Arvind Kejriwal

AAP leaders address a press conference in Goa as the party explores a possible opposition alliance ahead of the 2027 Assembly elections.
गोवा में AAP-कांग्रेस गठबंधन के संकेत, 2027 चुनाव से पहले भाजपा को घेरने की रणनीति

पणजी: दिल्ली और पंजाब में कांग्रेस पर लगातार हमलावर रहने वाली आम आदमी पार्टी (AAP) अब गोवा में उसी कांग्रेस के साथ चुनावी गठबंधन की संभावनाएं तलाश रही है। 2027 के गोवा विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी ने संकेत दिए हैं कि भाजपा को सत्ता से बाहर करने के लिए विपक्षी एकजुटता जरूरी है। गठबंधन पर अंतिम फैसला गोवा इकाई ही करेगी। केजरीवाल ने राज्य नेतृत्व को दी जिम्मेदारी गोवा दौरे पर पहुंचे AAP के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने गठबंधन के सवाल पर कहा कि इस संबंध में राज्य नेतृत्व निर्णय लेगा। उन्होंने कहा कि प्रदेश अध्यक्ष वाल्मिकी नाइक और उनकी टीम जो फैसला करेगी, पार्टी उसका पूरा समर्थन करेगी। केजरीवाल ने कहा कि गठबंधन से जुड़े सभी सवालों का जवाब गोवा इकाई ही देगी, क्योंकि स्थानीय राजनीतिक परिस्थितियों को वही बेहतर तरीके से समझती है। गठबंधन वार्ता के लिए बनी तीन सदस्यीय समिति AAP ने संभावित चुनावी गठबंधन पर बातचीत के लिए तीन सदस्यीय समिति का गठन किया है। इसमें प्रदेश अध्यक्ष वाल्मिकी नाइक, कार्यकारी अध्यक्ष गर्सन गोम्स और संगठन सचिव प्रशांत नाइक शामिल हैं। यह समिति कांग्रेस समेत अन्य विपक्षी दलों के साथ प्री-पोल गठबंधन की संभावनाओं पर चर्चा करेगी। पार्टी का कहना है कि उसकी लड़ाई किसी एक दल से नहीं, बल्कि भाजपा की नीतियों और विचारधारा के खिलाफ है। AAP ने विपक्षी दलों से व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं से ऊपर उठकर एकजुट होने की अपील भी की है। कांग्रेस ने भी छोड़े बातचीत के दरवाजे खुले गोवा प्रदेश कांग्रेस ने भी गठबंधन की संभावना से इनकार नहीं किया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गिरीश चोडणकर ने कहा कि भाजपा को चुनौती देने के लिए विपक्षी वोटों का बिखराव रोकना जरूरी है और इस दिशा में बातचीत की जा सकती है। बदलते राजनीतिक समीकरणों पर नजर दिल्ली, पंजाब और गुजरात में कांग्रेस के खिलाफ आक्रामक राजनीति करने वाली AAP का गोवा में बदला हुआ रुख राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है। माना जा रहा है कि यदि कांग्रेस और AAP के बीच चुनावी समझौता होता है, तो 2027 के गोवा विधानसभा चुनाव में विपक्ष भाजपा के सामने अधिक मजबूत चुनौती पेश कर सकता है।  

Deepshikha जुलाई 4, 2026 0
Arvind Kejriwal questions the legal authority of the SIT probing alleged irregularities in Ayodhya Ram Temple donation funds.
राम मंदिर चंदा मामला: SIT पर केजरीवाल के सवाल, बोले- ‘चोरों को बचाने के लिए बनाई गई जांच समिति’

  नई दिल्ली: अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए प्राप्त चंदे में कथित अनियमितताओं की जांच के लिए गठित विशेष जांच दल (SIT) को लेकर आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री Arvind Kejriwal ने गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि SIT के पास कोई वास्तविक कानूनी अधिकार नहीं है और इसका गठन कथित रूप से मामले में शामिल लोगों को बचाने के उद्देश्य से किया गया है। केजरीवाल की यह प्रतिक्रिया उस समय आई है जब SIT ने अपनी प्रारंभिक जांच रिपोर्ट उत्तर प्रदेश सरकार को सौंप दी है। ‘SIT के पास न समन का अधिकार, न गिरफ्तारी का’ मीडिया से बातचीत के दौरान केजरीवाल ने कहा कि यदि मामले में अब तक कोई प्राथमिकी (FIR) दर्ज नहीं हुई है, तो यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि SIT का गठन किस कानूनी प्रावधान के तहत किया गया है। उन्होंने कहा, “SIT किसी को समन नहीं भेज सकती, किसी की गिरफ्तारी नहीं कर सकती और न ही छापेमारी कर सकती है। ऐसे में यह जांच समिति आखिर किस अधिकार के तहत काम कर रही है?” AAP प्रमुख ने आरोप लगाया कि जांच का इस्तेमाल वास्तविक मुद्दे से ध्यान हटाने और कथित दोषियों के खिलाफ कार्रवाई को टालने के लिए किया जा रहा है। 2021 की जांच का दिया हवाला केजरीवाल ने वर्ष 2021 में अयोध्या भूमि खरीद मामले को याद करते हुए कहा कि उस समय भी इसी तरह की जांच समिति बनाई गई थी, लेकिन उसका कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आया। उन्होंने कहा, “तब भी SIT बनाई गई थी, लेकिन न कोई FIR दर्ज हुई और न ही किसी जिम्मेदार व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई हुई। आज उस जांच का कोई उल्लेख तक नहीं करता। मुझे आशंका है कि वर्तमान SIT का भी वही हश्र होगा।” ‘छोटे अधिकारियों पर फोकस, बड़े नामों को बचाया जा रहा’ AAP नेता ने दावा किया कि मौजूदा जांच का फोकस निचले स्तर के अधिकारियों तक सीमित दिखाई देता है, जबकि निर्णय लेने वाले प्रभावशाली लोगों तक जांच पहुंचती नजर नहीं आ रही। उन्होंने कहा कि यदि सरकार वास्तव में सच सामने लाना चाहती है, तो जांच को उन लोगों तक पहुंचना चाहिए जिन्होंने कथित तौर पर बड़े फैसले लिए और पूरे मामले को प्रभावित किया। CBI और ED जांच की मांग केजरीवाल ने यह भी सवाल उठाया कि यदि सरकार निष्पक्ष जांच चाहती है, तो मामला केंद्रीय एजेंसियों को क्यों नहीं सौंपा गया। उन्होंने कहा, “अगर सच्चाई सामने लाने की मंशा है, तो जांच Central Bureau of Investigation (CBI) या Enforcement Directorate (ED) जैसी एजेंसियों को सौंपी जानी चाहिए। अब तक FIR दर्ज न होना भी कई सवाल खड़े करता है।” श्रद्धालुओं के सवालों का जवाब जरूरी केजरीवाल ने कहा कि राम मंदिर से करोड़ों लोगों की आस्था जुड़ी हुई है और ऐसे में चंदे से जुड़े आरोपों की पारदर्शी जांच होना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म के अनुयायी और मंदिर निर्माण में योगदान देने वाले श्रद्धालु यह जानना चाहते हैं कि उनके द्वारा दिए गए धन का उपयोग किस प्रकार किया गया और आरोपों की सच्चाई क्या है। क्या है मामला? राम मंदिर निर्माण के लिए जुटाए गए चंदे और उससे जुड़े वित्तीय लेन-देन को लेकर हाल के दिनों में कई सवाल उठे हैं। इन्हीं आरोपों की जांच के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने SIT का गठन किया है। हालांकि, जांच अभी शुरुआती चरण में है और सरकार की ओर से इस संबंध में विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है। फिलहाल, SIT की वैधता और जांच की दिशा को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है, जबकि विपक्ष पारदर्शी और स्वतंत्र जांच की मांग कर रहा है।  

Deepshikha जून 25, 2026 0
Arvind Kejriwal addresses media while raising allegations over Ayodhya Ram Temple donation and financial management irregularities.
राम मंदिर दान विवाद पर अरविंद केजरीवाल का बड़ा दावा, बोले- निष्पक्ष जांच हुई तो योगी सरकार गिर जाएगी

  नई दिल्ली/अयोध्या: अयोध्या राम मंदिर में दान और वित्तीय प्रबंधन में कथित अनियमितताओं को लेकर सियासत तेज हो गई है। आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने इस मामले में उत्तर प्रदेश की योगी सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया है कि यदि निष्पक्ष और ईमानदार जांच हुई, तो राज्य सरकार तक संकट में पड़ सकती है। 'राम मंदिर से करोड़ों रुपये का चंदा गायब' अरविंद केजरीवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी एक वीडियो संदेश में कहा कि अयोध्या के राम मंदिर से करोड़ों रुपये का चंदा, कीमती गहने और हीरे-जवाहरात कथित रूप से गायब हो गए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि करीब 200 करोड़ रुपये नकद, हीरे और आभूषणों से भरे कई बक्सों के गायब होने की खबरें सामने आई हैं, लेकिन अब तक इस मामले में कोई प्राथमिकी (FIR) दर्ज नहीं की गई है। केजरीवाल ने कहा, "न तो उत्तर प्रदेश पुलिस ने एफआईआर दर्ज की, न प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कोई कार्रवाई की और न ही सीबीआई ने जांच शुरू की।" एसआईटी कर रही है मामले की जांच राम मंदिर दान और वित्तीय प्रबंधन में कथित अनियमितताओं की जांच के लिए गठित विशेष जांच दल (SIT) मामले की पड़ताल कर रहा है। जांच एजेंसी ने मंदिर ट्रस्ट के पदाधिकारियों और संबंधित लोगों को जांच पूरी होने तक अयोध्या नहीं छोड़ने के निर्देश दिए हैं। सूत्रों के अनुसार, एसआईटी रोजाना पूछताछ और जांच से जुड़ी रिपोर्ट डिजिटल रूप से सुरक्षित कर रही है और उसकी दैनिक रिपोर्ट मुख्यमंत्री कार्यालय को भेजी जा रही है। आभूषण और कीमती पत्थरों के रिकॉर्ड में गड़बड़ी के आरोप प्रारंभिक जांच में भगवान राम को चढ़ाए गए सोने-चांदी के आभूषणों, हीरे और अन्य कीमती पत्थरों के रिकॉर्ड में कथित गड़बड़ियां सामने आने की बात कही जा रही है। सूत्रों का दावा है कि ट्रस्ट पदाधिकारी आभूषणों और बहुमूल्य वस्तुओं के रिकॉर्ड को लेकर एसआईटी को संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए हैं। कुंभ मेले के दौरान सबसे अधिक दान, जांच के दायरे में कई पहलू जानकारी के मुताबिक, कथित अनियमितताओं का सबसे बड़ा हिस्सा कुंभ मेले के दौरान सामने आया, जब प्रतिदिन करीब 10 लाख श्रद्धालु मंदिर पहुंच रहे थे और दान पेटियां कुछ ही घंटों में भर जा रही थीं। एसआईटी की जांच केवल दान राशि के कथित दुरुपयोग तक सीमित नहीं है। जांच के दायरे में मंदिर ट्रस्ट द्वारा अलग-अलग चरणों में की गई जमीन की खरीद और निर्माण सामग्री की खरीद भी शामिल है। सूत्रों के अनुसार, लगभग 71 एकड़ भूमि बाजार मूल्य से 500 से 800 प्रतिशत अधिक कीमत पर खरीदे जाने के आरोपों की भी जांच की जा रही है। राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज राम मंदिर दान विवाद को लेकर विपक्ष ने योगी सरकार और मंदिर ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं, जबकि सरकार की ओर से अभी तक केजरीवाल के आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। जांच जारी है और एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट आने के बाद ही कथित वित्तीय अनियमितताओं और आरोपों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।  

Deepshikha जून 22, 2026 0
Shekhar Suman
'लू में औंधा हो गया कॉकरोच का मुखिया', शेखर सुमन के व्यंग्य ने बटोरी सुर्खियां

मुंबई, एजेंसियां। अभिनेता और टीवी होस्ट शेखर सुमन ने अपने यूट्यूब शो 'शेखर टुनाइट' के नए एपिसोड में अपने चिर-परिचित व्यंग्यात्मक अंदाज में राजनीति और समसामयिक घटनाओं पर तीखे तंज कसे। इस दौरान उन्होंने कथित 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP), उसके प्रमुख अभिजीत दीपके, आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार पर भी व्यंग्य किया। शो के कई वीडियो क्लिप सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं।   शेखर सुमन ने शेखर सुमन ने मजाकिया अंदाज में कहा कि कॉकरोच जनता पार्टी ने लोगों के बीच उम्मीदें तो जगा दी हैं, लेकिन अब उन्हें जंतर-मंतर से "छूमंतर" नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि जंतर-मंतर का "पलटने" का पुराना इतिहास रहा है और इसी संदर्भ में अरविंद केजरीवाल का नाम लेते हुए दावा किया कि उन्होंने राजनीति में नहीं आने, सरकारी मकान और सरकारी गाड़ी नहीं लेने जैसी बातें कही थीं, लेकिन बाद में अपने फैसले बदल दिए।   अपने व्यंग्य को आगे बढ़ाते हुए शेखर ने कहा कि असली कॉकरोच अगर एक बार पलट जाए तो अपने आप सीधा नहीं हो पाता। उन्होंने इसे लोकतंत्र से जोड़ते हुए कहा कि लोकतंत्र में जनता की आवाज हमेशा जीवित रहनी चाहिए, अन्यथा हालात ऐसे हो सकते हैं कि "झाड़ू भी कुछ नहीं कर पाएगा।"   शो में उन्होंने कथित तौर पर यह भी कहा कि दिल्ली की भीषण गर्मी के कारण कॉकरोच जनता पार्टी के प्रमुख अभिजीत दीपके बेहोश हो गए। इस टिप्पणी के बहाने उन्होंने केंद्र सरकार पर भी कटाक्ष करते हुए कहा कि "अमेरिका से आए कॉकरोच दिल्ली की गर्मी नहीं झेल पा रहे हैं, और दिल्ली भी अमेरिका की गर्मी नहीं झेल पा रही है।"   शेखर सुमन के इन राजनीतिक व्यंग्यों को लेकर सोशल मीडिया पर लोगों की मिली-जुली प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कई यूजर्स उनके बेबाक अंदाज की सराहना कर रहे हैं, जबकि कुछ इसे राजनीतिक कटाक्ष के रूप में देख रहे हैं।

abhishek singh जून 16, 2026 0
Arvind Kejriwal reacts to ED raids in Punjab amid GST scam investigation involving businesses.
पंजाब में ED की बड़ी कार्रवाई, कई ठिकानों पर छापेमारी; केजरीवाल बोले- व्यापारियों को घबराने की जरूरत नहीं

  चंडीगढ़: पंजाब में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की छापेमारी को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने मंगलवार को दावा किया कि केंद्रीय एजेंसी राज्य में व्यापारियों को निशाना बना रही है। उन्होंने छोटे व्यापारियों से घबराने की बजाय एकजुट रहने की अपील करते हुए भरोसा दिलाया कि पंजाब सरकार उनके साथ खड़ी है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर किए गए अपने पोस्ट में केजरीवाल ने कहा कि ईडी की कार्रवाई से व्यापारियों को डरने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि पूरा पंजाब और राज्य सरकार इस मुश्किल समय में उनके साथ है और सभी मिलकर इस स्थिति का सामना करेंगे। GST घोटाले की जांच में ED का एक्शन इस बीच, प्रवर्तन निदेशालय ने पंजाब के मंत्री संजीव अरोड़ा से जुड़े कथित 100 करोड़ रुपये के जीएसटी घोटाले की जांच के सिलसिले में पंजाब और उत्तर प्रदेश में कई स्थानों पर छापेमारी की है। अधिकारियों के अनुसार, यह कार्रवाई मोबाइल फोन की बिक्री से जुड़े कथित जीएसटी फर्जीवाड़े की जांच का हिस्सा है। सूत्रों के मुताबिक, एजेंसी इस मामले में मनी लॉन्ड्रिंग के पहलू की भी जांच कर रही है और कई व्यक्तियों तथा कारोबारी संस्थाओं को जांच के दायरे में लिया गया है। मोबाइल फोन कारोबार से जुड़ा है मामला प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि कथित घोटाला मोबाइल फोन के व्यापार और उससे संबंधित कर लेनदेन से जुड़ा हुआ है। आरोप है कि फर्जी बिलिंग और अन्य वित्तीय अनियमितताओं के जरिए बड़े पैमाने पर जीएसटी की चोरी की गई, जिससे सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचा। ईडी अब वित्तीय लेनदेन, बैंक खातों और संबंधित दस्तावेजों की जांच कर रही है ताकि कथित तौर पर अवैध रूप से अर्जित धन के प्रवाह का पता लगाया जा सके। राजनीतिक बयानबाजी भी तेज ईडी की कार्रवाई के बीच पंजाब की राजनीति में भी आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। आम आदमी पार्टी इसे व्यापारियों और विपक्षी नेताओं को दबाव में लाने की कोशिश बता रही है, जबकि जांच एजेंसियों का कहना है कि कार्रवाई पूरी तरह उपलब्ध सबूतों और जांच के आधार पर की जा रही है। ईडी की ओर से अभी तक छापेमारी को लेकर कोई विस्तृत आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। जांच पूरी होने के बाद एजेंसी आगे की कार्रवाई पर फैसला ले सकती है। जांच के नतीजों पर टिकी निगाहें पंजाब और उत्तर प्रदेश में हुई इस कार्रवाई को राज्य की हालिया बड़ी आर्थिक जांचों में से एक माना जा रहा है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जांच में क्या नए तथ्य सामने आते हैं और क्या एजेंसी इस मामले में किसी बड़े खुलासे तक पहुंच पाती है।  

Deepshikha जून 9, 2026 0
AAP supporters celebrating Punjab municipal election victory as party secures majority of wards
पंजाब निकाय चुनाव में AAP की बड़ी जीत, बीजेपी पांचवें स्थान पर; कांग्रेस रही दूसरे नंबर पर

पंजाब नगर निकाय चुनाव में आम आदमी पार्टी (AAP) ने शानदार प्रदर्शन करते हुए स्पष्ट बढ़त हासिल की है। चुनाव नतीजों में AAP ने 900 से अधिक वार्डों में जीत दर्ज कर राज्य की राजनीति में अपनी मजबूत पकड़ का संदेश दिया है। वहीं कांग्रेस दूसरे स्थान पर रही, जबकि भारतीय जनता पार्टी (BJP) का प्रदर्शन उम्मीदों से काफी कमजोर रहा। इन चुनावों को राज्य में सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी के लिए महत्वपूर्ण राजनीतिक परीक्षा माना जा रहा था। नतीजों ने संकेत दिया है कि शहरी क्षेत्रों में भी पार्टी का प्रभाव बरकरार है। AAP ने जीते सबसे ज्यादा वार्ड रात 11 बजे तक उपलब्ध नतीजों के अनुसार, कुल 1,977 वार्डों में हुए चुनाव में आम आदमी पार्टी ने 957 सीटों पर जीत दर्ज की। कांग्रेस 397 सीटों के साथ दूसरे स्थान पर रही। वहीं निर्दलीय उम्मीदवारों ने भी अच्छा प्रदर्शन करते हुए 251 वार्ड जीते। शिरोमणि अकाली दल (SAD) को 191 सीटें मिलीं, जबकि बीजेपी केवल 167 सीटों पर जीत दर्ज कर सकी।   प्रमुख दलों का प्रदर्शन पार्टी जीती सीटें (वार्ड) आम आदमी पार्टी (AAP) 957 कांग्रेस (INC) 397 निर्दलीय (IND) 251 शिरोमणि अकाली दल (SAD) 191 भारतीय जनता पार्टी (BJP) 167 बहुजन समाज पार्टी (BSP) 7 बीजेपी के लिए क्यों महत्वपूर्ण हैं ये नतीजे? नगर निकाय चुनावों में बीजेपी का पांचवें स्थान पर रहना पार्टी के लिए चिंता का विषय माना जा रहा है। पार्टी न केवल कांग्रेस और AAP से पीछे रही, बल्कि निर्दलीय उम्मीदवारों और शिरोमणि अकाली दल से भी कम सीटें हासिल कर सकी। विश्लेषकों का मानना है कि पंजाब में संगठन विस्तार और जनाधार बढ़ाने के लिए बीजेपी को नई रणनीति पर काम करना पड़ सकता है। खासकर ऐसे समय में जब पार्टी राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत स्थिति में है, लेकिन राज्य में अपेक्षित समर्थन हासिल नहीं कर पा रही है। जीत के बाद AAP में जश्न का माहौल नतीजों के बाद पंजाब भर में आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने जीत का जश्न मनाया। पार्टी कार्यालयों में ढोल-नगाड़ों के साथ खुशी मनाई गई और समर्थकों के बीच मिठाइयां बांटी गईं। पार्टी नेताओं ने इसे राज्य सरकार के कामकाज और विकास नीतियों पर जनता की मुहर बताया। अरविंद केजरीवाल ने बीजेपी पर साधा निशाना जीत के बाद आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने पंजाब की जनता का आभार जताया। उन्होंने बीजेपी पर हमला बोलते हुए कहा कि जनता ने उन ताकतों को जवाब दिया है जो लगातार लोगों और छोटे कारोबारियों को परेशान करने का काम कर रही थीं। केजरीवाल ने बीजेपी को "ईडी पार्टी" बताते हुए कहा कि मतदाताओं ने नकारात्मक राजनीति को खारिज कर दिया है। भगवंत मान बोले- जनता ने विकास की राजनीति को चुना भगवंत मान ने चुनाव परिणामों का स्वागत करते हुए कहा कि जनता ने विकास, काम और जनहित की राजनीति पर भरोसा जताया है। उन्होंने कहा कि चुनाव नतीजे यह दिखाते हैं कि लोग नफरत और टकराव की राजनीति के बजाय विकास और सुशासन को प्राथमिकता दे रहे हैं। पंजाब की राजनीति के लिए क्या संकेत? नगर निकाय चुनावों के नतीजे यह संकेत देते हैं कि पंजाब में आम आदमी पार्टी अभी भी मजबूत स्थिति में है। कांग्रेस ने दूसरे स्थान पर रहकर अपनी मौजूदगी दर्ज कराई है, लेकिन सत्तारूढ़ दल से उसका अंतर काफी बड़ा है। वहीं बीजेपी और शिरोमणि अकाली दल के सामने आने वाले समय में अपने जनाधार को मजबूत करने की चुनौती बनी रहेगी। इन नतीजों को भविष्य के विधानसभा और लोकसभा चुनावों की दिशा तय करने वाले संकेतों के रूप में भी देखा जा रहा है।  

surbhi मई 30, 2026 0
Arvind Kejriwal addressing NEET students amid paper leak controversy and exam stress concerns
NEET Paper Leak Case: छात्रों की परेशानी सुन भावुक हुए अरविंद केजरीवाल, कहा- ‘डॉक्टर बनकर ही रहना’

NEET परीक्षा और पेपर लीक विवाद को लेकर देशभर में छात्रों और अभिभावकों के बीच चिंता का माहौल बना हुआ है। इसी बीच Arvind Kejriwal ने NEET छात्रों के समर्थन में भावुक संदेश जारी किया है। उन्होंने कहा कि NEET की तैयारी कर रहे छात्र केवल परीक्षार्थी नहीं, बल्कि उनके अपने बच्चों जैसे हैं और वह उनके भविष्य के लिए उसी तरह संघर्ष कर रहे हैं जैसे कोई पिता अपने बच्चों के लिए करता है। केजरीवाल ने कहा कि उन्हें बड़ी संख्या में छात्रों के संदेश मिले हैं, जिनमें उन्होंने अपनी परेशानियां, मानसिक तनाव और भविष्य को लेकर चिंता जाहिर की है। उन्होंने कहा कि इन संदेशों ने उन्हें गहराई से प्रभावित किया। “आपका सपना टूटने नहीं देंगे” अरविंद केजरीवाल ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि देश के लाखों छात्र कड़ी मेहनत करके डॉक्टर बनने का सपना देखते हैं और किसी भी परिस्थिति में उनका यह सपना टूटना नहीं चाहिए। उन्होंने छात्रों से हिम्मत बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि मुश्किल हालात जीवन का हिस्सा हैं, लेकिन मेहनत, धैर्य और आत्मविश्वास से हर चुनौती को पार किया जा सकता है। उन्होंने कहा, “प्रिय NEET छात्रों, आपके इतने सारे संदेशों और आपकी भावनाओं की गहराई ने मुझे बहुत प्रभावित किया है। आपने मुझ पर भरोसा किया। हिम्मत बनाए रखें। एक संकल्प लें कि डॉक्टर बनकर ही रहेंगे। ईश्वर आप सभी का भला करे।” छात्रों के भविष्य को लेकर जताई चिंता केजरीवाल ने कहा कि आज के छात्र ही कल देश की स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत बनाएंगे। देश को ईमानदार, मेहनती और संवेदनशील डॉक्टरों की जरूरत है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि छात्रों और उनके परिवारों के भविष्य की रक्षा के लिए जो भी लड़ाई जरूरी होगी, उसमें वे उनके साथ खड़े रहेंगे। सोशल मीडिया पर वायरल हुआ संदेश अरविंद केजरीवाल का यह भावुक संदेश सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। बड़ी संख्या में छात्रों और अभिभावकों ने उनके बयान को प्रेरणादायक बताते हुए समर्थन दिया है। गौरतलब है कि NEET परीक्षा में कथित पेपर लीक और परीक्षा प्रक्रिया को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। कई छात्र संगठन और अभिभावक परीक्षा में पारदर्शिता और निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।  

surbhi मई 20, 2026 0
ED officials conduct action against AAP leader Deepak Singla in alleged bank fraud and money laundering case.
AAP नेता दीपक सिंगला गिरफ्तार, केजरीवाल और आतिशी ने बताया राजनीतिक साजिश

नई दिल्ली: Enforcement Directorate (ED) ने सोमवार को आम आदमी पार्टी (AAP) के नेता Deepak Singla को कथित बैंक धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार कर लिया। सिंगला पर ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स से जुड़े करीब 150 करोड़ रुपये के ऋण घोटाले में शामिल होने का आरोप है। ईडी की यह कार्रवाई दिल्ली और गोवा में कई स्थानों पर की गई छापेमारी के बाद हुई। जांच एजेंसी के मुताबिक, सिंगला और कुछ हवाला ऑपरेटरों के ठिकानों से महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद किए गए हैं। क्या हैं आरोप? ईडी के अनुसार, दीपक सिंगला और उनके परिवार पर 150 करोड़ रुपये से अधिक के बैंक ऋण में कथित धोखाधड़ी का आरोप है। एजेंसी का दावा है कि इस धनराशि को सिंगापुर स्थित कथित फर्जी कंपनियों में ट्रांसफर किया गया और बाद में हवाला नेटवर्क के जरिए भारत वापस लाया गया। जांच एजेंसी का कहना है कि सिंगला कथित रूप से दिल्ली से गोवा तक अवैध बैंकिंग चैनलों के माध्यम से धन के संचालन में शामिल थे। पहले भी हो चुकी है कार्रवाई ईडी की ओर से पिछले दो वर्षों में दीपक सिंगला के खिलाफ यह दूसरी बड़ी कार्रवाई है। इससे पहले वर्ष 2024 में भी उनके ठिकानों पर छापेमारी की गई थी। सिंगला दिल्ली की विश्वास नगर विधानसभा सीट से AAP के टिकट पर चुनाव लड़ चुके हैं। केजरीवाल ने बताया राजनीतिक बदले की कार्रवाई Arvind Kejriwal ने ईडी की कार्रवाई की आलोचना करते हुए इसे राजनीतिक साजिश बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल विपक्षी नेताओं को निशाना बनाने के लिए कर रही है। केजरीवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि दीपक सिंगला को किसी अपराध के कारण नहीं, बल्कि भाजपा के खिलाफ सक्रिय राजनीति करने और भाजपा में शामिल होने से इनकार करने की वजह से गिरफ्तार किया गया है। आतिशी ने लगाए गंभीर आरोप गोवा में पार्टी प्रभारी और दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री Atishi ने भी केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी नेताओं पर झूठे मामले दर्ज कराकर चुनाव से पहले राजनीतिक दबाव बनाया जा रहा है। आतिशी ने कहा कि AAP नेताओं और कार्यकर्ताओं के यहां छापेमारी कर चुनावी डेटा हासिल करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने यह भी दावा किया कि इसी तरह की कार्रवाई पहले पश्चिम बंगाल में All India Trinamool Congress के नेताओं के खिलाफ भी की गई थी। AAP ने कार्रवाई को बताया “राजनीतिक हथियार” आम आदमी पार्टी ने बयान जारी कर कहा कि पश्चिम बंगाल और पंजाब में हुई केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाई की तरह ही दीपक सिंगला का मामला भी राजनीतिक प्रेरित है। पार्टी का आरोप है कि भाजपा में शामिल होने से इनकार करने वाले विपक्षी नेताओं के खिलाफ जांच एजेंसियों का इस्तेमाल किया जा रहा है। फिलहाल मामले की जांच जारी है और ईडी कथित मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क और हवाला लेनदेन की आगे जांच कर रही है।  

surbhi मई 19, 2026 0
Delhi CM Rekha Gupta attacks Arvind Kejriwal after AAP Rajya Sabha MPs join BJP
AAP में बड़ी टूट: रेखा गुप्ता का केजरीवाल पर हमला, बोलीं- 'यह आपकी तानाशाही पर सीधा प्रहार'

राज्यसभा सांसदों के BJP में शामिल होने पर दिल्ली CM ने साधा निशाना आम आदमी पार्टी (AAP) को शुक्रवार को बड़ा राजनीतिक झटका लगा, जब उसके कई राज्यसभा सांसदों ने पार्टी छोड़कर भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दामन थाम लिया। इस घटनाक्रम के बाद दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने AAP संयोजक अरविंद केजरीवाल पर तीखा हमला बोला। "आपकी तानाशाही पर सीधा प्रहार" रेखा गुप्ता ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए कहा कि AAP, जिसने कभी क्रांति का नारा दिया था, अब अविश्वास और अलगाव के कारण बिखर रही है। उन्होंने लिखा, "आपकी पार्टी में अब आम आदमी नहीं, सिर्फ भ्रष्ट लोग बचे हैं। राज्यसभा के दो-तिहाई सांसदों का जाना आपकी तानाशाही पर सीधा प्रहार है। दिल्ली के बाद अब पंजाब की बारी है।" राघव चड्ढा समेत कई नेताओं ने थामा BJP का हाथ AAP के लिए यह झटका इसलिए भी बड़ा माना जा रहा है क्योंकि राघव चड्ढा, संदीप पाठक और अशोक मित्तल जैसे बड़े नेताओं ने भाजपा जॉइन कर ली। इन नेताओं ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पार्टी से अलग होने का ऐलान किया। बाद में भाजपा मुख्यालय में पार्टी अध्यक्ष नितिन नवीन ने उनका स्वागत किया। AAP में मचा सियासी भूचाल इन नेताओं के जाने से AAP के भीतर हलचल तेज हो गई है। पार्टी के लिए यह सिर्फ संख्या का नुकसान नहीं, बल्कि संगठनात्मक और राजनीतिक दोनों स्तरों पर बड़ा झटका माना जा रहा है। विशेषकर राघव चड्ढा और संदीप पाठक जैसे नेताओं की विदाई ने पार्टी नेतृत्व की चिंता बढ़ा दी है। BJP ने बताया स्वाभाविक फैसला दिल्ली भाजपा अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने इस घटनाक्रम को स्वाभाविक करार दिया। उन्होंने कहा कि AAP में लंबे समय से असंतोष पनप रहा था, जिसका नतीजा अब सामने आया है। पंजाब की राजनीति पर भी पड़ेगा असर विश्लेषकों का मानना है कि इस टूट का असर पंजाब की राजनीति पर भी देखने को मिल सकता है, जहां AAP की सरकार है। विपक्ष इसे बड़ा मुद्दा बनाने की तैयारी में है।  

surbhi अप्रैल 25, 2026 0
AAP faces major setback as seven Rajya Sabha MPs quit, leaving only three members
AAP में बड़ी टूट: 7 राज्यसभा सांसदों के जाने के बाद सिर्फ 3 बचे, पार्टी संकट में

नई दिल्ली में AAP को बड़ा झटका, राज्यसभा में संख्या घटकर रह गई सिर्फ 3 आम आदमी पार्टी (AAP) को राज्यसभा में बड़ा राजनीतिक नुकसान हुआ है। पार्टी के 10 में से 7 सांसदों ने संगठन से नाता तोड़ लिया है। इस बड़े घटनाक्रम के बाद पार्टी के पास अब सिर्फ 3 राज्यसभा सांसद बचे हैं। कौन-कौन से सांसद पार्टी में रह गए? बड़े पैमाने पर हुए इस बदलाव के बाद जो तीन सांसद AAP के साथ बने हुए हैं, वे हैं: Balbir Singh Seechewal Sanjay Singh ND Gupta इन नेताओं के साथ पार्टी अब उच्च सदन में बेहद कमजोर स्थिति में पहुंच गई है। 7 सांसदों ने छोड़ा AAP का साथ सूत्रों के मुताबिक, सात सांसदों ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) के साथ जाने का फैसला किया है। यह फैसला AAP के लिए एक बड़े झटके के रूप में देखा जा रहा है। इनमें कई वरिष्ठ नाम शामिल हैं, जिससे पार्टी के भीतर राजनीतिक हलचल और तेज हो गई है। राघव चड्ढा का दावा: दो-तिहाई समर्थन मिला इस पूरे घटनाक्रम के बीच Raghav Chadha ने दावा किया कि उनके पास AAP के राज्यसभा सांसदों के दो-तिहाई से अधिक समर्थन है, जो कानून के अनुसार किसी भी पार्टी में विलय के लिए जरूरी माना जाता है। उन्होंने कहा कि यह निर्णय राजनीतिक मजबूरी नहीं बल्कि सिद्धांतों के आधार पर लिया गया है। “AAP अब अपनी मूल विचारधारा से भटक गई” चड्ढा ने आरोप लगाया कि जिस पार्टी को उन्होंने वर्षों तक मजबूत किया, वह अब अपने मूल आदर्शों से दूर हो चुकी है। उन्होंने कहा कि वर्तमान स्थिति में पार्टी की दिशा और कार्यशैली बदल गई है। केजरीवाल की प्रतिक्रिया पार्टी प्रमुख Arvind Kejriwal ने इस पूरे घटनाक्रम पर संक्षिप्त प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह पंजाब के लोगों के साथ “धोखा” है और बीजेपी पर गंभीर आरोप लगाए। राजनीतिक तनाव और बढ़ा इस घटनाक्रम के बाद AAP के भीतर तनाव और बढ़ गया है। पार्टी में नेतृत्व, नीतियों और अंदरूनी मतभेदों को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बदलाव AAP के लिए राज्यसभा में बड़ा नुकसान साबित हो सकता है।  

surbhi अप्रैल 25, 2026 0
Arvind Kejriwal faces setback as AAP MPs resign before crucial party meeting in Delhi
केजरीवाल की कोशिश नाकाम: AAP सांसदों ने मीटिंग से पहले ही दिया इस्तीफा, बड़ा सियासी झटका

नई दिल्ली में AAP के भीतर भारी उथल-पुथल आम आदमी पार्टी (AAP) एक बड़े राजनीतिक संकट से गुजर रही है। पार्टी प्रमुख Arvind Kejriwal की अपने सांसदों से बातचीत कर उन्हें मनाने की कोशिश पूरी तरह विफल हो गई। सूत्रों के मुताबिक, तय बैठक से पहले ही कई सांसदों ने पार्टी छोड़ने का फैसला कर लिया था। मीटिंग से पहले ही बन चुका था इस्तीफे का मन सूत्रों के अनुसार, केजरीवाल ने शुक्रवार शाम अपने निवास पर कुछ असंतुष्ट सांसदों के साथ बैठक बुलाने की योजना बनाई थी, ताकि स्थिति को संभाला जा सके। लेकिन इससे पहले ही सांसदों ने सामूहिक रूप से AAP छोड़ने का निर्णय ले लिया। हालांकि उन्होंने एक साथ औपचारिक योजना नहीं बनाई थी, लेकिन व्यक्तिगत स्तर पर सभी ने पार्टी से अलग होने का मन पहले ही बना लिया था। 7 सांसदों का BJP में शामिल होने का दावा इसी बीच बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया, जब AAP के सात सांसदों ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल होने का ऐलान किया। इनमें प्रमुख नाम Raghav Chadha और अन्य वरिष्ठ नेता शामिल बताए जा रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक, इन सांसदों ने दावा किया कि AAP अब अपने मूल सिद्धांतों से भटक चुकी है। केजरीवाल का प्रस्ताव भी नहीं रोक सका टूट बताया जा रहा है कि केजरीवाल ने नाराज सांसदों को मनाने के लिए उन्हें भविष्य में टिकट देने और पार्टी में बेहतर अवसर देने का प्रस्ताव भी दिया था। लेकिन यह प्रयास भी नाकाम रहा। सूत्रों का कहना है कि कई सांसद पहले से ही पार्टी छोड़ने का मन बना चुके थे, इसलिए बातचीत का मौका ही नहीं बन सका। AAP में अंदरूनी खींचतान और नेतृत्व पर सवाल पार्टी में यह संकट तब और बढ़ गया जब राज्यसभा में नेतृत्व परिवर्तन को लेकर विवाद सामने आया। इसके बाद असंतोष और बढ़ता गया, जिससे कई सांसदों ने दूरी बना ली। BJP ने किया स्वागत, AAP ने लगाया ‘ऑपरेशन लोटस’ का आरोप BJP की ओर से इन सांसदों का स्वागत किया गया और पार्टी अध्यक्ष ने उन्हें पारंपरिक तरीके से शामिल किया। वहीं AAP ने BJP पर “ऑपरेशन लोटस” चलाकर सांसदों को तोड़ने का आरोप लगाया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि यह पूरी तरह राजनीतिक साजिश है। AAP के लिए बड़ा राजनीतिक झटका लगभग 14 साल पहले भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन से जन्मी AAP के लिए यह घटनाक्रम अब तक का सबसे बड़ा संकट माना जा रहा है। कई वरिष्ठ नेताओं के एक साथ पार्टी छोड़ने से संगठन की स्थिति कमजोर मानी जा रही है।  

surbhi अप्रैल 25, 2026 0
Raghav Chadha joins BJP as seven AAP Rajya Sabha MPs switch allegiance in Delhi
AAP में बड़ा सियासी भूचाल: राघव चड्ढा समेत 7 सांसद BJP में शामिल

नई दिल्ली में राजनीति का बड़ा उलटफेर देश की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। आम आदमी पार्टी (AAP) के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद Raghav Chadha ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल होने का ऐलान कर दिया है। उनके इस फैसले ने AAP के राष्ट्रीय संयोजक Arvind Kejriwal को गहरा राजनीतिक झटका दिया है। सूत्रों के अनुसार, AAP के कुल 10 राज्यसभा सांसदों में से 7 सांसदों ने BJP के साथ जाने का फैसला किया है। यह बदलाव पार्टी के लिए बड़ी टूट के रूप में देखा जा रहा है। 7 सांसदों का एक साथ पाला बदला राघव चड्ढा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में दावा किया कि AAP के कई सांसद अब BJP के साथ जुड़ रहे हैं। इनमें कुछ बड़े नाम भी शामिल बताए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह फैसला लंबे विचार-विमर्श के बाद लिया गया है। चड्ढा ने आरोप लगाया कि जिस पार्टी ने कभी ईमानदार राजनीति का वादा किया था, वह अब अपने मूल सिद्धांतों से भटक चुकी है। उनके अनुसार, AAP में अब पारदर्शिता और नैतिकता की कमी देखी जा रही है। “AAP अब अपनी राह से भटक चुकी है” – चड्ढा का बयान राघव चड्ढा ने कहा कि उन्होंने पार्टी को कई साल दिए, लेकिन अब हालात बदल चुके हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उनके पास राजनीति छोड़ने या सही रास्ता चुनने का विकल्प था, और उन्होंने दूसरा विकल्प चुना। उनका कहना है कि राज्यसभा के दो-तिहाई सांसदों के साथ मिलकर BJP में शामिल होने का निर्णय लिया गया है। AAP का पलटवार, BJP पर गंभीर आरोप AAP ने इस पूरे घटनाक्रम पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। पार्टी ने इसे “धोखा” करार देते हुए कहा कि जिन नेताओं को AAP ने पहचान दी, वही अब विरोधी खेमे में चले गए हैं। पार्टी नेताओं ने यह भी दावा किया कि यह कदम राजनीतिक दबाव और रणनीति का हिस्सा हो सकता है। केजरीवाल की पहली प्रतिक्रिया घटना के बाद Arvind Kejriwal ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए BJP पर हमला बोला और इसे पंजाब के लोगों के साथ “विश्वासघात” बताया। राजनीतिक माहौल में बढ़ी हलचल इस बड़े राजनीतिक बदलाव के बाद देश की सियासत में हलचल तेज हो गई है। अब सबकी नजर इस पर है कि आने वाले दिनों में AAP और BJP की रणनीति क्या होगी और संसद में इसका क्या असर पड़ेगा।  

surbhi अप्रैल 25, 2026 0
arvind kejriwal bengal voting
बंगाल की बंपर वोटिंग पर केजरीवाल का वार, बोले—“मोदी का SIR उल्टा पड़ रहा”

कोलकाता, एजेंसियां। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के पहले चरण में रिकॉर्ड तोड़ मतदान के बाद सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक Arvind Kejriwal ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि “सुनने में आ रहा है कि पश्चिम बंगाल में जमकर SIR के खिलाफ वोट पड़ रहा है, और यह पीएम मोदी के खिलाफ जा रहा है।”   रिकॉर्ड वोटिंग ने तोड़ा पुराना आंकड़ा पहले चरण में 23 अप्रैल को 152 सीटों पर करीब 92.88% मतदान दर्ज किया गया, जो राज्य के इतिहास में सबसे अधिक है। इससे पहले 2021 के विधानसभा चुनाव में कुल 81.56% मतदान हुआ था। इस बार कूचबिहार, मालदा, मुर्शिदाबाद, बीरभूम और दक्षिण दिनाजपुर जैसे जिलों में 94% से अधिक वोटिंग दर्ज की गई।   जिलों में दिखा भारी उत्साह उत्तरी और दक्षिणी बंगाल के कई जिलों में मतदाताओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। कूचबिहार में लगभग 96%, दक्षिण दिनाजपुर में 95% और जलपाईगुड़ी में 94% से अधिक मतदान हुआ। वहीं दार्जिलिंग और कलिम्पोंग जैसे क्षेत्रों में भी अच्छी भागीदारी देखने को मिली।   सियासी मायने और दावे विशेषज्ञों के मुताबिक, इतनी बड़ी संख्या में मतदान को अक्सर सत्ता विरोधी लहर (एंटी-इंकंबेंसी) का संकेत माना जाता है। हालांकि, सत्तारूढ़ All India Trinamool Congress (TMC) और Bharatiya Janata Party (BJP) दोनों ही इसे अपने पक्ष में बता रहे हैं।   आगे के चरणों पर नजर बंगाल चुनाव का अगला चरण 29 अप्रैल को होगा, जबकि मतगणना 4 मई को होगी। रिकॉर्ड मतदान के बाद अब सभी की नजर अगले चरण और अंतिम नतीजों पर टिकी है, जो राज्य की राजनीतिक दिशा तय करेंगे।

Unknown अप्रैल 24, 2026 0
Bengal elections
बंगाल चुनाव से पहले अरविंद केजरीवाल का ममता बनर्जी को समर्थन, कहा- लोकतंत्र की लड़ाई लड़ रही दीदी

कोलकाता, एजेंसियां। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले अरविंद केजरीवाल ने ममता बनर्जी से फोन पर बात कर उन्हें पूरा समर्थन देने का भरोसा दिलाया। आम आदमी पार्टी के संयोजक केजरीवाल ने कहा कि ममता बनर्जी देश के लोकतंत्र की एक महत्वपूर्ण और कठिन लड़ाई लड़ रही हैं। उन्होंने सोशल मीडिया के जरिए यह जानकारी साझा की।   भाजपा और केंद्र पर लगाए गंभीर आरोप केजरीवाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर आरोप लगाते हुए कहा कि केंद्र सरकार विभिन्न संस्थाओं का दुरुपयोग कर रही है। उन्होंने दावा किया कि इन सबके बावजूद आगामी चुनाव में भाजपा को हार का सामना करना पड़ेगा। केजरीवाल ने कहा कि लोकतंत्र की रक्षा के लिए एकजुटता जरूरी है।   ममता की रैली को अनुमति न मिलने पर विवाद यह बयान ऐसे समय आया है जब चुनाव आयोग ने भवानीपुर में ममता बनर्जी की प्रस्तावित रैली को अनुमति देने से इनकार कर दिया था। इस फैसले के बाद तृणमूल कांग्रेस ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि एक मुख्यमंत्री होने के बावजूद उन्हें अपने ही क्षेत्र में रैली की इजाजत नहीं दी गई, जबकि प्रधानमंत्री की रैलियों को जल्दी मंजूरी मिल जाती है।   चुनावी माहौल हुआ गरम पश्चिम बंगाल में चुनावी मुकाबला इस बार बेहद दिलचस्प हो गया है। 294 सदस्यीय विधानसभा के लिए मतदान दो चरणों में होगा—पहला चरण 23 अप्रैल और दूसरा 142 सीटों पर बाद में आयोजित होगा। मतगणना 4 मई को होगी।   सत्ता के लिए कड़ा मुकाबला राज्य में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस लगातार चौथी बार सत्ता में लौटने की कोशिश कर रही है, जबकि भाजपा सरकार बनाने के लक्ष्य के साथ मैदान में है। ऐसे में केजरीवाल का यह समर्थन चुनावी समीकरणों को और दिलचस्प बना सकता है।

Unknown अप्रैल 22, 2026 0
Arvind Kejriwal at Delhi High Court hearing in excise policy case amid judge recusal controversy
शराब नीति मामला: हाईकोर्ट में आज खुद पक्ष रखेंगे केजरीवाल, जज बदलने की मांग पर भी विवाद

दिल्ली के चर्चित शराब नीति मामले में आज बड़ा घटनाक्रम देखने को मिल सकता है। आम आदमी पार्टी (AAP) के प्रमुख अरविंद केजरीवाल दिल्ली हाईकोर्ट में खुद अपना पक्ष रख सकते हैं। यह मामला CBI की उस याचिका से जुड़ा है, जिसमें ट्रायल कोर्ट द्वारा केजरीवाल, मनीष सिसोदिया समेत 23 आरोपियों को दी गई राहत को चुनौती दी गई है। जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा को हटाने की मांग सुनवाई से पहले केजरीवाल और अन्य आरोपियों ने जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा से मामले से अलग होने (रिक्यूज) की मांग की। उनका कहना है कि निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे हैं, इसलिए केस को किसी दूसरी बेंच को ट्रांसफर किया जाए। हालांकि, यह मांग खारिज कर दी गई। कोर्ट ने साफ किया कि किसी जज के खुद को मामले से अलग करने का फैसला वही जज लेते हैं। क्या होता है ‘रिक्यूजल’? रिक्यूजल का मतलब होता है कि अगर किसी जज पर पक्षपात या हितों के टकराव का शक हो, तो वह खुद ही मामले की सुनवाई से अलग हो सकते हैं, ताकि न्याय प्रक्रिया निष्पक्ष बनी रहे। ट्रायल कोर्ट ने दी थी राहत 27 फरवरी को ट्रायल कोर्ट ने केजरीवाल, मनीष सिसोदिया समेत सभी 23 आरोपियों को इस मामले में राहत दी थी। कोर्ट ने CBI की जांच पर भी सवाल उठाए थे और उसकी आलोचना की थी। हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी CBI की याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस शर्मा ने 9 मार्च को कहा था कि पहली नजर में (प्राइमा फेसी) ट्रायल कोर्ट की टिप्पणियां सही नहीं लगतीं और इस पर दोबारा विचार जरूरी है। साथ ही, उन्होंने CBI जांच अधिकारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की सिफारिश पर भी रोक लगा दी थी। सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा मामला केजरीवाल पहले ही हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस से जज बदलने की मांग कर चुके हैं, लेकिन यह मांग खारिज हो चुकी है। इसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (SLP) भी दाखिल की है। जेल में रहे केजरीवाल और सिसोदिया इस मामले में केजरीवाल को 2024 लोकसभा चुनाव के दौरान गिरफ्तार किया गया था और वे 156 दिन तक हिरासत में रहे। बाद में उन्हें सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिली। वहीं, मनीष सिसोदिया इस केस में करीब 530 दिन तक जेल में रहे थे। क्या है पूरा मामला? दिल्ली सरकार ने 2021 में नई आबकारी (शराब) नीति लागू की थी, जिसका उद्देश्य राजस्व बढ़ाना और शराब व्यापार में सुधार करना था। बाद में अनियमितताओं के आरोप लगने पर इस नीति को वापस ले लिया गया। इसके बाद उपराज्यपाल विनय सक्सेना के आदेश पर CBI और ED ने जांच शुरू की। जांच एजेंसियों का आरोप है कि इस नीति के जरिए निजी कंपनियों को फायदा पहुंचाया गया और भ्रष्टाचार हुआ। भावुक हुए थे केजरीवाल 27 फरवरी को ट्रायल कोर्ट से राहत मिलने के बाद केजरीवाल भावुक हो गए थे। उन्होंने कहा था, “मैंने जिंदगी में सिर्फ ईमानदारी कमाई है।” वहीं मनीष सिसोदिया ने इसे “सच की जीत” बताया था।  

surbhi अप्रैल 6, 2026 0
Raghav Chadha facing political challenge as AAP struggles to remove him from Rajya Sabha position
राघव चड्ढा के सामने क्यों ‘बेबस’ है AAP? जानिए कौन से नियम बांध रहे केजरीवाल के हाथ

आम आदमी पार्टी (AAP) ने राघव चड्ढा को राज्यसभा में उपनेता पद से हटा दिया है, लेकिन इसके बावजूद पार्टी उन्हें न तो बाहर निकाल पा रही है और न ही उनकी सांसद सदस्यता खत्म करवा सकती है। इसके पीछे भारतीय संविधान और संसद के कुछ अहम नियम हैं। राज्यसभा सदस्य होने का फायदा राघव चड्ढा राज्यसभा सांसद हैं किसी सांसद की सदस्यता पार्टी सीधे खत्म नहीं कर सकती इसके लिए संविधान में तय प्रक्रिया का पालन जरूरी होता है दल-बदल विरोधी कानून (Anti-Defection Law) यह कानून संविधान की दसवीं अनुसूची में आता है इसके तहत सांसद तभी अयोग्य ठहराया जा सकता है जब: वह खुद पार्टी छोड़ दे, या व्हिप के खिलाफ वोट करे जब तक चड्ढा ऐसा नहीं करते, तब तक उनकी सदस्यता पर कोई असर नहीं पड़ेगा। सदस्यता खत्म करने की प्रक्रिया किसी सांसद को हटाने का अधिकार सीधे पार्टी के पास नहीं होता यह अधिकार राज्यसभा के सभापति के पास होता है प्रक्रिया: शिकायत या मामला उठाया जाता है जांच विशेषाधिकार समिति को भेजी जाती है रिपोर्ट के बाद सदन में प्रस्ताव आता है बहुमत से पास होने पर सदस्यता खत्म होती है AAP की राजनीतिक दुविधा AAP की स्थिति फिलहाल “न निगल पा रही, न उगल पा रही” जैसी है: अगर कार्रवाई नहीं करती: चड्ढा का कद पार्टी से बड़ा हो सकता है पार्टी की राजनीतिक लाइन कमजोर पड़ सकती है अगर बाहर निकालती है: चड्ढा स्वतंत्र सांसद बने रहेंगे खुलकर पार्टी के खिलाफ बोल सकते हैं इससे चुनावी नुकसान हो सकता है संकेत क्या मिला? उपनेता पद से हटाना एक राजनीतिक संदेश है पार्टी यह दिखाना चाहती है कि “लाइन से हटने वालों को साइडलाइन किया जाएगा”

surbhi अप्रैल 4, 2026 0
AAP leaders Raghav Chadha and Arvind Kejriwal amid party conflict controversy and internal criticism
AAP में बढ़ी तकरार: राघव चड्ढा पर पार्टी का सीधा हमला, ‘अब केजरीवाल के सिपाही नहीं रहे’

आम आदमी पार्टी (AAP) के भीतर राजनीतिक खींचतान अब खुलकर सामने आने लगी है। राज्यसभा सांसद Raghav Chadha के हालिया बयान के बाद पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने उन पर तीखा हमला बोला है। पार्टी प्रवक्ता Anurag Dhanda ने साफ शब्दों में कहा कि चड्ढा अब Arvind Kejriwal के ‘सिपाही’ नहीं रहे हैं। ‘निडरता हमारी पहचान, डरने वाले नहीं लड़ सकते’ अनुराग ढांडा ने चड्ढा के रुख पर सवाल उठाते हुए कहा कि AAP के कार्यकर्ता निडर होकर जनता के मुद्दे उठाते हैं। उन्होंने कहा, “जो डर जाए, वो देश के लिए क्या लड़ेगा?” यह बयान पार्टी के भीतर बढ़ते असंतोष को स्पष्ट तौर पर दर्शाता है। संसद में भूमिका पर उठे सवाल ढांडा ने आरोप लगाया कि संसद में सीमित समय मिलने के बावजूद Raghav Chadha ने गंभीर मुद्दों के बजाय गैर-जरूरी विषयों को प्राथमिकता दी। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि देश के अहम मुद्दों की बजाय ‘छोटे मुद्दों’ पर समय खर्च किया गया। कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी पर चुप्पी का आरोप AAP नेता ने यह भी दावा किया कि गुजरात में पार्टी के सैकड़ों कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी हुई, लेकिन इस मुद्दे पर चड्ढा ने संसद में आवाज नहीं उठाई। इसके अलावा पश्चिम बंगाल में मतदाता अधिकार से जुड़े मुद्दे पर भी उनकी निष्क्रियता पर सवाल खड़े किए गए। वॉकआउट के दौरान भी नहीं दिखी एकजुटता ढांडा ने आरोप लगाया कि जब पार्टी ने संसद से वॉकआउट किया, तब भी चड्ढा सदन में मौजूद रहे। इसे उन्होंने पार्टी लाइन से अलग रुख बताया और कहा कि पिछले कुछ समय से चड्ढा का व्यवहार बदलता नजर आ रहा है। सौरभ भारद्वाज ने भी साधा निशाना AAP के एक अन्य नेता Saurabh Bhardwaj ने भी चड्ढा की आलोचना करते हुए कहा कि वे संसद में ‘सॉफ्ट पीआर’ कर रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या चड्ढा ने पार्टी कार्यकर्ताओं और लोकतंत्र से जुड़े मुद्दों पर मजबूती से आवाज उठाई। बढ़ सकता है राजनीतिक विवाद इस पूरे घटनाक्रम से साफ है कि AAP के भीतर मतभेद गहराते जा रहे हैं। आने वाले दिनों में यह विवाद और बढ़ सकता है, जिसका असर पार्टी की रणनीति और छवि दोनों पर पड़ सकता है।  

surbhi अप्रैल 3, 2026 0
Raghav Chadha speaking in a video message after removal from AAP leadership role
“मेरी खामोशी को हार मत समझना” - राघव चड्ढा का AAP पर सीधा हमला, एक्शन के बाद पहली प्रतिक्रिया

आम आदमी पार्टी में हालिया राजनीतिक घटनाक्रम के बीच राज्यसभा सांसद Raghav Chadha ने अपनी चुप्पी तोड़ते हुए पार्टी नेतृत्व को लेकर तीखा संदेश दिया है। उपनेता पद से हटाए जाने के बाद पहली बार सार्वजनिक रूप से प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी खामोशी को कमजोरी या हार के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। Aam Aadmi Party के वरिष्ठ नेता राघव चड्ढा ने एक वीडियो संदेश जारी कर कहा कि उन्हें जानबूझकर खामोश करने की कोशिश की गई है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि पार्टी के भीतर उठाए गए मुद्दों और जनता से जुड़े सवालों के कारण उन्हें इस कार्रवाई का सामना करना पड़ा। “जनता की आवाज उठाना क्या अपराध है?” अपने बयान में चड्ढा ने सीधे सवाल उठाया कि क्या जनता के मुद्दों को उठाना गलत है। उन्होंने कहा कि वह लगातार आम लोगों से जुड़े विषयों को संसद और सार्वजनिक मंचों पर रखते रहे हैं, लेकिन इसके चलते उन्हें राजनीतिक नुकसान झेलना पड़ा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वह अपने सिद्धांतों से पीछे हटने वाले नहीं हैं और भविष्य में भी जनता की आवाज बुलंद करते रहेंगे। राजनीतिक संकेत और संभावित असर राघव चड्ढा का यह बयान पार्टी के अंदरूनी हालात की ओर इशारा करता है। उनके शब्दों से यह साफ झलकता है कि AAP के भीतर मतभेद उभरकर सामने आ रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह घटनाक्रम आने वाले समय में पार्टी के संगठनात्मक ढांचे और रणनीति पर असर डाल सकता है। आगे क्या? हालांकि, पार्टी की ओर से इस बयान पर आधिकारिक प्रतिक्रिया अभी सामने नहीं आई है, लेकिन चड्ढा का यह खुला संदेश सियासी हलकों में चर्चा का विषय बन गया है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि AAP नेतृत्व इस मुद्दे को कैसे संभालता है और इसका व्यापक राजनीतिक प्रभाव क्या पड़ता है।  

surbhi अप्रैल 3, 2026 0
Arvind Kejriwalamid Delhi excise policy case legal challenge by CBI
एक्साइज पॉलिसी केस: CBI ने केजरीवाल को मिली राहत को दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी

  दिल्ली की चर्चित आबकारी नीति मामले में नया कानूनी मोड़ सामने आया है। केंद्रीय जांच एजेंसी Central Bureau of Investigation (CBI) ने पूर्व दिल्ली मुख्यमंत्री Arvind Kejriwal और अन्य आरोपियों को मिली राहत को चुनौती देते हुए Delhi High Court में याचिका दायर की है। इस याचिका पर सोमवार को जस्टिस Swarana Kanta Sharma की पीठ सुनवाई करेगी। दरअसल, 27 फरवरी को दिल्ली की एक ट्रायल कोर्ट ने आम आदमी पार्टी के नेताओं Arvind Kejriwal, Manish Sisodia और अन्य आरोपियों को दिल्ली एक्साइज पॉलिसी मामले में राहत देते हुए उन्हें डिस्चार्ज कर दिया था। अदालत ने अपने आदेश में कहा था कि मामले में किसी बड़े आपराधिक षड्यंत्र या स्पष्ट आपराधिक मंशा के पर्याप्त सबूत नहीं पाए गए। हालांकि CBI ने इस फैसले को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट में कहा है कि ट्रायल कोर्ट ने साजिश के अलग-अलग पहलुओं को अलग-अलग करके देखा और अभियोजन पक्ष के पूरे मामले को समग्र रूप से नहीं परखा। एजेंसी का आरोप है कि अदालत ने अभियोजन द्वारा पेश किए गए कई महत्वपूर्ण दस्तावेजों और गवाहों के बयानों को नजरअंदाज कर दिया और अपने स्तर पर तथ्यों की व्याख्या कर दी। CBI ने यह भी कहा है कि गवाहों और सरकारी गवाह (एप्रूवर) के बयानों की विश्वसनीयता का मूल्यांकन ट्रायल के दौरान ही होना चाहिए, न कि शुरुआती चरण में उन्हें खारिज किया जाना चाहिए। यह मामला दिल्ली की Delhi Excise Policy 2021–22 से जुड़ा है। यह विवाद तब शुरू हुआ था जब जुलाई 2022 में दिल्ली के तत्कालीन मुख्य सचिव Naresh Kumar ने दिल्ली के उपराज्यपाल Vinai Kumar Saxena को एक रिपोर्ट सौंपी थी। इस रिपोर्ट में आरोप लगाया गया था कि आबकारी नीति तैयार करने और लागू करने की प्रक्रिया में कई प्रक्रियात्मक खामियां थीं। रिपोर्ट में कहा गया था कि उस समय आबकारी मंत्री रहे Manish Sisodia द्वारा लिए गए कुछ फैसले मनमाने और एकतरफा थे, जिससे सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचा। यह नीति नवंबर 2021 में लागू हुई थी, लेकिन विवाद बढ़ने के बाद जुलाई 2022 में इसे रद्द कर दिया गया। अब इस मामले में CBI की चुनौती पर हाई कोर्ट की सुनवाई महत्वपूर्ण मानी जा रही है। अदालत के फैसले से यह तय होगा कि ट्रायल कोर्ट का डिस्चार्ज आदेश बरकरार रहेगा या फिर मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई का रास्ता खुलेगा।  

surbhi मार्च 9, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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abhishek singh जुलाई 2, 2026 0