वॉशिंगटन, एजेंसियां। अमेरिका में रोजगार बाजार की रफ्तार लगातार धीमी होती नजर आ रही है। जून 2026 में देश में केवल 57 हजार नई नौकरियां जुड़ीं, जो बाजार की अपेक्षाओं से काफी कम हैं। ताजा रोजगार आंकड़ों ने अमेरिकी अर्थव्यवस्था की सेहत को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं। अर्थशास्त्रियों का मानना है कि ऊंची महंगाई, वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता और व्यापार नीतियों के कारण कंपनियां नई भर्तियों को लेकर सतर्क हो गई हैं। ट्रेड और टैरिफ नीतियों का असर विशेषज्ञों के अनुसार, आयात शुल्क और व्यापार से जुड़ी नीतियों के कारण कई कंपनियों की लागत बढ़ी है। इससे निवेश और नई भर्ती की रफ्तार प्रभावित हुई है। विपक्षी दलों ने भी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की आर्थिक और व्यापारिक नीतियों पर सवाल उठाते हुए दावा किया है कि इन फैसलों का असर रोजगार बाजार पर साफ दिखाई दे रहा है। बेरोजगारी दर घटी, लेकिन तस्वीर पूरी तरह सकारात्मक नहीं जून में अमेरिका की बेरोजगारी दर 4.3 प्रतिशत से घटकर 4.2 प्रतिशत हो गई। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि यह गिरावट पूरी तरह सकारात्मक संकेत नहीं है। बड़ी संख्या में लोगों ने नौकरी की तलाश ही छोड़ दी है, जिसके कारण वे आधिकारिक बेरोजगारों की सूची से बाहर हो गए। इसी वजह से बेरोजगारी दर कम दिखाई दे रही है। श्रम भागीदारी पांच साल के निचले स्तर पर लेबर फोर्स पार्टिसिपेशन रेट घटकर 61.5 प्रतिशत पर पहुंच गई है, जो पिछले पांच वर्षों का सबसे निचला स्तर है। वहीं 25 से 54 वर्ष आयु वर्ग की श्रम भागीदारी भी घटकर 83.3 प्रतिशत रह गई है। यह संकेत देता है कि रोजगार बाजार में सक्रिय लोगों की संख्या लगातार कम हो रही है। टेक सेक्टर में जारी है छंटनी जहां निर्माण और विनिर्माण क्षेत्र में कुछ नई नौकरियां पैदा हुई हैं, वहीं टेक सेक्टर में छंटनी का दौर जारी है। मेटा, माइक्रोसॉफ्ट समेत कई कंपनियां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में निवेश बढ़ाने के लिए कर्मचारियों की संख्या घटा रही हैं। कमजोर रोजगार आंकड़ों ने अब अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व के सामने भी ब्याज दरों को लेकर नई चुनौती खड़ी कर दी है।
सैन फ्रांसिस्को, एजेंसियां। टेक दिग्गज माइक्रोसॉफ्ट ने एंटरप्राइज ग्राहकों के लिए 'Microsoft Frontier Company' नाम से नई AI कंपनी लॉन्च करने की घोषणा की है। कंपनी इस पहल में शुरुआती चरण में 2.5 अरब डॉलर (लगभग 21,000 करोड़ रुपये) का निवेश करेगी। इसका उद्देश्य विभिन्न उद्योगों की कंपनियों को उनकी जरूरत के अनुसार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) समाधान अपनाने और उससे बेहतर व्यावसायिक परिणाम हासिल करने में मदद करना है। 6000 इंजीनियर और विशेषज्ञ देंगे सहायता माइक्रोसॉफ्ट ने बताया कि नई कंपनी के तहत 6,000 इंजीनियर और उद्योग विशेषज्ञ ग्राहकों के साथ सीधे काम करेंगे। ये टीमें कंपनियों की जरूरतों के अनुसार AI मॉडल चुनने, उन्हें लागू करने और उनके मौजूदा डेटा व सिस्टम के साथ एकीकृत करने में मदद करेंगी। सिर्फ Microsoft AI नहीं, अन्य मॉडल भी होंगे उपलब्ध माइक्रोसॉफ्ट की नई कंपनी केवल अपने AI टूल्स तक सीमित नहीं रहेगी। ग्राहक जरूरत के अनुसार OpenAI, Anthropic, ओपन-सोर्स और अन्य AI मॉडलों का भी उपयोग कर सकेंगे। कंपनी का कहना है कि उसका लक्ष्य ग्राहकों को सबसे उपयुक्त AI समाधान उपलब्ध कराना है। बड़ी कंपनियां होंगी शुरुआती ग्राहक माइक्रोसॉफ्ट ने बताया कि Unilever और Novo Nordisk जैसी वैश्विक कंपनियां इस नई पहल की शुरुआती ग्राहकों में शामिल होंगी। कंपनी का दावा है कि इससे AI लागू करने की लागत और समय दोनों कम होंगे तथा कंपनियों को निवेश पर बेहतर रिटर्न मिलेगा। एंटरप्राइज AI बाजार में बढ़ेगी प्रतिस्पर्धा विशेषज्ञों का मानना है कि Microsoft Frontier Company के लॉन्च से एंटरप्राइज AI सेवाओं के बाजार में प्रतिस्पर्धा और तेज होगी। माइक्रोसॉफ्ट का यह कदम उन कंपनियों को आकर्षित करने की कोशिश है जो अलग-अलग AI मॉडलों का इस्तेमाल कर अपने कारोबार में AI का अधिक प्रभावी उपयोग करना चाहती हैं।
नई दिल्ली: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और रोबोटिक्स की दुनिया में चीन ने एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। चीन की अग्रणी रोबोटिक्स कंपनी UBTech ने 30 जून को शेन्जेन में अपना नया ह्यूमनॉइड रोबोट UWORLD U1 लॉन्च किया। यह रोबोट पारंपरिक औद्योगिक मशीनों से बिल्कुल अलग है। इसे फैक्ट्रियों में काम कराने के बजाय इंसानों के साथ रहने, बातचीत करने और उन्हें भावनात्मक सहयोग (Emotional Support) देने के उद्देश्य से विकसित किया गया है। UWORLD U1 का डिजाइन और रूप-रंग काफी हद तक इंसानों जैसा है। इसमें सिलिकॉन स्किन, अत्याधुनिक इमोशनल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और ऑन-डिवाइस डेटा स्टोरेज जैसी आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया गया है। कंपनी का दावा है कि यह रोबोट लोगों के साथ प्राकृतिक तरीके से संवाद कर सकता है और समय के साथ उनके व्यवहार और पसंद को समझते हुए अधिक व्यक्तिगत अनुभव प्रदान करता है। इंसानों का साथी बनने के लिए तैयार किया गया UBTech के अनुसार, UWORLD U1 को ऐसे वातावरण के लिए डिजाइन किया गया है जहां इंसानों के साथ लगातार संवाद की आवश्यकता होती है। इसका इस्तेमाल बुजुर्गों की देखभाल, शिक्षा, होटल और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर, रिसेप्शन सेवाओं, प्रीमियम होम सर्विस और अन्य ग्राहक-केंद्रित कार्यों में किया जा सकता है। कंपनी का कहना है कि यह रोबोट सिर्फ सवालों के जवाब देने तक सीमित नहीं है, बल्कि बातचीत के दौरान सामने वाले की भावनाओं को समझने और उसके अनुसार प्रतिक्रिया देने की क्षमता भी रखता है। तीन वेरिएंट में उपलब्ध UWORLD U1 को तीन अलग-अलग मॉडल में पेश किया गया है। U1 Lite U1 Pro U1 Ultra फिलहाल इसकी बिक्री केवल चीन में शुरू की गई है। कीमत की बात करें तो इसकी शुरुआती कीमत 119,800 युआन (करीब 14 लाख रुपये) है, जबकि हाई-एंड Ultra मॉडल की कीमत 990,000 युआन (करीब 1.15 करोड़ रुपये) तक जाती है। महिला और पुरुष दोनों अवतार में मिलेगा UWORLD U1 की एक खास विशेषता यह है कि इसे पुरुष और महिला दोनों रूपों में तैयार किया गया है। पुरुष मॉडल की लंबाई लगभग 183 सेंटीमीटर है। महिला मॉडल की लंबाई लगभग 168 सेंटीमीटर रखी गई है। रोबोट में कुल 88 सर्वो जॉइंट्स दिए गए हैं, जिनकी मदद से यह इंसानों की तरह सिर, हाथ, गर्दन और शरीर की कई स्वाभाविक गतिविधियां कर सकता है। इसके पूरे बाहरी हिस्से पर सिलिकॉन कोटिंग की गई है ताकि बातचीत के दौरान यह अधिक वास्तविक महसूस हो। 20 से ज्यादा भावनाओं को पहचान सकता है UWORLD U1 की सबसे बड़ी ताकत इसका Emotional AI System है। कंपनी के मुताबिक यह रोबोट 20 से अधिक प्रकार की मानवीय भावनाओं को पहचान सकता है। बातचीत के दौरान यह सामने वाले व्यक्ति से आई कॉन्टैक्ट बनाए रखता है, चेहरे के भावों को समझता है और पिछली बातचीत को याद रखते हुए भविष्य में अधिक व्यक्तिगत जवाब देता है। यानी अगर कोई व्यक्ति नियमित रूप से इस रोबोट से बातचीत करता है, तो समय के साथ यह उसकी पसंद, व्यवहार और बातचीत के तरीके को समझकर उसी अनुसार प्रतिक्रिया देने लगता है। क्लाउड पर नहीं, डिवाइस में ही सुरक्षित रहेगा डेटा UBTech ने प्राइवेसी को ध्यान में रखते हुए UWORLD U1 में ऑन-डिवाइस AI प्रोसेसिंग का इस्तेमाल किया है। इसका इमोशनल AI मॉडल Rockchip RK3588 प्रोसेसर पर चलता है, जिससे अधिकांश प्रोसेसिंग सीधे डिवाइस पर होती है और क्लाउड सर्वर पर निर्भरता काफी कम हो जाती है। यूजर का व्यक्तिगत डेटा क्लाउड पर अपलोड होने के बजाय रोबोट में ही सुरक्षित रहता है। कंपनी के अनुसार इसमें तीन-स्तरीय प्राइवेसी आर्किटेक्चर दिया गया है, जिसमें लोकल-फर्स्ट प्रोसेसिंग, सीमित क्लाउड उपयोग और यूजर कंट्रोल्ड हार्डवेयर सिक्योरिटी शामिल है। इसका उद्देश्य AI डिवाइसों से जुड़ी बढ़ती गोपनीयता संबंधी चिंताओं को कम करना है। सिर्फ वयस्कों के लिए उपलब्ध UBTech ने स्पष्ट किया है कि UWORLD U1 को किसी इंडस्ट्रियल रोबोट के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। इसे विशेष रूप से वयस्क खरीदारों के लिए विकसित किया गया है, जहां स्वाभाविक संवाद, साथ और भावनात्मक सहयोग की जरूरत होती है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। दुनिया की अग्रणी टेक कंपनी माइक्रोसॉफ्ट एक बार फिर बड़े पैमाने पर कर्मचारियों की छंटनी की तैयारी में है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कंपनी नए वित्त वर्ष की शुरुआत में लगभग 5,000 कर्मचारियों की नौकरी खत्म कर सकती है। हालांकि माइक्रोसॉफ्ट ने अभी तक इस संबंध में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है, लेकिन माना जा रहा है कि यह कदम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) पर बढ़ते निवेश और बिजनेस रीस्ट्रक्चरिंग का हिस्सा है। वर्तमान में कंपनी में दुनिया भर में करीब 2.2 लाख कर्मचारी कार्यरत हैं और संभावित छंटनी कुल कर्मचारियों के 2.5 प्रतिशत से भी कम होगी। सेल्स, कंसल्टिंग और एक्सबॉक्स डिवीजन पर सबसे ज्यादा असर रिपोर्ट्स के मुताबिक इस बार सबसे अधिक प्रभाव सेल्स, कंसल्टिंग और एक्सबॉक्स (गेमिंग) डिवीजन पर पड़ सकता है। विशेष रूप से एक्सबॉक्स कारोबार में नई नेतृत्व टीम के आने के बाद संगठनात्मक बदलाव तेज हुए हैं। कंपनी कई पुराने पदों को समाप्त कर टीमों का पुनर्गठन कर सकती है, ताकि कारोबार को नई रणनीति के अनुरूप ढाला जा सके। एआई निवेश के लिए घटाए जा रहे परिचालन खर्च विशेषज्ञों का मानना है कि माइक्रोसॉफ्ट पिछले कुछ वर्षों से ओपनएआई के साथ मिलकर एआई डेटा सेंटर, कोपायलट और अन्य जनरेटिव एआई तकनीकों पर अरबों डॉलर का निवेश कर रही है। इन परियोजनाओं पर बढ़ते खर्च को संतुलित करने के लिए कंपनी अन्य परिचालन लागत में कटौती कर रही है। जिन कार्यों को अब एआई और ऑटोमेशन के जरिए अधिक दक्षता से किया जा सकता है, वहां मानव संसाधन की आवश्यकता कम की जा रही है। पूरी टेक इंडस्ट्री में बदल रहा रोजगार का स्वरूप माइक्रोसॉफ्ट अकेली कंपनी नहीं है जो इस दिशा में कदम बढ़ा रही है। वर्ष 2026 में मेटा, अमेजन, ओरेकल और लिंक्डइन जैसी कई प्रमुख टेक कंपनियां भी कर्मचारियों की संख्या घटा चुकी हैं। उद्योग जगत का मानना है कि एआई के बढ़ते उपयोग से काम करने का तरीका तेजी से बदल रहा है। भविष्य में कंपनियां कम कर्मचारियों और अधिक ऑटोमेशन के साथ काम करने की रणनीति अपना सकती हैं, जिससे तकनीकी क्षेत्र में रोजगार का स्वरूप लगातार बदलता दिखाई दे रहा है।
वॉशिंगटन: अमेरिका की 250वीं स्वतंत्रता वर्षगांठ के जश्न के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump अपने एक सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर विवादों में आ गए हैं। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर व्हाइट हाउस के लिए एक कथित "Golden Gift" की तस्वीर साझा की, लेकिन बाद में मीडिया की जांच में यह तस्वीर AI-जनरेटेड (कृत्रिम बुद्धिमत्ता से बनाई गई) पाई गई। क्या था ट्रंप का दावा? ट्रंप ने पोस्ट में व्हाइट हाउस की Truman Balcony पर एक विशाल सुनहरे बाज (Golden Eagle) की तस्वीर साझा की। तस्वीर में बाज अपने फैले हुए पंखों के साथ बालकनी पर बैठा दिखाई देता है, जबकि बालकनी पर अमेरिकी ध्वज वाले एक बड़े शील्ड (कवच) को भी दर्शाया गया है। पोस्ट के साथ ट्रंप ने लिखा: "व्हाइट हाउस के 250वें जन्मदिन के वर्ष के लिए एक गोल्डन गिफ्ट।" इसके बाद व्हाइट हाउस के आधिकारिक X अकाउंट ने भी इस पोस्ट को रीशेयर किया। फैक्ट चेक में क्या सामने आया? अमेरिकी समाचार चैनल CNN की पड़ताल में दावा किया गया कि यह तस्वीर वास्तविक नहीं है। जांच में सामने आए प्रमुख बिंदु: वास्तविक Truman Balcony की बनावट और रेलिंग तस्वीर से मेल नहीं खाती। तस्वीर में दिखाया गया विशाल सुनहरा बाज वास्तव में वहां मौजूद नहीं था। शील्ड पर केवल 11 सितारे दिखाई देते हैं, जबकि अमेरिकी इतिहास के अनुसार मूल 13 उपनिवेशों का प्रतिनिधित्व करने के लिए ऐसे प्रतीकों में सामान्यतः 13 सितारे होते हैं। फोटोग्राफर ने भी पेश किया सबूत फ्रीलांस फोटोग्राफर Andrew Leyden ने ट्रंप की पोस्ट के कुछ समय बाद रात करीब 9:30 बजे ट्रूमैन बालकनी की वास्तविक तस्वीरें साझा कीं। उनकी तस्वीरों में न तो कोई विशाल सुनहरा बाज दिखाई दिया और न ही वह शील्ड, जिसका जिक्र ट्रंप की पोस्ट में था। नए पासपोर्ट डिजाइन पर भी चर्चा इसी बीच ट्रंप ने अमेरिका की 250वीं वर्षगांठ के अवसर पर एक कथित 'लिमिटेड एडिशन' अमेरिकी पासपोर्ट का डिजाइन भी साझा किया। पोस्ट किए गए डिजाइन में: ट्रंप को ऐतिहासिक Resolute Desk पर बैठे हुए दिखाया गया है। पृष्ठभूमि में United States Declaration of Independence का चित्रण है। नीचे ट्रंप के हस्ताक्षर भी प्रदर्शित किए गए हैं। ट्रंप ने इसके साथ संदेश लिखा: "Welcome, but be good." AI कंटेंट को लेकर फिर छिड़ी बहस इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर सार्वजनिक हस्तियों और सरकारी संस्थानों द्वारा साझा की जाने वाली AI-जनरेटेड तस्वीरों की पारदर्शिता को लेकर बहस तेज हो गई है। हालांकि, इस मामले में व्हाइट हाउस या ट्रंप की ओर से AI-जनरेटेड तस्वीर साझा किए जाने के आरोपों पर कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के क्षेत्र में तेजी से विस्तार कर रही OpenAI ने भारत में अपनी मौजूदगी को मजबूत करने के लिए बड़ा कदम उठाया है। ChatGPT विकसित करने वाली कंपनी ने उबर इंडिया और साउथ एशिया के प्रमुख प्रभजीत सिंह को भारत का पहला मैनेजिंग डायरेक्टर नियुक्त किया है। वह सितंबर 2026 से नई जिम्मेदारी संभालेंगे। यह पहली बार है जब OpenAI ने भारत में शीर्ष स्तर पर नेतृत्व नियुक्त किया है। भारत में बिजनेस विस्तार की जिम्मेदारी OpenAI के अनुसार, प्रभजीत सिंह भारत में कंपनी के सभी प्रमुख कारोबारी संचालन की कमान संभालेंगे। वह एशिया-प्रशांत (APAC) प्रमुख किरन मणी को रिपोर्ट करेंगे। उनकी जिम्मेदारियों में भारत में कंज्यूमर ग्रोथ बढ़ाना, विभिन्न उद्योगों में AI के उपयोग को विस्तार देना, सरकारी नीतियों के साथ समन्वय स्थापित करना और सार्वजनिक-निजी भागीदारी को मजबूत करना शामिल होगा। OpenAI के लिए क्यों अहम है भारत भारत OpenAI के लिए अमेरिका के बाद दूसरा सबसे बड़ा यूजर मार्केट बन चुका है। देश में शिक्षा, शोध, कोडिंग और पेशेवर कार्यों में ChatGPT का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में कंपनी भारत में अपनी व्यावसायिक गतिविधियों और साझेदारियों को और मजबूत करना चाहती है। आईआईटी खड़गपुर और आईआईएम अहमदाबाद से पढ़ाई कर चुके प्रभजीत सिंह को भारतीय बाजार और कॉर्पोरेट जगत का व्यापक अनुभव है, जिसका लाभ OpenAI को मिलने की उम्मीद है। उबर में 11 साल का सफल कार्यकाल प्रभजीत सिंह ने OpenAI में शामिल होने से पहले उबर इंडिया और साउथ एशिया के प्रमुख पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने उबर में लगभग 11 वर्षों तक काम किया और उनके नेतृत्व में कंपनी ने महानगरों के साथ-साथ छोटे शहरों तक कैब, ऑटो और बाइक सेवाओं का विस्तार किया। उबर ने जताया आभार उबर ने प्रभजीत सिंह के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि भारत कंपनी के लिए सबसे महत्वपूर्ण बाजारों में से एक बना रहेगा। कंपनी ने भरोसा जताया कि नेतृत्व परिवर्तन के बावजूद भारत में इनोवेशन और मोबिलिटी सेवाओं का विस्तार लगातार जारी रहेगा। वहीं, OpenAI की यह नियुक्ति भारतीय AI बाजार में उसके दीर्घकालिक निवेश और रणनीतिक विस्तार का स्पष्ट संकेत मानी जा रही है।
मुंबई, एजेंसियां। देश में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते इस्तेमाल के बीच भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बैंकों और वित्तीय संस्थानों के लिए AI और मशीन लर्निंग (ML) से जुड़े नए ड्राफ्ट दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इनका उद्देश्य डिजिटल बैंकिंग को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और जवाबदेह बनाना है। AI मॉडल पर होगी सख्त निगरानी प्रस्तावित नियमों के अनुसार, हर बैंक को AI और ML मॉडल के उपयोग के लिए एक मजबूत रिस्क मैनेजमेंट फ्रेमवर्क तैयार करना होगा। इस फ्रेमवर्क को बैंक के बोर्ड से मंजूरी लेनी होगी और समय-समय पर इसकी समीक्षा भी करनी होगी। ग्राहक से जुड़े फैसलों में जरूरी होगी मानवीय निगरानी RBI ने स्पष्ट किया है कि यदि AI किसी ग्राहक से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णय लेता है, जैसे लोन मंजूरी या जोखिम मूल्यांकन, तो उस प्रक्रिया में मानवीय निगरानी भी अनिवार्य होगी। केवल AI के आधार पर अंतिम निर्णय नहीं लिया जा सकेगा। जनरेटिव AI के लिए अतिरिक्त सुरक्षा ड्राफ्ट में कहा गया है कि ग्राहक से सीधे संवाद करने वाले Generative AI सिस्टम के लिए अतिरिक्त साइबर सुरक्षा उपाय अपनाने होंगे। इससे डेटा लीक, गलत जानकारी और साइबर हमलों के जोखिम को कम किया जा सकेगा। थर्ड-पार्टी AI सिस्टम की भी होगी जांच अगर कोई बैंक किसी बाहरी कंपनी का AI मॉडल इस्तेमाल करता है, तब भी उसकी स्वतंत्र जांच करानी होगी। इससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि AI सिस्टम सुरक्षित और विश्वसनीय तरीके से काम कर रहा है। 24 जुलाई तक मांगे गए सुझाव RBI ने इन ड्राफ्ट दिशानिर्देशों पर बैंकों, विशेषज्ञों और आम लोगों से 24 जुलाई 2026 तक सुझाव मांगे हैं। सुझावों पर विचार करने के बाद अंतिम नियम जारी किए जाएंगे।
नई दिल्ली, एजेंसियां। दुनिया के सबसे लोकप्रिय मैसेजिंग ऐप WhatsApp ने अपने यूजर्स के लिए कई नए फीचर्स शुरू कर दिए हैं। इन अपडेट्स का उद्देश्य चैटिंग को आसान बनाना, स्टोरेज मैनेजमेंट बेहतर करना और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के जरिए यूजर एक्सपीरियंस को और स्मार्ट बनाना है। फोटो एडिट करना होगा आसान WhatsApp ने Meta AI आधारित नए फोटो एडिटिंग टूल पेश किए हैं। अब यूजर्स फोटो भेजने से पहले उसका बैकग्राउंड बदल सकेंगे, अनचाहे ऑब्जेक्ट हटा सकेंगे और AI की मदद से अलग-अलग स्टाइल भी उसमे लागू कर सकेंगे। iPhone पर एक ही ऐप में चलेंगे दो अकाउंट अब iPhone यूजर्स भी एक ही WhatsApp ऐप में दो अलग-अलग अकाउंट इस्तेमाल कर सकेंगे। इससे पर्सनल और ऑफिस अकाउंट को अलग-अलग मैनेज करना आसान होगा। यह सुविधा पहले केवल Android यूजर्स के लिए उपलब्ध थी। चैट ट्रांसफर हुआ और आसान WhatsApp ने चैट ट्रांसफर फीचर को और बेहतर बनाया है। अब Android और iPhone के बीच चैट, फोटो और वीडियो ट्रांसफर करना पहले से ज्यादा आसान होगा, जिससे नया फोन लेने पर डेटा सुरक्षित तरीके से ट्रांसफर किया जा सकेगा। बड़े मीडिया फाइल्स आसानी से होंगे डिलीट नए अपडेट के बाद यूजर्स किसी चैट के बड़े मीडिया फाइल्स को अलग से खोजकर डिलीट कर सकेंगे। इससे बिना पूरी चैट हटाए फोन की स्टोरेज खाली की जा सकेगी। इमोजी टाइप करते ही मिलेंगे स्टिकर सुझाव अब चैटिंग के दौरान जैसे ही यूजर कोई इमोजी टाइप करेगा, WhatsApp उससे जुड़े स्टिकर अपने आप सुझाएगा। इससे चैटिंग पहले से ज्यादा मजेदार और तेज हो जाएगी। यूजरनेम फीचर की भी तैयारी रिपोर्ट्स के मुताबिक WhatsApp जल्द ही Username फीचर भी लॉन्च कर सकता है। इसके बाद यूजर्स बिना मोबाइल नंबर साझा किए भी एक-दूसरे से जुड़ सकेंगे। यह फीचर यूजर की प्राइवेसी को और मजबूत करेगा। चरणबद्ध तरीके से मिलेंगे अपडेट WhatsApp ने बताया है कि ये सभी फीचर्स एक साथ सभी यूजर्स को नहीं मिलेंगे। इन्हें Android और iPhone पर चरणबद्ध तरीके से रोलआउट किया जा रहा है। यदि आपके फोन में अभी यह अपडेट नहीं आया है, तो Google Play Store या Apple App Store से WhatsApp का लेटेस्ट वर्जन अपडेट करें।
नई दिल्ली, एजेंसियां। दुनिया की दिग्गज ई-कॉमर्स कंपनी अमेजन ने गुरुवार को भारत में 2026 से 2030 के बीच 48 अरब डॉलर के निवेश की घोषणा की। अमेजन के CEO एंडी जेसी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के बाद यह बड़ा एलान किया। इस घोषणा के साथ 2010 से 2030 तक भारत में अमेजन की कुल वित्तीय प्रतिबद्धता 88 अरब डॉलर से अधिक हो जाएगी। पहले था 35 अरब का प्लान, अब बढ़कर हुआ 48 अरब एंडी जेसी ने बताया कि अमेजन ने 2010 से अब तक भारत में 40 अरब डॉलर का निवेश किया है। पिछले साल के अंत में 2026-2030 के लिए 35 अरब डॉलर निवेश की घोषणा की गई थी, जिसे अब बढ़ाकर 48 अरब डॉलर कर दिया गया है। यह अतिरिक्त 13 अरब डॉलर मुख्य रूप से क्लाउड कंप्यूटिंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के विकास में लगाया जाएगा। मुंबई और हैदराबाद में बढ़ेगी डेटा सेंटर क्षमता इस निवेश से क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर में कुल नियोजित राशि 21 अरब डॉलर से अधिक हो जाएगी। यह पूंजी मुंबई और हैदराबाद में Amazon Web Services के डेटा केंद्रों की क्षमता विस्तार में उपयोग होगी। 38 लाख नौकरियां और 80 अरब डॉलर का निर्यात लक्ष्य यह निवेश रोजगार के मोर्चे पर भी बड़ा असर डालेगा। 2024 में समर्थित 28 लाख नौकरियों को 2030 तक 38 लाख तक पहुंचाने का लक्ष्य है। इसके अलावा 2030 तक 80 अरब डॉलर के ई-कॉमर्स निर्यात, 1.5 करोड़ छोटे कारोबारियों को AI का लाभ और 40 लाख सरकारी स्कूली छात्रों को AI शिक्षा देने का भी लक्ष्य रखा गया है।
नई दिल्ली: भारतीय स्टार्टअप जगत के चर्चित उद्यमी कुणाल शाह एक बार फिर सुर्खियों में हैं। फिनटेक कंपनी CRED को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के बाद अब वह दुनिया के सबसे लोकप्रिय मैसेजिंग प्लेटफॉर्म WhatsApp की कमान संभालने जा रहे हैं। Meta ने उन्हें WhatsApp का नया ग्लोबल CEO नियुक्त किया है। इस नियुक्ति के साथ भारतीय उद्यमिता को वैश्विक स्तर पर एक बड़ी पहचान मिली है। हाल ही में कुणाल शाह ने CRED के CEO पद से हटने की घोषणा की थी। कंपनी की दैनिक जिम्मेदारियां अब मितेन संपत संभालेंगे, जबकि कुणाल शाह शेयरधारक और रणनीतिक भूमिका में जुड़े रहेंगे। कौन हैं कुणाल शाह? मुंबई में जन्मे कुणाल शाह एक गुजराती कारोबारी परिवार से ताल्लुक रखते हैं। उनके पिता फार्मास्युटिकल व्यवसाय से जुड़े थे। इंजीनियरिंग के बजाय उन्होंने मुंबई के विल्सन कॉलेज से फिलॉसफी में स्नातक की पढ़ाई की। इसके बाद उन्होंने NMIMS से MBA शुरू किया, लेकिन बीच में ही पढ़ाई छोड़कर उद्यमिता की राह चुन ली। उनका पहला बड़ा वेंचर PaisaBack था। इसके बाद वर्ष 2010 में उन्होंने FreeCharge की सह-स्थापना की। यह कंपनी इतनी सफल रही कि 2015 में Snapdeal ने इसे लगभग 2,800 करोड़ रुपये में खरीद लिया। कैसे बना CRED भारत का बड़ा फिनटेक ब्रांड? FreeCharge की सफलता के बाद कुणाल शाह ने 2018 में CRED की शुरुआत की। कंपनी का उद्देश्य समय पर क्रेडिट कार्ड बिल भुगतान करने वाले ग्राहकों को रिवॉर्ड देना था। धीरे-धीरे CRED ने भुगतान, लोन, बीमा, वेल्थ मैनेजमेंट और क्रेडिट कार्ड सेवाओं तक अपना विस्तार किया। CRED से जुड़े प्रमुख आंकड़े विवरण आंकड़े स्थापना वर्ष 2018 यूजर्स 1.7 करोड़ से अधिक FY25 राजस्व ₹2,735 करोड़ वैल्यूएशन 4.5 अरब डॉलर Meta की हिस्सेदारी लगभग 20% Meta ने हाल ही में CRED में 90 करोड़ डॉलर (करीब 8,550 करोड़ रुपये) का निवेश भी किया है। WhatsApp में क्या होगी नई भूमिका? रिपोर्ट्स के अनुसार, कुणाल शाह WhatsApp के बिजनेस मॉडल को और मजबूत बनाने पर काम करेंगे। उनकी प्राथमिकता विज्ञापन, सब्सक्रिप्शन आधारित सेवाओं और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) फीचर्स के विस्तार पर होगी। वह मौजूदा प्रमुख विल कैथकार्ट की जगह लेंगे, जिन्होंने पिछले सात वर्षों में WhatsApp के यूजर बेस को दोगुने से भी अधिक बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई थी। कुणाल शाह का मानना है कि WhatsApp ने अब तक शानदार सफर तय किया है, लेकिन इसकी वास्तविक क्षमता अभी पूरी तरह सामने नहीं आई है। कितनी है कुणाल शाह की नेटवर्थ? विभिन्न रिपोर्ट्स के मुताबिक, 2026 में कुणाल शाह की अनुमानित कुल संपत्ति करीब 15,000 करोड़ रुपये है। उनकी संपत्ति के प्रमुख स्रोत हैं: CRED में हिस्सेदारी FreeCharge की बिक्री से मिली पूंजी 200 से अधिक स्टार्टअप्स में एंजेल निवेश विभिन्न टेक कंपनियों में निवेश दिलचस्प बात यह है कि कुणाल शाह लंबे समय तक CRED से बेहद कम प्रतीकात्मक वेतन लेने के कारण भी चर्चा में रहे हैं। WhatsApp में उनकी नई भूमिका भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।
Infosys Chairman on AI: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते प्रभाव और इसके कारण नौकरियों पर मंडरा रहे खतरे को लेकर दुनिया भर में बहस जारी है। इसी बीच इंफोसिस के चेयरमैन नंदन नीलेकणि ने AI से जुड़ी आशंकाओं पर स्पष्ट और मजबूत राय रखी है। उनका कहना है कि AI पारंपरिक आईटी कंपनियों की जगह नहीं लेगा, बल्कि उनकी क्षमता और उत्पादकता को कई गुना बढ़ाने का काम करेगा। AI से नहीं खत्म होंगी आईटी कंपनियां इंफोसिस की 45वीं वार्षिक आम बैठक (AGM) में बोलते हुए नंदन नीलेकणि ने कहा कि जेनरेटिव AI के आने से पारंपरिक आईटी सर्विसेज मॉडल खत्म होने की बात सही नहीं है। उन्होंने कहा कि: "AI हमारी जैसी कंपनियों को रिप्लेस नहीं करेगा, बल्कि उन संगठनों की ताकत बढ़ाएगा जो तेजी से बदलाव के साथ खुद को ढालते हैं और स्पष्ट लक्ष्य के साथ आगे बढ़ते हैं।" नीलेकणि के अनुसार, सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट केवल कोड लिखने तक सीमित नहीं है। इसमें डोमेन नॉलेज, सुरक्षा, टेस्टिंग, सिस्टम डिजाइन और आर्किटेक्चर जैसी कई महत्वपूर्ण विशेषज्ञताएं शामिल होती हैं, जिन्हें केवल AI के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता। ऑटोमेशन के बीच क्यों बढ़ा है डर? दुनियाभर में यह चिंता लगातार बढ़ रही है कि AI और ऑटोमेशन के कारण कोडिंग, आउटसोर्सिंग और पारंपरिक आईटी सेवाओं की मांग घट सकती है। खासकर भारत के 300 अरब डॉलर से अधिक के तकनीकी उद्योग के लिए यह चिंता महत्वपूर्ण मानी जा रही है। हालांकि, नंदन नीलेकणि का मानना है कि AI खतरा नहीं बल्कि अवसर है। पुराने सिस्टम को आधुनिक बनाने में मदद कर रहा AI इंफोसिस चेयरमैन ने बताया कि AI की मदद से कंपनियां अपने दशकों पुराने टेक्नोलॉजी सिस्टम को आधुनिक बनाने की दिशा में तेजी से काम कर रही हैं। उनके मुताबिक, आने वाले समय में सबसे बड़ा अवसर AI मॉडल और एजेंट्स को कंपनियों के महत्वपूर्ण प्लेटफॉर्म के साथ जोड़ने में होगा। रिपोर्ट्स के अनुसार, इंफोसिस अपने शीर्ष 200 ग्राहकों में से लगभग 90 प्रतिशत के साथ AI आधारित प्रोजेक्ट्स पर काम कर रही है। 2030 तक 400 बिलियन डॉलर का हो सकता है बाजार इंफोसिस ने हाल ही में अपना AI-First Value Framework लॉन्च किया है। कंपनी का अनुमान है कि वर्ष 2030 तक AI-फर्स्ट सर्विसेज का वैश्विक बाजार 300 से 400 बिलियन डॉलर के बीच पहुंच सकता है। नंदन नीलेकणि के बयान से यह संकेत मिलता है कि इंफोसिस AI को चुनौती नहीं, बल्कि भविष्य के विकास का सबसे बड़ा अवसर मान रही है।
नई दिल्ली: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को लेकर दुनिया के सबसे प्रभावशाली खुफिया गठबंधनों में से एक Five Eyes intelligence alliance ने गंभीर चेतावनी जारी की है। गठबंधन का कहना है कि AI की अगली पीढ़ी के मॉडल आने वाले कुछ ही महीनों में वैश्विक साइबर सुरक्षा परिदृश्य को पूरी तरह बदल सकते हैं। इससे साइबर हमलों की रफ्तार, दायरा और जटिलता कई गुना बढ़ सकती है। फाइव आइज की निगरानी संस्था FIORC (Five Eyes Intelligence Oversight and Review Council) ने सरकारों, व्यवसायों और कॉर्पोरेट नेतृत्व से अपील की है कि वे साइबर सुरक्षा और साइबर रेजिलिएंस (Cyber Resilience) को तत्काल प्राथमिकता दें। AI बढ़ाएगा साइबर हमलों का खतरा संयुक्त बयान में कहा गया है कि "फ्रंटियर AI सिस्टम" मौजूदा उद्योग की अपेक्षाओं से कहीं अधिक शक्तिशाली साबित हो सकते हैं और साइबर हमलों तथा उनके बचाव दोनों में बुनियादी बदलाव ला सकते हैं। यह बदलाव वर्षों में नहीं, बल्कि कुछ महीनों में देखने को मिल सकता है। गठबंधन के अनुसार, AI किसी डिजिटल कमजोरी की पहचान होने और साइबर अपराधियों द्वारा उसका फायदा उठाने के बीच के समय को तेजी से कम कर रहा है, जिससे साइबर खतरों का जोखिम बढ़ रहा है। अमेरिकी फैसले के बाद जारी हुई चेतावनी यह बयान उस समय आया है, जब अमेरिका ने Anthropic द्वारा विकसित कुछ उन्नत AI सिस्टम तक विदेशी नागरिकों की पहुंच सीमित करने का फैसला किया है। यह कदम अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियों की सलाह पर उठाया गया है। फाइव आइज ने अपने बयान में किसी विशेष कंपनी या AI मॉडल का नाम नहीं लिया, लेकिन उसने स्पष्ट संकेत दिया कि अत्याधुनिक AI मॉडल वैश्विक साइबर सुरक्षा के लिए नई चुनौतियां पैदा कर सकते हैं। केवल खतरा नहीं, सुरक्षा का अवसर भी फाइव आइज ने यह भी स्वीकार किया कि AI साइबर सुरक्षा को मजबूत करने के लिए शक्तिशाली उपकरण भी उपलब्ध करा सकता है। संगठन का कहना है कि यदि AI का उपयोग रणनीतिक और जिम्मेदारीपूर्ण तरीके से किया जाए तो यह साइबर हमलों की पहचान, निगरानी और प्रतिक्रिया को पहले से अधिक प्रभावी बना सकता है। नेताओं को दी ये सलाह गठबंधन ने कंपनियों के बोर्ड और वरिष्ठ अधिकारियों से कहा है कि वे: साइबर जोखिम को केवल तकनीकी समस्या न मानें। साइबर सुरक्षा को व्यापारिक जोखिम और नेतृत्व की जिम्मेदारी के रूप में देखें। सुरक्षा टीमों को पर्याप्त संसाधन और अधिकार दें। बदलते AI-आधारित खतरों के अनुसार अपनी रणनीतियों को लगातार अपडेट करें। सुरक्षा उपायों का वास्तविक परिस्थितियों में परीक्षण करें। 'AI भविष्य नहीं, वर्तमान की चुनौती' बयान में कहा गया, "AI भविष्य की तकनीक नहीं है, यह पहले से मौजूद है। फ्रंटियर AI के तेजी से विकास का अर्थ है कि साइबर जोखिमों को लेकर हमारी धारणाएं वर्षों नहीं, बल्कि महीनों में पुरानी पड़ सकती हैं।" फाइव आइज ने चेतावनी दी कि दुनिया को बदलते साइबर खतरों का सामना करने के लिए अभी से तैयार होना होगा, क्योंकि AI आने वाले समय में वैश्विक डिजिटल सुरक्षा व्यवस्था को पूरी तरह नया रूप देने जा रहा है।
हॉन्गकॉन्ग: तकनीक की दुनिया तेजी से बदल रही है और अब इसका असर रिटेल सेक्टर में भी साफ दिखाई देने लगा है। हॉन्गकॉन्ग में एक ऐसा अनोखा स्टोर शुरू किया गया है, जहां किसी इंसानी कर्मचारी की जरूरत नहीं पड़ती। इस पूरी दुकान का संचालन सिर्फ एक ह्यूमनॉइड रोबोट कर रहा है, जिसका नाम "शाओ गाई" (Xiao Gai) है। साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, यह 24 घंटे संचालित होने वाला अपनी तरह का पहला पॉप-अप स्टोर है। इस पोर्टेबल कैप्सूल स्टोर को बीजिंग स्थित गैलबॉट कंपनी ने विकसित किया है। क्या-क्या कर सकता है यह रोबोट? करीब 5 फीट 6 इंच लंबा शाओ गाई अपने लंबे रोबोटिक हाथों की मदद से शेल्फ पर रखे सामान को व्यवस्थित कर सकता है, ग्राहकों के लिए उत्पाद चुन सकता है और चेकआउट काउंटर का काम भी संभाल सकता है। यह रोबोट कई भाषाओं में ग्राहकों से बातचीत करने में सक्षम है और दोस्ताना तरीके से लोगों की सहायता करता है। स्टोर में स्नैक्स, दैनिक जरूरत का सामान और दवाइयों समेत कई उत्पाद उपलब्ध हैं। कंपनी का दावा है कि इस तकनीक की मदद से बिक्री में लगभग 40 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हो सकती है। क्या रोबोट इंसानों की नौकरियां छीन लेंगे? रोबोट आधारित यह मॉडल जितना आकर्षक दिखाई देता है, उतने ही बड़े सवाल भी खड़े करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और रोबोटिक्स के बढ़ते इस्तेमाल से भविष्य में कई पारंपरिक नौकरियां प्रभावित हो सकती हैं। इसी दिशा में जापान एयरलाइंस ने भी टोक्यो के हानेडा एयरपोर्ट पर सामान ढोने और प्रबंधन के लिए रोबोटिक सहायकों का इस्तेमाल शुरू किया है। गैलबॉट कंपनी का लक्ष्य आने वाले समय में 10 शहरों में ऐसे 100 स्टोर्स शुरू करने का है। अभी पूरी तरह परफेक्ट नहीं हैं रोबोट हालांकि, रोबोटिक तकनीक अभी भी विकास के दौर में है। रिपोर्ट्स के अनुसार, पहले कुछ मामलों में रोबोट नियंत्रण से बाहर हो चुके हैं और गलतियां भी कर चुके हैं। एक उदाहरण में, स्टॉकहोम की एक AI-आधारित कॉफी शॉप ने गलत ऑर्डर देकर अपना पूरा बजट समय से पहले खत्म कर दिया था। इसी तरह कुछ रोबोट्स के व्यवहार में तकनीकी गड़बड़ियां भी सामने आ चुकी हैं। यानी फिलहाल रोबोट इंसानों की मदद जरूर कर रहे हैं, लेकिन पूरी तरह इंसानों की जगह लेना अभी दूर की बात मानी जा रही है।
Apple ने Siri को पूरी तरह बदला, AI चैटबॉट्स को देगी टक्कर Apple ने iOS 27 के साथ अपनी वर्चुअल असिस्टेंट Siri को पूरी तरह नया रूप दिया है। अब "Siri AI" पहले से कहीं ज्यादा स्मार्ट, समझदार और उपयोगी हो गई है। कंपनी का दावा है कि नई Siri न सिर्फ सवालों के जवाब देगी, बल्कि आपकी ईमेल, मैसेज, फोटो, फाइल्स और अन्य ऐप्स की जानकारी समझकर व्यक्तिगत सहायता भी प्रदान करेगी। Apple के अनुसार, Siri AI अब ChatGPT और Claude जैसे लोकप्रिय AI चैटबॉट्स को टक्कर देने में सक्षम होगी। आपकी निजी जानकारी को समझेगी Siri नई Siri की सबसे बड़ी खासियत "पर्सनल कॉन्टेक्स्ट अंडरस्टैंडिंग" है। अब Siri आपकी अनुमति के साथ: ईमेल खोज सकेगी मैसेज पढ़कर जानकारी निकाल सकेगी फोटो और वीडियो ढूंढ सकेगी नोट्स और दस्तावेज़ खोज सकेगी कैलेंडर और रिमाइंडर से जानकारी ले सकेगी उदाहरण के लिए आप पूछ सकते हैं: पिछले सप्ताह भाई ने कौन-सी फिल्म देखने को कहा था? मेरी फ्लाइट का कन्फर्मेशन नंबर क्या है? कल मुझे कौन-कौन से काम करने हैं? पिछले महीने मकान मालिक ने जो लीज भेजी थी, उसे ढूंढो। इंटरनेट से भी देगी जवाब Siri अब केवल फोन के डेटा तक सीमित नहीं रहेगी। यह वेब सर्च करके ताजा जानकारी भी उपलब्ध करा सकेगी। इससे उपयोगकर्ता: यात्रा की योजना बना सकेंगे रेसिपी खोज सकेंगे खेल स्कोर जान सकेंगे होमवर्क और रिसर्च में मदद ले सकेंगे DIY और गार्डनिंग टिप्स प्राप्त कर सकेंगे स्क्रीन पर क्या है, यह भी समझेगी Siri नई "ऑन-स्क्रीन अवेयरनेस" सुविधा Siri को स्क्रीन पर मौजूद कंटेंट समझने की क्षमता देती है। अब आप किसी फोटो, चार्ट, डॉक्यूमेंट या वेबसाइट को देखते हुए पूछ सकते हैं: यह फोटो कहां की है? इस दस्तावेज़ का सारांश बताओ। यह ग्राफ क्या दिखा रहा है? इस मेन्यू का अनुवाद करो। Siri स्क्रीन पर दिख रही जानकारी को पढ़कर उसी संदर्भ में जवाब दे सकेगी। ऐप्स में आपके लिए काम भी करेगी नई "App Actions" तकनीक Siri को ऐप्स के भीतर कार्य करने की क्षमता देती है। अब Siri से कहा जा सकता है: इस ईमेल का जवाब लिखो। आज की सभी तस्वीरें किसी दोस्त को भेज दो। मंगलवार शाम 3 बजे की मीटिंग कैलेंडर में जोड़ो। दोपहर 2 बजे की मीटिंग गुरुवार पर शिफ्ट कर दो। यह सुविधा Apple और थर्ड-पार्टी ऐप्स दोनों में काम करेगी। नया इंटरफेस और अलग Siri ऐप iOS 27 में Siri का नया इंटरफेस दिया गया है। Dynamic Island से एक्सेस टाइप और वॉइस दोनों विकल्प फोटो और डॉक्यूमेंट अपलोड करने की सुविधा बातचीत का इतिहास देखने के लिए अलग Siri ऐप पुराने चैट सर्च और पिन करने का विकल्प अब उपयोगकर्ता Siri के साथ लंबी बातचीत भी जारी रख सकेंगे। अब हर जगह कर सकेंगे AI लेखन iOS 27 में "Write with Siri" फीचर भी शामिल किया गया है। इसकी मदद से Siri: ईमेल ड्राफ्ट कर सकती है टेक्स्ट को प्रोफेशनल बना सकती है पैराग्राफ तैयार कर सकती है व्याकरण और स्पेलिंग सुधार सकती है टोन बदल सकती है यह सुविधा लगभग हर उस जगह उपलब्ध होगी जहां उपयोगकर्ता टाइपिंग करते हैं। Apple और Google की साझेदारी से तैयार हुए AI मॉडल Apple ने बताया है कि iOS 27 में इस्तेमाल किए जा रहे नए AI मॉडल उसके अपने Foundation Models हैं, जिन्हें विकसित करने में Google की Gemini तकनीक से भी मदद ली गई है। यह AI सिस्टम Spotlight Index और App Toolbox के साथ मिलकर काम करता है, जिससे Siri को अलग-अलग ऐप्स और डेटा स्रोतों तक पहुंच मिलती है। नई Siri आवाज को भी कर सकेंगे कस्टमाइज iPhone 17 Pro और iPhone Air जैसे नए डिवाइसों पर Siri की आवाज को कस्टमाइज करने का विकल्प मिलेगा। यूजर: बोलने की गति बदल सकेंगे आवाज की अभिव्यक्ति नियंत्रित कर सकेंगे बेहतर डिक्टेशन और वॉइस रिकग्निशन का लाभ उठा सकेंगे प्राइवेसी पर Apple का बड़ा दावा Apple का कहना है कि Siri AI का अधिकांश काम डिवाइस पर ही होगा। जहां क्लाउड प्रोसेसिंग की जरूरत होगी, वहां Private Cloud Compute तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। कंपनी के अनुसार उपयोगकर्ताओं का डेटा Apple या किसी तीसरे पक्ष के लिए उपलब्ध नहीं होगा। किन डिवाइसों में मिलेगी Siri AI? नई Siri AI केवल उन डिवाइसों में उपलब्ध होगी जो Apple Intelligence को सपोर्ट करते हैं। इनमें शामिल हैं: iPhone 15 Pro और उसके बाद के मॉडल iPadOS 27 सपोर्टेड iPad macOS Golden Gate वाले Mac visionOS 27 डिवाइस watchOS 27 समर्थित Apple Watch किन देशों में नहीं मिलेगी सुविधा? Apple ने स्पष्ट किया है कि लॉन्च के समय Siri AI: यूरोपीय संघ (EU) में iPhone और iPad पर उपलब्ध नहीं होगी चीन में उपलब्ध नहीं होगी हालांकि Mac उपयोगकर्ताओं को EU में यह सुविधा मिलेगी। निष्कर्ष iOS 27 के साथ Apple ने Siri को केवल वॉइस असिस्टेंट से आगे बढ़ाकर एक पूर्ण AI सहायक में बदल दिया है। व्यक्तिगत जानकारी समझने, ऐप्स में काम करने, वेब सर्च करने और कंटेंट लिखने जैसी क्षमताओं के साथ Siri अब Apple इकोसिस्टम का सबसे बड़ा AI अपग्रेड मानी जा रही है।
ट्रिलियन डॉलर की संपत्ति के बाद अब क्वाड्रिलियन डॉलर की चर्चा दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति Elon Musk एक बार फिर अपने बड़े और भविष्यवादी विचारों को लेकर सुर्खियों में हैं। दुनिया के पहले ट्रिलियनेयर बनने के बाद अब मस्क ने कहा है कि किसी व्यक्ति का क्वाड्रिलियनेयर बनना भी असंभव नहीं है। हालांकि इसके लिए मानव सभ्यता को पृथ्वी से आगे बढ़कर चंद्रमा और मंगल ग्रह पर औद्योगिक विस्तार करना होगा। मस्क की यह टिप्पणी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है और भविष्य की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था को लेकर नई बहस छेड़ रही है। आखिर कितनी होती है क्वाड्रिलियन डॉलर की संपत्ति? मस्क की मौजूदा अनुमानित संपत्ति 1.1 ट्रिलियन डॉलर बताई जा रही है। लेकिन क्वाड्रिलियन डॉलर की संपत्ति का मतलब है 1,000 ट्रिलियन डॉलर यानी 1,000,000,000,000,000 डॉलर। तुलना करें तो वर्ष 2026 में पूरी दुनिया की कुल अर्थव्यवस्था (Global GDP) लगभग 120 ट्रिलियन डॉलर के आसपास मानी जाती है। ऐसे में एक क्वाड्रिलियनेयर की संपत्ति दुनिया के कुल आर्थिक उत्पादन से कई गुना अधिक होगी। जब सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा गया कि मस्क को इस स्तर तक पहुंचने के लिए अभी करीब 998.9 ट्रिलियन डॉलर और चाहिए, तो उन्होंने जवाब दिया, "Not impossible." चांद और मंगल पर फैक्ट्रियां होंगी तो बनेगा नया आर्थिक युग मस्क ने स्पष्ट किया कि इतनी बड़ी संपत्ति हासिल करने का रास्ता पृथ्वी पर नहीं, बल्कि अंतरिक्ष में है। उन्होंने कहा कि इसके लिए चंद्रमा और मंगल ग्रह पर फैक्ट्रियों की जरूरत होगी। मस्क लंबे समय से मंगल ग्रह पर मानव बस्ती बसाने की वकालत करते रहे हैं। उनकी कंपनी SpaceX का प्रमुख लक्ष्य भी भविष्य में बड़े पैमाने पर इंसानों और सामान को मंगल तक पहुंचाना है। मस्क का मानना है कि यदि मंगल और चंद्रमा पर औद्योगिक उत्पादन शुरू होता है, तो अंतरग्रहीय व्यापार (Interplanetary Commerce) की शुरुआत होगी, जिससे मानव इतिहास की सबसे बड़ी आर्थिक क्रांति देखने को मिल सकती है। भविष्य में डॉलर नहीं, ‘द्रव्यमान और ऊर्जा’ होगी असली मुद्रा! मस्क ने भविष्य को लेकर एक और दिलचस्प दावा किया। उनका कहना है कि जब यह सब संभव होगा, तब शायद डॉलर जैसी पारंपरिक मुद्रा का अस्तित्व ही न रहे। उनके मुताबिक, भविष्य की अर्थव्यवस्था में "Mass and Energy" यानी द्रव्यमान और ऊर्जा सबसे महत्वपूर्ण संसाधन होंगे। उन्होंने संकेत दिया कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और रोबोटिक्स दुनिया को इतना बदल देंगे कि पैसों की मौजूदा अवधारणा अप्रासंगिक हो सकती है। AI और रोबोट बदल देंगे पूरी अर्थव्यवस्था मस्क पहले भी कई बार कह चुके हैं कि आने वाले दशकों में AI और रोबोट अधिकांश वस्तुओं और सेवाओं का उत्पादन करेंगे। इससे उत्पादन लागत बेहद कम हो जाएगी और कई क्षेत्रों में मानव श्रम की आवश्यकता घट सकती है। उनका मानना है कि जब मशीनें लगभग हर काम इंसानों से बेहतर और सस्ते तरीके से करने लगेंगी, तब वेतन, रोजगार और धन जैसी पारंपरिक आर्थिक अवधारणाओं में बड़े बदलाव देखने को मिलेंगे। आखिर एलन मस्क की संपत्ति कहां से आती है? दक्षिण अफ्रीका में जन्मे एलन मस्क की संपत्ति का सबसे बड़ा हिस्सा उनकी अंतरिक्ष कंपनी SpaceX से जुड़ा है। इसके अलावा इलेक्ट्रिक वाहन निर्माता Tesla, न्यूरोटेक कंपनी Neuralink और The Boring Company में उनकी हिस्सेदारी भी उनकी संपत्ति का बड़ा स्रोत है। वर्ष 2022 में उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) का अधिग्रहण भी किया था, जिसने उन्हें वैश्विक स्तर पर और अधिक प्रभावशाली बना दिया। क्या सचमुच संभव है क्वाड्रिलियनेयर बनना? विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा वैश्विक आर्थिक व्यवस्था में किसी व्यक्ति का क्वाड्रिलियन डॉलर की संपत्ति तक पहुंचना बेहद कठिन है। लेकिन यदि अंतरिक्ष उद्योग, AI और स्वचालित उत्पादन भविष्य में मस्क की कल्पना के अनुसार विकसित होते हैं, तो आज असंभव लगने वाले आर्थिक आंकड़े भी वास्तविकता बन सकते हैं।
सुरक्षा चिंताओं के बीच Claude Fable 5 पर रोक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कंपनी Anthropic ने अपने नए और अत्याधुनिक AI मॉडल Claude Fable 5 को अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया है। कंपनी का कहना है कि अमेरिकी अधिकारियों द्वारा उठाई गई राष्ट्रीय सुरक्षा संबंधी चिंताओं के बाद यह कदम उठाना पड़ा। यह फैसला मॉडल के सार्वजनिक लॉन्च के कुछ ही दिनों बाद सामने आया है। Anthropic ने अपनी वेबसाइट पर जारी बयान में कहा कि उसे निर्देश दिया गया है कि विदेशी नागरिकों की Claude Fable 5 और Mythos 5 तक पहुंच तत्काल प्रभाव से रोक दी जाए। कंपनी के अनुसार नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए दोनों सेवाओं को सभी ग्राहकों के लिए अस्थायी रूप से बंद करना पड़ा। क्या है सरकार की चिंता? Anthropic के मुताबिक अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियों ने किसी विशेष खतरे की सार्वजनिक रूप से पहचान नहीं की है। हालांकि कंपनी का कहना है कि सरकार को ऐसी तकनीक की जानकारी मिली है जिसके जरिए Claude Fable 5 की सुरक्षा सीमाओं को बायपास या “जेलब्रेक” किया जा सकता है। जेलब्रेकिंग वह प्रक्रिया है जिसमें किसी सॉफ्टवेयर या सिस्टम पर लगाए गए सुरक्षा प्रतिबंधों को पार कर अतिरिक्त क्षमताओं तक पहुंच हासिल की जाती है। इससे साइबर हमलों या संवेदनशील जानकारी तक अनधिकृत पहुंच का जोखिम बढ़ सकता है। कंपनी का दावा है कि जिन कमजोरियों की ओर ध्यान दिलाया गया है, वे पहले से ज्ञात और अपेक्षाकृत मामूली थीं तथा अन्य सार्वजनिक AI मॉडल भी उन्हें पहचानने में सक्षम हैं। लॉन्च से पहले ही चर्चा में था मॉडल Claude Fable 5 को Anthropic ने अपने अब तक के सबसे शक्तिशाली AI मॉडलों में से एक बताया था। सार्वजनिक रिलीज से पहले अप्रैल में इसे सीमित संस्थाओं के लिए परीक्षण और सुरक्षा मूल्यांकन हेतु उपलब्ध कराया गया था। कंपनी ने उस समय कहा था कि मॉडल की क्षमताएं इतनी उन्नत हैं कि यदि पर्याप्त सुरक्षा उपाय न हों तो इसका दुरुपयोग कंप्यूटर सिस्टम में घुसपैठ या साइबर हमलों के लिए किया जा सकता है। इसी वजह से इसके लॉन्च को लेकर तकनीकी, वित्तीय और सरकारी क्षेत्रों में बहस भी छिड़ गई थी। कुछ आलोचकों ने कंपनी के “बहुत शक्तिशाली” होने वाले दावों को मार्केटिंग रणनीति करार दिया था, जबकि समर्थकों का मानना था कि उन्नत AI मॉडलों के लिए अतिरिक्त सुरक्षा जांच आवश्यक है। ट्रम्प प्रशासन और Anthropic के बीच बढ़ा विवाद Anthropic हाल के महीनों में अमेरिकी प्रशासन के साथ टकराव को लेकर भी चर्चा में रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने कंपनी की सार्वजनिक आलोचना की थी। इसके अलावा अमेरिकी रक्षा विभाग के तत्कालीन प्रमुख Pete Hegseth ने Anthropic को “सप्लाई चेन रिस्क” घोषित किया था। यह एक गंभीर श्रेणी मानी जाती है, जिसके तहत किसी तकनीक या सेवा को सरकारी उपयोग के लिए पर्याप्त रूप से सुरक्षित नहीं माना जाता। अदालत में जारी है कानूनी लड़ाई इस फैसले के खिलाफ Anthropic ने अमेरिकी रक्षा विभाग पर मुकदमा दायर किया है। मामले की सुनवाई के दौरान एक अमेरिकी न्यायाधीश ने आदेश दिया कि विवाद के अंतिम निपटारे तक रक्षा विभाग का प्रतिबंध लागू नहीं किया जा सकता। इसका मतलब है कि अमेरिकी सरकारी एजेंसियां और सेना से जुड़े संगठन फिलहाल Anthropic की सेवाओं का उपयोग जारी रख सकते हैं, जबकि कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। AI उद्योग के लिए बड़ा संकेत Claude Fable 5 पर लगी यह अस्थायी रोक AI उद्योग के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत मानी जा रही है। जैसे-जैसे AI मॉडल अधिक शक्तिशाली होते जा रहे हैं, वैसे-वैसे राष्ट्रीय सुरक्षा, साइबर सुरक्षा और नियामकीय नियंत्रण को लेकर सरकारों की निगरानी भी बढ़ रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में उन्नत AI प्रणालियों के लिए सख्त सुरक्षा मानकों और सरकारी समीक्षा प्रक्रियाओं की मांग और तेज हो सकती है।
अमेरिकी रक्षा विभाग के साथ AI समझौते से बढ़ा विवाद दुनिया की सबसे बड़ी टेक कंपनियों में शामिल Google एक बार फिर अपने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) प्रोजेक्ट्स को लेकर चर्चा में है। इस बार विवाद की वजह कंपनी का अमेरिकी रक्षा विभाग (Pentagon) के साथ किया गया वह समझौता है, जिसके तहत Google की AI तकनीक का उपयोग गोपनीय और रक्षा संबंधी कार्यों में किया जा सकेगा। इसी मुद्दे को लेकर Google के एक वरिष्ठ अधिकारी ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। नौ साल बाद कंपनी छोड़ी Google में Android Platform Security के निदेशक रहे रिने मेयरहोफर (René Mayrhofer) ने कंपनी छोड़ने का फैसला किया है। उन्होंने अपने सहयोगियों को भेजे विदाई पत्र में कहा कि जिस Google को उन्होंने 2017 में जॉइन किया था, वह अब पहले जैसा नहीं रहा। उनके अनुसार कंपनी की नीतियों और मूल्यों में बड़ा बदलाव आया है। मेयरहोफर ने कहा कि उनके लिए इस्तीफा देना आसान नहीं था, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में यह फैसला “अनिवार्य” हो गया था। AI के सैन्य इस्तेमाल का किया विरोध अपने पत्र में मेयरहोफर ने स्पष्ट कहा कि वह व्यक्तिगत रूप से सैन्य अभियानों, विशेषकर आक्रामक युद्ध गतिविधियों, का समर्थन नहीं करते हैं। उन्होंने खुद को शांतिवादी (Pacifist) बताते हुए कहा कि वह ऐसी किसी तकनीक का हिस्सा नहीं बन सकते, जिसका उपयोग लोगों को नुकसान पहुंचाने या युद्ध संचालन में किया जाए। उनका मानना है कि Google द्वारा Pentagon को AI तकनीक उपलब्ध कराना कंपनी के पुराने नैतिक सिद्धांतों के विपरीत है। Google पर नैतिक मूल्यों से भटकने का आरोप इस्तीफा पत्र में उन्होंने Google प्रबंधन पर कई गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि कंपनी ने AI इंफ्रास्ट्रक्चर की बढ़ती ऊर्जा खपत के कारण अपने कार्बन-न्यूट्रल लक्ष्यों को पीछे छोड़ दिया है। इसके अलावा उन्होंने कहा कि कंपनी के शीर्ष स्तर पर बड़े फैसले लिए जा रहे हैं, लेकिन इन पर कर्मचारियों के बीच खुली चर्चा नहीं हो रही। उनके अनुसार कई महत्वपूर्ण बदलावों की जानकारी उन्हें भी आंतरिक माध्यमों से नहीं मिली। कर्मचारियों में पहले भी दिख चुका है विरोध यह पहला मौका नहीं है जब Google के भीतर Pentagon से जुड़े AI प्रोजेक्ट्स का विरोध हुआ हो। इससे पहले भी सैकड़ों कर्मचारियों ने सैन्य उद्देश्यों के लिए AI तकनीक उपलब्ध कराने का विरोध किया था। Google DeepMind के कुछ शोधकर्ताओं ने भी सार्वजनिक रूप से इस फैसले पर असहमति जताई थी। निगरानी और गोपनीयता को लेकर चिंता मेयरहोफर ने अपने पत्र में भविष्य में AI तकनीक के संभावित दुरुपयोग को लेकर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने आशंका जताई कि ऐसी तकनीकों का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर निगरानी (Mass Surveillance) के लिए किया जा सकता है, जिससे नागरिकों की निजता और स्वतंत्रता प्रभावित हो सकती है। उन्होंने कहा कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में उन्हें डर है कि AI आधारित सिस्टम का उपयोग आम लोगों की निगरानी के लिए भी किया जा सकता है। अगस्त तक कंपनी में रहेंगे हालांकि इस्तीफा देने के बाद भी मेयरहोफर अगस्त 2026 के अंत तक नोटिस अवधि पूरी करने के लिए Google से जुड़े रहेंगे। उन्होंने कहा कि वह इस दौरान अपने चल रहे प्रोजेक्ट्स को पूरा करेंगे, लेकिन Pentagon समझौते से जुड़े किसी भी AI कार्य से दूरी बनाए रखेंगे। AI नैतिकता पर फिर छिड़ी बहस Google के इस घटनाक्रम ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग किस सीमा तक और किन उद्देश्यों के लिए किया जाना चाहिए। जैसे-जैसे AI तकनीक अधिक शक्तिशाली होती जा रही है, वैसे-वैसे इसके नैतिक, सामाजिक और सुरक्षा संबंधी पहलुओं पर बहस भी तेज होती जा रही है।
स्पेसएक्स IPO के बाद एलन मस्क की संपत्ति 1.1 ट्रिलियन डॉलर के पार दुनिया के सबसे अमीर उद्योगपति और टेक उद्यमी Elon Musk ने एक नया इतिहास रच दिया है। स्पेसएक्स के बहुचर्चित आईपीओ (IPO) के बाद उनकी कुल संपत्ति लगभग 1.1 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच गई है, जिससे वे दुनिया के पहले ट्रिलियनेयर बनने की ओर बढ़ गए हैं। हालांकि अपनी रिकॉर्ड संपत्ति को लेकर चर्चा के बीच मस्क का एक बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। उन्होंने दावा किया है कि भविष्य में ऐसा समय आ सकता है जब पैसे की मौजूदा अहमियत खत्म हो जाएगी। AI और रोबोट बदल देंगे दुनिया की अर्थव्यवस्था 2026 एबंडेंस समिट के दौरान बातचीत में मस्क ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और उन्नत रोबोटिक्स मानव समाज को एक ऐसे दौर में ले जा सकते हैं, जहां वस्तुओं और सेवाओं का उत्पादन इतना अधिक होगा कि पारंपरिक आर्थिक मॉडल बदल जाएंगे। मस्क के अनुसार, AI आधारित मशीनें इतनी बड़ी मात्रा में काम कर सकेंगी कि इंसानों के लिए पारंपरिक नौकरियों की जरूरत कम हो जाएगी। उन्होंने कहा कि भविष्य में लोगों को केवल न्यूनतम आय नहीं, बल्कि "यूनिवर्सल हाई इनकम" (UHI) जैसी व्यवस्था मिल सकती है। “पैसे की प्रासंगिकता खत्म हो जाएगी” बातचीत के दौरान मस्क ने कहा कि भविष्य में पैसे का महत्व धीरे-धीरे कम हो सकता है। उनका मानना है कि जब AI और रोबोट लगभग हर वस्तु और सेवा को सस्ती और आसानी से उपलब्ध करा देंगे, तब लोगों की जीवनशैली बेहतर होगी और आर्थिक संसाधनों का वितरण अलग तरीके से होगा। मस्क के इस बयान पर मंच पर मौजूद उद्यमी Peter Diamandis ने मजाकिया अंदाज में पूछा कि जैसे ही आप ट्रिलियनेयर बन रहे हैं, उसी समय पैसा कम महत्वपूर्ण हो रहा है? इस पर मस्क ने हंसते हुए जवाब दिया, "हां, लगभग ऐसा ही है।" यूनिवर्सल हाई इनकम क्या है? मस्क ने यूनिवर्सल बेसिक इनकम (UBI) से आगे बढ़कर यूनिवर्सल हाई इनकम (UHI) की अवधारणा पेश की। उनका कहना है कि AI के कारण उत्पादन लागत बेहद कम हो जाएगी और लोगों को केवल बुनियादी जरूरतें पूरी करने के बजाय उच्च जीवन स्तर का लाभ मिल सकेगा। इस मॉडल में स्वास्थ्य सेवाएं, आवास, भोजन और अन्य सुविधाएं पहले की तुलना में अधिक सुलभ और सस्ती हो सकती हैं। भविष्य में सबसे मूल्यवान क्या होगा? मस्क के अनुसार भविष्य की अर्थव्यवस्था में केवल मुद्रा नहीं, बल्कि ऊर्जा और भौतिक संसाधन सबसे महत्वपूर्ण होंगे। उन्होंने कहा कि अत्याधुनिक AI सिस्टम डॉलर या अन्य मुद्राओं की परवाह नहीं करेंगे। उनके लिए असली महत्व बिजली, कंप्यूटिंग क्षमता, फैक्ट्रियों और कच्चे माल जैसे संसाधनों का होगा। सरल शब्दों में कहें तो भविष्य में आर्थिक ताकत का निर्धारण बैंक बैलेंस से ज्यादा ऊर्जा उत्पादन, तकनीकी क्षमता और संसाधनों पर नियंत्रण से हो सकता है। विशेषज्ञों के बीच बहस तेज मस्क के इस दृष्टिकोण को लेकर विशेषज्ञों के बीच बहस शुरू हो गई है। कुछ लोग इसे तकनीकी प्रगति की स्वाभाविक दिशा मानते हैं, जबकि कई अर्थशास्त्रियों का कहना है कि पूरी तरह से "पैसारहित" अर्थव्यवस्था की कल्पना अभी काफी दूर की बात है। फिलहाल इतना तय है कि AI और रोबोटिक्स के बढ़ते प्रभाव ने भविष्य की नौकरियों, आय और वैश्विक अर्थव्यवस्था को लेकर नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है।
नई दिल्ली/सैन फ्रांसिस्को: अमेरिकी रियल एस्टेट टेक्नोलॉजी कंपनी Opendoor ने भारत में अपना परिचालन बंद करने का फैसला किया है। इस निर्णय से कंपनी के लगभग 250 कर्मचारी प्रभावित होंगे। कंपनी का कहना है कि यह कदम उसकी नई कारोबारी रणनीति का हिस्सा है, जिसके तहत परिचालन संबंधी कार्यों को अमेरिकी बाजार के करीब लाया जा रहा है और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित प्रक्रियाओं को बढ़ावा दिया जा रहा है। 'Opendoor 2.0' रणनीति के तहत लिया गया फैसला कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी काज नेजातियान ने कर्मचारियों को भेजे गए संदेश में बताया कि भारत में संचालन बंद करने का निर्णय प्रदर्शन से जुड़ा नहीं है। उन्होंने कहा कि कंपनी अपने परिचालन मॉडल को पुनर्गठित कर रही है, ताकि ग्राहकों को अधिक प्रभावी और तेज सेवाएं प्रदान की जा सकें। नेजातियान के अनुसार, Opendoor 2.0 रणनीति के तहत कई भूमिकाओं को अमेरिका स्थानांतरित किया जा रहा है, जहां ग्राहक आधार मौजूद है। इससे टीमों और ग्राहकों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जा सकेगा। AI के बढ़ते इस्तेमाल से बदला परिचालन मॉडल कंपनी ने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में तकनीकी क्षमताओं में तेजी से वृद्धि हुई है। AI-सक्षम टीमों और स्वचालित प्रणालियों के इस्तेमाल से कई ऐसे कार्य अब कम मानव संसाधन में पूरे किए जा सकते हैं, जिनके लिए पहले बड़ी परिचालन टीमों की आवश्यकता होती थी। Opendoor का कहना है कि मैन्युअल प्रक्रियाओं पर निर्भरता कम करने और परिचालन को अधिक कुशल बनाने के लिए AI तकनीकों को व्यापक रूप से अपनाया जा रहा है। भारतीय कर्मचारियों के योगदान की सराहना सीईओ काज नेजातियान ने भारत में कार्यरत कर्मचारियों के योगदान की प्रशंसा करते हुए कहा कि भारतीय टीम ने कंपनी की वृद्धि और संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि यह निर्णय कर्मचारियों की क्षमता या प्रदर्शन को लेकर नहीं है, बल्कि बदलती व्यावसायिक जरूरतों और परिचालन संरचना का परिणाम है। उन्होंने प्रभावित कर्मचारियों को प्रतिभाशाली पेशेवर बताते हुए उनके भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं। प्रभावित कर्मचारियों को मिलेगा सहायता पैकेज कंपनी ने आश्वासन दिया है कि प्रभावित कर्मचारियों को सेवरेंस पैकेज (Severance Package), करियर ट्रांजिशन सपोर्ट और अन्य आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। इसके अलावा, कुछ कर्मचारियों को महत्वपूर्ण परियोजनाओं और कार्यभार के सुचारू हस्तांतरण तक अस्थायी रूप से कंपनी में बनाए रखा जाएगा। परिचालन में बदलाव, लेकिन रणनीति बरकरार Opendoor ने स्पष्ट किया है कि भारत में परिचालन बंद करने के बावजूद उसकी समग्र कारोबारी रणनीति में कोई बदलाव नहीं हुआ है। कंपनी का फोकस परिचालन को सरल बनाना, तकनीकी प्लेटफॉर्म को मजबूत करना और AI आधारित समाधानों के माध्यम से दक्षता बढ़ाना है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला वैश्विक टेक उद्योग में बढ़ते AI उपयोग और लागत अनुकूलन की उस प्रवृत्ति को दर्शाता है, जिसके तहत कंपनियां पारंपरिक परिचालन मॉडल को तेजी से बदल रही हैं।
रांची। झारखंड सरकार कृषि क्षेत्र को आधुनिक बनाने और किसानों को नई तकनीकों से परिचित कराने के उद्देश्य से रांची के मोरहाबादी मैदान में 16 से 18 जून तक तीन दिवसीय कृषि व्यापार मेला आयोजित करने जा रही है। इस मेले का उद्घाटन मुख्यमंत्री Hemant Soren करेंगे। आयोजन का उद्देश्य किसानों, कृषि वैज्ञानिकों, व्यापारियों और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों को एक साझा मंच प्रदान करना है, जहां वे कृषि क्षेत्र में हो रहे नवीन प्रयोगों और तकनीकी विकास पर विचार-विमर्श कर सकें। देशभर से आएंगे विशेषज्ञ और लगेंगे आधुनिक कृषि स्टॉल कृषि व्यापार मेले में देश के विभिन्न राज्यों से कृषि क्षेत्र से जुड़े संस्थान, कंपनियां और संगठन अपने स्टॉल लगाएंगे। मेले में 50 से अधिक वैज्ञानिक और कृषि विशेषज्ञ विभिन्न विषयों पर व्याख्यान देंगे। किसानों के लिए पंजीकरण पूरी तरह निःशुल्क रखा गया है ताकि अधिक से अधिक किसान इस आयोजन का लाभ उठा सकें। कृषि विभाग के अनुसार मेले में आधुनिक खेती, उन्नत बीज, सिंचाई तकनीक, जैविक कृषि और कृषि व्यवसाय से जुड़ी नई जानकारियां उपलब्ध कराई जाएंगी। किसानों को उत्पादन बढ़ाने और लागत कम करने के उपायों से भी अवगत कराया जाएगा। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और आधुनिक तकनीकों पर रहेगा विशेष फोकस मेले का प्रमुख आकर्षण कृषि क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित तकनीकों का प्रदर्शन होगा। इसके साथ ही कम लागत में अधिक उत्पादन देने वाली आधुनिक कृषि पद्धतियों, मत्स्य पालन, बागवानी और कृषि यंत्रीकरण से जुड़ी तकनीकों को भी प्रदर्शित किया जाएगा। विशेषज्ञ किसानों को इन तकनीकों के व्यावहारिक उपयोग और उनके लाभों की जानकारी देंगे। सांस्कृतिक कार्यक्रमों से भी सजेगा आयोजन कृषि व्यापार मेला केवल तकनीकी और व्यावसायिक गतिविधियों तक सीमित नहीं रहेगा। शाम के समय झारखंड की पारंपरिक लोक संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए नृत्य और गीत-संगीत के कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे। इसके अलावा राज्य के प्रगतिशील किसान और अन्य राज्यों के सफल कृषि विशेषज्ञ अपने अनुभव साझा करेंगे, जिससे किसानों को नई प्रेरणा और सीख मिलेगी। यह मेला कृषि क्षेत्र में नवाचार, ज्ञान और अवसरों का महत्वपूर्ण केंद्र बनने जा रहा है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। देश की सबसे बड़ी आईटी कंपनियों में से एक Tata Consultancy Services (TCS) ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को लेकर बड़ा विजन पेश किया है। कंपनी के चेयरमैन Natarajan Chandrasekaran ने घोषणा की है कि अगले तीन वर्षों में टीसीएस में कार्यरत AI एजेंट्स यानी डिजिटल वर्कर्स की संख्या कंपनी के इंसानी कर्मचारियों के बराबर हो सकती है। टीसीएस की 31वीं वार्षिक आम बैठक में बोलते हुए चंद्रशेखरन ने कहा कि AI तकनीक को लेकर नौकरी जाने की आशंकाएं बढ़ा-चढ़ाकर पेश की जा रही हैं। उनके अनुसार, AI आईटी उद्योग के लिए अब तक का सबसे बड़ा अवसर साबित होने जा रहा है। उन्होंने कहा कि दुनिया की अधिकांश कंपनियां आने वाले वर्षों में तकनीक पर अपना निवेश बढ़ाने की तैयारी कर रही हैं और इसका बड़ा हिस्सा AI पर खर्च होगा। AI कारोबार में तेज़ी से बढ़ रही कमाई टीसीएस के अनुसार, कंपनी की AI आधारित आय हर तिमाही लगभग 22 प्रतिशत की दर से बढ़ रही है। वित्त वर्ष 2025-26 की अंतिम तिमाही तक AI से होने वाली वार्षिक कमाई 2.5 बिलियन डॉलर (करीब 20 हजार करोड़ रुपये) तक पहुंच गई है। पांच रणनीतिक क्षेत्रों पर फोकस कंपनी ने AI आधारित भविष्य की तैयारी के लिए पांच प्रमुख क्षेत्रों को चिन्हित किया है। इनमें पुरानी तकनीकों का आधुनिकीकरण, सप्लाई चेन और ग्राहक सेवाओं में AI का उपयोग, AI एजेंट्स का सुरक्षित संचालन, सरकारों के लिए सॉवरेन AI सिस्टम विकसित करना और फैक्ट्रियों व गोदामों में रोबोटिक्स आधारित फिजिकल AI का इस्तेमाल शामिल है। मजबूत वित्तीय प्रदर्शन टीसीएस का कारोबार भी लगातार मजबूत बना हुआ है। वर्ष 2025-26 में कंपनी की कुल आय 4.6 प्रतिशत बढ़कर 2.67 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई, जबकि शुद्ध मुनाफा 8.8 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 52,820 करोड़ रुपये दर्ज किया गया। इसके अलावा कंपनी को 40.7 बिलियन डॉलर से अधिक के नए ऑर्डर मिले हैं, जो उसके मजबूत भविष्य की ओर संकेत करते हैं।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।