Israel News

Israeli Prime Minister Benjamin Netanyahu arrives for court proceedings linked to ongoing corruption allegations.Netanyahu Corruption Trial Hearing Delayed
करप्शन केस में फिर टली नेतन्याहू की गवाही, अदालत में सुरक्षा कारणों का हवाला

Benjamin Netanyahu की आपराधिक मामलों में चल रही सुनवाई के दौरान अदालत में होने वाली उनकी गवाही एक बार फिर स्थगित कर दी गई है। इजरायली मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, प्रधानमंत्री के वकील ने अदालत को बताया कि नेतन्याहू पूरे दिन सुरक्षा और कूटनीतिक बैठकों में व्यस्त रहेंगे। बताया गया है कि बचाव पक्ष की ओर से यरुशलम जिला अदालत को एक गोपनीय कार्यक्रम भी सौंपा गया, जिसमें देर रात तक निर्धारित बैठकों का उल्लेख किया गया था। पहले भी टल चुकी है पेशी यह पहली बार नहीं है जब नेतन्याहू की अदालत में पेशी टाली गई हो। इससे पहले 27 अप्रैल को भी सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए उनकी गवाही अनिश्चित समय के लिए स्थगित कर दी गई थी। इसी वर्ष अदालत ने सुरक्षा और विदेश नीति से जुड़ी जिम्मेदारियों को देखते हुए उनकी कुछ अन्य निर्धारित पेशियां भी रद्द कर दी थीं। सरकारी वकीलों ने जताई नाराजगी सरकारी वकीलों ने इस फैसले पर आपत्ति जताई थी। उनका कहना था कि प्रधानमंत्री को अदालत की कार्यवाही के अनुसार अपना कार्यक्रम तय करना चाहिए ताकि जिरह की प्रक्रिया समय पर पूरी हो सके। इसके बावजूद अदालत ने नेतन्याहू की अनुपस्थिति की अनुमति देते हुए दूसरे गवाह की गवाही सुनने का फैसला किया। अदालत ने दूसरे गवाह को बुलाया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह फैसला यरुशलम जिला अदालत के न्यायाधीशों: Rivka Friedman-Feldman Moshe Bar-Am Oded Shaham की पीठ ने लिया। अब अदालत नेतन्याहू के पूर्व सहयोगी और राज्य गवाह Shlomo Filber की पत्नी Ilanit Filber की गवाही सुनेगी। ‘केस 4000’ में गंभीर आरोप यह मामला चर्चित “केस 4000” से जुड़ा है, जिसे Bezeq-Walla प्रकरण भी कहा जाता है। इसे नेतन्याहू के खिलाफ चल रहे सबसे गंभीर मामलों में माना जाता है। आरोप है कि नेतन्याहू ने कारोबारी Shaul Elovitch की टेलीकॉम कंपनी Bezeq को सरकारी स्तर पर लाभ पहुंचाने वाले फैसलों को आगे बढ़ाया। इसके बदले उनसे जुड़े समाचार प्लेटफॉर्म Walla! पर प्रधानमंत्री के पक्ष में सकारात्मक कवरेज प्रकाशित किए जाने का आरोप है। नेतन्याहू ने आरोपों से किया इनकार नेतन्याहू लगातार इन सभी आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताते रहे हैं। उन्होंने कथित “डायरेक्टिव मीटिंग” समेत कई आरोपों को खारिज किया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, साल 2022 में श्लोमो फिलबर की गवाही में कई विरोधाभास सामने आए थे, जिसके बाद सरकारी वकीलों ने उनके साथ हुए स्टेट विटनेस समझौते को रद्द करने की मांग भी की थी। दिसंबर 2024 से जारी है ट्रायल नेतन्याहू ने पहली बार दिसंबर 2024 में अदालत में गवाही दी थी। जून 2025 से मामले में जिरह का चरण शुरू हुआ, जो अब भी जारी है। इजरायल की राजनीति और न्यायिक व्यवस्था के लिहाज से यह मामला बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि किसी मौजूदा प्रधानमंत्री के खिलाफ चल रहा यह सबसे चर्चित भ्रष्टाचार मुकदमों में शामिल है।  

surbhi मई 19, 2026 0
UAE denies Israeli claim of secret Benjamin Netanyahu visit during Iran conflict
नेतन्याहू के ‘गुप्त यूएई दौरे’ के दावे को अबू धाबी ने किया खारिज, कहा- ऐसा कुछ नहीं हुआ

इजरायल के दावे से मचा कूटनीतिक विवाद Benjamin Netanyahu के कार्यालय द्वारा किए गए एक बड़े दावे को संयुक्त अरब अमीरात ने सिरे से खारिज कर दिया है। इजरायल ने कहा था कि ईरान युद्ध के दौरान नेतन्याहू ने गुप्त रूप से यूएई का दौरा किया और राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद से मुलाकात की थी। हालांकि, United Arab Emirates ने तुरंत प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ऐसा कोई दौरा या गुप्त बैठक नहीं हुई। इजरायल ने क्या दावा किया? इजरायली प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार मार्च 26 को पश्चिम एशिया में युद्ध के चरम के दौरान नेतन्याहू ने यूएई के अल ऐन शहर में राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान से कई घंटों तक बातचीत की। इजरायल ने इस बैठक को दोनों देशों के रिश्तों में “ऐतिहासिक सफलता” बताया और कहा कि चर्चा क्षेत्रीय सुरक्षा और रणनीतिक सहयोग पर केंद्रित थी। यूएई ने जारी किया आधिकारिक बयान यूएई विदेश मंत्रालय ने आधिकारिक बयान जारी कर कहा कि नेतन्याहू के कथित दौरे और किसी इजरायली सैन्य प्रतिनिधिमंडल के आने की खबरें पूरी तरह गलत हैं। यूएई ने साफ कहा कि इजरायल के साथ उसके संबंध 2020 में हुए Abraham Accords के तहत खुले तौर पर संचालित होते हैं, न कि किसी गुप्त समझौते के जरिए। युद्ध के बीच बढ़ा सुरक्षा सहयोग हालांकि दोनों देशों के बयानों में विरोधाभास है, लेकिन रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि ईरान संघर्ष के दौरान इजरायल और यूएई के बीच सुरक्षा सहयोग बढ़ा था। सूत्रों के मुताबिक इजरायली खुफिया एजेंसी मोसाद के प्रमुख डेडी बरनेआ ने युद्ध के दौरान कम से कम दो बार यूएई का दौरा किया था। इन बैठकों में सैन्य और सुरक्षा मामलों पर समन्वय की चर्चा हुई। यूएई में तैनात किया गया था आयरन डोम अमेरिका के इजरायल में राजदूत माइक हकाबी ने भी दावा किया कि युद्ध के दौरान यूएई के अनुरोध पर इजरायल ने वहां अपनी आयरन डोम एयर डिफेंस प्रणाली और सैन्य कर्मियों को तैनात किया था। यह पहली बार था जब इजरायल की यह रक्षा प्रणाली विदेश में तैनात की गई। ईरान के हमलों से बढ़ा तनाव ईरान ने अमेरिका और इजरायल की सैन्य कार्रवाई के जवाब में खाड़ी देशों पर भी हमले किए थे। रिपोर्ट्स के अनुसार यूएई समेत कई देशों में ऊर्जा और नागरिक ढांचे को निशाना बनाया गया। सार्वजनिक दूरी, लेकिन रणनीतिक रिश्ते कायम 2020 के बाद से यूएई और इजरायल के बीच आर्थिक और सुरक्षा सहयोग तेजी से बढ़ा है। हालांकि, गाजा युद्ध और ईरान संकट के बीच यूएई सार्वजनिक रूप से इजरायल की सैन्य कार्रवाइयों से दूरी बनाने की कोशिश करता रहा है। इसी वजह से नेतन्याहू के गुप्त दौरे के दावे को लेकर दोनों देशों के बीच बयानबाजी ने नया कूटनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है।  

surbhi मई 14, 2026 0
Hezbollah leader Naim Qassem delivers speech amid rising Israel Lebanon border tensions
हिजबुल्लाह का अल्टीमेटम: "हथियार नहीं छोड़ेंगे", इजराइल से सीधी बातचीत से इनकार

मध्य पूर्व में तनाव एक बार फिर बढ़ता दिख रहा है। लेबनान के शक्तिशाली सशस्त्र समूह Hezbollah ने साफ कर दिया है कि वह न तो अपने हथियार छोड़ेगा और न ही Israel के साथ सीधे बातचीत करेगा। नईम कासिम का दोटूक संदेश Naim Qassem ने कहा कि मौजूदा हालात में इजराइल से किसी भी तरह की प्रत्यक्ष वार्ता संभव नहीं है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा: "हम अपने हथियार नहीं छोड़ेंगे।" यह बयान ऐसे समय आया है जब क्षेत्र में युद्धविराम को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। लेबनान सरकार को भी चेतावनी कासिम ने Lebanon की सरकार पर भी निशाना साधा। उनका आरोप है कि सरकार ने इजराइल के सामने जरूरत से ज्यादा रियायतें दी हैं। हिजबुल्लाह चाहता है कि यदि कोई वार्ता हो भी, तो वह केवल अप्रत्यक्ष माध्यमों से हो, सीधे नहीं। दक्षिणी लेबनान में इजराइली कार्रवाई Israel Defense Forces ने बताया कि दक्षिणी लेबनान में उसके सैनिकों ने संदिग्ध गतिविधियां देखीं। इसके बाद वायुसेना ने कार्रवाई करते हुए तीन आतंकवादियों को मार गिराया। आईडीएफ ने हिजबुल्लाह के कई ठिकानों और सैन्य ढांचे को भी निशाना बनाने का दावा किया है। नेतन्याहू का आरोप इजराइली प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने हिजबुल्लाह पर युद्धविराम समझौते को कमजोर करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि उत्तरी सीमा की सुरक्षा के लिए लेबनान में सैन्य अभियान जारी रहेगा। क्या युद्धविराम खतरे में है? हालात संकेत दे रहे हैं कि संघर्ष फिर भड़क सकता है। हिजबुल्लाह के सख्त रुख और इजराइल की लगातार सैन्य कार्रवाई से युद्धविराम पर खतरा मंडरा रहा है। अमेरिका की भूमिका अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने हाल ही में इजराइल-लेबनान युद्धविराम को तीन सप्ताह बढ़ाने की घोषणा की थी। साथ ही, अमेरिका ने लेबनान को हिजबुल्लाह से निपटने में सहयोग का आश्वासन भी दिया है। मध्य पूर्व की स्थिति फिलहाल बेहद नाजुक बनी हुई है। आने वाले दिनों में घटनाक्रम पूरे क्षेत्र की दिशा तय कर सकता है।  

surbhi अप्रैल 28, 2026 0
Israeli PM Benjamin Netanyahu speaking after recovery from early-stage prostate cancer treatment
शुरुआती स्टेज में प्रोस्टेट कैंसर से जूझे नेतन्याहू, इलाज के बाद बोले- अब पूरी तरह स्वस्थ

इजरायली प्रधानमंत्री ने खुद दी स्वास्थ्य की जानकारी इजरायल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने खुलासा किया है कि उन्हें शुरुआती चरण का प्रोस्टेट कैंसर हुआ था। हालांकि, समय रहते इलाज कराने के बाद अब वह पूरी तरह स्वस्थ हैं। उन्होंने बताया कि यह जानकारी सार्वजनिक करने में देरी इसलिए की गई ताकि मौजूदा युद्ध के दौरान ईरान इसे इजरायल के खिलाफ प्रचार के तौर पर इस्तेमाल न कर सके। नियमित जांच में सामने आई बीमारी नेतन्याहू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर बताया कि एक साल पहले बढ़े हुए लेकिन गैर-कैंसरयुक्त प्रोस्टेट की सफल सर्जरी के बाद वह लगातार मेडिकल निगरानी में थे। हाल ही में हुई जांच में प्रोस्टेट में एक सेंटीमीटर से भी छोटा धब्बा पाया गया। डॉक्टरों ने आगे की जांच में इसे शुरुआती चरण का कैंसर बताया। राहत की बात यह रही कि कैंसर शरीर के किसी अन्य हिस्से में नहीं फैला था। डॉक्टरों ने दिए थे दो विकल्प नेतन्याहू के अनुसार, डॉक्टरों ने उन्हें दो विकल्प सुझाए थे। पहला, नियमित निगरानी के जरिए स्थिति पर नजर रखना। दूसरा, लक्षित उपचार के माध्यम से कैंसर को पूरी तरह खत्म करना। उन्होंने दूसरा विकल्प चुना। नेतन्याहू ने बताया कि कुछ छोटी उपचार प्रक्रियाओं के बाद कैंसर का निशान पूरी तरह समाप्त हो गया। इलाज के दौरान भी जारी रखा काम इजरायली प्रधानमंत्री ने कहा कि इलाज के दौरान उन्होंने अपना काम नहीं रोका। उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा कि उपचार के दौरान उन्होंने एक किताब भी पढ़ डाली और अपने सरकारी कार्यों को भी जारी रखा। उन्होंने Hadassah Medical Center के डॉक्टरों और मेडिकल टीम का आभार व्यक्त किया। युद्ध के बीच स्वास्थ्य पर उठे थे सवाल यह खुलासा ऐसे समय में हुआ है जब मध्य पूर्व में तनाव चरम पर है। इजरायल और लेबनान के बीच संघर्ष लगातार जारी है। ऐसे में नेतन्याहू की सेहत को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा हो रही थी। शुरुआती पहचान से संभव है सफल इलाज प्रोस्टेट कैंसर पुरुषों में होने वाले आम कैंसरों में से एक है। विशेषज्ञों के मुताबिक, यदि इसकी पहचान शुरुआती चरण में हो जाए तो इसका इलाज बेहद प्रभावी साबित होता है। नेतन्याहू का मामला भी इसी का उदाहरण है।  

surbhi अप्रैल 25, 2026 0
Massive swarm of bees covering streets and buildings in Netivot Israel causing panic among residents
इज़राइल के नेटीवोट शहर में भयानक घटना: हजारों मधुमक्खियों के झुंड से मचा हड़कंप, सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस

  शहर पर अचानक मधुमक्खियों का हमला दक्षिणी इज़राइल के नेटीवोट शहर में अचानक हजारों मधुमक्खियों के विशाल झुंड ने लोगों को दहशत में डाल दिया। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में देखा जा सकता है कि पूरा इलाका मधुमक्खियों से ढक गया है, जिससे लोगों को घरों में रहने की सलाह दी गई है। स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि स्थानीय प्रशासन ने लोगों से अपने घरों के दरवाजे और खिड़कियां बंद रखने को कहा। मधुमक्खियों को हटाने और उनके अचानक आने के कारणों की जांच के लिए टीमें तैनात कर दी गई हैं। वायरल वीडियो और दहशत इस घटना के वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर तेजी से वायरल हो रहे हैं। लोगों के बीच यह सवाल उठ रहा है कि आखिर इतनी बड़ी संख्या में मधुमक्खियां अचानक शहर में कैसे पहुंच गईं। कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि इस कारण हवाई गतिविधियां भी प्रभावित हुईं, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। सोशल मीडिया पर धार्मिक व्याख्याएं इस घटना के बाद इंटरनेट पर अलग-अलग तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। कई यूजर्स इसे धार्मिक संकेत या “दैवीय चेतावनी” के रूप में देख रहे हैं। कुछ लोगों ने बाइबिल की पुस्तक Isaiah 7:18 का हवाला दिया, जिसमें मधुमक्खियों और अन्य प्राकृतिक घटनाओं का उल्लेख मिलता है। वहीं कुछ यूजर्स ने कुरान की आयतों का जिक्र करते हुए इसे ऐतिहासिक संकेतों से जोड़ने की कोशिश की। विशेषज्ञों की अलग राय हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी घटनाएं अक्सर पर्यावरणीय बदलाव, मौसम या कॉलोनी मूवमेंट जैसे प्राकृतिक कारणों से होती हैं। मधुमक्खियों का एक जगह से दूसरी जगह अचानक बड़ी संख्या में जाना कोई असामान्य जैविक घटना नहीं है। मध्य पूर्व तनाव के बीच चर्चा तेज यह घटना ऐसे समय पर सामने आई है जब मध्य पूर्व पहले से ही राजनीतिक और सैन्य तनावों से गुजर रहा है। इसी कारण सोशल मीडिया पर लोग इसे मौजूदा हालात से जोड़कर अलग-अलग व्याख्याएं कर रहे हैं। नेटीवोट में मधुमक्खियों का यह असामान्य झुंड भले ही प्राकृतिक घटना हो, लेकिन इसने लोगों के बीच डर, जिज्ञासा और धार्मिक बहस को जन्म दे दिया है। फिलहाल प्रशासन स्थिति को नियंत्रण में लाने की कोशिश कर रहा है और विशेषज्ञ इसके कारणों की जांच कर रहे हैं।  

surbhi अप्रैल 18, 2026 0
Israeli Prime Minister Benjamin Netanyahu addressing citizens about continued military operations against Hezbollah in Lebanon.
लेबनान में ‘सीजफायर नहीं’, हिज़्बुल्लाह पर हमले जारी रहेंगे: नेतन्याहू

Israel-Lebanon Conflict: इजराइल के प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू ने साफ कर दिया है कि लेबनान के साथ किसी भी तरह का संघर्षविराम (सीजफायर) लागू नहीं है। उन्होंने कहा कि इजरायली सेना हिज़्बुल्लाह के खिलाफ अपनी कार्रवाई जारी रखेगी। “हम तब तक नहीं रुकेंगे…” नेतन्याहू ने उत्तरी इजराइल के नागरिकों को संबोधित करते हुए कहा: “लेबनान में कोई संघर्षविराम लागू नहीं है। हम पूरी ताकत से हिज़्बुल्लाह पर हमले कर रहे हैं और तब तक नहीं रुकेंगे, जब तक अपनी सुरक्षा बहाल नहीं हो जाती।” बातचीत के लिए भी दिए निर्देश हालांकि, इससे पहले नेतन्याहू ने एक अलग बयान में संकेत दिया था कि: उन्होंने कैबिनेट को लेबनान के साथ बातचीत शुरू करने के निर्देश दिए हैं यह बातचीत जल्द शुरू हो सकती है बातचीत का फोकस क्या होगा? नेतन्याहू के मुताबिक संभावित बातचीत इन मुद्दों पर केंद्रित होगी: हिज़्बुल्लाह का निरस्त्रीकरण (हथियार छोड़ना) इजराइल और लेबनान के बीच शांतिपूर्ण संबंध स्थापित करना लेबनान के PM के बयान का जिक्र इजरायली प्रधानमंत्री ने लेबनान के प्रधानमंत्री द्वारा बेरूत के निरस्त्रीकरण की अपील की सराहना भी की और इसे बातचीत के लिए सकारात्मक संकेत बताया।  

surbhi अप्रैल 10, 2026 0
Iran Israel US war destruction with missiles, damaged buildings and rising global economic losses
ईरान-अमेरिका-इजरायल युद्ध: 4,000 से ज्यादा मौतें, 54.88 लाख करोड़ का नुकसान - किसे सबसे ज्यादा चोट?

मध्य-पूर्व में जारी तनाव ने अब एक बड़े वैश्विक संकट का रूप ले लिया है। Iran, Israel और United States के बीच चल रहे संघर्ष ने न सिर्फ हजारों जिंदगियां छीन ली हैं, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था को भी गहरी चोट पहुंचाई है। एक महीने से अधिक समय से जारी इस युद्ध के चलते दुनिया की GDP को अब तक लगभग 54.88 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हो चुका है। ईरान सबसे ज्यादा प्रभावित इस युद्ध की सबसे भारी कीमत ईरान चुका रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान में 7,300 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है और 25,000 से अधिक लोग घायल हुए हैं। लगातार मिसाइल और हवाई हमलों ने देश के इंफ्रास्ट्रक्चर-स्कूल, अस्पताल और ऐतिहासिक इमारतों-को बुरी तरह तबाह कर दिया है। अनुमान है कि अगर हालात नहीं सुधरे तो ईरान की GDP में 10% से ज्यादा गिरावट आ सकती है, जो उसे कई दशक पीछे धकेल सकती है। अमेरिका पर भी भारी आर्थिक बोझ हालांकि युद्ध का मुख्य मैदान ईरान है, लेकिन United States भी आर्थिक रूप से बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। अब तक इस युद्ध में अमेरिका को करीब 7.49 लाख करोड़ रुपये (80.4 बिलियन डॉलर) का नुकसान हो चुका है। यदि संघर्ष लंबा खिंचता है, तो यह नुकसान 210 बिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है। ऊर्जा बाजार और वैश्विक व्यापार में बाधा इसका मुख्य कारण है। इजरायल में भी भारी तबाही Israel में भी इस युद्ध का गंभीर असर देखने को मिला है। यहां 33,000 से ज्यादा मौतें और हजारों घायल सामने आए हैं। आर्थिक रूप से भी इजरायल को करीब 15 अरब डॉलर का नुकसान हुआ है, जबकि लगातार हमलों से देश की सुरक्षा और बुनियादी ढांचे पर दबाव बढ़ गया है। खाड़ी देशों और वैश्विक असर इस युद्ध की आंच सिर्फ तीन देशों तक सीमित नहीं रही। Qatar, Kuwait, Saudi Arabia और United Arab Emirates जैसे देशों की अर्थव्यवस्था पर भी इसका गहरा असर पड़ा है। तेल उत्पादन में गिरावट, LNG सुविधाओं पर खतरा और पानी की आपूर्ति तक प्रभावित होने की आशंका जताई गई है। वहीं Lebanon और Iraq जैसे देशों को भी जान-माल और आर्थिक दोनों स्तर पर भारी नुकसान झेलना पड़ा है। लेबनान में 1,400 से ज्यादा मौतें और लाखों लोग विस्थापित हो चुके हैं। भारत और दुनिया पर असर इस युद्ध का सीधा असर भले भारत पर न दिखे, लेकिन आर्थिक झटका हर आम आदमी तक पहुंच रहा है। कच्चे तेल की कीमत $69 प्रति बैरल से बढ़कर $125 तक पहुंच गई है, जिससे पेट्रोल-डीजल महंगे हो रहे हैं। शेयर बाजार में गिरावट से भारतीय निवेशकों के करीब 37 लाख करोड़ रुपये डूब चुके हैं। वैश्विक स्तर पर सप्लाई चेन टूट चुकी है, जिससे 1973 के तेल संकट जैसी स्थिति बन गई है। कई देशों में ऊर्जा आपातकाल, स्कूल बंद और ईंधन निर्यात पर रोक जैसे कदम उठाए जा रहे हैं। महंगाई का डोमिनो इफेक्ट तेल की कमी का असर अब हर सेक्टर पर दिख रहा है। ट्रांसपोर्टेशन, मैन्युफैक्चरिंग और रोजमर्रा की चीजों की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं। उर्वरकों की कमी से खाद्य पदार्थ महंगे होने की आशंका है, जबकि प्लास्टिक, टेक्सटाइल और केमिकल इंडस्ट्री की लागत में 30% से 50% तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।  

surbhi अप्रैल 8, 2026 0
Israeli Prime Minister Netanyahu reacting to US-Iran 14-day ceasefire announcement by Trump amid Middle East tension
US–Iran Ceasefire: ट्रंप के फैसले से इजरायल असहज, नेतन्याहू पर बढ़ा दबाव

मिडिल ईस्ट की राजनीति में बड़ा मोड़ तब आया जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अचानक ईरान पर हमले रोकने और 14 दिन के संघर्षविराम का ऐलान कर दिया। इस फैसले ने जहां वैश्विक स्तर पर राहत दी, वहीं इजरायल के लिए यह एक बड़ा रणनीतिक झटका साबित हुआ। ट्रंप के फैसले से क्यों चौंका इजरायल? इजरायल लंबे समय से ईरान के खिलाफ सख्त सैन्य कार्रवाई के पक्ष में था। लेकिन सीजफायर के ऐलान ने उसकी रणनीति को अचानक रोक दिया। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और उनका सुरक्षा तंत्र इस फैसले से असहज नजर आ रहा है, क्योंकि: इजरायल ईरान को सैन्य रूप से कमजोर करना चाहता था युद्धविराम से उसके अभियान की गति थम गई लेबनान और हिजबुल्लाह को लेकर उसकी चिंताएं बनी हुई हैं ट्रंप ने क्यों लिया यह फैसला? डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि: अमेरिका अपने प्रमुख सैन्य लक्ष्य हासिल कर चुका है अब स्थायी शांति समझौते की दिशा में बातचीत जरूरी है स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खोलना प्राथमिक शर्त थी, जिस पर ईरान राजी हो गया यह फैसला शहबाज शरीफ और पाकिस्तानी सैन्य नेतृत्व के साथ बातचीत के बाद लिया गया। ईरान की शर्तें क्या हैं? ईरान ने संघर्षविराम के लिए 10 सूत्रीय प्रस्ताव रखा, जिसमें प्रमुख बिंदु शामिल हैं: क्षेत्रीय हमलों को पूरी तरह रोकना ईरान पर लगे प्रतिबंधों को हटाना फ्रीज की गई संपत्तियों को वापस करना होर्मुज मार्ग को सुरक्षित और खुला रखना परमाणु हथियार न बनाने की प्रतिबद्धता ईरान के नेतृत्व, जिसमें मोज्तबा खामेनेई की भूमिका अहम मानी जा रही है, ने इन शर्तों पर सहमति के बाद सीजफायर को मंजूरी दी। इजरायल की सबसे बड़ी चिंता इजरायल के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह है कि: सीजफायर का असर लेबनान और हिजबुल्लाह पर पड़ सकता है उसकी स्वतंत्र सैन्य रणनीति सीमित हो सकती है हालांकि इजरायल ने औपचारिक रूप से सीजफायर का सम्मान करने की बात कही है, लेकिन अंदरूनी असंतोष साफ नजर आ रहा है। आगे क्या होगा? 14 दिन का यह संघर्षविराम बेहद अहम है पाकिस्तान में आगे शांति वार्ता प्रस्तावित है चीन और अन्य देशों की भूमिका भी बढ़ सकती है यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या यह अस्थायी शांति स्थायी समाधान का रास्ता खोल पाएगी या फिर क्षेत्र में तनाव दोबारा बढ़ेगा।  

surbhi अप्रैल 8, 2026 0
Destroyed apartment building in Haifa after Iranian missile strike with rescue teams searching debris
हाइफा पर ईरान का मिसाइल हमला, अपार्टमेंट ढहा; 2 की मौत, 2 लापता

ईरान और इजरायल के बीच जारी तनाव के बीच एक बड़ा हमला सामने आया है। ईरान ने इजरायल के उत्तरी शहर हाइफा पर मिसाइल दागी, जिसमें एक रिहायशी अपार्टमेंट ब्लॉक बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। इस हमले में दो लोगों की मौत हो गई, जबकि दो अन्य अब भी लापता बताए जा रहे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, रविवार को ईरान की ओर से इजरायल पर कुल चार मिसाइलें दागी गईं। इनमें से एक भारी मिसाइल सीधे हाइफा स्थित एक अपार्टमेंट पर गिरी, जिससे इमारत का आधा हिस्सा ढह गया। बचा हुआ हिस्सा भी असंतुलित हो गया, जिससे उसके कभी भी गिरने का खतरा बना रहा और राहत-बचाव कार्य बेहद चुनौतीपूर्ण हो गया। पूरी रात चला रेस्क्यू ऑपरेशन हमले के बाद राहत और बचाव दलों ने तुरंत मोर्चा संभाला और पूरी रात मलबे में फंसे लोगों को निकालने का प्रयास जारी रखा। सोमवार सुबह तक चले अभियान में दो लोगों के शव बरामद किए गए हैं, जबकि दो अन्य लोगों की तलाश अब भी जारी है। अधिकारियों का कहना है कि मलबा हटाने का काम सावधानी से किया जा रहा है, ताकि और नुकसान न हो। लगातार बजते रहे सायरन, बढ़ा खतरा ईरान के नए हमलों के बाद पूरे मध्य इजरायल में हवाई हमले के सायरन लगातार गूंजते रहे, जिससे लोगों में दहशत का माहौल बन गया। इजरायली सेना ने ईरान की ओर से दागी गई अन्य मिसाइलों का भी पता लगाया, जिसके बाद कई इलाकों में अलर्ट जारी कर दिया गया। सोमवार सुबह भी ईरान की ओर से तीन और मिसाइलें दागे जाने की जानकारी मिली, जिसके बाद मध्य इजरायल में हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया। हालांकि, इजरायल की एयर डिफेंस सिस्टम ने ज्यादातर मिसाइलों को हवा में ही निष्क्रिय कर दिया, जबकि कुछ मिसाइलें खाली क्षेत्रों में जाकर गिरीं। रणनीतिक रूप से अहम है हाइफा हाइफा इजरायल का तीसरा सबसे बड़ा शहर है और इसका सामरिक महत्व काफी ज्यादा है। यह शहर भूमध्य सागर के तट पर और माउंट कार्मेल की ढलानों पर स्थित है। यही वजह है कि यह अक्सर दुश्मन देशों के निशाने पर रहता है। इसके अलावा, हाइफा लेबनान सीमा के काफी करीब है, जहां से हिज़्बुल्लाह के रॉकेट भी इस क्षेत्र को निशाना बना सकते हैं। इस कारण यह इलाका लंबे समय से सुरक्षा के लिहाज से संवेदनशील बना हुआ है। हमले के बीच फिर जारी हुआ अलर्ट हाइफा में अपार्टमेंट पर मिसाइल गिरने के बाद जब राहत-बचाव कार्य चल रहा था, तभी एक और संभावित मिसाइल हमले की चेतावनी जारी की गई। इससे बचाव कार्य में लगे दलों और स्थानीय लोगों की चिंता और बढ़ गई। हालांकि, कुछ समय बाद इस अलर्ट को वापस ले लिया गया। लगातार हो रहे हमलों और बढ़ते तनाव के बीच इजरायल में सुरक्षा व्यवस्था और सख्त कर दी गई है। वहीं, हालात को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिंता जताई जा रही है।  

surbhi अप्रैल 6, 2026 0
Iran President Pezeshkian addressing global tensions mentioning Pakistan and Middle East countries amid conflict
ईरान-इसराइल तनाव के बीच राष्ट्रपति पेज़ेश्कियान का बड़ा बयान, पाकिस्तान समेत कई देशों का किया ज़िक्र

मध्य-पूर्व में जारी तनाव और अमेरिका-इसराइल के साथ टकराव के बीच ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान ने वैश्विक प्रतिक्रिया को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने पाकिस्तान, तुर्की, इराक़, लेबनान, मिस्र और अन्य अरब देशों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन देशों के लोग अमेरिका और इसराइल की नीतियों के खिलाफ खुलकर अपनी नाराज़गी जता रहे हैं। राष्ट्रपति पेज़ेश्कियान ने कहा, “आज हम दुनिया के कई देशों के लोगों को जागते हुए देख रहे हैं। पाकिस्तान, तुर्की, इराक़, लेबनान, मिस्र और अरब देशों के लोग अमेरिका, इसराइल और उनके अपराधों के प्रति अपनी नाराज़गी को मुखरता से व्यक्त कर रहे हैं।” उन्होंने आगे कहा कि दुनिया के स्वतंत्र लोग “ज़ायनिस्टों” के साथ नहीं हैं और क्षेत्र में स्थिरता केवल आपसी सहयोग और देशों की संप्रभुता के सम्मान से ही संभव है। पाकिस्तान की मध्यस्थता की पेशकश ईरानी राष्ट्रपति का यह बयान ऐसे समय में आया है जब पाकिस्तान ने इस तनाव को कम करने के लिए मध्यस्थता की पेशकश की है। पाकिस्तान ने दोनों पक्षों से बातचीत के ज़रिए समाधान निकालने की अपील की है। 15 सूत्रीय योजना की चर्चा इस बीच अमेरिकी और इसराइली मीडिया की कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि अमेरिका ने समझौते के लिए पाकिस्तान के माध्यम से ईरान को 15 सूत्रीय प्रस्ताव सौंपा है। हालांकि, इस प्रस्ताव की आधिकारिक पुष्टि अब तक नहीं हुई है। बढ़ते तनाव के बीच वैश्विक नजर मध्य-पूर्व की स्थिति पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है। लगातार हो रहे हमलों और बयानों के बीच कूटनीतिक कोशिशें भी तेज़ हो गई हैं, लेकिन हालात अब भी तनावपूर्ण बने हुए हैं।  

surbhi मार्च 25, 2026 0
Missile launches and drones over Middle East conflict map highlighting Iran Israel escalating military tensions
ईरान का साफ संदेश: “पछतावा नहीं, तो जंग जारी” - इजरायल पर मिसाइल-ड्रोन हमले तेज

पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच ईरान ने एक बार फिर साफ कर दिया है कि वह पीछे हटने वाला नहीं है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने दो टूक कहा है कि जब तक अमेरिका और इजरायल अपने “हमलों पर पछतावा” नहीं जताते, तब तक जंग जारी रहेगी। चीन के विदेश मंत्री वांग यी से फोन पर बातचीत में अराघची ने कहा कि ईरान अपनी संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा आखिरी दम तक करेगा। उन्होंने तेहरान के सिविल और डिफेंस ठिकानों पर हुए हमलों को क्षेत्रीय अस्थिरता की असली वजह बताया। IRGC का पलटवार: इजरायल पर ताबड़तोड़ हमले जमीनी स्तर पर संघर्ष और तेज हो गया है। ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने इजरायल के कई अहम ठिकानों को निशाना बनाया है। खैबर शिकन, इमाद और सज्जील जैसी बैलिस्टिक मिसाइलों का इस्तेमाल कामिकाज़े ड्रोन से हमले तेल अवीव, रामत गन और नेगेव के सैन्य केंद्र टारगेट बीरशेबा में लॉजिस्टिक और कमांड हेडक्वार्टर पर सीधा प्रहार ईरान का दावा है कि इन हमलों ने इजरायल के एयर डिफेंस सिस्टम को भी भेद दिया। ट्रंप का बड़ा बयान: “ईरान में बदलाव, जल्द होगी डील” इन हमलों के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चौंकाने वाला दावा किया है। ट्रंप के मुताबिक: ईरान में “नई लीडरशिप” आ चुकी है पुरानी व्यवस्था और खामेनेई अब सीन से बाहर अमेरिका की बातचीत “सही लोगों” से जारी ईरान ने तेल-गैस से जुड़ा बड़ा “तोहफा” दिया ईरान की नेवी और एयरफोर्स लगभग खत्म ट्रंप ने कहा कि अब ईरान के पास बातचीत के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है। अंतरराष्ट्रीय कानून पर ईरान का हमला अराघची ने पश्चिमी देशों पर “डबल स्टैंडर्ड” अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि: यूक्रेन और गाजा के मामलों में अलग-अलग नियम अपनाए जा रहे हैं इससे अंतरराष्ट्रीय कानून कमजोर हो रहा है हालांकि, उन्होंने जर्मनी के राष्ट्रपति फ्रैंक-वाल्टर स्टाइनमीयर की सराहना की, जिन्होंने अमेरिकी और इजरायली हमलों को अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया। रूस की चेतावनी: न्यूक्लियर खतरा बढ़ा रूस ने भी इस तनाव पर चिंता जताई है। रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने बुशहर न्यूक्लियर प्लांट के पास हो रहे हमलों को बेहद खतरनाक बताया। रूस के मुताबिक: न्यूक्लियर ठिकानों को नुकसान हुआ तो बड़ा पर्यावरणीय संकट हो सकता है यह पूरे क्षेत्र के लिए विनाशकारी साबित होगा

surbhi मार्च 25, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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Indian delegation at international cyber security meeting after India assumed CCDB chairmanship role
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भारत को मिली बड़ी अंतरराष्ट्रीय जिम्मेदारी, संभाला CCDB के अध्यक्ष का पद

surbhi मई 15, 2026 0