Datia By-Election

BJP leader Narottam Mishra addressing supporters after the Datia by-election ticket announcement, urging them to maintain peace amid protests.
दतिया उपचुनाव विवाद: नरोत्तम मिश्रा ने समर्थकों से की अपील, बोले- पेट्रोल लेकर सड़क पर मत उतरिए

भोपाल/दतिया: मध्य प्रदेश के दतिया विधानसभा उपचुनाव में टिकट नहीं मिलने के बाद भाजपा नेता नरोत्तम मिश्रा ने अपने समर्थकों से शांति बनाए रखने की अपील की है। उन्होंने कहा कि पार्टी का निर्णय सर्वोपरि है और विरोध लोकतांत्रिक एवं संगठनात्मक मर्यादा के भीतर होना चाहिए। "पेट्रोल या मिट्टी का तेल लेकर सड़क पर मत उतरिए" नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि उन्हें सोशल मीडिया पर ऐसे वीडियो दिखाए गए हैं, जिनमें कुछ लोग पेट्रोल या मिट्टी का तेल लेकर प्रदर्शन करते नजर आ रहे हैं। उन्होंने कार्यकर्ताओं से अपील करते हुए कहा कि वे किसी भी तरह की उग्र या हिंसक गतिविधि से दूर रहें। उन्होंने कहा कि टिकट देना या न देना पार्टी का निर्णय है और वह उसका सम्मान करते हैं। यदि किसी को अपनी बात रखनी है तो उसके लिए पार्टी के भीतर तय प्रक्रिया मौजूद है। 11-12 घंटे तक जाम रहा नेशनल हाईवे-44 दतिया के जिला कलेक्टर स्वप्निल वानखेड़े के अनुसार, प्रदर्शनकारियों ने करीब 11 से 12 घंटे तक नेशनल हाईवे-44 जाम रखा। प्रशासन ने कई बार प्रदर्शनकारियों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन भीड़ नहीं मानी और पुलिस पर पथराव शुरू कर दिया। पथराव में पुलिस अधिकारी घायल प्रशासन के मुताबिक, पथराव में दतिया के पुलिस अधीक्षक (SP) सहित कई वरिष्ठ अधिकारी और पुलिसकर्मी घायल हुए। स्थिति नियंत्रण से बाहर होती देख पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े। जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया कि इस दौरान लाठीचार्ज नहीं किया गया। प्रदर्शन के दौरान पुलिस वाहनों समेत अन्य गाड़ियों को भी नुकसान पहुंचा। 3,000 से अधिक लोग प्रदर्शन में शामिल दतिया के पुलिस अधीक्षक मयूर खंडेलवाल ने बताया कि प्रदर्शन में 3,000 से अधिक लोग शामिल थे। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारियों ने बाजार बंद कराने की कोशिश की और कानून-व्यवस्था प्रभावित करने का प्रयास किया। एसपी के अनुसार, पुलिस ने आदर्श आचार संहिता का हवाला देकर लोगों को समझाने की कोशिश की, लेकिन पथराव शुरू होने के बाद आंसू गैस का इस्तेमाल करना पड़ा। हिंसा करने वालों पर होगी कार्रवाई पुलिस ने बताया कि हिंसा और तोड़फोड़ में शामिल कुछ लोगों को हिरासत में लिया गया है। प्रशासन का कहना है कि घटना की पहचान के लिए वीडियो और अन्य साक्ष्यों की जांच की जा रही है तथा कानून हाथ में लेने वालों के खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। क्यों हुआ विवाद? भारतीय जनता पार्टी ने दतिया विधानसभा उपचुनाव के लिए आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बनाया है। इसके बाद नरोत्तम मिश्रा के समर्थकों ने टिकट वितरण का विरोध करते हुए प्रदर्शन शुरू कर दिया, जो बाद में हिंसक हो गया। हालांकि, नरोत्तम मिश्रा ने सार्वजनिक रूप से पार्टी के फैसले का सम्मान करने और कार्यकर्ताओं से संयम बनाए रखने की अपील की है।  

Deepshikha जुलाई 11, 2026 0
BJP workers protest in Datia after the party replaced former minister Dr. Narottam Mishra with Ashutosh Tiwari as its by-election candidate, leading to a highway blockade.
दतिया उपचुनाव में बीजेपी का बड़ा फैसला: नरोत्तम मिश्रा का टिकट कटा, समर्थकों का हंगामा, पुलिस पर पथराव

Datia By-Election 2026: मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के उम्मीदवार की घोषणा के बाद राजनीतिक माहौल गरमा गया है। पार्टी ने पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा की जगह आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बनाया है। इस फैसले से नाराज मिश्रा समर्थकों ने देर रात सड़क पर उतरकर विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान नेशनल हाईवे-44 जाम कर दिया गया और पुलिस पर पथराव की घटना भी सामने आई। टिकट कटने के बाद समर्थकों का प्रदर्शन बीजेपी की उम्मीदवार सूची जारी होने के बाद नरोत्तम मिश्रा के हजारों समर्थक दतिया में सड़कों पर उतर आए। विरोध प्रदर्शन के दौरान समर्थकों ने नेशनल हाईवे-44 पर जाम लगा दिया, जिससे लंबी दूरी तक वाहनों की कतारें लग गईं और यातायात प्रभावित हुआ। स्थिति तनावपूर्ण होने पर पुलिस मौके पर पहुंची। इस दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प हुई तथा पुलिस पर पथराव भी किया गया। हालात को नियंत्रित करने के लिए इलाके में भारी पुलिस बल तैनात किया गया। नरोत्तम मिश्रा को टिकट मिलने की थी उम्मीद पार्टी सूत्रों के अनुसार, डॉ. नरोत्तम मिश्रा को पूरा भरोसा था कि उन्हें उपचुनाव का टिकट मिलेगा। बताया जा रहा है कि उन्होंने नामांकन पत्र भी खरीद लिया था। ऐसे में अंतिम समय में टिकट कटना उनके समर्थकों के लिए बड़ा झटका साबित हुआ। आशुतोष तिवारी बने बीजेपी उम्मीदवार बीजेपी ने दतिया उपचुनाव के लिए आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बनाया है। सेवढ़ा निवासी तिवारी लंबे समय से प्रदेश संगठन में सक्रिय रहे हैं। उम्मीदवार घोषित होने के बाद उन्होंने पार्टी नेतृत्व का आभार जताया और कहा कि डॉ. नरोत्तम मिश्रा उनके लिए वरिष्ठ नेता और अभिभावक समान हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि मिश्रा ने उन्हें समर्थन देने और चुनाव प्रचार में सहयोग करने का भरोसा दिया है। दतिया सीट पर उपचुनाव क्यों हो रहा है? दतिया विधानसभा सीट पर उपचुनाव इसलिए कराया जा रहा है क्योंकि वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के राजेंद्र भारती ने डॉ. नरोत्तम मिश्रा को हराया था। हालांकि, अप्रैल 2026 में दिल्ली की एक अदालत ने धोखाधड़ी के एक मामले में राजेंद्र भारती को तीन वर्ष की सजा सुनाई, जिसके बाद उनकी विधानसभा सदस्यता समाप्त हो गई। इसी कारण यह सीट रिक्त हुई और निर्वाचन आयोग ने उपचुनाव की घोषणा की। बाद में भारती को जमानत मिल गई, लेकिन उनकी सदस्यता बहाल नहीं हुई। 30 जुलाई को होगा मतदान दतिया विधानसभा सीट पर 30 जुलाई को मतदान होना है। बीजेपी उम्मीदवार की घोषणा के बाद शुरू हुए विरोध ने चुनावी मुकाबले को और अधिक राजनीतिक रूप से दिलचस्प बना दिया है। अब सभी की नजर इस बात पर रहेगी कि पार्टी अपने नाराज कार्यकर्ताओं और समर्थकों को किस तरह मनाती है तथा इसका चुनावी परिणाम पर कितना असर पड़ता है।  

Deepshikha जुलाई 11, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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इंग्लैंड से सीरीज हार के बाद टीम इंडिया का होगा प्रदर्शन रिव्यू, BCCI करेगा खिलाड़ियों और कोचिंग स्टाफ का मूल्यांकन

anjali kumari जुलाई 11, 2026 0