Congress

Rahul Gandhi and BJP leaders clash over NEET-UG paper leak controversy and student future concerns.
NEET-UG पेपर लीक पर सियासी घमासान तेज, बीजेपी का राहुल गांधी पर पलटवार

Bharatiya Janata Party और Indian National Congress के बीच NEET-UG पेपर लीक मामले को लेकर राजनीतिक टकराव तेज हो गया है। भाजपा ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर आरोप लगाया है कि उन्होंने लाखों छात्रों के भविष्य से ऊपर “तुच्छ राजनीति” को तरजीह दी है। दरअसल, राहुल गांधी ने NEET-UG पेपर लीक विवाद, CBSE मूल्यांकन प्रक्रिया और तीन-भाषा नीति को लेकर केंद्र सरकार पर हमला बोला था। उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री Dharmendra Pradhan पर छात्रों को “विफल” करने का आरोप लगाया और प्रधानमंत्री Narendra Modi से लाखों छात्रों का भविष्य “बर्बाद” करने के लिए माफी मांगने की मांग की थी। बीजेपी का जवाब- “छात्रों के भविष्य पर राजनीति” भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता Gaurav Bhatia ने कांग्रेस पर पलटवार करते हुए कहा कि विपक्ष छात्रों की चिंता करने के बजाय राजनीतिक अवसरवाद में लगा हुआ है। उन्होंने कहा, “राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी ने एक बार फिर छात्रों के भविष्य के बजाय तुच्छ राजनीति को चुना है।” भाटिया ने आरोप लगाया कि कांग्रेस रचनात्मक सुझाव देने की बजाय केवल राजनीतिक नैरेटिव मजबूत करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि दूसरों को जवाबदेही का पाठ पढ़ाने से पहले कांग्रेस को अपने शासनकाल में हुए पेपर लीक, परीक्षा घोटालों और संस्थागत विफलताओं का जवाब देना चाहिए। “मोदी सरकार ने की त्वरित कार्रवाई” भाजपा प्रवक्ता ने दावा किया कि मोदी सरकार ने NEET पेपर लीक मामले में तेजी से कार्रवाई की है और जांच एजेंसियों ने कथित मुख्य साजिशकर्ताओं को गिरफ्तार किया है। उन्होंने कहा कि कई राज्यों में चल रही कार्रवाई यह साबित करती है कि सरकार अपराधियों को संरक्षण नहीं देती। गौरव भाटिया ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा, “कांग्रेस की रणनीति छात्रों का राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल करना है।” उन्होंने आगे कहा, “यह कोई लीपापोती नहीं है, न ही चुप्पी। यह निर्णायक और संस्थागत कार्रवाई है।” शिक्षा व्यवस्था पर बढ़ा राजनीतिक दबाव NEET-UG पेपर लीक विवाद को लेकर देशभर में छात्रों और अभिभावकों के बीच चिंता बनी हुई है। विपक्ष लगातार परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता पर सवाल उठा रहा है, जबकि केंद्र सरकार और भाजपा दावा कर रही है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मुद्दा आने वाले समय में राष्ट्रीय राजनीति और शिक्षा व्यवस्था दोनों में बड़ा बहस का विषय बना रह सकता है।  

surbhi मई 18, 2026 0
Akhilesh Yadav with MK Stalin and Mamata Banerjee amid opposition alliance political tensions
स्टालिन और ममता के साथ तस्वीर शेयर कर अखिलेश यादव ने कांग्रेस पर कसा तंज

समाजवादी पार्टी प्रमुख Akhilesh Yadav ने एक बार फिर राजनीतिक संकेतों से भरी पोस्ट कर सियासी हलचल तेज कर दी है. अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर M. K. Stalin और Mamata Banerjee के साथ अपनी तस्वीरें साझा करते हुए कांग्रेस पर इशारों में निशाना साधा. उन्होंने पोस्ट में लिखा, “हम वो नहीं जो मुश्किलों में साथ छोड़ दें.” इस एक लाइन को विपक्षी राजनीति और हाल के चुनावी घटनाक्रम से जोड़कर देखा जा रहा है. कांग्रेस के फैसले के बाद बढ़ी सियासी चर्चा अखिलेश यादव की यह पोस्ट ऐसे समय आई है जब तमिलनाडु में कांग्रेस ने चुनाव बाद डीएमके से दूरी बनाते हुए टीवीके (TVK) को समर्थन देने का फैसला किया है. कांग्रेस ने विधानसभा चुनाव डीएमके के साथ मिलकर लड़ा था, लेकिन नतीजों के बाद पार्टी ने अपना रुख बदल लिया. तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में टीवीके सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, हालांकि उसे स्पष्ट बहुमत नहीं मिला. इसके बाद सरकार गठन को लेकर लगातार राजनीतिक जोड़तोड़ जारी है. बंगाल के संदर्भ में भी बड़ा संदेश अखिलेश यादव की पोस्ट को पश्चिम बंगाल की राजनीति से भी जोड़कर देखा जा रहा है. हाल ही में पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस की हार के बाद कांग्रेस नेताओं के कुछ बयानों पर विपक्षी दलों के बीच असहजता देखी गई थी. इसी बीच लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष Rahul Gandhi ने भी कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं को नसीहत दी थी कि वे तृणमूल कांग्रेस की हार का मजाक न उड़ाएं. विपक्षी एकता पर नया संदेश? राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अखिलेश यादव की यह पोस्ट विपक्षी दलों के बीच भरोसे और साथ निभाने का संदेश देने की कोशिश है. ममता बनर्जी और स्टालिन दोनों ही INDIA गठबंधन के प्रमुख चेहरे माने जाते हैं, ऐसे में अखिलेश का यह बयान कांग्रेस की रणनीति पर अप्रत्यक्ष टिप्पणी के रूप में देखा जा रहा है. तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल के हालिया राजनीतिक घटनाक्रमों के बीच यह पोस्ट विपक्षी राजनीति में नए समीकरणों की ओर भी इशारा कर रही है.  

surbhi मई 8, 2026 0
Congress criticises Modi government over sharp commercial LPG price hike
LPG के दाम बढ़े तो कांग्रेस का हमला–‘Inflation Man Modi’, कहा- जारी है वसूली

देश में कमर्शियल LPG सिलिंडर की कीमतों में भारी बढ़ोतरी के बाद सियासत भी तेज हो गई है। कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को “Inflation Man Modi” करार दिया है। ₹993 की बढ़ोतरी पर घमासान शुक्रवार (1 मई) को 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल LPG सिलिंडर की कीमत में ₹993 तक की बढ़ोतरी की गई। नई दिल्ली में इसकी नई कीमत 3,071.50 रुपये हो गई है, जो अब तक की सबसे बड़ी बढ़ोतरी मानी जा रही है। कांग्रेस का आरोप–‘मोदी की वसूली जारी’ कांग्रेस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर सरकार पर तीखा हमला बोला। पार्टी ने कहा कि “Inflation Man Modi फिर सक्रिय हो गए हैं” और कमर्शियल सिलिंडर बार-बार महंगे किए जा रहे हैं। कांग्रेस के मुताबिक, 1 जनवरी से 1 मई के बीच कमर्शियल LPG सिलिंडर के दाम कुल ₹1,518 तक बढ़ चुके हैं। पार्टी ने तंज कसते हुए कहा कि साल के अभी 8 महीने बाकी हैं और “मोदी की वसूली जारी है।” कारोबारियों पर बढ़ेगा दबाव कांग्रेस ने दावा किया कि इस बढ़ोतरी से छोटे-बड़े कारोबारियों पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। रेस्टोरेंट, होटल, बेकरी और फूड इंडस्ट्री से जुड़े व्यवसायों की लागत बढ़ेगी, जिसका असर आम लोगों पर भी पड़ सकता है। घरेलू LPG में राहत हालांकि, घरेलू उपभोक्ताओं के लिए राहत की बात यह है कि 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू LPG सिलिंडर की कीमत में कोई बदलाव नहीं किया गया है। दिल्ली में इसकी कीमत फिलहाल 913 रुपये बनी हुई है।  

surbhi मई 1, 2026 0
Ajay Maken reacts to AAP Rajya Sabha MPs merging with BJP amid Punjab political controversy
AAP सांसदों के BJP में विलय पर कांग्रेस का हमला, अजय माकन बोले- पंजाब के जनादेश का अपमान

राघव चड्ढा समेत 7 सांसदों के विलय पर सियासी घमासान आम आदमी पार्टी के सात राज्यसभा सांसदों, जिनमें राघव चड्ढा भी शामिल हैं, के बीजेपी में विलय को मंजूरी मिलने के बाद देश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। इस घटनाक्रम पर कांग्रेस ने बीजेपी पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस नेता अजय माकन ने आरोप लगाया कि बीजेपी ने पंजाब के जनादेश का अनादर किया है और इससे राज्य में अलगाववादी ताकतों को बल मिल सकता है। "पंजाब में वही हुआ, जो अलगाववादी चाहते थे" अजय माकन ने कहा कि पंजाब जैसे संवेदनशील और सीमावर्ती राज्य में यह राजनीतिक बदलाव गंभीर चिंता का विषय है। उनके मुताबिक, अलगाववादी ताकतें लंबे समय से यह प्रचार करती रही हैं कि पंजाब के लोगों की आवाज को दबाया जाता है। माकन ने आरोप लगाया कि बीजेपी का यह कदम उसी नैरेटिव को मजबूती देता है। 6 फीसदी वोट, लेकिन 86 फीसदी राज्यसभा सीटें कांग्रेस नेता ने कहा कि 2021 के पंजाब विधानसभा चुनाव में बीजेपी को केवल 6.6 प्रतिशत वोट और दो सीटें मिली थीं। इसके बावजूद अब पंजाब से राज्यसभा की सात में से छह सीटों पर बीजेपी का प्रभाव हो गया है। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक जनादेश के साथ अन्याय बताया। AAP पर भी साधा निशाना अजय माकन ने आम आदमी पार्टी पर भी जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि AAP अब आम आदमी की नहीं, बल्कि अरबपतियों की पार्टी बन चुकी है। माकन के अनुसार, बीजेपी में शामिल हुए सातों सांसदों की औसत घोषित संपत्ति 800 करोड़ रुपये से अधिक है। केजरीवाल पर लगाए गंभीर आरोप कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि अरविंद केजरीवाल ने पार्टी के पुराने और समर्पित कार्यकर्ताओं की अनदेखी कर धनाढ्य लोगों को राज्यसभा भेजा। उन्होंने यह भी कहा कि AAP को कांग्रेस का वोट काटने के लिए खड़ा किया गया था, लेकिन अब उसका "मुखौटा" उतर चुका है। INDIA गठबंधन पर भी उठे सवाल माकन ने स्वीकार किया कि कांग्रेस और AAP के बीच पहले भी वैचारिक मतभेद रहे हैं। हालांकि, गठबंधन की मजबूरियों के चलते दोनों दल साथ आए थे। अब इस घटनाक्रम के बाद INDIA गठबंधन के भीतर भी नई बहस शुरू होने की संभावना है।  

surbhi अप्रैल 28, 2026 0
Anurag Thakur addressing media on women’s reservation bill ahead of Parliament special session
महिला आरक्षण पर सियासी घमासान: अनुराग ठाकुर का विपक्ष पर हमला, TMC पर भी साधा निशाना

  नई दिल्ली: महिला आरक्षण को लेकर संसद के विशेष सत्र से पहले राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। अनुराग ठाकुर ने विपक्षी दलों पर तीखा हमला करते हुए कहा कि “महिला-विरोधी सोच” रखने वाली पार्टियां ही इस बिल का विरोध कर रही हैं। ‘महिला-विरोधी मानसिकता वाले कर रहे विरोध’ आईएएनएस से बातचीत में अनुराग ठाकुर ने कहा कि जो दल महिला आरक्षण का विरोध कर रहे हैं, उनकी विचारधारा महिलाओं के खिलाफ है। उन्होंने दावा किया कि महिलाओं को 33% आरक्षण देने का रास्ता साफ किया जा चुका है और अब इसे लागू करने की दिशा में काम हो रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि 1971 के आधार पर सीटों का निर्धारण पहले ही हो चुका है और दक्षिण भारतीय राज्यों को पर्याप्त प्रतिनिधित्व मिला हुआ है। विपक्षी नेताओं पर सीधा निशाना भाजपा सांसद ने कई बड़े नेताओं पर सीधे आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि सोनिया गांधी ममता बनर्जी डीएमके और अन्य विपक्षी दल महिला आरक्षण का विरोध कर रहे हैं, क्योंकि उनकी सोच महिलाओं के हित में नहीं है। साथ ही उन्होंने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि अपने शासनकाल में वह इस बिल को पारित नहीं करा पाई। संसद सत्र में होगी अहम चर्चा संसद के विस्तारित सत्र में नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023 में संशोधन और परिसीमन विधेयक पर चर्चा होने की संभावना है। इसका उद्देश्य संसद और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण सुनिश्चित करना है। बंगाल चुनाव पर भी दिया बड़ा बयान अनुराग ठाकुर ने पश्चिम बंगाल की राजनीति पर भी टिप्पणी करते हुए कहा कि तृणमूल कांग्रेस की हार तय है 4 मई को सत्ता परिवर्तन होगा ममता बनर्जी अपनी उपलब्धियां गिनाने में असफल रही हैं उन्होंने ममता सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए कहा कि भाजपा के सत्ता में आने के बाद राज्य को “भ्रष्टाचार, कमीशन और अवैध घुसपैठ” से मुक्त किया जाएगा। सियासी टकराव तेज महिला आरक्षण और परिसीमन जैसे मुद्दों पर सरकार और विपक्ष के बीच टकराव लगातार बढ़ता जा रहा है। संसद के आगामी सत्र में इस मुद्दे पर तीखी बहस और राजनीतिक बयानबाजी देखने को मिल सकती है।  

surbhi अप्रैल 16, 2026 0
Mamata Banerjee addressing a rally amid discussions on Muslim voter dynamics in West Bengal elections
बंगाल चुनाव 2026: क्या ममता बनर्जी से दूर हो रहा मुस्लिम वोट बैंक? 160 सीटों का बड़ा समीकरण

  कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में ‘मुस्लिम वोट बैंक’ को सत्ता की चाबी माना जा रहा है, लेकिन इस बार यह समीकरण तृणमूल कांग्रेस (TMC) के लिए चुनौती बनता दिख रहा है। राजनीतिक विश्लेषण के मुताबिक, 2011 से लगातार ममता बनर्जी के साथ खड़ा यह वोट बैंक अब बदलते संकेत दे रहा है। सागरदीघी उपचुनाव: पहला बड़ा संकेत मुस्लिम बहुल सागरदीघी सीट पर TMC की हार को एक बड़ा टर्निंग पॉइंट माना जा रहा है। करीब 64% मुस्लिम आबादी वाली इस सीट पर कांग्रेस की जीत ने यह संकेत दिया कि अल्पसंख्यक मतदाता विकल्प तलाश रहे हैं। हालांकि बाद में विजेता विधायक को TMC में शामिल करा लिया गया, लेकिन राजनीतिक संदेश साफ था—वोटर अब एकतरफा नहीं रहे। पड़ोसी राज्यों का असर बंगाल के सीमावर्ती राज्यों के चुनावी रुझान भी असर डाल रहे हैं: बिहार (सीमांचल): किशनगंज, कटिहार, पूर्णिया, अररिया में असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM ने पारंपरिक समीकरण बदले असम (धुबरी मॉडल): AIUDF के बदरुद्दीन अजमल की हार और कांग्रेस की जीत से संकेत मिला कि मुस्लिम वोट ‘विजयी विकल्प’ की ओर शिफ्ट हो सकता है महाराष्ट्र (मालेगांव): यहां भी मुस्लिम वोटों का बंटवारा देखने को मिला इन रुझानों ने बंगाल में TMC की चिंता बढ़ा दी है। 160 सीटों का बड़ा गणित पश्चिम बंगाल की 294 विधानसभा सीटों में से लगभग 160 सीटें ऐसी हैं जहां मुस्लिम मतदाता निर्णायक भूमिका निभाते हैं। कुछ प्रमुख जिलों का समीकरण: मुर्शिदाबाद (66% मुस्लिम आबादी) मालदा (51%) उत्तर दिनाजपुर (करीब 50%) बीरभूम उत्तर 24 परगना 2021 में TMC ने इन इलाकों में शानदार प्रदर्शन किया था, लेकिन 2026 में मुकाबला कड़ा दिख रहा है। कांग्रेस और ओवैसी फैक्टर TMC के सामने सबसे बड़ी चुनौती कांग्रेस और AIMIM का उभार है। मालदा में कांग्रेस की पकड़ मजबूत होती दिख रही है असदुद्दीन ओवैसी की एंट्री से मुस्लिम वोटों में बंटवारे की आशंका हुमायूं कबीर जैसे स्थानीय नेताओं के साथ नए समीकरण बन रहे हैं इससे खासकर मालदा, मुर्शिदाबाद और उत्तर दिनाजपुर की करीब 49 सीटों पर TMC की स्थिति कमजोर हो सकती है। BJP की बढ़ती चुनौती दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी भी तेजी से अपनी पकड़ मजबूत कर रही है। 2014 में 17% वोट से बढ़कर अब 278 सीटों पर सीधी टक्कर महिला सुरक्षा, भ्रष्टाचार और घुसपैठ जैसे मुद्दों पर आक्रामक रणनीति अमित शाह का “महिला सुरक्षा” फोकस यह TMC के लिए दोहरी चुनौती बन गया है—एक तरफ वोट बैंक में संभावित सेंध, दूसरी तरफ भाजपा का विस्तार। क्या है TMC की चिंता? मुस्लिम वोटों का बंटवारा कांग्रेस और AIMIM का उभार पड़ोसी राज्यों के बदले रुझान भाजपा की आक्रामक रणनीति

surbhi अप्रैल 16, 2026 0
Voters standing in long queues at polling booths during assembly elections in Assam, Kerala, and Puducherry.
असम-केरल-पुडुचेरी में जबरदस्त वोटिंग, कई रिकॉर्ड टूटे

असम, केरल और पुडुचेरी में गुरुवार (9 अप्रैल) को हुए मतदान में लोगों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। शाम 6 बजे तक के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक तीनों जगहों पर अच्छी वोटिंग दर्ज की गई। कहां कितना हुआ मतदान? पुडुचेरी: 89.08% (सबसे ज्यादा) असम: 85.04% केरल: 77.38% असम में टूटा पिछला रिकॉर्ड असम की सभी 126 विधानसभा सीटों पर करीब 85.04% मतदान दर्ज किया गया, जो 2021 के 82.04% से ज्यादा है। इस बार राज्य में मुकाबला बेहद दिलचस्प माना जा रहा है: बीजेपी के नेतृत्व वाला NDA तीसरी बार सरकार बनाने की कोशिश में कांग्रेस करीब 10 साल बाद वापसी की उम्मीद में सीटों के हिसाब से अलग-अलग ट्रेंड असम में अलग-अलग क्षेत्रों में मतदान प्रतिशत में काफी अंतर देखने को मिला: सबसे ज्यादा: दलगांव – 94.57% सबसे कम: अमरी – 70.40% इस चरण में कुल 722 उम्मीदवार मैदान में हैं और 35 जिलों के 31,490 मतदान केंद्रों पर वोट डाले गए। केरल और पुडुचेरी में भी लंबी कतारें केरल: सभी 140 सीटों पर शाम 6 बजे तक वोटिंग खत्म हुई, लेकिन कई जगहों पर लोग लाइन में लगे रहे। समय से पहले पहुंचे मतदाताओं को टोकन देकर बाद में भी वोट डालने दिया गया। पुडुचेरी: 30 सीटों पर वोटिंग शाम 6 बजे खत्म हुई, लेकिन यहां भी देर तक लोग लाइन में खड़े रहे और उन्हें मतदान का मौका दिया गया।

surbhi अप्रैल 10, 2026 0
Mamata Banerjee addressing a political rally in Malda, targeting BJP and central government policies
बंगाल से दिल्ली तक BJP को हटाने का संकल्प: ममता बनर्जी का बड़ा राजनीतिक ऐलान

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री Mamata Banerjee ने आगामी विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक माहौल को गर्माते हुए भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ बड़ा ऐलान किया है। मालदा जिले के वैष्णव नगर में आयोजित एक जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि उनका लक्ष्य केवल बंगाल तक सीमित नहीं है, बल्कि वे केंद्र की सत्ता से भी भाजपा को हटाने का संकल्प ले चुकी हैं। ममता बनर्जी ने अपने संबोधन में कहा कि वह पहले पश्चिम बंगाल से भाजपा को बाहर करेंगी और इसके बाद दिल्ली की सत्ता से भी उसे उखाड़ फेंकेंगी। उन्होंने इसे जनता के सामने किया गया वादा बताते हुए कहा कि देश की मौजूदा नीतियां जनता को नुकसान पहुंचा रही हैं और बदलाव की आवश्यकता है। निर्वाचन आयोग और केंद्र पर तीखा हमला सभा के दौरान मुख्यमंत्री ने Election Commission of India पर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि आयोग ने राज्य के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों में बदलाव कर विकास कार्यों को बाधित किया है। उनके अनुसार, यह कदम निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया के बजाय राजनीतिक प्रभाव में लिया गया है। इसके साथ ही उन्होंने केंद्र सरकार और केंद्रीय एजेंसियों के इस्तेमाल को लेकर भी सवाल उठाए और कहा कि राज्य में राजनीतिक दबाव बनाने की कोशिश की जा रही है। मालदा घटना पर सख्त रुख हाल ही में मालदा में न्यायिक अधिकारियों के घेराव की घटना पर ममता बनर्जी ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने इसे राज्य की छवि के लिए नुकसानदायक बताया और कहा कि ऐसी घटनाएं किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं हैं। उन्होंने अपने कार्यकर्ताओं को चुनाव के दौरान संयम बरतने की सलाह दी। विपक्षी दलों पर मिलीभगत का आरोप मुख्यमंत्री ने भाजपा के साथ-साथ कांग्रेस और वामपंथी दलों पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि ये सभी पार्टियां अंदरखाने एक-दूसरे के साथ मिली हुई हैं और राज्य के विकास में बाधा डाल रही हैं। ममता बनर्जी ने जनता से अपील की कि वे इन दलों को चुनाव में जवाब दें। चुनावी माहौल में तेज हुआ सियासी घमासान पश्चिम बंगाल में चुनाव नजदीक आते ही राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। ममता बनर्जी का यह बयान न केवल राज्य की राजनीति बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी बड़ा संकेत माना जा रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि इस बयान का चुनावी समीकरणों पर क्या असर पड़ता है।  

surbhi अप्रैल 3, 2026 0
Indian politicians switching parties highlighting defection trend between Congress and BJP
कांग्रेस-मुक्त से ‘कांग्रेस-युक्त’ बीजेपी? दल-बदल की राजनीति पर उठे बड़े सवाल

नई दिल्ली। भारतीय राजनीति में दल-बदल का मुद्दा एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है। वरिष्ठ पत्रकार राजदीप सरदेसाई के विश्लेषण में यह सवाल उठाया गया है कि क्या “कांग्रेस-मुक्त भारत” का नारा अब धीरे-धीरे “कांग्रेस-युक्त बीजेपी” में बदलता जा रहा है। आंकड़े क्या कहते हैं? पिछले एक दशक में 200 से अधिक सांसद और विधायक भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए हैं, जिनमें लगभग 40 प्रतिशत नेता भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से आए हैं। 2024 के आम चुनावों में भी बीजेपी के 100 से ज्यादा उम्मीदवार ऐसे थे, जो पहले अन्य दलों, खासकर कांग्रेस से जुड़े रहे। असम बना सबसे बड़ा उदाहरण असम की राजनीति इस बदलाव की सबसे स्पष्ट तस्वीर पेश करती है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा खुद कांग्रेस से बीजेपी में आए और आज राज्य में पार्टी के सबसे प्रभावशाली चेहरों में गिने जाते हैं। हाल ही में कांग्रेस सांसद प्रद्युत बोरदोलोई का बीजेपी में शामिल होना भी इसी ट्रेंड का हिस्सा माना जा रहा है। विचारधारा से ज्यादा ‘सत्ता’ का महत्व विश्लेषण में कहा गया है कि अब राजनीति में विचारधारा की जगह सत्ता और अवसरवादिता ने ले ली है। जो नेता कभी बीजेपी की विचारधारा का विरोध करते थे, वही अब उसी का समर्थन करते नजर आते हैं। इससे राजनीतिक सीमाएं पहले की तुलना में कहीं ज्यादा धुंधली हो गई हैं। कांग्रेस की संगठनात्मक कमजोरी कांग्रेस की कमजोर होती संगठनात्मक पकड़ भी इस ट्रेंड की बड़ी वजह मानी जा रही है। कई राज्यों में पार्टी नेतृत्व को बनाए रखने और नए नेताओं को आगे लाने में असफल रही है, जिससे नेताओं के लिए दूसरे विकल्प तलाशना आसान हो गया है। लोकतंत्र पर क्या असर? दल-बदल का यह सिलसिला लोकतंत्र के लिए चुनौती बनता जा रहा है। जब कोई नेता एक पार्टी के टिकट पर जीतकर दूसरी पार्टी में चला जाता है, तो मतदाता का जनादेश कमजोर पड़ता है। हालांकि, कई मामलों में ऐसे नेताओं को दोबारा जीत मिलना यह भी दिखाता है कि मतदाता विकास और सत्ता के करीब रहने को प्राथमिकता दे रहे हैं। समाधान क्या हो सकता है? विशेषज्ञों का मानना है कि दल-बदल रोकने के लिए कड़े नियम जरूरी हैं। जैसे—दल बदलने वाले नेताओं को कुछ समय तक मंत्री बनने से रोकना या एंटी-डिफेक्शन कानून को और सख्त बनाना। लेकिन असली समाधान मजबूत विपक्ष और राजनीतिक सुधारों में ही छिपा है।  

kalpana मार्च 26, 2026 0
DMK alliance leaders finalize Tamil Nadu election seat sharing ahead of April 23 assembly polls
Tamil Nadu Election: डीएमके का सीट बंटवारा लगभग पूरा, आज VCK के साथ होगा फाइनल समझौता

तमिलनाडु विधानसभा चुनाव से पहले सत्तारूढ़ DMK (द्रमुक) ने अपने सहयोगी दलों के साथ सीट बंटवारे को लगभग अंतिम रूप दे दिया है। अब सिर्फ VCK (विदुथलाई चिरुथैगल काची) के साथ समझौता बाकी है, जिसे आज फाइनल किया जा सकता है। राज्य के परिवहन और बिजली मंत्री एस.एस. शिवशंकर ने बताया कि DMK और VCK के बीच बातचीत अंतिम चरण में है। किसे कितनी सीटें मिलीं? DMK के नेतृत्व वाले सेक्युलर प्रोग्रेसिव अलायंस में सीटों का बंटवारा इस तरह हुआ है- कांग्रेस: 28 सीटें भाकपा (CPI): 5 सीटें माकपा (CPM): 5 सीटें एमडीएमके: 4 सीटें IUML, MMK, KMDK: 2-2 सीटें कई दौर की बातचीत के बाद वाम दलों के साथ भी सहमति बन गई है। 23 अप्रैल को होंगे चुनाव तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव 23 अप्रैल को होने हैं। चुनाव की तारीख नजदीक आने के साथ ही सभी दलों ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। DMK ने शुरू किया प्रचार अभियान DMK ने पहले ही अपना चुनाव प्रचार अभियान शुरू कर दिया है। उपमुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन लगातार रैलियां और जनसभाएं कर रहे हैं। मंत्री शिवशंकर के मुताबिक, पार्टी पूरी ताकत के साथ चुनाव मैदान में उतर चुकी है और गठबंधन भी मजबूत स्थिति में है। क्या है राजनीतिक मायने? सीट बंटवारे का लगभग पूरा होना यह संकेत देता है कि DMK गठबंधन चुनाव से पहले एकजुट दिखना चाहता है। VCK के साथ समझौता होते ही गठबंधन पूरी तरह तैयार हो जाएगा।    

surbhi मार्च 24, 2026 0
Rajya Sabha election voting underway in Bihar, Odisha and Haryana amid cross-voting concerns and tight contests.
राज्यसभा चुनाव: 11 सीटों पर आज मतदान, बिहार-ओडिशा-हरियाणा में कड़ा मुकाबला, क्रॉस-वोटिंग पर नजर

  देश के तीन राज्यों-बिहार, ओडिशा और हरियाणा-में आज राज्यसभा की 11 सीटों के लिए मतदान हो रहा है। वोटिंग सुबह 11 बजे से शुरू होगी और मतगणना के बाद नतीजे भी आज ही शाम तक घोषित किए जाने की संभावना है। इस बार कुल 37 सीटों के लिए चुनाव प्रक्रिया चल रही है, जिनमें से 26 उम्मीदवार पहले ही निर्विरोध चुने जा चुके हैं। इन निर्विरोध चुने गए नेताओं में शरद पवार, रामदास अठावले, अभिषेक मनु सिंघवी, थंबी दुरई, विनोद तावड़े और बाबुल सुप्रियो जैसे कई प्रमुख नाम शामिल हैं। हालांकि बिहार, ओडिशा और हरियाणा की 11 सीटों पर मुकाबला बेहद दिलचस्प हो गया है।   बिहार: पांचवीं सीट पर टिकी सबकी नजर बिहार में राज्यसभा की पांच सीटों के लिए मतदान हो रहा है। सत्तारूढ़ गठबंधन के उम्मीदवारों-नीतीश कुमार, रामनाथ ठाकुर, नितिन नवीन और शिवम कुमार-की जीत लगभग तय मानी जा रही है। लेकिन असली मुकाबला पांचवीं सीट पर है, जहां NDA के उम्मीदवार उपेंद्र कुशवाहा और महागठबंधन समर्थित एडी सिंह आमने-सामने हैं। महागठबंधन के पास फिलहाल 35 विधायक हैं, जबकि जीत के लिए 41 वोटों की जरूरत है। माना जा रहा है कि AIMIM के पांच और BSP के एक विधायक का समर्थन मिलने से मुकाबला कड़ा हो सकता है। वहीं NDA को उम्मीद है कि महागठबंधन के कुछ विधायक क्रॉस-वोटिंग कर सकते हैं। कांग्रेस और बीएसपी के कुछ विधायकों पर भी सभी दलों की नजर बनी हुई है।   ओडिशा: भाजपा और बीजद के बीच संतुलन ओडिशा की चार सीटों पर भी दिलचस्प राजनीतिक समीकरण बन गए हैं। अनुमान है कि भारतीय जनता पार्टी और बीजू जनता दल दो-दो सीटें जीत सकती हैं। ओडिशा विधानसभा में भाजपा के पास 79 विधायक हैं और तीन निर्दलीय विधायकों का समर्थन भी उसे प्राप्त है, जिससे दो सीटें लगभग उसके खाते में तय मानी जा रही हैं। हालांकि तीसरे उम्मीदवार की जीत के लिए भाजपा को आठ अतिरिक्त वोटों की जरूरत होगी। वहीं बीजद के पास 48 विधायक हैं, जिससे उसकी एक सीट सुरक्षित मानी जा रही है। अगर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) का समर्थन मिल जाता है तो पार्टी दूसरी सीट भी जीत सकती है। चौथी सीट पर भाजपा समर्थित दिलीप रे और बीजद के उम्मीदवार के बीच सीधी टक्कर मानी जा रही है।   हरियाणा: निर्दलीय प्रत्याशी से बढ़ा रोमांच हरियाणा की दो सीटों पर चुनाव हो रहा है। 90 सदस्यीय विधानसभा में भाजपा के पास 48 विधायक हैं, जबकि Indian National Lok Dal के दो और तीन निर्दलीय विधायकों का समर्थन उसे प्राप्त है। ऐसे में भाजपा उम्मीदवार संजय भाटिया की जीत लगभग तय मानी जा रही है। दूसरी ओर कांग्रेस के 37 विधायक हैं और उसके उम्मीदवार करमवीर बोध भी जीत की स्थिति में नजर आ रहे हैं। हालांकि निर्दलीय उम्मीदवार सतीश नांदल के मैदान में उतरने से मुकाबला दिलचस्प हो गया है। उन्हें जीतने के लिए अतिरिक्त नौ वोटों की जरूरत होगी, जो बिना क्रॉस-वोटिंग के संभव नहीं माने जा रहे। इसी आशंका के चलते कांग्रेस ने अपने कई विधायकों को सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट कर दिया है।   शाम तक साफ होगी तस्वीर तीनों राज्यों में मतदान पूरा होने के बाद आज शाम तक परिणाम सामने आ जाएंगे। कई सीटों पर जीत-हार का फैसला क्रॉस-वोटिंग पर निर्भर माना जा रहा है, इसलिए कुछ जगहों पर चौंकाने वाले नतीजों की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।  

surbhi मार्च 16, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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Indian delegation at international cyber security meeting after India assumed CCDB chairmanship role
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भारत को मिली बड़ी अंतरराष्ट्रीय जिम्मेदारी, संभाला CCDB के अध्यक्ष का पद

surbhi मई 15, 2026 0