famous events March 26

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Important Events: 26 मार्च की महत्त्वपूर्ण घटनाएं

1552 – गुरू अमरदास सिखों के तीसरे गुरू बने। 1668 – इंग्लैंड ने बंबई पर अधिकार कर लिया।  1780 – ब्रिटेन के अखबार ब्रिट गैजेट और संडे मॉनीटर पहली बार रविवार के दिन प्रकाशित हुए। 1799 – फ्रांस के शासक नेपोलियन बोनापार्ट ने फिलीस्तीन के जाफा क्षेत्र पर कब्जा किया। 1812 – वेनेजुएला के सबसे बड़े शहर कराकास में जबरदस्त भूकंप की वजह से शहर का 90 प्रतिशत हिस्सा ध्वस्त हो गया और करीब 20 हजार लोगों की मौत हो गयी। 1845 – एडहेसिव मेडिकेटेड प्लास्टर को पेटेंट प्रदान किया गया। 1871 – फ्रांस की राजधानी में पेरिस कम्यून की स्थापना हुई। 1917 – गाजा में ब्रिटिशों और तुर्काें के बीच हुये युद्ध में ब्रिटेन विजयी हुआ। 1934 – ब्रिटेन में चालक परीक्षण शुरू हुआ। 1943 – एल्सी एस ओट्ट को अमेरिकी वायुसेना पदक मिला अौर वह यह पदक पाने वाली पहली महिला बनीं। 1953 – डॉ जोनास साल्क ने पोलियो से बचाव के लिए नये टीके की घोषणा की। 1971 – शेख मुजीबुर्रहमान ने पूर्वी पाकिस्तान को बंगलादेश के रूप में स्वतंत्र देश घोषित किया। 26 मार्च को बांग्लादेश स्वंतत्रता दिवस मनाता है। 1972 – भारत के राष्ट्रपति वी.वी गिरी ने पहले अंतरराष्ट्रीय संस्कृत सम्मेलन का उद्घाटन किया। 1973 – लंदन स्टॉक एक्सचेंज ने अपने 200 वर्ष पुराने इतिहास को तोड़ते हुए पहली बार महिलाओं की भर्ती शुरू की थी। 1974 - लाता गाँव, हेन्वाल घाटी, गढ़वाल हिमालय में गौरा देवी के नेतृत्व में 27 महिलाओं के एक समूह ने पेड़ों को बचाने के लिए पेड़ों के आसपास घेरा बना लिया और उन्हें अपने इस प्रयास से भारत में चिपको आंदोलन को आरंभ किया। 1979 – 30 साल से जारी युद्ध विराम के लिए इसराइल और मिस्र ने शांति समझौते पर हाथ मिलाए। यह समझौता अमेरिका द्वारा करवाया गया था। 1992 – हैवीवेट बॉक्सिंग चैंपियन माइक टाइसन को बलात्कार के आरोप में 10 वर्ष कारावास की सजा सुनायी गयी। 1995 - 15 सदस्यीय यूरोपीय यूनियन के सात देशों के बीच आंतरिक सीमा नियंत्रण समाप्त। 1998 - चीन ने अमेरिकी इरीडियम नेटवर्क के दो उपग्रहों को सफलतापूर्वक पृथ्वी की कक्षा में स्थापित किया। 1999 - द. अफ़्रीका के राष्ट्रपति नेल्सन मंडेला ने देश की प्रथम प्रजातांत्रिक संसद के विघटन की घोषणा की। 2001 - केन्या में छात्रावास में आग लगने से 58 छात्र मरे। 2003 - पाकिस्तान ने 200 कि.मी. की दूरी तक मार करने वाली परमाणु प्रक्षेपास्त्र 'अब्दाली' का परीक्षण किया। 2006 - मेलबर्न में 18वें राष्ट्रमंडल खेलों का समापन। 2008 - भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड कोष में 2.90 करोड़ रुपये की हेराफेरी के मामले में बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष जगमोहन डालमिया को गिरफ़्तार किया गया।  2008 - टाटा मोटर्स ने अमेरिकी कंपनी 'जगुआर' व 'लैंड रोवर' का अधिग्रहण किया। 2008 - युसुफ़ रजा गिलानी ने पाकिस्तान के 25वें प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली।  2008 - भारत व पाकिस्तान ने एक-दूसरे के युद्ध बन्दियों को रिहा करने के लिए विदेश मंत्रालय स्तर पर बातचीत शुरू की। 2014 - तावी रोइवास एस्तोनिया के प्रधानमत्री बने। 2019 - राष्‍ट्रपति रामनाथ कोविंद को क्रोएशिया के सर्वोच्‍च सम्‍मान से सम्‍मानित किया गया।  2019 - नीरव मोदी की पेंटिग्स की नीलामी से इनकम टैक्स डिपार्टमेंट को मिले 55 करोड़ रुपये । 2019 - गोलान पहाडि़यों पर इजरायल के कब्जे को ट्रंप द्वारा मान्यता दिए जाने के खिलाफ खाड़ी देशों ने विरोध किया। 2019 - ब्रिटेन में 54.74 लाख में नीलाम हुई टीपू सुल्तान की चांदी जड़ित बंदूक। 2020 - सरकार ने कोविड-19 महामारी से निपटने के लिए एक लाख 70 हजार करोड रूपये के प्रधानमंत्री गरीब कल्याण राहत पैकेज की घोषणा की। 2020 - अंतर्राष्‍ट्रीय मुद्रा कोष और विश्‍वबैंक ने सभी राष्‍ट्रों से विश्‍व के सबसे गरीब देशों से ऋण भुगतान पर रोक लगाने का आह्वान किया। 2021 - प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी दो दिन की बांग्लादेश यात्रा पर रवाना हुए। 2021 - मिस्र में दो रेलगाडि़यों की टक्‍कर में लगभग 32 लोग मारे गए और 66 घायल हुए। 2021 - बंगबंधु शेख मुजीबुर्रहमान को दिया गया गांधी शांति पुरस्कार उनकी पुत्री शेख रेहाना ने ग्रहण किया। 2021 - चीन ने प्रासंगिक ब्रिटिश व्यक्तियों और संस्थाओं पर प्रतिबंधों की घोषणा की । 2021 - पाकिस्तान ने परमाणु - सक्षम सतह से सतह पर मार करने वाली बैलिस्टिक मिसाइल शाहीन (Shaheen-1A) का सफल परीक्षण किया। 2022 - एल्युमिनियम-बॉडी से बनी देश की पहली हल्की ट्रेन को हरी झंडी दिखाई गई। पुणे मेट्रो में भरेगी रफ्तार। 2022 - राष्ट्रीय संस्कृति महोत्सव 2022 का आंध्र प्रदेश के राजमहेंद्रवरम में उद्घाटन हुआ। 2023 - राजस्थान के बीकानेर में 4.2 तीव्रता का भूकंप आया। 2023 - अंतरिक्ष में एक साथ  36 सैटेलाइट ले जाकर ISRO ने फिर इतिहास रचा , भारत का सबसे बड़ा LVM3 रॉकेट लॉन्च किया। 2023 - राजस्थान के नागौर में 8 करोड़ का मायरा : भाई ने बहन को दी 100 बीघा जमीन, 1 किलो सोना और 14 किलो चांदी देकर इतिहास रचा।   26 मार्च को जन्मे व्यक्ति   1893 - धीरेन्द्र नाथ गांगुली, बंगाली सिनेमा के प्रसिद्ध अभिनेता और निर्देशक । 1907 – महादेवी वर्मा - हिन्दी की मशहूर कवयित्री और हिन्दी साहित्य में छायावादी युग के चार प्रमुख स्तंभों में से एक , का जन्म फरुखाबाद में हुआ। 1912 - विमल प्रसाद चालिहा - स्वतंत्रता सेनानी, राजनीतिज्ञ और असम के मुख्यमंत्री रहे थे। 1933 - कुबेरनाथ राय - हिन्दी ललित निबन्ध परम्परा के महत्वपूर्ण हस्ताक्षर, सांस्कृतिक निबन्धकार और भारतीय आर्ष-चिन्तन के गन्धमादन थे।   26 मार्च को हुए निधन   1827 - लुडविग बीथोवन - जर्मनी के संगीतकार (पुरूष)। 1996 - के.के. हेब्बार के रूप में लोकप्रिय कटिंगेरी कृष्णा हेब्बार एक मशहूर कलाकार थे। 1999 - राज कुमार रणबीर सिंह - मणिपुर के आठवें मुख्यमंत्री रहे। 1999 - आनंद शंकर - भारतीय गीतकार और संगीतकार थे। 2006 - अनिल बिस्वास - भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के पश्चिम बंगाल राज्य के पूर्व महासचिव। 2014 - गंगाराम चौधरी - एक भारतीय राजनीतिज्ञ (राजस्थान सरकार में मंत्री) थे। 2014 - ति॰ क॰ शिवशंकरण या टी॰ के॰ शिवशंकरण - भारतीय राज्य तमिलनाडु से तमिल लेखक एवं समालोचक थे। 2020 - जाने-माने कलाकार और वास्तुकार सतीश गुजराल का निधन। 2021 - प्रसिद्ध पत्रकार और लेखक अनिल धारकर (74) का निधन हुआ।   2021 - भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व डिप्टी गवर्नर के सी चक्रवर्ती (68) का दिल का दौरा पड़ने से निधन हुआ। 2022 - अमेरिकी पुरुष कॉलेज बास्केटबॉल कोच  जो विलियम्स (88) का निधन हुआ। 2023 - अर्जेंटीना के फुटबॉल खिलाड़ी व प्रबंधक जुआन कार्लोस मुरुआ (87) का निधन हुआ। 2023 - अमेरिकी फुटबॉल कोच रहे रिचर्ड लैंट्ज़ (85) का निधन हुआ।   26 मार्च के महत्त्वपूर्ण अवसर एवं उत्सव   मेला बादशाह फूलडोल (ब्यावर)। होला मेला श्रीआनन्दपुर व पांओटा साहिब (पं. )। श्रीमती महादेवी वर्मा जयन्ती। श्री विमल प्रसाद चालिहा जयन्ती। श्री राज कुमार रणबीर सिंह स्मृति दिवस। बंगलादेश मुक्ति / स्वतन्त्रता दिवस व National Spinach Day (यूनाइटेड स्टेट्‍स)। कृपया ध्यान दें   यद्यपि इसे तैयार करने में पूरी सावधानी रखने की कोशिश रही है। फिर भी किसी घटना , तिथि या अन्य त्रुटि के लिए IDTV इन्द्रधनुष की  कोई जिम्मेदारी नहीं है।

Anjali Kumari मार्च 26, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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नालंदा मंदिर हादसा: भीड़ ने ली 8 महिलाओं की जान, धार्मिक आयोजन में मची भगदड़ जैसी स्थिति

surbhi मार्च 31, 2026 0