Gujarat News

Patients receiving meals at a government hospital and children eating mid-day meals at a government school in West Bengal after the state increased food spending.
बंगाल सरकार का बड़ा फैसला, अस्पतालों में मरीजों की डाइट पर खर्च दोगुना; मिड-डे मील के लिए 10 रुपये मिलेंगे

कोलकाता: पश्चिम बंगाल सरकार ने सरकारी अस्पतालों में भर्ती मरीजों और सरकारी स्कूलों के बच्चों के लिए भोजन व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया है। सरकार ने मरीजों के भोजन पर होने वाला दैनिक खर्च लगभग दोगुना कर दिया है। वहीं, पीएम पोषण (मिड-डे मील) योजना के तहत प्राथमिक और प्री-प्राथमिक विद्यालयों के विद्यार्थियों के भोजन की लागत भी बढ़ा दी गई है। नई दरें 1 अगस्त से लागू होंगी। मरीजों के भोजन पर अब 110 रुपये खर्च राज्य सरकार के नए आदेश के अनुसार, सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में भर्ती मरीजों के दैनिक भोजन पर होने वाला खर्च 56.64 रुपये से बढ़ाकर 110 रुपये कर दिया गया है। सरकार का कहना है कि बढ़ी हुई राशि से मरीजों को अधिक पौष्टिक, संतुलित और बेहतर गुणवत्ता वाला भोजन उपलब्ध कराया जाएगा। इस संबंध में सोमवार को स्वास्थ्य विभाग ने आधिकारिक निर्देश जारी किया। स्कूलों में मिड-डे मील के लिए 10 रुपये पीएम पोषण योजना के तहत प्री-प्राथमिक और प्राथमिक विद्यालयों में मिलने वाले मिड-डे मील की प्रति छात्र लागत भी बढ़ा दी गई है। पहले प्रति छात्र भोजन पर 6.78 रुपये खर्च किए जाते थे, जिसे अब बढ़ाकर 10 रुपये कर दिया गया है। बढ़ी हुई 3.22 रुपये की अतिरिक्त राशि राज्य सरकार अपने बजट से वहन करेगी। सरकार का कहना है कि महंगाई बढ़ने के कारण मौजूदा राशि में गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध कराना मुश्किल हो रहा था। 2017 के बाद पहली बार बढ़ीं दरें सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार, भोजन पर होने वाले खर्च में आखिरी बार संशोधन वर्ष 2017 में किया गया था। लगभग नौ वर्ष बाद अब इन दरों में वृद्धि की गई है। सरकार का कहना है कि बदलती कीमतों और पोषण संबंधी जरूरतों को देखते हुए यह फैसला लिया गया है। सरकार ने बताया फैसले का उद्देश्य राज्य सरकार के मुताबिक, इस निर्णय का उद्देश्य सरकारी अस्पतालों में भर्ती मरीजों को बेहतर पोषण उपलब्ध कराना और सरकारी स्कूलों के बच्चों के लिए गुणवत्तापूर्ण मिड-डे मील सुनिश्चित करना है। सरकार का मानना है कि संतुलित और पौष्टिक भोजन मरीजों के जल्द स्वस्थ होने में मदद करेगा, जबकि बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए भी बेहतर पोषण महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।  

Deepshikha जुलाई 14, 2026 0
Ahmedabad Guinness World Record
अहमदाबाद ने बनाया गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड, एक घंटे में लगाए 3.61 लाख पौधे

अहमदाबाद, एजेंसियां। गुजरात की राजधानी अहमदाबाद ने पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में एक नया इतिहास रच दिया है। अहमदाबाद नगर निगम ने मात्र एक घंटे में 3.61 लाख पौधे लगाकर गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया। यह मेगा वृक्षारोपण अभियान 12 जुलाई को शहर के भदाज क्षेत्र में आयोजित किया गया, जिसमें 25,000 से अधिक स्वयंसेवकों ने हिस्सा लिया।   मियावाकी तकनीक से लगाया गया मिनी जंगल   इस अभियान में मियावाकी (Miyawaki) पद्धति का इस्तेमाल किया गया, जिसके तहत कम जगह में घने जंगल विकसित किए जाते हैं। लगभग 76,000 वर्ग मीटर क्षेत्र में 35 देशी प्रजातियों के पौधे लगाए गए। विशेषज्ञों का मानना है कि यह क्षेत्र आने वाले वर्षों में एक घने शहरी जंगल के रूप में विकसित होगा, जिससे जैव विविधता बढ़ेगी और शहर का हरित क्षेत्र मजबूत होगा।   'एक पेड़ मां के नाम' अभियान से प्रेरित पहल   यह वृक्षारोपण अभियान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के "एक पेड़ मां के नाम" अभियान और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की "हरियाली लोकसभा" पहल के तहत आयोजित किया गया। कार्यक्रम में अमित शाह, गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल और कई जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। इस अभियान का लक्ष्य गांधीनगर लोकसभा क्षेत्र में बड़े पैमाने पर हरित आवरण बढ़ाना है।   पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम   अहमदाबाद नगर निगम ने कहा कि यह रिकॉर्ड केवल संख्या का नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण के प्रति जनभागीदारी का प्रतीक है। अभियान के तहत लगाए गए पौधे भविष्य में कार्बन उत्सर्जन कम करने, तापमान नियंत्रित रखने, जैव विविधता बढ़ाने और शहर को अधिक हरित एवं स्वच्छ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

anjali kumari जुलाई 14, 2026 0
Air India and IndiGo aircraft stop on the same taxiway at Ahmedabad Airport, avoiding a possible collision.
अहमदाबाद एयरपोर्ट पर बड़ा हादसा टला, आमने-सामने आ गए एअर इंडिया और इंडिगो के विमान

  अहमदाबाद: गुजरात के अहमदाबाद एयरपोर्ट पर बुधवार शाम एक बड़ा विमान हादसा टल गया, जब एअर इंडिया और इंडिगो के दो यात्री विमान एक ही टैक्सीवे पर आमने-सामने आ गए। स्थिति गंभीर होने से पहले ही एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) और पायलटों की सतर्कता से दोनों विमानों को रोक लिया गया, जिससे संभावित दुर्घटना टल गई। सूत्रों के मुताबिक, दोनों विमानों के बीच लगभग 200 मीटर की दूरी रह गई थी। घटना के बाद विमानन सुरक्षा एजेंसियों ने मामले की जांच शुरू कर दी है। कैसे हुई चूक? जानकारी के अनुसार, मुंबई से अहमदाबाद पहुंची एअर इंडिया की फ्लाइट AI-2493 लैंडिंग के बाद पार्किंग बे की ओर जा रही थी। इसी दौरान विमान निर्धारित मार्ग से हटकर गलत दिशा में मुड़ गया और उस टैक्सीवे पर पहुंच गया, जहां से मुंबई रवाना होने वाली इंडिगो की फ्लाइट 6E-5160 रनवे की ओर बढ़ रही थी। कुछ ही क्षणों में दोनों विमान एक-दूसरे के सामने आ गए। स्थिति को भांपते हुए दोनों विमानों की आवाजाही तत्काल रोक दी गई। समय रहते टला संभावित हादसा एयरपोर्ट सूत्रों के अनुसार, यदि दोनों विमानों को समय पर नहीं रोका जाता तो गंभीर दुर्घटना हो सकती थी। एयर ट्रैफिक कंट्रोल की निगरानी और पायलटों की तत्परता के कारण दोनों विमान सुरक्षित दूरी पर रुक गए। बाद में एअर इंडिया के विमान को विशेष टोइंग वाहन की मदद से खींचकर सही पार्किंग बे तक पहुंचाया गया। इसके बाद इंडिगो की उड़ान को रनवे की ओर बढ़ने की अनुमति दी गई। एअर इंडिया ने स्वीकार की गलती घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए एअर इंडिया ने बयान जारी कर कहा कि मुंबई से अहमदाबाद पहुंची फ्लाइट AI-2493 लैंडिंग के बाद टैक्सी करते समय अनजाने में गलत दिशा में मुड़ गई थी। एयरलाइन ने स्पष्ट किया कि इस घटना के दौरान यात्रियों और चालक दल की सुरक्षा पूरी तरह सुरक्षित रही तथा किसी भी प्रकार का जोखिम उत्पन्न नहीं हुआ। कंपनी ने कहा कि मामले की जानकारी संबंधित विमानन नियामक अधिकारियों को दे दी गई है और आंतरिक जांच भी शुरू कर दी गई है। इंडिगो ने क्या कहा? इंडिगो ने अपने बयान में बताया कि उसकी फ्लाइट 6E-5160 अहमदाबाद से मुंबई के लिए रवाना होने की तैयारी कर रही थी और टैक्सीवे पर आगे बढ़ रही थी। इसी दौरान दूसरी एयरलाइन का विमान गलत दिशा में आ गया। एयरलाइन के अनुसार, दोनों विमानों को सुरक्षित दूरी पर रोक दिया गया। एअर इंडिया के विमान को हटाए जाने के बाद इंडिगो की उड़ान निर्धारित प्रक्रिया के तहत रवाना हुई और सुरक्षित रूप से मुंबई पहुंच गई। विमानन नियामक एजेंसियों ने शुरू की जांच घटना के बाद विमानन सुरक्षा से जुड़े अधिकारियों ने पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है। जांच में यह पता लगाया जाएगा कि टैक्सींग के दौरान एअर इंडिया का विमान निर्धारित मार्ग से कैसे भटक गया और क्या इसमें मानवीय त्रुटि, संचार की समस्या या किसी अन्य तकनीकी कारण की भूमिका थी। विशेषज्ञों का मानना है कि एयरपोर्ट संचालन में टैक्सीवे पर होने वाली ऐसी घटनाएं अत्यंत गंभीर मानी जाती हैं और इन्हें "रनवे या टैक्सीवे इन्कर्शन" श्रेणी में रखा जाता है। दोनों विमान एयरबस A320 श्रेणी के थे जानकारी के अनुसार, घटना में शामिल दोनों विमान एयरबस A320 श्रेणी के नैरो-बॉडी यात्री विमान थे। यह विमान घरेलू और छोटी से मध्यम दूरी की अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए व्यापक रूप से इस्तेमाल किए जाते हैं। इन विमानों में सामान्यतः 150 से 180 यात्रियों के बैठने की क्षमता होती है। घटना के समय दोनों विमानों में कितने यात्री सवार थे, इसकी आधिकारिक जानकारी अभी सामने नहीं आई है। एयरबस A320 क्यों है खास? नैरो-बॉडी डिजाइन: विमान में एक सिंगल गलियारा होता है। 150-180 यात्रियों की क्षमता: घरेलू और क्षेत्रीय उड़ानों के लिए उपयुक्त। कम ईंधन खपत: एयरलाइंस के लिए किफायती संचालन। 3,000 से 6,000 किमी तक की उड़ान क्षमता। दुनिया के सबसे लोकप्रिय यात्री विमानों में शामिल।

Deepshikha जून 25, 2026 0
Farmers drive tractors during the Kisan Adhikar Rally from Ahmedabad to Gandhinagar demanding MSP and land rights.
गुजरात में किसानों के मुद्दे पर कांग्रेस का बीजेपी पर हमला, ‘किसान अधिकार ट्रैक्टर रैली’ से गरमाई सियासत

  अहमदाबाद: गुजरात में किसानों के मुद्दों को लेकर सियासत तेज हो गई है। अहमदाबाद से गांधीनगर तक निकाली गई ‘किसान अधिकार ट्रैक्टर रैली’ के बीच कांग्रेस ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार पर किसानों की जमीन हड़पने और उनकी आवाज दबाने का आरोप लगाया है। Amit Chavda ने भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि गुजरात में किसानों के साथ ऐसा व्यवहार किया जा रहा है, जैसा अंग्रेजी शासन के दौरान होता था। ‘अंग्रेजों जैसी नीतियों पर चल रही है बीजेपी’ अमित चावड़ा ने कहा, “गुजरात में अंग्रेजों जैसा राज चल रहा है। भाजपा सरकार अंग्रेजों की नीतियों पर चलकर किसानों की जमीनें छीनने का काम कर रही है। पुलिस और प्रशासन का इस्तेमाल करके किसानों की आवाज दबाने की कोशिश की जा रही है, लेकिन कांग्रेस ऐसा नहीं होने देगी।” उन्होंने दावा किया कि किसानों को अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से गांधीनगर मार्च करने से रोका जा रहा है। किसान संघर्ष समिति की ट्रैक्टर रैली किसान संघर्ष समिति के संयुक्त नेतृत्व में सोमवार को अहमदाबाद से गांधीनगर तक ‘किसान अधिकार ट्रैक्टर रैली’ निकाली गई। सैकड़ों ट्रैक्टरों के साथ बड़ी संख्या में किसान इस रैली में शामिल हुए और ‘जय जवान, जय किसान’ के नारे लगाए। किसानों का कहना है कि सरकार उनकी समस्याओं पर ध्यान नहीं दे रही है, जिसके कारण उन्हें सड़क पर उतरकर आंदोलन करने के लिए मजबूर होना पड़ा है। किसानों की प्रमुख मांगें प्रदर्शनकारी किसानों ने सरकार के सामने कई मांगें रखीं, जिनमें शामिल हैं— न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की कानूनी गारंटी। भूमि अधिग्रहण पर रोक। बिजली ट्रांसमिशन लाइनों से प्रभावित किसानों को वर्तमान जंत्री दर का 200 प्रतिशत तक मुआवजा। कृषि ऋण माफी। बिजली मीटर और बिलिंग व्यवस्था में सुधार। किसानों के हित में कृषि नीतियों में बदलाव। आंदोलन तेज करने की चेतावनी किसान नेताओं ने कहा कि यदि सरकार उनकी मांगों पर जल्द कोई ठोस निर्णय नहीं लेती है, तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा। उनका कहना है कि यह केवल मुआवजे या एमएसपी का मुद्दा नहीं, बल्कि किसानों के अस्तित्व और अधिकारों की लड़ाई है। कांग्रेस ने दिया किसानों को समर्थन किसान कांग्रेस और किसान संघर्ष समिति ने रैली को समर्थन देते हुए कहा कि किसानों के अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रहेगा। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार किसानों की समस्याओं को सुनने के बजाय प्रशासनिक दबाव बनाकर आंदोलन को कमजोर करने की कोशिश कर रही है। कांग्रेस के आरोपों और ट्रैक्टर रैली को लेकर भाजपा सरकार की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि किसानों के मुद्दों को लेकर शुरू हुई यह सियासी जंग आने वाले समय में गुजरात की राजनीति में एक महत्वपूर्ण मुद्दा बन सकती है, खासकर तब जब भूमि अधिग्रहण, मुआवजा और एमएसपी जैसे प्रश्न सीधे ग्रामीण और कृषि समुदाय को प्रभावित करते हैं।  

Deepshikha जून 16, 2026 0
Security personnel and bomb disposal squad inspecting Ahmedabad government offices after bomb threat email
गुजरात में हाई अलर्ट: CMO, AMC और RSS कार्यालय को बम से उड़ाने की धमकी, जांच में जुटी पुलिस

  गुजरात की राजधानी अहमदाबाद में मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO), अहमदाबाद म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (AMC) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) कार्यालय को बम से उड़ाने की धमकी मिलने के बाद सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर हैं। यह धमकी अज्ञात ईमेल के जरिए भेजी गई, जिसके बाद पूरे शहर में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। बम निरोधक दस्ते और डॉग स्क्वॉड ने शुरू की तलाशी सूचना मिलते ही पुलिस, फायर ब्रिगेड और इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम मौके पर पहुंची। बम निरोधक दस्ता (Bomb Disposal Squad), डॉग स्क्वॉड और स्थानीय पुलिस ने तीनों स्थानों पर व्यापक तलाशी अभियान चलाया। पुलिस सूत्रों के अनुसार, यह धमकी भरा ईमेल बुधवार सुबह एक सरकारी ईमेल आईडी पर प्राप्त हुआ, जिसमें तीनों प्रतिष्ठानों को निशाना बनाने की बात कही गई थी। घंटों चली जांच, कोई संदिग्ध वस्तु नहीं मिली सीएमओ, एएमसी और आरएसएस कार्यालयों में कई घंटों तक तलाशी अभियान चला, लेकिन अभी तक किसी भी स्थान से कोई संदिग्ध वस्तु बरामद नहीं हुई है। सुरक्षा के मद्देनजर सभी परिसरों के आसपास आने-जाने वालों की सघन जांच की जा रही है। अहमदाबाद क्राइम ब्रांच और साइबर सेल ने मामले की जांच शुरू कर दी है और ईमेल भेजने वाले के आईपी एड्रेस को ट्रेस किया जा रहा है। फर्जी धमकी की आशंका, पहले भी मिल चुके हैं ऐसे मेल पुलिस कमिश्नर ने बताया कि प्रारंभिक जांच में यह किसी शरारती तत्व की हरकत प्रतीत हो रही है, किसी भी संभावना को नजरअंदाज नहीं किया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि इससे पहले भी गुजरात के कई स्कूलों और एयरपोर्ट को इसी तरह के धमकी भरे ईमेल मिल चुके हैं, जो जांच में फर्जी साबित हुए थे। मामला दर्ज, साइबर जांच तेज पुलिस ने ईमेल के आधार पर प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर ली है और साइबर टीम को जांच सौंपी गई है। अधिकारियों ने नागरिकों से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और शांति बनाए रखें।  

Deepshikha जून 11, 2026 0
Prime Minister Narendra Modi inaugurating infrastructure projects in Gujarat including expressway and development initiatives
गुजरात में विकास की ‘मेगा सौगात’: पीएम मोदी आज देंगे 20,000 करोड़ के प्रोजेक्ट्स का तोहफा

गांधीनगर/अहमदाबाद, 31 मार्च 2026: Narendra Modi आज गुजरात दौरे पर हैं, जहां वे राज्य को 20,000 करोड़ रुपये से अधिक की विकास परियोजनाओं की बड़ी सौगात देने जा रहे हैं। सड़क, रेलवे, ऊर्जा, स्वास्थ्य और पर्यटन जैसे कई क्षेत्रों में ये प्रोजेक्ट्स राज्य के इंफ्रास्ट्रक्चर को नई रफ्तार देने वाले माने जा रहे हैं। सम्राट संप्रति म्यूजियम का उद्घाटन प्रधानमंत्री Samrat Samprati Museum का उद्घाटन करेंगे, जो जैन धर्म की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को दर्शाता है। यह म्यूजियम सम्राट संप्रति के नाम पर है, जो अहिंसा और धर्म प्रचार के लिए प्रसिद्ध रहे। सड़क और एक्सप्रेसवे प्रोजेक्ट्स Ahmedabad-Dholera Expressway का उद्घाटन (₹5,100 करोड़ से अधिक) इदर-बडोली बाईपास और NH-754K अपग्रेड का शिलान्यास गांधीनगर-कोबा-एयरपोर्ट रोड पर फ्लाईओवर प्रोजेक्ट इन प्रोजेक्ट्स से ट्रैफिक जाम में कमी और कनेक्टिविटी में बड़ा सुधार होने की उम्मीद है। रेलवे कनेक्टिविटी को बढ़ावा रेल सेक्टर में भी कई अहम प्रोजेक्ट्स राष्ट्र को समर्पित किए जाएंगे: कनालूस-जामनगर और राजकोट-कनालूस डबलिंग गांधीधाम-आदिपुर सेक्शन अपग्रेड हिम्मतनगर-खेड़ब्रह्मा गेज कन्वर्जन इसके साथ ही नई ट्रेन सेवा को भी हरी झंडी दिखाई जाएगी, जिससे यात्रियों की सुविधा बढ़ेगी। ऊर्जा और शहरी विकास में बड़ा निवेश 4.5 GW रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता वाला पावर ट्रांसमिशन प्रोजेक्ट (₹3,650 करोड़) 5,300 करोड़ रुपये के 44 अर्बन डेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स ये परियोजनाएं राज्य में ऊर्जा क्षमता और शहरी ढांचे को मजबूत करेंगी। स्वास्थ्य और पर्यटन सेक्टर को बढ़ावा अहमदाबाद और गांधीनगर के अस्पतालों में 858 बेड की नई सुविधाएं Rani ki Vav में लाइट एंड साउंड शो Sharmishtha Lake में वॉटर स्क्रीन प्रोजेक्शन इन प्रोजेक्ट्स का मकसद स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करना और पर्यटन अनुभव को बेहतर बनाना है। क्या है इस दौरे का बड़ा संदेश? प्रधानमंत्री का यह दौरा साफ संकेत देता है कि केंद्र सरकार इंफ्रास्ट्रक्चर, कनेक्टिविटी और सांस्कृतिक विरासत-तीनों क्षेत्रों में संतुलित विकास पर जोर दे रही है।  

surbhi मार्च 31, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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