नई दिल्ली: Enforcement Directorate (ED) ने सोमवार को आम आदमी पार्टी (AAP) के नेता Deepak Singla को कथित बैंक धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार कर लिया। सिंगला पर ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स से जुड़े करीब 150 करोड़ रुपये के ऋण घोटाले में शामिल होने का आरोप है। ईडी की यह कार्रवाई दिल्ली और गोवा में कई स्थानों पर की गई छापेमारी के बाद हुई। जांच एजेंसी के मुताबिक, सिंगला और कुछ हवाला ऑपरेटरों के ठिकानों से महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद किए गए हैं। क्या हैं आरोप? ईडी के अनुसार, दीपक सिंगला और उनके परिवार पर 150 करोड़ रुपये से अधिक के बैंक ऋण में कथित धोखाधड़ी का आरोप है। एजेंसी का दावा है कि इस धनराशि को सिंगापुर स्थित कथित फर्जी कंपनियों में ट्रांसफर किया गया और बाद में हवाला नेटवर्क के जरिए भारत वापस लाया गया। जांच एजेंसी का कहना है कि सिंगला कथित रूप से दिल्ली से गोवा तक अवैध बैंकिंग चैनलों के माध्यम से धन के संचालन में शामिल थे। पहले भी हो चुकी है कार्रवाई ईडी की ओर से पिछले दो वर्षों में दीपक सिंगला के खिलाफ यह दूसरी बड़ी कार्रवाई है। इससे पहले वर्ष 2024 में भी उनके ठिकानों पर छापेमारी की गई थी। सिंगला दिल्ली की विश्वास नगर विधानसभा सीट से AAP के टिकट पर चुनाव लड़ चुके हैं। केजरीवाल ने बताया राजनीतिक बदले की कार्रवाई Arvind Kejriwal ने ईडी की कार्रवाई की आलोचना करते हुए इसे राजनीतिक साजिश बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल विपक्षी नेताओं को निशाना बनाने के लिए कर रही है। केजरीवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि दीपक सिंगला को किसी अपराध के कारण नहीं, बल्कि भाजपा के खिलाफ सक्रिय राजनीति करने और भाजपा में शामिल होने से इनकार करने की वजह से गिरफ्तार किया गया है। आतिशी ने लगाए गंभीर आरोप गोवा में पार्टी प्रभारी और दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री Atishi ने भी केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी नेताओं पर झूठे मामले दर्ज कराकर चुनाव से पहले राजनीतिक दबाव बनाया जा रहा है। आतिशी ने कहा कि AAP नेताओं और कार्यकर्ताओं के यहां छापेमारी कर चुनावी डेटा हासिल करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने यह भी दावा किया कि इसी तरह की कार्रवाई पहले पश्चिम बंगाल में All India Trinamool Congress के नेताओं के खिलाफ भी की गई थी। AAP ने कार्रवाई को बताया “राजनीतिक हथियार” आम आदमी पार्टी ने बयान जारी कर कहा कि पश्चिम बंगाल और पंजाब में हुई केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाई की तरह ही दीपक सिंगला का मामला भी राजनीतिक प्रेरित है। पार्टी का आरोप है कि भाजपा में शामिल होने से इनकार करने वाले विपक्षी नेताओं के खिलाफ जांच एजेंसियों का इस्तेमाल किया जा रहा है। फिलहाल मामले की जांच जारी है और ईडी कथित मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क और हवाला लेनदेन की आगे जांच कर रही है।
Punjab Politics: पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने आम आदमी पार्टी (AAP) के विधायकों के साथ दिल्ली का रुख किया है, जहां वह राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात करेंगे। इस मुलाकात का मुख्य उद्देश्य हाल ही में AAP के सात राज्यसभा सांसदों के भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने के मुद्दे को उठाना है, जिसे पार्टी ‘ग़ैरक़ानूनी दलबदल’ करार दे रही है। यह मामला अब राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है और इसके संवैधानिक पहलुओं पर भी सवाल उठने लगे हैं। क्या है पूरा विवाद? 24 अप्रैल 2026 को राघव चड्ढा समेत आम आदमी पार्टी के 7 राज्यसभा सांसदों ने पार्टी से इस्तीफा देकर भाजपा जॉइन कर ली थी। इस फैसले को राज्यसभा सभापति की मंजूरी भी मिल गई, जिससे यह मामला और संवेदनशील हो गया। हालांकि आम आदमी पार्टी का कहना है कि यह दलबदल कानून का स्पष्ट उल्लंघन है और इन सांसदों की सदस्यता रद्द होनी चाहिए। पार्टी का आरोप है कि लोकतांत्रिक मूल्यों और जनादेश के साथ समझौता किया गया है। राष्ट्रपति से क्या करेंगे मांग? भगवंत मान इस पूरे घटनाक्रम को राष्ट्रपति के सामने विस्तार से रखेंगे और उनसे संवैधानिक हस्तक्षेप की मांग करेंगे। उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा, “मुझे विश्वास है कि राष्ट्रपति हमारी बात जरूर सुनेंगी। वह संविधान की संरक्षक हैं और देश की सर्वोच्च संवैधानिक प्राधिकरण हैं। हमें न्याय की उम्मीद है।” बीजेपी का जवाब और सियासी तंज इस मुद्दे पर सुनील जाखड़ ने पलटवार करते हुए कहा कि उन्हें इस मुलाकात की ज्यादा जानकारी नहीं है, लेकिन भगवंत मान को अपने विधायकों पर नजर रखनी चाहिए। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि कहीं ऐसा न हो कि AAP के विधायक भी भाजपा के कार्यक्रमों में पहुंच जाएं। इस बयान के बाद दोनों पार्टियों के बीच सियासी जुबानी जंग और तेज हो गई है। संवैधानिक और राजनीतिक महत्व यह मामला सिर्फ एक राजनीतिक दल बदल तक सीमित नहीं है, बल्कि दलबदल कानून, संसद की कार्यप्रणाली और लोकतांत्रिक मूल्यों से भी जुड़ा हुआ है। अगर इस पर कोई बड़ा फैसला आता है, तो इसका असर भविष्य की राजनीति पर भी पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह केस आने वाले समय में एक मिसाल बन सकता है कि राज्यसभा जैसे सदन में दलबदल के मामलों को कैसे देखा और सुलझाया जाता है। आगे की राजनीति पर नजर अब सभी की निगाहें द्रौपदी मुर्मु से होने वाली इस मुलाकात पर टिकी हैं। यह देखना अहम होगा कि इस मुद्दे पर क्या संवैधानिक कदम उठाए जाते हैं और क्या इससे AAP को कोई राहत मिलती है। कुल मिलाकर, यह घटनाक्रम पंजाब से निकलकर राष्ट्रीय राजनीति का बड़ा मुद्दा बन चुका है, जो आने वाले दिनों में और भी गर्मा सकता है।
राज्यसभा सांसदों के BJP में शामिल होने पर दिल्ली CM ने साधा निशाना आम आदमी पार्टी (AAP) को शुक्रवार को बड़ा राजनीतिक झटका लगा, जब उसके कई राज्यसभा सांसदों ने पार्टी छोड़कर भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दामन थाम लिया। इस घटनाक्रम के बाद दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने AAP संयोजक अरविंद केजरीवाल पर तीखा हमला बोला। "आपकी तानाशाही पर सीधा प्रहार" रेखा गुप्ता ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए कहा कि AAP, जिसने कभी क्रांति का नारा दिया था, अब अविश्वास और अलगाव के कारण बिखर रही है। उन्होंने लिखा, "आपकी पार्टी में अब आम आदमी नहीं, सिर्फ भ्रष्ट लोग बचे हैं। राज्यसभा के दो-तिहाई सांसदों का जाना आपकी तानाशाही पर सीधा प्रहार है। दिल्ली के बाद अब पंजाब की बारी है।" राघव चड्ढा समेत कई नेताओं ने थामा BJP का हाथ AAP के लिए यह झटका इसलिए भी बड़ा माना जा रहा है क्योंकि राघव चड्ढा, संदीप पाठक और अशोक मित्तल जैसे बड़े नेताओं ने भाजपा जॉइन कर ली। इन नेताओं ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पार्टी से अलग होने का ऐलान किया। बाद में भाजपा मुख्यालय में पार्टी अध्यक्ष नितिन नवीन ने उनका स्वागत किया। AAP में मचा सियासी भूचाल इन नेताओं के जाने से AAP के भीतर हलचल तेज हो गई है। पार्टी के लिए यह सिर्फ संख्या का नुकसान नहीं, बल्कि संगठनात्मक और राजनीतिक दोनों स्तरों पर बड़ा झटका माना जा रहा है। विशेषकर राघव चड्ढा और संदीप पाठक जैसे नेताओं की विदाई ने पार्टी नेतृत्व की चिंता बढ़ा दी है। BJP ने बताया स्वाभाविक फैसला दिल्ली भाजपा अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने इस घटनाक्रम को स्वाभाविक करार दिया। उन्होंने कहा कि AAP में लंबे समय से असंतोष पनप रहा था, जिसका नतीजा अब सामने आया है। पंजाब की राजनीति पर भी पड़ेगा असर विश्लेषकों का मानना है कि इस टूट का असर पंजाब की राजनीति पर भी देखने को मिल सकता है, जहां AAP की सरकार है। विपक्ष इसे बड़ा मुद्दा बनाने की तैयारी में है।
नई दिल्ली में AAP के भीतर भारी उथल-पुथल आम आदमी पार्टी (AAP) एक बड़े राजनीतिक संकट से गुजर रही है। पार्टी प्रमुख Arvind Kejriwal की अपने सांसदों से बातचीत कर उन्हें मनाने की कोशिश पूरी तरह विफल हो गई। सूत्रों के मुताबिक, तय बैठक से पहले ही कई सांसदों ने पार्टी छोड़ने का फैसला कर लिया था। मीटिंग से पहले ही बन चुका था इस्तीफे का मन सूत्रों के अनुसार, केजरीवाल ने शुक्रवार शाम अपने निवास पर कुछ असंतुष्ट सांसदों के साथ बैठक बुलाने की योजना बनाई थी, ताकि स्थिति को संभाला जा सके। लेकिन इससे पहले ही सांसदों ने सामूहिक रूप से AAP छोड़ने का निर्णय ले लिया। हालांकि उन्होंने एक साथ औपचारिक योजना नहीं बनाई थी, लेकिन व्यक्तिगत स्तर पर सभी ने पार्टी से अलग होने का मन पहले ही बना लिया था। 7 सांसदों का BJP में शामिल होने का दावा इसी बीच बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया, जब AAP के सात सांसदों ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल होने का ऐलान किया। इनमें प्रमुख नाम Raghav Chadha और अन्य वरिष्ठ नेता शामिल बताए जा रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक, इन सांसदों ने दावा किया कि AAP अब अपने मूल सिद्धांतों से भटक चुकी है। केजरीवाल का प्रस्ताव भी नहीं रोक सका टूट बताया जा रहा है कि केजरीवाल ने नाराज सांसदों को मनाने के लिए उन्हें भविष्य में टिकट देने और पार्टी में बेहतर अवसर देने का प्रस्ताव भी दिया था। लेकिन यह प्रयास भी नाकाम रहा। सूत्रों का कहना है कि कई सांसद पहले से ही पार्टी छोड़ने का मन बना चुके थे, इसलिए बातचीत का मौका ही नहीं बन सका। AAP में अंदरूनी खींचतान और नेतृत्व पर सवाल पार्टी में यह संकट तब और बढ़ गया जब राज्यसभा में नेतृत्व परिवर्तन को लेकर विवाद सामने आया। इसके बाद असंतोष और बढ़ता गया, जिससे कई सांसदों ने दूरी बना ली। BJP ने किया स्वागत, AAP ने लगाया ‘ऑपरेशन लोटस’ का आरोप BJP की ओर से इन सांसदों का स्वागत किया गया और पार्टी अध्यक्ष ने उन्हें पारंपरिक तरीके से शामिल किया। वहीं AAP ने BJP पर “ऑपरेशन लोटस” चलाकर सांसदों को तोड़ने का आरोप लगाया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि यह पूरी तरह राजनीतिक साजिश है। AAP के लिए बड़ा राजनीतिक झटका लगभग 14 साल पहले भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन से जन्मी AAP के लिए यह घटनाक्रम अब तक का सबसे बड़ा संकट माना जा रहा है। कई वरिष्ठ नेताओं के एक साथ पार्टी छोड़ने से संगठन की स्थिति कमजोर मानी जा रही है।
New Delhi में राजनीतिक बयानबाजी को लेकर सियासत तेज हो गई है। Tej Pratap Yadav द्वारा Rahul Gandhi पर दिए गए बयान के बाद कांग्रेस नेता Udit Raj ने कड़ा पलटवार किया है। क्या कहा उदित राज ने? कांग्रेस नेता उदित राज ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि: “यह पार्टी का आंतरिक मामला है, लेकिन तेज प्रताप यादव अपरिपक्व हैं। उनकी बातों को कोई गंभीरता से नहीं लेता।” उन्होंने यह भी कहा कि तेज प्रताप को पहले खुद पर ध्यान देना चाहिए और अनावश्यक बयानबाजी से बचना चाहिए। तेज प्रताप यादव ने क्या कहा था? इससे पहले तेज प्रताप यादव ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए उन्हें: सत्ता का लालची बताया कहा कि कांग्रेस पार्टी को संभालना उनके बस की बात नहीं साथ ही उन्होंने Priyanka Gandhi को कांग्रेस का नेतृत्व संभालने के लिए बेहतर विकल्प बताया। प्रियंका गांधी पर जताया भरोसा तेज प्रताप यादव ने कहा कि: प्रियंका गांधी ही कांग्रेस को बेहतर तरीके से चला सकती हैं उनके नेतृत्व में पार्टी मजबूत हो सकती है इस बयान के बाद सियासी माहौल गरमा गया है। विपक्षी दलों के बीच बयानबाजी तेज हो गई है और यह मुद्दा अब राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है।
दिल्ली के चर्चित शराब नीति मामले में आज बड़ा घटनाक्रम देखने को मिल सकता है। आम आदमी पार्टी (AAP) के प्रमुख अरविंद केजरीवाल दिल्ली हाईकोर्ट में खुद अपना पक्ष रख सकते हैं। यह मामला CBI की उस याचिका से जुड़ा है, जिसमें ट्रायल कोर्ट द्वारा केजरीवाल, मनीष सिसोदिया समेत 23 आरोपियों को दी गई राहत को चुनौती दी गई है। जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा को हटाने की मांग सुनवाई से पहले केजरीवाल और अन्य आरोपियों ने जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा से मामले से अलग होने (रिक्यूज) की मांग की। उनका कहना है कि निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे हैं, इसलिए केस को किसी दूसरी बेंच को ट्रांसफर किया जाए। हालांकि, यह मांग खारिज कर दी गई। कोर्ट ने साफ किया कि किसी जज के खुद को मामले से अलग करने का फैसला वही जज लेते हैं। क्या होता है ‘रिक्यूजल’? रिक्यूजल का मतलब होता है कि अगर किसी जज पर पक्षपात या हितों के टकराव का शक हो, तो वह खुद ही मामले की सुनवाई से अलग हो सकते हैं, ताकि न्याय प्रक्रिया निष्पक्ष बनी रहे। ट्रायल कोर्ट ने दी थी राहत 27 फरवरी को ट्रायल कोर्ट ने केजरीवाल, मनीष सिसोदिया समेत सभी 23 आरोपियों को इस मामले में राहत दी थी। कोर्ट ने CBI की जांच पर भी सवाल उठाए थे और उसकी आलोचना की थी। हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी CBI की याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस शर्मा ने 9 मार्च को कहा था कि पहली नजर में (प्राइमा फेसी) ट्रायल कोर्ट की टिप्पणियां सही नहीं लगतीं और इस पर दोबारा विचार जरूरी है। साथ ही, उन्होंने CBI जांच अधिकारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की सिफारिश पर भी रोक लगा दी थी। सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा मामला केजरीवाल पहले ही हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस से जज बदलने की मांग कर चुके हैं, लेकिन यह मांग खारिज हो चुकी है। इसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (SLP) भी दाखिल की है। जेल में रहे केजरीवाल और सिसोदिया इस मामले में केजरीवाल को 2024 लोकसभा चुनाव के दौरान गिरफ्तार किया गया था और वे 156 दिन तक हिरासत में रहे। बाद में उन्हें सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिली। वहीं, मनीष सिसोदिया इस केस में करीब 530 दिन तक जेल में रहे थे। क्या है पूरा मामला? दिल्ली सरकार ने 2021 में नई आबकारी (शराब) नीति लागू की थी, जिसका उद्देश्य राजस्व बढ़ाना और शराब व्यापार में सुधार करना था। बाद में अनियमितताओं के आरोप लगने पर इस नीति को वापस ले लिया गया। इसके बाद उपराज्यपाल विनय सक्सेना के आदेश पर CBI और ED ने जांच शुरू की। जांच एजेंसियों का आरोप है कि इस नीति के जरिए निजी कंपनियों को फायदा पहुंचाया गया और भ्रष्टाचार हुआ। भावुक हुए थे केजरीवाल 27 फरवरी को ट्रायल कोर्ट से राहत मिलने के बाद केजरीवाल भावुक हो गए थे। उन्होंने कहा था, “मैंने जिंदगी में सिर्फ ईमानदारी कमाई है।” वहीं मनीष सिसोदिया ने इसे “सच की जीत” बताया था।
आम आदमी पार्टी (AAP) के भीतर राजनीतिक खींचतान अब खुलकर सामने आने लगी है। राज्यसभा सांसद Raghav Chadha के हालिया बयान के बाद पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने उन पर तीखा हमला बोला है। पार्टी प्रवक्ता Anurag Dhanda ने साफ शब्दों में कहा कि चड्ढा अब Arvind Kejriwal के ‘सिपाही’ नहीं रहे हैं। ‘निडरता हमारी पहचान, डरने वाले नहीं लड़ सकते’ अनुराग ढांडा ने चड्ढा के रुख पर सवाल उठाते हुए कहा कि AAP के कार्यकर्ता निडर होकर जनता के मुद्दे उठाते हैं। उन्होंने कहा, “जो डर जाए, वो देश के लिए क्या लड़ेगा?” यह बयान पार्टी के भीतर बढ़ते असंतोष को स्पष्ट तौर पर दर्शाता है। संसद में भूमिका पर उठे सवाल ढांडा ने आरोप लगाया कि संसद में सीमित समय मिलने के बावजूद Raghav Chadha ने गंभीर मुद्दों के बजाय गैर-जरूरी विषयों को प्राथमिकता दी। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि देश के अहम मुद्दों की बजाय ‘छोटे मुद्दों’ पर समय खर्च किया गया। कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी पर चुप्पी का आरोप AAP नेता ने यह भी दावा किया कि गुजरात में पार्टी के सैकड़ों कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी हुई, लेकिन इस मुद्दे पर चड्ढा ने संसद में आवाज नहीं उठाई। इसके अलावा पश्चिम बंगाल में मतदाता अधिकार से जुड़े मुद्दे पर भी उनकी निष्क्रियता पर सवाल खड़े किए गए। वॉकआउट के दौरान भी नहीं दिखी एकजुटता ढांडा ने आरोप लगाया कि जब पार्टी ने संसद से वॉकआउट किया, तब भी चड्ढा सदन में मौजूद रहे। इसे उन्होंने पार्टी लाइन से अलग रुख बताया और कहा कि पिछले कुछ समय से चड्ढा का व्यवहार बदलता नजर आ रहा है। सौरभ भारद्वाज ने भी साधा निशाना AAP के एक अन्य नेता Saurabh Bhardwaj ने भी चड्ढा की आलोचना करते हुए कहा कि वे संसद में ‘सॉफ्ट पीआर’ कर रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या चड्ढा ने पार्टी कार्यकर्ताओं और लोकतंत्र से जुड़े मुद्दों पर मजबूती से आवाज उठाई। बढ़ सकता है राजनीतिक विवाद इस पूरे घटनाक्रम से साफ है कि AAP के भीतर मतभेद गहराते जा रहे हैं। आने वाले दिनों में यह विवाद और बढ़ सकता है, जिसका असर पार्टी की रणनीति और छवि दोनों पर पड़ सकता है।
आम आदमी पार्टी में हालिया राजनीतिक घटनाक्रम के बीच राज्यसभा सांसद Raghav Chadha ने अपनी चुप्पी तोड़ते हुए पार्टी नेतृत्व को लेकर तीखा संदेश दिया है। उपनेता पद से हटाए जाने के बाद पहली बार सार्वजनिक रूप से प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी खामोशी को कमजोरी या हार के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। Aam Aadmi Party के वरिष्ठ नेता राघव चड्ढा ने एक वीडियो संदेश जारी कर कहा कि उन्हें जानबूझकर खामोश करने की कोशिश की गई है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि पार्टी के भीतर उठाए गए मुद्दों और जनता से जुड़े सवालों के कारण उन्हें इस कार्रवाई का सामना करना पड़ा। “जनता की आवाज उठाना क्या अपराध है?” अपने बयान में चड्ढा ने सीधे सवाल उठाया कि क्या जनता के मुद्दों को उठाना गलत है। उन्होंने कहा कि वह लगातार आम लोगों से जुड़े विषयों को संसद और सार्वजनिक मंचों पर रखते रहे हैं, लेकिन इसके चलते उन्हें राजनीतिक नुकसान झेलना पड़ा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वह अपने सिद्धांतों से पीछे हटने वाले नहीं हैं और भविष्य में भी जनता की आवाज बुलंद करते रहेंगे। राजनीतिक संकेत और संभावित असर राघव चड्ढा का यह बयान पार्टी के अंदरूनी हालात की ओर इशारा करता है। उनके शब्दों से यह साफ झलकता है कि AAP के भीतर मतभेद उभरकर सामने आ रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह घटनाक्रम आने वाले समय में पार्टी के संगठनात्मक ढांचे और रणनीति पर असर डाल सकता है। आगे क्या? हालांकि, पार्टी की ओर से इस बयान पर आधिकारिक प्रतिक्रिया अभी सामने नहीं आई है, लेकिन चड्ढा का यह खुला संदेश सियासी हलकों में चर्चा का विषय बन गया है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि AAP नेतृत्व इस मुद्दे को कैसे संभालता है और इसका व्यापक राजनीतिक प्रभाव क्या पड़ता है।
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री Mamata Banerjee ने आगामी विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक माहौल को गर्माते हुए भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ बड़ा ऐलान किया है। मालदा जिले के वैष्णव नगर में आयोजित एक जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि उनका लक्ष्य केवल बंगाल तक सीमित नहीं है, बल्कि वे केंद्र की सत्ता से भी भाजपा को हटाने का संकल्प ले चुकी हैं। ममता बनर्जी ने अपने संबोधन में कहा कि वह पहले पश्चिम बंगाल से भाजपा को बाहर करेंगी और इसके बाद दिल्ली की सत्ता से भी उसे उखाड़ फेंकेंगी। उन्होंने इसे जनता के सामने किया गया वादा बताते हुए कहा कि देश की मौजूदा नीतियां जनता को नुकसान पहुंचा रही हैं और बदलाव की आवश्यकता है। निर्वाचन आयोग और केंद्र पर तीखा हमला सभा के दौरान मुख्यमंत्री ने Election Commission of India पर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि आयोग ने राज्य के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों में बदलाव कर विकास कार्यों को बाधित किया है। उनके अनुसार, यह कदम निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया के बजाय राजनीतिक प्रभाव में लिया गया है। इसके साथ ही उन्होंने केंद्र सरकार और केंद्रीय एजेंसियों के इस्तेमाल को लेकर भी सवाल उठाए और कहा कि राज्य में राजनीतिक दबाव बनाने की कोशिश की जा रही है। मालदा घटना पर सख्त रुख हाल ही में मालदा में न्यायिक अधिकारियों के घेराव की घटना पर ममता बनर्जी ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने इसे राज्य की छवि के लिए नुकसानदायक बताया और कहा कि ऐसी घटनाएं किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं हैं। उन्होंने अपने कार्यकर्ताओं को चुनाव के दौरान संयम बरतने की सलाह दी। विपक्षी दलों पर मिलीभगत का आरोप मुख्यमंत्री ने भाजपा के साथ-साथ कांग्रेस और वामपंथी दलों पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि ये सभी पार्टियां अंदरखाने एक-दूसरे के साथ मिली हुई हैं और राज्य के विकास में बाधा डाल रही हैं। ममता बनर्जी ने जनता से अपील की कि वे इन दलों को चुनाव में जवाब दें। चुनावी माहौल में तेज हुआ सियासी घमासान पश्चिम बंगाल में चुनाव नजदीक आते ही राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। ममता बनर्जी का यह बयान न केवल राज्य की राजनीति बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी बड़ा संकेत माना जा रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि इस बयान का चुनावी समीकरणों पर क्या असर पड़ता है।
नई दिल्ली: आम आदमी पार्टी (AAP) ने राज्यसभा में बड़ा संगठनात्मक बदलाव करते हुए सांसद राघव चड्ढा को उपनेता पद से हटा दिया है। उनकी जगह अब पार्टी ने अशोक मित्तल को नया उपनेता नियुक्त किया है। राज्यसभा सचिवालय को दी सूचना AAP ने इस फैसले की जानकारी राज्यसभा सचिवालय को भी दे दी है। पार्टी ने साफ कहा है कि: राघव चड्ढा को अब पार्टी की ओर से बोलने का मौका न दिया जाए सदन में उनकी भूमिका और बोलने का समय सीमित किया जाए क्यों लिया गया यह फैसला? हालांकि पार्टी ने आधिकारिक तौर पर कारण स्पष्ट नहीं किया है, लेकिन सूत्रों के मुताबिक: राघव चड्ढा पार्टी लाइन से हटकर मुद्दे उठा रहे थे कई बार बिना पूर्व सूचना के सदन में बोलते थे पार्टी ने पहले उन्हें चेतावनी भी दी थी जनहित के मुद्दों पर रहे सक्रिय हाल के समय में राघव चड्ढा संसद में कई मुद्दे उठा रहे थे, जैसे: एयरपोर्ट पर महंगी चाय (₹10 मुद्दा) डिलीवरी बॉयज से जुड़े मुद्दे आम जनता से जुड़े अन्य सवाल अशोक मित्तल को मिली नई जिम्मेदारी अब राज्यसभा में AAP की ओर से: अशोक मित्तल उपनेता की भूमिका निभाएंगे सदन में पार्टी की रणनीति और लाइन को आगे बढ़ाएंगे
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।