नई दिल्ली: भारतीय परिवारों के पास अनुमानित 30,000 टन से अधिक सोना मौजूद है, लेकिन इसका बड़ा हिस्सा वर्षों से घरों और लॉकरों में निष्क्रिय पड़ा है। अब इस सोने को आर्थिक गतिविधियों में लाने के लिए केंद्र सरकार Gold Monetisation Scheme (GMS) का नया संस्करण तैयार कर रही है। इस बार योजना में पहली बार जूलर्स (सर्राफा कारोबारियों) को भी महत्वपूर्ण भूमिका देने पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है। सरकार का उद्देश्य सोने के आयात पर निर्भरता कम करना, घरेलू गोल्ड संसाधनों का बेहतर उपयोग करना और निष्क्रिय पड़े सोने को वित्तीय प्रणाली से जोड़ना है। अगस्त में आ सकता है नया वर्जन रिपोर्ट्स के अनुसार, सरकार ने हाल के दिनों में वरिष्ठ मंत्रियों, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI), बैंकों और बुलियन इंडस्ट्री के प्रतिनिधियों के साथ कई दौर की बैठकें की हैं। इन चर्चाओं के बाद योजना को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया तेज हो गई है। सूत्रों के मुताबिक, Gold Monetisation Scheme का नया संस्करण अगस्त 2026 में घोषित किया जा सकता है, ताकि त्योहारी सीजन से पहले इसे लागू किया जा सके। पहली बार जूलर्स को मिलेगी अहम जिम्मेदारी नई व्यवस्था के तहत जूलर्स केवल सोना बेचने तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि वे कलेक्शन और एग्रीगेशन सेंटर की भूमिका निभा सकते हैं। प्रस्तावित व्यवस्था के अनुसार— ग्राहक अपना सोना जूलर्स के पास जमा कर सकेंगे। जूलर्स सोने की प्रारंभिक जांच और सत्यापन करेंगे। इसके बाद सोना अधिकृत रिफाइनर्स और बैंकों तक पहुंचाया जाएगा। पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता और ट्रेसेबिलिटी सुनिश्चित करने पर जोर रहेगा। इसके बदले जूलर्स को सोने के संग्रह, परीक्षण, जमा प्रक्रिया और अन्य सेवाओं के लिए सर्विस या हैंडलिंग फीस मिलने की संभावना है। सरकार का फोकस आयात कम करने पर भारत दुनिया के सबसे बड़े सोना आयातक देशों में शामिल है। बढ़ती वैश्विक कीमतों और आयात शुल्क में वृद्धि का असर घरेलू बाजार पर भी पड़ा है। मई 2026 में सोने का आयात घटकर करीब 12 अरब डॉलर रह गया। सरकार का मानना है कि यदि घरों में रखा निष्क्रिय सोना वित्तीय प्रणाली में आए, तो आयात पर निर्भरता कम की जा सकती है और विदेशी मुद्रा की बचत होगी। 2015 में शुरू हुई थी योजना, लेकिन नहीं मिली सफलता सरकार ने पहली बार 2015 में Gold Monetisation Scheme शुरू की थी। इस योजना के तहत लोग अपना सोना बैंक में जमा कर ब्याज कमा सकते थे। हालांकि, यह योजना अपेक्षित सफलता हासिल नहीं कर सकी। इंडस्ट्री के अनुसार, लगभग 11 वर्षों में केवल 39 टन सोना ही इस योजना के जरिए प्रणाली में आ सका। आखिर क्यों नहीं चली Gold Monetisation Scheme? विशेषज्ञों के मुताबिक योजना के सीमित प्रभाव के पीछे कई कारण रहे— भारतीय परिवारों का सोने से भावनात्मक जुड़ाव। आभूषण जमा कराने को लेकर भरोसे की कमी। ब्याज दरें अपेक्षाकृत कम होना। प्रक्रिया का जटिल और समय लेने वाला होना। मीडियम और लॉन्ग-टर्म डिपॉजिट विकल्प बंद होना। वर्तमान में योजना के तहत केवल एक से तीन वर्ष की शॉर्ट-टर्म बैंक डिपॉजिट सुविधा उपलब्ध है। क्या बदलेगी नई योजना की तस्वीर? सरकार को उम्मीद है कि यदि जूलर्स को इस प्रक्रिया में शामिल किया जाता है, तो लोगों का भरोसा बढ़ेगा और योजना तक पहुंच आसान होगी। इससे घरों में रखा निष्क्रिय सोना आर्थिक गतिविधियों में शामिल हो सकेगा, जिससे आयात पर दबाव कम करने और गोल्ड इकोसिस्टम को मजबूत करने में मदद मिल सकती है।
मुंबई: भारत के विदेशी मुद्रा भंडार (Foreign Exchange Reserves) में एक बार फिर बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, 12 जून 2026 को समाप्त सप्ताह के दौरान देश के विदेशी मुद्रा भंडार में लगभग 9.985 अरब डॉलर की कमी आई है। इससे पहले वाले सप्ताह में भी भंडार में 711 मिलियन डॉलर की गिरावट दर्ज की गई थी। इस ताजा गिरावट की सबसे बड़ी वजह सोने की कीमतों में आई कमजोरी मानी जा रही है, जिससे आरबीआई के गोल्ड रिजर्व के मूल्य पर सीधा असर पड़ा। विदेशी मुद्रा भंडार घटकर 671.62 अरब डॉलर पर पहुंचा आरबीआई के आंकड़ों के मुताबिक, भारी गिरावट के बाद भारत का कुल विदेशी मुद्रा भंडार घटकर 671.625 अरब डॉलर रह गया है। गौरतलब है कि 27 फरवरी 2026 को देश का विदेशी मुद्रा भंडार 728.494 अरब डॉलर के रिकॉर्ड उच्च स्तर पर पहुंचा था। इसके बाद से इसमें उतार-चढ़ाव का दौर जारी है। विदेशी मुद्रा आस्तियों (FCA) में हुई बढ़ोतरी हालांकि कुल भंडार में गिरावट के बीच एक सकारात्मक पहलू भी देखने को मिला। समीक्षा सप्ताह के दौरान भारत की फॉरेन करेंसी एसेट्स (FCA) में 846 मिलियन डॉलर की बढ़ोतरी हुई। इसके बाद FCA का कुल आकार बढ़कर 544.290 अरब डॉलर हो गया है। विदेशी मुद्रा आस्तियां कुल विदेशी मुद्रा भंडार का सबसे बड़ा हिस्सा होती हैं और इनमें डॉलर के अलावा यूरो, पाउंड और जापानी येन जैसी अन्य प्रमुख मुद्राओं में होने वाले उतार-चढ़ाव का भी प्रभाव शामिल होता है। गोल्ड रिजर्व की वैल्यू में 10.75 अरब डॉलर की गिरावट बीते सप्ताह सोने की कीमतों में आई गिरावट का सीधा असर आरबीआई के स्वर्ण भंडार पर पड़ा। गोल्ड रिजर्व की वैल्यू में 10.754 अरब डॉलर की कमी आई। अब देश के गोल्ड रिजर्व का मूल्य घटकर 100.112 अरब डॉलर रह गया है। मार्च 2026 के अंत तक आरबीआई के पास कुल 880.52 टन सोना मौजूद था। देश के कुल विदेशी मुद्रा भंडार में सोने की हिस्सेदारी लगभग 16.7 प्रतिशत है, इसलिए इसकी कीमतों में बदलाव का सीधा असर कुल रिजर्व पर पड़ता है। SDR और IMF रिजर्व में भी मामूली गिरावट आरबीआई के मुताबिक: विशेष आहरण अधिकार (SDR) में 66 मिलियन डॉलर की कमी आई। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के पास रखे भारत के रिजर्व में 11 मिलियन डॉलर की गिरावट दर्ज की गई। फिलहाल IMF के पास भारत का रिजर्व 4.815 अरब डॉलर है। क्या है विदेशी मुद्रा भंडार? विदेशी मुद्रा भंडार किसी देश की आर्थिक मजबूती का महत्वपूर्ण संकेतक माना जाता है। इसका उपयोग आयात भुगतान, मुद्रा स्थिरता बनाए रखने और वैश्विक आर्थिक झटकों से निपटने के लिए किया जाता है।
नई दिल्ली: सोने और चांदी की कीमतों में लगातार गिरावट का सिलसिला जारी है। गुरुवार, 11 जून 2026 को अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना छह महीने के निचले स्तर पर पहुंच गया। वहीं घरेलू बाजार में भी दोनों कीमती धातुओं के दाम में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव तथा कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के कारण वैश्विक बाजार में अनिश्चितता बढ़ी है। महंगाई और लंबे समय तक ऊंची ब्याज दरों की आशंका ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है, जिसका असर सोने और चांदी की कीमतों पर भी देखने को मिल रहा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्या है स्थिति? स्पॉट गोल्ड कारोबार के दौरान 21 नवंबर के बाद के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया। सोने की कीमत 0.2 फीसदी गिरकर 4,063.87 डॉलर प्रति औंस रही, जबकि स्पॉट सिल्वर 0.9 फीसदी की गिरावट के साथ 63.15 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार करती दिखी। एमसीएक्स पर सोना और चांदी घरेलू वायदा बाजार एमसीएक्स में भी गिरावट दर्ज की गई। 5 अगस्त डिलीवरी वाला सोना 1,48,017 रुपये प्रति 10 ग्राम से फिसलकर 1,46,444 रुपये तक पहुंच गया। 3 जुलाई डिलीवरी वाली चांदी 2,35,505 रुपये प्रति किलोग्राम से गिरकर 2,30,493 रुपये तक आ गई। प्रमुख शहरों में आज का सोने का भाव शहर 24 कैरेट 22 कैरेट 18 कैरेट दिल्ली ₹1,45,790 ₹1,33,650 ₹1,09,380 मुंबई ₹1,45,640 ₹1,33,500 ₹1,09,230 कोलकाता ₹1,45,640 ₹1,33,500 ₹1,09,230 चेन्नई ₹1,47,280 ₹1,35,000 ₹1,13,100 लखनऊ ₹1,45,790 ₹1,33,650 ₹1,09,380 पटना ₹1,45,690 ₹1,33,550 ₹1,09,380 जयपुर ₹1,45,790 ₹1,33,650 ₹1,09,380 भोपाल ₹1,45,690 ₹1,33,550 ₹1,09,280 सर्राफा बाजार में भी बड़ी गिरावट गुड रिटर्न्स के अनुसार, 24 कैरेट सोना ₹2,130 सस्ता होकर ₹1,45,640 प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। 22 कैरेट सोने में ₹1,950 की गिरावट आई और इसका भाव ₹1,33,500 प्रति 10 ग्राम रह गया। 18 कैरेट सोना ₹1,600 टूटकर ₹1,09,230 प्रति 10 ग्राम पर आ गया। चांदी का भाव करीब ₹2,50,000 प्रति किलोग्राम के आसपास बना हुआ है। सोने और चांदी की कीमतों में आई इस गिरावट से खरीदारों को राहत मिल सकती है। हालांकि निवेशकों की नजर अब वैश्विक घटनाक्रम और अमेरिकी ब्याज दरों से जुड़े संकेतों पर बनी हुई है।
नई दिल्ली: सोशल मीडिया पर इन दिनों एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें दावा किया जा रहा है कि 30 जून 2026 से भारत में कागज के नोटों की जगह प्लास्टिक करेंसी शुरू कर दी जाएगी। वीडियो में यह भी कहा गया है कि 10, 20, 50 और 100 रुपये के मौजूदा नोट धीरे-धीरे बंद कर दिए जाएंगे। हालांकि, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) ने इन दावों को पूरी तरह फर्जी बताया है। सोशल मीडिया पर क्या किया जा रहा है दावा? वायरल वीडियो में कहा जा रहा है कि केंद्र सरकार और RBI जल्द ही पॉलीमर यानी प्लास्टिक के नोट जारी करने वाले हैं और 30 जून 2026 तक पुराने कागजी नोटों को बदल दिया जाएगा। वीडियो में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कथित आवाज का भी इस्तेमाल किया गया है। क्या है वायरल दावे की सच्चाई? इन दावों के सामने आने के बाद प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) ने फैक्ट चेक जारी कर स्थिति स्पष्ट की। RBI के हवाले से बताया गया कि फिलहाल कागज के नोटों को वापस लेने या उनकी जगह प्लास्टिक करेंसी लाने की कोई योजना नहीं है। PIB ने यह भी कहा कि वायरल वीडियो डिजिटल रूप से एडिट किया गया है और उसमें किए गए दावे भ्रामक हैं। लोगों से क्या अपील की गई? सरकार ने लोगों से अपील की है कि नोटों और बैंकिंग से जुड़ी किसी भी जानकारी के लिए केवल भारतीय रिजर्व बैंक की आधिकारिक वेबसाइट पर ही भरोसा करें। सोशल मीडिया पर वायरल किसी भी संदेश या वीडियो को बिना जांचे-परखे साझा न करें। अगर किसी को सरकार से जुड़ा कोई संदिग्ध या फर्जी कंटेंट दिखाई देता है, तो उसकी शिकायत @PIBFactCheck के माध्यम से की जा सकती है। किन देशों में चलते हैं प्लास्टिक के नोट? दुनिया के कई देशों में पॉलीमर आधारित नोट पहले से इस्तेमाल किए जा रहे हैं। इनमें ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, सिंगापुर, मलेशिया, न्यूजीलैंड और वियतनाम जैसे देश शामिल हैं। प्लास्टिक के नोट कैसे बनते हैं? विशेषज्ञों के अनुसार, ये नोट सामान्य प्लास्टिक से नहीं बल्कि पॉलीमर सामग्री, विशेष रूप से पॉलीप्रोपलीन से बनाए जाते हैं। ये पारंपरिक कागजी नोटों की तुलना में अधिक मजबूत और टिकाऊ होते हैं तथा जल्दी खराब नहीं होते।
रांची। झारखंड में चिकित्सा शिक्षा को नई दिशा देने की तैयारी शुरू हो गई है। राज्य के प्रमुख चिकित्सा संस्थान रिम्स रांची में स्नातक (UG), स्नातकोत्तर (PG) और सुपर स्पेशियलिटी पाठ्यक्रमों की सीटों में उल्लेखनीय वृद्धि की जाएगी। स्वास्थ्य विभाग ने इस संबंध में रिम्स प्रशासन को विस्तृत प्रस्ताव तैयार करने का निर्देश दिया है। इस पहल का उद्देश्य राज्य में विशेषज्ञ डॉक्टरों की संख्या बढ़ाना और स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाना है। केंद्र और राज्य मिलकर उठाएंगे खर्च केंद्र प्रायोजित योजना के तहत मेडिकल कॉलेजों में सीटें बढ़ाने के लिए प्रति सीट लगभग 1.5 करोड़ रुपये तक की वित्तीय सहायता दी जाएगी। इसमें 60 प्रतिशत राशि केंद्र सरकार और 40 प्रतिशत राज्य सरकार वहन करेगी। योजना के तहत रिम्स में UG सीटों को 180 से बढ़ाकर 250, PG सीटों को 176 से बढ़ाकर 275 और सुपर स्पेशियलिटी सीटों को 11 से बढ़ाकर 100 करने का लक्ष्य रखा गया है। MGM और धनबाद मेडिकल कॉलेज को मिल चुकी मंजूरी स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, एमजीएम मेडिकल कॉलेज, जमशेदपुर में UG सीटें 150 से बढ़ाकर 250 और PG सीटें 49 से बढ़ाकर 200 करने के प्रस्ताव को पहले ही मंजूरी मिल चुकी है। वहीं, धनबाद मेडिकल कॉलेज में UG सीटें 100 से बढ़ाकर 250 और PG सीटें 19 से बढ़ाकर 200 करने के प्रस्ताव को भी भारत सरकार की स्वीकृति प्राप्त हो चुकी है। PPP मॉडल पर बनेंगे नए छात्रावास रिम्स-टू परियोजना के तहत छात्रावास निर्माण के लिए नई रणनीति अपनाई जाएगी। राज्य सरकार ने निर्णय लिया है कि हॉस्टल निर्माण पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल पर किया जाएगा। इसके लिए केंद्र सरकार के वायबिलिटी गैप फंड (VGF) से सहायता लेने की योजना है। इससे सरकारी खर्च कम होगा और छात्रों को आधुनिक सुविधाओं से युक्त बेहतर आवास उपलब्ध कराया जा सकेगा। चिकित्सा शिक्षा को मिलेगा नया आयाम सीटों में बढ़ोतरी और आधुनिक बुनियादी ढांचे के विकास से झारखंड में मेडिकल शिक्षा को बड़ा लाभ मिलेगा। इससे राज्य के छात्रों को अधिक अवसर मिलेंगे और भविष्य में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी को दूर करने में मदद मिलेगी।
नई दिल्ली: घरेलू रसोई गैस उपभोक्ताओं को एक बार फिर महंगाई का झटका लगा है। केंद्र सरकार ने 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत में 29 रुपये की बढ़ोतरी कर दी है। नई दरें 7 जून से लागू हो गई हैं। इसके बाद राजधानी दिल्ली में घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत 913 रुपये से बढ़कर 942 रुपये हो गई है। यह पिछले तीन महीनों में दूसरी बार है जब घरेलू एलपीजी की कीमतों में वृद्धि की गई है। इससे पहले मार्च 2026 में प्रति सिलेंडर 60 रुपये का इजाफा किया गया था। इस तरह चार महीनों के भीतर घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत कुल 89 रुपये बढ़ चुकी है, जिससे आम परिवारों के मासिक बजट पर अतिरिक्त दबाव बढ़ गया है। कांग्रेस ने साधा निशाना कीमतों में बढ़ोतरी को लेकर कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि लगातार बढ़ रही गैस की कीमतों ने आम जनता की रसोई का बजट बिगाड़ दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार महंगाई को नियंत्रित करने में विफल रही है और इसका सीधा असर मध्यम वर्ग तथा गरीब परिवारों पर पड़ रहा है। खरगे ने यह भी सवाल उठाया कि यदि सरकार ने वैश्विक ऊर्जा संकट के दौरान वैकल्पिक ईंधन आपूर्ति के पर्याप्त इंतजाम किए थे, तो घरेलू उपभोक्ताओं को बार-बार मूल्य वृद्धि का सामना क्यों करना पड़ रहा है। आम लोगों पर बढ़ेगा आर्थिक दबाव कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऊर्जा बाजार में अस्थिरता और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर भारत पर पड़ रहा है, लेकिन सरकार को यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि आम लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ न पड़े। उनका कहना है कि पहले से बढ़ती महंगाई और स्थिर आय के बीच घरेलू गैस की कीमतों में लगातार वृद्धि परिवारों के लिए चिंता का विषय बनती जा रही है। शरद पवार ने भी जताई नाराजगी राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार गुट) के प्रमुख शरद पवार ने भी बढ़ती महंगाई को लेकर केंद्र सरकार की आलोचना की। उन्होंने कहा कि आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी का असर सीधे आम नागरिकों की जेब पर पड़ रहा है। पवार ने दावा किया कि यदि महंगाई इसी तरह बढ़ती रही, तो इसका राजनीतिक असर भी देखने को मिल सकता है और जनता चुनावों में अपनी प्रतिक्रिया दे सकती है। भाजपा पर विपक्ष का दोहरा रवैया अपनाने का आरोप महाराष्ट्र विधानसभा में कांग्रेस विधायक दल के नेता विजय वडेट्टीवार ने कहा कि विपक्ष में रहते हुए भाजपा महंगाई के मुद्दे पर सरकारों को घेरती थी, लेकिन सत्ता में आने के बाद उसकी प्राथमिकताएं बदल गई हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले कुछ वर्षों में पेट्रोल, डीजल, सीएनजी और एलपीजी की कीमतों में कई बार बढ़ोतरी हुई है, जिससे आम उपभोक्ताओं की मुश्किलें बढ़ी हैं। रसोई बजट पर असर की आशंका विशेषज्ञों का मानना है कि घरेलू गैस की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी का असर सीधे परिवारों के मासिक खर्च पर पड़ता है। खासकर निम्न और मध्यम आय वर्ग के परिवारों के लिए रसोई गैस की बढ़ती कीमतें चिंता का विषय बन सकती हैं। सरकार की ओर से अभी तक इस बढ़ोतरी को लेकर कोई विस्तृत स्पष्टीकरण नहीं दिया गया है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार और आयात लागत में बदलाव को इसकी प्रमुख वजह माना जा रहा है।
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने अमेरिका दौरे के दौरान न्यूयॉर्क में 50 से अधिक वैश्विक व्यापार और उद्योग जगत के नेताओं के साथ महत्वपूर्ण बैठक की। इस गोलमेज सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य भारत और अमेरिका के बीच व्यापार, निवेश, नवाचार और सप्लाई चेन साझेदारी को और मजबूत बनाना था। पीयूष गोयल ने शुक्रवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इसकी जानकारी साझा करते हुए बताया कि यह बैठक न्यूयॉर्क स्थित भारतीय वाणिज्य दूतावास और यूएस-इंडिया स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप फोरम (USISPF) के सहयोग से आयोजित की गई थी। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत की आर्थिक क्षमता पर दिया जोर बैठक के दौरान पीयूष गोयल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत में तेजी से हो रहे आर्थिक सुधारों और मजबूत कारोबारी माहौल का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत वैश्विक निवेशकों के लिए तेजी से एक आकर्षक बाजार बनता जा रहा है और सरकार निवेश को आसान बनाने के लिए लगातार सुधार आधारित नीतियां लागू कर रही है। गोयल ने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक संबंधों को नई ऊंचाई पर ले जाने के लिए दोनों देशों के उद्योग जगत के बीच सहयोग बढ़ाना जरूरी है। व्यापार, निवेश और सप्लाई चेन साझेदारी पर रही विशेष चर्चा बैठक में साझा समृद्धि के लक्ष्य के साथ भारत-अमेरिका व्यापार और निवेश को बढ़ाने पर विस्तार से चर्चा हुई। इसके अलावा नवाचार, टेक्नोलॉजी सहयोग और वैश्विक सप्लाई चेन को मजबूत बनाने पर भी विचार-विमर्श किया गया। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत विश्व स्तर पर भरोसेमंद मैन्युफैक्चरिंग और सप्लाई चेन हब बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। आर्थिक कूटनीति को मजबूत करने में जुटा भारत यह बैठक ऐसे समय में हुई है, जब भारत प्रमुख वैश्विक साझेदार देशों के साथ आर्थिक कूटनीति को तेज करने की रणनीति पर काम कर रहा है। हाल के महीनों में केंद्र सरकार की ओर से कई उच्च स्तरीय अंतरराष्ट्रीय बैठकों और व्यापारिक वार्ताओं का आयोजन किया गया है, जिनका उद्देश्य निवेश आकर्षित करना और वैश्विक कंपनियों के साथ आर्थिक संबंध मजबूत करना है। भारत-कनाडा व्यापार बढ़ाने पर भी सरकार का फोकस सप्ताह की शुरुआत में पीयूष गोयल ने भारत-कनाडा व्यापार संबंधों को लेकर भी महत्वपूर्ण बयान दिया था। उन्होंने कहा था कि दोनों देशों के बीच वर्तमान द्विपक्षीय व्यापार लगभग 8.5 अरब डॉलर का है। भारत और कनाडा ने वर्ष 2030 तक इस व्यापार को बढ़ाकर 50 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। गोयल ने कहा कि कनाडा दौरे के दौरान उन्होंने शिक्षा, नवाचार, व्यापार परिषदों, संस्थागत निवेशकों और प्रवासी भारतीय समुदाय के प्रतिनिधियों के साथ कई महत्वपूर्ण बैठकें कीं। ओटावा और टोरंटो दौरे में आर्थिक साझेदारी पर जोर अपने तीन दिवसीय कनाडा दौरे में पीयूष गोयल ने 25 मई को ओटावा और 26 से 28 मई तक टोरंटो में विभिन्न कार्यक्रमों में हिस्सा लिया। इस दौरान भारत-कनाडा व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (CEPA) पर चल रही बातचीत को तेज करने पर विशेष जोर दिया गया। सरकार का उद्देश्य दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश के अवसरों को बढ़ाना और आर्थिक सहयोग को नई दिशा देना है। बोइंग प्रतिनिधिमंडल के साथ भी हुई थी अहम बैठक इससे पहले मई महीने में पीयूष गोयल ने विमानन क्षेत्र की प्रमुख कंपनी बोइंग के प्रतिनिधिमंडल के साथ भी बैठक की थी। इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व बोइंग में सरकारी संचालन, वैश्विक सार्वजनिक नीति और कॉर्पोरेट रणनीति के कार्यकारी उपाध्यक्ष जेफ शॉकी कर रहे थे। बैठक के दौरान भारत में निवेश, विमानन क्षेत्र में सहयोग और वैश्विक सप्लाई चेन को लेकर कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई थी।
नई दिल्ली, एजेंसियां। शाम की चाय हो या बच्चों की हल्की भूख, बिस्किट लगभग हर घर की पसंद होते हैं। हालांकि बाजार में मिलने वाले ज्यादातर बिस्किट मैदे और प्रिजर्वेटिव्स से बने होते हैं, जो सेहत के लिए ज्यादा फायदेमंद नहीं माने जाते। ऐसे में अगर घर पर ही गेहूं के आटे से स्वादिष्ट और खस्ता बिस्किट तैयार किए जाएं, तो यह स्वाद और सेहत दोनों के लिए बेहतर विकल्प साबित हो सकते हैं। खास बात यह है कि इन बिस्किट्स को बनाने के लिए ज्यादा सामग्री या मेहनत की जरूरत नहीं होती। घर की रसोई में मौजूद चीजों से ही इन्हें आसानी से तैयार किया जा सकता है। बिस्किट बनाने के लिए जरूरी सामग्री गेहूं के आटे के बिस्किट बनाने के लिए दो कप गेहूं का आटा, आधा कप पिसी चीनी, 4 से 5 बड़े चम्मच देसी घी या तेल, आधा चम्मच इलायची पाउडर, थोड़ा सफेद तिल या सौंफ और एक चुटकी नमक की जरूरत होती है। आटा गूंथने के लिए हल्का गुनगुना दूध या पानी इस्तेमाल किया जा सकता है। सही मोयन से आएगा खस्ता स्वाद बिस्किट को बाजार जैसा खस्ता बनाने के लिए मोयन सबसे अहम भूमिका निभाता है। सबसे पहले आटे में चीनी, इलायची और नमक मिलाएं। इसके बाद घी डालकर दोनों हाथों से अच्छी तरह रगड़ें। जब आटा मुट्ठी में दबाने पर बंधने लगे, तो समझिए मोयन सही है। इसके बाद थोड़ा-थोड़ा दूध या पानी डालकर सख्त आटा गूंथ लें। आटा ज्यादा मुलायम नहीं होना चाहिए, वरना बिस्किट कुरकुरे नहीं बनेंगे। आटे को 10 से 15 मिनट ढककर रख दें। धीमी आंच पर तलें या बेक करें आटे की छोटी-छोटी लोइयां बनाकर उन्हें हल्का दबाएं और मनचाहा आकार दें। डिजाइन बनाने के लिए कांटे या चाकू का इस्तेमाल भी किया जा सकता है। इसके बाद कड़ाही में हल्का गर्म तेल या घी लें और धीमी आंच पर बिस्किट्स को सुनहरा होने तक तलें। अगर हेल्दी विकल्प चाहते हैं, तो इन्हें 180 डिग्री सेल्सियस पर ओवन या एयर फ्रायर में 15 से 20 मिनट तक बेक भी किया जा सकता है। हफ्तों तक रहेगा स्वाद बरकरार तलने या बेक करने के बाद बिस्किट्स को पूरी तरह ठंडा होने दें। ठंडे होने के बाद ये और ज्यादा कुरकुरे हो जाते हैं। इन्हें एयरटाइट डिब्बे में स्टोर करने पर कई दिनों तक ताजा रखा जा सकता है। घर पर बने ये आटा बिस्किट स्वादिष्ट होने के साथ सेहतमंद भी होते हैं। यही वजह है कि एक बार इन्हें खाने के बाद बाजार के बिस्किट फीके लगने लगते हैं।
देशभर में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में एक बार फिर बढ़ोतरी की गई है। सोमवार (25 मई) से पेट्रोल ₹2.61 प्रति लीटर और डीजल ₹2.71 प्रति लीटर महंगा हो गया है। मई 2026 में यह चौथी बार है जब ईंधन के दाम बढ़ाए गए हैं। लगातार बढ़ती कीमतों से आम लोगों की जेब पर असर साफ दिखाई देने लगा है। तेल कंपनियों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और रुपये की कमजोरी के कारण इम्पोर्ट लागत बढ़ी है, जिसके चलते दाम बढ़ाने पड़े। चार महानगरों में पेट्रोल के नए दाम एमएस (पेट्रोल) खुदरा बिक्री मूल्य (RSP) Delhi - ₹102.12 प्रति लीटर (+₹2.61) Kolkata - ₹113.51 प्रति लीटर (+₹2.87) Mumbai - ₹111.21 प्रति लीटर (+₹2.72) Chennai - ₹107.77 प्रति लीटर (+₹2.46) चार महानगरों में डीजल के नए दाम हाई स्पीड डीजल खुदरा बिक्री मूल्य (RSP) Delhi - ₹95.20 प्रति लीटर (+₹2.71) Kolkata - ₹99.82 प्रति लीटर (+₹2.80) Mumbai - ₹97.83 प्रति लीटर (+₹2.81) Chennai - ₹99.55 प्रति लीटर (+₹2.57) मई 2026 में कब-कब बढ़े दाम? मई महीने में अब तक चार बार पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ चुके हैं: 15 मई 2026: पहली बार करीब ₹3 प्रति लीटर की बड़ी बढ़ोतरी 19 मई 2026: पेट्रोल लगभग 87 पैसे और डीजल 91 पैसे महंगा 23 मई 2026: फिर पेट्रोल 87 पैसे और डीजल 91 पैसे बढ़े 25 मई 2026: पेट्रोल ₹2.61 और डीजल ₹2.71 प्रति लीटर महंगा आम लोगों में नाराजगी ईंधन की लगातार बढ़ती कीमतों को लेकर लोगों में नाराजगी बढ़ रही है। दिल्ली के जनपथ स्थित एक पेट्रोल पंप पर ग्राहक ने कहा कि रोजाना की कमाई का बड़ा हिस्सा अब पेट्रोल पर खर्च हो रहा है। ग्राहक ने कहा कि महंगाई पहले ही लोगों की परेशानी बढ़ा चुकी है, ऐसे में बार-बार ईंधन महंगा होने से आम आदमी पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है। उसने सरकार से पेट्रोल-डीजल की कीमतों को नियंत्रित करने की मांग की।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को मंत्रिपरिषद की एक अहम बैठक में देश की एनर्जी सिक्योरिटी, आर्थिक सुधारों और “विकसित भारत 2047” के विजन को लेकर बड़ा संदेश दिया। चार घंटे से ज्यादा चली इस हाई लेवल बैठक में पश्चिम एशिया में जारी तनाव, होर्मुज स्ट्रेट से जुड़े जोखिम और भारत की ऊर्जा जरूरतों पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक में केंद्रीय कैबिनेट मंत्री, स्वतंत्र प्रभार वाले राज्य मंत्री और अन्य वरिष्ठ मंत्री शामिल हुए। माना जा रहा है कि मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल के दो साल पूरे होने से पहले यह बैठक सरकार की योजनाओं और नीतियों की समीक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण थी। “विकसित भारत 2047” सिर्फ नारा नहीं : पीएम मोदी बैठक में प्रधानमंत्री मोदी ने साफ कहा कि 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाना केवल एक राजनीतिक नारा नहीं, बल्कि सरकार की बड़ी प्रतिबद्धता है। उन्होंने मंत्रियों से कहा कि अब सरकार का पूरा फोकस योजनाओं को तेजी से जमीन पर उतारने और सुधारों को प्रभावी ढंग से लागू करने पर होना चाहिए। प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार की योजनाओं का सीधा फायदा जनता तक समय पर पहुंचना चाहिए और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में अनावश्यक देरी खत्म की जानी चाहिए। होर्मुज स्ट्रेट तनाव पर हुई चर्चा बैठक में पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और होर्मुज स्ट्रेट को लेकर बढ़ते तनाव का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा। दरअसल, भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर तेल और गैस आयात पर निर्भर है और पश्चिम एशिया में किसी भी तरह का संकट सप्लाई चेन को प्रभावित कर सकता है। सूत्रों के मुताबिक, प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि मौजूदा वैश्विक हालात को देखते हुए भारत को अपनी ऊर्जा रणनीति में तेजी से बदलाव करना होगा। उन्होंने बायोगैस, ग्रीन एनर्जी और अन्य रिन्यूएबल एनर्जी स्रोतों पर तेजी से काम करने पर जोर दिया। अल्टरनेटिव फ्यूल पर बढ़ेगा फोकस प्रधानमंत्री ने कहा कि तेल और गैस पर अत्यधिक निर्भरता भविष्य में भारत के लिए चुनौती बन सकती है। इसलिए देश को बायोगैस, सोलर एनर्जी, ग्रीन हाइड्रोजन और अन्य वैकल्पिक ईंधनों के इस्तेमाल को बढ़ावा देना होगा। सरकार का मानना है कि इससे न केवल एनर्जी सिक्योरिटी मजबूत होगी, बल्कि आयात पर निर्भरता भी कम होगी और वैश्विक संकटों का असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर सीमित रहेगा। लालफीताशाही खत्म करने पर जोर बैठक में प्रधानमंत्री मोदी ने प्रशासनिक सुधारों पर भी खास जोर दिया। उन्होंने मंत्रियों से कहा कि सरकारी कामकाज में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जाए। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सरकारी फाइलें “एक टेबल से दूसरी टेबल” तक बेवजह नहीं घूमनी चाहिए। उन्होंने प्रक्रियाओं को आसान बनाने और फैसलों में तेजी लाने के निर्देश दिए। इसके साथ ही उन्होंने योजनाओं की निगरानी और फीडबैक सिस्टम को मजबूत करने पर भी बल दिया, ताकि जनता की समस्याओं का समाधान तेजी से हो सके। नौ अहम क्षेत्रों की समीक्षा बैठक में अर्थव्यवस्था, कृषि, श्रम, ऊर्जा, विदेश नीति, इंफ्रास्ट्रक्चर, व्यापार और कॉरपोरेट मामलों समेत नौ महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर विस्तृत प्रेजेंटेशन दिए गए। सरकार ने विभिन्न मंत्रालयों के प्रदर्शन, योजनाओं की प्रगति और उनके जमीनी असर की समीक्षा की। सूत्रों के अनुसार, बैठक में इस बात पर भी चर्चा हुई कि सरकार की उपलब्धियों और विकास कार्यों की जानकारी आम जनता तक बेहतर तरीके से कैसे पहुंचाई जाए। राजनीतिक हलकों में बढ़ी चर्चा यह बैठक ऐसे समय हुई है जब कैबिनेट फेरबदल और बीजेपी संगठन में बदलाव की अटकलें भी तेज हैं। हालांकि बैठक का मुख्य फोकस शासन, विकास और ऊर्जा सुरक्षा जैसे मुद्दों पर रहा, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसे भविष्य की रणनीति से जोड़कर भी देखा जा रहा है।
पश्चिम एशिया में जारी तनाव और विदेशी मुद्रा पर बढ़ते दबाव के बीच भारत में सोने और चांदी के आयात के आंकड़ों ने सरकार की चिंता बढ़ा दी है। Narendra Modi द्वारा लोगों से एक साल तक सोने की खरीद टालने की अपील से पहले अप्रैल महीने में गोल्ड और सिल्वर इंपोर्ट में बड़ी तेजी दर्ज की गई। वाणिज्य मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल 2026 में भारत का सोने का आयात 81.69 प्रतिशत बढ़कर 5.62 अरब डॉलर तक पहुंच गया। वहीं चांदी का आयात 157.16 प्रतिशत उछलकर 41.1 करोड़ डॉलर हो गया। ऊंची कीमतों के बावजूद बढ़ा गोल्ड इंपोर्ट बढ़ती अंतरराष्ट्रीय कीमतों के बावजूद भारत में सोने की मांग मजबूत बनी हुई है। वित्त वर्ष 2025-26 में मूल्य के लिहाज से गोल्ड इंपोर्ट 24 प्रतिशत बढ़कर रिकॉर्ड 71.98 अरब डॉलर तक पहुंच गया। हालांकि मात्रा के हिसाब से आयात 4.76 प्रतिशत घटकर 721.03 टन रहा। विशेषज्ञों का मानना है कि ऊंची कीमतों के बावजूद निवेश और ज्वेलरी डिमांड के चलते आयात में तेजी बनी रही। सरकार ने बढ़ाई इंपोर्ट ड्यूटी सरकार ने हाल ही में सोने और चांदी पर इंपोर्ट ड्यूटी 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दी है। माना जा रहा है कि आने वाले महीनों में इसका असर आयात पर दिखाई दे सकता है। वाणिज्य सचिव Rajesh Agrawal ने कहा कि शुल्क बढ़ने से उपभोग आधारित मांग में कमी आ सकती है और गोल्ड इंपोर्ट घट सकता है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि चांदी का बड़ा हिस्सा औद्योगिक उपयोग में आने के कारण उस पर शुल्क वृद्धि का असर अपेक्षाकृत कम हो सकता है। चांदी के आयात में रिकॉर्ड तेजी वित्त वर्ष 2025-26 में चांदी का आयात करीब 150 प्रतिशत बढ़कर 12 अरब डॉलर तक पहुंच गया। मात्रा के लिहाज से यह 42 प्रतिशत बढ़कर 7,334.96 टन रहा। विशेषज्ञों के मुताबिक इलेक्ट्रॉनिक्स, सोलर और इंडस्ट्रियल सेक्टर में बढ़ती मांग के कारण सिल्वर इंपोर्ट में तेज उछाल देखा गया है। बढ़ा व्यापार घाटा अप्रैल में सोने और चांदी के बढ़े आयात का असर देश के व्यापार घाटे पर भी पड़ा। भारत का ट्रेड डेफिसिट बढ़कर 28.38 अरब डॉलर के तीन महीने के उच्च स्तर पर पहुंच गया। सरकार का फोकस अब विदेशी मुद्रा बचाने और चालू खाते के घाटे को नियंत्रित करने पर है। भारत में कहां से आता है सबसे ज्यादा सोना? Switzerland भारत का सबसे बड़ा गोल्ड सप्लायर बना हुआ है। देश के कुल गोल्ड इंपोर्ट में इसकी हिस्सेदारी करीब 40 प्रतिशत है। इसके बाद United Arab Emirates की हिस्सेदारी 16 प्रतिशत से अधिक और South Africa की करीब 10 प्रतिशत है। अप्रैल में सिर्फ स्विट्जरलैंड से भारत का आयात 26.73 प्रतिशत बढ़कर 1.47 अरब डॉलर तक पहुंच गया। भारत, China के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सोना उपभोक्ता माना जाता है। देश में गोल्ड इंपोर्ट का बड़ा हिस्सा ज्वेलरी इंडस्ट्री की मांग पूरी करने के लिए किया जाता है।
सरकार ने अचानक बदली निर्यात नीति भारत सरकार ने घरेलू आपूर्ति और महंगाई नियंत्रण को देखते हुए बड़ा कदम उठाया है। अब देश से चीनी का निर्यात सितंबर 2026 तक रोक दिया गया है। यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है। यह फैसला पहले की उस नीति से बिल्कुल अलग है, जिसमें सीमित मात्रा में चीनी निर्यात की अनुमति दी गई थी। अब इसे “restricted” से बदलकर पूरी तरह “prohibited” कर दिया गया है। किन-किन प्रकार की चीनी पर लगा प्रतिबंध नए आदेश के अनुसार कच्ची चीनी, सफेद चीनी और रिफाइंड चीनी–तीनों के निर्यात पर रोक रहेगी। यह आदेश वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले डीजीएफटी (Directorate General of Foreign Trade) द्वारा जारी किया गया है। हालांकि, यूरोपीय संघ और संयुक्त राज्य अमेरिका को कुछ मौजूदा समझौतों के तहत सीमित निर्यात की अनुमति दी गई है। घरेलू आपूर्ति को लेकर चिंता सरकारी आंकड़ों के अनुसार देश में चीनी उत्पादन 2025-26 सत्र में लगभग 275 लाख टन रहने का अनुमान है। शुरुआती स्टॉक जोड़ने के बाद कुल आपूर्ति लगभग 325 लाख टन हो जाएगी। वहीं घरेलू मांग करीब 280 लाख टन रहने की संभावना है। इसके बाद स्टॉक केवल 45 लाख टन रह जाएगा, जो पिछले कई वर्षों में सबसे कम स्तर माना जा रहा है। मौसम और संकट ने बढ़ाई चिंता विशेषज्ञों का कहना है कि 2026-27 में उत्पादन और घट सकता है। इसका कारण कमजोर मानसून और एल-नीनो की संभावना बताई जा रही है। साथ ही मध्य पूर्व में चल रहे तनाव से उर्वरक आपूर्ति पर भी असर पड़ने की आशंका है। व्यापारियों और मिलों पर असर अचानक लिए गए इस फैसले से चीनी उद्योग और व्यापारियों पर असर पड़ सकता है। कई कंपनियों ने पहले ही निर्यात के सौदे कर लिए थे, जिन पर अब अनिश्चितता बन गई है। वैश्विक बाजार में कीमतों में उछाल भारत के इस फैसले का असर अंतरराष्ट्रीय बाजार पर भी देखा गया। न्यूयॉर्क में कच्ची चीनी की कीमतों में 2% से अधिक की बढ़ोतरी हुई, जबकि लंदन में सफेद चीनी के भाव लगभग 3% तक बढ़ गए। भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा चीनी उत्पादक देश है और वैश्विक आपूर्ति में इसकी अहम भूमिका है। ऐसे में निर्यात प्रतिबंध से वैश्विक बाजार में भी दबाव बढ़ सकता है।
वैश्विक संकट का भारत की अर्थव्यवस्था पर असर मध्य पूर्व में जारी तनाव और तेल आपूर्ति में बाधा का असर अब भारत की अर्थव्यवस्था पर साफ दिखने लगा है। इसी बीच भारतीय रिजर्व बैंक (Reserve Bank of India) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने चेतावनी दी है कि अगर यह संकट लंबे समय तक जारी रहता है तो देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ सकती हैं। ईंधन कीमतों में बढ़ोतरी की आशंका RBI गवर्नर ने कहा कि अभी तक सरकार ने खुदरा ईंधन कीमतों में कोई बढ़ोतरी नहीं की है, लेकिन स्थिति लगातार बिगड़ती रही तो कीमतों का बोझ आम जनता पर डाला जा सकता है। उनका कहना है कि लंबे समय तक वैश्विक तेल संकट जारी रहने पर कीमतें बढ़ना लगभग तय है। भारत पर तेल संकट का सीधा असर मध्य पूर्व में तनाव और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे अहम तेल मार्गों में बाधा के कारण कच्चे तेल की आपूर्ति प्रभावित हुई है। इसका सीधा असर वैश्विक बाजार के साथ-साथ भारत पर भी पड़ रहा है, जो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है। भारत की स्थिति इसलिए भी संवेदनशील है क्योंकि देश खाद्य तेल और उर्वरक के लिए भी विदेशों पर निर्भर रहता है। रुपये में गिरावट से बढ़ी चिंता इसी बीच विदेशी मुद्रा बाजार में भी दबाव देखा जा रहा है। भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले लगातार कमजोर होकर 95 के स्तर से नीचे कारोबार कर रहा है, जिससे आयात और महंगा हो गया है। सरकार की नीति और कदम सरकार ने अब तक पेट्रोल-डीजल की कीमतें स्थिर रखी हैं, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे समय तक अंतरराष्ट्रीय दबाव रहने पर स्थिति बदल सकती है। प्रधानमंत्री ने भी ईंधन की खपत कम करने और बचत पर जोर देने की अपील की है ताकि विदेशी मुद्रा पर दबाव कम हो सके। वैश्विक हालात और भारत की चुनौती RBI गवर्नर ने स्विट्जरलैंड में एक सम्मेलन के दौरान कहा कि सरकार अब तक वित्तीय अनुशासन की नीति पर चल रही है, लेकिन वैश्विक अस्थिरता के कारण आने वाले समय में महंगाई और ऊर्जा कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है। मध्य पूर्व संकट यदि लंबे समय तक जारी रहता है तो भारत में ईंधन महंगा होना तय माना जा रहा है। ऐसे में सरकार और आम जनता दोनों के लिए आर्थिक चुनौतियां और बढ़ सकती हैं।
देशभर में 6 मई 2026 को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में हलचल देखने को मिली है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों और डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति का असर अब स्थानीय स्तर पर भी साफ दिखाई दे रहा है। जहां कुछ शहरों में ईंधन के दाम स्थिर बने हुए हैं, वहीं कई जगहों पर मामूली बढ़ोतरी और गिरावट दर्ज की गई है। बड़े शहरों में क्या है हाल? देश की आर्थिक राजधानी Mumbai में पेट्रोल 103.54 रुपये प्रति लीटर पर स्थिर है, जबकि New Delhi में भी कीमत 94.77 रुपये प्रति लीटर बनी हुई है। इसी तरह डीजल के दाम भी मुंबई में 90.03 रुपये और दिल्ली में 87.67 रुपये प्रति लीटर पर स्थिर हैं। यूपी, बिहार और झारखंड में बदलाव पूर्वी और उत्तरी राज्यों में कीमतों में हल्का उतार-चढ़ाव देखने को मिला: Gaya में पेट्रोल 50 पैसे बढ़कर 106.44 रुपये हो गया Noida में पेट्रोल 13 पैसे सस्ता हुआ Dhanbad में पेट्रोल 30 पैसे घटा Patna में पेट्रोल 8 पैसे बढ़ा डीजल की बात करें तो: पटना में 7 पैसे की बढ़त मुजफ्फरपुर में 8 पैसे की गिरावट जमशेदपुर में 23 पैसे महंगा धनबाद में 31 पैसे सस्ता हुआ प्रमुख शहरों में पेट्रोल के ताजा भाव (₹/लीटर) लखनऊ – 94.69 नोएडा – 94.77 गया – 106.44 पटना – 105.42 भागलपुर – 106.27 मुजफ्फरपुर – 105.98 धनबाद – 97.87 रांची – 97.86 देवघर – 97.68 जमशेदपुर – 98.03 मुंबई – 103.54 नई दिल्ली – 94.77 कोलकाता – 105.45 चेन्नई – 100.84 भोपाल – 106.52 गुरुग्राम – 95.51 बेंगलुरु – 102.92 प्रमुख शहरों में डीजल के ताजा भाव (₹/लीटर) लखनऊ – 87.81 नोएडा – 87.89 गया – 92.63 पटना – 91.67 भागलपुर – 92.44 मुजफ्फरपुर – 92.17 धनबाद – 92.62 रांची – 92.62 देवघर – 92.39 जमशेदपुर – 92.78 मुंबई – 90.03 नई दिल्ली – 87.67 कोलकाता – 92.02 चेन्नई – 92.39 भोपाल – 91.89 गुरुग्राम – 87.98 बेंगलुरु – 90.99 क्या है बदलाव की वजह? विशेषज्ञों के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और विदेशी मुद्रा विनिमय दर (रुपया बनाम डॉलर) सीधे तौर पर घरेलू ईंधन कीमतों को प्रभावित करते हैं। इसके अलावा राज्यों के टैक्स स्ट्रक्चर के कारण भी अलग-अलग शहरों में दामों में अंतर देखने को मिलता है। आगे क्या उम्मीद? आने वाले दिनों में अगर ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता रहती है, तो घरेलू बाजार में भी कीमतें संतुलित रह सकती हैं। हालांकि, छोटे स्तर पर उतार-चढ़ाव जारी रहने की संभावना है।
भारत के विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserves) में लगातार तीन सप्ताह की बढ़त के बाद एक बार फिर गिरावट दर्ज की गई है। Reserve Bank of India (RBI) द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, 24 अप्रैल 2026 को समाप्त सप्ताह में देश के विदेशी मुद्रा भंडार में 4.82 अरब डॉलर की कमी आई है। कुल भंडार में आई गिरावट ताजा गिरावट के बाद भारत का कुल विदेशी मुद्रा भंडार घटकर 698.487 अरब डॉलर रह गया है। इससे पहले 27 फरवरी 2026 को यह 728.494 अरब डॉलर के ऑल टाइम हाई स्तर पर पहुंच गया था। उल्लेखनीय है कि अप्रैल के पहले तीन हफ्तों में भंडार में 14 अरब डॉलर से अधिक की बढ़ोतरी हुई थी, जबकि मार्च 2026 में इसमें भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला था। FCA में कमी बना बड़ा कारण विदेशी मुद्रा भंडार का सबसे बड़ा हिस्सा मानी जाने वाली विदेशी मुद्रा आस्तियां (FCA) भी इस गिरावट की मुख्य वजह रही हैं। FCA में 2.841 अरब डॉलर की कमी कुल FCA भंडार घटकर 554.622 अरब डॉलर FCA में यूरो, पाउंड और येन जैसी मुद्राओं के उतार-चढ़ाव का भी असर शामिल होता है, जिससे कुल भंडार प्रभावित होता है। सोने के भंडार पर भी असर इस दौरान भारत के गोल्ड रिजर्व की वैल्यू में भी गिरावट दर्ज की गई है। सोने की वैल्यू में 1.897 अरब डॉलर की कमी कुल वैल्यू घटकर 120.236 अरब डॉलर हालांकि, मार्च 2026 के अंत तक भारत के पास कुल 880.52 टन सोना मौजूद था, जो कुल विदेशी मुद्रा भंडार का लगभग 16.7% हिस्सा है। SDR और IMF रिजर्व में भी गिरावट स्पेशल ड्रॉइंग राइट (SDR) में 67 मिलियन डॉलर की कमी, अब 18.774 अरब डॉलर International Monetary Fund (IMF) के पास रखे भारत के रिजर्व में 15 मिलियन डॉलर की गिरावट, कुल 4.855 अरब डॉलर क्यों आई गिरावट? विशेषज्ञों के मुताबिक, पश्चिम एशिया में जारी तनाव और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता का असर विदेशी मुद्रा भंडार पर पड़ा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में उतार-चढ़ाव, डॉलर की मजबूती और अन्य मुद्राओं में गिरावट भी इसके प्रमुख कारण माने जा रहे हैं। क्या है इसका मतलब? विदेशी मुद्रा भंडार में गिरावट अल्पकालिक दबाव का संकेत हो सकता है, लेकिन भारत का कुल भंडार अभी भी मजबूत स्थिति में बना हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले हफ्तों में वैश्विक हालात के आधार पर इसमें फिर सुधार देखने को मिल सकता है।
भारत ने अपने स्वर्ण भंडार को लेकर एक बड़ा और रणनीतिक कदम उठाया है। Reserve Bank of India (RBI) ने पिछले छह महीनों में करीब 104 टन सोना विदेशों से वापस देश में मंगाया है। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव और आर्थिक अनिश्चितता बढ़ रही है। कितना सोना भारत में, कितना विदेश में? RBI की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के कुल 880.52 टन सोने में से अब लगभग 77% यानी करीब 680 टन सोना देश के भीतर सुरक्षित रखा गया है। वहीं, करीब 197.67 टन सोना अभी भी Bank of England और Bank for International Settlements (BIS) के पास रखा हुआ है। क्यों बदली रणनीति? पहले भारत सहित कई देश अपने सोने को लंदन और न्यूयॉर्क जैसे वैश्विक वित्तीय केंद्रों में रखते थे। इसके पीछे मुख्य कारण थे: अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की खरीद-फरोख्त में आसानी वैश्विक लेनदेन में सुविधा विदेशी संस्थानों पर भरोसा लेकिन अब हालात बदल रहे हैं। Russia-Ukraine War और अफगानिस्तान के विदेशी भंडार फ्रीज होने जैसी घटनाओं ने देशों को सतर्क कर दिया है। अब सोने को सिर्फ निवेश नहीं, बल्कि रणनीतिक सुरक्षा (Strategic Asset) के रूप में देखा जा रहा है। क्या हैं प्रमुख जोखिम? विदेशों में रखी संपत्ति राजनीतिक कारणों से फ्रीज हो सकती है संकट के समय तुरंत उपयोग में लाना मुश्किल वैश्विक तनाव के कारण भरोसे में कमी विदेशी मुद्रा भंडार में बढ़ी हिस्सेदारी सोने की कीमतों में तेजी के चलते भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में इसकी अहमियत भी बढ़ी है: सितंबर 2025: 97.4 अरब डॉलर मार्च 2026: 115.4 अरब डॉलर हिस्सेदारी: 13.9% से बढ़कर 16.7% दुनिया में भी बढ़ रहा ट्रेंड भारत अकेला नहीं है, कई देश इसी राह पर चल रहे हैं: फ्रांस ने 129 टन सोना वापस मंगाया सर्बिया ने पूरा स्वर्ण भंडार देश में शिफ्ट किया जर्मनी भी अपने विदेशी भंडार की समीक्षा कर रहा है World Gold Council के अनुसार, 2025 तक 59% केंद्रीय बैंक अपना सोना अपने देश में रखना पसंद कर रहे हैं, जो 2020 में 50% था। क्या संकेत देता है यह कदम? भारत का यह कदम साफ तौर पर दर्शाता है कि बदलते वैश्विक माहौल में आर्थिक सुरक्षा और स्वायत्तता को प्राथमिकता दी जा रही है। यह सिर्फ एक वित्तीय निर्णय नहीं, बल्कि दीर्घकालिक रणनीतिक सोच का हिस्सा है।
भारत की अर्थव्यवस्था इस समय एक साथ कई मोर्चों पर दबाव झेलती नजर आ रही है। बढ़ती कच्चे तेल की कीमतों के बीच अब भीषण गर्मी और कमजोर मानसून के संकेतों ने महंगाई और आर्थिक स्थिरता को लेकर नई चिंता खड़ी कर दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर हालात नहीं सुधरे, तो आने वाले महीनों में आम लोगों पर इसका सीधा असर पड़ सकता है। महंगे क्रूड से बढ़ा दबाव वैश्विक स्तर पर जारी तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतें लगातार ऊंचाई पर बनी हुई हैं। इससे भारत जैसे आयात-निर्भर देश पर सीधा असर पड़ता है। पेट्रोल-डीजल महंगा होने से ट्रांसपोर्ट और उत्पादन लागत बढ़ती है, जिसका असर हर वस्तु की कीमत पर पड़ता है। भीषण गर्मी ने बढ़ाई बिजली मांग देश के कई हिस्सों में तापमान 47 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच चुका है। गर्मी के कारण एयर कंडीशनर और कूलर के इस्तेमाल में तेज बढ़ोतरी हुई है, जिससे बिजली की मांग रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है। हाल ही में देश में पावर डिमांड 256 गीगावाट तक पहुंच गई, जो एक नया रिकॉर्ड है। कमजोर मानसून से खेती पर खतरा जून से सितंबर के बीच आने वाला मानसून भारत की कृषि व्यवस्था की रीढ़ माना जाता है। इस बार सामान्य से कम बारिश की आशंका जताई जा रही है। अगर ऐसा होता है, तो फसल उत्पादन प्रभावित हो सकता है, जिससे खाद्य वस्तुओं की कीमतों में तेजी आ सकती है। महंगाई बढ़ने का खतरा Reserve Bank of India ने जहां महंगाई दर 4.6% रहने का अनुमान जताया था, वहीं अब विशेषज्ञ इसे 5% से ऊपर जाने की आशंका जता रहे हैं। अगर मानसून कमजोर रहता है, तो यह आंकड़ा 5.8% तक पहुंच सकता है। ऐसी स्थिति में ब्याज दरों में कटौती की संभावना कम हो सकती है, बल्कि दरें बढ़ाने का दबाव भी बन सकता है। ‘परफेक्ट स्टॉर्म’ जैसी स्थिति का खतरा ANZ Bank के अर्थशास्त्रियों के मुताबिक, ऊंची ऊर्जा कीमतें, भीषण गर्मी और कमजोर मानसून मिलकर “परफेक्ट स्टॉर्म” यानी गंभीर आर्थिक संकट जैसी स्थिति पैदा कर सकते हैं। खासकर खाद्य महंगाई सबसे बड़ा जोखिम बनकर उभर रही है। आम आदमी पर क्या असर पड़ेगा? खाने-पीने की चीजों के दाम बढ़ सकते हैं किसानों की आय पर असर पड़ सकता है ग्रामीण इलाकों में मांग घट सकती है खेती की लागत बढ़ने से महंगाई और तेज हो सकती है कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) में खाद्य पदार्थों की हिस्सेदारी करीब 37% है, इसलिए खाद्य कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर हर घर के बजट पर पड़ेगा। क्या है राहत की उम्मीद? कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि स्थिति पूरी तरह बिगड़ेगी नहीं। Nomura Holdings के अनुसार, भारत के पास गेहूं और चावल का पर्याप्त बफर स्टॉक मौजूद है, जिससे कीमतों को नियंत्रित किया जा सकता है। साथ ही बेहतर सिंचाई और जलवायु-प्रतिरोधी बीजों के कारण खेती पर असर पहले के मुकाबले कुछ कम हो सकता है।
नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल के बीच भारत की अर्थव्यवस्था को लेकर राहत भरी खबर सामने आई है। वैश्विक रेटिंग एजेंसी S&P Global Ratings ने कहा है कि अगर इस वित्त वर्ष में कच्चे तेल की औसत कीमत 130 डॉलर प्रति बैरल तक भी पहुंच जाती है, तब भी भारत की आर्थिक रफ्तार पर बड़ा असर नहीं पड़ेगा। एजेंसी के मुताबिक, ऐसे चुनौतीपूर्ण हालात में भी भारत करीब 6.3 प्रतिशत की दर से विकास करता रहेगा, जो वैश्विक स्तर पर बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में सबसे मजबूत वृद्धि दर मानी जाएगी। भारत की साख पर नहीं पड़ेगा असर S&P Global Ratings ने साफ किया है कि तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी के बावजूद भारत की ‘सॉवरेन क्रेडिट रेटिंग’ पर कोई नकारात्मक प्रभाव पड़ने की संभावना नहीं है। इसकी मुख्य वजह भारत का मजबूत वित्तीय प्रबंधन और राजकोषीय घाटे को नियंत्रित करने की प्रतिबद्धता बताई गई है। सामान्य हालात में 7.1% ग्रोथ का अनुमान एजेंसी के डायरेक्टर (सॉवरेन रेटिंग्स) YeeFarn Phua के अनुसार, यदि कच्चे तेल की औसत कीमत 85 डॉलर प्रति बैरल के आसपास रहती है, तो वित्त वर्ष 2026-27 में भारत की जीडीपी ग्रोथ 7.1 प्रतिशत तक पहुंच सकती है। हालांकि, तेल की कीमत 130 डॉलर तक पहुंचने की स्थिति में भी भारत की ग्रोथ 6.3 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जो अन्य बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के मुकाबले काफी बेहतर है। क्या हैं संभावित जोखिम? S&P ने यह भी चेतावनी दी है कि ऊर्जा आपूर्ति में बाधा एक बड़ा जोखिम बन सकती है। यदि ईंधन और उर्वरक जैसे उत्पादों की आपूर्ति प्रभावित होती है, तो इसका असर अर्थव्यवस्था के कुछ क्षेत्रों पर पड़ सकता है। ईरान संकट से बढ़ी तेल की कीमतें पश्चिम एशिया में तनाव, खासकर Iran से जुड़े हालात के कारण कच्चे तेल की कीमतों में हाल के दिनों में तेजी देखी गई है। एक समय पर कीमतें 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थीं, जो पिछले चार वर्षों का उच्चतम स्तर है। इसकी एक बड़ी वजह Strait of Hormuz में जहाजों की आवाजाही प्रभावित होना है। यह जलमार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग 20 प्रतिशत और गैस का करीब एक-तिहाई हिस्सा संभालता है। हालांकि, फिलहाल ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 98.32 डॉलर प्रति बैरल पर ट्रेड कर रही है, जिसमें हल्की गिरावट दर्ज की गई है। वैश्विक संकट में भी मजबूत भारत रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था लचीली बनी हुई है। मजबूत नीतिगत ढांचा और वित्तीय अनुशासन इसे अन्य देशों के मुकाबले बेहतर स्थिति में बनाए हुए हैं।
पश्चिम एशिया में जारी तनाव का असर अब भारत की अर्थव्यवस्था पर भी दिखने लगा है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर यह युद्ध लंबा खिंचता है, तो इसका सीधा असर महंगाई, ब्याज दरों और कंपनियों के निवेश फैसलों पर पड़ेगा। RBI बढ़ा सकता है ब्याज दरें क्लाइंट एसोसिएट्स के को-फाउंडर हिमांशु कोहली के मुताबिक: फिलहाल RBI दरों को स्थिर रख सकता है लेकिन अगर एनर्जी प्राइस बढ़ते रहे, तो FY27 में 25–50 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी संभव है महंगाई और तेल कीमतें बनेंगी बड़ा फैक्टर कच्चे तेल की कीमतों में उछाल होर्मुज स्ट्रेट में सप्लाई बाधा का खतरा डॉलर की मजबूती ये सभी फैक्टर्स महंगाई को बढ़ा सकते हैं, जिससे RBI पर दबाव बढ़ेगा। Capex (पूंजीगत खर्च) फैसले टल सकते हैं अनिश्चित माहौल को देखते हुए: कंपनियां निवेश (Capex) फैसलों को टाल सकती हैं मैनेजमेंट Q4FY26 के नतीजों में सतर्क रुख अपना सकता है किन सेक्टर्स पर सबसे ज्यादा असर? अगर युद्ध लंबा चला, तो इन सेक्टर्स पर दबाव बढ़ सकता है: केमिकल्स, पेंट्स, फर्टिलाइजर्स सीमेंट और मेटल्स ऑयल मार्केटिंग कंपनियां (OMCs) लॉजिस्टिक्स और एयरलाइंस कंज्यूमर स्टेपल्स इन सेक्टर्स के मार्जिन में गिरावट आ सकती है असर कब दिखेगा? Q4FY26: असर सीमित रहने की संभावना Q1FY27 – Q2FY27: मार्जिन पर दबाव साफ दिख सकता है डिमांड में भी कमी आ सकती है RBI की रणनीति क्या हो सकती है? रेपो रेट फिलहाल स्थिर फॉरेक्स मार्केट में हस्तक्षेप OMOs के जरिए लिक्विडिटी सपोर्ट 10 साल की सरकारी बॉन्ड यील्ड पहले ही 7% के पार जा चुकी है
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और वैश्विक सप्लाई चेन में आई दिक्कतों के बीच भारत सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने कई जरूरी पेट्रोकेमिकल उत्पादों पर कस्टम ड्यूटी पूरी तरह खत्म कर दी है। यह छूट 30 जून 2026 तक लागू रहेगी। क्यों लिया गया यह फैसला? सरकार के मुताबिक: मिडिल ईस्ट संकट से कच्चे माल की सप्लाई प्रभावित हो रही है अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें बढ़ रही हैं उद्योगों पर लागत का दबाव बढ़ रहा है इन परिस्थितियों को देखते हुए यह कदम उठाया गया है ताकि देश में उत्पादन और सप्लाई प्रभावित न हो। किन सेक्टरों को होगा फायदा? इस फैसले से कई बड़े उद्योगों को सीधा लाभ मिलेगा: प्लास्टिक और पैकेजिंग टेक्सटाइल इंडस्ट्री फार्मा सेक्टर केमिकल इंडस्ट्री ऑटो पार्ट्स मैन्युफैक्चरिंग सरकार का मानना है कि इससे उत्पादन लागत घटेगी और सप्लाई चेन सुचारू बनी रहेगी। किन उत्पादों पर मिली छूट? सरकार ने जिन प्रमुख पेट्रोकेमिकल्स पर ड्यूटी हटाई है, उनमें शामिल हैं: एनहाइड्रस अमोनिया मेथनॉल टोल्यून स्टाइरीन विनाइल क्लोराइड मोनोमर मोनोएथिलीन ग्लाइकोल (MEG) फिनोल, एसिटिक एसिड, PTA इसके अलावा कई पॉलिमर भी शामिल हैं: पॉलीएथिलीन (PE) पॉलीप्रोपिलीन (PP) पॉलीस्टाइरीन (PS) PVC, PET चिप्स ABS (इंजीनियरिंग प्लास्टिक) आम लोगों को कैसे मिलेगा फायदा? कच्चा माल सस्ता होने से उत्पादन लागत कम होगी इससे प्लास्टिक, पैकेजिंग, कपड़े, दवाइयों जैसी चीजों की कीमतों में राहत मिल सकती है बाजार में सप्लाई बनी रहने से महंगाई पर भी काबू पाने में मदद मिल सकती है
नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत आम लोगों के लिए महंगाई की खबर लेकर आई है। कारोबारियों पर भी इसका असर पड़ेगा। 1 अप्रैल से कमर्शियल LPG गैस सिलेंडर की कीमतों में बड़ी बढ़ोतरी की गई है। हालांकि राहत की बात यह है कि घरेलू गैस सिलेंडर के दाम में फिलहाल कोई बदलाव नहीं किया गया है। कितनी बढ़ी कीमत? सरकार द्वारा जारी नए रेट के मुताबिक, दिल्ली में 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल LPG सिलेंडर की कीमत में ₹195.50 और कोलकाता में ₹218 की बढ़ोतरी की गई है। इस बढ़ोतरी के बाद दिल्ली में कमर्शियल सिलेंडर की कीमत ₹2078.50 हो गई है, जो पहले ₹1884.50 थी। वहीं कोलकाता में यह कीमत बढ़कर 2208 रुपये पहुंच गई है। अलग-अलग शहरों में नए रेट देश के प्रमुख शहरों में कमर्शियल LPG सिलेंडर की नई कीमत इस प्रकार है: दिल्ली – ₹2078.50 कोलकाता – ₹2208 मुंबई – ₹2031 चेन्नई – ₹2246.50 पटना – ₹2365 जयपुर – ₹2031 रांची – ₹2120 छोटे सिलेंडर पर भी असर 5 किलो वाले फ्री ट्रेड LPG (FTL) सिलेंडर की कीमत में भी ₹51 की बढ़ोतरी की गई है। अब इसकी कीमत ₹549 प्रति रिफिल हो गई है। कारोबारियों पर सीधा असर कमर्शियल LPG सिलेंडर की कीमत बढ़ने का सीधा असर होटल, रेस्टोरेंट और छोटे व्यापारियों पर पड़ेगा। इससे खाने-पीने की चीजों की कीमतों में भी बढ़ोतरी हो सकती है, जिसका असर आम उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ेगा। पहले भी बढ़ चुके हैं दाम गौरतलब है कि 1 मार्च 2026 को भी कमर्शियल LPG सिलेंडर ₹114.50 महंगा हुआ था। वहीं 7 मार्च को घरेलू गैस सिलेंडर ₹60 बढ़ा था। यानी पिछले एक महीने में ही कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमत में करीब ₹300 तक की बढ़ोतरी हो चुकी है। क्यों बढ़ रही है कीमत? विशेषज्ञों के अनुसार मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव का सीधा असर LPG के दामों पर पड़ रहा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में अस्थिरता के चलते आने वाले समय में भी कीमतों में बदलाव संभव है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।