Census 2027

Ranchi Municipal Corporation
जनगणना 2027 की तैयारी में रांची नगर निगम बना राज्य का मॉडल

रांची। रांची नगर निगम को जनगणना 2027 की तैयारियों में उत्कृष्ट कार्य के लिए भारत सरकार के गृह मंत्रालय के अंतर्गत जनगणना संचालन निदेशालय, झारखंड द्वारा प्रशंसा पत्र भेजा गया है। निदेशालय ने निगम की सक्रियता, समयबद्ध कार्यशैली और तकनीकी दक्षता की सराहना की है। झारखंड जनगणना संचालन के निदेशक Prabhat Kumar ने नगर आयुक्त Sushant Gaurav को भेजे पत्र में कहा कि जनगणना 2027 के प्रथम चरण की तैयारियों में रांची नगर निगम ने राज्यभर में बेहतरीन प्रदर्शन किया है। विशेष रूप से HLB Geo-tagging और HLB Demarcation जैसे महत्वपूर्ण कार्यों को गंभीरता और दक्षता के साथ पूरा किया गया है।   लगभग 100 प्रतिशत कार्य पूर्ण 27 अप्रैल 2026 तक की प्रगति रिपोर्ट के अनुसार, रांची नगर निगम ने अपने अधिकांश कार्य लगभग 100 प्रतिशत पूरे कर लिए हैं। निदेशालय ने इसे राज्य के अन्य शहरी निकायों के लिए प्रेरणादायक बताया है। अधिकारियों के अनुसार, HLB Geo-tagging और Demarcation जनगणना प्रक्रिया की आधारशिला हैं, इसलिए इनका समय पर और गुणवत्तापूर्ण निष्पादन बेहद जरूरी था।   आने वाले चरणों में भी अहम भूमिका निदेशालय ने निगम की पूरी टीम की सराहना करते हुए आगामी चरणों में भी इसी तरह सहयोग बनाए रखने की अपेक्षा जताई है। आने वाले दिनों में Self Enumeration, मकान सूचीकरण और मकानों की गणना जैसे महत्वपूर्ण कार्य किए जाएंगे, जिनमें नगर निगम की भूमिका अहम रहेगी। नगर निगम प्रशासन ने इस उपलब्धि का श्रेय अधिकारियों, सुपरवाइजरों, फील्ड कर्मचारियों और तकनीकी टीम को दिया है।    निगम के अनुसार  निगम के अनुसार, डिजिटल तकनीक, बेहतर समन्वय और टीमवर्क के कारण यह सफलता संभव हुई। नगर आयुक्त सुशांत गौरव ने कहा कि यह सम्मान कर्मचारियों की मेहनत और प्रतिबद्धता का परिणाम है तथा भविष्य में भी रांची नगर निगम देश के लिए एक आदर्श शहरी मॉडल के रूप में कार्य करता रहेगा।

Anjali Kumari मई 11, 2026 0
जनगणना-2027
जनगणना-2027: 15 मई तक स्व-गणना, 16 से घर-घर पहुंचेंगे प्रगणक

रांची। जनगणना-2027 के पहले चरण में इस बार नागरिकों को खुद अपनी जानकारी ऑनलाइन दर्ज करने की सुविधा दी गई है। इसे लेकर रांची के डीसी मंजूनाथ भजंत्री ने कहा कि इससे जनगणना प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, सटीक और आसान रहेगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि शहर और गांव दोनों क्षेत्रों में लोगों को स्व-गणना के प्रति जागरूक किया जाए। इसके लिए स्कूल, कॉलेज, पंचायत प्रतिनिधि, स्वयं सहायता समूह, बैंकिंग संस्थान, और चेंबर ऑफ कॉमर्स के माध्यम से अभियान चलाया जाएगा।   जनगणना के प्रथम चरण की पूरी प्रक्रिया को समझेः 1 मई से ऑनलाइन सेल्फ इनुमरेशन हो रहा है, जो 15 मई तक चलेगा। वेब पोर्टल se.census.gov.in पर स्व-गणना फॉर्म भरें। स्व-गणना के बाद एसई-आईडी मिलेगा। 16 मई से 14 जून तक प्रगणक घर-घर जाकर सत्यापन करेंगे। इस चरण में घर के निर्माण सामग्री, पानी के स्रोत, शौचालय, बिजली, इंटरनेट और संपत्ति (गाड़ी, मोबाइल) से जुड़े कुल 33 प्रकार के प्रश्न पूछे जाएंगे। ऑनलाइन जानकारी नहीं भरने पर भी प्रगणक आपके घर पहुंचेंगे। सहायता के लिए हेल्पलाइन नंबर 1855 पर जानकारी ले सकते हैं।   पूरी तरह गोपनीय रहेंगी दी गई सभी जानकारी उपायुक्त ने कहा कि डिजिटल स्व-गणना से प्रक्रिया तेज और अधिक पारदर्शी होगी। इससे डेटा संग्रहण में त्रुटियां कम होंगी और लोगों की भागीदारी बढ़ेगी। हालांकि, ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता बढ़ाना बड़ी जिम्मेदारी होगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि जनगणना से जुड़ी सभी जानकारियां जनगणना अधिनियम 1948 के तहत पूरी तरह गोपनीय रहेंगी। डेटा सुरक्षित सर्वर पर एन्क्रिप्टेड रूप में रखा जाएगा और इसका उपयोग टैक्स, पुलिस या जांच कार्यों में नहीं होगा।

Anjali Kumari मई 9, 2026 0
जनगणना 2027
जनगणना 2027: 1 मई से होगी स्वगणना, OTP मांगने वालों से रहें सावधान

रांची। आगामी जनगणना 2027 को लेकर रांची नगर निगम (RMC) ने अपनी तैयारियां पूरी कर ली हैं। जनगणना की पूरी प्रक्रिया दो चरणों में संपन्न कराई जाएगी। पहले चरण में मकानों का सूचीकरण (हाउस लिस्टिंग) किया जाएगा, जिसके तहत घरों से संबंधित बुनियादी जानकारियां एकत्रित की जाएंगी। इसके बाद दूसरे चरण में जनसंख्या से जुड़ी विस्तृत जानकारी ली जाएगी। नागरिकों की सुविधा के लिए 1 मई से 15 मई 2026 तक स्वगणना (Self Enumeration) की सुविधा उपलब्ध रहेगी। इस अवधि के दौरान इच्छुक नागरिक ऑनलाइन माध्यम से स्वयं अपनी जानकारी डिजिटल प्लेटफॉर्म पर दर्ज कर सकेंगे। इससे प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और त्वरित होगी। सावधान: कोई दस्तावेज या ओटीपी नहीं मांगा जाएगा प्रशासन ने नागरिकों को सतर्क करते हुए कहा है कि जनगणना के दौरान किसी भी प्रकार का कोई भौतिक दस्तावेज या ओटीपी (OTP) नहीं मांगा जाएगा। अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी तरह के फर्जी कॉल, मैसेज या संदिग्ध गतिविधियों से सावधान रहें। यदि कोई जनगणना के नाम पर ओटीपी मांगता है, तो उसे साझा न करें। ग्रामीण और नेटवर्क विहीन क्षेत्रों के लिए विशेष व्यवस्था डिजिटल माध्यम के अलावा, निगम ने उन क्षेत्रों के लिए विशेष इंतजाम किए हैं जहां इंटरनेट कनेक्टिविटी या नेटवर्क की समस्या है। ऐसे ग्रामीण और नेटवर्क विहीन इलाकों में शिक्षकों की टीम तैनात की जाएगी। ये शिक्षक घर-घर जाकर जनगणना का कार्य पूरा करेंगे और सही आंकड़े सुनिश्चित करेंगे। नगर निगम ने नागरिकों से इस राष्ट्रीय कार्य में पूर्ण सहयोग करने की अपील की है ताकि डेटा पूरी तरह सटीक रहे।

Anjali Kumari अप्रैल 30, 2026 0
Citizens filling Census 2027 digital self-enumeration form online from home.
Census 2027: आज से डिजिटल जनगणना शुरू, 33 सवालों से जुटेगी हर घर की पूरी जानकारी

देश में लंबे इंतजार के बाद जनगणना 2027 की प्रक्रिया आज यानी 1 अप्रैल से शुरू हो गई है। यह भारत की 16वीं जनगणना है, जो कई मायनों में खास है। पहली बार इसमें लोगों को खुद अपनी जानकारी ऑनलाइन भरने (Self Enumeration) का विकल्प भी दिया गया है, जिससे प्रक्रिया अधिक आसान और डिजिटल हो गई है। क्यों खास है यह जनगणना? पिछली जनगणना 2011 में हुई थी अब देश की आबादी 1.4 अरब से अधिक अनुमानित यह डेटा सरकार की नीतियों, योजनाओं और संसाधनों के वितरण का आधार बनेगा क्या-क्या पूछे जाएंगे सवाल? जनगणना के पहले चरण में कुल 33 सवाल पूछे जाएंगे, जिनका फोकस घर और बुनियादी सुविधाओं पर रहेगा: घर और संरचना से जुड़े सवाल मकान की संख्या और स्थिति दीवार, छत और फर्श की सामग्री मकान का उपयोग (रिहायशी/व्यावसायिक) बुनियादी सुविधाएं पानी का स्रोत बिजली की उपलब्धता शौचालय और ड्रेनेज व्यवस्था रसोई और स्नान की सुविधा LPG/PNG गैस कनेक्शन जीवनशैली और साधन मोबाइल, इंटरनेट, टीवी, कंप्यूटर साइकिल, बाइक, कार जैसे वाहन परिवार का मुख्य भोजन (अनाज) क्या है ‘Self Enumeration’? इस बार आप घर बैठे खुद अपनी जानकारी ऑनलाइन भर सकते हैं: आधिकारिक पोर्टल: https://se.census.gov.in मोबाइल नंबर से लॉगिन लोकेशन मार्क कर जानकारी भरें सबमिट करने पर मिलेगा SE ID एन्युमरेटर आने पर सिर्फ यह ID दिखानी होगी यह सुविधा 16 भाषाओं में उपलब्ध है और लोगों को पहले से डेटा भरने के लिए 15 दिन का समय मिलेगा। गलत जानकारी देने पर क्या होगा? सरकार ने साफ किया है कि: सही जानकारी देना हर नागरिक की जिम्मेदारी है गलत जानकारी देने या सहयोग न करने पर कार्रवाई हो सकती है Census Act 1948 के तहत ₹1000 तक का जुर्माना लगाया जा सकता है क्यों जरूरी है यह प्रक्रिया? जनगणना सिर्फ आंकड़ों का संग्रह नहीं है, बल्कि: शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार की योजनाएं बुनियादी ढांचे का विकास राजनीतिक प्रतिनिधित्व इन सभी का आधार यही डेटा होता है।

surbhi अप्रैल 1, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Top week

RIMS hostel death
झारखंड

रिम्स हॉस्टल में एमबीबीएस छात्र की मौत, फंदे से लटका शव बरामद

Anjali Kumari मई 16, 2026 0