Crude Oil

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शेयर बाजार में शानदार वापसी, सेंसेक्स 400 अंक उछला; निफ्टी 24,100 के पार

नई दिल्ली, एजेंसियां। भारतीय शेयर बाजार ने गुरुवार को मजबूत शुरुआत करते हुए निवेशकों को राहत दी। पिछले कारोबारी सत्र में मुनाफावसूली के दबाव के बावजूद बाजार ने शानदार वापसी की और शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 400 अंकों से अधिक उछल गया। वहीं, निफ्टी भी 24,100 के महत्वपूर्ण स्तर को पार करने में सफल रहा। बाजार में यह तेजी मुख्य रूप से कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और वैश्विक बाजारों से मिले सकारात्मक संकेतों के कारण देखने को मिली।   कारोबार की शुरुआत में बीएसई का सेंसेक्स 367.18 अंक की बढ़त के साथ 77,358.40 के स्तर पर खुला, जबकि एनएसई का निफ्टी 104.75 अंक चढ़कर 24,126.40 पर पहुंच गया। शुरुआती कारोबार में आईटी और एविएशन सेक्टर के शेयरों में अच्छी खरीदारी देखने को मिली। एचसीएल टेक और इंडिगो के शेयर करीब दो-दो प्रतिशत की बढ़त के साथ कारोबार करते नजर आए।   कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट बनी सबसे बड़ा सहारा   विशेषज्ञों के अनुसार बाजार की तेजी का सबसे बड़ा कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट है। ब्रेंट क्रूड का भाव घटकर करीब 76 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया है, जो पिछले चार महीनों का निचला स्तर माना जा रहा है। तेल की कीमतों में कमी से भारत जैसे आयातक देशों को राहत मिलती है और इससे कंपनियों की लागत पर भी सकारात्मक असर पड़ता है।   वैश्विक संकेतों से भी मिला समर्थन जापान के निक्केई और टोपिक्स सूचकांकों में 1.3 प्रतिशत तक की बढ़त दर्ज की गई, जबकि अमेरिकी एसएंडपी 500 फ्यूचर्स भी मजबूती के साथ कारोबार कर रहे थे। हालांकि हांगकांग के हैंग सेंग, शंघाई कंपोजिट और ऑस्ट्रेलियाई बाजारों में कुछ दबाव देखने को मिला।   आगे भी बनी रह सकती है तेजी बाजार जानकारों का मानना है कि यदि वैश्विक स्तर पर कोई बड़ा नकारात्मक घटनाक्रम नहीं होता है और कच्चे तेल की कीमतें नियंत्रित रहती हैं, तो घरेलू शेयर बाजार में सकारात्मक माहौल बना रह सकता है। निवेशकों का सुधरता भरोसा आने वाले कारोबारी सत्रों में बाजार को और मजबूती दे सकता है।

abhishek singh जून 25, 2026 0
Share Market
शेयर मार्केट में चौथे दिन भी तेजी बरकरार, सेंसेक्स-निफ्टी ने बढ़ाया निवेशकों का उत्साह

मुंबई,एजेंसियां। भारतीय शेयर बाजार में बुधवार को लगातार चौथे कारोबारी सत्र में तेजी देखने को मिली। बाजार में खरीदारी का माहौल बने रहने से निवेशकों की संपत्ति में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई। कारोबार के अंत में बीएसई सेंसेक्स 347 अंकों की बढ़त के साथ 77,155.62 पर बंद हुआ, जबकि एनएसई निफ्टी 96 अंकों की मजबूती के साथ 24,085.70 के स्तर पर बंद हुआ।   बैंकिंग और आईटी शेयरों में दिखी मजबूती   बाजार की तेजी में बैंकिंग, आईटी और ऑटो सेक्टर के शेयरों का अहम योगदान रहा। निवेशकों ने चुनिंदा ब्लू-चिप कंपनियों के शेयरों में जमकर खरीदारी की, जिससे प्रमुख सूचकांकों को मजबूती मिली।   कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से मिला समर्थन   विशेषज्ञों के अनुसार वैश्विक बाजारों से मिले सकारात्मक संकेत और कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट ने निवेशकों का भरोसा बढ़ाया है। तेल की कीमतों में नरमी भारत जैसी आयात-निर्भर अर्थव्यवस्था के लिए राहत की खबर मानी जा रही है।   निवेशकों में बढ़ा उत्साह   लगातार चार दिनों से जारी तेजी के कारण निवेशकों का बाजार के प्रति विश्वास मजबूत हुआ है। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी अच्छी खरीदारी देखने को मिली, जिससे बाजार का व्यापक दायरा मजबूत रहा है।   आगे कैसी रह सकती है बाजार की चाल   बाजार जानकारों का मानना है कि यदि वैश्विक परिस्थितियां अनुकूल बनी रहती हैं और विदेशी निवेशकों का समर्थन मिलता है, तो आने वाले कारोबारी सत्रों में भी बाजार में सकारात्मक रुख बना रह सकता है। हालांकि निवेशकों को उतार-चढ़ाव को देखते हुए सावधानी के साथ निवेश करने की सलाह दी गई है।

abhishek singh जून 17, 2026 0
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हरे निशान पर बंद हुआ शेयर बाजार , सेंसेक्स 1,695 अंक उछला; निफ्टी 23,600 के पार

मुंबई, एजेंसियां। कारोबारी सप्ताह के अंतिम दिन शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार में जबरदस्त तेजी देखने को मिली। सकारात्मक वैश्विक संकेतों और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के बीच निवेशकों ने जमकर खरीदारी की। इसका असर प्रमुख सूचकांकों पर साफ दिखा। बीएसई सेंसेक्स 1,695.40 अंकों की छलांग लगाकर 75,527.95 पर बंद हुआ, जबकि एनएसई निफ्टी 461.31 अंक चढ़कर 23,622.90 के स्तर पर पहुंच गया।   चार प्रमुख कारणों से बाजार में आई तेजी विशेषज्ञों के अनुसार बाजार की इस मजबूत बढ़त के पीछे चार अहम वजहें रहीं। पहली, अमेरिका और ईरान के बीच संभावित शांति समझौते की उम्मीद से वैश्विक निवेशकों का भरोसा बढ़ा। दूसरी, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट ने भारत जैसे आयातक देशों के लिए राहत का माहौल बनाया। तीसरी, एशियाई और यूरोपीय बाजारों में मजबूत रैली का सकारात्मक असर भारतीय बाजार पर भी पड़ा। चौथी, अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये की मजबूती ने निवेशकों का विश्वास बढ़ाया।   रियल्टी, ऑटो और बैंकिंग शेयरों में जोरदार खरीदारी शुक्रवार के कारोबार में लगभग सभी सेक्टर हरे निशान में बंद हुए। रियल्टी सेक्टर ने सबसे बेहतर प्रदर्शन किया, जबकि ऑटो, मीडिया, बैंकिंग और फाइनेंशियल सर्विसेज शेयरों में भी अच्छी खरीदारी देखने को मिली। श्रीराम फाइनेंस के शेयर करीब 8 प्रतिशत तक उछले, वहीं लार्सन एंड टुब्रो (एलएंडटी) में लगभग 5 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई। एफएमसीजी, फार्मा और हेल्थकेयर शेयरों में भी मजबूती रही, जबकि आईटी सेक्टर में अपेक्षाकृत सीमित बढ़त देखने को मिली।   रुपया मजबूत, वैश्विक बाजारों में भी तेजी डॉलर के मुकाबले रुपया 72 पैसे मजबूत होकर 95.13 के स्तर पर पहुंच गया। एशिया और यूरोप के प्रमुख शेयर बाजारों में भी मजबूती का रुख देखने को मिला। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव कम होता है और आर्थिक संकेतक सकारात्मक बने रहते हैं, तो आने वाले कारोबारी सत्रों में भी भारतीय शेयर बाजार में तेजी का माहौल बरकरार रह सकता है।

abhishek singh जून 12, 2026 0
Petrol Pump Rule
अब पेट्रोल पंप से नहीं खरीद सकेंगे ज्यादा तेल! सरकार ने लागू किए नए नियम

नई दिल्ली, एजेंसियां। केंद्र सरकार ने पेट्रोल और डीजल की खरीद को लेकर नई गाइडलाइन जारी करते हुए बड़े औद्योगिक, व्यावसायिक और संस्थागत उपभोक्ताओं के लिए महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। नए आदेश के तहत ऐसे उपभोक्ता अब सामान्य पेट्रोल पंपों (रिटेल आउटलेट्स) से ईंधन नहीं खरीद सकेंगे। उन्हें अपनी आवश्यकता के अनुसार पेट्रोल और डीजल केवल अधिकृत बल्क सेल प्वाइंट्स (थोक बिक्री केंद्रों) से ही खरीदना होगा। यह व्यवस्था शुरुआती तौर पर 90 दिनों के लिए लागू की गई है।   मध्य-पूर्व संकट के बीच लिया गया फैसला सरकार का यह निर्णय ऐसे समय आया है जब मध्य-पूर्व में जारी तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज़ बढ़ोतरी हुई है। आम उपभोक्ताओं पर महंगाई का बोझ कम रखने के लिए सरकारी तेल कंपनियों ने खुदरा कीमतों में सीमित बढ़ोतरी की, जबकि थोक ग्राहकों के लिए ईंधन महंगा कर दिया गया। इसी वजह से कई बड़े उद्योग और संस्थान सस्ता ईंधन पाने के लिए पेट्रोल पंपों से बड़ी मात्रा में डीजल खरीदने लगे, जिससे कई क्षेत्रों में आम लोगों के लिए आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका पैदा हो गई।   200 लीटर से अधिक डीजल नहीं मिलेगा नई गाइडलाइन के अनुसार, किसी भी संदिग्ध ग्राहक या वाहन को एक पेट्रोल पंप से एक दिन में अधिकतम 200 लीटर डीजल ही दिया जाएगा। इससे अधिक मात्रा में ईंधन खरीदने की अनुमति नहीं होगी। इसके अलावा डीजल की बिक्री केवल वाहन के मुख्य ईंधन टैंक या पेट्रोलियम एवं विस्फोटक सुरक्षा संगठन (PESO) से प्रमाणित कंटेनरों में ही की जाएगी।   नियम तोड़ने पर होगी सख्त कार्रवाई सरकार ने स्पष्ट किया है कि पेट्रोल पंप से खरीदे गए डीजल को दोबारा मुनाफे के लिए बेचना पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। नियमों का उल्लंघन करने वाले व्यक्तियों, संस्थानों या पेट्रोल पंप संचालकों के खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के तहत कानूनी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही राज्य सरकारों को जमाखोरी और कालाबाजारी पर सख्त निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं।   जांच और जब्ती का अधिकार भी बढ़ाया गया नए निर्देशों के तहत अधिकृत अधिकारी, डीएसपी स्तर या उससे ऊपर के पुलिस अधिकारी तथा तेल कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारी पेट्रोल पंपों की जांच कर सकेंगे। यदि कहीं अनियमितता या नियमों का उल्लंघन पाया जाता है, तो वे ईंधन और संबंधित सामग्री जब्त करने की कार्रवाई भी कर सकेंगे। सरकार का कहना है कि इन कदमों का उद्देश्य आम उपभोक्ताओं के लिए ईंधन की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित करना और कालाबाजारी पर रोक लगाना है।

abhishek singh जून 12, 2026 0
External Affairs Minister S. Jaishankar defends India’s Russian oil imports at international policy forum.
रूसी तेल पर सवाल उठाने वाले यूरोप को जयशंकर का जवाब, बोले- भारत ने हमेशा राष्ट्रीय हित में लिए फैसले

  विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने रूस से तेल खरीदने को लेकर भारत की नीति का मजबूती से बचाव करते हुए कहा कि देश ने हमेशा कीमत, उपलब्धता और राष्ट्रीय हित को प्राथमिकता दी है। फिनलैंड में आयोजित ‘कुलतरांता टॉक्स’ कार्यक्रम के दौरान उन्होंने यूरोपीय देशों के रवैये पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि वैश्विक मुद्दों पर नैतिकता की बात करने वाले देशों को अपने आचरण पर भी नजर डालनी चाहिए। ‘उभरती शक्तियां और नई भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा’ विषय पर आयोजित चर्चा में जयशंकर से रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान भारत द्वारा रूसी तेल खरीद बढ़ाने को लेकर सवाल पूछा गया। इसके जवाब में उन्होंने कहा कि उस समय वैश्विक बाजार की परिस्थितियों ने भारत को व्यावहारिक निर्णय लेने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि भारत तेल की खरीद उसकी कीमत और उपलब्धता के आधार पर करता है। रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद जब वैश्विक ऊर्जा बाजार में बदलाव आया, तब रूस का तेल अधिक उपलब्ध था, जबकि यूरोपीय देश मध्य पूर्व से बड़ी मात्रा में तेल खरीद रहे थे, जो पारंपरिक रूप से भारत का प्रमुख स्रोत रहा है। यूरोप के रवैये पर उठाए सवाल ऊर्जा नीति पर भारत का पक्ष रखने के बाद जयशंकर ने यूरोप के दृष्टिकोण पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि भारत ने कभी ऐसा कोई कदम नहीं उठाया जिससे किसी यूरोपीय देश की सुरक्षा प्रभावित हुई हो, लेकिन भारत के खिलाफ इस्तेमाल होने वाले कई हथियार यूरोप से आए हैं। जब उनसे इस टिप्पणी पर और स्पष्टता मांगी गई, तो उन्होंने कहा कि वर्षों से ऐसे हथियारों की आपूर्ति होती रही है जिनका इस्तेमाल भारत के खिलाफ किया गया। उन्होंने कहा कि इस विषय पर भी गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए। ‘राष्ट्रीय हित सर्वोपरि’ विदेश मंत्री ने कहा कि भारत की प्राथमिकता अपने नागरिकों की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना और आर्थिक स्थिरता बनाए रखना है। उनके अनुसार, वैश्विक संकट के दौर में हर देश अपने हितों को ध्यान में रखकर फैसले लेता है और भारत ने भी वही किया। जयशंकर ने यह भी कहा कि रूस-यूक्रेन संघर्ष और उससे जुड़े ऊर्जा संबंधी फैसलों को केवल नैतिक दृष्टिकोण से नहीं देखा जाना चाहिए। उनका कहना था कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति में अधिकांश देश अपने रणनीतिक और आर्थिक हितों के आधार पर निर्णय लेते हैं। वैश्विक ऊर्जा बाजार में संतुलन का मुद्दा विदेश मंत्री ने यह भी उल्लेख किया कि रूस पर प्रतिबंधों के बाद वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता की आशंका थी। ऐसे समय में भारत ने अपनी ऊर्जा जरूरतों और बाजार की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए फैसले लिए, जिससे घरेलू आपूर्ति और आर्थिक गतिविधियों पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े। जयशंकर का यह बयान ऐसे समय आया है जब रूस से तेल आयात को लेकर भारत और पश्चिमी देशों के बीच समय-समय पर चर्चा होती रही है। भारत लगातार यह कहता रहा है कि उसकी विदेश और ऊर्जा नीति राष्ट्रीय हितों तथा व्यावहारिक आवश्यकताओं पर आधारित है।  

Deepshikha जून 12, 2026 0
Share Market
शेयर बाजार गुलजार, सेंसेक्स-निफ्टी में जोरदार तेजी

मुंबई, एजेंसियां। भारतीय शेयर बाजार ने शुक्रवार को शानदार शुरुआत करते हुए निवेशकों को राहत दी। वैश्विक स्तर पर सकारात्मक माहौल, अमेरिका और ईरान के बीच संभावित शांति समझौते की उम्मीद तथा कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के कारण बाजार में चौतरफा खरीदारी देखने को मिली। कारोबार के शुरुआती घंटों में बीएसई सेंसेक्स 850 अंकों से अधिक उछलकर करीब 74,700 के स्तर पर पहुंच गया, जबकि एनएसई निफ्टी भी लगभग 23,400 के स्तर के करीब कारोबार करता दिखाई दिया। दोनों प्रमुख सूचकांकों में एक प्रतिशत से अधिक की तेजी ने निवेशकों के मजबूत भरोसे का संकेत दिया।   किन सेक्टर्स ने सबसे ज्यादा दम दिखाया? बाजार की इस रैली में लगभग सभी प्रमुख सेक्टरों ने सकारात्मक प्रदर्शन किया। रियल्टी सेक्टर सबसे बड़ा गेनर रहा, जबकि ऑटो, मीडिया और फाइनेंशियल सर्विसेज शेयरों में भी अच्छी खरीदारी दर्ज की गई। बैंकिंग शेयरों ने बाजार को मजबूत सहारा दिया, वहीं एफएमसीजी, फार्मा और हेल्थकेयर जैसे डिफेंसिव सेक्टरों में भी लगातार बढ़त बनी रही। हालांकि, आईटी सेक्टर का प्रदर्शन अपेक्षाकृत कमजोर रहा और इसमें केवल मामूली तेजी देखने को मिली।   दुनियाभर के बाजारों का क्या है हाल ? वैश्विक बाजारों से मिले मजबूत संकेतों ने भी भारतीय बाजार की तेजी को बल दिया। एशियाई बाजारों में जापान का टोपिक्स इंडेक्स और ऑस्ट्रेलिया का एसएंडपी/एएसएक्स 200 उल्लेखनीय बढ़त के साथ कारोबार करते रहे। वहीं, हैंग सेंग फ्यूचर्स, एसएंडपी 500 फ्यूचर्स और यूरो स्टॉक्स 50 फ्यूचर्स भी हरे निशान में रहे। विशेषज्ञों का मानना है कि भू-राजनीतिक तनाव कम होने और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता बढ़ी है। यदि वैश्विक परिस्थितियां अनुकूल बनी रहती हैं और विदेशी निवेशकों की खरीदारी जारी रहती है, तो आने वाले कारोबारी सत्रों में भी भारतीय शेयर बाजार में सकारात्मक रुख देखने को मिल सकता है।

abhishek singh जून 12, 2026 0
Sensex Nifty Update
शेयर बाजार में भारी गिरावट, सेंसेक्स 400 अंक गिरा, निफ्टी 23150 से नीचे

मुंबई, एजेंसियां। घरेलू शेयर बाजार में गुरुवार को कारोबार की शुरुआत भारी गिरावट के साथ हुई। अमेरिका-ईरान तनाव बढ़ने और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के कारण निवेशकों में चिंता बढ़ गई। बीएसई सेंसेक्स अपने पिछले बंद स्तर 73,983.18 अंक के मुकाबले गिरकर 73,615.99 अंक पर खुला। वहीं, निफ्टी 50 भी 23,214.95 अंक से फिसलकर 23,104.40 अंक पर खुला और बाद में 23,100 के स्तर से नीचे पहुंच गया।   मिडिल ईस्ट संकट बना बड़ी वजह विश्लेषकों के अनुसार, मिडिल ईस्ट में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता बढ़ा दी है। निवेशकों को आशंका है कि यदि हालात और बिगड़ते हैं तो कच्चे तेल की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। इसी डर के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में तेजी देखी गई, जिसका असर भारतीय शेयर बाजार पर भी पड़ा।   तेल की बढ़ती कीमतों से बढ़ी चिंता भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। ऐसे में कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी से आयात बिल बढ़ सकता है और महंगाई पर दबाव बन सकता है। यही वजह है कि निवेशकों ने जोखिम वाले निवेश से दूरी बनाते हुए बिकवाली को प्राथमिकता दी।   इन सेक्टरों में सबसे ज्यादा कमजोरी बैंकिंग, ऑटो, आईटी और मेटल सेक्टर के शेयरों में सबसे अधिक दबाव देखने को मिला। निफ्टी आईटी इंडेक्स भी गिरावट के साथ कारोबार करता नजर आया। दूसरी ओर, ऑयल एंड गैस सेक्टर की कुछ कंपनियों में खरीदारी देखी गई, क्योंकि तेल कीमतों में वृद्धि से इन कंपनियों को फायदा मिलने की संभावना है।   निवेशकों के लिए क्या है सलाह? विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा उतार-चढ़ाव के बीच घबराकर निवेश संबंधी फैसले लेने से बचना चाहिए। लंबी अवधि के निवेशकों को मजबूत कंपनियों पर भरोसा बनाए रखना चाहिए। बाजार की आगे की दिशा मिडिल ईस्ट के घटनाक्रम और कच्चे तेल की कीमतों पर निर्भर करेगी। यदि तनाव कम होता है तो बाजार में रिकवरी देखने को मिल सकती है।

abhishek singh जून 11, 2026 0
Fuel station worker refilling petrol as fuel prices rise again across major Indian cities.
फिर बढ़े पेट्रोल-डीजल के दाम, 5 दिनों में दूसरी बढ़ोतरी; जानें आपके शहर में नई कीमतें

देशभर में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में एक बार फिर बढ़ोतरी की गई है। पिछले पांच दिनों में यह दूसरी बार है जब तेल कंपनियों ने ईंधन के दाम बढ़ाए हैं। ताजा बढ़ोतरी के बाद आम लोगों की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ना तय माना जा रहा है। जानकारी के अनुसार, पेट्रोल की कीमत में 87 पैसे प्रति लीटर और डीजल में 91 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई है। नई दरें लागू होने के बाद राजधानी दिल्ली में पेट्रोल 98.64 रुपये प्रति लीटर और डीजल 91.58 रुपये प्रति लीटर पहुंच गया है। महानगरों में पेट्रोल-डीजल के नए दाम मुंबई देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में पेट्रोल 91 पैसे महंगा होकर 107.59 रुपये प्रति लीटर हो गया है, जबकि डीजल 94 पैसे बढ़कर 94.08 रुपये प्रति लीटर पहुंच गया। कोलकाता कोलकाता में पेट्रोल की कीमत में सबसे अधिक 96 पैसे की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। यहां पेट्रोल अब 109.70 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है। वहीं डीजल 94 पैसे महंगा होकर 96.07 रुपये प्रति लीटर हो गया है। चेन्नई चेन्नई में पेट्रोल 82 पैसे बढ़कर 104.49 रुपये प्रति लीटर हो गया, जबकि डीजल की कीमत 86 पैसे बढ़ने के बाद 96.11 रुपये प्रति लीटर पहुंच गई है। 15 मई को भी बढ़े थे दाम इससे पहले 15 मई को भी तेल कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 3 रुपये प्रति लीटर की बड़ी बढ़ोतरी की थी। उस समय दिल्ली में पेट्रोल 94.77 रुपये से बढ़कर 97.77 रुपये और डीजल 87.67 रुपये से बढ़कर 90.67 रुपये प्रति लीटर हो गया था। उसी दिन अन्य महानगरों में भी ईंधन की कीमतों में तेज उछाल देखा गया था। कोलकाता में पेट्रोल 108.74 रुपये, मुंबई में 106.68 रुपये और चेन्नई में 103.67 रुपये प्रति लीटर पहुंच गया था। वहीं डीजल की कीमत कोलकाता में 95.13 रुपये, मुंबई में 93.14 रुपये और चेन्नई में 95.25 रुपये प्रति लीटर हो गई थी। आम लोगों पर बढ़ेगा असर लगातार बढ़ती ईंधन कीमतों का सीधा असर आम जनता की दैनिक जिंदगी पर पड़ सकता है। पेट्रोल-डीजल महंगा होने से परिवहन लागत बढ़ने की आशंका है, जिसका असर खाद्य पदार्थों और रोजमर्रा की जरूरतों की कीमतों पर भी देखने को मिल सकता है।  

surbhi मई 19, 2026 0
Traders monitor Brent crude oil surge amid rising US-Iran tensions and global supply concerns.
111 डॉलर के पार पहुंचा कच्चा तेल, अमेरिका-ईरान तनाव से बाजार में बढ़ी बेचैनी

Brent Crude और West Texas Intermediate की कीमतों में सोमवार, 18 मई को जोरदार उछाल देखने को मिला। इंटरनेशनल मार्केट में ब्रेंट क्रूड 111 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गया, जबकि WTI क्रूड भी 103 डॉलर प्रति बैरल के करीब कारोबार करता नजर आया। पिछले एक सप्ताह में कच्चे तेल की कीमतों में करीब 7% और एक महीने में 23% से ज्यादा की तेजी दर्ज की गई है। इस तेजी ने वैश्विक बाजारों में नई चिंता पैदा कर दी है। आखिर क्यों बढ़ रही है तेल की कीमत? तेल बाजार में यह उछाल मुख्य रूप से United States और Iran के बीच बढ़ते तनाव की वजह से आया है। Donald Trump ने ईरान को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि समझौते के लिए अब ज्यादा समय नहीं बचा है। उनके इस बयान के बाद बाजार में बेचैनी बढ़ गई और निवेशकों ने तेल की सप्लाई को लेकर चिंता जतानी शुरू कर दी। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर बढ़ी चिंता विशेषज्ञों का मानना है कि बाजार की सबसे बड़ी चिंता Strait of Hormuz को लेकर है। यह दुनिया के सबसे अहम तेल सप्लाई रूट्स में से एक माना जाता है। अगर इस समुद्री मार्ग में किसी तरह की रुकावट आती है, तो दुनिया भर में तेल की सप्लाई प्रभावित हो सकती है, जिसका सीधा असर कीमतों पर पड़ता है। UAE की घटना ने बढ़ाया तनाव वीकेंड में United Arab Emirates के बराकाह न्यूक्लियर प्लांट के बाहरी हिस्से में ड्रोन हमले के बाद आग लगने की खबर ने बाजार को और चिंतित कर दिया। हालांकि स्थानीय प्रशासन ने साफ किया कि किसी के घायल होने या रेडिएशन लीक जैसी कोई घटना नहीं हुई, लेकिन इस घटना ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी और तेल बाजार में तेजी को और हवा मिली। सोने की कीमतों पर दबाव जहां कच्चा तेल तेजी से ऊपर गया, वहीं COMEX Gold की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। सोना करीब 0.62% टूटकर 4,533 डॉलर प्रति औंस के आसपास पहुंच गया। विशेषज्ञों के मुताबिक इसकी मुख्य वजह अमेरिकी डॉलर की मजबूती रही। डॉलर मजबूत होने पर अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना खरीदना महंगा पड़ता है, जिससे इसकी मांग कमजोर हो जाती है। आगे क्या? अब बाजार की नजर अमेरिका-ईरान बातचीत और व्हाइट हाउस की अगली रणनीति पर टिकी हुई है। अगर दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ता है, तो आने वाले दिनों में कच्चे तेल की कीमतों में और उछाल देखने को मिल सकता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि तेल की बढ़ती कीमतों का असर वैश्विक महंगाई, ट्रांसपोर्ट लागत और आम उपभोक्ताओं की जेब पर भी पड़ सकता है

surbhi मई 18, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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abhishek singh जुलाई 2, 2026 0