कर्नाटक सरकार ने छात्रों में बढ़ती डिजिटल लत और उसके दुष्प्रभावों को देखते हुए 9वीं से 12वीं कक्षा के लिए एक विस्तृत ड्राफ्ट डिजिटल उपयोग नीति जारी की है। इस पॉलिसी में पढ़ाई के अलावा मनोरंजन के लिए रोजाना अधिकतम 1 घंटे का स्क्रीन टाइम तय करने और शाम 7 बजे के बाद इंटरनेट बंद करने जैसी सख्त सिफारिशें की गई हैं। यह पॉलिसी स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, कर्नाटक स्टेट मेंटल हेल्थ अथॉरिटी, NIMHANS और शिक्षा विभाग के सहयोग से तैयार की गई है। क्यों लाई गई यह पॉलिसी? सरकार के अनुसार, राज्य में करीब 25% किशोर इंटरनेट की लत का शिकार हो चुका हैं। इसके कारण: नींद में कमी मानसिक तनाव और चिंता पढ़ाई में ध्यान की कमी व्यवहार में बदलाव जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए यह नीति तैयार की गई है, ताकि बच्चों के डिजिटल उपयोग को संतुलित किया जा सके। पॉलिसी के प्रमुख प्रस्ताव ड्राफ्ट में छात्रों के डिजिटल इस्तेमाल को लेकर कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए गए हैं: पढ़ाई के अलावा मनोरंजन के लिए सिर्फ 1 घंटे का स्क्रीन टाइम शाम 7 बजे के बाद इंटरनेट बंद करने की सिफारिश छात्रों को सोने से कम से कम एक घंटे पहले स्क्रीन से दूर रखना मोबाइल में ‘चाइल्ड प्लान’ लागू करना, जिसमें: सीमित इंटरनेट एक्सेस ऑडियो-ओनली विकल्प तय समय के बाद ऑटोमेटिक इंटरनेट बंद बच्चों की उम्र के अनुसार डिवाइस और ऑपरेटिंग सिस्टम विकसित करने का सुझाव स्कूलों में क्या बदलाव होंगे? नई पॉलिसी के तहत स्कूलों में डिजिटल उपयोग को लेकर बड़े बदलाव प्रस्तावित हैं: डिजिटल वेल-बीइंग और ऑनलाइन सुरक्षा को पाठ्यक्रम में शामिल किया जाएगा छात्रों को साइबर बुलिंग, डेटा प्राइवेसी और जिम्मेदार इंटरनेट उपयोग के बारे में पढ़ाया जाएगा हर स्कूल अपनी डिजिटल उपयोग नीति लागू करेगा डिजिटल डिटॉक्स डे और टेक-फ्री पीरियड शुरू किए जाएंगे छात्रों से संपर्क के लिए WhatsApp की जगह डायरी सिस्टम अपनाने का सुझाव मानसिक स्वास्थ्य पर विशेष जोर स्कूलों में काउंसलिंग सेवाओं को मजबूत किया जाएगा शिक्षकों को ट्रेनिंग दी जाएगी ताकि वे डिजिटल लत के संकेत पहचान सकें जरूरत पड़ने पर छात्रों को विशेषज्ञों तक पहुंचाया जाएगा अभिभावकों और शिक्षकों की भूमिका पॉलिसी में अभिभावकों और शिक्षकों की जिम्मेदारी भी तय की गई है: अभिभावकों के लिए: घर में स्क्रीन टाइम सीमित करें नो-फोन जोन (जैसे डाइनिंग टेबल, बेडरूम) बनाएं बच्चों के सामने खुद भी संतुलित डिजिटल उपयोग का उदाहरण पेश करें शिक्षकों के लिए: छात्रों के डिजिटल व्यवहार पर नजर रखें सही मार्गदर्शन और सलाह दें AI के उपयोग पर भी नियंत्रण स्कूलों में AI के इस्तेमाल के लिए गाइडलाइन बनाई जाएगी होमवर्क में AI के उपयोग को नियंत्रित किया जाएगा नकल रोकने के लिए तकनीकी सिस्टम विकसित किए जाएंगे सोशल मीडिया पर पहले ही सख्ती कर्नाटक सरकार इससे पहले 16 साल से कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया उपयोग पर रोक लगाने का ऐलान कर चुकी है। इसमें: अकाउंट बनाने से पहले माता-पिता की अनुमति जरूरी उम्र का सत्यापन अनिवार्य डेटा सुरक्षा कानून (DPDP Act 2023) के तहत प्रावधान क्या है व्यापक असर? यह पॉलिसी लागू होने पर: छात्रों के स्क्रीन टाइम में कमी आएगी मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य में सुधार होगा पढ़ाई और फोकस बेहतर होगा डिजिटल दुनिया में जिम्मेदार व्यवहार विकसित होगा
नई दिल्ली,एजेंसियां। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने छात्राओं के स्वास्थ्य और स्वच्छता को ध्यान में रखते हुए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। बोर्ड ने अपने सभी संबद्ध स्कूलों को मेंस्ट्रुअल हेल्थ सेंटर स्थापित करने के निर्देश दिए हैं। इस पहल का उद्देश्य स्कूलों में पढ़ने वाली लड़कियों को सुरक्षित, सम्मानजनक और सुविधाजनक वातावरण प्रदान करना है, ताकि वे बिना किसी झिझक के अपनी जरूरतों का ध्यान रख सकें। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद लिया गया निर्णय यह फैसला Supreme Court of India के 20 जनवरी 2026 के आदेश के बाद लिया गया है। कोर्ट ने स्पष्ट कहा था कि मासिक धर्म के दौरान स्वच्छता और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराना हर लड़की का मौलिक अधिकार है। इन सुविधाओं की कमी से छात्राओं की पढ़ाई और आत्मविश्वास पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। सेंटर में मिलेंगी जरूरी सुविधाएं मेंस्ट्रुअल हेल्थ सेंटर में छात्राओं के लिए सैनिटरी नैपकिन की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी। इसके साथ ही स्वच्छता का विशेष ध्यान रखा जाएगा और इस्तेमाल किए गए नैपकिन के सुरक्षित निपटान की व्यवस्था भी होगी। कुछ स्कूलों में इन केंद्रों को MHM (Menstrual Hygiene Management) कॉर्नर के रूप में विकसित किया जाएगा, जहां स्वास्थ्य से जुड़ी जरूरी जानकारी भी दी जाएगी। जागरूकता और शिक्षा पर जोर CBSE ने केवल सुविधाएं देने तक ही सीमित न रहते हुए जागरूकता बढ़ाने पर भी जोर दिया है। स्कूलों को नियमित रूप से हेल्थ सेशन, प्यूबर्टी एजुकेशन और जेंडर सेंसिटिव चर्चाएं आयोजित करनी होंगी। इसका उद्देश्य छात्रों के बीच मेंस्ट्रुएशन से जुड़ी झिझक और गलत धारणाओं को दूर करना है। रिपोर्टिंग सिस्टम भी लागू बोर्ड ने इस पहल की निगरानी के लिए रिपोर्टिंग सिस्टम भी लागू किया है। स्कूलों को हर महीने अपनी तैयारियों और सुविधाओं की जानकारी देनी होगी। पहली रिपोर्ट 31 मार्च 2026 तक और दूसरी 30 अप्रैल 2026 तक जमा करनी होगी। सुरक्षित और सम्मानजनक माहौल की ओर कदम यह पहल स्कूलों में ऐसा वातावरण बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है, जहां लड़कियां खुलकर अपनी जरूरतों के बारे में बात कर सकें और बिना किसी बाधा के अपनी शिक्षा जारी रख सकें।
प्रधानमंत्री Narendra Modi सोमवार को ‘सबका साथ, सबका विकास: जनता की आकांक्षाओं की पूर्ति’ विषय पर आयोजित एक महत्वपूर्ण वेबिनार को संबोधित करेंगे। यह कार्यक्रम वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित किया जाएगा। सरकार के अनुसार इस वेबिनार का उद्देश्य बजट में घोषित योजनाओं और नीतियों को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए सरकार, उद्योग जगत और विशेषज्ञों के बीच संवाद और सहयोग को मजबूत करना है। इस वेबिनार में शिक्षा, कौशल विकास, स्वास्थ्य, आयुष, पर्यटन और आतिथ्य जैसे कई अहम क्षेत्रों से जुड़े विषयों पर चर्चा की जाएगी। सरकार का मानना है कि इन क्षेत्रों में बेहतर नीति समन्वय और नई पहल के जरिए युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा किए जा सकते हैं। शिक्षा और कौशल विकास पर विशेष जोर कार्यक्रम के दौरान शिक्षा व्यवस्था को रोजगार से जोड़ने के तरीकों पर चर्चा होगी। इसमें युवाओं के लिए नए कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू करने, आधुनिक तकनीक आधारित शिक्षा को बढ़ावा देने और उद्योगों की जरूरतों के अनुसार प्रशिक्षण देने जैसे मुद्दों पर विचार किया जाएगा। सरकार का उद्देश्य है कि छात्र पढ़ाई के साथ-साथ ऐसे कौशल हासिल करें, जिससे उन्हें बेहतर रोजगार के अवसर मिल सकें। रचनात्मक उद्योगों को बढ़ावा देने की योजना वेबिनार में एनीमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग और कॉमिक्स (AVGC) जैसे रचनात्मक क्षेत्रों को प्रोत्साहन देने पर भी चर्चा की जाएगी। इसके तहत कंटेंट क्रिएटर लैब विकसित करने और इस क्षेत्र में विशेष कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू करने जैसे प्रस्तावों पर विचार किया जाएगा। सरकार का मानना है कि यह सेक्टर आने वाले समय में युवाओं के लिए रोजगार का बड़ा स्रोत बन सकता है। स्वास्थ्य और आयुष क्षेत्र पर चर्चा कार्यक्रम में क्षेत्रीय चिकित्सा केंद्रों को मजबूत करने और नए आयुष संस्थानों की स्थापना से जुड़ी योजनाओं पर भी चर्चा होगी। इसका उद्देश्य स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुलभ और प्रभावी बनाना है। साथ ही आयुष आधारित उपचार पद्धतियों को बढ़ावा देने पर भी विचार किया जाएगा। पर्यटन और आतिथ्य क्षेत्र के विकास पर फोकस वेबिनार में पर्यटन क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर चर्चा की जाएगी। इसमें सतत पर्यटन मार्गों का विकास, पूर्वोत्तर क्षेत्र में बौद्ध सर्किट का विस्तार और विरासत पर्यटन को मजबूत करने जैसे विषय शामिल हैं। सरकार का लक्ष्य पर्यटन के माध्यम से स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करना और बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा करना है। कार्यक्रम का ढांचा कैसा होगा यह वेबिनार तीन चरणों में आयोजित किया जाएगा। पहले चरण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उद्घाटन सत्र को संबोधित करेंगे। इसके बाद विभिन्न विषयों पर अलग-अलग ब्रेकआउट सत्र आयोजित किए जाएंगे, जिनमें विशेषज्ञ, नीति-निर्माता और उद्योग जगत के प्रतिनिधि चर्चा करेंगे। अंत में समापन सत्र में इन चर्चाओं के निष्कर्ष और आगे की कार्ययोजना प्रस्तुत की जाएगी। छात्र और शिक्षक भी जुड़ सकेंगे इस कार्यक्रम में छात्रों और शिक्षकों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए University Grants Commission (UGC) ने देशभर के कॉलेजों और विश्वविद्यालयों से अपील की है कि वे अधिक से अधिक छात्रों और शिक्षकों को इस वेबिनार से जोड़ें। छात्र और शिक्षक इसे ऑनलाइन देख सकेंगे। यह वेबिनार वेबएक्स, यूट्यूब, फेसबुक और एक्स जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाइव प्रसारित किया जाएगा, ताकि देशभर के लोग इस चर्चा का हिस्सा बन सकें।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
UPSC CSE Result 2025: देश की सबसे प्रतिष्ठित परीक्षाओं में से एक Civil Services Examination का अंतिम परिणाम जारी कर दिया गया है। Union Public Service Commission ने शुक्रवार 6 मार्च 2026 को UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2025 का फाइनल रिजल्ट घोषित किया। इस परीक्षा में अनुज अग्निहोत्री ने पहला स्थान हासिल किया है। परीक्षा में शामिल हुए उम्मीदवार अब आयोग की आधिकारिक वेबसाइट UPSC Official Website पर जाकर फाइनल मेरिट लिस्ट देख सकते हैं। 958 उम्मीदवारों का हुआ चयन यूपीएससी द्वारा जारी फाइनल रिजल्ट के अनुसार इस वर्ष कुल 958 उम्मीदवारों ने सफलता हासिल की है। चयनित उम्मीदवारों की नियुक्ति विभिन्न केंद्रीय सेवाओं में उनकी रैंक और पसंद के आधार पर की जाएगी। फाइनल रिजल्ट उम्मीदवारों के लिखित परीक्षा (Main Exam) और पर्सनैलिटी टेस्ट (Interview) में प्रदर्शन के आधार पर तैयार किया गया है। इन प्रतिष्ठित सेवाओं के लिए होता है चयन यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा के माध्यम से देश की कई प्रतिष्ठित सेवाओं के लिए अधिकारियों का चयन किया जाता है। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं— भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) भारतीय पुलिस सेवा (IPS) भारतीय विदेश सेवा (IFS) भारतीय राजस्व सेवा (IRS) भारतीय व्यापार सेवा सहित अन्य ग्रुप A और ग्रुप B सेवाएं 979 पदों को भरने का लक्ष्य सिविल सेवा परीक्षा 2025 के माध्यम से केंद्र सरकार के विभिन्न विभागों में कुल 979 रिक्त पदों को भरा जाना है। ऐसे चेक करें UPSC CSE 2025 का रिजल्ट उम्मीदवार नीचे दिए गए स्टेप्स के माध्यम से अपना रिजल्ट देख सकते हैं— आधिकारिक वेबसाइट upsc.gov.in पर जाएं होमपेज पर “Examination” टैब पर क्लिक करें “Active Examinations” या “What’s New” सेक्शन में जाएं Civil Services Examination Final Result 2025 लिंक पर क्लिक करें मेरिट लिस्ट की PDF खुल जाएगी Ctrl + F दबाकर अपना नाम या रोल नंबर सर्च करें 15 दिन में जारी होगी मार्कशीट यूपीएससी के अनुसार सभी उम्मीदवारों की मार्कशीट रिजल्ट जारी होने के 15 दिनों के भीतर आयोग की वेबसाइट पर अपलोड कर दी जाएगी। उम्मीदवार इसे 30 दिनों तक ऑनलाइन डाउनलोड कर सकेंगे। पिछले साल का कट-ऑफ पिछले वर्ष का अंतिम कट-ऑफ इस प्रकार था— जनरल: 87.98 EWS: 85.92 OBC: 87.28 SC: 79.03 ST: 74.23 आयु सीमा क्या है यूपीएससी की अधिसूचना के अनुसार उम्मीदवार की आयु 1 अगस्त 2024 तक कम से कम 21 वर्ष और अधिकतम 32 वर्ष होनी चाहिए। यानी उम्मीदवार का जन्म 2 अगस्त 1992 से 1 अगस्त 2003 के बीच होना चाहिए। यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा भारत की सबसे कठिन और प्रतिष्ठित प्रतियोगी परीक्षाओं में से एक मानी जाती है। हर साल लाखों उम्मीदवार इस परीक्षा में शामिल होते हैं, लेकिन तीन चरणों—प्रारंभिक परीक्षा, मुख्य परीक्षा और इंटरव्यू—को पार कर बहुत कम उम्मीदवार ही अंतिम सूची में जगह बना पाते हैं। UPSC CSE 2025 टॉप-20 उम्मीदवारों की सूची रैंक रोल नंबर नाम 1 1131589 अनुज अग्निहोत्री 2 4000040 राजेश्वरी सुवे एम 3 3512521 अकांश ढुल 4 0834732 राघव झुनझुनवाला 5 0409847 ईशान भटनागर 6 6410067 जिनिया अरोड़ा 7 0818306 ए आर राजा मोहिद्दीन 8 0843487 पक्षल सेक्रेटरी 9 0831647 आस्था जैन 10 1523945 उज्ज्वल प्रियांक 11 1512091 यशस्वी राज वर्धन 12 0840280 अक्षित भारद्वाज 13 7813999 अनन्या शर्मा 14 5402316 सुरभि यादव 15 3507500 सिमरनदीप कौर 16 0867445 मोनिका श्रीवास्तव 17 0829589 चितवन जैन 18 5604518 श्रुति आर 19 0105602 निसार दिशांत अमृतलाल 20 6630448 रवि राज