drug trafficking

Former Venezuelan President Nicolas Maduro faces US drug trafficking trial proposed for June 2027
वेनेजुएला के पूर्व राष्ट्रपति निकोलस मादुरो पर अमेरिका में चलेगा ड्रग तस्करी का मुकदमा, जून 2027 से ट्रायल का प्रस्ताव

वेनेजुएला के पूर्व राष्ट्रपति निकोलस मादुरो पर अमेरिका में ड्रग तस्करी के गंभीर आरोपों को लेकर मुकदमे की तैयारी तेज हो गई है। मादुरो और अमेरिकी न्याय विभाग (DOJ) ने संयुक्त रूप से अदालत से अनुरोध किया है कि मामले की सुनवाई जून 2027 से शुरू की जाए। अब इस प्रस्ताव पर अंतिम फैसला अमेरिकी जिला न्यायाधीश अल्विन हेलरस्टीन करेंगे। मैनहट्टन फेडरल कोर्ट में दायर संयुक्त प्रस्ताव के अनुसार, दोनों पक्ष मुकदमे की तैयारी के लिए पर्याप्त समय चाहते हैं। हालांकि अदालत जरूरत पड़ने पर सुनवाई की तारीख में बदलाव भी कर सकती है। अमेरिकी मीडिया इस मामले को हाल के वर्षों के सबसे चर्चित अंतरराष्ट्रीय आपराधिक मामलों में से एक मान रहा है। ड्रग तस्करी के गंभीर आरोप अमेरिकी न्याय विभाग ने निकोलस मादुरो पर लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्करी नेटवर्क से जुड़े होने के आरोप लगाए हैं। अभियोजन पक्ष का दावा है कि उनके शासनकाल के दौरान मादुरो और उनके सहयोगियों ने बड़े पैमाने पर मादक पदार्थों की तस्करी को संरक्षण दिया। वहीं मादुरो लगातार इन आरोपों को राजनीतिक साजिश बताते रहे हैं और इन्हें खारिज करते आए हैं। जनवरी में हुई थी गिरफ्तारी रिपोर्ट के मुताबिक, इसी साल जनवरी में अमेरिकी स्पेशल फोर्सेज ने वेनेजुएला की राजधानी काराकास में विशेष अभियान चलाकर निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सीलिया फ्लोरेस को गिरफ्तार किया था। इसके बाद दोनों को न्यूयॉर्क लाया गया, जहां उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू की गई। अदालत के फैसले पर टिकी नजर फिलहाल अदालत को यह तय करना है कि ट्रायल जून 2027 से शुरू होगा या नहीं। यदि प्रस्ताव मंजूर होता है, तो आने वाले महीनों में अभियोजन और बचाव पक्ष सबूतों, गवाहों और अन्य कानूनी प्रक्रियाओं की तैयारी करेंगे। यह मामला न केवल अमेरिका और वेनेजुएला के संबंधों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संगठित अपराध और मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ कार्रवाई के दृष्टिकोण से भी बेहद अहम माना जा रहा है।  

kalpana जुलाई 22, 2026 0
French police display a recovered Pablo Picasso painting seized during a drug trafficking raid near Paris.
ड्रग तस्करों पर छापेमारी में मिली पिकासो की दुर्लभ पेंटिंग, फ्रांसीसी पुलिस भी रह गई हैरान

  पेरिस: फ्रांस में ड्रग तस्करों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के दौरान पुलिस को एक ऐसी बरामदगी हाथ लगी, जिसने जांच अधिकारियों को भी हैरान कर दिया। पेरिस के निकट एक छापेमारी के दौरान पुलिस ने विश्व प्रसिद्ध स्पेनिश चित्रकार Pablo Picasso की एक दुर्लभ और असली पेंटिंग बरामद की है। पुलिस ने बताया कि यह कार्रवाई मूल रूप से ड्रग तस्करी के नेटवर्क के खिलाफ की जा रही थी, लेकिन छापेमारी के दौरान एक कीमती कलाकृति मिलने से मामला और भी गंभीर हो गया। अब फ्रांसीसी अधिकारियों ने पेंटिंग की उत्पत्ति, उसके स्वामित्व और संभावित चोरी से जुड़े पहलुओं की अलग से जांच शुरू कर दी है। चोरी और अवैध कब्जे की जांच शुरू अधिकारियों के अनुसार, प्रारंभिक जांच में यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि पेंटिंग ड्रग तस्करों के पास कैसे पहुंची। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि कहीं यह कलाकृति किसी संग्रहालय, निजी संग्रह या कला प्रदर्शनी से चोरी तो नहीं हुई थी। फ्रांसीसी जांच एजेंसियां चोरी की संपत्ति रखने, अवैध कला व्यापार और संगठित अपराध से संभावित संबंधों की भी पड़ताल कर रही हैं। ड्रग माफिया का गढ़ बनता जा रहा है मार्सेई फ्रांस का बंदरगाह शहर Marseille लंबे समय से ड्रग तस्करों और संगठित अपराध गिरोहों के लिए गतिविधियों का प्रमुख केंद्र रहा है। यहां 'डीजेड माफिया' जैसे कई संगठित गिरोह सक्रिय हैं, जिनके अंतरराष्ट्रीय ड्रग कार्टेल, विशेषकर मैक्सिकन नेटवर्क से संबंध होने के दावे किए जाते रहे हैं। पिछले कुछ वर्षों में ड्रग हिंसा का दायरा लगातार बढ़ा है। नाबालिगों की भर्ती, गैंगवार और ड्रग विरोधी कार्यकर्ताओं पर हमले जैसी घटनाओं ने फ्रांसीसी प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। संगठित अपराध के खिलाफ सरकार का बड़ा अभियान ड्रग नेटवर्क को तोड़ने के लिए फ्रांसीसी सरकार ने बड़े स्तर पर छापेमारी अभियान शुरू किया है। इसके अलावा संगठित अपराध और अंतरराष्ट्रीय तस्करी से निपटने के लिए एक विशेष राष्ट्रीय अभियोजन कार्यालय PNACO का गठन किया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि ड्रग गिरोह अब केवल मादक पदार्थों की तस्करी तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे अवैध कला व्यापार, धन शोधन (मनी लॉन्ड्रिंग) और चोरी की बहुमूल्य वस्तुओं के कारोबार से भी जुड़े हो सकते हैं। कला जगत में भी मचा हड़कंप पिकासो की दुर्लभ पेंटिंग की बरामदगी ने कला जगत में भी हलचल पैदा कर दी है। यदि जांच में यह साबित होता है कि यह कलाकृति चोरी की थी, तो यह हाल के वर्षों में यूरोप में सामने आए सबसे बड़े अवैध कला व्यापार मामलों में से एक हो सकता है।  

Deepshikha जून 22, 2026 0
Russian and Pakistani officials sign security cooperation agreements during SCO meeting in Bishkek, Kyrgyzstan.
भारत के दोस्त रूस ने पाकिस्तान के साथ किए दो अहम समझौते, SCO बैठक में सुरक्षा सहयोग बढ़ाने पर सहमति

  नई दिल्ली/बिश्केक: शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की बैठक के दौरान रूस और पाकिस्तान ने सुरक्षा सहयोग को मजबूत करने की दिशा में दो महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं। दोनों देशों ने अवैध प्रवासन पर नियंत्रण और मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ संयुक्त कार्रवाई बढ़ाने पर सहमति जताई। इसके अलावा क्षेत्रीय सुरक्षा, आतंकवाद और अफगानिस्तान की स्थिति जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हुई। यह समझौते किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी और रूस के गृह मंत्री व्लादिमीर कोलोकोल्त्सेव के बीच हुई बैठक के दौरान हुए। मोहसिन नकवी एससीओ सदस्य देशों के गृह एवं सार्वजनिक सुरक्षा मंत्रियों की बैठक में भाग लेने के लिए बिश्केक पहुंचे हैं। अवैध प्रवासन रोकने पर समझौता पाकिस्तान के गृह मंत्रालय के अनुसार, दोनों देशों ने अवैध प्रवासन की रोकथाम और इससे जुड़े मामलों में सहयोग बढ़ाने के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। समझौते के तहत दोनों देश अपने-अपने क्षेत्रों में अवैध रूप से रह रहे नागरिकों की पहचान करने और उन्हें वापस भेजने की प्रक्रिया में सहयोग करेंगे। ड्रग्स तस्करी के खिलाफ संयुक्त कार्रवाई रूस और पाकिस्तान के बीच दूसरा समझौता मादक पदार्थों और नशीले पदार्थों की तस्करी रोकने से संबंधित है। दोनों देशों ने ड्रग्स नेटवर्क पर निगरानी बढ़ाने, खुफिया सूचनाओं का आदान-प्रदान करने और अंतरराष्ट्रीय तस्करी से निपटने के लिए संयुक्त प्रयासों को मजबूत करने पर सहमति जताई। रूस-पाकिस्तान संबंधों में बढ़ती नजदीकी हाल के वर्षों में रूस और पाकिस्तान के संबंधों में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला है। दोनों देश ऊर्जा, व्यापार और औद्योगिक सहयोग के क्षेत्रों में भी साझेदारी बढ़ा रहे हैं। पाकिस्तान रूस से ऊर्जा आयात बढ़ाने की संभावनाओं पर भी काम कर रहा है। जुलाई 2025 में दोनों देशों ने कराची स्थित पाकिस्तान स्टील मिल को पुनर्जीवित करने के लिए एक समझौता किया था। यह परियोजना ऐतिहासिक महत्व रखती है क्योंकि इस स्टील मिल की स्थापना सोवियत संघ की सहायता से की गई थी। अफगानिस्तान और क्षेत्रीय सुरक्षा पर चर्चा बैठक के दौरान अफगानिस्तान की सुरक्षा स्थिति, सीमा पार आतंकवाद और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे विषयों पर भी चर्चा हुई। रूस और पाकिस्तान दोनों ने क्षेत्रीय शांति और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सहयोग बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया। मध्य एशियाई देशों के नेताओं से भी मिले नकवी एससीओ बैठक के दौरान पाकिस्तानी गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने ताजिकिस्तान, उजबेकिस्तान, किर्गिस्तान और कजाकिस्तान के गृह मंत्रियों के साथ भी अलग-अलग द्विपक्षीय बैठकें कीं। इन बैठकों में आतंकवाद, सीमा पार अपराध, संगठित अपराध और सुरक्षा सहयोग से जुड़े मुद्दों पर विचार-विमर्श किया गया। SCO मंच पर सुरक्षा सहयोग को बढ़ावा बिश्केक में हुई बैठकों से संकेत मिलता है कि एससीओ सदस्य देश क्षेत्रीय सुरक्षा, आतंकवाद, अवैध प्रवासन और मादक पदार्थों की तस्करी जैसे साझा खतरों से निपटने के लिए आपसी सहयोग बढ़ाने के पक्ष में हैं। रूस और पाकिस्तान के बीच हुए ये नए समझौते भी इसी व्यापक क्षेत्रीय रणनीति का हिस्सा माने जा रहे हैं।  

Deepshikha जून 10, 2026 0
Drug Smuggling
राजमहल में ड्रग्स तस्करों पर पुलिस का बड़ा वार, एमडीएमए के साथ दो गिरफ्तार

साहिबगंज। जिले में नशे के अवैध कारोबार के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत राजमहल पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। राजमहल थाना क्षेत्र के फुलवरिया पटाल बगीचा इलाके में छापेमारी कर पुलिस ने 13.7 ग्राम एमडीएमए (MDMA) ड्रग्स बरामद किया है। इस कार्रवाई में दो युवकों को गिरफ्तार किया गया, जिन्हें आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। सोमवार को आयोजित प्रेस वार्ता में एसडीपीओ विमलेश कुमार त्रिपाठी ने बताया कि पुलिस अधीक्षक को क्षेत्र में मादक पदार्थों की खरीद-बिक्री की गुप्त सूचना मिली थी। सूचना को गंभीरता से लेते हुए तत्काल एक विशेष टीम गठित की गई और योजनाबद्ध तरीके से छापेमारी अभियान चलाया गया।   पुलिस को देखकर भागा आरोपी, तलाशी में मिला ड्रग्स छापेमारी के दौरान पुलिस टीम जब फुलवरिया पटाल बगीचा पहुंची, तो एक युवक संदिग्ध गतिविधि करते हुए भागने लगा। पुलिसकर्मियों ने उसका पीछा कर उसे पकड़ लिया। तलाशी के दौरान उसके पास से 13.7 ग्राम एमडीएमए बरामद किया गया। पूछताछ में उसकी पहचान मुर्गीटोला निवासी 29 वर्षीय फकरुद्दीन शेख उर्फ मिंटु के रूप में हुई।   पूछताछ के दौरान फकरुद्दीन ने इस कारोबार में फुलवरिया निवासी सलमान शेख की संलिप्तता की जानकारी दी। इसके बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए सलमान शेख को भी गिरफ्तार कर लिया। दोनों आरोपियों से ड्रग्स सप्लाई नेटवर्क और अन्य जुड़े लोगों के बारे में पूछताछ की जा रही है।   एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट की धारा 21 और 27 के तहत मामला दर्ज किया है। एसडीपीओ ने कहा कि जिले में नशे के कारोबार को खत्म करने के लिए अभियान लगातार जारी रहेगा। उन्होंने चेतावनी दी कि युवाओं को नशे की ओर धकेलने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि बरामद एमडीएमए कहां से लाई गई थी और इसका नेटवर्क किन-किन क्षेत्रों तक फैला हुआ है।

Unknown जून 8, 2026 0
Ranchi News
Ranchi में अड्डाबाजी और नशापान के खिलाफ बड़ी कार्रवाई, कचहरी, हरमू समेत कई इलाकों में चला प्रशासन का डंडा

रांची। रांची में सुरक्षित और शांतिपूर्ण माहौल बनाए रखने के लिए जिला प्रशासन अब पूरी तरह से एक्शन मोड में है। जिला दंडाधिकारी-सह-उपायुक्त (DC Ranchi) मंजूनाथ भजन्त्री के निर्देश पर शहर के विभिन्न सार्वजनिक स्थलों पर बेवजह अड्डाबाजी, अनावश्यक जमावड़ा और नशापान करने वालों के खिलाफ अभियान चलाया गया।  इस विशेष अभियान का नेतृत्व SDO सदर कुमार रजत ने किया। देर रात चली इस कार्रवाई से असामाजिक तत्वों और सड़क किनारे हुड़दंग करने वालों में हड़कंप मच गया। इन प्रमुख इलाकों में चली सघन जांच प्रशासनिक टीम ने शहर के उन संवेदनशील और प्रमुख चौक-चौराहों को टारगेट किया, जहां अक्सर युवाओं के जमावड़े और नशापान की शिकायतें मिलती हैं। अभियान के तहत मुख्य रूप से कचहरी चौक से लेकर बड़ा तालाब क्षेत्र, हरमू चौक, गाड़ीखाना चौक और उसके आसपास के इलाकों में जांच की गई। जांच के दौरान टीम ने सड़क किनारे और सार्वजनिक स्थानों पर अनावश्यक रूप से खड़े लोगों से पूछताछ की और उन्हें वहां से हटाया। SDO कुमार रजत की युवाओं को सख्त चेतावनी निरीक्षण के दौरान कई जगहों पर युवकों का अनावश्यक जमावड़ा पाया गया। SDO सदर कुमार रजत ने खुद युवाओं को हिदायत दी और भविष्य के लिए सख्त चेतावनी भी जारी की। उन्होंने कहा: “सार्वजनिक स्थलों पर अनावश्यक भीड़ लगाना, नशापान करना और असामाजिक गतिविधियां न केवल कानून-व्यवस्था के लिए चुनौती हैं, बल्कि इससे आम नागरिकों की सुरक्षा भी खतरे में पड़ती है। अगर भविष्य में कोई भी कानून-व्यवस्था को प्रभावित करते हुए पाया गया, तो उसके खिलाफ नियमानुसार कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। जारी रहेगा जिला प्रशासन का अभियान रांची जिला प्रशासन ने साफ कर दिया है कि यह कोई एक दिन की कार्रवाई नहीं है। शहर में अनुशासन और सुरक्षा का माहौल बनाए रखने के लिए अड्डाबाजी और अवांछित गतिविधियों के खिलाफ यह अभियान आगे भी निरंतर जारी रहेगा। प्रमुख हॉटस्पॉट्स पर पुलिस और प्रशासन की पैनी नजर रहेगी।   युवाओं से रचनात्मक कार्यों में जुड़ने की अपील प्रशासन ने न केवल कार्रवाई की, बल्कि युवाओं को सही राह दिखाने की कोशिश भी की है। जिला प्रशासन ने रांची के युवाओं से अपील की है कि वे अपनी ऊर्जा को सकारात्मक और रचनात्मक कार्यों में लगाएं। एक जिम्मेदार नागरिक के रूप में सामाजिक उत्तरदायित्व निभाएं और रांची को एक स्वच्छ, सुरक्षित और व्यवस्थित शहर बनाने में अपना सक्रिय योगदान दें।

Unknown जून 2, 2026 0
US military strikes suspected drug trafficking boat in eastern Pacific during anti-narcotics operation
पूर्वी प्रशांत महासागर में ड्रग्स तस्करों की नाव पर अमेरिकी हमला, तीन लोगों की मौत

अमेरिकी सेना ने पूर्वी प्रशांत महासागर में नशीले पदार्थों की तस्करी में कथित रूप से शामिल एक नाव पर हमला किया है। इस कार्रवाई में तीन लोगों की मौत हो गई। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, इस सप्ताह ड्रग्स तस्करी के खिलाफ यह तीसरा सैन्य अभियान है। हालिया कार्रवाई के बाद इन अभियानों में मारे गए लोगों की कुल संख्या 200 के पार पहुंच गई है। ड्रग्स विरोधी अभियान के तहत हुई कार्रवाई अमेरिकी सेना की United States Southern Command (यूएस सदर्न कमांड) ने बताया कि यह कार्रवाई कैरिबियन सागर और पूर्वी प्रशांत महासागर में चल रहे व्यापक ड्रग्स विरोधी अभियान का हिस्सा थी। सेना का दावा है कि जिस नाव को निशाना बनाया गया, उसका इस्तेमाल नशीले पदार्थों की तस्करी के लिए किया जा रहा था। अधिकारियों ने यह भी कहा कि नाव का संचालन एक घोषित आतंकवादी संगठन से जुड़े तत्व कर रहे थे, इस दावे के समर्थन में कोई स्वतंत्र सबूत सार्वजनिक नहीं किया गया है। हमले का वीडियो भी किया गया जारी अमेरिकी सेना ने हमले का वीडियो भी जारी किया है। वीडियो में समुद्र में चल रही एक छोटी नाव दिखाई देती है, जिस पर मिसाइल या अन्य हथियार से हमला किया जाता है। हमले के बाद नाव आग के गोले में तब्दील होती नजर आती है। वीडियो के अगले हिस्से में जलती हुई नाव और उसके आसपास पानी में तैरते पैकेट दिखाई देते हैं। माना जा रहा है कि ये पैकेट तस्करी से जुड़े सामान या नशीले पदार्थ हो सकते हैं। सितंबर से जारी है सैन्य अभियान अमेरिकी सैन्य अधिकारियों के मुताबिक, सितंबर की शुरुआत से ड्रग्स तस्करी के खिलाफ लगातार अभियान चलाया जा रहा है। शुक्रवार की कार्रवाई के बाद इस अभियान में मारे गए लोगों की संख्या 202 तक पहुंच गई है। इससे पहले मंगलवार और बुधवार को भी दो अलग-अलग अभियानों में तस्करी से जुड़े जहाजों को निशाना बनाया गया था। ट्रंप प्रशासन का सख्त रुख Donald Trump प्रशासन ने हाल के महीनों में लैटिन अमेरिकी ड्रग कार्टेल के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। प्रशासन का कहना है कि अमेरिका में अवैध मादक पदार्थों की आपूर्ति के पीछे संगठित ड्रग कार्टेल की बड़ी भूमिका है और उनसे निपटने के लिए सैन्य कार्रवाई भी जरूरी हो सकती है। अमेरिकी अधिकारियों ने इन अभियानों को राष्ट्रीय सुरक्षा और मादक पदार्थों की तस्करी रोकने की रणनीति का हिस्सा बताया है। क्यूबा के अधिकारियों से भी हुई मुलाकात यूएस सदर्न कमांड ने बताया कि यह कार्रवाई लैटिन अमेरिका क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य कमांडर General Francis L. Donovan के निर्देश पर की गई। इसी दिन जनरल डोनोवन ने Guantanamo Bay Naval Base के पास क्यूबा के सैन्य अधिकारियों से भी मुलाकात की। बैठक में किन मुद्दों पर चर्चा हुई, इसकी विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है। अभियानों पर उठ रहे सवाल ड्रग्स तस्करी के खिलाफ अमेरिकी कार्रवाई को लेकर समर्थन और आलोचना दोनों देखने को मिल रही है। समर्थकों का कहना है कि इससे अंतरराष्ट्रीय तस्करी नेटवर्क पर दबाव बढ़ेगा, जबकि आलोचकों का मानना है कि ऐसे अभियानों में पारदर्शिता और स्वतंत्र जांच की जरूरत है, खासकर तब जब सैन्य कार्रवाई में लोगों की जान जा रही हो।  

surbhi मई 30, 2026 0
Bokaro drug crackdown
बोकारो में नशा तस्करों पर शिकंजा, लाखों का गांजा बरामद

बोकारो। बोकारो पुलिस ने नशे के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए नया मोड़ बस स्टैंड से 47 किलो गांजा बरामद किया है। पुलिस के अनुसार, तस्कर इस अवैध गांजा की खेप को बस के माध्यम से बिहार भेजने की तैयारी कर रहे थे। गुप्त सूचना के आधार पर की गई छापेमारी में गांजा जब्त कर लिया गया, जबकि तस्कर मौके से फरार हो गए। बरामद गांजा की कीमत लगभग 5 से 7 लाख रुपये आंकी गई है।   गुप्त सूचना के बाद बनी विशेष टीम सिटी डीएसपी Alok Ranjan ने बताया कि 9 मई की शाम पुलिस अधीक्षक Nathu Singh Meena को सूचना मिली थी कि बीएस सिटी थाना क्षेत्र स्थित नया मोड़ बस स्टैंड से अवैध गांजा बिहार भेजा जाने वाला है। सूचना मिलते ही एसपी के निर्देश पर डीएसपी आलोक रंजन के नेतृत्व में विशेष छापेमारी टीम गठित की गई।   दो प्लास्टिक बोरों से मिला गांजा छापेमारी के दौरान पुलिस टीम ने पवनसुत बस पड़ाव के चबूतरे पर संदिग्ध अवस्था में रखे दो प्लास्टिक के बोरों की तलाशी ली। जांच में दोनों बोरों से 47 पैकेट में बंद करीब 47 किलो गांजा बरामद हुआ। पुलिस के मुताबिक तस्कर इसे बस के जरिए बिहार भेजने की फिराक में थे।   एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज इस मामले में बीएस सिटी थाना कांड संख्या 89/26 दर्ज किया गया है। पुलिस ने एनडीपीएस एक्ट की धारा 20(b)(ii)(C) के तहत कार्रवाई शुरू कर दी है। जांच के दौरान दो संदिग्ध तस्करों के नाम सामने आए हैं। उनकी गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है। पुलिस पूरे तस्करी नेटवर्क का पता लगाने में जुटी है और मामले की गहन जांच जारी है।

Unknown मई 11, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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kalpana जुलाई 17, 2026 0