बिहार, एजेंसियां। आईआरसीटीसी होटल आवंटन से जुड़े कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) प्रमुख लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार को फिलहाल राहत मिली है। दिल्ली की राऊज एवेन्यू कोर्ट ने गुरुवार को मामले में आरोप तय करने पर अपना फैसला सुरक्षित रखते हुए अगली सुनवाई 31 जुलाई तक टाल दी। अब सभी पक्षों की निगाहें अगली तारीख पर टिकी हैं, जब अदालत यह तय करेगी कि आरोप तय किए जाएंगे या नहीं। ईडी ने कई लोगों के खिलाफ दाखिल की है चार्जशीट इस मामले की जांच प्रवर्तन निदेशालय (ED) कर रहा है। एजेंसी ने अदालत में दाखिल अपनी चार्जशीट में लालू प्रसाद यादव, बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव, पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी, सांसद मीसा भारती, तेज प्रताप यादव, हेमा यादव समेत कई अन्य लोगों को आरोपी बनाया है। ईडी का दावा है कि जांच के दौरान मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े वित्तीय लेन-देन और कथित अनियमितताओं के पर्याप्त साक्ष्य सामने आए हैं। क्या है पूरा मामला? यह मामला उस समय का है जब लालू प्रसाद यादव वर्ष 2004 से 2009 के बीच केंद्र की यूपीए सरकार में रेल मंत्री थे। आरोप है कि इसी दौरान आईआरसीटीसी के रांची और पुरी स्थित दो होटलों के संचालन, विकास और रखरखाव का ठेका एक निजी कंपनी को नियमों के विपरीत तरीके से दिया गया। जांच एजेंसियों का आरोप है कि इस ठेके के बदले पटना में स्थित बहुमूल्य जमीन बेहद कम कीमत पर लालू परिवार से जुड़ी संस्थाओं को हस्तांतरित की गई। जमीन के बदले ठेका देने का आरोप ईडी का आरोप है कि बाद में इस जमीन को कथित तौर पर बेनामी संपत्तियों और शेल कंपनियों के माध्यम से परिवार के सदस्यों के नाम स्थानांतरित किया गया। इन्हीं वित्तीय लेन-देन को मनी लॉन्ड्रिंग से जोड़ते हुए एजेंसी ने मामला दर्ज किया और जांच शुरू की। फिलहाल अदालत ने आरोप तय करने के मुद्दे पर कोई अंतिम निर्णय नहीं दिया है। अब 31 जुलाई को होने वाली अगली सुनवाई में यह स्पष्ट होगा कि अदालत आरोप तय करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाती है या नहीं। इस मामले पर राजनीतिक और कानूनी दोनों हलकों की नजर बनी हुई है।
कोलकाता: पश्चिम बंगाल के चर्चित भर्ती भ्रष्टाचार मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और कमरहटी विधायक मदन मित्रा के परिवार पर जांच का दायरा बढ़ा दिया है। एजेंसी ने मदन मित्रा की पत्नी और उनके दो बेटों को पूछताछ के लिए समन जारी किया है। ईडी का मानना है कि मामले से जुड़े कुछ वित्तीय लेन-देन में उनके परिवार के सदस्यों की भूमिका की जांच जरूरी है। पत्नी और दो बेटों को भेजा गया समन ईडी सूत्रों के अनुसार, भर्ती भ्रष्टाचार मामले की जांच के दौरान कुछ संदिग्ध वित्तीय लेन-देन सामने आए हैं, जिनमें मदन मित्रा की पत्नी और दोनों बेटों के नाम सामने आए हैं। इन्हीं तथ्यों के आधार पर एजेंसी ने तीनों को पूछताछ के लिए तलब किया है। पहले भी हो चुकी है छापेमारी इससे पहले जून में ईडी ने मदन मित्रा के भवानीपुर स्थित आवास समेत दक्षिणेश्वर और अन्य ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया था। यह कार्रवाई कमरहटी नगरपालिका में कथित अवैध भर्ती से जुड़े मामले की जांच के तहत की गई थी। राजनीतिक हलकों में बढ़ीं चर्चाएं ईडी का समन जारी होने के बीच मदन मित्रा की राजनीतिक गतिविधियां भी चर्चा में हैं। मंगलवार रात वह पूर्व विधायक स्वर्ण कमल साहा के आवास पहुंचे, जहां उन्होंने काफी देर तक बैठक की। बताया जाता है कि वह रात करीब 10:30 बजे तक वहां मौजूद रहे। स्वर्ण कमल साहा के बेटे संदीपान साहा उन नेताओं में शामिल हैं, जिन्हें रीतब्रत बनर्जी के खेमे के करीब माना जा रहा है। ऐसे में मदन मित्रा की इस मुलाकात को लेकर राजनीतिक गलियारों में कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। क्या बदल रहे हैं सियासी समीकरण? पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद तृणमूल कांग्रेस के भीतर राजनीतिक समीकरण बदलते नजर आ रहे हैं। कई नेता पार्टी नेतृत्व से दूरी बनाकर अलग खेमे में शामिल हो चुके हैं। हालांकि, अब तक मदन मित्रा को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के करीबी नेताओं में गिना जाता रहा है। उनकी हालिया मुलाकातों ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या वे भी अपना राजनीतिक रुख बदलने की तैयारी में हैं या यह केवल सामान्य राजनीतिक मुलाकात थी। फिलहाल इस पर उनकी ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। जांच पर टिकी निगाहें ईडी अब मदन मित्रा के परिवार से पूछताछ के जरिए कथित वित्तीय लेन-देन और भर्ती भ्रष्टाचार मामले से जुड़े तथ्यों की जांच करेगी। वहीं, राजनीतिक हलकों की नजर इस बात पर भी बनी हुई है कि जांच के साथ-साथ पश्चिम बंगाल की बदलती सियासत में मदन मित्रा आगे क्या कदम उठाते हैं।
नई दिल्ली, एजेंसियां। फीफा विश्व कप 2026 के क्वार्टर फाइनल में फ्रांस ने शानदार प्रदर्शन करते हुए मोरक्को को 2-0 से हराकर सेमीफाइनल में प्रवेश कर लिया। बोस्टन स्टेडियम में खेले गए इस मुकाबले में पहले हाफ में दोनों टीमें गोल नहीं कर सकीं। मोरक्को के गोलकीपर यासीन बोनो ने शुरुआती दबाव के बीच एक महत्वपूर्ण पेनल्टी बचाकर अपनी टीम को मुकाबले में बनाए रखा, लेकिन दूसरे हाफ में फ्रांस के आक्रामक खेल के सामने मोरक्को टिक नहीं सका। एम्बाप्पे ने खोला खाता, डेम्बेले ने जीत की मुहर लगाई फ्रांस की ओर से पहला गोल कप्तान किलियन एम्बाप्पे ने 60वें मिनट में किया। डेसिरे डौए के पास पर एम्बाप्पे ने तीन रक्षकों से घिरे होने के बावजूद शानदार कौशल का प्रदर्शन करते हुए दमदार शॉट लगाया, जिसे मोरक्को के गोलकीपर रोक नहीं सके। इसके महज छह मिनट बाद एम्बाप्पे ने ही उस्मान डेम्बेले को शानदार पास दिया, जिसे डेम्बेले ने गोल में बदलकर फ्रांस की बढ़त 2-0 कर दी। इस गोल के साथ फ्रांस ने मुकाबले पर पूरी तरह अपनी पकड़ मजबूत कर ली। गोल्डन बूट की दौड़ में मेसी की बराबरी पूरे मैच में फ्रांस का दबदबा साफ नजर आया। टीम ने कुल 22 शॉट लगाए, जिनमें नौ शॉट गोलपोस्ट पर रहे। दूसरी ओर मोरक्को केवल पांच शॉट ही लगा सका, जिनमें सिर्फ एक शॉट लक्ष्य पर था। फ्रांस की मजबूत रक्षा पंक्ति ने मोरक्को को ज्यादा अवसर नहीं दिए। इस जीत के साथ फ्रांस लगातार खिताब की दौड़ में बना हुआ है। वहीं, किलियन एम्बाप्पे ने इस विश्व कप में अपना आठवां गोल दागकर गोल्डन बूट की दौड़ में अर्जेंटीना के लियोनेल मेसी की बराबरी कर ली है। तीसरा विश्व कप खेल रहे एम्बाप्पे के अब विश्व कप इतिहास में 20 गोल हो चुके हैं, जबकि छह विश्व कप खेल चुके मेसी 21 गोल के साथ शीर्ष स्थान पर बने हुए हैं।
रांची। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने रांची के चर्चित कांके भूमि घोटाला मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी कमलेश कुमार सिंह की 66 एकड़ जमीन को अस्थायी रूप से जब्त कर लिया है। एजेंसी के अनुसार, जब्त की गई जमीन की अनुमानित बाजार कीमत करीब 85 करोड़ रुपये है। जांच में सामने आया है कि कांके और नगड़ी अंचल क्षेत्र में फर्जी दस्तावेज तैयार कर जमीन की अवैध खरीद-बिक्री की गई और उस पर कब्जा किया गया। इस मामले में कई सरकारी अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में है। जमीन रिकॉर्ड में हेराफेरी का आरोप ईडी की जांच के मुताबिक, कमलेश कुमार सिंह और उसके सहयोगियों ने कुछ सरकारी अधिकारियों की मिलीभगत से भूमि रिकॉर्ड में हेराफेरी की। आरोप है कि गैर-मजरूआ, भुइंहरी, आदिवासी और सरकारी प्रकृति की जमीनों के फर्जी दस्तावेज तैयार कर उन्हें सामान्य जमीन के रूप में दर्शाया गया और फिर उनकी खरीद-बिक्री की गई। जांच में यह भी पता चला है कि 66 एकड़ जमीन के एक हिस्से की बिक्री की जा चुकी थी, जबकि शेष भूमि का हस्तांतरण नहीं हो पाया था। पहले ही दाखिल हो चुकी है चार्जशीट प्रवर्तन निदेशालय इस मामले में कमलेश कुमार सिंह समेत अन्य आरोपियों के खिलाफ धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत विशेष अदालत में चार्जशीट दाखिल कर चुका है। एजेंसी का कहना है कि मामले की जांच अभी जारी है और आगे भी नए तथ्यों के आधार पर कार्रवाई की जाएगी। 2024 में हुई थी गिरफ्तारी ईडी ने 26 जुलाई 2024 को कमलेश कुमार सिंह को गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी से पहले उसके विभिन्न ठिकानों पर छापेमारी की गई थी, जहां से एक करोड़ रुपये से अधिक नकदी और 100 जिंदा कारतूस बरामद किए गए थे। इसके बाद एजेंसी ने मनी लॉन्ड्रिंग के पहलू से जांच को आगे बढ़ाया। अब 85 करोड़ रुपये मूल्य की 66 एकड़ जमीन जब्त होने के बाद कांके भूमि घोटाले में ईडी की कार्रवाई और तेज होती दिखाई दे रही है।
कोलकाता: तृणमूल कांग्रेस (TMC) के फंड से जुड़े कथित वित्तीय अनियमितताओं के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की है। एजेंसी ने पार्टी के तीन बैंक खातों को फ्रीज कर दिया है, जिनमें करीब 440 करोड़ रुपये जमा बताए जा रहे हैं। इसके साथ ही ED पार्टी के कुल 19 बैंक खातों के लेन-देन की भी गहन जांच कर रही है। मामले ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में हलचल बढ़ा दी है। आरोप है कि पार्टी फंड के जरिए हुए कुछ वित्तीय लेन-देन संदिग्ध पाए गए हैं, जिसके बाद जांच का दायरा लगातार बढ़ाया जा रहा है। विधायक की शिकायत के बाद शुरू हुई जांच जानकारी के अनुसार, मामले की शुरुआत एक तृणमूल विधायक की शिकायत के आधार पर हुई थी। सबसे पहले बिधाननगर साइबर पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। बाद में वित्तीय लेन-देन में गड़बड़ी के संकेत मिलने पर प्रवर्तन निदेशालय ने मामला अपने हाथ में ले लिया। जांच एजेंसी को कथित तौर पर रिश्वत और अन्य संदिग्ध लेन-देन से जुड़े सुराग मिले हैं। इसी आधार पर तीन बैंक खातों को फ्रीज किया गया है, जबकि अन्य खातों की भी निगरानी की जा रही है। 19 बैंक खातों की जांच जारी सूत्रों के मुताबिक, तृणमूल कांग्रेस के नाम पर कुल 19 बैंक खाते संचालित हैं। इनमें से तीन खातों में लगभग 440 करोड़ रुपये जमा होने की जानकारी सामने आई है। फिलहाल ED इन खातों के लेन-देन की जांच कर रही है और यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि धनराशि का स्रोत और उपयोग क्या था। विमान और हेलीकॉप्टर खरीद की भी जांच ED ने इस मामले में कोलकाता समेत कई स्थानों पर तलाशी अभियान भी चलाया। जांच के दौरान 'केयरवेल एविएशन' नामक कंपनी के कार्यालय और उसके निदेशक के आवास पर भी छापेमारी की गई। जांच एजेंसी का आरोप है कि तृणमूल कांग्रेस फंड से करीब 160 करोड़ रुपये इस कंपनी के खाते में ट्रांसफर किए गए। आरोप है कि इसी धनराशि से एक छोटा विमान और एक हेलीकॉप्टर खरीदा गया। जांचकर्ताओं का दावा है कि बाद में इन दोनों का उपयोग किराये पर लेकर किया गया। अदालत पहुंची तृणमूल कांग्रेस खातों के फ्रीज होने के बाद तृणमूल कांग्रेस ने अदालत का दरवाजा खटखटाया है। पार्टी ने अन्य बैंक खातों के संचालन की अनुमति देने की मांग करते हुए याचिका दाखिल की है। पार्टी का कहना है कि शुरुआत में केवल तीन खाते फ्रीज किए गए थे, लेकिन अब जांच का दायरा बढ़ाया जा रहा है। इस संबंध में तृणमूल कांग्रेस ने अदालत में अतिरिक्त हलफनामा भी दाखिल किया है। गुरुवार को होगी अगली सुनवाई मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति सौगता भट्टाचार्य की पीठ में जारी है। वहीं, न्यायमूर्ति सुब्रता तालुकदार ने विशेष अधिकारी की नियुक्ति सहित अन्य पहलुओं पर सभी पक्षों से जवाब मांगा है। बैंक की ओर से भी अदालत में हलफनामा दाखिल किया गया है। अब इस पूरे मामले पर अगली सुनवाई गुरुवार को होगी।
रांची। झारखंड के चर्चित कथित शराब घोटाला मामले की जांच कर रही प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के समक्ष मंगलवार को राज्य के पूर्व वित्त मंत्री रामेश्वर उरांव पेश हुए। दूसरे समन के बाद वह तय समय पर रांची के एयरपोर्ट रोड स्थित ईडी के जोनल कार्यालय पहुंचे, जहां औपचारिक कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद अधिकारियों ने उनसे पूछताछ शुरू की। यह पूछताछ कथित शराब घोटाले और उससे जुड़े वित्तीय लेन-देन की जांच के सिलसिले में की जा रही है। रामेश्वर उरांव के पहले उनके बेटे से भी हुई पूछताछ ईडी ने इससे पहले रामेश्वर उरांव को 30 जून और उनके पुत्र रोहित उरांव को 29 जून को पूछताछ के लिए बुलाया था। हालांकि, दोनों निर्धारित तिथि पर उपस्थित नहीं हुए थे और उन्होंने एजेंसी से तीन सप्ताह का अतिरिक्त समय मांगा था। ईडी ने उनके अनुरोध पर विचार करते हुए तीन सप्ताह की बजाय एक सप्ताह की मोहलत दी और नया समन जारी किया। इसके तहत रोहित उरांव 6 जुलाई को ईडी के समक्ष पेश हुए, जबकि मंगलवार को रामेश्वर उरांव जांच में शामिल होने के लिए कार्यालय पहुंचे। सूत्रों के अनुसार सूत्रों के अनुसार, ईडी यह जांच योगेंद्र तिवारी से जुड़े कथित शराब घोटाले के विभिन्न पहलुओं को लेकर कर रही है। एजेंसी वित्तीय लेन-देन, प्रशासनिक निर्णयों और मामले से जुड़े अन्य तथ्यों की पड़ताल कर रही है। इसी क्रम में पूर्व वित्त मंत्री से भी कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर पूछताछ की जा रही है। ईडी कार्यालय पहुंचने पर पत्रकारों ने रामेश्वर उरांव से मामले को लेकर सवाल पूछने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। उन्होंने केवल इतना कहा, "मैं 25 साल पुलिस सेवा में रहा हूं। कोई भी गवाह बाहर बयान नहीं देता। जो भी कहना होगा, अंदर जांच एजेंसी के सामने कहूंगा।" अब इस पूछताछ के बाद ईडी आगे किन लोगों से सवाल-जवाब करेगी और जांच किस दिशा में बढ़ेगी, इस पर राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों की नजर बनी हुई है।
रांची। झारखंड के कथित शराब घोटाले मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा पूर्व वित्त मंत्री एवं कांग्रेस विधायक डॉ. रामेश्वर उरांव और उनके बेटे रोहित उरांव को पूछताछ के लिए समन जारी किए जाने के बाद राज्य की राजनीति गरमा गई है। इस कार्रवाई पर कांग्रेस ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा पर राजनीतिक दुर्भावना से काम करने का आरोप लगाया है। झारखंड कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व शिक्षामंत्री बंधु तिर्की ने कहा कि भाजपा केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल राजनीतिक विरोधियों को परेशान करने के लिए कर रही है। 'समन से बाल भी बांका नहीं होगा' बंधु तिर्की ने कहा कि डॉ. रामेश्वर उरांव एक सम्मानित जनप्रतिनिधि हैं और ईडी के समन से उनका "बाल भी बांका नहीं होगा।" उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा आगामी राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए विपक्षी नेताओं को निशाना बना रही है। तिर्की ने दावा किया कि उन्हें भी पहले बिना ठोस तथ्यों के मामलों में फंसाकर जनता के बीच गलत संदेश देने की कोशिश की गई थी। उन्होंने कहा कि झारखंड की जनता भाजपा की कार्यशैली और राजनीतिक रणनीति को अच्छी तरह समझती है। भाजपा पर लगाए गंभीर आरोप पूर्व मंत्री ने भाजपा पर पलटवार करते हुए कहा कि पार्टी के कई नेताओं पर भी भ्रष्टाचार और घोटालों के आरोप लग चुके हैं, लेकिन उन मामलों में एजेंसियों की कार्रवाई नहीं होती। उन्होंने पूर्व स्वास्थ्य मंत्री और भाजपा नेता भानु प्रताप शाही का नाम लेते हुए कहा कि जिन पर पहले घोटालों के आरोप लगे, वे भाजपा में शामिल होने के बाद "पाक-साफ" हो गए। बंधु तिर्की ने आरोप लगाया कि राज्य के कई हिस्सों में भ्रष्टाचार के पैसे से जमीन खरीदने और संपत्ति बनाने के मामले सामने आए हैं, लेकिन उन पर कोई जांच नहीं हो रही। उन्होंने भाजपा को चुनौती देते हुए कहा कि ईडी या अन्य एजेंसियों के जरिए दबाव बनाने से पार्टी को कोई राजनीतिक लाभ नहीं मिलेगा। तिर्की ने कहा कि 2 अगस्त को रांची में होने वाला आदिवासी महाजुटान भाजपा को जनता की वास्तविक ताकत का एहसास करा देगा। उन्होंने दोहराया कि कांग्रेस इस कार्रवाई से डरने वाली नहीं है और लोकतांत्रिक तरीके से अपना संघर्ष जारी रखेगी।
कोलकाता, एजेंसियां। पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) को एक और बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। पार्टी की वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री ज्योति प्रिया मल्लिक ने खराब स्वास्थ्य का हवाला देते हुए पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने शुक्रवार को अपने फैसले की जानकारी सार्वजनिक करते हुए कहा कि वह पहले ही पार्टी नेतृत्व को अपने इस्तीफे से अवगत करा चुके हैं। नई जिम्मेदारी मिलने के बाद आया इस्तीफा मल्लिक का इस्तीफा ऐसे समय सामने आया है, जब हाल ही में मुख्यमंत्री और टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी ने संगठन में बड़े स्तर पर फेरबदल करते हुए उन्हें पार्टी की नई वर्किंग कमेटी में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी थी। ऐसे में उनके अचानक पद छोड़ने के फैसले ने राजनीतिक हलकों में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है। ममता सरकार में संभाला था अहम मंत्रालय ज्योति प्रिया मल्लिक पश्चिम बंगाल सरकार में लंबे समय तक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे हैं। उन्होंने वर्ष 2011 से 2021 तक राज्य के खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री के रूप में कार्य किया और उन्हें ममता बनर्जी के करीबी नेताओं में गिना जाता था। पार्टी संगठन और सरकार दोनों में उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती रही है। ED की कार्रवाई के बाद बढ़ी थीं मुश्किलें मल्लिक का राजनीतिक सफर अक्टूबर 2023 में उस समय मुश्किलों में घिर गया था, जब कथित राशन वितरण घोटाले के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने उन्हें गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के बाद उन्होंने कई बार स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का हवाला दिया और इलाज के लिए चिकित्सकीय सुविधा की मांग की थी। इसके बाद से उनकी सक्रिय राजनीतिक भूमिका सीमित होती चली गई। इस्तीफे से बढ़ी सियासी हलचल ज्योति प्रिया मल्लिक के इस्तीफे को ऐसे समय में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जब टीएमसी के भीतर संगठनात्मक बदलाव और कुछ नेताओं की नाराजगी को लेकर लगातार चर्चाएं चल रही हैं। हालांकि मल्लिक ने अपने इस्तीफे की वजह केवल स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को बताया है, लेकिन उनके इस कदम ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में नई अटकलों को जन्म दे दिया है।
पटना, एजेंसियां। बिहार में राबड़ी देवी के कंगन का मामला सियासी बवाल बन गया है। राबड़ी देवी द्वारा भोजपुरी लोकगायक छोटू छलिया को कंगन भेंट किए जाने का के बाद यह राजनीतिक विवाद उभरा है। JDU की ओर से कंगन पर सवाल उठाए गए और ED जांच की मांग की गई। वहीं इस पर पलटवार करते हुए RJD MLC सुनील सिंह ने कहा है कि राबड़ी देवी कभी डायमंड ज्वेलरी नहीं पहनती हैं। उन्होंने कहा कि हर चमकने वाली चीज हीरा नहीं होती। बिना पूरी जानकारी के विपक्ष इस मामले को हवा दे रहा है। छोटू छलिया बड़े स्टार नही सुनील सिंह ने कहा कि छोटू छलिया कोई बड़े भोजपुरी स्टार नहीं हैं। वे आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि कलाकार अक्सर खुद को चर्चा में लाने के लिए बढ़ा-चढ़ाकर बातें करते हैं। बता दें कि लालू प्रसाद यादव के 79वें जन्मदिन समारोह के दौरान छोटू छलिया ने तेजस्वी यादव के बेटे इराज लालू यादव पर सोहर गीत प्रस्तुत किया था, जिससे खुश होकर राबड़ी देवी ने अपने हाथों के कंगन उन्हें उपहार स्वरूप दिए थे। JDU ने की ED जांच की मांग कंगन मिलने के बाद छोटू छलिया ने इसे हीरे का कंगन बताते हुए अपने जीवन का सबसे बड़ा सम्मान कहा था। इसी बयान के बाद JDU ने मामले को लेकर कई सवाल खड़े किए हैं। पार्टी प्रवक्ता नीरज कुमार ने कंगन की खरीद रसीद सार्वजनिक करने की भी मांग की है। साथ ही उन्होंने गहनों की खरीद में टैक्स और GST भुगतान की जांच कराने और पूरे मामले की ED से जांच कराने की मांग भी उठाई है।
चंडीगढ़: पंजाब में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की छापेमारी को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने मंगलवार को दावा किया कि केंद्रीय एजेंसी राज्य में व्यापारियों को निशाना बना रही है। उन्होंने छोटे व्यापारियों से घबराने की बजाय एकजुट रहने की अपील करते हुए भरोसा दिलाया कि पंजाब सरकार उनके साथ खड़ी है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर किए गए अपने पोस्ट में केजरीवाल ने कहा कि ईडी की कार्रवाई से व्यापारियों को डरने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि पूरा पंजाब और राज्य सरकार इस मुश्किल समय में उनके साथ है और सभी मिलकर इस स्थिति का सामना करेंगे। GST घोटाले की जांच में ED का एक्शन इस बीच, प्रवर्तन निदेशालय ने पंजाब के मंत्री संजीव अरोड़ा से जुड़े कथित 100 करोड़ रुपये के जीएसटी घोटाले की जांच के सिलसिले में पंजाब और उत्तर प्रदेश में कई स्थानों पर छापेमारी की है। अधिकारियों के अनुसार, यह कार्रवाई मोबाइल फोन की बिक्री से जुड़े कथित जीएसटी फर्जीवाड़े की जांच का हिस्सा है। सूत्रों के मुताबिक, एजेंसी इस मामले में मनी लॉन्ड्रिंग के पहलू की भी जांच कर रही है और कई व्यक्तियों तथा कारोबारी संस्थाओं को जांच के दायरे में लिया गया है। मोबाइल फोन कारोबार से जुड़ा है मामला प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि कथित घोटाला मोबाइल फोन के व्यापार और उससे संबंधित कर लेनदेन से जुड़ा हुआ है। आरोप है कि फर्जी बिलिंग और अन्य वित्तीय अनियमितताओं के जरिए बड़े पैमाने पर जीएसटी की चोरी की गई, जिससे सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचा। ईडी अब वित्तीय लेनदेन, बैंक खातों और संबंधित दस्तावेजों की जांच कर रही है ताकि कथित तौर पर अवैध रूप से अर्जित धन के प्रवाह का पता लगाया जा सके। राजनीतिक बयानबाजी भी तेज ईडी की कार्रवाई के बीच पंजाब की राजनीति में भी आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। आम आदमी पार्टी इसे व्यापारियों और विपक्षी नेताओं को दबाव में लाने की कोशिश बता रही है, जबकि जांच एजेंसियों का कहना है कि कार्रवाई पूरी तरह उपलब्ध सबूतों और जांच के आधार पर की जा रही है। ईडी की ओर से अभी तक छापेमारी को लेकर कोई विस्तृत आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। जांच पूरी होने के बाद एजेंसी आगे की कार्रवाई पर फैसला ले सकती है। जांच के नतीजों पर टिकी निगाहें पंजाब और उत्तर प्रदेश में हुई इस कार्रवाई को राज्य की हालिया बड़ी आर्थिक जांचों में से एक माना जा रहा है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जांच में क्या नए तथ्य सामने आते हैं और क्या एजेंसी इस मामले में किसी बड़े खुलासे तक पहुंच पाती है।
पश्चिम बंगाल की राजनीति में चल रहे उथल-पुथल भरे दौर के बीच प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी को शिक्षक भर्ती मामले में नया नोटिस जारी किया है। बुधवार को ईडी की एक टीम केंद्रीय सुरक्षा बलों के साथ कोलकाता के कालीघाट स्थित उनके आवास पहुंची और कानूनी प्रक्रिया पूरी की। इस घटनाक्रम ने राज्य की राजनीतिक हलचल को और तेज कर दिया है। सुरक्षा व्यवस्था के बीच हुई कार्रवाई जांच एजेंसी के पहुंचने के बाद इलाके में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई। केंद्रीय बलों की मौजूदगी के बीच आवास के आसपास निगरानी रखी गई और स्थिति पर नजर बनाए रखी गई। घटना की जानकारी मिलते ही पार्टी कार्यकर्ताओं और स्थानीय नेताओं की आवाजाही भी बढ़ गई। भर्ती मामले की जांच में नए पहलुओं की तलाश ईडी लंबे समय से कथित शिक्षक भर्ती अनियमितताओं से जुड़े वित्तीय पहलुओं की जांच कर रही है। एजेंसी विभिन्न दस्तावेजों, बैंकिंग रिकॉर्ड और डिजिटल साक्ष्यों की समीक्षा कर रही है ताकि मामले से जुड़े आर्थिक लेन-देन की पूरी तस्वीर सामने लाई जा सके। जांच के दौरान कई व्यक्तियों और संस्थाओं की भूमिका भी जांच के दायरे में है। कारोबारी संस्थाओं और वित्तीय नेटवर्क पर नजर सूत्रों के अनुसार, जांच एजेंसियां उन कंपनियों और वित्तीय लेन-देन की भी पड़ताल कर रही हैं जिनका नाम जांच के दौरान सामने आया है। उद्देश्य यह समझना है कि कथित तौर पर धन का प्रवाह किस प्रकार हुआ और उससे जुड़े नेटवर्क कैसे काम कर रहे थे। इसी क्रम में कुछ अतिरिक्त जानकारियां जुटाने के लिए नोटिस जारी किए जा रहे हैं। राजनीतिक संकट के बीच नई चुनौती यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है जब तृणमूल कांग्रेस पहले से ही संगठनात्मक चुनौतियों और आंतरिक मतभेदों से जूझ रही है। हालिया राजनीतिक घटनाक्रमों ने पार्टी के भीतर चर्चा और गतिविधियों को बढ़ा दिया है। ऐसे माहौल में ईडी की यह कार्रवाई राजनीतिक महत्व भी रखती है। आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज जांच एजेंसी की कार्रवाई के बाद राज्य में राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आने लगी हैं। विपक्ष इसे जांच प्रक्रिया का स्वाभाविक हिस्सा बता रहा है, जबकि तृणमूल कांग्रेस के नेता केंद्रीय एजेंसियों की भूमिका को लेकर सवाल उठा रहे हैं। इस मुद्दे पर आने वाले दिनों में राजनीतिक बहस और तेज होने की संभावना है। आगे की कार्रवाई पर टिकी निगाहें अब सभी की नजर इस बात पर है कि जांच एजेंसी की अगली कार्रवाई क्या होगी और पूछताछ या जांच के अगले चरण में कौन-से नए तथ्य सामने आते हैं। शिक्षक भर्ती मामला पहले से ही पश्चिम बंगाल के सबसे चर्चित मामलों में शामिल है और ताजा घटनाक्रम ने इसे एक बार फिर राजनीतिक और कानूनी चर्चा के केंद्र में ला दिया है।
पश्चिम बंगाल में शुक्रवार सुबह प्रवर्तन निदेशालय (ED) की बड़ी कार्रवाई से हड़कंप मच गया। ईडी ने कथित उगाही रैकेट से जुड़े मामले में कोलकाता और मुर्शिदाबाद समेत कई जगहों पर एक साथ छापेमारी की। जांच एजेंसी की यह कार्रवाई अपराधी बिश्वजीत पोद्दार उर्फ सोना पप्पू और कोलकाता पुलिस के पूर्व डिप्टी कमिश्नर शांतनु सिन्हा विश्वास से जुड़े मामलों को लेकर की गई है। सुबह 6 बजे शुरू हुई कार्रवाई सूत्रों के मुताबिक, ईडी की टीमों ने शुक्रवार सुबह करीब 6 बजे अलग-अलग स्थानों पर एक साथ तलाशी अभियान शुरू किया। अधिकारियों ने कोलकाता के रॉय स्ट्रीट स्थित एक कारोबारी के घर, एक होटल और कोलकाता पुलिस के एक सब-इंस्पेक्टर के आवास पर छापा मारा। इसके अलावा जांच एजेंसी की एक टीम मुर्शिदाबाद जिले के कांडी स्थित शांतनु सिन्हा विश्वास के घर भी पहुंची। अचानक हुई इस कार्रवाई से इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। कई जगहों पर केंद्रीय सुरक्षा बलों की मौजूदगी भी देखी गई, ताकि तलाशी अभियान के दौरान किसी तरह की बाधा न आए। नौ ठिकानों पर एक साथ छापेमारी न्यूज एजेंसी ANI के अनुसार, ईडी ने इस मामले में कुल नौ ठिकानों पर एक साथ कार्रवाई की है। जांच के दायरे में एमडी अली उर्फ मैक्स राजू, शांतनु सिन्हा विश्वास के भतीजे सौरव अधिकारी और मुर्शिदाबाद स्थित अन्य संदिग्ध ठिकाने भी शामिल हैं। जांच एजेंसियों का मानना है कि कथित उगाही नेटवर्क लंबे समय से सक्रिय था और इसके जरिए बड़े स्तर पर अवैध वसूली की जा रही थी। सूत्रों के मुताबिक, इस नेटवर्क के तार कुछ प्रभावशाली लोगों और स्थानीय संपर्कों से भी जुड़े हो सकते हैं। पूछताछ में मिले इनपुट के बाद कार्रवाई ईडी अधिकारियों के अनुसार, आरोपियों और अन्य संबंधित लोगों से पूछताछ के दौरान कई अहम जानकारियां सामने आई थीं। इन्हीं इनपुट्स के आधार पर शुक्रवार को यह सर्च ऑपरेशन शुरू किया गया। जांच एजेंसी फिलहाल दस्तावेजों, बैंक लेन-देन, मोबाइल डेटा और डिजिटल रिकॉर्ड की जांच कर रही है। अधिकारियों को शक है कि छापेमारी के दौरान कई महत्वपूर्ण वित्तीय लेन-देन और उगाही से जुड़े सबूत मिल सकते हैं। क्या है पूरा मामला? बताया जा रहा है कि यह मामला कथित उगाही और अवैध वसूली से जुड़ा है, जिसमें अपराधियों और कुछ पुलिस अधिकारियों के बीच कथित संबंधों की जांच की जा रही है। पूर्व आईपीएस अधिकारी शांतनु सिन्हा विश्वास का नाम सामने आने के बाद मामला और गंभीर हो गया है। अभी तक ईडी की ओर से आधिकारिक तौर पर विस्तृत बयान जारी नहीं किया गया है। वहीं, जिन लोगों के ठिकानों पर छापेमारी हुई है, उनकी तरफ से भी कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। आगे क्या? ईडी की टीमें फिलहाल सभी स्थानों पर सर्च ऑपरेशन जारी रखे हुए हैं। माना जा रहा है कि जांच के आगे बढ़ने के साथ इस मामले में और बड़े खुलासे हो सकते हैं। यदि जांच एजेंसी को पर्याप्त सबूत मिलते हैं, तो आने वाले दिनों में कई लोगों से पूछताछ और गिरफ्तारी की कार्रवाई भी हो सकती है।
नई दिल्ली: Enforcement Directorate (ED) ने सोमवार को आम आदमी पार्टी (AAP) के नेता Deepak Singla को कथित बैंक धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार कर लिया। सिंगला पर ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स से जुड़े करीब 150 करोड़ रुपये के ऋण घोटाले में शामिल होने का आरोप है। ईडी की यह कार्रवाई दिल्ली और गोवा में कई स्थानों पर की गई छापेमारी के बाद हुई। जांच एजेंसी के मुताबिक, सिंगला और कुछ हवाला ऑपरेटरों के ठिकानों से महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद किए गए हैं। क्या हैं आरोप? ईडी के अनुसार, दीपक सिंगला और उनके परिवार पर 150 करोड़ रुपये से अधिक के बैंक ऋण में कथित धोखाधड़ी का आरोप है। एजेंसी का दावा है कि इस धनराशि को सिंगापुर स्थित कथित फर्जी कंपनियों में ट्रांसफर किया गया और बाद में हवाला नेटवर्क के जरिए भारत वापस लाया गया। जांच एजेंसी का कहना है कि सिंगला कथित रूप से दिल्ली से गोवा तक अवैध बैंकिंग चैनलों के माध्यम से धन के संचालन में शामिल थे। पहले भी हो चुकी है कार्रवाई ईडी की ओर से पिछले दो वर्षों में दीपक सिंगला के खिलाफ यह दूसरी बड़ी कार्रवाई है। इससे पहले वर्ष 2024 में भी उनके ठिकानों पर छापेमारी की गई थी। सिंगला दिल्ली की विश्वास नगर विधानसभा सीट से AAP के टिकट पर चुनाव लड़ चुके हैं। केजरीवाल ने बताया राजनीतिक बदले की कार्रवाई Arvind Kejriwal ने ईडी की कार्रवाई की आलोचना करते हुए इसे राजनीतिक साजिश बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल विपक्षी नेताओं को निशाना बनाने के लिए कर रही है। केजरीवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि दीपक सिंगला को किसी अपराध के कारण नहीं, बल्कि भाजपा के खिलाफ सक्रिय राजनीति करने और भाजपा में शामिल होने से इनकार करने की वजह से गिरफ्तार किया गया है। आतिशी ने लगाए गंभीर आरोप गोवा में पार्टी प्रभारी और दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री Atishi ने भी केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी नेताओं पर झूठे मामले दर्ज कराकर चुनाव से पहले राजनीतिक दबाव बनाया जा रहा है। आतिशी ने कहा कि AAP नेताओं और कार्यकर्ताओं के यहां छापेमारी कर चुनावी डेटा हासिल करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने यह भी दावा किया कि इसी तरह की कार्रवाई पहले पश्चिम बंगाल में All India Trinamool Congress के नेताओं के खिलाफ भी की गई थी। AAP ने कार्रवाई को बताया “राजनीतिक हथियार” आम आदमी पार्टी ने बयान जारी कर कहा कि पश्चिम बंगाल और पंजाब में हुई केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाई की तरह ही दीपक सिंगला का मामला भी राजनीतिक प्रेरित है। पार्टी का आरोप है कि भाजपा में शामिल होने से इनकार करने वाले विपक्षी नेताओं के खिलाफ जांच एजेंसियों का इस्तेमाल किया जा रहा है। फिलहाल मामले की जांच जारी है और ईडी कथित मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क और हवाला लेनदेन की आगे जांच कर रही है।
Enforcement Directorate ने दिल्ली और गोवा समेत कई स्थानों पर दो अलग-अलग मामलों में बड़ी छापेमारी की है। जांच एजेंसी की यह कार्रवाई बैंक फ्रॉड और निवेश धोखाधड़ी से जुड़े मामलों में की गई है। पहले मामले में ईडी ने Deepak Singla के ठिकानों पर छापेमारी की। दीपक सिंगला Aam Aadmi Party की ओर से विश्वास नगर विधानसभा सीट से उम्मीदवार रह चुके हैं। अधिकारियों के अनुसार, यह कार्रवाई बैंक धोखाधड़ी से जुड़े मामले में की जा रही है, जिसके तहत दिल्ली और गोवा स्थित कई परिसरों की तलाशी ली गई। सूत्रों के मुताबिक, इससे पहले भी वर्ष 2024 में इसी मामले से जुड़ी जांच के दौरान ईडी ने सिंगला के ठिकानों पर छापेमारी की थी। हालांकि इस कार्रवाई पर उनकी ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। 180 करोड़ की कथित ठगी मामले में भी कार्रवाई ईडी की दूसरी कार्रवाई दिल्ली के सुभाष नगर स्थित ‘बाबाजी फाइनेंस ग्रुप’ से जुड़े मामले में हुई। जांच एजेंसी ने समूह से जुड़े राम सिंह के ठिकानों पर छापेमारी की है। अधिकारियों के अनुसार, बाबाजी फाइनेंस ग्रुप पर निवेश के नाम पर आम लोगों से करीब 180 करोड़ रुपये की कथित ठगी और धन की हेराफेरी करने का आरोप है। ईडी इस मामले में मनी लॉन्ड्रिंग और वित्तीय लेनदेन की जांच कर रही है। जांच एजेंसी का कहना है कि लोगों को भारी मुनाफे का लालच देकर निवेश कराया गया और बाद में रकम का कथित तौर पर गलत इस्तेमाल किया गया। दस्तावेज और डिजिटल रिकॉर्ड खंगाल रही एजेंसी ईडी दोनों मामलों में वित्तीय दस्तावेज, बैंक रिकॉर्ड और डिजिटल डेटा की जांच कर रही है। अधिकारियों के मुताबिक, छापेमारी के दौरान कई अहम दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक सबूत जुटाए गए हैं। जांच एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि कथित तौर पर धोखाधड़ी से हासिल धन का इस्तेमाल कहां और किस तरह किया गया। आने वाले दिनों में इस मामले में और लोगों से पूछताछ की संभावना भी जताई जा रही है।
चंडीगढ़, एजेंसियां। पंजाब सरकार में मंत्री संजीव अरोड़ा को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने शनिवार को गिरफ्तार कर लिया। सुबह से ही चंडीगढ़ के सेक्टर-2 स्थित उनके आवास पर ईडी की टीम छापेमारी कर रही थी। बताया जा रहा है कि करीब 20 गाड़ियों में पहुंची टीम ने लंबे समय तक तलाशी अभियान चलाया। पिछले एक महीने में यह दूसरी बार है जब संजीव अरोड़ा के ठिकानों पर ईडी की कार्रवाई हुई है। इससे पहले लुधियाना स्थित उनके आवास और अन्य ठिकानों पर भी छापेमारी की गई थी। भगवंत मान ने बीजेपी पर साधा निशाना ईडी की कार्रवाई के बाद पंजाब की राजनीति गरमा गई है। मुख्यमंत्री Bhagwant Mann ने केंद्र सरकार और भाजपा पर तीखा हमला बोला। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि “पंजाब गुरुओं और भगत सिंह की धरती है, इसे कोई झुका नहीं सकता।” मान ने आरोप लगाया कि भाजपा चुनाव के समय ईडी और अन्य एजेंसियों का इस्तेमाल राजनीतिक दबाव बनाने के लिए करती है। अरविंद केजरीवाल का भी केंद्र पर हमला आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक Arvind Kejriwal ने भी ईडी की कार्रवाई को लेकर भाजपा पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार पंजाब को राजनीतिक रूप से दबाने की कोशिश कर रही है। केजरीवाल ने कहा कि भाजपा पहले भी पंजाब के किसानों और राज्य के अधिकारों के खिलाफ काम करती रही है और अब ईडी की रेड के जरिए दबाव बनाया जा रहा है। पंजाब में लगातार बढ़ रही ED की सक्रियता हाल ही में मोहाली और चंडीगढ़ में भी ईडी ने कई ठिकानों पर छापेमारी की थी। इनमें कुछ कारोबारी और राजनीतिक रूप से जुड़े लोगों के नाम सामने आए थे। विपक्ष इसे भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई बता रहा है, जबकि आम आदमी पार्टी इसे राजनीतिक प्रतिशोध करार दे रही है। राजनीतिक माहौल हुआ गर्म संजीव अरोड़ा की गिरफ्तारी के बाद पंजाब में राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। आने वाले दिनों में इस मामले को लेकर राज्य की राजनीति और गर्माने के संकेत मिल रहे हैं।
ED Raid: प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने शनिवार को पंजाब सरकार के मंत्री संजीव अरोड़ा और उनसे जुड़े कई ठिकानों पर छापेमारी की. जांच एजेंसी ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में पंजाब, चंडीगढ़ और दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में एक साथ कार्रवाई शुरू की. ईडी की टीम चंडीगढ़ के सेक्टर-2 स्थित संजीव अरोड़ा के सरकारी आवास पर भी पहुंची, जहां कई घंटों तक तलाशी अभियान चलाया गया. पीएमएलए के तहत हुई कार्रवाई ईडी अधिकारियों के मुताबिक, यह छापेमारी धनशोधन निवारण अधिनियम (PMLA) की आपराधिक धाराओं के तहत की गई है. जांच एजेंसी ने पंजाब के अलावा हरियाणा के गुरुग्राम स्थित एक रियल एस्टेट कंपनी समेत कुल पांच परिसरों पर तलाशी ली है. सूत्रों के अनुसार, जांच एजेंसी वित्तीय लेनदेन, संपत्ति निवेश और कथित अवैध फंडिंग से जुड़े दस्तावेजों की जांच कर रही है. हालांकि ईडी ने अभी तक मामले में आधिकारिक रूप से विस्तृत जानकारी साझा नहीं की है. पहले भी हो चुकी है कार्रवाई यह पहला मौका नहीं है जब संजीव अरोड़ा ईडी की जांच के दायरे में आए हैं. इससे पहले अप्रैल 2026 में भी ईडी ने विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA) के तहत अरोड़ा और उनसे जुड़ी इकाइयों के परिसरों पर छापेमारी की थी. उस समय संजीव अरोड़ा ने कहा था कि वह जांच एजेंसियों के साथ पूरा सहयोग करेंगे और उन्हें न्यायिक प्रक्रिया पर पूरा भरोसा है. 2024 में भी हुई थी रेड ईडी ने साल 2024 में भी लुधियाना पश्चिम से विधायक रहे संजीव अरोड़ा के ठिकानों पर छापा मारा था. उस दौरान जांच औद्योगिक जमीन के कथित गलत इस्तेमाल और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामले में की गई थी. उस समय अरोड़ा राज्यसभा सांसद थे. राजनीतिक में बढ़ी हलचल ताजा कार्रवाई के बाद पंजाब की राजनीति में हलचल तेज हो गई है. विपक्षी दलों ने इस मामले को लेकर आम आदमी पार्टी सरकार पर निशाना साधना शुरू कर दिया है. वहीं, पार्टी की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है.
कथित स्वयंभू धर्मगुरु अशोक खरात से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने जांच तेज कर दी है। एजेंसी की पड़ताल में एक बड़े वित्तीय घोटाले का खुलासा हुआ है, जिसमें 70 करोड़ रुपये से अधिक के संदिग्ध लेनदेन और सैकड़ों ‘घोस्ट’ (फर्जी) बैंक अकाउंट्स का नेटवर्क सामने आया है। रूपाली चाकणकर के परिजनों को समन इस मामले में ED ने रूपाली चाकणकर की बहन प्रतिभा चाकणकर और उनके बेटे तन्मय को पूछताछ के लिए नोटिस जारी किया है। दोनों को अगले सप्ताह एजेंसी के सामने पेश होना होगा संदिग्ध बैंक खातों और लेनदेन को लेकर पूछताछ की जाएगी प्रतिभा चाकणकर ने आरोपों से इनकार करते हुए कहा है कि उनके नाम पर खोले गए खाते फर्जी हैं और उनके जाली हस्ताक्षरों का इस्तेमाल किया गया है। ‘घोस्ट अकाउंट’ नेटवर्क कैसे काम करता था? जांच में समता नागरी सहकारी पतसंस्था के भीतर एक सुनियोजित नेटवर्क का खुलासा हुआ है। 134 से अधिक संदिग्ध फर्जी या ‘प्रॉक्सी’ अकाउंट एक ही मोबाइल नंबर से कई खाते संचालित अधिकांश खातों में अशोक खरात को नॉमिनी दिखाया गया ED के अनुसार, इन खातों को खोलने के लिए लोगों के आधार और पैन जैसे KYC दस्तावेजों का दुरुपयोग किया गया। 70 करोड़ से ज्यादा का संदिग्ध ट्रांजेक्शन एजेंसी ने 2022 से 2024 के बीच 70 करोड़ रुपये से अधिक के लेनदेन की पहचान की है। करीब 100 अकाउंट्स जांच के दायरे में 40 अकाउंट्स को FD की तरह इस्तेमाल किया गया 35.53 करोड़ रुपये जमा और 35.21 करोड़ रुपये निकाले गए इन खातों को कोड नंबर देकर फंड की आवाजाही को नियंत्रित किया जाता था, जिससे यह एक संगठित वित्तीय नेटवर्क की ओर इशारा करता है। ‘लेयरिंग’ के जरिए मनी लॉन्ड्रिंग का शक ED का मानना है कि इस नेटवर्क का इस्तेमाल ‘लेयरिंग’ तकनीक के लिए किया गया, जिसमें पैसों को कई खातों में घुमाकर उसके असली स्रोत को छिपाया जाता है। जांच में यह भी सामने आया है कि धार्मिक गतिविधियों के नाम पर लोगों से दस्तावेज जुटाकर उनका दुरुपयोग किया गया। बैंकिंग सिस्टम पर उठे सवाल एजेंसी ने पतसंस्था के निदेशक संदीप ओमप्रकाश कोयते को भी तलब किया है। जांच का फोकस इस बात पर है कि: एक ही मोबाइल नंबर से इतने खाते कैसे खोले गए? एक ही नॉमिनी होने के बावजूद सिस्टम ने अलर्ट क्यों नहीं किया? सहयोगी ने कबूला रोल जांच में एक अहम खुलासा तब हुआ जब खरात के करीबी सहयोगी अरविंद पांडुरंग बावके ने माना कि उसने खरात के निर्देश पर कई बार इन खातों में नकदी जमा कराई। नासिक तक फैला नेटवर्क मामले की जांच अब जगदंबा माता ग्रामीण बिगर शेती सहकारी पतसंस्था तक पहुंच गई है, जहां 34 संदिग्ध अकाउंट्स की पहचान हुई है। आगे की कार्रवाई ED आने वाले दिनों में: और संदिग्ध खाताधारकों से पूछताछ करेगी मनी ट्रेल को ट्रैक करेगी नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की जांच करेगी
पंजाब में भ्रष्टाचार और मनी लॉन्ड्रिंग के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए Enforcement Directorate (ED) ने पूर्व डीआईजी Harcharan Singh Bhullar और उनके सहयोगियों के 11 ठिकानों पर छापेमारी की है। यह कार्रवाई सीबीआई और एंटी-करप्शन ब्यूरो द्वारा दर्ज मामलों के आधार पर की गई है, जिसमें रिश्वतखोरी और आय से अधिक संपत्ति के गंभीर आरोप शामिल हैं। कई शहरों में एक साथ छापेमारी ईडी की यह कार्रवाई चंडीगढ़, लुधियाना, पटियाला, नाभा और जालंधर सहित कई शहरों में एक साथ की गई। सूत्रों के मुताबिक, छापेमारी का उद्देश्य अवैध कमाई, बेनामी संपत्तियों और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े सबूत जुटाना है। रिश्वतखोरी के आरोप से शुरू हुआ मामला मामले की शुरुआत एक कबाड़ी कारोबारी की शिकायत से हुई थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि तत्कालीन डीआईजी ने उसके खिलाफ दर्ज एफआईआर को खत्म करने के बदले रिश्वत मांगी। Central Bureau of Investigation (CBI) ने इस शिकायत पर कार्रवाई करते हुए अक्टूबर 2025 में भुल्लर को गिरफ्तार किया था। सीबीआई की जांच में सामने आया कि बिचौलिए के जरिए करीब 8 लाख रुपये की रिश्वत मांगी गई थी। 16 अक्टूबर 2025 को ट्रैप के दौरान बिचौलिया 5 लाख रुपये लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया। छापे में मिली करोड़ों की संपत्ति तलाशी के दौरान अधिकारियों को भारी मात्रा में नकदी और कीमती सामान मिला था। रिपोर्ट के अनुसार: करीब 7.36 करोड़ रुपये की नकदी लगभग 2.32 करोड़ रुपये के सोने-चांदी के आभूषण 26 लग्जरी और ब्रांडेड घड़ियां इन बरामदगियों के बाद भुल्लर के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का मामला भी दर्ज किया गया। जांच का दायरा और बढ़ सकता है ईडी अब इस पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है, जिसमें यह पता लगाया जा रहा है कि अवैध कमाई को किन-किन माध्यमों से निवेश किया गया और इसमें और कौन लोग शामिल हैं। आने वाले दिनों में इस मामले में और खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कोटक महिंद्रा बैंक और नगर निगम पंचकूला से जुड़े कथित 145 करोड़ रुपये के घोटाले में बड़ी कार्रवाई की है। मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच के तहत एजेंसी ने हरियाणा और पंजाब के कई शहरों में एक साथ छापेमारी की। 12 ठिकानों पर एक साथ कार्रवाई ईडी ने बुधवार को चंडीगढ़, पंचकूला, जीरकपुर, डेराबस्सी और पटियाला जिले के राजपुरा में कुल 12 परिसरों पर तलाशी अभियान चलाया। इस दौरान एजेंसी ने कई महत्वपूर्ण दस्तावेज, बिक्री-खरीद समझौते और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े अहम सबूत बरामद किए। 145 करोड़ रुपये के गबन का आरोप ईडी के मुताबिक, यह मामला पंचकूला नगर निगम के करीब 145 करोड़ रुपये के सरकारी फंड के गबन से जुड़ा है। जांच एजेंसी का दावा है कि बैंक अधिकारियों, नगर निगम कर्मियों और निजी व्यक्तियों ने मिलकर सुनियोजित साजिश के तहत इस घोटाले को अंजाम दिया। फर्जी दस्तावेजों से खोले गए बैंक खाते जांच में सामने आया है कि नगर निगम पंचकूला के नाम पर फर्जी और जाली दस्तावेजों के जरिए अनधिकृत बैंक खाते खोले गए। इसके बाद असली खातों से सरकारी धन को इन फर्जी खातों में ट्रांसफर किया गया। रियल एस्टेट में लगाया गया पैसा ईडी के अनुसार, गबन की गई रकम को कई कंपनियों और व्यक्तियों के जरिए घुमाया गया। बाद में यह पैसा निजी लोगों और रियल एस्टेट फर्मों तक पहुंचाया गया। नगर निगम को धोखा देने के लिए 145 करोड़ रुपये से अधिक के फर्जी फिक्स्ड डिपॉजिट रसीदें भी जारी की गईं। ACB की FIR के बाद शुरू हुई जांच यह जांच पंचकूला एंटी करप्शन ब्यूरो द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की गई। मामला भारतीय न्याय संहिता, 2023 और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज किया गया था। जांच में और खुलासों की संभावना ईडी का कहना है कि छापेमारी के दौरान मिले दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक सबूतों की जांच की जा रही है। आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे हो सकते हैं।
लुधियाना: पंजाब की राजनीति में हलचल मचाते हुए प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने शुक्रवार सुबह आम आदमी पार्टी (AAP) के वरिष्ठ नेता और कैबिनेट मंत्री Sanjeev Arora के घर छापेमारी की। ईडी की टीम सुबह-सुबह लुधियाना स्थित उनके आवास पर पहुंची, जहां सुरक्षा के लिए केंद्रीय बल भी तैनात किए गए। कई ठिकानों पर एक साथ कार्रवाई सूत्रों के मुताबिक, ईडी ने सिर्फ आवास ही नहीं बल्कि Sanjeev Arora से जुड़े अन्य ठिकानों पर भी दबिश दी है। यह कार्रवाई कथित मनी लॉन्ड्रिंग और जमीन सौदों में अनियमितताओं से जुड़े एक पुराने मामले को लेकर की जा रही है। अशोक मित्तल पर भी हुई थी रेड इससे पहले बुधवार को ईडी ने AAP के राज्यसभा सांसद Ashok Mittal के जालंधर स्थित घर और उनकी निजी यूनिवर्सिटी में भी छापेमारी की थी। मित्तल के घर पर सर्च ऑपरेशन पूरा हो चुका है लेकिन उनकी यूनिवर्सिटी में अभी भी जांच जारी बताई जा रही है AAP पर बढ़ता दबाव लगातार दो दिनों में पार्टी के बड़े नेताओं पर हुई कार्रवाई से आम आदमी पार्टी पर राजनीतिक दबाव बढ़ता दिख रहा है। विपक्ष इस मुद्दे को लेकर सरकार पर हमलावर हो सकता है, जबकि AAP की ओर से इसे राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताया जा सकता है। ED की ये कार्रवाई पंजाब की सियासत में बड़ा मुद्दा बन सकती है। आने वाले दिनों में जांच के नतीजे और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं इस मामले को और गरमा सकती हैं।
पटना,एजेंसियां। प्रशांत किशोर की कंपनी I-PAC (Indian Political Action Committee) के दफ्तर पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की रेड के बाद एक बार फिर पश्चिम बंगाल के चर्चित कोयला घोटाले की चर्चा तेज हो गई है। यह मामला दरअसल ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ECL) के लीज एरिया से कथित अवैध कोयला खनन, चोरी, तस्करी और उससे कमाए गए पैसे की मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा है। ED ने यह जांच 2020 में CBI द्वारा दर्ज FIR के आधार पर शुरू की थी। एजेंसियों के अनुसार, इस सिंडिकेट का कथित मास्टरमाइंड अनूप माझी उर्फ ‘लाला’ था, जिस पर ECL, CISF, रेलवे और अन्य विभागों के कुछ अधिकारियों की मिलीभगत से कोयला चोरी कराने के आरोप हैं। जांच में क्या आया सामने ? जांच में यह आरोप सामने आया कि ECL के कुनुस्तोरिया और कजोरा क्षेत्रों से बड़े पैमाने पर कोयला अवैध रूप से निकाला गया और उसे विभिन्न फैक्ट्रियों व कंपनियों तक पहुंचाया गया। CBI और ED की कार्रवाई में कई जगह छापे पड़े, दस्तावेज और डिजिटल सबूत मिले, और कई आरोपियों के नाम सामने आए। ED के मुताबिक अब तक इस केस में 2,742.32 करोड़ रुपये तक की “प्रोसीड्स ऑफ क्राइम” (अपराध से अर्जित रकम) चिन्हित की गई है। एजेंसी ने पहले भी कई संपत्तियां अटैच की हैं और इस मामले में गिरफ्तारी व चार्जशीट की कार्रवाई हो चुकी है। I-PAC का नाम कैसे जुड़ा? ताजा मोड़ तब आया जब ED ने दावा किया कि कोयला तस्करी से जुड़ी काली कमाई का एक हिस्सा हवाला नेटवर्क के जरिए I-PAC तक पहुंचाया गया। रिपोर्टों के मुताबिक, जांच में करीब 20 करोड़ रुपये के कथित ट्रांसफर की बात सामने आई, जिसे गोवा में 2021-22 के दौरान I-PAC के ऑपरेशंस से जोड़ा गया। इसी कड़ी में ED ने I-PAC से जुड़े परिसरों पर तलाशी ली। हालांकि, जांच एजेंसियों के आरोप और कोर्ट में साबित अपराध—दोनों अलग बातें हैं, इसलिए अंतिम सच न्यायिक प्रक्रिया से ही तय होगा। फिलहाल, यह मामला सिर्फ कोयला चोरी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि राजनीति, हवाला और चुनावी मैनेजमेंट नेटवर्क तक फैलता दिख रहा है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।