मिडिल ईस्ट में जारी तनावपूर्ण हालात के बीच ईरान ने बड़ा दावा करते हुए कहा है कि उसने एक और अमेरिकी एयरफोर्स के अत्याधुनिक F-35 लड़ाकू विमान को मार गिराया है। यह दावा ऐसे समय में सामने आया है, जब क्षेत्र में अमेरिका और ईरान के बीच टकराव लगातार बढ़ता जा रहा है। ईरान का दावा: पायलट के बचने की संभावना कम ईरान की अर्ध-सरकारी एजेंसी के अनुसार, देश की सेना के मुख्यालय ‘खतम अल-अंबिया’ के प्रवक्ता ने बताया कि F-35 को सफलतापूर्वक निशाना बनाया गया। साथ ही यह भी कहा गया कि हादसे में पायलट गंभीर रूप से घायल हुआ और उसके बचने की संभावना बेहद कम है। ईरान की ओर से कुछ तस्वीरें भी जारी की गई हैं, जिनमें कथित तौर पर विमान के मलबे को दिखाया गया है। अमेरिका की ओर से नहीं हुई पुष्टि हालांकि इस पूरे मामले पर अभी तक अमेरिकी सैन्य कमान United States Central Command की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। इससे पहले भी ईरान ने इसी तरह का दावा किया था, जिसे अमेरिका ने खारिज करते हुए कहा था कि विमान सुरक्षित लैंड कर गया था। कितना खतरनाक है F-35? F-35 Lightning II अमेरिका का पांचवीं पीढ़ी का अत्याधुनिक स्टील्थ लड़ाकू विमान है, जिसे दुनिया के सबसे उन्नत फाइटर जेट्स में गिना जाता है। इसकी सबसे बड़ी खासियत इसकी ‘स्टील्थ टेक्नोलॉजी’ है, जिससे यह दुश्मन के रडार से लगभग छिपा रहता है। यह विमान दुश्मन के भारी एयर डिफेंस सिस्टम को भेदने, सटीक हमले करने और मल्टी-रोल मिशन को अंजाम देने में सक्षम है। पहले भी हो चुका है ऐसा दावा ईरान इससे पहले 19 मार्च को भी एक F-35 को मार गिराने का दावा कर चुका है। हालांकि उस समय अमेरिका ने साफ कहा था कि विमान ने सुरक्षित इमरजेंसी लैंडिंग कर ली थी। ऐसे में इस बार भी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है और दोनों देशों के दावों के बीच सच्चाई की पुष्टि होना बाकी है। बढ़ सकता है वैश्विक तनाव विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह दावा सही साबित होता है, तो यह अमेरिका-ईरान तनाव को और बढ़ा सकता है। इसका असर न केवल मिडिल ईस्ट बल्कि वैश्विक सुरक्षा और कूटनीतिक समीकरणों पर भी पड़ सकता है।
मिडिल ईस्ट में जारी तनाव अब एक नए और खतरनाक मोड़ पर पहुंचता दिख रहा है। पानी और तेल मार्गों को लेकर पहले से जारी टकराव के बीच अब रणनीतिक पुलों को निशाना बनाने की आशंका बढ़ गई है। हालिया घटनाक्रम में अमेरिका द्वारा ईरान के एक महत्वपूर्ण पुल पर किए गए हमले ने इस संकट को और भड़का दिया है, जिसके बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई के संकेत दिए हैं। अमेरिका का हमला और बढ़ता तनाव रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिकी हमले में ईरान के सबसे ऊंचे माने जा रहे B1 पुल को निशाना बनाया गया। यह पुल राजधानी तेहरान को करज शहर से जोड़ने वाला एक महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट था, जो अभी निर्माणाधीन था। इस हमले में कम से कम 8 लोगों की मौत और करीब 95 लोग घायल बताए जा रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस हमले के बाद कड़ा रुख अपनाते हुए ईरान को चेतावनी दी कि यदि वह वार्ता के लिए आगे नहीं आता, तो और भी कड़े कदम उठाए जा सकते हैं। ईरान का पलटवार: 8 अहम पुल निशाने पर हमले के बाद ईरान ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। ईरान की अर्ध-सरकारी एजेंसी के मुताबिक, इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने खाड़ी क्षेत्र और आसपास के देशों के 8 महत्वपूर्ण पुलों को संभावित निशाने के रूप में चिन्हित किया है। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं: कुवैत का शेख जाबेर अल-अहमद अल-सबा सी ब्रिज UAE के शेख जायद, अल मकता और शेख खलीफा ब्रिज सऊदी अरब और बहरीन को जोड़ने वाला किंग फहद कॉज़वे जॉर्डन के किंग हुसैन, दामिया और अब्दौन ब्रिज यह सूची इस बात का संकेत है कि आने वाले दिनों में संघर्ष और व्यापक हो सकता है, जिससे पूरे खाड़ी क्षेत्र की कनेक्टिविटी और सप्लाई चेन प्रभावित हो सकती है। ईरान का सख्त संदेश ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने साफ कहा कि नागरिक ढांचे पर हमले ईरान को झुकाने में सफल नहीं होंगे। उन्होंने इसे विरोधी पक्ष की ‘नैतिक हार’ बताया और संकेत दिया कि जवाबी कार्रवाई की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। वैश्विक असर की आशंका विशेषज्ञों का मानना है कि अगर पुलों और इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमले बढ़ते हैं, तो इसका असर केवल मिडिल ईस्ट तक सीमित नहीं रहेगा। यह वैश्विक व्यापार, तेल सप्लाई और समुद्री मार्गों को भी प्रभावित कर सकता है। खासकर खाड़ी क्षेत्र के पुल कई देशों के बीच व्यापार और लॉजिस्टिक्स की लाइफलाइन माने जाते हैं।
बीजिंग/मिडिल ईस्ट: अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच जहां दोनों पक्ष अपने-अपने रुख पर कायम हैं, वहीं चीन ने युद्ध खत्म कराने के लिए कूटनीतिक पहल तेज कर दी है। चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने बहरीन के साथ मिलकर क्षेत्र में शांति बहाल करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। बहरीन के साथ मिलकर शांति पहल चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने बहरीन के विदेश मंत्री अब्दुल्लातिफ बिन राशिद अल ज़यानी से फोन पर बातचीत की। इस दौरान उन्होंने कहा कि: चीन युद्ध खत्म कराने और स्थिरता लाने के लिए तैयार है बहरीन के साथ मिलकर शांति बहाली के प्रयास किए जाएंगे चीन का साफ संदेश: ‘आक्रामकता का विरोध’ वांग यी ने स्पष्ट किया कि: चीन किसी भी तरह की आक्रामकता के खिलाफ है क्षेत्र में संवाद और कूटनीति के जरिए समाधान चाहता है चीन-पाकिस्तान की 5 सूत्रीय योजना चीन ने पाकिस्तान के साथ मिलकर एक पांच सूत्रीय पहल भी पेश की है, जिसमें शामिल हैं: नागरिकों और गैर-सैन्य ठिकानों पर हमले रोकना युद्धविराम लागू करना होर्मुज़ जलडमरूमध्य की सुरक्षा सुनिश्चित करना समुद्री व्यापार और आवाजाही को सामान्य करना क्षेत्र में दीर्घकालिक शांति स्थापित करना संयुक्त राष्ट्र की भूमिका पर जोर चीन ने कहा कि: युद्धविराम अंतरराष्ट्रीय समुदाय की साझा जरूरत है UN सिक्योरिटी काउंसिल को तनाव कम करने और बातचीत बढ़ाने में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए बहरीन की चिंता बहरीन ने भी माना कि: खाड़ी क्षेत्र की सुरक्षा गंभीर खतरे में है हॉर्मुज़ स्ट्रेट में समुद्री आवाजाही प्रभावित हो रही है बहरीन ने इस मुद्दे पर संयुक्त राष्ट्र के जरिए समाधान और चीन के साथ सहयोग बढ़ाने की बात कही। ‘ग्लोबल साउथ’ पर फोकस चीन ने खुद को एक जिम्मेदार वैश्विक शक्ति बताते हुए कहा कि वह: पाकिस्तान के साथ मिलकर शांति बहाल करने में योगदान देगा खासकर छोटे और विकासशील देशों (Global South) के हितों की रक्षा करेगा
अमेरिका-ईरान के बीच जारी तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने गुरुवार सुबह राष्ट्र को संबोधित करते हुए बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि अमेरिका को ईरान के खिलाफ जंग में “जीत” मिल चुकी है और जल्द ही हालात पूरी तरह उनके नियंत्रण में होंगे। ट्रम्प के दावे क्या हैं? ट्रम्प ने कहा: ईरान की मिसाइल और ड्रोन क्षमता खत्म हो चुकी है ईरानी नौसेना को भी भारी नुकसान पहुंचा है ईरान की सैन्य ताकत अब काफी कमजोर हो गई है यह अभियान अपने अंतिम लक्ष्य के करीब है 2-3 हफ्तों में बड़े हमले की चेतावनी ट्रम्प ने साफ शब्दों में चेतावनी दी कि अगर ईरान के साथ कोई समझौता नहीं होता है, तो अमेरिका आने वाले 2-3 हफ्तों में बड़ा सैन्य हमला कर सकता है। ‘स्टोन एज’ वाली सख्त चेतावनी अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि यदि स्थिति नहीं सुधरी तो अमेरिका ईरान को “स्टोन एज” (पाषाण काल) में पहुंचा देगा। उनके इस बयान को अब तक का सबसे सख्त रुख माना जा रहा है। ईरान में सत्ता परिवर्तन का दावा ट्रम्प ने यह भी दावा किया कि ईरान में सत्ता परिवर्तन हो चुका है और नई लीडरशिप पहले के मुकाबले कम कट्टर है। हालांकि इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ईरान का पलटवार ट्रम्प के बयान के बाद ईरान की सेना ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। ईरानी सैन्य कमान खातम अल-अनबिया ने कहा कि युद्ध जारी रहेगा अमेरिका और इजरायल को करारा जवाब दिया जाएगा आने वाले समय में और बड़े हमलों की चेतावनी दी गई बढ़ता तनाव, वैश्विक चिंता मिडिल ईस्ट में लगातार बढ़ते इस तनाव ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता बढ़ा दी है। दोनों पक्षों के सख्त बयानों से हालात और बिगड़ने की आशंका जताई जा रही है।
मिडिल ईस्ट में जारी अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच युद्ध का आज 34वां दिन है। इसी बीच एक बड़ी खबर सामने आई है कि अमेरिकी-इजरायली हमलों में ईरान के पूर्व विदेश मंत्री कमाल खराजी गंभीर रूप से घायल हो गए हैं, जबकि उनकी पत्नी की मौत हो गई है। ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी नूरन्यूज के मुताबिक, हमले के बाद खराजी को तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनकी हालत गंभीर बताई जा रही है। कौन हैं कमाल खराजी? कमाल खराजी ईरान के वरिष्ठ कूटनीतिज्ञ रहे हैं: 1997 से 2005 तक ईरान के विदेश मंत्री पूर्व सर्वोच्च नेता अली खामेनेई के करीबी सलाहकार अंतरराष्ट्रीय मामलों में ईरान की रणनीति तय करने में अहम भूमिका जंग का 34वां दिन, अमेरिका का सख्त रुख इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने राष्ट्र को संबोधित करते हुए कहा कि “ऑपरेशन फ्यूरी” जारी रहेगा। उन्होंने इसे अमेरिका की सुरक्षा के लिए जरूरी कदम बताया और संकेत दिया कि ईरान के खिलाफ कार्रवाई अभी जारी रहेगी। बढ़ता तनाव और लगातार हमले मिडिल ईस्ट में हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं: कई शहरों में हवाई हमले जारी सैन्य और रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाया जा रहा नागरिकों के हताहत होने की खबरें भी सामने आ रही हैं खराजी और उनकी पत्नी पर हुआ हमला इस संघर्ष के और गंभीर होने का संकेत माना जा रहा है। वैश्विक चिंता बढ़ी विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के हाई-प्रोफाइल टारगेट पर हमले से हालात और ज्यादा तनावपूर्ण हो सकते हैं। अंतरराष्ट्रीय समुदाय लगातार शांति की अपील कर रहा है, लेकिन फिलहाल संघर्ष थमता नजर नहीं आ रहा।
तेहरान/वॉशिंगटन: ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान ने अमेरिकी नागरिकों को संबोधित करते हुए एक खुला पत्र लिखा है, जिसे उन्होंने बुधवार को सोशल मीडिया पर साझा किया। इस पत्र में उन्होंने युद्धविराम का कोई उल्लेख नहीं किया, जबकि इससे कुछ ही घंटे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया था कि ईरान की ओर से सीजफायर की मांग की गई है। “ईरान ने कभी युद्ध शुरू नहीं किया” अपने पत्र में पेज़ेश्कियान ने कहा कि ईरान ने “कभी कोई युद्ध शुरू नहीं किया” और देश लंबे समय से “हमलों और कब्ज़े” का सामना करता रहा है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ईरानी जनता का अमेरिका, यूरोप या पड़ोसी देशों के लोगों के प्रति कोई दुर्भावना नहीं है। ट्रंप के दावे से अलग संदेश ईरानी राष्ट्रपति का यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने सोशल मीडिया पर दावा किया था कि ईरान के “नए शासन” ने युद्धविराम की अपील की है। हालांकि, उन्होंने यह नहीं बताया कि यह अपील किसने की। ट्रंप ने यह भी कहा कि अमेरिका युद्धविराम पर तभी विचार करेगा जब होर्मुज़ जलडमरूमध्य पूरी तरह सुरक्षित और खुला होगा। उन्होंने ईरान के खिलाफ कड़ी चेतावनी देते हुए सख्त कार्रवाई की बात भी कही। संवाद बनाम टकराव की अपील पेज़ेश्कियान ने अपने पत्र के अंत में कहा कि दुनिया के सामने आज सबसे बड़ा विकल्प “टकराव और संवाद” के बीच है। उन्होंने चेतावनी दी कि आज लिया गया फैसला आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को तय करेगा। बढ़ते तनाव के बीच कूटनीतिक संदेश विशेषज्ञों के मुताबिक, यह पत्र सीधे अमेरिकी सरकार की बजाय वहां के नागरिकों को संबोधित कर एक कूटनीतिक संदेश देने की कोशिश है। इसमें शांति और संवाद की बात तो की गई है, लेकिन औपचारिक रूप से युद्धविराम का प्रस्ताव नहीं रखा गया।
Iran और Israel के बीच जारी युद्ध को एक महीना पूरा हो चुका है, लेकिन संघर्ष थमने के कोई संकेत नहीं दिख रहे। इस बीच इजरायल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने बड़ा बयान देते हुए साफ कर दिया है कि जंग अभी खत्म होने वाली नहीं है। ‘आधे से ज्यादा सैन्य लक्ष्य हासिल’ नेतन्याहू ने कहा कि ईरान के खिलाफ चल रही सैन्य कार्रवाई अपने “आधे से ज्यादा लक्ष्य” हासिल कर चुकी है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह प्रगति मिशन के लिहाज से है, समयसीमा के अनुसार नहीं। उन्होंने युद्ध समाप्त करने की कोई तय समय-सीमा बताने से इनकार किया, जिससे संकेत मिलता है कि यह संघर्ष अभी जारी रहेगा। क्या है इजरायल की रणनीति? नेतन्याहू के अनुसार, मौजूदा ऑपरेशन का मुख्य उद्देश्य ईरान की सैन्य ताकत को कमजोर करना है। इसमें उसकी मिसाइल क्षमता, हथियार उद्योग और परमाणु कार्यक्रम को निशाना बनाना शामिल है। उन्होंने दावा किया कि इस अभियान में ईरान के कई अहम सैन्य ठिकानों और संरचनाओं को नुकसान पहुंचाया गया है। ‘ईरानी शासन अंदर से ढह सकता है’ इजरायली प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि उन्हें लगता है कि Iran का मौजूदा शासन अंदर से कमजोर हो सकता है। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि यह सीधे तौर पर उनका घोषित लक्ष्य नहीं है, बल्कि मौजूदा फोकस सैन्य क्षमताओं को खत्म करने पर है। अमेरिका का रुख और दबाव इस युद्ध में United States भी इजरायल के साथ खड़ा नजर आ रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने पहले कहा था कि यह जंग 4 से 6 हफ्तों तक चल सकती है। वहीं अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio ने संकेत दिया है कि यह संघर्ष कुछ और हफ्तों तक जारी रह सकता है, क्योंकि इससे तेल कीमतों और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ रहा है। बढ़ती चिंता: वैश्विक असर विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह युद्ध लंबा खिंचता है, तो इसका असर पूरी दुनिया पर पड़ सकता है-खासकर ऊर्जा बाजार, कूटनीतिक रिश्तों और क्षेत्रीय स्थिरता पर।
पश्चिम एशिया में तनाव चरम पर पहुंच गया है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, United States और Israel ने Iran के प्रमुख शहर Isfahan में एक बड़े हथियार गोदाम को निशाना बनाते हुए कथित तौर पर संयुक्त हमला किया है। इस हमले के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने एक वीडियो साझा किया, जिसमें भीषण विस्फोट और आसमान में नारंगी रोशनी दिखाई देती है। हालांकि, इस वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। ‘बंकर-बस्टर बम’ के इस्तेमाल का दावा रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस हमले में 2000 पाउंड के ‘बंकर-बस्टर बम’ का इस्तेमाल किया गया। ये ऐसे विशेष बम होते हैं, जो जमीन के अंदर बने मजबूत ठिकानों, जैसे बंकर, सुरंग या हथियार भंडार, को नष्ट करने के लिए डिजाइन किए जाते हैं। इन बमों की खासियत यह होती है कि ये पहले जमीन या कंक्रीट को भेदते हैं और फिर अंदर जाकर विस्फोट करते हैं, जिससे अंदर मौजूद संरचनाओं को भारी नुकसान होता है। इस्फहान क्यों है अहम? इस्फहान ईरान का एक महत्वपूर्ण औद्योगिक और सैन्य केंद्र है, जहां कई रणनीतिक ठिकाने मौजूद हैं। रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया है कि यहां भूमिगत ठिकानों में संवर्धित यूरेनियम का भंडार हो सकता है, जो इसे और अधिक संवेदनशील बनाता है। हालांकि, इस हमले के बाद हुए नुकसान को लेकर ईरान की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। बढ़ता तनाव और वैश्विक असर यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव पहले से ही चरम पर है। हाल के दिनों में बार-बार चेतावनियां और सैन्य गतिविधियां तेज हुई हैं, जिससे क्षेत्र में बड़े संघर्ष की आशंका बढ़ गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह तनाव और बढ़ता है, तो इसका असर वैश्विक तेल आपूर्ति, बाजार और अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर पड़ सकता है।
पश्चिम एशिया में जारी तनाव अब एक नए मोड़ पर पहुंचता दिख रहा है। ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे संघर्ष के बीच एक अहम खबर सामने आई है-अगर अमेरिका जमीनी सैन्य कार्रवाई करता है, तो इजरायल उसमें सीधे तौर पर हिस्सा नहीं लेगा। इजरायली मीडिया की रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह फैसला क्षेत्रीय रणनीति और बढ़ते तनाव को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। इससे संकेत मिलते हैं कि संभावित ग्राउंड ऑपरेशन में अमेरिका को अकेले ही आगे बढ़ना पड़ सकता है। इजरायल ने क्यों बनाई दूरी? विशेषज्ञों के अनुसार, इजरायल का यह रुख कई रणनीतिक कारणों से जुड़ा है: जमीनी युद्ध में उतरने से क्षेत्रीय संघर्ष और भड़क सकता है इजरायल पहले से ही अपनी सुरक्षा चुनौतियों से जूझ रहा है बड़े युद्ध में सीधे शामिल होने से राजनीतिक और सैन्य जोखिम बढ़ सकता है हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि इजरायल खुफिया या तकनीकी सहयोग देगा या नहीं। अमेरिका के लिए बढ़ी चुनौती अगर डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ईरान में ग्राउंड ऑपरेशन शुरू करता है, तो यह मिशन काफी जटिल और जोखिम भरा हो सकता है। बिना बड़े सहयोगी के जमीनी युद्ध कठिन होगा ईरान जैसे विशाल और मजबूत देश में सैन्य कार्रवाई आसान नहीं लॉजिस्टिक्स, संसाधन और रणनीति की बड़ी चुनौती अमेरिका ने पहले ही क्षेत्र में अपने एयरक्राफ्ट कैरियर, युद्धपोत और फाइटर जेट्स की संख्या बढ़ा दी है, जिससे दबाव की रणनीति अपनाई जा रही है। ईरान की ओर से भी सख्त रुख इस बीच IRGC (ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड) लगातार आक्रामक बयान दे रही है और अमेरिका को खुली चुनौती दे रही है। इससे यह साफ है कि अगर जमीनी युद्ध शुरू होता है, तो संघर्ष और भी उग्र हो सकता है। क्या होगा आगे? फिलहाल अमेरिका ने जमीनी सैनिक उतारने को लेकर कोई अंतिम फैसला नहीं लिया है। लेकिन मौजूदा हालात “तूफान से पहले की शांति” जैसे नजर आ रहे हैं। अगर हालात बिगड़ते हैं, तो यह संघर्ष केवल दो देशों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे क्षेत्र और वैश्विक राजनीति पर इसका असर पड़ सकता है।
मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच एक चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है। The New York Times की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान द्वारा किए गए मिसाइल और ड्रोन हमलों में अमेरिका के कम से कम 13 सैन्य ठिकानों को भारी नुकसान पहुंचा है। हालात इतने बिगड़ गए हैं कि कई बेस अब संचालन के लायक नहीं बचे, जिससे अमेरिकी सैनिकों को अस्थायी रूप से होटल और दफ्तरों में शरण लेनी पड़ रही है। कुवैत में सबसे ज्यादा तबाही रिपोर्ट के मुताबिक कुवैत में स्थित अमेरिकी ठिकानों को सबसे अधिक नुकसान हुआ है। पोर्ट शुवैबा, अली अल सलेम एयर बेस और कैंप बुहरिंग जैसे प्रमुख ठिकानों पर हमलों से ऑपरेशनल सेंटर, विमानन ढांचा और ईंधन आपूर्ति सिस्टम गंभीर रूप से प्रभावित हुए हैं। इससे सैन्य आपूर्ति श्रृंखला और सुरक्षा व्यवस्था पर गहरा असर पड़ा है। कतर, बहरीन और सऊदी अरब भी निशाने पर ईरानी हमलों का असर केवल कुवैत तक सीमित नहीं रहा। अल उदेद एयर बेस (कतर) में स्थित अमेरिकी सेंट्रल कमांड के मुख्यालय का अर्ली वार्निंग रडार सिस्टम क्षतिग्रस्त हो गया। वहीं बहरीन में अमेरिकी फिफ्थ फ्लीट के संचार उपकरणों और सऊदी अरब के प्रिंस सुल्तान एयर बेस पर रिफ्यूलिंग टैंकरों को भी नुकसान पहुंचा है। ‘रिमोट वॉरफेयर’ की स्थिति सैन्य विशेषज्ञों के अनुसार, मौजूदा हालात ‘रिमोट वॉरफेयर’ का रूप ले चुके हैं, जहां सैनिक स्थायी बेस के बजाय अस्थायी ठिकानों से ऑपरेशन चला रहे हैं। इससे समन्वय और प्रतिक्रिया समय पर असर पड़ रहा है। सैनिकों को सुरक्षित स्थानों पर भेजा गया लगातार हमलों के चलते अमेरिकी सैनिकों को बेस से हटाकर अलग-अलग सुरक्षित स्थानों, जैसे होटल और कार्यालयों में ठहराया जा रहा है। इससे सैन्य संचालन में कठिनाई और जोखिम दोनों बढ़ गए हैं। ईरान की चेतावनी और जवाबी कार्रवाई Islamic Revolutionary Guard Corps ने अमेरिका और इजरायल को कड़ी चेतावनी दी है कि वे जमीनी युद्ध से बचें। साथ ही ईरान ने ‘ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस-4’ के तहत इजरायल के कई शहरों—हाइफा, डिमोना और तेल अवीव—पर मिसाइल हमलों का दावा किया है। अमेरिका की जवाबी तैयारी दूसरी ओर, Pentagon मिडिल ईस्ट में अपनी 82nd एयरबोर्न डिवीजन की तैनाती की तैयारी कर रहा है। यह यूनिट आपात स्थितियों में तेजी से कार्रवाई के लिए जानी जाती है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका ईरान के रणनीतिक ठिकानों पर आगे और हमले करने की योजना बना रहा है। बढ़ता खतरा, टलती कूटनीति ईरान के विदेश मंत्री ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल किसी भी युद्धविराम या समझौते का सवाल नहीं है। उनका कहना है कि देश ‘प्रतिरोध’ की नीति पर कायम रहेगा। ऐसे में क्षेत्र में तनाव और बढ़ने की आशंका है।
पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच युद्धविराम की कोशिशें अब तेज होती नजर आ रही हैं। ताजा रिपोर्ट्स के मुताबिक, JD Vance (अमेरिका के उपराष्ट्रपति) अगले तीन दिनों के भीतर Pakistan का दौरा कर सकते हैं। इस संभावित यात्रा का उद्देश्य Iran और United States के बीच चल रहे युद्ध को खत्म करने के लिए बातचीत को आगे बढ़ाना बताया जा रहा है। क्या कहती हैं रिपोर्ट्स? अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिकी प्रशासन पाकिस्तान में उच्चस्तरीय बैठक आयोजित करने की कोशिश कर रहा है, जिसमें जेडी वेंस की भागीदारी संभव है। हालांकि, अभी तक इस यात्रा की तारीख, स्थान और भागीदारी को लेकर अंतिम पुष्टि नहीं हुई है। ईरान ने किनसे बातचीत से किया इनकार? सूत्रों के मुताबिक, ईरान ने Steve Witkoff और Jared Kushner जैसे अमेरिकी दूतों के साथ दोबारा बातचीत करने से साफ इनकार कर दिया है। इसके बाद पाकिस्तान ने नए चेहरे के तौर पर जेडी वेंस का नाम आगे बढ़ाया है, जिससे वार्ता को नई दिशा मिल सके। पाकिस्तान क्यों बना रहा है खुद को मध्यस्थ? Shehbaz Sharif ने हाल ही में कहा था कि उनका देश “सार्थक और निर्णायक बातचीत” को संभव बनाने के लिए तैयार है। पाकिस्तान लगातार यह कोशिश कर रहा है कि वह अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाए और इस्लामाबाद को बातचीत का केंद्र बनाया जाए। व्हाइट हाउस का क्या रुख? व्हाइट हाउस ने फिलहाल इस यात्रा को लेकर कोई स्पष्ट पुष्टि नहीं की है। प्रेस सचिव ने कहा कि जेडी वेंस पहले से ही राष्ट्रीय सुरक्षा टीम का अहम हिस्सा हैं, लेकिन उनकी भूमिका में कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ है। साथ ही, अमेरिका ने यह भी साफ नहीं किया कि वह ईरान से किस स्तर पर बातचीत कर रहा है। क्या जल्द खत्म होगा युद्ध? विशेषज्ञों का मानना है कि अगर पाकिस्तान में यह वार्ता होती है, तो यह युद्धविराम की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हो सकता है। हालांकि, दोनों देशों के बीच अविश्वास और सख्त रुख को देखते हुए बातचीत आसान नहीं मानी जा रही।
नई दिल्ली में पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच हुई अहम सर्वदलीय बैठक में भारत ने अपनी कूटनीतिक स्थिति साफ कर दी है। विदेश मंत्री S. Jaishankar ने स्पष्ट कहा कि भारत वैश्विक राजनीति में “दलाल देश” की भूमिका नहीं निभा सकता। उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब Shehbaz Sharif ने अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता की पेशकश करते हुए बातचीत की मेजबानी की इच्छा जताई है। बैठक में क्या हुआ? यह उच्चस्तरीय बैठक रक्षा मंत्री Rajnath Singh की अध्यक्षता में आयोजित की गई, जिसमें गृह मंत्री Amit Shah, वित्त मंत्री Nirmala Sitharaman और पेट्रोलियम मंत्री Hardeep Singh Puri सहित कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए। सरकार ने विपक्ष को जानकारी दी कि भारत की प्राथमिकता इस समय दो अहम मुद्दे हैं: खाड़ी देशों में भारतीय नागरिकों की सुरक्षा ऊर्जा आपूर्ति को स्थिर बनाए रखना पाकिस्तान की भूमिका पर सरकार का जवाब बैठक में विपक्ष ने पाकिस्तान की मध्यस्थता भूमिका पर सवाल उठाए। इस पर S. Jaishankar ने कहा कि पाकिस्तान का यह रोल नया नहीं है। सरकारी सूत्रों के अनुसार, 1980 के दशक से ही अमेरिका-ईरान संवाद में पाकिस्तान एक माध्यम के रूप में इस्तेमाल होता रहा है। इसलिए मौजूदा घटनाक्रम को “नई रणनीति” के रूप में देखना सही नहीं होगा। कूटनीतिक स्तर पर भारत की पहल सरकार ने यह भी बताया कि प्रधानमंत्री Narendra Modi ने अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump से बातचीत में स्पष्ट किया है कि पश्चिम एशिया में जारी युद्ध को जल्द समाप्त किया जाना चाहिए, क्योंकि इसका असर सभी देशों पर पड़ रहा है। भारत ने हालात पर लगातार नजर बनाए रखी है और आवश्यक कूटनीतिक कदम उठाए जा रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय स्थिति और बढ़ती जटिलता पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष ने वैश्विक राजनीति को और जटिल बना दिया है। पाकिस्तान, मिस्र और तुर्किये बैकचैनल कूटनीति में सक्रिय बताए जा रहे हैं ईरान ने सार्वजनिक रूप से बातचीत से इनकार किया है अमेरिका ने सीमित समय के लिए हमलों पर रोक के संकेत दिए हैं इस बीच, क्षेत्र में तनाव लगातार बना हुआ है और वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी इसका असर पड़ रहा है। सरकार बनाम विपक्ष: आरोप-प्रत्यारोप जहां सरकार ने अपनी कूटनीतिक सक्रियता का बचाव किया, वहीं विपक्ष ने इसे “अपर्याप्त प्रतिक्रिया” बताया और संसद में इस मुद्दे पर विस्तृत चर्चा की मांग की।
मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच वैश्विक ऊर्जा सप्लाई को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। ईरान ने साफ किया है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पूरी तरह बंद नहीं है और भारत समेत पांच “मित्र देशों” के जहाजों को यहां से गुजरने की अनुमति दी जाएगी। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने सरकारी टीवी को दिए इंटरव्यू में यह जानकारी दी। किन देशों को मिली राहत? ईरान के अनुसार, जिन देशों को सुरक्षित मार्ग (Safe Passage) दिया जा रहा है, उनमें शामिल हैं: भारत रूस चीन पाकिस्तान इराक ईरान ने बताया कि इन देशों के जहाजों ने संपर्क कर सुरक्षित मार्ग की मांग की थी, जिसके बाद उनकी नौसेना ने उन्हें सुरक्षित रास्ता उपलब्ध कराया। ‘दुश्मन देशों’ के लिए रास्ता बंद ईरान ने स्पष्ट किया कि: अमेरिका इज़राइल और उनके सहयोगी देशों के जहाजों को इस मार्ग से गुजरने की अनुमति नहीं दी जाएगी। अराघची ने कहा कि मौजूदा हालात “युद्ध जैसे” हैं, इसलिए दुश्मन देशों के जहाजों को अनुमति देने का कोई कारण नहीं है। क्यों अहम है होर्मुज जलडमरूमध्य? स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक तेल सप्लाई का बड़ा हिस्सा गुजरता है। यहां किसी भी तरह की बाधा: तेल की कीमतों में उछाल सप्लाई चेन में संकट वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दबाव जैसे असर पैदा कर सकती है। ईरान का दावा: ‘हमने दिखाया नियंत्रण’ ईरान ने दावा किया कि उसने दशकों बाद इस रणनीतिक मार्ग पर अपना प्रभाव दिखाया है। साथ ही यह भी कहा कि कई देशों ने इस रास्ते को खुलवाने के लिए कोशिश की, लेकिन सफलता नहीं मिली। भारत के लिए क्या मायने? भारत के लिए यह राहत भरी खबर है, क्योंकि देश अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए काफी हद तक खाड़ी देशों पर निर्भर है। होर्मुज के आंशिक रूप से खुले रहने से तेल और गैस सप्लाई पर तत्काल बड़ा संकट टल सकता है।
मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच ईरान ने अमेरिका के साथ युद्धविराम (ceasefire) बातचीत के लिए कड़ी शर्तें रख दी हैं। तेहरान ने साफ कहा है कि जब तक खाड़ी क्षेत्र (Gulf) में मौजूद सभी अमेरिकी सैन्य ठिकानों को बंद नहीं किया जाता और उस पर लगे सभी आर्थिक प्रतिबंध (sanctions) पूरी तरह नहीं हटाए जाते, तब तक वह किसी समझौते के लिए तैयार नहीं होगा। ईरान की मुख्य मांगें ईरान ने बातचीत से पहले कई अहम शर्तें सामने रखी हैं: खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य बेस पूरी तरह बंद किए जाएं ईरान पर लगे सभी आर्थिक प्रतिबंध हटाए जाएं युद्ध के दौरान हुए नुकसान के लिए वित्तीय मुआवजा दिया जाए हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पर ईरान का अधिक नियंत्रण हो इस जलमार्ग से गुजरने वाले जहाजों से फीस वसूली का अधिकार भविष्य में किसी भी हमले को रोकने के लिए ठोस सुरक्षा गारंटी सख्ती के बीच नरमी के संकेत हालांकि सार्वजनिक तौर पर ईरान कड़ा रुख दिखा रहा है, लेकिन अंदरखाने कुछ लचीलापन भी दिख रहा है: 5 साल के लिए बैलिस्टिक मिसाइल प्रोग्राम रोकने पर विचार यूरेनियम संवर्धन (enrichment) कम करने की संभावना IAEA को सेंट्रीफ्यूज निरीक्षण की अनुमति 60% समृद्ध यूरेनियम के स्टॉक पर बातचीत की तैयारी हिज़्बुल्लाह, हमास जैसे प्रॉक्सी समूहों से समर्थन खत्म करने पर चर्चा ट्रंप के शांति प्रस्ताव पर शक अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा पेश किए गए 15-सूत्रीय शांति प्रस्ताव पर भी ईरान ने अविश्वास जताया है। ईरान का कहना है कि पहले भी कई बार बातचीत के बीच हमले हुए हैं, इसलिए वह “फिर से धोखा” नहीं खाना चाहता। क्यों है अविश्वास? पिछले साल जून में, परमाणु वार्ता से ठीक पहले इजरायल ने US समर्थन से हमला किया हाल ही में जेनेवा में बातचीत के बाद भी सैन्य कार्रवाई जारी रही कैसे शुरू हुआ युद्ध? ईरान-इजरायल-अमेरिका के बीच यह संघर्ष 28 फरवरी को शुरू हुआ, जब एक संयुक्त US-इजरायल हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई और कई बड़े अधिकारी मारे गए। इसके जवाब में ईरान ने: इराक, कतर, UAE, बहरीन, कुवैत और सऊदी अरब में अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए भारी नुकसान ईरान में अब तक 2300 से ज्यादा लोगों की मौत इनमें 1300 से अधिक नागरिक करीब 200 बच्चे (12 साल से कम उम्र) भी शामिल
अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच जारी युद्ध अब और व्यापक होता दिख रहा है। जंग के 26वें दिन मंगलवार रात कुवैत के इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर ड्रोन हमला हुआ, जिससे वहां मौजूद फ्यूल टैंक में आग लग गई। इस घटना के बाद पूरे क्षेत्र में सुरक्षा अलर्ट बढ़ा दिया गया है। कुवैत में हाई अलर्ट, कई ड्रोन मार गिराए गए कुवैत की सेना ने दावा किया है कि उसने दुश्मन के ड्रोन और मिसाइलों को हवा में ही नष्ट कर दिया। सेना के मुताबिक, अगर लोगों को धमाके सुनाई दे रहे हैं तो वह एयर डिफेंस सिस्टम की कार्रवाई का नतीजा है। कुवैत नेशनल गार्ड ने भी पुष्टि की है कि उसने अपने क्षेत्र में कम से कम 5 ड्रोन मार गिराए हैं। नागरिकों से सुरक्षा निर्देशों का सख्ती से पालन करने की अपील की गई है। इराक में अमेरिका के ठिकानों पर 23 हमलों का दावा वहीं, इराक के उग्रवादी संगठन इस्लामिक रेजिस्टेंस इन इराक ने दावा किया है कि उसने पिछले 24 घंटों में अमेरिका से जुड़े 23 ठिकानों पर ड्रोन और मिसाइल हमले किए। हालांकि, इन हमलों में हुए नुकसान को लेकर अभी स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है। जंग का मानवीय असर गहराया ईरान में जारी हमलों का असर बेहद गंभीर होता जा रहा है। अब तक करीब 1,500 लोगों की मौत और 18,551 से ज्यादा लोग घायल बताए जा रहे हैं। मृतकों में 8 महीने के बच्चे से लेकर 88 साल तक के बुजुर्ग शामिल करीब 200 महिलाओं की मौत 28 फरवरी को स्कूल पर हमले में 168 बच्चों की जान गई 55 हेल्थ वर्कर्स घायल, जिनमें 11 की मौत लेबनान और इजराइल में भी हमले तेज दक्षिणी लेबनान में इजराइल की एयरस्ट्राइक में 9 लोगों की मौत की खबर है। वहीं, हिजबुल्लाह ने इजराइल पर करीब 30 रॉकेट दागे, जिससे उत्तरी इलाकों में सायरन बजने लगे। अमेरिका की सैन्य तैयारी तेज रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका ने मिडिल ईस्ट में 2,000 पैराट्रूपर्स भेजने का फैसला किया है। ये सैनिक 82वीं एयरबोर्न डिवीजन से हैं, जो तेजी से कार्रवाई के लिए जानी जाती है। इसे संभावित जमीनी ऑपरेशन की तैयारी के तौर पर देखा जा रहा है। कूटनीतिक हल की कोशिशें भी जारी इस बीच पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान से बात कर हालात पर चिंता जताई और युद्ध खत्म करने की जरूरत पर जोर दिया। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी चेतावनी दी है कि यदि यह युद्ध जारी रहा, तो इसके गंभीर वैश्विक परिणाम हो सकते हैं, खासकर ऊर्जा और व्यापार पर।
मध्य-पूर्व में जारी तनाव और अमेरिका-इसराइल के साथ टकराव के बीच ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान ने वैश्विक प्रतिक्रिया को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने पाकिस्तान, तुर्की, इराक़, लेबनान, मिस्र और अन्य अरब देशों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन देशों के लोग अमेरिका और इसराइल की नीतियों के खिलाफ खुलकर अपनी नाराज़गी जता रहे हैं। राष्ट्रपति पेज़ेश्कियान ने कहा, “आज हम दुनिया के कई देशों के लोगों को जागते हुए देख रहे हैं। पाकिस्तान, तुर्की, इराक़, लेबनान, मिस्र और अरब देशों के लोग अमेरिका, इसराइल और उनके अपराधों के प्रति अपनी नाराज़गी को मुखरता से व्यक्त कर रहे हैं।” उन्होंने आगे कहा कि दुनिया के स्वतंत्र लोग “ज़ायनिस्टों” के साथ नहीं हैं और क्षेत्र में स्थिरता केवल आपसी सहयोग और देशों की संप्रभुता के सम्मान से ही संभव है। पाकिस्तान की मध्यस्थता की पेशकश ईरानी राष्ट्रपति का यह बयान ऐसे समय में आया है जब पाकिस्तान ने इस तनाव को कम करने के लिए मध्यस्थता की पेशकश की है। पाकिस्तान ने दोनों पक्षों से बातचीत के ज़रिए समाधान निकालने की अपील की है। 15 सूत्रीय योजना की चर्चा इस बीच अमेरिकी और इसराइली मीडिया की कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि अमेरिका ने समझौते के लिए पाकिस्तान के माध्यम से ईरान को 15 सूत्रीय प्रस्ताव सौंपा है। हालांकि, इस प्रस्ताव की आधिकारिक पुष्टि अब तक नहीं हुई है। बढ़ते तनाव के बीच वैश्विक नजर मध्य-पूर्व की स्थिति पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है। लगातार हो रहे हमलों और बयानों के बीच कूटनीतिक कोशिशें भी तेज़ हो गई हैं, लेकिन हालात अब भी तनावपूर्ण बने हुए हैं।
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध को लेकर बड़ा दावा किया है। ट्रंप ने कहा कि अमेरिका इस जंग को “जीत चुका है” और ईरान अब कभी परमाणु हथियार न रखने पर सहमत हो गया है। “ईरान की परमाणु क्षमता पूरी तरह खत्म” ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिकी हमलों में ईरान की न्यूक्लियर क्षमता पूरी तरह नष्ट हो चुकी है। उन्होंने कहा: अगर हमला नहीं किया जाता, तो ईरान दो हफ्ते में परमाणु हथियार बना लेता ईरान इसका इस्तेमाल इजरायल और पूरे पश्चिम एशिया में कर सकता था अमेरिकी कार्रवाई ने इस खतरे को पूरी तरह खत्म कर दिया “तेहरान के ऊपर उड़ रहे हैं हमारे विमान” ट्रंप ने यह भी कहा कि जंग में ईरान की नौसेना और वायुसेना खत्म हो चुकी है। उनके मुताबिक, अमेरिकी लड़ाकू विमान तेहरान और अन्य इलाकों के ऊपर उड़ान भर रहे हैं, जो उनकी सैन्य बढ़त को दिखाता है। “समझौते के लिए तैयार है ईरान” ट्रंप ने कहा कि ईरान अब समझौता करना चाहता है। बातचीत में शामिल प्रमुख नाम: उपराष्ट्रपति जेडी वेंस विदेश मंत्री मार्को रूबियो विशेष दूत स्टीव विटकॉफ जेरेड कुशनर हालांकि, ट्रंप ने यह भी कहा कि वह पहले से सब कुछ सार्वजनिक नहीं करना चाहते, लेकिन ईरान परमाणु हथियार न रखने पर सहमत हो चुका है। ईरान में “सत्ता परिवर्तन” का दावा ट्रंप ने एक और बड़ा दावा करते हुए कहा कि ईरान में सत्ता परिवर्तन हो चुका है। उनके मुताबिक: मौजूदा नेतृत्व पहले से अलग है नए लोग सत्ता में आए हैं यह बदलाव “रिजीम चेंज” जैसा है पाकिस्तान की एंट्री: मध्यस्थता की पेशकश इस बीच पाकिस्तान ने भी इस मुद्दे पर पहल दिखाई है। ट्रंप ने पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ का पोस्ट शेयर करते हुए बताया कि: पाकिस्तान, अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता करना चाहता है शांति वार्ता के लिए “सार्थक और निर्णायक भूमिका” निभाने को तैयार है
पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच ईरान ने एक बार फिर साफ कर दिया है कि वह पीछे हटने वाला नहीं है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने दो टूक कहा है कि जब तक अमेरिका और इजरायल अपने “हमलों पर पछतावा” नहीं जताते, तब तक जंग जारी रहेगी। चीन के विदेश मंत्री वांग यी से फोन पर बातचीत में अराघची ने कहा कि ईरान अपनी संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा आखिरी दम तक करेगा। उन्होंने तेहरान के सिविल और डिफेंस ठिकानों पर हुए हमलों को क्षेत्रीय अस्थिरता की असली वजह बताया। IRGC का पलटवार: इजरायल पर ताबड़तोड़ हमले जमीनी स्तर पर संघर्ष और तेज हो गया है। ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने इजरायल के कई अहम ठिकानों को निशाना बनाया है। खैबर शिकन, इमाद और सज्जील जैसी बैलिस्टिक मिसाइलों का इस्तेमाल कामिकाज़े ड्रोन से हमले तेल अवीव, रामत गन और नेगेव के सैन्य केंद्र टारगेट बीरशेबा में लॉजिस्टिक और कमांड हेडक्वार्टर पर सीधा प्रहार ईरान का दावा है कि इन हमलों ने इजरायल के एयर डिफेंस सिस्टम को भी भेद दिया। ट्रंप का बड़ा बयान: “ईरान में बदलाव, जल्द होगी डील” इन हमलों के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चौंकाने वाला दावा किया है। ट्रंप के मुताबिक: ईरान में “नई लीडरशिप” आ चुकी है पुरानी व्यवस्था और खामेनेई अब सीन से बाहर अमेरिका की बातचीत “सही लोगों” से जारी ईरान ने तेल-गैस से जुड़ा बड़ा “तोहफा” दिया ईरान की नेवी और एयरफोर्स लगभग खत्म ट्रंप ने कहा कि अब ईरान के पास बातचीत के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है। अंतरराष्ट्रीय कानून पर ईरान का हमला अराघची ने पश्चिमी देशों पर “डबल स्टैंडर्ड” अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि: यूक्रेन और गाजा के मामलों में अलग-अलग नियम अपनाए जा रहे हैं इससे अंतरराष्ट्रीय कानून कमजोर हो रहा है हालांकि, उन्होंने जर्मनी के राष्ट्रपति फ्रैंक-वाल्टर स्टाइनमीयर की सराहना की, जिन्होंने अमेरिकी और इजरायली हमलों को अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया। रूस की चेतावनी: न्यूक्लियर खतरा बढ़ा रूस ने भी इस तनाव पर चिंता जताई है। रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने बुशहर न्यूक्लियर प्लांट के पास हो रहे हमलों को बेहद खतरनाक बताया। रूस के मुताबिक: न्यूक्लियर ठिकानों को नुकसान हुआ तो बड़ा पर्यावरणीय संकट हो सकता है यह पूरे क्षेत्र के लिए विनाशकारी साबित होगा
दुनिया के सबसे आधुनिक माने जाने वाले लड़ाकू विमानों में शामिल F-35 Lightning II एक बार फिर विवादों में है। हालिया रिपोर्ट्स और घटनाओं ने इस फिफ्थ जेनरेशन स्टेल्थ फाइटर की क्षमताओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिससे भारत के इसे न खरीदने के फैसले पर नई चर्चा शुरू हो गई है। बार-बार हादसे और तकनीकी खामियां पिछले कुछ वर्षों में F-35 से जुड़ी कई दुर्घटनाएं सामने आई हैं। अलग-अलग देशों के बेड़े में शामिल इन विमानों को तकनीकी खराबी, ट्रेनिंग मिशन या लैंडिंग के दौरान नुकसान झेलना पड़ा है। केरल में ब्रिटिश नेवी के F-35B की इमरजेंसी लैंडिंग जैसी घटनाओं ने भी इसकी विश्वसनीयता पर सवाल खड़े किए। ईरान के दावे से बढ़ी बहस हालिया घटनाक्रम में ईरान ने दावा किया है कि उसने अपने एयर डिफेंस सिस्टम से F-35 को इंटरसेप्ट कर नुकसान पहुंचाया। हालांकि, अमेरिका ने विमान के नष्ट होने की पुष्टि नहीं की है, लेकिन इस दावे ने स्टेल्थ टेक्नोलॉजी की वास्तविक क्षमता पर चर्चा तेज कर दी है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि कोई स्टेल्थ जेट आसानी से ट्रैक या हिट हो सकता है, तो उसकी तकनीकी बढ़त पर सवाल उठना स्वाभाविक है। भारत क्यों रहा सतर्क? भारत को लंबे समय से आधुनिक 5th जेनरेशन फाइटर जेट की जरूरत है, खासकर चीन की बढ़ती सैन्य ताकत को देखते हुए। अमेरिका ने कई बार भारत को F-35 बेचने की कोशिश की, खासतौर पर डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल में इस पर जोर दिया गया। लेकिन भारत ने अब तक इस डील पर अंतिम निर्णय नहीं लिया। इसके पीछे कई अहम कारण रहे- टेक्नोलॉजी ट्रांसफर पर सीमाएं हथियार सिस्टम के इंटीग्रेशन की चुनौती लागत और मेंटेनेंस का बोझ और अब उभरते तकनीकी सवाल क्या JF-17 से भी तुलना सही? कुछ रिपोर्ट्स में F-35 की तुलना JF-17 Thunder से की जा रही है, लेकिन रक्षा विशेषज्ञ इसे अतिशयोक्ति मानते हैं। JF-17 एक हल्का मल्टी-रोल फाइटर है, जबकि F-35 अत्याधुनिक स्टेल्थ टेक्नोलॉजी, सेंसर फ्यूजन और नेटवर्क-सेंट्रिक वॉरफेयर के लिए डिजाइन किया गया है। दोनों की श्रेणी और क्षमताएं अलग हैं, इसलिए सीधी तुलना तकनीकी रूप से सटीक नहीं मानी जाती। भारत के पास क्या विकल्प? भारत फिलहाल अपने स्वदेशी और विदेशी विकल्पों पर समानांतर काम कर रहा है- Su-57 जैसे विकल्पों पर नजर और स्वदेशी 5th जेनरेशन प्रोजेक्ट (AMCA) पर तेजी भारत का लक्ष्य केवल खरीद नहीं, बल्कि तकनीकी आत्मनिर्भरता भी है। F-35 पर उठते सवालों के बीच यह साफ है कि भारत बेहद सतर्क रणनीति अपना रहा है। रक्षा खरीद में जल्दबाजी के बजाय दीर्घकालिक रणनीतिक फायदे को प्राथमिकता दी जा रही है।
मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच बेंजामिन नेतन्याहू ने बड़ा दावा करते हुए कहा है कि ईरान की सैन्य और परमाणु क्षमताओं को गंभीर नुकसान पहुंचाया गया है और यह युद्ध उम्मीद से कहीं जल्दी समाप्त हो सकता है। नेतन्याहू के अनुसार, अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हवाई हमलों के बाद ईरान अब न तो यूरेनियम संवर्धन (Enrichment) करने की स्थिति में है और न ही बैलिस्टिक मिसाइल बनाने में सक्षम है। हालांकि, उन्होंने अपने इन दावों के समर्थन में कोई ठोस सबूत सार्वजनिक नहीं किया। “ईरान की सैन्य क्षमता कमजोर हुई” नेतन्याहू ने कहा कि संयुक्त अभियान के तहत ईरान के उन कारखानों को निशाना बनाया गया है, जहां मिसाइल और परमाणु हथियारों के पुर्जे तैयार किए जाते थे। उनके मुताबिक, मिसाइल और ड्रोन क्षमता “तेजी से नष्ट” की जा रही है सैन्य ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा है अभियान “तेजी से लक्ष्य हासिल कर रहा है” उन्होंने दावा किया कि यह कार्रवाई क्षेत्र और दुनिया की सुरक्षा के लिए जरूरी है। अमेरिका की भूमिका पर क्या कहा? नेतन्याहू ने इस बात से इनकार किया कि इजरायल ने अमेरिका को युद्ध में खींचा है। उन्होंने कहा कि डोनाल्ड ट्रंप अपने फैसले खुद लेते हैं और अमेरिका-इजरायल के बीच गहरा तालमेल है। उन्होंने दोनों देशों की साझेदारी को “महत्वपूर्ण” बताते हुए कहा कि यह गठबंधन वैश्विक सुरक्षा के लिए काम कर रहा है। गैस ठिकानों पर हमले रोकने का फैसला नेतन्याहू ने यह भी बताया कि अमेरिका के अनुरोध पर इजरायल ने ईरान के प्रमुख गैस क्षेत्रों पर आगे हमले फिलहाल रोक दिए हैं। हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट किया कि पहले किए गए हमले इजरायल ने “स्वतंत्र रूप से” किए थे। युद्ध का विस्तार संभव, जमीनी कार्रवाई के संकेत अब तक यह संघर्ष मुख्य रूप से हवाई हमलों तक सीमित रहा है, लेकिन नेतन्याहू ने संकेत दिए कि जमीनी कार्रवाई (Ground Operation) भी संभव है। उन्होंने कहा कि इसके कई विकल्प मौजूद हैं, हालांकि उन्होंने विस्तार से कुछ नहीं बताया। ईरान के अंदर अस्थिरता का दावा नेतन्याहू ने ईरान के नेतृत्व में अंदरूनी तनाव और अस्थिरता के संकेत भी दिए। उनका कहना है कि वहां सत्ता के भीतर खींचतान बढ़ रही है और स्थिति अनिश्चित बनी हुई है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि यह कहना अभी जल्दबाजी होगी कि यह स्थिति किसी बड़े जनविद्रोह में बदलेगी या नहीं। क्या जल्द खत्म होगा युद्ध? नेतन्याहू का मानना है कि मौजूदा सैन्य बढ़त के चलते यह युद्ध उम्मीद से जल्दी समाप्त हो सकता है। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि जमीनी हकीकत, क्षेत्रीय राजनीति और वैश्विक दबाव इस संघर्ष की दिशा तय करेंगे।
मध्य-पूर्व में जारी संघर्ष के बीच इजरायल द्वारा ईरान के शीर्ष नेता अली लारिजानी को निशाना बनाकर एयरस्ट्राइक किए जाने का दावा सामने आया है। हालांकि इस हमले में लारिजानी की स्थिति- मृत्यु या घायल होने- को लेकर अब तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, और ईरान की ओर से भी चुप्पी बनी हुई है। IDF का बड़ा ऑपरेशन, शीर्ष नेतृत्व निशाने पर रिपोर्ट्स के अनुसार, Israel Defense Forces ने इस एयरस्ट्राइक में न सिर्फ लारिजानी, बल्कि बासिज बल के एक वरिष्ठ कमांडर को भी निशाना बनाया। यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब क्षेत्र में पहले से ही युद्ध जैसी स्थिति बनी हुई है और दोनों पक्षों के बीच लगातार सैन्य कार्रवाई जारी है। हमले से पहले लारिजानी का तीखा बयान एयरस्ट्राइक से ठीक एक दिन पहले अली लारिजानी ने अमेरिका-इजरायल के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया था। उन्होंने वैश्विक मुस्लिम समुदाय और इस्लामी देशों को संबोधित करते हुए एक खुला पत्र जारी किया, जिसमें उन्होंने कहा कि: ईरान को अपेक्षित अंतरराष्ट्रीय समर्थन नहीं मिला अधिकांश मुस्लिम देशों ने केवल बयानबाजी की, ठोस समर्थन नहीं दिया अमेरिका-इजरायल पर गंभीर आरोप अपने पत्र में लारिजानी ने: अमेरिका को “बड़ा शैतान” और इजरायल को “छोटा शैतान” बताया उन्होंने आरोप लगाया कि: ईरान पर हमलों में नागरिकों और सैन्य अधिकारियों की मौत हुई इसके बावजूद ईरान ने “दृढ़ इच्छाशक्ति” के साथ जवाब दिया इस्लामी देशों पर उठाए सवाल लारिजानी ने मुस्लिम देशों की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा: क्या वे निष्पक्ष रहेंगे या किसी पक्ष का समर्थन करेंगे? जिन देशों में अमेरिकी सैन्य ठिकाने हैं, वहां से ईरान पर हमले हो रहे हैं उन्होंने यह भी पूछा कि क्या ईरान चुप बैठा रहे, जबकि उसके खिलाफ हमले जारी हैं। एकता की अपील और क्षेत्रीय संदेश अपने पत्र के अंत में लारिजानी ने इस्लामी देशों से एकजुट होने की अपील की। उन्होंने कहा कि: अमेरिका भरोसेमंद नहीं है इजरायल क्षेत्र का दुश्मन है यदि मुस्लिम देश एकजुट हों, तो सुरक्षा और स्थिरता सुनिश्चित हो सकती है क्या बढ़ेगा टकराव? इस घटनाक्रम ने मध्य-पूर्व में तनाव को और बढ़ा दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि शीर्ष नेताओं को निशाना बनाए जाने की घटनाएं बढ़ती हैं, तो यह संघर्ष और व्यापक रूप ले सकता है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
UPSC CSE Result 2025: देश की सबसे प्रतिष्ठित परीक्षाओं में से एक Civil Services Examination का अंतिम परिणाम जारी कर दिया गया है। Union Public Service Commission ने शुक्रवार 6 मार्च 2026 को UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2025 का फाइनल रिजल्ट घोषित किया। इस परीक्षा में अनुज अग्निहोत्री ने पहला स्थान हासिल किया है। परीक्षा में शामिल हुए उम्मीदवार अब आयोग की आधिकारिक वेबसाइट UPSC Official Website पर जाकर फाइनल मेरिट लिस्ट देख सकते हैं। 958 उम्मीदवारों का हुआ चयन यूपीएससी द्वारा जारी फाइनल रिजल्ट के अनुसार इस वर्ष कुल 958 उम्मीदवारों ने सफलता हासिल की है। चयनित उम्मीदवारों की नियुक्ति विभिन्न केंद्रीय सेवाओं में उनकी रैंक और पसंद के आधार पर की जाएगी। फाइनल रिजल्ट उम्मीदवारों के लिखित परीक्षा (Main Exam) और पर्सनैलिटी टेस्ट (Interview) में प्रदर्शन के आधार पर तैयार किया गया है। इन प्रतिष्ठित सेवाओं के लिए होता है चयन यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा के माध्यम से देश की कई प्रतिष्ठित सेवाओं के लिए अधिकारियों का चयन किया जाता है। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं— भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) भारतीय पुलिस सेवा (IPS) भारतीय विदेश सेवा (IFS) भारतीय राजस्व सेवा (IRS) भारतीय व्यापार सेवा सहित अन्य ग्रुप A और ग्रुप B सेवाएं 979 पदों को भरने का लक्ष्य सिविल सेवा परीक्षा 2025 के माध्यम से केंद्र सरकार के विभिन्न विभागों में कुल 979 रिक्त पदों को भरा जाना है। ऐसे चेक करें UPSC CSE 2025 का रिजल्ट उम्मीदवार नीचे दिए गए स्टेप्स के माध्यम से अपना रिजल्ट देख सकते हैं— आधिकारिक वेबसाइट upsc.gov.in पर जाएं होमपेज पर “Examination” टैब पर क्लिक करें “Active Examinations” या “What’s New” सेक्शन में जाएं Civil Services Examination Final Result 2025 लिंक पर क्लिक करें मेरिट लिस्ट की PDF खुल जाएगी Ctrl + F दबाकर अपना नाम या रोल नंबर सर्च करें 15 दिन में जारी होगी मार्कशीट यूपीएससी के अनुसार सभी उम्मीदवारों की मार्कशीट रिजल्ट जारी होने के 15 दिनों के भीतर आयोग की वेबसाइट पर अपलोड कर दी जाएगी। उम्मीदवार इसे 30 दिनों तक ऑनलाइन डाउनलोड कर सकेंगे। पिछले साल का कट-ऑफ पिछले वर्ष का अंतिम कट-ऑफ इस प्रकार था— जनरल: 87.98 EWS: 85.92 OBC: 87.28 SC: 79.03 ST: 74.23 आयु सीमा क्या है यूपीएससी की अधिसूचना के अनुसार उम्मीदवार की आयु 1 अगस्त 2024 तक कम से कम 21 वर्ष और अधिकतम 32 वर्ष होनी चाहिए। यानी उम्मीदवार का जन्म 2 अगस्त 1992 से 1 अगस्त 2003 के बीच होना चाहिए। यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा भारत की सबसे कठिन और प्रतिष्ठित प्रतियोगी परीक्षाओं में से एक मानी जाती है। हर साल लाखों उम्मीदवार इस परीक्षा में शामिल होते हैं, लेकिन तीन चरणों—प्रारंभिक परीक्षा, मुख्य परीक्षा और इंटरव्यू—को पार कर बहुत कम उम्मीदवार ही अंतिम सूची में जगह बना पाते हैं। UPSC CSE 2025 टॉप-20 उम्मीदवारों की सूची रैंक रोल नंबर नाम 1 1131589 अनुज अग्निहोत्री 2 4000040 राजेश्वरी सुवे एम 3 3512521 अकांश ढुल 4 0834732 राघव झुनझुनवाला 5 0409847 ईशान भटनागर 6 6410067 जिनिया अरोड़ा 7 0818306 ए आर राजा मोहिद्दीन 8 0843487 पक्षल सेक्रेटरी 9 0831647 आस्था जैन 10 1523945 उज्ज्वल प्रियांक 11 1512091 यशस्वी राज वर्धन 12 0840280 अक्षित भारद्वाज 13 7813999 अनन्या शर्मा 14 5402316 सुरभि यादव 15 3507500 सिमरनदीप कौर 16 0867445 मोनिका श्रीवास्तव 17 0829589 चितवन जैन 18 5604518 श्रुति आर 19 0105602 निसार दिशांत अमृतलाल 20 6630448 रवि राज