रांची। झारखंड सरकार ने राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक प्रभावी और संसाधन संपन्न बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। अब प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी), सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी), सदर अस्पताल, अनुमंडल अस्पताल और आयुष्मान आरोग्य मंदिरों के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारियों को वित्तीय एवं प्रशासनिक अधिकार दिए गए हैं। इस फैसले के बाद उन्हें छोटी-छोटी जरूरतों और विकास कार्यों के लिए सिविल सर्जन पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। प्रभारियों को बनाया गया डीडीओ स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह ने बताया कि अधिकारों के विकेंद्रीकरण के तहत सभी स्वास्थ्य केंद्रों के प्रभारियों को ड्राइंग एंड डिस्बर्सिंग ऑफिसर (डीडीओ) बनाया गया है। इससे वे अपने संस्थान की जरूरतों के अनुसार स्वयं निर्णय लेकर राशि खर्च कर सकेंगे। दवाओं की खरीद, आवश्यक चिकित्सा उपकरणों की उपलब्धता, आउटसोर्स कर्मियों की नियुक्ति और अन्य जरूरी व्यवस्थाएं अब स्थानीय स्तर पर ही की जा सकेंगी। रखरखाव और विकास कार्यों में मिलेगी तेजी इस निर्णय के बाद स्वास्थ्य केंद्रों के प्रभारियों को अस्पताल संचालन एवं रखरखाव के लिए मिलने वाली राशि के उपयोग में भी स्वतंत्रता मिलेगी। अब उन्हें हर छोटे खर्च के लिए सिविल सर्जन की अनुमति का इंतजार नहीं करना होगा। इससे अस्पतालों में आवश्यक मरम्मत, सुविधाओं के विस्तार और मरीजों के लिए जरूरी संसाधन समय पर उपलब्ध कराए जा सकेंगे। हर स्तर के अस्पतालों को मिलती है वार्षिक राशि राज्य सरकार मुख्यमंत्री अस्पताल संचालन एवं रखरखाव योजना के तहत सदर अस्पतालों को 75 लाख रुपये, अनुमंडल अस्पतालों को 50 लाख रुपये, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र एवं रेफरल अस्पतालों को 10 लाख रुपये, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को 5 लाख रुपये तथा स्वास्थ्य उपकेंद्र और आयुष्मान आरोग्य मंदिरों को प्रतिवर्ष 2 लाख रुपये उपलब्ध कराती है। अब इन निधियों का उपयोग संबंधित केंद्रों के प्रभारी स्थानीय जरूरतों के अनुसार कर सकेंगे। मरीजों को मिलेगा सीधा लाभ स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि इस व्यवस्था से एक ओर सिविल सर्जनों पर प्रशासनिक बोझ कम होगा, वहीं दूसरी ओर अस्पतालों में निर्णय लेने की प्रक्रिया तेज होगी। स्थानीय स्तर पर त्वरित फैसले होने से स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार आएगा और मरीजों को बेहतर एवं समय पर उपचार की सुविधा मिल सकेगी।
रांची: मोहर्रम के अवसर पर झारखंड सरकार और पुलिस मुख्यालय ने पूरे राज्य में हाई अलर्ट जारी कर दिया है। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए राज्यभर में 16 हजार से अधिक पुलिस और होमगार्ड जवानों की तैनाती की जा रही है। इसके अलावा केंद्रीय अर्धसैनिक बलों की सात कंपनियां भी सुरक्षा व्यवस्था में लगाई जाएंगी। संवेदनशील इलाकों की निगरानी ड्रोन कैमरों और वीडियो सर्विलांस के माध्यम से की जाएगी। संवेदनशील इलाकों पर विशेष नजर पुलिस मुख्यालय के अनुसार जिन क्षेत्रों में पहले तनाव या विवाद की घटनाएं सामने आई हैं, वहां अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए जाएंगे। ड्रोन कैमरों के जरिए जुलूसों और भीड़भाड़ वाले इलाकों पर लगातार नजर रखी जाएगी। अफवाह फैलाने वालों पर होगी कार्रवाई प्रशासन ने सोशल मीडिया पर अफवाह फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी है। साइबर सेल को 24 घंटे सक्रिय रहने के निर्देश दिए गए हैं। किसी भी भड़काऊ पोस्ट या फर्जी सूचना पर तत्काल कार्रवाई की जाएगी। शांति समिति की बैठकें पूरी राज्य के सभी जिलों में शांति समिति की बैठकें आयोजित की गई हैं। प्रशासन ने सभी समुदायों के लोगों से आपसी सौहार्द बनाए रखने और किसी भी अफवाह पर ध्यान न देने की अपील की है। पुलिस की अपील पुलिस ने कहा है कि मोहर्रम के सभी जुलूस तय मार्ग और निर्धारित समय के अनुसार ही निकाले जाएंगे। लोगों से सहयोग करने तथा किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को देने की अपील की गई है।
रांची। झारखंड सरकार राज्य के हजारों संविदा, दैनिक वेतनभोगी, एकमुश्त पारिश्रमिक और आउटसोर्स कर्मियों को बड़ी राहत देने की तैयारी में है। सरकार ने प्रतियोगिता परीक्षाओं में अनुभव के आधार पर अतिरिक्त वेटेज देने का प्रस्ताव तैयार किया है। इस कदम से लंबे समय से विभिन्न विभागों में कार्यरत कर्मचारियों को सरकारी नौकरी पाने में महत्वपूर्ण लाभ मिल सकता है। संबंधित विभागों भेजा गया प्रस्ताव कार्मिक एवं प्रशासनिक सुधार विभाग ने इस प्रस्ताव को तैयार कर विधि और वित्त विभाग के पास मंजूरी के लिए भेज दिया है। मंजूरी मिलते ही सचिवालय, बोर्ड-निगम, क्षेत्रीय कार्यालयों और अन्य सरकारी संस्थानों में कार्यरत हजारों कर्मियों को इसका सीधा फायदा मिलेगा। प्रस्ताव के अनुसार तीन वर्ष से अधिक सेवा देने वाले कर्मचारियों को प्रतियोगिता परीक्षा के कुल अंकों में अतिरिक्त वेटेज मिलेगा। 36 माह तक सेवा करने वालों को कोई अतिरिक्त अंक नहीं मिलेगा, लेकिन 37वें माह से 0.15 प्रतिशत वेटेज शुरू होगा। इसके बाद सेवा अवधि बढ़ने के साथ यह लाभ भी बढ़ता जाएगा। 136 माह पर मिलेगा 15 प्रतिशत तक का वेटेज सरकार के प्रस्ताव के मुताबिक 40 माह की सेवा पर 0.60 प्रतिशत, 60 माह पर 3.60 प्रतिशत, 120 माह पर 12.60 प्रतिशत और 136 माह या उससे अधिक सेवा देने वालों को अधिकतम 15 प्रतिशत वेटेज दिया जाएगा। सरकार का मानना है कि संविदा और आउटसोर्स कर्मी वर्षों तक विभागीय कार्यों का अनुभव प्राप्त करते हैं और प्रशासनिक व्यवस्था को बेहतर तरीके से समझते हैं। ऐसे में उनके अनुभव को प्रतियोगिता परीक्षा में मान्यता देना एक न्यायसंगत कदम है। यदि यह प्रस्ताव लागू होता है तो हजारों कर्मियों के लिए नियमित सरकारी नौकरी का सपना साकार होने की दिशा में बड़ा कदम साबित हो सकता है।
रांची। झारखंड के महाधिवक्ता (एडवोकेट जनरल) राजीव रंजन ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपने त्यागपत्र में निजी और स्वास्थ्य संबंधी कारणों का उल्लेख किया है। राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया है। इसके साथ ही राज्य सरकार ने झारखंड हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता रोहितश्य रॉय को राज्य का नया महाधिवक्ता नियुक्त किया है। वहीं, अपर महाधिवक्ता अचुत्य केशव को पदोन्नत कर वरीय अपर महाधिवक्ता बनाया गया है। इस घटनाक्रम के बाद राज्य के राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। 2020 से संभाल रहे थे महाधिवक्ता की जिम्मेदारी राजीव रंजन फरवरी 2020 में झारखंड के महाधिवक्ता नियुक्त किए गए थे और तब से इस महत्वपूर्ण संवैधानिक पद पर कार्यरत थे। उनके इस्तीफे में स्वास्थ्य और व्यक्तिगत कारणों का जिक्र किया गया है, लेकिन उनके अचानक पद छोड़ने के फैसले ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। सरकार की ओर से फिलहाल इस मामले में कोई अतिरिक्त आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। इस्तीफे को लेकर राजनीतिक अटकलें राजनीतिक हलकों में राजीव रंजन के इस्तीफे को लेकर कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। चर्चा है कि उनकी नियुक्ति कांग्रेस नेतृत्व की सहमति से हुई थी और उन्होंने अतीत में कांग्रेस नेता राहुल गांधी से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में पैरवी भी की थी। हालांकि इन दावों की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। कुछ राजनीतिक विश्लेषक इस बदलाव को आगामी राज्यसभा चुनावों की रणनीति से जोड़कर देख रहे हैं, जबकि कुछ का मानना है कि महागठबंधन के भीतर चल रहे मतभेद और बदलते राजनीतिक समीकरण भी इसकी वजह हो सकते हैं। वहीं, एक हाई-प्रोफाइल मामले में अपेक्षित सफलता नहीं मिलने की चर्चा भी राजनीतिक गलियारों में हो रही है, हालांकि इसकी भी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। भाजपा ने सरकार पर साधा निशाना महाधिवक्ता के इस्तीफे को लेकर भाजपा ने राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है। पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता अजय साह ने आरोप लगाया कि झारखंड में शासन व्यवस्था की जगह "म्यूजिकल चेयर" का खेल चल रहा है। उन्होंने कहा कि संवैधानिक पदों पर बैठे अधिकारियों का भविष्य भी सुरक्षित नहीं दिखाई दे रहा है। भाजपा ने सरकार से राजीव रंजन के पूरे कार्यकाल का श्वेत पत्र जारी करने की मांग की है। पार्टी ने पूछा है कि उनके कार्यकाल में राज्य सरकार ने कितने मुकदमे जीते और हारे, बाहरी वकीलों पर कितना खर्च किया गया और उससे राज्य को क्या लाभ मिला। भाजपा ने यह भी सवाल उठाया कि यदि उनका कार्यकाल संतोषजनक था तो उनसे इस्तीफा क्यों लिया गया, और यदि प्रदर्शन संतोषजनक नहीं था तो उन्हें इतने लंबे समय तक पद पर क्यों बनाए रखा गया। फिलहाल, राज्य सरकार ने रोहितश्य रॉय की नियुक्ति के साथ कानूनी नेतृत्व में बदलाव कर दिया है, जबकि राजीव रंजन के इस्तीफे के वास्तविक कारणों को लेकर राजनीतिक चर्चाएं अभी भी जारी हैं।
रांची। झारखंड के 25000 शिक्षकों के लिए राहत भरी खबर है। खतरे में पड़ी, उनकी नौकरी अब बच सकती है। झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा यानी जेटेट नियमावली में जल्द बड़ा बदलाव होने जा रहा है। इसके अनुसार अब सेवा के दौरान प्रशिक्षण पाने वाले और बीएड-डीएलएड कर चुके शिक्षक भी आवेदन कर सकेंगे। इसे लेकर स्कूली शिक्षा और साक्षरता विभाग ने झारखंड एकेडमिक काउंसिल यानी जैक को आवश्यक संशोधन करने का निर्देश दे दिया है। नियमावली में बदलाव के साथ ही राज्य के सरकारी स्कूलों में कार्यरत करीब 25 हजार ट्रेनिंग प्राप्त शिक्षकों के लिए जेटेट में शामिल होने का रास्ता साफ हो जाएगा। इससे हजारों शिक्षकों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। इसके बाद शिक्षकों को आवेदन जमा करने के लिए भी पर्याप्त समय मिलेगा। बताते चलें कि इससे संबंधित खबर आइडीटीवी इंद्रधनुष में 6 जून प्रसारित की गई थी। 20 जुलाई तक बढ़ेगी आवेदन की तारीख स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने जैक को आवेदन जमा करने की तारीख भी 20 जुलाई तक बढ़ाने के लिए कहा है। वर्तमान में आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि 20 जून तक निर्धारित है। 31 अगस्त 2028 तक JTET पास करना अनिवार्य इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने देशभर के शिक्षकों के लिए 31 अगस्त 2028 तक शिक्षक पात्रता परीक्षा पास करना अनिवार्य कर दिया है, लेकिन मौजूदा नियमों की बाधा के कारण कार्यरत शिक्षक जेटेट के लिए आवेदन नहीं कर पा रहे थे। कोर्ट के आदेश के अनुसार तय समय सीमा तक जेटेट उत्तीर्ण नहीं करने वाले शिक्षकों की सेवा समाप्त हो सकती है। ऐसे में विभाग की पहल को शिक्षकों के भविष्य को सुरक्षित करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। जानिए नियमावली में क्या था पेच राज्य में वर्ष 1994 और वर्ष 1999 में अनट्रेंड शिक्षकों की नियुक्ति हुई थी। इन शिक्षकों को एक वर्ष का सेवाकालीन प्रशिक्षण मिला था। वर्तमान नियमावली में इनके आवेदन का कोई प्रावधान नहीं है। इसके अलावा, वैसे पारा शिक्षक आवेदन नहीं कर पा रहे हैं, जो डीइपी उत्तीर्ण हैं और छह माह के ब्रिज कोर्स का प्रशिक्षण पाया है। राज्य गठन के बाद बीएड सफल अभ्यर्थी, जो कक्षा एक से पांच में नियुक्त हैं और डीएलएड सफल अभ्यर्थी, जो कक्षा छह से आठ में नियुक्त हैं, उन्हें भी आवेदन जमा करने में परेशानी हो रही थी। वर्तमान नियमावली में ऐसे अभ्यर्थियों के लिए प्रावधान नहीं था। परीक्षा में शामिल होने के लिए उम्र की भी बाध्यता थी। प्रावधान में यह होगा बदलाव विभाग ने जैक को कहा है कि सेवा के दौरान प्रशिक्षण पाने वाले शिक्षक, डीइपी उत्तीर्ण और छह माह का ब्रिज कोर्स करने वाले पारा शिक्षक और बीएड-डीएलएड करने वाले शिक्षकों के आवेदन जमा करने के लिए साफ्टवेयर में बदलाव किया जाएगा। अब 60 वर्ष तक के शिक्षक भी आवेदन जमा कर सकेंगे।
नई दिल्ली, एजेंसियां। नई दिल्ली स्थित झारखंड भवन, वसंत विहार की व्यवस्थाओं को और बेहतर बनाने के उद्देश्य से झारखंड सरकार के रेजिडेंट कमिश्नर श्री अरवा राजकमल ने सोमवार को भवन का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने भवन में उपलब्ध सुविधाओं, स्वच्छता व्यवस्था, रखरखाव, सुरक्षा और अतिथि सेवाओं का विस्तृत जायजा लिया तथा अधिकारियों और कर्मचारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। मेंटेनेंस और अतिथि सेवाओं की समीक्षा निरीक्षण के दौरान रेजिडेंट कमिश्नर ने अतिथि कक्षों, कॉमन एरिया, भवन परिसर और रसोईघर का दौरा कर व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया। उन्होंने हाउसकीपिंग, स्वच्छता और रखरखाव कार्यों की समीक्षा करते हुए अधिकारियों से भवन संचालन की वर्तमान स्थिति की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय राजधानी में स्थित झारखंड भवन राज्य का प्रतिनिधि संस्थान है, इसलिए यहां आने वाले अतिथियों को बेहतर और गुणवत्तापूर्ण सुविधाएं उपलब्ध कराना सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। पार्किंग व्यवस्था सुधारने के निर्देश निरीक्षण के दौरान भवन परिसर में लंबे समय से खड़े छह अनुपयोगी और कंडम वाहनों को लेकर भी चर्चा हुई। रेजिडेंट कमिश्नर ने इन वाहनों की नियमानुसार शीघ्र नीलामी प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश दिया ताकि पार्किंग स्थल का बेहतर और सुव्यवस्थित उपयोग सुनिश्चित किया जा सके। उन्होंने उपलब्ध स्थान और संसाधनों के प्रभावी उपयोग पर भी विशेष जोर दिया। बंद पड़े सीसीटीवी कैमरों को तुरंत चालू करने का आदेश भवन की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा के दौरान कुछ सीसीटीवी कैमरे बंद पाए गए। इस पर रेजिडेंट कमिश्नर ने संबंधित अधिकारियों को तत्काल मरम्मत कर सभी कैमरों को पुनः क्रियाशील बनाने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था को मजबूत बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है। आधुनिकीकरण पर रहेगा फोकस रेजिडेंट कमिश्नर ने कहा कि झारखंड भवन में सुविधाओं का निरंतर आधुनिकीकरण और सुधार समय की आवश्यकता है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि भवन संचालन को अधिक व्यवस्थित, पारदर्शी और कार्यकुशल बनाया जाए ताकि आगंतुकों और अतिथियों को बेहतर अनुभव मिल सके। निरीक्षण के अंत में उन्होंने भवन की व्यवस्थाओं को और मजबूत बनाने के लिए संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को आवश्यक सुझाव एवं दिशा-निर्देश दिए।
रांची। झारखंड सरकार कृषि क्षेत्र को आधुनिक बनाने और किसानों को नई तकनीकों से परिचित कराने के उद्देश्य से रांची के मोरहाबादी मैदान में 16 से 18 जून तक तीन दिवसीय कृषि व्यापार मेला आयोजित करने जा रही है। इस मेले का उद्घाटन मुख्यमंत्री Hemant Soren करेंगे। आयोजन का उद्देश्य किसानों, कृषि वैज्ञानिकों, व्यापारियों और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों को एक साझा मंच प्रदान करना है, जहां वे कृषि क्षेत्र में हो रहे नवीन प्रयोगों और तकनीकी विकास पर विचार-विमर्श कर सकें। देशभर से आएंगे विशेषज्ञ और लगेंगे आधुनिक कृषि स्टॉल कृषि व्यापार मेले में देश के विभिन्न राज्यों से कृषि क्षेत्र से जुड़े संस्थान, कंपनियां और संगठन अपने स्टॉल लगाएंगे। मेले में 50 से अधिक वैज्ञानिक और कृषि विशेषज्ञ विभिन्न विषयों पर व्याख्यान देंगे। किसानों के लिए पंजीकरण पूरी तरह निःशुल्क रखा गया है ताकि अधिक से अधिक किसान इस आयोजन का लाभ उठा सकें। कृषि विभाग के अनुसार मेले में आधुनिक खेती, उन्नत बीज, सिंचाई तकनीक, जैविक कृषि और कृषि व्यवसाय से जुड़ी नई जानकारियां उपलब्ध कराई जाएंगी। किसानों को उत्पादन बढ़ाने और लागत कम करने के उपायों से भी अवगत कराया जाएगा। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और आधुनिक तकनीकों पर रहेगा विशेष फोकस मेले का प्रमुख आकर्षण कृषि क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित तकनीकों का प्रदर्शन होगा। इसके साथ ही कम लागत में अधिक उत्पादन देने वाली आधुनिक कृषि पद्धतियों, मत्स्य पालन, बागवानी और कृषि यंत्रीकरण से जुड़ी तकनीकों को भी प्रदर्शित किया जाएगा। विशेषज्ञ किसानों को इन तकनीकों के व्यावहारिक उपयोग और उनके लाभों की जानकारी देंगे। सांस्कृतिक कार्यक्रमों से भी सजेगा आयोजन कृषि व्यापार मेला केवल तकनीकी और व्यावसायिक गतिविधियों तक सीमित नहीं रहेगा। शाम के समय झारखंड की पारंपरिक लोक संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए नृत्य और गीत-संगीत के कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे। इसके अलावा राज्य के प्रगतिशील किसान और अन्य राज्यों के सफल कृषि विशेषज्ञ अपने अनुभव साझा करेंगे, जिससे किसानों को नई प्रेरणा और सीख मिलेगी। यह मेला कृषि क्षेत्र में नवाचार, ज्ञान और अवसरों का महत्वपूर्ण केंद्र बनने जा रहा है।
रांची। झारखंड में ग्रामीण क्षेत्रों तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाने के लक्ष्य को लेकर जल जीवन मिशन (JJM) 2.0 के तहत राज्य सरकार और केंद्र सरकार के जल शक्ति मंत्रालय के बीच महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। इस अवसर पर आयोजित उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय जल शक्ति मंत्री C. R. पाटिल ने की। कार्यक्रम मेंहेमंत सोरेन, पेयजल एवं स्वच्छता मंत्री योगेंद्र प्रसाद सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। 24 हजार करोड़ रुपये से अधिक की योजनाएं जारी बैठक में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने बताया कि वर्ष 2019-20 से राज्य में लगभग 24,635 करोड़ रुपये की लागत वाली पेयजल योजनाओं का क्रियान्वयन किया जा रहा है। सरकार मल्टी विलेज स्कीम (MVS) और सिंगल विलेज स्कीम (SVS) के माध्यम से दूरदराज के गांवों तक नल से जल पहुंचाने पर विशेष ध्यान दे रही है। केंद्र से लंबित राशि जारी करने की मांग मुख्यमंत्री ने बैठक में वित्तीय मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि जल जीवन मिशन की लगभग 55 प्रतिशत परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं, लेकिन केंद्र से केवल 46 प्रतिशत अनुदान ही प्राप्त हुआ है। हेमंत सोरेन ने केंद्र सरकार से करीब 6,500 करोड़ रुपये की लंबित सहायता राशि जल्द जारी करने का आग्रह किया, ताकि परियोजनाओं की गति बनी रहे और निर्धारित समय में लक्ष्य पूरे किए जा सकें। एनओसी और प्रशासनिक अड़चनों पर भी चर्चा मुख्यमंत्री ने कई परियोजनाओं में विभिन्न केंद्रीय एजेंसियों से समय पर अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) नहीं मिलने की समस्या भी उठाई। उन्होंने केंद्र से इस प्रक्रिया को तेज करने का अनुरोध किया, जिससे जलापूर्ति योजनाओं के क्रियान्वयन में देरी न हो। झारखंड को 2,500 करोड़ रुपये का विशेष आवंटन बैठक में केंद्र सरकार ने झारखंड के लिए 2,500 करोड़ रुपये के विशेष आवंटन की जानकारी दी। हालांकि यह राशि जल जीवन मिशन 2.0 के दिशा-निर्देशों और मानकों के पूर्ण अनुपालन के बाद जारी की जाएगी। निगरानी और क्रियान्वयन पर जोर परियोजनाओं की निगरानी के लिए सभी जिलों के उपायुक्तों और जिलाधिकारियों को नियमित समीक्षा करने के निर्देश दिए गए हैं। बैठक के अंत में केंद्र और राज्य सरकार ने मिलकर यह सुनिश्चित करने का संकल्प लिया कि झारखंड के प्रत्येक ग्रामीण परिवार तक सुरक्षित और स्वच्छ पेयजल की सुविधा समय पर पहुंचाई जा सके।
रांची। झारखंड में हुए ट्रेजरी घोटाले के बाद राज्य में वेतन भुगतान में विलंब हो रहा है। कर्मियों का वेतन अटकने लगा है। इसे देखते हुए राज्य सरकार ने अधिकारियों और कर्मचारियों के वेतन भुगतान को लेकर नई गाइडलाइन बनाई है। इससे पहले घोटाला सामने आने पर वित्त विभाग ने विभिन्न तरह की सत्यापन व्यवस्था लागू की थी। उससे कर्मियों के वेतन भुगतान में काफी विलंब होने लगा था। इसलिए अब नई व्यवस्था हुई है। वेतन भुगतान में आगे गड़बड़ी न हो, इसके लिए वित्त विभाग ने एक एसओपी तैयार की है। सरकारी कर्मचारियों के मास्टर डेटाबेस में छेड़छाड़ कर अवैध तरीके से वेतन निकासी की संभावना को खत्म करने के लिए एक चेक लिस्ट बनाई गई है। उसी को फॉलो कर ट्रेजरी पे बिलों का भुगतान करेगा। प्रधान महालेखाकार की रिपोर्ट से गंभीर गड़बड़ियों का खुलासा होने के बाद वित्त विभाग ने इम्प्लॉय मास्टर डेटा को सुरक्षित करने के लिए दिशा-निर्देश व एसओपी (स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर) जारी किया है। संयुक्त सचिव ज्योति कुमारी झा के हस्ताक्षर से जारी इस आदेश के तहत अब डेटा में किसी भी तरह का बदलाव पूरी तरह से नियंत्रित और ऑनलाइन होगा। अभी कर्मचारियों के प्रोफाइल को 'फ्रीज' किया जा रहा दरअसल, वर्तमान आईएफएमएस प्रणाली के अंतर्गत मार्च-अप्रैल से वेतन निकासी के साथ ही डीडीओ स्तर से कर्मचारियों के प्रोफाइल को 'फ्रीज' किया जा रहा है। इस कारण से वेतन भुगतान की प्रक्रिया के दौरान कर्मचारी के प्रोफाइल में कोई भी बदलाव संभव नहीं था। इसके कारण कर्मचारियों का प्रमोशन, पदनाम परिवर्तन, ट्रांसफर, वेतन संशोधन और बैंक अकाउंट डिटेल्स जैसे जरूरी अपडेट समय पर नहीं हो पा रहे थे। इससे अगले महीने का वेतन अटकने की आशंका बनी रहती थी। इसी परेशानी को दूर करने और डेटा से छेड़छाड़ रोकने के लिए यह नई व्यवस्था लागू की गई है। ये किया है वित्त विभाग ने वित्त विभाग ने कर्मचारियों के डेटा को दो मुख्य हिस्सों में बांटा है। दोनों के लिए अलग-अलग नियम तय किए गए हैं। बेसिक प्रोफाइल में कर्मचारी का जीपीएफ नंबर, नाम, जन्म तिथि, आधार नंबर, पैन नंबर, मोबाइल नंबर, जेंडर और नॉमिनी जैसी स्थायी जानकारियां रहेंगी। जीपीएफ नंबर और नाम में संशोधन की प्रक्रिया पहले की तरह ही पेंशन एवं लेखा निदेशालय के स्तर से होगी। जो अन्य जानकारियों को डीडीओ द्वारा फ्रीज किया गया है, उनमें सुधार के लिए कर्मचारी को ईम्प्लोयी पोर्टल के जरिए ऑनलाइन रिक्वेस्ट करना होगा। डीडीओ इसे अप्रूव कर पेंशन एवं लेखा निदेशालय को ऑनलाइन फॉरवर्ड करेंगे और वहीं से अंतिम संशोधन किया जाएगा। सैलरी और पोस्टिंग प्रोफाइल में कर्मचारी का पदनाम, पोस्टिंग स्थान, बेसिक पे, पे बैंड, पे लेवल, बैंक अकाउंट नंबर और आईएफएससी कोड होगा। प्रोफाइल में जैसे ही कोई बदलाव होगा, उसकी सूचना तुरंत कर्मचारी के मोबाइल पर एसएमएस के जरिए चली जाएगी।
रांची। मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन की अध्यक्षता में मंगलवार को झारखंड मंत्रालय में स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग की अद्यतन कार्य प्रगति की समीक्षा बैठक हुई। बैठक में मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को विभाग द्वारा संचालित योजनाओं, विद्यालयों में शैक्षणिक व्यवस्थाएं, आधारभूत संरचनाओं तथा विद्यार्थियों को उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं की विस्तृत समीक्षा की। मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि राज्य सरकार द्वारा विद्यालयों से जुड़ी योजनाओं एवं कार्यक्रमों को प्रभावी तरीके से पारदर्शिता के साथ अध्यनरत छात्र-छात्राओं तक ससमय पहुंचाना सुनिश्चित करें। झारखंडी बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि राज्य सरकार झारखंड के बच्चों को बेहतर एवं क्वालिटी एजुकेशन प्रदान करने हेतु प्रतिबद्ध है। सभी सरकारी विद्यालयों में आधारभूत संरचना और मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ-साथ पठन-पाठन की नवीनतम एवं आधुनिक तकनीक से संबंधित संसाधन उपलब्ध कराए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकारी विद्यालयों में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं के परीक्षा परिणाम में निरंतर सुधार हो रहा है, बच्चों का रिजल्ट और ज्यादा अच्छा हो इस निमित्त शिक्षकों के प्रशिक्षण कार्य सहित सभी पहलुओं पर विशेष ध्यान केंद्रित करें। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि शिक्षक नियुक्ति प्रक्रिया को गति दें। शिक्षकों के शत प्रतिशत पदों को भरना राज्य सरकार की प्राथमिकता है। शिक्षकों को समय पर वेतन मिले मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले कुछ महीनों में हजारों की संख्या शिक्षकों की बहाली हुई है, नियुक्ति प्रक्रिया निरंतर जारी रखते हुए रिक्त पदों को भरा जाए। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि नव नियुक्त शिक्षकों को ससमय वेतन मिले इस निमित्त सभी वेरिफिकेशन कार्य इस माह के अंत तक पूर्ण करना सुनिश्चित की जाए। ड्रॉप आउट मामलों में निरंतर सुधार मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने अधिकारियों से कहा कि शिक्षा किसी भी राज्य की आधारशिला होती है। राज्य सरकार का उद्देश्य है कि ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की पहुंच सुनिश्चित हो तथा प्रत्येक बच्चे को बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराया जाय। बैठक में मुख्यमंत्री को अधिकारियों ने अवगत कराया कि प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षा में ड्रॉप आउट बच्चों की संख्या में कमी आई है। ड्रॉप आउट के मामले में झारखंड राष्ट्रीय औसत से अच्छा है। शिक्षा विभाग द्वारा अभियान चलाकर ड्रॉप आउट बच्चों का नामांकन सुनिश्चित किया जा रहा है। श्रम विभाग से समन्वय स्थापित कर वैसे बच्चों का चिन्हित किया जा रहा है, जो बच्चे मजदूरी या कोई अन्य कार्य से जुड़े हैं और स्कूली शिक्षा से वंचित हैं। किताब, पठन-पाठन सामग्री एवं साइकिल वितरण कार्य भी समयबद्ध तरीके से किया जा रहा है। अब बच्चे मैट्रिक परीक्षा में अच्छे अंकों के साथ उतीर्ण हो रहे हैं, जिन विद्यालयों में बच्चों का रिजल्ट ठीक नहीं रहा है, वैसे विद्यालयों को चिन्हित कर सभी सुविधा, व्यवस्था एवं शिक्षकों की उपलब्धता सहित प्रत्येक बिंदुओं पर सुधार हेतु विभाग विशेष ध्यान केंद्रित कर रहा है। सभी स्कूलों में हो इंटरनेट कनेक्शन मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि सभी सरकारी विद्यालयों में इंटरनेट की सुविधा उपलब्ध कराई जाए एवं आईसीटी लैब की सुविधा दुरुस्त करें। 5000 सीएम स्कूल ऑफ़ एक्सीलेंस मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने अधिकारियों से कहा कि राज्य के भीतर सीएम स्कूल ऑफ़ एक्सीलेंस की संख्या बढ़ाकर 5 हजार किए जाने की कार्य योजना पर तेजी से कार्य करें, ताकि प्रत्येक पंचायत तक स्कूलों में अध्यनरत छात्र-छात्राओं को क्वालिटी एजुकेशन पहुंचाई जा सके। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि अगले 6 से 8 महीने के भीतर यह सुनिश्चित करें कि कोई भी विद्यालय सिंगल टीचर के भरोसे न चले। विद्यालय प्रबंध समितियों से समन्वय स्थापित कर स्थानीय पढ़े-लिखे अहर्ता रखने वाले इच्छुक युवाओं को शिक्षक के रूप में जोड़ें। विशेष कर छात्राओं को भी मौका दें, ताकि शिक्षकों की कमी से किसी भी विद्यालय में बच्चों की पढ़ाई प्रभावित नहीं हो। प्रत्येक पंचायत में अच्छे स्कूल हो मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि राज्य के प्रत्येक पंचायतों में अच्छे स्कूल होंगे, तभी बच्चे गुणवत्तापूर्ण शिक्षा ग्रहण कर अपना भविष्य उज्ज्वल करेंगे। सभी सरकारी विद्यालयों के पठन-पाठन कार्य में एकरूपता लाना सुनिश्चित करें। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि पायलट प्रोजेक्ट के तहत परिवहन सुविधा का संचालन करें, ताकि छात्र-छात्राओं को समय के अनुसार घर से स्कूल एवं स्कूल से घर तक पहुंचाया जा सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी सरकारी विद्यालयों के परिसरों व्यापक रूप से वृक्षारोपण का अभियान शुरू कराएं। अभिवंचित बच्चों को आवासीय सुविधा और क्वालिटी एजुकेशन प्रदान करे मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि राज्य के भीतर संचालित नेताजी सुभाष चंद्र बोस आवासीय विद्यालयों में अध्ययनरत अभिवंचित वर्ग के बच्चे-बच्चियों को आवासीय सुविधा सहित क्वालिटी एजुकेशन प्रदान करें। बैठक में अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को अवगत कराया कि राज्य के भीतर नेताजी सुभाष चंद्र बोस आवासीय विद्यालयों की कुल संख्या 26 है। इन स्कूलों में लगभग 4 हजार विभिन्न प्रकार के अभिवंचित बच्चों को रहने-खाने की पूरी सुविधा के साथ निःशुल्क शिक्षा प्रदान की जा रही है। नेताजी सुभाष चंद्र बोस आवासीय विद्यालयों के भवनों के रख-रखाव सहित सभी कार्यों को सुदृढ़ किया गया है। खेलकूद को दें बढ़ावा सीएम ने कहा कि सरकारी विद्यालयों में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं के बीच शिक्षा के साथ-साथ खेल गतिविधियों को भी बढ़ावा दें। वैसे बच्चे-बच्चियों को चिन्हित करें, जो खेल प्रतिस्पर्धा में बहुत अच्छा परफॉर्मेंस कर रहे हैं ताकि उन्हें खेल के क्षेत्र में और आगे बढ़ाया जा सके। राज्य के भीतर खेल के क्षेत्र में हमारे कई बच्चों ने झारखंड का नाम भी रोशन किया है। अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को अवगत कराया कि विद्यालयों में बच्चों को स्पोर्ट्स किट्स उपलब्ध कराया जा रहा है। राष्ट्रीय विद्यालय खेल प्रतियोगिता के तहत झारखंड के बच्चों की पूर्ण भागीदारी सुनिश्चित की जा रही है। शारीरिक शिक्षा के शिक्षक खेल गतिविधियों की बेहतरी के लिए कार्य कर रहे हैं। दिशोम गुरु शिबू सोरेन विद्यालय का डीपीआर जल्द बने बैठक में मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन के समक्ष अधिकारियों ने जगुआर कैंपस रांची में बनाए जाने वाले प्रस्तावित दिशोम गुरु शिबू सोरेन विद्यालय की स्थापना हेतु चिन्हित भूमि का पीपीटी प्रजेंटेशन रखा। मुख्यमंत्री को अवगत कराया गया कि जगुआर कैंपस रांची में ही 6 एकड़ भूमि विद्यालय निर्माण हेतु विभाग द्वारा चिन्हित किया गया है। मुख्यमंत्री को विद्यालय स्थापना की कार्य योजना से संबंधित विभिन्न पहलुओं पर विस्तृत जानकारी उपलब्ध कराई गई। मुख्यमंत्री ने इस संबंध में अधिकारियों को कई अहम दिशा-निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को एक सप्ताह के भीतर राज्य सरकार को इस प्रस्ताव से संबंधित डीपीआर समर्पित करने का निर्देश दिया। उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार द्वारा दिशोम गुरु शिबू सोरेन विद्यालय शहीद पुलिस कर्मियों के बच्चों को निःशुल्क शिक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से स्थापित किया जा रहा है। कस्तूरबा गांधी विद्यालय की ऑनलाइन जानकारी ली मौके पर मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ऑनलाइन माध्यम से कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय, बुंडू के स्कूल प्रबंधन के साथ जुड़े एवं स्कूल में स्थापित सभी सुविधाओं की जानकारी ली। बैठक में राज्य के मुख्य सचिव अविनाश कुमार, अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह, स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के सचिव उमा शंकर सिंह, राज्य परियोजना निदेशक शशि रंजन, निदेशक माध्यमिक शिक्षा राजेश प्रसाद, निदेशक प्राथमिक शिक्षा मनोज कुमार रंजन सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।
रांची। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा है कि राज्य में बहने वाली नदियों के जल को यहीं संरक्षित करना चाहिए, जिससे सिंचाई के लिए पर्याप्त जल उपलब्ध हो। जल संसाधन विभाग की समीक्षा बैठक करते हुए उन्होंने अधिकारियों से स्पष्ट रूप से कहा कि किसानों को खेती में पानी की समस्या नहीं होनी चाहिए। अधिकारी इस दृष्टिकोण से काम करें। कहा, कृषि कार्य में सिंचाई जल की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखें, इसमें कोई कोताही नहीं हो। खेतों तक पहुंचाये पानी मुख्यमंत्री ने खेतों तक पानी पहुंचाने के लिए समर्पित और प्रभावी प्रयास करने के निर्देश दिए। पाइपलाइन आधारित सिंचाई योजनाओं की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने इसके कार्यों में तेजी लाने को कहा। कहा कि इससे पेयजल आपूर्ति एवं सिंचाई दोनों उद्देश्यों की पूर्ति होगी। इन बिंदुओं पर भी दिये निर्देश बैठक में राज्य की सिंचाई योजनाओं, मेगा लिफ्ट परियोजनाओं, पाइपलाइन आधारित योजनाओं, बांधों एवं बहुउद्देश्यीय परियोजनाओं की विस्तृत समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिया कि जल संसाधन विभाग की सभी योजनाओं को समय पर पूरा करें, जिससे राज्य के किसानों को सीधा लाभ मिल सके। उन्होंने कहा कि राज्य में सिंचाई सुविधाओं के विस्तार से उत्पादन में वृद्धि होगी और किसानों की आर्थिक स्थिति भी सुदृढ़ होगी। इससे ग्रामीण क्षेत्रों से पलायन पर भी रोक लगेगी। नदी जल संरक्षण पर जोर मुख्यमंत्री ने नदी जल संरक्षण पर विशेष बल दिया। उन्होंने स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप योजनाएं बनाने पर जोर दिया तथा नदी जल को छोटे-छोटे जलाशयों में लिफ्ट कर सिंचाई कार्यों में उपयोग करने के निर्देश दिए। तालाबों में जल उपलब्धता सुनिश्चित कर मत्स्य पालन को बढ़ावा देने की आवश्यकता मुख्यमंत्री ने बताई। मुख्यमंत्री को योजनाओं की स्थिति बताई गई जल संसाधन विभाग के सचिव प्रशांत कुमार ने इस मौके पर विभाग द्वारा संचालित परियोजनाओं की स्थिति से मुख्यमंत्री को अवगत कराया। बैठक में जल संसाधन विभाग के मंत्री हफीजुल हसन, मुख्य सचिव अविनाश कुमार, विकास आयुक्त अजय कुमार सिंह एवं विभागीय पदाधिकारी उपस्थित थे। इन योजनाओं को रिपर्ट तलब मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने चांडिल बांध, खरकई बराज, ईंचा बांध, सोन-कनहर पाइपलाइन सिंचाई योजना, सिकटिया, मसलिया-रानीश्वर, पीरटांड़ मेगा लिफ्ट सिंचाई योजना पर अधिकारियों से रिपोर्ट मांगी। पलामू पाइपलाइन सिंचाई योजना (पैकेज-1 एवं 2), भीमखंडा माइक्रो लिफ्ट योजना, खरकई बायी मेगा लिफ्ट योजना, भैरवा जलाशय, कोनार सिंचाई परियोजना, पुनासी जलाशय एवं गुमानी बराज योजना की प्रगति की भी समीक्षा की गई। बैठक में पलामू के लिए अमानत बराज योजना, गिरिडीह के लिए गांडेय मेगा लिफ्ट सिंचाई योजना, खूंटी के चाराडीह-उलीहातू योजना, सिमडेगा के कोनपाला मेगा लिफ्ट योजना, पूर्वी सिंहभूम के पटमदा-बोड़ाम मेगा लिफ्ट योजना तथा सरायकेला-खरसावां के नीमडीह-कुकड़ू मेगा लिफ्ट सिंचाई योजना पर चर्चा हुई।
रांची। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन सोमवार 18 मई को सहायक आचार्य के पद पर नियुक्त 319 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र सौंपेंगे। इसे लेकर प्रोजेक्ट भवन सभागार में नियुक्ति पत्र वितरण समारोह का आयोजन किया गया है। नियुक्त अभ्यर्थियों में 158 उम्मीदवारों का चयन इंटर प्रशिक्षित सहायक आचार्य तथा 161 अभ्यर्थियों का चयन स्नातक प्रशिक्षित सहायक आचार्य के पदों पर किया गया है। झारखंड कर्मचारी चयन आयोग ने इन अभ्यर्थियों की नियुक्ति की अनुशंसा पिछले वर्ष दिसंबर में ही कर दी थी। 19 महिला पर्यवेक्षकों को भी मिलेगा नियुक्ति पत्र मुख्यमंत्री महिला एवं बाल विकास तथा सामाजिक सुरक्षा विभाग के लिए नियुक्त महिला पर्यवेक्षक के पदों पर चयनित 19 अभ्यर्थियों को भी नियुक्ति पत्र प्रदान करेंगे। जिला स्तर पर काउंसिलिंग प्रक्रिया पूरी होने के बाद नियुक्ति पत्र वितरण का निर्णय लिया गया।
Hemant Soren ने शुक्रवार को झारखंड पुलिस को बड़ी सौगात देते हुए 1477 नए वाहनों को हरी झंडी दिखाकर जिलों के लिए रवाना किया। विधानसभा परिसर से हुए इस कार्यक्रम के साथ ही राज्य में पुलिस को जर्जर गाड़ियों से राहत मिलने की शुरुआत हो गई है। अब थानों में नई चमचमाती गाड़ियां दिखाई देंगी और पुलिस की गश्ती व्यवस्था पहले से अधिक मजबूत होगी। 628 पेट्रोलिंग वाहन और 849 दोपहिया वाहन शामिल इस बेड़े में कुल 628 पेट्रोलिंग वाहन और 849 दोपहिया वाहन शामिल हैं। सभी पेट्रोलिंग वाहन Mahindra Bolero के बीएस-6 मॉडल हैं, जिन्हें राज्य के विभिन्न जिलों और पुलिस इकाइयों में तैनात किया जाएगा। इनमें से 614 बोलेरो वाहन जिला पुलिस को दिए जाएंगे, जबकि बाकी वाहन क्विक रिस्पांस टीम (QRT) और अन्य विशेष इकाइयों को आवंटित किए जाएंगे। इसे पुलिस आधुनिकीकरण की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है और एक बार में इतनी बड़ी संख्या में वाहनों का आवंटन अब तक का सबसे बड़ा बताया जा रहा है। पहले चरण में हुआ वाहन वितरण राज्य सरकार ने पहले ही 1255 पेट्रोलिंग वाहन और 1697 दोपहिया वाहन खरीदने की मंजूरी दी थी। पहले चरण में अब 628 पेट्रोलिंग वाहन और 849 दोपहिया वाहन जिलों को दिए जा रहे हैं। 12 अत्याधुनिक थानों का भी होगा शिलान्यास वाहन वितरण कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री राज्य के 12 नए अत्याधुनिक थाना भवनों का ऑनलाइन शिलान्यास भी करेंगे। सरकार जर्जर थाना भवनों की जगह आधुनिक सुविधाओं से लैस नए थाने बना रही है, ताकि पुलिसकर्मियों को बेहतर कार्य वातावरण मिल सके। किन जिलों को कितनी बोलेरो गाड़ियां जिला पुलिस के लिए कुल 614 बोलेरो वाहन आवंटित किए गए हैं। इनमें प्रमुख जिलों को मिलने वाली गाड़ियों की संख्या इस प्रकार है: Ranchi – 80 Jamshedpur – 51 Dhanbad – 40 Chaibasa – 40 Bokaro – 39 Giridih – 32 Palamu – 31 Hazaribagh – 28 Deoghar – 28 Gumla – 22 Garhwa – 21 Dumka – 20 Chatra – 19 Seraikela – 19 Latehar – 18 Godda – 17 Simdega – 15 Jamtara – 14 Khunti – 14 Koderma – 14 Lohardaga – 14 Sahibganj – 14 Ramgarh – 13 Pakur – 11
Hemant Soren की अध्यक्षता में हुई झारखंड कैबिनेट की बैठक में गुरुवार को कुल 40 प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। बैठक में छात्राओं के लिए छात्रवृत्ति का विस्तार, कर्मचारियों के लिए शिशु पालन अवकाश, मंत्रियों-विधायकों को उच्च स्तरीय स्वास्थ्य सुविधा समेत कई अहम फैसले लिए गए। छात्राओं को मिलेगा मानकी मुंडा छात्रवृत्ति का लाभ कैबिनेट ने मानकी मुंडा छात्रवृत्ति योजना में संशोधन को मंजूरी दी है। अब इस योजना का लाभ झारखंड के सभी तकनीकी महाविद्यालयों में पढ़ने वाली छात्राओं को मिलेगा। पहले यह सुविधा केवल Jharkhand University of Technology से संबद्ध कॉलेजों की छात्राओं तक सीमित थी, लेकिन अब निजी तकनीकी संस्थानों में पढ़ने वाली छात्राएं भी इसका लाभ उठा सकेंगी। रांची महिला कॉलेज की छात्राओं के लिए बनेगा नया हॉस्टल छात्राओं के लिए 528 बेड का नया छात्रावास बनाने का निर्णय लिया गया है। यह हॉस्टल **Ranchi Women's College परिसर के बजाय मोरहाबादी स्थित कल्याण परिषद परिसर में बनाया जाएगा। कर्मचारियों को मिलेगा 2 साल का सवैतनिक शिशु पालन अवकाश राज्य सरकार के कर्मचारियों को दो साल का सवैतनिक शिशु पालन अवकाश देने का फैसला लिया गया है। पहले साल: 100% वेतन दूसरे साल: 80% वेतन साथ ही कर्मचारियों की सेवा और सेवानिवृत्ति से जुड़ी शिकायतों के समाधान के लिए झारखंड सरकारी सेवा शिकायत निवारण समिति के गठन को भी मंजूरी दी गई है। पलामू स्टेशन का नाम अब मेदिनीनगर कैबिनेट ने Palamu Railway Station का नाम बदलकर Medininagar करने को मंजूरी दे दी है। इसके लिए राज्य सरकार पहले ही केंद्र सरकार से अनापत्ति प्रमाणपत्र प्राप्त कर चुकी है। NCC कैडेट्स का नाश्ता भत्ता बढ़ा राज्य में National Cadet Corps (NCC) कैडेट्स का नाश्ता भत्ता 10 रुपये से बढ़ाकर 25 रुपये कर दिया गया है। मंत्रियों-विधायकों को IAS-IPS जैसी स्वास्थ्य सुविधा कैबिनेट ने राज्य के मंत्रियों, विधायकों और पूर्व विधायकों को Indian Administrative Service और Indian Police Service अधिकारियों की तरह स्वास्थ्य सुविधाएं देने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। नई व्यवस्था के तहत जनप्रतिनिधियों और उनके परिवारों को देशभर के अस्पतालों में कैशलेस इलाज और चिकित्सा खर्च की प्रतिपूर्ति की सुविधा मिलेगी। यह व्यवस्था All India Services Medical Attendance Rules, 1954 की तर्ज पर लागू की जाएगी।
झारखंड में विधायकों और पूर्व विधायकों को ग्रेटर रांची क्षेत्र में जमीन उपलब्ध कराने की योजना अब आगे बढ़ती नजर आ रही है। राज्य सरकार ने इस लंबे समय से लंबित प्रक्रिया को गति देते हुए जल्द जमीन की रजिस्ट्री कराने का निर्णय लिया है। सरकार की ओर से कहा गया है कि अगले तीन दिनों के भीतर रजिस्ट्री के लिए ऑनलाइन पोर्टल शुरू कर दिया जाएगा, जिससे संबंधित विधायक और पूर्व विधायक अपनी जमीन की रजिस्ट्री करा सकेंगे। विधानसभा में उठा मुद्दा मंगलवार को विधानसभा की कार्यवाही के दौरान इस मुद्दे को झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के विधायक मथुरा महतो ने सदन में उठाया। उन्होंने कहा कि विधायकों और पूर्व विधायकों से जमीन आवंटन के लिए राशि पहले ही जमा कर ली गई है, लेकिन इसके बावजूद रजिस्ट्री की प्रक्रिया अब तक शुरू नहीं हो सकी है। उन्होंने सरकार से मांग की कि इस मामले में जल्द कार्रवाई करते हुए प्रक्रिया पूरी की जाए ताकि संबंधित लोगों को राहत मिल सके। भाजपा विधायक ने प्रशासन पर लगाए आरोप इस पर भाजपा विधायक सी.पी. सिंह ने रांची जिला प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि जमीन के लिए ली गई राशि सहकारी लिमिटेड के खाते में जमा है, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर देरी के कारण रजिस्ट्री प्रक्रिया शुरू नहीं हो पाई है। सी.पी. सिंह ने बताया कि उन्होंने इस मामले को लेकर रांची के उपायुक्त से भी बातचीत की थी। उस समय यह आश्वासन दिया गया था कि विधानसभा के मौजूदा सत्र के दौरान एक सप्ताह के भीतर रजिस्ट्री पोर्टल शुरू कर दिया जाएगा। लेकिन करीब 20 दिन बीत जाने के बाद भी पोर्टल शुरू नहीं होने से विधायकों और पूर्व विधायकों में नाराजगी बढ़ रही है। मंत्री ने सदन में दिया भरोसा मामले की गंभीरता को देखते हुए संसदीय कार्य मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने सदन में स्पष्ट किया कि अब इस प्रक्रिया में और देरी नहीं होगी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि अगले तीन दिनों के भीतर जमीन की रजिस्ट्री के लिए पोर्टल खोल दिया जाएगा और सभी आवश्यक औपचारिकताएं पूरी कर ली जाएंगी। बताया जा रहा है कि राज्य सरकार ने विधायकों और पूर्व विधायकों के लिए ग्रेटर रांची क्षेत्र में जमीन चिन्हित कर ली है। पोर्टल शुरू होने के बाद जमीन की रजिस्ट्री की प्रक्रिया तेजी से पूरी की जाएगी, जिससे लंबे समय से लंबित मांग का समाधान हो सकेगा।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।