देश की सबसे प्रतिष्ठित सरकारी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे लाखों उम्मीदवारों के लिए बड़ी अपडेट सामने आई है। Union Public Service Commission यानी UPSC ने साल 2027 का परीक्षा कैलेंडर जारी कर दिया है। आयोग की ओर से जारी इस शेड्यूल में सिविल सर्विस, NDA, CDS, CAPF, इंजीनियरिंग सर्विस और अन्य प्रमुख परीक्षाओं की तारीखें घोषित की गई हैं। अब उम्मीदवार पहले से अपनी तैयारी की रणनीति तय कर सकते हैं और परीक्षा के हिसाब से स्टडी प्लान बना सकते हैं। कब होगी UPSC Civil Services Exam 2027? UPSC Civil Services Examination 2027 की प्रारंभिक परीक्षा 23 मई 2027 को आयोजित की जाएगी। यही परीक्षा IAS, IPS, IFS और अन्य प्रतिष्ठित सेवाओं में चयन का रास्ता खोलती है। वहीं Civil Services Main Examination 20 अगस्त 2027 से शुरू होगी। यह परीक्षा कुल 5 दिनों तक आयोजित की जाएगी। जनवरी में आएगा नोटिफिकेशन UPSC कैलेंडर के मुताबिक सिविल सर्विस परीक्षा 2027 का आधिकारिक नोटिफिकेशन जनवरी 2027 में जारी किया जाएगा। इसके साथ ही आवेदन प्रक्रिया भी शुरू हो जाएगी। NDA और CDS परीक्षा की तारीखें देश की सेना में अधिकारी बनने का सपना देखने वाले युवाओं के लिए NDA और CDS परीक्षा बेहद अहम मानी जाती है। NDA और NA Examination (I) परीक्षा तिथि: 11 अप्रैल 2027 NDA और NA Examination (II) परीक्षा तिथि: 19 सितंबर 2027 इसके अलावा Combined Defence Services Examination यानी CDS परीक्षा का शेड्यूल भी UPSC कैलेंडर में जारी किया गया है। CAPF और अन्य परीक्षाओं की तारीखें भी घोषित CAPF Assistant Commandant Examination 2027 की परीक्षा 4 जुलाई 2027 को आयोजित होगी। इस परीक्षा के जरिए Border Security Force, Central Reserve Police Force, Central Industrial Security Force और Indo-Tibetan Border Police जैसी केंद्रीय सुरक्षा बलों में अधिकारी बनने का मौका मिलता है। इसके अलावा: Combined Geo-Scientist Preliminary Exam – 10 जनवरी 2027 Combined Geo-Scientist Main Exam – 19 जून 2027 ऐसे चेक करें UPSC 2027 Calendar उम्मीदवार UPSC का पूरा कैलेंडर देखने के लिए UPSC Official Website पर विजिट कर सकते हैं। स्टेप्स: वेबसाइट के होमपेज पर जाएं Examination सेक्शन खोलें UPSC 2027 Calendar लिंक पर क्लिक करें स्क्रीन पर पूरा एग्जाम शेड्यूल दिखाई देगा भविष्य के लिए PDF डाउनलोड कर सेव कर लें तैयारी शुरू करने का सही समय UPSC परीक्षाओं को देश की सबसे कठिन प्रतियोगी परीक्षाओं में गिना जाता है। ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि जल्दी तैयारी शुरू करने वाले उम्मीदवारों को बेहतर रणनीति बनाने का फायदा मिलता है।
NEET परीक्षा और पेपर लीक विवाद को लेकर देशभर में छात्रों और अभिभावकों के बीच चिंता का माहौल बना हुआ है। इसी बीच Arvind Kejriwal ने NEET छात्रों के समर्थन में भावुक संदेश जारी किया है। उन्होंने कहा कि NEET की तैयारी कर रहे छात्र केवल परीक्षार्थी नहीं, बल्कि उनके अपने बच्चों जैसे हैं और वह उनके भविष्य के लिए उसी तरह संघर्ष कर रहे हैं जैसे कोई पिता अपने बच्चों के लिए करता है। केजरीवाल ने कहा कि उन्हें बड़ी संख्या में छात्रों के संदेश मिले हैं, जिनमें उन्होंने अपनी परेशानियां, मानसिक तनाव और भविष्य को लेकर चिंता जाहिर की है। उन्होंने कहा कि इन संदेशों ने उन्हें गहराई से प्रभावित किया। “आपका सपना टूटने नहीं देंगे” अरविंद केजरीवाल ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि देश के लाखों छात्र कड़ी मेहनत करके डॉक्टर बनने का सपना देखते हैं और किसी भी परिस्थिति में उनका यह सपना टूटना नहीं चाहिए। उन्होंने छात्रों से हिम्मत बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि मुश्किल हालात जीवन का हिस्सा हैं, लेकिन मेहनत, धैर्य और आत्मविश्वास से हर चुनौती को पार किया जा सकता है। उन्होंने कहा, “प्रिय NEET छात्रों, आपके इतने सारे संदेशों और आपकी भावनाओं की गहराई ने मुझे बहुत प्रभावित किया है। आपने मुझ पर भरोसा किया। हिम्मत बनाए रखें। एक संकल्प लें कि डॉक्टर बनकर ही रहेंगे। ईश्वर आप सभी का भला करे।” छात्रों के भविष्य को लेकर जताई चिंता केजरीवाल ने कहा कि आज के छात्र ही कल देश की स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत बनाएंगे। देश को ईमानदार, मेहनती और संवेदनशील डॉक्टरों की जरूरत है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि छात्रों और उनके परिवारों के भविष्य की रक्षा के लिए जो भी लड़ाई जरूरी होगी, उसमें वे उनके साथ खड़े रहेंगे। सोशल मीडिया पर वायरल हुआ संदेश अरविंद केजरीवाल का यह भावुक संदेश सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। बड़ी संख्या में छात्रों और अभिभावकों ने उनके बयान को प्रेरणादायक बताते हुए समर्थन दिया है। गौरतलब है कि NEET परीक्षा में कथित पेपर लीक और परीक्षा प्रक्रिया को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। कई छात्र संगठन और अभिभावक परीक्षा में पारदर्शिता और निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।
West Bengal सरकार ने सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों को बड़ी राहत देते हुए भर्ती की अधिकतम आयु सीमा बढ़ाने का फैसला किया है। राज्य के वित्त विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, अब विभिन्न श्रेणियों की सरकारी नौकरियों में आवेदन के लिए उम्मीदवारों की अधिकतम आयु सीमा पहले से अधिक होगी। नई व्यवस्था के तहत ग्रुप A पदों के लिए अधिकतम आयु सीमा 41 वर्ष, ग्रुप B के लिए 44 वर्ष और ग्रुप C तथा D के लिए 45 वर्ष तय की गई है। यह संशोधन पश्चिम बंगाल सर्विसेज (रेजिंग ऑफ एज-लिमिट) रूल्स, 1981 में किया गया है। 11 मई से लागू होंगे नए नियम राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि नई आयु सीमा 11 मई से प्रभावी मानी जाएगी। यानी इस तारीख के बाद जारी होने वाली सभी भर्ती प्रक्रियाओं में नए नियम लागू होंगे। सरकार का कहना है कि इस फैसले से उन युवाओं को राहत मिलेगी, जो लंबे समय से सरकारी नौकरियों की तैयारी कर रहे थे लेकिन भर्ती प्रक्रियाओं और परीक्षाओं में देरी के कारण आयु सीमा पार होने की चिंता से जूझ रहे थे। युवाओं को मिलेगा बड़ा फायदा नई नीति लागू होने के बाद हजारों ऐसे उम्मीदवार सरकारी नौकरियों के लिए पात्र हो जाएंगे, जो पहले अधिकतम आयु सीमा पार कर चुके थे। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे प्रतियोगी परीक्षाओं में उम्मीदवारों की संख्या बढ़ सकती है और रोजगार के अवसरों तक पहुंच आसान होगी। सत्ता परिवर्तन के बाद लगातार बड़े फैसले 2026 विधानसभा चुनाव के बाद राज्य की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला। Suvendu Adhikari के नेतृत्व में बनी नई सरकार प्रशासनिक सुधार और रोजगार के मुद्दों को प्राथमिकता दे रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि युवाओं और सरकारी भर्ती से जुड़े फैसले आने वाले समय में राज्य की राजनीति और रोजगार व्यवस्था पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकते हैं। 2026 चुनाव में बदला राजनीतिक समीकरण 2026 के विधानसभा चुनाव में Bharatiya Janata Party ने 294 सदस्यीय विधानसभा में 206 सीटें जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल किया। वहीं All India Trinamool Congress, जिसने पिछले चुनाव में 212 सीटें जीती थीं, इस बार 80 सीटों पर सिमट गई। नई सरकार बनने के बाद राज्य में प्रशासनिक बदलाव और भर्ती प्रक्रियाओं में सुधार को लेकर लगातार फैसले लिए जा रहे हैं।
कोचिंग से लौटे चचेरे भाइयों ने देखा मंजर Patna के गांधी मैदान थाना क्षेत्र में एक दुखद घटना सामने आई है। JEE परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्र सौरभ कुमार ने कथित तौर पर आत्महत्या कर ली। मंगलवार रात करीब 8:30 बजे यह घटना सामने आई, जब उसके साथ रह रहे दो चचेरे भाई कोचिंग से लौटे। दरवाजा नहीं खुलने पर उन्होंने अंदर झांककर देखा, जहां सौरभ फंदे से लटका हुआ मिला। इसके बाद तुरंत पुलिस को सूचना दी गई। कमरे से मिला सुसाइड नोट पुलिस मौके पर पहुंची और दरवाजा तोड़कर अंदर प्रवेश किया। जांच के दौरान कमरे से एक सुसाइड नोट बरामद हुआ है। थाना प्रभारी अखिलेश मिश्रा के अनुसार, नोट में छात्र ने लिखा कि वह पढ़ाई के दबाव में था और लगातार मेहनत के बावजूद उसे अच्छे परिणाम नहीं मिल रहे थे। इसी कारण उसने यह कदम उठाया। नोट में उसने यह भी स्पष्ट किया कि उसकी मौत के लिए कोई अन्य व्यक्ति जिम्मेदार नहीं है। गया का रहने वाला था छात्र सौरभ कुमार गया जिले के आमस क्षेत्र का निवासी था और पटना में रहकर JEE परीक्षा की तैयारी कर रहा था। वह अपने दो चचेरे भाइयों–मुकेश कुमार और अक्षय कुमार–के साथ किराए के कमरे में रह रहा था। बताया जा रहा है कि तीनों अलग-अलग प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे थे। पुलिस जांच जारी घटना की सूचना मिलते ही पुलिस के साथ फॉरेंसिक टीम भी मौके पर पहुंची और साक्ष्य जुटाए। शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया है। पुलिस ने बताया कि पूरे मामले की जांच की जा रही है और परिवार को सूचना दे दी गई है। आगे की कार्रवाई पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और परिवार की शिकायत के आधार पर की जाएगी। बढ़ता दबाव बना चिंता का विषय यह घटना एक बार फिर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों पर बढ़ते मानसिक दबाव को उजागर करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में परिवार और संस्थानों को बच्चों की मानसिक स्थिति पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
देश की सबसे बड़ी इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षाओं में से एक JEE Main के सेशन 2 का रिजल्ट आज, 20 अप्रैल 2026 को जारी किया जा सकता है। National Testing Agency (NTA) किसी भी समय परिणाम घोषित कर सकता है, जिससे लाखों उम्मीदवारों का इंतजार खत्म होने वाला है। इस बार परीक्षा 2 अप्रैल से 9 अप्रैल 2026 के बीच आयोजित की गई थी, जबकि प्रोविजनल आंसर की 11 अप्रैल को जारी की गई थी। अब सभी की नजरें रिजल्ट पर टिकी हैं, जो आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध होगा। कहां और कैसे चेक करें रिजल्ट रिजल्ट जारी होते ही उम्मीदवार jeemain.nta.nic.in पर जाकर अपना स्कोरकार्ड देख सकते हैं। चेक करने के आसान स्टेप्स: ऑफिशियल वेबसाइट पर जाएं “JEE Main Session 2 Result 2026” लिंक पर क्लिक करें Application Number और Date of Birth दर्ज करें Submit पर क्लिक करें स्क्रीन पर रिजल्ट दिखाई देगा, इसे डाउनलोड और प्रिंट कर लें परीक्षा से जुड़े अहम अपडेट JEE Main Session 2 के लिए आवेदन प्रक्रिया 1 फरवरी से 25 फरवरी 2026 तक चली थी। परीक्षा शहर की जानकारी 22 मार्च को जारी हुई थी, जबकि एडमिट कार्ड परीक्षा से तीन दिन पहले उपलब्ध कराए गए थे। अब अगला लक्ष्य: JEE Advanced 2026 JEE Main में सफल उम्मीदवारों के लिए अगला कदम JEE Advanced है, जो देश के प्रतिष्ठित IITs में प्रवेश का रास्ता खोलता है। महत्वपूर्ण तारीखें: आवेदन शुरू: 23 अप्रैल 2026 आवेदन की अंतिम तिथि: 2 मई 2026 फीस जमा करने की आखिरी तारीख: 4 मई 2026 एडमिट कार्ड जारी: 11 मई 2026 परीक्षा तिथि: 17 मई 2026 रिजल्ट: 1 जून 2026 आगे की रणनीति क्या हो? जिन छात्रों का JEE Main में अच्छा स्कोर है, उनके लिए अब समय बेहद महत्वपूर्ण है। Advanced परीक्षा का स्तर अधिक चुनौतीपूर्ण होता है, इसलिए: कॉन्सेप्ट क्लियर रखें पिछले वर्षों के पेपर्स हल करें टाइम मैनेजमेंट पर ध्यान दें
पटना: बिहार में सहायक शिक्षा विकास पदाधिकारी (AEDO) परीक्षा की तैयारी कर रहे उम्मीदवारों के लिए अहम अपडेट सामने आया है। Bihar Public Service Commission ने BPSC AEDO Admit Card 2026 को अब परीक्षा केंद्र के पूरे पते के साथ उपलब्ध करा दिया है। पहले जारी एडमिट कार्ड में केवल परीक्षा तिथि, शहर और शिफ्ट की जानकारी दी गई थी, लेकिन अब उम्मीदवार अपने एग्जाम सेंटर की पूरी डिटेल्स भी देख सकते हैं। कब से डाउनलोड कर सकते हैं एडमिट कार्ड? Bihar Public Service Commission द्वारा जारी शेड्यूल के अनुसार: 14–15 अप्रैल परीक्षा: 11 अप्रैल से एड्रेस के साथ एडमिट कार्ड उपलब्ध 17–18 अप्रैल परीक्षा: 14 अप्रैल से उपलब्ध 20–21 अप्रैल परीक्षा: 17 अप्रैल से उपलब्ध हालांकि ई-एडमिट कार्ड 3 अप्रैल 2026 से ही डाउनलोड के लिए जारी कर दिया गया था। परीक्षा कब होगी? BPSC AEDO परीक्षा 14 अप्रैल से 21 अप्रैल 2026 के बीच तीन चरणों में आयोजित की जाएगी। कैसे करें एडमिट कार्ड डाउनलोड? उम्मीदवार नीचे दिए गए आसान स्टेप्स को फॉलो करके अपना एडमिट कार्ड डाउनलोड कर सकते हैं: आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं अपने अकाउंट में लॉगिन करें रजिस्ट्रेशन नंबर और पासवर्ड दर्ज करें “My Account” टैब पर क्लिक करें “BPSC AEDO Admit Card 2026” लिंक चुनें View/Download पर क्लिक करें परीक्षा केंद्र की डिटेल्स देखने के लिए “Exam Centre View” पर क्लिक करें एडमिट कार्ड डाउनलोड कर प्रिंट आउट निकाल लें परीक्षा के दिन ध्यान रखें एडमिट कार्ड का प्रिंट आउट साथ ले जाएं एक वैलिड फोटो आईडी प्रूफ जरूरी है समय से पहले परीक्षा केंद्र पर पहुंचें छात्रों के लिए सलाह उम्मीदवार अपने एडमिट कार्ड को ध्यान से जांच लें और परीक्षा केंद्र का पता पहले ही देख लें, ताकि परीक्षा के दिन किसी तरह की परेशानी न हो।
UP PCS Final Result 2024: उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (UPPSC) ने PCS 2024 का फाइनल रिजल्ट जारी कर दिया है। इस बार के नतीजों में लड़कियों का शानदार प्रदर्शन देखने को मिला है। टॉप 10 में 6 लड़कियों ने जगह बनाकर एक बार फिर साबित कर दिया कि बेटियां किसी से कम नहीं हैं। इस परीक्षा में कुल 932 अभ्यर्थी सफल घोषित किए गए हैं। परीक्षा में शामिल उम्मीदवार UPPSC की आधिकारिक वेबसाइट uppsc.up.nic.in पर जाकर अपना रिजल्ट चेक कर सकते हैं। टॉप 10 में कौन-कौन? रैंक रोल नंबर नाम कैटेगरी 1 0134065 नेहा पंचाल UR/GEN 2 0014117 अनन्या त्रिवेदी UR/GEN 3 0093175 अभय प्रताप सिंह UR/GEN 4 0530256 अनामिका मिश्रा UR/GEN 5 0149705 नेहा सिंह UR/GEN 6 0041100 दीप्ति वर्मा UR/OBC 7 0120986 पूजा तिवारी UR/GEN 8 0556977 अनुराग पांडेय UR/EWS 9 0530011 शुभम सिंह UR/OBC 10 0072939 आयुष पांडेय UR/GEN खास बात यह है कि टॉप 10 में 6 स्थान लड़कियों ने हासिल किए हैं, जो इस साल की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक है। ऐसे करें अपना रिजल्ट चेक सबसे पहले UPPSC की आधिकारिक वेबसाइट uppsc.up.nic.in पर जाएं। होमपेज पर “PCS 2024 Final Result” लिंक पर क्लिक करें। अपना रोल नंबर/रजिस्ट्रेशन नंबर और DOB दर्ज करें। सबमिट बटन पर क्लिक करें। आपका रिजल्ट स्क्रीन पर दिखाई देगा। इसे डाउनलोड करें और भविष्य के लिए प्रिंटआउट ले लें। परीक्षा कब हुई थी? मेन्स परीक्षा: 29-30 जून और 1-2 जुलाई 2025 मेन्स रिजल्ट: 4 फरवरी 2026 इंटरव्यू: 16 फरवरी से 20 मार्च 2026 फाइनल रिजल्ट: 29 मार्च 2026
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।