India Economy

Oil barrels, rising inflation graph, RBI building silhouette and stock market indicators showing economic impact of West Asia conflict on India
Iran War Impact: FY27 में RBI बढ़ा सकता है ब्याज दरें, कंपनियों के Capex फैसले टलने के आसार

  पश्चिम एशिया में जारी तनाव का असर अब भारत की अर्थव्यवस्था पर भी दिखने लगा है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर यह युद्ध लंबा खिंचता है, तो इसका सीधा असर महंगाई, ब्याज दरों और कंपनियों के निवेश फैसलों पर पड़ेगा। RBI बढ़ा सकता है ब्याज दरें क्लाइंट एसोसिएट्स के को-फाउंडर हिमांशु कोहली के मुताबिक: फिलहाल RBI दरों को स्थिर रख सकता है लेकिन अगर एनर्जी प्राइस बढ़ते रहे, तो FY27 में 25–50 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी संभव है महंगाई और तेल कीमतें बनेंगी बड़ा फैक्टर कच्चे तेल की कीमतों में उछाल होर्मुज स्ट्रेट में सप्लाई बाधा का खतरा डॉलर की मजबूती ये सभी फैक्टर्स महंगाई को बढ़ा सकते हैं, जिससे RBI पर दबाव बढ़ेगा। Capex (पूंजीगत खर्च) फैसले टल सकते हैं अनिश्चित माहौल को देखते हुए: कंपनियां निवेश (Capex) फैसलों को टाल सकती हैं मैनेजमेंट Q4FY26 के नतीजों में सतर्क रुख अपना सकता है किन सेक्टर्स पर सबसे ज्यादा असर? अगर युद्ध लंबा चला, तो इन सेक्टर्स पर दबाव बढ़ सकता है: केमिकल्स, पेंट्स, फर्टिलाइजर्स सीमेंट और मेटल्स ऑयल मार्केटिंग कंपनियां (OMCs) लॉजिस्टिक्स और एयरलाइंस कंज्यूमर स्टेपल्स इन सेक्टर्स के मार्जिन में गिरावट आ सकती है असर कब दिखेगा? Q4FY26: असर सीमित रहने की संभावना Q1FY27 – Q2FY27: मार्जिन पर दबाव साफ दिख सकता है डिमांड में भी कमी आ सकती है RBI की रणनीति क्या हो सकती है? रेपो रेट फिलहाल स्थिर फॉरेक्स मार्केट में हस्तक्षेप OMOs के जरिए लिक्विडिटी सपोर्ट 10 साल की सरकारी बॉन्ड यील्ड पहले ही 7% के पार जा चुकी है

surbhi अप्रैल 3, 2026 0
Petrochemical plant with industrial units highlighting government duty cut impact on manufacturing and supply chain
मिडिल ईस्ट तनाव के बीच बड़ा कदम: पेट्रोकेमिकल्स पर कस्टम ड्यूटी खत्म, उद्योगों को राहत

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और वैश्विक सप्लाई चेन में आई दिक्कतों के बीच भारत सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने कई जरूरी पेट्रोकेमिकल उत्पादों पर कस्टम ड्यूटी पूरी तरह खत्म कर दी है। यह छूट 30 जून 2026 तक लागू रहेगी। क्यों लिया गया यह फैसला? सरकार के मुताबिक: मिडिल ईस्ट संकट से कच्चे माल की सप्लाई प्रभावित हो रही है अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें बढ़ रही हैं उद्योगों पर लागत का दबाव बढ़ रहा है इन परिस्थितियों को देखते हुए यह कदम उठाया गया है ताकि देश में उत्पादन और सप्लाई प्रभावित न हो। किन सेक्टरों को होगा फायदा? इस फैसले से कई बड़े उद्योगों को सीधा लाभ मिलेगा: प्लास्टिक और पैकेजिंग टेक्सटाइल इंडस्ट्री फार्मा सेक्टर केमिकल इंडस्ट्री ऑटो पार्ट्स मैन्युफैक्चरिंग सरकार का मानना है कि इससे उत्पादन लागत घटेगी और सप्लाई चेन सुचारू बनी रहेगी। किन उत्पादों पर मिली छूट? सरकार ने जिन प्रमुख पेट्रोकेमिकल्स पर ड्यूटी हटाई है, उनमें शामिल हैं: एनहाइड्रस अमोनिया मेथनॉल टोल्यून स्टाइरीन विनाइल क्लोराइड मोनोमर मोनोएथिलीन ग्लाइकोल (MEG) फिनोल, एसिटिक एसिड, PTA इसके अलावा कई पॉलिमर भी शामिल हैं: पॉलीएथिलीन (PE) पॉलीप्रोपिलीन (PP) पॉलीस्टाइरीन (PS) PVC, PET चिप्स ABS (इंजीनियरिंग प्लास्टिक) आम लोगों को कैसे मिलेगा फायदा? कच्चा माल सस्ता होने से उत्पादन लागत कम होगी इससे प्लास्टिक, पैकेजिंग, कपड़े, दवाइयों जैसी चीजों की कीमतों में राहत मिल सकती है बाजार में सप्लाई बनी रहने से महंगाई पर भी काबू पाने में मदद मिल सकती है

surbhi अप्रैल 2, 2026 0
Commercial LPG gas cylinders stacked with price hike impact on businesses and restaurants
महंगाई का बड़ा झटका: कमर्शियल LPG सिलेंडर ₹195 तक महंगा, जानिए नए रेट और असर

नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत आम लोगों के लिए महंगाई की खबर लेकर आई है। कारोबारियों पर भी इसका असर पड़ेगा। 1 अप्रैल से कमर्शियल LPG गैस सिलेंडर की कीमतों में बड़ी बढ़ोतरी की गई है। हालांकि राहत की बात यह है कि घरेलू गैस सिलेंडर के दाम में फिलहाल कोई बदलाव नहीं किया गया है। कितनी बढ़ी कीमत? सरकार द्वारा जारी नए रेट के मुताबिक, दिल्ली में 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल LPG सिलेंडर की कीमत में ₹195.50 और कोलकाता में ₹218 की बढ़ोतरी की गई है। इस बढ़ोतरी के बाद दिल्ली में कमर्शियल सिलेंडर की कीमत ₹2078.50 हो गई है, जो पहले ₹1884.50 थी। वहीं कोलकाता में यह कीमत बढ़कर 2208 रुपये पहुंच गई है। अलग-अलग शहरों में नए रेट देश के प्रमुख शहरों में कमर्शियल LPG सिलेंडर की नई कीमत इस प्रकार है: दिल्ली – ₹2078.50 कोलकाता – ₹2208 मुंबई – ₹2031 चेन्नई – ₹2246.50 पटना – ₹2365 जयपुर – ₹2031 रांची – ₹2120 छोटे सिलेंडर पर भी असर 5 किलो वाले फ्री ट्रेड LPG (FTL) सिलेंडर की कीमत में भी ₹51 की बढ़ोतरी की गई है। अब इसकी कीमत ₹549 प्रति रिफिल हो गई है। कारोबारियों पर सीधा असर कमर्शियल LPG सिलेंडर की कीमत बढ़ने का सीधा असर होटल, रेस्टोरेंट और छोटे व्यापारियों पर पड़ेगा। इससे खाने-पीने की चीजों की कीमतों में भी बढ़ोतरी हो सकती है, जिसका असर आम उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ेगा। पहले भी बढ़ चुके हैं दाम गौरतलब है कि 1 मार्च 2026 को भी कमर्शियल LPG सिलेंडर ₹114.50 महंगा हुआ था। वहीं 7 मार्च को घरेलू गैस सिलेंडर ₹60 बढ़ा था। यानी पिछले एक महीने में ही कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमत में करीब ₹300 तक की बढ़ोतरी हो चुकी है। क्यों बढ़ रही है कीमत? विशेषज्ञों के अनुसार मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव का सीधा असर LPG के दामों पर पड़ रहा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में अस्थिरता के चलते आने वाले समय में भी कीमतों में बदलाव संभव है।  

surbhi अप्रैल 1, 2026 0
Fuel pump showing petrol prices as global crude oil rises amid Middle East tensions
कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के बावजूद राहत, सरकार का संकेत-फिलहाल नहीं बढ़ेंगे पेट्रोल-डीजल के दाम

  अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल के बावजूद भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में तत्काल बढ़ोतरी की संभावना नहीं है। केंद्र सरकार ने स्पष्ट संकेत दिया है कि मौजूदा हालात में उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ डालने की कोई योजना नहीं है। मध्य पूर्व में जारी तनाव, खासकर United States, Israel और Iran के बीच बढ़ते संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बढ़ गई है। इसी के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में Brent Crude Oil की कीमतों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखी गई है।   कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल सोमवार को ब्रेंट क्रूड की कीमत 99.75 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 119.5 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई, जो अगस्त 2022 के बाद पहली बार 100 डॉलर के पार गई। हालांकि शाम तक कीमतें कुछ नरम पड़ीं और यह लगभग 102 डॉलर प्रति बैरल के आसपास ट्रेड कर रही थीं। युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक ब्रेंट क्रूड की कीमतों में करीब 40 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की जा चुकी है, जिससे वैश्विक बाजार में चिंता का माहौल बना हुआ है।   महंगाई पर फिलहाल बड़ा असर नहीं लोकसभा में इस मुद्दे पर बोलते हुए वित्त मंत्री Nirmala Sitharaman ने कहा कि फिलहाल कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का भारत की महंगाई दर पर बड़ा प्रभाव पड़ने की संभावना नहीं है। उन्होंने बताया कि Reserve Bank of India की अक्टूबर 2025 की मौद्रिक नीति रिपोर्ट के अनुसार यदि कच्चे तेल की कीमतें आधार स्तर से 10 प्रतिशत बढ़ती हैं और उसका पूरा असर घरेलू बाजार में आता है, तो महंगाई दर में केवल लगभग 30 बेसिस पॉइंट यानी करीब 0.3 प्रतिशत की बढ़ोतरी हो सकती है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि मध्यम अवधि में महंगाई पर असर कई कारकों पर निर्भर करेगा, जिनमें रुपये की विनिमय दर, वैश्विक मांग-आपूर्ति की स्थिति, मौद्रिक नीति और समग्र आर्थिक परिस्थितियां शामिल हैं।   सरकारी तेल कंपनियों की मजबूत स्थिति सरकारी अधिकारियों और उद्योग विशेषज्ञों के मुताबिक भारत की प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्र की तेल रिफाइनरी कंपनियां-Indian Oil Corporation, Hindustan Petroleum Corporation Limited और Bharat Petroleum Corporation Limited-वित्तीय रूप से मजबूत स्थिति में हैं। वित्त वर्ष 2026 के पहले नौ महीनों में इन तीनों कंपनियों का संयुक्त शुद्ध लाभ 192 प्रतिशत बढ़कर 57,810 करोड़ रुपये हो गया, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 19,768 करोड़ रुपये था। मजबूत वित्तीय स्थिति के कारण ये कंपनियां फिलहाल खुदरा स्तर पर कीमतों को स्थिर रखने में सक्षम हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर पश्चिम एशिया में युद्ध और नहीं बढ़ता तथा ऊर्जा ढांचे पर बड़े हमले नहीं होते, तो ब्रेंट क्रूड की कीमतें 130 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकती हैं। इसके बावजूद फिलहाल पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी की संभावना कम बताई जा रही है।   भारत में पेट्रोल-डीजल की मौजूदा कीमतें जून 2022 में जब ब्रेंट क्रूड 120 डॉलर से ऊपर पहुंच गया था, तब दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 96.72 रुपये प्रति लीटर और डीजल 89.62 रुपये प्रति लीटर थी। इसके बाद मार्च 2024 में कीमतों में 2 रुपये की कटौती की गई, जिससे पेट्रोल 94.72 रुपये और डीजल 87.62 रुपये प्रति लीटर पर आ गया। 30 अक्टूबर 2024 को मार्केटिंग कॉस्ट एडजस्टमेंट के कारण केवल 5 पैसे की बढ़ोतरी हुई और वर्तमान में दिल्ली में पेट्रोल की कीमत लगभग 94.77 रुपये और डीजल 87.67 रुपये प्रति लीटर है।   टैक्स नीति से मिलती है राहत विशेषज्ञों के अनुसार सरकार अंतरराष्ट्रीय कीमतों के उतार-चढ़ाव से उपभोक्ताओं को बचाने के लिए समय-समय पर उत्पाद शुल्क में बदलाव करती रहती है। 8 अप्रैल 2025 को सरकार ने स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी (SAED) में 2 रुपये की बढ़ोतरी की थी, जिससे सालाना लगभग 34,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त राजस्व मिलने का अनुमान है। वर्तमान में पेट्रोल पर SAED 13 रुपये और डीजल पर 10 रुपये प्रति लीटर है। इससे पहले नवंबर 2021 और मई 2022 में सरकार ने एक्साइज ड्यूटी में कटौती कर पेट्रोल की कीमत में 13 रुपये और डीजल में 16 रुपये प्रति लीटर की राहत दी थी।   वैश्विक ऊर्जा बाजार पर युद्ध का असर ऊर्जा विशेषज्ञ Jim Burkhard (S&P Global Energy) का कहना है कि यदि मध्य पूर्व में संघर्ष बढ़ता है और Strait of Hormuz के जरिए होने वाली तेल आपूर्ति प्रभावित होती है, तो यह इतिहास का सबसे बड़ा तेल आपूर्ति संकट बन सकता है। हाल के दिनों में सऊदी अरब और कतर के ऊर्जा ढांचे पर हुए हमलों से भी बाजार में अस्थिरता बढ़ी है। फिलहाल सरकार का फोकस यह सुनिश्चित करने पर है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार की अस्थिरता का सीधा असर आम उपभोक्ताओं पर न पड़े और देश में ईंधन की कीमतें स्थिर बनी रहें।  

surbhi मार्च 10, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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नालंदा मंदिर हादसा: भीड़ ने ली 8 महिलाओं की जान, धार्मिक आयोजन में मची भगदड़ जैसी स्थिति

surbhi मार्च 31, 2026 0