नई दिल्ली: स्मॉलकैप मेटल सेक्टर की प्रमुख कंपनी Godawari Power and Ispat Limited के शेयरों में गुरुवार को शुरुआती कारोबार में मजबूती दर्ज की गई। कंपनी द्वारा अपनी पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक इकाई Godawari New Energy Private Limited में ₹50 करोड़ का ताजा इक्विटी निवेश करने की घोषणा के बाद बाजार में सकारात्मक प्रतिक्रिया देखने को मिली। शुरुआती कारोबार में शेयरों में तेजी घोषणा के बाद कंपनी का शेयर नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर सुबह करीब 9:30 बजे 1.7 प्रतिशत की बढ़त के साथ ₹305.05 पर ट्रेड करता दिखा। निवेशकों ने इस कदम को कंपनी के दीर्घकालिक विस्तार और नए बिजनेस सेगमेंट में एंट्री के रूप में देखा। राइट्स इश्यू के जरिए निवेश यह निवेश 5 करोड़ इक्विटी शेयरों के आवंटन के माध्यम से किया गया है, जिनकी फेस वैल्यू ₹10 प्रति शेयर है। यह प्रक्रिया राइट्स बेसिस पर पूरी की गई, जो पहले से स्वीकृत पूंजी निवेश योजना के अनुरूप है। कुल ₹200 करोड़ निवेश की योजना कंपनी पहले ही स्पष्ट कर चुकी है कि वह अपनी इस सहायक कंपनी में कुल ₹200 करोड़ तक निवेश करेगी। इस पूंजी का उपयोग कैपिटल एक्सपेंडिचर और वर्किंग कैपिटल की जरूरतों को पूरा करने में किया जाएगा। क्लीन एनर्जी और बैटरी स्टोरेज में एंट्री इस निवेश का मुख्य उद्देश्य 20 GWh क्षमता वाले Battery Energy Storage System (BESS) प्लांट के पहले चरण का विकास करना है। यह कदम कंपनी के क्लीन एनर्जी और बैटरी स्टोरेज सेक्टर में प्रवेश को दर्शाता है, जो भविष्य में तेजी से बढ़ने वाला क्षेत्र माना जा रहा है।
रसोई में बिना LPG सिलेंडर के असली आग जैसी आंच पर खाना बनाना अब कल्पना नहीं, हकीकत बनता जा रहा है। नई तकनीक पर आधारित प्लाज्मा इलेक्ट्रिक स्टोव तेजी से चर्चा में है, जो गैस के बिना भी ठीक वैसा ही फ्लेम अनुभव देता है जैसा पारंपरिक चूल्हे में मिलता है। बढ़ती LPG कीमतों और स्वच्छ ऊर्जा की जरूरत के बीच यह तकनीक भारतीय किचन के लिए गेमचेंजर साबित हो सकती है। क्या है प्लाज्मा इलेक्ट्रिक स्टोव? प्लाज्मा इलेक्ट्रिक स्टोव एक एडवांस कुकिंग डिवाइस है, जो पूरी तरह बिजली पर चलता है लेकिन इसमें गैस की तरह दिखाई देने वाली आंच (फ्लेम) बनती है। यह तकनीक Plasma Arc Technology पर आधारित है, जिसमें बिजली के जरिए हवा को आयनाइज़ कर बेहद गर्म प्लाज्मा फ्लेम तैयार किया जाता है। यानी इसमें न गैस जलती है और न ही कोई ईंधन खर्च होता है - सिर्फ बिजली से खाना पकता है। कैसे काम करती है यह तकनीक? इस स्टोव में हाई-वोल्टेज बिजली का उपयोग कर हवा को आयनाइज़ किया जाता है, जिससे प्लाज्मा फ्लेम बनती है। यह फ्लेम बेहद तेज गर्मी पैदा करती है, जो पारंपरिक गैस चूल्हे के बराबर या उससे ज्यादा हो सकती है। तापमान 1200–1300 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है, जिससे खाना तेजी से पकता है। खास बात यह है कि इसमें इंडक्शन की तरह इंतजार नहीं करना पड़ता - तुरंत ही तेज आंच मिलती है। LPG जैसा अनुभव, लेकिन बिना गैस प्लाज्मा स्टोव की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह गैस चूल्हे जैसा ही अनुभव देता है। इसमें दिखने वाली फ्लेम होती है, नॉब से कंट्रोल किया जा सकता है और किसी भी तरह के बर्तन - स्टील, एल्यूमिनियम, लोहे या पीतल - का इस्तेमाल किया जा सकता है। यही वजह है कि यह इंडक्शन कुकटॉप की सीमाओं को काफी हद तक खत्म करता है। LPG और इंडक्शन से कितना अलग? जहां पारंपरिक LPG स्टोव गैस पर निर्भर होते हैं और लीकेज या प्रदूषण का खतरा रहता है, वहीं इंडक्शन पूरी तरह बिजली पर चलता है लेकिन उसमें फ्लेम नहीं होती और खास बर्तन ही इस्तेमाल होते हैं। इसके मुकाबले प्लाज्मा स्टोव बिजली से चलता है, फ्लेम जैसा अनुभव देता है, सभी बर्तनों के साथ काम करता है और ज्यादा ऊर्जा दक्षता (80–90% तक) प्रदान करता है। मुख्य खूबियां जो बनाती हैं इसे खास यह स्टोव पूरी तरह गैस-फ्री है, यानी LPG या PNG की जरूरत खत्म। इसमें असली फ्लेम जैसा ही अनुभव मिलता है, सभी प्रकार के बर्तनों का इस्तेमाल किया जा सकता है और इसमें कोई धुआं या कालिख नहीं बनती। साथ ही इसमें ओवरहीट प्रोटेक्शन, ऑटो शट-ऑफ और लीकेज जैसी समस्या का कोई खतरा नहीं होता। मजबूत ग्लास टॉप और मेटल बर्नर इसे टिकाऊ और साफ-सफाई में आसान बनाते हैं। कीमत, पावर और इस्तेमाल प्लाज्मा स्टोव आमतौर पर 2500W से 6000W तक की पावर पर काम करते हैं और 220V सप्लाई से चलते हैं। इनकी कीमत फिलहाल करीब 30–35 हजार रुपये के आसपास है। यह सिंगल और डबल बर्नर विकल्प में उपलब्ध हैं और घरों के अलावा रेस्टोरेंट, क्लाउड किचन और फूड ट्रक में भी इस्तेमाल किए जा सकते हैं। भारत के लिए क्यों है गेमचेंजर? सरकार की सोलर योजनाओं जैसे PM Surya Ghar Yojana के साथ मिलकर यह तकनीक पूरी तरह बिजली आधारित कुकिंग को बढ़ावा दे सकती है। इससे LPG पर निर्भरता कम होगी, खर्च घटेगा और पर्यावरण को भी फायदा मिलेगा। अगर यह तकनीक बड़े स्तर पर अपनाई जाती है, तो यह भारत में किचन सिस्टम को पूरी तरह बदल सकती है। चुनौतियां भी कम नहीं हालांकि, इसकी शुरुआती कीमत ज्यादा है और यह पूरी तरह बिजली पर निर्भर है। ग्रामीण या कम बिजली आपूर्ति वाले क्षेत्रों में इसका उपयोग चुनौतीपूर्ण हो सकता है। साथ ही लोगों में इस तकनीक के प्रति जागरूकता अभी कम है। क्या यही है भविष्य की रसोई? प्लाज्मा इलेक्ट्रिक स्टोव पारंपरिक गैस चूल्हे और आधुनिक इलेक्ट्रिक कुकिंग के बीच एक बेहतरीन संतुलन पेश करता है। अगर इसकी कीमत कम होती है और इसका उत्पादन बड़े स्तर पर शुरू होता है, तो आने वाले समय में यह भारतीय रसोई का नया मानक बन सकता है।
इलेक्ट्रिक व्हीकल कंपनी Tesla ने भारत में अपनी मौजूदगी को मजबूत करते हुए एक अहम कदम उठाया है। कंपनी ने Nexus Seawoods Mall (नवी मुंबई) में देश का पहला इन-मॉल EV चार्जिंग हब शुरू किया है। यह पहल भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए सुविधाजनक इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है। हाई-स्पीड और रेगुलर चार्जिंग दोनों विकल्प इस नए चार्जिंग स्टेशन को मॉल के B1 पार्किंग लेवल पर स्थापित किया गया है, जहां: 4 V4 सुपरचार्जर (250kW क्षमता) 4 डेस्टिनेशन चार्जर (11kW) कंपनी के मुताबिक, सुपरचार्जर तकनीक के जरिए Tesla Model Y को सिर्फ 15 मिनट में लगभग 275 किमी तक की रेंज दी जा सकती है। EV चार्जिंग को बनाया जाएगा आसान Tesla का यह कदम ग्राहकों को रोजमर्रा की जिंदगी में चार्जिंग को आसान बनाने पर केंद्रित है। मॉल जैसी जगहों पर चार्जिंग शॉपिंग या समय बिताते हुए वाहन चार्ज लंबी दूरी की चिंता में कमी भारत में Tesla का विस्तार इस नए हब के साथ अब Tesla के भारत में कुल 4 चार्जिंग लोकेशन हो गए हैं: गुरुग्राम दिल्ली मुंबई नवी मुंबई कंपनी इन स्टेशनों को उन जगहों पर स्थापित कर रही है जहां लोग ज्यादा समय बिताते हैं। मॉल में एक्सपीरियंस ज़ोन भी लॉन्च चार्जिंग हब के साथ Tesla ने मॉल में एक इंटरैक्टिव एक्सपीरियंस ज़ोन भी शुरू किया है, जहां ग्राहक: कार की तकनीक को समझ सकते हैं टेस्ट ड्राइव ले सकते हैं डिजाइन और सेफ्टी फीचर्स एक्सप्लोर कर सकते हैं भारत में Tesla Model Y की कीमत फिलहाल Tesla भारत में अपने पोर्टफोलियो में मुख्य रूप से Model Y पेश कर रही है: कीमत: ₹59.89 लाख से ₹67.89 लाख (एक्स-शोरूम) वैरिएंट: Standard और Long Range FSD (Full Self Driving) फीचर ऑप्शनल EV इकोसिस्टम को मिलेगा बढ़ावा Tesla का यह कदम भारत में EV इकोसिस्टम को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे न केवल ग्राहकों को सुविधा मिलेगी, बल्कि इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने की रफ्तार भी तेज हो सकती है।
Coal India News: सरकारी क्षेत्र की दिग्गज कंपनी कोल इंडिया (Coal India) के शेयरों में आज हलचल देखने को मिल सकती है। कंपनी को तेलंगाना पावर जेनरेशन कॉर्पोरेशन लिमिटेड (TGGENCO) से 1057.09 करोड़ रुपये का बड़ा ऑर्डर मिला है, जो इसके बिजनेस मॉडल में बदलाव का भी संकेत देता है। क्या है पूरा ऑर्डर? कोल इंडिया को मिला यह कॉन्ट्रैक्ट पारंपरिक कोयला खनन से अलग एक नई दिशा में कदम है। प्रोजेक्ट: बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) लोकेशन: चौटुप्पल, तेलंगाना कुल वैल्यू: ₹1057.09 करोड़ इस प्रोजेक्ट के तहत कंपनी को एक बड़े पैमाने पर बिजली स्टोरेज प्लांट स्थापित करना होगा। प्रोजेक्ट की खासियत कुल क्षमता: 750 MWh स्टोरेज समय: 4 घंटे तक बिजली स्टोर प्रोजेक्ट टाइमलाइन: 18 महीने में पूरा करना होगा यह प्लांट खासतौर पर सोलर और विंड एनर्जी को स्टोर करने में मदद करेगा, जिससे पीक डिमांड के समय बिजली की सप्लाई सुनिश्चित की जा सके। कमाई का नया जरिया इस डील से कोल इंडिया को सिर्फ प्रोजेक्ट वैल्यू ही नहीं, बल्कि रेगुलर इनकम का मौका भी मिलेगा: कंपनी 3.14 लाख मेगावाट प्रति माह के टैरिफ पर बिजली सप्लाई करेगी यानी यह प्रोजेक्ट लॉन्ग टर्म रेवेन्यू स्ट्रीम भी बना सकता है। क्लीन एनर्जी की ओर शिफ्ट अब तक कोल इंडिया मुख्य रूप से कोयला खनन के लिए जानी जाती रही है, लेकिन यह ऑर्डर कंपनी के एनर्जी ट्रांजिशन प्लान को दिखाता है: रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर में एंट्री बैटरी स्टोरेज टेक्नोलॉजी में निवेश भविष्य के ग्रीन एनर्जी मार्केट में पकड़ मजबूत करने की कोशिश यह कदम निवेशकों के लिए पॉजिटिव संकेत माना जा सकता है। आगे की प्रक्रिया कंपनी को 15 दिनों के भीतर परफॉर्मेंस बैंक गारंटी जमा करनी होगी इसके बाद फाइनल एग्रीमेंट साइन होगा यानी फिलहाल यह ऑर्डर शुरुआती स्टेज में है, लेकिन संभावनाएं मजबूत हैं। शेयर पर क्या असर? इस बड़े ऑर्डर के बाद बाजार में कोल इंडिया के शेयरों पर नजर बनी रहेगी। 27 मार्च 2026 को शेयर कीमत: ₹445 के आसपास 1 साल का रिटर्न: लगभग 11–13% 52 वीक हाई: ₹476 52 वीक लो: ₹350 इसके अलावा कंपनी ने निवेशकों को आकर्षित करते हुए ₹26.40 प्रति शेयर डिविडेंड भी दिया है। निवेशकों के लिए संकेत यह डील कंपनी के बिजनेस में डायवर्सिफिकेशन दिखाती है क्लीन एनर्जी में एंट्री से लॉन्ग टर्म ग्रोथ की संभावना शॉर्ट टर्म में शेयर में वोलैटिलिटी और पॉजिटिव मूवमेंट संभव
ऊर्जा क्षेत्र में बिहार की बड़ी छलांग बिहार अब ऊर्जा सेक्टर में तेजी से उभरता हुआ निवेश केंद्र बनता जा रहा है। भारत इलेक्ट्रिसिटी समिट 2026 में ‘फोकस स्टेट’ के रूप में अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराते हुए राज्य ने यह साफ संकेत दिया कि आने वाले वर्षों में यहां ऊर्जा क्षेत्र में बड़े स्तर पर बदलाव देखने को मिलेगा। 5 साल में 81,000 करोड़ का निवेश राज्य सरकार ने अगले पांच वर्षों में ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर को आधुनिक बनाने के लिए करीब 81,000 करोड़ रुपए निवेश करने की योजना बनाई है। यह निवेश अलग-अलग सेक्टर में किया जाएगा, जिससे बिजली उत्पादन से लेकर सप्लाई तक की पूरी व्यवस्था मजबूत होगी। पावर जेनरेशन: 38,950 करोड़ रुपए ट्रांसमिशन सिस्टम: 16,194 करोड़ रुपए डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क: 22,951 करोड़ रुपए मेंटेनेंस और रख-रखाव: 3,346 करोड़ रुपए इस व्यापक योजना का मकसद राज्य में बिजली आपूर्ति को अधिक विश्वसनीय और सुचारु बनाना है। रिन्यूएबल एनर्जी में बड़ा लक्ष्य बिहार ने रिन्यूएबल एनर्जी पॉलिसी 2025 के तहत वर्ष 2030 तक 24 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन का लक्ष्य तय किया है। साथ ही 6.1 गीगावाट की एनर्जी स्टोरेज क्षमता विकसित करने की भी योजना है। निवेशकों को आकर्षित करने के लिए सरकार कई सुविधाएं दे रही है, जैसे- ट्रांसमिशन शुल्क में छूट ऊर्जा बैंकिंग की सुविधा सिंगल विंडो क्लीयरेंस कार्बन क्रेडिट के प्रावधान ये सभी पहल बिहार को ग्रीन एनर्जी के क्षेत्र में मजबूत खिलाड़ी बनाने की दिशा में अहम कदम माने जा रहे हैं। 20 साल में दिखा बड़ा बदलाव समिट के दौरान राज्य के ऊर्जा क्षेत्र में पिछले दो दशकों में हुए बदलावों को भी सामने रखा गया। 2005 में जहां केवल 700 मेगावाट बिजली उपलब्ध थी, वहीं अब मांग 8,700 मेगावाट से ज्यादा हो चुकी है। राज्य में करीब 2.2 करोड़ उपभोक्ता बिजली नेटवर्क से जुड़ चुके हैं। वितरण कंपनियां, जो 2021 में 1,942 करोड़ के घाटे में थीं, अब 2025 तक करीब 2,000 करोड़ के मुनाफे में पहुंच गई हैं। निवेशकों के लिए क्यों खास है बिहार? ऊर्जा क्षेत्र में सुधार, पारदर्शी नीतियां और बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर के चलते बिहार अब निवेशकों के लिए एक भरोसेमंद गंतव्य बनकर उभर रहा है। सरकार की योजनाएं साफ संकेत देती हैं कि आने वाले समय में राज्य न सिर्फ अपनी जरूरतें पूरी करेगा, बल्कि ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में भी तेजी से आगे बढ़ेगा। क्या बदलेगा आम लोगों के लिए? इस बड़े निवेश का सीधा फायदा आम उपभोक्ताओं को मिलेगा। बिजली आपूर्ति अधिक स्थिर होगी, कटौती में कमी आएगी और ग्रामीण क्षेत्रों तक बेहतर कनेक्टिविटी सुनिश्चित की जा सकेगी।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।