बंगाल की खाड़ी में रोहिंग्या शरणार्थियों से जुड़ा एक बड़ा समुद्री हादसा सामने आया है। म्यांमार से बांग्लादेश के शरणार्थी शिविरों की ओर जा रही दो नावों के खराब मौसम में लापता होने के बाद करीब 500 लोगों के डूबने की आशंका जताई जा रही है। अंतरराष्ट्रीय प्रवासन संगठन (IOM) और संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी उच्चायुक्त (UNHCR) के संयुक्त बयान के अनुसार, जून के अंतिम सप्ताह में दोनों नावें म्यांमार से रवाना हुई थीं। इनमें कुल 500 से अधिक लोग सवार थे, जिनका अब तक कोई पता नहीं चल सका है। खराब मौसम बना हादसे की वजह संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों के मुताबिक, एक नाव पर लगभग 250 लोग सवार थे, जिससे समुद्र में अचानक संपर्क टूट गया। वहीं दूसरी नाव, जिसमें करीब 280 लोग सवार थे, 8 जुलाई को म्यांमार के अयायारवाड़ी तट के पास तेज लहरों और खराब मौसम के बीच डूब गई। अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल सभी यात्रियों की स्थिति स्पष्ट नहीं है और राहत व जांच की प्रक्रिया जारी है। 12 लाख से अधिक रोहिंग्या रह रहे हैं शिविरों में संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, वर्तमान में करीब 12 लाख रोहिंग्या शरणार्थी बांग्लादेश के राहत शिविरों में रह रहे हैं। सीमित संसाधनों और कठिन जीवन परिस्थितियों के कारण कई लोग बेहतर भविष्य की उम्मीद में समुद्री रास्तों से दूसरे देशों की ओर जाने का जोखिम उठाते हैं। खतरनाक समुद्री सफर बना मजबूरी अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों का कहना है कि सुरक्षित और स्थायी समाधान नहीं मिलने के कारण रोहिंग्या शरणार्थी लगातार समुद्र के खतरनाक मार्गों का सहारा ले रहे हैं। खराब मौसम और मानव तस्करी के नेटवर्क के चलते ऐसे सफर अक्सर जानलेवा साबित होते हैं। जांच जारी, आधिकारिक पुष्टि का इंतजार आईओएम और यूएनएचसीआर ने इस संभावित समुद्री त्रासदी पर गहरी चिंता जताते हुए मामले की जांच शुरू कर दी है। हालांकि, अब तक मृतकों की आधिकारिक संख्या की पुष्टि नहीं की गई है। गौरतलब है कि पिछले वर्ष भी ऐसे ही समुद्री हादसों में 900 से अधिक रोहिंग्या शरणार्थियों की मौत हो गई थी या वे लापता हो गए थे।
मुंबई, एजेंसियां। क्रिस्टोफर नोलन की बहुप्रतीक्षित फिल्म 'द ओडिसी' 17 जुलाई को सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है और रिलीज के साथ ही इसे दर्शकों और समीक्षकों से शानदार प्रतिक्रिया मिल रही है। अब इस फिल्म की तारीफ करने वालों की सूची में हॉलीवुड सुपरस्टार टॉम क्रूज का नाम भी जुड़ गया है। अपनी दमदार एक्शन फिल्मों और खतरनाक स्टंट्स के लिए मशहूर अभिनेता ने फिल्म देखने के बाद सोशल मीडिया पर इसकी खुलकर सराहना की। टॉम क्रूज ने आईमैक्स 70mm थिएटर के बाहर फिल्म की टिकट हाथ में लिए अपनी तस्वीर साझा करते हुए लिखा, "वाह! क्रिस, एमा और आपकी शानदार कास्ट व क्रू को बहुत-बहुत धन्यवाद। मूवी थिएटर में एक शानदार रात के लिए शुक्रिया। मैं इसे दोबारा देखने का बेसब्री से इंतजार कर रहा हूं।" उनके इस पोस्ट ने सोशल मीडिया पर फिल्म को लेकर उत्साह और बढ़ा दिया। एक यूजर ने लिखा क्रूज की इस प्रतिक्रिया पर फैंस ने भी दिलचस्प कमेंट किए। एक यूजर ने लिखा, "अगर कोई फिल्म देखकर तुरंत दोबारा थिएटर जाने का मन करे, तो वही सबसे बड़ा रिव्यू होता है।" वहीं दूसरे ने मजाकिया अंदाज में कहा, "जब सचमुच चट्टानों से कूदने वाला इंसान किसी फिल्म की सिफारिश करे, तो बिना सोचे टिकट बुक कर लेनी चाहिए।" कई लोगों ने इसे नोलन की फिल्म के लिए सबसे बड़ी रिकमेंडेशन बताया। लिखित और निर्देशित 'द ओडिसी' क्रिस्टोफर नोलन द्वारा लिखित और निर्देशित 'द ओडिसी' होमर की प्रसिद्ध ग्रीक महाकाव्य कविता पर आधारित एक एपिक फैंटेसी-एक्शन फिल्म है। फिल्म में मैट डेमन ओडिसियस, टॉम हॉलैंड टेलीमैकस, ऐनी हैथवे पेनेलोप और रॉबर्ट पैटिनसन एंटिनस की भूमिका में नजर आए हैं। कहानी ट्रोजन युद्ध के बाद ओडिसियस की दस वर्षों तक चली संघर्षपूर्ण घर वापसी की यात्रा और उनके पारिवारिक व भावनात्मक रिश्तों को दिखाती है। 'ओपेनहाइमर' के बाद नोलन की यह पहली फिल्म है, जिसे भारत में बिना किसी कट के 'A' सर्टिफिकेट के साथ रिलीज किया गया है।
रांची। बंगाल की खाड़ी में बने निम्न दबाव क्षेत्र का असर अब झारखंड में साफ दिखाई देने लगा है। मौसम विज्ञान केंद्र ने राज्य के कई जिलों में अगले दो दिनों तक भारी बारिश, वज्रपात और तेज हवाओं की संभावना जताते हुए लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। विशेष रूप से 18 जुलाई के लिए रांची सहित 10 जिलों में येलो अलर्ट जारी किया गया है। इन जिलों में भारी बारिश की संभावना मौसम विभाग के अनुसार 17 जुलाई को खूंटी, गुमला, सिमडेगा, पूर्वी सिंहभूम, पश्चिमी सिंहभूम और सरायकेला-खरसावां में भारी बारिश और वज्रपात की आशंका है। वहीं 18 जुलाई को रांची, लातेहार, चतरा, गुमला, खूंटी, रामगढ़, हजारीबाग, कोडरमा, बोकारो और लोहरदगा में तेज बारिश के साथ वज्रपात हो सकता है। विभाग ने इन जिलों के लिए येलो अलर्ट जारी करते हुए लोगों से खराब मौसम के दौरान खुले स्थानों और पेड़ों के नीचे जाने से बचने की अपील की है। वज्रपात से दो लोगों की मौत गुरुवार को राज्य के कई हिस्सों में बारिश दर्ज की गई। सबसे अधिक 42 मिमी वर्षा सिमडेगा में रिकॉर्ड की गई, जबकि मेदिनीनगर, जमशेदपुर, रामगढ़ और लोहरदगा में भी बारिश हुई। इसी दौरान लातेहार जिले में वज्रपात की चपेट में आने से दो युवकों की मौत हो गई, जिससे मौसम विभाग की चेतावनी की गंभीरता और बढ़ गई है। 20 जुलाई तक मौसम रहेगा सक्रिय मौसम विज्ञान केंद्र का अनुमान है कि 20 जुलाई तक राज्य के विभिन्न हिस्सों में बादल छाए रहेंगे तथा गरज-चमक, वज्रपात और तेज हवाओं के साथ रुक-रुककर बारिश होती रहेगी। गुरुवार को रांची का अधिकतम तापमान 31.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। हालांकि मानसून सक्रिय होने के बावजूद झारखंड में अब तक सामान्य से कम वर्षा हुई है। मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार 1 जून से 16 जुलाई तक राज्य में सामान्य 348.9 मिमी वर्षा के मुकाबले केवल 207.1 मिमी बारिश हुई है, जो सामान्य से 41 प्रतिशत कम है। ऐसे में आगामी दिनों की बारिश कृषि और जल संसाधनों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
भगवान जगन्नाथ की विश्व प्रसिद्ध रथ यात्रा से पहले मौसम ने चिंता बढ़ा दी है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने बंगाल की खाड़ी में सक्रिय निम्न दबाव क्षेत्र के प्रभाव से ओडिशा के कई हिस्सों में भारी से अत्यधिक भारी बारिश की संभावना जताई है। इसे देखते हुए पुरी और जगतसिंहपुर जिलों के लिए रेड वार्निंग जारी की गई है। मौसम विभाग की चेतावनी के बाद पुरी जिला प्रशासन ने एहतियातन बुधवार को सरकारी और निजी सभी स्कूलों में छुट्टी घोषित कर दी है। कई जिलों में ऑरेंज और येलो अलर्ट आईएमडी ने बुधवार के लिए मयूरभंज, क्योंझर, भद्रक, केंद्रपाड़ा, जाजपुर, खुरधा, कटक, नयागढ़, अंगुल, ढेंकनाल, बौध, गंजम और कंधमाल जिलों में ऑरेंज अलर्ट जारी किया है।वहीं बालेश्वर, देवगढ़, सुंदरगढ़, झारसुगुड़ा, संबलपुर, बारगढ़, सोनपुर, बलांगीर, नुआपाड़ा, कालाहांडी, रायगढ़ा और गजपति जिलों के लिए येलो अलर्ट जारी किया गया है। श्रद्धालुओं के लिए विशेष एडवाइजरी रथ यात्रा में शामिल होने वाले श्रद्धालुओं को मौसम विभाग ने विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी है। आईएमडी ने कहा है कि तेज बारिश या आकाशीय बिजली की स्थिति में लोग किसी पक्के भवन में शरण लें। पेड़ों, बिजली के खंभों या अस्थायी ढांचों के नीचे खड़े होने से बचें। मछुआरों को समुद्र में नहीं जाने की सलाह समुद्र में मौसम खराब रहने की आशंका को देखते हुए मौसम विभाग ने मछुआरों को 17 जुलाई तक ओडिशा तट और आसपास के समुद्री क्षेत्र में नहीं जाने की सलाह दी है। विभाग के अनुसार इस दौरान समुद्र में ऊंची लहरें और तेज हवाएं चल सकती हैं। बंगाल की खाड़ी में सक्रिय हुआ निम्न दबाव आईएमडी के मुताबिक, बुधवार सुबह उत्तरी ओडिशा और पश्चिम बंगाल तट के पास बंगाल की खाड़ी में कम दबाव का क्षेत्र बना है। अगले दो दिनों में इसके उत्तर ओडिशा और पश्चिम बंगाल के गंगा के मैदानी इलाकों की ओर बढ़ने की संभावना है, जिससे बारिश की गतिविधियां और तेज हो सकती हैं। पुरी में जलभराव की स्थिति मंगलवार शाम से पुरी और आसपास के क्षेत्रों में लगातार तेज बारिश हो रही है। भारी वर्षा के कारण कई इलाकों में जलभराव हो गया है। भगवान जगन्नाथ मंदिर के सामने स्थित ग्रैंड रोड, जहां रथ यात्रा के दौरान रथ खींचे जाते हैं, वहां भी पानी जमा हो गया। प्रशासन ने जलनिकासी के लिए अग्निशमन विभाग की टीमों को लगाया है। आईएमडी के अनुसार, बुधवार सुबह साढ़े आठ बजे तक पिछले 24 घंटों में पुरी शहर में 143.8 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जो राज्य में सबसे अधिक रही। प्रशासन ने श्रद्धालुओं से मौसम को देखते हुए सावधानी बरतने और आधिकारिक निर्देशों का पालन करने की अपील की है।
रांची। भारत निर्वाचन आयोग ने चुनावी प्रक्रिया में मीडिया की भूमिका को और अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से 17 जुलाई को नई दिल्ली में राष्ट्रीय मीडिया कॉन्फ्रेंस आयोजित करने का फैसला किया है। यह एक दिवसीय सम्मेलन द्वारका स्थित इंडिया इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डेमोक्रेसी एंड इलेक्शन मैनेजमेंट (IIIDEM) के सभागार में आयोजित होगा। इसमें झारखंड समेत देश के विभिन्न राज्यों से चुनावी रिपोर्टिंग से जुड़े पत्रकार हिस्सा लेंगे। सम्मेलन को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार संबोधित करेंगे और मीडिया से सीधे संवाद भी करेंगे। चुनावी रिपोर्टिंग के विभिन्न पहलुओं पर होगा मंथन सुबह 9 बजे से शुरू होने वाले इस सम्मेलन में निर्वाचन आयोग के वरिष्ठ अधिकारी चुनावी प्रक्रिया के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से जानकारी देंगे। कार्यक्रम की शुरुआत डीजी (मीडिया) आशीष गोयल के संबोधन से होगी, जिसमें चुनाव में मीडिया की भूमिका पर चर्चा की जाएगी। इसके बाद IIIDEM के महानिदेशक राकेश कुमार वर्मा प्रतिभागियों को संबोधित करेंगे। सम्मेलन में डीजी (आईटी) डॉ. सीमा खन्ना चुनाव आयोग के ECINET प्लेटफॉर्म और चुनावी प्रक्रिया में तकनीक के बढ़ते उपयोग की जानकारी देंगी। वहीं, डीडीजी (लॉ) विजय कुमार पांडे चुनाव संबंधी संवैधानिक प्रावधानों और हाल के महत्वपूर्ण न्यायिक फैसलों पर प्रकाश डालेंगे। इसके अलावा अपूर्वा कुमार सिंह इलेक्ट्रोरल रोल, मतदान प्रक्रिया और मतगणना प्रणाली से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर प्रस्तुति देंगे। पत्रकारों को मिलेगा सवाल पूछने का अवसर सम्मेलन का सबसे अहम आकर्षण मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का विशेष संबोधन होगा, जिसमें वे चुनावी प्रक्रिया में मीडिया की जिम्मेदारी, पारदर्शिता और निष्पक्ष रिपोर्टिंग के महत्व पर अपने विचार रखेंगे। उनके संबोधन के बाद शाम 4:30 बजे से 5:30 बजे तक प्रश्नोत्तर सत्र आयोजित किया जाएगा, जिसमें पत्रकार सीधे मुख्य चुनाव आयुक्त से सवाल पूछ सकेंगे। झारखंड के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार ने बताया कि राज्य से 10 से 12 पत्रकार इस सम्मेलन में भाग ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस पहल से चुनावी रिपोर्टिंग से जुड़े पत्रकारों को निर्वाचन प्रक्रिया, कानून, तकनीक और आयोग की कार्यप्रणाली की बेहतर समझ मिलेगी, जिससे भविष्य में चुनाव संबंधी खबरों की गुणवत्ता और विश्वसनीयता मजबूत होगी।
पश्चिम बंगाल में रथ यात्रा के दौरान मौसम का मिजाज बिगड़ा रह सकता है। मौसम विभाग ने गुरुवार को दक्षिण बंगाल के कई हिस्सों में भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना जताई है। खासकर कोलकाता सहित आठ जिलों के लिए अलर्ट जारी किया गया है। वहीं तटीय क्षेत्रों में 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की भी आशंका व्यक्त की गई है। बंगाल की खाड़ी में बना नया निम्न दबाव मौसम विभाग के अनुसार, एक निम्न दबाव क्षेत्र के समाप्त होने के बाद बंगाल की खाड़ी में नया निम्न दबाव क्षेत्र सक्रिय हो गया है। यह प्रणाली बंगाल-ओडिशा तट के पास केंद्रित है और ओडिशा के रास्ते आगे बढ़ रही है। इसके प्रभाव से पूरे पश्चिम बंगाल में व्यापक बारिश होने की संभावना है। बारिश से खेती को लाभ मिलने की उम्मीद है, लेकिन निचले इलाकों में जलभराव की समस्या बढ़ सकती है। बुधवार सुबह से ही कई क्षेत्रों में लगातार बारिश दर्ज की गई है। तीन जिलों में ऑरेंज अलर्ट रथ यात्रा के दिन दक्षिण बंगाल के आठ जिलों में भारी बारिश का पूर्वानुमान जारी किया गया है। इनमें तीन जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट घोषित किया गया है। प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने और मौसम विभाग की सलाह का पालन करने की अपील की है। मछुआरों को समुद्र में जाने पर रोक निम्न दबाव के प्रभाव को देखते हुए मछुआरों को 19 जुलाई तक समुद्र में नहीं जाने की सलाह दी गई है। तटीय इलाकों में तेज हवाओं और ऊंची लहरों की आशंका के कारण यह एहतियाती कदम उठाया गया है। कब मिलेगी राहत? मौसम विभाग का अनुमान है कि दक्षिण बंगाल में अगले शनिवार से बारिश की तीव्रता धीरे-धीरे कम होने लगेगी। हालांकि उत्तर बंगाल में रविवार से फिर बारिश बढ़ने की संभावना है। उत्तर बंगाल के पांच जिलों के लिए रविवार और सोमवार को भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। रथ यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं को मौसम को ध्यान में रखते हुए यात्रा करने और प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने की सलाह दी गई है।
कोलकाता, एजेंसियां। झारखंड और पश्चिम बंगाल समेत पूर्वी भारत में मानसून एक बार फिर सक्रिय हो गया है। बंगाल की खाड़ी से जुड़े कम दबाव के क्षेत्र और उससे बनी चक्रवाती परिसंचरण के असर से दोनों राज्यों में भारी से बहुत भारी बारिश, तेज हवाएं और आकाशीय बिजली का खतरा बढ़ गया है। भारत मौसम विज्ञान विभाग ने कई जिलों के लिए बारिश और गरज-चमक का अलर्ट जारी किया है। झारखंड से बंगाल तक मौसम का बदला मिजाज मौसम विभाग के अनुसार, चक्रवाती परिसंचरण के प्रभाव से झारखंड, पश्चिम बंगाल, बिहार और ओडिशा के कई हिस्सों में अगले कुछ दिनों तक तेज बारिश का दौर जारी रह सकता है। कई स्थानों पर तेज हवाओं के साथ गरज-चमक और जलभराव की स्थिति बनने की आशंका जताई गई है। इन इलाकों में ज्यादा असर की आशंका पश्चिम बंगाल के उत्तरी और दक्षिणी जिलों में भारी बारिश दर्ज की जा रही है। वहीं झारखंड के कई जिलों में भी तेज बारिश, बिजली गिरने और तेज हवा चलने की चेतावनी दी गई है। IMD ने लोगों से खराब मौसम के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचने और निचले इलाकों में विशेष सतर्कता बरतने की अपील की है। प्रशासन अलर्ट मोड पर संभावित भारी बारिश को देखते हुए स्थानीय प्रशासन और आपदा प्रबंधन विभाग को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। नदियों के जलस्तर, शहरी जलभराव और बिजली आपूर्ति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। मौसम विभाग ने कहा है कि मानसून की सक्रिय स्थिति अगले कुछ दिनों तक बनी रह सकती है, इसलिए लोगों को आधिकारिक मौसम अपडेट पर नजर रखने की सलाह दी गई है।
रांची। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने झारखंड में अगले दो दिनों तक भारी बारिश, वज्रपात और तेज हवा की चेतावनी जारी की है। मौसम विभाग के अनुसार, राजधानी रांची सहित लातेहार, पलामू, गढ़वा, चतरा, बोकारो, धनबाद, पूर्वी सिंहभूम, पश्चिमी सिंहभूम और सरायकेला-खरसावां समेत कई जिलों में भारी वर्षा होने की संभावना है। प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने और खराब मौसम के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचने की अपील की है। मानसून ने पकड़ी रफ्तार, कई इलाकों में तेज बारिश के आसार मौसम विभाग के अनुसार, बंगाल की खाड़ी में बने मौसम तंत्र और सक्रिय मानसून के प्रभाव से राज्य के अधिकांश हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश के साथ कुछ स्थानों पर भारी वर्षा हो सकती है। पिछले 24 घंटों में सिमडेगा में सबसे अधिक वर्षा दर्ज की गई, जबकि मेदिनीनगर राज्य का सबसे गर्म शहर रहा। प्रशासन ने जारी की एडवाइजरी भारी बारिश और वज्रपात की आशंका को देखते हुए जिला प्रशासन और आपदा प्रबंधन विभाग को अलर्ट पर रखा गया है। लोगों को पेड़ों के नीचे खड़े न होने, नदी-नालों से दूर रहने और खराब मौसम के दौरान सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी गई है। किसानों को भी मौसम अपडेट पर नजर रखने और खेतों में काम करते समय सावधानी बरतने को कहा गया है। अगले सप्ताह तक जारी रह सकती है बारिश IMD के पूर्वानुमान के मुताबिक, झारखंड में मानसून की सक्रियता अगले कुछ दिनों तक बनी रहेगी। 6 से 8 जुलाई के बीच भी राज्य के कई हिस्सों में गरज-चमक के साथ बारिश की संभावना है, जिससे तापमान में गिरावट और उमस से राहत मिलने की उम्मीद है।
पटना, एजेंसियां। बिहार में मौसम एक बार फिर बदलने वाला है। बंगाल की खाड़ी में बने नए कम दबाव के क्षेत्र (लो प्रेशर सिस्टम) के प्रभाव से राज्य में अगले 48 घंटों के दौरान तेज बारिश होने की संभावना है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने कई जिलों में भारी वर्षा, गरज-चमक और तेज हवाओं को लेकर अलर्ट जारी किया है। इन जिलों में भारी बारिश की संभावना मौसम विभाग के अनुसार पटना, भागलपुर, पूर्णिया, कटिहार, किशनगंज, अररिया, सुपौल, मधेपुरा, सहरसा और आसपास के जिलों में शनिवार और रविवार के दौरान अच्छी बारिश हो सकती है। कुछ स्थानों पर वज्रपात और तेज हवा चलने की भी आशंका जताई गई है। गर्मी और उमस से मिलेगी राहत, प्रशासन ने जारी की सलाह लगातार उमस और गर्मी से परेशान लोगों को बारिश से राहत मिलने की उम्मीद है। हालांकि, मौसम विभाग ने लोगों से खराब मौसम के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचने और खुले स्थानों, पेड़ों तथा बिजली के खंभों के नीचे खड़े न होने की सलाह दी है। किसानों को भी मौसम पूर्वानुमान को ध्यान में रखते हुए खेती का कार्य करने की अपील की गई है।
बीजिंग/ढाका: चीन अब पाकिस्तान के बाद दक्षिण एशिया में अपनी रणनीतिक मौजूदगी और मजबूत करने की दिशा में एक और बड़ा कदम बढ़ा रहा है। चीन ने म्यांमार और बांग्लादेश के जरिए नए आर्थिक गलियारे (Economic Corridor) के निर्माण की योजना पर काम तेज कर दिया है। इस प्रस्तावित परियोजना का उद्देश्य सड़क, रेल और बंदरगाहों के नेटवर्क के माध्यम से चीन को सीधे बंगाल की खाड़ी से जोड़ना है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह परियोजना आगे बढ़ती है तो इसका असर केवल व्यापार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका क्षेत्रीय सामरिक संतुलन पर भी प्रभाव पड़ सकता है। क्या है चीन का नया इकोनॉमिक कॉरिडोर? रिपोर्टों के अनुसार, प्रस्तावित कॉरिडोर के तहत चीन के कुनमिंग शहर को म्यांमार के रास्ते बांग्लादेश के मोंगला बंदरगाह समेत अन्य प्रमुख समुद्री बंदरगाहों से जोड़ा जाएगा। इस परियोजना के जरिए चीन माल ढुलाई के लिए वैकल्पिक मार्ग विकसित करना चाहता है, साथ ही बंगाल की खाड़ी तक अपनी पहुंच को भी मजबूत करना चाहता है। बांग्लादेश-चीन वार्ता में हुई चर्चा हाल ही में चीन की यात्रा पर गए बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान ने इस परियोजना पर चीनी नेतृत्व के साथ विस्तृत चर्चा की। इसके बाद बांग्लादेश में चीन के राजदूत याओ वेन ने बताया कि दोनों देश आर्थिक सहयोग के साथ-साथ कूटनीतिक और रक्षा मामलों में '2+2 संवाद' की व्यवस्था विकसित करने पर भी सहमत हुए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य में इस आर्थिक गलियारे में अन्य इच्छुक देशों की भागीदारी के लिए भी चीन खुला रुख अपनाएगा। CPEC की तर्ज पर नया प्रोजेक्ट विश्लेषकों के अनुसार, यह परियोजना काफी हद तक चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) की तर्ज पर तैयार की जा रही है। जिस तरह CPEC के माध्यम से चीन को पाकिस्तान के ग्वादर बंदरगाह के जरिए अरब सागर तक सीधी पहुंच मिली, उसी प्रकार नया कॉरिडोर चीन को बंगाल की खाड़ी तक एक वैकल्पिक संपर्क मार्ग उपलब्ध करा सकता है। भारत की रणनीतिक चिंता क्यों बढ़ी? भारत के लिए इस परियोजना का महत्व केवल आर्थिक नहीं, बल्कि सामरिक भी माना जा रहा है। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, सड़क, रेल और बंदरगाह जैसी आधारभूत संरचनाओं का उपयोग सामान्य परिस्थितियों में व्यापार और परिवहन के लिए होता है, लेकिन किसी सैन्य या आपात स्थिति में इन्हीं मार्गों का इस्तेमाल सैनिकों, सैन्य उपकरणों और रसद की तेज आवाजाही के लिए भी किया जा सकता है। इसी कारण भारत इस क्षेत्र में चीन की बढ़ती बुनियादी ढांचा परियोजनाओं और समुद्री पहुंच पर करीबी नजर बनाए हुए है। क्षेत्रीय समीकरणों पर रहेगी नजर चीन की यह पहल ऐसे समय सामने आई है जब दक्षिण एशिया और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में रणनीतिक प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ रही है। यदि यह परियोजना आगे बढ़ती है, तो इसका प्रभाव क्षेत्रीय व्यापार, कनेक्टिविटी और सुरक्षा समीकरणों पर पड़ सकता है। हालांकि, परियोजना के सभी पहलुओं और संभावित प्रभावों को लेकर अभी आगे की कूटनीतिक और तकनीकी प्रक्रियाएं बाकी हैं।
पाकिस्तान की नई हैंगोर क्लास पनडुब्बी (PNS Hangor) एक बार फिर बंगाल की खाड़ी को लेकर चर्चा में है। पाकिस्तान नौसेना के वरिष्ठ अधिकारियों के हालिया बयानों ने संकेत दिए हैं कि इस पनडुब्बी का इस्तेमाल केवल अरब सागर तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि भविष्य में बंगाल की खाड़ी में भी पाकिस्तान अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ाने की कोशिश करेगा। चीन में निर्मित पाकिस्तान की पहली हैंगोर क्लास पनडुब्बी पिछले सप्ताह कराची पहुंची। इसके बाद पाकिस्तान नौसेना के अधिकारियों ने इसे ‘गेम चेंजर’ करार दिया और कहा कि इस नई क्षमता से पाकिस्तान दूरस्थ समुद्री क्षेत्रों, विशेषकर बंगाल की खाड़ी, में भी अपनी मौजूदगी बनाए रखने में सक्षम होगा। श्रीलंका में पाकिस्तानी अधिकारी ने क्या कहा? कोलंबो स्थित समाचार पोर्टल ‘द मॉर्निंग’ के अनुसार, पनडुब्बी के एस्कॉर्ट बेड़े का नेतृत्व कर रहे पाकिस्तानी कमोडोर उमर फारूक ने कहा कि हैंगोर क्लास पनडुब्बियों के शामिल होने से पाकिस्तान बंगाल की खाड़ी में भी अपनी उपस्थिति बनाए रखने में सक्षम होगा। उन्होंने बताया कि पाकिस्तान कुल आठ हैंगोर क्लास पनडुब्बियों को अपने बेड़े में शामिल करने की योजना पर काम कर रहा है। बंगाल की खाड़ी क्यों है रणनीतिक रूप से अहम? 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के बाद से बंगाल की खाड़ी में पाकिस्तान की नौसैनिक गतिविधियां लगभग नगण्य रही हैं। दूसरी ओर यह क्षेत्र भारत की समुद्री रणनीति का महत्वपूर्ण केंद्र है। भारतीय नौसेना की पूर्वी कमान का मुख्यालय विशाखापट्टनम में स्थित है। इसके अलावा अंडमान और निकोबार द्वीप समूह भारत को इस क्षेत्र में रणनीतिक बढ़त प्रदान करते हैं। भारत और बांग्लादेश के बीच व्यापार, ऊर्जा आपूर्ति और इंडो-पैसिफिक रणनीति का बड़ा हिस्सा भी इसी समुद्री क्षेत्र से जुड़ा हुआ है। क्या है PNS हैंगोर का इतिहास? ‘हैंगोर’ नाम भारतीय नौसैनिक इतिहास में विशेष महत्व रखता है। 1971 के युद्ध के दौरान पाकिस्तानी पनडुब्बी पीएनएस हैंगोर ने भारतीय युद्धपोत आईएनएस खुकरी को निशाना बनाकर डुबो दिया था। इस हमले में 176 भारतीय नौसैनिक शहीद हुए थे, जिनमें कप्तान महेंद्र नाथ मुल्ला भी शामिल थे, जिन्हें मरणोपरांत महावीर चक्र से सम्मानित किया गया। इस घटना के बावजूद पाकिस्तान 1971 का युद्ध हार गया और बांग्लादेश का जन्म हुआ। अब पाकिस्तान ने अपनी नई पनडुब्बी परियोजना के लिए फिर से ‘हैंगोर’ नाम चुना है। क्या है हैंगोर क्लास पनडुब्बियों की खासियत? हैंगोर क्लास पनडुब्बियां पाकिस्तान की सबसे बड़ी नौसैनिक आधुनिकीकरण परियोजना का हिस्सा हैं। इनमें एयर इंडिपेंडेंट प्रोपल्शन (AIP) तकनीक होने की बात कही जाती है, जिससे ये पनडुब्बियां लंबे समय तक पानी के भीतर रह सकती हैं और उन्हें बार-बार सतह पर आकर बैटरी चार्ज करने की आवश्यकता नहीं होती। इस तकनीक के कारण इन पनडुब्बियों को ट्रैक करना और उनकी गतिविधियों का पता लगाना अपेक्षाकृत कठिन माना जाता है। बांग्लादेश से बढ़ती नजदीकियां भी बढ़ा रहीं चिंता 2024 में शेख हसीना सरकार के सत्ता से बाहर होने के बाद पाकिस्तान और बांग्लादेश के संबंधों में तेजी से सुधार देखने को मिला है। दोनों देशों के बीच सीधी उड़ानें शुरू हुई हैं, व्यापार में वृद्धि हुई है और रक्षा सहयोग को लेकर भी बातचीत तेज हुई है। नवंबर 2025 में पाकिस्तानी युद्धपोत पीएनएस सैफ की चट्टोग्राम यात्रा 1971 के बाद पहली ऐसी घटना थी, जब कोई पाकिस्तानी युद्धपोत बांग्लादेश पहुंचा। इसके अलावा दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग, खुफिया साझेदारी और संयुक्त सैन्य अभ्यासों को संस्थागत रूप देने पर भी चर्चा चल रही है। अभी तक ऐसा कोई संकेत नहीं मिला है कि बांग्लादेश पाकिस्तान को अपने बंदरगाहों या सैन्य सुविधाओं के इस्तेमाल की अनुमति देगा। भारत की चिंता कितनी बढ़ी? विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान की नई पनडुब्बियां तत्काल तौर पर बंगाल की खाड़ी में शक्ति संतुलन बदलने में सक्षम नहीं हैं, लेकिन वे भारत के लिए एक अतिरिक्त सामरिक चुनौती जरूर पैदा कर सकती हैं। भारतीय नौसेना पिछले पांच दशकों में काफी मजबूत हुई है। भारत के पास परमाणु ऊर्जा से संचालित पनडुब्बियां, दो विमानवाहक पोत और लंबी दूरी की समुद्री निगरानी क्षमताएं मौजूद हैं। भारत अरब सागर और बंगाल की खाड़ी दोनों क्षेत्रों में मजबूत उपस्थिति बनाए हुए है। इसके बावजूद पाकिस्तान की बढ़ती नौसैनिक क्षमताएं और बांग्लादेश के साथ उसकी बढ़ती नजदीकियां भारत के लिए एक नए रणनीतिक समीकरण को जन्म दे सकती हैं। इसी वजह से भारत अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के आसपास अपनी समुद्री और निगरानी क्षमताओं को और मजबूत करने की दिशा में तेजी से काम कर रहा है।
Bangladesh और United States के बीच हुए नए रणनीतिक समझौतों ने दक्षिण एशिया और हिंद महासागर क्षेत्र की भू-राजनीति को लेकर नई चर्चाएं शुरू कर दी हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक बांग्लादेश ने अमेरिका को अपने दो अहम बंदरगाहों - Port of Chittagong और Matarbari Port - के इस्तेमाल की अनुमति देने पर सहमति जताई है। इसके साथ ही दोनों देशों के बीच खुफिया जानकारी साझा करने और समुद्री रणनीतिक सहयोग बढ़ाने को लेकर भी अहम करार हुए हैं। किन बंदरगाहों तक मिलेगी पहुंच? समझौते के तहत अमेरिकी नौसेना और सैन्य जहाज: Port of Chittagong Matarbari Port का इस्तेमाल कर सकेंगे। विशेषज्ञों के मुताबिक इससे अमेरिका को बंगाल की खाड़ी और हिंद महासागर क्षेत्र में अपनी सैन्य मौजूदगी मजबूत करने में मदद मिलेगी। खास बात यह है कि चिटगांव बंदरगाह भारत के Andaman and Nicobar Islands से लगभग 1100 किलोमीटर दूर है। अमेरिका की नजर मलक्का स्ट्रेट पर Strait of Malacca दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में गिना जाता है। दुनिया के बड़े हिस्से का: तेल व्यापार गैस सप्लाई इलेक्ट्रॉनिक्स और औद्योगिक सामानों का ट्रांसपोर्ट इसी रास्ते से होता है। विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका इस क्षेत्र में अपनी मौजूदगी बढ़ाकर चीन की समुद्री गतिविधियों पर करीबी नजर रखना चाहता है। बांग्लादेश-अमेरिका के 3 बड़े समझौते 1. बंदरगाह इस्तेमाल समझौता अमेरिकी सैन्य और नौसैनिक जहाजों को चिटगांव और मतारबाड़ी बंदरगाहों तक पहुंच मिलेगी। 2. खुफिया जानकारी साझा करना दोनों देश समुद्री सुरक्षा और सैन्य गतिविधियों से जुड़ी इंटेलिजेंस साझा करेंगे। 3. रणनीतिक सहयोग बढ़ाना बंगाल की खाड़ी और मलक्का क्षेत्र में संयुक्त निगरानी और सामरिक सहयोग मजबूत किया जाएगा। चीन के लिए क्यों अहम है मलक्का? China के लिए मलक्का स्ट्रेट बेहद संवेदनशील रणनीतिक क्षेत्र माना जाता है। चीन के लगभग 80% तेल आयात इसी रास्ते से गुजरते हैं। यही वजह है कि पूर्व चीनी राष्ट्रपति Hu Jintao ने इसे “मलक्का डिलेमा” कहा था। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इस समुद्री मार्ग पर किसी भी तरह का दबाव बढ़ता है तो इसका असर सीधे चीन की अर्थव्यवस्था और सप्लाई चेन पर पड़ सकता है। भारत के लिए क्यों बढ़ी अहमियत? India का भी बड़ा समुद्री व्यापार इसी मार्ग से होकर गुजरता है। भारत के: लगभग 55% समुद्री व्यापार ऊर्जा आयात का बड़ा हिस्सा मलक्का मार्ग से जुड़ा है। भारत की रणनीतिक ताकत का सबसे बड़ा आधार Andaman and Nicobar Islands माने जाते हैं, जो मलक्का स्ट्रेट के पश्चिमी प्रवेश द्वार के पास स्थित हैं। INS बाज की भूमिका INS Baaz भारत का महत्वपूर्ण एयर स्टेशन है, जो समुद्री निगरानी में अहम भूमिका निभाता है। विशेषज्ञों के मुताबिक यहां से हिंद महासागर और मलक्का क्षेत्र की गतिविधियों पर करीबी नजर रखी जा सकती है। क्या बढ़ेगा भारत-अमेरिका सहयोग? रणनीतिक मामलों के जानकार मानते हैं कि यदि अमेरिका बंगाल की खाड़ी और मलक्का क्षेत्र में अपनी सक्रियता बढ़ाता है, तो भारत की भूमिका भी और महत्वपूर्ण हो सकती है। इस पूरे क्षेत्र में: Indonesia Malaysia जैसे देश अपनी समुद्री संप्रभुता को लेकर काफी संवेदनशील हैं। इसलिए आने वाले समय में हिंद महासागर क्षेत्र की रणनीतिक राजनीति और भी दिलचस्प हो सकती है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।