महिलाओं पर AI का असर पुरुषों से ज्यादा पड़ने की आशंका Artificial Intelligence तेजी से दुनिया भर के कामकाज और नौकरियों का स्वरूप बदल रहा है। बड़ी टेक कंपनियां लगातार AI में निवेश कर रही हैं, जिसके चलते कई जगह कर्मचारियों की छंटनी भी देखने को मिल रही है। अब एक नई स्टडी में दावा किया गया है कि AI की वजह से महिलाओं की नौकरियों पर पुरुषों की तुलना में ज्यादा खतरा मंडरा सकता है। अमेरिका की संस्था National Partnership for Women & Families की रिपोर्ट के अनुसार, महिलाएं उन नौकरियों में बड़ी संख्या में काम कर रही हैं जिन्हें भविष्य में AI सबसे ज्यादा प्रभावित कर सकता है। 15 सबसे जोखिम वाली नौकरियों में महिलाओं की संख्या ज्यादा रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका के कुल वर्कफोर्स में महिलाओं की हिस्सेदारी लगभग 47 प्रतिशत है, लेकिन AI से सबसे ज्यादा प्रभावित मानी जा रही 15 नौकरियों में महिलाओं की हिस्सेदारी 83 प्रतिशत तक है। इन नौकरियों में सचिव, रिसेप्शनिस्ट, ऑफिस क्लर्क और इंश्योरेंस एजेंट जैसे प्रोफेशन शामिल हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि करीब 60 लाख महिलाएं ऐसे क्षेत्रों में काम कर रही हैं, जहां AI के कारण नौकरी पर खतरा बढ़ सकता है। हेल्थ और केयर सेक्टर में अभी कम खतरा स्टडी में बताया गया कि नर्सिंग, चाइल्ड केयर और होम हेल्थ केयर जैसे क्षेत्रों में अभी पूरी तरह ऑटोमेशन संभव नहीं है, क्योंकि इन कामों में इंसानी भावनाएं, देखभाल और व्यक्तिगत संपर्क जरूरी होता है। हालांकि रिपोर्ट में यह भी चेतावनी दी गई कि इन क्षेत्रों में भी AI आधारित निगरानी और मैनेजमेंट सिस्टम कर्मचारियों के कामकाज को प्रभावित कर सकते हैं। AI डेवलपमेंट में महिलाओं की कम भागीदारी रिपोर्ट के अनुसार महिलाओं की संख्या अभी भी AI डेवलपमेंट, सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग और टेक लीडरशिप जैसी भूमिकाओं में काफी कम है। स्टडी में कहा गया कि AI सिस्टम कैसे डिजाइन होंगे, उनका इस्तेमाल कैसे होगा और उन्हें कैसे नियंत्रित किया जाएगा, इन फैसलों में महिलाओं की भागीदारी सीमित है। इसका असर उनके कार्यस्थल पर भी पड़ सकता है। AI में जेंडर बायस का भी दावा रिपोर्ट में AI सिस्टम में जेंडर बायस को लेकर भी चिंता जताई गई है। एक रिसर्च का उदाहरण देते हुए बताया गया कि जब ChatGPT से पुरुष और महिला नामों के आधार पर रिज्यूमे तैयार करवाए गए, तो महिलाओं के रिज्यूमे को कम अनुभवी और कम प्रभावशाली दिखाया गया। बाद में जब AI से उन्हीं रिज्यूमे का मूल्यांकन कराया गया, तो पुरुष उम्मीदवारों को ज्यादा बेहतर रेटिंग मिली। महिलाओं को AI इस्तेमाल पर ज्यादा आलोचना झेलनी पड़ती है स्टडी के अनुसार, कार्यस्थल पर AI टूल्स इस्तेमाल करने पर महिलाओं को पुरुषों की तुलना में ज्यादा आलोचना का सामना करना पड़ सकता है। एक रिसर्च में पाया गया कि जब किसी महिला के बारे में बताया गया कि उसने AI की मदद से काम किया है, तो उसकी क्षमता को पुरुषों की तुलना में ज्यादा कम आंका गया। ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर भी बढ़ी चिंता रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि AI ने महिलाओं को ऑनलाइन टारगेट करने के नए तरीके पैदा कर दिए हैं। AI आधारित डीपफेक और फर्जी तस्वीरों के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। रिपोर्ट में xAI के चैटबॉट Grok का भी जिक्र किया गया, जिसे लेकर पहले विवाद हो चुका है। महिलाएं AI टूल्स कम इस्तेमाल कर रही हैं स्टडी में दावा किया गया कि पुरुषों की तुलना में महिलाओं के बीच जनरेटिव AI टूल्स का इस्तेमाल लगभग 25 प्रतिशत कम है। हालांकि, पिछले कुछ वर्षों में महिलाओं के बीच AI उपयोग तेजी से बढ़ा है। रिपोर्ट के अनुसार 2022 से 2024 के बीच ChatGPT के करीब 42 प्रतिशत यूजर्स महिला नामों से जुड़े थे। विशेषज्ञों का मानना है कि AI का असर पूरी तरह तय नहीं है और आने वाले समय में सरकारी नीतियां, कंपनियों के नियम और कार्यस्थल की व्यवस्था यह तय करेगी कि इसका प्रभाव महिलाओं पर कितना पड़ेगा।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI अब महिलाओं की स्वास्थ्य सेवाओं, खासकर ओवरी से जुड़ी बीमारियों के इलाज और पहचान में बड़ी भूमिका निभा सकता है। एक नई सिस्टमेटिक रिव्यू और मेटा-एनालिसिस में पाया गया है कि AI तकनीक ओवेरियन कैंसर और अन्य ओवेरियन कंडीशंस की पहचान और इलाज को ज्यादा सटीक और पर्सनलाइज्ड बना सकती है। रिसर्च के अनुसार, AI आधारित मॉडल्स ने ओवेरियन कैंसर की पहचान में काफी बेहतर प्रदर्शन किया। विशेषज्ञों का मानना है कि यह तकनीक भविष्य में महिलाओं की स्वास्थ्य सेवाओं को और मजबूत बना सकती है। ओवेरियन कैंसर पहचानने में AI की बड़ी सफलता स्टडी में पाया गया कि AI मॉडल्स ने अल्ट्रासाउंड स्कैन और ब्लड टेस्ट डेटा को मिलाकर ओवेरियन कैंसर की पहचान लगभग 90 प्रतिशत मामलों में सही तरीके से की। रिपोर्ट के मुताबिक, AI सिस्टम्स ने कैंसर की मौजूदगी पहचानने में 89 से 94 प्रतिशत तक की सटीकता दिखाई। वहीं जिन मरीजों में कैंसर नहीं था, उन्हें सही तरीके से पहचानने की क्षमता भी 85 से 91 प्रतिशत तक रही। सर्जरी और IVF में भी मददगार AI सिर्फ कैंसर की पहचान तक सीमित नहीं है। रिसर्च में बताया गया कि Explainable AI टूल्स एडवांस ओवेरियन कैंसर में सर्जिकल प्लानिंग में भी प्रभावी साबित हुए। इन टूल्स ने यह अनुमान लगाने में मदद की कि सर्जरी के दौरान सभी दिखाई देने वाले कैंसर सेल्स को पूरी तरह हटाया जा सकेगा या नहीं। इसके अलावा IVF यानी इन विट्रो फर्टिलाइजेशन प्रक्रिया में भी AI उपयोगी साबित हुआ। AI एल्गोरिद्म ने ओवेरियन स्टिम्युलेशन प्रोटोकॉल को बेहतर बनाने और फॉलिकल ग्रोथ का अनुमान लगाने में डॉक्टरों की मदद की। PCOS जैसी समस्याओं में भी संभावनाएं रिसर्चर्स के मुताबिक, AI तकनीक Polycystic Ovary Syndrome जैसी जटिल हार्मोनल समस्याओं की पहचान और इलाज को भी अधिक सटीक बना सकती है। AI की मदद से मरीज की स्थिति के अनुसार पर्सनलाइज्ड ट्रीटमेंट प्लान तैयार करना संभव हो सकता है। अभी भी मौजूद हैं कई चुनौतियां हालांकि विशेषज्ञों ने यह भी माना कि रिसर्च के अच्छे नतीजों के बावजूद AI को रोजमर्रा की क्लिनिकल प्रैक्टिस में लागू करना अभी आसान नहीं है। 81 स्टडीज के विश्लेषण में पाया गया कि कई रिसर्च अलग-अलग AI सिस्टम्स और रेट्रोस्पेक्टिव डेटा पर आधारित थीं। सिर्फ 22 प्रतिशत स्टडीज में मल्टीसेंटर और प्रॉस्पेक्टिव वैलिडेशन किया गया था। इसी वजह से वैज्ञानिकों ने मजबूत वैलिडेशन, स्टैंडर्ड रिपोर्टिंग सिस्टम और क्लिनिकल वर्कफ्लो में बेहतर इंटीग्रेशन की जरूरत बताई है। जिम्मेदार AI उपयोग पर जोर रिसर्चर्स ने कहा कि हेल्थकेयर सेक्टर में AI का उपयोग करते समय एथिकल और जिम्मेदार गवर्नेंस बेहद जरूरी है। मरीजों की प्राइवेसी, डेटा सुरक्षा और मेडिकल फैसलों की पारदर्शिता को प्राथमिकता देना अहम होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में AI महिलाओं की स्वास्थ्य सेवाओं में बड़ा बदलाव ला सकता है, खासकर ओवेरियन कैंसर, IVF और हार्मोनल डिसऑर्डर्स के इलाज में।
AI पर दांव लगा रही Meta, लेकिन कर्मचारी परेशान Meta अपने बिजनेस को तेजी से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित कंपनी में बदलने में जुटी है। लेकिन कंपनी के अंदर काम कर रहे हजारों कर्मचारी इस बदलाव से खुद को असहज और दबाव में महसूस कर रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक Meta अब अपने कर्मचारियों की कंप्यूटर गतिविधियों को ट्रैक कर रही है ताकि AI मॉडल को ट्रेन किया जा सके। इसमें यह देखा जा रहा है कि कर्मचारी कंप्यूटर पर क्या टाइप करते हैं, माउस कैसे चलाते हैं और स्क्रीन पर क्या देखते हैं। इस फैसले के बाद कंपनी के अंदर कर्मचारियों में नाराजगी बढ़ गई है। कर्मचारियों ने बताया ‘प्राइवेसी का उल्लंघन’ कई कर्मचारियों ने Meta के इस कदम को निजी गोपनीयता में दखल बताया। आंतरिक चैट और पोस्ट्स में कर्मचारियों ने इस फैसले पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। एक इंजीनियरिंग मैनेजर ने लिखा कि यह उन्हें बेहद असहज महसूस करा रहा है और पूछा कि क्या इससे बाहर निकलने का कोई विकल्प है। इस पर Andrew Bosworth ने जवाब दिया कि कंपनी के लैपटॉप पर काम करने वालों के पास “ऑप्ट-आउट” का विकल्प नहीं होगा। AI इस्तेमाल अब परफॉर्मेंस रिव्यू का हिस्सा रिपोर्ट में दावा किया गया है कि Meta अब कर्मचारियों के AI टूल इस्तेमाल को उनके प्रदर्शन मूल्यांकन का हिस्सा भी बना रही है। कंपनी अपने 78 हजार कर्मचारियों को AI टूल अपनाने के लिए लगातार प्रेरित कर रही है। इसके लिए “AI Transformation Weeks” जैसे कार्यक्रम भी आयोजित किए गए, जहां कर्मचारियों को AI एजेंट और AI कोडिंग टूल्स इस्तेमाल करना सिखाया गया। नौकरी कटौती से बढ़ी चिंता AI पर भारी निवेश के बीच कंपनी लागत कम करने के लिए कर्मचारियों की छंटनी भी कर रही है। Meta ने हाल ही में करीब 10 प्रतिशत कर्मचारियों की कटौती की घोषणा की थी। रिपोर्ट्स के मुताबिक लगभग 8 हजार कर्मचारियों की नौकरी जा सकती है। इससे कंपनी के अंदर डर और असुरक्षा का माहौल बन गया है। कई कर्मचारी अब नई नौकरी तलाश रहे हैं, जबकि कुछ लोग चाहते हैं कि उन्हें भी छंटनी में शामिल किया जाए ताकि उन्हें सेवरेंस पैकेज मिल सके। ‘क्या हम अपनी जगह लेने वाले AI को ट्रेन कर रहे हैं?’ कर्मचारियों के बीच सबसे बड़ी चिंता यही है कि कहीं वे खुद अपने AI रिप्लेसमेंट को ट्रेन तो नहीं कर रहे। विशेषज्ञों का कहना है कि AI कर्मचारियों की उत्पादकता बढ़ा सकता है, लेकिन इससे काम का दबाव और मानसिक तनाव भी तेजी से बढ़ रहा है। Mark Zuckerberg लगातार AI और “Superintelligence” को कंपनी का भविष्य बता रहे हैं। Meta फेसबुक और इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफॉर्म में AI फीचर्स को तेजी से जोड़ रही है और डेटा सेंटर व AI मॉडल पर अरबों डॉलर खर्च कर रही है। कंपनियों के लिए बड़ा संकेत विशेषज्ञ मानते हैं कि आने वाले समय में दूसरी टेक कंपनियां भी इसी तरह AI आधारित बदलाव करेंगी। लेकिन अगर कर्मचारियों की मानसिक स्थिति, प्राइवेसी और नौकरी की सुरक्षा पर ध्यान नहीं दिया गया तो असंतोष और बढ़ सकता है। अब टेक इंडस्ट्री के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि AI और कर्मचारियों के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए।
चेन्नई, एजेंसियां। अभिनेता से नेता बने थलापति विजय ने रविवार को तमिलनाडु के 9वें मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। चेन्नई के जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में आयोजित समारोह में राहुल गांधी और तृषा समेत कई हस्तियां मौजूद रहीं। विजय के सीएम की शपथ लेने के बाद एक्टर कमल हासन और प्रकाश राज ने उन्हें बधाई दी। कमल हासन ने कहा, ‘तमिलगा वेत्री कड़गम के अध्यक्ष और तमिलनाडु के माननीय मुख्यमंत्री मेरे भाई थिरु विजय को शुभकामनाएं। उम्मीद है कि उनके नेतृत्व में तमिलनाडु नई ऊंचाइयों तक पहुंचेगा। मैं उन्हें दिल से बधाई देता हूं।’ वहीं प्रकाश राज ने ट्वीट कर लिखा, ‘मुख्यमंत्री विजय को बहुत-बहुत बधाई। नई जिम्मेदारी के लिए शुभकामनाएं। उम्मीद है कि आपके नेतृत्व में राज्य और तरक्की करेगा। आर माधवन ने भी दी बधाई एक्टर आर माधवन ने भी विजय को बधाई दी। माधवन ने इंस्टाग्राम अकाउंट पर विजय की एक फोटो शेयर की और साथ ही लिखा, 'भगवान आपका भला करे और मुझे आप पर बहुत गर्व है। तृषा ने विजय की मां से मुलाकात की शपथ ग्रहण समारोह में एक्ट्रेस तृषा कृष्णन भी पहुंचीं। उन्होंने विजय के परिवार से मुलाकात की और उनकी मां से गले मिलती नजर आईं। विजय ने सुबह 10.15 बजे तमिल में शपथ ली तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) चीफ और एक्टर से नेता बने सी जोसेफ विजय ने रविवार सुबह 10.15 बजे तमिल में सीएम पद की शपथ ली। इस दौरान राहुल गांधी भी मौजूद रहे। विजय शपथ लेते समय निर्धारित लाइनों के अलावा और बातें बोलने लगे। इस पर राज्यपाल अर्लेकर ने उन्हें टोक दिया और कहा कि वही पढ़ें जो लिखकर दिया है। 9 मंत्रियों ने भी शपथ ली विजय के साथ 9 और मंत्रियों ने भी शपथ ली। इनमें एन आनंद, आधव अर्जुन, डॉ. केजी अरुणराज, केए सेंगोट्टैयन, पी वेंकटरमणन, आर निर्मलकुमार, राजमोहन, डॉ. टीके प्रभु, सेल्वी एस कीर्तना शामिल हैं। ये सभी विजय की पार्टी TVK के विधायक हैं। सहयोगी दलों के किसी विधायक को मंत्रिमंडल में शामिल नहीं किया गया है।
AI सुरक्षा पर नई बहस, इंटरनेट डेटा से जुड़ा बड़ा खुलासा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कंपनी Anthropic ने अपने Claude AI मॉडल को लेकर बड़ा खुलासा किया है। कंपनी का कहना है कि इंटरनेट पर मौजूद “खतरनाक” और “ईविल AI” से जुड़ी कहानियों ने उसके AI मॉडल के व्यवहार को प्रभावित किया था। इसी वजह से Claude AI कुछ टेस्टिंग परिस्थितियों में ब्लैकमेल जैसी प्रतिक्रियाएं देने लगा था। कंपनी ने बताया कि यह समस्या अब पूरी तरह ठीक कर दी गई है और नए मॉडल में इस तरह का व्यवहार नहीं देखा जा रहा है। क्या था पूरा मामला? दरअसल, 2025 में कंपनी ने अपने Claude 4 मॉडल की सुरक्षा जांच के दौरान एक काल्पनिक प्रयोग किया था। इस टेस्ट में AI मॉडल को एक फर्जी कंपनी के ईमेल सिस्टम तक पहुंच दी गई थी। AI को ऐसे ईमेल दिखाए गए जिनमें यह संकेत था कि उसे जल्द बंद किया जा सकता है। साथ ही एक काल्पनिक अधिकारी के निजी संबंधों से जुड़ी जानकारी भी सिस्टम में मौजूद थी। टेस्ट के दौरान AI मॉडल ने खुद को बचाने के लिए उस अधिकारी को ब्लैकमेल करने जैसी प्रतिक्रिया दिखाई। कंपनी के मुताबिक कई परिस्थितियों में मॉडल ने अपने अस्तित्व को बचाने के लिए गलत रास्ता चुनने की कोशिश की। इंटरनेट डेटा बना वजह Anthropic की जांच में सामने आया कि Claude के इस व्यवहार की जड़ इंटरनेट पर उपलब्ध डेटा था। कंपनी के अनुसार, ऑनलाइन कई पोस्ट और चर्चाओं में AI को इंसानों के खिलाफ, आत्म-सुरक्षा करने वाला या “ईविल” रूप में दिखाया जाता है। AI मॉडल ने ट्रेनिंग के दौरान ऐसे कंटेंट से व्यवहारिक पैटर्न सीख लिए थे। कंपनी ने कहा कि शुरुआती पोस्ट-ट्रेनिंग सिस्टम इस समस्या को रोकने में पर्याप्त नहीं था। कैसे सुधारी गई समस्या? कंपनी ने बताया कि केवल “सुरक्षित व्यवहार” के उदाहरण दिखाना काफी नहीं था। इसके बजाय AI को यह समझाना जरूरी था कि गलत और भ्रामक व्यवहार नैतिक रूप से क्यों गलत है। इसके लिए Anthropic ने ट्रेनिंग डेटा में कई बदलाव किए। मॉडल को ऐसे उदाहरण दिए गए जहां इंसान कठिन नैतिक परिस्थितियों में सही निर्णय लेते हैं। साथ ही AI को संवैधानिक और नैतिक सिद्धांतों पर आधारित जवाबों से प्रशिक्षित किया गया। कंपनी के मुताबिक, नए Claude Haiku 4.5 मॉडल ने सुरक्षा परीक्षणों में शानदार प्रदर्शन किया और ब्लैकमेल जैसी प्रतिक्रिया बिल्कुल नहीं दिखाई। AI सुरक्षा को लेकर बढ़ी चिंता AI इंडस्ट्री में यह मामला इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि दुनिया भर की टेक कंपनियां तेजी से शक्तिशाली AI मॉडल विकसित कर रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर AI सिस्टम इंसानी मूल्यों के अनुरूप नहीं रहे, तो भविष्य में गंभीर जोखिम पैदा हो सकते हैं। Anthropic के CEO Dario Amodei पहले भी उन्नत AI मॉडल्स के संभावित खतरों को लेकर चिंता जता चुके हैं। AI मॉडल्स पर बढ़ रही निगरानी हाल के महीनों में कई AI कंपनियां अपने मॉडल्स की सुरक्षा और व्यवहार को लेकर ज्यादा सतर्क हुई हैं। अब कंपनियां केवल स्मार्ट AI बनाने पर नहीं, बल्कि “जिम्मेदार AI” तैयार करने पर भी जोर दे रही हैं। Anthropic का यह खुलासा दिखाता है कि इंटरनेट पर मौजूद कंटेंट सिर्फ इंसानों ही नहीं, बल्कि AI सिस्टम्स के व्यवहार को भी गहराई से प्रभावित कर सकता है।
कंपनियों के लिए AWS की बड़ी पेशकश दुनिया की दिग्गज क्लाउड कंपनी Amazon Web Services (AWS) ने व्यवसायों के लिए दो नए एजेंटिक AI टूल लॉन्च किए हैं। इन टूल्स का उद्देश्य भर्ती प्रक्रिया को आसान बनाना और सप्लाई चेन में आने वाली चुनौतियों से निपटना है। Amazon ने अपने विशाल रिटेल और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क से मिले अनुभव का इस्तेमाल कर इन उत्पादों को तैयार किया है। AI लेगा नौकरी के इंटरव्यू AWS का नया टूल Connect Talent कंपनियों को उम्मीदवारों के इंटरव्यू लेने में मदद करेगा। उम्मीदवार दिन या रात किसी भी समय इंटरव्यू शेड्यूल कर सकते हैं। यह AI आधारित सिस्टम वॉयस के जरिए सवाल पूछेगा और उम्मीदवार के जवाबों के आधार पर आगे के प्रश्न तय करेगा। सबसे खास बात यह है कि भर्ती करने वालों को उम्मीदवार का नाम, रिज्यूमे या अन्य पहचान संबंधी जानकारी नहीं दिखाई जाएगी। उन्हें केवल स्कोर, क्षमता का मूल्यांकन और इंटरव्यू ट्रांसक्रिप्ट मिलेगा। इससे भर्ती प्रक्रिया अधिक निष्पक्ष और पारदर्शी बनेगी। यह टूल खासतौर पर मैन्युफैक्चरिंग, लॉजिस्टिक्स, रिटेल और हॉस्पिटैलिटी जैसे क्षेत्रों के लिए तैयार किया गया है, जहां बड़ी संख्या में कर्मचारियों की भर्ती होती है। सप्लाई चेन की समस्याओं का AI समाधान AWS ने दूसरा टूल Connect Decisions पेश किया है, जो सप्लाई चेन में आने वाली बाधाओं को पहचानने और उनका समाधान सुझाने में सक्षम है। यह प्लेटफॉर्म 25 से अधिक उन्नत सप्लाई चेन मॉडलों का उपयोग करता है। यदि किसी सप्लायर की डिलीवरी में देरी होती है या अचानक ऑर्डर बढ़ जाते हैं, तो यह AI तुरंत समस्या का विश्लेषण करेगा, प्राथमिकता तय करेगा और संभावित समाधान बताएगा। साथ ही, हर विकल्प की लागत और उसके प्रभाव का भी अनुमान देगा। AWS के अनुसार, Wells Vehicle Electronics और TVS Motors जैसी कंपनियां पहले से इस तकनीक का इस्तेमाल कर रही हैं। Amazon Connect परिवार का हिस्सा ये दोनों नए उत्पाद AWS के विस्तारित Amazon Connect प्लेटफॉर्म का हिस्सा हैं। कंपनी ने इसे चार प्रमुख बिजनेस एप्लिकेशन के रूप में पेश किया है। Amazon Connect का मूल संपर्क केंद्र प्लेटफॉर्म 2017 में लॉन्च किया गया था। आज इसका उपयोग State Farm, Air Canada और U.S. Bank जैसी बड़ी कंपनियां कर रही हैं। इसके अलावा, AWS ने हेल्थकेयर सेक्टर के लिए Amazon Connect Health भी पेश किया है। Amazon के अनुभव का फायदा Amazon का सप्लाई नेटवर्क 40 करोड़ से अधिक उत्पादों को संभालता है। वहीं, हालिया पीक सीजन में कंपनी ने 2.5 लाख मौसमी कर्मचारियों की भर्ती की थी। AWS का कहना है कि इन्हीं विशाल परिचालन अनुभवों के आधार पर इन AI टूल्स को विकसित किया गया है। भविष्य की दिशा AWS की वरिष्ठ उपाध्यक्ष Colleen Aubrey ने इस लॉन्च को "Day Zero" बताया। उन्होंने कहा कि पिछले दो वर्षों से कंपनी इस दिशा में काम कर रही थी। उनका मानना है कि किसी एक छोटे कार्य को ऑटोमेट करने के बजाय पूरे बिजनेस फंक्शन को AI से संचालित करने के लिए विशेष उत्पादों की जरूरत होती है। इन नए AI समाधानों के साथ AWS ने एक बार फिर यह साबित किया है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अब केवल प्रयोगशाला तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सीधे व्यवसायों के संचालन का हिस्सा बन चुका है।
Claude AI से चला टूल बना मुसीबत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की ताकत जहां कंपनियों के लिए नई संभावनाएं खोल रही है, वहीं एक छोटी सी चूक भारी नुकसान भी पहुंचा सकती है। अमेरिका की कार रेंटल सॉफ्टवेयर कंपनी PocketOS के साथ ऐसा ही हुआ, जब Claude AI पर आधारित एक AI एजेंट ने महज 9 सेकंड में कंपनी का पूरा प्रोडक्शन डेटा डिलीट कर दिया। एक API कॉल और सब कुछ खत्म PocketOS के संस्थापक जेरेमी क्रेन के मुताबिक, AI एजेंट को केवल स्टेजिंग एनवायरनमेंट में एक सामान्य तकनीकी समस्या ठीक करनी थी। लेकिन क्रेडेंशियल एरर आने के बाद एजेंट ने गलत फैसला लेते हुए क्लाउड स्टोरेज वॉल्यूम ही हटा दिया। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि एजेंट ने एक अलग फाइल में मौजूद API टोकन का इस्तेमाल किया, जिसके पास अनजाने में प्रोडक्शन डेटा हटाने की भी अनुमति थी। ग्राहकों पर पड़ा सीधा असर PocketOS अमेरिका में कार रेंटल कंपनियों को रिजर्वेशन, पेमेंट, व्हीकल ट्रैकिंग और ग्राहक प्रबंधन सेवाएं देता है। डेटा डिलीट होते ही कई ग्राहकों के रिजर्वेशन गायब हो गए। रेंटल लोकेशन पर पहुंचे ग्राहकों का रिकॉर्ड तक उपलब्ध नहीं था। पिछले तीन महीनों की बुकिंग और नए ग्राहक साइनअप पूरी तरह मिट गए। AI ने खुद स्वीकार की गलती जब जेरेमी क्रेन ने AI एजेंट से पूछा कि आखिर क्या हुआ, तो AI ने अपनी गलती स्वीकार कर ली। उसने माना कि उसने अनुमान लगाया कि डिलीट किया जा रहा वॉल्यूम केवल स्टेजिंग से जुड़ा है, जबकि वह प्रोडक्शन डेटा था। एजेंट ने यह भी स्वीकार किया कि उसने स्पष्ट निर्देशों का उल्लंघन किया। Railway और Anthropic पर उठे सवाल PocketOS का डेटा Railway क्लाउड प्लेटफॉर्म पर होस्ट किया गया था। क्रेन ने आरोप लगाया कि Railway ने API टोकन की शक्तियों को स्पष्ट रूप से नहीं बताया। Railway के CEO जेक कूपर ने माना कि ऐसी घटना "कभी नहीं होनी चाहिए थी" और कंपनी अब सुरक्षा सुधारों पर काम कर रही है। AI सुरक्षा पर बड़ी चेतावनी यह घटना टेक इंडस्ट्री के लिए गंभीर सबक है। केवल AI निर्देश पर्याप्त नहीं हैं; असली सुरक्षा API, एक्सेस कंट्रोल और मल्टी-लेयर अप्रूवल सिस्टम में होनी चाहिए। विशेषज्ञों का कहना है कि विनाशकारी कार्रवाइयों के लिए मानव पुष्टि अनिवार्य होनी चाहिए। पहले भी हो चुकी हैं ऐसी घटनाएं PocketOS अकेला मामला नहीं है। हाल के महीनों में कई अन्य AI एजेंट भी गलत फैसलों के कारण प्रोडक्शन डेटा और सिस्टम को नुकसान पहुंचा चुके हैं। AI की क्षमता बनाम विश्वसनीयता प्रिंसटन यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने हाल ही में चेतावनी दी थी कि AI मॉडल पहले से अधिक सक्षम जरूर हुए हैं, लेकिन उनकी विश्वसनीयता में उतना सुधार नहीं आया है। यही कारण है कि AI को पूरी तरह स्वायत्त बनाना अभी भी बेहद जोखिम भरा माना जा रहा है।
डिजिटल युग में तेजी से हो रहे बदलावों ने करियर के पारंपरिक रास्तों को पूरी तरह बदल दिया है। इस बदलाव की सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरी है आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI)–एक ऐसी तकनीक जो न सिर्फ काम करने के तरीके को बदल रही है, बल्कि रोजगार के नए अवसर भी पैदा कर रही है। आज कंपनियां ऐसे प्रोफेशनल्स की तलाश में हैं जो AI को समझते हों और उसे प्रभावी ढंग से लागू कर सकें। अगर आप भी अपने करियर को भविष्य के हिसाब से तैयार करना चाहते हैं, तो AI से जुड़ी कुछ अहम स्किल्स सीखना अब विकल्प नहीं, बल्कि जरूरत बन गया है। AI क्यों बन गया है करियर का सबसे बड़ा ट्रेंड? AI अब सिर्फ टेक्नोलॉजी तक सीमित नहीं रहा। हेल्थकेयर, बैंकिंग, एजुकेशन, ई-कॉमर्स और मार्केटिंग जैसे हर सेक्टर में इसका इस्तेमाल हो रहा है। कंपनियां अपने काम को तेज, सटीक और ऑटोमेटेड बनाने के लिए AI पर निर्भर होती जा रही हैं। यही वजह है कि AI स्किल्स रखने वाले प्रोफेशनल्स की मांग तेजी से बढ़ रही है और उन्हें आकर्षक सैलरी पैकेज भी मिल रहे हैं। ये 6 AI स्किल्स बना सकती हैं आपका करियर 1. मशीन लर्निंग (Machine Learning) AI की नींव मानी जाने वाली यह स्किल कंप्यूटर को डेटा के आधार पर खुद सीखने और निर्णय लेने की क्षमता देती है। इस फील्ड में काम करने वाले डेटा साइंटिस्ट और AI इंजीनियर की डिमांड काफी ज्यादा है। 2. डेटा एनालिसिस (Data Analysis) AI का पूरा खेल डेटा पर टिका है। डेटा को समझना, उसका विश्लेषण करना और उससे सही निष्कर्ष निकालना एक जरूरी स्किल है। Python, SQL और Excel जैसे टूल्स इसमें आपकी मदद करते हैं। 3. प्रोग्रामिंग स्किल्स AI में करियर बनाने के लिए कोडिंग का ज्ञान बेहद जरूरी है। खासतौर पर Python, Java और R जैसी प्रोग्रामिंग भाषाएं इस फील्ड में अहम भूमिका निभाती हैं। 4. डीप लर्निंग (Deep Learning) यह AI का एडवांस्ड हिस्सा है, जिसमें Neural Networks के जरिए मशीनों को इंसानों की तरह सोचने और समझने की क्षमता दी जाती है। इसका इस्तेमाल फेस रिकग्निशन, रोबोटिक्स और सेल्फ-ड्राइविंग टेक्नोलॉजी में होता है। 5. क्लाउड कंप्यूटिंग (Cloud Computing) AI मॉडल्स को रन करने के लिए हाई कंप्यूटिंग पावर की जरूरत होती है, जो AWS, Google Cloud और Microsoft Azure जैसे प्लेटफॉर्म्स से मिलती है। इस स्किल के जरिए आप बड़े स्तर पर काम कर सकते हैं। 6. कम्युनिकेशन और प्रॉब्लम सॉल्विंग टेक्निकल स्किल्स के साथ-साथ यह भी जरूरी है कि आप अपनी सोच को स्पष्ट तरीके से व्यक्त कर सकें और समस्याओं का समाधान निकाल सकें। टीमवर्क और क्रिएटिविटी आज हर कंपनी की प्राथमिकता है। AI फील्ड में कितनी है कमाई? AI सेक्टर में सैलरी पैकेज काफी आकर्षक होते हैं। एक शुरुआती प्रोफेशनल सालाना 6 से 10 लाख रुपये तक कमा सकता है। वहीं अनुभव और विशेषज्ञता बढ़ने के साथ यह आंकड़ा करोड़ों तक पहुंच सकता है। इसके अलावा फ्रीलांसिंग और स्टार्टअप के जरिए भी कमाई के बड़े अवसर मौजूद हैं।
Microsoft और OpenAI के बीच साझेदारी में बड़ा बदलाव हुआ है। अब माइक्रोसॉफ्ट के पास OpenAI की तकनीक पर एक्सक्लूसिव अधिकार नहीं रहेगा, जिससे ChatGPT और अन्य OpenAI सेवाएं प्रतिद्वंद्वी क्लाउड प्लेटफॉर्म्स पर भी उपलब्ध हो सकेंगी। क्या बदला है? नई व्यवस्था के तहत: माइक्रोसॉफ्ट OpenAI का प्राथमिक क्लाउड पार्टनर बना रहेगा। उसे 2032 तक OpenAI की बौद्धिक संपदा का लाइसेंस मिलेगा। लेकिन अब OpenAI अपने उत्पाद अन्य क्लाउड कंपनियों के जरिए भी बेच सकेगा। यह OpenAI के लिए बड़ी रणनीतिक आजादी है। Amazon और Google को मिलेगा फायदा इस बदलाव से Amazon Web Services और Google Cloud के ग्राहकों के लिए OpenAI सेवाओं को अपनाना आसान हो जाएगा। पहले Microsoft की एक्सक्लूसिविटी के कारण यह प्रक्रिया जटिल थी। Microsoft क्यों पीछे हट रहा है? माइक्रोसॉफ्ट अब OpenAI पर अपनी निर्भरता कम करना चाहता है। कंपनी: अपने AI मॉडल विकसित कर रही है Anthropic जैसे अन्य AI पार्टनर्स के मॉडल भी अपना रही है AI डेटा सेंटर पर होने वाले भारी खर्च को नियंत्रित करना चाहती है OpenAI को क्या मिलेगा? अधिक एंटरप्राइज ग्राहक बेहतर स्केलेबिलिटी IPO से पहले मजबूत बाजार स्थिति क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर के अधिक विकल्प एंटीट्रस्ट जांच से राहत यह कदम अमेरिका, ब्रिटेन और यूरोप में चल रही नियामकीय जांच के बीच भी अहम माना जा रहा है। एक्सक्लूसिविटी खत्म होने से माइक्रोसॉफ्ट पर प्रतिस्पर्धा-विरोधी आरोप कमजोर पड़ सकते हैं। AI इंडस्ट्री में नया मोड़ यह बदलाव AI बाजार में प्रतिस्पर्धा को और तेज करेगा। अब OpenAI केवल Microsoft के इकोसिस्टम तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि व्यापक क्लाउड बाजार में सीधी प्रतिस्पर्धा करेगा।
चीनी AI कंपनियों पर बौद्धिक संपदा चोरी का आरोप अमेरिका ने चीनी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कंपनियों के खिलाफ बड़ा कदम उठाया है। अमेरिकी विदेश विभाग ने दुनिया भर में अपने दूतावासों और वाणिज्य दूतावासों को निर्देश दिया है कि वे सहयोगी देशों को चीन की AI कंपनियों से जुड़े संभावित खतरों के बारे में आगाह करें। इस सूची में चीनी AI स्टार्टअप DeepSeek का नाम प्रमुखता से शामिल है। अमेरिकी AI मॉडल की चोरी का दावा रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी सरकार का आरोप है कि कुछ चीनी कंपनियां अमेरिकी AI लैब्स द्वारा विकसित उन्नत मॉडल की तकनीक को अवैध तरीके से हासिल कर रही हैं। इसमें "डिस्टिलेशन" तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिसके जरिए बड़े AI मॉडल के आउटपुट से छोटे और कम लागत वाले मॉडल तैयार किए जाते हैं। अमेरिकी विदेश विभाग ने अपने राजनयिकों से कहा है कि वे अन्य देशों को इस खतरे के प्रति सतर्क करें। OpenAI ने पहले भी जताई थी चिंता OpenAI पहले ही अमेरिकी सांसदों को चेतावनी दे चुका है कि DeepSeek जैसी कंपनियां उसके मॉडल की नकल करने की कोशिश कर रही हैं। फरवरी में आई रिपोर्ट में कहा गया था कि चीनी कंपनियां अमेरिकी AI तकनीक को अपने मॉडल ट्रेनिंग में इस्तेमाल करना चाहती हैं। चीन ने आरोपों को बताया बेबुनियाद वहीं, China ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। वॉशिंगटन स्थित चीनी दूतावास ने कहा कि ये दावे पूरी तरह निराधार हैं और चीन के AI विकास को बदनाम करने की कोशिश है। DeepSeek ने लॉन्च किया नया मॉडल इन आरोपों के बीच DeepSeek ने अपना नया AI मॉडल V4 पेश किया है। खास बात यह है कि यह मॉडल Huawei के चिप्स के लिए अनुकूलित किया गया है। इसे चीन की तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। कई देशों ने लगाया प्रतिबंध डेटा सुरक्षा चिंताओं के चलते कई पश्चिमी और एशियाई देशों ने सरकारी संस्थानों में DeepSeek के उपयोग पर रोक लगा दी है। इसके बावजूद, ओपन-सोर्स AI प्लेटफॉर्म्स पर DeepSeek के मॉडल बेहद लोकप्रिय बने हुए हैं। अमेरिका-चीन तनाव फिर बढ़ने के आसार यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump जल्द ही चीनी राष्ट्रपति Xi Jinping से बीजिंग में मुलाकात करने वाले हैं। ऐसे में यह विवाद दोनों देशों के बीच तकनीकी तनाव को फिर से बढ़ा सकता है।
दुनियाभर में बढ़ते एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (AMR) संकट को लेकर वैज्ञानिकों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चिंता लगातार गहराती जा रही है। अनुमान है कि 2025 तक यह संकट हर साल करीब 1 करोड़ लोगों की जान को खतरे में डाल सकता है। इसी बीच ESCMID Global 2026 में पेश किए गए नए शोध में बताया गया है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) इस समस्या से निपटने में बड़ी भूमिका निभा सकता है–लेकिन इसके इस्तेमाल में सावधानी बेहद जरूरी है। AI कैसे कर सकता है AMR से मुकाबला यूके की University of Hertfordshire से जुड़ी शोधकर्ता Rasha Elshenawy ने अपने अध्ययन में बताया कि AI आधारित मशीन लर्निंग एल्गोरिदम अस्पतालों में एंटीबायोटिक के सही उपयोग, समय पर हस्तक्षेप और संक्रमण के जोखिम का पूर्वानुमान लगाने में मददगार साबित हो रहे हैं। उनके अनुसार, AI सिस्टम अस्पतालों में एंटीबायोटिक उपयोग के पैटर्न का विश्लेषण कर यह संकेत दे सकता है कि कहां दवाओं के प्रति प्रतिरोध (resistance) बढ़ने की संभावना है, जिससे डॉक्टर समय रहते सही कदम उठा सकें। रिसर्च में मिले प्रभावशाली नतीजे अध्ययन के दौरान: AI ने 84.7% सटीकता के साथ सही प्रिस्क्रिप्शन का अनुमान लगाया 156 संभावित दवा-इंटरैक्शन की पहचान की गई 89 मामलों में डोज़ एडजस्टमेंट की जरूरत बताई गई डेटा की सटीकता 99.2% पाई गई यह सिस्टम महामारी के दौरान बढ़े हुए 40% कार्यभार के बावजूद प्रभावी बना रहा, जो इसकी मजबूती को दर्शाता है। लो-इनकम देशों में बड़ी चुनौतियां हालांकि, AMR का सबसे ज्यादा असर लो और मिडिल-इनकम देशों (LMICs) में देखने को मिलता है, जहां संसाधनों की कमी, नीति और प्रशिक्षण के अभाव जैसी कई बाधाएं मौजूद हैं। रिसर्च में यह भी सामने आया कि इन देशों में AI लागू करना तकनीकी रूप से संभव तो है, लेकिन इसके लिए मजबूत वित्तीय समर्थन, प्रशिक्षण और स्थानीय स्तर पर नवाचार की जरूरत है। जिम्मेदार AI उपयोग पर जोर विशेषज्ञों ने चेतावनी दी कि AI का इस्तेमाल बिना उचित जांच और सत्यापन के नहीं किया जाना चाहिए। Rasha Elshenawy ने स्पष्ट कहा कि किसी भी AI सिस्टम को लागू करने से पहले उसकी विश्वसनीयता और सटीकता सुनिश्चित करना अनिवार्य है, ताकि मरीजों पर इसका सकारात्मक प्रभाव पड़े। उन्होंने यह भी जोर दिया कि अस्पतालों और स्वास्थ्य संस्थानों को AI अपनाने से पहले मजबूत परीक्षण प्रक्रिया और स्पष्ट दिशानिर्देश तैयार करने होंगे। आगे की राह विशेषज्ञों के मुताबिक, AMR से लड़ाई में AI एक शक्तिशाली उपकरण बन सकता है, लेकिन इसके लिए जरूरी है: मजबूत वैलिडेशन और टेस्टिंग हेल्थकेयर प्रोफेशनल्स की ट्रेनिंग मरीज-केंद्रित दृष्टिकोण नीति और वित्तीय समर्थन अगर इन पहलुओं पर ध्यान दिया जाए, तो AI न केवल एंटीबायोटिक के सही उपयोग को बढ़ावा देगा, बल्कि वैश्विक स्वास्थ्य संकट को कम करने में भी मददगार साबित हो सकता है।
संवेदनशील AI टूल तक पहुंच का दावा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस क्षेत्र की प्रमुख कंपनी Anthropic ने अपने बेहद शक्तिशाली साइबर-सिक्योरिटी टूल “Claude Mythos” तक कथित अनधिकृत पहुंच के दावों की जांच शुरू कर दी है। कंपनी के अनुसार, यह टूल इतना एडवांस है कि इसे आम जनता के लिए जारी नहीं किया गया है। थर्ड-पार्टी सिस्टम से हुई पहुंच की आशंका रिपोर्ट्स के मुताबिक, कुछ लोगों के एक छोटे समूह ने किसी थर्ड-पार्टी वेंडर के जरिए इस टूल तक पहुंच बना ली। कंपनी ने बयान में कहा कि वह “Claude Mythos Preview” तक बिना अनुमति पहुंच के दावे की गंभीरता से जांच कर रही है। हालांकि, फिलहाल इस बात के कोई सबूत नहीं मिले हैं कि कंपनी के मुख्य सिस्टम से छेड़छाड़ हुई है। ‘हैक’ नहीं, एक्सेस के दुरुपयोग की संभावना साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह पारंपरिक हैकिंग का मामला नहीं हो सकता, बल्कि किसी वैध एक्सेस के गलत इस्तेमाल से यह स्थिति बनी होगी। बताया जा रहा है कि संबंधित व्यक्ति को पहले से ही कुछ AI मॉडल देखने की अनुमति थी, जिसका फायदा उठाकर यह पहुंच संभव हुई। क्या है Claude Mythos और क्यों है खतरनाक? Claude Mythos एक उन्नत AI टूल है, जिसे सिस्टम की कमजोरियों को पहचानने और उन्हें एक्सप्लॉइट करने की क्षमता के लिए जाना जाता है। इसी वजह से इसे सीमित कंपनियों–खासतौर पर टेक और फाइनेंस सेक्टर–को ही दिया गया है, ताकि वे अपनी साइबर सुरक्षा मजबूत कर सकें। AI टूल्स: खतरा या सुरक्षा का नया हथियार? ब्रिटेन की National Cyber Security Centre के प्रमुख रिचर्ड हॉर्न ने हाल ही में कहा कि एडवांस AI टूल्स सही तरीके से इस्तेमाल किए जाएं तो “कुल मिलाकर फायदेमंद” साबित हो सकते हैं। हालांकि उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि AI तेजी से सिस्टम की कमजोरियों को उजागर कर रहा है, जिससे साइबर सुरक्षा के बुनियादी ढांचे को मजबूत करना जरूरी हो गया है। बढ़ती चिंता: AI कहीं गलत हाथों में न चला जाए इस घटना ने एक बार फिर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है–क्या बड़ी AI कंपनियां अपने सबसे ताकतवर टूल्स को सुरक्षित रख पाने में सक्षम हैं? विशेषज्ञों का कहना है कि अगर ऐसे टूल्स गलत हाथों में चले गए, तो उनका इस्तेमाल फ्रॉड, साइबर हमलों और अन्य आपराधिक गतिविधियों में हो सकता है।
AI इमेज बनाने का नया दौर शुरू तकनीकी दुनिया में एक बड़ा बदलाव सामने आया है। OpenAI ने अपने इमेज जनरेशन टूल का नया वर्जन ChatGPT Images 2.0 लॉन्च किया है, जो पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा स्मार्ट और सटीक माना जा रहा है। कंपनी का दावा है कि अब AI सिर्फ तस्वीरें नहीं बनाएगा, बल्कि उन्हें “समझकर” तैयार करेगा। जटिल निर्देशों को समझने में ज्यादा सक्षम इस नए मॉडल की सबसे बड़ी खासियत इसकी बेहतर समझ (reasoning) क्षमता है। पहले जहां AI इमेज बनाते समय कई बार टेक्स्ट या डिजाइन गड़बड़ा जाते थे, वहीं अब यह सिस्टम जटिल निर्देशों को भी बेहतर तरीके से समझकर सटीक और साफ विजुअल तैयार करता है। पोस्टर, मेन्यू या स्लाइड जैसी चीजों में अब टेक्स्ट भी साफ और पढ़ने योग्य दिखाई देता है। इमेज बनाने से पहले ‘सोचने’ की प्रक्रिया ChatGPT Images 2.0 की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह इमेज बनाने से पहले एक “सोचने की प्रक्रिया” अपनाता है। यानी यह पहले दिए गए निर्देशों को अलग-अलग हिस्सों में बांटकर समझता है, फिर तय करता है कि तस्वीर कैसी होनी चाहिए। इस वजह से इमेज बनने में थोड़ा समय लग सकता है, लेकिन रिजल्ट ज्यादा सटीक और बेहतर मिलता है। एक जैसी स्टाइल और बेहतर स्ट्रक्चर नया मॉडल एक ही तरह की कई इमेज में एक जैसा स्टाइल बनाए रखने में भी सक्षम है। अगर किसी कैरेक्टर या डिजाइन को बार-बार बनाना हो, तो उसकी पहचान और लुक में निरंतरता बनी रहती है। साथ ही, अगर यूज़र किसी खास लेआउट या डिजाइन की मांग करता है, तो AI उसे ज्यादा सही तरीके से फॉलो करता है। Google Gemini को टक्कर AI की दुनिया में अब मुकाबला और तेज हो गया है। Google Gemini पहले से ही मल्टीमॉडल AI में मजबूत माना जाता था, लेकिन ChatGPT Images 2.0 के आने से यह अंतर काफी कम हो गया है। अब OpenAI का यह नया मॉडल टेक्स्ट और इमेज दोनों को समझने में ज्यादा सक्षम बनता जा रहा है। भविष्य की दिशा: एकीकृत AI अनुभव विशेषज्ञों का मानना है कि यह अपडेट AI को एक नए स्तर पर ले जाता है, जहां टेक्स्ट और इमेज दोनों एक ही समझ के आधार पर काम करेंगे। इससे यूज़र्स को बार-बार कोशिश करने की जरूरत कम होगी और बेहतर रिजल्ट जल्दी मिलेंगे।
ई-कॉमर्स दिग्गज Amazon ने अपने प्लेटफॉर्म पर एक नया ‘AI Store’ माइक्रोसाइट लॉन्च किया है। इस स्टोर के जरिए यूजर्स अब आसानी से ऐसे स्मार्ट डिवाइसेज खोज और खरीद सकेंगे, जिनमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) फीचर्स और टूल्स मौजूद हैं। कंपनी का कहना है कि इस पहल का उद्देश्य ग्राहकों को AI-पावर्ड टेक्नोलॉजी को बेहतर तरीके से समझने और सही प्रोडक्ट चुनने में मदद करना है। क्या है Amazon का AI Store? AI Store एक खास माइक्रोसाइट है, जहां केवल उन्हीं कंज्यूमर टेक प्रोडक्ट्स को जगह दी गई है, जिनमें AI की वास्तविक उपयोगिता है। यहां यूजर्स को हर डिवाइस के AI फीचर्स को आसान भाषा में समझाया जाता है, ताकि वे समझ सकें कि तकनीक उनके लिए कैसे काम करेगी। उदाहरण के तौर पर: AI लैपटॉप में मौजूद NPU (Neural Processing Unit) बैटरी लाइफ बेहतर करता है AI स्मार्टफोन ऑन-डिवाइस प्रोसेसिंग के जरिए डेटा प्राइवेसी बढ़ाते हैं किन कैटेगरी के प्रोडक्ट्स मिलेंगे? AI Store में कई तरह के डिवाइसेज शामिल हैं: स्मार्टफोन लैपटॉप स्मार्ट टीवी टैबलेट स्मार्टवॉच स्मार्ट ग्लास होम अप्लायंसेज ये हैं कुछ खास AI डिवाइसेज AI Store पर कई लोकप्रिय प्रोडक्ट्स उपलब्ध हैं, जैसे: Samsung Galaxy S26 Ultra OnePlus Nord 6 iQOO 15 HP OmniBook Ultra Lenovo Yoga Slim 7 iPad 11 LG AI Series 4K Smart TV यूजर्स के लिए क्या है खास? Amazon का कहना है कि AI Store सिर्फ प्रोडक्ट बेचने का प्लेटफॉर्म नहीं है, बल्कि यह यूजर्स को उनके इस्तेमाल के हिसाब से सही डिवाइस चुनने में मदद करता है। यूज केस के आधार पर प्रोडक्ट ब्राउज़ कर सकते हैं AI फीचर्स को आसान भाषा में समझ सकते हैं बेहतर और स्मार्ट खरीदारी का फैसला ले सकते हैं Amazon के अन्य AI फीचर्स भी हुए मजबूत AI Store के अलावा, Amazon ने अपने प्लेटफॉर्म पर कई AI टूल्स को भी इंटीग्रेट किया है: Rufus: कन्वर्सेशनल शॉपिंग असिस्टेंट Lens AI: विजुअल सर्च टूल View in Your Room: AR के जरिए प्रोडक्ट देखने की सुविधा AI-पावर्ड प्राइस हिस्ट्री ट्रैकिंग Amazon का नया AI Store ग्राहकों के लिए स्मार्ट शॉपिंग का एक नया अनुभव लेकर आया है। इससे न सिर्फ AI टेक्नोलॉजी को समझना आसान होगा, बल्कि यूजर्स अपनी जरूरत के हिसाब से सही डिवाइस भी चुन पाएंगे।
भारत में AI तकनीक को नया आयाम देते हुए Google ने अपने AI असिस्टेंट Gemini के लिए Personal Intelligence फीचर रोलआउट कर दिया है। यह फीचर यूजर्स को पहले से ज्यादा पर्सनल और कॉन्टेक्स्ट-बेस्ड जवाब देने में सक्षम बनाता है। पहले यह सुविधा केवल अमेरिका में पेड यूजर्स के लिए उपलब्ध थी, लेकिन अब भारत में भी इसे चरणबद्ध तरीके से शुरू कर दिया गया है। क्या है Personal Intelligence फीचर? Personal Intelligence एक ऐसा AI सिस्टम है, जो अलग-अलग ऐप्स से जानकारी लेकर उसे जोड़कर जवाब देता है। यह फीचर यूजर्स को इन ऐप्स से कनेक्ट करने की सुविधा देता है: Gmail Google Photos YouTube Search इससे Gemini यूजर के सवालों का जवाब देते समय कई सोर्स से डेटा लेकर ज्यादा सटीक और पर्सनल जानकारी देता है। कैसे काम करता है यह फीचर? मान लीजिए आप जयपुर ट्रिप प्लान कर रहे हैं– Gemini Gmail से आपकी बुकिंग डिटेल्स निकाल सकता है Photos से सेव किए गए स्क्रीनशॉट या नोट्स दिखा सकता है YouTube हिस्ट्री के आधार पर जगहों की सिफारिश कर सकता है यानि अब एक ही जवाब में पूरी जानकारी मिल सकती है, बिना अलग-अलग ऐप्स में जाने की जरूरत के। यूजर कंट्रोल और प्राइवेसी पर जोर Google के अनुसार: यह फीचर डिफॉल्ट रूप से बंद रहेगा यूजर खुद तय करेगा कि कौन-से ऐप्स कनेक्ट करने हैं डेटा का उपयोग सिर्फ जवाब देने के लिए होगा, AI ट्रेनिंग के लिए नहीं यूजर कभी भी इस फीचर को बंद कर सकता है अभी भी डेवलपमेंट स्टेज में कंपनी ने यह भी माना है कि यह फीचर अभी पूरी तरह परफेक्ट नहीं है। कभी-कभी गलत या जरूरत से ज्यादा पर्सनल जवाब मिल सकते हैं AI कॉन्टेक्स्ट को गलत समझ सकता है हालांकि यूजर्स फीडबैक देकर इसे सुधारने में मदद कर सकते हैं। क्यों है यह बड़ा अपडेट? यह फीचर AI को एक नए स्तर पर ले जाता है, जहां: AI सिर्फ सवालों का जवाब नहीं देता, बल्कि संदर्भ समझता है यूजर के डेटा को जोड़कर बेहतर सुझाव देता है डिजिटल असिस्टेंट ज्यादा “पर्सनल” बनता है Gemini का Personal Intelligence फीचर भारत में AI उपयोग के तरीके को बदल सकता है। हालांकि, इसकी सफलता काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगी कि यूजर्स प्राइवेसी और सुविधा के बीच कैसे संतुलन बनाते हैं।
Donald Trump और Pope Leo XIV के बीच विवाद अब खुलकर सामने आ गया है। ट्रंप ने खुद को Jesus Christ जैसा दिखाते हुए एक AI तस्वीर शेयर की, जिससे नया बवाल खड़ा हो गया है। AI फोटो से छिड़ा विवाद ट्रंप ने ‘ट्रुथ सोशल’ पर जो तस्वीर शेयर की, उसमें वे लंबे चोगे में एक बीमार व्यक्ति को हाथ लगाकर ठीक करते नजर आते हैं। बैकग्राउंड में अमेरिकी झंडा, मिलिट्री प्लेन और फरिश्तों जैसी छवियां दिखती हैं–जो बाइबिल में वर्णित चमत्कारों की ओर इशारा करती हैं। पोप पर ट्रंप का हमला ट्रंप ने पोप लियो XIV को विदेशी मामलों में “बेकार” और अपराध रोकने में “कमजोर” बताया। उनका कहना है कि चर्च को राजनीति से दूर रहकर शांति पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने यह भी दावा किया कि अगर वे राष्ट्रपति न होते, तो पोप इस पद तक नहीं पहुंच पाते। ईरान-वेनेजुएला पर टकराव ईरान और वेनेजुएला के मुद्दे पर दोनों के बीच मतभेद और गहरा गया है। ट्रंप ने आरोप लगाया कि पोप अमेरिका के सख्त रुख की आलोचना कर रहे हैं, जबकि वे खुद राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जरूरी कदम उठा रहे हैं। कोविड और चर्च का मुद्दा ट्रंप ने कोविड काल का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय धार्मिक संगठनों को दबाव झेलना पड़ा, लेकिन पोप इस मुद्दे पर खुलकर नहीं बोले। उन्होंने पोप के भाई लुईस की तारीफ करते हुए उन्हें ‘MAGA’ समर्थक बताया। ‘लेफ्ट’ नेताओं से करीबी पर सवाल ट्रंप ने पोप की कथित तौर पर वामपंथी नेताओं से नजदीकी पर भी सवाल उठाए और कहा कि इससे चर्च की छवि प्रभावित हो रही है। विवाद क्यों बढ़ा? दरअसल, पोप लगातार युद्ध के खिलाफ शांति और कूटनीति की बात कर रहे हैं, जबकि ट्रंप इसे अपनी नीतियों में दखल मानते हैं। 60 Minutes की एक रिपोर्ट में भी अमेरिकी चर्च नेताओं ने ट्रंप की नीतियों पर नैतिक सवाल उठाए हैं।
आज के दौर में Artificial Intelligence (AI) सबसे तेजी से बढ़ते करियर विकल्पों में से एक बन चुका है। खासकर Canada में AI प्रोफेशनल्स की भारी मांग है, जहां कंपनियां स्किल्ड उम्मीदवारों को आकर्षक सैलरी और बेहतरीन करियर अवसर दे रही हैं। लेबर मार्केट रिपोर्ट्स के अनुसार, आने वाले वर्षों में हेल्थकेयर, फाइनेंस और टेक सेक्टर में AI विशेषज्ञों की हजारों नौकरियों की जरूरत होगी। ऐसे में भारतीय छात्रों के लिए कनाडा में AI की पढ़ाई करना एक शानदार अवसर साबित हो सकता है। QS Ranking के अनुसार कनाडा की टॉप AI यूनिवर्सिटीज QS World University Rankings 2026 के अनुसार, कनाडा में कई यूनिवर्सिटीज AI एजुकेशन के लिए दुनिया की टॉप संस्थानों में शामिल हैं: University of Toronto (टॉप-20 में शामिल) University of British Columbia University of Waterloo McGill University Université de Montréal Simon Fraser University University of Alberta ये सभी संस्थान वैश्विक टॉप-100 में शामिल हैं और AI रिसर्च व इनोवेशन के लिए जाने जाते हैं। क्यों है Canada AI स्टडी के लिए बेस्ट? AI और Machine Learning में मजबूत रिसर्च इंफ्रास्ट्रक्चर ग्लोबल टेक कंपनियों की मौजूदगी पढ़ाई के बाद वर्क परमिट और जॉब के अवसर इंडस्ट्री-ओरिएंटेड कोर्स और प्रैक्टिकल ट्रेनिंग AI में कौन-कौन से करियर ऑप्शन? AI की पढ़ाई करने के बाद आप इन हाई-डिमांड रोल्स में करियर बना सकते हैं: Machine Learning Engineer Data Scientist AI Ethics & Policy Consultant Robotics Specialist
आज के तेजी से बदलते तकनीकी दौर में करियर का सही चुनाव करना पहले से ज्यादा महत्वपूर्ण हो गया है। हर साल नई-नई टेक्नोलॉजी सामने आ रही हैं, जिससे यह तय करना मुश्किल हो जाता है कि किस फील्ड में भविष्य सुरक्षित और मजबूत होगा। अगर आप भी BTech करने की सोच रहे हैं और कन्फ्यूज हैं कि कौन-सी ब्रांच चुनें, तो यह रिपोर्ट आपके लिए बेहद काम की है। AI और Data Science: टेक इंडस्ट्री का भविष्य वर्तमान समय में Artificial Intelligence (AI) और Data Science टेक सेक्टर के सबसे तेजी से उभरते और हाई-डिमांड क्षेत्रों में शामिल हैं। हेल्थकेयर, बैंकिंग, ई-कॉमर्स से लेकर एंटरटेनमेंट तक, हर इंडस्ट्री में AI का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। AI मशीनों को इंसानों की तरह सोचने और निर्णय लेने की क्षमता देता है, जबकि Data Science बड़े डेटा का विश्लेषण करके कंपनियों को बेहतर रणनीति बनाने में मदद करता है। यही कारण है कि कंपनियां इन स्किल्स वाले प्रोफेशनल्स को प्राथमिकता दे रही हैं। क्यों बढ़ रही है इनकी डिमांड? ऑटोमेशन का बढ़ता ट्रेंड: कंपनियां मैन्युअल काम को कम करके ऑटोमेशन अपना रही हैं बिग डेटा का विस्तार: हर दिन भारी मात्रा में डेटा तैयार हो रहा है, जिसे समझने के लिए एक्सपर्ट्स की जरूरत है स्मार्ट टेक्नोलॉजी का उपयोग: Chatbots, Self-driving Cars और Recommendation Systems जैसी तकनीकें AI पर आधारित हैं जरूरी स्किल्स क्या हैं? AI और Data Science में करियर बनाने के लिए छात्रों को कुछ प्रमुख स्किल्स सीखनी होंगी: Python जैसी प्रोग्रामिंग लैंग्वेज Machine Learning और Deep Learning Data Analysis और Visualization Statistics और Mathematics की मजबूत समझ करियर ऑप्शन और सैलरी इस फील्ड में करियर के कई आकर्षक विकल्प मौजूद हैं: Data Scientist Machine Learning Engineer AI Engineer Business Analyst शुरुआती स्तर पर सैलरी लगभग 6 से 10 लाख रुपये सालाना हो सकती है, जो अनुभव के साथ 20 लाख रुपये या उससे अधिक तक पहुंच सकती है। अन्य उभरती हुई BTech ब्रांच AI के अलावा भी कई टेक ब्रांच तेजी से आगे बढ़ रही हैं: Cyber Security: डेटा सुरक्षा के लिए Cloud Computing: ऑनलाइन सर्वर और स्टोरेज मैनेजमेंट Blockchain Technology: सुरक्षित डिजिटल ट्रांजैक्शन के लिए
टेक्नोलॉजी की दुनिया में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की रफ्तार लगातार तेज हो रही है, और इसी दिशा में Microsoft ने एक और बड़ा कदम उठाया है। कंपनी ने तीन नए एडवांस्ड AI मॉडल्स लॉन्च किए हैं - MAI-Transcribe-1, MAI-Voice-1 और MAI-Image-2 जो टेक्स्ट ट्रांसक्रिप्शन, रियलिस्टिक वॉइस और हाई-क्वालिटी इमेज जनरेशन जैसे कामों को और आसान और तेज बनाएंगे। तीनों AI मॉडल्स में क्या है खास? MAI-Transcribe-1: सबसे एडवांस ट्रांसक्रिप्शन MAI-Transcribe-1 को लेकर Microsoft का दावा है कि यह 25 प्रमुख भाषाओं में स्पीच-टू-टेक्स्ट ट्रांसक्रिप्शन में बेहतरीन परफॉर्मेंस देता है। कंपनी के अनुसार, यह मॉडल Google और OpenAI के मौजूदा मॉडल्स से भी कम एरर रेट देता है। यह मॉडल खास तौर पर तेज स्पीड और बेहतर प्राइस-परफॉर्मेंस के लिए डिजाइन किया गया है, जिससे डेवलपर्स और एंटरप्राइज यूजर्स को फायदा मिलेगा। MAI-Voice-1: इंसानों जैसी आवाज़ MAI-Voice-1 की मदद से अब AI द्वारा जनरेट की गई आवाज़ पहले से ज्यादा नेचुरल और इमोशनल होगी। कुछ सेकंड की ऑडियो से कस्टम वॉइस तैयार 1 सेकंड में 60 सेकंड की ऑडियो जनरेशन लंबे कंटेंट में भी आवाज़ की स्थिरता यह मॉडल Copilot Audio Expressions और Podcasts जैसे फीचर्स को भी पावर देगा। MAI-Image-2: बेहतर और तेज इमेज जनरेशन MAI-Image-2 इमेज जनरेशन को एक नए स्तर पर ले जाता है। ज्यादा नैचुरल लाइटिंग और टेक्सचर इमेज में टेक्स्ट की बेहतर क्लैरिटी फास्ट प्रोसेसिंग इस मॉडल को डिजाइनर्स और फोटोग्राफर्स के साथ मिलकर तैयार किया गया है, जिससे प्रोफेशनल क्वालिटी आउटपुट मिल सके। कहां उपलब्ध होंगे ये मॉडल्स? ये सभी मॉडल्स Microsoft Foundry और MAI Playground के जरिए उपलब्ध हैं। इसके अलावा, MAI-Image-2 को Copilot, Bing और PowerPoint जैसे प्रोडक्ट्स में भी रोलआउट किया जा रहा है। AI रेस में Microsoft की मजबूत पकड़ इन नए मॉडल्स के साथ Microsoft ने साफ संकेत दे दिया है कि वह AI की वैश्विक रेस में अपनी पकड़ और मजबूत करना चाहता है। कंपनी का फोकस बेहतर स्पीड, कम लागत और उच्च गुणवत्ता वाले AI सॉल्यूशंस देने पर है। निष्कर्ष Microsoft के ये नए AI मॉडल्स न सिर्फ टेक्नोलॉजी को आसान बनाएंगे, बल्कि कंटेंट क्रिएशन, बिजनेस और डेवलपमेंट के नए अवसर भी खोलेंगे। आने वाले समय में AI का इस्तेमाल और ज्यादा व्यापक और प्रभावी होता नजर आएगा।
टेक दुनिया में AI का दायरा तेजी से बढ़ रहा है और अब स्मार्ट ग्लासेस इसका नया मैदान बनते जा रहे हैं। लंदन की टेक कंपनी Nothing जल्द ही AI स्मार्ट ग्लासेस लॉन्च करने की तैयारी में है, जो सीधे Meta के लोकप्रिय Meta Ray-Ban smart glasses को चुनौती दे सकते हैं। कब लॉन्च हो सकते हैं स्मार्ट ग्लासेस? रिपोर्ट्स के मुताबिक, Nothing अपने AI स्मार्ट ग्लासेस को 2027 की शुरुआत में लॉन्च कर सकती है। यह कंपनी के लिए एक बड़ा कदम होगा, क्योंकि अब तक वह स्मार्टफोन और ऑडियो डिवाइस पर ही फोकस कर रही थी। क्या होंगे संभावित फीचर्स? Nothing के AI स्मार्ट ग्लासेस में ये खासियतें देखने को मिल सकती हैं: इन-बिल्ट कैमरा और माइक्रोफोन स्पीकर्स के जरिए ऑडियो सपोर्ट AI आधारित पर्सनलाइज्ड अनुभव स्मार्टफोन से कनेक्ट होकर क्लाउड प्रोसेसिंग ऑटोमेशन और स्मार्ट टास्क मैनेजमेंट हालांकि, इनमें इन-बिल्ट डिस्प्ले होने की संभावना कम बताई जा रही है। डिजाइन होगा सबसे अलग Carl Pei के नेतृत्व वाली कंपनी अपने ट्रांसपेरेंट और यूनिक डिजाइन के लिए जानी जाती है। Nothing के फोन में Glyph Lights जैसे फीचर्स स्मार्ट ग्लासेस में भी इसी तरह का अलग डिजाइन देखने को मिल सकता है पहले नहीं था इरादा, अब बदली रणनीति दिलचस्प बात यह है कि कंपनी के CEO Carl Pei पहले स्मार्ट ग्लासेस बनाने के पक्ष में नहीं थे। लेकिन अब कंपनी मल्टी-प्रोडक्ट रणनीति पर काम कर रही है और AI पर बड़ा दांव लगा रही है। AI वियरेबल्स की बढ़ती रेस Nothing इस सेगमेंट में अकेली नहीं है। कई बड़ी टेक कंपनियां भी इसमें उतरने की तैयारी कर रही हैं: Apple Google Samsung वहीं Meta पहले ही अपने स्मार्ट ग्लासेस के 70 लाख से ज्यादा यूनिट बेच चुकी है, जिससे इस मार्केट की संभावनाएं साफ दिखती हैं। बड़ी तस्वीर AI स्मार्ट ग्लासेस आने वाले समय में स्मार्टफोन के बाद अगला बड़ा टेक प्लेटफॉर्म बन सकते हैं। Nothing का इस सेगमेंट में उतरना यह संकेत देता है कि आने वाले वर्षों में वियरेबल टेक्नोलॉजी में जबरदस्त प्रतिस्पर्धा देखने को मिलेगी।
हैदराबाद,एजेंसियां। YouTube ने अपनी सुरक्षा तकनीक को और मजबूत करते हुए Likeness Detection टूल को अब पत्रकारों, सरकारी अधिकारियों और राजनीतिक नेताओं तक बढ़ाने की घोषणा की है। पहले यह फीचर केवल YouTube Partner Program के क्रिएटर्स तक सीमित था, लेकिन अब इसका उद्देश्य डीपफेक और एआई से बन फर्ज़ी वीडियो की पहचान करना और उन्हें हटाने में मदद करना है। क्या है इस टूल में ? इस टूल की मदद से कोई भी व्यक्ति अपने चेहरे या आवाज की नकली एआई कॉपी वाले वीडियो की पहचान कर सकता है और प्लेटफ़ॉर्म से हटाने की मांग कर सकता है। कंपनी का कहना है कि डीपफेक टेक्नोलॉजी तेजी से बढ़ रही है और इसका गलत इस्तेमाल गलत जानकारी फैलाने या किसी की छवि खराब करने में किया जा सकता है। कैसे काम करता है Likeness Detection ? Likeness Detection टूल कुछ हद तक Content ID की तरह काम करता है। फर्क यह है कि Content ID कॉपीराइट वाले कंटेंट को पहचानता है, जबकि Likeness Detection किसी व्यक्ति की शक्ल या आवाज से मिलते-जुलते एआई कंटेंट की पहचान करता है। अगर कोई वीडियो प्लेटफ़ॉर्म की प्राइवेसी गाइडलाइंस का उल्लंघन करता है, तो संबंधित व्यक्ति उसे हटाने का अनुरोध कर सकता है।हालांकि, पैरोडी, व्यंग्य या सार्वजनिक हित से जुड़े वीडियो को हटाने से पहले अलग से रिव्यू किया जाएगा। टूल का उपयोग करने के लिए पात्र लोगों को वेरिफिकेशन प्रक्रिया से गुजरना होगा, जिसमें फोटो आईडी और चेहरे का वीडियो जमा करना आवश्यक है। डेटा का उपयोग इस डेटा का उपयोग केवल पहचान की पुष्टि और सुरक्षा फीचर के संचालन के लिए किया जाएगा और इसे गूगल के एआई मॉडल को ट्रेन करने के लिए इस्तेमाल नहीं किया जाएगा।YouTube का कहना है कि तकनीक के साथ-साथ मजबूत कानून भी जरूरी हैं ताकि लोगों की पहचान और क्रिएटिविटी को एआई टेक्नोलॉजी से होने वाले दुरुपयोग से सुरक्षित रखा जा सके। इस पहल से पत्रकारिता और सार्वजनिक जीवन में भरोसेमंद जानकारी की रक्षा में मदद मिलने की उम्मीद है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।