Environment

A fuel station in Nepal displays E10 ethanol-blended petrol as the government prepares to introduce ethanol-mixed fuel under new quality and production standards.
भारत में E20 के बाद अब नेपाल में E10 पेट्रोल की तैयारी, सरकार ने जारी किया नया ड्राफ्ट

काठमांडू: भारत में पेट्रोल में इथेनॉल मिश्रण (E20) को बढ़ावा दिए जाने के बाद अब नेपाल भी इस दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रहा है। नेपाल सरकार ने पेट्रोल में 10 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण (E10) लागू करने की तैयारी शुरू कर दी है। इसके लिए नेपाल ब्यूरो ऑफ स्टैंडर्ड्स एंड मेट्रोलॉजी (NBSM) ने नया ड्राफ्ट स्टैंडर्ड जारी किया है, जिसमें इथेनॉल के उत्पादन, गुणवत्ता, भंडारण, बिक्री और मूल्य निर्धारण से जुड़े विस्तृत नियम तय किए गए हैं। सरकार का कहना है कि कैबिनेट आवश्यकता के अनुसार भविष्य में पेट्रोल में इथेनॉल की मात्रा बढ़ाने या घटाने का फैसला भी कर सकेगी। E10 पेट्रोल के लिए तैयार किए गए नए नियम नेपाली अखबार द काठमांडू पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, ड्राफ्ट स्टैंडर्ड में इथेनॉल उत्पादन के स्रोत और तकनीकों को तीन श्रेणियों में बांटा गया है। इसके साथ ही स्टोरेज, लेबलिंग और गुणवत्ता नियंत्रण के लिए भी सख्त दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। ड्राफ्ट के अनुसार: इथेनॉल को केवल सुरक्षित, सूखे और लीक-प्रूफ टैंक या ड्रम में रखा जाएगा। हर कंटेनर पर निर्माता का नाम, बैच नंबर, मात्रा और उत्पादन तकनीक का उल्लेख करना अनिवार्य होगा। इथेनॉल पूरी तरह साफ और पारदर्शी होना चाहिए तथा उसमें कोई ठोस कण नहीं होना चाहिए। पेट्रोल में मिलाए जाने वाले इथेनॉल की शुद्धता कम से कम 99.5 प्रतिशत होनी चाहिए। इन रसायनों के इस्तेमाल पर रोक नेपाल सरकार ने मेथनॉल, तारपीन, कीटोन और टार जैसे रसायनों को डीनेचुरेंट के रूप में इस्तेमाल करने पर रोक लगाने का प्रस्ताव रखा है। सरकार का मानना है कि ऐसे रसायन वाहनों के इंजन, रबर पाइप और फ्यूल सिस्टम को नुकसान पहुंचा सकते हैं। स्थानीय उत्पादन को मिलेगा बढ़ावा यह पहल नेपाल सरकार के 5 जनवरी 2026 के कैबिनेट फैसले के बाद शुरू की गई है। इसके तहत "इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल उपयोग आदेश-2026"को मंजूरी दी गई थी, जो 12 मार्च 2026 को नेपाल गजट में प्रकाशित होने के बाद प्रभावी हो गया। सरकार का उद्देश्य है कि देश में उपलब्ध संसाधनों से इथेनॉल का उत्पादन बढ़ाया जाए, रोजगार के अवसर पैदा हों और आयातित पेट्रोल पर निर्भरता कम की जा सके। खाद्यान्न की कमी न हो, इसलिए लगाया प्रतिबंध नेपाल सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि इथेनॉल उत्पादन के कारण खाद्यान्न संकट पैदा नहीं होना चाहिए। इसलिए खाने योग्य अनाज का उपयोग इथेनॉल बनाने में नहीं किया जाएगा। ड्राफ्ट के अनुसार इथेनॉल उत्पादन के लिए इन कच्चे माल का उपयोग किया जाएगा: चीनी मिलों से निकलने वाला शीरा (मोलासेस) नेपियर घास कृषि एवं वन अपशिष्ट धान का पुआल मक्के के डंठल गेहूं की भूसी खाने योग्य नहीं रहने वाला खराब अनाज कसावा यीस्ट और अन्य आवश्यक रसायन पर्यावरण अनुकूल उत्पादन पर जोर सरकार ने निर्देश दिया है कि इथेनॉल का उत्पादन पर्यावरण के अनुकूल तकनीकों से किया जाएगा। तैयार इथेनॉल केवल नेपाल ऑयल कॉर्पोरेशन (NOC) को ही बेचा जा सकेगा। इथेनॉल की कीमत हर वित्तीय वर्ष की शुरुआत से पहले सरकार की सिफारिश समिति तय करेगी। नई दर लागू होने तक पुरानी कीमतें प्रभावी रहेंगी। संशोधित कीमतें हर वर्ष जुलाई के मध्य से लागू की जाएंगी। भारत की तरह स्वच्छ ईंधन की दिशा में कदम विशेषज्ञों का मानना है कि नेपाल का E10 कार्यक्रम भारत की इथेनॉल मिश्रण नीति की तर्ज पर स्वच्छ ईंधन को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम होने, स्थानीय कृषि आधारित उद्योगों को बढ़ावा मिलने और कार्बन उत्सर्जन घटाने में मदद मिलने की उम्मीद है।  

Deepshikha जुलाई 15, 2026 0
Workers install an underground rainwater reservoir in a waterlogged area of Kolkata as part of the KMC's initiative to reduce flooding and recharge groundwater.
बारिश का पानी अब नहीं होगा बर्बाद, कोलकाता में भूजल बढ़ाने के लिए KMC की नई योजना

कोलकाता: बदलते मौसम और लगातार बढ़ती जलभराव की समस्या से निपटने के लिए कोलकाता नगर निगम (KMC) ने एक नई पहल शुरू की है। निगम शहर के 50 से अधिक जलजमाव प्रभावित इलाकों में विशेष भूमिगत जलाशय (अंडरग्राउंड रिजर्वायर) बना रहा है। इनका उद्देश्य बारिश के पानी को संग्रहित कर उसे फिल्टर करने के बाद भूजल स्तर को रिचार्ज करना है। 50 से अधिक इलाकों में शुरू हुआ काम नगर निगम के ड्रेनेज विभाग ने शहर के 50 से अधिक ऐसे क्षेत्रों की पहचान की है, जहां हर वर्ष मानसून के दौरान जलभराव की गंभीर समस्या होती है। इन स्थानों पर भूमिगत जलाशय तैयार किए जा रहे हैं, जिनमें भारी बारिश के दौरान सड़कों पर जमा पानी एकत्र किया जाएगा। इसके बाद आधुनिक फिल्ट्रेशन प्रणाली से पानी को साफ कर पाइपलाइन के जरिए जमीन के भीतर भेजा जाएगा, जिससे भूजल स्तर बढ़ाने में मदद मिलेगी। दो समस्याओं का एक साथ समाधान नगर निगम का कहना है कि इस परियोजना से दो बड़े लाभ होंगे। पहला, बारिश के दौरान सड़कों पर जलभराव कम होगा और दूसरा, लगातार गिर रहे भूजल स्तर को दोबारा बढ़ाने में सहायता मिलेगी। विशेषज्ञों के अनुसार, जलवायु परिवर्तन के कारण कम समय में अत्यधिक बारिश हो रही है, जिससे शहर का पुराना ड्रेनेज सिस्टम पर्याप्त साबित नहीं हो रहा है। 70 से 90 मीटर की गहराई तक भेजा जाएगा पानी ड्रेनेज विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, फिल्टर किया गया बारिश का पानी विशेष पाइपों के माध्यम से जमीन के भीतर 70 से 90 मीटर की गहराई तक स्थित प्राकृतिक रेतीली परतों में पहुंचाया जाएगा। इससे केवल स्वच्छ पानी ही भूजल में जाएगा और जल स्रोतों का प्राकृतिक पुनर्भरण (रिचार्ज) होगा। क्यों जरूरी है यह परियोजना कोलकाता में हाल के वर्षों में कम समय में अत्यधिक वर्षा होने लगी है। कई बार शहर का ड्रेनेज नेटवर्क एक घंटे में जितना पानी निकाल सकता है, उससे कहीं अधिक पानी सड़कों पर जमा हो जाता है। इससे लंबे समय तक जलभराव बना रहता है और आम लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। नगर निगम का मानना है कि नई परियोजना जलभराव की समस्या को पूरी तरह समाप्त नहीं करेगी, लेकिन इसकी गंभीरता को काफी हद तक कम करने में मदद मिलेगी। सफल होने पर पूरे शहर में होगा विस्तार ड्रेनेज विभाग ने बताया कि फिलहाल इस योजना को 50 से 55 जलभराव वाले क्षेत्रों में लागू किया जा रहा है। परियोजना के परिणामों का आकलन करने के बाद इसे कोलकाता के अन्य संवेदनशील इलाकों में भी विस्तार दिया जाएगा। नगर निगम को उम्मीद है कि यह पहल न केवल मानसून के दौरान नागरिकों को राहत देगी, बल्कि भविष्य में शहर के जल संसाधनों को सुरक्षित रखने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।  

Deepshikha जुलाई 15, 2026 0
Sawai Mansingh Stadium, Shaheed Veer Narayan Singh Stadium and Dr. DY Patil Stadium, where the NGT has imposed an interim halt on cricket and other sporting events over alleged environmental violations.
NGT का बड़ा आदेश: जयपुर, रायपुर और मुंबई के तीन स्टेडियमों में क्रिकेट मैचों पर अंतरिम रोक

नई दिल्ली: नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने पर्यावरणीय नियमों के कथित उल्लंघन को गंभीर मानते हुए जयपुर के सवाई मानसिंह स्टेडियम, रायपुर के शहीद वीर नारायण सिंह स्टेडियम और मुंबई के डॉ. डीवाई पाटिल स्टेडियम में फिलहाल क्रिकेट मैच और अन्य खेल आयोजनों पर अंतरिम रोक लगा दी है। ट्रिब्यूनल ने स्पष्ट किया है कि अगली सुनवाई 17 अगस्त को होगी। तब तक या ट्रिब्यूनल की विशेष अनुमति मिलने तक इन स्टेडियमों में कोई खेल आयोजन नहीं किया जा सकेगा। क्यों लगाई गई रोक? एनजीटी के अनुसार, स्टेडियमों में मैदान और पिच के रखरखाव के लिए भूजल का अत्यधिक उपयोग किया जा रहा है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि: पिच और आउटफील्ड की हरियाली बनाए रखने के लिए पीने योग्य भूजल का इस्तेमाल किया जा रहा है। इसके बजाय सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) के शुद्ध किए गए पानी और रेन वाटर हार्वेस्टिंग जैसी वैकल्पिक व्यवस्थाओं का पर्याप्त उपयोग नहीं किया गया। पहले भी जारी किए गए थे नोटिस ट्रिब्यूनल ने बताया कि संबंधित स्टेडियमों को पहले भी पर्यावरणीय नियमों के पालन को लेकर नोटिस जारी किए गए थे। हालांकि, संतोषजनक जवाब या अनुपालन रिपोर्ट नहीं मिलने के बाद एनजीटी ने अंतरिम रोक लगाने का फैसला किया। स्टेडियम प्रबंधन से मांगा जवाब एनजीटी ने संबंधित स्टेडियम प्रबंधन से पूछा है कि: पर्यावरण संबंधी दिशानिर्देशों का कितना पालन किया गया? भूजल के उपयोग को कम करने के लिए क्या कदम उठाए गए? एसटीपी के ट्रीटेड पानी और वर्षा जल संचयन (रेन वाटर हार्वेस्टिंग) की क्या व्यवस्था की गई? इन सभी बिंदुओं पर अगली सुनवाई में विस्तृत जवाब देना होगा। बड़े आयोजनों के लिए अनुमति लेनी होगी ट्रिब्यूनल ने यह भी कहा है कि यदि किसी बड़े खेल आयोजन की आवश्यकता हो, तो संबंधित पक्ष एनजीटी से विशेष अनुमति के लिए आवेदन कर सकते हैं। 17 अगस्त को होगी अगली सुनवाई अब इस मामले की अगली सुनवाई 17 अगस्त को होगी। स्टेडियम प्रबंधन की ओर से पर्यावरणीय नियमों के अनुपालन पर जवाब मिलने के बाद ही ट्रिब्यूनल यह तय करेगा कि खेल गतिविधियों पर लगी अंतरिम रोक हटाई जाए या आगे भी जारी रखी जाए।  

Deepshikha जुलाई 11, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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इंग्लैंड से सीरीज हार के बाद टीम इंडिया का होगा प्रदर्शन रिव्यू, BCCI करेगा खिलाड़ियों और कोचिंग स्टाफ का मूल्यांकन

anjali kumari जुलाई 11, 2026 0