Fuel Rate Update

Biscuits Recipe
बिना मैदे के बनाएं कुरकुरे बिस्किट, सेहत और स्वाद दोनों का मिलेगा फायदा

नई  दिल्ली, एजेंसियां। शाम की चाय हो या बच्चों की हल्की भूख, बिस्किट लगभग हर घर की पसंद होते हैं। हालांकि बाजार में मिलने वाले ज्यादातर बिस्किट मैदे और प्रिजर्वेटिव्स से बने होते हैं, जो सेहत के लिए ज्यादा फायदेमंद नहीं माने जाते। ऐसे में अगर घर पर ही गेहूं के आटे से स्वादिष्ट और खस्ता बिस्किट तैयार किए जाएं, तो यह स्वाद और सेहत दोनों के लिए बेहतर विकल्प साबित हो सकते हैं। खास बात यह है कि इन बिस्किट्स को बनाने के लिए ज्यादा सामग्री या मेहनत की जरूरत नहीं होती। घर की रसोई में मौजूद चीजों से ही इन्हें आसानी से तैयार किया जा सकता है।   बिस्किट बनाने के लिए जरूरी सामग्री गेहूं के आटे के बिस्किट बनाने के लिए दो कप गेहूं का आटा, आधा कप पिसी चीनी, 4 से 5 बड़े चम्मच देसी घी या तेल, आधा चम्मच इलायची पाउडर, थोड़ा सफेद तिल या सौंफ और एक चुटकी नमक की जरूरत होती है। आटा गूंथने के लिए हल्का गुनगुना दूध या पानी इस्तेमाल किया जा सकता है।   सही मोयन से आएगा खस्ता स्वाद बिस्किट को बाजार जैसा खस्ता बनाने के लिए मोयन सबसे अहम भूमिका निभाता है। सबसे पहले आटे में चीनी, इलायची और नमक मिलाएं। इसके बाद घी डालकर दोनों हाथों से अच्छी तरह रगड़ें। जब आटा मुट्ठी में दबाने पर बंधने लगे, तो समझिए मोयन सही है। इसके बाद थोड़ा-थोड़ा दूध या पानी डालकर सख्त आटा गूंथ लें। आटा ज्यादा मुलायम नहीं होना चाहिए, वरना बिस्किट कुरकुरे नहीं बनेंगे। आटे को 10 से 15 मिनट ढककर रख दें।   धीमी आंच पर तलें या बेक करें   आटे की छोटी-छोटी लोइयां बनाकर उन्हें हल्का दबाएं और मनचाहा आकार दें। डिजाइन बनाने के लिए कांटे या चाकू का इस्तेमाल भी किया जा सकता है। इसके बाद कड़ाही में हल्का गर्म तेल या घी लें और धीमी आंच पर बिस्किट्स को सुनहरा होने तक तलें। अगर हेल्दी विकल्प चाहते हैं, तो इन्हें 180 डिग्री सेल्सियस पर ओवन या एयर फ्रायर में 15 से 20 मिनट तक बेक भी किया जा सकता है।   हफ्तों तक रहेगा स्वाद बरकरार तलने या बेक करने के बाद बिस्किट्स को पूरी तरह ठंडा होने दें। ठंडे होने के बाद ये और ज्यादा कुरकुरे हो जाते हैं। इन्हें एयरटाइट डिब्बे में स्टोर करने पर कई दिनों तक ताजा रखा जा सकता है। घर पर बने ये आटा बिस्किट स्वादिष्ट होने के साथ सेहतमंद भी होते हैं। यही वजह है कि एक बार इन्हें खाने के बाद बाजार के बिस्किट फीके लगने लगते हैं।

Unknown मई 25, 2026 0
Customers refuel vehicles at a petrol pump after fuel prices rise across major Indian cities.
पेट्रोल-डीजल फिर महंगा: 10 दिन में चौथी बार बढ़े दाम, आम आदमी पर बढ़ा बोझ

देशभर में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में एक बार फिर बढ़ोतरी की गई है। सोमवार (25 मई) से पेट्रोल ₹2.61 प्रति लीटर और डीजल ₹2.71 प्रति लीटर महंगा हो गया है। मई 2026 में यह चौथी बार है जब ईंधन के दाम बढ़ाए गए हैं। लगातार बढ़ती कीमतों से आम लोगों की जेब पर असर साफ दिखाई देने लगा है। तेल कंपनियों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और रुपये की कमजोरी के कारण इम्पोर्ट लागत बढ़ी है, जिसके चलते दाम बढ़ाने पड़े। चार महानगरों में पेट्रोल के नए दाम एमएस (पेट्रोल) खुदरा बिक्री मूल्य (RSP) Delhi - ₹102.12 प्रति लीटर (+₹2.61) Kolkata - ₹113.51 प्रति लीटर (+₹2.87) Mumbai - ₹111.21 प्रति लीटर (+₹2.72) Chennai - ₹107.77 प्रति लीटर (+₹2.46) चार महानगरों में डीजल के नए दाम हाई स्पीड डीजल खुदरा बिक्री मूल्य (RSP) Delhi - ₹95.20 प्रति लीटर (+₹2.71) Kolkata - ₹99.82 प्रति लीटर (+₹2.80) Mumbai - ₹97.83 प्रति लीटर (+₹2.81) Chennai - ₹99.55 प्रति लीटर (+₹2.57) मई 2026 में कब-कब बढ़े दाम? मई महीने में अब तक चार बार पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ चुके हैं: 15 मई 2026: पहली बार करीब ₹3 प्रति लीटर की बड़ी बढ़ोतरी 19 मई 2026: पेट्रोल लगभग 87 पैसे और डीजल 91 पैसे महंगा 23 मई 2026: फिर पेट्रोल 87 पैसे और डीजल 91 पैसे बढ़े 25 मई 2026: पेट्रोल ₹2.61 और डीजल ₹2.71 प्रति लीटर महंगा आम लोगों में नाराजगी ईंधन की लगातार बढ़ती कीमतों को लेकर लोगों में नाराजगी बढ़ रही है। दिल्ली के जनपथ स्थित एक पेट्रोल पंप पर ग्राहक ने कहा कि रोजाना की कमाई का बड़ा हिस्सा अब पेट्रोल पर खर्च हो रहा है। ग्राहक ने कहा कि महंगाई पहले ही लोगों की परेशानी बढ़ा चुकी है, ऐसे में बार-बार ईंधन महंगा होने से आम आदमी पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है। उसने सरकार से पेट्रोल-डीजल की कीमतों को नियंत्रित करने की मांग की।  

surbhi मई 25, 2026 0
Petrol and diesel price board displaying updated fuel rates across Indian cities on May 12, 2026
Petrol Diesel Price Today: कहीं सस्ता हुआ पेट्रोल-डीजल, तो कहीं दाम रहे स्थिर, देखें 12 मई की नई रेट लिस्ट

12 मई 2026 को देशभर में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में मिलाजुला रुख देखने को मिला। कई शहरों में तेल की कीमतें स्थिर रहीं, जबकि कुछ जगहों पर मामूली राहत दर्ज की गई है। खासतौर पर Lucknow, Jamshedpur और Gurugram में पेट्रोल-डीजल के दाम घटे हैं। वहीं Bengaluru में पेट्रोल की कीमत में हल्की बढ़ोतरी हुई है। तेल कंपनियों की ओर से जारी नई दरों के अनुसार, बिहार और उत्तर प्रदेश के कुछ जिलों में ग्राहकों को राहत मिली है। दूसरी ओर Mumbai, Delhi और Kolkata जैसे बड़े शहरों में कीमतें स्थिर बनी हुई हैं। पेट्रोल के ताजा दाम आज Lucknow में पेट्रोल 8 पैसे सस्ता होकर 94.65 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है। वहीं Muzaffarpur में भी 9 पैसे की गिरावट दर्ज की गई है। सबसे बड़ी राहत Jamshedpur में देखने को मिली, जहां पेट्रोल 51 पैसे प्रति लीटर सस्ता हुआ है। इसके अलावा Chennai और Gurugram में भी मामूली कटौती हुई है। वहीं Bengaluru में पेट्रोल की कीमत 4 पैसे बढ़ी है। शहर आज का रेट (₹/लीटर) बदलाव लखनऊ 94.65 -0.08 नोएडा 95.05 स्थिर पटना 105.23 स्थिर मुजफ्फरपुर 105.98 -0.09 गया 106.31 स्थिर भागलपुर 106.27 स्थिर रांची 97.86 स्थिर धनबाद 97.82 स्थिर देवघर 97.64 स्थिर जमशेदपुर 97.80 -0.51 भोपाल 106.52 स्थिर नई दिल्ली 94.77 स्थिर कोलकाता 105.45 स्थिर मुंबई 103.54 स्थिर चेन्नई 100.80 -0.05 गुरुग्राम 95.36 -0.15 बेंगलुरु 102.96 +0.04 डीजल के दाम में कहां मिली राहत? डीजल की कीमतों में भी कुछ शहरों में राहत देखने को मिली है। Jamshedpur में डीजल 50 पैसे प्रति लीटर सस्ता हुआ है, जो आज की सबसे बड़ी गिरावट है। Lucknow में डीजल 10 पैसे और Muzaffarpur में 8 पैसे सस्ता हुआ है। वहीं Patna, Gaya और Ranchi समेत कई शहरों में कीमतें स्थिर बनी हुई हैं। शहर आज का रेट (₹/लीटर) बदलाव लखनऊ 87.76 -0.10 नोएडा 88.19 स्थिर पटना 91.49 स्थिर मुजफ्फरपुर 92.17 -0.08 गया 92.50 स्थिर भागलपुर 92.44 स्थिर रांची 92.62 स्थिर धनबाद 92.57 स्थिर देवघर 92.34 स्थिर जमशेदपुर 92.55 -0.50 भोपाल 91.89 स्थिर नई दिल्ली 87.67 स्थिर कोलकाता 92.02 स्थिर मुंबई 90.03 स्थिर चेन्नई 92.39 -0.01 गुरुग्राम 87.83 -0.14 बेंगलुरु 90.99 स्थिर आम लोगों और ट्रांसपोर्ट सेक्टर को राहत तेल की कीमतों में मामूली कटौती से आम लोगों के साथ-साथ ट्रांसपोर्ट सेक्टर को भी राहत मिलने की उम्मीद है। खासकर उन शहरों में जहां लगातार महंगाई का असर देखा जा रहा था, वहां ईंधन कीमतों में गिरावट लोगों के बजट पर थोड़ा असर कम कर सकती है।  

surbhi मई 12, 2026 0
Fuel station display showing petrol and diesel prices across Indian cities on 9 April 2026
पेट्रोल-डीजल के नए दाम जारी: 9 अप्रैल 2026 के ताजा रेट्स, कई शहरों में बदलाव

देशभर में हर सुबह की तरह आज, 9 अप्रैल 2026 को भी तेल कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल की नई कीमतें जारी कर दी हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के उतार-चढ़ाव के बीच घरेलू स्तर पर कीमतों में मिला-जुला रुख देखने को मिला है। जहां नई दिल्ली और मुंबई जैसे महानगरों में दाम स्थिर बने हुए हैं, वहीं कई अन्य शहरों में हल्की बढ़ोतरी और गिरावट दर्ज की गई है। अगर आप आज वाहन में ईंधन भरवाने की योजना बना रहे हैं, तो ताजा रेट्स पर एक नजर जरूर डाल लें, क्योंकि अलग-अलग शहरों में कीमतों का अंतर आपके खर्च को प्रभावित कर सकता है। आज पेट्रोल की कीमतें: कहां सस्ता, कहां महंगा? देश के प्रमुख शहरों में पेट्रोल की कीमतें स्थिर बनी हुई हैं: नई दिल्ली: ₹94.77 प्रति लीटर मुंबई: ₹103.54 प्रति लीटर कोलकाता: ₹105.41 प्रति लीटर चेन्नई: ₹100.80 प्रति लीटर हालांकि, अन्य शहरों में बदलाव देखने को मिला: पटना: ₹105.42 (+0.19) मुजफ्फरपुर: ₹106.36 (+0.38) जमशेदपुर: ₹98.64 (+0.84) नोएडा: ₹94.90 (-0.15) बेंगलुरु: ₹102.96 (-0.03) भोपाल: ₹106.52 (-0.04) भागलपुर: ₹105.84 (-0.56) डीजल की कीमतों में क्या बदलाव आया? डीजल के दाम भी कई शहरों में बदले हैं, जबकि कुछ जगहों पर स्थिरता बनी हुई है: नई दिल्ली: ₹87.67 प्रति लीटर मुंबई: ₹90.03 प्रति लीटर कोलकाता: ₹92.02 प्रति लीटर चेन्नई: ₹92.39 प्रति लीटर अन्य प्रमुख बदलाव: जमशेदपुर: ₹93.38 (+0.83) पटना: ₹91.67 (+0.18) मुजफ्फरपुर: ₹92.53 (+0.36) नोएडा: ₹88.01 (-0.18) बेंगलुरु: ₹90.99 (-0.07) भागलपुर: ₹92.04 (-0.53) धनबाद: ₹92.62 (-0.03) भोपाल: ₹91.89 (-0.04) कैसे तय होती हैं पेट्रोल-डीजल की कीमतें? भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल आयात करता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में बदलाव का सीधा असर घरेलू ईंधन दरों पर पड़ता है। इसके अलावा: केंद्र सरकार की एक्साइज ड्यूटी राज्य सरकारों का वैट (VAT) डीलर कमीशन इन सभी कारकों को जोड़कर अंतिम खुदरा कीमत तय होती है। यही वजह है कि अलग-अलग राज्यों और शहरों में पेट्रोल-डीजल के दाम अलग होते हैं। SMS से ऐसे चेक करें अपने शहर का रेट आप घर बैठे मोबाइल के जरिए भी ताजा कीमतें जान सकते हैं: Indian Oil: RSP <शहर कोड> लिखकर 9224992249 पर भेजें BPCL: RSP लिखकर 9223112222 पर SMS करें HPCL: HP Price लिखकर 9222201122 पर भेजें

surbhi अप्रैल 9, 2026 0
Cold watermelon health
क्या सीधे फ्रिज से निकला तरबूज खाना सेहत के लिए नुकसानदायक है? जानें एक्सपर्ट  की राय

नई दिल्ली, एजेंसियां। गर्मी के मौसम में तरबूज सिर्फ स्वाद ही नहीं, बल्कि शरीर को ठंडक और हाइड्रेशन देने वाला सुपरफ्रूट भी माना जाता है। इसमें लगभग 92 प्रतिशत पानी होता है, इसलिए तेज धूप और पसीने के मौसम में यह शरीर के लिए काफी फायदेमंद साबित होता है। लेकिन अक्सर लोग इसे खाने के तरीके में ऐसी गलतियां कर बैठते हैं, जो फायदे की जगह नुकसान पहुंचा सकती हैं। खासकर फ्रिज से निकाले गए बहुत ठंडे तरबूज को तुरंत खाना कई लोगों के लिए परेशानी की वजह बन सकता है। सीनियर डाइटिशियन गीतिका चोपड़ा के अनुसार, तरबूज को सही तापमान और सही समय पर खाना ज्यादा बेहतर माना जाता है।   तरबूज क्यों है गर्मियों का बेस्ट फ्रूट? तरबूज का वैज्ञानिक नाम Citrullus lanatus है और इसका मूल अफ्रीका माना जाता है। यह लो-कैलोरी फल है, इसलिए वजन नियंत्रित रखने वालों के लिए भी अच्छा विकल्प है। इसमें विटामिन C, विटामिन A, विटामिन B6, पोटैशियम, लाइकोपीन और बीटा-कैरोटीन जैसे जरूरी पोषक तत्व पाए जाते हैं। यही वजह है कि यह इम्यूनिटी बढ़ाने, शरीर को ठंडक देने और ब्लड प्रेशर को संतुलित रखने में मददगार माना जाता है।   बहुत ठंडा तरबूज खाने से क्या होता है? एक्सपर्ट के मुताबिक, फ्रिज से निकले तरबूज को तुरंत खाने पर शरीर को उसे सामान्य तापमान तक लाने के लिए अतिरिक्त मेहनत करनी पड़ती है। इससे पाचन प्रक्रिया थोड़ी धीमी हो सकती है। कई लोगों को इसके बाद गैस, पेट फूलना, भारीपन या असहजता महसूस हो सकती है। जिन लोगों का पेट पहले से संवेदनशील होता है, उन्हें यह दिक्कत ज्यादा हो सकती है।   गले पर भी पड़ सकता है असर बहुत ज्यादा ठंडा तरबूज कुछ लोगों में गले की खराश, खांसी या हल्की जलन का कारण भी बन सकता है। खासकर वे लोग जो लंबे समय तक एसी में रहते हैं या जिनकी इम्यूनिटी कमजोर होती है, उन्हें इससे जल्दी परेशानी हो सकती है। इसलिए बर्फ जैसा ठंडा तरबूज खाना हर किसी के लिए सही नहीं माना जाता।   स्टोर करने में सबसे ज्यादा होती है गलती तरबूज को काटकर लंबे समय तक फ्रिज में रखना भी नुकसानदायक हो सकता है। ऐसा करने से उसमें बैक्टीरिया पनपने का खतरा बढ़ जाता है और उसका पोषण स्तर, खासकर विटामिन C, धीरे-धीरे कम होने लगता है। खुले कटे फल को ज्यादा देर तक रखना सेहत के लिए सही नहीं है।   तरबूज खाने का सही तरीका डाइटिशियन की सलाह है कि तरबूज को हल्का ठंडा या रूम टेंपरेचर पर खाना सबसे बेहतर रहता है। अगर तरबूज कटा हुआ है, तो उसे ज्यादा देर तक स्टोर करने के बजाय जल्दी खा लेना चाहिए। गर्मी में सेहतमंद रहने के लिए सिर्फ क्या खा रहे हैं, यह नहीं बल्कि कैसे खा रहे हैं, यह भी उतना ही जरूरी है।

Unknown अप्रैल 9, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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Deepshikha जून 5, 2026 0