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Lalu Prasad Yadav
IRCTC मनी लॉन्ड्रिंग केस में लालू परिवार को फिलहाल मिली राहत, 31 जुलाई को होगी अगली सुनवाई

बिहार, एजेंसियां। आईआरसीटीसी होटल आवंटन से जुड़े कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) प्रमुख लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार को फिलहाल राहत मिली है। दिल्ली की राऊज एवेन्यू कोर्ट ने गुरुवार को मामले में आरोप तय करने पर अपना फैसला सुरक्षित रखते हुए अगली सुनवाई 31 जुलाई तक टाल दी। अब सभी पक्षों की निगाहें अगली तारीख पर टिकी हैं, जब अदालत यह तय करेगी कि आरोप तय किए जाएंगे या नहीं।   ईडी ने कई लोगों के खिलाफ दाखिल की है चार्जशीट इस मामले की जांच प्रवर्तन निदेशालय (ED) कर रहा है। एजेंसी ने अदालत में दाखिल अपनी चार्जशीट में लालू प्रसाद यादव, बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव, पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी, सांसद मीसा भारती, तेज प्रताप यादव, हेमा यादव समेत कई अन्य लोगों को आरोपी बनाया है। ईडी का दावा है कि जांच के दौरान मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े वित्तीय लेन-देन और कथित अनियमितताओं के पर्याप्त साक्ष्य सामने आए हैं।   क्या है पूरा मामला? यह मामला उस समय का है जब लालू प्रसाद यादव वर्ष 2004 से 2009 के बीच केंद्र की यूपीए सरकार में रेल मंत्री थे। आरोप है कि इसी दौरान आईआरसीटीसी के रांची और पुरी स्थित दो होटलों के संचालन, विकास और रखरखाव का ठेका एक निजी कंपनी को नियमों के विपरीत तरीके से दिया गया। जांच एजेंसियों का आरोप है कि इस ठेके के बदले पटना में स्थित बहुमूल्य जमीन बेहद कम कीमत पर लालू परिवार से जुड़ी संस्थाओं को हस्तांतरित की गई।   जमीन के बदले ठेका देने का आरोप ईडी का आरोप है कि बाद में इस जमीन को कथित तौर पर बेनामी संपत्तियों और शेल कंपनियों के माध्यम से परिवार के सदस्यों के नाम स्थानांतरित किया गया। इन्हीं वित्तीय लेन-देन को मनी लॉन्ड्रिंग से जोड़ते हुए एजेंसी ने मामला दर्ज किया और जांच शुरू की। फिलहाल अदालत ने आरोप तय करने के मुद्दे पर कोई अंतिम निर्णय नहीं दिया है। अब 31 जुलाई को होने वाली अगली सुनवाई में यह स्पष्ट होगा कि अदालत आरोप तय करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाती है या नहीं। इस मामले पर राजनीतिक और कानूनी दोनों हलकों की नजर बनी हुई है।

abhishek singh जुलाई 16, 2026 0
ED officials conduct an investigation in the alleged West Bengal recruitment scam as TMC leader Madan Mitra's family receives summons for questioning.
भर्ती भ्रष्टाचार मामला: ईडी के रडार पर मदन मित्रा का परिवार, पत्नी और दो बेटों से पूछताछ करेगी ईडी

कोलकाता: पश्चिम बंगाल के चर्चित भर्ती भ्रष्टाचार मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और कमरहटी विधायक मदन मित्रा के परिवार पर जांच का दायरा बढ़ा दिया है। एजेंसी ने मदन मित्रा की पत्नी और उनके दो बेटों को पूछताछ के लिए समन जारी किया है। ईडी का मानना है कि मामले से जुड़े कुछ वित्तीय लेन-देन में उनके परिवार के सदस्यों की भूमिका की जांच जरूरी है। पत्नी और दो बेटों को भेजा गया समन ईडी सूत्रों के अनुसार, भर्ती भ्रष्टाचार मामले की जांच के दौरान कुछ संदिग्ध वित्तीय लेन-देन सामने आए हैं, जिनमें मदन मित्रा की पत्नी और दोनों बेटों के नाम सामने आए हैं। इन्हीं तथ्यों के आधार पर एजेंसी ने तीनों को पूछताछ के लिए तलब किया है। पहले भी हो चुकी है छापेमारी इससे पहले जून में ईडी ने मदन मित्रा के भवानीपुर स्थित आवास समेत दक्षिणेश्वर और अन्य ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया था। यह कार्रवाई कमरहटी नगरपालिका में कथित अवैध भर्ती से जुड़े मामले की जांच के तहत की गई थी। राजनीतिक हलकों में बढ़ीं चर्चाएं ईडी का समन जारी होने के बीच मदन मित्रा की राजनीतिक गतिविधियां भी चर्चा में हैं। मंगलवार रात वह पूर्व विधायक स्वर्ण कमल साहा के आवास पहुंचे, जहां उन्होंने काफी देर तक बैठक की। बताया जाता है कि वह रात करीब 10:30 बजे तक वहां मौजूद रहे। स्वर्ण कमल साहा के बेटे संदीपान साहा उन नेताओं में शामिल हैं, जिन्हें रीतब्रत बनर्जी के खेमे के करीब माना जा रहा है। ऐसे में मदन मित्रा की इस मुलाकात को लेकर राजनीतिक गलियारों में कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। क्या बदल रहे हैं सियासी समीकरण? पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद तृणमूल कांग्रेस के भीतर राजनीतिक समीकरण बदलते नजर आ रहे हैं। कई नेता पार्टी नेतृत्व से दूरी बनाकर अलग खेमे में शामिल हो चुके हैं। हालांकि, अब तक मदन मित्रा को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के करीबी नेताओं में गिना जाता रहा है। उनकी हालिया मुलाकातों ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या वे भी अपना राजनीतिक रुख बदलने की तैयारी में हैं या यह केवल सामान्य राजनीतिक मुलाकात थी। फिलहाल इस पर उनकी ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। जांच पर टिकी निगाहें ईडी अब मदन मित्रा के परिवार से पूछताछ के जरिए कथित वित्तीय लेन-देन और भर्ती भ्रष्टाचार मामले से जुड़े तथ्यों की जांच करेगी। वहीं, राजनीतिक हलकों की नजर इस बात पर भी बनी हुई है कि जांच के साथ-साथ पश्चिम बंगाल की बदलती सियासत में मदन मित्रा आगे क्या कदम उठाते हैं।  

Deepshikha जुलाई 15, 2026 0
Enforcement Directorate (ED) investigation into alleged financial irregularities involving TMC funds, with party bank accounts reportedly frozen during the probe.
TMC के 3 बैंक खाते फ्रीज, 440 करोड़ रुपये पर रोक; 19 खातों की जांच में जुटी ED

कोलकाता: तृणमूल कांग्रेस (TMC) के फंड से जुड़े कथित वित्तीय अनियमितताओं के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की है। एजेंसी ने पार्टी के तीन बैंक खातों को फ्रीज कर दिया है, जिनमें करीब 440 करोड़ रुपये जमा बताए जा रहे हैं। इसके साथ ही ED पार्टी के कुल 19 बैंक खातों के लेन-देन की भी गहन जांच कर रही है। मामले ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में हलचल बढ़ा दी है। आरोप है कि पार्टी फंड के जरिए हुए कुछ वित्तीय लेन-देन संदिग्ध पाए गए हैं, जिसके बाद जांच का दायरा लगातार बढ़ाया जा रहा है। विधायक की शिकायत के बाद शुरू हुई जांच जानकारी के अनुसार, मामले की शुरुआत एक तृणमूल विधायक की शिकायत के आधार पर हुई थी। सबसे पहले बिधाननगर साइबर पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। बाद में वित्तीय लेन-देन में गड़बड़ी के संकेत मिलने पर प्रवर्तन निदेशालय ने मामला अपने हाथ में ले लिया। जांच एजेंसी को कथित तौर पर रिश्वत और अन्य संदिग्ध लेन-देन से जुड़े सुराग मिले हैं। इसी आधार पर तीन बैंक खातों को फ्रीज किया गया है, जबकि अन्य खातों की भी निगरानी की जा रही है। 19 बैंक खातों की जांच जारी सूत्रों के मुताबिक, तृणमूल कांग्रेस के नाम पर कुल 19 बैंक खाते संचालित हैं। इनमें से तीन खातों में लगभग 440 करोड़ रुपये जमा होने की जानकारी सामने आई है। फिलहाल ED इन खातों के लेन-देन की जांच कर रही है और यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि धनराशि का स्रोत और उपयोग क्या था। विमान और हेलीकॉप्टर खरीद की भी जांच ED ने इस मामले में कोलकाता समेत कई स्थानों पर तलाशी अभियान भी चलाया। जांच के दौरान 'केयरवेल एविएशन' नामक कंपनी के कार्यालय और उसके निदेशक के आवास पर भी छापेमारी की गई। जांच एजेंसी का आरोप है कि तृणमूल कांग्रेस फंड से करीब 160 करोड़ रुपये इस कंपनी के खाते में ट्रांसफर किए गए। आरोप है कि इसी धनराशि से एक छोटा विमान और एक हेलीकॉप्टर खरीदा गया। जांचकर्ताओं का दावा है कि बाद में इन दोनों का उपयोग किराये पर लेकर किया गया। अदालत पहुंची तृणमूल कांग्रेस खातों के फ्रीज होने के बाद तृणमूल कांग्रेस ने अदालत का दरवाजा खटखटाया है। पार्टी ने अन्य बैंक खातों के संचालन की अनुमति देने की मांग करते हुए याचिका दाखिल की है। पार्टी का कहना है कि शुरुआत में केवल तीन खाते फ्रीज किए गए थे, लेकिन अब जांच का दायरा बढ़ाया जा रहा है। इस संबंध में तृणमूल कांग्रेस ने अदालत में अतिरिक्त हलफनामा भी दाखिल किया है। गुरुवार को होगी अगली सुनवाई मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति सौगता भट्टाचार्य की पीठ में जारी है। वहीं, न्यायमूर्ति सुब्रता तालुकदार ने विशेष अधिकारी की नियुक्ति सहित अन्य पहलुओं पर सभी पक्षों से जवाब मांगा है। बैंक की ओर से भी अदालत में हलफनामा दाखिल किया गया है। अब इस पूरे मामले पर अगली सुनवाई गुरुवार को होगी।  

Deepshikha जुलाई 9, 2026 0
Rameshwar Oraon
झारखंड शराब घोटाला: ईडी के सामने पेश हुए पूर्व मंत्री रामेश्वर उरांव, शुरू हुई पूछताछ

रांची। झारखंड के चर्चित कथित शराब घोटाला मामले की जांच कर रही प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के समक्ष मंगलवार को राज्य के पूर्व वित्त मंत्री रामेश्वर उरांव पेश हुए। दूसरे समन के बाद वह तय समय पर रांची के एयरपोर्ट रोड स्थित ईडी के जोनल कार्यालय पहुंचे, जहां औपचारिक कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद अधिकारियों ने उनसे पूछताछ शुरू की। यह पूछताछ कथित शराब घोटाले और उससे जुड़े वित्तीय लेन-देन की जांच के सिलसिले में की जा रही है।   रामेश्वर उरांव  के पहले उनके बेटे से भी हुई पूछताछ ईडी ने इससे पहले रामेश्वर उरांव को 30 जून और उनके पुत्र रोहित उरांव को 29 जून को पूछताछ के लिए बुलाया था। हालांकि, दोनों निर्धारित तिथि पर उपस्थित नहीं हुए थे और उन्होंने एजेंसी से तीन सप्ताह का अतिरिक्त समय मांगा था। ईडी ने उनके अनुरोध पर विचार करते हुए तीन सप्ताह की बजाय एक सप्ताह की मोहलत दी और नया समन जारी किया। इसके तहत रोहित उरांव 6 जुलाई को ईडी के समक्ष पेश हुए, जबकि मंगलवार को रामेश्वर उरांव जांच में शामिल होने के लिए कार्यालय पहुंचे।   सूत्रों के अनुसार सूत्रों के अनुसार, ईडी यह जांच योगेंद्र तिवारी से जुड़े कथित शराब घोटाले के विभिन्न पहलुओं को लेकर कर रही है। एजेंसी वित्तीय लेन-देन, प्रशासनिक निर्णयों और मामले से जुड़े अन्य तथ्यों की पड़ताल कर रही है। इसी क्रम में पूर्व वित्त मंत्री से भी कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर पूछताछ की जा रही है। ईडी कार्यालय पहुंचने पर पत्रकारों ने रामेश्वर उरांव से मामले को लेकर सवाल पूछने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। उन्होंने केवल इतना कहा, "मैं 25 साल पुलिस सेवा में रहा हूं। कोई भी गवाह बाहर बयान नहीं देता। जो भी कहना होगा, अंदर जांच एजेंसी के सामने कहूंगा।"   अब इस पूछताछ के बाद ईडी आगे किन लोगों से सवाल-जवाब करेगी और जांच किस दिशा में बढ़ेगी, इस पर राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों की नजर बनी हुई है।

abhishek singh जुलाई 7, 2026 0
ED raid in Jharkhand
झारखंड समेत कई राज्यों में ईडी का एक्शन, 581 करोड़ रुपये की 31 संपत्तियां अटैच

रांची। ईडी ने रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड और रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस लिमिटेड से जुड़े मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए करीब 581 करोड़ 65 लाख रुपये मूल्य की 31 अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से अटैच किया है। ईडी के अनुसार अटैच की गई संपत्तियां झारखंड सहित गोवा, केरल, कर्नाटक, पंजाब, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, महाराष्ट्र, दिल्ली, पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश और राजस्थान में स्थित जमीन के टुकड़ों के रूप में हैं। यह कार्रवाई रिलायंस पावर लिमिटेड से जुड़े मामले में 6 मार्च 2026 को की गई तलाशी के बाद की गई है। 15,729 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्तियां अटैच हो चुकी: जांच एजेंसी ने बताया कि इससे पहले भी बैंक धोखाधड़ी के मामलों में रिलायंस होम फाइनेंस और रिलायंस कम्युनिकेशंस से जुड़ी 15,729 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्तियां अटैच की जा चुकी हैं। इस तरह अंबानी समूह से जुड़ी अटैच संपत्तियों का कुल मूल्य अब 16,310 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। ईडी ने तलाशी के दौरान 2 करोड़ 48 लाख रुपये के फिक्स्ड डिपॉजिट, म्यूचुअल फंड और नकदी भी जब्त किए हैं। इसके अलावा रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड के 13 बैंक खातों में मौजूद 77 करोड़ 86 लाख रुपये भी फ्रीज किए गए हैं।   सीबीआई एफआईआर के आधार पर शुरू की गई थी जांच: ईडी ने बताया कि जांच 22 जुलाई 2025 को कई सीबीआई एफआईआर के आधार पर शुरू की गई थी। जांच में सामने आया कि रिलायंस होम फाइनेंस और रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस ने कई बैंकों और वित्तीय संस्थानों से बड़ी मात्रा में धन जुटाया, जिनमें से करीब 11 हजार करोड़ रुपये से अधिक की राशि बाद में एनपीए में बदल गई. जांच में यह भी सामने आया कि इन कंपनियों से जुटाए गए सार्वजनिक धन को कई शेल कंपनियों के माध्यम से रिलायंस समूह की अन्य कंपनियों में डायवर्ट किया गया। ईडी के अनुसार इन शेल कंपनियों का संबंध अनिल अंबानी समूह से था और इनकी वित्तीय क्षमता बेहद कम थी। ईडी ने कहा है कि मामले में आगे की जांच जारी है और आर्थिक अपराध से जुड़े दोषियों के खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी।

Unknown मार्च 13, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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anjali kumari जुलाई 11, 2026 0