Udhayanidhi Stalin ने एक बार फिर सनातन धर्म को लेकर विवादित बयान दिया है। तमिलनाडु विधानसभा में विपक्ष के नेता के रूप में अपने पहले भाषण के दौरान उन्होंने कहा कि “सनातन धर्म लोगों को बांटता है, इसलिए इसे समाप्त हो जाना चाहिए।” उनके इस बयान के बाद राज्य की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। बीजेपी ने इसे हिंदू विरोधी मानसिकता बताते हुए डीएमके पर तीखा हमला बोला है। तमिल थाई वझुथु मुद्दे का भी किया जिक्र विधानसभा में अपने संबोधन के दौरान उदयनिधि स्टालिन ने “तमिल थाई वझुथु” के कथित अपमान का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि तमिल संस्कृति और पहचान का सम्मान किया जाना चाहिए। हालांकि, उनके सनातन धर्म संबंधी बयान ने ज्यादा राजनीतिक प्रतिक्रिया पैदा की और सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक इस पर बहस तेज हो गई। बीजेपी बोली- जनता माफ नहीं करेगी Shehzad Poonawalla ने डीएमके और उदयनिधि स्टालिन पर तीखा हमला करते हुए कहा कि विपक्षी दल वोट बैंक की राजनीति के लिए सनातन धर्म के खिलाफ नफरत फैलाने का काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु में चुनावी हार के बावजूद डीएमके ने कोई सबक नहीं सीखा है और पार्टी अब भी सनातन धर्म का अपमान कर रही है। पूनावाला ने कहा कि “तमिलनाडु की जनता उन्हें माफ नहीं करेगी।” 2023 में भी दिया था ऐसा ही बयान यह पहला मौका नहीं है जब उदयनिधि स्टालिन के बयान पर विवाद हुआ हो। सितंबर 2023 में भी उन्होंने सनातन धर्म की तुलना “डेंगू और मलेरिया” जैसी बीमारियों से करते हुए कहा था कि इसे खत्म कर देना चाहिए। उस बयान पर देशभर में राजनीतिक विवाद खड़ा हुआ था और कई नेताओं ने उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी। बीजेपी ने बताया वोट बैंक राजनीति का हिस्सा बीजेपी प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कहा कि विपक्षी दलों द्वारा बार-बार सनातन धर्म को निशाना बनाना कोई संयोग नहीं, बल्कि एक राजनीतिक रणनीति है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ दल धार्मिक भावनाओं को भड़काकर वोट बैंक मजबूत करना चाहते हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि पिछले बयान पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी की थी और इसे नफरती भाषण बताया गया था। राजनीतिक बयानबाजी से बढ़ा विवाद उदयनिधि स्टालिन के इस बयान के बाद तमिलनाडु समेत देशभर में राजनीतिक प्रतिक्रियाएं तेज हो गई हैं। बीजेपी और डीएमके के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है, जबकि सोशल मीडिया पर भी यह मुद्दा चर्चा का केंद्र बना हुआ है।
तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। अभिनेता से राजनेता बने C. Joseph Vijay ने अपनी पार्टी Tamilaga Vettri Kazhagam (TVK) के साथ विधानसभा चुनाव में शानदार प्रदर्शन करते हुए राज्य की राजनीति में नया अध्याय लिख दिया है। उनकी जीत की चर्चा अब भारत ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी हो रही है। इसी बीच Anwar Ibrahim ने विजय को तमिलनाडु का मुख्यमंत्री बनने पर खास अंदाज में बधाई दी है। मलेशियाई प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया पोस्ट में विजय को अपना “मित्र” बताते हुए उनके नेतृत्व की सराहना की और तमिलनाडु-मलेशिया के ऐतिहासिक रिश्तों का जिक्र किया। “फिल्मों से बड़ी जिम्मेदारी अब जनता ने दी” अनवर इब्राहिम ने अपने संदेश में लिखा कि वर्षों तक लोगों ने विजय को फिल्मों में भ्रष्ट नेताओं और खलनायकों को हराते देखा, लेकिन अब तमिलनाडु की जनता ने उन्हें असल राजनीति में उससे भी बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है। उन्होंने विजय के लोकप्रिय चुनावी नारे “ओरु विरल पुराची” यानी “एक उंगली क्रांति” का भी उल्लेख किया। इब्राहिम ने कहा कि यह आंदोलन अब इतिहास रचने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। तमिलनाडु और मलेशिया के रिश्तों का किया जिक्र मलेशियाई प्रधानमंत्री ने कहा कि तमिलनाडु और मलेशिया के बीच पीढ़ियों पुराने सांस्कृतिक और सामाजिक संबंध रहे हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले वर्षों में दोनों पक्षों के बीच सहयोग और मजबूत होगा। उन्होंने अपने संदेश में कहा कि वह मुख्यमंत्री विजय के साथ मिलकर काम करने को लेकर उत्साहित हैं। यह बयान इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि मलेशिया में बड़ी संख्या में तमिल मूल के लोग रहते हैं और तमिल संस्कृति का वहां गहरा प्रभाव है। दुनिया भर से मिल रहीं बधाइयां विजय की जीत के बाद केवल मलेशिया ही नहीं बल्कि Sri Lanka और Pakistan समेत कई देशों के नेताओं और कलाकारों ने भी उन्हें बधाई दी है। श्रीलंका के कई नेताओं ने इसे दक्षिण भारतीय राजनीति में बड़ा बदलाव बताया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विजय की लोकप्रियता ने पारंपरिक राजनीतिक समीकरणों को पूरी तरह बदल दिया है। TVK ने तोड़ा दशकों पुराना राजनीतिक दबदबा तमिलनाडु की 234 सदस्यीय विधानसभा में TVK ने 108 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरकर सबको चौंका दिया। सरकार बनाने के लिए 118 सीटों की जरूरत थी और कांग्रेस व वाम दलों ने विजय को समर्थन देने का ऐलान कर दिया। इस जीत को इसलिए ऐतिहासिक माना जा रहा है क्योंकि TVK ने राज्य में वर्षों से मजबूत पकड़ रखने वाली Dravida Munnetra Kazhagam (DMK) और All India Anna Dravida Munnetra Kazhagam (AIADMK) के प्रभाव को चुनौती दी है। चेन्नई में ली मुख्यमंत्री पद की शपथ विजय ने चेन्नई के Jawaharlal Nehru Indoor Stadium में आयोजित भव्य समारोह में मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। इस मौके पर बड़ी संख्या में समर्थक और कई राजनीतिक हस्तियां मौजूद रहीं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह जीत केवल सत्ता परिवर्तन नहीं बल्कि तमिलनाडु की राजनीति में नई पीढ़ी और नए नेतृत्व के उभार का संकेत है।
तमिलनाडु में सरकार गठन को लेकर जारी सस्पेंस के बीच राज्य की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है. सूत्रों के मुताबिक, एआईएडीएमके (AIADMK) भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेतृत्व वाले एनडीए (NDA) गठबंधन से अलग होने पर विचार कर रही है. चर्चा है कि पार्टी प्रमुख एडप्पाडी के. पलानीस्वामी (EPS) अभिनेता-विजय की पार्टी टीवीके (TVK) को समर्थन देकर नई सरकार बनाने का रास्ता खोल सकते हैं. पुडुचेरी रिसॉर्ट में हुई अहम बैठक AIADMK महासचिव एडप्पाडी के. पलानीस्वामी ने 7 मई को पुडुचेरी के बाहरी इलाके अरियानकुप्पम स्थित एक निजी रिसॉर्ट में पार्टी के नवनिर्वाचित विधायकों के साथ महत्वपूर्ण बैठक की. इस बैठक में करीब 40 विधायक शामिल हुए. बैठक लगभग एक घंटे तक चली, जिसमें मौजूदा राजनीतिक हालात और सरकार गठन के विकल्पों पर चर्चा हुई. सूत्रों के अनुसार, पलानीस्वामी ने विधायकों से एकजुट रहने और धैर्य बनाए रखने की अपील की. उन्होंने कहा कि आने वाले कुछ दिनों में “अच्छी खबर” मिल सकती है, इसलिए सभी विधायक साथ बने रहें. TVK को सत्ता से दूर रखना मुश्किल? तमिलगा वेत्री कषगम (TVK) विधानसभा चुनाव में 108 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है. हालांकि बहुमत के लिए जरूरी 118 सीटों के आंकड़े से पार्टी अभी पीछे है. कांग्रेस के 5 विधायकों का समर्थन मिलने के बाद भी TVK की संख्या 112 तक ही पहुंचती है. ऐसे में AIADMK का समर्थन विजय के लिए सत्ता का रास्ता आसान बना सकता है. राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अगर AIADMK समर्थन देती है, तो तमिलनाडु में नई राजनीतिक धुरी बन सकती है. किस पार्टी को कितनी सीटें? 234 सदस्यीय तमिलनाडु विधानसभा में सीटों का गणित इस प्रकार है: TVK – 108 सीट DMK – 59 सीट AIADMK – 47 सीट कांग्रेस – 5 सीट PMK – 4 सीट IUML – 2 सीट CPI – 2 सीट CPM – 2 सीट VCK – 2 सीट BJP, DMDK और AMMK – 1-1 सीट विजय को अपनी जीती हुई दो सीटों में से एक सीट छोड़नी होगी, जिससे TVK की प्रभावी संख्या 107 रह जाएगी. माकपा भी करेगी फैसला इधर, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (CPM) ने भी शुक्रवार को बैठक बुलाई है. पार्टी यह तय करेगी कि वह TVK को समर्थन देगी या नहीं. TVK ने सभी धर्मनिरपेक्ष दलों से नई सरकार के समर्थन की अपील की है. तमिलनाडु में बढ़ा सियासी रोमांच तमिलनाडु में अब राजनीतिक समीकरण तेजी से बदलते नजर आ रहे हैं. अगर AIADMK NDA से अलग होकर TVK का साथ देती है, तो राज्य की राजनीति में यह सबसे बड़ा राजनीतिक उलटफेर माना जाएगा. वहीं DMK भी लगातार बैकचैनल बातचीत में जुटी हुई है, ताकि सत्ता समीकरण अपने पक्ष में बनाए जा सकें.
Tamil Nadu में सरकार गठन को लेकर जारी राजनीतिक गतिरोध के बीच Tamilaga Vettri Kazhagam (TVK) को लेकर बड़ा घटनाक्रम सामने आया है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, अगर Dravida Munnetra Kazhagam (DMK) या All India Anna Dravida Munnetra Kazhagam (AIADMK) सरकार बनाने की दिशा में आगे बढ़ती है, तो TVK अपने सभी 107 विधायकों से सामूहिक इस्तीफा दिलाने पर विचार कर सकती है. TVK के भीतर बढ़ रही नाराजगी सूत्रों के अनुसार, यह संकेत पार्टी के अंदर बढ़ती नाराजगी और राजनीतिक बेचैनी को दर्शाता है. TVK नेताओं का मानना है कि चुनाव में सबसे बड़ी पार्टी बनने के बावजूद उन्हें सत्ता से दूर रखने की कोशिश की जा रही है. हालांकि अभी तक पार्टी प्रमुख Vijay की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन पार्टी के भीतर इस मुद्दे पर गंभीर चर्चा चल रही है. सरकार गठन पर क्यों फंसा मामला? 23 अप्रैल को हुए विधानसभा चुनाव में: TVK को 108 सीटें मिलीं DMK ने 59 सीटें जीतीं AIADMK के खाते में 47 सीटें आईं चूंकि विजय दो सीटों से जीते हैं, इसलिए नियम के तहत उन्हें एक सीट छोड़नी होगी. इसके बाद TVK की प्रभावी संख्या 107 रह जाएगी. Indian National Congress के 5 विधायकों के समर्थन के बाद भी TVK का आंकड़ा 112 तक ही पहुंचता है, जबकि 234 सदस्यीय विधानसभा में बहुमत के लिए 118 सीटों की जरूरत है. DMK-AIADMK बैकचैनल बातचीत की चर्चा राजनीतिक हलकों में यह चर्चा भी तेज है कि DMK और AIADMK के बीच बैकचैनल बातचीत चल रही है, ताकि TVK को सत्ता से दूर रखा जा सके. हालांकि दोनों दलों ने किसी औपचारिक गठबंधन की घोषणा नहीं की है. TVK नेताओं का दावा है कि जनता ने बदलाव के पक्ष में वोट दिया है और सबसे बड़ी पार्टी को नजरअंदाज करना जनादेश का अपमान होगा. इस्तीफे की रणनीति से क्या होगा? अगर TVK के विधायक सामूहिक इस्तीफा देते हैं, तो: राज्य में संवैधानिक संकट पैदा हो सकता है कई सीटों पर उपचुनाव की नौबत आ सकती है सरकार गठन की प्रक्रिया और जटिल हो जाएगी राजनीतिक अस्थिरता बढ़ सकती है विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम दबाव की राजनीति का हिस्सा भी हो सकता है, ताकि अन्य दल TVK के साथ बातचीत के लिए मजबूर हों. तमिलनाडु में अब सबकी नजर राज्यपाल की अगली चाल और राजनीतिक दलों के बीच जारी बातचीत पर टिकी हुई है.
Tamil Nadu Government Formation: तमिलनाडु में सरकार गठन को लेकर सियासी हलचल लगातार तेज होती जा रही है. TVK प्रमुख विजय एक बार फिर राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर से मिलने लोक भवन पहुंचे. 24 घंटे के भीतर यह उनकी दूसरी मुलाकात रही, जिससे राज्य की राजनीति में सस्पेंस और बढ़ गया है. कांग्रेस समर्थन के बाद फिर राज्यपाल से मुलाकात सूत्रों के मुताबिक, विजय ने 6 मई को कांग्रेस का समर्थन पत्र राज्यपाल को सौंपकर सरकार बनाने का दावा पेश किया था. हालांकि अभी तक राज्यपाल की ओर से कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है. इसी बीच विजय की दोबारा राज्यपाल से मुलाकात को बेहद अहम माना जा रहा है. माना जा रहा है कि सरकार गठन के लिए बहुमत जुटाने और आगे की रणनीति पर चर्चा हुई है. TVK विधायकों की अहम बैठक सरकार गठन को लेकर विजय ने 7 मई को TVK के निर्वाचित विधायकों की महत्वपूर्ण बैठक भी बुलायी है. इस बैठक में पार्टी आगे की रणनीति, समर्थन जुटाने और विधायक दल के नेता के चयन पर चर्चा कर सकती है. सूत्रों के अनुसार, TVK अपने विधायक दल के नेता के नाम पर भी औपचारिक मुहर लगा सकती है. बहुमत से अभी पीछे TVK 234 सदस्यीय तमिलनाडु विधानसभा में सरकार बनाने के लिए 118 विधायकों का समर्थन जरूरी है. हालिया चुनाव में TVK ने 108 सीटों पर जीत हासिल की है, जिससे वह राज्य की सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी. हालांकि बहुमत के आंकड़े तक पहुंचने के लिए पार्टी को अभी और समर्थन की जरूरत है. कांग्रेस के पांच विधायकों ने TVK को समर्थन देने की घोषणा की है, लेकिन इसके बावजूद आंकड़ा अभी भी बहुमत से नीचे माना जा रहा है. इसके अलावा विजय को अपनी जीती हुई दो सीटों में से एक सीट छोड़नी होगी, जिससे पार्टी की प्रभावी संख्या और प्रभावित हो सकती है. कांग्रेस ने DMK से तोड़ा साथ कांग्रेस ने बड़ा राजनीतिक कदम उठाते हुए विजय की पार्टी TVK को समर्थन देने का फैसला किया है. इसके साथ ही उसने अपने पुराने सहयोगी DMK से दूरी बना ली है. कांग्रेस सांसद ज्योतिमणि ने सरकार गठन में हो रही देरी पर नाराजगी जताते हुए कहा कि बहुमत परीक्षण का सही मंच विधानसभा है, न कि राजभवन. उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा राज्यपाल के माध्यम से राजनीति कर रही है और विजय को तुरंत सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया जाना चाहिए. राज्यपाल के फैसले पर टिकी नजर फिलहाल तमिलनाडु में सबकी नजर राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर के अगले कदम पर टिकी हुई है. राजनीतिक दल लगातार जोड़-तोड़ और समर्थन जुटाने में लगे हैं. अगर TVK आवश्यक समर्थन जुटाने में सफल रहती है, तो राज्य में पहली बार विजय के नेतृत्व में नई सरकार बनने का रास्ता साफ हो सकता है.
Tamil Nadu Government Formation: तमिलनाडु में नई सरकार के गठन को लेकर सियासी हलचल लगातार तेज होती जा रही है. TVK प्रमुख विजय के मुख्यमंत्री पद की शपथ को लेकर बना सस्पेंस अभी खत्म नहीं हुआ है. राज्यपाल विश्वनाथ आर्लेकर द्वारा बहुमत साबित करने के लिए 118 विधायकों के समर्थन पत्र मांगे जाने के बाद विजय का प्रस्तावित शपथग्रहण फिलहाल टल गया है. TVK ने सौंपा 112 विधायकों का समर्थन पत्र सूत्रों के मुताबिक, TVK ने कांग्रेस के 5 विधायकों के समर्थन सहित कुल 112 विधायकों का समर्थन पत्र राज्यपाल को सौंप दिया है. हालांकि सरकार बनाने के लिए 118 विधायकों का समर्थन जरूरी है, इसलिए अभी भी TVK बहुमत के आंकड़े से पीछे है. विजय दो विधानसभा सीटों से चुनाव जीते हैं, जिसके कारण पार्टी की प्रभावी संख्या 107 मानी जा रही है. बताया जा रहा है कि TVK फिलहाल VCK, PMK और वामपंथी दलों के साथ समर्थन को लेकर बातचीत कर रही है. राज्यपाल के रुख से बढ़ा राजनीतिक तनाव राज्यपाल विश्वनाथ आर्लेकर के अतिरिक्त समर्थन पत्र मांगने के बाद राजनीतिक विवाद भी शुरू हो गया है. कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि सबसे बड़ी पार्टी के नेता को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करना राज्यपाल की संवैधानिक जिम्मेदारी है और विजय को अनावश्यक रूप से बहुमत साबित करने के लिए दबाव में डाला जा रहा है. सूत्रों के अनुसार, TVK ने अब इस पूरे मामले में कानूनी विशेषज्ञों से सलाह लेने का फैसला किया है. विजय की प्रोटोकॉल सुरक्षा वापस सरकार गठन में देरी के बीच राज्य सरकार ने विजय को दी गयी प्रोटोकॉल कॉन्वॉय सुरक्षा वापस ले ली है. हालांकि उनकी बेसिक पायलट सुरक्षा अभी जारी रहेगी. इस फैसले के बाद राजनीतिक चर्चाएं और तेज हो गयी हैं. AIADMK में टूट का खतरा, विधायक पहुंचे रिसॉर्ट इसी बीच AIADMK के भीतर भी हलचल तेज हो गयी है. पार्टी ने अपने कई विधायकों को पुडुचेरी के एक रिसॉर्ट में शिफ्ट कर दिया है. सूत्रों का कहना है कि ये विधायक सीवी षणमुगम गुट से जुड़े हैं. अब तक 28 विधायक रिसॉर्ट पहुंच चुके हैं, जबकि कुल 32 विधायकों के वहां पहुंचने की संभावना जतायी जा रही है. पार्टी को आशंका है कि सरकार गठन के दौरान विधायकों में टूट-फूट हो सकती है. 108 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनी TVK हालिया विधानसभा चुनाव में विजय की पार्टी TVK ने 108 सीटें जीतकर तमिलनाडु की सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरकर सबको चौंका दिया. हालांकि पार्टी बहुमत के आंकड़े से पीछे रह गयी. चुनाव परिणाम आने के बाद TVK विधायकों ने विजय को विधायक दल का नेता चुना था, जिसके बाद उन्होंने सरकार बनाने का दावा पेश किया. कांग्रेस पहले ही TVK को सशर्त समर्थन दे चुकी है, जबकि अन्य छोटे दलों और वामपंथी पार्टियों के भीतर अभी चर्चा जारी है. DMK की बैठक पर भी नजर आज DMK विधायक दल की बैठक भी होने जा रही है, जिसमें नेता प्रतिपक्ष के चयन और आगे की रणनीति पर चर्चा होगी. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले कुछ दिन तमिलनाडु की राजनीति के लिए बेहद अहम साबित हो सकते हैं.
Tamil Nadu Government Formation: तमिलनाडु में सरकार गठन को लेकर जारी राजनीतिक सस्पेंस के बीच अब राज्य की राजनीति में रिजॉर्ट पॉलिटिक्स की एंट्री हो गयी है. बहुमत के आंकड़े और संभावित टूट-फूट की आशंका के बीच AIADMK ने अपने 15 से अधिक विधायकों को पुदुचेरी के एक रिजॉर्ट में शिफ्ट कर दिया है. राज्य में TVK, DMK और AIADMK के बीच राजनीतिक जोड़-तोड़ का दौर तेज हो गया है. पुदुचेरी के रिजॉर्ट में AIADMK विधायकों की शिफ्टिंग सूत्रों के मुताबिक, AIADMK ने अपने विधायकों को सुरक्षित रखने के लिए पुदुचेरी के मशहूर ‘द शोर त्रिश्वम’ रिजॉर्ट में ठहराने का फैसला किया है. बताया जा रहा है कि पार्टी के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद सीवी शन्मुगम ने यहां 20 से ज्यादा कमरे बुक कराए हैं. कई विधायक रिजॉर्ट पहुंच चुके हैं, जबकि अन्य के भी पहुंचने की खबर है. पार्टी को आशंका है कि सरकार गठन की प्रक्रिया के दौरान विपक्षी दल उनके विधायकों को तोड़ने की कोशिश कर सकते हैं. इसी वजह से AIADMK फिलहाल अपने विधायकों को एकजुट रखने की रणनीति पर काम कर रही है. AIADMK के कुछ विधायक TVK के समर्थन में राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, AIADMK के भीतर भी मतभेद की स्थिति बनी हुई है. पार्टी के कुछ विधायक अभिनेता विजय की पार्टी TVK को समर्थन देने के पक्ष में बताए जा रहे हैं. तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 में TVK 108 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, लेकिन सरकार बनाने के लिए जरूरी 118 सीटों के बहुमत से अभी भी पीछे है. DMK और AIADMK के बीच बैकचैनल बातचीत तमिलनाडु की राजनीति में एक और बड़ा मोड़ तब आया जब DMK और AIADMK के बीच बैकचैनल बातचीत की खबरें सामने आयीं. दोनों दल लंबे समय से एक-दूसरे के कट्टर राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी रहे हैं, लेकिन मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों में सत्ता समीकरण बदलते नजर आ रहे हैं. सूत्रों के मुताबिक, AIADMK नेताओं ने बातचीत की पुष्टि की है, हालांकि किसी औपचारिक गठबंधन पर अभी फैसला नहीं हुआ है. विधानसभा में DMK के पास 59 सीटें हैं, जबकि AIADMK के खाते में 47 सीटें हैं. ऐसे में दोनों दलों का साथ आना तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा बदलाव माना जा रहा है. विजय ने राज्यपाल से की मुलाकात इससे पहले TVK प्रमुख विजय ने सरकार बनाने का दावा पेश करने के लिए राज्यपाल राजेंद्र अर्लेकर से मुलाकात की थी. हालांकि राज्यपाल ने उनसे 118 विधायकों के समर्थन का प्रमाण पेश करने को कहा है. सूत्रों के अनुसार, फिलहाल विजय को 112 विधायकों का समर्थन हासिल है, जिसमें कांग्रेस के 5 विधायक भी शामिल हैं. इसके बावजूद बहुमत के आंकड़े तक पहुंचने के लिए उन्हें अभी और समर्थन की जरूरत है. बताया जा रहा है कि कांग्रेस के साथ समझौता होने के बाद TVK ने फिलहाल AIADMK के साथ बातचीत रोक दी है, लेकिन अन्य छोटे दलों और निर्दलीय विधायकों से संपर्क जारी है. तमिलनाडु में बढ़ी राजनीतिक हलचल सरकार गठन को लेकर तमिलनाडु में राजनीतिक गतिविधियां लगातार तेज होती जा रही हैं. बहुमत के आंकड़े, संभावित गठबंधन और विधायकों की नाराजगी के बीच राज्य की राजनीति बेहद दिलचस्प मोड़ पर पहुंच गयी है. आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि तमिलनाडु में अगली सरकार किस दल या गठबंधन की बनेगी.
गुवाहाटी/तिरुवनंतपुरम/पुडुचेरी, एजेंसियां। असम, तमिलनाडु, केरलम और पुडुचेरी विधानसभा चुनाव के नतीजे आज आ जाएंगे। वोटों की गिनती जारी है। ताजा रुझानों के मुताबिक केरलम में LDF को 53 सीटों पर बढ़त मिली हुई है। लेकिन UDF बाजी पलटते हुए दिखाई दे रहा है। कांग्रेस के समर्थन वाले UDF को 83 सीटों पर बढ़त मिल गई है। असम व पुडूचेरी का हाल असम में बीजेपी को 69 सीटों पर और पुडुचेरी में बीजेपी को 22 सीटों पर बढ़त मिली हुई है। तमिलनाडु में डीएमके 46 सीटों पर आगे चल रही है। एक्टर विजय का जलवा इधर, एक्टर विजय की पार्टी TVK ने कई सीटों पर DMK को पीछे छोड़ दिया है। चुनाव आयोग के मुताबिक TVK 2 सीट पर आगे चल रही है। AIDMK तीन और DMK एक सीट पर आगे है। असम में बीजेपी आगे नतीजों से पहले आए एग्जिट पोल्स में असम में फिर हिमंता सरकार बनने का अनुमान है। तमिलनाडु में DMK की वापसी के आसार हैं, तो केरलम में कांग्रेस की अगुआई वाले UDF को बढ़त है। पुडुचेरी में NDA गठबंधन की वापसी दिखाई दे रही है।
चेन्नई: प्रस्तावित परिसीमन विधेयक को लेकर देश में सियासी माहौल गर्माता जा रहा है। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन ने इस बिल के खिलाफ अपना विरोध तेज करते हुए इसकी कॉपी जला दी। उन्होंने इस कानून को “काला कानून” करार देते हुए राज्यभर में आंदोलन शुरू करने का ऐलान किया है। ‘तमिलों को हाशिये पर धकेल देगा यह कानून’ स्टालिन का आरोप है कि अगर यह परिसीमन लागू हुआ, तो तमिलनाडु जैसे राज्यों की राजनीतिक हिस्सेदारी कम हो जाएगी। उन्होंने कहा कि इससे “तमिल लोग अपनी ही जमीन पर शरणार्थी बन जाएंगे।” उनका तर्क है कि जनसंख्या के आधार पर सीटों का पुनर्निर्धारण दक्षिण भारत के उन राज्यों के लिए नुकसानदेह होगा, जिन्होंने जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर प्रदर्शन किया है। सोशल मीडिया पर साझा किया विरोध एम. के. स्टालिन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर वीडियो और तस्वीरें साझा करते हुए केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने अपने पोस्ट में लिखा: “फासीवादी बीजेपी का घमंड चकनाचूर हो” “आज मैंने एक और आग जलाई है, उस काले कानून की प्रति जलाकर” “यह आग पूरे द्रविड़ भूमि में फैलेगी” उन्होंने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए हिंदी विरोध आंदोलन का जिक्र किया और कहा कि “तब भी तमिलनाडु झुका नहीं था और अब भी नहीं झुकेगा।” क्यों हो रहा है विरोध? परिसीमन का मतलब है—जनसंख्या के आधार पर लोकसभा और विधानसभा सीटों का पुनर्निर्धारण। दक्षिण भारत के राज्यों की मुख्य चिंताएं: जनसंख्या नियंत्रण के बावजूद सीटें कम होने का डर उत्तर भारत के ज्यादा आबादी वाले राज्यों को फायदा राजनीतिक प्रतिनिधित्व में असंतुलन केंद्र का क्या है रुख? केंद्र सरकार का कहना है कि परिसीमन एक संवैधानिक प्रक्रिया है और इसका मकसद सभी राज्यों को समान प्रतिनिधित्व देना है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि किसी राज्य के साथ अन्याय नहीं होगा। बढ़ सकता है सियासी टकराव तमिलनाडु में इस मुद्दे पर विरोध तेज होने के बाद अन्य दक्षिणी राज्यों में भी प्रतिक्रिया देखने को मिल सकती है। ऐसे में परिसीमन विधेयक को लेकर केंद्र और राज्यों के बीच टकराव और बढ़ने के आसार हैं।
नई दिल्ली: महिला आरक्षण को लेकर संसद के विशेष सत्र से पहले राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। अनुराग ठाकुर ने विपक्षी दलों पर तीखा हमला करते हुए कहा कि “महिला-विरोधी सोच” रखने वाली पार्टियां ही इस बिल का विरोध कर रही हैं। ‘महिला-विरोधी मानसिकता वाले कर रहे विरोध’ आईएएनएस से बातचीत में अनुराग ठाकुर ने कहा कि जो दल महिला आरक्षण का विरोध कर रहे हैं, उनकी विचारधारा महिलाओं के खिलाफ है। उन्होंने दावा किया कि महिलाओं को 33% आरक्षण देने का रास्ता साफ किया जा चुका है और अब इसे लागू करने की दिशा में काम हो रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि 1971 के आधार पर सीटों का निर्धारण पहले ही हो चुका है और दक्षिण भारतीय राज्यों को पर्याप्त प्रतिनिधित्व मिला हुआ है। विपक्षी नेताओं पर सीधा निशाना भाजपा सांसद ने कई बड़े नेताओं पर सीधे आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि सोनिया गांधी ममता बनर्जी डीएमके और अन्य विपक्षी दल महिला आरक्षण का विरोध कर रहे हैं, क्योंकि उनकी सोच महिलाओं के हित में नहीं है। साथ ही उन्होंने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि अपने शासनकाल में वह इस बिल को पारित नहीं करा पाई। संसद सत्र में होगी अहम चर्चा संसद के विस्तारित सत्र में नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023 में संशोधन और परिसीमन विधेयक पर चर्चा होने की संभावना है। इसका उद्देश्य संसद और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण सुनिश्चित करना है। बंगाल चुनाव पर भी दिया बड़ा बयान अनुराग ठाकुर ने पश्चिम बंगाल की राजनीति पर भी टिप्पणी करते हुए कहा कि तृणमूल कांग्रेस की हार तय है 4 मई को सत्ता परिवर्तन होगा ममता बनर्जी अपनी उपलब्धियां गिनाने में असफल रही हैं उन्होंने ममता सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए कहा कि भाजपा के सत्ता में आने के बाद राज्य को “भ्रष्टाचार, कमीशन और अवैध घुसपैठ” से मुक्त किया जाएगा। सियासी टकराव तेज महिला आरक्षण और परिसीमन जैसे मुद्दों पर सरकार और विपक्ष के बीच टकराव लगातार बढ़ता जा रहा है। संसद के आगामी सत्र में इस मुद्दे पर तीखी बहस और राजनीतिक बयानबाजी देखने को मिल सकती है।
राज्यसभा में सोमवार को 19 नए सदस्यों ने सांसद के रूप में शपथ ली। इस दौरान एनसीपी-एससीपी के वरिष्ठ नेता शरद पवार व्हीलचेयर पर सदन पहुंचे, जिसने सभी का ध्यान आकर्षित किया। शपथ ग्रहण समारोह राज्यसभा के सभापति सी.पी. राधाकृष्णन की मौजूदगी में संपन्न हुआ। वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में हुआ शपथ ग्रहण इस मौके पर राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश, संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू और विभिन्न दलों के फ्लोर लीडर भी मौजूद रहे। समारोह का माहौल गरिमामय रहा और नए सदस्यों ने अपने-अपने पद की शपथ ली। महाराष्ट्र से 5 सदस्यों ने ली शपथ महाराष्ट्र से कुल 5 सदस्यों ने शपथ ली। सबसे पहले बीजेपी की माया चिंतामन इवनाते ने शपथ ली इसके बाद शरद पवार ने शपथ ग्रहण किया रामराव सखाराम वडकुटे (BJP) ज्योति नागनाथ वाघमारे (शिवसेना) रामदास अठावले (RPI-A) तमिलनाडु से 6 नए सांसद तमिलनाडु से 6 सदस्यों ने राज्यसभा में प्रवेश किया: कॉन्स्टैंटाइन रविंद्रन (DMK), क्रिस्टोफर मणिकम (कांग्रेस), एलके सुधीश (DMDK), एम थंबीदुरई (AIADMK), तिरुचि शिवा (DMK) और अंबुमणि रामदास (PMK)। पश्चिम बंगाल से 5 सदस्य पश्चिम बंगाल से शपथ लेने वाले सदस्यों में शामिल हैं: बाबुल सुप्रियो (AITC), बिस्वजीत सिन्हा (BJP), मेनका गुरुस्वामी (AITC), राजीव कुमार (AITC) और रुक्मिणी मलिक (AITC)। ओडिशा से 3 सदस्य ओडिशा से मनमोहन सामल (BJP), संरूपत मिश्रा (BJD) और दिलीप कुमार राय (निर्दलीय) ने शपथ ली। क्षेत्रीय भाषाओं में ली शपथ अधिकांश सांसदों ने अपनी-अपनी क्षेत्रीय भाषाओं में शपथ ली, जो भारत की भाषाई विविधता को दर्शाता है। गरिमामय माहौल में संपन्न हुआ समारोह शपथ ग्रहण कार्यक्रम शांतिपूर्ण और गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। नए सदस्यों के शामिल होने से राज्यसभा की कार्यवाही को और मजबूती मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
देश के कई राज्यों में विधानसभा चुनाव 2026 को लेकर सियासी सरगर्मी अपने चरम पर पहुंच गई है। तमिलनाडु समेत असम, पश्चिम बंगाल, केरल और पुडुचेरी में चुनाव प्रचार तेज हो गया है। इस बीच तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम सामने आया, जहां मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन और अभिनेता से नेता बने विजय ने सोमवार को अपना नामांकन दाखिल कर दिया। स्टालिन ने कोलाथुर से भरा पर्चा, जताया भरोसा डीएमके प्रमुख स्टालिन ने चेन्नई की कोलाथुर सीट से नामांकन दाखिल किया। यह सीट वे 2011 से लगातार जीतते आ रहे हैं। नामांकन के बाद उन्होंने रोड शो भी किया और दावा किया कि उनकी पार्टी इस बार भी भारी बहुमत से सत्ता में वापसी करेगी। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार के वादों पर जनता को भरोसा है और पिछले कार्यकाल में किए गए कामों का फायदा उन्हें चुनाव में मिलेगा। विजय का सियासी डेब्यू, पेरंबूर से मैदान में तमिल फिल्म इंडस्ट्री के सुपरस्टार विजय ने भी पेरंबूर सीट से नामांकन दाखिल कर राजनीति में औपचारिक एंट्री कर ली है। उनकी पार्टी तमिलगा वेत्री कझगम के लिए यह चुनाव बेहद अहम माना जा रहा है। विजय के नामांकन के दौरान भारी भीड़ और समर्थकों का उत्साह देखने को मिला। वे इस चुनाव के जरिए अपनी लोकप्रियता को राजनीतिक ताकत में बदलने की कोशिश करेंगे। चुनावी मैदान में बढ़ी टक्कर विजय की एंट्री ने तमिलनाडु चुनाव को और दिलचस्प बना दिया है। एक तरफ सत्ताधारी डीएमके अपनी उपलब्धियों के दम पर मैदान में है, वहीं दूसरी ओर नए चेहरे के रूप में विजय का करिश्मा भी चुनावी समीकरणों को प्रभावित कर सकता है। अन्य राज्यों में भी तेज प्रचार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी चुनावी राज्यों में सक्रिय हैं और ‘मेरा बूथ, सबसे मजबूत संवाद’ अभियान के जरिए पार्टी कार्यकर्ताओं से जुड़ रहे हैं। बीजेपी को असम और पुडुचेरी में जीत का भरोसा जताया गया है।
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव से पहले सत्तारूढ़ DMK (द्रमुक) ने अपने सहयोगी दलों के साथ सीट बंटवारे को लगभग अंतिम रूप दे दिया है। अब सिर्फ VCK (विदुथलाई चिरुथैगल काची) के साथ समझौता बाकी है, जिसे आज फाइनल किया जा सकता है। राज्य के परिवहन और बिजली मंत्री एस.एस. शिवशंकर ने बताया कि DMK और VCK के बीच बातचीत अंतिम चरण में है। किसे कितनी सीटें मिलीं? DMK के नेतृत्व वाले सेक्युलर प्रोग्रेसिव अलायंस में सीटों का बंटवारा इस तरह हुआ है- कांग्रेस: 28 सीटें भाकपा (CPI): 5 सीटें माकपा (CPM): 5 सीटें एमडीएमके: 4 सीटें IUML, MMK, KMDK: 2-2 सीटें कई दौर की बातचीत के बाद वाम दलों के साथ भी सहमति बन गई है। 23 अप्रैल को होंगे चुनाव तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव 23 अप्रैल को होने हैं। चुनाव की तारीख नजदीक आने के साथ ही सभी दलों ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। DMK ने शुरू किया प्रचार अभियान DMK ने पहले ही अपना चुनाव प्रचार अभियान शुरू कर दिया है। उपमुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन लगातार रैलियां और जनसभाएं कर रहे हैं। मंत्री शिवशंकर के मुताबिक, पार्टी पूरी ताकत के साथ चुनाव मैदान में उतर चुकी है और गठबंधन भी मजबूत स्थिति में है। क्या है राजनीतिक मायने? सीट बंटवारे का लगभग पूरा होना यह संकेत देता है कि DMK गठबंधन चुनाव से पहले एकजुट दिखना चाहता है। VCK के साथ समझौता होते ही गठबंधन पूरी तरह तैयार हो जाएगा।
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 से पहले सियासी माहौल गरमा गया है, लेकिन आंकड़े साफ संकेत दे रहे हैं कि सत्ताधारी Dravida Munnetra Kazhagam (DMK) और उसके सहयोगी दल बेहद मजबूत स्थिति में हैं। 2024 के लोकसभा चुनावों और 2021 के विधानसभा चुनावों के आधार पर देखें तो विपक्ष फिलहाल काफी पीछे नजर आ रहा है। 223 सीटों का गणित: DMK गठबंधन की बड़ी बढ़त 2024 के लोकसभा चुनाव नतीजों के विधानसभा क्षेत्रों के विश्लेषण से पता चलता है कि DMK गठबंधन ने 234 में से 223 विधानसभा क्षेत्रों में बढ़त हासिल की थी। यह आंकड़ा बहुमत के लिए जरूरी 118 सीटों के आंकड़े से बहुत आगे है, जो इस बात का संकेत है कि अगर यही ट्रेंड जारी रहा तो DMK को सत्ता में वापसी से रोकना विपक्ष के लिए बेहद मुश्किल होगा। वहीं, All India Anna Dravida Munnetra Kazhagam (AIADMK) सिर्फ 8 सीटों पर बढ़त बना पाई, जबकि Pattali Makkal Katchi (PMK) को सिर्फ 3 सीटों पर बढ़त मिली। लोकसभा 2024 में ‘INDIA’ गठबंधन का दबदबा 2024 के लोकसभा चुनावों में DMK के नेतृत्व वाले ‘INDIA’ गठबंधन ने 39 में से 38 सीटों पर जीत दर्ज की। इस प्रदर्शन ने साफ कर दिया कि राज्य में सत्ताधारी गठबंधन की पकड़ मजबूत बनी हुई है। M. K. Stalin के नेतृत्व में DMK ने 22 सीटों पर चुनाव लड़ा और सभी जीतीं, साथ ही 125 विधानसभा क्षेत्रों में बढ़त हासिल की। वोट शेयर बनाम सीटों की कहानी DMK: 26.93% वोट शेयर AIADMK: 20.46% वोट शेयर हालांकि वोट शेयर का अंतर ज्यादा बड़ा नहीं दिखता, लेकिन सीटों में यह अंतर बहुत बड़ा हो गया है। राज्य के 234 विधानसभा क्षेत्रों में से 52 में DMK को 50% से ज्यादा वोट मिले, जबकि AIADMK सिर्फ 1 सीट पर ही यह आंकड़ा छू पाई। करीबी मुकाबलों में भी DMK आगे जिन 26 लोकसभा सीटों पर जीत का अंतर 10,000 वोट से कम था, उनमें भी DMK गठबंधन ने 19 सीटों पर बढ़त बनाई, जबकि AIADMK सिर्फ 7 सीटों पर ही आगे रही। यह दर्शाता है कि कड़े मुकाबलों में भी सत्ताधारी गठबंधन का पलड़ा भारी रहा। विपक्ष के लिए चुनौती क्यों बढ़ी? AIADMK का 2024 लोकसभा चुनाव में प्रदर्शन 2021 विधानसभा चुनाव के मुकाबले कमजोर रहा। जहां 2021 में उसने 66 सीटें जीती थीं, वहीं 2024 में उसे कई सीटों पर DMK, कांग्रेस और अन्य सहयोगी दलों से हार का सामना करना पड़ा। नए खिलाड़ी से बदलेगा खेल? इस बार चुनाव में अभिनेता से नेता बने Vijay की पार्टी Tamilaga Vettri Kazhagam (TVK) भी मैदान में उतर रही है। TVK की एंट्री मुकाबले को दिलचस्प बना सकती है, लेकिन बड़ा सवाल यही है कि क्या यह पार्टी विपक्ष को मजबूत करेगी या DMK के वोट बैंक में सेंध लगाएगी। मौजूदा आंकड़ों और चुनावी ट्रेंड को देखते हुए DMK गठबंधन स्पष्ट रूप से बढ़त में है। हालांकि, अंतिम नतीजे इस बात पर निर्भर करेंगे कि चुनावी मैदान में नए समीकरण कैसे बनते हैं और TVK जैसे नए खिलाड़ी कितना असर डालते हैं।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।