Iran

India LPG tanker Hormuz
होर्मुज में ईरान ने रोका भारतीय LPG टैंकर, 34 क्रू मेंबर फंसे

तेहरान, एजेंसियां। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच Iran ने India से जुड़े एक एलपीजी टैंकर को Strait of Hormuz के पास रोक दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक जहाज में 34 सदस्यीय चालक दल मौजूद है और यह करीब 36 लाख घरेलू गैस सिलेंडरों के बराबर एलपीजी लेकर जा रहा था।   कुवैत से गुजरात जा रहा था जहाज जानकारी के अनुसार यह टैंकर Mina Al Ahmadi Port (कुवैत) से Deendayal Port Kandla (गुजरात) के लिए रवाना हुआ था। लेकिन क्षेत्र में बढ़ते तनाव और 28 फरवरी से लागू समुद्री प्रतिबंधों के कारण जहाज आगे नहीं बढ़ सका।   यूएई के पास खड़ा है टैंकर फिलहाल यह जहाज Mina Saqr Port के पास लंगर डाले खड़ा है और आगे बढ़ने की अनुमति का इंतजार कर रहा है। जहाज के कप्तान वीरेंद्र विश्वकर्मा और क्रू मेंबर लगातार मदद की गुहार लगा रहे हैं।   15वें दिन में पहुंचा पश्चिम एशिया संघर्ष Israel, United States और Iran के बीच चल रहा टकराव अब और खतरनाक होता जा रहा है। मिसाइल और ड्रोन हमलों के बीच यह संघर्ष 15वें दिन में पहुंच चुका है। भारत सरकार ने कहा है कि क्षेत्र में तेजी से बदलती स्थिति पर उसकी करीबी नजर बनी हुई है।

Anjali Kumari मार्च 14, 2026 0
Russian oil 30-day concession
सभी देशों को रूसी तेल खरीदने की छूट, अमेरिका ने 30 दिन की रियायत दी कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर पार

तेल अवीव, एजेंसियां। अमेरिका ने दुनिया भर के देशों को रूसी तेल खरीदने के लिए 30 दिन की अस्थायी छूट दे दी है। यह फैसला इसलिए लिया गया है, क्योंकि ईरान जंग की वजह से दुनिया में ऑयल सप्लाई पर असर पड़ रहा है। सीमित मात्रा में रूसी तेल खरीद सकेंगेः इस छूट के तहत देश सीमित मात्रा में रूसी तेल खरीद सकेंगे। अमेरिका का कहना है कि इससे बाजार में ऑयल सप्लाई बढ़ेगी और कीमतों को कंट्रोल रखने में मदद मिलेगी। जंग की वजह से कच्चे तेल की कीमत भी 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है, जो अगस्त 2022 के बाद पहली बार हुआ है। युद्ध की वजह से ग्लोबल ऑयल मार्केट में चिंता बढ़ गई है। यह है अमेरिकी शर्तः अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने कहा कि यह इजाजत सिर्फ उस रूसी तेल के लिए है जो पहले से जहाजों में लोड होकर समुद्र में फंसा हुआ है। इसका मकसद बाजार में सप्लाई बढ़ाना है।

Anjali Kumari मार्च 13, 2026 0
Iran leader Ali Larijani reacts to Donald Trump’s warning amid rising US-Iran tensions.
ईरान-अमेरिका टकराव और गहरा: ट्रंप की चेतावनी पर ईरान का पलटवार, कहा-“सावधान रहें, कहीं आप ही खत्म न हो जाएं”

  मध्य पूर्व में जारी संघर्ष के बीच अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर खुलकर सामने आ गया है। तीखी बयानबाज़ी और सैन्य कार्रवाई के बीच दोनों देशों के नेताओं के बीच शब्दों की जंग भी तेज हो गई है। ईरान के वरिष्ठ नेता और सुरक्षा मामलों के प्रभावशाली चेहरों में शामिल अली लारिजानी ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को कड़ी चेतावनी दी है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर जारी एक संदेश में लारिजानी ने ट्रंप के हालिया बयान का जवाब देते हुए लिखा, “आपसे भी अधिक शक्तिशाली लोग ईरान को खत्म नहीं कर पाए। अपने लिए सावधान रहें, कहीं ऐसा न हो कि आप ही समाप्त कर दिए जाएं।” यह बयान उस समय आया है जब ट्रंप ने ईरान के खिलाफ बेहद कड़े शब्दों का इस्तेमाल करते हुए सैन्य कार्रवाई की धमकी दी थी।   ट्रंप की सख्त चेतावनी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में कहा था कि यदि ईरान ने दुनिया की तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को बाधित करने की कोशिश की, तो अमेरिका पहले की तुलना में “20 गुना अधिक ताकत” से हमला करेगा। ट्रंप ने अपने संदेश में कहा कि ऐसा हमला ईरान को इस स्थिति में पहुंचा सकता है कि वह दोबारा खड़ा भी न हो पाए। उन्होंने लिखा, “मौत, आग और तबाही उन पर बरसेगी-लेकिन मैं उम्मीद करता हूं कि स्थिति वहां तक न पहुंचे।” इसके साथ ही ट्रंप ने ईरान के नए सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई को लेकर भी तीखी टिप्पणी की। एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि उन्हें ईरान के नए नेतृत्व से संतोष नहीं है और उनका मानना है कि मोजतबा खामेनेई “शांति से नहीं रह पाएंगे।”   नए नेतृत्व पर भी जताई नाराज़गी दरअसल, ईरान में हाल ही में हुए बड़े राजनीतिक घटनाक्रम के बाद अयातुल्ला अली खामेनेई के निधन के पश्चात उनके दूसरे बेटे मोजतबा खामेनेई को नया सर्वोच्च नेता चुना गया है। इस फैसले को लेकर अमेरिका की ओर से पहले ही असंतोष जताया जा चुका है। ट्रंप ने इससे पहले यह भी कहा था कि ईरान के नए नेता के चयन में अमेरिका की भी भूमिका होनी चाहिए, जैसा कि अतीत में कुछ देशों के राजनीतिक मामलों में अमेरिका का प्रभाव देखा गया है।   हमलों के बाद भड़का युद्ध मध्य पूर्व में मौजूदा तनाव की शुरुआत उस समय हुई जब 28 फरवरी को अमेरिका और इज़राइल ने मिलकर ईरान पर बड़े सैन्य हमले किए। इन हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की मौत हो गई, जिसके बाद क्षेत्र में व्यापक संघर्ष शुरू हो गया। ईरान ने इस हमले के जवाब में इज़राइल और उसके सहयोगी देशों पर ड्रोन और मिसाइल हमले तेज कर दिए हैं। इस संघर्ष का असर अब कई खाड़ी देशों तक पहुंच चुका है।   होर्मुज़ जलडमरूमध्य पर संकट ईरान ने चेतावनी दी है कि जब तक युद्ध जारी रहेगा, वह क्षेत्र से तेल की आपूर्ति रोक सकता है। ईरानी अधिकारियों ने यहां तक कहा है कि वे “एक भी लीटर तेल के निर्यात” को रोक सकते हैं, खासकर उन देशों के लिए जो अमेरिका और इज़राइल का समर्थन कर रहे हैं। होर्मुज़ जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है। वैश्विक स्तर पर करीब 20 प्रतिशत कच्चा तेल इसी रास्ते से होकर गुजरता है। ऐसे में इस मार्ग पर किसी भी प्रकार का व्यवधान अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गंभीर प्रभाव डाल सकता है।   खाड़ी देशों में भी बढ़े हमले मंगलवार को ईरान ने इज़राइल और कई खाड़ी देशों को निशाना बनाते हुए नए हमले किए। बहरीन की राजधानी मनामा में एक रिहायशी इमारत पर हुए हमले में 29 वर्षीय महिला की मौत हो गई और आठ लोग घायल हो गए।   सऊदी अरब ने अपने पूर्वी तेल समृद्ध क्षेत्र में दो ड्रोन मार गिराने का दावा किया।   कुवैत की नेशनल गार्ड ने छह ड्रोन को नष्ट करने की जानकारी दी।   वहीं संयुक्त अरब अमीरात के औद्योगिक शहर रुवैस में एक ड्रोन हमले के बाद पेट्रोकेमिकल संयंत्रों के पास आग लग गई, हालांकि इस घटना में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है।   इज़राइल में भी अलर्ट इज़राइल में भी हमलों की आशंका के बीच अलर्ट जारी है। यरुशलम में सायरन बजने लगे और तेल अवीव के ऊपर कई धमाकों की आवाजें सुनी गईं। इज़राइली रक्षा प्रणाली ने ईरान की ओर से दागे गए कई मिसाइलों और ड्रोन को हवा में ही रोकने की कोशिश की।   वैश्विक बाजारों पर असर मध्य पूर्व में बढ़ते इस संघर्ष ने अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी चिंता बढ़ा दी है। तेल आपूर्ति में संभावित बाधा और युद्ध के फैलने की आशंका के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार और शेयर बाजारों में अस्थिरता देखी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह टकराव और बढ़ता है या होर्मुज़ जलडमरूमध्य से तेल आपूर्ति बाधित होती है, तो इसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। कुल मिलाकर, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ती सैन्य कार्रवाई और तीखी बयानबाज़ी ने मध्य पूर्व को एक बार फिर गंभीर संकट की स्थिति में ला खड़ा किया है। आने वाले दिनों में यह टकराव किस दिशा में जाता है, इस पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं।  

surbhi मार्च 11, 2026 0
ईरान की बड़ी चेतावनी: ‘सत्ता परिवर्तन की कोशिश हुई तो डिमोना परमाणु केंद्र पर होगा हमला’

अमेरिका-इजराइल के साथ जंग के छठे दिन तेहरान का सख्त संदेश मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच ईरान ने अमेरिका और इजराइल को कड़ी चेतावनी दी है। ईरान ने कहा है कि अगर इस्लामिक गणराज्य में सत्ता परिवर्तन की कोशिश की गई, तो वह इजराइल के डिमोना परमाणु केंद्र को निशाना बनाएगा। ईरान की अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी Iranian Students' News Agency (आईएसएनए) ने एक सैन्य अधिकारी के हवाले से यह जानकारी दी है। डिमोना परमाणु स्थल पर हमले की चेतावनी रिपोर्ट के अनुसार, ईरानी सैन्य अधिकारी ने साफ कहा कि यदि अमेरिका और इजराइल ईरान की मौजूदा व्यवस्था को हटाने की दिशा में आगे बढ़ते हैं, तो जवाब में इजराइल के परमाणु ठिकाने डिमोना को निशाना बनाया जाएगा। डिमोना स्थित परमाणु केंद्र को इजराइल के सबसे संवेदनशील और रणनीतिक ठिकानों में गिना जाता है। यह चेतावनी ऐसे समय आई है जब क्षेत्र में हालात पहले से ही बेहद तनावपूर्ण हैं। इजराइल पर मिसाइलों की बौछार, लाखों लोग बंकरों में गुरुवार तड़के ईरान ने इजराइल पर मिसाइलों की नई खेप दागी। हमले के बाद इजराइल के कई शहरों में सायरन बजने लगे और लाखों लोगों को बम शेल्टर में शरण लेनी पड़ी। यह हमला ऐसे समय हुआ जब अमेरिका और इजराइल के साथ ईरान की जंग छठे दिन में प्रवेश कर चुकी है। लगातार हो रहे हमलों और जवाबी कार्रवाई से पूरे क्षेत्र में भय और अस्थिरता का माहौल बना हुआ है। छठे दिन भी जारी संघर्ष मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पिछले कुछ दिनों में ईरान और इजराइल के बीच मिसाइल और ड्रोन हमलों की कई घटनाएं सामने आई हैं। अमेरिका के समर्थन से इजराइल की कार्रवाई और उसके जवाब में ईरान की प्रतिक्रिया ने हालात को और गंभीर बना दिया है। विश्लेषकों का मानना है कि अगर तनाव इसी तरह बढ़ता रहा, तो यह संघर्ष व्यापक क्षेत्रीय युद्ध का रूप ले सकता है, जिसका असर पूरी दुनिया की सुरक्षा और अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की बढ़ी चिंता ईरान की डिमोना परमाणु स्थल पर हमले की चेतावनी ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता बढ़ा दी है। परमाणु स्थलों को निशाना बनाने की किसी भी कोशिश से बड़े पैमाने पर विनाश और पर्यावरणीय संकट का खतरा पैदा हो सकता है। फिलहाल दुनिया की नजरें मध्य पूर्व पर टिकी हैं, जहां हालात तेजी से बदल रहे हैं और कूटनीतिक समाधान की संभावनाएं कमजोर पड़ती दिख रही हैं।  

surbhi मार्च 5, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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बिहार

नालंदा मंदिर हादसा: भीड़ ने ली 8 महिलाओं की जान, धार्मिक आयोजन में मची भगदड़ जैसी स्थिति

surbhi मार्च 31, 2026 0