नई दिल्ली: केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने बांग्लादेश में भारत के नए उच्चायुक्त दिनेश त्रिवेदी को केंद्रीय कैबिनेट मंत्री के समकक्ष दर्जा देने का फैसला किया है। विदेश नीति के लिहाज से इस कदम को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला प्रधानमंत्री मोदी की 'नेबरहुड फर्स्ट' नीति को मजबूत करने के साथ-साथ ढाका को एक स्पष्ट कूटनीतिक संदेश भी देता है। दिनेश त्रिवेदी को 27 अप्रैल को बांग्लादेश में भारत का उच्चायुक्त नियुक्त किया गया था। मोदी सरकार के 12 वर्षों के कार्यकाल में यह पहली बार है, जब किसी वरिष्ठ राजनीतिक नेता को विदेश में भारत का राजदूत बनाकर भेजा गया है और उसे कैबिनेट मंत्री के समकक्ष दर्जा दिया गया है। क्या होगा कैबिनेट रैंक का फायदा? बांग्लादेश में भारत की पूर्व उच्चायुक्त वीना सीकरी ने इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में बताया कि कैबिनेट मंत्री का दर्जा मिलने से दिनेश त्रिवेदी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक सीधे पहुंच मिलेगी। उनके अनुसार, सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत विदेश सचिव या विदेश मंत्री के माध्यम से संवाद करने के बजाय त्रिवेदी सीधे प्रधानमंत्री से महत्वपूर्ण मामलों पर संपर्क कर सकेंगे। इससे दोनों देशों के बीच संवेदनशील मुद्दों पर तेजी से निर्णय लेने में मदद मिलेगी। ढाका के लिए क्या है संदेश? वीना सीकरी के मुताबिक, यह फैसला बांग्लादेश को यह स्पष्ट संदेश देता है कि दिनेश त्रिवेदी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भरोसेमंद राजनीतिक प्रतिनिधि हैं। ऐसे में बांग्लादेश की सरकार भी उनके साथ सामान्य राजनयिक की बजाय उच्च राजनीतिक स्तर पर संवाद करेगी। माना जा रहा है कि त्रिवेदी की सीधी पहुंच बांग्लादेश के प्रधानमंत्री और वरिष्ठ मंत्रियों तक होगी। प्रोटोकॉल और सुरक्षा में भी मिलेगा विशेष दर्जा कैबिनेट रैंक मिलने के बाद दिनेश त्रिवेदी को बांग्लादेश में विशेष कूटनीतिक प्रोटोकॉल मिलेगा। हवाई अड्डे पर आगमन, आधिकारिक कार्यक्रमों और देश के भीतर यात्रा के दौरान उन्हें वही सम्मान और सुरक्षा उपलब्ध कराई जाएगी, जो बांग्लादेश अपने कैबिनेट मंत्रियों को देता है। 'नेबरहुड फर्स्ट' नीति को मिलेगी मजबूती विशेषज्ञों का मानना है कि यह नियुक्ति प्रधानमंत्री मोदी की 'नेबरहुड फर्स्ट' नीति के तहत पड़ोसी देशों के साथ संबंधों को प्राथमिकता देने की रणनीति का हिस्सा है। अगस्त 2024 में शेख हसीना सरकार के सत्ता से हटने के बाद भारत और बांग्लादेश के रिश्तों में तनाव देखने को मिला था। मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के दौरान कई भारत समर्थक परियोजनाओं और नीतिगत फैसलों में बदलाव किए गए, जिससे दोनों देशों के संबंध प्रभावित हुए। नई सरकार के साथ रिश्ते सुधारने की कोशिश अब बांग्लादेश में तारिक रहमान के नेतृत्व वाली नई सरकार के गठन के बाद भारत व्यापार, निवेश और विकास परियोजनाओं को फिर से गति देना चाहता है। हाल के दिनों में तारिक रहमान की चीन यात्रा और वहां जारी संयुक्त बयान ने नई दिल्ली की रणनीतिक चिंताओं को बढ़ाया है। ऐसे में दिनेश त्रिवेदी की नियुक्ति और उन्हें दिया गया विशेष दर्जा भारत की सक्रिय कूटनीतिक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। पहले भी राजनीतिक नेताओं को मिल चुका है यह सम्मान मोदी सरकार में यह पहली बार हुआ है, लेकिन पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकारों के दौरान भी कई वरिष्ठ राजनीतिक नेताओं को राजदूत बनाकर भेजा गया था। इनमें विजयलक्ष्मी पंडित, टी.एन. कौल, डॉ. कर्ण सिंह और डी.पी. धर जैसे नाम शामिल हैं, जिन्हें अपने-अपने कार्यकाल में कैबिनेट मंत्री के समकक्ष दर्जा दिया गया था।
रोम: इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया आरोपों पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि इटली और अमेरिका के संबंध बराबरी और साझेदारी पर आधारित हैं, न कि किसी के सामने झुकने पर। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी सरकार न तो अमेरिका विरोधी है और न ही किसी विदेशी नेता के दबाव में काम करती है। क्या है पूरा विवाद? विवाद की शुरुआत तब हुई जब डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि फ्रांस में आयोजित G7 शिखर सम्मेलन के दौरान जॉर्जिया मेलोनी ने उनके साथ कई बार तस्वीर खिंचवाने का अनुरोध किया था। ट्रंप ने यह भी आरोप लगाया कि मेलोनी ऐसा अपनी लोकप्रियता बढ़ाने के लिए कर रही थीं। मेलोनी ने दिया जवाब एक इटैलियन समाचार संस्थान को दिए इंटरव्यू में मेलोनी ने ट्रंप के आरोपों को खारिज करते हुए कहा, "मैं न पहले किसी के सामने झुकी थी और न आगे झुकूंगी। अमेरिका के साथ हमारा रिश्ता मजबूत साझेदारी और पारस्परिक सम्मान पर आधारित है।" उन्होंने कहा कि पश्चिमी देशों की ताकत उनकी एकजुटता में है और उन्होंने हमेशा इसी सोच के साथ काम किया है। 'लोकप्रियता विदेश नीति से तय नहीं होती' मेलोनी ने ट्रंप के इस दावे को भी खारिज किया कि उनकी लोकप्रियता अमेरिका के खिलाफ रुख अपनाने की वजह से बढ़ी है। उन्होंने कहा कि उनकी लोकप्रियता किसी विदेशी नेता के साथ रिश्तों पर निर्भर नहीं करती, बल्कि इस बात पर आधारित है कि उनकी सरकार इटली के राष्ट्रीय हितों की कितनी मजबूती से रक्षा करती है। उन्होंने कहा, "मैंने हमेशा इटली के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है और आगे भी देती रहूंगी।" सैन्य समझौतों पर भी दिया बयान इटली की प्रधानमंत्री ने अमेरिका और इटली के बीच मौजूद सैन्य समझौतों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इटली में स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डों से जुड़े समझौतों का सम्मान किया जाएगा और उन्हें एकतरफा तरीके से बदला नहीं जा सकता। उन्होंने दोहराया कि इटली एक स्वतंत्र और संप्रभु राष्ट्र है तथा उसकी विदेश नीति राष्ट्रीय हितों के आधार पर तय होती है। ट्रंप को अप्रत्यक्ष संदेश मेलोनी ने बिना नाम लिए ट्रंप पर निशाना साधते हुए कहा कि उनकी लोकप्रियता को लेकर किसी और को चिंता करने की आवश्यकता नहीं है और बेहतर होगा कि हर नेता अपने काम पर ध्यान दे। अमेरिका दौरा भी टला इस विवाद के बीच इटली के विदेश मंत्री एंटोनियो ताजानी ने अपना प्रस्तावित अमेरिका दौरा भी रद्द कर दिया। सरकार की ओर से दौरा रद्द करने का आधिकारिक कारण सार्वजनिक नहीं किया गया है।
नई दिल्ली/विक्टोरिया: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तीन दिवसीय सेशेल्स यात्रा के दौरान भारत और सेशेल्स ने रक्षा, समुद्री सुरक्षा, डिजिटल भुगतान, स्वास्थ्य, अंतरिक्ष, कृषि और शिक्षा समेत विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए 19 महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए। दोनों देशों के बीच हुई प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता के बाद इन समझौतों की घोषणा की गई। इनका उद्देश्य हिंद महासागर क्षेत्र में रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करना और द्विपक्षीय संबंधों को नई दिशा देना है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, दोनों देशों के बीच प्रत्यर्पण संधि, बाह्य अंतरिक्ष के शांतिपूर्ण उपयोग, यूपीआई आधारित डिजिटल भुगतान प्रणाली, एक्जिम बैंक के माध्यम से व्यापक ऋण सुविधा, और सेशेल्स के नए राष्ट्रीय अस्पताल की प्रारंभिक तैयारियों से जुड़े समझौतों पर सहमति बनी है। सेशेल्स की समुद्री सुरक्षा को मिलेगा भारत का सहयोग भारत ने सेशेल्स की समुद्री सुरक्षा क्षमताओं को मजबूत करने के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं की हैं। भारत सेशेल्स को एक तेज गश्ती पोत (Fast Patrol Vessel) उपहार में देगा। इसके अलावा सेशेल्स रक्षा बल को 10 यूटिलिटी वाहन और पांच लेजर रेडियल श्रेणी की नौकाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी। भारत ने यह भी घोषणा की कि सेशेल्स कोस्ट गार्ड के पोत पीएस जोरोस्टर के पुनर्निर्माण का कार्य पूरा हो चुका है। साथ ही सेशेल्स के लिए उपलब्ध कराए गए डोर्नियर विमान को आधुनिक ग्लास कॉकपिट प्रणाली से अपग्रेड किया जाएगा। विकास परियोजनाओं को भी मिला बढ़ावा भारत ने विकास सहयोग के तहत सेशेल्स को छह एंबुलेंस, 500 मीट्रिक टन चावल और 8,500 मीट्रिक टन सीमेंट भी सौंपा। इसके साथ ही भारत-सेशेल्स राजनयिक संबंधों के 50 वर्ष पूरे होने के अवसर पर एक स्मारक लोगो जारी किया गया। दोनों देशों ने व्यावसायिक एवं तकनीकी शिक्षा केंद्र की आधारशिला का डिजिटल माध्यम से उद्घाटन भी किया। सेशेल्स में लागू होगी UPI आधारित डिजिटल भुगतान प्रणाली डिजिटल सहयोग को बढ़ावा देने के लिए नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) इंटरनेशनल पेमेंट्स लिमिटेड और सेशेल्स के केंद्रीय बैंक के बीच समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। इसके तहत सेशेल्स में भारत की यूपीआई (UPI) आधारित डिजिटल भुगतान प्रणाली को लागू किया जाएगा, जिससे दोनों देशों के बीच आर्थिक और तकनीकी सहयोग को नई मजबूती मिलेगी। जन औषधि योजना के तहत मिलेंगी सस्ती भारतीय दवाएं स्वास्थ्य क्षेत्र में भी दोनों देशों के बीच महत्वपूर्ण समझौते हुए हैं। एचएलएल लाइफकेयर लिमिटेड और सेशेल्स के स्वास्थ्य मंत्रालय के बीच हुए समझौते के तहत जन औषधि योजना के माध्यम से सेशेल्स के लोगों को उच्च गुणवत्ता वाली और किफायती भारतीय दवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। इसके अलावा नए राष्ट्रीय अस्पताल की प्रारंभिक तैयारियों को लेकर भी समझौता हुआ है। शिक्षा, कृषि और अंतरिक्ष सहयोग का होगा विस्तार भारत और सेशेल्स ने विदेश सेवा प्रशिक्षण, कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा, नाविकों के प्रशिक्षण और प्रमाणन की पारस्परिक मान्यता तथा बाह्य अंतरिक्ष की खोज और उसके शांतिपूर्ण उपयोग से जुड़े कई समझौतों पर भी हस्ताक्षर किए। विदेश मंत्रालय के अनुसार, इन समझौतों से दोनों देशों के बीच संस्थागत सहयोग और क्षमता निर्माण को नई गति मिलेगी। 50 वर्षों की दोस्ती को मिली नई दिशा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यह यात्रा ऐसे समय हो रही है जब भारत और सेशेल्स के बीच राजनयिक संबंधों की स्थापना के 50 वर्ष पूरे हो रहे हैं। राष्ट्रपति पैट्रिक हर्मिनी के निमंत्रण पर सेशेल्स पहुंचे प्रधानमंत्री मोदी राष्ट्रीय दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में भी शामिल होंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि इन 19 समझौतों के बाद भारत और सेशेल्स के संबंध केवल विकास सहयोग तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि हिंद महासागर क्षेत्र में सुरक्षा, समुद्री सहयोग और डिजिटल कनेक्टिविटी के नए दौर की शुरुआत भी करेंगे।
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने रूस से तेल खरीदने को लेकर भारत की नीति का मजबूती से बचाव करते हुए कहा कि देश ने हमेशा कीमत, उपलब्धता और राष्ट्रीय हित को प्राथमिकता दी है। फिनलैंड में आयोजित ‘कुलतरांता टॉक्स’ कार्यक्रम के दौरान उन्होंने यूरोपीय देशों के रवैये पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि वैश्विक मुद्दों पर नैतिकता की बात करने वाले देशों को अपने आचरण पर भी नजर डालनी चाहिए। ‘उभरती शक्तियां और नई भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा’ विषय पर आयोजित चर्चा में जयशंकर से रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान भारत द्वारा रूसी तेल खरीद बढ़ाने को लेकर सवाल पूछा गया। इसके जवाब में उन्होंने कहा कि उस समय वैश्विक बाजार की परिस्थितियों ने भारत को व्यावहारिक निर्णय लेने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि भारत तेल की खरीद उसकी कीमत और उपलब्धता के आधार पर करता है। रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद जब वैश्विक ऊर्जा बाजार में बदलाव आया, तब रूस का तेल अधिक उपलब्ध था, जबकि यूरोपीय देश मध्य पूर्व से बड़ी मात्रा में तेल खरीद रहे थे, जो पारंपरिक रूप से भारत का प्रमुख स्रोत रहा है। यूरोप के रवैये पर उठाए सवाल ऊर्जा नीति पर भारत का पक्ष रखने के बाद जयशंकर ने यूरोप के दृष्टिकोण पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि भारत ने कभी ऐसा कोई कदम नहीं उठाया जिससे किसी यूरोपीय देश की सुरक्षा प्रभावित हुई हो, लेकिन भारत के खिलाफ इस्तेमाल होने वाले कई हथियार यूरोप से आए हैं। जब उनसे इस टिप्पणी पर और स्पष्टता मांगी गई, तो उन्होंने कहा कि वर्षों से ऐसे हथियारों की आपूर्ति होती रही है जिनका इस्तेमाल भारत के खिलाफ किया गया। उन्होंने कहा कि इस विषय पर भी गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए। ‘राष्ट्रीय हित सर्वोपरि’ विदेश मंत्री ने कहा कि भारत की प्राथमिकता अपने नागरिकों की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना और आर्थिक स्थिरता बनाए रखना है। उनके अनुसार, वैश्विक संकट के दौर में हर देश अपने हितों को ध्यान में रखकर फैसले लेता है और भारत ने भी वही किया। जयशंकर ने यह भी कहा कि रूस-यूक्रेन संघर्ष और उससे जुड़े ऊर्जा संबंधी फैसलों को केवल नैतिक दृष्टिकोण से नहीं देखा जाना चाहिए। उनका कहना था कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति में अधिकांश देश अपने रणनीतिक और आर्थिक हितों के आधार पर निर्णय लेते हैं। वैश्विक ऊर्जा बाजार में संतुलन का मुद्दा विदेश मंत्री ने यह भी उल्लेख किया कि रूस पर प्रतिबंधों के बाद वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता की आशंका थी। ऐसे समय में भारत ने अपनी ऊर्जा जरूरतों और बाजार की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए फैसले लिए, जिससे घरेलू आपूर्ति और आर्थिक गतिविधियों पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े। जयशंकर का यह बयान ऐसे समय आया है जब रूस से तेल आयात को लेकर भारत और पश्चिमी देशों के बीच समय-समय पर चर्चा होती रही है। भारत लगातार यह कहता रहा है कि उसकी विदेश और ऊर्जा नीति राष्ट्रीय हितों तथा व्यावहारिक आवश्यकताओं पर आधारित है।
न्यूयॉर्क, एजेंसियां। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि अमेरिका और ईरान के बीच एक मजबूत और प्रभावशाली समझौता होने की संभावना काफी बढ़ गई है। उन्होंने कहा कि वॉशिंगटन और तेहरान के बीच जारी बातचीत निर्णायक चरण में पहुंच चुकी है और जल्द ही ऐसा समझौता हो सकता है जो सैन्य कार्रवाई से भी अधिक प्रभावी साबित होगा। न्यूयॉर्क में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा कि अमेरिका के पास सैन्य विकल्प मौजूद हैं, लेकिन उनकी प्राथमिकता कूटनीतिक समाधान है। उन्होंने कहा कि यदि अमेरिका चाहे तो ईरान के खिलाफ व्यापक बमबारी अभियान चला सकता है, लेकिन इससे क्षेत्रीय स्थिरता और समुद्री व्यापार मार्गों पर गंभीर असर पड़ेगा। ट्रंप ने स्पष्ट किया कि युद्ध की तुलना में हस्ताक्षरित समझौता अधिक स्थायी और मजबूत परिणाम देगा। ‘बमबारी नहीं, समझौता बेहतर विकल्प’ ट्रंप ने कहा कि किसी भी सैन्य अभियान में बड़ी संख्या में लोगों की जान जा सकती है, जिसे वे टालना चाहते हैं। उनका मानना है कि एक औपचारिक समझौता ईरान के परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय गतिविधियों पर अधिक प्रभावी नियंत्रण स्थापित कर सकता है। नाकेबंदी को बताया सबसे प्रभावी हथियार अमेरिकी राष्ट्रपति ने दावा किया कि आर्थिक प्रतिबंधों और समुद्री नाकेबंदी ने ईरान की अर्थव्यवस्था पर गहरा असर डाला है। उनके अनुसार, यही दबाव तेहरान को बातचीत की मेज पर लाने में सफल रहा है। ट्रंप ने कहा कि नाकेबंदी कई मामलों में बमबारी से भी अधिक प्रभावशाली साबित हुई है और ईरान अब समझौते के लिए मजबूर होता दिख रहा है। मध्य पूर्व में बढ़ा तनाव हाल के दिनों में ईरान और इजराइल के बीच मिसाइल हमलों और जवाबी सैन्य कार्रवाइयों से क्षेत्र में तनाव बढ़ा है। ट्रंप ने बताया कि उन्होंने इजराइली प्रधानमंत्री से भी बातचीत कर संयम बरतने की सलाह दी है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि संघर्ष बढ़ता है तो क्षेत्रीय स्थिरता और वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर व्यापक असर पड़ सकता है।
रूस के राष्ट्रपति Vladimir Putin ने भारत के साथ द्विपक्षीय संबंधों को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि भारत और रूस के बीच रणनीतिक साझेदारी लगातार मजबूत हो रही है और इसे कमजोर करने की पश्चिमी देशों की कोशिशें सफल नहीं होंगी। भारत-रूस साझेदारी लगातार मजबूत हो रही है पुतिन ने कहा कि दोनों देशों के बीच व्यापार, ऊर्जा और रणनीतिक सहयोग लगातार बढ़ रहा है। उन्होंने भरोसा जताया कि आने वाले वर्षों में भारत-रूस व्यापार 100 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। ‘भारत पर दबाव बनाना गलत’ — पुतिन राष्ट्रपति पुतिन ने कहा कि दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र और प्रधानमंत्री Narendra Modi पर बाहरी दबाव डालना अंतरराष्ट्रीय संबंधों के लिए नुकसानदेह है। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रयासों का कोई असर नहीं पड़ा है और भारत अपनी स्वतंत्र विदेश नीति पर कायम है। भारत की आर्थिक प्रगति की तारीफ पुतिन ने भारत की तेज आर्थिक वृद्धि और मजबूत विकास दर की सराहना करते हुए कहा कि यह प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व और नीतिगत निरंतरता का परिणाम है। उन्होंने भारत को दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल बताया। पश्चिमी देशों के दबाव पर रूस का रुख पुतिन ने कहा कि पश्चिमी देशों की कोशिशें भारत और रूस के संबंधों को प्रभावित करने में विफल रही हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि रूस को भारत के अन्य देशों के साथ संबंधों से कोई आपत्ति नहीं है। भारत-अमेरिका संबंधों पर भी टिप्पणी पुतिन ने कहा कि भारत अपने राष्ट्रीय हितों के आधार पर सभी देशों के साथ संबंध विकसित कर रहा है और अमेरिका के साथ उसके बढ़ते संबंध रूस-भारत साझेदारी पर कोई नकारात्मक असर नहीं डालेंगे। ‘भारत एक भरोसेमंद साझेदार’ रूस के राष्ट्रपति ने भारत को एक “विश्वसनीय साझेदार” बताते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच दीर्घकालिक भरोसा और रणनीतिक सहयोग मजबूत बना हुआ है।
ब्रिटेन की विदेश मंत्री Yvette Cooper इस सप्ताह भारत दौरे पर आएंगी। भारत पहुंचने से पहले वह चीन की यात्रा करेंगी। उनका यह दौरा वैश्विक चुनौतियों पर सहयोग बढ़ाने और प्रमुख साझेदार देशों के साथ रणनीतिक संबंधों को मजबूत करने पर केंद्रित रहेगा। ब्रिटेन के विदेश, राष्ट्रमंडल और विकास कार्यालय (FCDO) के अनुसार, यात्रा के दौरान मंत्रिस्तरीय स्तर की बैठकों में पश्चिम एशिया की स्थिति, होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा, रूस-यूक्रेन युद्ध और अफ्रीका में इबोला प्रकोप जैसे महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। जयशंकर के साथ द्विपक्षीय बैठक नई दिल्ली में कूपर गुरुवार को भारत के विदेश मंत्री S. Jaishankar के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगी। दोनों नेता भारत-ब्रिटेन संबंधों, क्षेत्रीय सुरक्षा, आर्थिक सहयोग और वैश्विक चुनौतियों पर विचार-विमर्श करेंगे। बैठक के बाद कूपर व्यापार, निवेश और शिक्षा क्षेत्र से जुड़े प्रतिनिधियों के साथ भी संवाद करेंगी। इस दौरान दोनों देशों के बीच सहयोग के नए अवसरों पर चर्चा होने की उम्मीद है। FTA के बाद संबंधों को नई दिशा देने की कोशिश कूपर का यह दौरा भारत और ब्रिटेन के बीच मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर हस्ताक्षर के लगभग एक वर्ष बाद हो रहा है। पिछले वर्ष भारत के प्रधानमंत्री Narendra Modi और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री Keir Starmer ने इस समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। दोनों देशों ने इसे एक महत्वाकांक्षी और भविष्य-केंद्रित समझौता बताया था, जिसका उद्देश्य व्यापार, निवेश, नवाचार और आर्थिक विकास को बढ़ावा देना है। रणनीतिक साझेदारी को मिलेगा और बल विशेषज्ञों का मानना है कि कूपर की भारत यात्रा दोनों देशों के बीच बढ़ते रणनीतिक और आर्थिक संबंधों को और मजबूती दे सकती है। वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारत और ब्रिटेन रक्षा, व्यापार, शिक्षा, तकनीक और सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं।
अमेरिका के विदेश मंत्री Marco Rubio शनिवार को अपने चार दिवसीय भारत दौरे पर Kolkata पहुंचे। यह उनका पहला भारत दौरा है और करीब 14 साल बाद कोई अमेरिकी विदेश मंत्री कोलकाता आया है। इससे पहले साल 2012 में Hillary Clinton ने शहर का दौरा किया था। भारत में अमेरिका के राजदूत Sergio Gor ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी साझा करते हुए कहा कि मार्को रूबियो की यात्रा भारत-अमेरिका संबंधों के लिए काफी अहम मानी जा रही है। उन्होंने बताया कि रूबियो जल्द ही Narendra Modi से मुलाकात करेंगे। व्यापार, रक्षा और QUAD पर होगी चर्चा सर्जियो गोर के मुताबिक इस दौरे के दौरान व्यापार, टेक्नोलॉजी, रक्षा और Quadrilateral Security Dialogue जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा की जाएगी। मार्को रूबियो का भारत दौरा 23 मई से 26 मई तक चलेगा। इस दौरान वह कोलकाता के अलावा Agra, Jaipur और New Delhi भी जाएंगे। 26 मई को QUAD देशों की अहम बैठक आयोजित होगी। इस बैठक में अमेरिका के अलावा Penny Wong और Motegi Toshimitsu भी हिस्सा लेंगे। मदर टेरेसा हाउस और विक्टोरिया मेमोरियल जा सकते हैं रूबियो हालांकि अमेरिकी विदेश विभाग ने अभी तक कोलकाता दौरे का पूरा कार्यक्रम सार्वजनिक नहीं किया है, लेकिन सूत्रों के मुताबिक रूबियो Mother House जा सकते हैं। यह Missionaries of Charity का मुख्यालय है, जिसकी स्थापना Mother Teresa ने की थी। इसके अलावा रिपोर्ट्स में कहा गया है कि वह Victoria Memorial का भी दौरा कर सकते हैं। इसे देखते हुए शहर में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। ऊर्जा सहयोग बढ़ाने पर अमेरिका का जोर भारत पहुंचने से पहले मार्को रूबियो Sweden गए थे। वहां पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि अमेरिका भारत को ज्यादा से ज्यादा ऊर्जा निर्यात करना चाहता है। उन्होंने कहा कि इस समय अमेरिका रिकॉर्ड स्तर पर ऊर्जा उत्पादन और निर्यात कर रहा है। होर्मुज स्ट्रेट से जुड़े सवाल पर रूबियो ने भारत को अमेरिका का “बेहतरीन साझेदार” बताया। रूबियो ने यह भी कहा कि वह QUAD देशों के विदेश मंत्रियों के साथ बैठक को लेकर उत्साहित हैं और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सहयोग को आगे बढ़ाना अमेरिका की प्राथमिकताओं में शामिल है।
Bangladesh ने अपनी विदेश नीति को लेकर बड़ा संकेत देते हुए साफ कहा है कि वह भारत और चीन के बीच किसी एक पक्ष की ओर झुकाव नहीं दिखाएगा। बांग्लादेश सरकार ने कहा है कि उसकी प्राथमिकता “बांग्लादेश फर्स्ट” यानी राष्ट्रीय हित होंगे और वह संतुलित कूटनीति अपनाएगी। हुमायूं कबीर का बड़ा बयान प्रधानमंत्री Tarique Rahman के विदेश मामलों के सलाहकार Humayun Kabir ने ढाका में आयोजित एक गोलमेज सम्मेलन में कहा: “बांग्लादेश भारत और चीन के बीच फुटबॉल नहीं बनेगा।” उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार की विदेश नीति व्यावहारिक सोच, संतुलन और राष्ट्रीय हितों पर आधारित होगी। बांग्लादेश सभी बड़ी वैश्विक शक्तियों के साथ अच्छे और रचनात्मक संबंध बनाए रखना चाहता है। भारत और चीन दोनों से संतुलित रिश्ते Humayun Kabir ने कहा कि सरकार किसी एक देश पर निर्भर रहने के बजाय बहुआयामी कूटनीतिक रणनीति अपनाना चाहती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि: India और China दोनों के साथ संतुलित संबंध बनाए जाएंगे हर फैसले में बांग्लादेश के राष्ट्रीय हित सर्वोच्च होंगे ढाका वाशिंगटन, बीजिंग और नई दिल्ली सभी के साथ संतुलित रिश्ते चाहता है चीन को बताया अहम विकास सहयोगी हुमायूं कबीर ने चीन को बांग्लादेश का महत्वपूर्ण विकास साझेदार बताया। उन्होंने कहा कि बीजिंग की उनकी हालिया यात्रा काफी सकारात्मक रही और दोनों देशों के बीच सहयोग के कई नए रास्तों पर चर्चा हुई। “Bangladesh First” नीति क्या है? प्रधानमंत्री Tarique Rahman की “Bangladesh First” नीति पर बोलते हुए कबीर ने कहा कि इसका मतलब अलगाववाद नहीं है। उन्होंने कहा कि इस नीति का उद्देश्य: देश की संप्रभुता की रक्षा आर्थिक विकास को प्राथमिकता विदेश नीति में आत्मनिर्भर और संतुलित दृष्टिकोण को आगे बढ़ाना है। हिंद-प्रशांत क्षेत्र पर भी साफ रुख Humayun Kabir ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र को लेकर कहा कि बांग्लादेश खुले, सहयोगात्मक और समावेशी क्षेत्रीय ढांचे का समर्थन करता है। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश किसी वैश्विक शक्ति संघर्ष में किसी एक पक्ष का समर्थन नहीं करेगा, लेकिन व्यापार, समुद्री सुरक्षा, कनेक्टिविटी और सतत विकास से जुड़े प्रयासों में सक्रिय भागीदारी जारी रखेगा। क्यों अहम है यह बयान? विशेषज्ञों के अनुसार, दक्षिण एशिया में India और China के बढ़ते प्रभाव के बीच बांग्लादेश का यह रुख काफी अहम माना जा रहा है। एक ओर भारत बांग्लादेश का करीबी पड़ोसी और बड़ा व्यापारिक साझेदार है, वहीं चीन बुनियादी ढांचे और निवेश परियोजनाओं में तेजी से अपनी मौजूदगी बढ़ा रहा है। ऐसे में ढाका संतुलन बनाकर दोनों देशों से रणनीतिक और आर्थिक लाभ लेना चाहता है।
अमेरिका और Iran के बीच तनाव एक बार फिर चरम पर है। एक ओर अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump बातचीत और समझौते के संकेत दे रहे हैं, तो दूसरी ओर अमेरिकी सेना ने ईरान के समुद्री रास्तों पर भारी सैन्य घेराबंदी कर दी है। United States Central Command (CENTCOM) के मुताबिक, इस मिशन में 10,000 से ज्यादा सैनिक, 12 से अधिक युद्धपोत और 100 से ज्यादा लड़ाकू विमान तैनात किए गए हैं। समुद्र में अमेरिका की ताकत का प्रदर्शन इस ऑपरेशन में एयरक्राफ्ट कैरियर USS Abraham Lincoln और गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रॉयर USS Delbert D. Black जैसे अत्याधुनिक युद्धपोत शामिल हैं, जो ईरान के बंदरगाहों और तटीय इलाकों पर कड़ी नजर रख रहे हैं। CENTCOM का कहना है कि कोई भी जहाज अगर ईरानी बंदरगाहों की ओर जाता है या वहां से निकलता है, तो उसे रोका जाएगा और जांच की जाएगी। होर्मुज जलडमरूमध्य खुला, लेकिन निगरानी कड़ी जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के चेयरमैन जनरल डैन केन ने स्पष्ट किया है कि Strait of Hormuz को बंद नहीं किया गया है। यह घेराबंदी केवल ईरान के बंदरगाहों और तटीय सीमा तक सीमित है। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में भी अमेरिकी सेना पूरी तरह सक्रिय है और हर संदिग्ध गतिविधि पर नजर रखी जा रही है। ‘डार्क फ्लीट’ पर भी शिकंजा अमेरिका ने उन जहाजों पर भी कार्रवाई के संकेत दिए हैं, जिन्हें ‘डार्क फ्लीट’ कहा जाता है। ये ऐसे जहाज होते हैं जो अंतरराष्ट्रीय नियमों को दरकिनार कर गुप्त रूप से ईरानी तेल की ढुलाई करते हैं। ट्रंप बोले- ईरान डील के लिए तैयार इसी बीच ट्रंप ने दावा किया कि ईरान अब समझौते के लिए पहले से ज्यादा तैयार है। उन्होंने कहा, “ईरान आज उन शर्तों को मानने को तैयार है, जिनके लिए वह पहले राजी नहीं था।” ट्रंप ने साफ किया कि किसी भी संभावित डील की सबसे अहम शर्त यह होगी कि ईरान परमाणु हथियार न बनाए। सीजफायर टूटा तो फिर जंग राष्ट्रपति ट्रंप ने चेतावनी भी दी कि अगर बातचीत असफल रही, तो युद्ध दोबारा शुरू हो सकता है। उन्होंने कहा कि अमेरिकी सेना पूरी तरह तैयार है और जरूरत पड़ने पर तुरंत कार्रवाई की जाएगी।
अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने एक बार फिर प्रधानमंत्री Narendra Modi की तारीफ करते हुए उन्हें “अच्छा काम करने वाला नेता” बताया है। मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और सीजफायर की कोशिशों के बीच दोनों नेताओं के बीच हाल ही में फोन पर बातचीत हुई, जिसे ट्रंप ने “बहुत सकारात्मक” करार दिया। ट्रंप ने मीडिया से बातचीत में कहा कि उनकी पीएम मोदी के साथ बातचीत काफी अच्छी रही। उन्होंने कहा, “वह मेरे अच्छे मित्र हैं और बहुत अच्छा काम कर रहे हैं।” सीजफायर और मिडिल ईस्ट पर चर्चा राष्ट्रपति ट्रंप के मुताबिक, इस बातचीत में पश्चिम एशिया की स्थिति, खासकर इजरायल और लेबनान के बीच सीजफायर जैसे मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। उन्होंने संकेत दिया कि अमेरिका इस क्षेत्र में तनाव कम करने और शांति स्थापित करने के लिए कूटनीतिक प्रयास जारी रखे हुए है। पाकिस्तान दौरे के दिए संकेत ट्रंप ने यह भी कहा कि अगर ईरान के साथ सीजफायर समझौता होता है, तो वह पाकिस्तान का दौरा कर सकते हैं। उन्होंने कहा, “अगर इस्लामाबाद में डील साइन होती है, तो मैं वहां जा सकता हूं।” उन्होंने पाकिस्तान की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि वह शांति प्रक्रिया में अच्छा काम कर रहा है और अमेरिका के साथ सहयोग कर रहा है। कूटनीतिक कोशिशें तेज यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिका मिडिल ईस्ट में कई स्तर पर कूटनीतिक प्रयास कर रहा है। इसमें ईरान के साथ बातचीत, इजरायल-लेबनान सीमा पर तनाव कम करना और क्षेत्रीय स्थिरता सुनिश्चित करना शामिल है। ट्रंप ने यह भी उम्मीद जताई कि हिजबुल्लाह जैसे समूह सीजफायर का पालन करेंगे और क्षेत्र में हिंसा कम होगी।
वॉशिंगटन: अमेरिका और Iran के बीच जारी सैन्य तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने दावा किया है कि दोनों देशों के बीच चल रही जंग अब अपने अंत के करीब है। फॉक्स न्यूज को दिए इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा कि अगर उन्होंने ईरान के खिलाफ कड़ा कदम नहीं उठाया होता, तो तेहरान अब तक परमाणु हथियार बना चुका होता। “परमाणु हथियार होता तो ‘सर’ कहना पड़ता” Donald Trump ने तीखे अंदाज में कहा: “अगर ईरान के पास परमाणु बम होता, तो आज सबको उन्हें ‘सर’ कहना पड़ता।” उन्होंने दावा किया कि अमेरिकी कार्रवाई ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को रोकने में बड़ी भूमिका निभाई है। “ईरान को उबरने में लगेंगे 20 साल” ट्रंप के मुताबिक: अमेरिका और Israel के हमलों से ईरान को भारी नुकसान हुआ है देश को दोबारा खड़ा होने में करीब 20 साल लग सकते हैं सीजफायर के बावजूद जारी दबाव दोनों देशों के बीच फिलहाल दो हफ्ते का युद्धविराम लागू है, जिससे हालात कुछ हद तक शांत हुए हैं। हालांकि, ट्रंप ने साफ किया कि: अमेरिका का मिशन अभी खत्म नहीं हुआ है ईरान पर दबाव बनाए रखा जाएगा बातचीत के संकेत Donald Trump ने यह भी कहा कि: ईरान समझौते के लिए तैयार नजर आ रहा है जल्द ही बातचीत का नया दौर शुरू हो सकता है सूत्रों के मुताबिक, Islamabad में बैक-चैनल वार्ता जारी है। अमेरिका का फोकस ट्रंप प्रशासन का लक्ष्य स्पष्ट है: ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर स्थायी रोक भविष्य में किसी भी परमाणु खतरे को खत्म करना ट्रंप के बयान से संकेत मिलते हैं कि एक ओर अमेरिका युद्ध खत्म होने की बात कर रहा है, तो दूसरी ओर ईरान पर कड़ा दबाव बनाए रखने की रणनीति जारी है। आने वाले दिनों में यह तय होगा कि हालात पूरी तरह शांत होते हैं या फिर तनाव दोबारा बढ़ता है।
अंतरराष्ट्रीय मंच पर एक बार फिर भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु जल संधि को लेकर तीखी बयानबाज़ी देखने को मिली। संयुक्त राष्ट्र में आयोजित विश्व जल दिवस से जुड़े एक कार्यक्रम के दौरान पाकिस्तान ने सिंधु जल संधि को बहाल करने की मांग उठाई, लेकिन भारत ने स्पष्ट शब्दों में इसे खारिज करते हुए कड़ा रुख अपनाया। भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी. हरीश ने पाकिस्तान को दो टूक जवाब देते हुए कहा कि जब तक वह आतंकवाद को पूरी तरह समाप्त नहीं करता, तब तक सिंधु जल संधि बहाल नहीं की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी संधि की पवित्रता की बात करने से पहले मानव जीवन की पवित्रता का सम्मान करना जरूरी है। पाकिस्तान की अपील, भारत का जवाब पाकिस्तान ने इस मुद्दे को उस कार्यक्रम में उठाया, जिसका मुख्य उद्देश्य सभी के लिए सुरक्षित जल और स्वच्छता सुनिश्चित करना था। पाकिस्तान ने खुद को पीड़ित पक्ष के रूप में पेश करते हुए संधि बहाल करने की मांग की। हालांकि, भारत ने इसे भटकाने वाली रणनीति बताते हुए कड़ी आपत्ति जताई। भारत ने कहा कि उसने हमेशा एक जिम्मेदार ऊपरी-तटीय देश की भूमिका निभाई है, लेकिन जिम्मेदारी दोनों पक्षों की होती है। भारत ने क्यों निलंबित की संधि गौरतलब है कि 1960 में हुई सिंधु जल संधि को भारत ने पिछले वर्ष पहलगाम आतंकी हमले के बाद निलंबित कर दिया था। इस हमले की जिम्मेदारी पाकिस्तान से जुड़े आतंकी संगठन ‘द रेजिस्टेंस फ्रंट’ ने ली थी, जिसका संबंध लश्कर-ए-तैयबा से बताया गया। इसके जवाब में भारत ने कड़ा रुख अपनाते हुए न केवल कूटनीतिक स्तर पर दबाव बनाया, बल्कि जल समझौते को भी निलंबित कर दिया। ‘आतंकवाद के साथ नहीं चल सकती संधि’ हरीश ने अपने बयान में स्पष्ट कहा कि पाकिस्तान ने वर्षों से आतंकवाद को एक सरकारी नीति के हथियार के रूप में इस्तेमाल किया है, जिससे हजारों निर्दोष भारतीयों की जान गई। उन्होंने कहा, “हमारे धैर्य और सद्भावना का पाकिस्तान पर कोई असर नहीं पड़ा। इसलिए भारत को मजबूर होकर यह कदम उठाना पड़ा।” संधि में बदलाव की जरूरत पर भी उठे सवाल भारत ने यह भी कहा कि पिछले 65 वर्षों में तकनीक, जनसंख्या और पर्यावरण में बड़े बदलाव हुए हैं, जिससे संधि में संशोधन की आवश्यकता थी। लेकिन पाकिस्तान ने इस पर चर्चा से इनकार कर दिया। भारत का जल प्रबंधन पर जोर भारत ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर यह भी दोहराया कि वह जल प्रबंधन और स्वच्छता को लेकर गंभीर है। सरकार की ‘जल जीवन मिशन’ योजना के तहत देश के करोड़ों ग्रामीण परिवारों तक पाइप से पीने का पानी पहुंचाया जा चुका है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।