Digestive Health

Doctor explaining hernia care tips to a patient during hot summer weather.
गर्मियों में हर्निया के मरीज रहें सतर्क, बढ़ सकती है सूजन और दर्द की समस्या; जानिए बचाव के आसान उपाय

गर्मी का मौसम सिर्फ थकान और डिहाइड्रेशन ही नहीं लाता, बल्कि पहले से हर्निया से जूझ रहे लोगों के लिए अतिरिक्त परेशानी भी पैदा कर सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, गर्म मौसम सीधे तौर पर हर्निया का कारण नहीं बनता, लेकिन शरीर में होने वाले कुछ बदलाव दर्द, सूजन और असहजता को बढ़ा सकते हैं। अपोलो स्पेक्ट्रा हॉस्पिटल, जयपुर के सीनियर कंसल्टेंट (जनरल एंड लैपरोस्कोपिक सर्जरी) डॉ. रत्नेश जेनवा के मुताबिक, गर्मियों में शरीर को सामान्य तापमान बनाए रखने के लिए अधिक मेहनत करनी पड़ती है। इस दौरान ज्यादा पसीना, पानी की कमी, मांसपेशियों की कमजोरी और पेट पर दबाव बढ़ने जैसी समस्याएं हर्निया के लक्षणों को गंभीर बना सकती हैं। क्यों बढ़ सकता है हर्निया का दर्द? 1. डिहाइड्रेशन से कमजोर होती हैं मांसपेशियां अत्यधिक पसीने के कारण शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी हो जाती है। इससे पेट की दीवार की मांसपेशियां कमजोर पड़ सकती हैं और हर्निया वाली जगह पर दर्द और बेचैनी बढ़ सकती है। 2. कब्ज और पेट फूलने से बढ़ता है दबाव गर्मी के मौसम में पाचन संबंधी समस्याएं और कब्ज आम हैं। शौच के दौरान जोर लगाने से पेट के अंदर दबाव बढ़ता है, जिससे हर्निया की समस्या और गंभीर हो सकती है। 3. पसीने से त्वचा में जलन हर्निया वाले हिस्से के आसपास लगातार पसीना आने से खुजली, जलन और सूजन हो सकती है। खासतौर पर इंग्वाइनल हर्निया के मरीजों को यह समस्या ज्यादा परेशान कर सकती है। 4. थकान से कम होता है मांसपेशियों का सहारा अधिक गर्मी के कारण शरीर जल्दी थक जाता है। इससे प्रभावित हिस्से के आसपास की मांसपेशियों का सपोर्ट कम हो सकता है और सामान्य गतिविधियों में भी दर्द महसूस हो सकता है। 5. ज्यादा शारीरिक गतिविधियां भी बढ़ा सकती हैं परेशानी गर्मियों में यात्रा, एक्सरसाइज या भारी सामान उठाने से पेट की मांसपेशियों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है, जिससे हर्निया के लक्षण बढ़ सकते हैं। हर्निया के मरीज गर्मियों में इन बातों का रखें खास ध्यान दिनभर पर्याप्त मात्रा में पानी पीते रहें। कब्ज से बचने के लिए फाइबर युक्त भोजन लें। भारी सामान उठाने से बचें। ढीले और सूती कपड़े पहनें। लंबे समय तक खड़े रहने से बचें। शरीर का वजन नियंत्रित रखें। अत्यधिक गर्मी के समय ठंडी जगह पर रहने की कोशिश करें। एक बार में ज्यादा खाने के बजाय हल्का और कम मात्रा में भोजन करें। दर्द, सूजन या बेचैनी अचानक बढ़ने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। लक्षणों को नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी विशेषज्ञों का कहना है कि अगर हर्निया की जगह पर अचानक तेज दर्द, अत्यधिक सूजन, उल्टी या गंभीर असहजता महसूस हो, तो इसे सामान्य समस्या मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसी स्थिति में तुरंत सर्जन या डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।  

surbhi जून 15, 2026 0
Assortment of fiber-rich foods including fruits, vegetables, legumes, seeds and whole grains
फाइबर से भरपूर 13 सुपरफूड्स: बेहतर पाचन, वजन नियंत्रण और स्वस्थ आंतों के लिए डाइट में करें शामिल

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग प्रोटीन पर तो खूब ध्यान देते हैं, लेकिन फाइबर को अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार अधिकांश लोग रोजाना जितना फाइबर लेना चाहिए, उससे काफी कम मात्रा में इसका सेवन करते हैं। फाइबर न सिर्फ पाचन तंत्र को स्वस्थ रखता है, बल्कि दिल की बीमारी, टाइप-2 डायबिटीज, मोटापा और कोलोरेक्टल कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के खतरे को भी कम करने में मदद करता है। फाइबर आंतों में मौजूद अच्छे बैक्टीरिया को पोषण देता है, जिससे शरीर में सूजन कम होती है और संपूर्ण स्वास्थ्य बेहतर बना रहता है। फाइबर क्यों है जरूरी? पाचन तंत्र को मजबूत बनाता है कब्ज की समस्या कम करता है ब्लड शुगर को नियंत्रित रखने में मदद करता है लंबे समय तक पेट भरा रखता है वजन नियंत्रण में सहायक होता है हृदय स्वास्थ्य को बेहतर बनाता है आंतों के अच्छे बैक्टीरिया को बढ़ावा देता है विशेषज्ञों के मुताबिक एक वयस्क व्यक्ति को प्रतिदिन लगभग 30 ग्राम फाइबर लेना चाहिए। फाइबर से भरपूर 13 बेहतरीन खाद्य पदार्थ 1. हरी मटर (Green Peas) उबली हुई एक कप मटर में लगभग 9 ग्राम फाइबर और 8.5 ग्राम प्रोटीन होता है। यह शाकाहारियों के लिए शानदार विकल्प है। 2. नाशपाती (Pear) एक मध्यम आकार की नाशपाती में 6 ग्राम से अधिक फाइबर होता है। यह पाचन को बेहतर बनाने और कब्ज से राहत देने में मदद कर सकती है। 3. सेब (Apple) सेब को छिलके सहित खाने से अधिक फाइबर मिलता है। इसमें विटामिन C और एंटीऑक्सीडेंट भी भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं। 4. मसूर दाल (Lentils) एक कप पकी हुई मसूर दाल में लगभग 15.5 ग्राम फाइबर और 18 ग्राम प्रोटीन होता है। 5. प्रीबायोटिक फाइबर वाले खाद्य पदार्थ लहसुन, प्याज, लीक, शतावरी (Asparagus), आर्टिचोक और बीन्स जैसे खाद्य पदार्थ आंतों के अच्छे बैक्टीरिया को बढ़ाने में मदद करते हैं। 6. राई ब्रेड (Pumpernickel Rye Bread) इसकी एक स्लाइस में लगभग 6 ग्राम फाइबर होता है, जो पेट को लंबे समय तक भरा रखने में मदद करता है। 7. ब्लैक बीन्स फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट का बेहतरीन स्रोत। यह आंतों के माइक्रोबायोम को मजबूत बनाने में मदद करता है। 8. रास्पबेरी (Raspberries) फाइबर, विटामिन C और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर यह फल पाचन और इम्युनिटी दोनों के लिए लाभकारी है। 9. साबुत अनाज (Whole Grains) क्विनोआ, जौ, बाजरा, बकव्हीट और स्पेल्ट जैसे साबुत अनाज फाइबर का उत्कृष्ट स्रोत हैं। 10. एवोकाडो (Avocado) स्वस्थ वसा और फाइबर से भरपूर एवोकाडो लंबे समय तक पेट भरा रखने और मेटाबॉलिज्म को बेहतर बनाने में मदद करता है। 11. चिया सीड्स (Chia Seeds) 100 ग्राम चिया सीड्स में लगभग 34 ग्राम फाइबर पाया जाता है। यह वजन नियंत्रण और पाचन दोनों के लिए फायदेमंद है। 12. क्रूसिफेरस सब्जियां ब्रोकली, फूलगोभी, पत्ता गोभी, केल और ब्रसेल्स स्प्राउट्स जैसी सब्जियां घुलनशील और अघुलनशील दोनों प्रकार के फाइबर से भरपूर होती हैं। 13. पॉपकॉर्न बिना ज्यादा तेल के बनाया गया पॉपकॉर्न एक हेल्दी होल ग्रेन स्नैक है और फाइबर का अच्छा स्रोत माना जाता है। क्या फाइबर सप्लीमेंट लेना चाहिए? अगर आपकी डाइट में पर्याप्त फल, सब्जियां, साबुत अनाज और दालें शामिल नहीं हैं, तो डॉक्टर या न्यूट्रिशनिस्ट की सलाह पर फाइबर सप्लीमेंट लिया जा सकता है। हालांकि प्राकृतिक स्रोतों से मिलने वाला फाइबर हमेशा बेहतर माना जाता है।  

surbhi जून 5, 2026 0
Chia seeds and sabja seeds in bowls highlighting their health benefits for digestion and weight loss
चिया सीड्स या सब्जा के बीज: एसिडिटी, कब्ज और वजन घटाने के लिए कौन है बेहतर?

आजकल हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाने वाले लोगों के बीच चिया सीड्स और सब्जा के बीज (तुलसी के बीज) काफी लोकप्रिय हो चुके हैं। दोनों ही फाइबर, एंटीऑक्सीडेंट और जरूरी पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं, लेकिन इनके फायदे और उपयोग अलग-अलग हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि एसिडिटी, कब्ज, वजन घटाने या फिटनेस के लिए आखिर कौन-सा विकल्प ज्यादा बेहतर है? चिया और सब्जा में क्या है अंतर? चिया सीड्स चिया सीड्स Salvia Hispanica पौधे से प्राप्त होते हैं और इनमें भरपूर मात्रा में: ओमेगा-3 फैटी एसिड प्रोटीन कैल्शियम मैग्नीशियम फाइबर पाया जाता है। ये शरीर को लंबे समय तक ऊर्जा देने और मांसपेशियों व हड्डियों को मजबूत बनाने में मदद करते हैं। सब्जा सीड्स सब्जा या तुलसी के बीज पारंपरिक भारतीय आहार का हिस्सा रहे हैं। इनमें: भरपूर फाइबर एंटीऑक्सीडेंट कम कैलोरी पाई जाती है। इन्हें विशेष रूप से शरीर को ठंडक पहुंचाने और पाचन तंत्र को बेहतर बनाने के लिए जाना जाता है। एसिडिटी और कब्ज में कौन ज्यादा फायदेमंद? दोनों बीज पानी में भिगोने पर जेल जैसी परत बना लेते हैं, जो पाचन तंत्र को बेहतर बनाने में मदद करती है। सब्जा सीड्स एसिडिटी, पेट की जलन, गैस और कब्ज से राहत दिलाने के लिए अधिक प्रभावी माने जाते हैं। चिया सीड्स गट हेल्थ सुधारने और पाचन प्रक्रिया को बेहतर बनाने में मदद करते हैं। अगर आपकी मुख्य समस्या एसिडिटी या कब्ज है, तो सब्जा के बीज बेहतर विकल्प हो सकते हैं। वजन घटाने में कौन मददगार? दोनों ही बीज फाइबर से भरपूर होते हैं, जिससे पेट लंबे समय तक भरा रहता है और बार-बार भूख नहीं लगती। चिया सीड्स में प्रोटीन और हेल्दी फैट अधिक होते हैं, जो लंबे समय तक ऊर्जा बनाए रखते हैं। सब्जा सीड्स कम कैलोरी वाले होते हैं, इसलिए कैलोरी कंट्रोल करने वालों के लिए उपयोगी हैं। वजन घटाने के लिए दोनों अच्छे हैं, लेकिन कम कैलोरी डाइट में सब्जा और हाई-प्रोटीन डाइट में चिया अधिक फायदेमंद हो सकता है। शरीर को ठंडक पहुंचाने में कौन आगे? गर्मियों में शरीर को ठंडा रखने के लिए सब्जा के बीज लंबे समय से इस्तेमाल किए जाते रहे हैं। शरबत, नींबू पानी और फालूदा में सब्जा का उपयोग आम है। शरीर की गर्मी कम करने और हाइड्रेशन बनाए रखने में सब्जा अधिक प्रभावी माना जाता है। फिटनेस और जिम करने वालों के लिए क्या बेहतर? अगर आपका लक्ष्य फिटनेस, मसल रिकवरी और लंबे समय तक ऊर्जा बनाए रखना है, तो: चिया सीड्स में मौजूद प्रोटीन और ओमेगा-3 फैटी एसिड अधिक लाभदायक हैं। नियमित एक्सरसाइज करने वालों के लिए चिया बेहतर विकल्प माना जाता है। सेवन का सही तरीका सब्जा सीड्स 5 से 10 मिनट पानी में भिगोएं। शरबत, दूध, फालूदा या नींबू पानी में मिलाकर सेवन करें। चिया सीड्स कम से कम 30 मिनट पानी में भिगोएं। स्मूदी, दही, ओट्स, सलाद या हेल्दी ड्रिंक्स में मिलाएं।

surbhi जून 5, 2026 0
yogurt consumption
दही खाने का सही तरीका जानते हैं? एक छोटी गलती बिगाड़ सकती है सेहत

नई दिल्ली, एजेंसियां। गर्मी के मौसम में दही को सबसे पौष्टिक और लाभकारी खाद्य पदार्थों में गिना जाता है। यह न सिर्फ शरीर को ठंडक पहुंचाता है, बल्कि पाचन तंत्र को बेहतर बनाने और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में भी मदद करता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ भी नियमित रूप से दही को आहार में शामिल करने की सलाह देते हैं। हालांकि, दही का पूरा लाभ तभी मिलता है जब इसे सही समय और सही तरीके से खाया जाए। गलत तरीके से सेवन करने पर यह फायदे की बजाय नुकसान भी पहुंचा सकता है।   पोषक तत्वों से भरपूर है दही दही में प्रोटीन, कैल्शियम, विटामिन बी-12 और प्रोबायोटिक्स जैसे महत्वपूर्ण पोषक तत्व पाए जाते हैं। प्रोबायोटिक्स आंतों में अच्छे बैक्टीरिया को बढ़ावा देते हैं, जिससे पाचन बेहतर रहता है। इसके अलावा दही शरीर को ऊर्जा प्रदान करता है और गर्मी के प्रभाव को कम करने में मदद करता है। कैल्शियम की पर्याप्त मात्रा हड्डियों और दांतों को मजबूत बनाए रखने में भी सहायक होती है।   दही खाने का सही तरीका विशेषज्ञों के अनुसार दही का सेवन दिन के समय, खासकर दोपहर के भोजन के साथ करना सबसे अच्छा माना जाता है। इससे पाचन तंत्र सक्रिय रहता है और दही के पोषक तत्वों का बेहतर लाभ मिलता है। दही हमेशा ताजा और अच्छी तरह जमा हुआ होना चाहिए। ताजे दही में भुना जीरा, काला नमक या थोड़ा सा पुदीना मिलाकर खाने से इसका स्वाद बढ़ता है और पाचन भी बेहतर होता है। गर्मियों में लस्सी, रायता या साधारण दही भी शरीर को हाइड्रेट रखने में मदद कर सकता है।   इन गलतियों से बचना जरूरी स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि अत्यधिक मात्रा में दही खाना भी सही नहीं है। जरूरत से ज्यादा सेवन करने पर कुछ लोगों को पेट भारी लगना, गैस या अन्य पाचन संबंधी समस्याएं हो सकती हैं। इसके अलावा बासी या खराब दही का सेवन स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है। लंबे समय तक रखा हुआ दही बैक्टीरिया संक्रमण का कारण बन सकता है। जिन लोगों को दूध या दही से एलर्जी है या कोई विशेष स्वास्थ्य समस्या है, उन्हें सेवन से पहले डॉक्टर की सलाह अवश्य लेनी चाहिए।   संतुलित सेवन से मिलेगा अधिक लाभ गर्मी में दही स्वास्थ्य के लिए बेहद फायदेमंद माना जाता है, लेकिन इसका सही समय, सही मात्रा और ताजा गुणवत्ता बनाए रखना जरूरी है। संतुलित तरीके से सेवन करने पर दही शरीर को ठंडक, बेहतर पाचन और मजबूत प्रतिरक्षा प्रणाली जैसे कई स्वास्थ्य लाभ प्रदान कर सकता है।

Unknown जून 3, 2026 0
Traditional Japanese superfoods including miso soup, umeboshi, kuzu, sauerkraut, and kukicha tea for gut health
जापानी महिलाओं की लंबी उम्र का राज! आंतों को स्वस्थ रखने वाले 5 सुपरफूड्स जिन्हें आप भी डाइट में शामिल कर सकते हैं

बेहतर पाचन और लंबी उम्र के लिए जापानी खानपान बना प्रेरणा दुनियाभर में जापान को लंबी उम्र और बेहतर स्वास्थ्य के लिए जाना जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इसके पीछे सिर्फ अच्छी आनुवंशिकता नहीं, बल्कि उनकी संतुलित जीवनशैली और पोषण से भरपूर खानपान भी बड़ी वजह है। जापान के लोग वर्षों से ऐसे खाद्य पदार्थों का सेवन करते आ रहे हैं जो एंटीऑक्सीडेंट्स, प्रोबायोटिक्स और पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं। ये न केवल आंतों की सेहत को बेहतर बनाते हैं बल्कि शरीर की उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को भी धीमा करने में मदद कर सकते हैं। आइए जानते हैं उन 5 खास जापानी सुपरफूड्स के बारे में जो गट हेल्थ और माइक्रोबायोम को मजबूत बनाने में सहायक माने जाते हैं। 1. फर्मेंटेड पत्ता गोभी (सॉकरक्राउट) जापानी भोजन में फर्मेंटेड फूड्स का महत्वपूर्ण स्थान है। फर्मेंटेड पत्ता गोभी, जिसे सॉकरक्राउट भी कहा जाता है, प्रोबायोटिक्स से भरपूर होती है। यह पाचन तंत्र को स्वस्थ रखने में मदद करती है और आंतों में अच्छे बैक्टीरिया के संतुलन को बढ़ावा देती है। साथ ही इसमें विटामिन C की अच्छी मात्रा होती है, जो इसे एक प्रभावी एंटीऑक्सीडेंट बनाती है। इसे भोजन से पहले छोटी मात्रा में सलाद या साइड डिश के रूप में खाया जा सकता है। 2. कुजु (Kuzu) कुजु एक पारंपरिक जापानी आटा है जो कुडज़ू पौधे की जड़ से तैयार किया जाता है। इसे प्राकृतिक थिकनर के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार यह पाचन तंत्र को आराम पहुंचाने, रक्त शर्करा को संतुलित रखने और शरीर में ऑक्सीडेटिव तनाव को कम करने में मदद कर सकता है। कुजु का उपयोग सूप, सॉस और हर्बल पेय बनाने में किया जाता है। 3. उमेबोशी पेस्ट उमेबोशी एक विशेष प्रकार के जापानी फल से तैयार किया गया फर्मेंटेड पेस्ट है। यह प्रोबायोटिक गुणों से भरपूर माना जाता है। कम कैलोरी और कम वसा वाला यह खाद्य पदार्थ पाचन स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के साथ-साथ शरीर को आवश्यक पोषक तत्व भी प्रदान करता है। कई लोग इसे भोजन से पहले थोड़ी मात्रा में लेते हैं, जबकि कुछ इसे हर्बल ड्रिंक या चाय में मिलाकर भी इस्तेमाल करते हैं। 4. कुकिचा चाय जापान में लोकप्रिय कुकिचा चाय साधारण चाय की पत्तियों से नहीं, बल्कि पौधे की टहनियों और डंठलों से बनाई जाती है। इसमें कैफीन की मात्रा बेहद कम होती है, जबकि विटामिन, खनिज और एंटीऑक्सीडेंट्स की मात्रा अपेक्षाकृत अधिक होती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह चाय पाचन में मदद करती है और शरीर के एसिड-बेस संतुलन को बनाए रखने में सहायक हो सकती है। 5. मिसो सूप मिसो सूप जापान के सबसे लोकप्रिय पारंपरिक खाद्य पदार्थों में से एक है। कई जापानी परिवार इसे नाश्ते में भी शामिल करते हैं। फर्मेंटेड सोयाबीन, समुद्री नमक और कोजी से तैयार मिसो प्रोबायोटिक्स का बेहतरीन स्रोत माना जाता है। यह आंतों के स्वास्थ्य को मजबूत बनाने और पाचन तंत्र को सक्रिय करने में मदद करता है। इसके अलावा इसमें प्रोटीन, विटामिन और कई आवश्यक खनिज भी पाए जाते हैं। क्यों जरूरी है स्वस्थ माइक्रोबायोम? विशेषज्ञों के अनुसार, आंतों में मौजूद अच्छे बैक्टीरिया केवल पाचन ही नहीं बल्कि प्रतिरक्षा प्रणाली, मानसिक स्वास्थ्य और ऊर्जा स्तर को भी प्रभावित करते हैं। संतुलित माइक्रोबायोम सूजन को कम करने, पोषक तत्वों के बेहतर अवशोषण और शरीर की समग्र कार्यप्रणाली को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है। डाइट में धीरे-धीरे करें शामिल हालांकि ये सभी खाद्य पदार्थ स्वास्थ्यवर्धक माने जाते हैं, लेकिन किसी भी नए फर्मेंटेड या विशेष खाद्य पदार्थ को डाइट में धीरे-धीरे शामिल करना बेहतर होता है। जिन लोगों को विशेष स्वास्थ्य समस्याएं हैं, उन्हें आहार में बड़े बदलाव से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेनी चाहिए। जापानी खानपान से जुड़े ये सुपरफूड्स दिखाते हैं कि स्वस्थ जीवनशैली केवल महंगे सप्लीमेंट्स से नहीं, बल्कि सही और संतुलित भोजन से भी हासिल की जा सकती है।  

surbhi जून 2, 2026 0
gut health tests for bloating, digestion problems and microbiome imbalance
बार-बार पेट फूलने की समस्या को न करें नजरअंदाज, ये 5 टेस्ट बता सकते हैं आपके Gut Health की असली वजह

Gut Microbiome से जुड़ी समस्याएं आजकल तेजी से बढ़ रही हैं। खाने के बाद पेट फूलना, गैस बनना या भारीपन महसूस होना आम बात लग सकती है, लेकिन अगर यह समस्या लगातार बनी रहती है तो यह शरीर की ओर से मिलने वाला गंभीर संकेत हो सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार बार-बार ब्लोटिंग यानी पेट फूलना फूड इंटॉलरेंस, खराब पाचन, बैक्टीरियल इन्फेक्शन या आंतों की दूसरी समस्याओं का संकेत हो सकता है। ऐसे में समय रहते सही जांच करवाना बेहद जरूरी हो जाता है। विशेषज्ञों के मुताबिक लगातार होने वाली ब्लोटिंग को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए, क्योंकि सही टेस्ट के जरिए इसकी असली वजह पता लगाकर लंबे समय तक राहत पाई जा सकती है। पेट फूलने की वजह जानने के लिए जरूरी 5 टेस्ट 1. फूड इंटॉलरेंस टेस्ट कई लोगों को कुछ खास चीजें जैसे दूध, ग्लूटेन या अन्य फूड कॉम्पोनेंट्स सूट नहीं करते। ऐसे में फूड इंटॉलरेंस टेस्ट यह पता लगाने में मदद करता है कि कौन-सा खाना पेट फूलने और गैस की वजह बन रहा है। इसके बाद डॉक्टर या डाइटिशियन की सलाह से खानपान में बदलाव किया जा सकता है। 2. गट माइक्रोबायोम टेस्ट यह टेस्ट आंतों में मौजूद अच्छे और खराब बैक्टीरिया का संतुलन जांचता है। जब खराब बैक्टीरिया ज्यादा बढ़ जाते हैं, तो इसे गट डिस्बायोसिस कहा जाता है। यह स्थिति पाचन को खराब कर सकती है और बार-बार ब्लोटिंग की समस्या पैदा कर सकती है। 3. SIBO Breath Test यह एक नॉन-इनवेसिव टेस्ट होता है, जिसमें मरीज को ग्लूकोज वाला घोल पिलाया जाता है। इसके बाद सांस में हाइड्रोजन और मीथेन गैस का स्तर जांचा जाता है। अगर गैस तेजी से बढ़ती है, तो यह Small Intestinal Bacterial Overgrowth यानी SIBO का संकेत हो सकता है, जो गैस और पेट फूलने की बड़ी वजह माना जाता है। 4. स्टूल टेस्ट अगर पेट फूलने के साथ बार-बार पेट खराब हो रहा है या लंबे समय से पाचन संबंधी दिक्कत बनी हुई है, तो डॉक्टर स्टूल टेस्ट कराने की सलाह दे सकते हैं। इससे इन्फेक्शन, सूजन या अन्य पाचन संबंधी समस्याओं का पता लगाया जाता है। 5. एंडोस्कोपी या इमेजिंग टेस्ट लगातार गंभीर ब्लोटिंग या पेट दर्द की स्थिति में डॉक्टर एंडोस्कोपी या इमेजिंग टेस्ट कर सकते हैं। इस टेस्ट में कैमरे की मदद से आंतों और पेट के अंदर की स्थिति देखी जाती है, जिससे अल्सर, सूजन या अन्य संरचनात्मक समस्याओं का पता चलता है। कब समझें कि टेस्ट करवाना जरूरी है? अगर आपको ये लक्षण लगातार महसूस हो रहे हैं, तो डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी हो सकता है: बार-बार और लंबे समय तक पेट फूलना लगातार पेट दर्द अनियमित मल त्याग कुछ खास चीजें खाने के बाद हमेशा समस्या होना बिना वजह थकान महसूस होना प्राकृतिक तरीके से कैसे सुधारें Gut Health? विशेषज्ञों के अनुसार कुछ आसान आदतें अपनाकर गट हेल्थ को बेहतर बनाया जा सकता है: फाइबर युक्त भोजन बढ़ाएं पर्याप्त पानी पिएं प्रोबायोटिक फूड्स खाएं ट्रिगर फूड्स से बचें तनाव कम करें नियमित शारीरिक गतिविधि करें विशेषज्ञों  का कहना है कि समय पर जांच और सही इलाज से लंबे समय तक होने वाली पाचन समस्याओं से बचा जा सकता है।  

surbhi मई 29, 2026 0
Digestive health
रोजमर्रा की ये 6 आदतें धीरे-धीरे खराब कर रही हैं आपका पाचन तंत्र

नई दिल्ली, एजेंसियां। पाचन तंत्र शरीर का एक बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो भोजन को ऊर्जा और पोषक तत्वों में बदलकर शरीर को स्वस्थ रखने का काम करता है। लेकिन आज की भागदौड़ भरी जिंदगी, अनियमित दिनचर्या और गलत खानपान की आदतों के कारण लोगों की गट हेल्थ तेजी से प्रभावित हो रही है। शुरुआत में ये समस्याएं सामान्य लगती हैं, लेकिन समय के साथ गैस, एसिडिटी, कब्ज और IBS जैसी गंभीर बीमारियों का रूप ले सकती हैं।   विशेषज्ञों के अनुसार कई रोजमर्रा की आदतें ऐसी हैं, जो धीरे-धीरे पाचन तंत्र को कमजोर बना देती हैं। अगर समय रहते इन्हें नहीं बदला गया, तो लंबे समय में शरीर की सेहत पर गंभीर असर पड़ सकता है।   देर रात खाना पाचन के लिए नुकसानदायक रात 9 बजे के बाद शरीर का मेटाबॉलिज्म धीमा होने लगता है। ऐसे में देर रात खाना खाने से भोजन सही तरीके से पच नहीं पाता और पेट में गैस, ब्लोटिंग और एसिडिटी जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। लगातार देर रात खाना खाने की आदत वजन बढ़ने और नींद खराब होने का कारण भी बन सकती है।   बार-बार खाना छोड़ना भी खतरनाक कई लोग व्यस्तता के कारण समय पर खाना नहीं खाते या मील स्किप कर देते हैं। इससे पेट में बनने वाला एसिड पेट की लाइनिंग को नुकसान पहुंचाने लगता है। नतीजतन गैस, पेट दर्द, ब्लोटिंग और IBS जैसी समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है।   प्रोसेस्ड और पैकेज्ड फूड से बढ़ती परेशानी चिप्स, नूडल्स, बिस्कुट और फास्ट फूड जैसे प्रोसेस्ड फूड में पोषण कम और प्रिजर्वेटिव ज्यादा होते हैं। ये आंतों के अच्छे बैक्टीरिया को नुकसान पहुंचाते हैं और पाचन को कमजोर बनाते हैं। लगातार ऐसे भोजन से इम्युनिटी कम होने के साथ मोटापा और मेटाबॉलिक बीमारियों का खतरा भी बढ़ सकता है।   कम पानी पीना और फाइबर की कमी पर्याप्त पानी न पीने से शरीर में सूखापन बढ़ता है और कब्ज की समस्या होने लगती है। लंबे समय तक ऐसा रहने पर बवासीर और फिशर जैसी दिक्कतें हो सकती हैं। वहीं डाइट में फाइबर की कमी से आंतों की सफाई सही तरीके से नहीं हो पाती, जिससे पेट दर्द और कब्ज की समस्या बढ़ती है।   अनियमित नींद भी बिगाड़ती है गट हेल्थ विशेषज्ञों के मुताबिक अच्छी नींद सिर्फ आराम के लिए नहीं, बल्कि शरीर की रिपेयर प्रक्रिया के लिए भी जरूरी है। नींद पूरी न होने से गट-ब्रेन एक्सिस प्रभावित होता है, जिससे एसिडिटी, सूजन और IBS जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। लगातार खराब नींद पूरे मेटाबॉलिज्म को प्रभावित कर सकती है।

Unknown मई 23, 2026 0
Summer Bael Sharbat Benefits
गर्मी में रोज बेल का शरबत पीने से क्या होता है? जानिए इसके फायदे

  गर्मियों में शरीर को ठंडा रखने और लू से बचाने के लिए लोग कई तरह के पेय पदार्थ पीते हैं। लेकिन बाजार के ठंडे पेय अक्सर सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकते हैं। ऐसे में Bael Fruit से बना शरबत एक प्राकृतिक और स्वास्थ्यवर्धक विकल्प माना जाता है। आयुर्वेद में भी बेल के औषधीय गुणों का उल्लेख मिलता है। नियमित रूप से बेल का शरबत पीने से शरीर को कई फायदे मिल सकते हैं।   1. पेट की समस्याओं में राहत बेल के शरबत में हल्के रेचक (लैक्सेटिव) गुण पाए जाते हैं, जो पाचन तंत्र को बेहतर बनाने में मदद करते हैं। यह कब्ज की समस्या को दूर करने में सहायक होता है और दस्त तथा पेचिश जैसी परेशानियों में भी लाभकारी माना जाता है।   2. शरीर को ठंडक देता है बेल की तासीर ठंडी होती है। इसका शरबत पीने से शरीर को ठंडक मिलती है, प्यास शांत होती है और गर्मी में होने वाली Heatstroke या लू से बचाव में मदद मिल सकती है।   3. शरीर को ऊर्जा देता है बेल में कार्बोहाइड्रेट और कई जरूरी पोषक तत्व मौजूद होते हैं। गर्मी के कारण होने वाली थकान और कमजोरी को दूर करने में यह मददगार माना जाता है और शरीर को तुरंत ऊर्जा देता है।   4. खून साफ करने और त्वचा के लिए फायदेमंद बेल का शरबत शरीर को प्राकृतिक रूप से डिटॉक्स करने में मदद करता है। इससे शरीर के हानिकारक तत्व बाहर निकलते हैं, खून साफ रहता है और त्वचा से जुड़ी समस्याएं जैसे मुंहासे और गर्मी के दाने कम हो सकते हैं।  

surbhi मार्च 13, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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abhishek singh जुलाई 2, 2026 0