fraud case

Sunny Leone at a public event amid reports of a Karnataka CID notice in a fraud investigation.
₹2400 करोड़ धोखाधड़ी मामले में सनी लियोनी को कर्नाटक CID का नोटिस, भुगतान से जुड़ी जानकारी मांगी

नई दिल्ली: बॉलीवुड अभिनेत्री और 'बिग बॉस' फेम सनी लियोनी को कर्नाटक क्रिमिनल इन्वेस्टिगेशन डिपार्टमेंट (CID) ने ₹2400 करोड़ के कथित 'शिवम एसोसिएट्स' निवेश घोटाले से जुड़े मामले में नोटिस जारी किया है। हालांकि जांच एजेंसी ने साफ किया है कि सनी लियोनी पर किसी तरह के गलत काम का आरोप नहीं है। उनसे केवल एक फिल्म के लिए मिली फीस के भुगतान से संबंधित जानकारी मांगी गई है। क्या है पूरा मामला? कर्नाटक CID 'शिवम एसोसिएट्स' और उसके प्रमोटर शिवानंद नीलन्नवर के खिलाफ जांच कर रही है। आरोप है कि उन्होंने बिना अनुमति निवेश योजनाएं चलाकर करीब 40,700 निवेशकों से हजारों करोड़ रुपये जुटाए और ऊंचे रिटर्न का लालच देकर कथित तौर पर धोखाधड़ी की। जांच के अनुसार, शिवानंद नीलन्नवर ने वर्ष 2023 में कन्नड़ फिल्म 'चैंपियन' का निर्माण किया था। इसी फिल्म के लोकप्रिय गीत 'डिंगारा बिल्लि नानू' में सनी लियोनी ने विशेष प्रस्तुति दी थी, जिसके लिए उन्हें लगभग ₹1 करोड़ की फीस दी गई थी। सनी लियोनी से क्या जानना चाहती है CID? जांच एजेंसी यह पता लगाना चाहती है कि अभिनेत्री को भुगतान किस माध्यम से किया गया और क्या यह रकम कथित निवेश घोटाले से जुड़े फंड से आई थी। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यह सिर्फ पूछताछ की प्रक्रिया का हिस्सा है और सनी लियोनी को आरोपी के रूप में नहीं देखा जा रहा है। क्या है ₹2400 करोड़ का शिवम एसोसिएट्स घोटाला? शिवम एसोसिएट्स पर आरोप है कि उसने कर्नाटक और महाराष्ट्र के निवेशकों को 36 से 60 प्रतिशत तक वार्षिक रिटर्न का वादा कर निवेश कराया। शुरुआती जांच में सामने आया कि कुछ धन निवेशकों को लौटाया गया, जबकि बड़ी रकम शेयर बाजार और निजी खातों में ट्रांसफर की गई। रिपोर्ट्स के मुताबिक: लगभग ₹540 करोड़ शेयर बाजार में लगाए गए। इसमें करीब ₹170 करोड़ का नुकसान हुआ। करीब ₹55 करोड़ निजी खातों में ट्रांसफर किए गए। आरोपी पहले ही हो चुका है गिरफ्तार मुख्य आरोपी शिवानंद नीलन्नवर को मई 2026 में गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद मामला CID को सौंपा गया। जांच एजेंसी ने 30 से अधिक बैंक खातों को फ्रीज कर दिया है और कथित तौर पर निवेशकों के पैसों से खरीदी गई कई लग्जरी संपत्तियां और वाहन जब्त किए हैं। सनी लियोनी के कारोबार और नेटवर्थ सनी लियोनी फिल्मों और टीवी शो के अलावा कई व्यवसायों से भी जुड़ी हुई हैं। उनकी अनुमानित कुल संपत्ति ₹98 करोड़ से ₹115 करोड़ के बीच बताई जाती है। उनके प्रमुख कारोबारों में शामिल हैं: 'स्टार स्ट्रक' कॉस्मेटिक ब्रांड 'अफेटो फ्रैग्रेंस' परफ्यूम ब्रांड 'आई एम एनिमल' वीगन फैशन ब्रांड वेलनेस ब्रांड्स में निवेश 'चिका लोका' रेस्टोरेंट 'सनसिटी मीडिया एंड एंटरटेनमेंट' प्रोडक्शन कंपनी डिजिटल और गेमिंग प्रोजेक्ट्स फिलहाल, कर्नाटक CID की जांच का उद्देश्य केवल पैसों के स्रोत और लेन-देन की कड़ी को समझना है।  

surbhi जून 11, 2026 0
Former CIA officer investigated after FBI raid uncovers cash, gold bars and luxury watches.
पूर्व CIA अधिकारी पर 382 करोड़ रुपये के घोटाले का आरोप, घर से मिलीं 303 सोने की ईंटें और करोड़ों की नकदी

  वॉशिंगटन: अमेरिका की खुफिया एजेंसी सीआईए के एक पूर्व अधिकारी पर करोड़ों डॉलर की कथित धोखाधड़ी का आरोप लगा है। जांच एजेंसियों का दावा है कि पूर्व अधिकारी डेविड रश ने राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े एक गोपनीय कार्यक्रम का सहारा लेकर सरकारी संसाधनों का दुरुपयोग किया और करीब 4 करोड़ डॉलर (लगभग 382 करोड़ रुपये) की संपत्ति जुटा ली। मामला तब सुर्खियों में आया जब संघीय जांच एजेंसियों ने उनके घर पर छापेमारी की। अधिकारियों के अनुसार, तलाशी के दौरान बड़ी मात्रा में नकदी, सैकड़ों सोने की ईंटें और कई लग्जरी घड़ियां बरामद की गईं। फर्जी गोपनीय मिशन बनाकर किया कथित खेल अमेरिकी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, डेविड रश पर आरोप है कि उन्होंने एक कथित फर्जी सरकारी कार्यक्रम तैयार किया और उसे राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े अत्यंत संवेदनशील मिशन के रूप में प्रस्तुत किया। जांचकर्ताओं का कहना है कि इस कार्यक्रम को "कंटिन्यूटी ऑफ गवर्नमेंट ऑपरेशंस" से जुड़ा बताया गया था। आमतौर पर इस तरह की योजनाएं युद्ध, बड़े आतंकी हमले, प्राकृतिक आपदा या राष्ट्रीय आपातकाल जैसी परिस्थितियों में सरकार के कामकाज को जारी रखने के लिए बनाई जाती हैं। अधिकारियों का आरोप है कि इसी संवेदनशील व्यवस्था की आड़ लेकर रश ने लंबे समय तक सरकारी संसाधनों और विशेष सुविधाओं तक पहुंच बनाई। छापेमारी में मिला सोने और नकदी का जखीरा संघीय जांच ब्यूरो (FBI) द्वारा वर्जीनिया स्थित आवास पर की गई छापेमारी में चौंकाने वाले खुलासे सामने आए। जांच एजेंसियों के अनुसार, घर से 303 सोने की ईंटें बरामद की गईं। इसके अलावा लगभग 20 लाख डॉलर नकद और कई महंगी लग्जरी घड़ियां भी मिलीं। अधिकारियों का मानना है कि बरामद संपत्ति कथित तौर पर उसी फर्जी कार्यक्रम के जरिए अर्जित की गई हो सकती है। संपत्ति के स्रोत और उससे जुड़े वित्तीय लेनदेन की जांच अभी जारी है। अदालत में 'मास्टर मैनिपुलेटर' बताया गया मामले की सुनवाई के दौरान सरकारी वकीलों ने डेविड रश को "मास्टर मैनिपुलेटर" करार दिया। अभियोजन पक्ष का आरोप है कि उन्होंने वर्षों तक अपने शैक्षणिक और पेशेवर रिकॉर्ड के बारे में भ्रामक जानकारी देकर विभिन्न सरकारी संस्थानों में प्रभावशाली पद हासिल किए। जांच एजेंसियों का दावा है कि रश ने अपने अनुभव और योग्यता को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया, जिससे उन्हें ऐसे संवेदनशील कार्यक्रमों तक पहुंच मिली जिनका दुरुपयोग बाद में किया गया। सहयोगियों की भूमिका की भी जांच अधिकारियों के अनुसार, यह भी जांच की जा रही है कि क्या इस कथित योजना में अन्य लोग भी शामिल थे। प्रारंभिक जांच में संकेत मिले हैं कि जिन सहयोगियों को इस कार्यक्रम से जोड़ा गया था, उन्हें कथित धोखाधड़ी की पूरी जानकारी नहीं थी। जांच एजेंसियां अब वित्तीय दस्तावेजों, ईमेल रिकॉर्ड और अन्य संचार माध्यमों की पड़ताल कर रही हैं। CIA की निगरानी व्यवस्था पर उठे सवाल मामले के सामने आने के बाद अमेरिकी खुफिया तंत्र की जवाबदेही और निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठने लगे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि आरोप सही साबित होते हैं, तो यह एक गंभीर संस्थागत विफलता मानी जाएगी। आलोचकों के अनुसार, राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े गोपनीय ढांचे का उपयोग कथित तौर पर वर्षों तक निजी लाभ के लिए किया जाना चिंताजनक है और इससे निगरानी तंत्र की कमजोरियां उजागर होती हैं। फिलहाल हिरासत में हैं डेविड रश मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, डेविड रश वर्तमान में हिरासत में हैं। अदालत ने उन्हें जमानत देने से इनकार कर दिया है। न्यायाधीश का मानना है कि मामले की गंभीरता और उपलब्ध संसाधनों को देखते हुए उनके फरार होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। इसी आधार पर उन्हें फिलहाल हिरासत में रखने का आदेश दिया गया है। आगे और बढ़ सकती हैं मुश्किलें जांच एजेंसियों ने संकेत दिया है कि मामले की पड़ताल आगे बढ़ने के साथ डेविड रश पर अतिरिक्त आरोप भी लगाए जा सकते हैं। वित्तीय अनियमितताओं, धोखाधड़ी, सरकारी संसाधनों के दुरुपयोग और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े नियमों के उल्लंघन जैसे पहलुओं की अलग-अलग जांच की जा रही है। यदि आरोप अदालत में साबित होते हैं, तो यह हाल के वर्षों में अमेरिकी खुफिया तंत्र से जुड़े सबसे बड़े वित्तीय घोटालों में से एक माना जा सकता है।  

Deepshikha जून 9, 2026 0
Maiyan Samman Yojana
Maiyan Samman Yojana: एक साल तक चलता रहा फर्जीवाड़ा, महिला योजना का पुरुष ने उठाया लाभ

सिमडेगा। झारखंड के सिमडेगा  जिले के जलडेगा प्रखंड में मंईयां सम्मान योजना में बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है। डोर-टू-डोर सत्यापन अभियान के दौरान यह सामने आया कि एक पुरुष ने महिलाओं के नाम पर योजना की राशि अवैध रूप से प्राप्त की। मामले के उजागर होने के बाद प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई शुरू कर दी है।   आरोपी ने एक साल तक उठाई सरकारी राशि जांच में पता चला कि टिनगीना निवासी पंकज नाग ने फर्जी तरीके से योजना का लाभ लिया। उसने जून 2025 से मार्च 2026 तक लगातार अपने खाते में हर महीने 2500 रुपये प्राप्त किए। इस तरह उसने करीब एक वर्ष में कुल 30,000 रुपये की सरकारी राशि हड़प ली। यह पूरी राशि मंईयां सम्मान योजना के तहत महिलाओं के नाम पर दी जानी थी।   सीएससी आईडी का दुरुपयोग, प्रज्ञा केंद्र संचालक भी आरोपी जलडेगा बीडीओ डॉ. प्रवीण कुमार के अनुसार, आरोपी ने प्रज्ञा केंद्र संचालक कुमार चाणक्य की सीएससी आईडी का उपयोग कर फर्जी आवेदन किया था। इसी आधार पर योजना का लाभ लिया गया। मामले में दोनों को नामजद आरोपी बनाया गया है। प्रशासन ने तत्काल प्राथमिकी दर्ज कर जलडेगा थाना में कांड संख्या 33/26 के तहत मामला दर्ज कराया है।   प्रशासन की सख्त कार्रवाई और जांच जारी प्रशासन ने आरोपी से 30,000 रुपये की रिकवरी कर राशि नजारत में जमा करा दी है। साथ ही संबंधित बैंक खाते को भी होल्ड कर दिया गया है। इसके अलावा तत्कालीन पंचायत सचिव से भी स्पष्टीकरण मांगा गया है। अधिकारियों ने बताया कि मामले की विस्तृत जांच जारी है और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

Unknown मई 30, 2026 0
BCCL Fraud
BCCL में नौकरी दिलाने के नाम पर 20 करोड़ की ठगी, झारखंड से बंगाल तक फैला नेटवर्क

रांची। भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (BCCL) में नौकरी दिलाने के नाम पर झारखंड में बड़े फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। डकरा, खलारी, पिपरवार, टंडवा और हजारीबाग समेत कई इलाकों के करीब 200 लोगों से लगभग 20 करोड़ रुपये की ठगी किए जाने का आरोप है। मामले की शिकायत दर्ज होने के बाद पुलिस जांच में जुट गई है, जबकि आरोपी फिलहाल फरार बताए जा रहे हैं।   कांग्रेस नेत्री से 24 लाख की ठगी डकरा निवासी कांग्रेस नेत्री इंदिरा देवी ने खलारी थाना में शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके बेटे और भतीजे को BCCL में नौकरी दिलाने का झांसा देकर 24 लाख रुपये ठग लिए गए। आरोपियों ने खुद को प्रभावशाली लोगों से जुड़ा बताते हुए भरोसा जीत लिया और फर्जी ज्वाइनिंग लेटर तक दिखाए।   मेडिकल जांच और ट्रेनिंग का नाटक पीड़ितों के अनुसार, युवकों को धनबाद बुलाकर होटल में ठहराया गया और फिर मेडिकल जांच कराई गई। इसके बाद बायोमीट्रिक हस्ताक्षर और कथित ट्रेनिंग प्रक्रिया भी पूरी कराई गई। अभ्यर्थियों को पोस्टिंग लिस्ट दिखाकर विश्वास दिलाया गया कि उनकी नौकरी पक्की हो चुकी है, लेकिन बाद में किसी को ज्वाइनिंग लेटर नहीं मिला।   नेटवर्क मार्केटिंग की तरह चला गिरोह जांच में सामने आया है कि गिरोह ने पूरी ठगी को नेटवर्क मार्केटिंग मॉडल की तरह चलाया। लोगों को पहले नौकरी का लालच दिया गया और फिर उनसे नए उम्मीदवार जोड़ने को कहा गया। इसी तरह रिश्तेदारों और परिचितों से पैसे जुटाकर करोड़ों रुपये इकट्ठा किए गए।   बंगाल और धनबाद से जुड़े तार मामले में पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी निवासी सागर चक्रवर्ती और धनबाद के सिजुआ निवासी मुस्तकीम अंसारी के नाम सामने आए हैं। दोनों खुद को राजनीतिक प्रभाव वाला व्यक्ति बताते थे। पुलिस के अनुसार, कई आरोपियों के मोबाइल बंद हैं और उनकी तलाश जारी है। खलारी थाना पुलिस ने कहा है कि पैसों के लेनदेन का सत्यापन किया जा रहा है और जल्द आगे की कार्रवाई की जाएगी।

Unknown मई 18, 2026 0
Pune man poses in fake police uniform with banners claiming selection to impress for marriage proposals
शादी के लिए ‘पुलिस’ बना युवक: फर्जी भर्ती का दावा कर चिपकाए पोस्टर, अब केस दर्ज

  महाराष्ट्र के Pune से एक अजीबोगरीब मामला सामने आया है, जहां एक युवक ने शादी के रिश्ते पाने के लिए खुद को पुलिसकर्मी बताकर झूठी कहानी गढ़ ली। लेकिन उसकी यह चाल ज्यादा दिन नहीं चल सकी और अब उस पर कानूनी कार्रवाई हो रही है। शादी के लिए रची पूरी साजिश 26 वर्षीय ऋषिकेश राजू जाधव, जो पेशे से सब्जी विक्रेता है, ने खुद को पुलिस में चयनित दिखाने के लिए शहरभर में पोस्टर और फ्लेक्स बैनर लगवा दिए। इतना ही नहीं, उसने पुलिस की वर्दी पहनकर अपनी तस्वीरें खिंचवाईं और उन्हें व्हाट्सऐप स्टेटस पर भी साझा किया, ताकि लोगों को उसकी “नौकरी” पर यकीन हो जाए। पुलिस के अनुसार, वह शादी न होने से परेशान था और इसी कारण उसने यह झूठा नाटक रचा। जांच में खुली पोल मामले का खुलासा तब हुआ जब पुलिस ने शहर में अवैध पोस्टर और बैनरों के खिलाफ अभियान चलाया। इसी दौरान अधिकारियों की नजर इन पोस्टरों पर पड़ी, जिनमें युवक खुद को पुलिसकर्मी बताता दिख रहा था। जांच के बाद पता चला कि वह Maharashtra Police में चयनित नहीं हुआ था, बल्कि लोगों को गुमराह कर रहा था। बचपन से था पुलिस बनने का सपना पुलिस अधिकारियों ने बताया कि युवक बचपन से ही पुलिस में भर्ती होना चाहता था और उसने कई बार कोशिश भी की, लेकिन ऊंचाई की शर्त पूरी न होने के कारण चयन नहीं हो सका। इसी बीच परिवार ने उसकी शादी के लिए रिश्ते ढूंढने शुरू किए, जिससे वह दबाव में आ गया और अपनी मां से झूठ बोल दिया कि उसकी नौकरी लग गई है। मिठाई बांटी, घर के बाहर लगाया बैनर अपने झूठ को सच साबित करने के लिए उसने मोहल्ले में मिठाई तक बांटी और घर के बाहर बड़ा बैनर भी लगवाया, जिस पर पुलिस का लोगो और उसकी “भर्ती” की बधाई लिखी गई थी। अब कानूनी कार्रवाई फिलहाल पुलिस ने आरोपी के खिलाफ सार्वजनिक सेवक की पहचान का दुरुपयोग करने का मामला दर्ज कर लिया है। अधिकारियों का कहना है कि ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई की जाएगी ताकि कोई भी व्यक्ति इस तरह की धोखाधड़ी न कर सके।  

surbhi अप्रैल 23, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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Deepshikha जून 5, 2026 0