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JMM Assam elections 2026
असम चुनाव में ‘एकला चलो’ की राह पर चल पड़ा झामुमो,सभी 21 उम्मीदवारों ने भरा पर्चा

रांची। झारखंड मुक्ति मोर्चा ने असम विधानसभा चुनाव में अकेले उतरने का फैसला किया है। पार्टी के केंद्रीय महासचिव और प्रवक्ता सुप्रियो भट्टाचार्य ने जानकारी दी कि पार्टी के सभी 21 प्रत्याशियों ने नामांकन दाखिल कर दिया है। गठबंधन पर सहमति नहीं बनने के कारण पार्टी ने ‘एकला चलो’ की रणनीति अपनाई है।   गठबंधन नहीं बना, अकेले चुनाव मैदान में JMM सुप्रियो भट्टाचार्य ने बताया कि असम में गठबंधन को लेकर बातचीत हुई थी, लेकिन कोई सहमति नहीं बन सकी। ऐसे में पार्टी ने अपने दम पर चुनाव लड़ने का निर्णय लिया। उन्होंने कहा कि पार्टी के सभी उम्मीदवार कांग्रेस और भाजपा के खिलाफ चुनाव लड़ेंगे।   पार्टी को चुनाव से फायदा होने का दावा पार्टी का मानना है कि अकेले चुनाव लड़ने से उसका जनाधार मजबूत होगा। सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा कि यह देखना ज्यादा जरूरी है कि इससे पार्टी को कितना फायदा होता है, न कि किसे नुकसान होगा।   केंद्र सरकार की विदेश नीति पर उठाए सवाल प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने केंद्र सरकार की विदेश नीति पर भी सवाल उठाए। उन्होंने प्रधानमंत्री के संसद में दिए गए बयान को लेकर कहा कि उसमें स्पष्टता की कमी थी। उन्होंने मांग की कि सरकार वैश्विक संकट और विदेश नीति पर श्वेत पत्र जारी करे।   मध्य पूर्व में फंसे भारतीयों का मुद्दा भट्टाचार्य ने दावा किया कि मध्य पूर्व के कई हिस्सों में अब भी भारतीय नागरिक फंसे हुए हैं। उन्होंने कहा कि यदि मौजूदा हालात लंबे समय तक बने रहे, तो इसका असर भारत पर भी पड़ सकता है।   झारखंड में गठबंधन जारी रहेगा उन्होंने स्पष्ट किया कि झारखंड में कांग्रेस के साथ पार्टी का चुनाव पूर्व गठबंधन जारी रहेगा और अगले चुनाव तक इसमें कोई बदलाव नहीं होगा।

Anjali Kumari मार्च 24, 2026 0
Rahul Gandhi Chaibasa visit
Rahul Gandhi चाईबासा में 22 मार्च को लगायेंगे कांग्रेसियों की क्लास

रांची। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी द्वारा “संगठन सृजन” अभियान के तहत देशभर में जिला कांग्रेस कमेटी (DCC) अध्यक्षों का चयन किया गया है। इसी क्रम में संगठन को और अधिक मजबूत एवं प्रभावी बनाने के उद्देश्य से चयनित जिला अध्यक्षों के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। उक्त क्रम में झारखंड एवं ओडिशा के जिला कांग्रेस कमेटी अध्यक्षों के लिए 10 दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण शिविर का आयोजन झारखंड के चाईबासा स्थित ट्राइबल रिसर्च एंड ट्रेनिंग सेंटर (TRTC) में किया जा रहा है। यह प्रशिक्षण शिविर 22 मार्च से 31 मार्च 2026 तक संचालित होगा। इस संबंध में जानकारी देते हुए मीडिया चेयरमैन सतीश पॉल मुंजनी ने बताया कि इस प्रशिक्षण शिविर का उद्देश्य संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करना, जिला स्तर पर नेतृत्व क्षमता का विकास करना तथा कार्यकर्ताओं के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना है। शिविर में जनसंपर्क, संगठन विस्तार, राजनीतिक रणनीति एवं जनहित के मुद्दों पर प्रभावी कार्यशैली जैसे विषयों पर विस्तृत प्रशिक्षण दिया जाएगा। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम की विशेषता यह है कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी भी शिविर के दौरान एक दिन के लिए उपस्थित होकर जिला अध्यक्षों एवं कार्यकर्ताओं का मार्गदर्शन करेंगे। उनके आगमन को लेकर कार्यकर्ताओं में काफी उत्साह है।  प्रदेश कांग्रेस कमेटी द्वारा सभी संबंधित जिला अध्यक्षों से निर्धारित समय के भीतर प्रशिक्षण स्थल पर पहुंचकर अपनी उपस्थिति सुनिश्चित करने की अपील की गई है। यह प्रशिक्षण शिविर संगठन को जमीनी स्तर पर सुदृढ़ करने एवं आगामी राजनीतिक चुनौतियों के लिए तैयार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है।

Anjali Kumari मार्च 19, 2026 0
Mamata Banerjee Bhawanipur seat
Bengal Elections 2026: Mamata Banerjee की बढ़ेंगी मुश्किलें, Humayun Kabir ने भवानीपुर में उतारा उम्मीदवार

कोलकाता, एजेंसियां। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 से पहले सियासी मुकाबला और दिलचस्प हो गया है। ममता बनर्जी के लिए चुनौतियां बढ़ती नजर आ रही हैं, क्योंकि पूर्व विधायक हुमायूं कबीर ने अपनी नई पार्टी ‘आम जनता उन्नयन पार्टी’ के जरिए बड़ा चुनावी दांव चला है।   भवानीपुर सीट पर नया मुकाबला राज्य की हाई-प्रोफाइल भवानीपुर सीट पर अब मुकाबला त्रिकोणीय होता दिख रहा है। हुमायूं कबीर ने यहां से पूनम बेगम को उम्मीदवार बनाया है, जो सीधे मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को चुनौती देंगी। इस कदम को मुस्लिम वोट बैंक में सेंध लगाने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।   182 सीटों पर चुनाव लड़ेगी नई पार्टी हुमायूं कबीर ने ऐलान किया है कि उनकी पार्टी 294 सदस्यीय विधानसभा में से 182 सीटों पर उम्मीदवार उतारेगी। इससे इस बार चुनाव में बहुकोणीय मुकाबले के आसार बन गए हैं।   AIMIM से गठबंधन के संकेत कबीर ने यह भी संकेत दिए हैं कि उनकी पार्टी All India Majlis-e-Ittehadul Muslimeen (AIMIM) के साथ तालमेल कर सकती है। इससे कुछ सीटों पर चुनावी समीकरण और मजबूत हो सकते हैं।   टीएमसी में हलचल कबीर के इस कदम से All India Trinamool Congress (TMC) में भी हलचल मच गई है। खासकर कांदी सीट से फिरहाद हकीम के पूर्व दामाद यासीन हैदर को टिकट देने को टीएमसी के अंदरूनी समीकरणों पर सीधा असर माना जा रहा है।   खुद दो सीटों से लड़ेंगे कबीर हुमायूं कबीर खुद मुर्शिदाबाद जिले की रेजीनगर और नोदा सीट से चुनाव लड़ेंगे। पार्टी जल्द ही अपनी पूरी उम्मीदवार सूची जारी करेगी।   क्या है रणनीति? हुमायूं कबीर का फोकस अल्पसंख्यक वोटों के ध्रुवीकरण और नए राजनीतिक विकल्प के रूप में उभरने पर है। उनके इस कदम से बंगाल की राजनीति में मुकाबला और कड़ा होने की संभावना है।

Anjali Kumari मार्च 19, 2026 0
विधानसभा चुनाव
पश्चिम बंगाल में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल, मुख्य सचिव और गृह सचिव हटाए गए

कोलकाता, एजेंसियां। Election Commission of India ने पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव की घोषणा के तुरंत बाद बड़ा प्रशासनिक फेरबदल किया है। आयोग ने राज्य की मुख्य सचिव नंदिनी चक्रवर्ती और गृह सचिव जगदीश प्रसाद मीणा को उनके पद से हटा दिया है। अब दुष्यंत नारियावाला को नया मुख्य सचिव नियुक्त किया गया है, जबकि संघमित्रा घोष को राज्य का नया गृह सचिव बनाया गया है। चुनाव आयोग ने नए मुख्य सचिव को सोमवार दोपहर तीन बजे तक पदभार ग्रहण करने का निर्देश दिया है।   पुलिस विभाग में भी बदलाव प्रशासनिक बदलाव के साथ पुलिस विभाग में भी कई अहम नियुक्तियां की गई हैं। 1996 बैच के आईपीएस अधिकारी अजय कुमार नंद को Kolkata Police का नया पुलिस कमिश्नर बनाया गया है। वहीं 1992 बैच के आईपीएस अधिकारी सिद्ध नाथ गुप्ता को महानिदेशक और सूचना एवं सरकारी प्रमुख (प्रभारी) की जिम्मेदारी दी गई है। इसके अलावा 1991 बैच के नटराजन रमेश बाबू को सुधार सेवा विभाग का महानिदेशक बनाया गया है, जबकि 1995 बैच के अजय मुकुंद रानाडे को अतिरिक्त महानिदेशक (कानून-व्यवस्था) के पद पर तैनात किया गया है।   चुनाव से पहले हुए बदलाव दरअसल, West Bengal में विधानसभा चुनाव की तारीखों के ऐलान के बाद आदर्श आचार संहिता लागू हो गई है। चुनाव आयोग को इस दौरान प्रशासनिक स्तर पर कई विशेष अधिकार मिलते हैं, जिसके तहत वह अधिकारियों के तबादले या नियुक्ति का फैसला ले सकता है।   दो चरणों में होगा मतदान निर्वाचन आयोग के मुताबिक राज्य में इस बार दो चरणों में मतदान कराया जाएगा। पहले चरण के लिए 23 अप्रैल और दूसरे चरण के लिए 29 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे, जबकि मतगणना 4 मई को होगी। चुनाव की तारीखों के साथ ही राज्य में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है।

Anjali Kumari मार्च 16, 2026 0
अब असम में हिमंता को हेमंत का चैलेंज
अब असम में हिमंता को हेमंत का चैलेंज, जानें JMM किसका बिगाड़ेगा खेल

रांचीः असम समेत 5 राज्यों में में विधानसभा चुनाव की घोषणा हो गई है। इस बीच झारखंड के मुख्यमंत्री और झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के अध्यक्ष हेमंत सोरेन की सक्रियता ने पूर्वोत्तर की राजनीति में हलचल बढ़ा दी है। यह साफ हो गया है कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन झारखंड के बाद अब हिमंता बिस्वा शर्मा को उन्ही के गढ़ असम में चुनौती देने जा रहे हैं।  पिछले सप्ताह ही असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष और लोकसभा सांसद गौरव गोगोई से मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की मुलाकात भी हुई थी। इस बैठक को असम चुनाव के संदर्भ में विपक्षी दलों के संभावित तालमेल और रणनीतिक समन्वय की दिशा में अहम माना जा रहा है। कई सीटों पर उम्मीदवार उतार सकता है झामुमो झारखंड मुक्ति मोर्चा प्रमुख हेमंत सोरेन ने असम विधानसभा चुनाव में कई सीटों पर उम्मीदवार उतारने का संकेत दिया है। इसे लेकर वो पिछले एक महीने में दो बार असम का दौरा कर चुके हैं। हेमंत सोरेन असम में रहने वाले जनजातीय और चाय बागान में मजदूरी करने वाले झारखंड के आदिवासी वोट बैंक की मदद से संगठन का विस्तार करना चाहते हैं।   हिमंता बिस्वा सरमा को घेरने की कोशिश हेमंत सोरेन ने वर्ष 2024 के झारखंड विधानसभा चुनाव के दौरान ही यह ऐलान किया था कि वो असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा को भी चुनाव के वक्त जवाब देंगे। उस दौरान हिमंता बिस्वा सरमा भाजपा और एनडीए प्रत्याशियों की जीत सुनिश्चित करने के लिए कई दिनों तक झारखंड में ही कैंप कर रहे थे। साथ ही हेमंत सोरेन सरकार की नीतियों पर सवाल उठा रहे थे। अब हेमंत सोरेन असम जाकर वहां बीजेपी सरकार को घेरने की कोशिश कर रहे हैं। असम चुनाव को लेकर विपक्षी एकता की कोशिश   असम में जेएमएम के बढ़ते प्रभाव के बीच कांग्रेस के महासचिव और पूर्व केंद्रीय मंत्री भंवर जितेंद्र सिंह और झारखंड प्रदेश कांग्रेस के प्रभारी के. राजू के साथ गौरव गगोई की बैठक भी रांची में हुई थी। राजनीतिक हलकों में इसे असम चुनाव को लेकर विपक्षी रणनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कहा जा रहा है कि रांची से ही विपक्षी एकता की कोशिश शुरू हो गई है।   सीट बंटवारे पर प्रारंभिक बातचीत जानकारी के अनुसार बैठक में असम विधानसभा चुनाव, झारखंड में चल रही विभिन्न विकास योजनाओं के क्रियान्वयन और समसामयिक राजनीतिक मुद्दों पर चर्चा हुई। इसके साथ ही असम में झामुमो और कांग्रेस के बीच संभावित सीट बंटवारे और चुनावी तालमेल को लेकर भी प्रारंभिक बातचीत की चर्चा है।   एक नए समीकरण की संभावनाओं को बल दरअसल, पिछले लगभग डेढ़ महीने के भीतर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने असम में दो बड़ी जनसभाओं को संबोधित किया है। फरवरी में तिनसुकिया जिले में आयोजित आदिवासी महासभा की रैली और इसके बाद विश्वनाथ जिले में हुई सभा में उमड़ी भीड़ ने वहां की राजनीति में एक नए समीकरण की संभावनाओं को बल दिया है। इन सभाओं में उन्होंने खास तौर पर चाय बागानों में काम करने वाले आदिवासी समुदाय की पहचान, सम्मान और अधिकारों का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। झामुमो का मानना है कि असम में झारखंड, ओडिशा और पश्चिम बंगाल से जाकर बसे लाखों आदिवासी समुदाय राजनीतिक रूप से एक महत्वपूर्ण शक्ति हैं, जिनकी आवाज अभी तक मुख्यधारा की राजनीति में अपेक्षित रूप से नहीं उठाई गई है। इसी सामाजिक आधार पर पार्टी वहां अपनी राजनीतिक जमीन तलाशने की कोशिश कर रही है।   झामुमो की नजर देश की 12 करोड़ आदिवासी वोट बैंक पर झामुमो के महासचिव और राज्य सरकार के मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू का कहना है कि पार्टी का लक्ष्य देश के लगभग 12 करोड़ आदिवासियों की मजबूत आवाज बनना है। उनके अनुसार असम में मिल रहे जनसमर्थन से यह संकेत मिलता है कि वहां के आदिवासी समाज में राजनीतिक प्रतिनिधित्व को लेकर नई उम्मीदें पैदा हो रही हैं। कांग्रेस भी इसे भली भांति समझ रही है। इसलिए वह झारखंड के नेताओं को आगे कर रही है। गौरव गोगोई ने रांची में मीडिया  जानकारी दी थी कि कांग्रेस नेतृत्व ने असम विधानसभा चुनाव के लिए झारखंड कांग्रेस नेता बंधु तिर्की को वरीय पर्यवेक्षक बनाया है। उन्होंने कहा कि विपक्षी दलों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर भाजपा को चुनौती देने की रणनीति तैयार की जा रही है और इसी सिलसिले में झारखंड के नेताओं के साथ भी विचार-विमर्श किया जा रहा है। बहरहाल, रांची में कांग्रेस नेताओं और हेमंत सोरेन की यह मुलाकात केवल औपचारिक शिष्टाचार से आगे बढ़कर असम चुनाव की संभावित रणनीति के एक महत्वपूर्ण संकेत के रूप में देखी जा रही है। वैसे भी असम में झामुमो की सक्रियता से सबसे ज्यादा चिंता कांग्रेस की ही बढ़ी हुई है। इसलिए कांग्रेस झामुमो की अनदेखी करने की स्थिति में नहीं है।

Anjali Kumari मार्च 16, 2026 0
विधायकों की जमीन में फंसा पेंच, रघुवर निशाने पर, जानें पूरा मामला
विधायकों की जमीन में फंसा पेंच, रघुवर निशाने पर, जानें पूरा मामला

रांची। विधायकों और पूर्व विधायकों को आवास के लिए स्वावलंबन सहकारी समिति को उपलब्ध कराई गई कांके की 33 एकड़ जमीन में पेंच फंस गया है। राज्य सरकार की ओर से सदन में बताया गया कि उक्त जमीन वर्ष 1970 से ही दूसरे के नाम बंदोबस्त थी। संसदीय कार्य मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने दावा किया कि भाजपा के शासनकाल में तत्कालीन मुख्यमंत्री रघुवर दास के दबाव में राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के अफसरों ने गरीबों की जमीन को गलत ढंग से समिति को हस्तांतरित कर दिया था। उन्होंने इसपर भी सवाल उठाया कि बंदोबस्त हो चुकी जमीन कैसे विधायकों के लिए हस्तांतरित कर दी गई थी। पोर्टल खोला जाना था संसदीय कार्य मंत्री ने कहा कि उन्होंने पिछले दिनों तीन दिनों के भीतर जमीन रजिस्ट्री के लिए पोर्टल खोलने का आश्वासन सदन में दिया था। उन्होंने रांची डीसी के आश्वासन पर यह बात सदन में कही थी, लेकिन उन्होंने जमीन की वास्तविक स्थिति जानने के लिए गुरुवार को राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री तथा इस विभाग के सचिव और रांची डीसी के साथ बैठक की। 3.30 एकड़ जमीन चली गई रिंग रोड मे उसमें यह बात सामने आई कि 33 एकड़ जमीन में 3.30 एकड़ जमीन पर रिंग रोड बन गई है। दो एकड़ जमीन में आदिवासी मसना है। तीन एकड़ जमीन पर डोभा बन गया है। तीन एकड़ जमीन में रिंग रोड बनने से गड्ढा हो गया है। 23.70 एकड़ जमीन ही बेची है जिसपर ग्रामीण खेती कर रहे हैं। 1970-71 में जमीन भूमिहीनों के लिए बंदोबस्त की गई थी उन्होंने बताया कि दस्तावेज के अध्ययन से पता चला कि 1970-71 में ही उक्त जमीन भूमिहीनों के लिए बंदोबस्त की गई थी, जिसपर वे आज भी खेती कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि भाजपा की सरकार में तत्कालीन मुख्यमंत्री रघुवर दास के दबाव पर अधिकारियों ने आनन-फानन में विधायकों के लिए जमीन सहकारी समिति को हस्तांतरित कर दी थी। उन्होंने कहा कि कोई भी जनप्रतिनिधि गरीबों की जमीन पर अपना आवास बनाना नहीं चाहेगा। गरीबों को कोई विस्थापित नहीं करना चाहेगा। उन्होंने विधायकों के लिए दूसरी जगह जमीन तलाशने की बात कही। राधाकृष्ण किशोर और सीपी सिंह में नोकझोंक विधायकों की जमीन को लेकर तत्कालीन भाजपा सरकार पर आरोप लगाने के बाद संसदीय कार्य मंत्री राधाकृष्ण किशोर और रांची से भाजपा के विधायक सीपी सिंह के बीच हल्की नोक-झोंक भी हुई। दरअसल, सीपी सिंह ने मंत्री को राजनीतिज्ञ कहकर संबोधित किया। इसपर मंत्री ने कहा कि वे राजनीतिज्ञ नहीं है। इसपर सीपी ने कहा कि राजनीतिज्ञ नहीं होते तो पेट्रोल पर भी राजनीति नहीं करते। मंत्री गरीबी हटाने के नाम पर गरीबों को हटानेवाली इंदिरा गांधी की पार्टी से ही हैं। जवाब में मंत्री ने कहा कि इंदिरा गांधी होतीं तो पेट्रोल की किल्लत की नौबत ही नहीं आती। देश की किरकिरी नहीं होती। इसपर सीपी ने पलटवार करते हुए कहा कि इतिहास भूला नहीं जा सकता। जवाहर लाल नेहरू के कारण ही भारत की जमीन चीन में चली गई। क्या है जमीन की अद्यतन स्थिति? आवास निर्माण के लिए भूमि आवंटन की प्रक्रिया भले ही कागजी रूप से पूरी कर ली गई हो, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति अब भी विवादित बनी हुई है। उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार समिति द्वारा 28 जून 2016 को राजस्व विभाग के संयुक्त सचिव से जमीन आवंटन का अनुरोध किया गया था। इसके बाद कांके अंचल के मौजा चुटू स्थित थाना संख्या-164, खाता संख्या-118 और प्लाट संख्या-115 की 35 एकड़ गैरमजरुआ मालिक परती कदिम भूमि हस्तांतरण का प्रस्ताव तैयार किया गया। सात अगस्त 2017 को भूमि हस्तांतरण को स्वीकृति प्रदान की गई। इसके बाद 10 अप्रैल 2018 को समिति ने एक करोड़ 70 लाख 62 हजार 500 रुपये जमा कर दिए और एक जून 2018 को हस्तांतरित भूमि का एकरारनामा भी पूरा कर लिया गया। पूरी प्रक्रिया लगभग एक वर्ष 11 माह और तीन दिनों में पूर्ण हुई। भूमिहीनों का दावा और विरोधः वर्ष 1970-71 में भूमिहीन परिवारों बंधना करमाली, जुड़वा करमाली, चरकू करमाली, ललकू मुंडा, राजू मिरदहा सहित अन्य के नाम से इस जमीन की बंदोबस्ती की गई थी। आरोप है कि भाजपा सरकार के दौरान तत्कालीन मुख्यमंत्री रघुवर दास के दबाव में इन आदिवासी परिवारों से बिना सहमति के बंदोबस्ती रद कर दी गई। ग्रामीण कर रहे विरोध जब प्रशासनिक अधिकारी भूमि को कब्जा-मुक्त कराने पहुंचे तो ग्रामीणों ने तीव्र विरोध किया। वर्तमान में भी जिन परिवारों की बंदोबस्ती रद हुई थी, उनका कब्जा जमीन पर बना हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि ऐसे हालात में यदि रजिस्ट्री के लिए पोर्टल खोल भी दिया जाता है तो भूमिहीनों की जमीन पर कब्जा करना सही नहीं होगा। 2 एकड़ क्षेत्र में आदिवासी मसना कुल 35 एकड़ भूमि में से लगभग 3.30 एकड़ पर रिंग रोड का निर्माण हो चुका है, जबकि दो एकड़ क्षेत्र में आदिवासी मसना (श्मशान) स्थित है। करीब तीन एकड़ में सात डोभा बनाए गए हैं और तीन एकड़ क्षेत्र रिंग रोड के दक्षिण परती गढ़ा के रूप में है। शेष लगभग 23.70 एकड़ भूमि पर स्थानीय ग्रामीण खेती कर रहे हैं।

Anjali Kumari मार्च 14, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2025 का रिजल्ट घोषित, अनुज अग्निहोत्री बने टॉपर, 958 उम्मीदवार सफल

UPSC CSE Result 2025: देश की सबसे प्रतिष्ठित परीक्षाओं में से एक Civil Services Examination का अंतिम परिणाम जारी कर दिया गया है। Union Public Service Commission ने शुक्रवार 6 मार्च 2026 को UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2025 का फाइनल रिजल्ट घोषित किया। इस परीक्षा में अनुज अग्निहोत्री ने पहला स्थान हासिल किया है। परीक्षा में शामिल हुए उम्मीदवार अब आयोग की आधिकारिक वेबसाइट UPSC Official Website पर जाकर फाइनल मेरिट लिस्ट देख सकते हैं। 958 उम्मीदवारों का हुआ चयन यूपीएससी द्वारा जारी फाइनल रिजल्ट के अनुसार इस वर्ष कुल 958 उम्मीदवारों ने सफलता हासिल की है। चयनित उम्मीदवारों की नियुक्ति विभिन्न केंद्रीय सेवाओं में उनकी रैंक और पसंद के आधार पर की जाएगी। फाइनल रिजल्ट उम्मीदवारों के लिखित परीक्षा (Main Exam) और पर्सनैलिटी टेस्ट (Interview) में प्रदर्शन के आधार पर तैयार किया गया है। इन प्रतिष्ठित सेवाओं के लिए होता है चयन यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा के माध्यम से देश की कई प्रतिष्ठित सेवाओं के लिए अधिकारियों का चयन किया जाता है। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं— भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS)   भारतीय पुलिस सेवा (IPS)   भारतीय विदेश सेवा (IFS)   भारतीय राजस्व सेवा (IRS)   भारतीय व्यापार सेवा सहित अन्य ग्रुप A और ग्रुप B सेवाएं   979 पदों को भरने का लक्ष्य सिविल सेवा परीक्षा 2025 के माध्यम से केंद्र सरकार के विभिन्न विभागों में कुल 979 रिक्त पदों को भरा जाना है। ऐसे चेक करें UPSC CSE 2025 का रिजल्ट उम्मीदवार नीचे दिए गए स्टेप्स के माध्यम से अपना रिजल्ट देख सकते हैं— आधिकारिक वेबसाइट upsc.gov.in पर जाएं   होमपेज पर “Examination” टैब पर क्लिक करें   “Active Examinations” या “What’s New” सेक्शन में जाएं   Civil Services Examination Final Result 2025 लिंक पर क्लिक करें   मेरिट लिस्ट की PDF खुल जाएगी   Ctrl + F दबाकर अपना नाम या रोल नंबर सर्च करें   15 दिन में जारी होगी मार्कशीट यूपीएससी के अनुसार सभी उम्मीदवारों की मार्कशीट रिजल्ट जारी होने के 15 दिनों के भीतर आयोग की वेबसाइट पर अपलोड कर दी जाएगी। उम्मीदवार इसे 30 दिनों तक ऑनलाइन डाउनलोड कर सकेंगे। पिछले साल का कट-ऑफ पिछले वर्ष का अंतिम कट-ऑफ इस प्रकार था— जनरल: 87.98   EWS: 85.92   OBC: 87.28   SC: 79.03   ST: 74.23   आयु सीमा क्या है यूपीएससी की अधिसूचना के अनुसार उम्मीदवार की आयु 1 अगस्त 2024 तक कम से कम 21 वर्ष और अधिकतम 32 वर्ष होनी चाहिए। यानी उम्मीदवार का जन्म 2 अगस्त 1992 से 1 अगस्त 2003 के बीच होना चाहिए। यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा भारत की सबसे कठिन और प्रतिष्ठित प्रतियोगी परीक्षाओं में से एक मानी जाती है। हर साल लाखों उम्मीदवार इस परीक्षा में शामिल होते हैं, लेकिन तीन चरणों—प्रारंभिक परीक्षा, मुख्य परीक्षा और इंटरव्यू—को पार कर बहुत कम उम्मीदवार ही अंतिम सूची में जगह बना पाते हैं। UPSC CSE 2025 टॉप-20 उम्मीदवारों की सूची रैंक रोल नंबर नाम 1 1131589 अनुज अग्निहोत्री 2 4000040 राजेश्वरी सुवे एम 3 3512521 अकांश ढुल 4 0834732 राघव झुनझुनवाला 5 0409847 ईशान भटनागर 6 6410067 जिनिया अरोड़ा 7 0818306 ए आर राजा मोहिद्दीन 8 0843487 पक्षल सेक्रेटरी 9 0831647 आस्था जैन 10 1523945 उज्ज्वल प्रियांक 11 1512091 यशस्वी राज वर्धन 12 0840280 अक्षित भारद्वाज 13 7813999 अनन्या शर्मा 14 5402316 सुरभि यादव 15 3507500 सिमरनदीप कौर 16 0867445 मोनिका श्रीवास्तव 17 0829589 चितवन जैन 18 5604518 श्रुति आर 19 0105602 निसार दिशांत अमृतलाल 20 6630448 रवि राज

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surbhi मार्च 31, 2026 0