electricity bill

Consumer checking UPPCL electricity bill and making online payment through mobile app
UP में प्रीपेड मीटर उपभोक्ताओं का बिजली बिल जारी, जानें कैसे चेक करें और मिनटों में करें भुगतान

उत्तर प्रदेश में प्रीपेड बिजली मीटर व्यवस्था समाप्त होने के बाद अब उपभोक्ताओं को पोस्टपेड सिस्टम के तहत बिजली बिल भेजा जा रहा है। जून 2026 से प्रीपेड मीटर वाले उपभोक्ताओं को भी सामान्य उपभोक्ताओं की तरह मासिक बिजली बिल प्राप्त होगा। हालांकि बिल प्राप्त करने और भुगतान करने की प्रक्रिया में कुछ बदलाव किए गए हैं। यदि आपका प्रीपेड मीटर भी पोस्टपेड सिस्टम में परिवर्तित हो चुका है, तो आप SMS, WhatsApp, UPPCL ऐप या अन्य डिजिटल पेमेंट प्लेटफॉर्म के माध्यम से अपना बिजली बिल आसानी से चेक और जमा कर सकते हैं। ऐसे चेक करें अपना बिजली बिल 1. SMS के जरिए बिजली बिल देखने का सबसे आसान तरीका SMS है। अपने मोबाइल का मैसेज बॉक्स खोलें। UPPCL या अपने डिस्कॉम (PVVNL, MVVNL, DVVNL, PuVVNL आदि) के नाम से आए संदेश को खोजें। उसी मैसेज में आपका बिल विवरण उपलब्ध होगा। 2. UPPCL ऐप के जरिए अपने मोबाइल में UPPCL ऐप डाउनलोड करें। रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर से लॉगिन करें। होम स्क्रीन पर आपका बिजली बिल दिखाई देगा। यहां से बिल की राशि, देय तिथि और अन्य जानकारी देख सकते हैं। 3. WhatsApp के जरिए अपने संबंधित डिस्कॉम के व्हाट्सएप नंबर पर Hello भेजें। इसके बाद दिखाई देने वाले मेन्यू में बिजली बिल विकल्प चुनकर बिल की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। व्हाट्सएप नंबर: DVVNL : 8010957826 MVVNL : 8010924203 PuVVNL : 8010968292 PVVNL : 7859804803 KESCO : 8287835233 बिजली बिल का भुगतान कैसे करें? UPPCL ऐप से भुगतान UPPCL ऐप खोलें। होम स्क्रीन पर दिखाई दे रहे बिल के नीचे Pay Now पर क्लिक करें। कैप्चा भरकर लॉगिन करें। बिल राशि की पुष्टि करें। Proceed पर क्लिक करें। BillDesk विकल्प चुनें। UPI, डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड या अन्य भुगतान विकल्प का चयन करें। भुगतान पूरा करें। अन्य ऐप्स से भी कर सकते हैं भुगतान यदि UPPCL ऐप का उपयोग नहीं कर पा रहे हैं तो— Google Pay PhonePe Paytm BHIM UPI Amazon Pay जैसे प्लेटफॉर्म पर जाकर अपनी कस्टमर आईडी और संबंधित डिस्कॉम चुनकर बिजली बिल का भुगतान कर सकते हैं। भुगतान के बाद इन बातों का रखें ध्यान भुगतान की रसीद अवश्य डाउनलोड या सेव करें। UPPCL ऐप में भुगतान इतिहास (Payment History) देखकर पुरानी रसीदें भी डाउनलोड की जा सकती हैं। किसी भी विवाद की स्थिति में डिजिटल रसीद आपके भुगतान का प्रमाण होगी। उपभोक्ताओं के लिए क्या बदला? पहले प्रीपेड मीटर उपभोक्ताओं को बिजली इस्तेमाल करने से पहले रिचार्ज कराना पड़ता था। अब पोस्टपेड व्यवस्था लागू होने के बाद उपभोक्ता पहले बिजली का उपयोग करेंगे और बाद में मासिक बिल का भुगतान करेंगे। इससे रिचार्ज की झंझट खत्म हो गई है और भुगतान प्रक्रिया भी पहले से अधिक सरल हो गई है।  

surbhi जून 4, 2026 0
Technician inspecting AC cooling coil and refrigerant system to prevent gas leakage and improve performance
AC की गैस बार-बार खत्म हो जाती है? यह सस्ता उपाय बचा सकता है हजारों रुपये, जानिए पूरा सच

गर्मी के मौसम में एयर कंडीशनर (AC) अब केवल सुविधा नहीं बल्कि जरूरत बन चुका है। लेकिन कई लोगों को कुछ वर्षों बाद एक आम और महंगी समस्या का सामना करना पड़ता है—एसी की गैस का बार-बार लीक होना। जब एसी की कूलिंग अचानक कम हो जाती है और तकनीशियन जांच करता है, तो अक्सर पता चलता है कि रेफ्रिजरेंट गैस लीक हो गई है। गैस रीफिल कराने में हजारों रुपये खर्च हो सकते हैं और यदि समस्या बार-बार हो तो खर्च लगातार बढ़ता जाता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, एसी की गैस लीकेज के पीछे सबसे बड़ी वजह कूलिंग कॉयल पर लगने वाली जंग होती है। एसी की कॉयल लगातार नमी, धूल, प्रदूषण और वातावरण में मौजूद रासायनिक तत्वों के संपर्क में रहती है। समय के साथ धातु की सतह कमजोर होने लगती है और उसमें बेहद छोटे छेद बन सकते हैं। यही छेद बाद में गैस लीकेज का कारण बनते हैं। क्या है कॉयल प्रोटेक्शन स्प्रे? बाजार में उपलब्ध कॉयल प्रोटेक्शन या कॉयल सेवर स्प्रे इन समस्याओं को कम करने के उद्देश्य से बनाए जाते हैं। ये स्प्रे कॉयल की सतह पर एक सुरक्षात्मक परत तैयार करते हैं, जो नमी और जंग से बचाव में मदद कर सकती है। कई उत्पाद धूल और गंदगी को कम चिपकने देने का दावा भी करते हैं, जिससे कॉयल अपेक्षाकृत साफ बनी रहती है। इन स्प्रे की कीमत आमतौर पर 300 रुपये से शुरू होती है, जो संभावित गैस रीफिल खर्च की तुलना में काफी कम है। क्या सच में बढ़ सकती है AC की उम्र? तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय-समय पर कॉयल की सुरक्षा की जाए और नियमित सर्विसिंग कराई जाए, तो जंग लगने की संभावना कम हो सकती है। इससे कॉयल की लाइफ बढ़ सकती है और गैस लीकेज का जोखिम भी घट सकता है। हालांकि केवल स्प्रे का इस्तेमाल करना ही पर्याप्त समाधान नहीं है। एसी की नियमित सफाई, फिल्टर मेंटेनेंस और समय-समय पर तकनीकी निरीक्षण भी बेहद जरूरी है। बिजली बिल में भी हो सकती है बचत जब एसी में रेफ्रिजरेंट गैस का स्तर सही रहता है, तो कंप्रेसर को अतिरिक्त दबाव में काम नहीं करना पड़ता। इससे मशीन की कार्यक्षमता बेहतर बनी रहती है और बिजली की खपत भी नियंत्रित रहती है। दूसरी ओर, गैस लीकेज वाले एसी को समान कूलिंग देने के लिए अधिक समय तक चलना पड़ता है, जिससे बिजली बिल बढ़ सकता है। खरीदने से पहले रखें ये सावधानियां कॉयल प्रोटेक्शन स्प्रे खरीदते समय केवल कम कीमत देखकर फैसला न करें। विश्वसनीय ब्रांड का उत्पाद चुनें, उसके निर्देश ध्यान से पढ़ें और आवश्यकता होने पर अधिकृत एसी तकनीशियन से सलाह लें। सही उत्पाद, नियमित सर्विसिंग और समय पर मेंटेनेंस का संयोजन ही एसी को लंबे समय तक बेहतर स्थिति में रख सकता है। कुल मिलाकर, कॉयल प्रोटेक्शन स्प्रे एसी की सुरक्षा में सहायक हो सकते हैं, लेकिन इन्हें नियमित रखरखाव का विकल्प नहीं बल्कि एक अतिरिक्त सुरक्षा उपाय के रूप में देखना चाहिए।  

surbhi जून 3, 2026 0
Smart electricity meter installation drive announced for 2 crore consumers in West Bengal
बंगाल में 2 करोड़ घरों में लगेंगे स्मार्ट मीटर, बिजली व्यवस्था सुधारने के लिए शुरू होगी बड़ी योजना

  पश्चिम बंगाल में बिजली क्षेत्र में बड़े बदलाव की तैयारी शुरू हो गई है। राज्य सरकार ने करीब 2 करोड़ बिजली उपभोक्ताओं के लिए स्मार्ट मीटर लगाने की योजना को मंजूरी दे दी है। कोलकाता में केंद्रीय ऊर्जा मंत्री Manohar Lal Khattar और मुख्यमंत्री Suvendu Adhikari के बीच हुई समीक्षा बैठक में इस महत्वाकांक्षी कार्यक्रम पर सहमति बनी। योजना के तहत जुलाई 2026 से चरणबद्ध तरीके से पुराने बिजली मीटरों को स्मार्ट मीटर से बदला जाएगा। सरकार का दावा है कि इससे बिजली चोरी पर रोक लगेगी, बकाया बिलों की वसूली आसान होगी और वितरण व्यवस्था अधिक पारदर्शी बनेगी। पहले सरकारी दफ्तरों में लगेंगे स्मार्ट मीटर सरकार ने इस परियोजना को मिशन मोड में लागू करने का फैसला किया है। जून 2026 तक सभी सरकारी कार्यालयों और सरकारी परिसरों में स्मार्ट मीटर लगाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके बाद अगस्त 2026 तक इन सभी कनेक्शनों को प्रीपेड प्रणाली में बदला जाएगा। सरकारी विभागों में बकाया बिलों की समस्या को खत्म करने के लिए यह कदम अहम माना जा रहा है। घरेलू और औद्योगिक उपभोक्ता भी आएंगे दायरे में सरकारी प्रतिष्ठानों के बाद बड़े औद्योगिक उपभोक्ताओं को स्मार्ट मीटर से जोड़ा जाएगा। इसके बाद राज्यभर के घरेलू उपभोक्ताओं के घरों में स्मार्ट मीटर लगाए जाएंगे। राज्य सरकार का कहना है कि आम उपभोक्ताओं को प्रीपेड प्रणाली अपनाने के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा। उपभोक्ता अपनी सुविधा के अनुसार प्रीपेड या पोस्टपेड, किसी भी विकल्प का चयन कर सकेंगे। उपभोक्ताओं को मीटर लगाने के लिए एक साथ पूरी रकम नहीं चुकानी होगी।  स्मार्ट मीटर योजना के तहत केंद्र सरकार प्रत्येक मीटर पर 900 रुपये की सहायता देगी। उपभोक्ताओं को मीटर लगाने के लिए एक साथ पूरी रकम  राशि नहीं चुकानी होगी। सरकार के अनुसार, उपभोक्ताओं से मासिक बिजली बिल के साथ लगभग 100 रुपये का अतिरिक्त योगदान लिया जाएगा, जिससे मीटर की लागत की भरपाई की जाएगी। 15 हजार करोड़ रुपये के घाटे को कम करने की तैयारी समीक्षा बैठक में सामने आया कि राज्य के बिजली क्षेत्र पर करीब 15,000 करोड़ रुपये का वित्तीय बोझ है। इसके अलावा ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन (T&D) लॉस लगभग 12 प्रतिशत तक पहुंच चुका है। सरकार का लक्ष्य स्मार्ट मीटरिंग के जरिए इस नुकसान को सिंगल डिजिट में लाना है। अगले दो महीनों में एक विस्तृत "सोर्स एलोकेशन प्लान" तैयार किया जाएगा, जिसके आधार पर बिजली क्षेत्र की वित्तीय स्थिति को सुधारने की रणनीति बनाई जाएगी। बकाया बिलों की वसूली के लिए बनेगा सख्त तंत्र राज्य सरकार सरकारी विभागों और बड़े उपभोक्ताओं पर बकाया लगभग 800 करोड़ रुपये की राशि की वसूली के लिए भी नई व्यवस्था तैयार कर रही है। अधिकारियों का मानना है कि स्मार्ट मीटर से रीयल-टाइम निगरानी संभव होगी, जिससे बकाया भुगतान और बिजली खपत पर बेहतर नियंत्रण रखा जा सकेगा। सौर ऊर्जा योजनाओं को भी मिलेगा बढ़ावा बैठक में केवल स्मार्ट मीटरिंग ही नहीं, बल्कि नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देने पर भी चर्चा हुई। राज्य सरकार ने केंद्र को भरोसा दिलाया है कि पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना और पीएम-कुसुम योजना के क्रियान्वयन में तेजी लाई जाएगी। सरकार का कहना है कि इन योजनाओं के जरिए किसानों और निम्न आय वर्ग के परिवारों को सस्ती तथा स्वच्छ ऊर्जा उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।  

Deepshikha जून 2, 2026 0
Person using remote control to operate air conditioner in a home during summer heat
AC को बार-बार ऑन-ऑफ करना सही या गलत? जानिए गर्मियों में इस्तेमाल का सही तरीका

गर्मियों के मौसम में एयर कंडीशनर (AC) का इस्तेमाल तेजी से बढ़ जाता है। ऐसे में कई लोग बिजली बचाने के लिए AC को हर 10–15 मिनट में ऑन-ऑफ करते रहते हैं। लेकिन क्या यह तरीका सही है? एक्सपर्ट्स के मुताबिक, यह आदत फायदे की बजाय नुकसान पहुंचा सकती है। क्या बार-बार AC ऑन-ऑफ करना सही है? टेक्निकल तौर पर AC को बार-बार ऑन-ऑफ करना गलत माना जाता है। जब भी AC चालू किया जाता है, उसका कंप्रेसर (compressor) शुरुआत में ज्यादा बिजली खपत करता है। ऐसे में अगर आप इसे बार-बार बंद करके फिर चालू करते हैं, तो हर बार स्टार्टिंग लोड बढ़ता है, जिससे कुल बिजली खपत ज्यादा हो जाती है। क्यों बढ़ जाता है बिजली बिल? हर बार ON करने पर कंप्रेसर को ज्यादा पावर चाहिए होती है बार-बार स्टार्ट होने से यूनिट को कमरे को फिर से ठंडा करने में ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है इससे बिजली की खपत कम होने के बजाय बढ़ जाती है AC को नुकसान कैसे होता है? कंप्रेसर पर बार-बार दबाव पड़ता है मशीन के पार्ट्स जल्दी घिसने लगते हैं AC की लाइफ कम हो सकती है खराब होने की संभावना बढ़ जाती है सही तरीका क्या है? AC को बार-बार ऑन-ऑफ करने के बजाय लगातार चलने दें तापमान 24–26°C के बीच सेट रखें (यह सबसे ऊर्जा-कुशल माना जाता है) टाइमर या स्लीप मोड का इस्तेमाल करें कमरे को पूरी तरह बंद रखें ताकि कूलिंग बनी रहे नियमित सर्विसिंग कराते रहें AC को बार-बार ऑन-ऑफ करना बिजली बचाने का तरीका नहीं है, बल्कि इससे बिजली बिल बढ़ सकता है और मशीन पर भी बुरा असर पड़ता है। सही उपयोग और सेटिंग्स अपनाकर ही आप बेहतर कूलिंग के साथ   

surbhi अप्रैल 17, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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Jamshid Ghomi accused of exporting sensitive US technology to Iran in sanctions case
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अमेरिका में ईरान कनेक्शन का खुलासा, प्रतिबंधित टेक्नोलॉजी सप्लाई के आरोप में CEO गिरफ्तार

Deepshikha जून 4, 2026 0