Bollywood controversy

Alia Bhatt
आलिया भट्ट संग विवाद की अफवाहों पर बॉबी देओल ने तोड़ी चुप्पी, बोले- ‘मैं खुद हैरान था’

मुंबई, एजेंसियां। बॉलीवुड अभिनेता बॉबी देओल ने अभिनेत्री अलिअ भट्ट के साथ कथित विवाद की खबरों पर पहली बार खुलकर प्रतिक्रिया दी है। पिछले कुछ समय से फिल्म Alpha की शूटिंग के दौरान दोनों कलाकारों के बीच अनबन की चर्चाएं सोशल मीडिया और मनोरंजन जगत में सुर्खियां बनी हुई थीं। अब बॉबी देओल ने इन अफवाहों को पूरी तरह निराधार बताया है।   दोस्त के मैसेज से पता चली अफवाह हाल ही में एक टीवी शो के दौरान बॉबी देओल ने कहा कि उन्हें इस कथित विवाद के बारे में तब पता चला, जब उनके एक दोस्त ने सोशल मीडिया पर वायरल हो रही खबर का स्क्रीनशॉट भेजा। उन्होंने कहा कि यह देखकर वह खुद भी हैरान रह गए थे। बॉबी ने कहा कि लोग बिना किसी आधार के कहानियां बना देते हैं और अफवाहों को सच की तरह पेश करने लगते हैं।   आलिया की तारीफ करते हुए बोले- बेहतरीन अभिनेत्री हैं बॉबी देओल ने बताया कि आलिया भट्ट के साथ काम करने का अनुभव बेहद शानदार रहा। उन्होंने कहा कि आलिया एक प्रतिभाशाली और मेहनती कलाकार हैं, जो हर सीन और एक्शन सीक्वेंस की पूरी तैयारी करके सेट पर आती हैं। बॉबी के मुताबिक, शूटिंग के दौरान दोनों के बीच किसी तरह का विवाद नहीं हुआ और वे समझ नहीं पाए कि ऐसी खबरें आखिर कहां से आईं।   दूसरी फिल्म ऑफर होने की खबर भी बताई गलत अभिनेता ने उन खबरों को भी खारिज किया, जिनमें दावा किया गया था कि विवाद के कारण निर्माता-निर्देशक Aditya Chopra ने उन्हें दूसरी फिल्म ऑफर की थी। बॉबी ने कहा कि इस तरह की बातें पूरी तरह मनगढ़ंत हैं और उनका वास्तविकता से कोई संबंध नहीं है।   ‘बंदर’ से बड़े पर्दे पर लौटेंगे बॉबी वर्कफ्रंट की बात करें तो बॉबी देओल जल्द ही निर्देशक Anurag Kashyap की फिल्म Bandar में नजर आएंगे। इस फिल्म में Sanya Malhotra, Sapna Pabbi और Saba Azad भी अहम भूमिकाओं में हैं। फिल्म 5 जून को सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है।

Unknown जून 1, 2026 0
Chori Chori Chupke Chupke film scene with Salman Khan amid controversy over underworld financing links
‘चोरी चोरी चुपके चुपके’ और अंडरवर्ल्ड कनेक्शन: Ram Gopal Varma के खुलासे से फिर चर्चा में पुराना विवाद

बॉलीवुड की चर्चित फिल्म Chori Chori Chupke Chupke एक बार फिर सुर्खियों में है। इस बार वजह बनी है फिल्ममेकर Ram Gopal Varma का हालिया खुलासा, जिसमें उन्होंने बताया कि इस फिल्म के निर्माण के दौरान किस तरह अंडरवर्ल्ड कनेक्शन सामने आए थे। कैसे शुरू हुआ प्रोजेक्ट राम गोपाल वर्मा ने पत्रकार Hussain Zaidi से बातचीत में बताया कि फिल्म के फाइनेंसर Bharat Shah को एक ऐसे शख्स ने संपर्क किया, जिसने दावा किया कि उसके पास Salman Khan की डेट्स हैं। जब इस बात की पुष्टि सलमान खान से हुई, तो भरत शाह को भरोसा हो गया और उन्होंने फिल्म में निवेश कर दिया। इसके बाद फिल्म की शूटिंग शुरू हो गई। अंडरवर्ल्ड कनेक्शन से मचा हड़कंप हालात तब बिगड़े जब बाद में पता चला कि फिल्म के निर्माता Nazim Rizvi के कथित संबंध अंडरवर्ल्ड डॉन Chhota Shakeel से थे। राम गोपाल वर्मा के मुताबिक, उस समय भरत शाह को लगा कि वह एक वैध बिजनेस कर रहे हैं और निर्माता के निजी संबंधों से उनका कोई लेना-देना नहीं है। फिरौती कॉल ने बढ़ाई मुश्किलें मामला और गंभीर तब हुआ जब फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े एक कारोबारी को 5 करोड़ रुपये की फिरौती की कॉल आई। मदद के लिए उसने भरत शाह से संपर्क किया, यह सोचकर कि रिजवी के अंडरवर्ल्ड कनेक्शन से समाधान निकल सकता है। बातचीत के बाद यह रकम घटाकर 2 करोड़ रुपये कर दी गई, लेकिन इससे इंडस्ट्री में डर और तनाव का माहौल बन गया। पुलिस कार्रवाई और गिरफ्तारी आखिरकार 2001 में मुंबई पुलिस ने Bharat Shah और Nazim Rizvi को गिरफ्तार कर लिया। भरत शाह को अंडरवर्ल्ड कनेक्शन की जानकारी छुपाने का दोषी माना गया और एक साल की सजा सुनाई गई। हालांकि, पहले से 14 महीने हिरासत में रहने के कारण उन्हें तुरंत रिहा कर दिया गया। वहीं नाजिम रिजवी और उनके सहयोगियों को जबरन वसूली और अंडरवर्ल्ड से संबंध रखने के मामले में दोषी ठहराया गया और छह साल की सजा सुनाई गई। बॉलीवुड फाइनेंसिंग का काला सच यह मामला उस दौर की एक बड़ी सच्चाई को उजागर करता है, जब फिल्म इंडस्ट्री में फाइनेंसिंग के जरिए अंडरवर्ल्ड का दखल चर्चा में था। फिल्म में Preity Zinta और Rani Mukerji भी अहम भूमिकाओं में थीं, और यह फिल्म अपने विषय के साथ-साथ विवादों के कारण भी याद की जाती है।  

surbhi अप्रैल 20, 2026 0
Mukesh Khanna reacts to Ranveer Singh casting as Shaktimaan
‘शक्तिमान’ पर टकराव: रणवीर सिंह को रोल देने से इनकार, मुकेश खन्ना बोले–करोड़ों का नुकसान भी मंजूर

  मुंबई: भारतीय टेलीविजन के आइकॉनिक सुपरहीरो ‘शक्तिमान’ को लेकर लंबे समय से चल रही चर्चाओं के बीच अब एक बार फिर विवाद गहरा गया है। ‘शक्तिमान’ के मूल अभिनेता Mukesh Khanna ने स्पष्ट कर दिया है कि वह इस किरदार के लिए Ranveer Singh को कास्ट करने के पक्ष में नहीं हैं, भले ही इसके लिए उन्हें भारी आर्थिक नुकसान क्यों न उठाना पड़े। ‘रणवीर बेहतरीन अभिनेता हैं, लेकिन शक्तिमान नहीं’ एक इंटरव्यू में Mukesh Khanna ने Ranveer Singh की तारीफ करते हुए कहा कि वह एक शानदार और ऊर्जा से भरपूर अभिनेता हैं, जिन्होंने ‘गली बॉय’ और खिलजी जैसे किरदारों में दमदार प्रदर्शन किया है। लेकिन उनके अनुसार, ‘शक्तिमान’ का किरदार निभाने के लिए सिर्फ एक्टिंग ही नहीं, बल्कि एक खास व्यक्तित्व और सादगी भरी छवि भी जरूरी है। ‘स्टार नहीं, सही चेहरा चाहिए’ खन्ना ने साफ कहा कि वह इस प्रोजेक्ट में किसी बड़े स्टार को नहीं, बल्कि एक नए चेहरे को मौका देना चाहते हैं। उनका मानना है कि पहले से स्थापित छवि वाला कोई भी अभिनेता इस किरदार के साथ न्याय नहीं कर पाएगा। उन्होंने कहा कि अगर उन्हें पूरी स्वतंत्रता मिले, तो वह पूरे देश में ऑडिशन लेकर एक ऐसा चेहरा चुनेंगे जो ‘शक्तिमान’ की सादगी और नैतिकता को सही मायने में दर्शा सके। करोड़ों के ऑफर को भी ठुकराया Mukesh Khanna ने यह भी खुलासा किया कि Sony Pictures इस प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने के लिए उन्हें करोड़ों रुपये देने को तैयार है। इसके बावजूद वह अपने फैसले पर अडिग हैं। उनका कहना है कि यह उनके लिए आर्थिक नुकसान का कारण बन सकता है, लेकिन वह ‘शक्तिमान’ की मूल भावना से समझौता नहीं करेंगे। अक्षय कुमार पर भी साधा निशाना बातचीत के दौरान उन्होंने ऐतिहासिक किरदारों के संदर्भ में Akshay Kumar पर भी अप्रत्यक्ष टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि ऐसे रोल में केवल विग या कॉस्ट्यूम काफी नहीं होते, बल्कि किरदार की शख्सियत भी उतनी ही अहम होती है। रणवीर खुद मिलने पहुंचे थे इस विवाद में एक दिलचस्प पहलू यह भी सामने आया कि Ranveer Singh खुद ‘शक्तिमान’ का रोल पाने के लिए Mukesh Khanna से मिलने पहुंचे थे। यह मुलाकात Sony Pictures की ओर से आयोजित की गई थी, जहां रणवीर ने इस किरदार के लिए अपनी दावेदारी पेश की थी। आदित्य चोपड़ा ने भी मांगे थे राइट्स खन्ना ने यह भी खुलासा किया कि वर्षों पहले निर्माता Aditya Chopra ने ‘शक्तिमान’ के राइट्स लेने में रुचि दिखाई थी। हालांकि, उन्होंने यह प्रस्ताव ठुकरा दिया क्योंकि वह नहीं चाहते थे कि इस किरदार को उसकी मूल भावना से अलग किसी और दिशा में ले जाया जाए।  

surbhi अप्रैल 18, 2026 0
Akshay Kumar speaking about Hera Pheri 3 delay amid ongoing disputes in Bollywood project
‘हेरा फेरी 3’ पर लगा ब्रेक, अक्षय कुमार ने दिया बड़ा अपडेट–फिलहाल नहीं बन रही फिल्म, फैंस निराश

  मुंबई: बॉलीवुड की सबसे लोकप्रिय कॉमेडी फ्रेंचाइजी में से एक ‘हेरा फेरी’ के तीसरे पार्ट का इंतजार कर रहे फैंस के लिए बड़ा झटका सामने आया है। अभिनेता Akshay Kumar ने साफ कर दिया है कि ‘Hera Pheri 3’ फिलहाल नहीं बन रही है। यह बयान ऐसे समय आया है जब उनकी फिल्म Bhoot Bangla रिलीज हो चुकी है और फैंस उनसे लगातार इस बहुप्रतीक्षित फिल्म को लेकर सवाल कर रहे थे। क्या बोले अक्षय कुमार? एक इंटरव्यू के दौरान अक्षय कुमार ने कहा कि “दुर्भाग्यवश, ‘हेरा फेरी 3’ अभी नहीं बन रही है।” उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि इस खबर से उन्हें खुद भी झटका लगा था। अक्षय ने संकेत दिया कि फिल्म कई तरह की जटिलताओं में उलझी हुई है–हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि कुछ बातें वह सार्वजनिक तौर पर नहीं बता सकते। उनके मुताबिक, “ऐसा नहीं है कि हम तीनों साथ नहीं हैं। हम साथ हैं, लेकिन कई समझौते और मुद्दे हैं जो प्रोजेक्ट को आगे बढ़ने से रोक रहे हैं।” विवादों में फंसी रही फिल्म ‘हेरा फेरी 3’ लंबे समय से विवादों में घिरी हुई है। खासकर Paresh Rawal के अचानक प्रोजेक्ट से अलग होने की खबर ने सभी को चौंका दिया था। इसके अलावा, फिल्म के कॉपीराइट को लेकर निर्माता Firoz Nadiadwala और एक साउथ फिल्म प्रोड्यूसर के बीच कानूनी विवाद भी सामने आया, जिससे प्रोजेक्ट और अटक गया। फेमस तिकड़ी का क्या होगा? फैंस लंबे समय से Suniel Shetty, अक्षय कुमार और परेश रावल की आइकॉनिक तिकड़ी को फिर से पर्दे पर देखने का इंतजार कर रहे हैं। 2000 में रिलीज हुई Hera Pheri और 2006 की Phir Hera Pheri ने बाबूराव, राजू और श्याम के किरदारों को अमर बना दिया था। “बुढ़ापा न आ जाए…” अक्षय कुमार ने हल्के-फुल्के अंदाज में कहा कि उम्मीद है फिल्म बनने में इतनी देरी न हो जाए कि “बुढ़ापा आ जाए।” उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया कि सही समय आने पर फिल्म जरूर बनेगी, लेकिन फिलहाल इसके लिए इंतजार करना पड़ेगा। फैंस को बड़ा झटका इस अपडेट के बाद सोशल मीडिया पर फैंस की निराशा साफ दिखाई दे रही है। लंबे समय से इस फिल्म को लेकर जो उम्मीदें थीं, वे फिलहाल टूटती नजर आ रही हैं।  

surbhi अप्रैल 18, 2026 0
Rajesh Khanna news
13 साल बाद फिर सुर्खियों में राजेश खन्ना की निजी जिंदगी,कोर्ट ने अनीता आडवाणी की याचिका की खारिज

मुंबई, एजेंसियां। हिंदी सिनेमा के पहले सुपरस्टार राजेश खन्ना की निजी जिंदगी एक बार फिर सुर्खियों में है। दिवंगत अभिनेता के साथ अपने रिश्ते को विवाह का कानूनी दर्जा दिलाने की मांग को लेकर अभिनेत्री अनीता आडवाणी ने बॉम्बे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, लेकिन अदालत ने उनकी याचिका खारिज कर दी है। इस फैसले के साथ कोर्ट ने साफ संकेत दे दिया है कि फिलहाल उनके रिश्ते को शादी के रूप में मान्यता नहीं दी जाएगी।   क्या है पूरा मामला? यह विवाद राजेश खन्ना के निधन के बाद शुरू हुई लंबी कानूनी लड़ाई का हिस्सा है। अनीता आडवाणी का दावा रहा है कि वह अभिनेता के साथ लंबे समय तक रिश्ते में थीं और उनका संबंध “शादी जैसा” था। उन्होंने यह भी आरोप लगाया था कि राजेश खन्ना के निधन के बाद उन्हें उनके मशहूर बंगले ‘आशीर्वाद’ से बाहर निकाल दिया गया।   हाईकोर्ट ने बरकरार रखा निचली अदालत का फैसला बॉम्बे हाईकोर्ट ने डिंडोशी सिविल कोर्ट के पुराने फैसले को सही ठहराते हुए अनीता आडवाणी की अपील खारिज कर दी। यह अपील उन्होंने साल 2017 में दायर की थी, जब निचली अदालत ने उनकी सिविल सूट को खारिज कर दिया था। मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने अनीता आडवाणी के वकीलों के साथ-साथ डिंपल कपाड़िया, ट्विंकल खन्ना और अक्षय कुमार की ओर से रखे गए पक्ष को भी सुना।   पहले भी मिल चुका है कानूनी झटका गौरतलब है कि साल 2015 में भी बॉम्बे हाईकोर्ट ने अनीता आडवाणी द्वारा दायर घरेलू हिंसा से जुड़ी याचिका खारिज कर दी थी। तब अदालत ने कहा था कि उनका रिश्ता “in the nature of marriage” की कानूनी परिभाषा में नहीं आता।   अब क्या आगे? फिलहाल, अनीता आडवाणी को इस फैसले से बड़ा कानूनी झटका लगा है। हालांकि, अदालत का विस्तृत आदेश अभी आना बाकी है, इसलिए अब सबकी नजर आगे आने वाली कानूनी टिप्पणी पर टिकी है।

Unknown अप्रैल 1, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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Former Tamil Nadu BJP leaders resign and join Annamalai’s new political movement in Chennai
राजनीति

तमिलनाडु बीजेपी में बढ़ी टूट, अन्नामलाई के बाद उपाध्यक्ष और प्रदेश सचिव ने भी छोड़ी पार्टी

Deepshikha जून 6, 2026 0