2026 फीफा विश्व कप के पहले सेमीफाइनल में स्पेन ने शानदार प्रदर्शन करते हुए फ्रांस को 2-0 से हराकर फाइनल में जगह बना ली। इस जीत के साथ स्पेन ने सिर्फ 16 साल बाद विश्व कप फाइनल में वापसी ही नहीं की, बल्कि 96 साल के विश्व कप इतिहास में ऐसा रिकॉर्ड भी अपने नाम कर लिया, जो आज तक कोई भी टीम नहीं बना सकी थी। स्पेन ने पूरे टूर्नामेंट में अपनी मजबूत रक्षा पंक्ति और अनुशासित खेल का शानदार प्रदर्शन किया। यही कारण रहा कि फ्रांस जैसी मजबूत टीम भी स्पेन के डिफेंस को भेदने में पूरी तरह नाकाम रही। 96 साल में पहली बार बना यह रिकॉर्ड स्पेन एक ही फीफा विश्व कप में छह क्लीन शीट दर्ज करने वाली पहली टीम बन गई है। फ्रांस के खिलाफ सेमीफाइनल में मिकेल ओयार्जाबेल और पेड्रो पोरो के गोलों ने जीत सुनिश्चित की, लेकिन मैच की सबसे बड़ी ताकत स्पेन की मजबूत डिफेंस और गोलकीपर उनाई सिमोन का बेहतरीन प्रदर्शन रहा। पूरे टूर्नामेंट में स्पेन ने सात मुकाबलों में केवल एक गोल खाया, जबकि छह मैचों में विरोधी टीम एक भी गोल नहीं कर सकी। एम्बाप्पे समेत फ्रांस के स्टार खिलाड़ी रहे बेअसर किलियन एम्बाप्पे, माइकल ओलिसे और फ्रांस की आक्रामक लाइन से बड़े प्रदर्शन की उम्मीद थी, लेकिन स्पेन की रणनीतिक डिफेंस ने उन्हें खुलकर खेलने का मौका ही नहीं दिया। पूरे मुकाबले में फ्रांस लय हासिल नहीं कर सका और सेमीफाइनल से बाहर हो गया। टूटा पुराना विश्व रिकॉर्ड इससे पहले एक विश्व कप संस्करण में सबसे अधिक पांच क्लीन शीट का रिकॉर्ड नीदरलैंड्स (1974), इटली (1990), ब्राजील (1994), फ्रांस (1998) और स्पेन (2010) के नाम दर्ज था। अब स्पेन ने छह क्लीन शीट के साथ यह रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया है। 44 साल बाद दोहराया गया खास कारनामा मौजूदा यूरो चैंपियन स्पेन अब विश्व कप फाइनल में पहुंचने वाली दूसरी टीम बन गई है, जिसने यूरो चैंपियन रहते हुए लगातार दूसरी बार विश्व कप फाइनल में जगह बनाई है। इससे पहले यह उपलब्धि वेस्ट जर्मनी ने 1974 और 1982 में हासिल की थी। स्पेन ने 2008 यूरो जीतने के बाद 2010 विश्व कप जीता था और अब यूरो 2024 चैंपियन रहते हुए 2026 विश्व कप के फाइनल में पहुंच गया है। लगातार 37 मैचों से अजेय स्पेन स्पेन की यह जीत लगातार 37वां अजेय मुकाबला भी रही। टीम ने इस मामले में इटली के रिकॉर्ड की बराबरी कर ली है। यदि स्पेन फाइनल मुकाबला जीतता है, तो वह लगातार 38 मैचों तक अजेय रहने वाली पहली राष्ट्रीय फुटबॉल टीम बन जाएगी। फ्रांस के लिए निराशाजनक रिकॉर्ड फ्रांस के लिए यह हार बेहद निराशाजनक रही। 1986 विश्व कप में वेस्ट जर्मनी से 0-2 की हार के बाद यह नॉकआउट चरण में उसकी सबसे बड़ी हार मानी जा रही है। सेमीफाइनल जैसे बड़े मुकाबले में फ्रांस का आक्रमण पूरी तरह स्पेन के डिफेंस के सामने बेअसर साबित हुआ। हार के बाद फ्रांस में उठे सवाल सेमीफाइनल में हार के बाद फ्रांसीसी मीडिया और कई पूर्व खिलाड़ियों ने टीम की रणनीति और प्रदर्शन पर सवाल उठाए हैं। कप्तान किलियन एम्बाप्पे ने भी स्वीकार किया कि टीम से सामरिक और तकनीकी स्तर पर कई गलतियां हुईं, जिनका फायदा स्पेन ने पूरी तरह उठाया। क्या खत्म होने वाला है डिडिएर डेशॉम्प्स का दौर? फ्रांस के मुख्य कोच डिडिएर डेशॉम्प्स के भविष्य को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं। उनके नेतृत्व में फ्रांस ने 2018 में विश्व कप जीता, 2022 में फाइनल खेला और 2026 में सेमीफाइनल तक का सफर तय किया। हालांकि स्पेन के खिलाफ मिली हार के बाद अब उनके भविष्य पर सवाल उठने लगे हैं। अब स्पेन की नजर 19 जुलाई को होने वाले विश्व कप फाइनल पर है। यदि टीम खिताब जीतने में सफल रहती है तो वह न केवल विश्व चैंपियन बनेगी, बल्कि कई ऐतिहासिक रिकॉर्ड भी अपने नाम दर्ज करेगी। फिलहाल स्पेन ने यह साबित कर दिया है कि फुटबॉल में मजबूत रक्षा पंक्ति भी उतनी ही अहम होती है जितना शानदार आक्रमण।
डलास: फीफा विश्व कप 2026 के पहले सेमीफाइनल में स्पेन ने दमदार प्रदर्शन करते हुए फ्रांस को 2-0 से शिकस्त देकर फाइनल में अपनी जगह पक्की कर ली। पूरे मुकाबले में स्पेन ने आक्रामक और अनुशासित खेल का बेहतरीन संतुलन दिखाया, जबकि किलियन एम्बाप्पे की अगुआई वाली फ्रांसीसी टीम लगातार संघर्ष करने के बावजूद गोल करने में नाकाम रही। इस जीत के साथ स्पेन ने 2010 के बाद पहली बार विश्व कप फाइनल में प्रवेश किया और अब वह 16 साल बाद दूसरी बार विश्व चैंपियन बनने से सिर्फ एक कदम दूर है। शुरुआत से ही स्पेन ने गेंद पर बेहतर नियंत्रण बनाए रखा और फ्रांस की रक्षापंक्ति पर लगातार दबाव बनाया। स्पेन की तेज पासिंग और सामूहिक खेल के सामने फ्रांस की टीम लय में नजर नहीं आई। दूसरी ओर, एम्बाप्पे को स्पेनिश डिफेंडरों ने पूरे मैच में खुलकर खेलने का मौका नहीं दिया। पेनल्टी से मिली शुरुआती बढ़त मैच का पहला बड़ा मौका 22वें मिनट में आया, जब स्पेन को पेनल्टी मिली। इस मौके को मिकेल ओयरजाबल ने बिना कोई गलती किए शानदार अंदाज में गोल में बदल दिया। उन्होंने गोलकीपर को गलत दिशा में भेजते हुए गेंद को नेट में पहुंचाया और स्पेन को 1-0 की अहम बढ़त दिला दी। इस गोल के बाद स्पेन का आत्मविश्वास और बढ़ गया। टीम ने गेंद पर नियंत्रण बनाए रखा और फ्रांस के हमलों को बीच मैदान में ही रोकने की रणनीति अपनाई। फ्रांस ने बराबरी करने की कोशिश जरूर की, लेकिन उसके हमलों में धार की कमी साफ दिखाई दी। पहले हाफ में स्पेन का रहा दबदबा हाफ टाइम तक स्पेन 1-0 से आगे था। फ्रांस ने कुछ मौके जरूर बनाए, लेकिन स्पेन की मजबूत रक्षापंक्ति और गोलकीपर ने हर चुनौती का सफलतापूर्वक सामना किया। एम्बाप्पे और फ्रांस के अन्य स्टार खिलाड़ी स्पेनिश डिफेंस को भेदने में असफल रहे। स्पेन ने पहले हाफ में न सिर्फ बढ़त हासिल की, बल्कि खेल की रफ्तार पर भी अपना नियंत्रण बनाए रखा। मिडफील्ड में उसकी पकड़ ने फ्रांस को खुलकर खेलने का अवसर नहीं दिया। पेड्रो पोरो ने जीत पर लगाई मुहर दूसरे हाफ की शुरुआत भी स्पेन ने आक्रामक अंदाज में की। 58वें मिनट में पेड्रो पोरो ने शानदार गोल दागकर स्कोर 2-0 कर दिया। इस गोल ने फ्रांस की वापसी की उम्मीदों को लगभग खत्म कर दिया। इसके बाद फ्रांस ने आक्रमण तेज करने की कोशिश की, लेकिन स्पेन की रक्षापंक्ति ने कोई बड़ी गलती नहीं की। स्पेन ने संयमित खेल दिखाते हुए गेंद पर कब्जा बनाए रखा और मैच के अंतिम मिनटों तक फ्रांस को कोई स्पष्ट गोल करने का मौका नहीं दिया। एम्बाप्पे का जादू नहीं चला पूरे टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन करने वाले किलियन एम्बाप्पे इस बड़े मुकाबले में अपना प्रभाव छोड़ने में सफल नहीं रहे। स्पेन के डिफेंडरों ने उन्हें लगातार मार्क किया और खतरनाक मूव बनाने का मौका नहीं दिया। फ्रांस के अन्य स्टार खिलाड़ी भी उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर सके। 16 साल बाद फिर विश्व कप फाइनल में स्पेन इस शानदार जीत के साथ स्पेन ने 2010 के बाद पहली बार फीफा विश्व कप के फाइनल में जगह बनाई है। अब उसकी नजर 16 साल बाद दूसरी बार विश्व कप ट्रॉफी जीतने पर होगी। दूसरी ओर, फ्रांस का लगातार दूसरा विश्व कप जीतने का सपना सेमीफाइनल में ही समाप्त हो गया। स्पेन के लिए यह जीत केवल फाइनल का टिकट नहीं, बल्कि नई पीढ़ी की टीम के आत्मविश्वास और शानदार सामूहिक प्रदर्शन का भी बड़ा प्रमाण है।
स्पेन के युवा फुटबॉल स्टार लामिन यामाल ने अपने 19वें जन्मदिन पर सिर्फ हीरों से जड़ा नेकलेस पहनकर ही सुर्खियां नहीं बटोरीं, बल्कि नस्लवाद और विभाजनकारी राजनीति के खिलाफ एक मजबूत संदेश देकर भी सबका ध्यान खींचा। फ्रांस के खिलाफ फीफा वर्ल्ड कप 2026 के सेमीफाइनल से पहले आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में यामाल ने कहा कि फुटबॉल का असली उद्देश्य लोगों को जोड़ना है, न कि उन्हें बांटना। जन्मदिन पर खुद को दिया खास तोहफा सेमीफाइनल मुकाबले से एक दिन पहले टेक्सास में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में यामाल व्हाइट गोल्ड और डायमंड से बने शानदार नेकलेस के साथ पहुंचे। जब उनसे पूछा गया कि यह जन्मदिन का उपहार किसने दिया, तो उन्होंने मुस्कुराते हुए जवाब दिया कि यह किसी और का नहीं, बल्कि खुद का दिया हुआ गिफ्ट है। यामाल ने कहा, "यह मुझे किसी ने गिफ्ट नहीं किया। मैंने इसे खुद खरीदा है। यह मेरी तरफ से मेरे लिए तोहफा है।" उनका यह जवाब सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो गया। नस्लवाद पर दिया एकता का संदेश प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान यामाल से हाल ही में फ्रांस की बहुसांस्कृतिक टीम को लेकर उठे राजनीतिक विवाद पर सवाल पूछा गया। हाल ही में स्पेन के पूर्व प्रधानमंत्री मारियानो राजोय की एक टिप्पणी को लेकर विवाद खड़ा हो गया था, जिसमें फ्रांस की टीम की विविधता पर सवाल उठाए गए थे। इस पर यामाल ने बिना किसी विवाद को बढ़ाए बेहद संतुलित जवाब दिया। उन्होंने कहा कि फुटबॉल का मकसद लोगों को एकजुट करना है। फ्रांस और स्पेन दोनों अलग-अलग संस्कृतियों और समुदायों के एकीकरण की मिसाल हैं। ऐसे में किसी की टिप्पणी पर चर्चा करने से ज्यादा जरूरी यह है कि खेल लोगों को जोड़ने का काम करे। विविधता की मिसाल हैं यामाल लामिन यामाल खुद भी विविध सांस्कृतिक पृष्ठभूमि से आते हैं। उनके पिता मोरक्को से हैं, जबकि उनकी मां इक्वेटोरियल गिनी मूल की हैं। ऐसे में उनका बयान आधुनिक और समावेशी समाज की सोच को दर्शाता है। छोटे भाई की वायरल लोकप्रियता पर भी बोले यामाल ने अपने छोटे भाई केयने का भी जिक्र किया, जो स्पेन के मैचों के दौरान स्टेडियम में अपनी मस्तीभरी हरकतों की वजह से सोशल मीडिया पर काफी लोकप्रिय हो चुके हैं। उन्होंने हंसते हुए कहा कि उनके भाई को खुद भी नहीं पता कि वह इंटरनेट पर वायरल हो चुके हैं। कैमरा देखते ही वह वही शरारतें करते हैं जो घर पर करते हैं और उन्हें टीवी पर देखकर उन्हें भी खुशी होती है। गोल नहीं, टीम की जीत ज्यादा अहम पूरे टूर्नामेंट में अब तक सिर्फ एक गोल करने को लेकर पूछे गए सवाल पर भी यामाल बिल्कुल शांत नजर आए। उन्होंने कहा कि हर टूर्नामेंट अलग होता है और उनके लिए व्यक्तिगत आंकड़ों से ज्यादा महत्वपूर्ण टीम की सफलता है। यामाल का कहना था कि जब तक स्पेन जीत रहा है, उन्हें अपने गोलों की संख्या की चिंता नहीं है। उन्होंने उम्मीद जताई कि टीम आगे बढ़ेगी और उन्हें गोल करने के और अवसर मिलेंगे। फ्रांस के खिलाफ रोमांचक मुकाबले की उम्मीद स्पेन और फ्रांस के बीच होने वाले सेमीफाइनल को लेकर यामाल ने कहा कि दोनों टीमें आक्रमण और बचाव में मजबूत हैं, इसलिए मुकाबला बेहद संतुलित और रोमांचक रहने वाला है। उनके अनुसार यह वही मैच है जिसका दुनिया भर के फुटबॉल प्रशंसक लंबे समय से इंतजार कर रहे थे। मैदान के बाहर भी दिखी परिपक्व सोच महज 19 साल की उम्र में यामाल ने जिस आत्मविश्वास और परिपक्वता के साथ नस्लवाद, राजनीति और खेल की भूमिका पर अपनी बात रखी, उसने यह साफ कर दिया कि वह केवल मैदान पर ही नहीं, बल्कि मैदान के बाहर भी नई पीढ़ी के प्रभावशाली खिलाड़ियों में शामिल हो चुके हैं।
महराजगंज: उत्तर प्रदेश के महाराजगंज जिले में भारत-नेपाल सीमा पर सशस्त्र सीमा बल (SSB) ने एक अमेरिकी नागरिक को बिना वैध पासपोर्ट और यात्रा दस्तावेजों के नेपाल में प्रवेश करने की कोशिश करते हुए गिरफ्तार किया है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि वह पिछले करीब सात महीने से बिना पासपोर्ट के भारत में रह रहा था। सुरक्षा एजेंसियां अब उसके भारत आने के पूरे घटनाक्रम और गतिविधियों की जांच कर रही हैं। नेपाल सीमा पार करने की कोशिश में पकड़ा गया एसएसबी की 22वीं बटालियन रविवार को नियमित गश्त कर रही थी। इसी दौरान सोनौली थाना क्षेत्र के मैनिहवा इलाके में सीमा स्तंभ संख्या 516 के पास एक विदेशी नागरिक नेपाल की ओर बढ़ता दिखाई दिया। जवानों ने उसे रोककर दस्तावेज मांगे, लेकिन उसके पास कोई वैध पासपोर्ट या यात्रा संबंधी दस्तावेज नहीं मिला। पूछताछ में उसने अपना नाम जॉर्डन ब्राउन (36) बताया और खुद को अमेरिका के कैलिफोर्निया का निवासी बताया। जवानों को देखकर भागने लगा महराजगंज के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थ के अनुसार, जब एसएसबी जवानों ने उससे पूछताछ शुरू की तो वह मौके से भागने का प्रयास करने लगा। हालांकि, जवानों ने तुरंत उसे पकड़ लिया और हिरासत में ले लिया। थाईलैंड में पासपोर्ट खोने का दावा पुलिस पूछताछ में जॉर्डन ब्राउन ने बताया कि वह टूरिस्ट वीजा पर थाईलैंड गया था, जहां उसका पासपोर्ट खो गया। उसने यह भी दावा किया कि वह पहले अमेरिकी नौसेना (US Navy) में अधिकारी के रूप में कार्य कर चुका है। हालांकि, पुलिस उसके सभी दावों का सत्यापन कर रही है। समुद्र के रास्ते भारत पहुंचने का दावा पूछताछ में ब्राउन ने बताया कि वह थाईलैंड से समुद्री मार्ग के जरिए श्रीलंका पहुंचा और वहां से 2 नवंबर 2025 को समुद्र के रास्ते भारत आया। इसके बाद वह लंबे समय तक गोवा में रहा। बाद में वह गोवा से बेंगलुरु और फिर उत्तर प्रदेश के सोनौली बॉर्डर पहुंचा, जहां से वह नेपाल में प्रवेश करने की कोशिश कर रहा था। सात महीने तक बिना पासपोर्ट कैसे रहा? जांच एजेंसियों के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि जॉर्डन ब्राउन करीब सात महीने तक बिना वैध पासपोर्ट और यात्रा दस्तावेजों के भारत में कैसे रहा और विभिन्न राज्यों में आवाजाही कैसे करता रहा। पुलिस अब उसके संपर्कों, यात्रा मार्ग और भारत में रहने की पूरी अवधि की जांच कर रही है। सुरक्षा एजेंसियां कर रही हैं पूछताछ फिलहाल अमेरिकी नागरिक को हिरासत में रखकर पूछताछ की जा रही है। पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि उसके दावे कितने सही हैं और भारत में उसके रहने का वास्तविक उद्देश्य क्या था। जांच पूरी होने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
नई दिल्ली, एजेंसियां। फीफा वर्ल्ड कप 2026 में दक्षिण अफ्रीका को पहली बार नॉकआउट चरण तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाने वाले युवा मिडफील्डर जेडन एडम्स का 25 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। उनका शव 11 जुलाई को केपटाउन के शॉट्सचेक्लूफ इलाके स्थित एक घर में मिला। दक्षिण अफ्रीका के खेल मंत्री गेटन मैकेंजी ने उनके निधन की पुष्टि करते हुए इसे देश के फुटबॉल के लिए अपूरणीय क्षति बताया। हालांकि, उनकी मौत की वजह का अब तक आधिकारिक खुलासा नहीं किया गया है। मौत की जांच जारी, अफवाहों से बचने की अपील खेल मंत्री ने सोशल मीडिया पर शोक व्यक्त करते हुए लोगों और मीडिया से अपील की कि वे मौत के कारण को लेकर किसी तरह की अटकलें न लगाएं। पुलिस ने भी मामले की जांच शुरू कर दी है और कहा है कि सभी परिस्थितियों की पड़ताल की जा रही है। सोशल मीडिया पर आत्महत्या और अवसाद से जुड़े कई दावे किए जा रहे हैं, लेकिन इनकी किसी भी स्तर पर आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। वर्ल्ड कप में शानदार प्रदर्शन, देश को दिलाई नई पहचान जेडन एडम्स ने फीफा वर्ल्ड कप 2026 में दक्षिण अफ्रीका के तीनों ग्रुप मुकाबलों में हिस्सा लिया था। उनकी बदौलत टीम पहली बार टूर्नामेंट के नॉकआउट चरण तक पहुंची। हालांकि, कनाडा के खिलाफ राउंड ऑफ 32 के मुकाबले में वह नहीं खेल सके। इससे पहले वह 2024 अफ्रीका कप ऑफ नेशंस में तीसरे स्थान पर रहने वाली दक्षिण अफ्रीकी टीम का भी हिस्सा थे। उनके निधन पर विश्व फुटबॉल जगत में शोक की लहर है। नॉर्वे और इंग्लैंड के बीच खेले गए वर्ल्ड कप क्वार्टर फाइनल से पहले उनके सम्मान में दो मिनट का मौन रखा गया। दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा, फुटबॉल खिलाड़ियों के संगठन और कई खेल हस्तियों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी। उनकी गर्लफ्रेंड अकीला एडेंडॉर्फ ने भी भावुक संदेश साझा करते हुए उन्हें अपना सबसे बड़ा सहारा और सबसे अच्छा दोस्त बताया। जेडन का निधन उनकी दादी की मौत के एक महीने के भीतर हुआ है, जिससे उनके परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।
FIFA World Cup 2026 के सेमीफाइनल में फुटबॉल की दो बड़ी प्रतिद्वंद्वी टीमें इंग्लैंड और अर्जेंटीना आमने-सामने होंगी। हालांकि इस हाई-वोल्टेज मुकाबले से पहले एक और दिलचस्प बात चर्चा में है। मैच में न तो इंग्लैंड का कोई रेफरी होगा और न ही अर्जेंटीना का। इसके पीछे वजह दोनों देशों के बीच दशकों पुराना फॉकलैंड द्वीप (Falkland Islands) विवाद और FIFA की निष्पक्षता संबंधी नीति है। क्यों नहीं होंगे इंग्लैंड और अर्जेंटीना के रेफरी? FIFA लंबे समय से ऐसे मुकाबलों में विशेष सावधानी बरतता है, जहां दोनों देशों के बीच राजनीतिक या ऐतिहासिक विवाद रहे हों। इसी कारण पूरे टूर्नामेंट के दौरान किसी भी अंग्रेज रेफरी को अर्जेंटीना के मैचों में और किसी अर्जेंटीनी रेफरी को इंग्लैंड के मुकाबलों में नियुक्त नहीं किया गया। इसका उद्देश्य रेफरी की निष्पक्षता पर किसी भी तरह के सवाल या विवाद की संभावना को खत्म करना है। क्या है फॉकलैंड द्वीप विवाद? फॉकलैंड द्वीप दक्षिण अटलांटिक महासागर में स्थित एक द्वीप समूह है। इस पर ब्रिटेन का प्रशासनिक नियंत्रण है, जबकि अर्जेंटीना इसे इस्लास माल्विनास (Islas Malvinas) नाम से अपना क्षेत्र मानता है। साल 1982 में अर्जेंटीना ने इन द्वीपों पर सैन्य कब्जा कर लिया था, जिसके बाद ब्रिटेन और अर्जेंटीना के बीच 74 दिनों तक युद्ध चला। अंततः ब्रिटेन ने दोबारा इन द्वीपों पर नियंत्रण स्थापित कर लिया। हालांकि युद्ध समाप्त हुए कई दशक बीत चुके हैं, लेकिन दोनों देशों के बीच यह विवाद आज भी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। FIFA की रेफरी नियुक्ति नीति क्या कहती है? FIFA का मानना है कि किसी भी मैच में रेफरी की निष्पक्षता सर्वोपरि होती है। इसलिए ऐसे देशों के बीच मुकाबलों में उन देशों के अधिकारियों की नियुक्ति से बचा जाता है, जिनके बीच राजनीतिक, ऐतिहासिक या अन्य संवेदनशील विवाद रहे हों। इसी वजह से: इंग्लैंड के रेफरी अर्जेंटीना के किसी भी मैच में नियुक्त नहीं किए गए। अर्जेंटीना के रेफरी भी इंग्लैंड के मुकाबलों से दूर रखे गए। कौन-कौन से रेफरी हुए प्रभावित? इस नीति के चलते इंग्लैंड के अनुभवी रेफरी माइकल ओलिवर और एंथनी टेलर को अर्जेंटीना के मैचों में जिम्मेदारी नहीं दी गई। वहीं अर्जेंटीना के रेफरी फाकुंडो टेलो को भी केवल उन मुकाबलों में नियुक्त किया गया, जिनमें इंग्लैंड की टीम शामिल नहीं थी। कैसे चुने जाते हैं विश्व कप के रेफरी? विश्व कप में रेफरी नियुक्त करने की जिम्मेदारी FIFA के रेफरी विभाग की होती है। चयन प्रक्रिया में कई पहलुओं पर ध्यान दिया जाता है, जिनमें शामिल हैं: पूरे टूर्नामेंट में रेफरी का प्रदर्शन फिटनेस स्तर फैसलों की गुणवत्ता अनुशासन संभावित हितों का टकराव (Conflict of Interest) भू-राजनीतिक परिस्थितियां इन सभी पहलुओं का मूल्यांकन कर यह सुनिश्चित किया जाता है कि मैच पूरी तरह निष्पक्ष तरीके से संचालित हो। अन्य देशों पर भी लागू होती है यह नीति FIFA केवल इंग्लैंड और अर्जेंटीना के मामलों में ही नहीं, बल्कि अन्य राजनीतिक रूप से संवेदनशील देशों के बीच होने वाले मुकाबलों में भी इसी तरह की सावधानी बरतता है। इसके अलावा किसी भी रेफरी को अपने ही देश की टीम के मैच में नियुक्त नहीं किया जाता। सेमीफाइनल में भी जारी रहेगी यही व्यवस्था इंग्लैंड और अर्जेंटीना के बीच होने वाले सेमीफाइनल में भी दोनों देशों का कोई रेफरी मैदान पर नहीं होगा। ऐसे में इन देशों के रेफरी केवल टूर्नामेंट के अन्य मुकाबलों में ही अपनी सेवाएं दे सकते हैं।
फीफा विश्व कप 2026 के क्वार्टर फाइनल में फ्रांस के हाथों 2-0 की हार के बाद मोरक्को के मुख्य कोच मोहम्मद ओआहबी ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि यह हार उनकी टीम के लिए सीख साबित होगी और अगली बार जब विश्व कप में फ्रांस का सामना होगा तो मोरक्को उसे बाहर करने की पूरी कोशिश करेगा। फ्रांस ने बोस्टन के गिलेट स्टेडियम में खेले गए मुकाबले में दूसरे हाफ में किलियन एम्बाप्पे और उस्मान डेम्बेले के गोल की बदौलत जीत दर्ज कर सेमीफाइनल में जगह बनाई। इसके साथ ही लगातार दूसरे विश्व कप में फ्रांस ने मोरक्को को 2-0 के अंतर से टूर्नामेंट से बाहर किया। 2030 विश्व कप पर टिकी हैं नजरें हार के बावजूद ओआहबी ने भविष्य को लेकर सकारात्मक रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि टीम अब अगले विश्व कप की तैयारी करेगी, जिसकी मेजबानी मोरक्को, स्पेन और पुर्तगाल संयुक्त रूप से करेंगे। उन्होंने कहा, "फ्रांस दुनिया की सर्वश्रेष्ठ टीमों में से एक है। वे पिछले दो विश्व कप के फाइनल तक पहुंचे हैं और उनके पास शानदार खिलाड़ी हैं। आज वे हमसे बेहतर थे, लेकिन हमें यकीन है कि अगले चार वर्षों में हम और मजबूत होकर लौटेंगे और उन्हें हराने की कोशिश करेंगे।" हार से निराश, लेकिन खिलाड़ियों के प्रदर्शन पर भरोसा कोच ने स्वीकार किया कि टीम इस हार से निराश है, क्योंकि उनका लक्ष्य सिर्फ क्वार्टर फाइनल तक पहुंचना नहीं बल्कि विश्व कप जीतना था। उन्होंने कहा कि खिलाड़ियों ने मैदान पर जीत के लिए हरसंभव प्रयास किया और पूरी प्रतिबद्धता के साथ मुकाबला खेला। हालांकि, फ्रांस की गुणवत्ता ने आखिरकार अंतर पैदा कर दिया। अब अफ्रीका कप ऑफ नेशंस पर रहेगा फोकस मोहम्मद ओआहबी ने बताया कि फिलहाल टीम का अगला बड़ा लक्ष्य अफ्रीका कप ऑफ नेशंस (AFCON) होगा, जिसका आयोजन अगले वर्ष केन्या, युगांडा और तंजानिया में होना है। उनका कहना है कि टीम पहले इस टूर्नामेंट में बेहतर प्रदर्शन करने और खिताब जीतने पर ध्यान देगी, जिसके बाद 2030 विश्व कप की तैयारियां तेज की जाएंगी। युवा खिलाड़ियों से भविष्य की उम्मीद कोच ने कहा कि मोरक्को के पास प्रतिभाशाली युवा खिलाड़ियों की मजबूत फौज है और फुटबॉल संघ भी लगातार टीम के विकास पर काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि विश्व कप का यह अनुभव युवा खिलाड़ियों के लिए काफी महत्वपूर्ण रहेगा और इससे भविष्य में टीम और मजबूत बनकर उभरेगी। फ्रांस की ताकत को भी सराहा ओआहबी ने फ्रांस के प्रदर्शन की तारीफ करते हुए कहा कि उनकी टीम शुरुआत से ही दबाव बना रही थी और वह पहले भी गोल कर सकती थी। उन्होंने माना कि फ्रांस ने बेहतर फुटबॉल खेली, लेकिन मोरक्को के खिलाड़ी पूरे मैच में संघर्ष करते रहे और अंत तक मुकाबले में बने रहने की कोशिश की। कोच ने भरोसा जताया कि टीम सितंबर में फिर से एकजुट होकर नई ऊर्जा के साथ तैयारी शुरू करेगी और आने वाले वर्षों में बड़े मंच पर बेहतर प्रदर्शन करने का प्रयास करेगी।
FIFA विश्व कप के राउंड ऑफ-16 मुकाबले में अर्जेंटीना से 3-2 की नाटकीय हार के बाद मिस्र के मुख्य कोच होसम हसन ने FIFA और मैच अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका दावा है कि विश्व फुटबॉल की सर्वोच्च संस्था चाहती थी कि लियोनेल मेसी और मौजूदा चैंपियन अर्जेंटीना टूर्नामेंट में आगे बढ़ें। हालांकि, इन आरोपों का समर्थन करने वाला कोई आधिकारिक प्रमाण सामने नहीं आया है और FIFA की ओर से भी इस पर कोई प्रतिक्रिया जारी नहीं की गई है। 2-0 की बढ़त के बावजूद हार गया मिस्र मुकाबले में मिस्र ने शानदार शुरुआत करते हुए 2-0 की बढ़त बना ली थी और लंबे समय तक मैच पर नियंत्रण बनाए रखा। लेकिन अंतिम चरण में अर्जेंटीना ने शानदार वापसी करते हुए क्रिस्टियन रोमेरो, लियोनेल मेसी और एंजो फर्नांडीज के गोल की बदौलत 13 मिनट के भीतर तीन गोल दाग दिए और 3-2 से जीत दर्ज कर क्वार्टर फाइनल में जगह बना ली। VAR फैसलों पर जताई नाराजगी हार के बाद होसम हसन ने कहा कि उनकी टीम ने खेल के अधिकांश हिस्से में बेहतर प्रदर्शन किया, लेकिन कुछ फैसलों ने मैच की दिशा बदल दी। उनके अनुसार, सबसे बड़ा विवाद 59वें मिनट में हुआ जब मोस्तफा ज़िको का गोल VAR समीक्षा के बाद रद्द कर दिया गया। इसके अलावा उन्होंने आरोप लगाया कि मोहम्मद सलाह को पेनल्टी नहीं मिली और अर्जेंटीना के विजयी गोल से पहले फाउल होने के बावजूद VAR ने हस्तक्षेप नहीं किया। 'मेसी को टूर्नामेंट में बनाए रखना चाहते थे' पोस्ट-मैच प्रेस कॉन्फ्रेंस में होसम हसन ने कहा कि उन्हें लगता है कि मैच का परिणाम केवल मैदान पर हुए प्रदर्शन से तय नहीं हुआ। उन्होंने आरोप लगाया कि संभव है FIFA और अन्य बाहरी कारक चाहते थे कि मौजूदा विश्व चैंपियन और लियोनेल मेसी प्रतियोगिता में बने रहें। हालांकि उन्होंने अपने दावे के समर्थन में कोई सबूत पेश नहीं किया। 'अब कभी वर्ल्ड कप नहीं देखूंगा' मैच के बाद एक टीवी इंटरव्यू में मिस्र के कोच ने अपनी नाराजगी दोहराते हुए कहा कि उन्हें यह जीत अर्जेंटीना की "अयोग्य जीत" लगी। उन्होंने यह भी कहा कि अपने देश लौटने के बाद वह दोबारा विश्व कप नहीं देखना चाहेंगे क्योंकि उनके अनुसार प्रतियोगिता में उन्हें न्याय नहीं मिला। FIFA कर सकता है टिप्पणी की समीक्षा होसम हसन के बयानों के बाद अब यह मामला चर्चा का विषय बन गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, FIFA उनके पोस्ट-मैच बयानों की समीक्षा कर सकता है और यदि आवश्यक हुआ तो अनुशासनात्मक कार्रवाई पर भी विचार किया जा सकता है।
FIFA विश्व कप के राउंड ऑफ-16 में अर्जेंटीना ने मिस्र के खिलाफ शानदार वापसी करते हुए 3-2 से जीत दर्ज की। मुकाबले के बाद सबसे भावुक पल तब देखने को मिला जब कप्तान लियोनेल मेसी की आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े। अंतिम सीटी बजते ही साथी खिलाड़ियों ने उन्हें गले लगाया और बाद में कंधों पर उठाकर उनकी शानदार कप्तानी और प्रदर्शन का सम्मान किया। 2-0 से पिछड़ने के बाद बदली मैच की तस्वीर करीब 80 मिनट तक ऐसा लग रहा था कि मौजूदा विश्व चैंपियन अर्जेंटीना टूर्नामेंट से बाहर हो जाएगी। टीम 2-0 से पीछे थी और मेसी पहले हाफ में पेनल्टी भी चूक चुके थे। लेकिन अंतिम 13 मिनट में अर्जेंटीना ने शानदार खेल दिखाया। क्रिस्टियन रोमेरो, लियोनेल मेसी और एंजो फर्नांडीज के गोल की बदौलत टीम ने 3-2 से यादगार जीत हासिल कर क्वार्टर फाइनल में जगह बना ली। पेनल्टी मिस करने के बाद भी नहीं हारी उम्मीद पहले हाफ में मेसी की पेनल्टी मिस होने के बाद टीम मुश्किल में आ गई थी। इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और लगातार गेंद मांगते रहे। उन्होंने पहले अर्जेंटीना के लिए वापसी की शुरुआत कराई, फिर बराबरी का गोल दागा। आखिरकार एंजो फर्नांडीज ने स्टॉपेज टाइम में विजयी गोल कर टीम को अगले दौर में पहुंचा दिया। कोच स्कालोनी भी हुए भावुक मैच के बाद अर्जेंटीना के मुख्य कोच लियोनेल स्कालोनी भी अपनी भावनाओं पर काबू नहीं रख सके। उन्होंने कहा कि यह टीम कभी हार नहीं मानती और खिलाड़ियों का जज्बा ही उनकी सबसे बड़ी ताकत है। स्कालोनी ने मेसी की तारीफ करते हुए कहा कि पेनल्टी चूकने के बाद भी उन्होंने गेंद मांगना नहीं छोड़ा और वही उनकी महानता की पहचान है। मेसी ने टीम को दिया जीत का श्रेय मैच के बाद मेसी ने व्यक्तिगत प्रदर्शन के बजाय पूरी टीम की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह जीत पूरे समूह की मेहनत का परिणाम है और टीम ने एक बार फिर साबित किया कि वह आखिरी मिनट तक लड़ना जानती है। उन्होंने प्रशंसकों का भी धन्यवाद दिया और उम्मीद जताई कि टीम आगे भी इसी तरह का प्रदर्शन जारी रखेगी। साथियों ने कंधों पर उठाकर किया सम्मान जीत के बाद अर्जेंटीना के खिलाड़ियों ने मैदान पर एकजुट होकर जश्न मनाया। सभी खिलाड़ियों ने मेसी को घेर लिया और फिर उन्हें कंधों पर उठाकर सम्मान दिया। यह दृश्य टीम के भीतर मजबूत एकता, विश्वास और अपने कप्तान के प्रति सम्मान का प्रतीक बन गया। अर्जेंटीना अब इस शानदार जीत के साथ विश्व कप के क्वार्टर फाइनल में पहुंच चुकी है और खिताब बचाने की उसकी उम्मीदें बरकरार हैं।
वॉशिंगटन/सिएटल: फीफा विश्व कप 2026 के बीच अमेरिका के स्टार स्ट्राइकर फोलारिन बालोगुन को मिले रेड कार्ड को लेकर बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा फैसले पर सवाल उठाने के बाद फीफा ने रेड कार्ड की समीक्षा की और उसे वापस ले लिया। अब बालोगुन बेल्जियम के खिलाफ राउंड ऑफ-16 मुकाबले में खेल सकेंगे। ट्रंप ने फैसले को बताया अन्यायपूर्ण डोनाल्ड ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से कहा कि फोलारिन बालोगुन अमेरिकी टीम के सबसे महत्वपूर्ण खिलाड़ियों में से एक हैं और उन्हें अगले मैच से बाहर करना उचित नहीं है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में ट्रंप ने कहा कि शुरुआत में उन्हें रेड कार्ड के नियमों की जानकारी नहीं थी, लेकिन जब पता चला कि इसके कारण खिलाड़ी अगले मैच में नहीं खेल सकता, तो उन्हें यह फैसला अनुचित लगा। उन्होंने कहा कि मैदान पर यह जानबूझकर किया गया फाउल नहीं था, बल्कि दोनों खिलाड़ी तेज रफ्तार में एक-दूसरे से टकरा गए थे। फीफा से की फैसले की समीक्षा की मांग ट्रंप ने बताया कि उन्होंने इस मामले को लेकर फीफा अधिकारियों से संपर्क किया और रेड कार्ड की समीक्षा करने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि किसी खिलाड़ी को उस मैच के लिए दंडित करना उचित नहीं है, जो अभी खेला ही नहीं गया। उनके अनुसार, ऐसा निर्णय खेल भावना के अनुरूप नहीं है। फीफा ने हटाया निलंबन फीफा द्वारा मामले की समीक्षा के बाद फोलारिन बालोगुन का रेड कार्ड रद्द कर दिया गया। इसके साथ ही उन पर लगाया गया एक मैच का प्रतिबंध भी समाप्त हो गया है। अब 25 वर्षीय स्ट्राइकर सोमवार को सिएटल में बेल्जियम के खिलाफ होने वाले राउंड ऑफ-16 मुकाबले में अमेरिकी टीम का हिस्सा होंगे। अमेरिका के लिए अहम खिलाड़ी फोलारिन बालोगुन इस विश्व कप में अमेरिका के सबसे प्रभावशाली खिलाड़ियों में शामिल रहे हैं। उन्होंने अब तक तीन गोल किए हैं और टीम के आक्रमण की सबसे मजबूत कड़ी माने जा रहे हैं। उनकी वापसी अमेरिकी मुख्य कोच मौरिसियो पोचेटिनो के लिए बड़ी राहत मानी जा रही है। बेल्जियम फुटबॉल संघ ने जताई आपत्ति फीफा के फैसले पर बेल्जियम फुटबॉल संघ (RBFA) ने नाराजगी व्यक्त की है। संघ ने कहा कि अमेरिका-बेल्जियम मुकाबले से ठीक पहले रेड कार्ड हटाए जाने का फैसला हैरान करने वाला है और वह अपने हितों की रक्षा के लिए उपलब्ध सभी कानूनी विकल्पों पर विचार करेगा। टेड क्रूज ने किया ट्रंप का समर्थन अमेरिकी सीनेटर टेड क्रूज ने भी ट्रंप के रुख का समर्थन किया। उन्होंने रेड कार्ड को "बेतुका फैसला" बताते हुए कहा कि राष्ट्रपति ने अमेरिकी टीम और उसके खिलाड़ियों के हितों की रक्षा के लिए सही कदम उठाया। खेल के साथ राजनीति पर भी छिड़ी बहस फोलारिन बालोगुन के रेड कार्ड को रद्द किए जाने के बाद विश्व कप के बीच खेल और राजनीति के संबंधों पर नई बहस शुरू हो गई है। आलोचकों का मानना है कि इस फैसले ने रेफरी के निर्णयों की स्वतंत्रता और खेल प्रशासन की निष्पक्षता को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं, जबकि समर्थकों का कहना है कि समीक्षा प्रक्रिया के जरिए एक गलत निर्णय को सुधारा गया है।
स्पेन से हार के बाद भावुक हुए रोनाल्डो, बोले- जल्दबाजी में कोई फैसला नहीं करूंगा Cristiano Ronaldo ने पुष्टि कर दी है कि FIFA World Cup 2026 उनके करियर का आखिरी विश्व कप था। हालांकि, उन्होंने फिलहाल पुर्तगाल की राष्ट्रीय टीम से संन्यास लेने का ऐलान नहीं किया है। 41 वर्षीय दिग्गज फुटबॉलर ने कहा कि वह अपने अंतरराष्ट्रीय भविष्य पर फैसला लेने से पहले परिवार के साथ समय बिताएंगे और शांत मन से सोच-विचार करेंगे। स्पेन के खिलाफ हार के साथ खत्म हुआ विश्व कप सफर Portugal का विश्व कप अभियान प्री-क्वार्टर फाइनल (राउंड ऑफ 16) में Spain के खिलाफ 1-0 की हार के साथ समाप्त हो गया। मुकाबले में दूसरे हाफ के स्टॉपेज टाइम में Mikel Merino ने निर्णायक गोल कर स्पेन को क्वार्टर फाइनल में पहुंचा दिया। मैच के बाद रोनाल्डो ने कहा कि टीम ने पूरी कोशिश की, लेकिन किस्मत उनके साथ नहीं थी। उन्होंने कहा, "मैं दुखी हूं कि मेरा विश्व कप सफर इस तरह खत्म हुआ। मैंने अपना सर्वश्रेष्ठ दिया और पूरी ईमानदारी से खेला। यह मेरा आखिरी विश्व कप था, लेकिन अभी मैं अपने भविष्य पर कोई जल्दबाजी में फैसला नहीं लूंगा।" विश्व कप खत्म, लेकिन अंतरराष्ट्रीय करियर अभी नहीं रोनाल्डो ने साफ किया कि विश्व कप में उनका सफर जरूर समाप्त हो गया है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि उन्होंने पुर्तगाल के लिए अपना आखिरी मैच खेल लिया है। उन्होंने कहा कि भावनाओं में बहकर फैसला लेना सही नहीं होगा और वह कुछ समय बाद तय करेंगे कि राष्ट्रीय टीम के लिए खेलना जारी रखना है या नहीं। 'स्पेन को किस्मत का साथ मिला' हार के बाद रोनाल्डो ने माना कि मुकाबला बेहद करीबी था और दोनों टीमों के जीतने की बराबर संभावना थी। उनके अनुसार, "स्पेन को थोड़ा भाग्य का साथ मिला। यह ऐसा मैच था जो किसी भी तरफ जा सकता था।" छठा विश्व कप, लेकिन अधूरा रहा सबसे बड़ा सपना रोनाल्डो ने अपने करियर में रिकॉर्ड की बराबरी करते हुए छठा FIFA World Cup खेला। इस टूर्नामेंट में उन्होंने तीन गोल भी किए, लेकिन वह विश्व कप जीतने का अपना सबसे बड़ा सपना पूरा नहीं कर सके। विश्व फुटबॉल के सबसे सफल खिलाड़ियों में गिने जाने वाले रोनाल्डो के नाम कई व्यक्तिगत और टीम उपलब्धियां हैं, लेकिन विश्व कप ट्रॉफी उनके करियर की सबसे बड़ी अधूरी उपलब्धि बनकर रह गई। याद दिलाई पुर्तगाल की ऐतिहासिक सफलताएं रोनाल्डो ने अपने अंतरराष्ट्रीय करियर की उपलब्धियों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उनके नेतृत्व में पुर्तगाल ने पहली बार बड़े अंतरराष्ट्रीय खिताब जीते। उन्होंने कहा कि टीम ने UEFA Euro 2016 का खिताब जीता और इसके बाद UEFA Nations League में 2019 और 2025 में भी चैंपियन बनी। रोनाल्डो ने कहा, "मैंने पुर्तगाल के लिए तीन बड़े खिताब जीते। मेरे आने से पहले टीम ने कोई बड़ा खिताब नहीं जीता था। मेरे लिए 2016 की यूरोपीय चैम्पियनशिप विश्व कप जितनी ही महत्वपूर्ण है।" अभी बाकी है अंतिम फैसला फिलहाल इतना तय हो गया है कि रोनाल्डो का विश्व कप अध्याय समाप्त हो चुका है। हालांकि, उनके अंतरराष्ट्रीय करियर का अंत अभी तय नहीं है। उन्होंने संकेत दिए हैं कि वह जल्दबाजी में संन्यास का फैसला नहीं करेंगे और परिवार के साथ समय बिताने के बाद ही अपने अगले कदम की घोषणा करेंगे।
FIFA World Cup 2026 के प्री-क्वार्टर फाइनल में सह-मेजबान United States को Belgium के खिलाफ 4-1 से करारी हार का सामना करना पड़ा। मुकाबले से पहले सबसे ज्यादा चर्चा स्ट्राइकर Folarin Balogun की विवादित वापसी को लेकर थी, लेकिन मैदान पर वह उम्मीदों पर खरे नहीं उतर सके। इस जीत के साथ बेल्जियम ने क्वार्टर फाइनल में जगह बना ली, जहां उसका सामना Spain से होगा। विवाद के बीच मैदान पर उतरे बालोगुन बालोगुन को पिछले दौर में Bosnia and Herzegovina के खिलाफ मुकाबले में रेड कार्ड मिला था, जिसके कारण उन्हें एक मैच का स्वत: निलंबन झेलना था। हालांकि, मैच से पहले FIFA ने उनके निलंबन को एक वर्ष के लिए स्थगित कर दिया, जिससे वह बेल्जियम के खिलाफ खेलने के पात्र हो गए। इस फैसले ने टूर्नामेंट के दौरान बड़ा विवाद खड़ा कर दिया। मैदान पर नहीं दिखा असर टूर्नामेंट में पहले ही तीन गोल कर चुके बालोगुन से अमेरिका को बड़ी उम्मीदें थीं, लेकिन बेल्जियम की मजबूत रक्षापंक्ति ने उन्हें पूरे मैच में लगभग बेअसर बनाए रखा। पहले हाफ में उन्होंने एक फ्री-किक दिलाई, जिस पर Malik Tillman ने शानदार गोल कर स्कोर 1-1 से बराबर किया। इसके अलावा बालोगुन कोई बड़ा प्रभाव नहीं छोड़ सके। उनका सबसे अच्छा मौका 82वें मिनट में आया, लेकिन बेल्जियम के गोलकीपर Thibaut Courtois ने शानदार बचाव कर दिया। अतिरिक्त समय में उन्हें बदलकर Haji Wright को मैदान पर उतारा गया। बेल्जियम ने पूरी तरह बनाया दबदबा बेल्जियम की ओर से Charles De Ketelaere ने शानदार प्रदर्शन करते हुए टीम को बढ़त दिलाई। इसके बाद अमेरिकी गोलकीपर Matt Freese की एक बड़ी गलती का फायदा उठाकर बेल्जियम ने अपनी बढ़त और मजबूत कर ली। अंत में Romelu Lukaku ने गोल कर 4-1 की जीत पर मुहर लगा दी। डोनाल्ड ट्रंप के हस्तक्षेप से बढ़ा था विवाद बालोगुन की वापसी इसलिए भी चर्चा में रही क्योंकि अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया कि उन्होंने Gianni Infantino से इस मामले की समीक्षा करने का अनुरोध किया था। ट्रंप का कहना था कि रेड कार्ड का फैसला गलत था और यह फाउल भी नहीं था। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने FIFA पर फैसला बदलने का दबाव नहीं बनाया। FIFA ने किया बचाव, UEFA ने जताई नाराजगी FIFA अध्यक्ष जियानी इन्फैन्टिनो ने कहा कि बालोगुन के मामले में पूरी न्यायिक प्रक्रिया स्वतंत्र रूप से अपनाई गई और नियमों के अनुसार फैसला लिया गया। दूसरी ओर, UEFA ने इस फैसले की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि स्वत: निलंबन हटाना प्रतियोगिता की निष्पक्षता पर सवाल खड़ा करता है। वहीं Royal Belgian Football Association ने भी मैच से पहले बालोगुन की पात्रता को चुनौती दी थी, लेकिन FIFA ने उसकी अपील खारिज कर दी। सोशल मीडिया पर भी हुआ तंज मैच जीतने के बाद बेल्जियम टीम ने सोशल मीडिया पर Romelu Lukaku की जश्न मनाते हुए तस्वीर साझा की और उसके साथ लिखा— "Overturn this." इसे बालोगुन के निलंबन हटाने वाले फैसले पर तंज के रूप में देखा गया। तीन गोल के साथ खत्म हुआ टूर्नामेंट हालांकि अमेरिका टूर्नामेंट से बाहर हो गया, लेकिन बालोगुन ने विश्व कप में तीन गोल किए। इस प्रदर्शन के साथ उन्होंने Landon Donovan के 2010 विश्व कप के रिकॉर्ड की बराबरी की। अमेरिका के लिए एक विश्व कप में सबसे ज्यादा चार गोल करने का रिकॉर्ड अब भी Bert Patenaude के नाम दर्ज है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। अमेरिका, कनाडा और मैक्सिको की मेजबानी में खेले जा रहे फीफा वर्ल्ड कप 2026 में जहां मैदान पर रोमांचक मुकाबले देखने को मिल रहे हैं, वहीं भीषण गर्मी भी खिलाड़ियों के लिए बड़ी चुनौती बनकर सामने आई है। कई मैचों के दौरान तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच गया, जबकि कुछ स्थानों पर यह 43 डिग्री सेल्सियस के पार भी दर्ज किया गया। ऐसे हालात में खिलाड़ियों को हीट स्ट्रेस और थकान से बचाने के लिए टीमों ने अत्याधुनिक 'क्लाइमाकूल सिस्टम' अपनाया है, जिसमें कूलिंग वेस्ट, इंसुलेटेड जैकेट और कूलिंग ओवरबूट जैसी तकनीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है। मैदान पर गर्मी से बचाने में मददगार 'कूलिंग वेस्ट' रविवार को फिलाडेल्फिया के लिंकन फाइनेंशियल फील्ड में फ्रांस और पराग्वे के बीच खेले गए प्री-क्वार्टर फाइनल मुकाबले के दौरान तापमान 43.3 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। ऐसे हालात को देखते हुए फीफा ने खिलाड़ियों के लिए हाइड्रेशन ब्रेक की व्यवस्था की है। वहीं कई टीमों ने मैच से पहले और हाफ टाइम के दौरान खिलाड़ियों को ठंडा रखने के लिए कूलिंग वेस्ट का इस्तेमाल किया। इस वेस्ट के अंदर विशेष प्रकार का जेल भरा होता है, जिसे उपयोग से पहले फ्रीज किया जाता है। खिलाड़ी जब इसे पहनते हैं तो यह धीरे-धीरे शरीर की अतिरिक्त गर्मी को सोखता है और शरीर के तापमान को नियंत्रित रखने में मदद करता है। विशेषज्ञों के अनुसार यह तकनीक शरीर के आंतरिक तापमान को लगभग 0.5 डिग्री सेल्सियस और त्वचा के तापमान को करीब 13 डिग्री सेल्सियस तक कम कर सकती है। जर्सी और जूतों में भी हाई-टेक बदलाव सिर्फ कूलिंग वेस्ट ही नहीं, खिलाड़ियों की जर्सियों में भी माइक्रो-वेंटिलेशन तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। यह तकनीक पसीने को तेजी से बाहर निकालती है और शरीर में हवा का बेहतर प्रवाह बनाए रखती है, जिससे खिलाड़ी लंबे समय तक सहज महसूस करते हैं। इसके अलावा खिलाड़ियों के जूतों पर विशेष कूलिंग ओवरबूट लगाए जा रहे हैं। इनका उद्देश्य पैरों की गर्मी और सूजन को कम करना है। दावा किया जा रहा है कि इन ओवरबूट्स की मदद से केवल सात मिनट में पैरों का तापमान करीब दो डिग्री सेल्सियस तक घटाया जा सकता है, जिससे रिकवरी भी तेज होती है। फॉर्मूला-1 से फुटबॉल तक पहुंची तकनीक दिलचस्प बात यह है कि कूलिंग वेस्ट और अन्य उपकरणों को शुरुआत में फॉर्मूला-1 ड्राइवरों के लिए विकसित किया गया था। अब इन्हें फुटबॉल में भी सफलतापूर्वक अपनाया जा रहा है। टीमें इनका उपयोग मैच से पहले, हाफ टाइम और ट्रेनिंग सत्रों के दौरान खिलाड़ियों की शारीरिक क्षमता बनाए रखने के लिए कर रही हैं। जलवायु परिवर्तन ने बढ़ाई चुनौती विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण दुनिया भर में खेल आयोजनों के दौरान अत्यधिक गर्मी अब बड़ी चुनौती बनती जा रही है। ऐसे में फीफा वर्ल्ड कप 2026 में खिलाड़ियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए मेडिकल प्रोटोकॉल, हाइड्रेशन ब्रेक और आधुनिक कूलिंग तकनीकों की भूमिका पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। इन उपायों की बदौलत खिलाड़ी भीषण गर्मी के बावजूद अपनी फिटनेस और प्रदर्शन को बेहतर बनाए रखने में सफल हो रहे हैं।
सिएटल, एजेंसियां। फीफा विश्व कप 2026 के राउंड ऑफ 16 में स्पेन के खिलाफ होने वाले अहम मुकाबले से पहले पुर्तगाल के कप्तान Cristiano Ronaldo ने आलोचकों और पत्रकारों पर तीखा हमला बोला। 41 वर्षीय स्टार फुटबॉलर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि पिछले 23 वर्षों से लोग उन्हें "खत्म" करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन वे आज भी मजबूती से मैदान में डटे हुए हैं। रोनाल्डो ने कहा रोनाल्डो ने कहा, "आप लोग 23 साल से मुझे खत्म करने की कोशिश कर रहे हैं। अब तक समझ जाना चाहिए कि यह बेकार है, लेकिन फिर भी कोशिश जारी है।" उन्होंने माना कि उम्र के साथ उनके खेल में बदलाव आया है, लेकिन वह अब भी टीम के लिए अहम योगदान दे रहे हैं। इस विश्व कप में उनके नाम तीन गोल दर्ज हैं, जिनमें उज्बेकिस्तान के खिलाफ दो और क्रोएशिया के खिलाफ एक पेनल्टी गोल शामिल है। "मैं कब रुकूंगा, यह मैं तय करूंगा, आप नहीं" प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जब उनसे लगातार संन्यास और भविष्य को लेकर सवाल पूछे गए तो रोनाल्डो नाराज दिखे। उन्होंने दो टूक कहा, "मैं कब रुकूंगा, यह मैं तय करूंगा, आप नहीं।" उन्होंने मुस्कुराते हुए एक पत्रकार की ओर इशारा कर कहा कि उन्हें लोगों के चेहरे अच्छी तरह याद रहते हैं और वह जानते हैं कि कौन उन्हें पसंद नहीं करता। रोनाल्डो ने कहा भावुक अंदाज में रोनाल्डो ने कहा कि उन्होंने फुटबॉल और जिंदगी दोनों में अपना सब कुछ झोंक दिया है। उनके मुताबिक, स्पेन के खिलाफ मैच का नतीजा चाहे जो भी हो, उन्हें अपने करियर पर कोई पछतावा नहीं होगा। उन्होंने यह भी कहा कि 40 वर्ष की उम्र के बाद मिली आलोचनाओं ने उन्हें और मजबूत बनाया है। स्पेन के खिलाफ मुकाबले को लेकर रोनाल्डो ने इसे कठिन चुनौती बताया। उन्होंने कहा कि जीत के लिए पुर्तगाल को आत्मविश्वास, कड़ी मेहनत और बहादुरी के साथ खेलना होगा। साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि विश्व कप जीतने या हारने से उनकी पहचान नहीं बदलने वाली, क्योंकि उन्होंने हमेशा अपना शत-प्रतिशत दिया है।
नई दिल्ली: फीफा विश्व कप 2026 में अनुभवी खिलाड़ियों का शानदार प्रदर्शन लगातार सुर्खियां बटोर रहा है। इसी कड़ी में बोस्निया-हर्जेगोविना के कप्तान एडिन जेको ने विश्व फुटबॉल के इतिहास में एक और यादगार उपलब्धि अपने नाम कर ली है। 39 वर्षीय स्टार स्ट्राइकर ने अमेरिका के खिलाफ राउंड ऑफ-32 मुकाबले में शुरुआती एकादश का हिस्सा बनते ही पुरुष फीफा विश्व कप के नॉकआउट चरण में खेलने वाले सबसे उम्रदराज़ आउटफील्ड खिलाड़ी बनने का रिकॉर्ड अपने नाम दर्ज कराया। यह उपलब्धि केवल एक व्यक्तिगत रिकॉर्ड नहीं, बल्कि उनकी बेहतरीन फिटनेस, अनुशासन, अनुभव और खेल के प्रति समर्पण का भी प्रतीक मानी जा रही है। दो दशक से अधिक लंबे अंतरराष्ट्रीय करियर में कई ऐतिहासिक उपलब्धियां हासिल कर चुके जेको ने एक बार फिर साबित कर दिया कि बड़े मंच पर अनुभव की अहमियत आज भी बरकरार है। अंतरराष्ट्रीय करियर में जुड़ा एक और स्वर्णिम अध्याय एडिन जेको लंबे समय से बोस्निया-हर्जेगोविना फुटबॉल टीम के सबसे भरोसेमंद खिलाड़ियों में शामिल रहे हैं। कप्तान के रूप में उन्होंने वर्षों तक टीम का नेतृत्व किया और कई महत्वपूर्ण मुकाबलों में अपनी छाप छोड़ी। विश्व कप 2026 में भी उन्होंने अपनी टीम का नेतृत्व करते हुए एक ऐसा रिकॉर्ड बनाया, जिसे फुटबॉल इतिहास में लंबे समय तक याद रखा जाएगा। 39 वर्ष की उम्र में विश्व कप जैसे सबसे बड़े मंच पर नॉकआउट मुकाबले में शुरुआती एकादश का हिस्सा बनना इस बात का प्रमाण है कि फिटनेस, मानसिक मजबूती और पेशेवर प्रतिबद्धता किसी भी खिलाड़ी के करियर को लंबा बना सकती है। अमेरिका के खिलाफ मुकाबले में अनुभव बना सबसे बड़ी ताकत बोस्निया-हर्जेगोविना के लिए अमेरिका के खिलाफ मुकाबला आसान नहीं था। हालांकि मैच का परिणाम अपनी जगह महत्वपूर्ण रहा, लेकिन जेको का मैदान पर उतरना ही अपने आप में एक ऐतिहासिक क्षण बन गया। उन्होंने यह दिखाया कि उम्र बढ़ने के बावजूद शीर्ष स्तर पर प्रतिस्पर्धा करना संभव है, यदि खिलाड़ी अपनी फिटनेस और प्रदर्शन को लगातार बनाए रखे। उनकी मौजूदगी ने युवा खिलाड़ियों के लिए भी एक प्रेरणादायक संदेश दिया कि मेहनत और अनुशासन के दम पर लंबे समय तक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेला जा सकता है। रिकॉर्ड पर जल्द मंडरा सकता है खतरा हालांकि जेको ने यह ऐतिहासिक उपलब्धि अपने नाम कर ली है, लेकिन यह रिकॉर्ड ज्यादा समय तक उनके पास रहे, इसकी संभावना कम मानी जा रही है। विश्व कप 2026 में अभी कई अनुभवी खिलाड़ी नॉकआउट चरण में अपनी टीमों के लिए खेल रहे हैं। यदि वे अपने अगले मुकाबले में शुरुआती एकादश में शामिल होते हैं, तो जेको का यह रिकॉर्ड टूट भी सकता है। इसके बावजूद उनका नाम विश्व कप इतिहास में हमेशा एक खास स्थान रखेगा, क्योंकि उन्होंने उम्र के इस पड़ाव पर भी दुनिया के सबसे बड़े फुटबॉल मंच पर अपनी उपयोगिता साबित की है। रोनाल्डो के बाद अब जेको के नाम नई उपलब्धि विश्व कप 2026 अनुभवी खिलाड़ियों के शानदार प्रदर्शन का गवाह बन रहा है। इससे पहले क्रिस्टियानो रोनाल्डो ने विश्व कप में मैच की शुरुआत करने वाले सबसे उम्रदराज़ आउटफील्ड खिलाड़ी बनने का रिकॉर्ड बनाया था। अब एडिन जेको ने नॉकआउट चरण में सबसे उम्रदराज़ आउटफील्ड खिलाड़ी के रूप में नया इतिहास रच दिया है। इन दोनों दिग्गजों की उपलब्धियां यह साबित करती हैं कि आधुनिक फुटबॉल में उम्र सफलता की बाधा नहीं है। सही फिटनेस, अनुभव और निरंतर मेहनत के दम पर खिलाड़ी लंबे समय तक विश्व स्तर पर अपनी पहचान बनाए रख सकते हैं।
नई दिल्ली: फीफा वर्ल्ड कप 2026 सिर्फ दुनिया की सर्वश्रेष्ठ फुटबॉल टीमों के बीच मुकाबला नहीं है, बल्कि यह प्रवास, पहचान, नागरिकता और पारिवारिक विरासत की भी एक अनोखी कहानी बनकर सामने आया है। इस बार के टूर्नामेंट में बड़ी संख्या में ऐसे खिलाड़ी हिस्सा ले रहे हैं, जिनका जन्म उस देश में नहीं हुआ है जिसकी राष्ट्रीय टीम की जर्सी पहनकर वे मैदान में उतर रहे हैं। टूर्नामेंट में शामिल कुल 1,248 खिलाड़ियों में से लगभग 290 खिलाड़ी ऐसे हैं, जो अपनी जन्मभूमि की बजाय अपने माता-पिता, दादा-दादी या पूर्वजों के देश का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। यानी विश्व कप का लगभग हर चौथा खिलाड़ी प्रवासी पृष्ठभूमि से जुड़ा हुआ है। यह आंकड़ा वैश्विक प्रवास और दोहरी पहचान के बढ़ते प्रभाव को भी दर्शाता है। फ्रांस और नीदरलैंड बने दुनिया के सबसे बड़े 'फुटबॉल एक्सपोर्टर' फीफा वर्ल्ड कप 2026 में सबसे अधिक खिलाड़ियों को दूसरे देशों की राष्ट्रीय टीमों तक पहुंचाने वाले देशों में फ्रांस और नीदरलैंड सबसे आगे हैं। आंकड़ों के अनुसार: फ्रांस में जन्मे 75 खिलाड़ी इस विश्व कप में अन्य देशों का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। नीदरलैंड में जन्मे 42 खिलाड़ी अलग-अलग राष्ट्रीय टीमों की ओर से खेल रहे हैं। इसके बाद जर्मनी के 23, इंग्लैंड के 21, बेल्जियम के 11, स्पेन के 11 और स्वीडन के 10 खिलाड़ी अन्य देशों की जर्सी पहनकर मैदान में उतर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इन देशों की मजबूत फुटबॉल अकादमियां, आधुनिक प्रशिक्षण व्यवस्था और युवा खिलाड़ियों के विकास पर विशेष ध्यान देने की वजह से यहां बड़ी संख्या में प्रतिभाएं तैयार होती हैं। हालांकि राष्ट्रीय टीम में सीमित स्थान होने के कारण कई खिलाड़ी अपने पारिवारिक मूल वाले देशों के लिए खेलने का विकल्प चुनते हैं। क्यूरासाओ और डीआर कांगो की टीमों में प्रवासी खिलाड़ियों का दबदबा इस विश्व कप में क्यूरासाओ और डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (DR Congo) प्रवासी खिलाड़ियों के सबसे बड़े उदाहरण बनकर सामने आए हैं। क्यूरासाओ की पूरी टीम ऐसे खिलाड़ियों से बनी है जिनका जन्म नीदरलैंड में हुआ। डीआर कांगो के 20 खिलाड़ी फ्रांस, बेल्जियम, इंग्लैंड और स्विट्जरलैंड जैसे देशों में जन्मे हैं। इसके अलावा: मोरक्को के 19 खिलाड़ी हैती के 16 खिलाड़ी अल्जीरिया के 15 खिलाड़ी केप वर्दे के 13 खिलाड़ी भी प्रवासी परिवारों से जुड़े हुए हैं। इन खिलाड़ियों ने अपने पूर्वजों के देशों का प्रतिनिधित्व करते हुए इन टीमों को अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल में नई पहचान दिलाई है। भारतीय मूल के चार खिलाड़ी भी विश्व कप में हालांकि भारतीय फुटबॉल टीम इस बार फीफा वर्ल्ड कप 2026 के लिए क्वालीफाई नहीं कर सकी, लेकिन भारतीय मूल के चार खिलाड़ी अलग-अलग देशों की ओर से टूर्नामेंट में हिस्सा ले रहे हैं। इनमें शामिल हैं: न्यूजीलैंड के सरप्रीत सिंह ऑस्ट्रेलिया के निशान वेलुपिल्लै डीआर कांगो के सैमुअल मूटूसामी कतर के तहसीन मोहम्मद जमशीद इन खिलाड़ियों की मौजूदगी भारतीय मूल के खिलाड़ियों की वैश्विक फुटबॉल में बढ़ती भागीदारी को भी दर्शाती है। आखिर क्यों बढ़ रही है यह प्रवृत्ति? फीफा के नियम खिलाड़ियों को यह अधिकार देते हैं कि यदि उनके माता-पिता, दादा-दादी या पारिवारिक जड़ें किसी अन्य देश से जुड़ी हैं, तो वे निर्धारित पात्रता पूरी करने पर उस देश की राष्ट्रीय टीम का प्रतिनिधित्व कर सकते हैं। इतिहास भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। फ्रांस और नीदरलैंड जैसे यूरोपीय देशों का कभी अफ्रीका, कैरेबियन और एशिया के कई क्षेत्रों पर औपनिवेशिक शासन रहा था। बेहतर शिक्षा, रोजगार और जीवन की तलाश में इन देशों के लाखों लोग 20वीं सदी के दौरान यूरोप जाकर बस गए। उनकी अगली पीढ़ी वहीं पैदा हुई, वहीं फुटबॉल सीखी और पेशेवर खिलाड़ी बनी। बाद में उनमें से कई खिलाड़ियों ने अपने जन्म के देश की बजाय अपने पूर्वजों के देश के लिए खेलने का फैसला किया। विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक फुटबॉल में यह रुझान आने वाले वर्षों में और बढ़ सकता है। वैश्वीकरण, दोहरी नागरिकता और अंतरराष्ट्रीय प्रवास ने राष्ट्रीय टीमों की तस्वीर को पहले से कहीं अधिक विविध और बहुसांस्कृतिक बना दिया है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। फीफा वर्ल्ड कप 2026 के राउंड ऑफ 32 में सह-मेजबान कनाडा ने दक्षिण अफ्रीका को 1-0 से हराकर इतिहास रच दिया। विश्व रैंकिंग में 30वें स्थान पर काबिज कनाडा पहली बार टूर्नामेंट के राउंड ऑफ-16 में पहुंचा है। लॉस एंजिल्स में खेले गए इस रोमांचक मुकाबले का फैसला स्टॉपेज टाइम में हुआ, जब कप्तान स्टीफन यूस्टाकियो ने शानदार गोल कर टीम को यादगार जीत दिलाई। अब अगले दौर में कनाडा का सामना नीदरलैंड्स और मोरक्को के बीच होने वाले मुकाबले की विजेता टीम से होगा। दोनों टीमों के बीच कांटे की टक्कर मैच की शुरुआत से ही दोनों टीमों ने आक्रामक खेल दिखाया। पहले हाफ में दक्षिण अफ्रीका ने कई अच्छे मौके बनाए, लेकिन कनाडा की मजबूत रक्षापंक्ति और गोलकीपर ने हर प्रयास नाकाम कर दिया। वहीं, दक्षिण अफ्रीका के गोलकीपर रोनवेन विलियम्स ने भी शानदार बचाव करते हुए कनाडा को बढ़त लेने से रोके रखा। दूसरे हाफ में कनाडा ने गेंद पर अधिक नियंत्रण बनाया और लगातार दबाव बनाए रखा। 75वें मिनट में स्टार खिलाड़ी अल्फोंसो डेविस के मैदान पर उतरने से टीम के हमलों में और धार आई। आखिरकार स्टॉपेज टाइम में यूस्टाकियो ने बॉक्स के बाहर उछलती गेंद को शानदार तरीके से नियंत्रित कर निचले कोने में गोल दागते हुए मैच का फैसला कर दिया। दक्षिण अफ्रीका सम्मानजनक विदाई के साथ बाहर हालांकि दक्षिण अफ्रीका की टीम हार के साथ टूर्नामेंट से बाहर हो गई, लेकिन उसने पहली बार नॉकआउट चरण में पहुंचकर इतिहास रचा। टीम के 74 वर्षीय मुख्य कोच ह्यूगो ब्रूस भी नॉकआउट चरण में टीम का नेतृत्व करने वाले सबसे उम्रदराज कोच बन गए। इससे पहले यह रिकॉर्ड उरुग्वे के पूर्व कोच ऑस्कर टबारेज के नाम था। कनाडा ने इस विश्व कप में अपना पहला अंक, पहली जीत और अब पहली बार अंतिम-16 में जगह बनाकर नई उपलब्धियां हासिल की हैं। टूर्नामेंट के राउंड ऑफ 32 का अगला मुकाबला जापान और ब्राजील के बीच खेला जाएगा, जिस पर फुटबॉल प्रेमियों की नजरें टिकी रहेंगी।
अर्लिंगटन: फुटबॉल की दुनिया के सबसे महान खिलाड़ियों में शुमार अर्जेंटीना के सुपरस्टार लियोनेल मेसी आज 24 जून को अपना 39वां जन्मदिन मना रहे हैं। उम्र के इस पड़ाव पर भी मेसी का प्रदर्शन दुनिया भर के फुटबॉल प्रेमियों को हैरान कर रहा है। फीफा विश्व कप 2026 में उनका शानदार फॉर्म जारी है और शुरुआती दो मुकाबलों में ही वह पांच गोल दाग चुके हैं। हाल ही में ऑस्ट्रिया के खिलाफ मुकाबले में मेसी ने दो गोल करके एक और ऐतिहासिक उपलब्धि अपने नाम कर ली। इसके साथ ही वह फीफा विश्व कप इतिहास में सबसे ज्यादा गोल करने वाले खिलाड़ी बन गए हैं। उनके नाम अब कुल 18 विश्व कप गोल दर्ज हो चुके हैं। इससे पहले उन्होंने अल्जीरिया के खिलाफ हैट्रिक लगाकर जर्मनी के महान स्ट्राइकर मिरोस्लाव क्लोज के 16 गोल के रिकॉर्ड की बराबरी की थी। 39 की उम्र में भी कायम है मेसी का जादू ऑस्ट्रिया के खिलाफ मुकाबले में मेसी ने एक बार फिर साबित कर दिया कि उम्र उनके खेल पर कोई असर नहीं डाल पाई है। टूर्नामेंट के शुरुआती दो मैचों में ही पांच गोल कर चुके मेसी की तारीफ करते हुए ऑस्ट्रिया के कोच राल्फ रंगनिक ने कहा कि 39 साल की उम्र में इस तरह का प्रदर्शन असाधारण है और यही उन्हें दुनिया के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों में सर्वश्रेष्ठ बनाता है। जन्मदिन पर भावुक भी हैं मेसी इस खास दिन पर मेसी भावनात्मक दौर से भी गुजर रहे हैं। उनके पिता अर्जेंटीना में अस्वस्थ हैं और वह अपने परिवार से लगभग 10 हजार किलोमीटर दूर विश्व कप में टीम की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। बावजूद इसके उन्होंने निजी चिंताओं को अपने खेल पर हावी नहीं होने दिया और अर्जेंटीना के अब तक हुए सभी पांच गोल खुद किए हैं। मेसी ने कहा, "विश्व कप का हर मैच कठिन है। कोई टीम आसानी से मौके नहीं देती, लेकिन मैं हर पल का आनंद ले रहा हूं।" पेनल्टी मिस करने के बाद शानदार वापसी ऑस्ट्रिया के खिलाफ मैच के शुरुआती मिनटों में मेसी पेनल्टी पर गोल करने से चूक गए थे। उनके शॉट के पोस्ट के बाहर जाने से स्टेडियम में सन्नाटा छा गया था। हालांकि, आठ बार के बैलन डी'ओर विजेता मेसी ने बाद में शानदार वापसी करते हुए दो गोल दागे और अपनी गलती की भरपाई कर दी। मेसी ने मैच के बाद कहा, "पेनल्टी मिस करने से मैं काफी नाराज था, लेकिन बाद में इसकी भरपाई करने में सफल रहा।" यही मेसी की सबसे बड़ी ताकत मानी जाती है। वह हर असफलता के बाद और अधिक मजबूती के साथ वापसी करते हैं। स्टॉपेज टाइम में भी दिखी वही पुरानी फुर्ती मैच के स्टॉपेज टाइम में मेसी ने अपना 18वां विश्व कप गोल दागा। पहले प्रयास को गोलकीपर ने रोक दिया, लेकिन मेसी ने शानदार नियंत्रण और ड्रिब्लिंग का प्रदर्शन करते हुए कई डिफेंडरों को छकाकर गेंद को जाल में पहुंचा दिया। 70 हजार दर्शकों से खचाखच भरे स्टेडियम में मौजूद अधिकांश अर्जेंटीनी समर्थकों ने इस पल का जोरदार जश्न मनाया। लियोनेल मेसी के बड़े रिकॉर्ड 6 विश्व कप (2006-2026) खेलने वाले पहले खिलाड़ी। लगातार 6 विश्व कप मैचों में गोल करने वाले इकलौते फुटबॉलर। 18 विश्व कप गोल के साथ ऑलटाइम टॉप स्कोरर। 26 गोल योगदान (18 गोल + 8 असिस्ट), जिससे उन्होंने पेले के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ा। 28 विश्व कप मैच खेलकर सबसे ज्यादा मैच खेलने वाले खिलाड़ी बने। विश्व कप में कुल 2489 मिनट मैदान पर बिताने का रिकॉर्ड। 12 मैन ऑफ द मैच अवॉर्ड जीतने वाले एकमात्र खिलाड़ी। दो बार गोल्डन बॉल (2014 और 2022) जीतने वाले दुनिया के अकेले फुटबॉलर। 128 सफल ड्रिब्लिंग के साथ डिएगो माराडोना के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ा। 39 साल की उम्र में भी लियोनेल मेसी जिस स्तर का प्रदर्शन कर रहे हैं, वह उन्हें सिर्फ एक महान खिलाड़ी नहीं बल्कि फुटबॉल इतिहास का 'अल्टीमेट किंग' साबित करता है।
Lionel Messi World Cup Record: फुटबॉल के महान खिलाड़ी लियोनेल मेसी ने एक और ऐतिहासिक उपलब्धि अपने नाम कर ली है। अर्जेंटीना के कप्तान ने फीफा वर्ल्ड कप 2026 में ऑस्ट्रिया के खिलाफ शानदार प्रदर्शन करते हुए दो गोल दागे और इसी के साथ विश्व कप इतिहास में सबसे ज्यादा गोल करने वाले खिलाड़ी बन गए। इससे पहले यह रिकॉर्ड जर्मनी के दिग्गज स्ट्राइकर मिरोस्लाव क्लोज के नाम था, जिन्होंने अपने करियर में वर्ल्ड कप में 16 गोल किए थे। अब मेसी 18 गोल के साथ उनसे आगे निकल चुके हैं। रिकॉर्ड टूटने पर मिरोस्लाव क्लोज ने दी बधाई अपना रिकॉर्ड टूटने के बाद मिरोस्लाव क्लोज ने मेसी की खुलकर सराहना की। उन्होंने कहा, "मैं हमेशा से कहता आया हूं कि मेसी का कोई मुकाबला नहीं है। वह दुनिया के सर्वश्रेष्ठ फुटबॉलर हैं। मुझे उनका मुश्किल परिस्थितियों से लड़ने और हर चुनौती से ऊपर उठने का तरीका बेहद पसंद है।" क्लोज ने यह भी कहा था कि अगर कोई खिलाड़ी उनका रिकॉर्ड तोड़ सकता है, तो वह लियोनेल मेसी ही हैं। छठा वर्ल्ड कप खेल रहे हैं मेसी लियोनेल मेसी साल 2006 से लगातार फीफा वर्ल्ड कप में हिस्सा ले रहे हैं और 2026 का टूर्नामेंट उनके करियर का छठा विश्व कप है। वर्ल्ड कप में मेसी का सफर 2006 – 1 गोल 2014 – 4 गोल 2022 – 7 गोल और अर्जेंटीना को चैंपियन बनाया 2026 – अब तक 5 गोल (अल्जीरिया के खिलाफ 3 और ऑस्ट्रिया के खिलाफ 2) मेसी का मौजूदा फॉर्म शानदार है और वह एक बार फिर अर्जेंटीना को विश्व विजेता बनाने के मिशन पर नजर आ रहे हैं। ऑस्ट्रिया के खिलाफ ऐसा रहा मुकाबला मैच के शुरुआती दौर में ऑस्ट्रिया के मजबूत डिफेंस ने अर्जेंटीना को काफी परेशान किया। हालांकि, 38वें मिनट में मेसी ने अपनी शानदार ड्रिब्लिंग और फिनिशिंग का नमूना पेश करते हुए पहला गोल दागा और टीम को बढ़त दिलाई। इसके बाद ऑस्ट्रिया ने बराबरी की भरपूर कोशिश की, लेकिन इंजरी टाइम के 95वें मिनट में मेसी ने दूसरा गोल करके मुकाबले पर अर्जेंटीना की पकड़ मजबूत कर दी और टीम को जीत दिलाई। मेसी के इस प्रदर्शन ने एक बार फिर साबित कर दिया कि उम्र सिर्फ एक संख्या है और महान खिलाड़ी बड़े मंच पर इतिहास रचने का हुनर रखते हैं।
नई दिल्ली, एजेंसियां। फीफा वर्ल्ड कप 2026 में ब्राजील के प्रशंसकों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। टीम के मुख्य कोच कार्लो एंसेलोटी ने पुष्टि की है कि स्टार फुटबॉलर नेमार स्कॉटलैंड के खिलाफ होने वाले ग्रुप-सी के अंतिम मुकाबले में खेलने के लिए उपलब्ध रहेंगे। चोट के कारण अब तक टूर्नामेंट का एक भी मैच नहीं खेलने वाले नेमार की वापसी ब्राजील के लिए बड़ी मजबूती मानी जा रही है। पिंडली की चोट के कारण थे बाहर 34 वर्षीय नेमार 17 मई को अपने क्लब सैंटोस के लिए खेलते समय दाहिने पैर की पिंडली में चोटिल हो गए थे। इसी वजह से वह विश्व कप में मोरक्को के खिलाफ ड्रॉ रहे पहले मैच और हैती पर 3-0 की जीत वाले मुकाबले में टीम का हिस्सा नहीं बन सके। हालांकि वह लगातार टीम के साथ बने रहे और पुनर्वास कार्यक्रम से गुजरते रहे। कोच ने दिया फिटनेस अपडेट हैती के खिलाफ जीत के बाद एंसेलोटी ने बताया कि नेमार पहले व्यक्तिगत ट्रेनिंग करेंगे और फिर पूरी टीम के साथ अभ्यास में शामिल होंगे। उन्होंने भरोसा जताया कि स्कॉटलैंड के खिलाफ होने वाले मुकाबले के लिए स्टार खिलाड़ी पूरी तरह उपलब्ध रहेंगे। राफिन्हा की चोट बनी चिंता ब्राजील को हैती के खिलाफ मैच में एक और झटका लगा, जब राफिन्हा हैमस्ट्रिंग की समस्या के कारण पहले हाफ में ही मैदान छोड़ने को मजबूर हो गए। कोच ने कहा कि उनकी चोट की गंभीरता का आकलन किया जा रहा है। ऐसे में आक्रमण की जिम्मेदारी नेमार पर अधिक रह सकती है। ब्राजील की बढ़ी उम्मीदें हैती के खिलाफ ब्राजील ने 3-0 की शानदार जीत दर्ज की, जिसमें मैथियस कुन्हा ने दो और विनीसियस जूनियर ने एक गोल किया। 129 अंतरराष्ट्रीय मैचों में 79 गोल कर चुके नेमार अब अपने चौथे विश्व कप में टीम की अगुआई करते हुए ब्राजील को नॉकआउट चरण की ओर ले जाने की कोशिश करेंगे।
फीफा वर्ल्ड कप 2026 के ग्रुप स्टेज मुकाबले अब और रोमांचक होते जा रहे हैं। टूर्नामेंट के आठवें दिन कई शानदार मुकाबले देखने को मिले, जहां मेक्सिको ने दक्षिण कोरिया को हराकर नॉकआउट राउंड में पहुंचने वाली पहली टीम बनने का गौरव हासिल किया। वहीं सह-मेजबान कनाडा ने वर्ल्ड कप इतिहास की अपनी पहली जीत दर्ज करते हुए कतर को 6-0 से करारी शिकस्त दी। मेक्सिको ने बनाई नॉकआउट में जगह घरेलू मैदान पर खेल रही मेक्सिको की टीम ने दक्षिण कोरिया को 1-0 से हराकर लगातार दूसरी जीत हासिल की। मैच का एकमात्र गोल 50वें मिनट में लुइस रोमो ने किया। मैच के अंतिम क्षणों में गोलकीपर राउल रंगेल ने शानदार डबल सेव कर दक्षिण कोरिया की बराबरी की उम्मीदों पर पानी फेर दिया। इस जीत के साथ मेक्सिको ग्रुप-ए में 6 अंकों के साथ शीर्ष पर पहुंच गया और राउंड ऑफ 32 में प्रवेश करने वाली पहली टीम बन गया। कनाडा ने कतर को 6-0 से रौंदा सह-मेजबान कनाडा ने अपने घरेलू दर्शकों के सामने ऐतिहासिक प्रदर्शन किया। वैंकूवर में खेले गए मुकाबले में कनाडा ने कतर को 6-0 से हराया। इस मैच के स्टार रहे जोनाथन डेविड, जिन्होंने शानदार हैट्रिक लगाई। इसके अलावा साइल लारिन और नाथन सलीबा ने भी गोल दागे, जबकि एक गोल कतर के खिलाड़ी के आत्मघाती गोल की वजह से मिला। यह फीफा वर्ल्ड कप के इतिहास में कनाडा की पहली जीत रही। स्विट्जरलैंड की शानदार जीत ग्रुप-बी के मुकाबले में स्विट्जरलैंड ने बोस्निया-हर्जेगोविना को 4-1 से हराया। जोहान मंजाम्बी ने दो गोल दागकर टीम की जीत में अहम भूमिका निभाई। कप्तान ग्रेनिट झाका ने भी एक गोल किया। इस जीत के साथ स्विट्जरलैंड ने अगले दौर में पहुंचने की अपनी दावेदारी मजबूत कर ली है। साउथ अफ्रीका और चेक रिपब्लिक का मुकाबला ड्रॉ ग्रुप-ए के एक अन्य मुकाबले में साउथ अफ्रीका और चेक रिपब्लिक के बीच मैच 1-1 से बराबरी पर समाप्त हुआ। चेक रिपब्लिक के लिए मिखाल कैडिलैक ने छठे मिनट में गोल किया। साउथ अफ्रीका की ओर से टेबोहो मोकोएना ने 83वें मिनट में पेनल्टी के जरिए बराबरी दिलाई। दोनों टीमों के अब दो मैचों में एक-एक अंक हो गए हैं। 19 जून 2026 के मैच परिणाम मुकाबला परिणाम मेक्सिको vs दक्षिण कोरिया मेक्सिको 1-0 से विजयी कनाडा vs कतर कनाडा 6-0 से विजयी स्विट्जरलैंड vs बोस्निया-हर्जेगोविना स्विट्जरलैंड 4-1 से विजयी साउथ अफ्रीका vs चेक रिपब्लिक मैच 1-1 से ड्रॉ ग्रुप-ए की स्थिति मेक्सिको – 6 अंक दक्षिण कोरिया – 3 अंक चेक रिपब्लिक – 1 अंक साउथ अफ्रीका – 1 अंक मेक्सिको अब आधिकारिक रूप से राउंड ऑफ 32 में पहुंच चुका है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।