नई दिल्ली: टाटा समूह की होल्डिंग कंपनी टाटा संस (Tata Sons) एक बार फिर सुर्खियों में है। कंपनी के सबसे बड़े अल्पसंख्यक (Minority) शेयरधारक शापूरजी पल्लोनजी (SP) ग्रुप ने अपनी हिस्सेदारी के एक हिस्से को आधार बनाकर ₹25,500 करोड़ के बॉन्ड जारी करने की योजना बनाई है। इस कदम के बाद टाटा संस की संभावित लिस्टिंग (IPO) को लेकर चर्चाएं एक बार फिर तेज हो गई हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, SP Group सोमवार को यह बॉन्ड इश्यू लॉन्च कर सकता है। इस बॉन्ड की शर्तों में टाटा संस की भविष्य की लिस्टिंग या फिर SP Group और टाटा संस के बीच हिस्सेदारी को लेकर किसी समझौते की संभावना भी शामिल बताई जा रही है। क्या है पूरा मामला? टाटा संस में SP Group की 18.37% हिस्सेदारी है, जिससे वह कंपनी का सबसे बड़ा माइनॉरिटी शेयरधारक है। रिपोर्ट के मुताबिक, ग्रुप इस हिस्सेदारी के एक हिस्से का इस्तेमाल ₹25,500 करोड़ जुटाने के लिए करेगा। इसके लिए Zero Coupon, Unlisted और Unrated Non-Convertible Debentures (NCDs) जारी किए जाएंगे। बताया गया है कि Equigene Investments इन बॉन्ड्स को जारी करेगी, जबकि Cyrus Investments टाटा संस के शेयरों को गिरवी (Collateral) के रूप में रखेगी। IPO की शर्त भी जुड़ी रिपोर्ट के अनुसार, इस बॉन्ड इश्यू की शर्तों में यह भी शामिल है कि 18 महीने के भीतर या तो— टाटा संस अपने IPO की घोषणा करे, या SP Group और टाटा संस के बीच हिस्सेदारी को लेकर कोई समाधान या समझौता हो। हालांकि, इसका यह अर्थ नहीं है कि टाटा संस का IPO तय हो गया है। यह केवल बॉन्ड इश्यू से जुड़ी एक संभावित शर्त बताई जा रही है। RBI के नियमों ने बढ़ाई हलचल हाल ही में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने अपर-लेयर NBFC के लिए नए नियामकीय प्रावधान लागू किए हैं। इन नियमों के अनुसार, जिन कंपनियों की कुल परिसंपत्तियां (Assets) ₹1 लाख करोड़ से अधिक हैं और जिन्हें Upper Layer NBFC के रूप में वर्गीकृत किया गया है, उन्हें सूचीबद्ध (Listed) होना पड़ सकता है। टाटा संस की परिसंपत्तियां ₹1.75 लाख करोड़ से अधिक बताई जाती हैं और RBI ने उसे पहले ही Upper Layer NBFC के रूप में वर्गीकृत किया है। इसी वजह से कंपनी की संभावित लिस्टिंग को लेकर चर्चाएं लगातार बनी हुई हैं। टाटा समूह के भीतर भी अलग-अलग राय टाटा संस की लिस्टिंग को लेकर समूह के भीतर भी अलग-अलग मत सामने आते रहे हैं। पहले Tata Trusts ने प्रस्ताव पारित कर कंपनी को अनलिस्टेड बनाए रखने का समर्थन किया था। वहीं, कंपनी के उपाध्यक्ष वेणु श्रीनिवासन और विजय सिंह ने लिस्टिंग को कंपनी और निवेशकों के लिए फायदेमंद बताया था। दूसरी ओर, Tata Trusts के चेयरमैन नोएल टाटा सार्वजनिक रूप से कंपनी की लिस्टिंग का विरोध कर चुके हैं। कब आएगा बॉन्ड इश्यू? रिपोर्ट्स के अनुसार— बॉन्ड इश्यू सोमवार को लॉन्च किया जा सकता है। अगले सप्ताह इसके सेटलमेंट की प्रक्रिया पूरी होने की संभावना है। हालांकि, इस पूरे मामले पर SP Group की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। निवेशकों की नजर आगे की घटनाओं पर विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भविष्य में टाटा संस की लिस्टिंग को लेकर कोई ठोस कदम उठाया जाता है, तो यह भारतीय कॉरपोरेट इतिहास की सबसे चर्चित घटनाओं में से एक हो सकता है। फिलहाल बाजार की नजर RBI के नियामकीय रुख, SP Group की रणनीति और टाटा समूह के अगले फैसलों पर बनी हुई है।
मुंबई: घरेलू शेयर बाजार ने लगातार दूसरे कारोबारी दिन मजबूत शुरुआत की। अमेरिका और ईरान के बीच जारी बातचीत से भू-राजनीतिक तनाव कम होने और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट का सकारात्मक असर भारतीय शेयर बाजार पर भी देखने को मिला। गुरुवार को शुरुआती कारोबार में बीएसई सेंसेक्स करीब 500 अंक तक उछल गया, जबकि एनएसई निफ्टी 50 भी 24,150 अंक के करीब पहुंच गया। बाजार में सबसे ज्यादा खरीदारी आईटी शेयरों में देखने को मिली, जबकि व्यापक बाजार (Broader Market) में भी सकारात्मक माहौल बना रहा। सेंसेक्स और निफ्टी में मजबूत शुरुआत सुबह करीब 9:40 बजे तक— बीएसई सेंसेक्स 493.71 अंक यानी 0.64% की बढ़त के साथ 77,416.35 अंक पर कारोबार कर रहा था। निफ्टी 50 143.85 अंक यानी 0.60% चढ़कर 24,149.70 अंक पर पहुंच गया। वहीं, शुरुआती कारोबार में भारतीय रुपया भी मजबूती के साथ कारोबार करता दिखा। आईटी शेयरों में जोरदार खरीदारी बाजार की तेजी में सबसे बड़ा योगदान आईटी सेक्टर का रहा। Infosys के शेयरों में 3 प्रतिशत से अधिक की तेजी दर्ज की गई, जिससे यह सेंसेक्स के सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाले शेयरों में शामिल रहा। इसके अलावा— HCL Technologies TCS Tech Mahindra के शेयरों में भी लगभग 2 प्रतिशत तक की बढ़त देखने को मिली। आईटी शेयरों में आई इस तेजी ने पूरे बाजार की धारणा को मजबूत किया। Adani Enterprises सहित कई दिग्गज शेयरों में बढ़त आईटी कंपनियों के अलावा Adani Enterprises सहित कई अन्य प्रमुख शेयरों में भी निवेशकों की अच्छी खरीदारी देखने को मिली, जिससे प्रमुख सूचकांकों को मजबूती मिली। हालांकि, सभी शेयरों में तेजी नहीं रही। Bajaj Finance के शेयरों में 1 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई और यह सेंसेक्स में सबसे अधिक नुकसान उठाने वाला शेयर रहा। ब्रॉडर मार्केट में भी दिखी मजबूती केवल बड़े शेयर ही नहीं, बल्कि मिडकैप और स्मॉलकैप कंपनियों में भी निवेशकों का उत्साह देखने को मिला। निफ्टी मिडकैप 100 करीब 0.3% मजबूत रहा। निफ्टी स्मॉलकैप 100 में भी लगभग 0.3% की बढ़त दर्ज की गई। सेक्टोरल इंडेक्स की बात करें तो— निफ्टी आईटी लगभग 3% चढ़ा। निफ्टी रियल्टी में करीब 1% की तेजी रही। निफ्टी मेटल इंडेक्स भी लगभग 1% मजबूत हुआ। एनएसई पर कारोबार के दौरान लगभग— 1,818 शेयरों में तेजी, 586 शेयरों में गिरावट, जबकि 99 शेयर बिना किसी बदलाव के कारोबार करते नजर आए। यह आंकड़े बाजार में व्यापक खरीदारी का संकेत देते हैं। कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से मिला समर्थन विशेषज्ञों के अनुसार बाजार की तेजी के पीछे सबसे बड़ा कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में आई नरमी है। ब्रेंट क्रूड का भाव करीब 1.06 प्रतिशत गिरकर 70.81 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। बताया जा रहा है कि अमेरिका और ईरान के बीच कतर की राजधानी दोहा में जारी वार्ता से निवेशकों की चिंता कुछ कम हुई है। दोनों देशों के प्रतिनिधि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से सामान्य रूप से संचालित करने और ईरान के फ्रीज किए गए फंड को जारी करने जैसे मुद्दों पर चर्चा कर रहे हैं। यदि बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ती है, तो वैश्विक ऊर्जा बाजार में स्थिरता आने की संभावना बढ़ सकती है। निवेशकों की नजर आगे के संकेतों पर विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले कारोबारी सत्रों में निवेशकों की नजर वैश्विक आर्थिक घटनाक्रम, कच्चे तेल की कीमतों, विदेशी निवेशकों (FII) की गतिविधियों और कंपनियों के तिमाही नतीजों पर रहेगी। यही कारक आगे बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
नई दिल्ली: भारतीय SaaS कंपनी Zoho के सह-संस्थापक और मुख्य वैज्ञानिक श्रीधर वेम्बु ने एक दिलचस्प अनुभव साझा करते हुए बताया कि कैसे उनके एक ग्राहक ने सिर्फ Zoho का नाम लेकर Microsoft से भारी डिस्काउंट हासिल कर लिया। वेम्बु ने इस घटना को वर्तमान AI प्रतिस्पर्धा से जोड़ते हुए कहा कि किसी भी बाजार में मजबूत विकल्प (Competition) होना बेहद जरूरी है, क्योंकि प्रतिस्पर्धा ही ग्राहकों के हितों की रक्षा करती है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट में दावा किया कि उनके एक भारतीय ग्राहक को Microsoft Office लाइसेंस रिन्यू कराने के दौरान अचानक काफी अधिक कीमत चुकाने के लिए कहा गया। लेकिन जैसे ही ग्राहक ने Microsoft को बताया कि वह Zoho Office Suite पर शिफ्ट होने पर विचार कर रहा है, कंपनी ने कथित तौर पर लाइसेंस की कीमत में लगभग 90 प्रतिशत तक की कटौती कर दी। हालांकि, इस दावे पर Microsoft की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ग्राहक ने सिर्फ Zoho का नाम लिया और बदल गई कीमत श्रीधर वेम्बु के मुताबिक, संबंधित ग्राहक पहले से Zoho के कुछ अन्य प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल कर रहा था। जब Microsoft Office के लाइसेंस का नवीनीकरण कराने का समय आया, तो उसे पहले की तुलना में काफी अधिक कीमत बताई गई। इसके बाद ग्राहक ने Microsoft के प्रतिनिधियों से कहा कि वह Zoho Office Suite को विकल्प के रूप में देख रहा है। वेम्बु का दावा है कि इतना सुनते ही Microsoft ने अपने लाइसेंस की कीमत में करीब 90% तक की कमी कर दी। उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा कि ग्राहक ने बाद में उन्हें धन्यवाद देते हुए बताया कि "Zoho खरीदे बिना ही उसके काफी पैसे बच गए।" AI की प्रतिस्पर्धा से जोड़ा पूरा मामला श्रीधर वेम्बु ने इस उदाहरण का इस्तेमाल मौजूदा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की प्रतिस्पर्धा को समझाने के लिए किया। उनका कहना था कि आज अमेरिकी AI कंपनियों को चीनी ओपन-सोर्स AI मॉडल्स से कड़ी चुनौती मिल रही है और यही प्रतिस्पर्धा पूरे उद्योग के लिए सकारात्मक साबित हो सकती है। उन्होंने इशारा किया कि जब किसी बड़ी कंपनी को मजबूत विकल्पों का सामना करना पड़ता है, तो उसे अपने उत्पादों की कीमत, गुणवत्ता और सेवाओं में सुधार करना पड़ता है। इसका सीधा फायदा ग्राहकों को मिलता है। "अगली बार Zoho का नाम जरूर लेना" अपने पोस्ट में वेम्बु ने हल्के-फुल्के अंदाज में सलाह भी दी कि अगर कोई Microsoft Office का लाइसेंस रिन्यू करा रहा है, तो उसे Zoho का जिक्र जरूर करना चाहिए। उनका कहना था कि प्रतिस्पर्धा कई बार ग्राहकों के लिए बेहतर डील दिलाने में मददगार साबित होती है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य केवल यह दिखाना था कि बाजार में विकल्प मौजूद होना क्यों जरूरी है। एकाधिकार पर उठाए सवाल वेम्बु ने अपने पोस्ट में पुराने एंटी-ट्रस्ट मामलों का जिक्र करते हुए कहा कि किसी भी कंपनी का बाजार पर अत्यधिक नियंत्रण ग्राहकों के हित में नहीं होता। उनके अनुसार, जब किसी सेक्टर में सिर्फ एक या दो बड़ी कंपनियां हावी हो जाती हैं, तो वे कीमतें और शर्तें अपनी सुविधा के अनुसार तय कर सकती हैं। उन्होंने कहा कि मजबूत प्रतिस्पर्धा कंपनियों को जवाबदेह बनाती है और उपभोक्ताओं को बेहतर कीमत, बेहतर सेवा और अधिक विकल्प उपलब्ध कराती है। भारतीय AI को लेकर जताया भरोसा श्रीधर वेम्बु ने भारत के AI इकोसिस्टम को लेकर भी आशावादी रुख अपनाया। उनका कहना है कि भारतीय विश्वविद्यालयों, स्टार्टअप्स और टेक कंपनियों में तेजी से AI पर काम हो रहा है। उन्होंने कहा कि AI मॉडल्स को ट्रेन करने की लागत लगातार कम हो रही है और आने वाले वर्षों में भारतीय AI मॉडल्स भी वैश्विक स्तर पर मजबूत प्रतिस्पर्धा पेश कर सकते हैं। वेम्बु के मुताबिक, भारत को AI की दौड़ में पीछे मानने की जरूरत नहीं है। यदि निवेश, रिसर्च और नवाचार इसी गति से आगे बढ़ते रहे, तो भारतीय कंपनियां भी दुनिया के बड़े AI खिलाड़ियों को चुनौती देने की स्थिति में पहुंच सकती हैं।
कोलकाता: पश्चिम बंगाल में औद्योगिक निवेश को बढ़ावा देने की कोशिशों के बीच राज्य सरकार ने देश के प्रमुख औद्योगिक घरानों में से एक Aditya Birla Group से राज्य में निवेश करने का आग्रह किया है। यह पहल ऐसे समय में हुई है जब राज्य में उद्योगों को आकर्षित करने के लिए नई रणनीतियों पर जोर दिया जा रहा है। शमिक भट्टाचार्य ने दी जानकारी Shamik Bhattacharya ने कोलकाता में आयोजित 'बिजनेस अपॉर्च्युनिटी प्लेटफॉर्म' कार्यक्रम में कहा कि राज्य सरकार ने आदित्य बिड़ला समूह से पश्चिम बंगाल में निवेश बढ़ाने का अनुरोध किया है। उन्होंने कहा कि बंगाल का बिड़ला समूह के साथ ऐतिहासिक संबंध रहा है और अब राज्य एक बार फिर इस औद्योगिक घराने को निवेश के लिए आमंत्रित कर रहा है। मुख्यालय कभी कोलकाता में था शमिक भट्टाचार्य ने कहा कि आज से करीब पांच दशक पहले आदित्य बिड़ला समूह का मुख्यालय कोलकाता में हुआ करता था, लेकिन उस समय श्रमिक अशांति और औद्योगिक माहौल के कारण समूह को अपना मुख्यालय मुंबई स्थानांतरित करना पड़ा। उन्होंने कहा कि उस दौर में कई बड़े औद्योगिक समूहों ने भी पश्चिम बंगाल से अपने मुख्यालय अन्य राज्यों में स्थानांतरित किए थे। 1978 की घटना का किया उल्लेख भट्टाचार्य ने वर्ष 1978 की एक घटना का उल्लेख करते हुए कहा कि कथित तौर पर तत्कालीन परिस्थितियों के कारण उद्योगपति आदित्य बिड़ला को कोलकाता स्थित Reserve Bank of India कार्यालय के पास अपनी कार से उतरकर पैदल जाना पड़ा था। उन्होंने दावा किया कि इसी तरह की घटनाओं और असुरक्षा की भावना के बाद समूह ने अपने व्यवसाय के विस्तार और सुरक्षा के लिए मुंबई जाने का फैसला किया। उनके अनुसार, बाद में कई अन्य उद्योगपति भी अपने मुख्यालय पश्चिम बंगाल से बाहर ले गए। बंगाल से पूरी तरह नहीं टूटा था रिश्ता भट्टाचार्य ने कहा कि मुख्यालय मुंबई स्थानांतरित होने के बावजूद आदित्य बिड़ला समूह ने पश्चिम बंगाल में अपने औद्योगिक परिचालन पूरी तरह बंद नहीं किए और राज्य में अपनी व्यावसायिक गतिविधियां जारी रखीं। निवेश आकर्षित करने पर सरकार का जोर पश्चिम बंगाल सरकार राज्य में नए निवेश और रोजगार के अवसर बढ़ाने के उद्देश्य से विभिन्न औद्योगिक समूहों से संपर्क कर रही है। सरकार का मानना है कि बड़े निवेश से राज्य के औद्योगिक विकास को नई गति मिलेगी और आर्थिक गतिविधियों का विस्तार होगा।
अमरावती, एजेंसियां। देश की सबसे बड़ी दोपहिया वाहन निर्माता कंपनी Hero MotoCorp ने आंध्र प्रदेश में अगले 3 से 5 वर्षों के दौरान ₹3,200 करोड़ से अधिक निवेश करने की घोषणा की है। कंपनी इस निवेश के जरिए तिरुपति में अपने विनिर्माण, लॉजिस्टिक्स और इलेक्ट्रिक वाहन (EV) कारोबार का विस्तार करेगी। ग्लोबल पार्ट्स सेंटर और उत्पादन क्षमता में होगा विस्तार इस निवेश योजना के तहत कंपनी ₹750 करोड़ से अधिक की लागत से Global Parts Centre स्थापित करेगी। साथ ही तिरुपति संयंत्र की वार्षिक उत्पादन क्षमता बढ़ाकर 12 लाख से 15 लाख यूनिट तक करने का लक्ष्य रखा गया है। यह केंद्र घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों के लिए स्पेयर पार्ट्स की आपूर्ति को मजबूत करेगा। 4,000 नए रोजगार मिलने की उम्मीद Hero MotoCorp के कार्यकारी अध्यक्ष पवन मुंजाल ने कहा कि यह निवेश आंध्र प्रदेश को इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरिंग का प्रमुख केंद्र बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। परियोजना से करीब 4,000 प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होने की संभावना है।
नई दिल्ली: भारत का डिजिटल भुगतान प्लेटफॉर्म UPI (यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस) अब अफ्रीकी द्वीपीय देश सेशेल्स तक पहुंचने जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया सेशेल्स यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच UPI को लेकर एक महत्वपूर्ण समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। इस समझौते के बाद सेशेल्स भी उन देशों की सूची में शामिल हो जाएगा, जहां भारतीय यात्री UPI आधारित डिजिटल भुगतान का लाभ उठा सकेंगे। किन देशों में पहले से उपलब्ध है UPI? सेशेल्स के शामिल होने के बाद भारतीय UPI नेटवर्क का दायरा और बढ़ गया है। इससे पहले भारतीय पर्यटक निम्न देशों में UPI के जरिए मर्चेंट पेमेंट कर सकते हैं— सिंगापुर नेपाल भूटान श्रीलंका मॉरीशस संयुक्त अरब अमीरात कतर फ्रांस कंबोडिया अब इस सूची में सेशेल्स भी शामिल हो गया है। प्रधानमंत्री मोदी ने क्या कहा? प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया पर जानकारी साझा करते हुए कहा कि सेशेल्स यात्रा के दौरान कई महत्वपूर्ण समझौते हुए हैं। इनमें UPI लागू करने, जन औषधि सहयोग, जलवायु परिवर्तन, ग्रीन हाइड्रोजन, ऊर्जा और ब्लू इकोनॉमी जैसे क्षेत्रों में साझेदारी शामिल है। भारतीय यात्रियों को क्या होगा फायदा? इस समझौते का सबसे बड़ा लाभ भारतीय पर्यटकों और व्यवसायियों को मिलेगा। मुख्य फायदे: नकद रखने की जरूरत कम होगी। डिजिटल भुगतान पहले से अधिक आसान होगा। भुगतान प्रक्रिया तेज और सुविधाजनक बनेगी। भारत और सेशेल्स के बीच फिनटेक सहयोग मजबूत होगा। सेशेल्स हिंद महासागर का एक लोकप्रिय पर्यटन स्थल है, जहां हर वर्ष हजारों भारतीय पर्यटक छुट्टियां मनाने पहुंचते हैं। भारतीयों के लिए वीजा-फ्री डेस्टिनेशन भारतीय नागरिकों को सेशेल्स यात्रा के लिए पहले से वीजा लेने की आवश्यकता नहीं होती। हालांकि, पर्यटन उद्देश्य से पहुंचने वाले यात्रियों को आगमन पर Visitor Permit लेना होता है। सेशेल्स में भारतीय मूल के लोगों की भी उल्लेखनीय उपस्थिति है। भारत से वहां चावल, दवाइयां, वस्त्र, वाहन, मशीनरी, स्पेयर पार्ट्स और प्लास्टिक उत्पादों का निर्यात किया जाता है। भारत की डिजिटल ताकत को मिल रही वैश्विक पहचान पिछले कुछ वर्षों में UPI दुनिया के सबसे सफल डिजिटल भुगतान प्लेटफॉर्म में से एक बनकर उभरा है। अब इसका विस्तार लगातार नए देशों तक हो रहा है, जिससे सीमा पार डिजिटल भुगतान को बढ़ावा मिलने के साथ भारत की फिनटेक क्षमता को भी वैश्विक पहचान मिल रही है।
नई दिल्ली: अगर आप आज सोना या चांदी खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो आपके लिए अच्छी खबर है। लगातार उतार-चढ़ाव के बीच 29 जून 2026 को सोने और चांदी दोनों की कीमतों में मामूली गिरावट दर्ज की गई है। हालांकि गिरावट बहुत बड़ी नहीं है, लेकिन खरीदारी करने वालों के लिए यह राहत की बात हो सकती है। ध्यान रखें कि अलग-अलग शहरों, ज्वेलर्स और टैक्स के आधार पर कीमतों में थोड़ा अंतर हो सकता है। आज कितना सस्ता हुआ सोना? आज सभी प्रमुख कैरेट के सोने के दाम में ₹10 प्रति 10 ग्राम की कमी दर्ज की गई है। कैरेट आज का रेट कल का रेट बदलाव 24 कैरेट (10 ग्राम) ₹1,43,940 ₹1,43,950 -₹10 22 कैरेट (10 ग्राम) ₹1,31,940 ₹1,31,950 -₹10 18 कैरेट (10 ग्राम) ₹1,07,950 ₹1,07,960 -₹10 प्रमुख शहरों में 24 कैरेट सोने का भाव (10 ग्राम) शहर आज का रेट बदलाव पटना ₹1,43,990 -₹10 रांची ₹1,43,950 -₹10 लखनऊ ₹1,44,090 -₹10 दिल्ली ₹1,44,090 -₹10 मुंबई ₹1,43,940 -₹10 कोलकाता ₹1,43,940 -₹10 चांदी भी हुई सस्ती आज चांदी की कीमत में भी हल्की गिरावट देखने को मिली है। 1 किलो चांदी का भाव ₹100 घटकर ₹2,39,900 पर आ गया है। मात्रा आज का रेट कल का रेट बदलाव 10 ग्राम ₹2,399 ₹2,400 -₹1 100 ग्राम ₹23,990 ₹24,000 -₹10 1 किलो ₹2,39,900 ₹2,40,000 -₹100 प्रमुख शहरों में चांदी का भाव (1 किलो) शहर आज का रेट बदलाव पटना ₹2,39,900 -₹100 रांची ₹2,39,900 -₹100 लखनऊ ₹2,39,900 -₹100 दिल्ली ₹2,39,900 -₹100 मुंबई ₹2,39,900 -₹100 कोलकाता ₹2,39,900 -₹100 खरीदारी से पहले रखें इन बातों का ध्यान अगर आप सोना या चांदी खरीदने जा रहे हैं, तो सिर्फ कीमत ही नहीं, बल्कि हॉलमार्क, मेकिंग चार्ज, GST और ज्वेलर की विश्वसनीयता की भी जांच जरूर करें। अलग-अलग शहरों और दुकानों पर अंतिम कीमत में अंतर हो सकता है।
मुंबई: बुधवार, 24 जून 2026 को भारतीय शेयर बाजार ने मिले-जुले वैश्विक संकेतों के बीच सकारात्मक शुरुआत की। अमेरिकी बाजारों में कमजोरी के बावजूद घरेलू बाजार में खरीदारी का माहौल देखने को मिला, जिससे शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स और निफ्टी दोनों हरे निशान में कारोबार करते नजर आए। सुबह करीब 9:30 बजे तक बीएसई सेंसेक्स 194 अंकों की बढ़त के साथ 76,395 पर पहुंच गया, जबकि एनएसई निफ्टी 50 करीब 41 अंकों की मजबूती के साथ 23,867 के स्तर पर कारोबार कर रहा था। शुरुआती कारोबार में बाजार का हाल इंडेक्स स्तर (सुबह 9:30 बजे) BSE Sensex 76,395 NSE Nifty 50 23,867 बाजार में तेजी का मुख्य कारण आईसीआईसीआई बैंक, इंफोसिस, टेक महिंद्रा और एलएंडटी जैसे दिग्गज शेयरों में खरीदारी रही। एनएसई के 15 सेक्टोरल इंडेक्स में से 11 बढ़त के साथ खुले। प्राइवेट बैंक, आईटी और हेल्थकेयर सेक्टर ने सबसे बेहतर प्रदर्शन किया। वैश्विक संकेतों से क्यों बना दबाव? हालांकि घरेलू बाजार में मजबूती दिखी, लेकिन वैश्विक स्तर पर कुछ ऐसे कारक हैं जो निवेशकों की चिंता बढ़ा रहे हैं। अमेरिकी बाजारों में गिरावट पिछले कारोबारी सत्र में अमेरिकी बाजारों में बिकवाली देखने को मिली। खासकर टेक शेयरों में कमजोरी के कारण Nasdaq और S&P 500 दबाव में रहे। एशियाई बाजारों का मिश्रित रुख जापान और चीन के बाजारों में सुस्ती रही, जबकि दक्षिण कोरिया का कोस्पी इंडेक्स करीब 3 प्रतिशत की मजबूती के साथ कारोबार करता नजर आया। ब्याज दरों को लेकर चिंता बाजार में यह आशंका बनी हुई है कि साल के अंत तक ब्याज दरों में बढ़ोतरी हो सकती है। इसी वजह से निवेशक सतर्क रुख अपनाए हुए हैं। आगे क्या रहेगा निफ्टी और सेंसेक्स का रुख? मार्केट एक्सपर्ट्स के अनुसार, फिलहाल बाजार एक अहम मोड़ पर खड़ा है। निफ्टी के लिए महत्वपूर्ण स्तर 23,900 के ऊपर टिकने पर निफ्टी 24,000 से 24,050 तक पहुंच सकता है। यदि दबाव बढ़ता है तो 23,640 तक गिरावट संभव है। सेंसेक्स के लिए अहम स्तर 76,500 का स्तर बाजार की अगली दिशा तय करने वाला माना जा रहा है। किन सेक्टरों में दिखा दबाव? आज के कारोबार में ऑटो, मेटल और मीडिया सेक्टर में कमजोरी देखने को मिली। वहीं बैंकिंग, आईटी और हेल्थकेयर शेयरों में निवेशकों की दिलचस्पी बनी रही। निवेशकों के लिए क्या है सलाह? विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल बाजार में संतुलित स्थिति बनी हुई है। ऐसे में निवेशकों को जल्दबाजी में बड़े फैसले लेने से बचना चाहिए और अपनी जोखिम क्षमता के अनुसार ही निवेश करना चाहिए। कच्चे तेल और सोने की कीमतों में आ रहे बदलाव भी आने वाले दिनों में बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
नई दिल्ली: भारतीय स्टार्टअप जगत के चर्चित उद्यमी कुणाल शाह एक बार फिर सुर्खियों में हैं। फिनटेक कंपनी CRED को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के बाद अब वह दुनिया के सबसे लोकप्रिय मैसेजिंग प्लेटफॉर्म WhatsApp की कमान संभालने जा रहे हैं। Meta ने उन्हें WhatsApp का नया ग्लोबल CEO नियुक्त किया है। इस नियुक्ति के साथ भारतीय उद्यमिता को वैश्विक स्तर पर एक बड़ी पहचान मिली है। हाल ही में कुणाल शाह ने CRED के CEO पद से हटने की घोषणा की थी। कंपनी की दैनिक जिम्मेदारियां अब मितेन संपत संभालेंगे, जबकि कुणाल शाह शेयरधारक और रणनीतिक भूमिका में जुड़े रहेंगे। कौन हैं कुणाल शाह? मुंबई में जन्मे कुणाल शाह एक गुजराती कारोबारी परिवार से ताल्लुक रखते हैं। उनके पिता फार्मास्युटिकल व्यवसाय से जुड़े थे। इंजीनियरिंग के बजाय उन्होंने मुंबई के विल्सन कॉलेज से फिलॉसफी में स्नातक की पढ़ाई की। इसके बाद उन्होंने NMIMS से MBA शुरू किया, लेकिन बीच में ही पढ़ाई छोड़कर उद्यमिता की राह चुन ली। उनका पहला बड़ा वेंचर PaisaBack था। इसके बाद वर्ष 2010 में उन्होंने FreeCharge की सह-स्थापना की। यह कंपनी इतनी सफल रही कि 2015 में Snapdeal ने इसे लगभग 2,800 करोड़ रुपये में खरीद लिया। कैसे बना CRED भारत का बड़ा फिनटेक ब्रांड? FreeCharge की सफलता के बाद कुणाल शाह ने 2018 में CRED की शुरुआत की। कंपनी का उद्देश्य समय पर क्रेडिट कार्ड बिल भुगतान करने वाले ग्राहकों को रिवॉर्ड देना था। धीरे-धीरे CRED ने भुगतान, लोन, बीमा, वेल्थ मैनेजमेंट और क्रेडिट कार्ड सेवाओं तक अपना विस्तार किया। CRED से जुड़े प्रमुख आंकड़े विवरण आंकड़े स्थापना वर्ष 2018 यूजर्स 1.7 करोड़ से अधिक FY25 राजस्व ₹2,735 करोड़ वैल्यूएशन 4.5 अरब डॉलर Meta की हिस्सेदारी लगभग 20% Meta ने हाल ही में CRED में 90 करोड़ डॉलर (करीब 8,550 करोड़ रुपये) का निवेश भी किया है। WhatsApp में क्या होगी नई भूमिका? रिपोर्ट्स के अनुसार, कुणाल शाह WhatsApp के बिजनेस मॉडल को और मजबूत बनाने पर काम करेंगे। उनकी प्राथमिकता विज्ञापन, सब्सक्रिप्शन आधारित सेवाओं और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) फीचर्स के विस्तार पर होगी। वह मौजूदा प्रमुख विल कैथकार्ट की जगह लेंगे, जिन्होंने पिछले सात वर्षों में WhatsApp के यूजर बेस को दोगुने से भी अधिक बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई थी। कुणाल शाह का मानना है कि WhatsApp ने अब तक शानदार सफर तय किया है, लेकिन इसकी वास्तविक क्षमता अभी पूरी तरह सामने नहीं आई है। कितनी है कुणाल शाह की नेटवर्थ? विभिन्न रिपोर्ट्स के मुताबिक, 2026 में कुणाल शाह की अनुमानित कुल संपत्ति करीब 15,000 करोड़ रुपये है। उनकी संपत्ति के प्रमुख स्रोत हैं: CRED में हिस्सेदारी FreeCharge की बिक्री से मिली पूंजी 200 से अधिक स्टार्टअप्स में एंजेल निवेश विभिन्न टेक कंपनियों में निवेश दिलचस्प बात यह है कि कुणाल शाह लंबे समय तक CRED से बेहद कम प्रतीकात्मक वेतन लेने के कारण भी चर्चा में रहे हैं। WhatsApp में उनकी नई भूमिका भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।
नई दिल्ली: अगर आप सोना या चांदी खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो 24 जून 2026 के ताजा भाव जानना आपके लिए जरूरी है। सर्राफा बाजार में आज दोनों कीमती धातुओं की कीमतों में हल्की गिरावट दर्ज की गई है। जून महीने के दौरान सोना और चांदी दोनों अपने निचले स्तर के करीब पहुंच गए हैं, जिससे खरीदारों के लिए यह समय अहम माना जा रहा है। सोने की कीमत में मामूली गिरावट आज 24 कैरेट सोना 1,44,590 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर कारोबार कर रहा है, जबकि 22 कैरेट सोने का भाव 1,32,540 रुपये प्रति 10 ग्राम है। पिछले कारोबारी दिन की तुलना में सोने की कीमत में 100 रुपये प्रति 10 ग्राम की गिरावट दर्ज की गई है। 24 कैरेट सोने के ताजा भाव (10 ग्राम) शहर आज का भाव कल का भाव बदलाव पटना ₹1,44,640 ₹1,44,740 -₹100 रांची ₹1,44,590 ₹1,44,690 -₹100 लखनऊ ₹1,44,740 ₹1,44,840 -₹100 दिल्ली ₹1,44,740 ₹1,44,840 -₹100 मुंबई ₹1,44,590 ₹1,44,690 -₹100 कोलकाता ₹1,44,590 ₹1,44,690 -₹100 चेन्नई ₹1,47,920 ₹1,48,020 -₹100 चांदी भी हुई सस्ती चांदी की कीमतों में भी आज हल्की नरमी देखने को मिली है। एक किलो चांदी का भाव 2,44,900 रुपये पर पहुंच गया है, जो कल के मुकाबले 100 रुपये कम है। दिलचस्प बात यह है कि पिछले एक महीने में चांदी की कीमत में करीब 35,100 रुपये प्रति किलो की बड़ी गिरावट आ चुकी है। चांदी के ताजा भाव (1 किलो) शहर आज का भाव कल का भाव बदलाव पटना ₹2,44,900 ₹2,45,000 -₹100 रांची ₹2,44,900 ₹2,45,000 -₹100 लखनऊ ₹2,44,900 ₹2,45,000 -₹100 दिल्ली ₹2,44,900 ₹2,45,000 -₹100 मुंबई ₹2,44,900 ₹2,45,000 -₹100 कोलकाता ₹2,44,900 ₹2,45,000 -₹100 चेन्नई ₹2,49,900 ₹2,50,000 -₹100 खरीदारी से पहले क्या ध्यान रखें? सोने और चांदी के दाम शहर, टैक्स, मेकिंग चार्ज और ज्वेलर्स के हिसाब से थोड़ा अलग हो सकते हैं। इसलिए खरीदारी से पहले अपने स्थानीय सर्राफा बाजार या ज्वेलर से ताजा कीमत की पुष्टि जरूर कर लें।
Infosys Chairman on AI: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते प्रभाव और इसके कारण नौकरियों पर मंडरा रहे खतरे को लेकर दुनिया भर में बहस जारी है। इसी बीच इंफोसिस के चेयरमैन नंदन नीलेकणि ने AI से जुड़ी आशंकाओं पर स्पष्ट और मजबूत राय रखी है। उनका कहना है कि AI पारंपरिक आईटी कंपनियों की जगह नहीं लेगा, बल्कि उनकी क्षमता और उत्पादकता को कई गुना बढ़ाने का काम करेगा। AI से नहीं खत्म होंगी आईटी कंपनियां इंफोसिस की 45वीं वार्षिक आम बैठक (AGM) में बोलते हुए नंदन नीलेकणि ने कहा कि जेनरेटिव AI के आने से पारंपरिक आईटी सर्विसेज मॉडल खत्म होने की बात सही नहीं है। उन्होंने कहा कि: "AI हमारी जैसी कंपनियों को रिप्लेस नहीं करेगा, बल्कि उन संगठनों की ताकत बढ़ाएगा जो तेजी से बदलाव के साथ खुद को ढालते हैं और स्पष्ट लक्ष्य के साथ आगे बढ़ते हैं।" नीलेकणि के अनुसार, सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट केवल कोड लिखने तक सीमित नहीं है। इसमें डोमेन नॉलेज, सुरक्षा, टेस्टिंग, सिस्टम डिजाइन और आर्किटेक्चर जैसी कई महत्वपूर्ण विशेषज्ञताएं शामिल होती हैं, जिन्हें केवल AI के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता। ऑटोमेशन के बीच क्यों बढ़ा है डर? दुनियाभर में यह चिंता लगातार बढ़ रही है कि AI और ऑटोमेशन के कारण कोडिंग, आउटसोर्सिंग और पारंपरिक आईटी सेवाओं की मांग घट सकती है। खासकर भारत के 300 अरब डॉलर से अधिक के तकनीकी उद्योग के लिए यह चिंता महत्वपूर्ण मानी जा रही है। हालांकि, नंदन नीलेकणि का मानना है कि AI खतरा नहीं बल्कि अवसर है। पुराने सिस्टम को आधुनिक बनाने में मदद कर रहा AI इंफोसिस चेयरमैन ने बताया कि AI की मदद से कंपनियां अपने दशकों पुराने टेक्नोलॉजी सिस्टम को आधुनिक बनाने की दिशा में तेजी से काम कर रही हैं। उनके मुताबिक, आने वाले समय में सबसे बड़ा अवसर AI मॉडल और एजेंट्स को कंपनियों के महत्वपूर्ण प्लेटफॉर्म के साथ जोड़ने में होगा। रिपोर्ट्स के अनुसार, इंफोसिस अपने शीर्ष 200 ग्राहकों में से लगभग 90 प्रतिशत के साथ AI आधारित प्रोजेक्ट्स पर काम कर रही है। 2030 तक 400 बिलियन डॉलर का हो सकता है बाजार इंफोसिस ने हाल ही में अपना AI-First Value Framework लॉन्च किया है। कंपनी का अनुमान है कि वर्ष 2030 तक AI-फर्स्ट सर्विसेज का वैश्विक बाजार 300 से 400 बिलियन डॉलर के बीच पहुंच सकता है। नंदन नीलेकणि के बयान से यह संकेत मिलता है कि इंफोसिस AI को चुनौती नहीं, बल्कि भविष्य के विकास का सबसे बड़ा अवसर मान रही है।
नई दिल्ली: ज्वैलरी मैन्युफैक्चरिंग कंपनी Advit Jewels का आईपीओ 23 जून से निवेशकों के लिए खुल गया और पहले ही दिन इसे शानदार प्रतिक्रिया मिली। आईपीओ खुलने के शुरुआती तीन घंटों के भीतर ही रिटेल कैटेगरी में यह चार गुना से अधिक सब्सक्राइब हो गया, जिससे निवेशकों के बीच कंपनी को लेकर उत्साह साफ नजर आ रहा है। कंपनी इस पब्लिक इश्यू के जरिए लगभग 165 करोड़ रुपये जुटाने की योजना बना रही है। इसके तहत करीब 1.19 करोड़ नए शेयर जारी किए जा रहे हैं। निवेशक इस आईपीओ में 25 जून तक आवेदन कर सकते हैं, जबकि शेयरों की संभावित लिस्टिंग 1 जुलाई को हो सकती है। क्या है प्राइस बैंड और निवेश की शर्तें? Advit Jewels ने अपने आईपीओ का प्राइस बैंड 130 रुपये से 138 रुपये प्रति शेयर तय किया है। एक लॉट में 100 शेयर शामिल हैं। रिटेल निवेशक न्यूनतम एक लॉट और अधिकतम 14 लॉट के लिए आवेदन कर सकते हैं। क्या करती है Advit Jewels? जयपुर स्थित Advit Jewels अपने प्रसिद्ध 'Rambhajo' ब्रांड के तहत हाथ से तैयार की जाने वाली कुंदन, पोल्की, डायमंड और स्टडेड ज्वैलरी का निर्माण और सप्लाई करती है। कंपनी B2B मॉडल के तहत डीलर्स और रिटेलर्स को सेवाएं देने के साथ-साथ कस्टमाइज्ड ऑर्डर पर भी ज्वैलरी तैयार करती है। आईपीओ से जुटाई गई राशि का उपयोग कंपनी अपने कर्ज को कम करने, वर्किंग कैपिटल की जरूरतों को पूरा करने और अन्य कॉर्पोरेट उद्देश्यों के लिए करेगी। ग्रे मार्केट में मजबूत संकेत आईपीओ खुलने के साथ ही ग्रे मार्केट में भी Advit Jewels के शेयरों की मांग तेज दिखाई दी। दोपहर 12 बजे तक कंपनी का ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP) 65 रुपये पहुंच गया था। 138 रुपये के ऊपरी प्राइस बैंड के आधार पर यह लगभग 47 प्रतिशत प्रीमियम दर्शाता है। यदि ग्रे मार्केट का यह रुझान जारी रहता है, तो लिस्टिंग के समय निवेशकों को अच्छा मुनाफा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। हालांकि GMP केवल एक संकेतक होता है और वास्तविक लिस्टिंग प्रदर्शन बाजार की परिस्थितियों पर निर्भर करता है। एक्सपर्ट्स की राय रिसर्च फर्म Equivision ने इस आईपीओ को 'सब्सक्राइब' रेटिंग दी है। फर्म के अनुसार कंपनी की मजबूत राजस्व वृद्धि, बढ़ती लाभप्रदता और संगठित ज्वैलरी बाजार में मजबूत उपस्थिति इसकी प्रमुख ताकत हैं। साथ ही टियर-1 और टियर-2 शहरों में विस्तार की रणनीति को भी सकारात्मक माना गया है।
नई दिल्ली: लगातार दो दिनों की गिरावट के बाद सोमवार सुबह सोने और चांदी की कीमतों में जोरदार तेजी देखने को मिली। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर कारोबार शुरू होते ही सोना प्रति 10 ग्राम करीब ₹800 तक उछल गया, जबकि चांदी के दाम में प्रति किलो लगभग ₹4,000 की बढ़ोतरी दर्ज की गई। इस तेजी से निवेशकों और सर्राफा कारोबारियों को राहत मिली है। हाल के दिनों में सोने की कीमतों में आई गिरावट के बाद बाजार में फिर से सकारात्मक माहौल बनता दिखाई दे रहा है। MCX पर क्या रहे भाव? सुबह 9:40 बजे अगस्त डिलीवरी वाला सोना ₹522 की बढ़त के साथ ₹1,47,725 प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहा था। वहीं जुलाई डिलीवरी वाली चांदी ₹1,914 की तेजी के साथ ₹2,35,099 प्रति किलोग्राम के स्तर पर पहुंच गई। शुरुआती कारोबार में चांदी में करीब ₹4,000 तक का उछाल देखने को मिला। प्रमुख शहरों में आज का सोने का भाव शहर 24 कैरेट 22 कैरेट 18 कैरेट दिल्ली ₹1,46,660 ₹1,34,450 ₹1,10,030 मुंबई ₹1,46,510 ₹1,34,300 ₹1,09,880 कोलकाता ₹1,46,510 ₹1,34,300 ₹1,09,880 चेन्नई ₹1,48,360 ₹1,35,990 ₹1,13,690 लखनऊ ₹1,46,660 ₹1,34,450 ₹1,10,030 कानपुर ₹1,46,660 ₹1,34,450 ₹1,10,030 पटना ₹1,46,560 ₹1,34,350 ₹1,09,930 जयपुर ₹1,46,660 ₹1,34,450 ₹1,10,030 इंदौर ₹1,46,560 ₹1,34,350 ₹1,09,930 भोपाल ₹1,46,560 ₹1,34,350 ₹1,09,930 अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी तेजी वैश्विक बाजार में हाजिर सोना 0.9 प्रतिशत की बढ़त के साथ 4,197.41 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया। वहीं चांदी की कीमतों में 1.8 प्रतिशत की तेजी आई और यह 66.10 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार करती दिखी। आगे कैसी रह सकती है चाल? विशेषज्ञों के अनुसार, कच्चे तेल की कीमतों, महंगाई और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों से जुड़े फैसले आने वाले समय में सोने और चांदी की दिशा तय करेंगे। अगर ब्याज दरों में बढ़ोतरी होती है, तो सोने की लंबी अवधि की तेजी पर दबाव बन सकता है। हालांकि, वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की मांग बनी रह सकती है।
मुंबई: भारत के विदेशी मुद्रा भंडार (Foreign Exchange Reserves) में एक बार फिर बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, 12 जून 2026 को समाप्त सप्ताह के दौरान देश के विदेशी मुद्रा भंडार में लगभग 9.985 अरब डॉलर की कमी आई है। इससे पहले वाले सप्ताह में भी भंडार में 711 मिलियन डॉलर की गिरावट दर्ज की गई थी। इस ताजा गिरावट की सबसे बड़ी वजह सोने की कीमतों में आई कमजोरी मानी जा रही है, जिससे आरबीआई के गोल्ड रिजर्व के मूल्य पर सीधा असर पड़ा। विदेशी मुद्रा भंडार घटकर 671.62 अरब डॉलर पर पहुंचा आरबीआई के आंकड़ों के मुताबिक, भारी गिरावट के बाद भारत का कुल विदेशी मुद्रा भंडार घटकर 671.625 अरब डॉलर रह गया है। गौरतलब है कि 27 फरवरी 2026 को देश का विदेशी मुद्रा भंडार 728.494 अरब डॉलर के रिकॉर्ड उच्च स्तर पर पहुंचा था। इसके बाद से इसमें उतार-चढ़ाव का दौर जारी है। विदेशी मुद्रा आस्तियों (FCA) में हुई बढ़ोतरी हालांकि कुल भंडार में गिरावट के बीच एक सकारात्मक पहलू भी देखने को मिला। समीक्षा सप्ताह के दौरान भारत की फॉरेन करेंसी एसेट्स (FCA) में 846 मिलियन डॉलर की बढ़ोतरी हुई। इसके बाद FCA का कुल आकार बढ़कर 544.290 अरब डॉलर हो गया है। विदेशी मुद्रा आस्तियां कुल विदेशी मुद्रा भंडार का सबसे बड़ा हिस्सा होती हैं और इनमें डॉलर के अलावा यूरो, पाउंड और जापानी येन जैसी अन्य प्रमुख मुद्राओं में होने वाले उतार-चढ़ाव का भी प्रभाव शामिल होता है। गोल्ड रिजर्व की वैल्यू में 10.75 अरब डॉलर की गिरावट बीते सप्ताह सोने की कीमतों में आई गिरावट का सीधा असर आरबीआई के स्वर्ण भंडार पर पड़ा। गोल्ड रिजर्व की वैल्यू में 10.754 अरब डॉलर की कमी आई। अब देश के गोल्ड रिजर्व का मूल्य घटकर 100.112 अरब डॉलर रह गया है। मार्च 2026 के अंत तक आरबीआई के पास कुल 880.52 टन सोना मौजूद था। देश के कुल विदेशी मुद्रा भंडार में सोने की हिस्सेदारी लगभग 16.7 प्रतिशत है, इसलिए इसकी कीमतों में बदलाव का सीधा असर कुल रिजर्व पर पड़ता है। SDR और IMF रिजर्व में भी मामूली गिरावट आरबीआई के मुताबिक: विशेष आहरण अधिकार (SDR) में 66 मिलियन डॉलर की कमी आई। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के पास रखे भारत के रिजर्व में 11 मिलियन डॉलर की गिरावट दर्ज की गई। फिलहाल IMF के पास भारत का रिजर्व 4.815 अरब डॉलर है। क्या है विदेशी मुद्रा भंडार? विदेशी मुद्रा भंडार किसी देश की आर्थिक मजबूती का महत्वपूर्ण संकेतक माना जाता है। इसका उपयोग आयात भुगतान, मुद्रा स्थिरता बनाए रखने और वैश्विक आर्थिक झटकों से निपटने के लिए किया जाता है।
नई दिल्ली: भारतीय रेलवे अपनी आय बढ़ाने के लिए नए विकल्पों पर तेजी से काम कर रहा है। इसी कड़ी में अब रेलवे की नजर थर्मल पावर प्लांट्स से निकलने वाली फ्लाई ऐश (राख) पर है। जिस राख को कभी बिजलीघरों के लिए परेशानी माना जाता था, वही अब रेलवे के लिए करोड़ों रुपये की कमाई का नया जरिया बन सकती है। रेल मंत्रालय फ्लाई ऐश की ढुलाई में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए एक व्यापक योजना तैयार कर रहा है। इस दिशा में रेलवे बोर्ड स्तर पर उच्च स्तरीय बैठक भी आयोजित की गई, जिसमें रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने स्वयं हिस्सा लिया। फ्लाई ऐश ढुलाई के लिए बन सकता है अलग लॉजिस्टिक नेटवर्क रेलवे बोर्ड के सूत्रों के अनुसार, बैठक में थर्मल पावर प्लांट से निकलने वाली राख की ढुलाई बढ़ाने के विभिन्न विकल्पों पर चर्चा की गई। रेलवे इस काम के लिए एक डेडिकेटेड लॉजिस्टिक नेटवर्क विकसित करने पर भी विचार कर रहा है। रेलवे का मानना है कि जिस तरह कोयले की ढुलाई उसकी आय का बड़ा स्रोत है, उसी तरह फ्लाई ऐश परिवहन भी भविष्य में महत्वपूर्ण राजस्व का माध्यम बन सकता है। फिलहाल बहुत कम है रेलवे की हिस्सेदारी देश के ताप बिजलीघरों से हर साल करीब 34 करोड़ टन फ्लाई ऐश उत्पन्न होती है। हालांकि, वर्तमान में इसकी अधिकांश ढुलाई सड़क मार्ग यानी ट्रकों के जरिए की जाती है। आंकड़ों के मुताबिक: देश में हर साल लगभग 34 करोड़ टन फ्लाई ऐश पैदा होती है। रेलवे फिलहाल केवल करीब 130 लाख टन फ्लाई ऐश की ढुलाई कर रहा है। अधिकांश परिवहन अभी भी ट्रकों के माध्यम से होता है। रेलवे का लक्ष्य इस हिस्सेदारी को बढ़ाकर एक बड़े माल परिवहन बाजार में अपनी उपस्थिति मजबूत करना है। आखिर क्या होती है फ्लाई ऐश? थर्मल पावर प्लांट में बिजली उत्पादन के लिए कोयले का इस्तेमाल किया जाता है। कोयला जलने के बाद जो महीन राख बचती है, उसे तकनीकी भाषा में फ्लाई ऐश कहा जाता है। बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में इसे आमतौर पर छाई भी कहा जाता है। पहले इसके निपटान की समस्या होती थी, लेकिन अब यह निर्माण उद्योग के लिए एक महत्वपूर्ण संसाधन बन चुकी है। किन क्षेत्रों में होता है फ्लाई ऐश का इस्तेमाल? फ्लाई ऐश का उपयोग कई क्षेत्रों में किया जा रहा है, जिनमें शामिल हैं: सड़क और फ्लाईओवर निर्माण सीमेंट उद्योग ईंट और टाइल निर्माण खदानों की बैकफिलिंग रेडी-मिक्स कंक्रीट (RMC) कृषि क्षेत्र एनटीपीसी के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2024-25 में उत्पन्न फ्लाई ऐश का: 32% हिस्सा सड़क और फ्लाईओवर निर्माण में, 27% सीमेंट उद्योग में, 14% ईंट और टाइल निर्माण में इस्तेमाल हुआ। सुरक्षित ढुलाई पर रहेगा फोकस फ्लाई ऐश का परिवहन यदि सही तरीके से न किया जाए तो यह पर्यावरण के लिए हानिकारक साबित हो सकता है। इसलिए रेलवे विशेष डिजाइन वाले कंटेनरों और ढंके हुए वैगनों का इस्तेमाल करने की योजना बना रहा है, ताकि राख हवा में न फैले और पर्यावरण को नुकसान न पहुंचे।
घरेलू शेयर बाजार में शुक्रवार को आईटी सेक्टर में भारी बिकवाली देखने को मिली। एशियाई बाजारों में मजबूती के बावजूद भारतीय बाजार दबाव में रहे और इसका सबसे बड़ा असर आईटी कंपनियों के शेयरों पर दिखाई दिया। निफ्टी आईटी इंडेक्स में करीब 6 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जबकि देश की दिग्गज आईटी कंपनियां टीसीएस और इन्फोसिस अपने 52 हफ्तों के निचले स्तर पर पहुंच गईं। इस तेज गिरावट से निवेशकों की कुल संपत्ति में लगभग ₹1.35 लाख करोड़ की कमी दर्ज की गई। टीसीएस और इन्फोसिस को सबसे बड़ा झटका देश की सबसे बड़ी आईटी कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) का शेयर करीब 7 प्रतिशत टूटकर ₹2,060.50 तक पहुंच गया, जो इसका 52 सप्ताह का निचला स्तर है। वहीं इन्फोसिस का शेयर लगभग 9 प्रतिशत की गिरावट के साथ ₹1,030.35 पर पहुंच गया। इस गिरावट से कंपनी के मार्केट कैपिटलाइजेशन में करीब ₹40,000 करोड़ की कमी आई और उसका कुल मार्केट कैप घटकर लगभग ₹3.63 लाख करोड़ रह गया। अन्य आईटी कंपनियों में भी बिकवाली केवल टीसीएस और इन्फोसिस ही नहीं, बल्कि अन्य प्रमुख आईटी कंपनियों के शेयरों में भी भारी दबाव देखने को मिला। विप्रो के शेयर में 4 प्रतिशत से अधिक गिरावट एचसीएल टेक में 5 प्रतिशत से ज्यादा कमजोरी टेक महिंद्रा में भी 5 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आखिर क्यों आई इतनी बड़ी गिरावट? इस बिकवाली की मुख्य वजह ग्लोबल आईटी दिग्गज Accenture का कमजोर आउटलुक माना जा रहा है। कंपनी ने वित्त वर्ष 2026 के लिए अपने राजस्व वृद्धि अनुमान की ऊपरी सीमा को 5 प्रतिशत से घटाकर 4 प्रतिशत कर दिया है। इसके अलावा चौथी तिमाही के लिए कंपनी का राजस्व अनुमान भी बाजार की अपेक्षाओं से कम रहा। इससे निवेशकों के बीच यह चिंता बढ़ गई कि वैश्विक कंपनियां आईटी कंसल्टिंग और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन प्रोजेक्ट्स पर खर्च कम कर सकती हैं। भारतीय आईटी कंपनियों पर क्यों पड़ा असर? भारतीय आईटी कंपनियों का बड़ा कारोबार उत्तरी अमेरिका से आता है। ऐसे में यदि अमेरिकी और वैश्विक कंपनियां तकनीकी सेवाओं पर खर्च घटाती हैं, तो इसका सीधा असर भारतीय आईटी कंपनियों की आय पर पड़ सकता है। इसी आशंका के कारण निवेशकों ने आईटी शेयरों में जमकर बिकवाली की। निफ्टी आईटी इंडेक्स में करीब 6% की गिरावट शुक्रवार के कारोबार में निफ्टी आईटी इंडेक्स सबसे कमजोर सेक्टर इंडेक्स रहा। निवेशकों की चिंता और वैश्विक संकेतों के दबाव में पूरे आईटी सेक्टर में कमजोरी देखने को मिली। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में निवेशकों की नजर अमेरिकी बाजार और वैश्विक आईटी खर्च से जुड़े संकेतों पर बनी रहेगी।
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने और समझौता होने के बाद वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में नरमी देखने को मिल रही है। होर्मुज जलडमरूमध्य के सामान्य होने से तेल आपूर्ति में सुधार की उम्मीद भी बढ़ी है, लेकिन इसके बावजूद हवाई यात्रियों को अभी सस्ती फ्लाइट टिकट का इंतजार करना पड़ेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि अगले तीन से चार महीनों तक विमान किराए में बड़ी राहत मिलने की संभावना बेहद कम है। इस तिमाही में किराया घटने की उम्मीद कम एविएशन सेक्टर के जानकारों के मुताबिक अधिकांश एयरलाइंस आने वाले कुछ महीनों के लिए अपनी ऑपरेशनल लागत पहले ही तय कर चुकी हैं। ऐसे में ईंधन की कीमतों में गिरावट का सीधा असर तुरंत टिकटों पर नहीं दिखाई देगा। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि एयर टर्बाइन फ्यूल (ATF) की कीमतों में 10 प्रतिशत कमी भी आती है, तो इसका मतलब यह नहीं कि विमान किराया भी उतना ही घट जाएगा। अभी भी ऊंचे स्तर पर हैं ATF के दाम इजरायल-ईरान संघर्ष शुरू होने से पहले की तुलना में एयर टर्बाइन फ्यूल की कीमतें अभी भी काफी ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं। बढ़ती लागत के कारण दुनिया भर की कई एयरलाइंस को उड़ानों में कटौती करने और किराए बढ़ाने पड़े थे। अब जबकि हालात सामान्य होने की दिशा में बढ़ रहे हैं, तब भी ईंधन की कीमतों को पुराने स्तर तक पहुंचने में समय लगेगा। एयरलाइंस का सबसे बड़ा खर्च है ईंधन एविएशन उद्योग में जेट फ्यूल सबसे बड़ा खर्च माना जाता है। नए विमानों वाली एयरलाइंस के कुल संचालन खर्च का 25 से 35 प्रतिशत हिस्सा ATF पर खर्च होता है। पुराने विमानों का संचालन करने वाली कंपनियों के लिए यह खर्च 40 से 50 प्रतिशत तक पहुंच जाता है। यही वजह है कि ईंधन की कीमतों में बदलाव का असर एयरलाइन कंपनियों की लागत पर सीधे पड़ता है। अभी टिकट सस्ते करने का दबाव नहीं युद्ध के दौरान बढ़ी हुई लागत का कुछ हिस्सा एयरलाइंस ने खुद वहन किया, जबकि बाकी भार यात्रियों पर बढ़े हुए किराए के रूप में डाला गया। अब कई एयरलाइंस को टिकट कीमतें घटाने की तत्काल जरूरत महसूस नहीं हो रही है, क्योंकि मौजूदा समय में यात्री ऊंचे किराए पर भी यात्रा करने को तैयार हैं। तेल उत्पादन और सप्लाई चेन को सामान्य होने में लगेगा समय विशेषज्ञों के अनुसार, युद्ध के दौरान खाड़ी क्षेत्र में कई तेल कुओं और संबंधित सुविधाओं को बंद कर दिया गया था। इन्हें दोबारा पूरी क्षमता से शुरू करने, रिफाइनरियों को सक्रिय करने और सप्लाई नेटवर्क को सामान्य बनाने में समय लगेगा। इसके अलावा, सुरक्षा कारणों से दूर चले गए तेल टैंकरों और शिपिंग नेटवर्क को भी पहले जैसी स्थिति में लौटने में कई सप्ताह या महीनों का समय लग सकता है। कब मिल सकती है राहत? अगर वैश्विक हालात स्थिर बने रहते हैं और कच्चे तेल की कीमतों में लगातार गिरावट जारी रहती है, तो वर्ष की अगली तिमाही में हवाई किराए में कुछ राहत देखने को मिल सकती है। हालांकि फिलहाल यात्रियों को महंगे टिकट के साथ ही यात्रा करनी पड़ सकती है।
सोने और चांदी की कीमतों में शुक्रवार, 19 जून 2026 को बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) में शुरुआती कारोबार के दौरान जहां चांदी के दाम में करीब ₹8,000 तक की गिरावट देखने को मिली, वहीं सोना भी लगभग ₹3,000 तक सस्ता हो गया। सर्राफा बाजार में भी दोनों कीमती धातुओं के भाव नीचे आए हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा वर्ष के अंत तक ब्याज दरों में बढ़ोतरी के संकेत दिए जाने के बाद निवेशकों का रुख बदला है, जिसका असर अंतरराष्ट्रीय बाजार के साथ भारतीय बाजार पर भी देखने को मिला। एमसीएक्स पर चांदी में भारी गिरावट एमसीएक्स पर 3 जुलाई डिलीवरी वाली चांदी पिछले कारोबारी सत्र में ₹2,37,572 प्रति किलोग्राम पर बंद हुई थी। शुक्रवार को इसकी शुरुआत ₹2,32,371 से हुई और शुरुआती कारोबार में यह गिरकर ₹2,29,561 प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई। सुबह करीब 10 बजे चांदी ₹6,944 यानी 2.92 फीसदी की गिरावट के साथ ₹2,30,628 प्रति किलोग्राम पर कारोबार करती दिखाई दी। सोने का भाव भी फिसला 5 अगस्त डिलीवरी वाला सोना पिछले सत्र में ₹1,49,309 प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था। शुक्रवार को इसकी शुरुआत ₹1,47,175 पर हुई और शुरुआती कारोबार में यह गिरकर ₹1,46,252 प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गया। सुबह 10 बजे के आसपास सोना करीब ₹2,695 यानी 1.8 प्रतिशत की गिरावट के साथ ₹1,46,614 प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहा था। प्रमुख शहरों में आज का गोल्ड रेट शहर 24 कैरेट 22 कैरेट 18 कैरेट दिल्ली ₹1,46,010 ₹1,33,850 ₹1,09,540 मुंबई ₹1,45,860 ₹1,33,700 ₹1,09,390 कोलकाता ₹1,45,860 ₹1,33,700 ₹1,09,390 चेन्नई ₹1,48,040 ₹1,35,700 ₹1,13,500 लखनऊ ₹1,46,010 ₹1,33,850 ₹1,09,540 कानपुर ₹1,46,010 ₹1,33,850 ₹1,09,540 पटना ₹1,45,910 ₹1,33,750 ₹1,09,440 जयपुर ₹1,46,010 ₹1,33,850 ₹1,09,540 इंदौर ₹1,45,910 ₹1,33,750 ₹1,09,440 भोपाल ₹1,45,910 ₹1,33,750 ₹1,09,440 सर्राफा बाजार में भी आई गिरावट सर्राफा बाजार में 24 कैरेट सोना ₹3,650 सस्ता होकर ₹1,45,860 प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया है। वहीं 22 कैरेट सोने की कीमत ₹3,350 घटकर ₹1,33,700 हो गई। 18 कैरेट सोना ₹2,740 की गिरावट के बाद ₹1,09,390 प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहा है। दूसरी ओर, चांदी का भाव ₹10,000 घटकर ₹2,50,000 प्रति किलोग्राम रह गया है। क्या खरीदारी का सही समय है? बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि कीमतों में आई यह गिरावट खरीदारों के लिए एक अवसर हो सकती है, लेकिन निवेश करने से पहले बाजार की चाल और वैश्विक संकेतों पर नजर रखना जरूरी है।
Turtlemint Fintech IPO: इंश्योरटेक सेक्टर की प्रमुख कंपनी टर्टलमिंट फिनटेक सॉल्यूशंस का बहुप्रतीक्षित आईपीओ 19 जून 2026 से आम निवेशकों के लिए खुलने जा रहा है। कंपनी ने इस सार्वजनिक निर्गम का आकार 883 करोड़ रुपये रखा है और इसके लिए प्रति शेयर 144 रुपये से 152 रुपये का प्राइस बैंड तय किया गया है। वहीं, एंकर निवेशकों के लिए बोली प्रक्रिया 18 जून को शुरू हो चुकी है। ₹883 करोड़ का है आईपीओ टर्टलमिंट फिनटेक इस आईपीओ के जरिए कुल 883 करोड़ रुपये जुटाने की योजना बना रही है। इसमें: 660.72 करोड़ रुपये के नए शेयर (Fresh Issue) जारी किए जाएंगे। 221.95 करोड़ रुपये के शेयर ऑफर फॉर सेल (OFS) के तहत बेचे जाएंगे। ऊपरी प्राइस बैंड 152 रुपये के आधार पर कंपनी का अनुमानित मार्केट वैल्यूएशन करीब 4,500 करोड़ रुपये आंका गया है। कब तक लगा सकेंगे बोली? रिटेल निवेशकों के लिए यह इश्यू: ओपनिंग डेट: 19 जून 2026 क्लोजिंग डेट: 23 जून 2026 तक खुला रहेगा। वहीं एंकर निवेशकों ने 18 जून को ही इसमें निवेश के लिए बोली लगाई। न्यूनतम कितना निवेश करना होगा? कंपनी ने आईपीओ का लॉट साइज 98 शेयर तय किया है। एक शेयर का अधिकतम मूल्य: ₹152 एक लॉट का निवेश: ₹14,896 निवेशकों को कम से कम एक लॉट के लिए आवेदन करना होगा, जबकि इसके बाद उसी के गुणक में अतिरिक्त बोली लगाई जा सकेगी। किस वर्ग के लिए कितना आरक्षण? इश्यू में विभिन्न निवेशक श्रेणियों के लिए आरक्षण इस प्रकार है: 75% – क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIB) 15% – नॉन-इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (NII) 10% – रिटेल निवेशक ग्रे मार्केट में कैसा है माहौल? ग्रे मार्केट में फिलहाल टर्टलमिंट आईपीओ का प्रीमियम लगभग 1.32% बताया जा रहा है। मौजूदा संकेतों के अनुसार, ऊपरी प्राइस बैंड के आधार पर शेयर में लगभग ₹2 प्रति शेयर की संभावित लिस्टिंग गेन का अनुमान लगाया जा रहा है। हालांकि, जीएमपी समय के साथ बदल सकता है और इसे निवेश का एकमात्र आधार नहीं माना जाना चाहिए। महत्वपूर्ण तारीखें इवेंट तारीख एंकर बुक ओपन 18 जून 2026 आईपीओ ओपन 19 जून 2026 आईपीओ क्लोज 23 जून 2026 अलॉटमेंट 24 जून 2026 रिफंड प्रक्रिया 25 जून 2026 डीमैट अकाउंट में शेयर क्रेडिट 25 जून 2026 लिस्टिंग 29 जून 2026 क्या काम करती है Turtlemint? टर्टलमिंट एक टेक्नोलॉजी-आधारित इंश्योरेंस डिस्ट्रीब्यूशन प्लेटफॉर्म है, जो ग्राहकों, इंश्योरेंस कंपनियों और डिजिटल पार्टनर्स को एक मंच पर जोड़ता है। 30 सितंबर 2025 तक: कंपनी के पास 6 लाख से अधिक डिजिटल पार्टनर्स थे। इनमें करीब 4.85 लाख PoSPs (Point of Sales Persons) शामिल थे। अप्रैल 2022 से सितंबर 2025 के बीच कंपनी ने 1.97 करोड़ इंश्योरेंस पॉलिसियों के वितरण में मदद की।
ट्रेड सीक्रेट्स मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अपील खारिज की भारत की सबसे बड़ी आईटी कंपनियों में से एक Tata Consultancy Services (TCS) को अमेरिका में चल रहे ट्रेड सीक्रेट्स विवाद में बड़ा झटका लगा है। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने कंपनी की अपील सुनने से इनकार कर दिया है, जिसके बाद TCS को 70 मिलियन डॉलर (करीब 590 करोड़ रुपये) का अतिरिक्त एकमुश्त खर्च दर्ज करना पड़ेगा। इस फैसले के बाद मामले में कंपनी की कुल वित्तीय देनदारी लगभग 220 मिलियन डॉलर तक पहुंच गई है। पहली तिमाही में दर्ज होगा विशेष खर्च TCS ने अपने बयान में कहा कि वह वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में 70 मिलियन डॉलर का अतिरिक्त "एक्सेप्शनल चार्ज" दर्ज करेगी। इसमें हर्जाना, ब्याज और कानूनी खर्च शामिल होंगे। कंपनी पहले ही इस मामले के लिए 150 मिलियन डॉलर का प्रावधान कर चुकी थी। अब नए प्रावधान के साथ कुल राशि 220 मिलियन डॉलर हो जाएगी। DXC टेक्नोलॉजी के पक्ष में रहा फैसला अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने 15 जून को DXC Technology के पक्ष में दिए गए 168 मिलियन डॉलर के हर्जाने के फैसले को बरकरार रखा। यह मामला DXC की पूर्ववर्ती कंपनी Computer Sciences Corporation (CSC) द्वारा 2019 में दायर किए गए मुकदमे से जुड़ा है। क्या है पूरा विवाद? मुकदमे के अनुसार, TCS पर आरोप लगाया गया था कि उसने बीमा कंपनी Transamerica के लगभग 2,200 कर्मचारियों को नियुक्त किया और उनके आंतरिक सिस्टम तक पहुंच का उपयोग करते हुए जीवन बीमा प्रबंधन के लिए एक प्रतिस्पर्धी प्लेटफॉर्म विकसित किया। DXC का दावा था कि इस प्रक्रिया में उसके ट्रेड सीक्रेट्स और गोपनीय व्यावसायिक जानकारियों का अनुचित इस्तेमाल किया गया। 2023 में जूरी ने लगाया था 210 मिलियन डॉलर का जुर्माना साल 2023 में अमेरिकी जूरी ने TCS को जानबूझकर ट्रेड सीक्रेट्स चोरी करने का दोषी मानते हुए 210 मिलियन डॉलर का हर्जाना देने की सिफारिश की थी। हालांकि बाद में अमेरिकी जिला न्यायाधीश ने इस राशि को घटाकर 168 मिलियन डॉलर कर दिया था। इसमें: 56 मिलियन डॉलर क्षतिपूर्ति (Compensatory Damages) 112 मिलियन डॉलर दंडात्मक हर्जाना (Punitive Damages) शामिल था। इसके बाद 2025 में अमेरिकी अपीलीय अदालत ने भी इस फैसले को बरकरार रखा था। सुप्रीम कोर्ट में क्या थी TCS की दलील? TCS का कहना था कि DXC ने वास्तविक वित्तीय नुकसान साबित नहीं किया है, इसलिए उसे अनुचित लाभ (Unjust Enrichment) के आधार पर हर्जाना नहीं मिलना चाहिए। कंपनी ने यह भी तर्क दिया कि दंडात्मक हर्जाने की राशि अत्यधिक है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने मामले की समीक्षा करने से इनकार कर दिया, जिससे निचली अदालतों का फैसला प्रभावी हो गया। मुनाफे पर कितना असर? TCS का जनवरी-मार्च तिमाही का शुद्ध लाभ 137.18 अरब रुपये (लगभग 1.45 अरब डॉलर) रहा था। विश्लेषकों के अनुसार 70 मिलियन डॉलर का अतिरिक्त प्रावधान कंपनी की मजबूत वित्तीय स्थिति के मुकाबले सीमित प्रभाव डालेगा, लेकिन यह एक बार का बड़ा खर्च जरूर माना जाएगा। निवेशकों की नजर अगले नतीजों पर अब निवेशकों की निगाह TCS के आगामी तिमाही परिणामों पर रहेगी, जहां यह विशेष खर्च कंपनी की आय और लाभ पर असर डालता दिखाई देगा। हालांकि कंपनी का मुख्य व्यवसाय और परिचालन प्रदर्शन फिलहाल मजबूत बना हुआ है।
नई दिल्ली: घरेलू शेयर बाजार में आज सकारात्मक शुरुआत देखने को मिली। शुरुआती कारोबार में बीएसई सेंसेक्स 400 अंक से अधिक की तेजी के साथ कारोबार करता दिखा, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी50 इंडेक्स 23,300 के स्तर को पार कर गया। सुबह करीब 9:45 बजे सेंसेक्स 430.61 अंक यानी 0.58 फीसदी की बढ़त के साथ 74,349.37 अंक पर कारोबार कर रहा था। वहीं, निफ्टी 114.45 अंक या 0.49 फीसदी चढ़कर 23,356.55 अंक पर पहुंच गया। इस बीच भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले 0.2 फीसदी कमजोर होकर 95.54 पर खुला। पिछले कारोबारी सत्र में रुपया 95.35 के स्तर पर बंद हुआ था। रिलायंस इंडस्ट्रीज में सबसे ज्यादा तेजी सेंसेक्स के 30 शेयरों में से 22 शेयर हरे निशान में खुले। सबसे ज्यादा बढ़त रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयरों में दर्ज की गई, जो करीब 1.5 फीसदी मजबूत हुए। इसके अलावा इन शेयरों में भी तेजी रही: हिंदुस्तान यूनिलीवर भारत इलेक्ट्रॉनिक्स (BEL) इन्फोसिस ट्रेंट स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) लार्सन एंड टुब्रो (L&T) एचडीएफसी बैंक टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) इन शेयरों में रही कमजोरी दूसरी ओर कुछ प्रमुख शेयरों में गिरावट भी देखने को मिली। इनमें शामिल हैं: बजाज फिनसर्व पावरग्रिड टेक महिंद्रा एचसीएल टेक महिंद्रा एंड महिंद्रा सन फार्मा मारुति सुजुकी मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों का प्रदर्शन ब्रॉडर मार्केट में भी मिश्रित रुख देखने को मिला। निफ्टी मिडकैप इंडेक्स में 0.01 फीसदी की बढ़त रही। निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स 0.25 फीसदी मजबूत हुआ। सेक्टरवार प्रदर्शन आज के कारोबार में FMCG सेक्टर सबसे मजबूत रहा। निफ्टी FMCG इंडेक्स में लगभग 1 फीसदी की तेजी दर्ज की गई। इसके अलावा: आईटी सेक्टर में खरीदारी प्राइवेट बैंकिंग शेयरों में मजबूती ऑयल एंड गैस सेक्टर में बढ़त वहीं, मेटल और ऑटो सेक्टर में दबाव देखने को मिला। कच्चे तेल की कीमतों में भी बढ़ोतरी पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच कच्चे तेल की कीमतों में हल्की तेजी देखी गई है। ब्रेंट क्रूड 0.65 फीसदी बढ़कर 92.04 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। इंडियन बास्केट की कीमत 1.31 फीसदी बढ़कर 97.19 डॉलर प्रति बैरल हो गई। विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय हालात और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव आने वाले दिनों में भारतीय बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।