Indian Navy

Defence Minister Rajnath Singh chairs a Defence Acquisition Council meeting approving major defence procurement proposals to strengthen India's armed forces.
₹52 हजार करोड़ के हथियार खरीद को मंजूरी, सेना को मिलेंगे ड्रोन रोधी सिस्टम, मिसाइलें और कामिकाजे ड्रोन

नई दिल्ली: भारतीय सशस्त्र बलों के आधुनिकीकरण की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई रक्षा खरीद परिषद (Defence Acquisition Council-DAC) की बैठक में करीब ₹52 हजार करोड़ के अत्याधुनिक हथियारों और रक्षा प्रणालियों की खरीद को मंजूरी दे दी गई। इन प्रस्तावों को एक्सेप्टेंस ऑफ नेसेसिटी (AoN) प्रदान किया गया है, जिसके बाद खरीद प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इन प्रणालियों के शामिल होने से भारतीय थल सेना, नौसेना और वायुसेना की निगरानी, मारक क्षमता और रक्षा तंत्र पहले से अधिक मजबूत होगा। इन हथियारों की खरीद को मिली मंजूरी DAC ने कई अहम रक्षा प्रणालियों की खरीद को मंजूरी दी है, जिनमें शामिल हैं— आकाश तरंग (AKASH TARANG) एंटी-यूएवी इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम मैन-पोर्टेबल एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल (MPATGM) मीडियम रेंज सरफेस टू एयर मिसाइल (MRSAM) वेरी शॉर्ट रेंज एयर डिफेंस सिस्टम (V-SHORADS) टैंकों के लिए एक्टिव प्रोटेक्शन सिस्टम जेट आधारित कामिकाजे ड्रोन सिस्टम क्या होता है AoN? रक्षा खरीद प्रक्रिया में Acceptance of Necessity (AoN) पहला आधिकारिक चरण होता है। इसका अर्थ है कि सरकार ने संबंधित सैन्य उपकरण की आवश्यकता को मंजूरी दे दी है। इसके बाद टेंडर, तकनीकी मूल्यांकन और खरीद अनुबंध जैसी प्रक्रियाएं शुरू होती हैं। भारतीय सेना को मिलेगी नई तकनीकी ताकत रक्षा मंत्रालय के अनुसार, आकाश तरंग प्रणाली दुश्मन के ड्रोन और मानव रहित हवाई वाहनों (UAV) का पता लगाकर उन्हें निष्क्रिय करने में सक्षम होगी। वहीं MPATGM पैदल सैनिकों को दुश्मन के टैंकों और बख्तरबंद वाहनों को नष्ट करने की क्षमता देगा। MRSAM मध्यम दूरी से आने वाले लड़ाकू विमान, हेलीकॉप्टर और मिसाइल जैसे हवाई खतरों से सुरक्षा प्रदान करेगा। V-SHORADS कम दूरी की हवाई सुरक्षा को मजबूत करेगा, जबकि टैंकों के लिए स्वीकृत एक्टिव प्रोटेक्शन सिस्टम एंटी-टैंक मिसाइलों से बेहतर सुरक्षा देगा। इसके अलावा जेट आधारित कामिकाजे ड्रोन कम लागत में अधिक प्रभावी हमले और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध क्षमता बढ़ाने में मदद करेंगे। नौसेना के लिए भी कई आधुनिक प्रणालियां मंजूर भारतीय नौसेना के लिए भी कई नई रक्षा प्रणालियों की खरीद को मंजूरी मिली है। इनमें शामिल हैं— मल्टी इन्फ्लुएंस ग्राउंड माइन (MIGM) नेवल शिपबोर्न अनमैन्ड एरियल सिस्टम (NSUAS) इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन सिस्टम के लिए लैंड बेस्ड टेस्टिंग फैसिलिटी (LBTF) रक्षा मंत्रालय के अनुसार, ये प्रणालियां समुद्री निगरानी, युद्ध क्षमता और नौसैनिक प्लेटफॉर्म के आधुनिकीकरण को नई मजबूती देंगी। वायुसेना को मिलेगा हाई-एल्टीट्यूड सर्विलांस सिस्टम भारतीय वायुसेना के लिए फिक्स्ड विंग हाई एल्टीट्यूड प्सूडो सैटेलाइट (FW-HAPS) की खरीद को भी मंजूरी दी गई है। यह प्रणाली इंटेलिजेंस, सर्विलांस, रिकॉनिसेंस (ISR), दूरसंचार और रिमोट सेंसिंग जैसे मिशनों में वायुसेना की क्षमता बढ़ाएगी। नई सैन्य नेतृत्व टीम की पहली DAC बैठक यह रक्षा खरीद परिषद की पहली बैठक थी, जिसमें नए सैन्य नेतृत्व ने भाग लिया। बैठक में चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल एन.एस. राजा सुब्रमणी, नौसेना प्रमुख एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन और हाल ही में पदभार संभालने वाले थल सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ मौजूद रहे। रक्षा बजट में पहले ही हुआ है बड़ा इजाफा केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में रक्षा क्षेत्र के लिए ₹7.85 लाख करोड़ का प्रावधान किया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 15 प्रतिशत से अधिक है। इसमें ₹2.19 लाख करोड़ पूंजीगत व्यय के लिए निर्धारित किए गए हैं, जिनका उपयोग लड़ाकू विमान, हेलीकॉप्टर, युद्धपोत, पनडुब्बियां, मिसाइल, तोप, स्मार्ट हथियार और विभिन्न मानव रहित प्रणालियों की खरीद पर किया जाएगा.  

Deepshikha जुलाई 4, 2026 0
INS Trikand
आईएनएस त्रिकंद ने अदन की खाड़ी में समुद्री डकैती की कोशिश नाकाम की, व्यापारी जहाज को सुरक्षित बचाया

नई दिल्ली, एजेंसियां। भारतीय नौसेना के युद्धपोत आईएनएस त्रिकंद ने अदन की खाड़ी में एक व्यापारी जहाज पर समुद्री डकैती (पाइरेसी) की कोशिश को विफल कर दिया। नौसेना की त्वरित कार्रवाई के चलते जहाज और उस पर सवार चालक दल को सुरक्षित बचा लिया गया। घटना के बाद क्षेत्र में सुरक्षा गश्त और निगरानी बढ़ा दी गई है।   संकट संदेश मिलते ही शुरू किया रेस्क्यू ऑपरेशन   भारतीय नौसेना के अनुसार, व्यापारी जहाज से संकट का संदेश मिलने के तुरंत बाद आईएनएस त्रिकंद को मौके पर भेजा गया। युद्धपोत के पहुंचते ही संदिग्ध नौकाएं क्षेत्र से भाग निकलीं और समुद्री डकैती की कोशिश विफल हो गई।   चालक दल पूरी तरह सुरक्षित   नौसेना ने बताया कि समय पर की गई कार्रवाई से जहाज पर मौजूद सभी चालक दल के सदस्य सुरक्षित हैं। किसी भी व्यक्ति के घायल होने या जहाज को गंभीर नुकसान पहुंचने की सूचना नहीं है।   समुद्री सुरक्षा के लिए भारत की सक्रिय निगरानी   भारतीय नौसेना लगातार अदन की खाड़ी, अरब सागर और हिंद महासागर क्षेत्र में व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा के लिए निगरानी अभियान चला रही है। हाल के महीनों में कई व्यापारी जहाजों को सुरक्षित एस्कॉर्ट भी प्रदान किया गया है।   व्यापारिक मार्गों की सुरक्षा पर विशेष जोर   नौसेना ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा भारत की प्राथमिकता है। समुद्री डकैती और अन्य सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए भारतीय नौसेना मित्र देशों की नौसेनाओं के साथ समन्वय बनाकर लगातार अभियान चला रही है।

abhishek singh जुलाई 3, 2026 0
Prime Minister Narendra Modi departs for a three-day official visit to Seychelles to attend the island nation's 50th National Day celebrations and hold high-level bilateral meetings.
प्रधानमंत्री मोदी सेशेल्स रवाना, 11 साल बाद दूसरा दौरा; राष्ट्रीय दिवस समारोह में होंगे मुख्य अतिथि

  नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार सुबह तीन दिवसीय आधिकारिक दौरे पर सेशेल्स के लिए रवाना हो गए। 27 से 29 जून तक चलने वाली इस यात्रा के दौरान वह सेशेल्स की आजादी के 50 वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित राष्ट्रीय दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। प्रधानमंत्री की यह पिछले 11 वर्षों में सेशेल्स की दूसरी यात्रा है। इससे पहले उन्होंने वर्ष 2015 में इस हिंद महासागर द्वीपीय देश का दौरा किया था। सेशेल्स के राष्ट्रपति डॉ. पैट्रिक हर्मिनी के निमंत्रण पर हो रही इस यात्रा को हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की रणनीतिक साझेदारी और समुद्री सहयोग को नई मजबूती देने की दिशा में अहम माना जा रहा है। राष्ट्रीय दिवस परेड में भारतीय सशस्त्र बलों की एक टुकड़ी के साथ भारतीय नौसेना के दो युद्धपोत भी हिस्सा लेंगे। राष्ट्रपति से द्विपक्षीय और क्षेत्रीय मुद्दों पर होगी चर्चा प्रधानमंत्री मोदी अपनी यात्रा के दौरान राष्ट्रपति डॉ. पैट्रिक हर्मिनी के साथ द्विपक्षीय संबंधों, हिंद महासागर क्षेत्र की सुरक्षा, समुद्री सहयोग और विभिन्न क्षेत्रीय एवं वैश्विक मुद्दों पर विस्तृत चर्चा करेंगे। इसके अलावा वे सेशेल्स की राष्ट्रीय विधानसभा को भी संबोधित करेंगे। यह पहली बार होगा जब कोई भारतीय प्रधानमंत्री सेशेल्स की संसद को संबोधित करेगा। प्रधानमंत्री वहां रहने वाले भारतीय समुदाय के सदस्यों से भी मुलाकात करेंगे। सेशेल्स की लगभग 1.35 लाख की आबादी में करीब 12 हजार लोग भारतीय मूल के हैं, जो कुल आबादी का लगभग 8 से 9 प्रतिशत हिस्सा हैं। भारत-सेशेल्स संबंधों के 50 वर्ष पूरे रवाना होने से पहले प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि इस वर्ष भारत और सेशेल्स के बीच राजनयिक संबंधों के 50 वर्ष पूरे हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के संबंध आपसी विश्वास, लोकतांत्रिक मूल्यों, विविधता के सम्मान और लोगों के गहरे जुड़ाव पर आधारित हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि फरवरी 2026 में राष्ट्रपति हर्मिनी की भारत यात्रा के बाद यह दौरा द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊंचाई देने का अवसर होगा। दोनों देश हिंद महासागर क्षेत्र में सुरक्षा, समृद्धि और सतत विकास के साझा लक्ष्य को आगे बढ़ाने के लिए मिलकर काम करेंगे। उन्होंने कहा कि सेशेल्स की राष्ट्रीय विधानसभा को संबोधित करना उनके लिए सम्मान की बात होगी और यह दोनों देशों के मजबूत लोकतांत्रिक मूल्यों तथा संसदीय परंपराओं का प्रतीक है। हिंद महासागर में रणनीतिक साझेदारी पर रहेगा फोकस भारत के लिए सेशेल्स हिंद महासागर क्षेत्र का एक महत्वपूर्ण समुद्री साझेदार है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि सेशेल्स भारत के 'विजन महासागर (MAHASAGAR)' का प्रमुख सहयोगी है और दोनों देश समुद्री सुरक्षा, ब्लू इकोनॉमी, आपदा प्रबंधन तथा क्षमता निर्माण जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस यात्रा के दौरान समुद्री निगरानी, रक्षा सहयोग, व्यापार, निवेश और विकास परियोजनाओं पर भी महत्वपूर्ण चर्चा हो सकती है। 2015 के दौरे में मजबूत हुए थे रक्षा संबंध प्रधानमंत्री मोदी ने इससे पहले मार्च 2015 में सेशेल्स का दौरा किया था। उस समय भारत ने सेशेल्स को दूसरा डोर्नियर समुद्री निगरानी विमान देने की घोषणा की थी, जिससे उसकी तटीय सुरक्षा और समुद्री निगरानी क्षमता मजबूत हुई। इसी यात्रा के दौरान भारत की सहायता से विकसित तटीय निगरानी रडार नेटवर्क का भी उद्घाटन किया गया था। यह परियोजना हिंद महासागर में समुद्री सुरक्षा और जहाजों की निगरानी बढ़ाने की भारत की व्यापक रणनीति का हिस्सा मानी जाती है। इंदिरा गांधी के बाद मोदी का दूसरा ऐतिहासिक दौरा सेशेल्स की यात्रा करने वाली पहली भारतीय प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी थीं, जिन्होंने 1976 में देश की स्वतंत्रता के बाद वहां का दौरा किया था और 1981 में दोबारा सेशेल्स गई थीं। इसके बाद करीब 34 वर्षों तक किसी भारतीय प्रधानमंत्री ने इस द्वीपीय राष्ट्र की यात्रा नहीं की। वर्ष 2015 में नरेंद्र मोदी ने इस सिलसिले को आगे बढ़ाया और अब 2026 का यह दौरा भारत-सेशेल्स संबंधों को नई दिशा देने की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। भारत की 'पड़ोसी पहले' नीति और हिंद महासागर क्षेत्र में बढ़ते सामरिक सहयोग के संदर्भ में प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा दोनों देशों के बीच रक्षा, समुद्री सुरक्षा, आर्थिक साझेदारी और लोगों के बीच संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है।  

Deepshikha जून 27, 2026 0
Indian Navy SSC Officer
भारतीय नौसेना में SSC अधिकारी के 275 पदों पर भर्ती, 27 जुलाई तक करें आवेदन

नई दिल्ली, एजेंसियां। भारतीय नौसेना ने जून 2027 (AT-27) बैच के लिए शॉर्ट सर्विस कमीशन (SSC) अधिकारी भर्ती का नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। इस भर्ती अभियान के तहत कुल 275 पदों पर योग्य अविवाहित पुरुष एवं महिला उम्मीदवारों का चयन किया जाएगा। आवेदन प्रक्रिया 25 जून 2026 से शुरू हो चुकी है और अंतिम तिथि 27 जुलाई 2026 है।   किन पदों पर कितनी रिक्तियां इस भर्ती में कार्यकारी शाखा GS(X)/हाइड्रोग्राफी में 90, नौसेना निर्माता में 32, शिक्षा शाखा में 26, पायलट में 25, इलेक्ट्रिकल शाखा में 24, ऑब्जर्वर में 18, NAIC में 14, ATC में 15, लॉजिस्टिक्स में 10, सबमरीन टेक्नोलॉजी (इलेक्ट्रिकल) में 8, इंजीनियरिंग शाखा में 9 और सबमरीन टेक्नोलॉजी (इंजीनियरिंग) में 5 पद शामिल हैं।   शैक्षणिक योग्यता अधिकांश पदों के लिए किसी भी विषय में BE/BTech में न्यूनतम 60% अंक अनिवार्य है। लॉजिस्टिक्स के लिए MBA, MCA और PG डिप्लोमा धारक भी पात्र हैं। शिक्षा शाखा के लिए गणित, भौतिकी जैसे विषयों में M.Sc/MA मान्य है।   चयन प्रक्रिया अकादमिक अंकों के आधार पर शॉर्टलिस्टिंग होगी, इसके बाद SSB इंटरव्यू में मनोवैज्ञानिक परीक्षण, ग्रुप टास्क और व्यक्तिगत साक्षात्कार होगा। SSB में सफल उम्मीदवारों का मेडिकल परीक्षण किया जाएगा। चयनित अभ्यर्थियों को भारतीय नौसेना अकादमी, एझिमाला में प्रशिक्षण दिया जाएगा।   ऐसे करें आवेदन भारतीय नौसेना की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर नया पंजीकरण करें। "SSC Officer June 2027 (AT-27 Course)" लिंक पर क्लिक कर फॉर्म भरें, फोटो, हस्ताक्षर और दस्तावेज अपलोड करें और सबमिट करें।

abhishek singh जून 26, 2026 0
Prime Minister Narendra Modi to visit Seychelles for a three-day state visit and attend the National Day Golden Jubilee celebrations.
PM Modi Seychelles Visit: 27 जून से सेशेल्स दौरे पर रहेंगे प्रधानमंत्री मोदी, हिंद महासागर में रणनीतिक साझेदारी होगी मजबूत

  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 27 से 29 जून तक हिंद महासागर के द्वीपीय देश सेशेल्स की तीन दिवसीय राजकीय यात्रा पर जाएंगे। इस दौरान वह सेशेल्स के राष्ट्रीय दिवस के स्वर्ण जयंती समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच रक्षा, समुद्री सुरक्षा और विकास सहयोग सहित कई अहम मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। राष्ट्रपति पैट्रिक हर्मिनी के निमंत्रण पर होगा दौरा विदेश मंत्रालय के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी यह यात्रा सेशेल्स के राष्ट्रपति पैट्रिक हर्मिनी के निमंत्रण पर करेंगे। अपने प्रवास के दौरान प्रधानमंत्री राष्ट्रपति हर्मिनी के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे, जिसमें दोनों देशों के संबंधों की समीक्षा की जाएगी और क्षेत्रीय व वैश्विक मुद्दों पर विचार-विमर्श होगा। राष्ट्रीय दिवस के स्वर्ण जयंती समारोह में होंगे शामिल प्रधानमंत्री मोदी सेशेल्स के राष्ट्रीय दिवस के 50वें वर्ष के समारोह में विशेष अतिथि के रूप में हिस्सा लेंगे। इस अवसर पर भारतीय सशस्त्र बलों का एक दल और भारतीय नौसेना के दो युद्धपोत भी समारोह में भाग लेंगे, जो दोनों देशों के रक्षा सहयोग और मजबूत रणनीतिक संबंधों का प्रतीक माना जा रहा है। संसद को करेंगे संबोधित, भारतीय समुदाय से भी मिलेंगे यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी सेशेल्स की संसद को संबोधित करेंगे। इसके अलावा वह वहां रह रहे भारतीय समुदाय के सदस्यों से भी मुलाकात करेंगे और दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक एवं जन-से-जन संबंधों को मजबूत करने पर जोर देंगे। भारत-सेशेल्स संबंधों को मिलेगी नई मजबूती विदेश मंत्रालय का कहना है कि यह दौरा भारत और सेशेल्स के बीच दशकों पुराने मैत्रीपूर्ण संबंधों को नई दिशा देगा। दोनों देशों के बीच समुद्री सुरक्षा, क्षमता निर्माण, विकास परियोजनाओं और आर्थिक सहयोग को और मजबूत करने पर विशेष ध्यान रहेगा। हिंद महासागर में भारत का अहम साझेदार है सेशेल्स सेशेल्स हिंद महासागर क्षेत्र में भारत का एक महत्वपूर्ण समुद्री साझेदार है। भारत की 'सागर' (Security and Growth for All in the Region) नीति, समुद्री सुरक्षा रणनीति और ग्लोबल साउथ देशों के साथ सहयोग बढ़ाने में सेशेल्स की अहम भूमिका मानी जाती है। यही वजह है कि इस यात्रा को क्षेत्रीय रणनीति और हिंद महासागर में भारत की बढ़ती भूमिका के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। 2015 के बाद प्रधानमंत्री मोदी की पहली सेशेल्स यात्रा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इससे पहले वर्ष 2015 में सेशेल्स की यात्रा पर गए थे। लगभग एक दशक बाद हो रही यह यात्रा दोनों देशों के रणनीतिक, आर्थिक और समुद्री सहयोग को नई गति देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।  

Deepshikha जून 26, 2026 0
Prime Minister Narendra Modi performs yoga at Kolkata’s Red Road and commissions three indigenous naval warships at Syama Prasad Mookerjee Port.
राष्ट्रीय शक्ति के आधार हैं योग और समुद्री सामर्थ्य, कोलकाता में बोले पीएम मोदी

  कोलकाता: प्रधानमंत्री Narendra Modi ने रविवार को कोलकाता दौरे के दौरान योग और समुद्री शक्ति को विकसित भारत की दो महत्वपूर्ण आधारशिलाएं बताते हुए कहा कि व्यक्तिगत अनुशासन और राष्ट्रीय क्षमता मिलकर एक मजबूत, आत्मविश्वासी और विकसित भारत का निर्माण करती हैं। उन्होंने एक ओर 12वें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस समारोह में योग को वैश्विक शांति का माध्यम बताया, तो दूसरी ओर भारतीय नौसेना को तीन स्वदेशी युद्धपोत सौंपकर आत्मनिर्भर भारत और समुद्री सुरक्षा का संदेश दिया। रेड रोड पर योग दिवस समारोह को किया संबोधित Red Road पर आयोजित 12वें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस समारोह को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि योग केवल शारीरिक स्वास्थ्य का साधन नहीं, बल्कि विश्व शांति और मानवता को जोड़ने का माध्यम है। उन्होंने कहा कि योग व्यक्ति को स्वयं, समाज और दुनिया से जोड़ता है तथा संतुलित और स्वस्थ जीवन जीने की प्रेरणा देता है। "योग केवल व्यक्तिगत स्वास्थ्य का मार्ग नहीं है, बल्कि वैश्विक शांति और सद्भाव का भी आधार है।" ‘योग फॉर हेल्दी एजिंग’ थीम पर दिया विशेष जोर इस वर्ष अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की थीम 'योग फॉर हेल्दी एजिंग' रखी गई है। प्रधानमंत्री ने कहा कि नियमित योगाभ्यास से व्यक्ति उम्र बढ़ने के बावजूद शारीरिक और मानसिक रूप से सक्रिय रह सकता है। उन्होंने कहा कि योग के माध्यम से— 40 वर्ष की उम्र में 20 वर्ष जैसा लचीलापन, 50 वर्ष की उम्र में 30 वर्ष जैसी ऊर्जा, और 70 वर्ष की उम्र में भी 50 वर्ष जैसी सक्रियता एवं स्वास्थ्य बनाए रखा जा सकता है। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह संदेश केवल बुजुर्गों के लिए नहीं, बल्कि हर आयु वर्ग के लोगों के लिए महत्वपूर्ण है। योग केवल व्यायाम नहीं, जीवन जीने की कला प्रधानमंत्री ने Bhagavad Gita का उल्लेख करते हुए कहा कि खानपान, कार्य और नींद में संतुलन ही दुखों से मुक्ति की कुंजी है। योग व्यक्ति को संतुलित जीवन जीना सिखाता है और मानसिक स्वास्थ्य के साथ आत्मबोध का मार्ग भी प्रशस्त करता है। उन्होंने कहा कि योग किसी एक देश, संस्कृति या आयु वर्ग तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मानवीय चेतना की सार्वभौमिक अभिव्यक्ति है। टैगोर और महर्षि अरविंद के विचारों का किया उल्लेख प्रधानमंत्री मोदी ने Rabindranath Tagore और Sri Aurobindo के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि जुड़ाव ही योग का मूल तत्व है। उन्होंने कहा कि योग व्यक्ति को स्वयं, समाज और विश्व से जोड़ता है और मानव एकता का आधार बनता है। वैश्विक शांति का माध्यम बन सकता है योग दुनिया में जारी संघर्षों और भू-राजनीतिक तनावों का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि योग केवल शरीर को स्वस्थ नहीं रखता, बल्कि मन को शांति देकर वैश्विक सद्भाव और शांति की राह भी खोलता है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में योग की प्रासंगिकता पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है और यह दुनिया के बेहतर भविष्य के लिए आवश्यक है। योग को जीवनशैली बनाने का आह्वान प्रधानमंत्री ने लोगों से अपील की कि योग को केवल एक दिन के आयोजन तक सीमित न रखें, बल्कि इसे अपनी जीवनशैली का हिस्सा बनाएं। उन्होंने कहा कि 21 जून अब दुनिया के सबसे बड़े सामुदायिक उत्सवों में शामिल हो चुका है और योग राष्ट्रीय तथा सांस्कृतिक सीमाओं से परे एक वैश्विक आंदोलन का रूप ले चुका है। भारतीय नौसेना को मिले तीन स्वदेशी युद्धपोत योग दिवस समारोह के बाद प्रधानमंत्री ने Syama Prasad Mookerjee Port पर आयोजित कार्यक्रम में भारतीय नौसेना को तीन स्वदेशी युद्धपोत—INS Agray, INS Dunagiri और INS Sanshodhak—सौंपे। इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने कहा कि आत्मनिर्भर रक्षा उत्पादन और मजबूत समुद्री शक्ति विकसित भारत की सुरक्षा, आर्थिक समृद्धि और वैश्विक प्रतिष्ठा के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। उन्होंने कहा कि भारत की बढ़ती समुद्री क्षमता और स्वदेशी रक्षा निर्माण देश को आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ वैश्विक मंच पर उसकी रणनीतिक स्थिति को भी मजबूत कर रहे हैं। "योग हमारी आंतरिक शक्ति को मजबूत करता है, जबकि समुद्री सामर्थ्य हमारी बाहरी सुरक्षा को सुदृढ़ बनाता है। दोनों मिलकर विकसित भारत के संकल्प को नई ऊर्जा देते हैं।"  

Deepshikha जून 22, 2026 0
DRDO missile interceptor launch during successful ballistic missile defense and anti-ship missile tests in India.
भारत की मिसाइल सुरक्षा को बड़ी मजबूती, DRDO ने लगातार तीन सफल परीक्षण कर रचा नया कीर्तिमान

बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस और एंटी-शिप मिसाइल क्षमता का सफल प्रदर्शन भारत ने अपनी रक्षा क्षमताओं को और मजबूत करते हुए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने लगातार तीन सफल उड़ान परीक्षणों के जरिए देश की बहुस्तरीय मिसाइल रक्षा प्रणाली और नई नौसैनिक मिसाइल तकनीक का प्रदर्शन किया है। इस सफलता को भारत की सामरिक सुरक्षा के लिए बड़ा कदम माना जा रहा है। रक्षा मंत्री Rajnath Singh ने इस उपलब्धि की जानकारी देते हुए बताया कि इन परीक्षणों ने विभिन्न प्रकार के दुश्मन खतरों से निपटने की भारत की क्षमता को साबित किया है। दुश्मन की बैलिस्टिक मिसाइलों को हवा में ही मार गिराने की क्षमता DRDO द्वारा किए गए परीक्षणों में बहुस्तरीय बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस (BMD) प्रणाली का सफल प्रदर्शन किया गया। इस दौरान इंटरसेप्टर मिसाइलों ने अपने निर्धारित लक्ष्यों को सफलतापूर्वक ट्रैक कर उन्हें नष्ट किया। यह प्रणाली विभिन्न ऊंचाइयों और दूरी पर आने वाली बैलिस्टिक मिसाइलों को पहचानने, उनका पीछा करने और उन्हें लक्ष्य तक पहुंचने से पहले ही नष्ट करने में सक्षम है। इस तरह की रक्षा प्रणाली किसी भी संभावित हमले के खिलाफ कई स्तरों पर सुरक्षा प्रदान करती है। रक्षा मंत्री ने कहा कि इन सफल परीक्षणों के बाद भारत उन चुनिंदा देशों की श्रेणी में शामिल हो गया है, जिनके पास अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइलों (ICBM) तक को रोकने की क्षमता वाली मिसाइल रक्षा प्रणाली मौजूद है। आधुनिक युद्धों में बढ़ेगा भारत का सुरक्षा कवच आज के दौर में लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलें किसी भी देश की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा मानी जाती हैं। ऐसे में एक प्रभावी मिसाइल शील्ड सैन्य ठिकानों, रणनीतिक संस्थानों और महत्वपूर्ण नागरिक क्षेत्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में अहम भूमिका निभाती है। इन परीक्षणों के दौरान स्वदेशी सेंसर, अत्याधुनिक रडार, कमांड एंड कंट्रोल नेटवर्क और इंटरसेप्टर सिस्टम की दक्षता भी सफलतापूर्वक परखी गई। यह भारत की रक्षा तकनीक में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक और बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। पहली बार सफल हुआ NASM-MR मिसाइल का परीक्षण मिसाइल रक्षा प्रणाली के अलावा DRDO ने नौसेना के लिए विकसित नई मध्यम दूरी की एंटी-शिप मिसाइल (NASM-MR) का भी पहला सफल उड़ान परीक्षण किया। यह मिसाइल समुद्र में दुश्मन के युद्धपोतों और अन्य नौसैनिक लक्ष्यों पर दूर से सटीक हमला करने में सक्षम होगी। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भारतीय नौसेना की मारक क्षमता और समुद्री सुरक्षा दोनों में बड़ा इजाफा होगा। 'मिशन सुदर्शन चक्र' के तहत तैयार हो रही नई सुरक्षा व्यवस्था रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने हैदराबाद स्थित DRDO की रक्षा अनुसंधान एवं विकास प्रयोगशाला में आयोजित कार्यक्रम के दौरान "मिशन सुदर्शन चक्र" का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि यह परियोजना प्रधानमंत्री Narendra Modi द्वारा घोषित दीर्घकालिक रक्षा रणनीति का हिस्सा है। इसके तहत देश के लिए तीन-स्तरीय मिसाइल सुरक्षा कवच विकसित किया जा रहा है, जो सैन्य ठिकानों, महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे और नागरिक क्षेत्रों को सुरक्षा प्रदान करेगा। आत्मनिर्भर भारत को मिला नया बल इन सफल परीक्षणों ने एक बार फिर साबित किया है कि भारत रक्षा क्षेत्र में तेजी से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहा है। अब अगला कदम इन प्रणालियों को बड़े पैमाने पर उत्पादन और सशस्त्र बलों में तैनाती के लिए तैयार करना होगा। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि DRDO की यह उपलब्धि भारत की रक्षा तैयारियों को नई ऊंचाई पर ले जाएगी और देश की सामरिक शक्ति को वैश्विक स्तर पर और मजबूत बनाएगी।  

surbhi जून 13, 2026 0
Rafale fighter jets flying in formation as India advances major defence procurement plan
3.25 लाख करोड़ की मेगा डील की तैयारी, भारत खरीदेगा 114 नए राफेल लड़ाकू विमान

  भारत ने अपनी वायु शक्ति को और मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। रक्षा मंत्रालय ने 114 नए राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद के लिए फ्रांस को औपचारिक अनुरोध पत्र (Letter of Request) भेज दिया है। करीब 3.25 लाख करोड़ रुपये की यह डील भारत के इतिहास के सबसे बड़े सैन्य विमान अधिग्रहण कार्यक्रमों में से एक मानी जा रही है। रक्षा मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक, मंत्रालय के अधिग्रहण विंग ने पिछले सप्ताह फ्रांसीसी सरकार को प्रस्ताव भेजा है। अब अगले दो से तीन महीनों के भीतर फ्रांस की ओर से जवाब मिलने की उम्मीद है। दोनों देशों के बीच बातचीत पूरी होने के बाद अगले एक साल के भीतर समझौते को अंतिम रूप दिया जा सकता है। 'मेक इन इंडिया' को मिलेगा बड़ा बढ़ावा इस परियोजना की सबसे अहम विशेषता यह है कि 114 में से 94 राफेल विमानों का निर्माण भारत में किया जाएगा। फ्रांसीसी कंपनी डसॉल्ट एविएशन एक भारतीय साझेदार के साथ मिलकर इन विमानों का उत्पादन करेगी। अगर यह योजना तय रूप में लागू होती है, तो यह पहली बार होगा जब राफेल लड़ाकू विमानों का निर्माण फ्रांस के बाहर किया जाएगा। इससे भारत के रक्षा विनिर्माण क्षेत्र और 'मेक इन इंडिया' अभियान को बड़ा बल मिलने की उम्मीद है। मोदी की फ्रांस यात्रा में हो सकती है अहम चर्चा सूत्रों के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जून के मध्य तक फ्रांस का दौरा कर सकते हैं। माना जा रहा है कि इस यात्रा के दौरान राफेल सौदा दोनों देशों के बीच प्रमुख चर्चा का विषय रहेगा। भारतीय वायु सेना लंबे समय से लड़ाकू स्क्वाड्रनों की कमी का सामना कर रही है। ऐसे में उन्नत 4.5 पीढ़ी के राफेल विमानों की बड़ी संख्या में खरीद को वायु सेना की परिचालन क्षमता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। 176 तक पहुंच जाएगी राफेल विमानों की संख्या भारतीय वायु सेना और नौसेना पहले ही कुल 62 राफेल विमानों का ऑर्डर दे चुकी हैं। प्रस्तावित 114 नए विमानों के शामिल होने के बाद देश के पास राफेल विमानों की संख्या बढ़कर 176 हो जाएगी। इसके अलावा भारतीय नौसेना ने 31 अतिरिक्त राफेल मरीन विमानों में भी रुचि दिखाई है। यदि यह खरीद भी आगे बढ़ती है, तो भविष्य में भारत के पास राफेल विमानों की कुल संख्या 200 के पार पहुंच सकती है। 2028 से शुरू हो सकती है डिलीवरी रक्षा मंत्रालय के अनुसार, भारतीय नौसेना के लिए राफेल मरीन विमानों की डिलीवरी वर्ष 2028 से शुरू होने की संभावना है। इसके बाद वायु सेना के लिए भी विमानों की आपूर्ति शुरू होगी। अनुमान है कि अंतिम समझौते पर हस्ताक्षर होने के लगभग साढ़े तीन साल बाद भारतीय वायु सेना को नए राफेल विमान मिलने शुरू हो जाएंगे। इस बीच, वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह फ्रांस के दौरे पर हैं। उनके डसॉल्ट एविएशन की उत्पादन इकाइयों का दौरा करने की भी संभावना है, जहां राफेल लड़ाकू विमानों का निर्माण किया जाता है।  

Deepshikha जून 2, 2026 0
Admiral Krishna Swaminathan assumes charge as Indian Navy Chief and outlines security priorities
पदभार संभालते ही बोले नौसेना प्रमुख एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन, देश की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता

भारतीय नौसेना के 27वें प्रमुख के रूप में कार्यभार संभालने के बाद एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन ने कहा कि देश की सुरक्षा और समुद्री हितों की रक्षा उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता होगी। उन्होंने कहा कि बदलते क्षेत्रीय सुरक्षा परिदृश्य के बीच नौसेना की युद्धक क्षमता को मजबूत बनाए रखने और तकनीकी आधुनिकीकरण को गति देने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। एडमिरल स्वामीनाथन ने 31 मई को सेवानिवृत्त हुए एडमिरल Dinesh Kumar Tripathi का स्थान लिया। इससे पहले वह भारतीय नौसेना की पश्चिमी कमान के फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ के रूप में सेवाएं दे रहे थे। चार दशक का समृद्ध नौसैनिक अनुभव 1 जुलाई 1987 को भारतीय नौसेना में कमीशन प्राप्त करने वाले एडमिरल स्वामीनाथन कम्युनिकेशन और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर के विशेषज्ञ माने जाते हैं। लगभग चार दशक लंबे करियर में उन्होंने आईएनएस विद्युत, आईएनएस विनाश, आईएनएस कुलिश और विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रमादित्य समेत कई महत्वपूर्ण युद्धपोतों की कमान संभाली है। नौसेना के आधुनिकीकरण पर रहेगा जोर पदभार ग्रहण करने के बाद मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि भारतीय नौसेना का नेतृत्व करना उनके लिए अत्यंत गौरव और जिम्मेदारी का विषय है। उन्होंने कहा कि मौजूदा क्षेत्रीय सुरक्षा वातावरण लगातार जटिल, चुनौतीपूर्ण और अप्रत्याशित होता जा रहा है, ऐसे में नौसेना को तकनीकी रूप से और अधिक सक्षम बनाना समय की आवश्यकता है। युद्धक क्षमता बनाए रखना प्राथमिक लक्ष्य एडमिरल स्वामीनाथन ने कहा कि उनकी सबसे बड़ी प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना होगी कि भारतीय नौसेना हर परिस्थिति में देश की सुरक्षा और आर्थिक हितों की रक्षा करने में सक्षम रहे। उन्होंने कहा कि नौसेना अपनी परिचालन तैयारियों और युद्धक क्षमता को सर्वोच्च स्तर पर बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है।  

surbhi जून 1, 2026 0
Indian Navy warship INS Kolkata protects merchant vessel from piracy threat in Indian Ocean
भारतीय नौसेना ने हिंद महासागर में टाला बड़ा खतरा, INS कोलकाता ने समुद्री लुटेरों की कोशिश नाकाम की

भारतीय नौसेना ने पश्चिमी हिंद महासागर में एक बड़ी समुद्री डकैती की कोशिश को विफल कर दिया है। नौसेना के युद्धपोत INS कोलकाता ने त्वरित कार्रवाई करते हुए व्यापारी जहाज MV मशाल्लाह-1 को संभावित हमले से सुरक्षित बचा लिया। नौसेना के अनुसार, अदन की खाड़ी के पास व्यापारी जहाज के आसपास संदिग्ध समुद्री गतिविधियों की सूचना मिली थी। इसके बाद एंटी-पायरेसी मिशन पर तैनात INS कोलकाता को तुरंत सक्रिय किया गया। हेलीकॉप्टर और कमांडो टीम ने संभाला मोर्चा स्थिति की गंभीरता को देखते हुए INS कोलकाता से हेलीकॉप्टर भेजकर इलाके की हवाई निगरानी की गई। इसके साथ ही नौसेना के कमांडो दस्ते ने MV मशाल्लाह-1 पर बोर्डिंग ऑपरेशन चलाया। जांच के दौरान यह सुनिश्चित किया गया कि जहाज और उसमें मौजूद चालक दल पूरी तरह सुरक्षित हैं और किसी प्रकार का तत्काल खतरा नहीं है। समुद्री डाकुओं की घेराबंदी की कोशिश नाकाम भारतीय नौसेना के मुताबिक, समुद्री डाकू व्यापारी जहाज के आसपास घेराबंदी की तैयारी में थे। लेकिन भारतीय युद्धपोत की तेज कार्रवाई और इलाके में उसकी मौजूदगी से संदिग्ध समुद्री लुटेरों के इरादे विफल हो गए। नौसेना ने कहा कि पूरे घटनाक्रम के दौरान जहाज की लगातार निगरानी की गई और किसी भी तरह की क्षति या अपहरण जैसी घटना नहीं होने दी गई। 2008 से अदन की खाड़ी में सक्रिय है भारतीय नौसेना भारतीय नौसेना वर्ष 2008 से अदन की खाड़ी और पश्चिमी हिंद महासागर में एंटी-पायरेसी मिशन चला रही है। इस क्षेत्र से गुजरने वाले व्यापारी जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करना नौसेना की प्रमुख जिम्मेदारियों में शामिल है। समुद्री व्यापार के लिहाज से यह इलाका बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है और यहां समुद्री डकैती की घटनाएं अंतरराष्ट्रीय चिंता का विषय रही हैं। हिंद महासागर में बढ़ी समुद्री चुनौतियां हाल के वर्षों में पश्चिमी हिंद महासागर और अदन की खाड़ी के आसपास समुद्री डकैती, तस्करी और अन्य अवैध गतिविधियों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसी को देखते हुए भारतीय नौसेना लगातार युद्धपोतों और निगरानी संसाधनों की तैनाती बनाए हुए है। नौसेना का कहना है कि उसका उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों को सुरक्षित रखना और व्यापारी जहाजों की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करना है। “भारत क्षेत्रीय सुरक्षा भागीदार की भूमिका निभा रहा” भारतीय नौसेना ने कहा कि वह हिंद महासागर क्षेत्र में “प्रथम प्रतिक्रिया बल” और प्रमुख सुरक्षा भागीदार की भूमिका निभा रही है। समुद्री सुरक्षा को लेकर भारत की प्रतिबद्धता लगातार मजबूत हो रही है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि INS कोलकाता की यह कार्रवाई भारतीय नौसेना की त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता और समुद्री सुरक्षा रणनीति की मजबूती को दर्शाती है। मित्र देशों के साथ बढ़ा समन्वय हाल के समय में भारतीय नौसेना ने कई मित्र देशों के साथ संयुक्त समुद्री अभ्यास भी किए हैं। इन अभ्यासों का उद्देश्य समुद्री डकैती, तस्करी और आतंकवाद जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए बेहतर समन्वय विकसित करना है। नौसेना प्रमुख भी कई बार कह चुके हैं कि समुद्री सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियां अब वैश्विक स्वरूप ले चुकी हैं और उनसे निपटने के लिए साझा रणनीति जरूरी है।  

surbhi मई 27, 2026 0
Lieutenant General N S Raja Subramani and Vice Admiral Krishna Swaminathan appointed to top military posts
लेफ्टिनेंट जनरल एन एस राजा सुब्रमणि बने नए CDS, वाइस एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन होंगे नौसेना प्रमुख

भारत सरकार ने सशस्त्र बलों के शीर्ष नेतृत्व में बड़ा बदलाव करते हुए N S Raja Subramani को देश का नया चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) नियुक्त किया है. वहीं Krishna Swaminathan को भारतीय नौसेना का अगला प्रमुख चुना गया है. दोनों नियुक्तियों को रक्षा क्षेत्र में महत्वपूर्ण रणनीतिक बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है. 30 मई के बाद संभालेंगे CDS की जिम्मेदारी सरकार की ओर से जारी आदेश के मुताबिक लेफ्टिनेंट जनरल एन एस राजा सुब्रमणि मौजूदा CDS Anil Chauhan का कार्यकाल पूरा होने के बाद पद संभालेंगे. जनरल अनिल चौहान 30 मई 2026 को रिटायर हो रहे हैं. CDS बनने के साथ ही एन एस राजा सुब्रमणि सैन्य मामलों के विभाग (Department of Military Affairs) में भारत सरकार के सचिव की जिम्मेदारी भी निभाएंगे. सैन्य नेतृत्व का लंबा अनुभव एन एस राजा सुब्रमणि फिलहाल नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल सेक्रेटेरिएट में मिलिट्री एडवाइजर के रूप में कार्यरत हैं. उन्होंने 1 सितंबर 2025 को यह जिम्मेदारी संभाली थी. इससे पहले वे भारतीय सेना में कई अहम पदों पर रह चुके हैं. जुलाई 2024 से जुलाई 2025 तक उन्होंने आर्मी के वाइस चीफ के रूप में काम किया. वहीं मार्च 2023 से जून 2024 तक वे सेंट्रल कमांड के जीओसी-इन-चीफ रहे. रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि सीमा सुरक्षा, सामरिक योजना और सैन्य संचालन का उनका अनुभव उन्हें इस पद के लिए मजबूत विकल्प बनाता है. कृष्णा स्वामीनाथन होंगे नए नौसेना प्रमुख सरकार ने वाइस एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन को भारतीय नौसेना का नया चीफ ऑफ नेवल स्टाफ नियुक्त किया है. वे 31 मई 2026 को अपना नया कार्यभार संभालेंगे. फिलहाल वे मुंबई स्थित वेस्टर्न नेवल कमांड के प्रमुख हैं. उनका कार्यकाल 31 दिसंबर 2028 तक रहेगा. इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर के विशेषज्ञ माने जाते हैं स्वामीनाथन कृष्णा स्वामीनाथन 1 जुलाई 1987 को भारतीय नौसेना में शामिल हुए थे. उन्हें कम्युनिकेशन और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर का विशेषज्ञ माना जाता है. उन्होंने National Defence Academy, ब्रिटेन के जॉइंट सर्विसेज कमांड एंड स्टाफ कॉलेज, करंजा के कॉलेज ऑफ नेवल वॉरफेयर और अमेरिका के यूएस नेवल वॉर कॉलेज जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों से सैन्य शिक्षा प्राप्त की है. रक्षा नेतृत्व में बड़े बदलाव का संकेत रक्षा मामलों के जानकारों के अनुसार, इन नियुक्तियों से भारत की सैन्य रणनीति और तीनों सेनाओं के संयुक्त संचालन को नई दिशा मिल सकती है. आने वाले समय में सीमा सुरक्षा, समुद्री रणनीति और आधुनिक युद्ध तकनीक पर सरकार का फोकस और मजबूत होने की उम्मीद है.  

surbhi मई 9, 2026 0
LPG tanker ships passing through Strait of Hormuz carrying gas cargo safely toward India.
Strait of Hormuz: 60 हजार टन LPG लेकर भारत आ रहे दो जहाज, सुरक्षित पार किया संवेदनशील रास्ता

पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच भारत के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से दो भारतीय LPG जहाज सुरक्षित निकल चुके हैं और जल्द ही भारत पहुंचने वाले हैं। कब पहुंचेंगे जहाज? केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के अनुसार- Green Sangvi: 7 अप्रैल को भारत पहुंचेगा Green Asha: 9 अप्रैल को भारत पहुंचेगा हालांकि, मौजूदा हालातों को देखते हुए समय में हल्का बदलाव संभव है। कितनी गैस ला रहे हैं जहाज? Green Sangvi: लगभग 46,000 मीट्रिक टन LPG Green Asha: करीब 15,000 मीट्रिक टन LPG ये दोनों जहाज 60,000 मीट्रिक टन से ज्यादा रसोई गैस लेकर भारत लौट रहे हैं। इन जहाजों पर क्रमशः 25 और 26 भारतीय नाविक सवार हैं। खाड़ी में कितने भारतीय जहाज और नाविक? मंत्रालय के मुताबिक- खाड़ी क्षेत्र में 16 भारतीय जहाज मौजूद हैं इन पर कुल 433 भारतीय नाविक तैनात हैं इनमें LNG, LPG, क्रूड ऑयल टैंकर, कंटेनर शिप, केमिकल टैंकर और बल्क कार्गो जहाज शामिल हैं। 1600 नाविकों का सुरक्षित रेस्क्यू सरकार की निगरानी में अब तक- 1,599 भारतीय नाविकों को सुरक्षित वापस लाया जा चुका है पिछले 24 घंटों में 180 नाविकों की वापसी हुई भारत के बंदरगाहों पर स्थिति सामान्य मंत्रालय ने बताया कि देश के सभी प्रमुख बंदरगाह- गुजरात, महाराष्ट्र, गोवा, केरल, आंध्र प्रदेश और पुडुचेरी-में कामकाज सामान्य रूप से जारी है और कहीं भी भीड़ या बाधा की स्थिति नहीं है। क्यों अहम है होर्मुज जलडमरूमध्य? होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है, जहां से बड़ी मात्रा में तेल और गैस का वैश्विक व्यापार होता है। ऐसे में इस रास्ते से भारतीय जहाजों का सुरक्षित निकलना देश की ऊर्जा सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।  

surbhi अप्रैल 7, 2026 0
Indian LPG carrier Green Asha safely crossing Strait of Hormuz amid rising Iran-Israel tensions
होर्मुज संकट के बीच राहत: LPG जहाज ‘ग्रीन आशा’ सुरक्षित पार, अब ‘जग विक्रम’ का इंतजार

ईरान-इजरायल तनाव के बीच खतरनाक बने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से भारत के लिए एक राहत भरी खबर सामने आई है। एलपीजी लेकर खाड़ी में फंसा भारतीय जहाज ‘ग्रीन आशा’ सफलतापूर्वक इस संवेदनशील समुद्री मार्ग को पार कर चुका है और अब भारतीय नौसेना की निगरानी में सुरक्षित भारत की ओर लौट रहा है। ‘ग्रीन सान्वी’ के बाद ‘ग्रीन आशा’ ने पार किया रास्ता डायरेक्टरेट जनरल ऑफ शिपिंग की रिपोर्ट के मुताबिक, 3 अप्रैल को एलपीजी कैरियर ‘ग्रीन सान्वी’ के सुरक्षित निकलने के बाद रविवार को ‘ग्रीन आशा’ ने भी होर्मुज स्ट्रेट पार कर लिया। इसके साथ ही इस खतरनाक क्षेत्र में अब केवल एक भारतीय जहाज ‘जग विक्रम’ बचा है, जिसकी सुरक्षित वापसी का इंतजार किया जा रहा है। बताया गया है कि ‘जग विक्रम’ भारतीय नौसेना से आगे के निर्देशों का इंतजार कर रहा है, ताकि वह सुरक्षित तरीके से इस क्षेत्र से बाहर निकल सके। 28 फरवरी के बाद बढ़ा खतरा गौरतलब है कि 28 फरवरी को ईरान पर हमले के बाद से होर्मुज स्ट्रेट बेहद संवेदनशील हो गया था। इस दौरान कई तेल और गैस से भरे जहाज इस इलाके में फंस गए थे। कुछ जहाजों पर हमले भी हुए, जिससे यह मार्ग लगभग बंद हो गया था। हालांकि, अब राजनयिक प्रयासों और सुरक्षा इंतजामों के चलते धीरे-धीरे जहाजों की आवाजाही फिर शुरू हो रही है। कब पहुंचेगा ‘ग्रीन सान्वी’? करीब 46,655 मीट्रिक टन एलपीजी लेकर लौट रहा ‘ग्रीन सान्वी’ 7 अप्रैल को गुजरात के भरूच जिले के दहेज बंदरगाह पहुंचने की उम्मीद है। वहीं, BW TYR नामक एलपीजी कैरियर फिलहाल मुंबई के बाहरी बंदरगाह पर ‘शिप-टू-शिप’ ट्रांसफर के जरिए अपना माल उतार रहा है। एक अन्य जहाज BW ELM को चेन्नई के एन्नोर पोर्ट की ओर मोड़ा गया है। पहले भी पहुंचे कई जहाज पिछले सप्ताह ‘जग वसंत’ करीब 47,612 मीट्रिक टन एलपीजी लेकर गुजरात के कांडला पहुंचा, जबकि ‘पाइन गैस’ ने न्यू मैंगलोर में 45,000 मीट्रिक टन एलपीजी की आपूर्ति की। अब भी खाड़ी में मौजूद हैं कई भारतीय जहाज शिपिंग मंत्रालय के अनुसार, फिलहाल: 16 भारतीय जहाज फारसी खाड़ी में 4 जहाज ओमान की खाड़ी में 1 जहाज अदन की खाड़ी में 2 जहाज लाल सागर में मौजूद हैं इनमें से 5 जहाज शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया के हैं। 20,000 भारतीय नाविकों की मौजूदगी रिपोर्ट के अनुसार, पूरे खाड़ी क्षेत्र में करीब 20,000 भारतीय नाविक मौजूद हैं। इनमें: 528 नाविक भारतीय झंडे वाले जहाजों पर 433 फारसी खाड़ी में 95 ओमान की खाड़ी में तैनात हैं 5 अप्रैल तक विभिन्न शिपिंग कंपनियों ने 1,479 भारतीय नाविकों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया है। नौसेना की निगरानी में ऑपरेशन भारतीय नौसेना लगातार इस पूरे ऑपरेशन पर नजर बनाए हुए है और जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित कर रही है। ‘ग्रीन आशा’ का सुरक्षित पार होना भारत के लिए बड़ी राहत है, जबकि अब सभी की नजरें ‘जग विक्रम’ की सुरक्षित वापसी पर टिकी हैं।  

surbhi अप्रैल 6, 2026 0
INS Aridhaman nuclear submarine launch visuals with Rajnath Singh highlighting India’s naval strength
INS Aridhaman की लॉन्चिंग के संकेत: राजनाथ सिंह बोले-‘ये सिर्फ नाम नहीं, भारत की ताकत है’

भारत की समुद्री रक्षा क्षमता को और मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठने जा रहा है। रक्षा मंत्री Rajnath Singh ने देश की तीसरी स्वदेशी परमाणु-संचालित बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बी INS Aridhaman की संभावित लॉन्चिंग के संकेत दिए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर कहा, “यह सिर्फ एक शब्द नहीं, बल्कि शक्ति का प्रतीक है-‘Aridhaman’।” यह पनडुब्बी भारत की न्यूक्लियर डिटरेंस क्षमता को और मजबूत करेगी, जिससे देश की ‘सेकंड स्ट्राइक’ क्षमता और अधिक प्रभावी बनेगी। समुद्री शक्ति में बड़ा इजाफा INS Aridhaman, भारत की स्वदेशी परमाणु पनडुब्बी परियोजना का तीसरा अहम हिस्सा है, जो पहले से सेवा में मौजूद INS Arihant और INS Arighaat के बाद शामिल होगी। करीब 7,000 टन वजनी यह पनडुब्बी आधुनिक डिजाइन और बेहतर स्टेल्थ टेक्नोलॉजी से लैस है, जिससे दुश्मन के लिए इसे ट्रैक करना बेहद मुश्किल होगा। मिसाइल क्षमता: पहले से दोगुनी ताकत INS Aridhaman की सबसे बड़ी खासियत इसकी मिसाइल क्षमता है। इसमें 8 वर्टिकल लॉन्च ट्यूब्स हैं, जो इसे और अधिक घातक बनाते हैं। 8 K-4 मिसाइल (3500 किमी रेंज) या 24 K-15 मिसाइल (750 किमी रेंज) यह क्षमता इसे लंबी दूरी तक सटीक और शक्तिशाली हमला करने में सक्षम बनाती है। भारत की ‘Second Strike’ रणनीति को मजबूती परमाणु पनडुब्बियां (SSBN) किसी भी देश की रक्षा रणनीति में बेहद महत्वपूर्ण होती हैं। INS Aridhaman के शामिल होने से भारत की “Continuous At-Sea Deterrence” क्षमता मजबूत होगी, यानी हर समय एक परमाणु पनडुब्बी समुद्र में तैनात रह सकेगी। इससे यह सुनिश्चित होता है कि किसी भी संभावित हमले की स्थिति में भारत जवाबी कार्रवाई करने में सक्षम रहेगा। विशाखापत्तनम में लॉन्चिंग, Taragiri भी शामिल रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह विशाखापत्तनम दौरे पर हैं, जहां INS Aridhaman की लॉन्चिंग के साथ-साथ अत्याधुनिक स्टेल्थ फ्रिगेट INS Taragiri को भी नौसेना में शामिल किया जाएगा। Visakhapatnam भारत के परमाणु पनडुब्बी बेड़े का प्रमुख केंद्र है और यहीं इनका निर्माण व तैनाती होती है। भारत की बढ़ती समुद्री ताकत का संकेत INS Aridhaman का शामिल होना न केवल रक्षा क्षमता को मजबूत करेगा, बल्कि ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान के तहत स्वदेशी रक्षा निर्माण को भी नई ऊंचाई देगा। आने वाले समय में चौथी परमाणु पनडुब्बी के जुड़ने के बाद भारत पूरी तरह से मजबूत न्यूक्लियर ट्रायड हासिल कर लेगा।  

surbhi अप्रैल 3, 2026 0
Supreme Court grants permanent commission to women officers, landmark gender equality ruling in armed forces
महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन: सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, सशस्त्र बलों की ‘लापरवाही’ पर कड़ी फटकार

देश की सशस्त्र सेनाओं में लैंगिक समानता की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए Supreme Court of India ने महिला शॉर्ट सर्विस कमीशन (SSC) अधिकारियों को स्थायी कमीशन (Permanent Commission) देने का आदेश दिया है। कोर्ट ने इस दौरान सशस्त्र बलों के रवैये पर सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि महिलाओं के साथ लंबे समय से “प्रणालीगत भेदभाव” किया गया है। मुख्य न्यायाधीश Surya Kant की अध्यक्षता वाली पीठ ने स्पष्ट कहा कि पुरुष अधिकारियों के लिए स्थायी कमीशन को विशेषाधिकार बनाए रखना अब स्वीकार्य नहीं है। कोर्ट ने इस फैसले में Article 142 of the Constitution of India के तहत अपने विशेष अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए न्याय सुनिश्चित किया। 250 अधिकारियों की सीमा को बताया मनमाना सुप्रीम कोर्ट ने हर साल अधिकतम 250 महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन देने की सीमा को “मनमाना” और असंवैधानिक बताया। कोर्ट ने कहा कि इस तरह की सीमा महिलाओं के अवसरों को सीमित करती है और समानता के सिद्धांत के खिलाफ है। मूल्यांकन प्रक्रिया में गंभीर खामियां कोर्ट ने पाया कि Indian Army और Indian Navy में महिला अधिकारियों के मूल्यांकन में गंभीर खामियां थीं। उनकी Annual Confidential Reports (ACRs) को “लापरवाही” से तैयार किया गया और यह मानकर आकलन किया गया कि उन्हें कभी स्थायी कमीशन नहीं मिलेगा। इससे उनकी योग्यता का सही आकलन नहीं हो पाया। पेंशन और सेवा लाभ का भी मिलेगा फायदा अदालत ने निर्देश दिया कि जिन महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन का अधिकार है, उन्हें 20 साल की सेवा पूरी मानी जाएगी। इसके साथ ही उन्हें पेंशन और अन्य सभी सेवानिवृत्ति लाभ भी दिए जाएंगे। यह लाभ उन अधिकारियों को भी मिलेगा, जिन्हें पहले चयन बोर्ड में अयोग्य घोषित कर दिया गया था। अलग-अलग बलों के लिए अलग निर्देश नौसेना: मेडिकल फिटनेस के आधार पर योग्य महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन मिलेगा। वायुसेना: कोर्ट ने माना कि कई अधिकारियों को निष्पक्ष अवसर नहीं मिला, लेकिन ऑपरेशनल कारणों से दोबारा नियुक्ति संभव नहीं है। सेना: मूल्यांकन प्रणाली में सुधार और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। पारदर्शिता की कमी पर भी सवाल कोर्ट ने रक्षा मंत्रालय और नौसेना द्वारा चयन प्रक्रिया और अंक सार्वजनिक न करने पर भी चिंता जताई। कोर्ट के अनुसार, इस पारदर्शिता की कमी से न केवल महिला बल्कि पुरुष अधिकारियों को भी नुकसान हुआ। व्यापक सुधार के आदेश सुप्रीम कोर्ट ने सभी सशस्त्र बलों को निर्देश दिया है कि वे अपनी मूल्यांकन प्रक्रिया की व्यापक समीक्षा करें, ताकि भविष्य में किसी भी महिला अधिकारी के साथ भेदभाव न हो।  

surbhi मार्च 24, 2026 0
Indian Navy warships deployed in Gulf of Oman escorting oil tankers amid Hormuz Strait crisis
होर्मुज संकट के बीच भारत का बड़ा कदम: ओमान की खाड़ी में बढ़ेगी नौसेना की ताकत, सुरक्षित निकाले जाएंगे भारतीय जहाज

पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के बीच वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति की सबसे अहम लाइफलाइन माने जाने वाले Strait of Hormuz में तनाव चरम पर पहुंच गया है। इस स्थिति को देखते हुए भारत ने अपने ऊर्जा और व्यापारिक हितों की सुरक्षा के लिए बड़ा रणनीतिक कदम उठाया है। भारत ने Indian Navy की तैनाती बढ़ाते हुए Gulf of Oman में अतिरिक्त युद्धपोत भेजने का फैसला किया है, ताकि भारतीय जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित की जा सके। 6 से 7 युद्धपोतों की तैनाती, सुरक्षा पर फोकस खाड़ी क्षेत्र में भारतीय नौसेना की मौजूदगी को मजबूत करते हुए अब कुल युद्धपोतों की संख्या 6 से बढ़ाकर 7 की जा रही है। इसका मुख्य उद्देश्य कच्चा तेल और LPG लेकर आने वाले भारतीय झंडे वाले जहाजों को सुरक्षित रास्ता उपलब्ध कराना है। यह वही मार्ग है, जहां से Saudi Arabia, United Arab Emirates और Qatar जैसे देशों से भारत को ऊर्जा आपूर्ति होती है। 22 भारतीय जहाज फंसे, बढ़ी चिंता हालिया तनाव के चलते होर्मुज जलडमरूमध्य में आवाजाही लगभग ठप हो गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, 22 भारतीय झंडाधारी जहाज इस क्षेत्र में फंसे हुए हैं, जिससे ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ गई है। यह मार्ग वैश्विक कच्चे तेल की करीब 20% आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है, इसलिए यहां किसी भी तरह की बाधा का असर पूरी दुनिया पर पड़ता है। नेवी की एस्कॉर्ट रणनीति, जहाजों को सुरक्षित निकाला जा रहा भारतीय नौसेना अब सक्रिय रूप से जहाजों को एस्कॉर्ट कर रही है। हाल ही में एक भारतीय युद्धपोत ने यूएई के फुजैरा पोर्ट से निकले एक तेल टैंकर को सुरक्षित भारत के पश्चिमी तट तक पहुंचाया। इसके अलावा, ‘शिवालिक’ और ‘नंदा देवी’ जैसे LPG कैरियर भी करीब 92,712 मीट्रिक टन गैस लेकर सुरक्षित भारत पहुंच चुके हैं-जो मौजूदा संकट के बीच बड़ी राहत मानी जा रही है। ‘ऑपरेशन संकल्प’ के तहत कार्रवाई यह पूरी तैनाती Operation Sankalp के तहत की जा रही है, जिसकी शुरुआत 2019 में की गई थी। इसका उद्देश्य भारतीय व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और समुद्री मार्गों पर भरोसा बनाए रखना है। अदन की खाड़ी में भी लगातार मिशन भारतीय नौसेना सिर्फ होर्मुज तक सीमित नहीं है। Gulf of Aden में भी 2008 से एंटी-पायरेसी मिशन चलाया जा रहा है, जहां हर समय एक युद्धपोत तैनात रहता है। यह मिशन समुद्री डकैती पर नजर रखने और भारतीय व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा के लिए अहम भूमिका निभाता है। ऊर्जा सुरक्षा के लिए जरूरी कदम विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा हालात में भारत की यह रणनीतिक तैनाती बेहद जरूरी है। इससे न सिर्फ भारतीय जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी, बल्कि देश की ऊर्जा आपूर्ति को भी स्थिर बनाए रखने में मदद मिलेगी।  

surbhi मार्च 19, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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abhishek singh जून 30, 2026 0