Energy Security India

Mohra hydroelectric power project on Jhelum River in Uri Jammu Kashmir undergoing revival work
सिंधु के बाद भारत का बड़ा कदम: झेलम पर ‘मोहरा’ प्रोजेक्ट को रफ्तार, बढ़ी पाकिस्तान की चिंता

भारत ने जल और ऊर्जा रणनीति के मोर्चे पर एक और बड़ा कदम उठाते हुए जम्मू-कश्मीर में झेलम नदी पर स्थित ऐतिहासिक मोहरा हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर प्रोजेक्ट को फिर से शुरू करने की प्रक्रिया तेज कर दी है। इस फैसले को न सिर्फ ऊर्जा उत्पादन, बल्कि रणनीतिक नजरिए से भी बेहद अहम माना जा रहा है, जिससे पाकिस्तान की चिंता बढ़ना तय है। 120 साल पुराना प्रोजेक्ट फिर होगा चालू उत्तर कश्मीर के उरी सेक्टर में स्थित यह प्रोजेक्ट 1905 में शुरू हुआ था और कभी पूरे क्षेत्र की बिजली जरूरतों का प्रमुख स्रोत था। शुरुआती क्षमता: 10.5 मेगावाट 1992 की भीषण बाढ़ के बाद बंद पिछले 30 वर्षों से ठप पड़ा था अब बदलते भू-राजनीतिक हालात और बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को देखते हुए इसे दोबारा शुरू करने की योजना बनाई गई है। कैसे आगे बढ़ रहा है काम? जम्मू-कश्मीर स्टेट पावर डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन ने फरवरी 2026 में इस प्रोजेक्ट के पुनरुद्धार को मंजूरी दी। ट्रांजैक्शन एडवाइजर (TA) की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू रेनोवेशन, मॉडर्नाइजेशन और अपग्रेडेशन की तैयारी आईआईटी रुड़की को DPR अपडेट करने की जिम्मेदारी सरकार जल्द ही टेंडर जारी कर इस प्रोजेक्ट को आधुनिक स्वरूप देने की दिशा में आगे बढ़ेगी। सिंधु जल संधि के बाद तेज हुई रणनीति भारत द्वारा सिंधु जल संधि को स्थगित करने के बाद जल संसाधनों के अधिकतम उपयोग पर जोर दिया जा रहा है। लक्ष्य है: मौजूदा 3540 मेगावाट क्षमता को बढ़ाकर 2035 तक 11,000 मेगावाट करना पुराने प्रोजेक्ट्स को पुनर्जीवित करना नए हाइड्रो प्रोजेक्ट्स को तेजी से लागू करना पाकिस्तान के लिए क्यों है चिंता? झेलम नदी भारत-पाकिस्तान के बीच एक महत्वपूर्ण नदी है। जल प्रवाह और नियंत्रण का रणनीतिक महत्व ऊर्जा उत्पादन के साथ जल प्रबंधन पर असर क्षेत्रीय शक्ति संतुलन बदलने की संभावना ऐसे में मोहरा प्रोजेक्ट का पुनरुद्धार पाकिस्तान के लिए एक बड़ा संकेत माना जा रहा है। सिर्फ बिजली नहीं, रणनीतिक ‘मोहरा’ विशेषज्ञों का मानना है कि भले ही इस प्रोजेक्ट की क्षमता सीमित हो, लेकिन इसका महत्व केवल बिजली उत्पादन तक सीमित नहीं है। यह: भारत की जल संसाधन क्षमता का प्रतीक है ऐतिहासिक और तकनीकी विरासत को पुनर्जीवित करता है रणनीतिक दबाव बनाने का एक साधन भी बन सकता है निष्कर्ष मोहरा हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर प्रोजेक्ट का पुनरुद्धार भारत की ऊर्जा आत्मनिर्भरता और रणनीतिक सोच का हिस्सा है। आने वाले समय में यह कदम क्षेत्रीय राजनीति और जल विवादों पर बड़ा असर डाल सकता है।  

surbhi अप्रैल 3, 2026 0
PM Modi meeting with officials discussing Middle East crisis impact on oil supply and economy strategy
मिडिल ईस्ट संकट पर मोदी सरकार का एक्शन प्लान: तेल-गैस सप्लाई से लेकर महंगाई नियंत्रण तक 3-स्तरीय रणनीति तैयार

मध्य-पूर्व में जारी तनाव और Iran-Israel conflict के बीच भारत सरकार ने अपनी अर्थव्यवस्था को सुरक्षित रखने के लिए बड़ा कदम उठाया है। प्रधानमंत्री Narendra Modi की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) की बैठक में एक व्यापक रणनीति तैयार की गई, जिसका मुख्य उद्देश्य है-देश में तेल, गैस, खाद और जरूरी वस्तुओं की आपूर्ति किसी भी हालत में बाधित न हो। सरकार का साफ संदेश: सप्लाई नहीं रुकेगी बैठक के बाद सरकार ने स्पष्ट किया कि: पेट्रोल-डीजल और गैस की सप्लाई जारी रहेगी देश में पर्याप्त कोयला भंडार मौजूद है, इसलिए बिजली संकट की आशंका नहीं महंगाई को नियंत्रित रखने के लिए सप्लाई चेन मजबूत की जाएगी भारत अपनी जरूरत का लगभग: 85% कच्चा तेल 50% प्राकृतिक गैस 60% LPG आयात करता है, ऐसे में मिडिल ईस्ट संकट से आपूर्ति प्रभावित होना बड़ी चुनौती है। 11 अहम सेक्टरों पर फोकस सरकार ने 11 महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर विशेष निगरानी रखी है: कृषि उर्वरक खाद्य सुरक्षा पेट्रोलियम बिजली MSME निर्यात शिपिंग व्यापार वित्त सप्लाई चेन इन सभी सेक्टरों पर संभावित प्रभाव को देखते हुए ठोस कदम उठाने की योजना बनाई गई है। तीन-स्तरीय रणनीति: Short, Medium और Long Term प्लान 1. अल्पकालिक रणनीति (Short-term) जरूरी वस्तुओं की उपलब्धता सुनिश्चित करना बाजार में कीमतों को नियंत्रण में रखना मौजूदा स्टॉक की लगातार समीक्षा 2. मध्यम अवधि रणनीति (Medium-term) तेल, गैस और खाद के लिए वैकल्पिक देशों से आयात बफर स्टॉक को मजबूत करना सप्लाई चेन को स्थिर बनाए रखना 3. दीर्घकालिक रणनीति (Long-term) आत्मनिर्भरता बढ़ाने पर जोर MSME और कृषि उत्पादन को मजबूत करना रिन्यूएबल एनर्जी को बढ़ावा देकर ऊर्जा निर्भरता कम करना किसानों और खाद सुरक्षा पर विशेष ध्यान सरकार ने आगामी खरीफ सीजन को ध्यान में रखते हुए खाद की उपलब्धता को प्राथमिकता दी है। वैकल्पिक आयात स्रोतों पर भी काम किया जा रहा है ताकि किसी भी स्थिति में किसानों को परेशानी न हो। इंडस्ट्री और एक्सपोर्ट के लिए भी प्लान केमिकल, फार्मा और पेट्रोकेमिकल सेक्टर के लिए नए आयात स्रोत भारतीय उत्पादों के लिए नए एक्सपोर्ट मार्केट विकसित करने की योजना सरकार का यह एक्शन प्लान साफ संकेत देता है कि वैश्विक संकट के बावजूद भारत अपनी अर्थव्यवस्था को स्थिर रखने के लिए तैयार है। तेल-गैस सप्लाई, खाद सुरक्षा और महंगाई नियंत्रण जैसे अहम मुद्दों पर फोकस से आम जनता को राहत मिलने की उम्मीद है।  

surbhi मार्च 23, 2026 0
LPG tanker ships waiting near Strait of Hormuz amid Middle East tensions before sailing to India
ईरान युद्ध के बीच भारत की बड़ी तैयारी: 8 LPG टैंकर जल्द पार करेंगे होर्मुज, गैस की किल्लत की आशंका कम

  मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और ईरान से जुड़े युद्ध हालात के बीच भारत ने घरेलू रसोई गैस आपूर्ति को सुरक्षित रखने के लिए बड़ा कूटनीतिक कदम उठाया है। सरकार के अनुसार, जल्द ही 8 LPG टैंकर Strait of Hormuz को पार कर भारत की ओर रवाना होंगे, जिससे देश में गैस संकट की आशंकाओं को काफी हद तक कम किया जा सकेगा। सूत्रों के मुताबिक, फिलहाल ये सभी टैंकर होर्मुज जलडमरूमध्य के ठीक पहले इंतजार कर रहे हैं और उनकी सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए भारत और ईरान के बीच लगातार बातचीत जारी है।   जयशंकर और ईरानी विदेश मंत्री के बीच हुई बातचीत ऊर्जा आपूर्ति को प्रभावित होने से बचाने के लिए भारत ने कूटनीतिक स्तर पर सक्रियता बढ़ा दी है। विदेश मंत्री S. Jaishankar और ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi के बीच कई दौर की फोन पर बातचीत हुई है। इन चर्चाओं का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि भारतीय LPG टैंकरों को सुरक्षित मार्ग मिल सके और वे बिना किसी बाधा के होर्मुज जलडमरूमध्य पार कर सकें।   होर्मुज के पास खड़े हैं 8 टैंकर सरकारी सूत्रों के अनुसार, आठ LPG टैंकर इस समय होर्मुज के पास खड़े हैं और स्थिति सामान्य होने का इंतजार कर रहे हैं। ईरानी अधिकारियों ने भारतीय जहाजों की आवाजाही में सहयोग का भरोसा दिया है। इसके साथ ही मानवीय पहलू पर भी बातचीत हो रही है। करीब 250 ईरानी नाविक फिलहाल भारत में हैं, जिन्हें रहने की सुविधा दी गई है और उनके स्वदेश लौटने की व्यवस्था की जा रही है।   सरकार ने बनाया संकट प्रबंधन प्लान ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित न हो, इसके लिए केंद्र सरकार का क्राइसिस मैनेजमेंट ग्रुप (Crisis Management Group) लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है। यह समूह तेल और गैस की आपूर्ति श्रृंखला को सुरक्षित रखने के लिए विभिन्न मंत्रालयों और एजेंसियों के साथ समन्वय कर रहा है, ताकि देश में LPG कुकिंग गैस की सप्लाई सामान्य बनी रहे।   भारत की LPG आयात पर निर्भरता भारत अपनी कुल LPG जरूरतों का करीब 60 से 67 प्रतिशत हिस्सा आयात करता है। इस आयात का बड़ा भाग खाड़ी देशों से आता है और अधिकांश शिपमेंट Strait of Hormuz के रास्ते ही भारत पहुंचते हैं। ऐसे में इस समुद्री मार्ग में किसी भी तरह की रुकावट देश की ऊर्जा आपूर्ति को प्रभावित कर सकती है।   नौसेना एस्कॉर्ट पर भी विचार सूत्रों के अनुसार, अगर हालात ज्यादा तनावपूर्ण होते हैं तो भारत अपने ईंधन से भरे जहाजों की सुरक्षा के लिए नौसेना एस्कॉर्ट देने के विकल्प पर भी विचार कर रहा है, ताकि आपूर्ति श्रृंखला बाधित न हो।  

surbhi मार्च 13, 2026 0
India’s External Affairs Minister S Jaishankar speaking in Rajya Sabha on Middle East crisis
मिडिल ईस्ट संकट पर भारत सतर्क, ऊर्जा जरूरतों को लेकर सभी विभाग अलर्ट: एस जयशंकर

  मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और Israel, Iran तथा United States के बीच जारी संघर्ष को लेकर भारत सरकार ने स्थिति पर कड़ी नजर बनाए रखी है। विदेश मंत्री S. Jaishankar ने सोमवार को Rajya Sabha में बयान देते हुए कहा कि भारत इस संकट का समाधान बातचीत और कूटनीति के जरिए चाहता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत कभी भी युद्ध का समर्थन नहीं करता और सभी पक्षों से शांति बनाए रखने की अपील करता है। जयशंकर ने कहा कि खाड़ी क्षेत्र में हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं और सरकार वहां रह रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। उन्होंने बताया कि Narendra Modi स्वयं स्थिति पर लगातार नजर रखे हुए हैं और सरकार की विभिन्न एजेंसियां हालात पर निगरानी कर रही हैं। उन्होंने कहा कि संघर्ष के कारण आम जनजीवन और कारोबार दोनों प्रभावित हो रहे हैं, जिससे वैश्विक स्तर पर भी चिंताएं बढ़ी हैं। विदेश मंत्री ने यह भी बताया कि ईरान में फंसे भारतीयों की मदद के लिए Embassy of India, Tehran लगातार काम कर रहा है और जरूरत पड़ने पर भारतीयों को सुरक्षित बाहर निकालने की तैयारी भी की जा रही है। उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में फंसे भारतीयों को वापस लाने के लिए सरकार हर संभव कदम उठा रही है। ऊर्जा आपूर्ति के मुद्दे पर बोलते हुए जयशंकर ने कहा कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को लेकर पूरी तरह सतर्क है और इस विषय पर सभी संबंधित विभागों को अलर्ट पर रखा गया है। उन्होंने बताया कि खाड़ी क्षेत्र के देश भारत के महत्वपूर्ण व्यापारिक साझेदार हैं, लेकिन मौजूदा संघर्ष की वजह से व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर असर पड़ने की आशंका है। जयशंकर ने यह भी कहा कि भारत लगातार खाड़ी देशों के संपर्क में है और क्षेत्र में शांति बहाल करने की अपील कर रहा है। उन्होंने बताया कि मौजूदा परिस्थितियों में ईरान के नेतृत्व से संपर्क करना आसान नहीं है, फिर भी उन्होंने ईरान के विदेश मंत्री से बातचीत कर स्थिति पर चर्चा की है। विदेश मंत्री के अनुसार भारत की नीति हमेशा स्पष्ट रही है कि अंतरराष्ट्रीय विवादों का समाधान युद्ध से नहीं बल्कि संवाद, संयम और कूटनीति के जरिए होना चाहिए। भारत का मानना है कि तनाव कम करना और आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना इस समय सबसे जरूरी है।  

surbhi मार्च 9, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2025 का रिजल्ट घोषित, अनुज अग्निहोत्री बने टॉपर, 958 उम्मीदवार सफल

UPSC CSE Result 2025: देश की सबसे प्रतिष्ठित परीक्षाओं में से एक Civil Services Examination का अंतिम परिणाम जारी कर दिया गया है। Union Public Service Commission ने शुक्रवार 6 मार्च 2026 को UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2025 का फाइनल रिजल्ट घोषित किया। इस परीक्षा में अनुज अग्निहोत्री ने पहला स्थान हासिल किया है। परीक्षा में शामिल हुए उम्मीदवार अब आयोग की आधिकारिक वेबसाइट UPSC Official Website पर जाकर फाइनल मेरिट लिस्ट देख सकते हैं। 958 उम्मीदवारों का हुआ चयन यूपीएससी द्वारा जारी फाइनल रिजल्ट के अनुसार इस वर्ष कुल 958 उम्मीदवारों ने सफलता हासिल की है। चयनित उम्मीदवारों की नियुक्ति विभिन्न केंद्रीय सेवाओं में उनकी रैंक और पसंद के आधार पर की जाएगी। फाइनल रिजल्ट उम्मीदवारों के लिखित परीक्षा (Main Exam) और पर्सनैलिटी टेस्ट (Interview) में प्रदर्शन के आधार पर तैयार किया गया है। इन प्रतिष्ठित सेवाओं के लिए होता है चयन यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा के माध्यम से देश की कई प्रतिष्ठित सेवाओं के लिए अधिकारियों का चयन किया जाता है। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं— भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS)   भारतीय पुलिस सेवा (IPS)   भारतीय विदेश सेवा (IFS)   भारतीय राजस्व सेवा (IRS)   भारतीय व्यापार सेवा सहित अन्य ग्रुप A और ग्रुप B सेवाएं   979 पदों को भरने का लक्ष्य सिविल सेवा परीक्षा 2025 के माध्यम से केंद्र सरकार के विभिन्न विभागों में कुल 979 रिक्त पदों को भरा जाना है। ऐसे चेक करें UPSC CSE 2025 का रिजल्ट उम्मीदवार नीचे दिए गए स्टेप्स के माध्यम से अपना रिजल्ट देख सकते हैं— आधिकारिक वेबसाइट upsc.gov.in पर जाएं   होमपेज पर “Examination” टैब पर क्लिक करें   “Active Examinations” या “What’s New” सेक्शन में जाएं   Civil Services Examination Final Result 2025 लिंक पर क्लिक करें   मेरिट लिस्ट की PDF खुल जाएगी   Ctrl + F दबाकर अपना नाम या रोल नंबर सर्च करें   15 दिन में जारी होगी मार्कशीट यूपीएससी के अनुसार सभी उम्मीदवारों की मार्कशीट रिजल्ट जारी होने के 15 दिनों के भीतर आयोग की वेबसाइट पर अपलोड कर दी जाएगी। उम्मीदवार इसे 30 दिनों तक ऑनलाइन डाउनलोड कर सकेंगे। पिछले साल का कट-ऑफ पिछले वर्ष का अंतिम कट-ऑफ इस प्रकार था— जनरल: 87.98   EWS: 85.92   OBC: 87.28   SC: 79.03   ST: 74.23   आयु सीमा क्या है यूपीएससी की अधिसूचना के अनुसार उम्मीदवार की आयु 1 अगस्त 2024 तक कम से कम 21 वर्ष और अधिकतम 32 वर्ष होनी चाहिए। यानी उम्मीदवार का जन्म 2 अगस्त 1992 से 1 अगस्त 2003 के बीच होना चाहिए। यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा भारत की सबसे कठिन और प्रतिष्ठित प्रतियोगी परीक्षाओं में से एक मानी जाती है। हर साल लाखों उम्मीदवार इस परीक्षा में शामिल होते हैं, लेकिन तीन चरणों—प्रारंभिक परीक्षा, मुख्य परीक्षा और इंटरव्यू—को पार कर बहुत कम उम्मीदवार ही अंतिम सूची में जगह बना पाते हैं। UPSC CSE 2025 टॉप-20 उम्मीदवारों की सूची रैंक रोल नंबर नाम 1 1131589 अनुज अग्निहोत्री 2 4000040 राजेश्वरी सुवे एम 3 3512521 अकांश ढुल 4 0834732 राघव झुनझुनवाला 5 0409847 ईशान भटनागर 6 6410067 जिनिया अरोड़ा 7 0818306 ए आर राजा मोहिद्दीन 8 0843487 पक्षल सेक्रेटरी 9 0831647 आस्था जैन 10 1523945 उज्ज्वल प्रियांक 11 1512091 यशस्वी राज वर्धन 12 0840280 अक्षित भारद्वाज 13 7813999 अनन्या शर्मा 14 5402316 सुरभि यादव 15 3507500 सिमरनदीप कौर 16 0867445 मोनिका श्रीवास्तव 17 0829589 चितवन जैन 18 5604518 श्रुति आर 19 0105602 निसार दिशांत अमृतलाल 20 6630448 रवि राज

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surbhi मार्च 31, 2026 0