Bihar police

Patna traffic constable performs CPR to save CISF जवान on Mithapur bypass, heroic act caught on video
पटना में ट्रैफिक कॉन्स्टेबल बना ‘रियल हीरो’: CPR देकर CISF जवान की बचाई जान, वीडियो हुआ वायरल

पटना: बिहार की राजधानी पटना से एक बेहद प्रेरणादायक और मानवीय घटना सामने आई है, जहां एक ट्रैफिक कॉन्स्टेबल की सूझबूझ और तत्परता ने एक जवान की जिंदगी बचा ली। बिहार पुलिस द्वारा साझा किए गए इस वीडियो ने सोशल मीडिया पर लोगों का दिल जीत लिया है, और अब हर कोई इस पुलिसकर्मी की सराहना कर रहा है। क्या है पूरा मामला? घटना पटना के मीठापुर बाइपास की है, जहां से गुजर रहे एक CISF जवान को अचानक सांस लेने में दिक्कत हुई और वह सड़क पर ही गिर पड़ा। मौके पर मौजूद लोगों ने तुरंत ट्रैफिक पुलिस को सूचना दी। कुछ ही पलों में एक ट्रैफिक कॉन्स्टेबल वहां पहुंचा और स्थिति की गंभीरता को समझते हुए बिना देर किए CPR (कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन) देना शुरू कर दिया। कैसे बची जवान की जान? वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि जवान लगभग बेहोशी की हालत में था। ट्रैफिक कॉन्स्टेबल ने लगातार CPR देकर उसकी सांसें वापस लाने की कोशिश की। कुछ ही देर में जवान को होश आ गया, जिससे वहां मौजूद लोगों ने राहत की सांस ली। इसके बाद कॉन्स्टेबल ने जवान को निर्देश दिया कि वह सिर नीचे रखे, पैर फैलाए और पानी पीकर खुद को सामान्य करे। उनकी सतर्कता और सही समय पर लिए गए फैसले ने एक बड़ी अनहोनी को टाल दिया। बिहार पुलिस का संदेश इस घटना का वीडियो साझा करते हुए बिहार पुलिस ने लिखा- “बिहार पुलिस सदैव आपके साथ। हर संकट में आपके साथ, हर परिस्थिति में आपके लिए समर्पित। आपकी सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है।” सोशल मीडिया पर मिल रही जमकर तारीफ वीडियो वायरल होते ही लोग ट्रैफिक कॉन्स्टेबल की तारीफ करते नहीं थक रहे हैं। एक यूजर ने लिखा, “सैल्यूट इस जज्बे को।” दूसरे ने कहा, “CPR की ट्रेनिंग हर स्कूल-कॉलेज में जरूरी होनी चाहिए।” वहीं एक अन्य यूजर ने लिखा, “वेलडन, बदलता हुआ बिहार।” क्यों खास है यह घटना? यह घटना सिर्फ एक जान बचाने की नहीं, बल्कि आपात स्थिति में सही प्रशिक्षण और त्वरित निर्णय की अहमियत को भी दर्शाती है। अगर हर नागरिक को CPR जैसी जीवन रक्षक तकनीक की जानकारी हो, तो कई जिंदगियां बचाई जा सकती हैं।  

surbhi मार्च 24, 2026 0
Accused Rahul Kalra arrested in franchise scam case by police after cheating investors of crores in Patna
100 करोड़ की फ्रेंचाइजी ठगी का मास्टरमाइंड गिरफ्तार: कौन है राहुल कालरा और कैसे रचा गया पूरा खेल?

पटना: बिहार की राजधानी पटना में करोड़ों की ठगी के मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए पुलिस ने कथित मास्टरमाइंड राहुल कालरा और उनकी पत्नी रुचिका कालरा को हरियाणा के गुरुग्राम स्थित एक होटल से गिरफ्तार कर लिया है। दोनों पर कपड़ा धुलाई कंपनी की फ्रेंचाइजी दिलाने के नाम पर करीब 100 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी का आरोप है। विदेश भागने की तैयारी में थे आरोपी पटना पुलिस के मुताबिक, राहुल कालरा और उनकी पत्नी विदेश फरार होने की फिराक में थे। इसी दौरान पुलिस को इनकी लोकेशन मिली और छापेमारी कर दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया। अब ट्रांजिट रिमांड पर उन्हें पटना लाकर पूछताछ की जाएगी। फ्रेंचाइजी के नाम पर करोड़ों की ठगी जांच में सामने आया है कि राहुल कालरा खुद को एक प्रतिष्ठित वॉशिंग (कपड़ा/वाहन धुलाई) कंपनी का संचालक बताकर लोगों को फ्रेंचाइजी देने का झांसा देता था। कई कारोबारियों ने इस झांसे में आकर करोड़ों रुपये निवेश किए, लेकिन: न तो कोई यूनिट स्थापित की गई न मशीनें उपलब्ध कराई गईं और न ही निवेशकों को पैसा वापस मिला पटना समेत कई शहरों में दर्ज केस इस मामले में गांधी मैदान थाना में दो अलग-अलग एफआईआर दर्ज हैं। एक केस साल 2025 में दूसरा जनवरी 2026 में दर्ज हुआ एक पीड़ित ने 1.85 करोड़ रुपये की ठगी की शिकायत दर्ज कराई है। इसके अलावा एसके पुरी थाना में भी मामला दर्ज है। देशभर में फैला था ठगी का नेटवर्क जांच में यह भी सामने आया है कि इस गिरोह ने बिहार के अलावा अन्य राज्यों में भी लोगों को निशाना बनाया। भागलपुर और बेंगलुरु जैसे शहरों में भी निवेशकों से ठगी के मामले सामने आए हैं। पुलिस को शक है कि यह एक बड़ा संगठित नेटवर्क है। कौन है राहुल कालरा? राहुल कालरा पटना के पाटलिपुत्र कॉलोनी में रह चुका है खुद को एक निजी कंपनी का मैनेजिंग डायरेक्टर (MD) बताता था कपड़ा और वाहन धुलाई से जुड़ा कारोबार चलाने का दावा करता था इसी कारोबार की फ्रेंचाइजी के नाम पर लोगों को निवेश के लिए फंसाता था इस पूरे खेल में उसकी पत्नी रुचिका कालरा और अन्य सहयोगियों की भी भूमिका सामने आई है। ठिकाना बदल-बदल कर छिप रहे थे आरोपी गिरफ्तारी से बचने के लिए दोनों लगातार अपना ठिकाना बदल रहे थे। आखिरकार पुलिस को इनकी जानकारी गुरुग्राम के एक होटल में मिली, जहां से उन्हें दबोच लिया गया। पुलिस करेगी बड़ा खुलासा पटना पुलिस इस पूरे मामले का विस्तृत खुलासा करने की तैयारी में है। पूछताछ के बाद ठगी के नेटवर्क और अन्य शामिल लोगों के बारे में और बड़े खुलासे होने की संभावना है।  

surbhi मार्च 24, 2026 0
Clash between GRP and excise team at Katihar Junction with injured constable and chaos on platform
कटिहार जंक्शन पर ‘खाकी vs खाकी’: GRP और मद्य निषेध टीम में भिड़ंत, सिपाही घायल, वीडियो वायरल

स्टेशन पर मचा हड़कंप कटिहार जंक्शन पर शुक्रवार को उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब दो सरकारी विभागों के जवान आपस में ही भिड़ गए। जीआरपी और मद्य निषेध विभाग के बीच हुई इस झड़प में एक सिपाही घायल हो गया। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। शराब तस्करी की सूचना पर पहुंची थी टीम मद्य निषेध विभाग की टीम को गुप्त सूचना मिली थी कि बंगाल के रास्ते आने वाली ट्रेन में शराब की बड़ी खेप लाई जा रही है। इसी सूचना के आधार पर टीम कटिहार स्टेशन पर छापेमारी के लिए पहुंची थी। बताया जा रहा है कि जैसे ही टीम प्लेटफॉर्म पर कार्रवाई शुरू करने लगी, तभी जीआरपी के जवान वहां पहुंच गए। बहस से शुरू हुई मारपीट प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, दोनों पक्षों के बीच पहले कहासुनी हुई, जो देखते ही देखते हाथापाई में बदल गई। आरोप है कि जीआरपी के जवानों ने मद्य निषेध टीम के काम में हस्तक्षेप किया और फिर मामला हिंसक झड़प तक पहुंच गया। वीडियो वायरल, जांच के आदेश घटना के दौरान मौजूद लोगों ने पूरी झड़प का वीडियो बना लिया, जो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। मामले की गंभीरता को देखते हुए अधिकारियों ने जांच के आदेश दे दिए हैं और रिपोर्ट तलब की गई है। सिपाही देव शंकर कुमार घायल इस झगड़े में मद्य निषेध विभाग के सिपाही देव शंकर कुमार घायल हो गए। उन्हें इलाज के लिए कटिहार सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज चल रहा है। आरोप-प्रत्यारोप का दौर मद्य निषेध विभाग का आरोप है कि जीआरपी जानबूझकर उनकी कार्रवाई में बाधा डालती है और इसी कारण यह विवाद हुआ। विभाग के एक अधिकारी ने कहा कि वे तस्करों को पकड़ने पहुंचे थे, लेकिन उन्हें अपने ही वर्दीधारी साथियों के विरोध का सामना करना पड़ा। पुलिस महकमे पर उठे सवाल इस घटना ने पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियों के बीच समन्वय पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आमतौर पर कानून-व्यवस्था संभालने वाली ‘खाकी’ का इस तरह आपस में भिड़ना व्यवस्था की बड़ी खामी को उजागर करता है।  

surbhi मार्च 20, 2026 0
Police encounter site in Motihari with security forces after shootout where two criminals killed and STF jawan martyred
मोतिहारी एनकाउंटर: पुलिस को चुनौती देने वाले दो कुख्यात बदमाश ढेर, STF जवान श्रीराम यादव शहीद

मोतिहारी: बिहार के पूर्वी चंपारण जिले में सोमवार देर रात पुलिस और अपराधियों के बीच हुई भीषण मुठभेड़ में दो कुख्यात बदमाश मारे गए, जबकि एक STF जवान शहीद हो गए। यह एनकाउंटर चकिया थाना क्षेत्र के रामडीहा गांव में रात करीब 2:30 बजे हुआ, जिसने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी।   धमकी के बाद एक्शन में आई पुलिस पुलिस के मुताबिक, कुख्यात अपराधी कुंदन ठाकुर और प्रियांशु दुबे ने चकिया थाने के अपर थानाध्यक्ष को नेपाल के नंबर से फोन कर खुली चुनौती दी थी। उन्होंने कहा था कि “शहर अब उनकी गुंडई देखेगा” और 10-15 पुलिसकर्मियों की हत्या की धमकी भी दी थी। इसी कॉल को ट्रेस करते हुए STF और स्थानीय पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए रामडीहा गांव में घेराबंदी की।   घेराबंदी होते ही शुरू हुई ताबड़तोड़ फायरिंग जैसे ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची, अपराधियों ने सरेंडर करने के बजाय अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई में पुलिस ने भी मोर्चा संभाला, जिससे मुठभेड़ तेज हो गई। इस दौरान STF के जवान श्रीराम यादव गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें तत्काल अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। उनकी शहादत से पूरे पुलिस महकमे में शोक की लहर दौड़ गई है।   जवाबी कार्रवाई में दोनों बदमाश ढेर पुलिस की जवाबी फायरिंग में कुंदन ठाकुर और प्रियांशु दुबे मौके पर ही मारे गए। दोनों के खिलाफ आर्म्स एक्ट समेत कई आपराधिक मामले दर्ज थे। हालांकि, अंधेरे का फायदा उठाकर उनके कुछ साथी मौके से फरार होने में सफल रहे। घटनास्थल से हथियार और अन्य संदिग्ध सामान बरामद होने की संभावना जताई जा रही है।   पूरे इलाके में सर्च ऑपरेशन तेज घटना की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंच गए हैं। DIG और SP के नेतृत्व में पूरे चकिया क्षेत्र को छावनी में तब्दील कर दिया गया है। पुलिस फरार अपराधियों की गिरफ्तारी के लिए सघन तलाशी अभियान चला रही है। अधिकारियों का कहना है कि इस गिरोह के पूरे नेटवर्क को खत्म किया जाएगा।   नेपाल सीमा से जुड़ा अपराध का नेटवर्क मोतिहारी का यह इलाका नेपाल सीमा के करीब होने के कारण संवेदनशील माना जाता है। अक्सर अपराधी वारदात को अंजाम देकर सीमा पार फरार हो जाते हैं, जिससे पुलिस के लिए चुनौती बढ़ जाती है।   कानून-व्यवस्था पर सख्त संदेश इस एनकाउंटर को पुलिस की बड़ी कार्रवाई माना जा रहा है। हालांकि STF जवान श्रीराम यादव की शहादत ने इस सफलता को दर्दनाक बना दिया है। पुलिस ने साफ किया है कि अपराधियों के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा और कानून-व्यवस्था से खिलवाड़ करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।  

surbhi मार्च 17, 2026 0
Police investigation at crime scene in Bihar after woman shot dead and skeleton recovered in Siwan
बिहार में दो सनसनीखेज घटनाएं: सहरसा में महिला की गोली मारकर हत्या, सीवान में 5 महीने से लापता युवक का कंकाल बरामद

  सहरसा में घास काटने गई महिला की गोली मारकर हत्या बिहार के सहरसा जिले में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। Saharsa के सलखुआ थाना क्षेत्र के कोपरिया गांव में अज्ञात अपराधियों ने एक 20 वर्षीय तलाकशुदा महिला की गोली मारकर हत्या कर दी। मृतका की पहचान कोपरिया पंचायत के वार्ड-13 निवासी धीरेन्द्र यादव की पुत्री शुषम कुमारी के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि वह गांव के पास स्थित गुलडाही बहियार में घास काटने गई थी, तभी अपराधियों ने उसके गले में गोली मार दी, जिससे घटनास्थल पर ही उसकी मौत हो गई।   महिलाओं ने खेत में देखा खून से लथपथ शव जानकारी के अनुसार, गांव की कुछ महिलाएं घास काटकर वापस लौट रही थीं। इसी दौरान उनकी नजर खेत में खून से लथपथ पड़े शव पर पड़ी। इसके बाद उन्होंने शोर मचाया और गांव वालों को इसकी सूचना दी। सूचना मिलते ही मृतका के परिजन और ग्रामीण मौके पर पहुंचे। घटना के बाद पूरे इलाके में दहशत और सनसनी का माहौल बन गया।   तीन साल पहले हुआ था विवाह, बाद में हो गया था तलाक मृतका के पिता ने बताया कि करीब तीन साल पहले उनकी बेटी की शादी हुई थी, लेकिन कुछ समय बाद उसका तलाक हो गया। परिवार वाले अब उसकी दूसरी शादी की तैयारी कर रहे थे। इसी बीच इस दर्दनाक घटना ने पूरे परिवार को झकझोर कर रख दिया है।   पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और मक्के के खेत से शव बरामद कर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। मामले की जांच के लिए फॉरेंसिक टीम को भी बुलाया गया है। पुलिस आसपास के लोगों से पूछताछ कर हत्या के कारणों का पता लगाने की कोशिश कर रही है।   सीवान में 5 महीने से लापता युवक का कंकाल मिला इधर Siwan जिले में करीब पांच महीने से लापता युवक का कंकाल मिलने से इलाके में सनसनी फैल गई है। मृतक की पहचान दारौंदा थाना क्षेत्र के उजाय गांव निवासी राजेंद्र यादव के रूप में हुई है। कंकाल गांव के पास एक खेत से बरामद हुआ है।   26 सितंबर को भैंस चराने निकले थे घर से परिजनों के अनुसार, राजेंद्र यादव 26 सितंबर 2025 को सुबह करीब 11 बजे घर से भैंस चराने के लिए निकले थे, लेकिन इसके बाद वह वापस घर नहीं लौटे। परिवार ने काफी खोजबीन की, लेकिन उनका कोई सुराग नहीं मिल पाया।   मोबाइल और सामान मिलने से हुई पहचान बीती रात गांव के एक व्यक्ति ने परिजनों को सूचना दी कि गांव के पूर्व दिशा में स्थित चंवर में लाठी और छाता पड़ा हुआ है। सूचना मिलने पर परिजन मौके पर पहुंचे और पुलिस को भी इसकी जानकारी दी। पुलिस की मौजूदगी में जब आसपास खोजबीन की गई तो वहां से मोबाइल फोन जेब में रखा पैसा खैनी की चुनौटी गमछा और लाठी मानव हड्डियां बरामद हुईं। इन सामानों के आधार पर कंकाल की पहचान राजेंद्र यादव के रूप में की गई।   हत्या की आशंका, जांच में जुटी पुलिस परिजनों का आरोप है कि राजेंद्र यादव की हत्या कर शव को खेत में फेंक दिया गया। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस और फॉरेंसिक टीम मौके पर पहुंच गई और जांच शुरू कर दी है। पुलिस का कहना है कि मामले की हर पहलू से जांच की जा रही है और रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के असली कारणों का खुलासा हो पाएगा।  

surbhi मार्च 9, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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surbhi मार्च 31, 2026 0