Apple के अगले फ्लैगशिप स्मार्टफोन iPhone 18 Pro को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। कंपनी की ओर से अभी तक आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन कई लीक रिपोर्ट्स में इसके डिजाइन, कैमरा, बैटरी, प्रोसेसर और AI फीचर्स से जुड़ी अहम जानकारियां सामने आई हैं। माना जा रहा है कि Apple इस साल सितंबर में अपने नए iPhone 18 Pro और iPhone 18 Pro Max को पेश कर सकता है। हालांकि, फिलहाल सामने आई सभी जानकारियां लीक रिपोर्ट्स पर आधारित हैं और Apple ने इनमें से किसी भी फीचर की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। सितंबर में हो सकता है लॉन्च रिपोर्ट्स के मुताबिक, Apple अपना वार्षिक लॉन्च इवेंट सितंबर 2026 में आयोजित कर सकता है। संभावना है कि इवेंट 8 या 9 सितंबर को आयोजित हो और इसके कुछ दिनों बाद नए iPhone की बिक्री शुरू हो जाए। कुछ रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया है कि इस बार Apple लॉन्च रणनीति में बदलाव कर सकता है। इसके तहत सितंबर में केवल iPhone 18 Pro, iPhone 18 Pro Max और कंपनी का पहला फोल्डेबल iPhone पेश किया जा सकता है, जबकि स्टैंडर्ड iPhone 18 मॉडल्स को 2027 की शुरुआत तक लॉन्च किया जा सकता है। डिजाइन में छोटे लेकिन अहम बदलाव लीक्स के अनुसार, iPhone 18 Pro का डिजाइन मौजूदा Pro सीरीज जैसा ही रहेगा। संभावित बदलावों में शामिल हैं- फ्लैट-एज डिजाइन बरकरार रहेगा। ट्रिपल रियर कैमरा सेटअप मिलेगा। कैमरा मॉड्यूल पहले से थोड़ा बड़ा हो सकता है। बड़ी बैटरी और बेहतर कूलिंग सिस्टम के कारण फोन थोड़ा मोटा और भारी हो सकता है। नए Dark Cherry कलर के साथ Light Blue, Silver और Dark Grey रंग मिलने की संभावना है। Dynamic Island हो सकता है छोटा रिपोर्ट्स के अनुसार- iPhone 18 Pro में 6.3 इंच डिस्प्ले iPhone 18 Pro Max में 6.9 इंच डिस्प्ले मिल सकता है। कहा जा रहा है कि Face ID के कुछ सेंसर डिस्प्ले के नीचे शिफ्ट किए जा सकते हैं, जिससे Dynamic Island पहले की तुलना में छोटा दिखाई दे सकता है। इसके अलावा LTPO+ OLED डिस्प्ले मिलने की भी संभावना जताई जा रही है, जिससे बैटरी एफिशिएंसी बेहतर हो सकती है। नई A20 Pro चिप दे सकती है AI बूस्ट iPhone 18 Pro सीरीज में Apple की नई A20 Pro चिप मिलने की उम्मीद है, जिसे TSMC की 2nm प्रोसेस टेक्नोलॉजी पर तैयार किया जा सकता है। इससे यूजर्स को- तेज़ प्रोसेसिंग बेहतर गेमिंग कम बैटरी खपत ऑन-डिवाइस AI फीचर्स अधिक स्मार्ट Siri अनुभव जैसे फायदे मिल सकते हैं। बैटरी पर भी रहेगा खास फोकस बैटरी को लेकर भी इस बार बड़ा अपग्रेड देखने को मिल सकता है। लीक्स के मुताबिक, iPhone 18 Pro Max में लगभग 5,391mAh से 5,567mAh तक की बैटरी दी जा सकती है। बड़ी बैटरी की वजह से फोन का वजन और मोटाई थोड़ा बढ़ सकती है। कैमरे में मिल सकते हैं बड़े बदलाव Apple इस बार ट्रिपल 48MP कैमरा सिस्टम को बरकरार रख सकता है, लेकिन कैमरा हार्डवेयर में कई नए सुधार देखने को मिल सकते हैं। संभावित फीचर्स- Variable Aperture Main Camera नया Stacked Image Sensor बेहतर Telephoto Camera 24MP फ्रंट कैमरा Pressure-Sensitive Camera Control Button इन बदलावों से फोटोग्राफी और वीडियो रिकॉर्डिंग का अनुभव पहले से बेहतर होने की उम्मीद है। नई कनेक्टिविटी और AI फीचर्स रिपोर्ट्स के अनुसार, iPhone 18 Pro में Apple का नया C2 Modem दिया जा सकता है, जिससे नेटवर्क स्पीड और पावर एफिशिएंसी बेहतर होगी। इसके अलावा- एडवांस Satellite Connectivity iOS 27 नई Siri Apple Intelligence आधारित AI फीचर्स भी मिलने की संभावना है। कीमत बढ़ने की संभावना Apple ने अभी तक कीमत का खुलासा नहीं किया है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि नई 2nm चिप, बड़ी बैटरी और कैमरा अपग्रेड के कारण iPhone 18 Pro सीरीज की कीमत पिछले मॉडल्स की तुलना में अधिक हो सकती है। हालांकि, कंपनी की ओर से आधिकारिक घोषणा होने तक इन जानकारियों को केवल लीक रिपोर्ट्स के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।
Apple का अगला फ्लैगशिप स्मार्टफोन iPhone 18 Pro सितंबर 2026 में लॉन्च होने की उम्मीद है। टेक रिपोर्ट्स के अनुसार, कंपनी का यह लॉन्च शेड्यूल केवल परंपरा नहीं बल्कि एक सोची-समझी रणनीति हो सकता है। इससे Apple को Samsung और Google जैसे Android ब्रांड्स की नई डिवाइसों के बाजार प्रदर्शन का आकलन करने और उसी हिसाब से अपनी रणनीति बनाने का मौका मिल सकता है। हालांकि, Apple ने अभी तक iPhone 18 Series की लॉन्च डेट, कीमत या फीचर्स की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। सितंबर लॉन्च से Apple को क्या फायदा? हर साल Samsung और Google अपने प्रीमियम स्मार्टफोन जुलाई-अगस्त के दौरान लॉन्च करते हैं। इसके बाद सितंबर में Apple अपनी नई iPhone Series पेश करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे Apple को कई फायदे मिलते हैं: प्रतिस्पर्धी कंपनियों की कीमतों और उपभोक्ता प्रतिक्रिया का विश्लेषण करने का समय मिलता है। त्योहारी सीजन से पहले iPhone की बिक्री शुरू हो जाती है। कैरियर और नेटवर्क कंपनियां नए iPhone के साथ आकर्षक ऑफर्स लॉन्च करती हैं। प्रीमियम स्मार्टफोन बाजार में ग्राहकों का ध्यान तेजी से iPhone की ओर शिफ्ट हो जाता है। iOS 27 से मिलेगा बेहतर अनुभव? रिपोर्ट्स के मुताबिक Apple iOS 27 का पब्लिक बीटा जल्द जारी कर सकता है। बताया जा रहा है कि नया अपडेट मुख्य रूप से: सिस्टम परफॉर्मेंस सुधार, Apple Intelligence फीचर्स, Siri AI अपग्रेड, बेहतर स्थिरता पर केंद्रित होगा। Apple की खास बात यह है कि नया iOS एक साथ कई पुराने iPhone मॉडल्स तक पहुंचता है, जबकि Android में अलग-अलग कंपनियों के कारण अपडेट अलग समय पर मिलते हैं। AI फीचर्स पर रहेगा फोकस टेक रिपोर्ट्स के अनुसार iPhone 18 Pro में Apple का नया AI हार्डवेयर और ऑन-डिवाइस Apple Intelligence फीचर्स देखने को मिल सकते हैं। कंपनी की रणनीति क्लाउड आधारित AI के बजाय प्राइवेसी को प्राथमिकता देते हुए अधिक AI प्रोसेसिंग सीधे डिवाइस पर उपलब्ध कराने की हो सकती है। हालांकि इन फीचर्स की आधिकारिक जानकारी लॉन्च के समय ही सामने आएगी। बढ़ सकती है iPhone 18 Pro की कीमत रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि मेमोरी और स्टोरेज कंपोनेंट्स की बढ़ती लागत के कारण प्रीमियम स्मार्टफोन की कीमतें बढ़ रही हैं। यदि Samsung और Google पहले अपने नए फ्लैगशिप की कीमत बढ़ाते हैं, तो Apple के लिए भी iPhone 18 Pro की ऊंची कीमत तय करना अपेक्षाकृत आसान हो सकता है। हालांकि Apple ने अभी तक कीमतों को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है। Android से मुकाबले में क्या होगी रणनीति? विश्लेषकों का मानना है कि सितंबर में लॉन्च होने से Apple को यह देखने का अवसर मिलता है कि: ग्राहक किस तरह के AI फीचर्स पसंद कर रहे हैं। बाजार में किन फीचर्स की सबसे अधिक मांग है। प्रतिस्पर्धी कंपनियों की मार्केटिंग रणनीति कितनी सफल रही। इसके बाद Apple अपने iPhone 18 Pro की मार्केटिंग और सेवाओं को उसी हिसाब से पेश कर सकता है। अभी आधिकारिक पुष्टि का इंतजार फिलहाल iPhone 18 Pro से जुड़ी अधिकांश जानकारी लीक्स और उद्योग विशेषज्ञों की रिपोर्ट्स पर आधारित है। लॉन्च के बाद ही फोन की वास्तविक कीमत, स्पेसिफिकेशन और उपलब्धता की पूरी तस्वीर सामने आएगी।
Vietnam Boat Accident: वियतनाम के फु क्वोक द्वीप के पास हुए दर्दनाक नाव हादसे में जान गंवाने वाले 15 भारतीयों के शव जल्द भारत लाए जाएंगे। वियतनाम स्थित भारतीय दूतावास ने बताया है कि सभी पार्थिव शरीरों को आवश्यक कानूनी और प्रशासनिक औपचारिकताएं पूरी होने के बाद जल्द से जल्द भारत भेजा जाएगा। इस बीच वियतनाम सरकार ने हादसे की उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए हैं। भारतीय दूतावास ने जारी किया अपडेट भारतीय दूतावास ने सोशल मीडिया पर जानकारी देते हुए बताया कि हादसे में मारे गए 15 भारतीयों के शव हो ची मिन्ह सिटी ले जाए जा रहे हैं। वहां पहचान और अन्य जरूरी प्रक्रियाएं पूरी की जाएंगी। इसके बाद पार्थिव शरीरों को भारत भेजने की व्यवस्था की जाएगी। दूतावास ने कहा कि वह वियतनामी प्रशासन के साथ लगातार समन्वय बनाए हुए है और पीड़ित परिवारों को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। वियतनाम सरकार ने जांच के दिए आदेश स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, वियतनाम के प्रधानमंत्री ले मिन्ह हंग ने हादसे की विस्तृत जांच के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा है कि दुर्घटना के लिए जो भी जिम्मेदार पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। सरकार ने संबंधित एजेंसियों को हादसे के कारणों का पता लगाने और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। अस्पतालों में रखे गए शव आन जियांग प्रांत के अधिकारियों के अनुसार, बरामद किए गए पांच शवों को कीन जियांग जनरल अस्पताल में रखा गया है। वहीं, अन्य 10 शवों को हो ची मिन्ह सिटी के चो रे अस्पताल भेजा गया है, जहां उनकी पहचान और अन्य कानूनी प्रक्रियाएं पूरी की जा रही हैं। लावा मोबाइल कंपनी की ट्रिप के दौरान हुआ हादसा जानकारी के अनुसार, हादसे का शिकार हुई नाव में कुल 36 लोग सवार थे। इनमें 32 भारतीय नागरिक और नाव के चालक दल के सदस्य शामिल थे। बताया गया है कि लावा मोबाइल कंपनी ने अपने कर्मचारियों के लिए वियतनाम की यात्रा आयोजित की थी। कंपनी के करीब 110 कर्मचारी छुट्टियां मनाने के लिए वियतनाम पहुंचे थे। हादसे में जान गंवाने वाले सभी भारतीय दक्षिण भारत के विभिन्न राज्यों के निवासी बताए जा रहे हैं। हादसे के बाद परिवारों में शोक नाव हादसे के बाद मृतकों के परिवारों में शोक की लहर है। भारतीय दूतावास, स्थानीय प्रशासन और संबंधित एजेंसियां शवों को जल्द भारत पहुंचाने और पीड़ित परिवारों को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने में जुटी हुई हैं। वहीं, हादसे के कारणों की जांच जारी है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।