Education Update

Ranchi University PG admissions
रांची यूनिवर्सिटी का नया शेड्यूल जारी, PG नामांकन प्रक्रिया में बड़ा बदलाव

रांची। रांची यूनिवर्सिटी (RU) ने स्नातकोत्तर (PG) सत्र 2025-27 में नामांकन प्रक्रिया को लेकर नया शेड्यूल जारी किया है। विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से जारी संशोधित कार्यक्रम के अनुसार अब पीजी पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए पहली मेरिट लिस्ट 13 जून को प्रकाशित की जाएगी। शेड्यूल में किए गए इस बदलाव के बाद हजारों छात्र-छात्राओं की निगाहें अब पहली मेरिट सूची पर टिकी हुई हैं।   मेरिट लिस्ट के बाद होगा दस्तावेज सत्यापन विश्वविद्यालय प्रशासन ने बताया कि पहली मेरिट लिस्ट जारी होने के बाद चयनित अभ्यर्थियों को निर्धारित समय के भीतर संबंधित पीजी विभागों और कॉलेजों में नामांकन प्रक्रिया पूरी करनी होगी। इसके लिए दस्तावेज सत्यापन भी किया जाएगा। छात्रों को सलाह दी गई है कि वे अपने सभी जरूरी प्रमाण पत्र और दस्तावेज पहले से तैयार रखें, ताकि नामांकन के समय किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।   पारदर्शी और व्यवस्थित प्रक्रिया पर जोर रांची यूनिवर्सिटी का कहना है कि प्रवेश प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित, पारदर्शी और समयबद्ध बनाने के उद्देश्य से शेड्यूल में बदलाव किया गया है। विश्वविद्यालय चरणबद्ध तरीके से नामांकन की पूरी प्रक्रिया संपन्न कराएगा। जिन छात्रों का नाम पहली मेरिट सूची में शामिल नहीं होगा, उन्हें आगामी मेरिट लिस्ट का इंतजार करना होगा।   कॉलेजों और विभागों में बढ़ी तैयारियां पहली मेरिट लिस्ट की नई तारीख घोषित होने के बाद विश्वविद्यालय के विभिन्न पीजी विभागों और संबद्ध कॉलेजों में तैयारियां तेज हो गई हैं। छात्र-छात्राएं भी लगातार प्रवेश प्रक्रिया से जुड़ी जानकारी जुटाने में लगे हुए हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन का दावा है कि सभी प्रक्रियाएं तय समय के अनुसार पूरी की जाएंगी।   छात्रों से आधिकारिक सूचना पर भरोसा करने की अपील विश्वविद्यालय ने छात्रों को सलाह दी है कि वे केवल आधिकारिक वेबसाइट और पोर्टल पर जारी सूचनाओं पर ही भरोसा करें। किसी भी अफवाह या भ्रामक जानकारी से बचते हुए विश्वविद्यालय के निर्देशों का पालन करें, ताकि नामांकन प्रक्रिया सुचारु रूप से पूरी हो सके।

anjali kumari जून 11, 2026 0
Jharkhand Teachers Recruitment
झारखंड में 25 हजार शिक्षकों की जायेगी नौकरी

रांची। झारखंड में करीब 25 हजार शिक्षकों की नौकरी पर खतरा मंडरा रहा है। इन शिक्षकों के प्रमाण पत्रों को अमान्य कर दिया गया है। यानी इनकी डिग्री अब फर्जी बताई जा रही है। इन शिक्षकों के प्रशिक्षण प्रमाणपत्र और प्रशिक्षण डिग्री वर्तमान जेटेट नियमावली के अनुरूप नहीं माने जाने के कारण उनके आवेदन स्वीकार नहीं किए जा रहे हैं। इससे हजारों शिक्षक फंस गये हैं। 31 अगस्त 2028 तक JTET पास करना अनिवार्य सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद झारखंड के लगभग 70 हजार शिक्षकों के लिए 31 अगस्त 2028 तक जेटेट उत्तीर्ण करना आवश्यक कर दिया गया है। यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर शिक्षक जेटेट पास नहीं कर पाते हैं, तो उनकी सेवा पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। ऐसे में आवेदन प्रक्रिया में आ रही बाधाओं ने शिक्षकों की चिंता और बढ़ा दी है। प्रशिक्षण प्रमाणपत्र विवाद से अटके आवेदन झारखंड के करीब 25 हजार शिक्षकों के जेटेट आवेदन स्वीकार नहीं हो रहे। प्रशिक्षण डिग्री और प्रमाणपत्र की मान्यता को लेकर विवाद बना हुआ है। जेटेट आवेदन की अंतिम तिथि 20 जून निर्धारित की गई है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार 31 अगस्त 2028 तक जेटेट पास करना अनिवार्य है। समस्या का समाधान नहीं होने पर शिक्षकों की नौकरी खतरे में पड़ सकती है। प्रशिक्षण प्रमाणपत्र की मान्यता पर उलझा मामला जानकारी के अनुसार, फिलहाल पूरा विवाद शिक्षकों के प्रशिक्षण प्रमाणपत्र और प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों की मान्यता को लेकर है। झारखंड एकेडमिक काउंसिल (जैक) ने जेटेट के लिए आवेदन स्वीकार करने की अंतिम तिथि 20 जून तय की है। लेकिन, बड़ी संख्या में शिक्षकों के आवेदन तकनीकी कारणों और प्रमाणपत्र संबंधी विसंगतियों के कारण लंबित पड़े हुए हैं। तकनीकी त्रुटियां और स्पष्ट दिशा-निर्देश की कमी कई शिक्षकों के दस्तावेजों में तकनीकी त्रुटियां बताई जा रही हैं, जबकि कुछ मामलों में प्रशिक्षण की मान्यता को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश उपलब्ध नहीं हैं। इसके कारण आवेदन प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। वर्षों से विद्यालयों में कार्यरत शिक्षक अब इस बात को लेकर चिंतित हैं कि यदि समय रहते समस्या का समाधान नहीं हुआ तो वे जेटेट परीक्षा में शामिल होने से वंचित रह सकते हैं। शिक्षकों और संबंधित संगठनों की मांग है कि सरकार, जैक और शिक्षा विभाग इस मामले में शीघ्र स्पष्ट निर्देश जारी करें, ताकि पात्र शिक्षकों के आवेदन स्वीकार किए जा सकें और उनके भविष्य पर मंडरा रहा संकट दूर हो सके।

Unknown जून 6, 2026 0
BIT Mesra
BIT Mesra में क्या अब नहीं पढ़गे झारखंड के छात्र

रांची। झारखंड के छात्रों के लिए प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग संस्थान बीआईटी मेसरा में प्रवेश अब पहले से ज्यादा कठिन होने वाला है। संस्थान ने सत्र 2026-27 से राज्य के विद्यार्थियों को मिलने वाला 50 प्रतिशत होम स्टेट कोटा समाप्त करने का निर्णय लिया है। अब सभी सीटों पर दाखिला केवल ऑल इंडिया मेरिट के आधार पर होगा।   एमओयू खत्म होने के बाद बदली व्यवस्था यह फैसला झारखंड सरकार और बीआईटी मेसरा के बीच हुए समझौते (एमओयू) की अवधि समाप्त होने के बाद लिया गया है। अब तक राज्य के छात्रों को संस्थान में विशेष अवसर मिलता था और कुल सीटों का आधा हिस्सा झारखंड के अभ्यर्थियों के लिए आरक्षित रहता था। इन सीटों पर प्रवेश जोसा, सीसैब और संस्थान स्तरीय काउंसलिंग के माध्यम से होता था। नई व्यवस्था लागू होने के बाद झारखंड के छात्रों को भी देशभर के उम्मीदवारों के साथ सीधे मुकाबले में उतरना होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे प्रवेश प्रक्रिया में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और कटऑफ भी पहले से अधिक ऊंचा जा सकता है।   650 बीटेक सीटों पर मिलता था लाभ बीआईटी मेसरा में बीटेक, बीआर्क और इंटीग्रेटेड एमएससी समेत विभिन्न पाठ्यक्रमों में कुल 1342 सीटें हैं। इनमें से करीब 650 बीटेक सीटों पर झारखंड के विद्यार्थियों को होम स्टेट कोटा का लाभ मिलता था। अब ये सभी सीटें ऑल इंडिया कोटा में शामिल कर दी जाएंगी।   बीसी-1 और बीसी-2 वर्ग पर भी असर इस फैसले का असर बीसी-1 और बीसी-2 वर्ग के छात्रों पर भी पड़ेगा। पहले इन वर्गों के लिए लगभग 80 सीटों पर विशेष आरक्षण का लाभ मिलता था, लेकिन अब इन सीटों पर भी राष्ट्रीय स्तर की मेरिट के आधार पर ही नामांकन होगा।   छात्रों और अभिभावकों में बढ़ी चिंता बीआईटी मेसरा लंबे समय से झारखंड के मेधावी छात्रों की पहली पसंद माना जाता रहा है। ऐसे में कोटा समाप्त होने की खबर से छात्रों और अभिभावकों के बीच चिंता बढ़ गई है। कई लोगों का मानना है कि इससे राज्य के विद्यार्थियों के लिए अवसर सीमित हो सकते हैं, जबकि कुछ विशेषज्ञ इसे संस्थान में गुणवत्ता और राष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा बढ़ाने की दिशा में उठाया गया कदम मान रहे हैं। संस्थान ने स्पष्ट किया है कि नई प्रवेश प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी होगी और सभी अभ्यर्थियों को समान अवसर प्रदान किए जाएंगे।   सरकार का क्या है कहना? इधर इस पूरे मामले पर झारखंड सरकार ने भी स्थिति स्पष्ट की है। सरकार का कहना है कि मामले में कानूनी राय ली जाएगी और सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद छात्रों के हित में फैसला लिया जाएगा। हालांकि जब तक अंतिम निर्णय नहीं हो जाता, तब तक यह मुद्दा छात्रों और अभिभावकों के लिए चिंता और असमंजस का कारण बना हुआ है।

Unknown मई 29, 2026 0
NDA-II Recruitment 2026
NDA-II Recruitment 2026: भारतीय सेना में अफसर बनने का मौका, 394 पदों पर निकली भर्ती

नई दिल्ली, एजेंसियां। संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने NDA-II Recruitment 2026 का आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। डिफेंस सेक्टर में करियर बनाने का सपना देखने वाले युवाओं के लिए यह एक बड़ा मौका माना जा रहा है। इस भर्ती अभियान के तहत नेशनल डिफेंस एकेडमी (NDA) और इंडियन नेवल एकेडमी (INA) में कुल 394 पदों पर उम्मीदवारों का चयन किया जाएगा। इच्छुक और योग्य उम्मीदवार 9 जून 2026 से पहले आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।   तीनों सेनाओं में होगी भर्ती इस भर्ती प्रक्रिया के जरिए भारतीय थल सेना, नौसेना और वायु सेना में अधिकारियों की नियुक्ति की जाएगी। जारी नोटिफिकेशन के अनुसार थल सेना के लिए 208 पद, नौसेना के लिए 42 पद, वायु सेना के विभिन्न विभागों के लिए 120 पद और नेवल अकादमी के लिए 24 सीटें निर्धारित की गई हैं। चयनित उम्मीदवारों को प्रतिष्ठित रक्षा अकादमियों में प्रशिक्षण दिया जाएगा।   कब होगी परीक्षा? UPSC द्वारा NDA-II परीक्षा का आयोजन 13 सितंबर 2026 को किया जाएगा। परीक्षा देशभर के विभिन्न परीक्षा केंद्रों पर आयोजित होगी। उम्मीदवारों के एडमिट कार्ड 6 सितंबर 2026 को जारी किए जाएंगे। वहीं परीक्षा परिणाम सितंबर 2026 के अंत तक घोषित होने की संभावना जताई जा रही है।   शैक्षणिक योग्यता और आयु सीमा इस भर्ती के लिए उम्मीदवार का 12वीं पास होना जरूरी है। जो छात्र वर्तमान में 12वीं कक्षा में पढ़ रहे हैं, वे भी आवेदन कर सकते हैं। आर्मी विंग के लिए किसी भी स्ट्रीम के छात्र आवेदन करने के पात्र हैं, जबकि एयरफोर्स और नेवी विंग के लिए 12वीं में फिजिक्स और मैथ्स विषय होना अनिवार्य है।   आयु सीमा के तहत उम्मीदवार का जन्म 1 जनवरी 2008 से 1 जनवरी 2011 के बीच होना चाहिए। केवल अविवाहित पुरुष और महिला उम्मीदवार ही इस भर्ती के लिए आवेदन कर सकते हैं।   तीन चरणों में होगी चयन प्रक्रिया NDA भर्ती प्रक्रिया तीन चरणों में पूरी की जाएगी। पहले चरण में लिखित परीक्षा आयोजित होगी, जिसमें गणित और सामान्य योग्यता परीक्षण शामिल रहेगा। इसके बाद सफल उम्मीदवारों को SSB इंटरव्यू के लिए बुलाया जाएगा। अंतिम चरण में मेडिकल परीक्षण किया जाएगा। सभी चरणों में प्रदर्शन के आधार पर अंतिम मेरिट तैयार की जाएगी।   आवेदन शुल्क और स्टाइपेंड सामान्य वर्ग के उम्मीदवारों के लिए आवेदन शुल्क 100 रुपये तय किया गया है, जबकि आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों को शुल्क में छूट दी गई है। प्रशिक्षण के दौरान उम्मीदवारों को लगभग 56,100 रुपये प्रतिमाह स्टाइपेंड दिया जाएगा। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद अधिकारियों को लेवल-10 पे स्केल के अनुसार वेतन और अन्य भत्ते मिलेंगे।   ऐसे करें आवेदन उम्मीदवार सबसे पहले आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर वन टाइम रजिस्ट्रेशन करें। इसके बाद लॉगिन करके NDA-II आवेदन फॉर्म भरें, जरूरी दस्तावेज अपलोड करें और आवेदन शुल्क जमा कर फॉर्म सबमिट करें। भविष्य के लिए आवेदन पत्र का प्रिंटआउट सुरक्षित रखना जरूरी है। 

Unknown मई 23, 2026 0
NTA entrance exam
NTA की बड़ी तैयारी, JEE और NEET के लिए हो सकती है एक साझा प्रवेश परीक्षा

नई दिल्ली, एजेंसियां। देश में इंजीनियरिंग और मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं के स्वरूप में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। केंद्र सरकार अब JEE और NEET जैसी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं के लिए एक साझा प्रवेश परीक्षा प्रणाली लागू करने पर विचार कर रही है। इस प्रस्ताव पर चर्चा NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले के बाद गठित संसदीय समिति की बैठक में हुई।   अधिकारियों के अनुसार यह प्रस्ताव उस उच्चस्तरीय समिति की सिफारिशों पर आधारित है, जिसकी अध्यक्षता K. Radhakrishnan ने की थी। रिपोर्ट में स्नातक स्तर पर प्रवेश परीक्षाओं में एकरूपता लाने और एक साझा परीक्षा ढांचा तैयार करने की सिफारिश की गई है। इसके तहत भविष्य में JEE और NEET जैसी परीक्षाएं एक ही प्लेटफॉर्म पर आयोजित हो सकती हैं, जिसमें इंजीनियरिंग और मेडिकल छात्रों के लिए अलग-अलग विषय सेक्शन होंगे।   संसदीय समिति ने दिया समर्थन शिक्षा, महिला, बाल, युवा और खेल मामलों की संसदीय स्थायी समिति के कई सदस्यों ने इस विचार का समर्थन किया है। समिति का मानना है कि एक साझा परीक्षा व्यवस्था से परीक्षा प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित होगी।   NEET में उम्र सीमा और Attempt तय करने की तैयारी समिति ने NEET परीक्षा के लिए उम्र सीमा और प्रयासों की संख्या तय करने का भी सुझाव दिया है। अधिकारियों का कहना है कि इससे मेडिकल प्रवेश परीक्षा की प्रणाली अन्य राष्ट्रीय प्रतियोगी परीक्षाओं के समान हो जाएगी।   पेपर लीक के बाद सुरक्षा व्यवस्था पर फोकस NEET-UG 2026 परीक्षा 3 मई को आयोजित हुई थी, लेकिन पेपर लीक और धांधली के आरोपों के बाद इसे रद्द करना पड़ा। अब दोबारा परीक्षा 21 जून को कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच आयोजित की जाएगी। मामले की जांच Central Bureau of Investigation कर रही है।   इसी बीच NTA प्रश्न पत्र तैयार करने की प्रक्रिया में बाहरी एजेंसियों की भूमिका कम करने और अपना तकनीकी इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने की दिशा में भी काम कर रहा है, ताकि भविष्य में परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित बनाया जा सके।

Unknown मई 23, 2026 0
Teachers Salary Issue
हजारीबाग में 59 स्कूलों के प्राचार्य और शिक्षकों के वेतन पर रोक, शोकॉज जारी

रांची। झारखंड एकेडमिक काउंसिल (जैक) की मैट्रिक परीक्षा में 95 प्रतिशत से कम रिजल्ट देने वाले हजारीबाग जिले के 59 हाई स्कूलों के प्राचार्य और शिक्षकों का वेतन रोक दिया गया है। इनसे एक सप्ताह में स्पष्टीकरण मांगा गया है। मैट्रिक के रिजल्ट में हजारीबाग 14वें नंबर पर जिला शिक्षा पदाधिकारी प्रवीण रंजन ने बताया कि इस बार रिजल्ट में हजारीबाग 14वें स्थान पर रहा। जबकि पिछले साल यह सातवें स्थान पर था। जिन स्कूलों से स्पष्टीकरण मांगा गया है, उनमें पीएमश्री केबी हाई स्कूल, हिंदू प्लस टू स्कूल, केएन प्लस टू स्कूल इचाक, राम नारायण प्लस टू स्कूल पदमा और पीएमश्री स्कूल देवकुली, सलगावां, पबरा, सरौनी व ढौठवा आदि शामिल हैं। इन स्कूलों में शिक्षकों की संख्या भी पर्याप्त है। इस बार गणित, अंग्रेजी और विज्ञान में बड़ी संख्या में बच्चे फेल हो गए हैं, जिसके कारण इन स्कूलों का रिजल्ट गिरा है।

Unknown मई 18, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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Deepshikha जून 5, 2026 0