वैश्विक बाजारों में कमजोर संकेतों और पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच भारतीय शेयर बाजार ने गुरुवार को भारी गिरावट के साथ शुरुआत की। हालांकि कारोबार आगे बढ़ने के साथ बाजार ने कुछ हद तक रिकवरी दिखाई और शुरुआती नुकसान की भरपाई करने की कोशिश की। शुरुआत में 500 अंकों से ज्यादा टूटा सेंसेक्स कारोबार की शुरुआत में बीएसई सेंसेक्स 500 अंकों से अधिक लुढ़क गया, जबकि एनएसई निफ्टी 50 भी महत्वपूर्ण स्तर से नीचे फिसल गया। सुबह करीब 9:20 बजे सेंसेक्स 284.51 अंक यानी 0.38 प्रतिशत की गिरावट के साथ 74,061.66 अंक पर कारोबार कर रहा था। वहीं निफ्टी 67.25 अंक यानी 0.29 प्रतिशत टूटकर 23,338.35 अंक पर पहुंच गया। हालांकि दिन चढ़ने के साथ खरीदारी लौटने लगी और बाजार में सुधार देखने को मिला। बाद में सेंसेक्स करीब 100 अंकों की बढ़त के साथ कारोबार करता दिखाई दिया। इन शेयरों में दिखी मजबूती शुरुआती कमजोरी के बावजूद कुछ प्रमुख शेयरों में अच्छी खरीदारी देखने को मिली। इनमें शामिल रहे— इटरनल टाइटन अडानी पोर्ट्स एशियन पेंट्स टेक महिंद्रा भारत इलेक्ट्रॉनिक्स टीसीएस एनटीपीसी हिंदुस्तान यूनिलीवर इन शेयरों में आई मजबूती ने बाजार को संभालने में अहम भूमिका निभाई। इन दिग्गज शेयरों पर रहा दबाव सेंसेक्स के 30 शेयरों में से 18 शेयर गिरावट के साथ खुले। सबसे ज्यादा दबाव ट्रेंट पर देखने को मिला। गिरावट वाले प्रमुख शेयरों में शामिल रहे— ट्रेंट इन्फोसिस एचडीएफसी बैंक बजाज फिनसर्व इंडिगो सन फार्मा कोटक महिंद्रा बैंक एचसीएल टेक व्यापक बाजार का हाल मुख्य सूचकांकों के साथ-साथ व्यापक बाजार में भी कमजोरी दर्ज की गई। निफ्टी मिडकैप सूचकांक में 0.22 प्रतिशत की गिरावट निफ्टी स्मॉलकैप सूचकांक में 0.15 प्रतिशत की गिरावट सेक्टोरल सूचकांकों में सूचना प्रौद्योगिकी, रियल्टी और निजी बैंकिंग शेयरों में सबसे अधिक दबाव देखा गया। वहीं दूसरी ओर— उपभोक्ता टिकाऊ वस्तु क्षेत्र तेल एवं गैस क्षेत्र रसायन क्षेत्र में सकारात्मक कारोबार देखने को मिला। रुपये में हल्की मजबूती इस बीच भारतीय मुद्रा में भी मामूली सुधार देखने को मिला। रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 7 पैसे मजबूत होकर 95.69 के स्तर पर खुला। बाजार में गिरावट की वजह क्या रही? विश्लेषकों के अनुसार बाजार पर सबसे बड़ा दबाव पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का रहा। क्षेत्र में सैन्य गतिविधियों और भू-राजनीतिक अनिश्चितता ने वैश्विक निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। ऐसे माहौल में निवेशक जोखिम वाले निवेश से दूरी बनाते हैं, जिसका असर शेयर बाजारों पर दिखाई देता है। इसके अलावा निवेशकों की नजर भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की बैठक के नतीजों पर भी टिकी हुई है। ब्याज दरों और आर्थिक वृद्धि को लेकर आने वाले फैसले बाजार की अगली दिशा तय कर सकते हैं। निवेशकों के लिए क्या संकेत? विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा समय में वैश्विक घटनाक्रम बाजार की चाल को प्रभावित कर रहे हैं। ऐसे में निवेशकों को अल्पकालिक उतार-चढ़ाव से घबराने के बजाय मजबूत कंपनियों और दीर्घकालिक निवेश रणनीति पर ध्यान देना चाहिए।
Iran US Ceasefire: ईरान और अमेरिका के बीच जारी 14 दिनों का युद्धविराम 22 अप्रैल को खत्म होने वाला है। ऐसे में दोनों देशों के बीच नए दौर की बातचीत की तैयारी तेज हो गई है। लेकिन होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते तनाव और ईरानी जहाज की कथित जब्ती के बाद हालात फिर से अनिश्चित हो गए हैं। पाकिस्तान इस बातचीत का मध्यस्थ बनकर एक बार फिर शांति वार्ता कराने की कोशिश कर रहा है, लेकिन मौजूदा हालात इसे मुश्किल बना रहे हैं। होर्मुज तनाव से बढ़ी चिंता हाल ही में अमेरिका द्वारा एक ईरानी ध्वज वाले मालवाहक जहाज को रोककर जब्त करने के बाद ईरान ने कड़ा विरोध जताया है। अमेरिका का दावा है कि यह जहाज उसके लगाए गए प्रतिबंधों से बचने की कोशिश कर रहा था। इस कार्रवाई के बाद ईरान की संयुक्त सैन्य कमान ने जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी है। वहीं, ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने पाकिस्तान के विदेश मंत्री से बातचीत में कहा कि अमेरिका का रवैया “दोहरा और अस्थिर” है। ईरान का सख्त रुख: अभी कोई वार्ता नहीं ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने स्पष्ट कर दिया है कि फिलहाल अमेरिका के साथ किसी भी तरह की बातचीत की कोई योजना नहीं है। उन्होंने कहा: “अभी हमारे पास अगले दौर की वार्ता के लिए कोई निर्णय नहीं है।” यह बयान उस समय आया है जब पाकिस्तान में दूसरे दौर की बातचीत की तैयारी चल रही थी। ट्रंप की चेतावनी से बढ़ा तनाव अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका ने ईरान को एक “बेहतरीन डील” दी है और अब फैसला ईरान को करना है। ट्रंप ने चेतावनी देते हुए कहा: ईरान या तो समझौता करे या फिर “तबाही” के लिए तैयार रहे अमेरिकी सेना ईरान के पावर प्लांट और पुलों को निशाना बना सकती है उनके इस बयान ने तनाव और बढ़ा दिया है। बातचीत में सबसे बड़ा रोड़ा क्या है? ईरान का आरोप है कि अमेरिका लगातार युद्धविराम की शर्तों का उल्लंघन कर रहा है। इनमें शामिल हैं: ईरानी जहाजों पर कार्रवाई समुद्री रास्तों पर दबाव क्षेत्रीय संघर्षों में हस्तक्षेप ईरान का कहना है कि इन हालात में बातचीत का माहौल नहीं बन पा रहा है। पाकिस्तान की कूटनीतिक कोशिशें तेज पाकिस्तान एक बार फिर मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। पिछले 24 घंटों में पाकिस्तान ने अमेरिका और ईरान दोनों से संपर्क तेज कर दिए हैं। पाक गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने ईरानी दूतावास का दौरा किया ईरान को बातचीत के लिए मनाने की कोशिश जारी दूसरे दौर की बैठक की तैयारी चल रही है पहली वार्ता रही थी बेनतीजा 11–12 अप्रैल को इस्लामाबाद में दोनों देशों के बीच 21 घंटे लंबी बातचीत हुई थी, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला। अब सभी की नजरें दूसरे दौर की संभावित बैठक पर टिकी हैं, जो या तो तनाव कम कर सकती है या हालात और बिगाड़ सकती है।
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच China ने United States को कड़ा संदेश दिया है। होर्मुज जलडमरूमध्य पर अमेरिकी नाकेबंदी के बाद चीन ने साफ कहा है कि वह उसके व्यापारिक और ऊर्जा हितों में दखल बर्दाश्त नहीं करेगा। चीन के रक्षा मंत्री का सख्त बयान चीन के रक्षा मंत्री Dong Jun ने चेतावनी देते हुए कहा: अमेरिका होर्मुज स्ट्रेट पर नाकेबंदी न करे चीन-ईरान संबंधों में हस्तक्षेप से बचे यह जलमार्ग चीन के लिए खुला रहना चाहिए उन्होंने कहा कि चीन के Iran के साथ महत्वपूर्ण ट्रेड और एनर्जी समझौते हैं, इसलिए किसी भी तरह की बाधा स्वीकार नहीं होगी। होर्मुज जलडमरूमध्य क्यों है अहम? Strait of Hormuz दुनिया के सबसे अहम समुद्री मार्गों में से एक है। चीन के लिए इसकी अहमियत: करीब 40% कच्चा तेल यहीं से आता है लगभग 30% LNG सप्लाई इसी रास्ते से होती है इसी वजह से चीन लगातार सीजफायर और स्थिरता की मांग कर रहा है। अमेरिका की नाकेबंदी से बढ़ा तनाव Donald Trump के निर्देश पर अमेरिका ने होर्मुज स्ट्रेट के जरिए Iran के बंदरगाहों तक जाने वाले समुद्री रास्तों पर नाकेबंदी लागू कर दी है। United States Central Command (CENTCOM) के मुताबिक: यह नाकेबंदी सभी जहाजों पर लागू होगी किसी देश के साथ भेदभाव नहीं किया जाएगा ईरानी पोर्ट्स से जुड़े हर समुद्री मार्ग पर निगरानी रहेगी पेट्रोडॉलर vs युआन की जंग? कुछ एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह कदम सिर्फ सुरक्षा नहीं, बल्कि आर्थिक रणनीति भी हो सकता है। खाड़ी क्षेत्र में कुछ तेल सौदे युआन में हो रहे हैं यह पारंपरिक पेट्रोडॉलर सिस्टम को चुनौती देता है ऐसे में अमेरिका की कार्रवाई चीन की आर्थिक पकड़ को कमजोर करने की कोशिश भी मानी जा रही है सीजफायर के पक्ष में चीन तनाव के बीच चीन के विदेश मंत्रालय ने कहा: होर्मुज की सुरक्षा और स्थिरता पूरी दुनिया के हित में है बिना रुकावट जहाजों की आवाजाही जरूरी है सभी पक्षों को संयम बरतना चाहिए क्या आगे बढ़ेगा टकराव? अमेरिका की नाकेबंदी और चीन की चेतावनी के बाद हालात और संवेदनशील हो गए हैं। अगर कूटनीतिक हल नहीं निकला, तो इसका असर: वैश्विक तेल कीमतों सप्लाई चेन और अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर साफ तौर पर देखने को मिल सकता है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव को कम करने के लिए पाकिस्तान द्वारा की जा रही मध्यस्थता की कोशिशों पर कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। थरूर ने स्पष्ट किया कि इस मामले में भारत और पाकिस्तान की तुलना नहीं की जा सकती क्योंकि दोनों देशों की परिस्थितियां और हित पूरी तरह भिन्न हैं। उन्होंने दावा किया कि पाकिस्तान अपनी मर्जी से नहीं, बल्कि अमेरिका के इशारे पर यह भूमिका निभा रहा है। पाकिस्तान की भौगोलिक और आंतरिक मजबूरी शशि थरूर ने पाकिस्तान की सक्रियता के पीछे ठोस भौगोलिक और सामाजिक कारणों का हवाला दिया। उन्होंने बताया कि पाकिस्तान की 900 किलोमीटर लंबी सीमा ईरान से लगती है। इसके अलावा, पाकिस्तान में लगभग 4 करोड़ शिया मुस्लिम आबादी रहती है। शरणार्थी संकट: थरूर के अनुसार, यदि ईरान पर दोबारा हमला होता है, तो वहां से पलायन करने वाले शरणार्थी सीधे पाकिस्तान का रुख करेंगे, जो उसकी अर्थव्यवस्था और स्थिरता के लिए बड़ी चुनौती होगी। पड़ोसी होने का दबाव: सीमा साझा करने के कारण ईरान में होने वाली किसी भी बड़ी हलचल का सीधा असर पाकिस्तान की सुरक्षा पर पड़ता है। 'वॉशिंगटन की स्क्रिप्ट' पर काम कर रहा है इस्लामाबाद वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने पाकिस्तान की मध्यस्थता की प्रामाणिकता पर सवाल उठाते हुए इसे 'वॉशिंगटन प्रेरित' करार दिया। थरूर ने एक हालिया घटनाक्रम का जिक्र करते हुए कहा कि पाकिस्तानी प्रधानमंत्री के एक सोशल मीडिया पोस्ट की हेडिंग में 'ड्राफ्ट: एक्स पर पाकिस्तान के पीएम का मैसेज' लिखा था। भाषा और शब्दावली: थरूर का तर्क है कि उस संदेश में इस्तेमाल की गई भाषा पूरी तरह से वॉशिंगटन की थी और उसमें कुछ ऐसे शब्दों का प्रयोग किया गया था जो अक्सर डोनाल्ड ट्रंप इस्तेमाल करते हैं। निष्कर्ष: उन्होंने कहा कि अमेरिका के साथ पाकिस्तान के संबंध ऐसे हैं कि वह उनके कहने पर ऐसी भूमिका निभा रहा है जिसे 'सिर्फ पाकिस्तान ही कर सकता है'। भारतीय अर्थव्यवस्था और नागरिकों पर युद्ध का प्रभाव भारत के दृष्टिकोण को स्पष्ट करते हुए शशि थरूर ने कहा कि हमारा प्राथमिक हित शांति और समाधान में है। उन्होंने बताया कि इस युद्ध जैसी स्थिति का भारत पर व्यापक असर पड़ रहा है: ऊर्जा सुरक्षा: भारत की प्राकृतिक गैस और पेट्रोलियम का एक बड़ा हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के रास्ते कतर और बहरीन जैसे देशों से आता है। युद्ध के कारण इस आपूर्ति श्रृंखला में बाधा आ रही है। प्रवासी भारतीयों की सुरक्षा: खाड़ी देशों (Gulf Countries) में लाखों भारतीय नागरिक रहते हैं और काम करते हैं। युद्ध की स्थिति उनकी सुरक्षा और आजीविका के लिए बड़ा खतरा है। घरेलू अर्थव्यवस्था: वैश्विक तेल कीमतों में अस्थिरता का सीधा असर भारत की घरेलू अर्थव्यवस्था और महंगाई पर पड़ता है। शांति की अपील और भविष्य की राह शशि थरूर ने जोर देकर कहा कि भारत चाहता है कि यह युद्ध जल्द से जल्द समाप्त हो। हालांकि भारत सीधे तौर पर पाकिस्तान की तरह मध्यस्थता की दौड़ में नहीं है, लेकिन क्षेत्र में शांति बनाए रखना भारत की प्राथमिकता है। उन्होंने केरल में अपने काफिले पर हुए हालिया हमले और अन्य राजनीतिक विषयों पर भी बात की, लेकिन अंतरराष्ट्रीय मंच पर पाकिस्तान की इस 'विशिष्ट' भूमिका को लेकर उनका बयान सबसे अधिक चर्चा में बना हुआ है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।