India Russia relations

India’s External Affairs Minister S. Jaishankar speaking at Finland forum on Russia oil trade and energy policy discussion
रूसी तेल खरीद पर भारत के समर्थन में उतरी फिनलैंड, जयशंकर ने पश्चिमी देशों को याद दिलाई पुरानी बातें

फिनलैंड की विदेश मंत्री ने भारत का किया बचाव रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद से भारत द्वारा रूस से तेल खरीदने को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। हालांकि इस बार भारत को यूरोप से ही अप्रत्याशित समर्थन मिला है। फिनलैंड की विदेश मंत्री Elina Valtonen ने स्पष्ट कहा कि भारत ने रूस से तेल खरीदते समय पश्चिमी देशों द्वारा तय किए गए प्राइस कैप नियमों का पालन किया है और यही उस व्यवस्था का मूल उद्देश्य भी था। फिनलैंड में आयोजित चर्चित ‘कुल्तारांता टॉक्स’ कार्यक्रम में भारत के विदेश मंत्री S. Jaishankar, फिनलैंड की विदेश मंत्री और यूएई की सहायक विदेश मंत्री Lana Nusseibeh एक पैनल चर्चा में शामिल हुए थे। इसी दौरान वाल्टोनेन ने भारत के पक्ष में अपनी बात रखी। "रूसी तेल खरीदने पर रोक नहीं थी" वाल्टोनेन ने कहा कि जब पश्चिमी देशों ने रूस के तेल पर प्राइस कैप लागू किया था, तब इसका उद्देश्य दुनिया को रूसी तेल खरीदने से रोकना नहीं था। उन्होंने कहा कि वैश्विक तेल आपूर्ति बाधित न हो और रूस को अत्यधिक मुनाफा न मिले, इसी संतुलन को ध्यान में रखकर यह व्यवस्था बनाई गई थी। उन्होंने कहा कि भारत ने निर्धारित मूल्य सीमा के भीतर तेल खरीदा, इसलिए उसने नियमों का उल्लंघन नहीं किया। जयशंकर बोले- लागत और उपलब्धता के आधार पर खरीदते हैं तेल रूस से तेल आयात को लेकर पूछे गए सवालों पर विदेश मंत्री जयशंकर ने भारत की ऊर्जा नीति का जोरदार बचाव किया। उन्होंने कहा कि भारत किसी राजनीतिक दबाव के आधार पर नहीं, बल्कि लागत और उपलब्धता को ध्यान में रखकर ऊर्जा खरीदता है। जयशंकर ने याद दिलाया कि 2022 में रूस पर प्रतिबंध लगने के बाद वैश्विक ऊर्जा बाजार में बड़ा बदलाव आया था। उस समय यूरोपीय देशों ने मध्य-पूर्व के तेल की बड़ी मात्रा खरीदनी शुरू कर दी थी, जो पहले भारत के प्रमुख आपूर्तिकर्ताओं में शामिल था। ऐसे में भारत को अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए नए विकल्प तलाशने पड़े। "अमेरिका ने भी रूसी तेल खरीदने को कहा था" विदेश मंत्री ने चर्चा के दौरान एक महत्वपूर्ण दावा भी किया। उन्होंने कहा कि उस समय अमेरिका ने स्वयं भारत से रूसी तेल खरीद जारी रखने का आग्रह किया था ताकि वैश्विक तेल बाजार में स्थिरता बनी रहे। जयशंकर ने कहा कि इस मुद्दे को किसी बड़े नैतिक सिद्धांत की तरह पेश करना उचित नहीं है, क्योंकि उस दौर में कई देशों ने व्यावहारिक जरूरतों के आधार पर फैसले लिए थे। यूरोप की आलोचना पर तीखी प्रतिक्रिया रूस-यूक्रेन संघर्ष और भारत की विदेश नीति पर चर्चा के दौरान जयशंकर ने यूरोपीय देशों की आलोचना पर भी कड़ा जवाब दिया। उन्होंने कहा कि कई यूरोपीय देश वर्षों से ऐसे देशों को हथियार बेचते रहे हैं जिनका इस्तेमाल भारत के खिलाफ हुआ है। भारत ने कभी भी यूरोप की सुरक्षा को खतरे में डालने वाला कोई कदम नहीं उठाया, इसलिए आलोचना करते समय इस तथ्य को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए। बदल रहा है भारत का ऊर्जा नक्शा जयशंकर ने यह भी स्पष्ट किया कि भारत केवल एक ही क्षेत्र पर निर्भर नहीं है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में रूस भारत का सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता है, जबकि प्राकृतिक गैस के मामले में अमेरिका शीर्ष स्थान पर पहुंच चुका है। इससे पहले यह स्थान Qatar के पास था। उन्होंने कहा कि खाड़ी देशों के साथ भारत के संबंध केवल तेल और गैस तक सीमित नहीं हैं, बल्कि व्यापार, निवेश और रणनीतिक साझेदारी जैसे कई क्षेत्रों तक फैले हुए हैं। भारत के पक्ष को मिली नई मजबूती फिनलैंड की विदेश मंत्री का सार्वजनिक समर्थन भारत के उस तर्क को मजबूती देता है कि उसने रूस से तेल खरीदते समय पश्चिमी देशों द्वारा निर्धारित नियमों का ही पालन किया। ऐसे समय में जब रूस की ऊर्जा निर्यात नीति और यूक्रेन युद्ध को लेकर वैश्विक बहस जारी है, यह बयान भारत की ऊर्जा रणनीति के समर्थन में एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक संदेश माना जा रहा है।  

surbhi जून 13, 2026 0
External Affairs Minister S. Jaishankar defends India’s Russian oil imports at international policy forum.
रूसी तेल पर सवाल उठाने वाले यूरोप को जयशंकर का जवाब, बोले- भारत ने हमेशा राष्ट्रीय हित में लिए फैसले

  विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने रूस से तेल खरीदने को लेकर भारत की नीति का मजबूती से बचाव करते हुए कहा कि देश ने हमेशा कीमत, उपलब्धता और राष्ट्रीय हित को प्राथमिकता दी है। फिनलैंड में आयोजित ‘कुलतरांता टॉक्स’ कार्यक्रम के दौरान उन्होंने यूरोपीय देशों के रवैये पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि वैश्विक मुद्दों पर नैतिकता की बात करने वाले देशों को अपने आचरण पर भी नजर डालनी चाहिए। ‘उभरती शक्तियां और नई भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा’ विषय पर आयोजित चर्चा में जयशंकर से रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान भारत द्वारा रूसी तेल खरीद बढ़ाने को लेकर सवाल पूछा गया। इसके जवाब में उन्होंने कहा कि उस समय वैश्विक बाजार की परिस्थितियों ने भारत को व्यावहारिक निर्णय लेने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि भारत तेल की खरीद उसकी कीमत और उपलब्धता के आधार पर करता है। रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद जब वैश्विक ऊर्जा बाजार में बदलाव आया, तब रूस का तेल अधिक उपलब्ध था, जबकि यूरोपीय देश मध्य पूर्व से बड़ी मात्रा में तेल खरीद रहे थे, जो पारंपरिक रूप से भारत का प्रमुख स्रोत रहा है। यूरोप के रवैये पर उठाए सवाल ऊर्जा नीति पर भारत का पक्ष रखने के बाद जयशंकर ने यूरोप के दृष्टिकोण पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि भारत ने कभी ऐसा कोई कदम नहीं उठाया जिससे किसी यूरोपीय देश की सुरक्षा प्रभावित हुई हो, लेकिन भारत के खिलाफ इस्तेमाल होने वाले कई हथियार यूरोप से आए हैं। जब उनसे इस टिप्पणी पर और स्पष्टता मांगी गई, तो उन्होंने कहा कि वर्षों से ऐसे हथियारों की आपूर्ति होती रही है जिनका इस्तेमाल भारत के खिलाफ किया गया। उन्होंने कहा कि इस विषय पर भी गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए। ‘राष्ट्रीय हित सर्वोपरि’ विदेश मंत्री ने कहा कि भारत की प्राथमिकता अपने नागरिकों की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना और आर्थिक स्थिरता बनाए रखना है। उनके अनुसार, वैश्विक संकट के दौर में हर देश अपने हितों को ध्यान में रखकर फैसले लेता है और भारत ने भी वही किया। जयशंकर ने यह भी कहा कि रूस-यूक्रेन संघर्ष और उससे जुड़े ऊर्जा संबंधी फैसलों को केवल नैतिक दृष्टिकोण से नहीं देखा जाना चाहिए। उनका कहना था कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति में अधिकांश देश अपने रणनीतिक और आर्थिक हितों के आधार पर निर्णय लेते हैं। वैश्विक ऊर्जा बाजार में संतुलन का मुद्दा विदेश मंत्री ने यह भी उल्लेख किया कि रूस पर प्रतिबंधों के बाद वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता की आशंका थी। ऐसे समय में भारत ने अपनी ऊर्जा जरूरतों और बाजार की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए फैसले लिए, जिससे घरेलू आपूर्ति और आर्थिक गतिविधियों पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े। जयशंकर का यह बयान ऐसे समय आया है जब रूस से तेल आयात को लेकर भारत और पश्चिमी देशों के बीच समय-समय पर चर्चा होती रही है। भारत लगातार यह कहता रहा है कि उसकी विदेश और ऊर्जा नीति राष्ट्रीय हितों तथा व्यावहारिक आवश्यकताओं पर आधारित है।  

Deepshikha जून 12, 2026 0
Russian President Vladimir Putin and Indian Prime Minister during BRICS Summit discussions in New Delhi
BRICS Summit 2026: सितंबर में भारत आएंगे रूसी राष्ट्रपति पुतिन, नई दिल्ली में होगा शिखर सम्मेलन

रूस के राष्ट्रपति Vladimir Putin सितंबर में भारत दौरे पर आने वाले हैं। वह 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में आयोजित होने वाले BRICS शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। दक्षिण अफ्रीका में रूसी दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इसकी पुष्टि की है। यह एक साल के भीतर पुतिन की दूसरी भारत यात्रा होगी। इससे पहले दिसंबर 2025 में 23वें भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए उन्होंने भारत का दौरा किया था। अब वह फिर से भारत में आयोजित होने वाले BRICS Summit में भाग लेने आ रहे हैं। भारत कर रहा है BRICS सम्मेलन की मेजबानी इस वर्ष BRICS शिखर सम्मेलन की मेजबानी India कर रहा है। भारत चौथी बार इस संगठन की अध्यक्षता संभाल रहा है। इससे पहले भारत 2012, 2016 और 2021 में BRICS की मेजबानी कर चुका है। नई दिल्ली में होने वाला यह सम्मेलन वैश्विक राजनीति, व्यापार, आर्थिक सहयोग और विकासशील देशों के बीच साझेदारी को मजबूत करने के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है। BRICS देशों के बीच तेजी से बढ़ा व्यापार हाल ही में गुजरात के गांधीनगर में आयोजित BRICS व्यापार एवं आर्थिक मामलों की बैठक में वाणिज्य सचिव Rajesh Agrawal ने बताया कि BRICS देशों के बीच वस्तु व्यापार में पिछले 21 वर्षों में 13 गुना वृद्धि दर्ज की गई है। उन्होंने कहा कि साल 2003 में BRICS देशों के बीच व्यापार 84 अरब डॉलर था, जो बढ़कर 2024 में 1.17 लाख करोड़ डॉलर तक पहुंच गया। हालांकि, यह अभी भी वैश्विक व्यापार का लगभग 5 प्रतिशत ही है। BRICS में शामिल हुए कई नए देश BRICS संगठन की शुरुआत Brazil, Russia, India, China और South Africa के साथ हुई थी। इसके बाद 2024 में संगठन का विस्तार करते हुए Egypt, Ethiopia, Iran और United Arab Emirates को सदस्य बनाया गया। वहीं, 2025 में Indonesia भी BRICS का सदस्य बन गया। वैश्विक अर्थव्यवस्था में BRICS की बड़ी भूमिका BRICS अब दुनिया की 11 प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाओं का समूह बन चुका है। यह समूह वैश्विक आबादी का लगभग 49.5 प्रतिशत, वैश्विक GDP का करीब 40 प्रतिशत और दुनिया के कुल व्यापार का लगभग 26 प्रतिशत प्रतिनिधित्व करता है। नई दिल्ली में होने वाला BRICS Summit वैश्विक दक्षिण (Global South) की आवाज को मजबूत करने और बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।  

surbhi मई 20, 2026 0
S Jaishankar meeting Russian officials as India secures increased oil and gas supply amid Hormuz crisis
होर्मुज संकट के बीच भारत को राहत: S. Jaishankar की कूटनीति रंग लाई, रूस ने बढ़ाई ऊर्जा सप्लाई

पश्चिम एशिया में जारी तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य में बाधित सप्लाई के बीच भारत के लिए एक बड़ी राहत की खबर सामने आई है। भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर की रूस के शीर्ष नेतृत्व के साथ अहम बैठक के बाद रूस ने भारत को तेल और गैस आपूर्ति बढ़ाने का भरोसा दिया है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है, जब ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच जारी संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर गंभीर असर पड़ा है और भारत जैसे बड़े आयातक देशों की चिंता बढ़ गई थी। रूस का भरोसा: ऊर्जा संकट में बड़ी राहत रूस के उप-प्रधानमंत्री Denis Manturov ने प्रधानमंत्री Narendra Modi और विदेश मंत्री जयशंकर के साथ बैठक में स्पष्ट किया कि रूसी कंपनियां भारत को कच्चा तेल और एलएनजी (LNG) की सप्लाई बढ़ाने में सक्षम हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, मार्च 2026 में रूस से भारत को तेल सप्लाई में करीब 90 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जो इस संकट के समय भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। उर्वरक आपूर्ति में भी बढ़ोतरी ऊर्जा के साथ-साथ रूस ने उर्वरकों की सप्लाई बढ़ाने का भी भरोसा दिया है। 2025 के अंत तक भारत को खनिज उर्वरकों की आपूर्ति में 40 प्रतिशत की वृद्धि की गई है। दोनों देशों के बीच यूरिया उत्पादन को लेकर संयुक्त परियोजनाएं भी प्रगति पर हैं, जो भारत के कृषि क्षेत्र को मजबूती देंगी। कूटनीतिक स्तर पर बढ़ा सहयोग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस बैठक को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच व्यापार, कनेक्टिविटी और रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने पर सहमति बनी है। वहीं विदेश मंत्री जयशंकर ने ऊर्जा, टेक्नोलॉजी, उद्योग और महत्वपूर्ण खनिजों जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की बात कही। इसके अलावा, पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति और वैश्विक भू-राजनीतिक परिदृश्य पर भी विस्तृत चर्चा हुई। भारत-रूस संबंधों को नई मजबूती हाल के समय में भारत और रूस के बीच ऊर्जा सहयोग तेजी से मजबूत हुआ है। प्रतिबंधों में आंशिक ढील के बाद रूस एक बार फिर भारत का प्रमुख तेल आपूर्तिकर्ता बनकर उभरा है। इसके साथ ही परमाणु ऊर्जा और रक्षा क्षेत्र में भी दोनों देशों के बीच सहयोग जारी है, जो रणनीतिक साझेदारी को और गहरा बना रहा है।  

surbhi अप्रैल 3, 2026 0
Russia India oil policy
भारत की तेल नीति पर रूस का बड़ा बयान, कहा- अमेरिकी दबाव मंजूर नहीं

नई दिल्ली, एजेंसियां। भारत के तेल बाजार को लेकर अमेरिका के कथित दबाव पर रूस ने खुलकर प्रतिक्रिया दी है। भारत में रूस के राजदूत डेनिस अलिपोव ने साफ कहा है कि मॉस्को किसी भी तरह के बाहरी दबाव को स्वीकार नहीं करता और भारत की स्वतंत्र विदेश नीति का सम्मान करता है। उनके इस बयान ने ऐसे समय में खास महत्व हासिल कर लिया है, जब वैश्विक ऊर्जा बाजार पश्चिम एशिया के तनाव और भू-राजनीतिक खींचतान से प्रभावित है।   डेनिस अलिपोव ने कहा डेनिस अलिपोव ने कहा कि अमेरिका की ओर से भारत के बाजार में रूस के लिए बाधाएं खड़ी करने की कोशिशें अंतरराष्ट्रीय व्यापार और कूटनीतिक संबंधों की स्वस्थ परंपरा के खिलाफ हैं। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि “दबाव बनाकर व्यापार कराना सही तरीका नहीं है।” उनके मुताबिक, भारत अपने राष्ट्रीय हितों के आधार पर फैसले लेने वाला देश है और नई दिल्ली की यही नीति उसे वैश्विक मंच पर अलग पहचान देती है।   रूसी राजदूत ने यह भी स्पष्ट किया रूसी राजदूत ने यह भी स्पष्ट किया कि भारत और रूस के बीच ऊर्जा सहयोग लगातार मजबूत हुआ है। खासकर कच्चे तेल के क्षेत्र में दोनों देशों की साझेदारी पिछले कुछ समय में और गहरी हुई है। उन्होंने कहा कि भारत को रूस से तेल आपूर्ति में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है और दोनों देश इस सहयोग को आगे भी जारी रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं। रूस का मानना है कि यह संबंध केवल व्यापारिक नहीं, बल्कि रणनीतिक भरोसे पर आधारित है। अलिपोव ने पश्चिम एशिया में जारी संकट का जिक्र करते हुए कहा कि मौजूदा हालात ने ऊर्जा बाजार को अस्थिर बना दिया है। तेल और गैस की कीमतों में उतार-चढ़ाव, आपूर्ति श्रृंखला पर दबाव और वैश्विक शिपिंग मार्गों पर तनाव ने स्थिति को और जटिल बनाया है। उन्होंने इस पूरी परिस्थिति को “ऑयल डिसरप्शन डिप्लोमेसी” का हिस्सा बताते हुए संकेत दिया कि भू-राजनीति अब ऊर्जा बाजार को सीधे प्रभावित कर रही है।   प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रूसी  यात्रा पर  इस बीच, उन्होंने भारत-रूस संबंधों के भविष्य को लेकर भी सकारात्मक संकेत दिए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की संभावित रूस यात्रा पर उन्होंने कहा कि मॉस्को इस साल उनकी यात्रा का दिल से स्वागत करेगा। राजदूत ने यह भी याद दिलाया कि भारत और रूस के बीच वार्षिक शिखर बैठक की परंपरा दोनों देशों की गहरी रणनीतिक साझेदारी का प्रमाण है। कुल मिलाकर, रूस का यह बयान सिर्फ तेल व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारत की विदेश नीति की स्वायत्तता और वैश्विक ऊर्जा समीकरणों में उसकी बढ़ती भूमिका को भी रेखांकित करता है।

Unknown अप्रैल 1, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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abhishek singh जुलाई 2, 2026 0