Education News

e-Kalyan Scholarship
ई-कल्याण छात्रवृत्ति में देरी से झारखंड के हजारों विद्यार्थियों की बढ़ी मुश्किलें

रांची। झारखंड में ई-कल्याण पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति की राशि जारी होने में लगातार हो रही देरी से हजारों विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। सत्र 2024-25, 2025-26 और 2026-27 के लिए आवेदन करने वाले बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं को अब तक छात्रवृत्ति का भुगतान नहीं मिला है। इसके कारण आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों के सामने कॉलेज फीस, हॉस्टल शुल्क, किराया और अन्य शैक्षणिक खर्चों का संकट खड़ा हो गया है। कई छात्र पढ़ाई पूरी कर चुके हैं, लेकिन उन्हें अब तक छात्रवृत्ति की राशि नहीं मिली है, जिससे विद्यार्थियों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।   फीस जमा करने और पढ़ाई जारी रखने में हो रही परेशानी रांची सहित राज्य के विभिन्न कॉलेजों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों का कहना है कि ई-कल्याण छात्रवृत्ति उनके लिए उच्च शिक्षा का महत्वपूर्ण सहारा है। समय पर राशि नहीं मिलने के कारण कई छात्रों को फीस जमा करने, हॉस्टल का किराया चुकाने और अन्य खर्च पूरे करने के लिए उधार लेना पड़ रहा है। छात्र संगठनों ने कई बार संबंधित विभाग को ज्ञापन सौंपा और सोशल मीडिया के माध्यम से भी सरकार का ध्यान इस ओर आकर्षित करने की कोशिश की, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया है।   ओबीसी छात्रों पर सबसे ज्यादा असर, बजट पर भी उठे सवाल जानकारी के अनुसार, पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना केंद्र और राज्य सरकार की संयुक्त योजना है, जिसमें 60 प्रतिशत राशि केंद्र और 40 प्रतिशत राशि राज्य सरकार वहन करती है। छात्रों का आरोप है कि फंड जारी होने में देरी और विभागीय स्तर पर लापरवाही के कारण भुगतान अटका हुआ है। झारखंड विधानसभा के मानसून सत्र में छात्रवृत्ति मद के लिए करीब 39 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, लेकिन विद्यार्थियों का कहना है कि यह राशि वास्तविक जरूरत की तुलना में काफी कम है।   सरकार से जल्द समाधान की मांग अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के छात्र नेता तुषार दुबे ने कहा कि सरकार अन्य योजनाओं का भुगतान समय पर कर रही है, लेकिन विद्यार्थियों की छात्रवृत्ति लंबित है। वहीं शोधार्थी चंदन कुमार ने भी मामले को गंभीर बताते हुए शीघ्र भुगतान की मांग की। इस पर कल्याण मंत्री चमरा लिंडा ने कहा कि कुछ जिलों के लिए राशि जारी कर दी गई है और पूरे मामले की समीक्षा कर जल्द स्थिति स्पष्ट की जाएगी। छात्र अब सरकार से लंबित छात्रवृत्ति राशि जल्द जारी करने और ई-कल्याण पोर्टल की तकनीकी समस्याओं को दूर करने की मांग कर रहे हैं।

anjali kumari जुलाई 3, 2026 0
BPSC topper Suditi Bhushan celebrates her State Tax Assistant Commissioner selection a day after her wedding.
मेहंदी का रंग फीका भी नहीं पड़ा और बन गईं अफसर, शादी के अगले ही दिन BPSC में मिली बड़ी सफलता; जानिए सुदिति भूषण की प्रेरणादायक कहानी

पटना: कहते हैं कि मेहनत और सही समय जब एक साथ मिलते हैं, तो सफलता की कहानी मिसाल बन जाती है। बिहार की राजधानी पटना की रहने वाली सुदिति भूषण ने कुछ ऐसा ही कर दिखाया है। शादी के अगले ही दिन उन्हें ऐसी खुशखबरी मिली, जिसने उनके जीवन की नई शुरुआत को और भी यादगार बना दिया। 19 जून 2026 को सुदिति ने उत्तर प्रदेश के गोरखपुर निवासी सौरभ श्रीवास्तव के साथ सात फेरे लिए और 20 जून को घोषित 70वीं बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) परीक्षा के परिणाम में उनका चयन राज्य कर सहायक आयुक्त (State Tax Assistant Commissioner) के प्रतिष्ठित पद पर हो गया। शादी की खुशियों के बीच मिली इस उपलब्धि ने पूरे परिवार और शुभचिंतकों के उत्साह को दोगुना कर दिया। शादी के अगले दिन मिली जिंदगी की सबसे बड़ी खुशखबरी शादी के समारोह की रस्में अभी पूरी भी नहीं हुई थीं कि अगले दिन बीपीएससी का परिणाम जारी हो गया। रिजल्ट में सुदिति ने शानदार प्रदर्शन करते हुए राज्य कर सहायक आयुक्त के पद के लिए सफलता हासिल की। दिलचस्प बात यह है कि उनके पति सौरभ श्रीवास्तव भी प्रशासनिक सेवा में हैं और वर्तमान में कार्यपालक दंडाधिकारी (Executive Magistrate) के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। इस तरह यह दंपति अब प्रशासनिक सेवाओं से जुड़ी एक प्रेरणादायक जोड़ी बन गया है। यह पहली सफलता नहीं, पहले भी पास कर चुकी हैं BPSC सुदिति भूषण की यह उपलब्धि अचानक मिली सफलता नहीं, बल्कि वर्षों की मेहनत और निरंतर प्रयास का परिणाम है। इससे पहले उन्होंने 64वीं बीपीएससी परीक्षा भी उत्तीर्ण की थी। उस परीक्षा में उन्होंने पूरे बिहार में 486वीं रैंक हासिल की थी, जिसके आधार पर उन्हें अंचल अधिकारी (CO) का पद मिला था। वर्तमान में वह बक्सर जिले में चकबंदी पदाधिकारी के रूप में कार्यरत थीं। हालांकि, उनका लक्ष्य इससे भी ऊंचा था। उन्होंने नौकरी के साथ अपनी पढ़ाई जारी रखी और लगातार मेहनत करते हुए दूसरे प्रयास में अपनी रैंक में उल्लेखनीय सुधार कर राज्य कर सहायक आयुक्त का पद हासिल किया। पटना के प्रतिष्ठित संस्थानों से की पढ़ाई मूल रूप से बिहार के भोजपुर जिले के बड़का डुमरा गांव की रहने वाली सुदिति की शुरुआती शिक्षा पटना में हुई। उन्होंने सेंट जोसेफ कॉन्वेंट स्कूल, पटना से स्कूली शिक्षा पूरी की। इसके बाद पटना वीमेंस कॉलेज से भूगोल (Geography) ऑनर्स में स्नातक की डिग्री हासिल की। कॉलेज के दिनों से ही उनका सपना सिविल सेवा में जाने का था। उन्होंने इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए लगातार तैयारी की और अपनी मेहनत के दम पर सफलता प्राप्त की। प्रशासनिक और शैक्षणिक माहौल वाले परिवार से हैं सुदिति सुदिति की सफलता के पीछे उनके परिवार का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उनके घर का वातावरण शिक्षा और प्रशासनिक सेवाओं से जुड़ा रहा, जिसने उन्हें हमेशा बेहतर करने के लिए प्रेरित किया। उनके पिता डॉ. कृष्ण भूषण प्रसाद भारतीय स्टेट बैंक (SBI) से सेवानिवृत्त अधिकारी हैं। उनकी मां डॉ. निभा श्रीवास्तव आकाशवाणी पटना में उद्घोषिका हैं। उनकी बड़ी बहन मेधा भूषण भारतीय पुलिस सेवा (IPS) की अधिकारी हैं। वहीं उनके छोटे भाई सत्यम भूषण श्रीवास्तव Banaras Hindu University से एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहे हैं। मेहनत और धैर्य की मिसाल सुदिति भूषण की कहानी यह बताती है कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत लगातार जारी रहे, तो सफलता निश्चित रूप से मिलती है। नौकरी के साथ तैयारी करना, पहले से मिली सरकारी नौकरी के बावजूद बेहतर रैंक के लिए प्रयास जारी रखना और जीवन के सबसे महत्वपूर्ण व्यक्तिगत अवसर के बीच भी अपनी उपलब्धि हासिल करना उनकी दृढ़ इच्छाशक्ति का प्रमाण है। उनकी सफलता आज हजारों बीपीएससी और सिविल सेवा अभ्यर्थियों के लिए प्रेरणा बन चुकी है।  

surbhi जुलाई 3, 2026 0
CBSE Class 10 Result
CBSE कक्षा 10 सेकेंड बोर्ड परीक्षा का रिजल्ट जल्द, लाखों छात्रों को आधिकारिक घोषणा का इंतजार

नई दिल्ली, एजेंसियां। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) कक्षा 10 की सेकेंड बोर्ड परीक्षा (फेज-2) का परिणाम जल्द जारी कर सकता है। हालांकि बोर्ड ने अभी तक रिजल्ट की आधिकारिक तारीख और समय की घोषणा नहीं की है। छह लाख से अधिक छात्र अपने परिणाम का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।   जल्द जारी हो सकता है रिजल्ट   मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, CBSE किसी भी समय सेकेंड बोर्ड परीक्षा का परिणाम घोषित कर सकता है। रिजल्ट जारी होने के बाद छात्र अपना स्कोरकार्ड CBSE की आधिकारिक वेबसाइट, DigiLocker और UMANG ऐप के माध्यम से देख सकेंगे।   'बेटर मार्क्स रूल' से छात्रों को मिलेगा फायदा   इस वर्ष लागू नई व्यवस्था के तहत यदि किसी छात्र ने दोनों बोर्ड परीक्षाओं में हिस्सा लिया है, तो जिस विषय में अधिक अंक होंगे, वही अंतिम परिणाम में जोड़े जाएंगे। इससे छात्रों को अपने प्रदर्शन में सुधार का बेहतर अवसर मिलेगा।   मार्कशीट पर नहीं होगा 'कंपार्टमेंट' का उल्लेख   CBSE ने स्पष्ट किया है कि सेकेंड बोर्ड परीक्षा देने वाले छात्रों के पास प्रमाणपत्र या अंतिम मार्कशीट पर 'कंपार्टमेंट' का उल्लेख नहीं किया जाएगा। इससे कक्षा 11 में प्रवेश या आगे की पढ़ाई पर किसी प्रकार का नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा।   अभिभावकों और कर्मचारियों को सलाह   बोर्ड ने छात्रों और अभिभावकों से अपील की है कि वे रिजल्ट से जुड़ी किसी भी अपुष्ट जानकारी या सोशल मीडिया पर चल रही अफवाहों पर भरोसा न करें। केवल CBSE के आधिकारिक पोर्टल पर जारी सूचना को ही सही माना जाए।

anjali kumari जुलाई 3, 2026 0
Fee Regulation Committee
दिल्ली सरकार का बड़ा फैसला, निजी स्कूलों में 15 जुलाई तक बनेगी फीस रेगुलेशन कमेटी

नई दिल्ली, एजेंसियां। दिल्ली सरकार के शिक्षा निदेशालय ने राजधानी के सभी मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों को 15 जुलाई 2026 तक स्कूल-स्तरीय फीस रेगुलेशन कमेटी गठित करने का निर्देश दिया है। सरकार का कहना है कि इस कदम का उद्देश्य स्कूल फीस निर्धारण प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाना है।   15 जुलाई तक कमेटी बनाना अनिवार्य   शिक्षा निदेशालय के आदेश के अनुसार, सभी निजी स्कूलों को निर्धारित समय सीमा के भीतर फीस रेगुलेशन कमेटी का गठन करना होगा। इस कमेटी में स्कूल प्रबंधन, शिक्षक और अभिभावकों के प्रतिनिधियों को शामिल किया जाएगा, ताकि फीस से जुड़े फैसलों में सभी पक्षों की भागीदारी सुनिश्चित हो सके।   नई फीस मंजूर होने तक पुरानी फीस ही रहेगी लागू   सरकार ने स्पष्ट किया है कि जब तक नई फीस संरचना को मंजूरी नहीं मिल जाती, तब तक स्कूल पहले से लागू फीस ही वसूल सकेंगे। किसी भी तरह की मनमानी फीस वृद्धि की अनुमति नहीं होगी।   अभिभावकों को मिलेगी राहत   सरकार का मानना है कि इस व्यवस्था से फीस निर्धारण में पारदर्शिता बढ़ेगी और अभिभावकों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ नहीं पड़ेगा। साथ ही स्कूलों को भी निर्धारित नियमों के तहत ही फीस संबंधी निर्णय लेने होंगे।   शिक्षा विभाग रखेगा निगरानी   शिक्षा विभाग ने कहा है कि सभी स्कूलों को निर्देशों का पालन करना होगा। नियमों के उल्लंघन की स्थिति में संबंधित स्कूलों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।

anjali kumari जुलाई 3, 2026 0
Students exploring career options after Class 12 with information on healthcare, IT, agriculture, hospitality, and vocational courses.
12वीं के बाद क्या करें? बिहार-झारखंड में इन कोर्सेज की बढ़ी डिमांड, शानदार करियर और बेहतर नौकरी के मिल सकते हैं अवसर

नई दिल्ली: 12वीं की पढ़ाई पूरी करने के बाद अधिकांश छात्रों और उनके अभिभावकों के सामने सबसे बड़ा सवाल होता है कि आगे कौन-सा कोर्स चुना जाए, जिससे बेहतर करियर और अच्छी नौकरी के अवसर मिल सकें। पहले जहां अधिकांश छात्र इंजीनियरिंग, मेडिकल या सामान्य ग्रेजुएशन को ही प्राथमिकता देते थे, वहीं अब बदलते समय के साथ रोजगार का बाजार भी तेजी से बदल रहा है। बिहार और झारखंड जैसे राज्यों में हेल्थकेयर, आईटी, कृषि, हॉस्पिटैलिटी और स्किल-बेस्ड इंडस्ट्री का तेजी से विस्तार हो रहा है। ऐसे में कई ऐसे प्रोफेशनल कोर्स सामने आए हैं, जिनकी मांग लगातार बढ़ रही है और आने वाले वर्षों में इनमें रोजगार की संभावनाएं भी मजबूत मानी जा रही हैं। अगर आपने 12वीं पास कर ली है और अपने भविष्य को लेकर सही फैसला लेना चाहते हैं, तो ये कोर्स आपके लिए बेहतरीन विकल्प साबित हो सकते हैं। 1. पैरामेडिकल कोर्स: हेल्थ सेक्टर में बढ़ रही मांग देशभर में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के साथ प्रशिक्षित पैरामेडिकल प्रोफेशनल्स की जरूरत लगातार बढ़ रही है। बिहार और झारखंड में भी नए अस्पताल, मेडिकल कॉलेज और डायग्नोस्टिक सेंटर खुलने से इस क्षेत्र में रोजगार के अवसर बढ़े हैं। 12वीं (साइंस) के बाद छात्र इन कोर्सों का चयन कर सकते हैं— DMLT (डिप्लोमा इन मेडिकल लैब टेक्नोलॉजी) एक्स-रे टेक्नोलॉजी रेडियोलॉजी ऑपरेशन थिएटर टेक्निशियन फिजियोथेरेपी इन कोर्सों के बाद सरकारी अस्पतालों के अलावा निजी अस्पतालों, लैब और डायग्नोस्टिक सेंटरों में नौकरी के अच्छे अवसर मिलते हैं। 2. आईटी और कंप्यूटर कोर्स: डिजिटल दुनिया में बढ़ रहे अवसर डिजिटल इंडिया, ऑनलाइन सेवाओं और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते उपयोग के कारण आईटी सेक्टर लगातार विस्तार कर रहा है। अगर आपकी रुचि कंप्यूटर और टेक्नोलॉजी में है, तो ये कोर्स आपके लिए बेहतर विकल्प हो सकते हैं— BCA डेटा एनालिटिक्स साइबर सिक्योरिटी वेब डेवलपमेंट सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट क्लाउड कंप्यूटिंग इन क्षेत्रों में देश के साथ-साथ विदेशों में भी रोजगार के अवसर मौजूद हैं। इसके अलावा फ्रीलांसिंग और वर्क फ्रॉम होम जैसी संभावनाएं भी तेजी से बढ़ रही हैं। 3. एग्रीकल्चर और फूड टेक्नोलॉजी: कृषि आधारित राज्यों में बेहतर भविष्य बिहार और झारखंड मुख्य रूप से कृषि प्रधान राज्य हैं। ऐसे में कृषि और खाद्य प्रसंस्करण से जुड़े प्रोफेशनल्स की मांग लगातार बढ़ रही है। इस क्षेत्र में छात्र निम्नलिखित कोर्स कर सकते हैं— B.Sc Agriculture फूड टेक्नोलॉजी डेयरी टेक्नोलॉजी हॉर्टिकल्चर इन कोर्सों के बाद सरकारी विभागों, कृषि अनुसंधान संस्थानों, फूड प्रोसेसिंग कंपनियों और एग्री-बिजनेस सेक्टर में करियर बनाया जा सकता है। 4. होटल मैनेजमेंट और टूरिज्म: सर्विस सेक्टर में बढ़ते अवसर पर्यटन और हॉस्पिटैलिटी उद्योग लगातार विकसित हो रहा है। होटल, एयरलाइन, ट्रैवल एजेंसी, रिसॉर्ट और रेस्टोरेंट इंडस्ट्री में प्रशिक्षित युवाओं की मांग बनी रहती है। 12वीं के बाद छात्र इन क्षेत्रों में करियर बना सकते हैं— होटल मैनेजमेंट ट्रैवल एंड टूरिज्म फूड प्रोडक्शन हॉस्पिटैलिटी मैनेजमेंट इस क्षेत्र में देश के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी रोजगार के अवसर उपलब्ध हैं। 5. नर्सिंग और हेल्थकेयर: हमेशा बनी रहती है डिमांड हेल्थकेयर ऐसा क्षेत्र है जहां प्रशिक्षित कर्मचारियों की आवश्यकता कभी कम नहीं होती। छात्र इन कोर्सों का चयन कर सकते हैं— B.Sc Nursing GNM ANM बिहार और झारखंड में नए मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों के खुलने से प्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ की मांग लगातार बढ़ रही है। सरकारी और निजी दोनों क्षेत्रों में रोजगार की अच्छी संभावनाएं उपलब्ध हैं। 6. स्किल-बेस्ड और वोकेशनल कोर्स: कम समय में रोजगार की तैयारी हर छात्र लंबी अवधि की पढ़ाई नहीं करना चाहता। ऐसे छात्रों के लिए स्किल-बेस्ड और वोकेशनल कोर्स बेहतरीन विकल्प हो सकते हैं। इनमें शामिल हैं— इलेक्ट्रिशियन फिटर वेल्डर ऑटोमोबाइल टेक्नोलॉजी रेफ्रिजरेशन एवं एयर कंडीशनिंग सोलर टेक्नोलॉजी इलेक्ट्रॉनिक्स आईटीआई और अन्य व्यावसायिक संस्थानों के ये कोर्स कम समय में रोजगार योग्य कौशल प्रदान करते हैं और उद्योगों में इनकी अच्छी मांग रहती है। कोर्स चुनते समय किन बातों का रखें ध्यान? विशेषज्ञों के अनुसार केवल ट्रेंड देखकर कोर्स का चयन नहीं करना चाहिए। छात्रों को अपनी रुचि, योग्यता, भविष्य में रोजगार की संभावनाएं, कोर्स की गुणवत्ता और संस्थान की विश्वसनीयता को ध्यान में रखते हुए निर्णय लेना चाहिए। सही कोर्स का चुनाव न केवल बेहतर नौकरी दिला सकता है, बल्कि लंबे समय में सफल करियर की मजबूत नींव भी बन सकता है।  

surbhi जुलाई 2, 2026 0
Neet - ug 2026
NEET-UG परीक्षा सुधारों पर 1 जुलाई को संसदीय समिति की अहम बैठक, NTA अधिकारियों से होगी पूछताछ

नई दिल्ली, एजेंसियां। NEET-UG 2026 परीक्षा से जुड़े विवाद और दोबारा आयोजित परीक्षा के बाद अब 1 जुलाई को संसद की शिक्षा, महिला, बाल, युवा एवं खेल संबंधी स्थायी समिति की महत्वपूर्ण बैठक होगी। इस बैठक में उच्च शिक्षा विभाग और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) के वरिष्ठ अधिकारियों को तलब किया गया है।   परीक्षा सुधारों पर होगा मंथन   बैठक में 21 जून को आयोजित NEET-UG री-एग्जाम से मिले अनुभवों, परीक्षा प्रणाली में सुधार और भविष्य में पेपर लीक जैसी घटनाओं को रोकने के उपायों पर चर्चा होगी। समिति NTA की कार्यप्रणाली और परीक्षा की पारदर्शिता बढ़ाने के लिए उठाए गए कदमों की भी समीक्षा करेगी।   के. राधाकृष्णन भी देंगे प्रस्तुति   पूर्व ISRO अध्यक्ष के. राधाकृष्णन, जो NTA सुधारों की निगरानी के लिए गठित उच्चस्तरीय समिति के अध्यक्ष हैं, बैठक में अपनी सिफारिशें प्रस्तुत करेंगे। इन सुझावों के आधार पर NTA की परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और विश्वसनीय बनाने की दिशा में आगे की रणनीति तय की जाएगी।   CBI जांच और रिजल्ट पर भी रहेगी नजर   समिति को NEET-UG पेपर लीक मामले की CBI जांच की प्रगति से भी अवगत कराया जाएगा। साथ ही री-एग्जाम के बाद उत्तर कुंजी, परिणाम जारी करने की प्रक्रिया और भविष्य के सुधारों पर भी चर्चा होने की संभावना है।

anjali kumari जून 30, 2026 0
Jharkhand Teacher Appointment
झारखंड में 1,042 सहायक शिक्षकों को मिला नियुक्ति पत्र, सीएम हेमंत सोरेन बोले- शिक्षा से बदलेगा राज्य का भविष्य

रांची। झारखंड सरकार ने राज्य के सरकारी विद्यालयों में शिक्षकों की कमी दूर करने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए 1,042 नवचयनित सहायक शिक्षकों को नियुक्ति पत्र सौंपे। रांची के खेलगांव में आयोजित भव्य समारोह में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने नव नियुक्त शिक्षकों को जॉइनिंग लेटर प्रदान करते हुए उन्हें शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने और आने वाली पीढ़ी के भविष्य को संवारने की जिम्मेदारी निभाने का आह्वान किया।   इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि नियुक्ति पत्र मिलने से शिक्षकों के साथ-साथ उनके परिवारों के चेहरों पर भी खुशी साफ दिखाई दे रही है। उन्होंने कहा कि एक शिक्षक केवल पढ़ाने का कार्य नहीं करता, बल्कि समाज और देश का भविष्य तैयार करता है। सरकारी संस्थानों पर उठने वाले सवालों का जवाब बेहतर कार्य और जिम्मेदार व्यवहार से दिया जा सकता है।   मुख्यमंत्री ने बताया मुख्यमंत्री ने बताया कि उनकी सरकार ने पिछले कार्यकाल सहित अब तक 55 हजार से अधिक पदों पर नियुक्तियां दी हैं। उन्होंने कहा कि राज्य में शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस की सफलता का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इन स्कूलों में प्रवेश के लिए 50 हजार से अधिक आवेदन आना इस बात का प्रमाण है कि सरकारी शिक्षा व्यवस्था पर लोगों का भरोसा बढ़ रहा है। उन्होंने विज्ञान शिक्षकों की नियुक्ति को भी महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि इससे सरकारी स्कूलों के छात्र भी डॉक्टर और इंजीनियर बनने का सपना पूरा कर सकेंगे।   समारोह में वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने कहा समारोह में वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन राज्य गठन के मूल उद्देश्य को पूरा करने की दिशा में काम कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि वर्ष 2020 से अब तक 38,903 युवाओं को सरकारी नौकरियां दी जा चुकी हैं। इस दौरान मुख्यमंत्री ने वर्ष 2026 के सतत व्यावसायिक विकास (CPD) कार्यक्रम का भी उद्घाटन किया, जिसका उद्देश्य झारखंड में शिक्षण गुणवत्ता और शिक्षा के स्तर को और बेहतर बनाना है।

anjali kumari जून 29, 2026 0
Teachers Protest
SIR ड्यूटी पर जा रहे शिक्षकों का विरोध, बोले- गैर शैक्षणिक कार्य से पढ़ाई हो रही चौपट

रांची। झारखंड में 30 जून से शुरू होने जा रहे विशेष गहन मतदाता पुनरीक्षण (SIR) अभियान को लेकर शिक्षक संगठनों और सरकार के बीच विवाद गहरा गया है। अभियान के तहत बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) घर-घर जाकर मतदाताओं का सत्यापन करेंगे। इस कार्य में बड़ी संख्या में शिक्षकों की प्रतिनियुक्ति किए जाने पर झारखंड माध्यमिक शिक्षक संघ ने कड़ा विरोध दर्ज कराया है। संघ का कहना है कि पहले से ही शिक्षकों की कमी से जूझ रहे सरकारी विद्यालयों में इस फैसले से छात्रों की पढ़ाई पर प्रतिकूल असर पड़ेगा।   शिक्षक संघ ने सरकार से की पुनर्विचार की मांग संघ के प्रदेश महासचिव गंगा प्रसाद यादव ने कहा कि शिक्षकों का मूल दायित्व गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना है, लेकिन उन्हें लगातार चुनाव, जनगणना और मतदाता पुनरीक्षण जैसे गैर शैक्षणिक कार्यों में लगाया जा रहा है। इससे विशेष रूप से 10वीं और 12वीं के विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित होती है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि SIR अभियान में शिक्षकों की ड्यूटी लगाने के निर्णय पर पुनर्विचार किया जाए।   जिला सचिव संजय यादव ने भी कहा कि जनगणना के बाद अब मतदाता पुनरीक्षण की जिम्मेदारी मिलने से विद्यालयों में नियमित कक्षाएं प्रभावित होंगी और इसका सीधा नुकसान विद्यार्थियों को उठाना पड़ेगा।   अधिकारियों ने बताया जरूरी अभियान चुनाव से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि मतदाता सूची का विशेष पुनरीक्षण लोकतांत्रिक प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है। राज्य के करीब 24,520 मतदान केंद्रों पर अभियान सफल बनाने के लिए पर्याप्त मानव संसाधन की आवश्यकता है। जानकारी के अनुसार, लगभग 50 हजार बीएलओ में 7,500 शिक्षक पहले से कार्यरत हैं और आवश्यकता पड़ने पर 25 हजार से अधिक शिक्षकों की सेवाएं ली जा सकती हैं। अधिकारियों का दावा है कि जिन स्कूलों में शिक्षकों की कमी है, वहां पढ़ाई प्रभावित न हो, इसके लिए आवश्यक व्यवस्था की जाएगी।   7 अक्टूबर को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित होने तक चलने वाले इस अभियान के बीच शिक्षा और चुनावी जिम्मेदारियों के संतुलन को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि सरकार शिक्षक संगठनों की मांगों पर कोई वैकल्पिक व्यवस्था करती है या अपने मौजूदा फैसले पर कायम रहती है।

anjali kumari जून 29, 2026 0
Ranchi School Holiday
मोहर्रम पर कल रांची के सभी स्कूल रहेंगे बंद

रांची। मोहर्रम पर्व के अवसर पर 27 जून (शनिवार) को रांची जिले के विभिन्न क्षेत्रों में ताजिया और अखाड़ा जुलूस निकाले जाएंगे। बड़ी संख्या में धार्मिक जुलूसों के कारण शहर के कई प्रमुख मार्गों पर यातायात प्रभावित रहने की संभावना को देखते हुए जिला प्रशासन ने एहतियाती कदम उठाते हुए जिले के सभी सरकारी, गैर-सरकारी, सहायता प्राप्त और निजी विद्यालयों में एक दिन का अवकाश घोषित किया है।   रांची के उपायुक्त मंजूनाथ भजन्त्री के निर्देश पर जारी आदेश के अनुसार, स्कूली बच्चों की सुरक्षा और सुगम यातायात व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया है। प्रशासन का मानना है कि जुलूस के दौरान शहर के विभिन्न इलाकों में भारी भीड़ और ट्रैफिक डायवर्जन रहेगा, जिससे विद्यार्थियों और अभिभावकों को परेशानी हो सकती है।   जरूरी परीक्षाओं को मिली सशर्त अनुमति जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जिन विद्यालयों में पहले से निर्धारित परीक्षाएं आयोजित की जानी अत्यंत आवश्यक हैं, वे जिला शिक्षा पदाधिकारी (डीईओ) रांची को पूर्व सूचना देकर परीक्षा आयोजित कर सकते हैं। इसके अलावा सभी शैक्षणिक गतिविधियां 27 जून को स्थगित रहेंगी।   ट्रैफिक व्यवस्था में रहेगा बदलाव मोहर्रम के अवसर पर शहर के कई प्रमुख मार्गों से ताजिया और अखाड़ा जुलूस गुजरेंगे। इसे देखते हुए यातायात पुलिस द्वारा विशेष ट्रैफिक प्लान लागू किया जाएगा। कई मार्गों पर वाहनों की आवाजाही सीमित या डायवर्ट की जा सकती है। प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे आवश्यक होने पर ही घर से निकलें तथा वैकल्पिक मार्गों का उपयोग करें।   शांति और भाईचारे के साथ पर्व मनाने की अपील इस बीच शिया समुदाय के प्रतिनिधिमंडल ने उपायुक्त मंजूनाथ भजन्त्री से मुलाकात कर उन्हें मुख्य जुलूस में शामिल होने का निमंत्रण दिया। उपायुक्त ने भरोसा दिलाया कि जिला प्रशासन मोहर्रम को शांतिपूर्ण और गरिमामय ढंग से संपन्न कराने के लिए पूरी तरह तैयार है।   मौलाना तहजीब उल हसन रिजवी समेत शिया समुदाय के प्रतिनिधियों ने भी प्रशासन के सहयोग की सराहना करते हुए कहा कि मोहर्रम का आयोजन पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार शांति, भाईचारे और धार्मिक अनुशासन के साथ किया जाएगा। प्रशासन ने सभी नागरिकों, विद्यालय प्रबंधन और अभिभावकों से सहयोग बनाए रखने तथा सामाजिक सौहार्द कायम रखने की अपील की है।

anjali kumari जून 26, 2026 0
National Teachers Award 2026
राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार 2026 के लिए आवेदन शुरू, 10 जुलाई तक कर सकेंगे ऑनलाइन आवेदन

नई दिल्ली, एजेंसियां। देशभर के शिक्षकों के लिए एक बड़ी खबर है। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार 2026 के लिए ऑनलाइन आवेदन और नामांकन प्रक्रिया शुरू कर दी है। पात्र शिक्षक 15 जून से 10 जुलाई 2026 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। इस पुरस्कार का उद्देश्य स्कूल शिक्षा में उत्कृष्ट योगदान देने वाले शिक्षकों को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित करना है।   कौन कर सकता है आवेदन?   इस पुरस्कार के लिए केंद्र सरकार, राज्य सरकार, केंद्र शासित प्रदेशों, स्थानीय निकायों, सहायता प्राप्त (Aided) तथा मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों में कार्यरत पात्र शिक्षक आवेदन कर सकते हैं। आवेदन निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुसार ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से स्वीकार किए जाएंगे।   आवेदन की अंतिम तिथि   शिक्षक 10 जुलाई 2026 तक अपना ऑनलाइन आवेदन भर सकते हैं। इसके बाद 11 से 13 जुलाई के बीच अंतिम सबमिशन की प्रक्रिया पूरी होगी। आवेदन के बाद जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर चयन की प्रक्रिया होगी।   ऐसे होगा चयन   आवेदनों की पहले जिला और क्षेत्रीय स्तर पर जांच की जाएगी। इसके बाद राज्य स्तर की चयन समिति योग्य उम्मीदवारों का चयन करेगी। अंतिम चरण में राष्ट्रीय जूरी चयनित शिक्षकों का मूल्यांकन करेगी और अंतिम सूची तैयार करेगी।   शिक्षक दिवस पर मिलेगा सम्मान   चयनित शिक्षकों को 5 सितंबर, शिक्षक दिवस के अवसर पर आयोजित राष्ट्रीय समारोह में सम्मानित किया जाएगा। यह पुरस्कार शिक्षा के क्षेत्र में नवाचार, गुणवत्तापूर्ण शिक्षण और विद्यार्थियों के समग्र विकास में उत्कृष्ट योगदान देने वाले शिक्षकों को दिया जाता है।   शिक्षा मंत्रालय ने योग्य शिक्षकों से की आवेदन की अपील   शिक्षा मंत्रालय ने देशभर के योग्य शिक्षकों से समय सीमा के भीतर आवेदन करने की अपील की है, ताकि उत्कृष्ट कार्य करने वाले शिक्षकों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान और सम्मान मिल सके।

anjali kumari जून 26, 2026 0
Students checking Delhi University PG admission seat allotment and accepting seats online through the CSAS portal.
DU PG Admission 2026: सीट एक्सेप्ट करने का तरीका, जानें पूरा स्टेप-बाय-स्टेप प्रोसेस

DU PG Admission 2026: दिल्ली यूनिवर्सिटी में पोस्टग्रेजुएट (PG) कोर्स में प्रवेश का इंतजार कर रहे छात्रों के लिए अहम अपडेट है। विश्वविद्यालय ने CSAS-PG (Common Seat Allocation System) के तहत पीजी एडमिशन की दूसरी सीट अलॉटमेंट लिस्ट जारी कर दी है। CUET PG 2026 के स्कोर के आधार पर दाखिले दिए जा रहे हैं। जिन उम्मीदवारों को दूसरे राउंड में सीट आवंटित हुई है, उन्हें तय समय सीमा के भीतर सीट स्वीकार करनी होगी और फीस जमा करनी होगी। निर्धारित समय के भीतर प्रक्रिया पूरी नहीं करने पर सीट रद्द हो सकती है। कब तक करनी होगी सीट एक्सेप्ट? दिल्ली यूनिवर्सिटी के अनुसार, दूसरे राउंड में सीट पाने वाले उम्मीदवारों को 24 जून 2026 तक अपनी सीट स्वीकार करनी होगी। वहीं, सीट कन्फर्म करने के लिए फीस जमा करने की अंतिम तिथि 27 जून 2026 निर्धारित की गई है। विश्वविद्यालय ने छात्रों को सलाह दी है कि वे अंतिम समय का इंतजार करने के बजाय जल्द से जल्द प्रक्रिया पूरी कर लें। DU PG Admission 2026: ऐसे करें सीट एक्सेप्ट यदि आपको दूसरी अलॉटमेंट लिस्ट में सीट मिली है, तो नीचे दिए गए स्टेप्स फॉलो करें: स्टेप 1: दिल्ली यूनिवर्सिटी के CSAS-PG पोर्टल पर जाएं। स्टेप 2: अपने CUET PG आवेदन नंबर और पासवर्ड की मदद से लॉग इन करें। स्टेप 3: होमपेज पर दिखाई दे रहे Second Seat Allocation List 2026 लिंक पर क्लिक करें। स्टेप 4: स्क्रीन पर आपका सीट अलॉटमेंट स्टेटस दिखाई देगा। स्टेप 5: यदि सीट आवंटित हुई है, तो Seat Acceptance विकल्प पर क्लिक करें। स्टेप 6: अलॉटमेंट लेटर डाउनलोड करें और भविष्य के लिए उसका प्रिंटआउट सुरक्षित रख लें। दूसरे राउंड में कितने छात्रों को मिली सीट? दिल्ली यूनिवर्सिटी के मुताबिक, पीजी एडमिशन के दूसरे चरण में कुल 2,964 नए सीट अलॉटमेंट किए गए हैं। पहले राउंड में सीट पाने वाले 3,399 छात्रों ने अपनी सीट फ्रीज की थी। 2,448 उम्मीदवारों ने अपग्रेड का विकल्प चुना। 2,303 छात्रों ने न तो फ्रीज और न ही अपग्रेड का विकल्प चुना। इससे पहले पहले राउंड में कुल 11,548 सीटें आवंटित की गई थीं। इनमें से 10,393 छात्रों ने सीट स्वीकार की थी, जबकि 8,150 उम्मीदवारों ने फीस जमा कर अपनी एडमिशन प्रक्रिया पूरी कर ली थी। छात्रों के लिए जरूरी सलाह यदि आपको दूसरी सूची में सीट मिली है, तो समय सीमा समाप्त होने से पहले सीट स्वीकार करें और फीस जमा करना न भूलें। किसी भी देरी की स्थिति में आपका एडमिशन प्रभावित हो सकता है।  

surbhi जून 24, 2026 0
Students discuss the NEET UG 2026 re-exam after facing a challenging Physics section.
NEET UG Re-Exam 2026: फिजिक्स ने बढ़ाई छात्रों की टेंशन, बायोलॉजी से अच्छे स्कोर की उम्मीद; जानिए कैसा रहा पूरा पेपर

नई दिल्ली: NEET UG 2026 री-एग्जाम 21 जून को सफलतापूर्वक आयोजित किया गया। परीक्षा खत्म होने के बाद देशभर के छात्रों और विषय विशेषज्ञों की शुरुआती प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं। अधिकांश छात्रों का मानना है कि इस बार का पेपर कुल मिलाकर मॉडरेट से थोड़ा कठिन था, जबकि फिजिक्स सेक्शन ने सबसे ज्यादा चुनौती पेश की। दिल्ली के एक अभ्यर्थी ने बताया कि पूरा पेपर संतुलित था, लेकिन फिजिक्स के प्रश्न लंबे और पिछली परीक्षा की तुलना में अधिक कठिन थे। वहीं बायोलॉजी का स्तर आसान से मध्यम रहा और कैमिस्ट्री को छात्रों ने औसत कठिनाई वाला बताया। एक अन्य छात्र ने कहा कि यह उनका पहला प्रयास था और उन्हें लगभग 500 अंक मिलने की उम्मीद है। उन्होंने परीक्षा केंद्र पर की गई व्यवस्थाओं की भी सराहना की। जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर से परीक्षा देने वाले एक अभ्यर्थी के अनुसार, पेपर का अनुभव अच्छा रहा, हालांकि फिजिक्स सेक्शन अपेक्षाकृत कठिन था। वहीं चेन्नई के छात्र तरुण ने भी माना कि री-एग्जाम पहले की तुलना में अधिक चुनौतीपूर्ण रहा। फिजिक्स बना सबसे कठिन सेक्शन छात्रों के अनुसार फिजिक्स में कॉन्सेप्ट आधारित और न्यूमेरिकल प्रश्नों की संख्या अधिक थी। कई सवालों को हल करने में ज्यादा समय लगा, जिससे टाइम मैनेजमेंट प्रभावित हुआ। इसी वजह से अधिकांश अभ्यर्थियों ने फिजिक्स को सबसे कठिन सेक्शन बताया। बायोलॉजी ने दी राहत बायोलॉजी सेक्शन को छात्रों ने आसान से मध्यम स्तर का बताया। इसमें अधिकतर प्रश्न NCERT आधारित और सीधे पूछे गए थे। जिन छात्रों की बायोलॉजी पर मजबूत पकड़ है, उन्हें अच्छे अंक मिलने की संभावना जताई जा रही है। कैमिस्ट्री रही संतुलित कैमिस्ट्री सेक्शन का स्तर मध्यम रहा। इसमें थ्योरी और एप्लिकेशन आधारित प्रश्नों का संतुलन देखने को मिला। हालांकि कुछ छात्रों ने कहा कि सेक्शन लंबा था, जिसके कारण समय प्रबंधन चुनौतीपूर्ण रहा। कुल मिलाकर छात्रों की राय के अनुसार NEET UG Re-Exam 2026 में फिजिक्स सबसे मुश्किल, कैमिस्ट्री मध्यम और बायोलॉजी अपेक्षाकृत आसान रही।  

surbhi जून 22, 2026 0
Prime Minister Narendra Modi waits at Delhi airport to avoid traffic disruption during NEET-UG 2026 re-examination hours.
दिल्ली लौटने के बाद भी पीएम आवास नहीं गए मोदी, NEET अभ्यर्थियों की सुविधा के लिए एयरपोर्ट पर रुके

  नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को NEET-UG 2026 पुनर्परीक्षा में शामिल होने वाले लाखों छात्रों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए एक विशेष निर्णय लिया। दिल्ली लौटने के बाद प्रधानमंत्री सीधे अपने आवास नहीं गए, बल्कि कुछ समय तक एयरपोर्ट पर ही रुके रहे ताकि उनके काफिले की आवाजाही से राजधानी की सड़कों पर यातायात प्रभावित न हो। जानकारी के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी दोपहर करीब 1:15 बजे दिल्ली हवाई अड्डे पर पहुंचे। इसी दौरान दोपहर 2 बजे से राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET-UG) की पुनर्परीक्षा शुरू होने वाली थी। ऐसे में प्रधानमंत्री ने एयरपोर्ट से निकलने में देरी करने का निर्णय लिया, जिससे परीक्षा केंद्रों की ओर जा रहे छात्रों को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। छात्रों की सुविधा को दी प्राथमिकता सूत्रों के मुताबिक प्रधानमंत्री नहीं चाहते थे कि उनके वीवीआईपी काफिले की वजह से राजधानी में ट्रैफिक जाम की स्थिति बने और परीक्षा देने जा रहे विद्यार्थी समय पर अपने केंद्रों तक न पहुंच सकें। इसी कारण उन्होंने कुछ समय एयरपोर्ट पर ही रुककर यातायात व्यवस्था को प्रभावित होने से बचाने का प्रयास किया। कड़ी सुरक्षा के बीच शुरू हुई पुनर्परीक्षा राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) द्वारा आयोजित NEET-UG 2026 की पुनर्परीक्षा रविवार को देश और विदेश के विभिन्न परीक्षा केंद्रों पर कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच शुरू हुई। तीन मई को आयोजित मूल परीक्षा को कथित प्रश्नपत्र लीक विवाद के बाद रद्द कर दिया गया था, जिसके बाद पुनर्परीक्षा कराई जा रही है। पुनर्परीक्षा दोपहर 2 बजे से शाम 5:15 बजे तक आयोजित की जा रही है। इस बार अभ्यर्थियों को 15 मिनट का अतिरिक्त समय भी प्रदान किया गया है। 551 भारतीय शहरों सहित 14 विदेशी केंद्रों पर परीक्षा एनटीए के अनुसार, परीक्षा का आयोजन भारत के 551 शहरों में स्थित 5,440 परीक्षा केंद्रों तथा विदेश के 14 केंद्रों पर किया जा रहा है। परीक्षा प्रक्रिया की पारदर्शिता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए 95,000 से अधिक परीक्षा कक्षों में सीसीटीवी निगरानी की व्यवस्था की गई है। अभ्यर्थियों से तनावमुक्त होकर परीक्षा देने की अपील पुनर्परीक्षा से पहले केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने सभी अभ्यर्थियों को शुभकामनाएं देते हुए उनसे किसी भी प्रकार के तनाव या चिंता से दूर रहकर परीक्षा में शामिल होने की अपील की। उन्होंने कहा कि सरकार और एनटीए परीक्षा के निष्पक्ष एवं सुचारु आयोजन के लिए सभी आवश्यक कदम उठा रहे हैं। NEET-UG पुनर्परीक्षा को लेकर देशभर में व्यापक सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था लागू की गई है, ताकि परीक्षा प्रक्रिया की विश्वसनीयता और पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सके।  

Deepshikha जून 22, 2026 0
NTA officials oversee security arrangements and mock drill preparations ahead of NEET UG 2026 re-examination across India.
NEET UG Re-Exam 2026: पुनर्परीक्षा से पहले NTA की मॉक ड्रिल, सुरक्षा के लिए दो लाख से अधिक कर्मी तैनात

  राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) ने नीट-यूजी 2026 पुनर्परीक्षा के सुरक्षित, पारदर्शी और सुचारू संचालन के लिए तैयारियां अंतिम चरण में पहुंचा दी हैं। परीक्षा से एक दिन पहले, 20 जून को देशभर में व्यापक स्तर पर मॉक ड्रिल आयोजित की जाएगी, ताकि परीक्षा के दिन सुरक्षा, प्रश्नपत्र वितरण और परीक्षा प्रबंधन से जुड़ी सभी व्यवस्थाओं की समीक्षा की जा सके। एनटीए अधिकारियों के अनुसार, 21 जून को आयोजित होने वाली पुनर्परीक्षा के लिए देशभर में दो लाख से अधिक सुरक्षाकर्मियों, प्रशासनिक अधिकारियों और परीक्षा कर्मियों की तैनाती की गई है। 22.79 लाख से अधिक अभ्यर्थी देंगे परीक्षा नीट-यूजी 2026 पुनर्परीक्षा रविवार, 21 जून को दोपहर 2 बजे से शाम 5:15 बजे तक पारंपरिक पेन-एंड-पेपर मोड में आयोजित होगी। परीक्षा के लिए भारत के 551 शहरों और विदेश के 14 शहरों में कुल 22.79 लाख से अधिक अभ्यर्थियों ने पंजीकरण कराया है। दिव्यांग अभ्यर्थियों को निर्धारित नियमों के तहत अतिरिक्त समय की सुविधा दी जाएगी। ऐसे उम्मीदवार शाम 6:20 बजे तक परीक्षा दे सकेंगे। सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतजाम पुनर्परीक्षा को लेकर इस बार सुरक्षा व्यवस्था को अभूतपूर्व स्तर पर मजबूत किया गया है। गोपनीय प्रश्नपत्रों और परीक्षा सामग्री के परिवहन की जिम्मेदारी जिला प्रशासन, पुलिस बलों और विशेष एस्कॉर्ट टीमों को सौंपी गई है। एनटीए ने परीक्षा प्रबंधन के लिए: 674 सिटी कोऑर्डिनेटर नियुक्त किए हैं। 6,669 स्वतंत्र पर्यवेक्षकों को निगरानी की जिम्मेदारी दी गई है। प्रत्येक परीक्षा केंद्र पर अधीक्षक, निरीक्षक और सुरक्षा कर्मियों की अलग से तैनाती की गई है। मेडिकल कॉलेजों को एनएमसी का निर्देश इस बीच, राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग (NMC) ने सभी मेडिकल कॉलेजों और संस्थानों को परीक्षा की निष्पक्षता बनाए रखने में सहयोग करने का निर्देश दिया है। एनएमसी ने डीन और प्राचार्यों को भेजे नोटिस में कहा है कि 20 और 21 जून को विद्यार्थियों को सामान्य अवकाश नहीं दिया जाए। केवल विशेष परिस्थितियों और उचित कारणों में ही छुट्टी प्रदान की जाए। पेपर लीक विवाद के बाद हो रही पुनर्परीक्षा गौरतलब है कि मेडिकल पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए नीट-यूजी 2026 की परीक्षा 3 मई को आयोजित की गई थी। प्रश्नपत्र लीक के आरोपों के बाद 12 मई को परीक्षा रद्द कर दी गई थी। पूरे मामले की जांच फिलहाल केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) कर रही है। इसी विवाद के बाद एनटीए ने 21 जून को पुनर्परीक्षा कराने का निर्णय लिया है। एजेंसी का दावा है कि इस बार परीक्षा की निष्पक्षता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए बहुस्तरीय निगरानी और कड़े सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू किए गए हैं। अभ्यर्थियों के लिए अहम सलाह एनटीए ने अभ्यर्थियों को परीक्षा केंद्र पर समय से पहुंचने, एडमिट कार्ड और वैध पहचान पत्र साथ रखने तथा परीक्षा से संबंधित दिशानिर्देशों का पालन करने की सलाह दी है। एजेंसी ने यह भी स्पष्ट किया है कि किसी भी प्रकार की अनियमितता पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।  

Deepshikha जून 20, 2026 0
Entrepreneur Srinivas Raju discussing engineering education, skills and career readiness during an interview.
'4 साल की इंजीनियरिंग समय की बर्बादी?' अमेरिकी यूनिवर्सिटी से पढ़े निवेशक श्रीनि राजू के बयान से छिड़ी नई बहस

भारत में इंजीनियरिंग की पढ़ाई को लंबे समय से बेहतर करियर और स्थिर भविष्य का रास्ता माना जाता रहा है। हर साल लाखों छात्र IIT-JEE जैसी कठिन परीक्षाओं की तैयारी करते हैं और प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग कॉलेजों में दाखिला पाने का सपना देखते हैं। लेकिन हाल ही में प्रसिद्ध उद्यमी और प्राइवेट इक्विटी निवेशक श्रीनि राजू के एक बयान ने डिग्री बनाम स्किल्स की बहस को फिर से तेज कर दिया है। उन्होंने कहा कि कई मामलों में चार साल की इंजीनियरिंग डिग्री छात्रों को नौकरी के लिए उतना तैयार नहीं करती, जितना व्यावहारिक कौशल और लगातार सीखने की क्षमता करती है। कौन हैं श्रीनि राजू? चिंतलपति श्रीनिवास राजू भारतीय आईटी उद्योग, इंफ्रास्ट्रक्चर और प्राइवेट इक्विटी निवेश के क्षेत्र में एक जाना-पहचाना नाम हैं। उनका जन्म आंध्र प्रदेश में हुआ था। उन्होंने NIT कुरुक्षेत्र से इंजीनियरिंग की पढ़ाई की और बाद में अमेरिका की Utah State University से सिविल और एनवायरनमेंटल इंजीनियरिंग में मास्टर डिग्री हासिल की। इंजीनियरिंग डिग्री पर क्या बोले श्रीनि राजू? 'रॉ टॉक्स विद वीके' पॉडकास्ट में बातचीत के दौरान श्रीनि राजू ने कहा कि आज के समय में कई छात्र वर्षों तक डिग्री हासिल करने में समय लगाते हैं, लेकिन उनके पास वास्तविक नौकरी के लिए जरूरी प्रैक्टिकल स्किल्स की कमी होती है। उनका मानना है कि सिर्फ B.Tech की डिग्री किसी व्यक्ति के जॉब-रेडी होने का पैमाना नहीं हो सकती। 12वीं पास और B.Tech ग्रेजुएट्स पर कंपनी का प्रयोग श्रीनि राजू ने अपनी कंपनी के एक पुराने प्रयोग का जिक्र करते हुए बताया कि एक समूह में 30 इंटरमीडिएट (12वीं पास) छात्रों को और दूसरे समूह में 30 B.Tech ग्रेजुएट्स को रखा गया। दोनों समूहों को एक जैसी ट्रेनिंग एक साल तक दी गई। ट्रेनिंग पूरी होने के बाद दोनों की उत्पादकता का मूल्यांकन किया गया। उनके अनुसार, परिणामों में कोई बड़ा अंतर नहीं दिखा। इसी अनुभव ने उन्हें यह सोचने पर मजबूर किया कि क्या चार साल की डिग्री हमेशा व्यावहारिक दुनिया में अतिरिक्त लाभ देती है। शिक्षा व्यवस्था में क्या कमी है? श्रीनि राजू का मानना है कि वर्तमान शिक्षा प्रणाली का बड़ा हिस्सा अभी भी किताबी ज्ञान पर आधारित है। कई संस्थानों में छात्रों को वह सिखाया जाता है जो पाठ्यक्रम में लिखा है, जबकि उद्योग की बदलती जरूरतें और वास्तविक कार्य अनुभव उससे अलग हो सकते हैं। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वह शिक्षा को बेकार नहीं मानते, बल्कि शिक्षा और इंडस्ट्री की जरूरतों के बीच बेहतर तालमेल की आवश्यकता पर जोर देते हैं। आज के जॉब मार्केट में क्या सबसे ज्यादा जरूरी है? श्रीनि राजू के अनुसार, बदलते रोजगार बाजार में सिर्फ डिग्री या सर्टिफिकेट काफी नहीं हैं। छात्रों को इन क्षमताओं पर विशेष ध्यान देना चाहिए: प्रॉब्लम सॉल्विंग स्किल्स लगातार सीखने की क्षमता स्वयं से नई चीजें सीखने की आदत प्रैक्टिकल नॉलेज और इंडस्ट्री एक्सपोजर बदलती तकनीकों के साथ खुद को अपडेट रखना IIT-JEE में असफल होने वालों को क्या सलाह दी? उन्होंने छात्रों से कहा कि अगर वे IIT-JEE जैसी परीक्षाओं में सफल नहीं हो पाते हैं, तो इसे जीवन का अंत न समझें। मेहनत और सही कौशल के जरिए कोई भी व्यक्ति अपने लक्ष्य तक पहुंच सकता है। डिग्री बनाम स्किल्स: क्या है सच्चाई? विशेषज्ञों का मानना है कि डिग्री और स्किल्स दोनों का अपना महत्व है। डिग्री बुनियादी ज्ञान और अवसरों के दरवाजे खोलती है, जबकि व्यावहारिक कौशल किसी व्यक्ति को वास्तविक कार्यक्षेत्र में सफल बनाते हैं। ऐसे में दोनों के बीच संतुलन बनाना ही सबसे बेहतर रास्ता माना जाता है।  

surbhi जून 17, 2026 0
NEET paper leak accused Yash Yadav arrives at court after getting permission to appear for the re-exam.
NEET पेपर लीक केस: आरोपी यश यादव को 21 जून की परीक्षा में शामिल होने की कोर्ट से अनुमति

  नीट पेपर लीक मामले के आरोपी यश यादव को दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। कोर्ट ने उसे 21 जून को होने वाली दोबारा आयोजित NEET-UG परीक्षा में शामिल होने की अनुमति दे दी है। इसके साथ ही अदालत ने यश यादव को अपनी बहन की शादी में शामिल होने की भी इजाजत प्रदान की है। कोर्ट ने शिक्षा को बताया मौलिक अधिकार मामले की सुनवाई के दौरान राउज एवेन्यू कोर्ट ने कहा कि शिक्षा प्रत्येक व्यक्ति का मौलिक अधिकार है और किसी भी व्यक्ति को इस अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता। इसी आधार पर अदालत ने यश यादव को परीक्षा देने की अनुमति प्रदान की। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यश यादव को पुलिस हिरासत और सुरक्षा निगरानी में परीक्षा केंद्र ले जाया जाएगा। पढ़ाई के लिए किताबें रखने की भी मिली थी अनुमति यश यादव ने इससे पहले अदालत से पढ़ाई के लिए किताबें अपने पास रखने की अनुमति मांगी थी। 2 जून को कोर्ट ने उसकी इस मांग को स्वीकार कर लिया था, ताकि वह आगामी परीक्षा की तैयारी कर सके। यश यादव की वकील अंबिका यादव ने अदालत में कहा था कि वह एक मेधावी छात्र है और उसने 3 मई को आयोजित नीट-यूजी परीक्षा दी थी। परीक्षा स्थगित होने के बाद अब 21 जून को दोबारा आयोजित की जा रही है, इसलिए उसे परीक्षा में शामिल होने का अवसर दिया जाना चाहिए। नीट पेपर लीक मामले में आरोपी है यश यादव यश यादव नीट पेपर लीक मामले में गिरफ्तार किए गए पांच आरोपियों में से एक है। मामले की जांच अभी जारी है और आरोपी के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया भी चल रही है। अदालत ने माना कि आपराधिक मामले में आरोपी होने मात्र से किसी छात्र के शिक्षा के अधिकार को पूरी तरह खत्म नहीं किया जा सकता।  

Deepshikha जून 17, 2026 0
Candidates appearing for UP Police Constable Exam 2026 while discussing expected cut-off marks.
UP Police Constable Cut Off 2026: क्या यूपी एसआई की तरह बढ़ेगी सिपाही भर्ती की कटऑफ? एक्सपर्ट ने बताया सेफ स्कोर

उत्तर प्रदेश पुलिस कांस्टेबल भर्ती 2026 की लिखित परीक्षा 8, 9 और 10 जून को छह शिफ्टों में आयोजित की जा चुकी है। 32,679 पदों के लिए आयोजित इस भर्ती में 28 लाख से अधिक अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था, जबकि 21 लाख से ज्यादा उम्मीदवार परीक्षा में शामिल हुए। अब परीक्षा समाप्त होने के बाद सबसे बड़ा सवाल संभावित कटऑफ को लेकर उठ रहा है। कई अभ्यर्थी इस बात को लेकर चिंतित हैं कि क्या यूपी पुलिस सब-इंस्पेक्टर (UPSI) 2025 की तरह इस बार कांस्टेबल भर्ती की कटऑफ भी काफी ऊंची जा सकती है। इस विषय पर Careerwill के शिक्षक मोहित शर्मा ने विस्तार से अपनी राय दी है। क्या यूपी पुलिस कांस्टेबल की कटऑफ बहुत हाई जाएगी? मोहित शर्मा के अनुसार, यूपी एसआई भर्ती और कांस्टेबल भर्ती की परिस्थितियां पूरी तरह अलग हैं। उनका कहना है कि यूपी पुलिस कांस्टेबल भर्ती की कटऑफ यूपी एसआई 2025 जैसी असामान्य रूप से ऊंची जाने की संभावना कम है। इसके पीछे ये प्रमुख कारण हैं: 1. पदों की संख्या काफी ज्यादा यूपी एसआई भर्ती में केवल 4,543 पद थे, जबकि कांस्टेबल भर्ती में 32,679 पद हैं। ज्यादा रिक्तियों के कारण चयन का दायरा बड़ा रहेगा और अधिक उम्मीदवार अगले चरण तक पहुंच सकेंगे। 2. फिजिकल के लिए बड़ी संख्या में उम्मीदवार होंगे शॉर्टलिस्ट एक्सपर्ट के मुताबिक, शारीरिक दक्षता परीक्षा (PET) के लिए लगभग 75,000 से 80,000 अभ्यर्थियों को बुलाया जा सकता है। 3. कांस्टेबल परीक्षा का स्तर अपेक्षाकृत कठिन रहा यूपी एसआई परीक्षा का पेपर अपेक्षाकृत आसान था, जिसके कारण उम्मीदवारों के अंक अधिक आए और कटऑफ भी बढ़ गई। वहीं कांस्टेबल भर्ती की परीक्षा में मानसिक अभिरुचि, कथन-निष्कर्ष और गणित के प्रश्न लंबे तथा समय लेने वाले थे। इससे औसत प्रयास प्रभावित हुआ और मेरिट संतुलित रहने की संभावना बढ़ गई। मोहित शर्मा का कहना है कि केवल यूपी एसआई 2025 की कटऑफ देखकर घबराने की जरूरत नहीं है, क्योंकि दोनों परीक्षाओं की चयन प्रक्रिया और रिक्तियों में बड़ा अंतर है। कितना स्कोर माना जा रहा है सुरक्षित? एक्सपर्ट के अनुसार, यदि किसी उम्मीदवार के लगभग 125 प्रश्न सही हैं और कुल अंक 250 से ऊपर बन रहे हैं, तो उसे सुरक्षित स्थिति में माना जा सकता है। ऐसे अभ्यर्थियों को अब लिखित परीक्षा की चिंता छोड़कर अगले चरण यानी: डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन शारीरिक मानक परीक्षण (PST) शारीरिक दक्षता परीक्षा (PET) की तैयारी शुरू कर देनी चाहिए। यूपी पुलिस फिजिकल टेस्ट के मानक पुरुष अभ्यर्थियों के लिए सामान्य, ओबीसी और एससी वर्ग: न्यूनतम लंबाई 168 सेमी एसटी वर्ग: न्यूनतम लंबाई 160 सेमी महिला अभ्यर्थियों के लिए सामान्य, ओबीसी और एससी वर्ग: न्यूनतम लंबाई 152 सेमी एसटी वर्ग: न्यूनतम लंबाई 147 सेमी न्यूनतम वजन: 40 किलोग्राम रनिंग टेस्ट पुरुष उम्मीदवार 4.8 किलोमीटर दौड़ समय सीमा: 25 मिनट महिला उम्मीदवार 2.4 किलोमीटर दौड़ समय सीमा: 14 मिनट

surbhi जून 15, 2026 0
Odisha CM Mohan Charan Majhi announces free education from KG to PG for students
ओडिशा में शिक्षा क्षेत्र में बड़ा ऐलान: अब KG से PG तक मुफ्त होगी पढ़ाई, 10 लाख से अधिक छात्रों को मिलेगा लाभ

मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने किया ‘फ्री एंड यूनिवर्सल एजुकेशन’ का ऐलान ओडिशा सरकार ने शिक्षा के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक फैसला लेते हुए राज्य के छात्रों को बड़ी राहत दी है। मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने घोषणा की है कि अब राज्य में किंडरगार्टन (KG) से लेकर पोस्ट ग्रेजुएशन (PG) तक की शिक्षा पूरी तरह मुफ्त होगी। इस फैसले के साथ ओडिशा देश के उन चुनिंदा राज्यों में शामिल हो गया है, जहां उच्च शिक्षा तक निशुल्क शिक्षा की व्यवस्था लागू की जा रही है। बीजेपी सरकार के दो वर्ष पूरे होने के अवसर पर किए गए इस ऐलान को राज्य की शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव माना जा रहा है। सरकार का दावा है कि इस योजना से 10 लाख से अधिक छात्रों को सीधा लाभ मिलेगा। सरकारी कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में नहीं देनी होगी फीस नई व्यवस्था के तहत सरकारी कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में दाखिला लेने वाले छात्रों को अब किसी प्रकार की शैक्षणिक फीस नहीं देनी होगी। राज्य में पहले से ही कक्षा 10 तक शिक्षा निशुल्क थी, लेकिन अब इस दायरे को बढ़ाकर स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर तक कर दिया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए यह निर्णय बेहद लाभकारी साबित होगा। कई छात्र वित्तीय कठिनाइयों के कारण उच्च शिक्षा बीच में छोड़ने को मजबूर हो जाते हैं, लेकिन अब उन्हें बेहतर अवसर मिल सकेंगे। राज्य सरकार पर आएगा करीब 30 करोड़ रुपये का अतिरिक्त भार सरकारी अधिकारियों के अनुसार, सरकारी कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में फीस पहले से अपेक्षाकृत कम थी, लेकिन पूरी तरह शुल्क समाप्त करने से राज्य सरकार पर हर साल लगभग 30 करोड़ रुपये का अतिरिक्त वित्तीय भार पड़ेगा। हालांकि सरकार का मानना है कि शिक्षा पर किया गया यह निवेश राज्य के भविष्य को मजबूत करेगा और युवाओं को अधिक अवसर प्रदान करेगा। शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए होगी शिक्षकों की बड़ी भर्ती मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए बड़े पैमाने पर शिक्षकों की नियुक्ति का भी ऐलान किया। उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में 45,000 से अधिक नए शिक्षकों की भर्ती की जाएगी। उन्होंने बताया कि पिछले दो वर्षों के दौरान राज्य सरकार पहले ही 26,000 से अधिक शिक्षकों की नियुक्ति कर चुकी है। नई भर्तियों से स्कूलों और कॉलेजों में शिक्षकों की कमी को दूर करने में मदद मिलेगी। उच्च शिक्षा के विस्तार के लिए बनेंगे चार नए विश्वविद्यालय राज्य में उच्च शिक्षा के अवसर बढ़ाने के लिए सरकार ने चार नए विश्वविद्यालय स्थापित करने की भी घोषणा की है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन विश्वविद्यालयों के लिए बजट में आवश्यक प्रावधान किए जा चुके हैं और जल्द ही परियोजनाओं पर काम शुरू होगा। सरकार का लक्ष्य है कि राज्य के छात्रों को गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा के लिए दूसरे राज्यों का रुख न करना पड़े। विकास परियोजनाओं पर भी सरकार का जोर अपने कार्यकाल के दो वर्ष पूरे होने पर मुख्यमंत्री ने राज्य में चल रही विभिन्न विकास परियोजनाओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि तटीय राजमार्ग, उत्तर और दक्षिण ओडिशा को जोड़ने वाले दो एक्सप्रेसवे तथा भुवनेश्वर-कटक-पुरी-पारादीप आर्थिक क्षेत्र जैसी परियोजनाएं रोजगार और आर्थिक विकास को गति देंगी। विपक्ष के आरोपों पर भी दिया जवाब कानून-व्यवस्था को लेकर विपक्ष की आलोचनाओं का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में अपराध के मामलों में दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने महिलाओं के खिलाफ अपराधों में सजा की दर बढ़ने का भी दावा किया। साथ ही उन्होंने पिछली सरकार पर भ्रष्ट अधिकारियों को संरक्षण देने का आरोप लगाते हुए कहा कि वर्तमान सरकार ने पिछले दो वर्षों में कई वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ सतर्कता जांच और कार्रवाई की है। ओडिशा सरकार का यह फैसला शिक्षा के क्षेत्र में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि योजना प्रभावी ढंग से लागू होती है तो यह राज्य में उच्च शिक्षा की पहुंच बढ़ाने और सामाजिक-आर्थिक असमानता कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।  

surbhi जून 13, 2026 0
Ranchi Hostel Incident
रांची के हॉस्टल में रहने वाली एक छात्रा की चौथी मंजिल से गिरकर मौत

रांची। राजधानी रांची के लालपुर थाना क्षेत्र स्थित लोहराकोचा के एक गर्ल्स हॉस्टल में गुरुवार शाम एक दर्दनाक हादसे में 19 वर्षीय छात्रा की चौथी मंजिल से गिरकर मौत हो गई। घटना के बाद इलाके में सनसनी फैल गई। सूचना मिलते ही लालपुर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए रिम्स भेज दिया। मामले की गंभीरता को देखते हुए फॉरेंसिक साइंस लैब (एफएसएल) की टीम ने भी घटनास्थल का निरीक्षण कर साक्ष्य जुटाए। पुलिस फिलहाल हादसा, आत्महत्या और हत्या तीनों संभावनाओं को ध्यान में रखकर जांच कर रही है।   छात्रा  पश्चिम बंगाल की थी  मृतक छात्रा की पहचान गायत्री के रूप में हुई है, जो पश्चिम बंगाल के कुल्टी की रहने वाली थी। वह रांची के लालपुर स्थित एक गर्ल्स हॉस्टल में रहकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रही थी। हॉस्टल संचालक ने घटना की सूचना तत्काल पुलिस को दी, जिसके बाद जांच प्रक्रिया शुरू की गई। प्रारंभिक जांच में मामला दुर्घटना का प्रतीत हो रहा है, लेकिन पुलिस किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले सभी तथ्यों की बारीकी से जांच कर रही है।   थाना प्रभारी रुपेश कुमार सिंह ने बताया  लालपुर थाना प्रभारी रुपेश कुमार सिंह ने बताया कि जांच के दौरान यह जानकारी सामने आई है कि छात्रा को मिर्गी के दौरे आते थे। हॉस्टल में प्रवेश के समय परिजनों द्वारा जमा किए गए आवेदन पत्र में भी इस बीमारी का उल्लेख किया गया था। पुलिस इस पहलू की भी जांच कर रही है कि कहीं घटना के समय छात्रा को दौरा तो नहीं पड़ा था, जिसके कारण वह संतुलन खोकर नीचे गिर गई हो।   पुलिस ने छात्रा के परिजनों को घटना की सूचना दे दी है और उनके रांची पहुंचने का इंतजार किया जा रहा है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट, एफएसएल जांच और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर ही मौत के वास्तविक कारणों का खुलासा हो सकेगा। फिलहाल मामले की विस्तृत जांच जारी है और पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचा जाएगा।

anjali kumari जून 12, 2026 0
Students at an engineering campus in Greater Noida with placement highlights and career opportunities.
ग्रेटर नोएडा के इन इंजीनियरिंग कॉलेजों में लें दाखिला, लाखों के पैकेज के साथ मिल सकती है शानदार नौकरी

नई दिल्ली: 12वीं के बाद इंजीनियरिंग की पढ़ाई के लिए सही कॉलेज चुनना हर छात्र और अभिभावक के लिए बेहद महत्वपूर्ण फैसला होता है। अगर आप दिल्ली-एनसीआर में बेहतरीन बीटेक कॉलेज की तलाश कर रहे हैं, तो ग्रेटर नोएडा आज देश के प्रमुख शिक्षा केंद्रों में शामिल हो चुका है। यहां के कई संस्थान आधुनिक सुविधाओं, उत्कृष्ट शिक्षण व्यवस्था और शानदार प्लेसमेंट रिकॉर्ड के लिए जाने जाते हैं। ग्रेटर नोएडा के प्रमुख इंजीनियरिंग कॉलेज और प्लेसमेंट रिकॉर्ड कॉलेज का नाम औसत पैकेज उच्चतम पैकेज प्रमुख भर्ती करने वाली कंपनियां जीएल बजाज इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड मैनेजमेंट 6.5 लाख रुपये प्रतिवर्ष 40 से 57 लाख रुपये अमेजन, पालो ऑल्टो, सिस्को, टीसीएस, कैपजेमिनी गलगोटियास कॉलेज एवं विश्वविद्यालय 5.4 लाख रुपये प्रतिवर्ष 60 लाख रुपये इंफोसिस, कॉग्निजेंट, विप्रो, एक्सेंचर शिव नादर विश्वविद्यालय 9.88 लाख रुपये प्रतिवर्ष 54.82 लाख रुपये गोल्डमैन सैक्स, एडोबी, आईबीएम, ओरेकल, मैकिन्से नोएडा इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (एनआईईटी) 6 लाख रुपये प्रतिवर्ष 44 लाख रुपये माइक्रोसॉफ्ट, जेपी मॉर्गन, एचसीएल, विप्रो, टीसीएस जीएनआईओटी समूह संस्थान 5.5 से 7.25 लाख रुपये प्रतिवर्ष 70 लाख रुपये अमेजन, डेलॉइट, एचसीएल टेक्नोलॉजीज, इन्फोगेन कॉलेज चुनते समय इन बातों का रखें विशेष ध्यान फीस और प्लेसमेंट का संतुलन कॉलेज में प्रवेश लेने से पहले यह जरूर देखें कि चार वर्षों की पढ़ाई पर होने वाले खर्च के मुकाबले वहां का औसत प्लेसमेंट पैकेज कितना है। जीएल बजाज और एनआईईटी जैसे संस्थान बेहतर निवेश प्रतिफल (आरओआई) के लिए जाने जाते हैं, जबकि शिव नादर विश्वविद्यालय अपेक्षाकृत अधिक फीस के साथ उच्च औसत पैकेज प्रदान करता है। आधुनिक और उद्योग आधारित पाठ्यक्रम आज के समय में कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डेटा विज्ञान, मशीन लर्निंग और साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्रों की मांग तेजी से बढ़ रही है। इसलिए यह सुनिश्चित करें कि कॉलेज में इन विषयों से जुड़े पाठ्यक्रम और अत्याधुनिक प्रयोगशालाएं उपलब्ध हों। स्थान का लाभ ग्रेटर नोएडा का नॉलेज पार्क क्षेत्र नोएडा, दिल्ली और गुरुग्राम के सूचना प्रौद्योगिकी केंद्रों के नजदीक स्थित है। इसका फायदा छात्रों को इंटर्नशिप, व्यावहारिक परियोजनाओं और कैंपस प्लेसमेंट के रूप में मिलता है। बेहतर करियर और आकर्षक वेतन पैकेज की तलाश कर रहे छात्रों के लिए ग्रेटर नोएडा के ये संस्थान बेहतरीन विकल्प साबित हो सकते हैं।  

surbhi जून 11, 2026 0
Education Minister Dharmendra Pradhan reviewing NEET 2026 preparations amid the paper leak controversy.
NEET 2026: पेपर लीक दोषियों की सजा बने मिसाल, PM मोदी खुद रख रहे हैं नजर- शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान

नई दिल्ली: NEET UG 2026 पेपर लीक मामले को लेकर केंद्र सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा है कि पेपर लीक में शामिल दोषियों को ऐसी सजा मिलनी चाहिए जो भविष्य में दूसरों के लिए मिसाल बने। उन्होंने स्पष्ट किया कि आरोपियों के खिलाफ फास्ट ट्रैक कोर्ट में मुकदमा चलाने की सिफारिश की गई है ताकि जल्द फैसला हो सके। 21 जून को होने वाले NEET UG 2026 री-एग्जाम से पहले शिक्षा मंत्रालय, स्वास्थ्य मंत्रालय और नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) लगातार तैयारियों की समीक्षा कर रहे हैं। मंगलवार को शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने NTA मुख्यालय पहुंचकर सुरक्षा व्यवस्था, परीक्षा संचालन और रिजल्ट प्रक्रिया का जायजा लिया। दोषियों पर होगी सबसे कड़ी कार्रवाई धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि पेपर तैयार करने और अनुवाद प्रक्रिया से जुड़े जिन लोगों ने देश के करोड़ों छात्रों का भरोसा तोड़ा है, उनके खिलाफ न केवल आपराधिक कार्रवाई होगी बल्कि नागरिक दायित्व (Civil Liability) के तहत भी कार्रवाई की संभावनाएं तलाश की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि सीबीआई को निर्देश दिया गया है कि गिरफ्तार किए गए लोगों के खिलाफ फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई सुनिश्चित की जाए ताकि जल्द फैसला सामने आ सके। शिक्षा मंत्री ने कहा, "दोषियों को ऐसी सजा मिलनी चाहिए जो आने वाले समय में किसी के लिए भी चेतावनी और मिसाल बने।" PM मोदी भी कर रहे हैं निगरानी धर्मेंद्र प्रधान ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं पूरे मामले पर नजर बनाए हुए हैं। केंद्र सरकार की सभी एजेंसियां अपनी-अपनी जिम्मेदारी निभा रही हैं और छात्रों के हितों की रक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि NTA कानूनी विशेषज्ञों से सलाह ले रही है ताकि उन संस्थाओं और व्यक्तियों के खिलाफ भी कार्रवाई की जा सके जिन्होंने अपनी जिम्मेदारियों का पालन नहीं किया। री-एग्जाम की तैयारियां अंतिम चरण में NTA पहले ही NEET UG 2026 री-एग्जाम के लिए एग्जाम सिटी स्लिप जारी कर चुका है। अब जल्द ही एडमिट कार्ड जारी किए जाएंगे। कुछ छात्रों द्वारा परीक्षा केंद्र बदलने की मांग की गई है, जिस पर एजेंसी विचार कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि सभी फैसले छात्रों के हितों को ध्यान में रखकर लिए जा रहे हैं। संसदीय समिति ने अधिकारियों को तलब किया बुधवार को संसद की स्थायी समिति की महत्वपूर्ण बैठक होने जा रही है, जिसमें शिक्षा मंत्रालय, स्वास्थ्य मंत्रालय, NTA और नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) के वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे। समिति परीक्षा संचालन, सुरक्षा व्यवस्था और भविष्य की सुधार योजनाओं पर सवाल-जवाब करेगी। CUET-UG रिजल्ट भी जल्द NTA CUET-UG 2026 का रिजल्ट भी जल्द जारी करने की तैयारी में है। 7 जून को परीक्षा समाप्त होने के बाद 9 जून को प्रोविजनल आंसर-की जारी कर दी गई थी। छात्र 11 जून तक प्रति प्रश्न 200 रुपये शुल्क देकर आपत्तियां दर्ज करा सकते हैं। इस वर्ष 243 विश्वविद्यालयों में स्नातक पाठ्यक्रमों में प्रवेश CUET स्कोर के आधार पर होगा। साइबर सुरक्षा पर विशेष फोकस सरकार ने NTA के संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करने के लिए संयुक्त सचिव और निदेशक स्तर के नए अधिकारियों की नियुक्ति की है। इसके अलावा IB, CBI और साइबर सुरक्षा एजेंसियों को भी सक्रिय किया गया है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।  

surbhi जून 10, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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बिहार में असिस्टेंट प्रोफेसर बनने के नियम बदले, जानिए कब जरूरी होगा NET ?

abhishek singh जुलाई 2, 2026 0