नई दिल्ली, एजेंसियां। भारत और यूनाइटेड किंगडम (यूके) के बीच बहुप्रतीक्षित मुक्त व्यापार समझौता आज 15 जुलाई 2026 से आधिकारिक रूप से लागू हो गया है। करीब तीन वर्षों की बातचीत के बाद लागू हुए इस समझौते से दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश और आर्थिक सहयोग को नई गति मिलने की उम्मीद है। 99% भारतीय निर्यात को मिलेगा शुल्क-मुक्त प्रवेश समझौते के तहत भारत के लगभग 99% निर्यात उत्पादों को ब्रिटेन के बाजार में ड्यूटी-फ्री (शुल्क-मुक्त) प्रवेश मिलेगा। इससे कपड़ा, चमड़ा, इंजीनियरिंग सामान, रत्न एवं आभूषण, कृषि उत्पाद और समुद्री खाद्य पदार्थों के निर्यात को बड़ा बढ़ावा मिलने की संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भारतीय कंपनियों की प्रतिस्पर्धा चीन और बांग्लादेश जैसे देशों के मुकाबले और मजबूत होगी। भारतीय उपभोक्ताओं को भी मिलेगा लाभ FTA के लागू होने के साथ भारत में ब्रिटेन से आयात होने वाले कई उत्पादों पर सीमा शुल्क चरणबद्ध तरीके से कम किया जाएगा। इससे ब्रिटिश कारें, स्कॉच व्हिस्की, चॉकलेट, इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद और प्रीमियम उपभोक्ता वस्तुएं आने वाले वर्षों में अपेक्षाकृत सस्ती हो सकती हैं। व्यापार और रोजगार को मिलेगा बढ़ावा सरकार का कहना है कि यह समझौता दोनों देशों के बीच व्यापार को नई ऊंचाई पर ले जाएगा। भारतीय सेवा क्षेत्र, आईटी कंपनियों और पेशेवरों को भी ब्रिटेन के बाजार में बेहतर अवसर मिलेंगे। अनुमान है कि आने वाले वर्षों में इस समझौते से दोनों देशों के बीच व्यापार में उल्लेखनीय वृद्धि होगी और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
नई दिल्ली: भारत और ब्रिटेन के बीच लंबे समय से प्रतीक्षित मुक्त व्यापार समझौता (India-UK Free Trade Agreement - FTA) आज से लागू हो गया है। इस समझौते को भारत के निर्यात क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। सरकार का लक्ष्य दोनों देशों के बीच मौजूदा 60 अरब डॉलर के द्विपक्षीय व्यापार को अगले 3 से 4 वर्षों में 100 अरब डॉलर तक पहुंचाना है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस समझौते से भारतीय निर्यातकों को ब्रिटेन के विशाल 949 अरब डॉलर के आयात बाजार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने का अवसर मिलेगा। फिलहाल इस बाजार में भारत की हिस्सेदारी 2 प्रतिशत से भी कम है। किन सेक्टरों को होगा सबसे अधिक फायदा? FTA लागू होने के बाद ब्रिटेन ने 117 उत्पादों को छोड़कर लगभग सभी भारतीय उत्पादों पर शून्य (Zero) आयात शुल्क की व्यवस्था लागू की है। इससे भारतीय निर्यातकों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता मजबूत होने की उम्मीद है। सबसे अधिक लाभ मिलने वाले प्रमुख सेक्टर: टेक्सटाइल और परिधान खाद्य एवं कृषि प्रसंस्कृत उत्पाद लेदर एवं फुटवियर इंजीनियरिंग गुड्स फार्मास्यूटिकल्स इन क्षेत्रों के उत्पाद अब ब्रिटेन के बाजार में पहले की तुलना में अधिक प्रतिस्पर्धी कीमतों पर उपलब्ध हो सकेंगे, जिससे भारतीय कंपनियों को चीन और बांग्लादेश जैसे देशों के मुकाबले बढ़त मिलने की संभावना है। भारत ने किन उत्पादों पर दी राहत? समझौते के तहत भारत ने भी लगभग 12,000 टैरिफ लाइनों में से करीब 89.5 प्रतिशत उत्पादों पर सीमा शुल्क कम करने या समाप्त करने पर सहमति दी है। 64 प्रतिशत से अधिक उत्पादों को तत्काल ड्यूटी-फ्री प्रवेश मिलेगा। शेष उत्पादों पर शुल्क चरणबद्ध तरीके से कम किया जाएगा। लगभग 536 उत्पादों, जिनमें कारें भी शामिल हैं, पर आयात शुल्क में क्रमिक कमी की जाएगी। हालांकि, इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) को शुरुआती पांच वर्षों के लिए इस समझौते के दायरे से बाहर रखा गया है। संवेदनशील क्षेत्रों को रखा गया बाहर सरकार ने घरेलू किसानों और कृषि क्षेत्र के हितों को ध्यान में रखते हुए कुछ संवेदनशील क्षेत्रों को इस समझौते से बाहर रखा है। इनमें शामिल हैं: डेयरी उत्पाद अनाज कई प्रमुख कृषि उत्पाद इस कदम का उद्देश्य घरेलू उत्पादन और किसानों के हितों की सुरक्षा करना है। सेवा क्षेत्र और रोजगार के नए अवसर यह समझौता केवल वस्तुओं के व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि डिजिटल सेवाओं और प्रोफेशनल सर्विसेज के लिए भी नए अवसर लेकर आया है। विशेषज्ञों के अनुसार इससे: भारतीय आईटी और सेवा कंपनियों को लाभ मिलेगा। कुशल पेशेवरों के लिए नए रोजगार अवसर बनेंगे। भारत में Global Capability Centres (GCCs) की संख्या बढ़ सकती है। विदेशी कंपनियों का निवेश आकर्षित होने की संभावना बढ़ेगी। भारत के लिए क्यों है अहम यह समझौता? ब्रिटेन दुनिया के बड़े आयातक देशों में शामिल है और हर साल लगभग 949 अरब डॉलर मूल्य के उत्पादों का आयात करता है। अभी इस बाजार में भारत की हिस्सेदारी बेहद सीमित है। FTA लागू होने के बाद भारतीय कंपनियों को कम शुल्क, बेहतर बाजार पहुंच और अधिक प्रतिस्पर्धी कीमतों का लाभ मिलेगा। यदि व्यापार लक्ष्य के अनुसार आगे बढ़ता है, तो यह समझौता भारत के निर्यात, विनिर्माण और रोजगार सृजन को नई गति दे सकता है।
भारत और यूनाइटेड किंगडम (यूके) के बीच हुआ व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौता (Comprehensive Economic and Trade Agreement - CETA) 15 जुलाई 2026 से लागू होने जा रहा है। इस समझौते के लागू होने के बाद दोनों देशों के बीच व्यापार को नई गति मिलने की उम्मीद है। एक ओर भारत में कई ब्रिटिश उत्पाद पहले की तुलना में कम कीमत पर उपलब्ध होंगे, वहीं दूसरी ओर भारतीय उत्पादों को ब्रिटेन के बाजार में बिना सीमा शुल्क (Zero Duty) के प्रवेश का लाभ मिलेगा। भारतीय ग्राहकों को किन चीजों में मिलेगी राहत? नए व्यापार समझौते के तहत ब्रिटेन से आयात होने वाले कई लोकप्रिय उत्पादों पर आयात शुल्क में कमी आएगी। इसका सीधा असर इन वस्तुओं की कीमतों पर पड़ सकता है। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं: स्कॉच व्हिस्की जिन चॉकलेट बिस्किट कॉस्मेटिक और ब्यूटी प्रोडक्ट्स कुछ प्रीमियम फूड और लाइफस्टाइल उत्पाद हालांकि कीमतों में वास्तविक कमी इस बात पर भी निर्भर करेगी कि आयातक और कंपनियां शुल्क में मिली राहत का कितना लाभ ग्राहकों तक पहुंचाती हैं। भारतीय निर्यातकों के लिए खुलेंगे नए अवसर इस समझौते का सबसे बड़ा फायदा भारतीय उद्योगों और निर्यातकों को मिलने की संभावना है। अब कई भारतीय उत्पादों को ब्रिटेन में बिना किसी आयात शुल्क के भेजा जा सकेगा, जिससे उनकी प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ेगी। इन क्षेत्रों को विशेष लाभ मिलने की उम्मीद है: वस्त्र एवं रेडीमेड गारमेंट्स हस्तशिल्प कालीन चमड़ा और फुटवियर रत्न एवं आभूषण इंजीनियरिंग उत्पाद कृषि एवं खाद्य प्रसंस्कृत उत्पाद विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भारतीय निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है और रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। व्यापार और निवेश को मिलेगा नया प्रोत्साहन भारत और ब्रिटेन के बीच यह समझौता केवल वस्तुओं के व्यापार तक सीमित नहीं है। इससे निवेश, सप्लाई चेन, विनिर्माण और विभिन्न उद्योगों के बीच सहयोग को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है। सरकार का मानना है कि यह समझौता भारतीय कंपनियों को वैश्विक बाजार में अपनी पहुंच बढ़ाने में मदद करेगा और दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को नई ऊंचाई देगा। उपभोक्ताओं और उद्योगों पर क्या होगा असर? विशेषज्ञों के अनुसार, ब्रिटिश उत्पादों की कीमतों में धीरे-धीरे कमी देखने को मिल सकती है, जबकि भारतीय निर्यातकों को बड़े बाजार तक आसान पहुंच मिलेगी। इससे घरेलू उद्योगों की प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और व्यापारिक गतिविधियों में तेजी आने की संभावना है। इसके अलावा, निर्यात बढ़ने से मैन्युफैक्चरिंग, टेक्सटाइल, एमएसएमई और कृषि आधारित उद्योगों को भी लाभ मिल सकता है। भारत-यूके व्यापार संबंधों में नया अध्याय करीब एक वर्ष पहले हस्ताक्षरित भारत-यूके व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौता अब औपचारिक रूप से लागू हो रहा है। इसे दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। आने वाले समय में यह समझौता भारतीय निर्यात, विदेशी निवेश और आर्थिक विकास को नई गति देने में अहम भूमिका निभा सकता है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। भारत और ब्रिटेन के बीच मुक्त व्यापार समझौता 15 जुलाई 2026 से लागू होने जा रहा है। इसके तहत भारत सरकार ने ब्रिटेन से आयात होने वाले वाहनों पर शुल्क रियायत (ड्यूटी कंसेशन) का लाभ लेने के लिए नए नियम अधिसूचित कर दिए हैं। इस फैसले से ब्रिटेन में बनी कई लग्जरी कारों की कीमतों में बड़ी कमी आने की संभावना है। आयात शुल्क में मिलेगी बड़ी राहत समझौते के तहत निर्धारित वार्षिक कोटा के भीतर आयात होने वाली ब्रिटेन में निर्मित कारों पर आयात शुल्क में भारी कटौती की जाएगी। पहले वर्ष में कुछ श्रेणी की पूरी तरह आयातित लग्जरी कारों पर सीमा शुल्क 110% से घटाकर 30% किया जाएगा, जिससे उनकी कीमतें काफी कम हो सकती हैं। किन गाड़ियों पर होगा असर? इस समझौते का सबसे अधिक लाभ रोल्स-रॉयस, एस्टन मार्टिन, मैकलारेन, लैंड रोवर, जगुआर और MINI जैसी ब्रिटेन में निर्मित प्रीमियम कारों को मिल सकता है। उद्योग विशेषज्ञों का अनुमान है कि कुछ मॉडलों की कीमतों में ₹1 करोड़ से ₹3 करोड़ तक की कमी आ सकती है। सरकार ने तय की पात्रता की शर्तें सरकार ने स्पष्ट किया है कि शुल्क रियायत का लाभ केवल अधिकृत आयातकों और निर्धारित कोटा के तहत ही मिलेगा। इसके लिए ब्रिटेन से जारी Certificate of Origin सहित सभी निर्धारित दस्तावेज जमा करना अनिवार्य होगा। साथ ही, घरेलू ऑटो और इलेक्ट्रिक वाहन उद्योग के हितों की सुरक्षा के लिए भी विशेष प्रावधान किए गए हैं। ऑटो सेक्टर में बढ़ेगी प्रतिस्पर्धा विशेषज्ञों का मानना है कि FTA लागू होने के बाद भारत के प्रीमियम ऑटोमोबाइल बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और उपभोक्ताओं को अधिक विकल्प मिलेंगे। हालांकि, यह रियायत केवल तय सीमा (कोटा) के भीतर आयात होने वाले वाहनों पर ही लागू होगी।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।