Hindu festivals

Devotee offering prayers to a spiritual guru during Guru Purnima, symbolizing the sacred tradition of Guru Mantra and devotion.
Guru Purnima 2026: गुरु मंत्र को क्यों रखा जाता है अत्यंत गोपनीय? जानिए शास्त्रों में बताए गए आध्यात्मिक नियम और इसका महत्व

गुरु पूर्णिमा भारतीय सनातन परंपरा का एक अत्यंत पावन और महत्वपूर्ण पर्व है। यह दिन गुरु के प्रति श्रद्धा, सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए समर्पित माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि गुरु ही शिष्य को अज्ञान के अंधकार से ज्ञान के प्रकाश की ओर ले जाते हैं और आध्यात्मिक मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं। शास्त्रों के अनुसार, जिस व्यक्ति पर आपकी पूर्ण श्रद्धा और निष्ठा हो, उसी को अपना गुरु बनाना चाहिए। एक बार गुरु से दीक्षा और गुरु मंत्र प्राप्त होने के बाद शिष्य का कर्तव्य है कि वह गुरु की आज्ञा का पालन करे, उनके बताए मार्ग पर चले और गुरु मंत्र को सदैव गोपनीय रखे। गुरु मंत्र को गोपनीय रखने की परंपरा क्यों है? धर्मग्रंथों में गुरु मंत्र को अत्यंत गोपनीय रखने का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि गुरु द्वारा दिया गया मंत्र केवल शब्दों का समूह नहीं होता, बल्कि वह आध्यात्मिक ऊर्जा और साधना का माध्यम होता है। शास्त्रों के अनुसार, गुरु मंत्र की शक्ति तभी प्रभावी होती है जब साधक उसका नियमित और निष्ठापूर्वक जप करता है तथा उसे अनावश्यक रूप से दूसरों के सामने प्रकट नहीं करता। प्रकृति भी देती है यही संदेश धार्मिक व्याख्याओं में गुरु मंत्र की तुलना प्रकृति के नियमों से की गई है। जैसे— बीज मिट्टी के भीतर छिपकर ही विशाल वृक्ष बनता है। गर्भ में पल रहा जीवन पूर्ण विकसित होने तक सुरक्षित और गोपनीय रहता है। संचित ऊर्जा समय आने पर सबसे अधिक प्रभावशाली रूप में प्रकट होती है। उसी प्रकार गुरु मंत्र भी साधक के अंतर्मन में मौन रूप से विकसित होने वाली आध्यात्मिक शक्ति माना जाता है। इसलिए इसे गोपनीय रखने की परंपरा बनाई गई है। गुरु मंत्र सार्वजनिक करने से क्या माना जाता है? धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यदि साधक बार-बार अपने गुरु मंत्र की चर्चा करता है, तो उसका ध्यान साधना से हटकर दूसरों की प्रतिक्रिया, प्रशंसा, शंका या तुलना की ओर जा सकता है। ऐसी स्थिति में साधना का केंद्र भीतर की बजाय बाहर हो जाता है, जिससे आध्यात्मिक एकाग्रता प्रभावित हो सकती है। इसी कारण गुरु मंत्र को निजी साधना का विषय माना गया है। शास्त्रों में क्या कहा गया है? धर्मशास्त्रों में कहा गया है कि व्यक्ति के कल्याण के लिए कुछ बातों को सदैव गोपनीय रखना चाहिए और उनमें गुरु मंत्र प्रमुख है। मान्यता के अनुसार— गुरु मंत्र किसी भी व्यक्ति को नहीं बताना चाहिए। परिवार, मित्र या परिचितों के बीच भी इसे साझा नहीं करना चाहिए। गुरु द्वारा दी गई मंत्र-जप की विशेष विधि भी गोपनीय रखनी चाहिए। गुरु के निर्देशों का श्रद्धापूर्वक पालन करना ही शिष्य का धर्म माना गया है। पति-पत्नी को भी गुरु मंत्र साझा न करने की सलाह परंपरागत धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यदि पति ने गुरु मंत्र प्राप्त किया है तो उसे अपनी पत्नी को भी वह मंत्र नहीं बताना चाहिए। इसी प्रकार यदि पत्नी ने गुरु मंत्र प्राप्त किया है तो उसे भी अपने पति के साथ मंत्र साझा नहीं करना चाहिए। इसी कारण कई परंपराओं में पति-पत्नी एक साथ गुरु से मंत्र दीक्षा ग्रहण करते हैं, ताकि दोनों अपनी-अपनी साधना गुरु के निर्देशानुसार कर सकें। एक गुरु और एक मंत्र पर निष्ठा का महत्व धार्मिक ग्रंथों में यह भी उल्लेख मिलता है कि जिस प्रकार पूर्ण श्रद्धा के साथ किसी एक आराध्य की उपासना करने से साधक को आध्यात्मिक लाभ प्राप्त होता है, उसी प्रकार एक गुरु से प्राप्त गुरु मंत्र का नियमित जप और गुरु के प्रति अटूट निष्ठा साधना को सफल बनाने का माध्यम माना गया है।  

surbhi जुलाई 1, 2026 0
Hindu Panchang calendar with auspicious timings, Rahukaal and planetary positions for June 8, 2026
आज का पंचांग 8 जून 2026: आज अधिक मास की अष्टमी तिथि, जानें राहुकाल, शुभ मुहूर्त और दिनभर के प्रमुख योग

आज का पंचांग, 8 जून 2026: आज सोमवार, 8 जून 2026 को अधिक ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि है। आज शतभिषा नक्षत्र के बाद पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र का शुभ संयोग बन रहा है। विष्कुम्भ योग के बाद प्रीति योग का आरंभ होगा। भगवान शिव की आराधना और धार्मिक कार्यों के लिए आज का दिन विशेष माना गया है। आइए जानते हैं आज का संपूर्ण पंचांग, शुभ मुहूर्त, राहुकाल और विशेष उपाय। आज का पंचांग तिथि: कृष्ण अष्टमी 9 जून तड़के 03:23 बजे तक, इसके बाद नवमी तिथि प्रारंभ होगी। नक्षत्र: शतभिषा नक्षत्र – प्रातः 09:09 बजे तक इसके बाद पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र योग: विष्कुम्भ योग – प्रातः 09:28 बजे तक इसके बाद प्रीति योग करण: बालव करण – दोपहर 03:29 बजे तक इसके बाद कौलव करण सूर्य और चंद्रमा की स्थिति सूर्योदय: प्रातः 05:23 बजे सूर्यास्त: सायं 07:18 बजे चंद्रोदय: 9 जून को रात्रि 12:50 बजे चंद्रास्त: दोपहर 12:06 बजे चंद्रमा: कुंभ राशि में 9 जून तड़के 03:36 बजे तक रहेंगे, इसके बाद मीन राशि में प्रवेश करेंगे। आज के शुभ मुहूर्त अभिजीत मुहूर्त प्रातः 11:52 बजे से दोपहर 12:48 बजे तक ब्रह्म मुहूर्त प्रातः 03:52 बजे से 04:38 बजे तक अमृत काल 9 जून तड़के 01:29 बजे से 03:07 बजे तक आज के अशुभ मुहूर्त राहुकाल प्रातः 07:30 बजे से 09:00 बजे तक यमगंड काल प्रातः 10:30 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक गुलिक काल दोपहर 01:30 बजे से 03:00 बजे तक आज का नक्षत्र विशेष आज पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र का प्रभाव रहेगा। इससे पहले प्रातः तक शतभिषा नक्षत्र रहेगा, जिसका स्वामी राहु और देवता वरुण माने जाते हैं। यह नक्षत्र शोध, चिकित्सा, आध्यात्मिकता, रहस्य और नवाचार से जुड़े कार्यों के लिए शुभ माना जाता है। इस नक्षत्र में जन्मे लोग सामान्यतः बुद्धिमान, सत्यनिष्ठ, स्वतंत्र विचारों वाले और समस्याओं का समाधान खोजने में कुशल माने जाते हैं। इनमें रचनात्मकता और नेतृत्व क्षमता भी प्रबल होती है। आज का विशेष उपाय सोमवार के दिन भगवान शिव का दूध से अभिषेक करें तथा शिव चालीसा का पाठ करें। जरूरतमंद लोगों को चावल, चीनी या मिश्री का दान करना भी अत्यंत शुभ माना गया है। ऐसा करने से मानसिक शांति, सुख-समृद्धि और भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है।  

surbhi जून 8, 2026 0
Devotees offering prayers to River Ganga during Ganga Saptami and Ganga Dussehra celebrations
गंगा दशहरा और गंगा सप्तमी को एक समझने की भूल न करें, जानिए दोनों पर्वों में क्या है बड़ा अंतर

Ganga Dussehra और Ganga Saptami सनातन धर्म में मां गंगा को समर्पित दो बेहद पवित्र पर्व माने जाते हैं। दोनों ही त्योहारों पर गंगा स्नान, पूजा-पाठ और दान का विशेष महत्व होता है। हालांकि, कई लोग इन दोनों पर्वों को एक ही समझ लेते हैं, जबकि इनकी तिथि, पौराणिक कथा और धार्मिक महत्व पूरी तरह अलग हैं। हिंदू मान्यताओं के अनुसार मां गंगा केवल एक नदी नहीं, बल्कि मोक्ष प्रदान करने वाली देवी हैं। आइए जानते हैं गंगा सप्तमी और गंगा दशहरा के बीच क्या अंतर है। तिथि और समय में अंतर दोनों पर्व हिंदू पंचांग के अलग-अलग महीनों में मनाए जाते हैं। Ganga Saptami वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को मनाई जाती है। Ganga Dussehra ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाया जाता है। गंगा सप्तमी और गंगा दशहरा का महत्व Ganga Saptami को मां गंगा का जन्मोत्सव माना जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इसी दिन मां गंगा भगवान ब्रह्मा के कमंडल से प्रकट हुई थीं। कहा जाता है कि उन्होंने भगवान विष्णु के चरणों को पवित्र जल से धोकर स्वर्ग में स्थान प्राप्त किया था। वहीं Ganga Dussehra मां गंगा के पृथ्वी पर अवतरण का पर्व माना जाता है। इसी दिन मां गंगा स्वर्ग से धरती पर उतरी थीं और भगवान शिव ने उनके प्रचंड वेग को अपनी जटाओं में धारण किया था। गंगा सप्तमी से जुड़ी कथा पौराणिक कथा के अनुसार जब मां गंगा स्वर्ग से प्रवाहित हो रही थीं, तब उनके तेज बहाव से ऋषि जह्नु की कुटिया और पूजा सामग्री बह गई। इससे क्रोधित होकर ऋषि जह्नु ने पूरी गंगा नदी को पी लिया। बाद में देवताओं और राजा भगीरथ की प्रार्थना पर ऋषि जह्नु ने वैशाख शुक्ल सप्तमी के दिन अपने कान से गंगा को पुनः बाहर निकाला। इसी कारण इस दिन को मां गंगा का ‘दूसरा जन्म’ भी कहा जाता है। इस घटना के बाद मां गंगा को ‘जाह्नवी’ नाम मिला। गंगा दशहरा की पौराणिक कथा Ganga Dussehra का संबंध राजा भगीरथ की कठोर तपस्या से जुड़ा है। मान्यता है कि राजा भगीरथ ने अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति और मोक्ष के लिए हजारों वर्षों तक तप किया था। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान ब्रह्मा ने मां गंगा को पृथ्वी पर भेजने की अनुमति दी। लेकिन गंगा के तीव्र वेग को संभालना संभव नहीं था। तब भगवान शिव ने मां गंगा को अपनी जटाओं में धारण किया और बाद में शांत धारा के रूप में पृथ्वी पर प्रवाहित किया। दोनों पर्वों का धार्मिक महत्व दोनों ही पर्वों पर गंगा स्नान, दान-पुण्य और पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इन दिनों गंगा स्नान करने से पापों का नाश होता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है।  

surbhi मई 23, 2026 0
Devotees performing Ganesh Puja with idol, flowers, and lamps seeking blessings for prosperity and success.
Ganesh Puja: क्यों प्रथम पूजनीय हैं भगवान गणेश? जानिए पूजा के 7 प्रमुख आध्यात्मिक लाभ

सनातन धर्म में हर शुभ कार्य की शुरुआत भगवान गणेश की पूजा से करना परंपरा का अहम हिस्सा है। “श्री गणेश” से कार्य प्रारंभ करने का अर्थ ही है कि उस कार्य में सफलता, शुभता और बाधा-रहित मार्ग की कामना की जा रही है। गणपति को ऋद्धि-सिद्धि, बुद्धि, विवेक और शुभ-लाभ का देवता माना जाता है, इसलिए उन्हें “प्रथम पूजनीय” का दर्जा प्राप्त है। गणपति प्रथम पूजनीय क्यों हैं? धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, एक बार सभी देवी-देवताओं के बीच यह प्रतियोगिता हुई कि जो सबसे पहले पूरे ब्रह्मांड का चक्कर लगाएगा, वही प्रथम पूजनीय होगा। जहां अन्य देवता अपने-अपने वाहनों पर सवार होकर ब्रह्मांड की यात्रा पर निकल पड़े, वहीं भगवान गणेश ने अपनी बुद्धिमत्ता का परिचय देते हुए अपने माता-पिता–भगवान शिव और माता पार्वती–की परिक्रमा की। गणेश जी के अनुसार, माता-पिता ही उनका संपूर्ण ब्रह्मांड हैं। उनकी इस सूझबूझ से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें प्रथम पूजनीय होने का वरदान दिया। गणपति पूजा के 7 प्रमुख लाभ 1. नवग्रह दोषों से मुक्ति गणेश जी की विधिपूर्वक पूजा करने से कुंडली के नवग्रह दोष शांत होते हैं और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। 2. सफलता और समृद्धि की प्राप्ति लंबोदर रूप में पूजे जाने वाले गणपति की कृपा से जीवन के हर क्षेत्र में सफलता और आर्थिक उन्नति मिलती है। 3. विघ्नों का नाश विघ्नहर्ता गणेश की आराधना से कार्यों में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं और योजनाएं सफलतापूर्वक पूर्ण होती हैं। 4. नकारात्मकता और दोषों का अंत गणपति की पूजा व्यक्ति के भीतर के अहंकार को समाप्त कर उसे विनम्र बनाती है, साथ ही नकारात्मक शक्तियों को भी दूर करती है। 5. बुद्धि और विवेक का आशीर्वाद गणेश जी को ज्ञान और बुद्धि का देवता माना जाता है। उनकी कृपा से व्यक्ति सही निर्णय लेने में सक्षम होता है। 6. वास्तु दोष से मुक्ति घर में गणपति की मूर्ति या चित्र रखने से वास्तु दोष दूर होते हैं और सकारात्मक वातावरण बना रहता है। 7. सुख-समृद्धि और मनोकामना पूर्ति सच्चे मन से की गई गणपति पूजा जीवन के कष्टों को दूर कर इच्छाओं की पूर्ति करती है और घर में सुख-समृद्धि बनाए रखती है। भगवान गणेश की पूजा केवल धार्मिक आस्था ही नहीं, बल्कि जीवन को संतुलित, सकारात्मक और सफल बनाने का मार्ग भी मानी जाती है। उनकी आराधना व्यक्ति को मानसिक, आध्यात्मिक और व्यावहारिक रूप से सशक्त बनाती है।  

surbhi अप्रैल 15, 2026 0
Devotee performing Akshaya Tritiya puja with gold, diya, and offerings for wealth and prosperity.
अक्षय तृतीया 2026: कब है यह पावन पर्व? जानें सोना खरीदने का शुभ मुहूर्त, पूजा का सही समय और धन वृद्धि के उपाय

  हिंदू धर्म में Akshaya Tritiya का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। यह पर्व वैशाख महीने के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है। मान्यता है कि इस दिन किए गए जप, तप, दान और पूजा का फल अक्षय यानी कभी समाप्त न होने वाला होता है। इस पावन दिन पर विशेष रूप से Vishnu और Lakshmi की पूजा की जाती है। साथ ही सोना खरीदना भी बेहद शुभ माना जाता है, क्योंकि इससे घर में सुख-समृद्धि और धन वृद्धि का आशीर्वाद मिलता है।   अक्षय तृतीया 2026 कब है साल 2026 में अक्षय तृतीया 19 अप्रैल, रविवार को मनाई जाएगी। इस दिन को सनातन परंपरा में अबूझ मुहूर्त माना जाता है, यानी इस दिन किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत बिना विशेष मुहूर्त देखे भी की जा सकती है।   पूजा का शुभ मुहूर्त अक्षय तृतीया पर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा के लिए शुभ समय: 19 अप्रैल 2026 सुबह 10:49 बजे से दोपहर 12:20 बजे तक इस दौरान विधि-विधान से पूजा करने से घर में सुख, समृद्धि और धन की वृद्धि होती है।   सोना खरीदने का शुभ मुहूर्त पहला शुभ समय: 19 अप्रैल 2026, सुबह 10:49 बजे से 20 अप्रैल 2026, सुबह 05:51 बजे तक दूसरा शुभ समय: 20 अप्रैल 2026, सुबह 05:51 बजे से 07:27 बजे तक   चौघड़िया के अनुसार सोना खरीदने का शुभ समय सुबह: 10:49 बजे से 12:20 बजे तक दोपहर: 01:58 बजे से 03:35 बजे तक शाम: 06:49 बजे से 10:57 बजे तक उषाकाल (20 अप्रैल): 04:28 बजे से 05:51 बजे तक   अक्षय तृतीया पर धन वृद्धि के उपाय भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विधि-विधान से पूजा करें। इस दिन सोना या चांदी खरीदना बेहद शुभ माना जाता है। जरूरतमंद लोगों को अन्न, वस्त्र या धन का दान करें। घर में दीपक जलाकर लक्ष्मी जी का ध्यान करें। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अक्षय तृतीया के दिन किए गए शुभ कार्यों का फल जीवन भर बना रहता है और घर में सुख-समृद्धि का वास होता है।  

surbhi मार्च 14, 2026 0
idol of Goddess Durga.
Chaitra Navratri 2026: कब है महाअष्टमी और राम नवमी? जानें सही तारीख और पूजा से जुड़े जरूरी नियम

  Chaitra Navratri हिंदू धर्म के सबसे पवित्र पर्वों में से एक माना जाता है। इस दौरान भक्त मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा करते हैं और नौ दिनों तक व्रत रखकर देवी की आराधना करते हैं। नवरात्र के करीब आते ही भक्तों के मन में अक्सर यह सवाल रहता है कि महाअष्टमी और राम नवमी किस दिन पड़ेंगी।   कब है महाअष्टमी 2026? इस साल महाअष्टमी 26 मार्च 2026, गुरुवार को मनाई जाएगी। यह दिन मां के आठवें स्वरूप Mahagauri को समर्पित होता है। इस दिन कन्या पूजन का विशेष महत्व माना जाता है। मान्यता है कि सुबह कन्याओं को भोजन कराने और उनका आशीर्वाद लेने से देवी की विशेष कृपा प्राप्त होती है।   कब है राम नवमी 2026? राम नवमी 27 मार्च 2026, शुक्रवार को मनाई जाएगी। इसी दिन Rama के जन्मोत्सव का पर्व मनाया जाता है। इस दिन भक्त भगवान राम की पूजा-अर्चना करते हैं और नवरात्र व्रत का पारण करते हैं।   अष्टमी-नवमी पर क्या करें अष्टमी के दिन 2 से 10 साल की कन्याओं को भोजन कराकर उनका आशीर्वाद लें, क्योंकि उन्हें देवी का स्वरूप माना जाता है।   अष्टमी के अंत और नवमी के आरंभ के बीच के संधि काल में दीपक जलाकर मां Chamunda का ध्यान करना शुभ माना जाता है।   नवमी के दिन घर में छोटा हवन करना शुभ माना जाता है, इससे सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है।   इन बातों का रखें ध्यान अष्टमी और नवमी के दिन घर में झगड़ा या किसी का अपमान करने से बचें।   इन दिनों तामसिक भोजन जैसे मांस-मदिरा से दूर रहें और सात्विक भोजन करें।   राम नवमी की पूजा में तुलसी चढ़ाया जा सकता है, लेकिन नवरात्र के दौरान मां दुर्गा को तुलसी नहीं चढ़ाई जाती।   इन दिनों ब्रह्म मुहूर्त में उठकर पूजा करना सबसे शुभ माना जाता है।

surbhi मार्च 14, 2026 0
Popular post
शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Top week

Bihar Assistant Professor
जॉब्स

बिहार में असिस्टेंट प्रोफेसर बनने के नियम बदले, जानिए कब जरूरी होगा NET ?

abhishek singh जुलाई 2, 2026 0