Bihar political news

Nitish Kumar
CM पद छोड़ने के बाद भी नीतीश कुमार रहेंगे हाई सिक्योरिटी में

पटना, एजेंसियां। बिहार की राजनीति में बड़े बदलाव के संकेतों के बीच मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर अहम अपडेट सामने आया है। खबर है कि मुख्यमंत्री पद छोड़ने के बाद भी उनकी सुरक्षा में कोई कमी नहीं होगी, बल्कि उनका सुरक्षा घेरा और मजबूत किया जाएगा। मौजूदा समय में उन्हें मुख्यमंत्री होने के नाते SSG सुरक्षा प्राप्त है, लेकिन इस्तीफे के बाद उन्हें Z+ श्रेणी की अतिरिक्त सुरक्षा भी दी जाएगी। इस संबंध में राज्य के गृह विभाग की विशेष शाखा की ओर से आदेश जारी किए जाने की खबर है।   सूत्रों के अनुसार सूत्रों के अनुसार, नीतीश कुमार जल्द ही राज्यसभा की सदस्यता ग्रहण कर सकते हैं। रिपोर्ट्स में कहा गया है कि वे 10 अप्रैल को राज्यसभा सांसद के रूप में शपथ ले सकते हैं। इसके लिए उनके 8 या 9 अप्रैल को दिल्ली जाने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, मुख्यमंत्री पद से इस्तीफे की आधिकारिक तारीख अभी स्पष्ट नहीं है, लेकिन बिहार की सियासत में इसे बड़े नेतृत्व परिवर्तन के रूप में देखा जा रहा है।   MLC पद छोड़ चुके, अब नजर CM कुर्सी पर नीतीश कुमार पहले ही 30 मार्च को बिहार विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा दे चुके हैं। यह कदम उनके राज्यसभा जाने की प्रक्रिया का हिस्सा माना जा रहा है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि मुख्यमंत्री आवास छोड़ने के बाद वे किसी दूसरे सरकारी आवास में शिफ्ट हो सकते हैं। इस पूरे घटनाक्रम ने बिहार में सत्ता परिवर्तन की अटकलों को और तेज कर दिया है।   चारों सदनों के सदस्य बनने की ओर बड़ा कदम अगर नीतीश कुमार राज्यसभा की शपथ लेते हैं, तो वे उन चुनिंदा नेताओं में शामिल होंगे जो विधानसभा, विधान परिषद, लोकसभा और राज्यसभा—चारों सदनों का हिस्सा रह चुके हैं। फिलहाल, उनकी सुरक्षा और राजनीतिक भूमिका—दोनों को लेकर बिहार में हलचल तेज है।

Anjali Kumari अप्रैल 2, 2026 0
Nitin Navin MLA update
Nitish Kumar ने MLC पद और न Nitin Navin ने MLA पोस्ट छोड़ा

पटना, एजेंसियां। बिहार क सीएम नीतीश कुमार ने एमएलसी का पद छोड़ दिया है। वहीं, बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने एमएलए के पद से इस्तीफा दे दिया है। बिहार की राजनीति में एक साथ दो बड़े फैसलों ने हलचल बढ़ा दी है। बीजेपी नेता नितिन नवीन बांकीपुर सीट से विधायक थे। दोनों नेताओं के इस्तीफे के बाद राज्य में सियासी चर्चाएं तेज हो गई हैं और आने वाले दिनों में बड़े बदलाव के संकेत मिल रहे हैं।  दिल्ली जायेंगे नीतीश कुमार   नीतीश कुमार हाल ही में राज्यसभा के लिए चुने गए हैं और अब वे राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाएंगे। लंबे समय तक बिहार की राजनीति के केंद्र में रहे नीतीश अब दिल्ली की राजनीति में नई जिम्मेदारी संभालेंगे। वहीं नितिन नवीन को भी पार्टी ने नई भूमिका दी है, जिसके तहत वे आगे काम करेंगे। बिहार में नेतृत्व परिवर्तन की चर्चा नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद बिहार में नेतृत्व परिवर्तन की चर्चा तेज हो गई है। माना जा रहा है कि आने वाले समय में नए मुख्यमंत्री के चयन की प्रक्रिया शुरू हो सकती है। हालांकि अभी आधिकारिक तौर पर कुछ स्पष्ट नहीं है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसे बड़े बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है। चारों सदनों में प्रतिनिधित्व का रिकॉर्ड नीतीश कुमार उन चुनिंदा नेताओं में शामिल हो गए हैं, जिन्होंने देश के चारों सदनों का हिस्सा बनने का गौरव हासिल किया है। 1985 में हरनौत से विधायक बनकर उन्होंने अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत की थी। 1989 में लोकसभा पहुंचे, फिर 2006 से लगातार विधान परिषद के सदस्य रहे और अब राज्यसभा में नई भूमिका निभाएंगे। इस्तीफे से पहले बैठक इस्तीफे से पहले पटना स्थित मुख्यमंत्री आवास पर जदयू के वरिष्ठ नेताओं के साथ अहम बैठक हुई। इसमें ललन सिंह, संजय कुमार झा, विजय कुमार चौधरी और अशोक चौधरी जैसे नेता शामिल हुए। बैठक में आगे की रणनीति और राजनीतिक हालात पर चर्चा की गई। नितिन नवीन ने दिया भावुक संदेश नितिन नवीन ने अपने इस्तीफे का ऐलान सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर किया। उन्होंने लिखा कि विधायक के रूप में काम करना उनके लिए एक खास अनुभव रहा। उन्होंने कहा कि पार्टी ने उन्हें जो नई जिम्मेदारी दी है, उसके जरिए भी वे बिहार के विकास के लिए काम करते रहेंगे और जनता से उनका रिश्ता हमेशा मजबूत रहेगा। आगे दोनों नेताओं की भूमिका पर नजर इन दोनों बड़े इस्तीफों के बाद बिहार की राजनीति एक नए मोड़ पर खड़ी नजर आ रही है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि राज्यसभा में इन नेताओं की भूमिका क्या होगी और बिहार में नेतृत्व को लेकर क्या फैसला सामने आता है।

Anjali Kumari मार्च 30, 2026 0
RJD MLA Bogo Singh speaks to media during Bihar Rajya Sabha election voting in Patna.
राज्यसभा चुनाव के बीच RJD में बयानबाजी: विधायक बोगो सिंह ने तेजस्वी यादव के दावों को बताया ‘फेक’

  वोटिंग के बीच सियासत गरम बिहार में राज्यसभा की पांच सीटों के लिए मतदान के दौरान सियासी माहौल और गर्म हो गया है। जहां एक तरफ NDA और महागठबंधन अपनी-अपनी जीत का दावा कर रहे हैं, वहीं इस बीच एक ऐसा बयान सामने आया है जिसने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। बेगूसराय से राजद विधायक Bogo Singh ने नेता प्रतिपक्ष Tejashwi Yadav के दावों को ही फेक बता दिया। इतना ही नहीं, उन्होंने राज्यसभा की सभी पांच सीटों पर NDA की जीत का दावा भी कर दिया।   “यहां सिर्फ आंकड़ों का खेल है” वोट डालने के बाद मीडिया से बातचीत में बोगो सिंह ने कहा कि राजनीति में सिर्फ बयान देने से कुछ नहीं होता, असली खेल आंकड़ों का होता है। उन्होंने कहा कि महागठबंधन की स्थिति मजबूत नजर नहीं आ रही है और उनके कई विधायक भी दिखाई नहीं दे रहे हैं। बोगो सिंह ने दावा किया कि राज्यसभा चुनाव में NDA को स्पष्ट बढ़त मिलेगी और पांचों सीटों पर उसकी जीत तय है।   तेजस्वी यादव के पुराने दावों पर भी उठाए सवाल बोगो सिंह ने अपने बयान में यह भी कहा कि पहले भी कई मौकों पर तेजस्वी यादव ने बड़े-बड़े दावे किए थे। उन्होंने विधानसभा चुनाव का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय भी तेजस्वी यादव ने सरकार बनाने का दावा किया था, लेकिन नतीजे अलग रहे। उनका कहना था कि सिर्फ दावे करने से चुनाव नहीं जीते जाते, इसके लिए विधायकों का समर्थन और स्पष्ट संख्या बल जरूरी होता है।   AIMIM से समर्थन जुटाने की कोशिश बताया जा रहा है कि राज्यसभा की पांचवीं सीट को लेकर मुकाबला कड़ा हो गया है। इसी कारण महागठबंधन अन्य दलों का समर्थन जुटाने की कोशिश कर रहा है। रविवार को आयोजित इफ्तार कार्यक्रम में तेजस्वी यादव ने All India Majlis-e-Ittehadul Muslimeen (AIMIM) नेताओं से मुलाकात कर समर्थन मांगा था। इस दौरान पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष Akhtarul Iman समेत अन्य नेता भी मौजूद थे।   वोट डालने के बाद तेजस्वी का भरोसा इस बीच विधानसभा में वोट डालने पहुंचे तेजस्वी यादव ने कहा कि महागठबंधन पूरी मजबूती से चुनाव लड़ रहा है और उन्हें जीत का भरोसा है। राज्यसभा चुनाव से पहले रविवार को पटना में महागठबंधन की लंबी बैठक भी हुई थी, जिसमें देर रात तक चुनावी रणनीति पर चर्चा की गई थी।   अब नतीजों का इंतजार बिहार विधानसभा में मतदान प्रक्रिया जारी है और सभी की नजरें अब नतीजों पर टिकी हुई हैं। खास तौर पर पांचवीं सीट को लेकर राजनीतिक समीकरण काफी दिलचस्प बन गए हैं, जिससे परिणाम आने तक सियासी चर्चाएं जारी रहने की संभावना है।  

surbhi मार्च 16, 2026 0
Bihar leaders hold late-night strategy meeting in Patna ahead of Rajya Sabha election voting.
राज्यसभा की 5 सीटों के लिए आज वोटिंग: पटना में देर रात तक चली NDA और महागठबंधन की रणनीति बैठक

  बिहार की सियासत में बढ़ी हलचल बिहार में राज्यसभा की पांच सीटों के लिए आज मतदान होना है। वोटिंग से पहले रविवार को राजधानी पटना में राजनीतिक हलचल तेज रही। सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ने अपने-अपने विधायकों को एकजुट रखने और जीत सुनिश्चित करने के लिए देर रात तक रणनीति बनाई। सूत्रों के मुताबिक चार सीटों पर NDA उम्मीदवारों की जीत लगभग तय मानी जा रही है, जबकि पांचवीं सीट को लेकर मुकाबला अभी भी दिलचस्प बना हुआ है। इसी वजह से दोनों पक्षों ने रात करीब 11 बजे तक बैठकों का दौर जारी रखा।   होटल में महागठबंधन की बैठक रविवार को पटना के एक होटल में विपक्षी गठबंधन की अहम बैठक हुई। इस बैठक की अगुवाई Tejashwi Yadav ने की। बैठक में महागठबंधन के नेताओं के साथ AIMIM और Bahujan Samaj Party के प्रतिनिधि भी शामिल हुए। करीब तीन घंटे तक चली इस बैठक में राज्यसभा चुनाव को लेकर रणनीति पर चर्चा की गई। हालांकि बैठक के बाद तेजस्वी यादव ने मीडिया से बातचीत में चुनावी रणनीति पर ज्यादा कुछ नहीं कहा।   AIMIM से समर्थन की कोशिश बताया जा रहा है कि पांचवीं सीट पर मुकाबला कड़ा होने के कारण महागठबंधन अन्य दलों का समर्थन जुटाने की कोशिश कर रहा है। इसी क्रम में तेजस्वी यादव ने All India Majlis-e-Ittehadul Muslimeen (AIMIM) से भी समर्थन मांगा है। रविवार को AIMIM की ओर से आयोजित इफ्तार कार्यक्रम में तेजस्वी यादव पहुंचे थे, जहां उन्होंने पार्टी नेताओं से मुलाकात कर सहयोग की उम्मीद जताई। राजनीतिक गलियारों में AIMIM विधायकों के रुख को लेकर काफी चर्चा हो रही है।   कांग्रेस का दावा – सभी विधायक साथ महागठबंधन की बैठक के बाद Akhilesh Singh ने कहा कि उनके सभी विधायक मौजूद हैं और कोई भी गायब नहीं है। उन्होंने दावा किया कि विपक्ष पूरी तरह एकजुट है और महागठबंधन के उम्मीदवार की जीत तय है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि NDA के कुछ विधायक संपर्क में नहीं हैं, जिससे सत्ता पक्ष की चिंता बढ़ गई है।   NDA की भी देर रात तक बैठक दूसरी ओर सत्तारूढ़ गठबंधन ने भी देर रात तक रणनीति बैठक की। यह बैठक भाजपा नेता और राज्यसभा उम्मीदवार Nitin Nabin के आवास पर हुई। बैठक में Vijay Sharma, Nityanand Rai और बिहार के उपमुख्यमंत्री Samrat Choudhary समेत कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। नेताओं ने विधायकों को एकजुट रखने और मतदान की रणनीति पर विस्तार से चर्चा की।   वोटिंग के बाद आएगा अंतिम फैसला अब सभी की नजरें आज होने वाली वोटिंग और उसके नतीजों पर टिकी हैं। खासकर पांचवीं सीट को लेकर राजनीतिक मुकाबला काफी दिलचस्प हो गया है। माना जा रहा है कि छोटे दलों और निर्दलीय विधायकों की भूमिका इस सीट के परिणाम को प्रभावित कर सकती है।  

surbhi मार्च 16, 2026 0
Mokama MLA Anant Singh arriving under police security to vote in Bihar Rajya Sabha election.
राज्यसभा चुनाव 2026: जेल में बंद विधायक अनंत सिंह डालेंगे वोट, NDA की पांचवीं सीट की राह हुई आसान

  कोर्ट के फैसले से NDA को मिली बड़ी राहत बिहार में होने वाले राज्यसभा चुनाव से पहले सियासी हलचल तेज हो गई है। मोकामा से विधायक Anant Singh को पटना की विशेष अदालत ने 16 मार्च को होने वाले मतदान में हिस्सा लेने की अनुमति दे दी है। दुलारचंद यादव हत्या मामले में फिलहाल जेल में बंद अनंत सिंह पुलिस सुरक्षा में विधानसभा पहुंचकर वोट डाल सकेंगे। पटना की MP-MLA कोर्ट ने आदेश दिया है कि मतदान के बाद उन्हें तुरंत वापस जेल भेज दिया जाएगा। अदालत के इस फैसले से National Democratic Alliance (NDA) को बड़ी राजनीतिक राहत मिली है।   बिहार में 16 मार्च को होगा मतदान बिहार से राज्यसभा की पांच सीटों के लिए 16 मार्च को मतदान होना है। इन सीटों को लेकर सत्तारूढ़ NDA और विपक्षी महागठबंधन के बीच कड़ी राजनीतिक टक्कर देखने को मिल रही है। मोकामा के विधायक अनंत सिंह Janata Dal (United) से जुड़े हैं और उनका वोट NDA के लिए बेहद अहम माना जा रहा है।   पांचवीं सीट के लिए कड़ा गणित बिहार विधानसभा में किसी भी उम्मीदवार को राज्यसभा पहुंचने के लिए कम से कम 41 विधायकों के समर्थन की जरूरत होती है। 243 सदस्यीय विधानसभा में NDA की चार सीटों पर जीत लगभग तय मानी जा रही है, लेकिन पांचवीं सीट के लिए उसे अतिरिक्त समर्थन जुटाना पड़ रहा है। NDA के पास फिलहाल 38 विधायकों का समर्थन है। ऐसे में अनंत सिंह का वोट गठबंधन के लिए बेहद महत्वपूर्ण हो गया है। यदि उन्हें मतदान की अनुमति नहीं मिलती, तो NDA को विपक्षी खेमे से ज्यादा क्रॉस वोटिंग की जरूरत पड़ती।   पुलिस सुरक्षा में विधानसभा लाए जाएंगे अनंत सिंह अदालत के आदेश के अनुसार अनंत सिंह को Beur Central Jail से पुलिस सुरक्षा में बिहार विधानसभा लाया जाएगा। मतदान पूरा होने के बाद उन्हें वापस जेल भेज दिया जाएगा। राज्यसभा चुनाव में हर वोट की अहमियत को देखते हुए इस फैसले को राजनीतिक रूप से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।   RJD ने भी उतारा उम्मीदवार इस चुनाव में विपक्षी खेमे की ओर से Tejashwi Yadav के नेतृत्व वाली Rashtriya Janata Dal ने भी उम्मीदवार उतारा है। इससे पांचवीं सीट की लड़ाई और दिलचस्प हो गई है। दोनों गठबंधन अपने-अपने विधायकों को एकजुट रखने और समर्थन सुनिश्चित करने में जुटे हुए हैं।   पहले भी जेल से विधानसभा पहुंचे थे अनंत सिंह गौरतलब है कि अनंत सिंह फिलहाल दुलारचंद यादव हत्या मामले में जेल में बंद हैं। इससे पहले भी उन्हें बिहार विधानसभा के बजट सत्र के दौरान विधायक पद की शपथ लेने के लिए जेल से बाहर आने की अनुमति दी गई थी।   मतदान के बाद साफ होगी तस्वीर 16 मार्च को होने वाले मतदान के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि NDA बिहार की सभी पांच राज्यसभा सीटों पर जीत दर्ज कर पाता है या फिर महागठबंधन पांचवीं सीट पर कब्जा जमाने में सफल होता है। फिलहाल अनंत सिंह को वोट देने की अनुमति मिलने से सियासी समीकरण जरूर बदल गए हैं।  

surbhi मार्च 14, 2026 0
Nitish Kumar pats Samrat Choudhary during Samriddhi Yatra event, sparking Bihar CM speculation
बिहार का नया सीएम तय? सम्राट चौधरी की पीठ थपथपाते दिखे नीतीश कुमार, समृद्धि यात्रा में बताया विकास का रोडमैप

  बिहार की राजनीति में उस समय चर्चाएं तेज हो गईं जब मुख्यमंत्री Nitish Kumar ने समृद्धि यात्रा के दौरान मंच पर उपमुख्यमंत्री Samrat Choudhary की पीठ थपथपाते हुए राज्य के विकास की बात कही। इस घटनाक्रम के बाद राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा शुरू हो गई कि क्या बिहार के अगले मुख्यमंत्री को लेकर कोई संकेत दिया गया है।   पूर्णिया और कटिहार में समृद्धि यात्रा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार गुरुवार को अपनी समृद्धि यात्रा के तहत Purnia और Katihar पहुंचे। यहां आयोजित सभाओं में उन्होंने बिहार के विकास के लिए आने वाले पांच वर्षों का रोडमैप जनता के सामने रखा। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क और खेल जैसे क्षेत्रों में बड़े बदलाव की योजना बना रही है। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार के सहयोग से बिहार में विकास की रफ्तार और तेज होगी।   हर प्रखंड में आदर्श स्कूल और डिग्री कॉलेज शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए सरकार हर प्रखंड में आदर्श स्कूल और डिग्री कॉलेज खोलने की योजना पर काम कर रही है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों के छात्रों को अपने इलाके में ही उच्च शिक्षा की बेहतर सुविधा मिल सकेगी।   अस्पतालों को बनाया जाएगा विशेष अस्पताल स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए प्रखंड स्तर के अस्पतालों को विशेष अस्पताल के रूप में विकसित किया जाएगा। साथ ही ग्रामीण सड़कों को दो लेन में बदलने की योजना भी बनाई गई है, ताकि गांवों की कनेक्टिविटी बेहतर हो सके।   पटना में बनेगी आधुनिक स्पोर्ट्स सिटी राजधानी Patna में एक आधुनिक स्पोर्ट्स सिटी बनाने की योजना भी सामने रखी गई है। इसके जरिए खिलाड़ियों को बेहतर प्रशिक्षण और सुविधाएं दी जाएंगी। सरकार खिलाड़ियों को सरकारी नौकरी देने की योजना पर भी काम कर रही है, ताकि खेलों को बढ़ावा मिल सके।   मखाना किसानों के लिए विशेष योजना मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि Makhana उत्पादन से जुड़े किसानों की आय बढ़ाने के लिए विशेष योजनाएं तैयार की जा रही हैं। इससे मिथिलांचल क्षेत्र के किसानों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है।   मंच पर भावुक हुईं मंत्री लेशी सिंह कटिहार में आयोजित कार्यक्रम के दौरान मंत्री Leshi Singh अपने राजनीतिक सफर को याद करते हुए भावुक हो गईं और मंच पर ही रो पड़ीं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कठिन समय में उनका साथ दिया और राजनीति में आगे बढ़ने का अवसर दिया।   सम्राट चौधरी को लेकर बढ़ी चर्चा कार्यक्रम के अंत में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मंच पर मौजूद उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की पीठ थपथपाकर भरोसा जताया कि राज्य में विकास कार्य इसी तरह आगे बढ़ते रहेंगे। इसके बाद राजनीतिक गलियारों में इस बात को लेकर चर्चा तेज हो गई कि क्या यह भविष्य के नेतृत्व को लेकर कोई संकेत है।  

surbhi मार्च 13, 2026 0
Heated exchange between Pappu Yadav and Giriraj Singh during Lok Sabha no-confidence motion debate
लोकसभा में ‘भूंजा’ टिप्पणी पर गरमाई बहस, पप्पू यादव और गिरिराज सिंह में तीखी नोकझोंक

  संसद में अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान उस समय माहौल गर्म हो गया जब Pappu Yadav और Giriraj Singh के बीच तीखी नोकझोंक हो गई। बहस के दौरान दोनों नेताओं के बीच तीखे शब्दों का आदान-प्रदान हुआ, जिसके बाद सदन में कुछ समय के लिए शोरगुल की स्थिति बन गई।   चर्चा के दौरान शुरू हुई तकरार लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव पर बोलते हुए पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव अपना पक्ष रख रहे थे। इसी दौरान बेगूसराय से भाजपा सांसद गिरिराज सिंह ने उन्हें टोक दिया। इस पर पप्पू यादव नाराज हो गए और दोनों नेताओं के बीच तीखी बहस शुरू हो गई। स्थिति को देखते हुए आसन पर बैठे Jagdambika Pal को हस्तक्षेप करना पड़ा। उन्होंने दोनों सांसदों से शांत रहने और विषय पर ही बोलने की अपील की।   ‘मेरे घर आकर भूंजा खाते थे’ वाली टिप्पणी बहस के दौरान पप्पू यादव ने गिरिराज सिंह पर तंज कसते हुए कहा कि जब वह पांच बार सांसद बन चुके थे, तब गिरिराज सिंह पैदा भी नहीं हुए थे। उन्होंने यह भी कहा कि गिरिराज सिंह उनके घर आकर ‘भूंजा’ खाते थे। इसके साथ ही पप्पू यादव ने चुनौती देते हुए कहा कि अगर हिम्मत है तो गिरिराज सिंह निर्दलीय चुनाव लड़कर जीतकर दिखाएं। उनका कहना था कि कई नेता पार्टी के नाम पर चुनाव जीतते हैं, लेकिन असली ताकत जनता के समर्थन से साबित होती है।   अटल सरकार को लेकर भी हुई बहस इस दौरान गिरिराज सिंह ने पलटवार करते हुए पूछा कि Atal Bihari Vajpayee की सरकार के समय पप्पू यादव कहां थे। इस पर पप्पू यादव ने जवाब दिया कि वह उस समय सरकार का हिस्सा रहे हैं और फेडरल डेमोक्रेटिक पार्टी के जरिए सत्ता में शामिल थे। उन्होंने कहा कि वह 1990 से लगातार संसदीय राजनीति में सक्रिय हैं।   जगदंबिका पाल ने संभाला मामला दोनों नेताओं के बीच बढ़ती बहस को देखते हुए उपसभापति जगदंबिका पाल ने तुरंत हस्तक्षेप किया और याद दिलाया कि सदन में अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा चल रही है। उनके हस्तक्षेप के बाद माहौल धीरे-धीरे शांत हुआ और पप्पू यादव ने अपना भाषण आगे जारी रखा।   दोनों नेताओं की राजनीतिक पृष्ठभूमि पूर्णिया से सांसद पप्पू यादव सात बार लोकसभा सदस्य रह चुके हैं। 2024 के चुनाव में कांग्रेस से टिकट नहीं मिलने के बाद उन्होंने Purnia से निर्दलीय चुनाव लड़कर जीत हासिल की थी। वहीं गिरिराज सिंह फिलहाल Begusarai से भाजपा सांसद हैं और उन्हें पार्टी के फायरब्रांड नेताओं में गिना जाता है। वह पहले बिहार सरकार में मंत्री और विधान परिषद सदस्य भी रह चुके हैं तथा केंद्र में भी मंत्री पद संभाल चुके हैं।  

surbhi मार्च 13, 2026 0
Bihar CM Nitish Kumar during Samriddhi Yatra visit to Purnia and Katihar districts.
‘समृद्धि यात्रा’ का तीसरा दिन: पूर्णिया और कटिहार का दौरा करेंगे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार

  बिहार के मुख्यमंत्री Nitish Kumar की ‘समृद्धि यात्रा’ के तीसरे चरण का आज तीसरा दिन है। मधेपुरा में रात्रि विश्राम के बाद मुख्यमंत्री आज सुबह हेलिकॉप्टर से Purnia पहुंचेंगे। इसके बाद वे Katihar का भी दौरा करेंगे। इस दौरान दोनों जिलों में करीब 895 करोड़ रुपये की विकास योजनाओं का शिलान्यास और उद्घाटन किया जाएगा। राज्यसभा के लिए नामांकन दाखिल करने के बाद निकली इस यात्रा को राजनीतिक दृष्टि से भी काफी अहम माना जा रहा है, खासकर इसलिए क्योंकि यह दौरा सीमांचल क्षेत्र के मुस्लिम बहुल इलाकों में हो रहा है।   पूर्णिया में 485 करोड़ की योजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास मुख्यमंत्री पूर्णिया में कुल 485 करोड़ रुपये की योजनाओं का शिलान्यास और उद्घाटन करेंगे। इनमें 321 करोड़ रुपये की लागत वाली 8 योजनाओं का शिलान्यास और 164 करोड़ रुपये की 84 योजनाओं का उद्घाटन शामिल है। दौरे के दौरान मुख्यमंत्री Maa Puran Devi Temple, डेयरी, मत्स्य और पशुपालन प्रशिक्षण केंद्र का निरीक्षण भी करेंगे। इसके अलावा वे Indira Gandhi Stadium पहुंचकर जीविका दीदियों और आम लोगों के साथ जनसंवाद करेंगे। वहीं अधिकारियों के साथ विकास कार्यों की समीक्षा बैठक भी करेंगे।   कटिहार में 410 करोड़ की 443 योजनाएं पूर्णिया के बाद मुख्यमंत्री कटिहार के लिए रवाना होंगे। यहां 181 करोड़ रुपये की लागत वाली 186 योजनाओं का शिलान्यास और 229 करोड़ रुपये की 257 योजनाओं का उद्घाटन किया जाएगा। इसके अलावा मुख्यमंत्री स्थानीय अधिकारियों के साथ विकास कार्यों की समीक्षा करेंगे और ग्रामीणों व योजनाओं के लाभार्थियों से सीधे संवाद भी करेंगे।   चार दिनों में 10 जिलों का दौरा ‘समृद्धि यात्रा’ 10 मार्च से शुरू हुई है और चार दिनों में कोसी-सीमांचल क्षेत्र के 10 जिलों को कवर किया जाएगा। 13 मार्च को मुख्यमंत्री Saharsa और Khagaria का दौरा करेंगे, जबकि 14 मार्च को Begusarai और Sheikhpura जाएंगे।   राज्यसभा और मुख्यमंत्री पद पर सस्पेंस बरकरार राज्यसभा के लिए नामांकन दाखिल करने के बाद शुरू हुई इस यात्रा को राजनीतिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अब तक अपने किसी भी संबोधन में राज्यसभा जाने को लेकर कोई टिप्पणी नहीं की है। मुख्यमंत्री पद छोड़ेंगे या नहीं, इस सवाल पर भी उन्होंने पूरी तरह चुप्पी साध रखी है, जिससे बिहार की राजनीति में अटकलों का दौर जारी है।  

surbhi मार्च 12, 2026 0
Rajya Sabha Deputy Chairman Harivansh Narayan Singh amid speculation of BJP nomination in Rajya Sabha elections 2026
राज्यसभा चुनाव 2026: हरिवंश नारायण सिंह को मिलेगा ‘साइलेंट वफादारी’ का इनाम? BJP के फैसले पर टिकी नजर

  राज्यसभा चुनाव 2026 को लेकर बिहार की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। जेडीयू द्वारा राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह को दोबारा मौका नहीं दिए जाने के बाद अब उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। सियासी गलियारों में चर्चा है कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) उनकी ‘साइलेंट वफादारी’ का इनाम दे सकती है और संभव है कि उन्हें मनोनयन के जरिए फिर से राज्यसभा में भेजा जाए।   नीतीश कुमार के फैसले से बदला सियासी समीकरण जेडीयू ने इस बार हरिवंश नारायण सिंह को राज्यसभा के लिए दोबारा नामित नहीं किया है। उनकी जगह मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने खुद उच्च सदन में जाने का फैसला लेकर सबको चौंका दिया। इसके साथ ही पार्टी ने केंद्रीय मंत्री रामनाथ ठाकुर को तीसरी बार राज्यसभा भेजने का निर्णय लेकर अपनी पुरानी परंपरा भी बदल दी। हरिवंश नारायण सिंह का राज्यसभा कार्यकाल 9 अप्रैल को समाप्त होने वाला है। ऐसे में उनका दोबारा नामांकन न होने से राज्यसभा के उपसभापति पद पर भी चुनाव की संभावना बढ़ गई है।   बीजेपी दे सकती है नया अवसर राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बीजेपी हरिवंश नारायण सिंह को उनकी वफादारी का इनाम दे सकती है। यह भी चर्चा है कि पूर्व मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई के कार्यकाल के बाद खाली होने वाली मनोनीत सीट पर उन्हें मौका मिल सकता है।   मुश्किल दौर में भी मोदी सरकार का दिया साथ हरिवंश नारायण सिंह को बीजेपी के करीब माना जाता है। जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने एनडीए से अलग होकर विपक्षी गठबंधन का दामन थाम लिया था, तब भी हरिवंश ने केंद्र की मोदी सरकार का समर्थन जारी रखा था। यहां तक कि जब 28 मई 2023 को नए संसद भवन के उद्घाटन समारोह का विपक्षी दलों ने बहिष्कार किया था और जेडीयू ने भी इसमें शामिल नहीं होने का फैसला किया था, तब भी हरिवंश नारायण सिंह कार्यक्रम में पहुंचे थे। उन्होंने समारोह के दौरान राष्ट्रपति का संदेश भी पढ़कर सुनाया था।   जेडीयू के भीतर भी हुआ था विवाद इस घटना को लेकर जेडीयू के कुछ नेताओं ने नाराजगी भी जताई थी। पार्टी सांसद ललन सिंह ने उस समय हरिवंश नारायण सिंह के रुख पर तीखी टिप्पणी की थी। हालांकि हरिवंश ने इस विवाद पर सार्वजनिक रूप से कोई प्रतिक्रिया नहीं दी थी। बाद में उन्होंने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मुलाकात कर अपनी स्थिति स्पष्ट की और मामला शांत हो गया।   मोदी-नीतीश के बीच ‘सेतु’ माने जाते हैं हरिवंश दिल्ली के राजनीतिक हलकों में यह भी माना जाता है कि हरिवंश नारायण सिंह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बीच संवाद का महत्वपूर्ण माध्यम रहे हैं। कहा जाता है कि उनकी भूमिका के कारण ही नीतीश कुमार की दोबारा एनडीए में वापसी संभव हो पाई, जिसका फायदा लोकसभा चुनावों में बीजेपी को मिला। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि राज्यसभा चुनाव और उपसभापति पद को लेकर बीजेपी क्या फैसला लेती है और हरिवंश नारायण सिंह के राजनीतिक भविष्य की दिशा क्या होती है।  

surbhi मार्च 10, 2026 0
Nitish Kumar meeting with JDU MLAs and MPs at CM residence in Patna
नीतीश कुमार ने JDU विधायकों और सांसदों की बुलाई बैठक, सीएम फेस पर हो सकती है चर्चा

  Bihar Politics: बिहार की राजनीति में हलचल के बीच मुख्यमंत्री Nitish Kumar ने जेडीयू के विधायकों, सांसदों और एमएलसी की अहम बैठक बुलाई है। यह बैठक शुक्रवार शाम 5 बजे मुख्यमंत्री आवास 1 अणे मार्ग, पटना में आयोजित होगी। राजनीतिक गलियारों में चल रही चर्चाओं के बीच इस बैठक को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राज्यसभा की अटकलों के बीच सियासी हलचल हाल ही में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की चर्चाओं के बाद बिहार की राजनीति में नई हलचल तेज हो गई है। ऐसे में सवाल उठने लगा है कि अगर वे राज्यसभा जाते हैं तो बिहार का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा। इसी वजह से जेडीयू की इस बैठक को काफी अहम माना जा रहा है। माना जा रहा है कि बैठक में संभावित मुख्यमंत्री चेहरे और राजनीतिक समीकरणों पर चर्चा हो सकती है। बीजेपी से इन नामों की चर्चा अगर मुख्यमंत्री पद Bharatiya Janata Party के पास जाता है तो कई नेताओं के नाम चर्चा में हैं। Samrat Choudhary – वर्तमान में बिहार के उपमुख्यमंत्री हैं और सरकार में अहम भूमिका निभा रहे हैं।   Nityanand Rai – केंद्रीय गृह राज्य मंत्री और यादव समाज से आते हैं।   Vijay Kumar Sinha – संगठन में मजबूत पकड़ और आरएसएस से करीबी माने जाते हैं।   Nitish Mishra – पूर्व मुख्यमंत्री Jagannath Mishra के बेटे और भाजपा के प्रमुख नेताओं में शामिल हैं।   जेडीयू के संभावित चेहरे अगर मुख्यमंत्री पद Janata Dal (United) के पास रहता है तो पार्टी के अंदर भी कई नाम चर्चा में हैं। Vijay Kumar Chaudhary – जेडीयू के वरिष्ठ नेता और कई महत्वपूर्ण विभागों के मंत्री रह चुके हैं।   Shravan Kumar – नालंदा से लगातार जीतते आ रहे हैं और मुख्यमंत्री के करीबी माने जाते हैं।   Shreyasi Singh – युवा और चर्चित चेहरा, खेल जगत से भी पहचान।   Gayatri Devi – सीतामढ़ी से लगातार तीसरी बार विधायक बनी हैं।

surbhi मार्च 6, 2026 0
Popular post
शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2025 का रिजल्ट घोषित, अनुज अग्निहोत्री बने टॉपर, 958 उम्मीदवार सफल

UPSC CSE Result 2025: देश की सबसे प्रतिष्ठित परीक्षाओं में से एक Civil Services Examination का अंतिम परिणाम जारी कर दिया गया है। Union Public Service Commission ने शुक्रवार 6 मार्च 2026 को UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2025 का फाइनल रिजल्ट घोषित किया। इस परीक्षा में अनुज अग्निहोत्री ने पहला स्थान हासिल किया है। परीक्षा में शामिल हुए उम्मीदवार अब आयोग की आधिकारिक वेबसाइट UPSC Official Website पर जाकर फाइनल मेरिट लिस्ट देख सकते हैं। 958 उम्मीदवारों का हुआ चयन यूपीएससी द्वारा जारी फाइनल रिजल्ट के अनुसार इस वर्ष कुल 958 उम्मीदवारों ने सफलता हासिल की है। चयनित उम्मीदवारों की नियुक्ति विभिन्न केंद्रीय सेवाओं में उनकी रैंक और पसंद के आधार पर की जाएगी। फाइनल रिजल्ट उम्मीदवारों के लिखित परीक्षा (Main Exam) और पर्सनैलिटी टेस्ट (Interview) में प्रदर्शन के आधार पर तैयार किया गया है। इन प्रतिष्ठित सेवाओं के लिए होता है चयन यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा के माध्यम से देश की कई प्रतिष्ठित सेवाओं के लिए अधिकारियों का चयन किया जाता है। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं— भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS)   भारतीय पुलिस सेवा (IPS)   भारतीय विदेश सेवा (IFS)   भारतीय राजस्व सेवा (IRS)   भारतीय व्यापार सेवा सहित अन्य ग्रुप A और ग्रुप B सेवाएं   979 पदों को भरने का लक्ष्य सिविल सेवा परीक्षा 2025 के माध्यम से केंद्र सरकार के विभिन्न विभागों में कुल 979 रिक्त पदों को भरा जाना है। ऐसे चेक करें UPSC CSE 2025 का रिजल्ट उम्मीदवार नीचे दिए गए स्टेप्स के माध्यम से अपना रिजल्ट देख सकते हैं— आधिकारिक वेबसाइट upsc.gov.in पर जाएं   होमपेज पर “Examination” टैब पर क्लिक करें   “Active Examinations” या “What’s New” सेक्शन में जाएं   Civil Services Examination Final Result 2025 लिंक पर क्लिक करें   मेरिट लिस्ट की PDF खुल जाएगी   Ctrl + F दबाकर अपना नाम या रोल नंबर सर्च करें   15 दिन में जारी होगी मार्कशीट यूपीएससी के अनुसार सभी उम्मीदवारों की मार्कशीट रिजल्ट जारी होने के 15 दिनों के भीतर आयोग की वेबसाइट पर अपलोड कर दी जाएगी। उम्मीदवार इसे 30 दिनों तक ऑनलाइन डाउनलोड कर सकेंगे। पिछले साल का कट-ऑफ पिछले वर्ष का अंतिम कट-ऑफ इस प्रकार था— जनरल: 87.98   EWS: 85.92   OBC: 87.28   SC: 79.03   ST: 74.23   आयु सीमा क्या है यूपीएससी की अधिसूचना के अनुसार उम्मीदवार की आयु 1 अगस्त 2024 तक कम से कम 21 वर्ष और अधिकतम 32 वर्ष होनी चाहिए। यानी उम्मीदवार का जन्म 2 अगस्त 1992 से 1 अगस्त 2003 के बीच होना चाहिए। यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा भारत की सबसे कठिन और प्रतिष्ठित प्रतियोगी परीक्षाओं में से एक मानी जाती है। हर साल लाखों उम्मीदवार इस परीक्षा में शामिल होते हैं, लेकिन तीन चरणों—प्रारंभिक परीक्षा, मुख्य परीक्षा और इंटरव्यू—को पार कर बहुत कम उम्मीदवार ही अंतिम सूची में जगह बना पाते हैं। UPSC CSE 2025 टॉप-20 उम्मीदवारों की सूची रैंक रोल नंबर नाम 1 1131589 अनुज अग्निहोत्री 2 4000040 राजेश्वरी सुवे एम 3 3512521 अकांश ढुल 4 0834732 राघव झुनझुनवाला 5 0409847 ईशान भटनागर 6 6410067 जिनिया अरोड़ा 7 0818306 ए आर राजा मोहिद्दीन 8 0843487 पक्षल सेक्रेटरी 9 0831647 आस्था जैन 10 1523945 उज्ज्वल प्रियांक 11 1512091 यशस्वी राज वर्धन 12 0840280 अक्षित भारद्वाज 13 7813999 अनन्या शर्मा 14 5402316 सुरभि यादव 15 3507500 सिमरनदीप कौर 16 0867445 मोनिका श्रीवास्तव 17 0829589 चितवन जैन 18 5604518 श्रुति आर 19 0105602 निसार दिशांत अमृतलाल 20 6630448 रवि राज

Top week

Crowd chaos at Nalanda Sheetla Temple during religious event causing stampede-like situation and casualties
बिहार

नालंदा मंदिर हादसा: भीड़ ने ली 8 महिलाओं की जान, धार्मिक आयोजन में मची भगदड़ जैसी स्थिति

surbhi मार्च 31, 2026 0