Devotional News

Devotees worship Lord Jagannath at home with lamps, flowers, tulsi leaves, and sacred mantras during Rath Yatra.
Jagannath Ji Ke Mantra: घर पर करें भगवान जगन्नाथ की पूजा, जानें सरल पूजा विधि, गायत्री मंत्र, मूल मंत्र और स्तोत्र

आषाढ़ शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि से भगवान जगन्नाथ की विश्व प्रसिद्ध रथ यात्रा का शुभारंभ होता है। इस दौरान भगवान जगन्नाथ अपने बड़े भाई भगवान बलभद्र और बहन देवी सुभद्रा के साथ भव्य रथ पर विराजमान होकर श्रीमंदिर से गुंडीचा मंदिर की यात्रा करते हैं। धार्मिक मान्यता है कि रथ यात्रा में शामिल होकर भगवान के रथ को खींचने से सौ यज्ञों के समान पुण्य फल प्राप्त होता है। यदि आप किसी कारणवश रथ यात्रा में शामिल नहीं हो पा रहे हैं, तो श्रद्धा और भक्ति के साथ घर पर भगवान जगन्नाथ की पूजा, मंत्र जाप और स्तोत्र का पाठ भी कर सकते हैं। मान्यता है कि सच्चे मन से की गई आराधना भगवान की कृपा प्राप्त करने का माध्यम बनती है। घर पर भगवान जगन्नाथ की पूजा कैसे करें? घर पर भगवान जगन्नाथ की पूजा करने के लिए इन सरल चरणों का पालन करें— सबसे पहले पूजा स्थल की अच्छी तरह सफाई करें और गंगाजल छिड़ककर उसे शुद्ध करें। भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। घी का दीपक और धूप जलाकर पूजा का प्रारंभ करें। भगवान को चंदन, रोली, अक्षत, पुष्प और तुलसी दल अर्पित करें। इसके बाद भगवान जगन्नाथ के मंत्रों और स्तोत्रों का श्रद्धापूर्वक जाप करें। मालपुआ, मौसमी फल तथा सात्विक (बिना प्याज-लहसुन) भोजन का भोग अर्पित करें। अंत में भगवान जगन्नाथ की आरती करें और परिवार के साथ प्रसाद ग्रहण करें। भगवान जगन्नाथ गायत्री मंत्र ॐ जगन्नाथाय विद्महे। महाबलाय धीमहि। तन्नो विष्णुः प्रचोदयात्॥ भगवान जगन्नाथ का मूल मंत्र ॐ श्री जगन्नाथाय नमः॥ श्री जगन्नाथ अष्टकम का महत्व धार्मिक मान्यता के अनुसार श्री जगन्नाथ अष्टकम का श्रद्धापूर्वक पाठ करने से भगवान जगन्नाथ की विशेष कृपा प्राप्त होती है। यह स्तोत्र भगवान के दिव्य स्वरूप, करुणा और भक्तों के प्रति उनके स्नेह का वर्णन करता है। परंपरागत विश्वास है कि नियमित रूप से इसका पाठ करने से मानसिक शांति, आध्यात्मिक उन्नति और सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव होता है। जगन्नाथ स्तोत्र का महत्व जगन्नाथ स्तोत्र में भगवान श्रीकृष्ण के जगन्नाथ स्वरूप की स्तुति की गई है। इसमें भक्त भगवान से जीवन के कष्टों, भय, दुख और बाधाओं को दूर करने की प्रार्थना करता है। धार्मिक परंपरा के अनुसार, श्रद्धा और विश्वास के साथ इसका पाठ करने से मन में भक्ति, आत्मविश्वास और आध्यात्मिक संतुलन बढ़ता है। रथ यात्रा का धार्मिक महत्व मान्यता है कि भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि भक्त और भगवान के मिलन का प्रतीक है। इस दौरान भगवान स्वयं अपने भक्तों के बीच आते हैं और सभी को अपने दर्शन का अवसर प्रदान करते हैं। जो श्रद्धालु रथ यात्रा में शामिल नहीं हो पाते, वे घर पर भगवान का स्मरण, मंत्र जाप, स्तोत्र पाठ और आरती करके भी अपनी भक्ति व्यक्त कर सकते हैं।  

surbhi जुलाई 16, 2026 0
Oil lamp flame during Hindu worship showing symbolic shapes believed to represent traditional spiritual signs and religious meanings.
Deepak Ki Lau Ke Sanket: पूजा के दीपक की लौ में बनने वाली आकृतियां क्या बताती हैं? जानें शुभ और अशुभ संकेतों का धार्मिक महत्व

हिंदू धर्म में पूजा के दौरान दीपक जलाना शुभ और मंगलकारी माना जाता है। मान्यता है कि दीपक की लौ केवल प्रकाश ही नहीं देती, बल्कि सकारात्मक ऊर्जा का भी प्रतीक होती है। कई धार्मिक मान्यताओं और लोकविश्वासों के अनुसार, पूजा के समय दीपक की लौ में बनने वाली कुछ आकृतियां जीवन से जुड़े शुभ-अशुभ संकेत भी दे सकती हैं। ज्योतिष एवं वास्तु से जुड़े पारंपरिक मतों के अनुसार, दीपक की लौ में बनने वाली आकृतियों को दैवीय संकेत माना जाता है। हालांकि, इन मान्यताओं का वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है और इन्हें धार्मिक आस्था एवं परंपरागत विश्वास के रूप में ही देखा जाना चाहिए। आइए जानते हैं कि दीपक की लौ में दिखाई देने वाली अलग-अलग आकृतियों का पारंपरिक अर्थ क्या माना जाता है। दीपक की लौ में दिखने वाले शुभ संकेत त्रिशूल, ॐ या स्वास्तिक जैसी आकृति धार्मिक मान्यता के अनुसार यदि दीपक की लौ में त्रिशूल, ॐ या स्वास्तिक जैसी आकृति दिखाई दे, तो इसे अत्यंत शुभ माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि यह ईश्वर की विशेष कृपा और सकारात्मक ऊर्जा का संकेत हो सकता है। साथ ही जीवन में चल रही बाधाएं धीरे-धीरे दूर होने की संभावना मानी जाती है। फूल जैसी आकृति यदि लौ में कमल या गुलाब जैसे फूल की आकृति प्रतीत हो, तो पारंपरिक मान्यता के अनुसार यह इस बात का संकेत माना जाता है कि आपकी पूजा-आराधना स्वीकार हो रही है। इसे आने वाले शुभ समाचार और मनोकामनाओं की पूर्ति से भी जोड़ा जाता है। हंस या मोर की आकृति हंस और मोर दोनों को भारतीय संस्कृति में शुभता, ज्ञान और समृद्धि का प्रतीक माना गया है। यदि दीपक की लौ में ऐसी आकृति दिखाई दे, तो इसे परिवार में सुख-शांति, प्रेम और मानसिक संतुलन का संकेत माना जाता है। भगवान गणेश जैसी आकृति यदि लौ में भगवान गणेश का स्वरूप प्रतीत हो, तो धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह कार्यों में आ रही बाधाओं के दूर होने और नए शुभ कार्यों के सफल होने का संकेत माना जाता है। दीपक की लौ में दिखाई देने वाले सतर्क करने वाले संकेत दो भागों में बंटी हुई लौ यदि दीपक की लौ बीच से दो हिस्सों में विभाजित दिखाई दे, तो पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार इसे शुभ नहीं माना जाता। इसे परिवार में मतभेद, आर्थिक चुनौतियों या किसी प्रकार की अस्थिरता का संकेत माना जाता है। बिना हवा के काला धुआं निकलना यदि वातावरण शांत होने के बावजूद दीपक से लगातार काला धुआं निकल रहा हो, तो लोकमान्यताओं के अनुसार इसे नकारात्मक ऊर्जा का संकेत माना जाता है। ऐसी स्थिति में घर की साफ-सफाई, सकारात्मक वातावरण और पूजा-पाठ पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी जाती है। लगातार फड़फड़ाती हुई लौ यदि दीपक की लौ बिना स्पष्ट कारण के लगातार तेज़ी से कांपती या फड़फड़ाती रहे, तो इसे आने वाली चुनौतियों, अनावश्यक खर्चों या स्वास्थ्य संबंधी सावधानी बरतने का संकेत माना जाता है। ध्यान रखने योग्य बात धार्मिक मान्यताएं व्यक्ति की आस्था और परंपराओं पर आधारित होती हैं। दीपक की लौ में दिखाई देने वाली आकृतियों को लेकर अलग-अलग क्षेत्रों और परंपराओं में अलग-अलग मान्यताएं प्रचलित हैं। इन्हें भविष्य की निश्चित भविष्यवाणी या वैज्ञानिक तथ्य नहीं माना जाना चाहिए। सकारात्मक सोच, सत्कर्म और नियमित पूजा ही जीवन में मानसिक शांति और आत्मविश्वास का आधार बनते हैं।  

surbhi जुलाई 16, 2026 0
ICC T20 World Cup 2028
ICC ने T20 वर्ल्ड कप के फॉर्मेट में किया बड़ा बदलाव, 'सुपर 10' और एलिमिनेटर राउंड की होगी एंट्री

दुबई, एजेंसियां। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) ने 2028 पुरुष T20 वर्ल्ड कप के फॉर्मेट में बड़े बदलावों को मंजूरी दे दी है। नए प्रारूप के तहत टूर्नामेंट में 20 टीमें हिस्सा लेंगी, लेकिन अब प्रतियोगिता ग्रुप स्टेज, एलिमिनेटर, सुपर 10 और नॉकआउट चरणों में खेली जाएगी। ICC का कहना है कि नए फॉर्मेट का उद्देश्य अधिक प्रतिस्पर्धी मुकाबले और उभरती टीमों को बेहतर अवसर देना है।   एलिमिनेटर राउंड से बढ़ेगा रोमांच   नए फॉर्मेट में ग्रुप चरण के बाद कुछ टीमें सीधे अगले दौर में पहुंचेंगी, जबकि अन्य क्वालीफाई करने वाली टीमें एलिमिनेटर मुकाबले खेलेंगी। इन मुकाबलों के विजेता आगे बढ़ेंगे, जबकि हारने वाली टीमों का सफर यहीं समाप्त हो जाएगा।   'सुपर 10' में होगा खिताब का असली मुकाबला   एलिमिनेटर के बाद 10 टीमें 'सुपर 10' चरण में पहुंचेंगी। यहां सभी टीमों को दो समूहों में बांटा जाएगा और प्रत्येक टीम अपने समूह की अन्य टीमों से मुकाबला करेगी। इसके बाद शीर्ष टीमें सेमीफाइनल में जगह बनाएंगी।   उभरती टीमों को मिलेगा बड़ा मौका   ICC के अनुसार, नए फॉर्मेट से एसोसिएट और उभरती क्रिकेट टीमों को अधिक प्रतिस्पर्धी मैच खेलने का अवसर मिलेगा। साथ ही बड़े देशों के बीच अधिक हाई-वोल्टेज मुकाबले देखने को मिल सकते हैं।   2028 से लागू होगा नया प्रारूप   ICC ने स्पष्ट किया है कि नया फॉर्मेट 2028 पुरुष T20 वर्ल्ड कप से लागू होगा। इस टूर्नामेंट की मेजबानी ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड संयुक्त रूप से करेंगे। नए प्रारूप को लेकर क्रिकेट जगत में उत्सुकता बढ़ गई है।

abhishek singh जुलाई 16, 2026 0
Sourav Ganguli
'दादा' का 54वां जन्मदिन आज: भारतीय क्रिकेट को नई दिशा देने वाले सौरव गांगुली को दुनिया भर से शुभकामनाएं

कोलकाता, एजेंसियां। भारतीय क्रिकेट के सबसे सफल कप्तानों में शामिल सौरव गांगुली आज अपना 54वां जन्मदिन मना रहे हैं। 'दादा' और 'प्रिंस ऑफ कोलकाता' के नाम से मशहूर गांगुली को क्रिकेट जगत, पूर्व खिलाड़ियों और लाखों प्रशंसकों ने सोशल मीडिया पर जन्मदिन की शुभकामनाएं दीं। अपने बेखौफ नेतृत्व और आक्रामक कप्तानी के दम पर उन्होंने भारतीय क्रिकेट को नई पहचान दिलाई और टीम इंडिया को विदेशी सरज़मीं पर जीतना सिखाया।    ऐसा रहा सौरव गांगुली का क्रिकेट करियर   सौरव गांगुली का जन्म 8 जुलाई 1972 को कोलकाता में हुआ था। उन्होंने 1996 में इंग्लैंड के खिलाफ लॉर्ड्स टेस्ट में शतक लगाकर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में यादगार शुरुआत की। गांगुली ने भारत के लिए 113 टेस्ट मैचों में 7,212 रन बनाए, जिसमें 16 शतक शामिल हैं। वहीं 311 वनडे मैचों में उन्होंने 11,363 रन बनाए और 22 शतक जड़े। वह वनडे क्रिकेट में भारत के सबसे सफल बल्लेबाजों में गिने जाते हैं। उन्होंने अपने करियर में कई अहम मौकों पर गेंदबाजी करते हुए वनडे में 100 विकेट भी हासिल किए।    कप्तानी में बदली टीम इंडिया की तस्वीर   वर्ष 2000 से 2005 तक कप्तान रहे गांगुली ने भारतीय टीम को नई आक्रामक पहचान दी। उनकी कप्तानी में भारत ने 2002 आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी जीती और 2003 विश्व कप के फाइनल तक का सफर तय किया। उन्होंने एमएस धोनी, युवराज सिंह, वीरेंद्र सहवाग, हरभजन सिंह, जहीर खान और इरफान पठान जैसे कई खिलाड़ियों को मौका देकर भारतीय क्रिकेट की मजबूत नींव तैयार की।    परिवार और निजी जीवन   सौरव गांगुली की पत्नी डोना गांगुली प्रसिद्ध ओडिसी नृत्यांगना हैं। दोनों ने वर्ष 1997 में विवाह किया था। उनकी एक बेटी सना गांगुली हैं, जिन्होंने विदेश में उच्च शिक्षा प्राप्त की है। क्रिकेट से संन्यास के बाद गांगुली ने भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) के अध्यक्ष के रूप में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और भारतीय क्रिकेट के प्रशासनिक सुधारों में योगदान दिया।    बर्थडे पर मिला खास तोहफा   गांगुली के जन्मदिन के अवसर पर उनकी बहुप्रतीक्षित बायोपिक 'दादा: द सौरव गांगुली स्टोरी' का फर्स्ट लुक भी जारी किया गया। फिल्म में राजकुमार राव सौरव गांगुली की भूमिका निभा रहे हैं और यह फिल्म 14 मई 2027 को सिनेमाघरों में रिलीज होगी।

abhishek singh जुलाई 8, 2026 0
Devotee reciting Hanuman Chalisa before Lord Hanuman idol with a lit diya during prayer.
हनुमान चालीसा का पाठ क्यों माना जाता है संकटमोचन का उपाय? जानिए धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसके प्रमुख लाभ

हिंदू धर्म में हनुमान चालीसा को सबसे लोकप्रिय और पूजनीय स्तोत्रों में से एक माना जाता है। गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित यह चालीसा भगवान हनुमान की महिमा का वर्णन करती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, श्रद्धा और विश्वास के साथ हनुमान चालीसा का नियमित पाठ करने से व्यक्ति को मानसिक शक्ति, सकारात्मक ऊर्जा और कठिन परिस्थितियों का सामना करने का साहस मिलता है। हालांकि, इन लाभों का आधार धार्मिक आस्था और परंपराएं हैं, इनके समर्थन में वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं। 1. मानसिक तनाव और भय कम करने की मान्यता धार्मिक मान्यता है कि नियमित रूप से हनुमान चालीसा का पाठ करने से मन शांत होता है और भय, चिंता तथा नकारात्मक विचारों से राहत मिलती है। कई श्रद्धालु इसे आत्मविश्वास बढ़ाने और मानसिक संतुलन बनाए रखने का माध्यम मानते हैं। 2. सकारात्मक ऊर्जा का संचार मान्यता है कि हनुमान चालीसा की 40 चौपाइयों का श्रद्धापूर्वक पाठ करने से घर और मन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। इससे व्यक्ति का मन आध्यात्मिक रूप से मजबूत होता है और जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित होता है। 3. ग्रह दोषों से राहत की धार्मिक मान्यता ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जिन लोगों की कुंडली में शनि, मंगल या अन्य ग्रहों के प्रतिकूल प्रभाव बताए जाते हैं, उन्हें नियमित रूप से हनुमान चालीसा का पाठ करने की सलाह दी जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इससे ग्रहों के नकारात्मक प्रभाव कम हो सकते हैं। 4. संकट और बाधाओं से रक्षा भगवान हनुमान को 'संकटमोचन' कहा जाता है। ऐसी मान्यता है कि सच्ची श्रद्धा से हनुमान चालीसा का पाठ करने पर जीवन की कठिनाइयों, बाधाओं और भय से मुक्ति मिलने में सहायता मिलती है। यही कारण है कि अनेक श्रद्धालु इसे अपनी दैनिक पूजा का हिस्सा बनाते हैं। हनुमान चालीसा पाठ की पारंपरिक विधि धार्मिक परंपराओं के अनुसार, मंगलवार और शनिवार को हनुमान चालीसा का पाठ विशेष फलदायी माना जाता है। पाठ से पहले स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें, भगवान हनुमान के समक्ष दीपक और धूप जलाएं तथा भगवान श्रीराम का स्मरण करने के बाद श्रद्धापूर्वक चालीसा का पाठ करें। आस्था का विषय हनुमान चालीसा का पाठ करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा हुआ है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह व्यक्ति को आध्यात्मिक शक्ति और मनोबल प्रदान करता है। हालांकि, इसके प्रभाव व्यक्तिगत विश्वास और धार्मिक आस्था पर आधारित माने जाते हैं।  

surbhi जुलाई 8, 2026 0
Devotees offering prayers to Lord Kartikeya during Skanda Shashthi with lamps and flowers.
स्कंद षष्ठी पर ये छोटा सा उपाय बदल सकता है आपकी पूजा का अनुभव, इस शुभ मुहूर्त में करें भगवान कार्तिकेय की आराधना

हिंदू धर्म में स्कंद षष्ठी का विशेष महत्व माना जाता है। यह पर्व भगवान शिव और माता पार्वती के ज्येष्ठ पुत्र भगवान कार्तिकेय को समर्पित होता है, जिन्हें स्कंद, मुरुगन और कुमारस्वामी के नाम से भी जाना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन श्रद्धा और नियमपूर्वक व्रत और पूजा करने से जीवन में सुख, समृद्धि, साहस और सफलता का आशीर्वाद प्राप्त होता है। स्कंद षष्ठी 2026 की तिथि और शुभ मुहूर्त वैदिक पंचांग के अनुसार, स्कंद षष्ठी तिथि 19 जून 2026 को शाम 5:00 बजे से शुरू होकर 20 जून 2026 को दोपहर 3:47 बजे तक रहेगी। इस दिन कई शुभ योग और विशेष मुहूर्त बन रहे हैं, जिनका धार्मिक दृष्टि से खास महत्व माना गया है। ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:03 बजे से 4:43 बजे तक अमृत काल: सुबह 8:36 बजे से 10:06 बजे तक अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:54 बजे से दोपहर 12:50 बजे तक विजय मुहूर्त: दोपहर 2:42 बजे से 3:38 बजे तक इस वर्ष स्कंद षष्ठी पर रवि योग और निशिता मुहूर्त जैसे शुभ संयोग भी बन रहे हैं, जिससे इस पर्व का आध्यात्मिक महत्व और बढ़ गया है। स्कंद षष्ठी पर करें यह आसान उपाय धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, स्कंद षष्ठी के दिन भगवान कार्तिकेय को लाल या पीले रंग के फूल अर्पित करना शुभ माना जाता है। पूजा के दौरान "ॐ स्कन्दाय नमः" मंत्र का 108 बार जाप करने से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और मन को शांति मिलती है। इसके अलावा पूजा स्थल पर घी का दीपक जलाकर कुछ समय भगवान कार्तिकेय का ध्यान करने की भी परंपरा है। मान्यता है कि इससे मानसिक तनाव कम होता है और आत्मविश्वास में वृद्धि होती है। भगवान कार्तिकेय और तारकासुर की कथा का संदेश पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान कार्तिकेय ने अपनी दिव्य शक्ति और पराक्रम से अत्याचारी दैत्य तारकासुर का वध किया था। यह कथा केवल देव और दानव के युद्ध की कहानी नहीं है, बल्कि अच्छाई की बुराई पर विजय का प्रतीक भी मानी जाती है। भगवान कार्तिकेय का जीवन यह संदेश देता है कि साहस, संयम और सही दिशा में किए गए प्रयास किसी भी कठिनाई पर विजय दिला सकते हैं। स्कंद षष्ठी का आध्यात्मिक महत्व स्कंद षष्ठी केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि आत्मबल, सकारात्मक सोच और नई शुरुआत का प्रतीक भी माना जाता है। मान्यता है कि सच्ची श्रद्धा और भक्ति से किए गए छोटे-छोटे उपाय भी जीवन में बड़े सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं।  

surbhi जून 19, 2026 0
Premananda Maharaj
‘हम मिलें न मिलें, प्यार हमेशा रहेगा’- 9 दिन से बंद पदयात्रा के बीच प्रेमानंद महाराज  का भावुक वीडियो वायरल

वृंदावन, एजेंसियां। वृंदावन के प्रसिद्ध संत प्रेमानंद महाराज ने अपने भक्तों और शिष्यों के लिए एक भावुक संदेश जारी किया है। केली कुंज आश्रम ट्रस्ट के यूट्यूब चैनल पर साझा किए गए 1 मिनट 19 सेकेंड के वीडियो में उन्होंने भक्तों से चिंता न करने और भगवान श्रीजी के भजन में मन लगाने की अपील की। उन्होंने कहा, “हम मिलें न मिलें, बोलें न बोलें, हम आप सबको बहुत प्यार करते हैं। चिंता मत करो, खूब नाम जप करो और प्रसन्न रहो।”   ‘हमारा मौन और एकांतवास आपके लिए’ प्रेमानंद महाराज ने अपने संदेश में कहा कि उनका एकांतवास और मौन उनके स्वयं के लिए नहीं, बल्कि भक्तों के कल्याण के लिए है। उन्होंने कहा कि “जो कुछ होना था, वह हो चुका है। अब जो कुछ हो रहा है, वह सब आपके लिए है।” उन्होंने भक्तों से निर्भय होकर भजन करने और गुरुदेव पर भरोसा बनाए रखने की बात कही।   स्वास्थ्य खराब होने से स्थगित हुई पदयात्रा 17 मई से प्रेमानंद महाराज की प्रसिद्ध रात्रि पदयात्रा बंद है। उनके शिष्यों ने बताया था कि स्वास्थ्य खराब होने के कारण महाराज जी पदयात्रा और एकांतिक दर्शन नहीं कर पा रहे हैं। जानकारी के अनुसार उनकी दोनों किडनी खराब हैं और सप्ताह में दो से तीन बार डायलिसिस करानी पड़ती है। हालांकि तीन दिन पहले वह अपने गुरु संत गोविंद शरण महाराज के दर्शन के लिए वराह घाट स्थित आश्रम पहुंचे थे।   हजारों भक्तों में चिंता का माहौल प्रेमानंद महाराज हर रोज तड़के 3 बजे केली कुंज आश्रम से सौभरी वन तक करीब डेढ़ किलोमीटर पैदल पदयात्रा करते थे। उनके दर्शन के लिए रोजाना हजारों श्रद्धालु पहुंचते थे। पदयात्रा बंद होने के बाद भक्तों में चिंता और भावुकता का माहौल बना हुआ है। महाराज के संदेश ने उनके अनुयायियों को भावनात्मक रूप से गहराई से प्रभावित किया है।

Unknown मई 25, 2026 0
Devotees offering milk and donations during Masik Shivratri 2026 worship of Lord Shiva
मासिक शिवरात्रि 2026: इस दिन करें इन चीजों का दान, भगवान शिव बरसाएंगे कृपा

Masik Shivratri हिंदू धर्म में बेहद पवित्र और फलदायी पर्व माना जाता है। हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाई जाने वाली यह शिवरात्रि भगवान Shiva की आराधना के लिए विशेष मानी जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन व्रत, पूजा और दान करने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है। माना जाता है कि मासिक शिवरात्रि भगवान शिव और शक्ति के दिव्य मिलन का प्रतीक है। यही कारण है कि इस दिन श्रद्धा और सच्चे मन से की गई पूजा और दान का विशेष महत्व बताया गया है। मई 2026 में कब है मासिक शिवरात्रि? पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि 15 मई 2026 को सुबह 8 बजकर 31 मिनट से शुरू होगी और 16 मई को सुबह 5 बजकर 11 मिनट तक रहेगी। निशिता काल को ध्यान में रखते हुए मासिक शिवरात्रि का व्रत और पूजा 15 मई, शुक्रवार को किया जाएगा। इस दिन शिव भक्त उपवास रखकर भगवान शिव का अभिषेक और रात्रि पूजा करते हैं। दूध और सफेद वस्तुओं का दान मासिक शिवरात्रि पर दूध, दही, चावल, मिश्री और सफेद वस्त्रों का दान बेहद शुभ माना जाता है। सफेद रंग को शांति, पवित्रता और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इन वस्तुओं का दान करने से मानसिक तनाव कम होता है और भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है। अन्न और भोजन का दान इस दिन गरीब और जरूरतमंद लोगों को भोजन, फल और अन्न दान करना पुण्यदायी माना गया है। मान्यता है कि भूखे लोगों को भोजन कराने से घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। कहा जाता है कि भगवान शिव ऐसे दान से शीघ्र प्रसन्न होते हैं। तिल और घी का दान काले तिल और घी का दान भी मासिक शिवरात्रि पर विशेष महत्व रखता है। शिव मंदिर में घी का दीपक जलाना और तिल का दान करना जीवन की नकारात्मकता और बाधाओं को दूर करने वाला माना जाता है। धार्मिक विश्वास है कि इससे जीवन में शांति और स्थिरता आती है। वस्त्र और जरूरत की चीजों का दान जरूरतमंद लोगों को कपड़े, कंबल और दैनिक उपयोग की वस्तुएं दान करने से पुण्य फल प्राप्त होता है। मान्यता है कि ऐसा करने से जीवन में सकारात्मकता, सुख और संतोष बढ़ता है। धार्मिक दृष्टि से दान को केवल पुण्य का माध्यम नहीं बल्कि मानव सेवा का भी प्रतीक माना गया है। धार्मिक मान्यता मान्यता है कि मासिक शिवरात्रि पर श्रद्धा और सच्चे मन से किया गया दान भगवान शिव को प्रसन्न करता है। इससे व्यक्ति के जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का आगमन होता है। इस दिन शिव पूजा के साथ दान-पुण्य करने को विशेष फलदायी माना गया है।  

surbhi मई 14, 2026 0
evotees performing Gayatri Mahayagya with sacred fire rituals and chanting in Kharasawan temple premises
खरसावां में भव्य गायत्री महायज्ञ का समापन, मंत्रों से गूंजा बड़ाबांबो, नारी शक्ति और संस्कारों का दिया संदेश

झारखंड के खरसावां क्षेत्र में आयोजित दो दिवसीय पांच कुंडीय गायत्री महायज्ञ का समापन श्रद्धा और भक्ति के माहौल में भव्य पूर्णाहुति के साथ हुआ। बड़ाबांबो स्थित हुडीबाबा शिव मंदिर परिसर में हुए इस आयोजन ने पूरे इलाके को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया। गायत्री मंत्रों के सामूहिक उच्चारण और हवन-पूजन से वातावरण भक्तिमय बना रहा। हवन-पूजन और दीप यज्ञ से भक्तिमय माहौल मंगलवार को श्रद्धालुओं ने वेदमाता गायत्री का आह्वान करते हुए पांच कुंडों में विधि-विधान से हवन-पूजन किया। इस दौरान दीप यज्ञ का भी आयोजन हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया। शाम को पूर्णाहुति के साथ महायज्ञ का समापन हुआ। पूरे आयोजन में अनुशासन और श्रद्धा का अद्भुत संगम देखने को मिला। दीक्षा संस्कार और 16 संस्कारों की जानकारी महायज्ञ के दौरान 19 श्रद्धालुओं को गायत्री मंत्र की दीक्षा दी गई। साथ ही भारतीय परंपरा के 16 संस्कारों के महत्व को विस्तार से समझाया गया। कार्यक्रम में: 2 बच्चों का नामकरण संस्कार 1 पुंशवन संस्कार 2 माताओं का गर्भधारण संस्कार भी संपन्न कराए गए। इन संस्कारों के माध्यम से समाज को भारतीय संस्कृति से जोड़ने का संदेश दिया गया। संस्कारों से ही मजबूत बनता है समाज शांतिकुंज हरिद्वार के प्रतिनिधि संतोष संगम ने कहा कि अच्छे संस्कार ही एक सशक्त समाज की नींव होते हैं। उन्होंने चरित्र निर्माण पर जोर देते हुए कहा कि सदविचारों को जीवन में उतारना ही सच्ची साधना है। गायत्री मंत्र के महत्व पर विशेष जोर वक्ताओं ने गायत्री मंत्र के आध्यात्मिक और वैज्ञानिक महत्व को विस्तार से बताया। श्रद्धालुओं से अपील की गई कि वे प्रतिदिन गायत्री महामंत्र का जाप करें और साधना, स्वाध्याय व शिक्षा के माध्यम से आत्मविकास करें। भारतीय संस्कृति के मूल तत्व अपनाने की अपील कार्यक्रम में ‘गौ, गंगा, गीता, गायत्री और गुरु’ को भारतीय संस्कृति के आधार स्तंभ बताते हुए इन्हें जीवन में अपनाने का संदेश दिया गया। वक्ताओं ने कहा कि इन मूल्यों के संरक्षण से समाज को सही दिशा मिलती है। नारी शक्ति के सशक्तिकरण पर जोर इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य नारी शक्ति संवर्धन भी रहा। महिलाओं की भूमिका को रेखांकित करते हुए उन्हें आत्मनिर्भर बनने और समाज में सक्रिय भागीदारी निभाने के लिए प्रेरित किया गया। कहा गया कि सशक्त नारी ही मजबूत समाज की पहचान है। आस्था और भक्ति का अद्भुत संगम पूरे महायज्ञ के दौरान बड़ाबांबो क्षेत्र में आस्था का अद्भुत दृश्य देखने को मिला। सामूहिक गायत्री मंत्र जाप से वातावरण गूंज उठा और श्रद्धालु आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर हो गए। गणमान्य लोगों की रही मौजूदगी इस धार्मिक आयोजन में गायत्री परिवार से जुड़े कई प्रमुख लोग और स्थानीय गणमान्य व्यक्ति शामिल हुए। उनकी उपस्थिति ने कार्यक्रम को और भी गरिमामय बना दिया। धार्मिक आयोजन से मिला सामाजिक संदेश इस महायज्ञ के जरिए सिर्फ पूजा-अर्चना ही नहीं, बल्कि समाज को सकारात्मक दिशा देने का संदेश भी दिया गया। संस्कार, नैतिकता और सदाचार को अपनाकर जीवन को बेहतर बनाने की प्रेरणा दी गई।  

surbhi मार्च 18, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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