मुंबई, एजेंसियां। रणवीर सिंह की ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘धुरंधर’ के पहले भाग की अपार सफलता के बाद, अब इसका मच-अवेटेड सीक्वल Dhurandhar 2 (‘धुरंधर 2: द रिवेंज’) सिनेमाघरों में तहलका मचाने के लिए आ गई है। बॉलीवुड सुपरस्टार रणवीर सिंह और सारा अर्जुन की मच-अवेटेड फिल्म ‘धुरंधर 2: द रिवेंज’ (Dhurandhar 2: The Revenge) 19 मार्च 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज हो गई है। फिल्म के पहले भाग की जबरदस्त सफलता के बाद, फैंस Dhurandhar 2 का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। फिल्म के प्रीव्यू शोज के बाद सोशल मीडिया पर पहला रिव्यू भी सामने आ गया है। फिल्म समीक्षक रवि चौधरी ने फिल्म को 4.5 स्टार देते हुए इसे एक “कम्प्लीट एंटरटेनमेंट ब्लॉकबस्टर” करार दिया है। आइए जानते हैं फिल्म की एडवांस बुकिंग, रनटाइम और बॉक्स ऑफिस से जुड़ी हर छोटी-बड़ी डिटेल। Dhurandhar 2 फिल्म रिव्यू समीक्षक रवि चौधरी के अनुसार, आदित्य धर के निर्देशन में बनी यह फिल्म दर्शकों को अंत तक बांधे रखती है। फिल्म में रणबीर सिंह और सारा अर्जुन की जोड़ी, दोनों की केमिस्ट्री और परफॉरमेंस को जबरदस्त सराहना मिल रही है। इसके साथ ही फिल्म का बैकग्राउंड स्कोर और इंटेंस एक्शन सीन्स इसे एक विजुअल ट्रीट बनाते हैं। यह फिल्म लगभग 4 घंटे लंबी है, लेकिन रवि चौधरी का दावा है कि कहानी इतनी सस्पेंस से भरी है कि दर्शक बोर नहीं होंगे। बॉक्स ऑफिस पर सुनामी! ट्रेड रिपोर्ट्स और Sacnilk के आंकड़ों के मुताबिक, Dhurandhar 2(‘धुरंधर 2’) ने रिलीज से पहले ही इतिहास रचना शुरू कर दिया है, फिल्म ने अपने प्रीव्यू शोज से ही लगभग 44.25 करोड़ रुपये की कमाई कर ली है। बिना ब्लॉक सीटों के 29.11 करोड़ और ब्लॉक सीटों के साथ यह आंकड़ा 38.62 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। विदेशों में प्री-सेल 75 करोड़ को पार कर चुकी है, जिससे कुल एडवांस बुकिंग 153 करोड़ रुपये से अधिक हो गई है। क्या बनेगा रिकॉर्ड? ट्रेड एक्सपर्ट्स का मानना है कि Dhurandhar 2(‘धुरंधर 2’) पहले दिन 100 करोड़ (हिंदी बेल्ट) और 200 करोड़ (वर्ल्डवाइड ग्रॉस) का कलेक्शन कर सकती है। अगर ऐसा हुआ, तो यह ‘बाहुबली 2’ और ‘RRR’ जैसी फिल्मों के क्लब में शामिल हो जाएगी। रनटाइम विवाद: भारत और विदेशों में क्यों है फर्क? फिल्म के रनटाइम को लेकर एक दिलचस्प जानकारी सामने आई है। भारत और ओवरसीज मार्केट में फिल्म की लंबाई अलग-अलग है। भारत (CBFC) सेंसर बोर्ड (CBFC) ने फिल्म को ‘A’ सर्टिफिकेट दिया है। फिल्म में 21 कट्स और हिंसक दृश्यों में बदलाव के बाद भारत में इसका रनटाइम 3 घंटे 49 मिनट है। वहीं विदेश (Overseas), विदेशों में दर्शकों की पसंद को देखते हुए फिल्म का अनकट वर्जन रिलीज हो रहा है, जिसकी लंबाई 3 घंटे 55 मिनट है, यानी की 6 मिनट ज्यादा लंबी। Dhurandhar 2, स्टार कास्ट और रिलीज डेट फिल्म के पहले भाग में अक्षय खन्ना को ‘रहमान डकैत’ के खूंखार अवतार में देखा गया था, वहीं रणबीर सिंह ने ‘हमजा अली’ के दमदार किरदार से पर्दे पर आग लगा दी थी। इन दोनों की टक्कर ने फिल्म को यादगार बना दिया था। जिसके बाद इसके सीक्वल में मेकर्स ने कास्टिंग को अगले स्तर पर पहुँचा दिया है। इस बार एक्शन और ड्रामा का डोज दोगुना होने वाला है, क्योंकि फिल्म में बॉलीवुड के कई दिग्गज एक साथ नजर आएंगे। अब इसके पार्ट 2 में रणवीर सिंह, संजय दत्त, आर माधवन, अर्जुन रामपाल, राकेश बेदी, सारा खान नजर आएंगे। इस बार फिल्म पूरे भारत में अलग-अलग भाषाओं में रिलीज होगी, यह फिल्म हिंदी, तमिल, तेलुगु, कन्नड़ और मलयालम में दिखाई जाएगी। फिल्म का बॉक्स ऑफिस पर रास्ता साफ है, क्योंकि अल्लू अर्जुन की ‘टॉक्सिक’ अब जून में रिलीज होगी। Dhurandhar 2(‘धुरंधर 2: द रिवेंज’) न केवल एक सीक्वल है, बल्कि यह भारतीय सिनेमा में कमाई के नए कीर्तिमान स्थापित करने की ओर अग्रसर है। रणबीर सिंह का ‘हमजा अली’ अवतार देखने के लिए फैंस में जबरदस्त उत्साह है।
मुंबई, एजेंसियां। फिल्म The Kerala Story 2 Goes Beyond की अभिनेत्री Ulka Gupta ने हाल ही में अपने बचपन से जुड़ा एक बेहद भावुक किस्सा साझा किया। उन्होंने बताया कि एक बार एयरपोर्ट पर उनकी मुलाकात दिग्गज अभिनेत्री Smita Patil के माता-पिता से हुई थी, जो उनके लिए जीवन का यादगार पल बन गया। स्मिता पाटिल जैसी दिखने पर भावुक हुए माता-पिता उल्का गुप्ता ने बताया कि उस समय वह टीवी शो Jhansi Ki Rani की शूटिंग कर रही थीं और लगातार यात्रा कर रही थीं। इसी दौरान एयरपोर्ट पर स्मिता पाटिल के माता-पिता ने उन्हें और उनकी मां को रोका। उन्होंने कहा कि उल्का बिल्कुल उनकी बेटी स्मिता पाटिल जैसी दिखती हैं। यह कहते हुए वे भावुक हो गए। उल्का ने बताया कि यह सुनकर उन्हें बेहद खुशी और सम्मान का एहसास हुआ। स्मृति दिवस में भी मिला आमंत्रण उल्का ने आगे बताया कि उस मुलाकात के बाद स्मिता पाटिल के माता-पिता ने उन्हें अपने घर बुलाया। इतना ही नहीं, उन्होंने उल्का और उनकी मां को स्मिता पाटिल के स्मृति दिवस पर भी आमंत्रित किया। उस समय उल्का की उम्र करीब 11-12 साल थी और यह अनुभव उनके लिए बेहद खास और भावनात्मक रहा। बचपन की यादों में आज भी जिंदा है वह पल अभिनेत्री ने कहा कि यह घटना उनके जीवन की सबसे खास यादों में शामिल है। एक महान अभिनेत्री के परिवार से इस तरह का स्नेह मिलना उनके लिए गर्व की बात रही। उन्होंने इसे अपने करियर के शुरुआती दिनों की प्रेरणादायक घटना बताया। उल्का गुप्ता का करियर सफर उल्का गुप्ता ने अपने करियर की शुरुआत टीवी से की थी और ‘झांसी की रानी’ में अपने किरदार से पहचान बनाई। इसके बाद उन्होंने साउथ फिल्म इंडस्ट्री में भी काम किया और कई फिल्मों में नजर आईं। वह Simmba जैसी फिल्मों का भी हिस्सा रह चुकी हैं, जिसमें Ranveer Singh मुख्य भूमिका में थे। हाल ही में रिलीज हुई नई फिल्म हाल ही में उल्का गुप्ता The Kerala Story 2 Goes Beyond में नजर आई हैं, जिसे दर्शकों से अच्छी प्रतिक्रिया मिल रही है। इस फिल्म के जरिए उन्होंने एक बार फिर अपने अभिनय का दम दिखाया है।
मुंबई, एजेंसियां। मशहूर रैपर बादशाह इन दिनों अपने नए हरियाणवी गाने Titli (Titri/Titri song controversy) को लेकर विवादों में घिरे हुए हैं। गाने के बोल और वीडियो को लेकर सोशल मीडिया पर तीखी बहस छिड़ गई है। कुछ लोगों और संगठनों ने गाने के कुछ शब्दों को महिलाओं के प्रति आपत्तिजनक बताते हुए इसकी आलोचना की है।1 मार्च को रिलीज हुए इस गाने के बाद से ही कई जगह विरोध शुरू हो गया। कुछ संगठनों ने आरोप लगाया कि गाने में डबल मीनिंग शब्दों का इस्तेमाल किया गया है, जो महिलाओं के सम्मान के खिलाफ है। मामला इतना बढ़ गया कि हरियाणा में इसको लेकर शिकायतें दर्ज कराई गईं और पुलिस ने भी इसकी जांच शुरू कर दी। विवाद बढ़ने पर माफी मांग चुके हैं बादशाह बढ़ते विवाद को देखते हुए बादशाह ने सार्वजनिक तौर पर माफी भी मांगी। विवाद के बाद गाने को कई प्लेटफॉर्म से हटा दिया गया। इसके बावजूद सोशल मीडिया पर बहस जारी है और लोग इस मुद्दे पर अलग-अलग राय दे रहे हैं।कुछ यूजर्स का कहना है कि गाने के बोल आपत्तिजनक हैं और ऐसे कंटेंट पर रोक लगनी चाहिए, जबकि कई लोग इसे सिर्फ एक कमर्शियल रैप ट्रैक बताते हुए कलाकार की रचनात्मक स्वतंत्रता का समर्थन कर रहे हैं। सैंटी शर्मा आए बादशाह के समर्थन में इसी बीच रैपर Santy Sharma ने इस पूरे विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए बादशाह का समर्थन किया है। उन्होंने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर एक पोस्ट शेयर करते हुए कहा कि लोगों ने पूरे संदर्भ को समझे बिना ही बादशाह को जज करना शुरू कर दिया है।सैंटी शर्मा का कहना है कि भारत में अभी भी हिप-हॉप और रैप म्यूजिक की संस्कृति को पूरी तरह समझा नहीं गया है। उन्होंने कहा कि रैप म्यूजिक में कई बार कलाकार क्रिएटिव एक्सप्रेशन और कॉम्पिटिशन के लिए अलग तरह के शब्दों और संदर्भों का इस्तेमाल करते हैं, जिसे लोग अक्सर गलत तरीके से ले लेते हैं। ‘बादशाह को गलत समझा जा रहा है’ सैंटी शर्मा ने अपने बयान में यह भी कहा कि कई बार गाने का ऑडियो पहले तैयार हो जाता है और वीडियो बाद में किसी दूसरी टीम द्वारा बनाया जाता है। ऐसे में अगर किसी को गाने के बोल या वीडियो में कोई आपत्ति है, तो उसे समझदारी से सुलझाया जाना चाहिए।उन्होंने कहा कि अगर किसी लिरिक्स में गलती है तो उसे बदला या अपडेट किया जा सकता है, लेकिन बिना पूरे मामले को समझे किसी कलाकार को निशाना बनाना सही नहीं है। सोशल मीडिया पर जारी है बहस ‘टिटरी’ विवाद के बाद सोशल मीडिया पर दो तरह की राय सामने आई है। एक पक्ष इसे महिलाओं के सम्मान से जुड़ा मुद्दा बता रहा है, जबकि दूसरा पक्ष इसे संगीत की रचनात्मक स्वतंत्रता का हिस्सा मान रहा है।
मुंबई ,एजेंसियां। कॉमेडी और एंटरटेनमेंट से भरपूर The Great Indian Kapil Show का सीजन 4 एक बार फिर चर्चा में है। हाल ही में इसके ग्रैंड फिनाले का प्रोमो रिलीज हुआ, जिसने सोशल मीडिया पर जबरदस्त हलचल मचा दी है। इस खास एपिसोड में बॉलीवुड की मशहूर पिता-पुत्र जोड़ी वरुण धवन और डेविड धवन मेहमान बनकर पहुंचे हैं। प्रोमो में शो के होस्ट कपिल शर्मा के साथ दोनों की मजेदार बातचीत और नोकझोंक देखने को मिलती है। वरुण और उनके पिता डेविड धवन एक-दूसरे की खिंचाई करते नजर आते हैं और अपने करियर से जुड़े कई दिलचस्प किस्से भी साझा करते हैं। यह हल्की-फुल्की बातचीत दर्शकों को खूब हंसाने वाली है। सुनील ग्रोवर की एंट्री ने लूट ली महफिल हालांकि प्रोमो में असली सरप्राइज तब आता है जब कॉमेडियन सुनील ग्रोवर मंच पर दिग्गज अभिनेता कदर खान के गेटअप में एंट्री लेते हैं। उनका लुक, आवाज और संवाद बोलने का अंदाज इतना सटीक होता है कि वहां मौजूद सभी लोग कुछ पल के लिए चौंक जाते हैं। सुनील ग्रोवर ने कादर खान की खास कॉमिक शैली और डायलॉग डिलीवरी को शानदार तरीके से मंच पर उतारा। उनकी मिमिक्री देखकर दर्शक ही नहीं बल्कि शो में मौजूद मेहमान भी हैरान रह गए। खास बात यह रही कि डेविड धवन, जिन्होंने कादर खान के साथ कई सुपरहिट फिल्मों में काम किया है, वह भी इस परफॉर्मेंस से बेहद प्रभावित नजर आए। डेविड धवन बोले - याद आ गए कादर खान प्रोमो में देखा जा सकता है कि सुनील ग्रोवर की परफॉर्मेंस देखकर डेविड धवन मुस्कुराते हुए कहते हैं कि उन्हें कादर खान की याद आ गई। यह पल शो के सबसे खास और भावुक क्षणों में से एक बन जाता है।शो की जज Archana Puran Singh भी सुनील ग्रोवर की एक्टिंग से प्रभावित नजर आती हैं और उनकी जमकर तारीफ करती हैं। सोशल मीडिया पर मिल रही जबरदस्त प्रतिक्रिया ग्रैंड फिनाले का यह प्रोमो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। फैंस सुनील ग्रोवर की मिमिक्री और उनकी कॉमिक टाइमिंग की जमकर तारीफ कर रहे हैं। कई यूजर्स ने इसे दिवंगत अभिनेता कादर खान को एक खूबसूरत श्रद्धांजलि बताया है। कुल मिलाकर, “द ग्रेट इंडियन कपिल शो” के इस खास एपिसोड ने दर्शकों की उत्सुकता और बढ़ा दी है और फैंस अब ग्रैंड फिनाले का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।
मुंबई,एजेंसियां। हाल ही में सोशल मीडिया पर दिग्गज बॉलीवुड अभिनेत्री नीना गुप्ता को लेकर एक अजीब अफवाह फैल गई। कुछ वायरल तस्वीरों में उनका पेट थोड़ा उभरा हुआ नजर आया, जिसके बाद कई लोगों ने दावा करना शुरू कर दिया कि 66 साल की उम्र में वह मां बनने वाली हैं। यह खबर तेजी से सोशल मीडिया और मनोरंजन जगत में चर्चा का विषय बन गई। हालांकि अभिनेत्री ने जल्द ही इस अफवाह पर विराम लगा दिया और सच्चाई साफ कर दी। इंटरव्यू में बताई असली वजह एक इंटरव्यू में नीना गुप्ता ने स्पष्ट किया कि वह प्रेग्नेंट नहीं हैं। उन्होंने बताया कि तस्वीरों में जो पेट उभरा हुआ दिखाई दे रहा है, वह सिर्फ साड़ी के मोटे कपड़े की वजह से ऐसा लग रहा था। उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा कि उन्हें अच्छा लगता है कि लोग ऐसी खबरों पर ध्यान दे रहे हैं, क्योंकि इससे लगता है कि समाज सोच के स्तर पर आगे बढ़ रहा है। अभिनेत्री ने इस तरह की अफवाहों को पूरी तरह गलत बताया। लंबा और संघर्षभरा करियर नीना गुप्ता भारतीय सिनेमा की बेहद सम्मानित कलाकारों में गिनी जाती हैं। उन्होंने अपने करियर में कई यादगार फिल्में और टीवी शो किए हैं। 1994 में फिल्म वो छोकरी के लिए उन्हें नेशनल अवॉर्ड भी मिला था। इसके अलावा वह क्लासिक फिल्म जाने भी दो यार और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चित फिल्म गांधी में भी नजर आ चुकी हैं। निजी जिंदगी की कहानी नीना गुप्ता की निजी जिंदगी भी काफी चर्चा में रही है। 1980 के दशक में उनका रिश्ता वेस्टइंडीज के दिग्गज क्रिकेटर Vivian Richards के साथ रहा। इसी दौरान वह प्रेग्नेंट हुईं और उन्होंने बिना शादी के ही बेटी मसाबा गुप्ता को जन्म देने का फैसला किया। उस दौर में यह फैसला काफी साहसी माना गया।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।