Indian Air Force

Indian Air Force aircraft catches fire after landing at Jorhat Air Base in Assam
असम के जोरहाट एयरबेस पर IAF विमान हादसे का शिकार, लैंडिंग के बाद लगी आग

एयरबेस के भीतर हुआ हादसा, जांच शुरू असम के जोरहाट स्थित भारतीय वायुसेना (IAF) के एयरबेस पर शुक्रवार को एक सैन्य विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, विमान एयरबेस के भीतर सुरक्षित लैंडिंग के बाद अचानक आग की चपेट में आ गया, जिससे अफरा-तफरी का माहौल बन गया। घटना के तुरंत बाद एयरबेस की आपातकालीन और अग्निशमन टीमों को मौके पर भेजा गया। आग पर काबू पाने के लिए राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया गया। पायलट और क्रू की स्थिति पर आधिकारिक जानकारी का इंतजार फिलहाल भारतीय वायुसेना की ओर से विमान के प्रकार, हादसे के कारण और पायलट या अन्य क्रू सदस्यों की स्थिति को लेकर कोई विस्तृत आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। सूत्रों के मुताबिक, विमान रनवे पर उतरने के बाद किसी तकनीकी गड़बड़ी का शिकार हुआ, जिसके बाद उसमें आग लग गई। हालांकि दुर्घटना की वास्तविक वजह जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। वायुसेना ने शुरू की जांच हादसे के बाद भारतीय वायुसेना ने घटना की जांच शुरू कर दी है। तकनीकी विशेषज्ञ विमान के ब्लैक बॉक्स और अन्य उपकरणों की जांच कर रहे हैं ताकि दुर्घटना के कारणों का पता लगाया जा सके। जोरहाट एयरबेस भारतीय वायुसेना का एक महत्वपूर्ण सैन्य केंद्र है और पूर्वोत्तर क्षेत्र में रणनीतिक दृष्टि से अहम माना जाता है। अधिकृत जानकारी आने के बाद ही नुकसान और हादसे की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो पाएगी।  

surbhi जून 13, 2026 0
Russian President Vladimir Putin discusses Su-57 stealth fighter jet cooperation proposal for India.
भारत को रूस का बड़ा ऑफर: Su-57 फाइटर जेट देने और साथ मिलकर बनाने को तैयार पुतिन, जानिए क्यों अहम है प्रस्ताव

  नई दिल्ली: भारतीय वायुसेना की पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान की तलाश के बीच रूस ने एक बार फिर बड़ा रक्षा प्रस्ताव पेश किया है। रूसी राष्ट्रपति Vladimir Putin ने कहा है कि रूस भारत को अत्याधुनिक Su-57 स्टेल्थ फाइटर जेट देने के साथ-साथ इसके संयुक्त उत्पादन और तकनीकी सहयोग के लिए भी तैयार है। यह प्रस्ताव ऐसे समय आया है जब भारत अपने स्वदेशी लड़ाकू विमान कार्यक्रम को आगे बढ़ा रहा है और क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियां भी बढ़ रही हैं। भारत के लिए फिर खुला Su-57 कार्यक्रम का दरवाजा सेंट पीटर्सबर्ग अंतरराष्ट्रीय आर्थिक मंच (SPIEF) के दौरान पुतिन ने कहा कि रूस ने पहले भी भारत को पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान कार्यक्रम में साझेदारी का प्रस्ताव दिया था। उनके अनुसार, उस समय भारत ने परियोजना की प्रगति देखने के बाद निर्णय लेने का विकल्प चुना था। पुतिन ने कहा कि रूस ने बाद में इस विमान को अपने दम पर विकसित किया, लेकिन आज भी भारत के साथ संयुक्त उत्पादन, तकनीकी सहयोग और विमान आपूर्ति के लिए तैयार है। Su-57 को बताया दुनिया के सबसे उन्नत लड़ाकू विमानों में से एक रूसी राष्ट्रपति ने दावा किया कि Sukhoi Su-57 आधुनिक सैन्य विमानन तकनीक का प्रतिनिधित्व करता है और यह दुनिया के सबसे सक्षम पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमानों में शामिल है। उन्होंने संकेत दिया कि यदि भारत रुचि दिखाता है तो रूस तकनीक साझा करने और उत्पादन सहयोग जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में भी बातचीत के लिए तैयार रहेगा। भारतीय वायुसेना के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह प्रस्ताव? भारत अभी तक किसी भी फिफ्थ-जनरेशन स्टेल्थ फाइटर का संचालन नहीं करता। दूसरी ओर, भारत का स्वदेशी Advanced Medium Combat Aircraft (AMCA) कार्यक्रम विकास चरण में है और इसके अगले दशक में सेवा में आने की संभावना जताई जा रही है। इस बीच, क्षेत्रीय स्तर पर वायु शक्ति का संतुलन भी तेजी से बदल रहा है। रिपोर्टों के अनुसार, पाकिस्तान चीन के Shenyang J-35A स्टेल्थ फाइटर को शामिल करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। ऐसे में भारतीय वायुसेना के लिए अंतरिम समाधान की आवश्यकता पर चर्चा तेज हुई है। Su-57 की प्रमुख क्षमताएं Su-57 रूस का सबसे उन्नत लड़ाकू विमान माना जाता है। इसकी प्रमुख विशेषताएं हैं: स्टेल्थ तकनीक आधारित डिजाइन सुपरसोनिक गति पर लंबी दूरी की उड़ान उन्नत रडार और सेंसर प्रणाली हवा से हवा और हवा से जमीन दोनों प्रकार के मिशन की क्षमता इलेक्ट्रॉनिक युद्ध और नेटवर्क-केंद्रित संचालन की सुविधा आधुनिक मिसाइल और हथियार प्रणाली के साथ एकीकरण भारत ने 2018 में क्यों छोड़ा था कार्यक्रम? भारत पहले रूस के साथ FGFA (Fifth Generation Fighter Aircraft) परियोजना का हिस्सा था। हालांकि 2018 में भारत इससे अलग हो गया था। उस समय सामने आए प्रमुख कारणों में शामिल थे: स्टेल्थ क्षमता को लेकर चिंताएं तकनीकी प्रदर्शन पर सवाल विकास लागत और समयसीमा तकनीक हस्तांतरण से जुड़े मुद्दे अब पुतिन का ताजा प्रस्ताव इन पुराने मतभेदों को दूर करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। भारत के सामने क्या विकल्प हैं? भारत के पास फिलहाल तीन प्रमुख रास्ते हैं: स्वदेशी AMCA कार्यक्रम पर पूरी तरह निर्भर रहना। अंतरिम समाधान के रूप में विदेशी फिफ्थ-जनरेशन फाइटर खरीदना। रूस के साथ Su-57 के संयुक्त उत्पादन या तकनीकी सहयोग मॉडल पर विचार करना। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी निर्णय में लागत, तकनीक हस्तांतरण, परिचालन जरूरतें और दीर्घकालिक रणनीतिक हित महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। क्या भारत Su-57 खरीदेगा? फिलहाल भारत सरकार या भारतीय वायुसेना की ओर से Su-57 खरीदने को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। रूस के नए प्रस्ताव ने इस विषय पर चर्चा को फिर से तेज कर दिया है और आने वाले महीनों में इस पर रणनीतिक स्तर पर विचार-विमर्श बढ़ सकता है।  

Deepshikha जून 6, 2026 0
Rafale fighter jets flying in formation as India advances major defence procurement plan
3.25 लाख करोड़ की मेगा डील की तैयारी, भारत खरीदेगा 114 नए राफेल लड़ाकू विमान

  भारत ने अपनी वायु शक्ति को और मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। रक्षा मंत्रालय ने 114 नए राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद के लिए फ्रांस को औपचारिक अनुरोध पत्र (Letter of Request) भेज दिया है। करीब 3.25 लाख करोड़ रुपये की यह डील भारत के इतिहास के सबसे बड़े सैन्य विमान अधिग्रहण कार्यक्रमों में से एक मानी जा रही है। रक्षा मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक, मंत्रालय के अधिग्रहण विंग ने पिछले सप्ताह फ्रांसीसी सरकार को प्रस्ताव भेजा है। अब अगले दो से तीन महीनों के भीतर फ्रांस की ओर से जवाब मिलने की उम्मीद है। दोनों देशों के बीच बातचीत पूरी होने के बाद अगले एक साल के भीतर समझौते को अंतिम रूप दिया जा सकता है। 'मेक इन इंडिया' को मिलेगा बड़ा बढ़ावा इस परियोजना की सबसे अहम विशेषता यह है कि 114 में से 94 राफेल विमानों का निर्माण भारत में किया जाएगा। फ्रांसीसी कंपनी डसॉल्ट एविएशन एक भारतीय साझेदार के साथ मिलकर इन विमानों का उत्पादन करेगी। अगर यह योजना तय रूप में लागू होती है, तो यह पहली बार होगा जब राफेल लड़ाकू विमानों का निर्माण फ्रांस के बाहर किया जाएगा। इससे भारत के रक्षा विनिर्माण क्षेत्र और 'मेक इन इंडिया' अभियान को बड़ा बल मिलने की उम्मीद है। मोदी की फ्रांस यात्रा में हो सकती है अहम चर्चा सूत्रों के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जून के मध्य तक फ्रांस का दौरा कर सकते हैं। माना जा रहा है कि इस यात्रा के दौरान राफेल सौदा दोनों देशों के बीच प्रमुख चर्चा का विषय रहेगा। भारतीय वायु सेना लंबे समय से लड़ाकू स्क्वाड्रनों की कमी का सामना कर रही है। ऐसे में उन्नत 4.5 पीढ़ी के राफेल विमानों की बड़ी संख्या में खरीद को वायु सेना की परिचालन क्षमता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। 176 तक पहुंच जाएगी राफेल विमानों की संख्या भारतीय वायु सेना और नौसेना पहले ही कुल 62 राफेल विमानों का ऑर्डर दे चुकी हैं। प्रस्तावित 114 नए विमानों के शामिल होने के बाद देश के पास राफेल विमानों की संख्या बढ़कर 176 हो जाएगी। इसके अलावा भारतीय नौसेना ने 31 अतिरिक्त राफेल मरीन विमानों में भी रुचि दिखाई है। यदि यह खरीद भी आगे बढ़ती है, तो भविष्य में भारत के पास राफेल विमानों की कुल संख्या 200 के पार पहुंच सकती है। 2028 से शुरू हो सकती है डिलीवरी रक्षा मंत्रालय के अनुसार, भारतीय नौसेना के लिए राफेल मरीन विमानों की डिलीवरी वर्ष 2028 से शुरू होने की संभावना है। इसके बाद वायु सेना के लिए भी विमानों की आपूर्ति शुरू होगी। अनुमान है कि अंतिम समझौते पर हस्ताक्षर होने के लगभग साढ़े तीन साल बाद भारतीय वायु सेना को नए राफेल विमान मिलने शुरू हो जाएंगे। इस बीच, वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह फ्रांस के दौरे पर हैं। उनके डसॉल्ट एविएशन की उत्पादन इकाइयों का दौरा करने की भी संभावना है, जहां राफेल लड़ाकू विमानों का निर्माण किया जाता है।  

Deepshikha जून 2, 2026 0
Dassault Mirage 2000 fighter jet showcasing strike and combat capabilities during military operations.
परमाणु हमले से लेकर सर्जिकल स्ट्राइक तक, क्यों दुनिया का भरोसेमंद फाइटर जेट बना मिराज-2000

फ्रांसीसी लड़ाकू विमान Dassault Mirage 2000 एक बार फिर वैश्विक सैन्य चर्चाओं के केंद्र में है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि संयुक्त अरब अमीरात ने ईरान के लावन द्वीप स्थित तेल रिफाइनरी पर मिराज-2000-9 फाइटर जेट से हमला किया। हालांकि इस कार्रवाई की आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है, लेकिन सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि मिराज-2000 की सटीक हमला क्षमता और गहरी घुसपैठ की ताकत ने इसे दुनिया के सबसे भरोसेमंद मल्टीरोल फाइटर जेट्स में शामिल कर दिया है। ईरान हमले की रिपोर्ट से बढ़ी चर्चा रिपोर्ट्स के मुताबिक अप्रैल में हुए संघर्ष के दौरान UAE के मिराज-2000-9 विमानों ने ईरान के लावन द्वीप पर स्थित ऊर्जा ठिकानों को निशाना बनाया। इसके कुछ घंटों बाद ईरान समर्थित जवाबी मिसाइल और ड्रोन हमलों की खबरें भी सामने आईं। विशेषज्ञों का मानना है कि मिराज-2000-9, मूल मिराज-2000 का सबसे उन्नत एक्सपोर्ट संस्करण है, जिसे खास तौर पर United Arab Emirates के लिए विकसित किया गया था। इसमें आधुनिक एवियोनिक्स, सटीक टारगेटिंग सिस्टम, लंबी दूरी की स्ट्राइक क्षमता और इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम शामिल हैं। क्यों इतना खतरनाक माना जाता है मिराज-2000 Dassault Aviation द्वारा विकसित यह चौथी पीढ़ी का मल्टीरोल लड़ाकू विमान कई भूमिकाओं में इस्तेमाल किया जा सकता है। यह हवाई वर्चस्व, गहरे हमले, टोही मिशन और परमाणु हथियार ले जाने जैसी क्षमताओं के लिए जाना जाता है। मिराज-2000 की सबसे बड़ी ताकत उसकी सटीकता और विश्वसनीयता मानी जाती है। यही वजह है कि कई देशों की वायुसेनाओं ने दशकों तक इस पर भरोसा बनाए रखा है। भारत की परमाणु रणनीति में अहम भूमिका भारतीय वायुसेना के लिए Indian Air Force का मिराज-2000 बेड़ा लंबे समय तक रणनीतिक ताकत का अहम हिस्सा रहा है। रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक भारत ने अपने परमाणु ट्रायड के वायु-आधारित हिस्से में मिराज-2000 विमानों को विशेष भूमिका दी थी। ग्वालियर के महाराजपुर एयरफोर्स स्टेशन पर तैनात मिराज-2000 विमानों को परमाणु हथियार ले जाने और जवाबी हमले की क्षमता से लैस किया गया था। भारत की “नो फर्स्ट यूज” नीति के तहत यदि देश पर परमाणु हमला होता है, तो यह विमान जवाबी कार्रवाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने में सक्षम माने जाते हैं। कारगिल युद्ध में साबित की ताकत 1999 के Kargil War के दौरान मिराज-2000 ने भारतीय सेना को बड़ी रणनीतिक बढ़त दिलाई थी। पहाड़ी इलाकों में सटीक बमबारी और दुश्मन के ठिकानों को तबाह करने में इसकी भूमिका बेहद अहम रही थी। उसी दौर में भारत ने इन विमानों को परमाणु हमले की क्षमता से लैस करने की प्रक्रिया को भी अंतिम रूप दिया था। अब राफेल संभाल रहा बड़ी जिम्मेदारी हालांकि समय के साथ मिराज-2000 बेड़ा पुराना हो रहा है। अब Dassault Rafale जैसे आधुनिक लड़ाकू विमान भारतीय वायुसेना की नई रणनीतिक ताकत बन रहे हैं। माना जाता है कि भविष्य में वायु-आधारित परमाणु हमले की प्राथमिक जिम्मेदारी धीरे-धीरे राफेल बेड़े को सौंपी जा रही है। यूक्रेन भी हुआ मिराज का फैन रूस-यूक्रेन युद्ध में भी मिराज-2000 की क्षमताओं की खूब चर्चा हो रही है। Ukraine को फ्रांस से मिले मिराज-2000-5 विमानों ने रूसी क्रूज मिसाइलों और ड्रोन हमलों को रोकने में अहम भूमिका निभाई है। सैन्य रिपोर्टों के मुताबिक इन विमानों ने Kh-101 क्रूज मिसाइलों और शाहेद ड्रोन जैसे खतरनाक लक्ष्यों को रोकने में बेहद प्रभावी प्रदर्शन किया है। आधुनिक पश्चिमी हथियारों के साथ इसकी अनुकूलता और तेज इंटरसेप्शन क्षमता इसे आज भी बेहद खतरनाक लड़ाकू विमान बनाती है।  

surbhi मई 12, 2026 0
Prime Minister Narendra Modi praising Indian armed forces during Operation Sindoor anniversary event
ऑपरेशन सिंदूर पर पीएम मोदी का बड़ा बयान, बोले- आतंकवाद के खिलाफ भारत का सख्त जवाब

Operation Sindoor: ऑपरेशन सिंदूर के एक साल पूरे होने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारतीय सेना की बहादुरी और देश की आतंकवाद विरोधी नीति की सराहना की है. पीएम मोदी ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर आतंकवाद के खिलाफ भारत के सख्त रुख, मजबूत इच्छाशक्ति और राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति अटूट प्रतिबद्धता का प्रतीक है. प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत आतंकवाद और उसे समर्थन देने वाले नेटवर्क के खिलाफ अपनी लड़ाई में पूरी तरह अडिग है. उन्होंने कहा कि देश की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और भारत हर आतंकी चुनौती का मुंहतोड़ जवाब देने में सक्षम है. भारतीय सेना के शौर्य को किया सलाम पीएम मोदी ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय सशस्त्र बलों ने अद्भुत साहस, सटीक रणनीति और मजबूत समन्वय का परिचय दिया. उन्होंने पहलगाम आतंकी हमले का जिक्र करते हुए कहा कि निर्दोष नागरिकों की हत्या करने वालों को भारतीय सुरक्षा बलों ने करारा जवाब दिया. प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर लिखा कि पूरा देश भारतीय जवानों की वीरता और समर्पण को सलाम करता है. उन्होंने कहा कि इस अभियान ने दुनिया को भारतीय सेना की तैयारी, पेशेवर क्षमता और तीनों सेनाओं के मजबूत तालमेल की ताकत दिखायी. आत्मनिर्भर भारत की ताकत भी दिखी पीएम मोदी ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत की बढ़ती क्षमता को भी सामने रखा. उन्होंने कहा कि आधुनिक सैन्य तकनीक, स्वदेशी रक्षा उपकरण और बेहतर समन्वय ने इस अभियान को सफल बनाने में अहम भूमिका निभायी. उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय सुरक्षा बलों के बीच बढ़ती एकजुटता और सामरिक क्षमता आज देश की सबसे बड़ी ताकत बन चुकी है. क्यों शुरू किया गया था ऑपरेशन सिंदूर? ऑपरेशन सिंदूर भारतीय सेना, वायुसेना, नौसेना और सीमा सुरक्षा बल (BSF) द्वारा संयुक्त रूप से चलाया गया सैन्य अभियान था. यह ऑपरेशन 7 मई से 10 मई 2025 के बीच पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (POK) में आतंकवादी ठिकानों और सैन्य अड्डों को निशाना बनाकर अंजाम दिया गया था. यह कार्रवाई 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के जवाब में की गयी थी. उस हमले में 26 लोगों की मौत हुई थी, जिनमें ज्यादातर पर्यटक शामिल थे. आतंकवाद के खिलाफ भारत का संदेश प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने दुनिया को साफ संदेश दिया कि भारत अपनी संप्रभुता और नागरिकों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं करेगा. उन्होंने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में भारत पूरी मजबूती और दृढ़ता के साथ आगे बढ़ता रहेगा.  

surbhi मई 7, 2026 0
Fighter jet hard landing blocks Pune Airport runway
पुणे एयरपोर्ट पर बड़ा घटनाक्रम: वायुसेना के फाइटर जेट की हार्ड लैंडिंग से रनवे बंद, उड़ानें प्रभावित

  पुणे: Pune Airport पर शुक्रवार देर रात अचानक अफरा-तफरी का माहौल बन गया, जब भारतीय वायुसेना के एक लड़ाकू विमान की लैंडिंग के दौरान तकनीकी समस्या आ गई। इस “हार्ड लैंडिंग” के चलते रनवे पूरी तरह ब्लॉक हो गया और एयरपोर्ट पर सभी फ्लाइट ऑपरेशन तत्काल प्रभाव से रोक दिए गए। घटना रात करीब 10:25 बजे की बताई जा रही है। वायुसेना के अधिकारियों के मुताबिक, विमान को उतारते समय अचानक खराबी आई, जिससे सामान्य लैंडिंग संभव नहीं हो सकी और विमान ने कड़ी लैंडिंग की। इस वजह से रनवे पर रुकावट पैदा हो गई और उसे अस्थायी रूप से बंद करना पड़ा। राहत की बात यह रही कि इस पूरे घटनाक्रम में विमान में मौजूद सभी एयरक्रू पूरी तरह सुरक्षित हैं। किसी के घायल होने या किसी नागरिक संपत्ति को नुकसान पहुंचने की कोई सूचना नहीं है। एयरपोर्ट और वायुसेना की टीमें तुरंत हरकत में आ गईं और रनवे को साफ करने का काम शुरू कर दिया गया। एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) के अनुसार, स्थिति को सामान्य करने में करीब 4 से 5 घंटे का समय लग सकता है। इस दौरान कई उड़ानों में देरी हुई, जबकि कुछ फ्लाइट्स को डायवर्ट या रद्द भी करना पड़ा, जिससे यात्रियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। उड्डयन राज्य मंत्री Murlidhar Mohol ने भी इस घटना की पुष्टि करते हुए कहा कि सभी एयरलाइंस को समय रहते सूचित कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि वे लगातार एयरपोर्ट डायरेक्टर और वायुसेना अधिकारियों के संपर्क में हैं ताकि जल्द से जल्द सेवाएं बहाल की जा सकें। फिलहाल प्राथमिक जांच में तकनीकी खराबी को इस घटना की वजह माना जा रहा है, लेकिन विस्तृत जांच रिपोर्ट के बाद ही असली कारण सामने आएगा। इस घटना ने एक बार फिर एयरपोर्ट संचालन में सुरक्षा और आपात स्थिति से निपटने की तैयारियों पर ध्यान खींचा है।  

surbhi अप्रैल 18, 2026 0
Indian Air Force Rafale fighter jet showcasing integration of indigenous missiles under Make in India initiative.
114 राफेल डील: स्वदेशी हथियार होंगे अनिवार्य, भारत का बड़ा प्लान

Rafale Deal Update: भारत 114 राफेल लड़ाकू विमानों की मेगा डील में अब एक अहम शर्त जोड़ने जा रहा है-इन विमानों में स्वदेशी मिसाइलों और हथियार प्रणालियों का एकीकरण (integration) अनिवार्य होगा। ICD क्या है और क्यों जरूरी? डील में Interface Control Document (ICD) अनिवार्य किया जाएगा यह एक तकनीकी डॉक्यूमेंट है जो तय करता है: कौन-सा सिस्टम किससे कैसे जुड़ेगा मिसाइल, रडार और अन्य सिस्टम कैसे काम करेंगे इससे भारतीय हथियारों को राफेल में जोड़ना आसान होगा मेगा डील की बड़ी बातें कुल लागत: ₹3.25 लाख करोड़ (लगभग) 114 राफेल जेट खरीदे जाएंगे 18 जेट सीधे फ्रांस से तैयार हालत में 96 जेट भारत में ही बनाए जाएंगे 25% से ज्यादा स्वदेशी सामग्री का इस्तेमाल ‘Buy & Make’ मॉडल यह डील Buy and Make कैटेगरी में होगी मतलब: कुछ जेट बाहर से आएंगे बाकी भारत में बनेंगे (Make in India को बढ़ावा) सोर्स कोड पर क्या विवाद? रिपोर्ट्स: फ्रांस की कंपनी Dassault ने सोर्स कोड देने से मना किया सरकार का जवाब: कोई भी देश अपना मालिकाना सॉफ्टवेयर कोड शेयर नहीं करता यह सामान्य प्रैक्टिस है सोर्स कोड कंट्रोल करता है: इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर हथियार लॉन्च सिस्टम रडार भारत की रणनीति क्या है? विदेशी निर्भरता कम करने पर जोर फोकस: तेजस Mk1A AMCA (5th Gen Fighter) लंबी दूरी की स्वदेशी मिसाइलें इसका मतलब आसान भाषा में भारत चाहता है कि राफेल सिर्फ खरीदा न जाए, बल्कि उसमें भारतीय हथियार भी आसानी से लगाए जा सकें ताकि भविष्य में अपग्रेड और ऑपरेशन पर पूरा कंट्रोल रहे

surbhi अप्रैल 10, 2026 0
Dassault Rafale fighter jet with India France flags highlighting stalled defense deal over technology and Russia concerns
राफेल डील पर ब्रेक क्यों? DAC की मंजूरी के बाद भी फाइल अटकी, रूस बना सबसे बड़ा फैक्टर

भारत की महत्वाकांक्षी राफेल फाइटर जेट डील एक बार फिर चर्चा में है, लेकिन इस बार वजह प्रगति नहीं, बल्कि ठहराव है। 12 फरवरी 2026 को रक्षा मंत्रालय की Defence Acquisition Council (DAC) से मंजूरी मिलने के बाद उम्मीद थी कि प्रक्रिया तेज़ी से आगे बढ़ेगी, खासकर तब जब 17 फरवरी को Emmanuel Macron भारत दौरे पर आए। माना जा रहा था कि इस दौरान बड़ा ऐलान हो सकता है, लेकिन ऐसा नहीं हुआ-और अब करीब दो महीने बाद भी फाइल आगे नहीं बढ़ी है। इस देरी की सबसे बड़ी वजह तकनीकी और रणनीतिक मतभेद बताए जा रहे हैं, जिसमें रूस की भूमिका अहम बनकर उभरी है। भारत के सामने चुनौती स्पष्ट है-वायुसेना के पास मौजूदा समय में केवल 29 स्क्वाड्रन हैं, जबकि न्यूनतम आवश्यकता 42 की है। इस कमी को पूरा करने के लिए भारत 114 नए Dassault Rafale लड़ाकू विमान खरीदने की योजना पर काम कर रहा है। इससे पहले ही भारतीय वायुसेना के पास राफेल के दो स्क्वाड्रन मौजूद हैं और नौसेना के लिए 26 मरीन राफेल की डील भी हो चुकी है। क्या है डील का पूरा ढांचा? प्रस्तावित डील के तहत 114 विमानों में से 18 सीधे फ्रांस से तैयार हालत (फ्लाइ-अवे) में मिलेंगे, जबकि 96 विमानों का निर्माण भारत में होगा। इसमें लोकल मैन्युफैक्चरिंग और “मेक इन इंडिया” को बढ़ावा देने के लिए 50–60 प्रतिशत तक स्वदेशी कंपोनेंट शामिल करने की योजना है। इस डील की अनुमानित लागत करीब 3.25 लाख करोड़ रुपये बताई जा रही है, जो भारत के सैन्य इतिहास की सबसे बड़ी डील में से एक हो सकती है। कहां फंसा है पेंच? असल विवाद “सोर्स कोड” और हथियार एकीकरण (integration) को लेकर है। भारत चाहता है कि वह राफेल में अपनी स्वदेशी मिसाइलें और हथियार बिना किसी अतिरिक्त अनुमति के इस्तेमाल कर सके। इसमें सबसे अहम है BrahMos missile, जो भारत और Russia की संयुक्त परियोजना है। यहीं से फ्रांस की चिंता शुरू होती है। राफेल के सॉफ्टवेयर और सिस्टम में बदलाव के लिए संवेदनशील सोर्स कोड साझा करना पड़ सकता है। फ्रांस को आशंका है कि इस प्रक्रिया में यह तकनीक अप्रत्यक्ष रूप से रूस तक पहुंच सकती है, जो उसके लिए रणनीतिक जोखिम है। खासकर तब, जब रूस और पश्चिमी देशों के बीच Russia-Ukraine War के कारण संबंध पहले से तनावपूर्ण हैं और NATO के सदस्य देश फ्रांस रूस को प्रतिद्वंद्वी मानते हैं। भारत की स्थिति क्या है? भारत का तर्क साफ है-वह अपने हथियारों और मिसाइल सिस्टम को किसी भी प्लेटफॉर्म पर इस्तेमाल करने की स्वतंत्रता चाहता है, ताकि लागत कम रहे और रणनीतिक स्वायत्तता बनी रहे। भारत का यह भी रिकॉर्ड रहा है कि उसने किसी भी रक्षा सौदे में तकनीक लीक नहीं की है। क्या है आगे का रास्ता? यह डील भारत और फ्रांस दोनों के लिए बेहद अहम है। जहां भारत को तत्काल फाइटर जेट्स की जरूरत है, वहीं फ्रांस के लिए यह एक बड़ा रक्षा निर्यात सौदा है। विशेषज्ञ मानते हैं कि समाधान “विश्वास और संतुलन” के बीच ही निकलेगा-संभवतः फ्रांस सीमित एक्सेस या नियंत्रित तकनीकी साझा करने का विकल्प दे सकता है, जबकि भारत तकनीक की सुरक्षा को लेकर आश्वासन देगा। फिलहाल, राफेल डील सिर्फ एक रक्षा सौदा नहीं, बल्कि भारत की रणनीतिक स्वायत्तता और वैश्विक साझेदारियों के बीच संतुलन की परीक्षा बन चुकी है।  

surbhi अप्रैल 8, 2026 0
Indian Air Force Surya Kiran jets performing aerobatics with colorful smoke trails at Sujanpur air show
सुजानपुर एयर शो: आसमान में गरजे 9 जेट, सूर्यकिरण टीम के करतब देख झूमे दर्शक

हमीरपुर (हिमाचल प्रदेश): सुजानपुर में आयोजित एयर शो के दौरान भारतीय वायुसेना की सूर्यकिरण एरोबेटिक टीम ने 9 जेट विमानों के साथ आसमान में शानदार प्रदर्शन कर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। सैनिक स्कूल सुजानपुर के मैदान में हुए इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य युवाओं को वायुसेना में शामिल होने के लिए प्रेरित करना रहा। आसमान में दिखे हैरतअंगेज करतब एयरफोर्स स्टेशन चंडीगढ़ और आदमपुर से उड़ान भरकर पहुंचे जेट विमानों ने: एक साथ कई एरोबेटिक फॉर्मेशन बनाए रंग-बिरंगे धुएं से आसमान में खूबसूरत डिजाइन उकेरे दर्शकों ने तालियों और सीटियों से पायलट्स का स्वागत किया पूर्व छात्रों ने भरी उड़ान इस एयर शो की खास बात यह रही कि: सैनिक स्कूल सुजानपुर के दो पूर्व छात्र भी टीम का हिस्सा रहे एयर कमोडोर बृजेश पाल और स्क्वाड्रन लीडर हिमकुश चंदेल ने उड़ान भरी अपने पूर्व छात्रों को उड़ान भरते देख स्कूल परिसर तालियों और उत्साह से गूंज उठा। NCC कैडेट्स की मौजूदगी हमीरपुर जिले के 44 स्कूलों और 10 कॉलेजों से करीब 500-600 NCC कैडेट्स ने कार्यक्रम में हिस्सा लिया अधिकारियों ने बताया कि यह शो छात्रों को वायुसेना की कार्यशैली, अनुशासन और कौशल को करीब से समझने का अवसर देता है। दो दिवसीय कार्यक्रम यह आयोजन दो दिनों तक चलेगा। हालांकि: पहले दिन मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू दूसरे दिन सांसद अनुराग ठाकुर किसी कारणवश दोनों का दौरा रद्द हो गया। विधायक ने जताया गर्व विधायक रणजीत सिंह राणा ने कहा: ऐसे आयोजन सैनिकों और युवाओं के लिए गर्व का विषय हैं सैनिक स्कूल के छात्र देश के उच्च पदों पर सेवाएं दे रहे हैं

surbhi मार्च 25, 2026 0
Concept model of India’s futuristic sixth generation stealth fighter jet technology under development
भारत की बड़ी रक्षा उपलब्धि: 6th जेनरेशन फाइटर जेट की अहम तकनीक विकसित

  भारत ने रक्षा तकनीक के क्षेत्र में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। भारतीय वैज्ञानिकों ने छठी पीढ़ी (6th Generation) के फाइटर जेट की डिजाइन से जुड़ी एक अहम तकनीक विकसित कर ली है। यह तकनीक भविष्य में भारत के पांचवीं और छठी पीढ़ी के लड़ाकू विमानों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। दुनिया में अभी तक किसी भी देश के पास पूरी तरह से विकसित छठी पीढ़ी का फाइटर जेट नहीं है। अमेरिका, चीन, जापान और यूरोप के कुछ देश इस दिशा में काम कर रहे हैं, लेकिन फिलहाल इस दौड़ में सबसे गंभीर रूप से अमेरिका और चीन ही आगे माने जाते हैं। ऐसे समय में भारत की यह तकनीकी सफलता रक्षा क्षेत्र में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।   भारत की मौजूदा स्थिति भारत इस समय 4.5 जेनरेशन और 5वीं पीढ़ी के फाइटर जेट विकसित करने की दिशा में काम कर रहा है। 4.5 जेनरेशन तकनीक के तहत तेजस मार्क-2 के प्रोटोटाइप पर काम जारी है। इसके अलावा भारत का स्वदेशी पांचवीं पीढ़ी का फाइटर जेट प्रोजेक्ट AMCA (एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट) भी विकास के चरण में है। इसी बीच भारत ने 4.5+ जेनरेशन के राफेल लड़ाकू विमानों को भी अपने बेड़े में शामिल करने की योजना बनाई है और भविष्य में भारतीय वायुसेना में 114 और राफेल विमानों के शामिल होने की संभावना जताई जा रही है।   छठी पीढ़ी के फाइटर जेट की खासियत छठी पीढ़ी के फाइटर जेट्स भविष्य की युद्ध तकनीक का अहम हिस्सा माने जा रहे हैं। इन विमानों में अत्याधुनिक स्टेल्थ तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और ड्रोन के साथ समन्वित ऑपरेशन जैसी क्षमताएं होंगी। ये फाइटर जेट केवल अकेले युद्ध नहीं करेंगे, बल्कि ड्रोन और अन्य लड़ाकू विमानों के साथ एक टीम की तरह काम करेंगे। इन्हें भविष्य के “फ्लाइंग कमांड सेंटर” के रूप में भी देखा जा रहा है।   भारतीय वैज्ञानिकों की तकनीकी उपलब्धि भारत में फाइटर जेट्स के विकास का काम एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी (ADA) कर रही है। इस संस्था के वैज्ञानिकों ने स्टेल्थ फाइटर जेट्स के लिए एयर इनटेक सिस्टम के एयरोडायनामिक डिजाइन में एक महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है। फरवरी 2026 में ‘जर्नल ऑफ एयरोस्पेस साइंसेज एंड टेक्नोलॉजीज’ में प्रकाशित इस शोध में बताया गया है कि कैसे हाई इंजन परफॉर्मेंस को बनाए रखते हुए विमान की स्टेल्थ क्षमता को सुरक्षित रखा जा सकता है। यह तकनीक भारत के AMCA प्रोजेक्ट और भविष्य के छठी पीढ़ी के टेललेस एयरक्राफ्ट के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।   क्या है S-Duct तकनीक रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार स्टेल्थ फाइटर जेट्स की सबसे बड़ी चुनौती इंजन के कंप्रेसर ब्लेड्स को दुश्मन के रडार से छिपाना होती है। ये ब्लेड रडार तरंगों को तेज़ी से परावर्तित करते हैं, जिससे विमान की पहचान हो सकती है। इस समस्या के समाधान के लिए डिजाइनर ‘S-Duct’ या सर्पाकार एयर इनटेक का उपयोग करते हैं। यह डिजाइन हवा को घुमावदार रास्ते से इंजन तक पहुंचाता है, जिससे इंजन सीधे रडार की नजर में नहीं आता। हालांकि इस तरह के घुमावदार रास्ते से गुजरते समय हवा का प्रवाह अस्थिर हो सकता है, जिससे इंजन की क्षमता प्रभावित होने का खतरा रहता है।   भारतीय इंजीनियरों की सफलता ADA के इंजीनियर आर. अबिलाशनिनी और विल्लिआम्माई सोमासुंदरम ने विंड टनल परीक्षण और कंप्यूटेशनल फ्लूइड डायनामिक्स तकनीक का उपयोग करके एक नई एयर इनटेक ज्योमेट्री विकसित की है। इस तकनीक के परिणाम बेहद प्रभावशाली बताए जा रहे हैं। इससे इंजन की परफॉर्मेंस बनाए रखते हुए स्टेल्थ क्षमता को सुरक्षित रखने का रास्ता साफ हुआ है।   भविष्य में भारत को मिल सकता है बड़ा फायदा रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह तकनीकी उपलब्धि भारत के AMCA प्रोजेक्ट के लिए एक निर्णायक कदम साबित हो सकती है। इसके साथ ही भविष्य में छठी पीढ़ी के फाइटर जेट विकसित करने की दिशा में भी भारत को मजबूत आधार मिलेगा। यदि इस तकनीक को सफलतापूर्वक लागू किया गया, तो भारत आने वाले वर्षों में उन्नत लड़ाकू विमान तकनीक के क्षेत्र में एक बड़ा वैश्विक खिलाड़ी बनकर उभर सकता है।  

surbhi मार्च 9, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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Military activity near the Strait of Hormuz amid escalating US-Iran tensions and reported retaliatory strikes.
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अपाचे हेलीकॉप्टर घटना के बाद अमेरिका का ईरान पर हमला, तेहरान ने दी कड़ी चेतावनी

Deepshikha जून 10, 2026 0