United States Dollar के मुकाबले भारतीय रुपया लगातार दबाव में बना हुआ है। मंगलवार को कारोबार शुरू होते ही रुपया डॉलर के मुकाबले अपने अब तक के सबसे निचले स्तर 96.85 तक पहुंच गया। ट्रेडिंग के दौरान यह और गिरकर 96.93 प्रति डॉलर तक पहुंच गया। लगातार 13वें कारोबारी दिन रुपये में कमजोरी देखने के बाद बाजार में चिंता बढ़ गई है। पिछले सप्ताह रुपया पहली बार 96 प्रति डॉलर के पार गया था और अब गिरावट का सिलसिला जारी है। जानकारों का मानना है कि मजबूत डॉलर, महंगे कच्चे तेल और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता ने भारतीय मुद्रा पर दबाव बढ़ा दिया है। डॉलर इतना मजबूत क्यों हो रहा है? अमेरिका में बॉन्ड यील्ड तेजी से बढ़ रही है, जिससे डॉलर को मजबूती मिल रही है। रिपोर्ट्स के अनुसार 30 साल के अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड की यील्ड 5.18% तक पहुंच गई है, जो 2007 की वैश्विक आर्थिक मंदी के बाद सबसे ऊंचे स्तरों में से एक मानी जा रही है। वहीं 10 साल की बॉन्ड यील्ड भी करीब 4.66% तक पहुंच गई। जब अमेरिकी बॉन्ड यील्ड बढ़ती है, तो वैश्विक निवेशक वहां निवेश को ज्यादा सुरक्षित मानते हैं। इसका असर यह होता है कि उभरते बाजारों से पैसा निकलने लगता है और डॉलर मजबूत हो जाता है। इसी वजह से भारतीय रुपये जैसी मुद्राओं पर दबाव बढ़ रहा है। कच्चे तेल की कीमतें भी बनी बड़ी वजह भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है। ऐसे में कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी सीधे भारतीय अर्थव्यवस्था और रुपये पर असर डालती है। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव की वजह से अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में उतार-चढ़ाव बना हुआ है। तेल महंगा होने पर भारत को ज्यादा डॉलर खर्च करने पड़ते हैं, जिससे डॉलर की मांग बढ़ जाती है और रुपया कमजोर पड़ता है। महंगे तेल का असर सिर्फ करेंसी तक सीमित नहीं रहता। इससे: ट्रांसपोर्ट महंगा हो सकता है रोजमर्रा की चीजों के दाम बढ़ सकते हैं महंगाई पर दबाव बढ़ सकता है RBI क्या कर रहा है? Reserve Bank of India रुपये की गिरावट को नियंत्रित करने के लिए बाजार में हस्तक्षेप कर रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक RBI डॉलर बेचकर रुपये को सपोर्ट देने की कोशिश कर रहा है, ताकि गिरावट बहुत ज्यादा तेज न हो। हालांकि मौजूदा वैश्विक हालात भारतीय मुद्रा के लिए चुनौती बने हुए हैं। अगर: डॉलर मजबूत बना रहता है तेल की कीमतें ऊंची रहती हैं वैश्विक तनाव बढ़ता है तो आने वाले दिनों में रुपये पर दबाव जारी रह सकता है। आम लोगों पर क्या पड़ेगा असर? रुपये की कमजोरी का असर आम लोगों की जेब पर भी पड़ सकता है। इससे: विदेश यात्रा महंगी हो सकती है आयातित इलेक्ट्रॉनिक्स और गैजेट्स के दाम बढ़ सकते हैं पेट्रोल-डीजल महंगा हो सकता है विदेशी शिक्षा और ऑनलाइन सेवाएं महंगी पड़ सकती हैं हालांकि निर्यात करने वाली कंपनियों को कमजोर रुपये से कुछ फायदा भी हो सकता है, क्योंकि उन्हें डॉलर में ज्यादा कमाई होती है।
अगर आप आज सोना या चांदी खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो आपके लिए राहत की खबर है। 16 मई 2026 को सोने और चांदी की कीमतों में हल्की गिरावट दर्ज की गई है। हफ्तेभर की तेज उतार-चढ़ाव के बाद बाजार फिलहाल थोड़ा शांत नजर आ रहा है। आज कितना सस्ता हुआ सोना? आज सोने की कीमत में मामूली 1 रुपये प्रति ग्राम की गिरावट देखी गई है। आज का गोल्ड रेट कैरेट आज का रेट कल का रेट बदलाव 24 कैरेट (1 ग्राम) ₹15,790 ₹15,791 -₹1 22 कैरेट (1 ग्राम) ₹14,474 ₹14,475 -₹1 18 कैरेट (1 ग्राम) ₹11,842 ₹11,843 -₹1 शहरों में 22 कैरेट सोने का भाव शहर आज का रेट बदलाव Patna ₹14,479 -₹1 Lucknow ₹14,489 -₹1 Ranchi ₹14,474 -₹1 New Delhi ₹14,489 -₹1 Mumbai ₹14,474 -₹1 Kolkata ₹14,474 -₹1 चांदी में भी दिखी हल्की गिरावट चांदी की कीमतों में भी आज नरमी देखने को मिली है। 1 किलो चांदी का भाव 100 रुपये घटकर ₹2,89,900 पर पहुंच गया है। आज का सिल्वर रेट यूनिट आज का रेट कल का रेट बदलाव 1 ग्राम ₹289.90 ₹290 -₹0.10 10 ग्राम ₹2,899 ₹2,900 -₹1 1 किलो ₹2,89,900 ₹2,90,000 -₹100 शहरों में चांदी का भाव शहर आज का रेट (1Kg) बदलाव Patna ₹2,89,900 -₹100 Lucknow ₹2,89,900 -₹100 Ranchi ₹2,89,900 -₹100 New Delhi ₹2,89,900 -₹100 Mumbai ₹2,89,900 -₹100 अभी खरीदना सही रहेगा? विशेषज्ञों के अनुसार, बाजार फिलहाल स्थिर नजर आ रहा है। छोटी खरीदारी करने वालों के लिए यह अच्छा मौका माना जा सकता है। हालांकि बड़ी खरीदारी करने वाले निवेशक 1-2 दिन बाजार की चाल और अंतरराष्ट्रीय कीमतों पर नजर रख सकते हैं।
पश्चिम एशिया में जारी तनाव और विदेशी मुद्रा पर बढ़ते दबाव के बीच भारत में सोने और चांदी के आयात के आंकड़ों ने सरकार की चिंता बढ़ा दी है। Narendra Modi द्वारा लोगों से एक साल तक सोने की खरीद टालने की अपील से पहले अप्रैल महीने में गोल्ड और सिल्वर इंपोर्ट में बड़ी तेजी दर्ज की गई। वाणिज्य मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल 2026 में भारत का सोने का आयात 81.69 प्रतिशत बढ़कर 5.62 अरब डॉलर तक पहुंच गया। वहीं चांदी का आयात 157.16 प्रतिशत उछलकर 41.1 करोड़ डॉलर हो गया। ऊंची कीमतों के बावजूद बढ़ा गोल्ड इंपोर्ट बढ़ती अंतरराष्ट्रीय कीमतों के बावजूद भारत में सोने की मांग मजबूत बनी हुई है। वित्त वर्ष 2025-26 में मूल्य के लिहाज से गोल्ड इंपोर्ट 24 प्रतिशत बढ़कर रिकॉर्ड 71.98 अरब डॉलर तक पहुंच गया। हालांकि मात्रा के हिसाब से आयात 4.76 प्रतिशत घटकर 721.03 टन रहा। विशेषज्ञों का मानना है कि ऊंची कीमतों के बावजूद निवेश और ज्वेलरी डिमांड के चलते आयात में तेजी बनी रही। सरकार ने बढ़ाई इंपोर्ट ड्यूटी सरकार ने हाल ही में सोने और चांदी पर इंपोर्ट ड्यूटी 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दी है। माना जा रहा है कि आने वाले महीनों में इसका असर आयात पर दिखाई दे सकता है। वाणिज्य सचिव Rajesh Agrawal ने कहा कि शुल्क बढ़ने से उपभोग आधारित मांग में कमी आ सकती है और गोल्ड इंपोर्ट घट सकता है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि चांदी का बड़ा हिस्सा औद्योगिक उपयोग में आने के कारण उस पर शुल्क वृद्धि का असर अपेक्षाकृत कम हो सकता है। चांदी के आयात में रिकॉर्ड तेजी वित्त वर्ष 2025-26 में चांदी का आयात करीब 150 प्रतिशत बढ़कर 12 अरब डॉलर तक पहुंच गया। मात्रा के लिहाज से यह 42 प्रतिशत बढ़कर 7,334.96 टन रहा। विशेषज्ञों के मुताबिक इलेक्ट्रॉनिक्स, सोलर और इंडस्ट्रियल सेक्टर में बढ़ती मांग के कारण सिल्वर इंपोर्ट में तेज उछाल देखा गया है। बढ़ा व्यापार घाटा अप्रैल में सोने और चांदी के बढ़े आयात का असर देश के व्यापार घाटे पर भी पड़ा। भारत का ट्रेड डेफिसिट बढ़कर 28.38 अरब डॉलर के तीन महीने के उच्च स्तर पर पहुंच गया। सरकार का फोकस अब विदेशी मुद्रा बचाने और चालू खाते के घाटे को नियंत्रित करने पर है। भारत में कहां से आता है सबसे ज्यादा सोना? Switzerland भारत का सबसे बड़ा गोल्ड सप्लायर बना हुआ है। देश के कुल गोल्ड इंपोर्ट में इसकी हिस्सेदारी करीब 40 प्रतिशत है। इसके बाद United Arab Emirates की हिस्सेदारी 16 प्रतिशत से अधिक और South Africa की करीब 10 प्रतिशत है। अप्रैल में सिर्फ स्विट्जरलैंड से भारत का आयात 26.73 प्रतिशत बढ़कर 1.47 अरब डॉलर तक पहुंच गया। भारत, China के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सोना उपभोक्ता माना जाता है। देश में गोल्ड इंपोर्ट का बड़ा हिस्सा ज्वेलरी इंडस्ट्री की मांग पूरी करने के लिए किया जाता है।
Anand Mahindra ने भारत की तेजी से बढ़ती मैन्युफैक्चरिंग क्षमता को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि देश की असली औद्योगिक ताकत चमकदार हेडलाइन्स या बड़ी कंपनियों से नहीं, बल्कि हजारों छोटे और मध्यम उद्योगों यानी MSMEs से बन रही है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक यूजर शुभम मिश्रा की पोस्ट का हवाला देते हुए कहा कि भारत की औद्योगिक क्रांति चुपचाप फैक्ट्री फ्लोर्स, वर्कशॉप्स और सप्लायर नेटवर्क में आगे बढ़ रही है। “MSMEs ही भारत की असली ताकत” Anand Mahindra ने कहा कि भारत का भविष्य केवल बड़े कॉर्पोरेट्स पर निर्भर नहीं होगा। देश की औद्योगिक मजबूती उन हजारों मध्यम स्तर के उद्यमों से बनेगी जो धीरे-धीरे विश्वस्तरीय निर्माता बनते जा रहे हैं। उन्होंने लिखा कि मैन्युफैक्चरिंग की असली ताकत कभी ग्लैमरस नहीं होती, बल्कि यह फैक्ट्री शेड्स और छोटे वर्कशॉप्स में लगातार तैयार होती है। बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और आसान नियमों की मांग महिंद्रा ने MSMEs को और मजबूत बनाने के लिए बेहतर सड़कें, प्लग-एंड-प्ले इंडस्ट्रियल पार्क्स और तेज रेग्युलेटरी अप्रूवल्स की जरूरत बताई। उनके मुताबिक Ease of Doing Business सिर्फ बड़ी कंपनियों के लिए नहीं, बल्कि छोटे और मध्यम उद्योगों के लिए भी उतना ही जरूरी है। उन्होंने कहा कि ऑपरेशनल फ्रिक्शन कम करने से भारत की मैन्युफैक्चरिंग ग्रोथ और तेज हो सकती है। 12 साल में 10 गुना बढ़ा इलेक्ट्रॉनिक्स प्रोडक्शन सोशल मीडिया यूजर शुभम मिश्रा के अनुसार, भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन 2014 में लगभग 10 बिलियन डॉलर था, जो अब बढ़कर 115 बिलियन डॉलर तक पहुंच चुका है। उन्होंने दावा किया कि भारत की प्रगति को अक्सर कम आंका जाता है क्योंकि असली बदलाव सप्लायर इकोसिस्टम और कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में हो रहा है। Apple सप्लाई चेन में बढ़ी भारत की भूमिका Apple की ग्लोबल सप्लाई चेन में भी भारत की हिस्सेदारी लगातार बढ़ रही है। पोस्ट के मुताबिक, पिछले पांच वर्षों में भारत में iPhone उत्पादन का हिस्सा बढ़कर करीब 14 प्रतिशत तक पहुंच गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत धीरे-धीरे असेंबलिंग हब से एडवांस मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम की तरफ बढ़ रहा है। चीन से की गई तुलना शुभम मिश्रा ने भारत की मौजूदा स्थिति की तुलना China के शुरुआती औद्योगिक दौर से की। उनका कहना है कि चीन ने भी 2003 से 2018 के बीच धीरे-धीरे छोटे सप्लायर्स और कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग के दम पर खुद को वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग ताकत में बदला था। अब भारत भी उसी दिशा में आगे बढ़ता दिखाई दे रहा है, जहां छोटे वेंडर्स और Tier-3 सप्लायर्स औद्योगिक विकास की रीढ़ बन रहे हैं।
देश की तेल कंपनियों ने 16 मई 2026 के लिए पेट्रोल और डीजल के ताजा दाम जारी कर दिए हैं। कई बड़े शहरों में आज ईंधन की कीमतें स्थिर बनी हुई हैं, जबकि कुछ राज्यों के जिलों में हल्का उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। Mumbai और New Delhi जैसे महानगरों में कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ है। पेट्रोल के ताजा रेट आज Mumbai में पेट्रोल 106.68 रुपये प्रति लीटर पर स्थिर है। वहीं Kolkata में पेट्रोल 4 पैसे महंगा हुआ है। Noida में 19 पैसे की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। Patna में पेट्रोल 51 पैसे महंगा हुआ, जबकि Ranchi में 41 पैसे की तेजी देखने को मिली। दूसरी तरफ Lucknow, Bengaluru और Bhopal में हल्की गिरावट दर्ज की गई। प्रमुख शहरों में पेट्रोल के रेट शहर आज का भाव (₹/लीटर) बदलाव लखनऊ 97.39 -0.16 नोएडा 97.97 +0.19 पटना 109.06 +0.51 रांची 101.25 +0.41 मुंबई 106.68 स्थिर नई दिल्ली 97.77 स्थिर कोलकाता 108.74 +0.04 चेन्नई 103.67 स्थिर बेंगलुरु 106.17 -0.04 भोपाल 109.63 -0.08 डीजल के दामों में कहां हुआ बदलाव? डीजल की कीमतों में भी कुछ शहरों में मामूली बदलाव देखने को मिला है। Noida में डीजल 18 पैसे महंगा हुआ है। Gaya और Patna में 47 पैसे की बढ़त दर्ज की गई है। वहीं Deoghar में डीजल 51 पैसे और Ranchi में 34 पैसे महंगा हुआ है। दूसरी ओर Lucknow और Darbhanga में कीमतों में गिरावट आई है। प्रमुख शहरों में डीजल के रेट शहर आज का भाव (₹/लीटर) बदलाव लखनऊ 90.69 -0.13 नोएडा 91.20 +0.18 पटना 95.10 +0.47 रांची 96.10 +0.34 मुंबई 93.14 स्थिर नई दिल्ली 90.67 स्थिर कोलकाता 95.13 स्थिर चेन्नई 95.25 स्थिर गुरुग्राम 90.89 -0.05 भोपाल 94.82 -0.06 विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों और स्थानीय टैक्स के आधार पर आने वाले दिनों में फ्यूल प्राइस में और बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
सरकार द्वारा सितंबर 2026 तक चीनी निर्यात पर रोक लगाने के फैसले के बाद गुरुवार को शुगर सेक्टर के शेयरों में तेज गिरावट देखने को मिली। बाजार खुलते ही कई प्रमुख चीनी कंपनियों के स्टॉक्स दबाव में आ गए, जिससे निवेशकों की चिंता बढ़ गई। सरकार के इस फैसले का सबसे ज्यादा असर उन कंपनियों पर पड़ा जिनका कारोबार निर्यात पर काफी हद तक निर्भर माना जाता है। शुरुआती कारोबार में Balrampur Chini के शेयर में करीब 4 फीसदी तक की गिरावट दर्ज की गई। इसके अलावा Dalmia Bharat Sugar and Industries, EID Parry India और अन्य शुगर कंपनियों के शेयर भी लाल निशान में कारोबार करते दिखे। सितंबर 2026 तक निर्यात पर लगी रोक केंद्र सरकार ने घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता बनाए रखने और कीमतों को नियंत्रित रखने के उद्देश्य से चीनी निर्यात पर अस्थायी प्रतिबंध लगाने का फैसला किया है। यह रोक 30 सितंबर 2026 तक लागू रहेगी। हालांकि सरकार ने यूरोपीय यूनियन (EU) और अमेरिका को टैरिफ रेट कोटा (TRQ) व्यवस्था के तहत होने वाले निर्यात को इस प्रतिबंध से बाहर रखा है। यानी इन विशेष समझौतों के तहत सीमित मात्रा में चीनी का निर्यात जारी रहेगा। पहले से भेजे जा रहे माल को मिली राहत सरकार ने उन निर्यात खेपों को राहत दी है जो पहले से निर्यात प्रक्रिया में शामिल हैं। यानी जिन शिपमेंट्स की प्रक्रिया पहले शुरू हो चुकी थी, उन्हें कुछ शर्तों के साथ निर्यात की अनुमति दी जा सकती है। इस फैसले से घरेलू बाजार में चीनी की सप्लाई बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है, लेकिन शेयर बाजार में निवेशकों ने इसे शुगर कंपनियों के मुनाफे पर असर डालने वाला कदम माना। शुगर शेयरों में कैसा रहा हाल? सरकारी फैसले के बाद कई प्रमुख शुगर कंपनियों के शेयरों में गिरावट दर्ज की गई— Balrampur Chini के शेयर में करीब 4% तक की कमजोरी EID Parry India करीब 1.40% फिसलकर 794 रुपये के आसपास पहुंचा Dalmia Bharat Sugar and Industries भी दबाव में दिखा अन्य चीनी कंपनियों के शेयरों में भी बिकवाली का माहौल रहा क्यों अहम है सरकार का यह फैसला? विशेषज्ञों का मानना है कि देश में बढ़ती मांग और संभावित उत्पादन दबाव को देखते हुए सरकार घरेलू कीमतों को नियंत्रण में रखना चाहती है। चीनी निर्यात पर रोक से घरेलू बाजार में पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध रहेगा, जिससे महंगाई को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है। हालांकि दूसरी तरफ इस फैसले से चीनी कंपनियों की एक्सपोर्ट कमाई प्रभावित हो सकती है, जिसका असर उनके शेयरों पर दिखाई दे रहा है। आने वाले दिनों में निवेशकों की नजर सरकार की आगे की नीति और घरेलू चीनी उत्पादन के आंकड़ों पर बनी रहेगी।
घरेलू शेयर बाजार में गुरुवार को कारोबार की शुरुआत मजबूती के साथ हुई। वैश्विक बाजारों से मिले सकारात्मक संकेतों और चुनिंदा सेक्टर्स में खरीदारी के दम पर सेंसेक्स और निफ्टी दोनों हरे निशान में खुले। शुरुआती कारोबार में बैंकिंग, फार्मा और मेटल शेयरों में तेजी देखने को मिली, जबकि आईटी सेक्टर पर दबाव बना रहा। बीएसई सेंसेक्स 339 अंकों की तेजी के साथ 74,947.12 के स्तर पर खुला। वहीं, एनएसई निफ्टी भी 118 अंकों की बढ़त लेकर 23,530.25 पर पहुंच गया। बाजार खुलते ही निवेशकों का रुझान चुनिंदा स्टॉक्स में खरीदारी की ओर दिखा, जिससे कई शेयरों में जोरदार हलचल रही। फार्मा शेयरों में खरीदारी, IT सेक्टर दबाव में शुरुआती कारोबार में फार्मा सेक्टर ने बाजार को सपोर्ट दिया। सिप्ला समेत कई दवा कंपनियों के शेयरों में तेजी दर्ज की गई, जिसके चलते निफ्टी फार्मा इंडेक्स करीब 1.26 फीसदी मजबूत हुआ। दूसरी ओर आईटी शेयरों में कमजोरी देखने को मिली। HCL Tech, TCS, Tech Mahindra और Infosys जैसे बड़े आईटी स्टॉक्स में बिकवाली हावी रही। निफ्टी IT इंडेक्स करीब 0.83 फीसदी तक फिसल गया। डॉलर के मुकाबले हल्की कमजोरी के साथ खुला रुपया विदेशी मुद्रा बाजार में भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले हल्की कमजोरी के साथ खुला। गुरुवार को रुपया 95.73 प्रति डॉलर के स्तर पर खुला, जबकि पिछले कारोबारी सत्र में यह 95.71 पर बंद हुआ था। यानी शुरुआती कारोबार में रुपये में 2 पैसे की गिरावट दर्ज की गई। CNG महंगी होते ही MGL शेयर में तेजी महानगर गैस लिमिटेड (MGL) ने मुंबई महानगर क्षेत्र में CNG की कीमत में 2 रुपये प्रति किलोग्राम की बढ़ोतरी का ऐलान किया है। नई दरें लागू होने के बाद अब मुंबई, ठाणे और नवी मुंबई में CNG की कीमत 84 रुपये प्रति किलो हो गई है। इस फैसले का असर कंपनी के शेयर पर भी दिखाई दिया। शुरुआती कारोबार में MGL का स्टॉक करीब 1.5 फीसदी उछलकर 1,059 रुपये के आसपास पहुंच गया। Kaynes Technology के शेयर में भारी गिरावट आज के कारोबार में Kaynes Technology के शेयर निवेशकों के लिए चिंता का कारण बने रहे। कंपनी के मार्च तिमाही नतीजे बाजार की उम्मीदों से कमजोर रहने के बाद स्टॉक में बड़ी गिरावट आई। करीब 10 बजे तक कंपनी का शेयर लगभग 18 फीसदी टूटकर 3,431.70 रुपये के स्तर पर कारोबार करता दिखा। वहीं, वैश्विक ब्रोकरेज फर्म JPMorgan द्वारा रेटिंग घटाने से भी निवेशकों की धारणा कमजोर हुई। वेदांता के शेयर में जोरदार उछाल मेटल सेक्टर की दिग्गज कंपनी वेदांता के शेयरों में मजबूत खरीदारी देखने को मिली। शुरुआती कारोबार में स्टॉक 3 फीसदी से ज्यादा चढ़कर 335 रुपये के पार पहुंच गया। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि कमोडिटी कीमतों में सुधार और मजबूत मांग के संकेतों से मेटल शेयरों को सपोर्ट मिल रहा है। निवेशकों के लिए क्या संकेत? विशेषज्ञों के मुताबिक बाजार में फिलहाल सकारात्मक माहौल बना हुआ है, लेकिन सेक्टर आधारित उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। फार्मा और मेटल शेयरों में फिलहाल मजबूती दिख रही है, जबकि आईटी सेक्टर पर दबाव बना रह सकता है। हालांकि, वैश्विक आर्थिक संकेत, डॉलर की चाल और कंपनियों के तिमाही नतीजे आने वाले दिनों में बाजार की दिशा तय करेंगे।
देशभर में बढ़ती महंगाई के बीच आम लोगों की रसोई पर एक और बोझ बढ़ गया है। देश के सबसे बड़े डेयरी ब्रांड Amul ने दूध की कीमतों में 2 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी कर दी है। नई कीमतें आज यानी 14 मई 2026 से लागू हो चुकी हैं। इस फैसले का असर करोड़ों उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ेगा, क्योंकि अमूल दूध का इस्तेमाल देश के लगभग हर हिस्से में बड़े पैमाने पर किया जाता है। दूध की कीमतों में बढ़ोतरी ऐसे समय में हुई है जब पहले से ही सब्जियां, गैस सिलेंडर और रोजमर्रा की जरूरत की कई चीजें महंगी हो चुकी हैं। ऐसे में अब दूध के दाम बढ़ने से घरेलू बजट और बिगड़ सकता है। क्यों बढ़ाए गए अमूल दूध के दाम? अमूल ब्रांड के तहत उत्पाद बेचने वाली Gujarat Cooperative Milk Marketing Federation (GCMMF) ने बताया कि दूध उत्पादन से जुड़ी लागत में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। संस्था के अनुसार पिछले कुछ महीनों में पशु आहार, पैकेजिंग सामग्री, ट्रांसपोर्टेशन और ईंधन की कीमतों में तेजी से इजाफा हुआ है। इन बढ़ती लागतों का सीधा असर डेयरी उद्योग पर पड़ा है, जिसके कारण कंपनी को दूध के दाम बढ़ाने का फैसला लेना पड़ा। GCMMF का कहना है कि लागत बढ़ने के बावजूद कीमतों में सीमित बढ़ोतरी की गई है ताकि उपभोक्ताओं पर ज्यादा बोझ न पड़े। कितनी बढ़ीं कीमतें? नई दरों के लागू होने के बाद अब अमूल दूध के अलग-अलग वेरिएंट्स के दाम 2 रुपये प्रति लीटर तक बढ़ गए हैं। संस्था के मुताबिक यह बढ़ोतरी कुल कीमत का लगभग 2.5 से 3.5 प्रतिशत है, जो मौजूदा खाद्य महंगाई दर से कम बताई जा रही है। हालांकि, आम ग्राहकों का मानना है कि लगातार बढ़ती कीमतों का असर सीधे घरेलू खर्च पर पड़ रहा है, खासकर मध्यम वर्ग और निम्न आय वाले परिवारों पर। किसानों को भी मिलेगा फायदा GCMMF ने यह भी साफ किया कि दूध की बढ़ी कीमतों का फायदा केवल कंपनी को नहीं, बल्कि दूध उत्पादक किसानों को भी मिलेगा। फेडरेशन के अनुसार सदस्य डेयरी संघों ने किसानों से दूध खरीदने की कीमत में भी बढ़ोतरी की है। मई 2025 की तुलना में दूध खरीद मूल्य में करीब 30 रुपये प्रति किलोग्राम फैट तक का इजाफा किया गया है। इससे डेयरी किसानों की आय में सुधार होने की उम्मीद है। संस्था का दावा है कि अमूल अपने मुनाफे का बड़ा हिस्सा सीधे किसानों तक पहुंचाने की नीति पर काम करता है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलती है। लगातार दूसरी बार बढ़े दूध के दाम गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब अमूल ने दूध की कीमतों में इजाफा किया हो। इससे पहले मई 2025 में भी कंपनी ने दाम बढ़ाए थे। अब करीब एक साल बाद फिर से कीमतों में बढ़ोतरी होने से लोगों की चिंता बढ़ गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आने वाले महीनों में ईंधन और पशु आहार की कीमतें और बढ़ती हैं, तो डेयरी उत्पादों की कीमतों में आगे भी इजाफा देखने को मिल सकता है।
भारत की प्रमुख सरकारी तेल कंपनी Hindustan Petroleum Corporation Limited (HPCL) ने बढ़ती वैश्विक ऊर्जा कीमतों के बीच एक बड़ा कदम उठाया है। कंपनी ने रूस से कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की खरीद में तेजी लाने का फैसला किया है, ताकि उत्पादन लागत और मुनाफे पर पड़ने वाले दबाव को कम किया जा सके। कंपनी के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर Vikas Kaushal ने पोस्ट-अर्निंग्स कॉन्फ्रेंस कॉल में बताया कि मौजूदा वैश्विक हालात को देखते हुए कंपनी अपने मार्जिन को सुरक्षित रखने के लिए रूसी तेल पर अधिक निर्भर हो रही है। मुनाफे को स्थिर रखने की रणनीति HPCL ने स्पष्ट किया है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव और भू-राजनीतिक तनाव के कारण लागत बढ़ रही है। ऐसे में कंपनी अपने रिफाइनिंग मार्जिन को बचाने के लिए सस्ते विकल्पों की ओर रुख कर रही है। प्रबंधन के अनुसार, कंपनी ने अगले दो महीनों के लिए कच्चे तेल की आपूर्ति पहले ही सुरक्षित कर ली है। साथ ही, जुलाई महीने के लिए स्पॉट कार्गो की खरीद भी शुरू कर दी गई है। रूस से बढ़ी खरीद, वैश्विक संकट का असर जानकारी के मुताबिक, ईरान और अमेरिका के बीच तनाव जैसे हालात ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को प्रभावित किया है। इसी दबाव को कम करने के लिए HPCL अब रूस से ज्यादा मात्रा में कच्चा तेल खरीद रही है। कंपनी का मानना है कि मौजूदा स्थिति लंबे समय तक बनी रही तो घरेलू स्तर पर ईंधन कीमतों को स्थिर रखना और भी चुनौतीपूर्ण हो सकता है। वित्तीय नतीजे: मुनाफे में 20% की बढ़ोतरी HPCL ने हाल ही में अपने तिमाही नतीजे जारी किए, जिसमें कंपनी के शुद्ध मुनाफे में 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। शुद्ध मुनाफा: ₹4,902 करोड़ पिछले तिमाही में: ₹4,703 करोड़ EBITDA में वृद्धि: 27.9% की मजबूत बढ़त कुल राजस्व: लगभग ₹1.14 लाख करोड़ (स्थिर) कंपनी ने वित्त वर्ष के लिए ₹19.25 प्रति शेयर का अंतिम डिविडेंड भी घोषित किया है। ईंधन खपत पर सरकार की चिंता कंपनी की यह रणनीति ऐसे समय में सामने आई है जब देश में ऊर्जा खपत और कीमतों को लेकर चिंता बढ़ रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, सरकार की ओर से भी ईंधन की बचत और खपत कम करने की अपील की गई है। हालांकि HPCL का कहना है कि वह बाजार की परिस्थितियों के अनुसार संतुलित नीति अपना रही है ताकि उपभोक्ताओं पर अचानक बोझ न बढ़े। क्या है आगे की चुनौती? विशेषज्ञों का मानना है कि अगर वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव लंबे समय तक जारी रहता है, तो भारत की तेल कंपनियों को सप्लाई और कीमत दोनों स्तर पर दबाव का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में रूस जैसे स्रोतों पर बढ़ती निर्भरता एक रणनीतिक बदलाव के रूप में देखी जा रही है।
घरेलू शेयर बाजार में लगातार दूसरे दिन भारी गिरावट देखने को मिली है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच निवेशकों में घबराहट बढ़ गई है। इसी बीच प्रधानमंत्री Narendra Modi की अपील ने भी बाजार की चिंता को और बढ़ा दिया। प्रधानमंत्री ने पश्चिम एशिया संकट को कोरोना महामारी के बाद सबसे बड़ा वैश्विक संकट बताते हुए लोगों से ईंधन और विदेशी मुद्रा बचाने की अपील की है। साथ ही उन्होंने वर्क फ्रॉम होम अपनाने की सलाह भी दी है। 24 घंटे में यह उनकी दूसरी ऐसी अपील मानी जा रही है। दो दिन में 2,000 अंक टूटा Sensex मंगलवार को शुरुआती कारोबार में BSE Sensex करीब 850 अंक तक लुढ़क गया, जबकि Nifty 50 में 200 अंकों से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई। सुबह 11 बजे तक सेंसेक्स 860.48 अंक यानी 1.13% गिरकर 75,154.80 पर कारोबार कर रहा था। वहीं निफ्टी 226.75 अंक यानी 0.95% टूटकर 23,589.10 पर पहुंच गया। सोमवार को भी सेंसेक्स 1312.91 अंक गिरा था। इस तरह दो कारोबारी सत्रों में सेंसेक्स लगभग 2,000 अंक टूट चुका है। रुपया डॉलर के मुकाबले ऑल टाइम लो पर भारतीय रुपया भी दबाव में दिखाई दिया। डॉलर के मुकाबले रुपया करीब 0.2 फीसदी टूटकर रिकॉर्ड निचले स्तर पर खुला। तेल की बढ़ती कीमतों और विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने रुपये पर अतिरिक्त दबाव डाला है। किन शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट? Infosys में सबसे ज्यादा 2.57% की गिरावट दर्ज की गई। इसके अलावा: Tech Mahindra Tata Consultancy Services HCL Technologies Asian Paints HDFC Bank Bajaj Finserv Titan Company जैसे शेयरों में भी तेज गिरावट देखी गई। वहीं दूसरी ओर Reliance Industries, State Bank of India, Tata Steel और UltraTech Cement के शेयरों में तेजी रही। निवेशकों को 5 लाख करोड़ का नुकसान लगातार गिरावट के कारण Bombay Stock Exchange में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल मार्केट कैप करीब 5 लाख करोड़ रुपये घटकर 462 लाख करोड़ रुपये रह गया। ब्रॉडर मार्केट में भी बिकवाली का दबाव रहा। निफ्टी मिडकैप 1.03% और स्मॉलकैप इंडेक्स 1.34% टूट गया। कच्चे तेल की कीमतों ने बढ़ाई चिंता अंतरराष्ट्रीय बाजार में Saudi Aramco की चेतावनी के बाद तेल बाजार में चिंता और बढ़ गई है। कंपनी का कहना है कि वैश्विक तेल भंडार तेजी से घट रहा है। ब्रेंट क्रूड की कीमत 105 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, होर्मुज स्ट्रेट में तनाव के कारण कुवैत और अन्य देशों का तेल निर्यात प्रभावित हुआ है। निवेशकों के लिए क्या संकेत? विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक पश्चिम एशिया का तनाव कम नहीं होता और कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता नहीं आती, तब तक भारतीय बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। विदेशी निवेशकों की बिकवाली और रुपये की कमजोरी भी बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगी।
भारतीय रुपया मंगलवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले अपने अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया। इंटरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में रुपया 95.57 प्रति डॉलर पर खुला और कारोबार के दौरान टूटकर 95.63 के ऑल टाइम लो तक पहुंच गया। यह पिछले बंद भाव की तुलना में 35 पैसे की गिरावट है। सोमवार को भी रुपया 79 पैसे टूटकर 95.28 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था। लगातार गिरते रुपये ने निवेशकों और आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। कच्चे तेल में उछाल से बढ़ा दबाव रुपये में कमजोरी की सबसे बड़ी वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी मानी जा रही है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने तेल बाजार को प्रभावित किया है, जिससे ब्रेंट क्रूड की कीमत 105 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई। Saudi Aramco ने भी चेतावनी दी है कि वैश्विक स्तर पर तेल का भंडार काफी कम हो रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अप्रैल में OPEC देशों का उत्पादन साल 2000 के बाद सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया। होर्मुज स्ट्रेट संकट का असर Strait of Hormuz में बढ़ते तनाव का असर वैश्विक तेल सप्लाई पर दिखाई दे रहा है। होर्मुज स्ट्रेट बंद होने के कारण कुवैत और इराक जैसे देश तेल निर्यात में दिक्कतों का सामना कर रहे हैं। इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ गई है। विदेशी निवेशकों की भारी बिकवाली भारतीय शेयर बाजार से विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली भी रुपये पर दबाव बढ़ा रही है। आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों ने सोमवार को भारतीय बाजार में करीब 8,437 करोड़ रुपये के शेयर बेच दिए। ईरान संकट शुरू होने के बाद से विदेशी निवेशक भारतीय बाजार से 20 अरब डॉलर से अधिक निकाल चुके हैं। इससे डॉलर की मांग बढ़ी और रुपया कमजोर हुआ। शेयर बाजार में भी बड़ी गिरावट कमजोर रुपये और वैश्विक तनाव का असर घरेलू शेयर बाजार पर भी देखने को मिला। शुरुआती कारोबार में BSE Sensex 525 अंक से ज्यादा टूट गया, जबकि NIFTY 50 में भी 164 अंकों से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई। क्यों गिर रहा है रुपया? डॉलर के मुकाबले रुपया 95.63 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंचा अमेरिका-ईरान तनाव से कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल ब्रेंट क्रूड 105 डॉलर प्रति बैरल के पार विदेशी निवेशकों की भारी बिकवाली शेयर बाजार में कमजोरी और वैश्विक अनिश्चितता आम लोगों पर क्या होगा असर? रुपये में गिरावट का सीधा असर आयात पर पड़ता है। भारत बड़ी मात्रा में कच्चा तेल आयात करता है, इसलिए तेल महंगा होने से पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ सकती हैं। इसके अलावा इलेक्ट्रॉनिक सामान, विदेश यात्रा और आयातित वस्तुएं भी महंगी हो सकती हैं।
शुरुआती कारोबार में बाजार में बड़ी बिकवाली सोमवार को घरेलू शेयर बाजार में बड़ी गिरावट देखने को मिली। BSE Sensex शुरुआती कारोबार में 1000 अंक से ज्यादा टूट गया, जबकि Nifty 50 में भी करीब 300 अंकों की गिरावट दर्ज की गई। सुबह करीब 9:39 बजे Sensex 1016 अंक गिरकर 76,311 के स्तर पर कारोबार कर रहा था। वहीं Nifty 50 करीब 23,879 अंक पर पहुंच गया। बाजार में गिरावट की बड़ी वजह क्या है? विशेषज्ञों के मुताबिक बाजार पर इस समय दो बड़े दबाव बने हुए हैं– पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल रिपोर्ट्स के अनुसार Brent Crude Oil की कीमत फिर 105 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गई है। इससे भारत के चालू खाता घाटे (Current Account Deficit) और महंगाई को लेकर चिंता बढ़ गई है। इसके साथ ही प्रधानमंत्री Narendra Modi की हालिया अपील ने भी बाजार की धारणा को प्रभावित किया। प्रधानमंत्री ने लोगों से पेट्रोल-डीजल की खपत कम करने, गैरजरूरी विदेश यात्रा से बचने और सोना, खाद्य तेल व उर्वरक जैसे आयातित उत्पादों पर निर्भरता घटाने की बात कही थी। बाजार इसे सरकार की आर्थिक चिंता और बढ़ते आयात बिल के संकेत के तौर पर देख रहा है। किन सेक्टरों पर सबसे ज्यादा दबाव? गिरावट का असर कई सेक्टरों में साफ दिखाई दिया। ज्वेलरी और कंजम्प्शन सेक्टर Titan Company के शेयर करीब 5.6 प्रतिशत टूट गए। बाजार को डर है कि सोने की मांग में कमी आने से ज्वेलरी कंपनियों की बिक्री प्रभावित हो सकती है। एविएशन सेक्टर कच्चे तेल की कीमत बढ़ने से एयरलाइन कंपनियों पर दबाव बढ़ा। InterGlobe Aviation के शेयर 3.5 प्रतिशत से ज्यादा टूट गए। बैंकिंग सेक्टर बैंकिंग शेयरों में भी कमजोरी रही– State Bank of India करीब 3% टूटा HDFC Bank में 1% से ज्यादा गिरावट ICICI Bank और Axis Bank भी लाल निशान में कारोबार करते दिखे ऑटो और एनर्जी कंपनियां भी दबाव में Maruti Suzuki, Bajaj Auto और Reliance Industries के शेयरों में भी गिरावट दर्ज की गई। किन शेयरों में दिखी मजबूती? बाजार की भारी गिरावट के बीच कुछ डिफेंसिव सेक्टरों में खरीदारी देखने को मिली। Tata Consumer Products के शेयरों में तेजी रही। इसके अलावा फार्मा सेक्टर अपेक्षाकृत स्थिर दिखा। Sun Pharmaceutical Industries और Cipla जैसे शेयर बाजार की कमजोरी के बावजूद संभले रहे। आगे बाजार की चाल कैसी रह सकती है? विशेषज्ञों का कहना है कि अगर कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बनी रहती हैं, तो बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। निवेशकों की नजर अब– कच्चे तेल की कीमतों पश्चिम एशिया की स्थिति रुपये की चाल सरकार के अगले आर्थिक संकेतों पर बनी रहेगी।
Titan के शेयरों में 6% से ज्यादा की गिरावट Titan Company के शेयर सोमवार को शुरुआती कारोबार में 6 प्रतिशत से ज्यादा टूट गए। कंपनी का शेयर करीब 283 रुपये गिरकर 4,230 रुपये तक पहुंच गया। कारोबार के दौरान शेयर ने 4,220 रुपये का निचला स्तर भी छुआ। बाजार में यह गिरावट उस वक्त देखने को मिली जब प्रधानमंत्री Narendra Modi ने लोगों से एक साल तक शादी के लिए सोना खरीदने से बचने की अपील की। PM मोदी के बयान से क्यों बढ़ी चिंता? हैदराबाद में एक कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने बढ़ते वैश्विक आर्थिक दबाव और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों का जिक्र करते हुए लोगों से ईंधन की बचत करने और शादी के लिए सोना खरीदने से परहेज करने की अपील की। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत बड़ी मात्रा में कच्चा तेल और सोना आयात करता है। इन दोनों की खरीद डॉलर में होती है, जिससे विदेशी मुद्रा भंडार और रुपये पर दबाव बढ़ सकता है। बाजार को आशंका है कि अगर सोने की खरीद में कमी आती है तो ज्वेलरी कंपनियों की बिक्री प्रभावित हो सकती है, खासकर शादी के सीजन में। Titan के साथ दूसरे ज्वेलरी शेयर भी लुढ़के Kalyan Jewellers और Senco Gold समेत कई ज्वेलरी कंपनियों के शेयरों में भी भारी बिकवाली देखी गई। Senco Gold के शेयर करीब 9% टूटे Kalyan Jewellers में लगभग 8% की गिरावट आई Titan के शेयर 6% से ज्यादा फिसले इस बिकवाली ने पूरे ज्वेलरी सेक्टर पर दबाव बढ़ा दिया। मजबूत नतीजों के बावजूद क्यों टूटा Titan? दिलचस्प बात यह रही कि Titan Company ने हाल ही में मजबूत तिमाही नतीजे जारी किए थे। कंपनी का Q4FY26 कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट 35 प्रतिशत बढ़कर 1,179 करोड़ रुपये पहुंच गया। पिछले साल इसी अवधि में यह 871 करोड़ रुपये था। इसके अलावा कंपनी की कुल आय 46 प्रतिशत बढ़कर 20,300 करोड़ रुपये रही। EBIT में भी 28 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। इसके बावजूद निवेशकों ने भविष्य में सोने की मांग घटने की आशंका को ज्यादा गंभीरता से लिया। सोने के आयात और रुपये पर दबाव चिंता की वजह रिपोर्ट्स के मुताबिक वित्त वर्ष 2026 में भारत हर महीने औसतन 60 टन सोना आयात कर रहा था, जिसकी लागत करीब 6 अरब डॉलर प्रति माह रही। विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक अनिश्चितता और महंगे कच्चे तेल के बीच बढ़ता गोल्ड इंपोर्ट भारत के ट्रेड बैलेंस और रुपये पर अतिरिक्त दबाव डाल सकता है। इसी वजह से बाजार में ज्वेलरी सेक्टर को लेकर फिलहाल सतर्कता का माहौल बना हुआ है।
शुरुआती कारोबार में बाजार में बड़ी बिकवाली सोमवार को घरेलू शेयर बाजार में बड़ी गिरावट देखने को मिली। BSE Sensex शुरुआती कारोबार में 1000 अंक से ज्यादा टूट गया, जबकि Nifty 50 में भी करीब 300 अंकों की गिरावट दर्ज की गई। सुबह करीब 9:39 बजे Sensex 1016 अंक गिरकर 76,311 के स्तर पर कारोबार कर रहा था। वहीं Nifty 50 करीब 23,879 अंक पर पहुंच गया। बाजार में गिरावट की बड़ी वजह क्या है? विशेषज्ञों के मुताबिक बाजार पर इस समय दो बड़े दबाव बने हुए हैं– पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल रिपोर्ट्स के अनुसार Brent Crude Oil की कीमत फिर 105 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गई है। इससे भारत के चालू खाता घाटे (Current Account Deficit) और महंगाई को लेकर चिंता बढ़ गई है। इसके साथ ही प्रधानमंत्री Narendra Modi की हालिया अपील ने भी बाजार की धारणा को प्रभावित किया। प्रधानमंत्री ने लोगों से पेट्रोल-डीजल की खपत कम करने, गैरजरूरी विदेश यात्रा से बचने और सोना, खाद्य तेल व उर्वरक जैसे आयातित उत्पादों पर निर्भरता घटाने की बात कही थी। बाजार इसे सरकार की आर्थिक चिंता और बढ़ते आयात बिल के संकेत के तौर पर देख रहा है। किन सेक्टरों पर सबसे ज्यादा दबाव? गिरावट का असर कई सेक्टरों में साफ दिखाई दिया। ज्वेलरी और कंजम्प्शन सेक्टर Titan Company के शेयर करीब 5.6 प्रतिशत टूट गए। बाजार को डर है कि सोने की मांग में कमी आने से ज्वेलरी कंपनियों की बिक्री प्रभावित हो सकती है। एविएशन सेक्टर कच्चे तेल की कीमत बढ़ने से एयरलाइन कंपनियों पर दबाव बढ़ा। InterGlobe Aviation के शेयर 3.5 प्रतिशत से ज्यादा टूट गए। बैंकिंग सेक्टर बैंकिंग शेयरों में भी कमजोरी रही– State Bank of India करीब 3% टूटा HDFC Bank में 1% से ज्यादा गिरावट ICICI Bank और Axis Bank भी लाल निशान में कारोबार करते दिखे ऑटो और एनर्जी कंपनियां भी दबाव में Maruti Suzuki, Bajaj Auto और Reliance Industries के शेयरों में भी गिरावट दर्ज की गई। किन शेयरों में दिखी मजबूती? बाजार की भारी गिरावट के बीच कुछ डिफेंसिव सेक्टरों में खरीदारी देखने को मिली। Tata Consumer Products के शेयरों में तेजी रही। इसके अलावा फार्मा सेक्टर अपेक्षाकृत स्थिर दिखा। Sun Pharmaceutical Industries और Cipla जैसे शेयर बाजार की कमजोरी के बावजूद संभले रहे। आगे बाजार की चाल कैसी रह सकती है? विशेषज्ञों का कहना है कि अगर कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बनी रहती हैं, तो बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। निवेशकों की नजर अब– कच्चे तेल की कीमतों पश्चिम एशिया की स्थिति रुपये की चाल सरकार के अगले आर्थिक संकेतों पर बनी रहेगी।
भारतीय कर्मचारियों की तारीफ या ‘टॉक्सिक वर्क कल्चर’ का समर्थन? Burj Khalifa के डेवलपर और Emaar Properties के संस्थापक Mohamed Alabbar के एक बयान ने सोशल मीडिया पर नई बहस छेड़ दी है। उन्होंने कहा कि उन्हें भारतीय कर्मचारियों को नौकरी पर रखना पसंद है क्योंकि वे “रात 1 बजे भी फोन उठाते हैं” और उनका वर्क एथिक दुनिया में सबसे मजबूत है। यह टिप्पणी उन्होंने “Make It in the Emirates” समिट के दौरान की। अलब्बार ने कहा कि सफलता सिर्फ बुद्धिमानी से नहीं, बल्कि लगातार मेहनत, अनुशासन और जिम्मेदारी निभाने की आदत से मिलती है। उनके मुताबिक भारतीय प्रोफेशनल्स कठिन परिस्थितियों में भी काम के प्रति समर्पित रहते हैं और यही बात उन्हें अलग बनाती है। “हार्ड वर्क ही असली ताकत” अपने संबोधन में अलब्बार ने कहा कि किसी भी कंपनी की असली मजबूती उसके कर्मचारियों की मेहनत और संकट के समय उनकी प्रतिबद्धता से तय होती है। उन्होंने 2008 की आर्थिक मंदी और कोविड-19 महामारी का जिक्र करते हुए कहा कि वही कंपनियां टिक पाईं जिनकी टीमें मुश्किल हालात में भी काम करती रहीं। उन्होंने यह भी बताया कि संकट के समय उनकी कंपनी ने कर्मचारियों की नौकरी और सैलरी सुरक्षित रखने की कोशिश की थी, ताकि टीम का भरोसा बना रहे। सोशल मीडिया पर मिला मिला-जुला रिएक्शन हालांकि अलब्बार की टिप्पणी को कुछ लोगों ने भारतीय कर्मचारियों की मेहनत की सराहना माना, लेकिन सोशल मीडिया पर कई यूजर्स ने इसे “अनहेल्दी वर्क कल्चर” को बढ़ावा देने वाला बयान बताया। Reddit और X जैसे प्लेटफॉर्म पर यूजर्स ने कहा कि देर रात तक उपलब्ध रहना समर्पण नहीं बल्कि नौकरी का दबाव और असुरक्षा दिखाता है। कई लोगों ने लिखा कि भारतीय प्रोफेशनल्स को लंबे समय से “ओवरडिलीवर” करने के लिए तैयार किया जाता रहा है, जिससे निजी जीवन और मानसिक स्वास्थ्य प्रभावित होता है। कुछ यूजर्स ने यह चिंता भी जताई कि विदेशी कंपनियां भारतीय कर्मचारियों से हर समय उपलब्ध रहने की उम्मीद करने लगी हैं, जिससे ओवरवर्क की समस्या और बढ़ सकती है। वर्क-लाइफ बैलेंस पर फिर शुरू हुई चर्चा भारत के आईटी, कंसल्टिंग और सर्विस सेक्टर के कर्मचारी दुनियाभर में अपनी मेहनत और मल्टीपल टाइम जोन में काम करने की क्षमता के लिए जाने जाते हैं। लेकिन HR एक्सपर्ट्स का मानना है कि लगातार उपलब्ध रहने की संस्कृति लंबे समय में बर्नआउट, तनाव और कर्मचारियों के नौकरी छोड़ने की दर बढ़ा सकती है। दुनिया के कई देशों में अब “Right to Disconnect” जैसे नियम लागू किए जा रहे हैं, जिनका मकसद कर्मचारियों को ऑफिस समय के बाद काम से अलग रहने का अधिकार देना है। भारत में अभी ऐसा कोई व्यापक कानून नहीं है, लेकिन नई पीढ़ी के कर्मचारी अब वर्क-लाइफ बैलेंस और मानसिक स्वास्थ्य को ज्यादा महत्व देने लगे हैं। बड़ा सवाल: मेहनत या सीमाओं की जरूरत? अलब्बार के बयान ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है–क्या भारतीय प्रोफेशनल्स को हमेशा “हर समय उपलब्ध” रहने वाली अपनी छवि बनाए रखनी चाहिए, या अब काम और निजी जीवन के बीच स्पष्ट सीमाएं तय करने का समय आ गया है?
शादी-ब्याह के सीजन के बीच सोने और चांदी की कीमतों में फिर तेजी देखने को मिली है। 7 मई 2026 को सर्राफा बाजार खुलते ही दोनों कीमती धातुओं के दाम बढ़ गए। India के कई बड़े शहरों में सोना और चांदी नए स्तर पर पहुंच गए हैं। ऐसे में अगर आप गहनों की खरीदारी करने की योजना बना रहे हैं, तो घर से निकलने से पहले ताजा रेट जरूर चेक कर लें। बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ते तनाव, डॉलर की चाल और सुरक्षित निवेश की मांग के कारण सोने और चांदी की कीमतों में तेजी आई है। खासतौर पर शादी के सीजन में बढ़ी मांग का भी असर बाजार पर साफ दिखाई दे रहा है। सोने की कीमतों में बढ़त आज 24 कैरेट सोने के दाम में लगभग 2,000 रुपये प्रति 10 ग्राम तक की तेजी दर्ज की गई है। हालांकि शहरवार तुलना में पिछले क्लोजिंग रेट से मामूली बढ़त भी देखने को मिली है। 24 कैरेट सोने का भाव (प्रति 10 ग्राम) शहर आज का रेट कल का रेट बदलाव Lucknow ₹1,52,290 ₹1,52,280 ₹10 बढ़ा Patna ₹1,52,190 ₹1,52,180 ₹10 बढ़ा Ranchi ₹1,52,200 ₹1,52,190 ₹10 बढ़ा Delhi ₹1,52,190 ₹1,52,180 ₹10 बढ़ा Mumbai ₹1,52,450 ₹1,52,440 ₹10 बढ़ा Chennai ₹1,52,900 ₹1,52,890 ₹10 बढ़ा चांदी की कीमतों में भी जोरदार उछाल चांदी की कीमतों में भी लगातार तेजी बनी हुई है। इंडस्ट्रियल डिमांड और निवेशकों की बढ़ती रुचि के कारण चांदी महंगी हो गई है। कई शहरों में चांदी का भाव 2.65 लाख रुपये प्रति किलो के पार पहुंच गया है। चांदी का भाव (प्रति किलो) शहर आज का रेट कल का रेट बदलाव Lucknow ₹2,65,100 ₹2,65,000 ₹100 बढ़ा Patna ₹2,65,100 ₹2,65,000 ₹100 बढ़ा Ranchi ₹2,65,100 ₹2,65,000 ₹100 बढ़ा Delhi ₹2,53,180 ₹2,53,080 ₹100 बढ़ा Bengaluru ₹2,53,820 ₹2,53,720 ₹100 बढ़ा Chennai ₹2,54,360 ₹2,54,260 ₹100 बढ़ा खरीदारी से पहले रखें इन बातों का ध्यान सर्राफा बाजार में जारी ये रेट बेस प्राइस हैं। इनमें 3% GST, मेकिंग चार्ज और अन्य टैक्स शामिल नहीं होते। ज्वेलरी खरीदते समय डिजाइन और कारीगरी के हिसाब से अलग-अलग मेकिंग चार्ज जोड़े जाते हैं, जिससे अंतिम कीमत और बढ़ सकती है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि खरीदारी से पहले अपने नजदीकी ज्वेलर से लाइव रेट और कुल बिल की जानकारी जरूर लें, ताकि बाद में किसी तरह की परेशानी न हो।
7 मई 2026 को देशभर में पेट्रोल और डीजल की नई कीमतें जारी कर दी गई हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और अलग-अलग राज्यों के टैक्स ढांचे की वजह से कई शहरों में फ्यूल के दाम बदल गए हैं। Uttar Pradesh, Bihar और Jharkhand के कई शहरों में आज पेट्रोल-डीजल की कीमतों में मामूली बढ़ोतरी और गिरावट दोनों देखने को मिली। जहां Patna और Ranchi में तेल महंगा हुआ है, वहीं Lucknow और Dhanbad के लोगों को थोड़ी राहत मिली है। पेट्रोल के नए रेट्स आज पेट्रोल की कीमतों में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी पटना में दर्ज की गई, जहां दाम 51 पैसे बढ़ गए। दूसरी ओर लखनऊ में पेट्रोल 12 पैसे सस्ता हुआ है। दिल्ली और मुंबई जैसे बड़े महानगरों में कीमतें स्थिर बनी हुई हैं। 7 मई 2026 पेट्रोल रेट्स शहर आज का रेट कल का रेट बदलाव Lucknow ₹94.57 ₹94.69 ₹0.12 सस्ता Noida ₹94.90 ₹94.88 ₹0.02 महंगा Patna ₹105.74 ₹105.23 ₹0.51 महंगा Gaya ₹106.31 ₹106.28 ₹0.03 महंगा Muzaffarpur ₹106.19 ₹106.19 कोई बदलाव नहीं Bhagalpur ₹106.02 ₹106.21 ₹0.19 सस्ता Ranchi ₹98.20 ₹97.86 ₹0.34 महंगा Deoghar ₹97.60 ₹97.64 ₹0.04 सस्ता Dhanbad ₹97.82 ₹97.93 ₹0.11 सस्ता Jamshedpur ₹97.80 ₹97.80 स्थिर Delhi ₹94.77 ₹94.77 स्थिर Mumbai ₹103.50 ₹103.50 स्थिर Bhopal ₹106.35 ₹106.63 ₹0.28 सस्ता Kolkata ₹105.45 ₹105.41 ₹0.04 महंगा Bengaluru ₹102.96 ₹102.92 ₹0.04 महंगा Gurugram ₹95.51 ₹95.65 ₹0.14 सस्ता Chennai ₹100.90 ₹100.90 स्थिर डीजल की कीमतों में भी बदलाव डीजल के दामों में भी बिहार और झारखंड के कई शहरों में तेजी देखी गई है। पटना में डीजल 48 पैसे महंगा हो गया, जबकि धनबाद में 12 पैसे की गिरावट दर्ज हुई। दिल्ली, मुंबई और चेन्नई में डीजल की कीमतें फिलहाल स्थिर बनी हुई हैं। 7 मई 2026 डीजल रेट्स शहर आज का रेट कल का रेट बदलाव Lucknow ₹87.67 ₹87.81 ₹0.14 सस्ता Noida ₹88.01 ₹87.98 ₹0.03 महंगा Patna ₹91.97 ₹91.49 ₹0.48 महंगा Gaya ₹92.50 ₹92.48 ₹0.02 महंगा Muzaffarpur ₹92.37 ₹92.37 स्थिर Bhagalpur ₹92.21 ₹92.39 ₹0.18 सस्ता Ranchi ₹92.97 ₹92.62 ₹0.35 महंगा Deoghar ₹92.29 ₹92.34 ₹0.05 सस्ता Dhanbad ₹92.57 ₹92.69 ₹0.12 सस्ता Jamshedpur ₹92.55 ₹92.55 स्थिर Delhi ₹87.67 ₹87.67 स्थिर Mumbai ₹90.03 ₹90.03 स्थिर Bhopal ₹91.74 ₹91.99 ₹0.25 सस्ता Kolkata ₹92.02 ₹92.02 स्थिर Bengaluru ₹90.99 ₹90.99 स्थिर Gurugram ₹87.97 ₹88.10 ₹0.13 सस्ता Chennai ₹92.48 ₹92.48 स्थिर विशेषज्ञों के मुताबिक आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की चाल और सरकार की टैक्स नीति के आधार पर फ्यूल की कीमतों में और बदलाव देखने को मिल सकता है।
दक्षिण कोरिया की प्रमुख ऑटो कंपनी Hyundai Motor ने भारत में अपने 30 साल पूरे कर लिए हैं। Hyundai Motor India Limited (HMIL) की स्थापना 6 मई 1996 को हुई थी और आज यह देश की दूसरी सबसे बड़ी पैसेंजर कार निर्माता कंपनी बन चुकी है। तीन दशक के इस सफर में हुंडई ने भारत में न केवल अपनी मजबूत पकड़ बनाई, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी भारत को एक अहम एक्सपोर्ट हब के रूप में स्थापित किया। 30 साल में क्या हासिल किया? हुंडई का भारत में प्रदर्शन बेहद प्रभावशाली रहा है: कुल बिक्री: 1.35 करोड़ (13.5 मिलियन) यूनिट भारत में बिक्री: 96 लाख यूनिट निर्यात: 39 लाख यूनिट एक्सपोर्ट देश: 150+ यह आंकड़े बताते हैं कि हुंडई की ग्लोबल रणनीति में भारत की भूमिका कितनी अहम है। निवेश और विस्तार की बड़ी योजना कंपनी ने अब तक भारत में करीब 40,700 करोड़ रुपये का निवेश किया है। आने वाले पांच वर्षों में वह 45,000 करोड़ रुपये और निवेश करने की योजना बना रही है। इसके साथ ही कंपनी 2028 तक अपनी उत्पादन क्षमता बढ़ाकर 10.74 लाख यूनिट प्रति वर्ष करने का लक्ष्य रखती है। प्लांट और मैन्युफैक्चरिंग नेटवर्क हुंडई ने भारत में अपना पहला मैन्युफैक्चरिंग प्लांट Sriperumbudur (चेन्नई के पास) में स्थापित किया था, जहां 1998 से उत्पादन शुरू हुआ। यह कोरिया के बाहर कंपनी की पहली इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग यूनिट थी। इसके अलावा कंपनी ने हाल ही में Talegaon में भी उत्पादन शुरू किया है। दोनों प्लांट्स की संयुक्त उत्पादन क्षमता फिलहाल करीब 9.94 लाख यूनिट सालाना है। सर्विस नेटवर्क और रोजगार हुंडई का सर्विस नेटवर्क भी देशभर में मजबूत है: 1,025 शहरों में मौजूदगी 1,625 सर्विस सेंटर 50,000 से ज्यादा प्रशिक्षित प्रोफेशनल यह नेटवर्क कंपनी को ग्राहकों के बीच भरोसेमंद ब्रांड बनाने में मदद करता है। कंपनी का विजन एचएमआईएल के एमडी और सीईओ तरुण गर्ग के अनुसार, कंपनी ने 13.5 मिलियन से अधिक ग्राहकों को सेवा दी है और भविष्य में भी भारत को अपने विकास का केंद्र बनाए रखेगी। क्या संकेत देता है यह सफर? हुंडई का 30 साल का सफर भारतीय ऑटो सेक्टर के विकास की कहानी भी बयां करता है। यह दिखाता है कि कैसे विदेशी कंपनियां भारत को न केवल बड़े बाजार, बल्कि मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपोर्ट हब के रूप में देख रही हैं। आने वाले समय में निवेश और उत्पादन क्षमता में बढ़ोतरी से ऑटो सेक्टर में प्रतिस्पर्धा और तेज होने की संभावना है।
भारत के विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserves) में लगातार तीन सप्ताह की बढ़त के बाद एक बार फिर गिरावट दर्ज की गई है। Reserve Bank of India (RBI) द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, 24 अप्रैल 2026 को समाप्त सप्ताह में देश के विदेशी मुद्रा भंडार में 4.82 अरब डॉलर की कमी आई है। कुल भंडार में आई गिरावट ताजा गिरावट के बाद भारत का कुल विदेशी मुद्रा भंडार घटकर 698.487 अरब डॉलर रह गया है। इससे पहले 27 फरवरी 2026 को यह 728.494 अरब डॉलर के ऑल टाइम हाई स्तर पर पहुंच गया था। उल्लेखनीय है कि अप्रैल के पहले तीन हफ्तों में भंडार में 14 अरब डॉलर से अधिक की बढ़ोतरी हुई थी, जबकि मार्च 2026 में इसमें भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला था। FCA में कमी बना बड़ा कारण विदेशी मुद्रा भंडार का सबसे बड़ा हिस्सा मानी जाने वाली विदेशी मुद्रा आस्तियां (FCA) भी इस गिरावट की मुख्य वजह रही हैं। FCA में 2.841 अरब डॉलर की कमी कुल FCA भंडार घटकर 554.622 अरब डॉलर FCA में यूरो, पाउंड और येन जैसी मुद्राओं के उतार-चढ़ाव का भी असर शामिल होता है, जिससे कुल भंडार प्रभावित होता है। सोने के भंडार पर भी असर इस दौरान भारत के गोल्ड रिजर्व की वैल्यू में भी गिरावट दर्ज की गई है। सोने की वैल्यू में 1.897 अरब डॉलर की कमी कुल वैल्यू घटकर 120.236 अरब डॉलर हालांकि, मार्च 2026 के अंत तक भारत के पास कुल 880.52 टन सोना मौजूद था, जो कुल विदेशी मुद्रा भंडार का लगभग 16.7% हिस्सा है। SDR और IMF रिजर्व में भी गिरावट स्पेशल ड्रॉइंग राइट (SDR) में 67 मिलियन डॉलर की कमी, अब 18.774 अरब डॉलर International Monetary Fund (IMF) के पास रखे भारत के रिजर्व में 15 मिलियन डॉलर की गिरावट, कुल 4.855 अरब डॉलर क्यों आई गिरावट? विशेषज्ञों के मुताबिक, पश्चिम एशिया में जारी तनाव और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता का असर विदेशी मुद्रा भंडार पर पड़ा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में उतार-चढ़ाव, डॉलर की मजबूती और अन्य मुद्राओं में गिरावट भी इसके प्रमुख कारण माने जा रहे हैं। क्या है इसका मतलब? विदेशी मुद्रा भंडार में गिरावट अल्पकालिक दबाव का संकेत हो सकता है, लेकिन भारत का कुल भंडार अभी भी मजबूत स्थिति में बना हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले हफ्तों में वैश्विक हालात के आधार पर इसमें फिर सुधार देखने को मिल सकता है।
देशभर में महंगाई के मोर्चे पर एक और बड़ा झटका लगा है। कमर्शियल LPG सिलिंडर के साथ-साथ 5 किलोग्राम वाले ‘छोटू’ (FTL) सिलिंडर की कीमतों में भारी बढ़ोतरी कर दी गई है, जिससे खासतौर पर होटल, रेस्टोरेंट और छोटे कारोबारियों की लागत बढ़ना तय माना जा रहा है। कमर्शियल सिलिंडर में भारी उछाल नई दरों के अनुसार, 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल LPG सिलिंडर की कीमत में करीब 993 रुपये की बढ़ोतरी हुई है। नई दिल्ली में इसकी कीमत बढ़कर अब 3,071.50 रुपये हो गई है। 5 किलो वाला ‘छोटू’ भी महंगा सिर्फ बड़े सिलिंडर ही नहीं, बल्कि 5 किलोग्राम वाले फ्री ट्रेड LPG (FTL) सिलिंडर की कीमत में भी 261 रुपये की बढ़ोतरी की गई है। यह सिलिंडर छोटे दुकानदारों, ढाबों और सीमित व्यावसायिक उपयोग के लिए ज्यादा इस्तेमाल होता है, इसलिए इसका असर छोटे कारोबारियों पर भी पड़ेगा। घरेलू उपभोक्ताओं को राहत राहत की बात यह है कि 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू LPG सिलिंडर की कीमत में कोई बदलाव नहीं किया गया है। यह वही सिलिंडर है जिसका इस्तेमाल देश के करोड़ों घरों में खाना बनाने के लिए किया जाता है। किन पर पड़ेगा सबसे ज्यादा असर? कमर्शियल LPG महंगा होने का सीधा असर इन सेक्टर्स पर पड़ेगा: रेस्टोरेंट और होटल बेकरी और फूड आउटलेट कैटरिंग सर्विस छोटे ढाबे और स्ट्रीट फूड विक्रेता आमतौर पर ऐसे व्यवसाय बढ़ी हुई लागत का कुछ हिस्सा ग्राहकों पर डालते हैं, जिससे आने वाले दिनों में खाने-पीने की चीजें महंगी हो सकती हैं। क्यों बढ़ती हैं कीमतें? 5 किलो वाला FTL सिलिंडर सब्सिडी फ्री होता है और इसकी कीमत बाजार के हिसाब से तय होती है। इसलिए इसमें अंतरराष्ट्रीय बाजार के उतार-चढ़ाव का असर जल्दी देखने को मिलता है। क्या आगे और बढ़ सकती है महंगाई? विशेषज्ञों का मानना है कि अगर कमर्शियल LPG की कीमतें लंबे समय तक ऊंची रहीं, तो इसका असर खाने-पीने की कीमतों पर साफ दिखाई देगा।
टैक्स व्यवस्था को लेकर एक अहम कानूनी स्पष्टता देते हुए Delhi High Court ने बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने साफ कहा है कि किसी कंपनी की कमाई को उसके शेयरधारकों की व्यक्तिगत आय नहीं माना जा सकता। यह निर्णय कॉर्पोरेट टैक्सेशन के सिद्धांतों को और मजबूत करता है और निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण मार्गदर्शन भी प्रदान करता है। कंपनी और शेयरधारक अलग-अलग इकाइयां Delhi High Court ने अपने फैसले में कहा कि कानून की नजर में कंपनी एक स्वतंत्र कानूनी इकाई होती है, जो अपने शेयरधारकों से अलग होती है। भले ही किसी व्यक्ति के पास कंपनी के 100% शेयर क्यों न हों, वह कंपनी की संपत्तियों का मालिक नहीं माना जाएगा, बल्कि केवल शेयरों का मालिक होगा। कंपनी की आय पर शेयरधारकों से टैक्स नहीं कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अगर कंपनी कोई मुनाफा कमाती है या अपनी संपत्ति बेचकर आय अर्जित करती है, तो उस पर सीधे तौर पर शेयरधारकों से टैक्स नहीं वसूला जा सकता। यह आय कंपनी की मानी जाएगी, न कि उसके निवेशकों की। डिविडेंड पर लगेगा टैक्स हालांकि, अदालत ने यह भी साफ किया कि यदि शेयरधारकों को कंपनी से डिविडेंड प्राप्त होता है, तो उस आय पर लागू कानून के तहत टैक्स लगाया जा सकता है। यानी निवेशकों की टैक्स देनदारी केवल उस लाभ तक सीमित होगी, जो उन्हें कंपनी से प्रत्यक्ष रूप से मिलता है। इनकम टैक्स विभाग की अपील खारिज मामले में Income Tax Department की ओर से शेयरधारकों पर टैक्स लगाने की मांग की गई थी, जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया। अदालत ने ट्रिब्यूनल के पहले के फैसले को सही ठहराते हुए कहा कि टैक्स केवल शेयरों से मिलने वाली आय पर ही लगाया जा सकता है, न कि कंपनी की कुल कमाई पर। यह फैसला कॉर्पोरेट सेक्टर और निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इससे टैक्स से जुड़ी कई जटिलताओं पर स्पष्टता मिलती है और कानूनी विवादों की संभावना भी कम हो सकती है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।