Chaitra Navratri

Goddess Skandamata idol with Kartikeya, devotees offering flowers during Chaitra Navratri fifth day पूजा
चैत्र नवरात्रि 2026: पांचवें दिन मां स्कंदमाता की पूजा का विशेष महत्व, जानें मंत्र, भोग, रंग और विधि

चैत्र नवरात्रि के पावन पर्व में पांचवां दिन माता दुर्गा के स्कंदमाता स्वरूप को समर्पित होता है। वर्ष 2026 में यह शुभ अवसर 23 मार्च को मनाया जा रहा है। इस दिन भक्त पूरे विधि-विधान के साथ मां स्कंदमाता की पूजा-अर्चना करते हैं। धार्मिक मान्यता है कि मां स्कंदमाता की कृपा से संतान सुख, पारिवारिक शांति और समृद्धि की प्राप्ति होती है। मां स्कंदमाता का दिव्य स्वरूप मां स्कंदमाता को ममता और वात्सल्य की प्रतिमूर्ति माना जाता है। वे चार भुजाओं वाली हैं और अपनी गोद में भगवान कार्तिकेय को धारण किए रहती हैं, जिन्हें ‘स्कंद’ भी कहा जाता है। माता की दो भुजाओं में कमल पुष्प होते हैं, जबकि एक हाथ वरमुद्रा में होता है। इनका वाहन सिंह है, लेकिन कमल पर विराजमान होने के कारण इन्हें ‘पद्मासना’ भी कहा जाता है। उनका शांत और तेजस्वी स्वरूप भक्तों को आस्था और विश्वास से भर देता है। पूजा विधि: कैसे करें आराधना नवरात्रि के पांचवें दिन प्रातःकाल स्नान कर स्वच्छ और विशेष रूप से सफेद वस्त्र धारण करना शुभ माना जाता है। पूजा स्थल की सफाई कर गंगाजल से शुद्धिकरण किया जाता है। इसके बाद माता का ध्यान कर कलश स्थापना की जाती है। पूजा के दौरान चंदन, अक्षत, धूप और दीप अर्पित किए जाते हैं। मां को पीले फूल और फल चढ़ाकर मंत्रों का जाप, दुर्गा चालीसा और दुर्गा सप्तशती का पाठ किया जाता है। अंत में कपूर से आरती कर पूजा संपन्न की जाती है। प्रिय रंग और पुष्प मान्यता के अनुसार मां स्कंदमाता को सफेद रंग अत्यंत प्रिय है, जो शांति और पवित्रता का प्रतीक है। इस दिन सफेद वस्त्र धारण करना शुभ माना जाता है। वहीं, पूजा में पीले रंग के फूल जैसे गेंदा और पीला गुलाब अर्पित करना विशेष फलदायी माना जाता है। भोग: क्या लगाएं प्रसाद मां स्कंदमाता को केले का भोग अत्यंत प्रिय है। धार्मिक मान्यता है कि केले का प्रसाद चढ़ाने से शारीरिक कष्ट दूर होते हैं और बुद्धि का विकास होता है। इसके अलावा केले से बनी खीर या मिठाई का भोग लगाना भी शुभ माना जाता है। स्कंदमाता के प्रमुख मंत्र सिंहासनगता नित्यं पद्माश्रितकरद्वया। शुभदास्तु सदा देवी स्कन्दमाता यशस्विनी॥ या देवी सर्वभूतेषु मां स्कन्दमाता रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥ धार्मिक महत्व माना जाता है कि मां स्कंदमाता की उपासना से संतान सुख, सुख-समृद्धि और मानसिक शांति प्राप्त होती है। उनकी कृपा से भक्तों को आरोग्य, ज्ञान और बुद्धि का आशीर्वाद मिलता है। साथ ही, यह भी मान्यता है कि उनकी भक्ति से मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है।  

surbhi मार्च 23, 2026 0
Goddess Brahmacharini idol with diya, flowers and fruits during Navratri Day 2 worship rituals
नवरात्रि का दूसरा दिन: मां ब्रह्मचारिणी की पूजा से मिलेगा शांति और सौभाग्य का आशीर्वाद, जानें पूरी विधि, मंत्र और भोग

चैत्र नवरात्रि का दूसरा दिन पूरी श्रद्धा और आस्था के साथ मां ब्रह्मचारिणी को समर्पित होता है। 20 मार्च 2026 को जैसे ही इस पावन दिन की शुरुआत होती है, घर-घर में पूजा के साथ उम्मीद और सकारात्मक ऊर्जा का माहौल बन जाता है। मां ब्रह्मचारिणी को तप, संयम और साधना की देवी माना जाता है, जिनकी आराधना से जीवन में शांति, ज्ञान और स्थिरता आती है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, यह दिन केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं बल्कि ग्रहों के संतुलन के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। खासतौर पर चंद्र और मंगल ग्रह से जुड़े दोषों को दूर करने में इस दिन की पूजा लाभकारी मानी जाती है। मां ब्रह्मचारिणी का महत्व और ज्योतिषीय संबंध मां ब्रह्मचारिणी नवदुर्गा का दूसरा स्वरूप हैं, जो कठोर तपस्या और आत्मसंयम का प्रतीक है। मान्यता है कि यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में चंद्र कमजोर हो या मानसिक अशांति बनी रहती हो, तो इस दिन सच्चे मन से पूजा करने से मन स्थिर होता है और निर्णय क्षमता मजबूत होती है। विद्यार्थियों और नौकरीपेशा लोगों के लिए यह दिन विशेष रूप से लाभकारी माना जाता है, क्योंकि इससे एकाग्रता और आत्मविश्वास में वृद्धि होती है। मां का दिव्य स्वरूप मां ब्रह्मचारिणी का स्वरूप अत्यंत सरल और शांत होता है। वे सफेद वस्त्र धारण करती हैं, एक हाथ में जपमाला और दूसरे में कमंडल रखती हैं। यह रूप तपस्या, ज्ञान और त्याग का प्रतीक है। ज्योतिष में सफेद रंग को चंद्र का प्रतीक माना गया है, इसलिए इस दिन सफेद या पीले वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है। पूजा सामग्री सफेद या पीले फूल   घी का दीपक   चंदन, रोली, अक्षत   धूप-दीप   पान-सुपारी   फल (विशेषकर सेब, नाशपाती, पीले फल)   पूजा विधि प्रातः स्नान कर स्वच्छ पीले या सफेद वस्त्र धारण करें   पूजा स्थल को साफ कर मां की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें   दीपक जलाकर मां को फूल, फल और नैवेद्य अर्पित करें   शांत मन और पूर्ण श्रद्धा के साथ पूजा करें   जल्दबाजी से बचें, भाव और ध्यान सबसे महत्वपूर्ण होते हैं   मंत्र “ॐ ऐं ह्रीं क्लीं ब्रह्मचारिण्यै नमः” “दधाना कर पद्माभ्याम अक्षमाला कमण्डलू। देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा॥” ज्योतिष मान्यता है कि इन मंत्रों का 108 बार जाप करने से चंद्र और मंगल ग्रह संतुलित होते हैं, जिससे जीवन में स्थिरता और सकारात्मक ऊर्जा आती है। भोग और विशेष अर्पण मां ब्रह्मचारिणी को फल अत्यंत प्रिय हैं। सेब, नाशपाती और पीले फल चढ़ाना शुभ माना जाता है। साथ ही सफेद और पीले फूल अर्पित करने से सकारात्मक ऊर्जा में वृद्धि होती है।  

surbhi मार्च 20, 2026 0
Hindu New Year and Chaitra Navratri
हिंदू नववर्ष 2083 और चैत्र नवरात्र का शुभारंभ: 19 मार्च से शुरू पावन पर्व, विनायक चतुर्थी का विशेष संयोग

आज 19 मार्च 2026 से आस्था और आध्यात्मिक ऊर्जा का महापर्व Chaitra Navratri शुरू हो गया है। इसी के साथ हिंदू नववर्ष यानी नवसंवत्सर 2083 और शक संवत 1947 का भी शुभारंभ हुआ है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह दिन नए आरंभ, सकारात्मक ऊर्जा और शुभ कार्यों की शुरुआत का प्रतीक माना जाता है। नवरात्र के साथ नए वर्ष की शुरुआत चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से नवरात्र का आरंभ होता है। इसी दिन से हिंदू नववर्ष की गणना भी शुरू होती है। नौ दिनों तक चलने वाले इस पर्व में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है और इसका समापन Ram Navami के साथ होता है। 19 मार्च को कलश स्थापना का महत्व नवरात्र के पहले दिन कलश स्थापना (घट स्थापना) का विशेष महत्व होता है। इस दिन श्रद्धालु विधि-विधान से पूजा स्थल तैयार कर कलश स्थापित करते हैं और मां दुर्गा की आराधना का संकल्प लेते हैं। पूजा की शुरुआत भगवान गणेश के ध्यान से होती है और इसके बाद नौ दिनों तक नियमित रूप से देवी पूजा, व्रत, जप और तप किया जाता है। मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना नवरात्र के दौरान मां दुर्गा के इन नौ रूपों की पूजा की जाती है: शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री। इन नौ दिनों की साधना के बाद दसवें दिन रामनवमी का पर्व मनाया जाता है। 22 मार्च को विनायक चतुर्थी का विशेष संयोग इस बार नवरात्र के बीच 22 मार्च को Vinayaka Chaturthi का व्रत भी रखा जाएगा। यह दिन भगवान गणेश को समर्पित होता है और मध्याह्न काल में पूजा करना विशेष फलदायी माना गया है। मान्यता है कि इस दिन “ॐ गं गणपतये नमः” मंत्र का जाप करने से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। आध्यात्मिक साधना और शुभ कार्यों का समय चैत्र नवरात्र को आध्यात्मिक उन्नति और सकारात्मक ऊर्जा का पर्व माना जाता है। इन दिनों में: व्रत, जप और ध्यान का विशेष महत्व   दान-पुण्य और सेवा कार्य शुभ   नए कार्यों की शुरुआत के लिए उत्तम समय   भक्त मां दुर्गा की आराधना कर जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की कामना करते हैं।

surbhi मार्च 19, 2026 0
Durga Puja rituals during Chaitra Navratri festival
चैत्र नवरात्रि 2026: कलश स्थापना से रामनवमी तक पूरा कैलेंडर, जानें शुभ मुहूर्त और धार्मिक महत्व

आस्था और श्रद्धा का प्रतीक Chaitra Navratri इस वर्ष 19 मार्च 2026 से प्रारंभ हो चुका है। नौ दिनों तक चलने वाले इस पर्व में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है और इसका समापन Ram Navami के साथ होता है। इस बार तिथियों, मुहूर्तों और विशेष संयोगों को लेकर श्रद्धालुओं में खास उत्साह देखा जा रहा है। कलश स्थापना का शुभ समय 19 मार्च को सुबह 6:40 बजे तक अमावस्या रहने के बाद प्रतिपदा तिथि प्रारंभ हुई। प्रतिपदा के क्षय होने के कारण इसी दिन कलश स्थापना की गई। अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:32 बजे से 12:21 बजे तक   हालांकि पूरे दिन स्थापना संभव है, लेकिन सुबह का समय सबसे शुभ माना गया है।   मंगलवारी जुलूसों का धार्मिक उत्साह रामनवमी से पहले इस बार तीन मंगलवारी जुलूसों का आयोजन हो रहा है, जो श्रद्धालुओं के लिए विशेष महत्व रखते हैं: पहला: 10 मार्च   दूसरा: 17 मार्च   तीसरा: 24 मार्च   इन जुलूसों में भारी संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं और भक्ति का माहौल चरम पर होता है। षष्ठी और महासप्तमी (24–25 मार्च) 24 मार्च (षष्ठी): बेलवरण का आयोजन, शाम 6:54 बजे तक तिथि मान्य   25 मार्च (महासप्तमी): मां दुर्गा के सातवें स्वरूप की पूजा, शाम 4:30 बजे तक सप्तमी   इस दिन से पंडालों में विधिवत पूजा-अर्चना शुरू हो जाती है। महाअष्टमी और महानवमी (26–27 मार्च) 26 मार्च (महाअष्टमी):   अष्टमी तिथि दोपहर 2:15 बजे तक   संधि पूजा और विशेष अनुष्ठानों का महत्व   27 मार्च (महानवमी + रामनवमी): नवमी तिथि दोपहर 12:02 बजे तक   पुनर्वसु नक्षत्र का शुभ संयोग   रामनवमी का विशेष योग इस वर्ष Ram Navami 27 मार्च को मनाई जाएगी। वाराणसी पंचांग के अनुसार नवमी तिथि सुबह 5:56 बजे से शाम 5:12 बजे तक रहेगी, जिससे पूजा के लिए पर्याप्त शुभ समय उपलब्ध रहेगा। दशमी और देवी आगमन-गमन 28 मार्च (दशमी): सुबह 10:06 बजे तक तिथि मान्य धार्मिक मान्यता के अनुसार: मां दुर्गा का आगमन डोली पर   गमन मुर्गा पर   इसे वर्ष भर के शुभ-अशुभ संकेतों से जोड़ा जाता है।  

surbhi मार्च 19, 2026 0
Hindu New Year 2026 with traditional rituals and festive vibes
हिंदू नववर्ष 2026: कब से शुरू, क्यों खास और किन राशियों के लिए रहेगा शुभ

चैत्र मास की शुरुआत के साथ ही भारतीय परंपरा में एक नए वर्ष का आगाज़ होता है-और इस बार यह शुरुआत कई मायनों में विशेष मानी जा रही है। कब से शुरू हो रहा है नववर्ष? हिंदू पंचांग के अनुसार, नववर्ष का पहला दिन चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से माना जाता है। साल 2026 में यह तिथि 19 मार्च (गुरुवार) को पड़ रही है। इसी दिन से विक्रम संवत 2083 का आरंभ होगा। दिलचस्प बात यह है कि यही दिन देश के अलग-अलग हिस्सों में अलग-अलग नामों से मनाया जाता है-जैसे गुड़ी पड़वा (महाराष्ट्र) और उगादी (दक्षिण भारत)। इसी दिन से चैत्र नवरात्रि की भी शुरुआत हो रही है, जिससे इसका धार्मिक महत्व और बढ़ जाता है। क्यों खास है यह नववर्ष? इस बार का नववर्ष सामान्य नहीं है। ज्योतिषीय गणना के अनुसार, इसमें अधिक मास (ज्येष्ठ) लगने के कारण साल 12 की जगह 13 महीनों का होगा। इसका सीधा असर त्योहारों की तिथियों पर पड़ेगा-यानी सावन, नवरात्रि और दीपावली जैसे प्रमुख पर्व अपने पारंपरिक समय से थोड़ा खिसक सकते हैं। शुभ मुहूर्त पर एक नजर प्रतिपदा तिथि शुरू: 19 मार्च सुबह 06:52 बजे   समाप्ति: 20 मार्च सुबह 04:52 बजे   उदय तिथि के अनुसार: 19 मार्च को ही नववर्ष मनाया जाएगा   संवत 2083 का संकेत इस वर्ष का नाम ‘रौद्र’ संवत्सर रखा गया है। राजा: बृहस्पति (गुरु) – धर्म, शिक्षा और आध्यात्मिकता में वृद्धि   मंत्री: मंगल – साहस, प्रशासन और निर्णय क्षमता में तेजी   यह संयोजन संकेत देता है कि साल धार्मिक उन्नति के साथ-साथ मजबूत फैसलों और सक्रिय शासन का भी रहेगा। किन राशियों के लिए शुभ संकेत? मेष (Aries) ऊर्जा और आत्मविश्वास से भरपूर यह साल मेष राशि वालों के लिए करियर में नए अवसर लेकर आ सकता है। लंबित विवाद सुलझने और नई जिम्मेदारियां मिलने के योग हैं। सिंह (Leo) यह साल पहचान और प्रतिष्ठा दिलाने वाला हो सकता है। नेतृत्व क्षमता मजबूत होगी और खासतौर पर सरकारी या प्रशासनिक क्षेत्रों में लाभ के संकेत हैं। वृश्चिक (Scorpio) मेहनत का पूरा फल मिलने का समय है। संपत्ति, निवेश और पुराने विवादों में राहत मिल सकती है। आर्थिक स्थिति मजबूत होने के संकेत हैं। कुल मिलाकर यह नववर्ष सिर्फ कैलेंडर बदलने का अवसर नहीं, बल्कि नई ऊर्जा, नए संकल्प और बदलाव का संकेत भी है। 13 महीनों वाला यह साल जहां समय की गति को थोड़ा अलग बनाएगा, वहीं कई लोगों के जीवन में बड़े सकारात्मक बदलाव भी ला सकता है।

surbhi मार्च 18, 2026 0
Devotees performing tarpan ritual on river bank during Chaitra Amavasya with offerings and prayers
चैत्र अमावस्या 2026: 18 या 19 मार्च? जानिए सही तारीख, तर्पण-श्राद्ध का समय और स्नान-दान का मुहूर्त

चैत्र अमावस्या 2026 को लेकर लोगों के बीच तारीख को लेकर भ्रम की स्थिति बनी हुई है। इसकी मुख्य वजह अगले ही दिन से शुरू हो रही Chaitra Navratri है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि पितरों के लिए तर्पण, श्राद्ध और स्नान-दान कब किया जाए- 18 मार्च या 19 मार्च? पंचांग गणना और उदयातिथि के आधार पर अब इस भ्रम को स्पष्ट कर दिया गया है।   चैत्र अमावस्या की सही तारीख क्या है? हिंदू पंचांग के अनुसार अमावस्या तिथि 18 मार्च 2026 को सुबह 8:25 बजे से शुरू होकर 19 मार्च 2026 को सुबह 6:52 बजे तक रहेगी। उदयातिथि (सूर्योदय के समय की तिथि) के आधार पर जिस दिन सूर्योदय के समय अमावस्या होती है, वही दिन अमावस्या माना जाता है। इस आधार पर: चैत्र अमावस्या की मान्य तिथि: 19 मार्च 2026 (गुरुवार)   दर्श अमावस्या (तिथि प्रारंभ): 18 मार्च 2026 (बुधवार)   तर्पण-श्राद्ध और पिंडदान कब करें? धार्मिक मान्यता के अनुसार पितरों के लिए तर्पण, श्राद्ध और पिंडदान अमावस्या तिथि में दिन के समय किया जाता है। 18 मार्च को अमावस्या तिथि दिनभर मौजूद रहेगी   जबकि 19 मार्च को सुबह 6:52 बजे के बाद प्रतिपदा तिथि शुरू हो जाएगी   इसलिए तर्पण, श्राद्ध और पिंडदान 18 मार्च 2026 को करना श्रेष्ठ रहेगा शुभ समय: दोपहर 11:30 बजे से 2:30 बजे के बीच   इस दौरान पंचबलि कर्म, ब्राह्मण भोज और पितरों का तर्पण करने का विशेष महत्व है। साथ ही, 18 मार्च की शाम को सूर्यास्त के बाद पितरों के लिए दीपदान करना भी शुभ माना गया है।   स्नान-दान कब करें? उदयातिथि के आधार पर स्नान और दान 19 मार्च 2026 को किया जाएगा शुभ मुहूर्त: ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:51 बजे से 5:39 बजे तक   सूर्योदय के बाद भी स्नान-दान किया जा सकता है   इस दिन स्नान के बाद अन्न, वस्त्र, फल और धन का दान करने से पापों का नाश और पुण्य की प्राप्ति होती है।   धार्मिक महत्व चैत्र अमावस्या को पितरों की शांति और आशीर्वाद प्राप्त करने का विशेष दिन माना जाता है। इसे कई स्थानों पर भूतड़ी अमावस्या भी कहा जाता है। इस दिन किए गए तर्पण, श्राद्ध और दान से पितृ दोष दूर होता है और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है। इसके अगले दिन से Chaitra Navratri का शुभारंभ होता है, इसलिए यह दिन धार्मिक दृष्टि से और भी महत्वपूर्ण हो जाता है।  

surbhi मार्च 17, 2026 0
idol of Goddess Durga.
Chaitra Navratri 2026: कब है महाअष्टमी और राम नवमी? जानें सही तारीख और पूजा से जुड़े जरूरी नियम

  Chaitra Navratri हिंदू धर्म के सबसे पवित्र पर्वों में से एक माना जाता है। इस दौरान भक्त मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा करते हैं और नौ दिनों तक व्रत रखकर देवी की आराधना करते हैं। नवरात्र के करीब आते ही भक्तों के मन में अक्सर यह सवाल रहता है कि महाअष्टमी और राम नवमी किस दिन पड़ेंगी।   कब है महाअष्टमी 2026? इस साल महाअष्टमी 26 मार्च 2026, गुरुवार को मनाई जाएगी। यह दिन मां के आठवें स्वरूप Mahagauri को समर्पित होता है। इस दिन कन्या पूजन का विशेष महत्व माना जाता है। मान्यता है कि सुबह कन्याओं को भोजन कराने और उनका आशीर्वाद लेने से देवी की विशेष कृपा प्राप्त होती है।   कब है राम नवमी 2026? राम नवमी 27 मार्च 2026, शुक्रवार को मनाई जाएगी। इसी दिन Rama के जन्मोत्सव का पर्व मनाया जाता है। इस दिन भक्त भगवान राम की पूजा-अर्चना करते हैं और नवरात्र व्रत का पारण करते हैं।   अष्टमी-नवमी पर क्या करें अष्टमी के दिन 2 से 10 साल की कन्याओं को भोजन कराकर उनका आशीर्वाद लें, क्योंकि उन्हें देवी का स्वरूप माना जाता है।   अष्टमी के अंत और नवमी के आरंभ के बीच के संधि काल में दीपक जलाकर मां Chamunda का ध्यान करना शुभ माना जाता है।   नवमी के दिन घर में छोटा हवन करना शुभ माना जाता है, इससे सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है।   इन बातों का रखें ध्यान अष्टमी और नवमी के दिन घर में झगड़ा या किसी का अपमान करने से बचें।   इन दिनों तामसिक भोजन जैसे मांस-मदिरा से दूर रहें और सात्विक भोजन करें।   राम नवमी की पूजा में तुलसी चढ़ाया जा सकता है, लेकिन नवरात्र के दौरान मां दुर्गा को तुलसी नहीं चढ़ाई जाती।   इन दिनों ब्रह्म मुहूर्त में उठकर पूजा करना सबसे शुभ माना जाता है।

surbhi मार्च 14, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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