रांची। नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा (होटवार जेल) के अधीक्षक पर महिला बंदी का मानसिक और शारीरिक शोषण करने का आरोप लगाया है। इस संबंध में उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को चिट्ठी लिखकर मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। इस सनसनीखेज आरोप ने राज्य के सियासी और प्रशासनिक महकमे में भूचाल ला दिया है। होटवार जेल एक बार फिर शर्मनाक और गंभीर विवादों के घेरे में आ गया है। सबूतों का हवाला दिया नेता प्रतिपक्ष ने बाबूलाल ने पत्र में लिखा है कि उनके पास इसके पर्याप्त सबूत हैं। महिला बंदी गर्भवती हो गई है। यह संस्थागत अपराध है। इस तरह की घटना राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था के पूरी तरह से ध्वस्त होने का प्रमाण है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया है कि इस गंभीर मामले में कार्रवाई करने की बजाय प्रशासनिक अधिकारी पूरे प्रकरण को दबाने में जुटे हैं। जेल आईजी पर दोषी को बचाने का आरोप चिट्ठी में उन्होंने जेल आईजी पर फाइलों को गायब करने और दोषी अधिकारी को संरक्षण देने का भी आरोप लगाया। बाबूलाल का कहना है कि महिला बंदी को बीमारी और इलाज के बहाने जेल से बाहर गुप्त स्थानों और अस्पतालों में ले जाया जा रहा है, ताकि हर प्रकार के जैविक और फॉरेंसिक साक्ष्य को समय रहते नष्ट किया जा सके। इसके बाद रविवार को जेल प्रशासन ने महिला की गर्भावस्था की जांच कराई, जिसमें रिपोर्ट निगेटिव आई। यह है पूरा मामला ब्राउन शुगर तस्करी मामले में सुखदेव नगर पुलिस ने 7 नवंबर 2025 को महिला को गिरफ्तार किया था। इसके बाद उसे होटवार जेल भेजा गया। जेल प्रशासन के अनुसार 28 अप्रैल को उसने पेट दर्द की शिकायत की तो जेल प्रशासन ने उसका इलाज कराया। बताया जा रहा है कि 12 मई को उसने वार्ड में रह रही महिला बंदियों को बताया कि उसके साथ गलत हुआ है। यह बात जेल में तेजी से फैली। जेलर लवकुश कुमार तक भी बात पहुंची, तो उन्होंने जेल अधीक्षक को इसकी सूचना दी। फिर महिला डॉक्टर अपराजिता के नेतृत्व में टीम बनाकर उसकी जांच कराई गई। इसके बाद जेल अधीक्षक के चंद्रशेखर ने 13 मई को जेल आईजी सुदर्शन मंडल को इसकी जानकारी दी। उन्होंने जेल अधीक्षक से पूछताछ की। जांच रिपोर्ट का डॉक्टर से एनालिसिस कराया। लेकिन, उसके गर्भवती होने की पुष्टि नहीं हुई। जेल अधीक्षक ने कहा-महिला ने वीआईपी व्यवस्था मांगी थी जेल अधीक्षक के चंद्रशेखर ने महिला बंदी के आरोप को झूठा बताया है। उन्होंने कहा कि उससे कभी मुलाकात तक नहीं हुई। वह जेल में वीआईपी सुविधा मांग रही थी। वह ड्रग्स एडिक्टेड है। उसने कहा था कि ड्रग्स और मोबाइल की सुविधा उपलब्ध कराएं, वरना उन्हें फंसा देगी। पूरे मामले में जिस स्तर से भी जांच कराने की जरूरत हो, कराई जा सकती है। इस मामले को जिस व्यक्ति ने वायरल किया है, अगर वह साबित नहीं कर पाया तो उसके खिलाफ मानहानि का केस करूंगा।
रांची। झारखंड की राजनीति से बुधवार को एक दुखद खबर सामने आई। गोमिया के पूर्व विधायक और पूर्व मंत्री Madhav Lal Singh का निधन हो गया। रांची स्थित एक निजी अस्पताल में इलाज के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर फैलते ही गोमिया समेत पूरे राज्य में शोक की लहर दौड़ गई। जानकारी के अनुसार, बीते दिनों अचानक उनकी तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें बोकारो के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। हालत गंभीर होने पर डॉक्टरों ने उन्हें बेहतर इलाज के लिए रांची रेफर किया। इसके बाद उन्हें Pulse Hospital में भर्ती कराया गया, जहां बुधवार सुबह इलाज के दौरान उनका निधन हो गया। चार बार रहे गोमिया के विधायक माधव लाल सिंह ने गोमिया विधानसभा क्षेत्र का चार बार प्रतिनिधित्व किया था। वे वर्ष 1985, 1990, 2000 और 2009 में विधायक निर्वाचित हुए थे। बिहार और बाद में झारखंड की राजनीति में उन्होंने एक जनप्रिय और प्रभावशाली नेता के रूप में अपनी पहचान बनाई। सादगी और जनसेवा के लिए थे लोकप्रिय राजनीतिक जीवन में माधव लाल सिंह अपनी सादगी, ईमानदारी और जनसेवा के लिए जाने जाते थे। आम लोगों के बीच वे “माधव बाबू” के नाम से काफी लोकप्रिय थे। ग्रामीण क्षेत्रों में उनकी मजबूत पकड़ थी और वे लोगों की समस्याओं को सीधे सुनकर समाधान करने के लिए पहचाने जाते थे। समर्थकों में शोक, नेताओं ने जताया दुख उनके निधन की खबर मिलते ही समर्थकों और शुभचिंतकों की भीड़ अस्पताल और उनके आवास पर जुटने लगी। कई लोग इस खबर से भावुक हो उठे। विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं और सामाजिक संगठनों ने उनके निधन को राज्य की राजनीति के लिए अपूरणीय क्षति बताया है। गोमिया क्षेत्र में फिलहाल शोक और मायूसी का माहौल बना हुआ है।
रांची। झारखंड के पूर्व मंत्री आलमगीर आलम और उनके पूर्व आप्त सचिव संजीव लाल को सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिलने के बाद बुधवार को रांची स्थित बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा से रिहा किया जाएगा। दोनों पिछले 23 महीनों से न्यायिक हिरासत में थे। मनी लॉन्ड्रिंग मामले में आरोपित दोनों को सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने जमानत प्रदान की थी, लेकिन आदेश की कॉपी समय पर अपलोड नहीं होने के कारण मंगलवार को उनकी रिहाई नहीं हो सकी। अब आदेश अपलोड होने के बाद कानूनी प्रक्रिया पूरी की जाएगी और बंध पत्र भरने के बाद दोनों जेल से बाहर आ सकेंगे। पहले निचली अदालत और हाई कोर्ट से नहीं मिली थी राहत इस मामले में विशेष अदालत और झारखंड हाई कोर्ट से राहत नहीं मिलने के बाद दोनों ने 25 जुलाई 2025 को सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। लंबी सुनवाई के बाद शीर्ष अदालत ने उन्हें जमानत देने का फैसला सुनाया। इस खबर के बाद राज्य की राजनीतिक हलचल भी तेज हो गई है। माना जा रहा है कि आलमगीर आलम की रिहाई का असर आने वाले दिनों में झारखंड की राजनीति पर भी देखने को मिल सकता है।
रांची। झारखंड की सत्ताधारी महागठबंधन सरकार में कांग्रेस की अंदरूनी खींचतान अब सहयोगी दल झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के लिए भी चिंता का सबब बनती जा रही है। लगातार बढ़ रही गुटबाजी और नेताओं के बीच खुलकर सामने आ रहे मतभेदों ने गठबंधन की सियासत को असहज मोड़ पर ला खड़ा किया है। हाल के दिनों में मंत्री राधाकृष्ण किशोर के तेवरों ने राजनीतिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है। उन्होंने एक साथ कई मुद्दों पर नाराजगी जाहिर कर यह संकेत दे दिया है कि कांग्रेस के भीतर सबकुछ सामान्य नहीं है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष केशव महतो कमलेश के खिलाफ पार्टी के अंदर असंतोष लगातार बढ़ रहा है। संगठन में फैसलों की शैली, कार्यकर्ताओं की उपेक्षा और राजनीतिक समन्वय को लेकर कई वरिष्ठ नेता नाराज बताए जा रहे हैं। प्रदेश नेतृत्व में बदलाव का दबाव यही वजह है कि प्रदेश नेतृत्व में बदलाव को लेकर अंदरखाने लामबंदी तेज हो गई है। कांग्रेस के कुछ नेता मानते हैं कि मौजूदा परिस्थितियों में संगठन को संभालने के लिए नए नेतृत्व की जरूरत है। झामुमो लगातार रख रहा नजर राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी तेज है कि मंत्रियों के विभागों के पुन: बंटवारे और राजनीतिक हिस्सेदारी को लेकर भी असहमति पैदा हो सकती है। कई नेताओं को यह शिकायत है कि संगठन और सरकार के बीच बेहतर तालमेल नहीं बन पा रहा है। इसी कारण समय-समय पर सार्वजनिक बयानबाजी सामने आ रही है, जिससे गठबंधन की छवि प्रभावित हो रही है। झामुमो भी इस स्थिति पर नजर बनाए हुए है, क्योंकि कांग्रेस की अंदरूनी कलह का सीधा असर सरकार की स्थिरता और समन्वय पर पड़ सकता है। भाषा विवाद पर भी धर्मसंकट इधर मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने हाल में भाषा विवाद के मुद्दे पर प्रदेश अध्यक्ष से जवाब मांगकर राजनीतिक तापमान और बढ़ा दिया है। वे इस निमित्त गठित मंत्रियों के समूह में शामिल हैं। इसका हवाला देते हुए उन्होंने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष से पार्टी का आधिकारिक पक्ष बताने को कहा है। जिस तरह सार्वजनिक रूप से प्रदेश अध्यक्ष पर सवाल खड़े हो रहे हैं, उससे यह स्पष्ट संकेत गया कि पार्टी के भीतर संवाद और भरोसे का संकट गहराता जा रहा है। कांग्रेस जल्द ही अंदरूनी मतभेदों को नियंत्रित नहीं करती है, तो इसका असर आगामी राजनीतिक रणनीतियों और गठबंधन की मजबूती पर पड़ सकता है। विपक्ष हमलावर झामुमो की चिंता इस बात को लेकर भी बढ़ रही है कि विपक्ष लगातार महागठबंधन की एकजुटता पर सवाल उठा रहा है। भाजपा कांग्रेस की अंदरूनी कलह को मुद्दा बनाकर सरकार को घेरने की कोशिश कर रही है। ऐसे में गठबंधन के सहयोगी दल चाहते हैं कि कांग्रेस अपने संगठनात्मक विवादों को जल्द सुलझाए, ताकि सरकार विकास और जनहित के मुद्दों पर केंद्रित रह सके।
रांची। महिला आरक्षण को लेकर झारखंड की सियासत गरमा गई है। नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से नारी शक्ति वंदन पर विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि इस संबंध में मुख्यमंत्री से मिलने के लिए समय मांगा गया था जो नहीं मिला। मरांडी ने कहा कि पार्टी के महामंत्री अमर कुमार बाउरी द्वारा 30 अप्रैल से ही मुख्यमंत्री से मिलने का समय लेने का प्रयास किया जा रहा था। समय नहीं मिलने पर उनको एक पत्र लिखकर ही सारी बातों से अवगत करा दिया जा रहा है। झारखंड में 7 महिलाओं की सीटें होती केंद्र सरकार ने 16, 17, 18 अप्रैल को नारी शक्ति वंदन अधिनियम संसद में लाया था। इससे देश की आधी आबादी के लिए लोकसभा और विधानसभा में 33% सीटें उनके लिए आरक्षित होगी। झारखंड में 14 लोकसभा की सीटें बढ़कर 21 हो जाती। जिसमें सात महिलाओं के लिए रिजर्व होती। इसी प्रकार विधानसभा की सीटें 81 से बढ़कर 121 हो जाती। झामुमो ने विरोध में किया था मतदान झारखंड मुक्ति मोर्चा ने इसके विरोध में मतदान किया। इसलिए पार्टी ने तय किया था कि मुख्यमंत्री से मिलकर उनसे पार्टी आग्रह करेगी कि इस मुद्दे पर राज्यपाल की सहमति से एक विशेष सत्र बुलाएं और सदन से पारित कराकर केंद्र को प्रस्ताव भेजें। झामुमो का पलटवार मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मुलाकात का समय नहीं मिलने के नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी के आरोप पर झारखंड मुक्ति मोर्चा ने पलटवार किया है। महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा कि मुख्यमंत्री के पास निरर्थक सवालों के लिए समय नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि कोई सकारात्मक एजेंडा हो तो सरकार संवाद के लिए हमेशा तैयार है, लेकिन केवल राजनीतिक आरोपों के आधार पर मुलाकात की अपेक्षा उचित नहीं है। भट्टाचार्य ने नगर निकाय चुनावों का उदाहरण देते हुए कहा कि राज्य सरकार ने 33 प्रतिशत आरक्षण लागू कर ट्रिपल टेस्ट की प्रक्रिया पूरी की है। इसके बावजूद विपक्ष महिलाओं के नाम पर राजनीति कर उन्हें गुमराह कर रहा है। बंगाल में केंद्रीय एजेंसियां बनी बीजेपी का मोहरा उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि बंगाल में एक महिला नेतृत्व के खिलाफ केंद्र की एजेंसियों का व्यापक इस्तेमाल किया जा रहा है, जो लोकतांत्रिक मूल्यों पर सवाल खड़ा करता है।
रांची। हेमंत सोरेन पश्चिम बंगाल में चुनाव प्रचार खत्म कर रांची लौटते ही एक्शन मोड में नजर आए। सोमवार को उन्होंने राज्य में शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला सशक्तीकरण और ट्रैफिक व्यवस्था में सुधार को लेकर लगातार उच्चस्तरीय बैठकें कीं। इन बैठकों में विभिन्न विभागों के अधिकारियों के साथ योजनाओं की प्रगति और भविष्य की रणनीति पर विस्तार से चर्चा हुई। दिशोम गुरु शिबू सोरेन आवासीय विद्यालय पर फोकस मुख्यमंत्री ने रांची के जगुआर कैंपस, रिंग रोड में प्रस्तावित दिशोम गुरु शिबू सोरेन आवासीय विद्यालय के निर्माण को लेकर समीक्षा की। अधिकारियों ने पावरपॉइंट प्रस्तुति के जरिए परियोजना की रूपरेखा, सुविधाओं और कार्य योजना की जानकारी दी। सीएम ने निर्देश दिया कि भूमि चिह्नितीकरण का कार्य जल्द पूरा कर निर्माण प्रक्रिया को तेज किया जाए। अधिकारियों ने बताया कि डीपीआर तैयार है और जमीन चिन्हित करने का काम जारी है। पुलिस परिवारों के लिए अस्पताल योजना पर चर्चा बैठक में जैप-10, होटवार में प्रस्तावित अस्पताल के संचालन को लेकर भी चर्चा हुई। यह अस्पताल पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल पर चलेगा। शुरुआती चरण में 50 बेड की सुविधा होगी, जिसे भविष्य में बढ़ाकर 100 बेड तक किया जा सकेगा। फ्लाईओवर परियोजनाओं को जल्द पूरा करने के निर्देश सीएम ने सिरमटोली से कांटाटोली को जोड़ने वाले फ्लाईओवर की प्रगति की समीक्षा करते हुए भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया तेजी से पूरी करने के निर्देश दिए। साथ ही करमटोली से साइंस सिटी, चिरौंदी तक प्रस्तावित फ्लाईओवर परियोजना पर भी महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश दिए। महिला सशक्तीकरण और डिजिटल शिक्षा पर जोर मुख्यमंत्री ने मिशन शक्ति और मिशन वात्सल्य के तहत चल रही योजनाओं की मॉनिटरिंग पर जोर दिया। उन्होंने कामकाजी महिलाओं का डेटाबेस तैयार करने और सखी निवास योजना को मजबूत करने के निर्देश दिए। इसके अलावा डिजिटल और ऑनलाइन शिक्षा को बढ़ावा देने तथा नर्सिंग शिक्षा के विस्तार पर भी विशेष ध्यान देने को कहा।
आज की तेज़ रफ्तार जिंदगी में पुरुषों की त्वचा लगातार धूप, धूल और प्रदूषण के संपर्क में रहती है। ऑफिस जाने का रोज़ाना सफर हो, वीकेंड पर बाइक राइड हो या आउटडोर स्पोर्ट्स–इन सबके कारण चेहरे पर जिद्दी टैन, असमान स्किन टोन और डलनेस साफ दिखाई देने लगती है। अच्छी बात यह है कि टैन हटाने के लिए आपको बहुत जटिल या लंबी स्किनकेयर रूटीन की जरूरत नहीं है। सही प्रोडक्ट्स और साइंटिफिक अप्रोच के साथ आप सिर्फ एक हफ्ते में अपनी स्किन को बेहतर बना सकते हैं। आखिर टैन होता क्यों है? जब आपकी त्वचा सूरज की UV किरणों के संपर्क में आती है, तो शरीर खुद को बचाने के लिए मेलानिन नामक पिगमेंट बनाता है। यही मेलानिन त्वचा को डार्क बनाता है। पुरुषों की त्वचा महिलाओं की तुलना में लगभग 20% मोटी होती है और इसमें ऑयल प्रोडक्शन भी ज्यादा होता है। यही कारण है कि टैन त्वचा पर जमा होकर ज्यादा गहरा और पैची दिखाई देता है। 7 दिनों का असरदार डिटैन रूटीन Step 1: दिन की शुरुआत करें डिटैन फेसवॉश से कई पुरुष आज भी चेहरे पर साबुन या बॉडी वॉश का इस्तेमाल करते हैं, जो स्किन के लिए नुकसानदायक हो सकता है। एक अच्छा डिटैन फेसवॉश त्वचा की ऊपरी परत से डेड स्किन और गंदगी हटाता है। यह स्किन को साफ करने के साथ-साथ आगे इस्तेमाल होने वाले प्रोडक्ट्स को बेहतर तरीके से काम करने में मदद करता है। Step 2: हफ्ते में 2 बार डिटैन फेस मास्क लगाएं सिर्फ फेसवॉश से गहरा टैन नहीं हटता। इसके लिए डिटैन फेस मास्क जरूरी है। यह मास्क खास एक्टिव इंग्रीडिएंट्स और क्ले से बना होता है, जो त्वचा के अंदर जमा मेलानिन को तोड़ने में मदद करता है। हफ्ते में 2 बार 10–15 मिनट लगाने से स्किन धीरे-धीरे साफ और ब्राइट दिखने लगती है। Step 3: मॉइश्चराइजर से स्किन को हाइड्रेट रखें बहुत से लोग मानते हैं कि टैन हटाने के लिए स्किन को ड्राय रखना चाहिए, लेकिन यह गलत है। ड्राय स्किन और भी ज्यादा डल और डार्क दिखती है। इसलिए हर बार फेसवॉश या मास्क के बाद एक हल्का, ऑयल-फ्री मॉइश्चराइजर जरूर लगाएं। इससे त्वचा सॉफ्ट, हेल्दी और ग्लोइंग बनी रहती है। Step 4: सनस्क्रीन है सबसे जरूरी अगर आप सनस्क्रीन नहीं लगाते, तो आपका सारा डिटैन प्रयास बेकार हो सकता है। SPF 50 वाला ब्रॉड-स्पेक्ट्रम सनस्क्रीन रोज सुबह लगाना जरूरी है। यह आपकी त्वचा को UV किरणों से बचाता है और नए टैन को बनने से रोकता है। यह रूटीन क्यों सबसे असरदार है? यह डिटैन रूटीन तीन स्तरों पर काम करता है: Removal (हटाना): डेड और डार्क स्किन को साफ करता है Correction (सुधार): गहरे पिगमेंट को कम करता है Prevention (बचाव): नए टैन को बनने से रोकता है
रांची। झारखंड में लगातार सामने आ रहे घोटालों को लेकर राजनीतिक माहौल गरमा गया है। भाजपा नेता बाबूलाल मरांडी ने राज्य की हेमंत सोरेन सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में भ्रष्टाचार इस कदर बढ़ गया है कि “जहां हाथ डालिए, वहीं नया घोटाला सामने आ जाता है।”मरांडी ने कहा कि खनन क्षेत्र में पत्थर, कोयला, बालू और लौह अयस्क की खुली लूट तो दिख रही है, लेकिन इसके अलावा भी सरकारी धन की बड़े पैमाने पर बंदरबांट हो रही है। उनके अनुसार यह स्थिति राज्य को “अंदर से खोखला” कर रही है और आम जनता इससे परेशान है। रांची में करोड़ों की अवैध निकासी का मामला राजधानी रांची में हाल ही में पशुपालन विभाग के दो कर्मचारियों द्वारा लगभग 2.94 करोड़ रुपये की अवैध निकासी का मामला सामने आया है। मरांडी ने दावा किया कि यह कोई एकल घटना नहीं है, बल्कि बोकारो और हजारीबाग जैसे अन्य जिलों में भी इसी तरह की वित्तीय अनियमितताएं सामने आ चुकी हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि यह घोटाले पिछले कई वर्षों से जारी हैं और अब धीरे-धीरे उजागर हो रहे हैं, जिससे प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं। उच्च अधिकारियों की भूमिका पर उठे सवाल मरांडी ने कहा कि इतने बड़े पैमाने पर हो रही गड़बड़ियां बिना उच्च अधिकारियों की मिलीभगत के संभव नहीं हैं। उन्होंने इसे “संगठित भ्रष्टाचार” करार देते हुए सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए। सरकार से जांच और कार्रवाई की मांग भाजपा नेता ने राज्य सरकार से सभी विभागों का व्यापक ऑडिट कराने, कोषागार से हुई निकासी की निष्पक्ष जांच कराने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। साथ ही उन्होंने सरकारी धन की वसूली सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया।
पिता योगेंद्र साव के निष्कासन से भड़कीं अंबा, बोलीं– एकतरफा कार्रवाई, न्याय के लिए जाएंगी केंद्रीय नेतृत्व के पास झारखंड की राजनीति में इन दिनों घमासान तेज हो गया है। कांग्रेस की पूर्व विधायक और राष्ट्रीय सचिव अंबा प्रसाद ने पार्टी के खिलाफ खुलकर बगावती रुख अपना लिया है। उन्होंने न केवल प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व बल्कि राज्य की गठबंधन सरकार पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। यह विवाद तब और बढ़ गया जब उनके पिता और पूर्व मंत्री योगेंद्र साव को पार्टी से निष्कासित कर दिया गया। “कार्रवाई पूरी तरह एकतरफा” अंबा प्रसाद ने प्रेस वार्ता में कहा कि उनके पिता के खिलाफ की गई कार्रवाई पूरी तरह से एकतरफा और दबाव में ली गई है। उनका आरोप है कि न तो कोई नोटिस दिया गया और न ही पक्ष रखने का मौका मिला। उन्होंने प्रदेश नेतृत्व के उस दावे को भी खारिज किया जिसमें चेतावनी दिए जाने की बात कही गई थी। 3 साल के लिए पार्टी से बाहर योगेंद्र साव झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने 20 मार्च को योगेंद्र साव को अनुशासनहीनता के आरोप में तीन वर्षों के लिए पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से निष्कासित कर दिया था। पार्टी के अनुसार, उन्होंने सोशल मीडिया और फेसबुक लाइव के जरिए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और गठबंधन सरकार के खिलाफ बयानबाजी की, जो संगठनात्मक नियमों के खिलाफ है। घर तोड़े जाने से बढ़ा विवाद अंबा प्रसाद ने बड़कागांव स्थित चट्टी बरियातू कोल माइंस परियोजना क्षेत्र में उनके आवास को बुलडोजर से गिराए जाने का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने इस कार्रवाई को “तुगलकी फरमान” बताते हुए कहा कि बिना उचित मुआवजा और न्यायिक प्रक्रिया पूरी हुए उनके घर को ध्वस्त किया गया, जिससे परिवार को गहरा आघात पहुंचा है। जांच रिपोर्ट पर उठाए सवाल उन्होंने यह भी सवाल खड़ा किया कि मामले की जांच के लिए बनाई गई कमेटी की रिपोर्ट अब तक सार्वजनिक क्यों नहीं की गई। अंबा प्रसाद ने कांग्रेस नेतृत्व, गठबंधन सरकार, पुलिस-प्रशासन और NTPC Limited पर निशाना साधते हुए कहा कि उनका परिवार लंबे समय से टारगेट किया जा रहा है। “धमकियां मिलीं, करियर खत्म करने की कोशिश” अंबा प्रसाद ने दावा किया कि उनके पिता को लगातार धमकियां दी गईं और उनका राजनीतिक करियर खत्म करने की साजिश रची गई। उन्होंने कहा कि निष्कासन का फैसला दबाव में लिया गया है। केंद्रीय नेतृत्व से करेंगी न्याय की मांग उन्होंने साफ किया कि इस पूरे मामले को लेकर वे कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व के पास जाएंगी और न्याय की मांग करेंगी।
विधानसभा में उठा बड़ा मुद्दा झारखंड के गढ़वा जिले से जुड़ा मंडल डैम विस्थापन का मामला अब विधानसभा तक पहुंच गया है। क्षेत्रीय विधायक सत्येंद्र नाथ तिवारी ने बजट सत्र के आखिरी दिन ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के जरिए पुनर्वास योजना पर गंभीर आपत्ति जताई। जंगल उजाड़कर बसाने की योजना पर सवाल विधायक ने सरकार की उस योजना का विरोध किया, जिसमें बलीगढ़, बिरापुर और विश्रामपुर जैसे गांवों के बीच स्थित जंगल क्षेत्र में विस्थापित परिवारों को बसाने की तैयारी है। उन्होंने कहा कि इस योजना के तहत करीब 780 विस्थापित परिवारों को बसाया जाना प्रस्तावित है। 5000 ग्रामीणों की आजीविका पर खतरा सत्येंद्र तिवारी ने सदन में कहा कि इस फैसले से आसपास के करीब 5000 ग्रामीणों की रोजी-रोटी प्रभावित होगी। इन गांवों के लोग जंगल पर निर्भर हैं और महुआ फूल, तेंदूपत्ता, पत्तल-दोना, लाह और जड़ी-बूटियों से अपनी आजीविका चलाते हैं। जंगल क्षेत्र में बसावट होने से उनके जीवन पर सीधा असर पड़ेगा। पर्यावरण संतुलन बिगड़ने की आशंका विधायक ने यह भी चेतावनी दी कि जंगल क्षेत्र में बड़ी संख्या में लोगों को बसाने से पर्यावरणीय संतुलन बिगड़ सकता है। जनसंख्या का दबाव बढ़ेगा और प्राकृतिक संसाधनों पर अतिरिक्त भार पड़ेगा, जिससे क्षेत्र की पारिस्थितिकी को नुकसान हो सकता है। वैकल्पिक स्थान पर पुनर्वास की मांग उन्होंने सरकार से मांग की कि विस्थापित परिवारों को किसी अन्य उपयुक्त स्थान पर बसाया जाए, ताकि स्थानीय ग्रामीणों की आजीविका और पर्यावरण दोनों सुरक्षित रह सकें। सड़क और पुल निर्माण की भी उठाई मांग इसके अलावा विधायक ने गैर-सरकारी संकल्प के तहत सिरोई पंचायत के ढोटी गांव तक लगभग 7 किलोमीटर पक्की सड़क और पुलिया निर्माण की मांग भी विधानसभा में रखी। इस पर संबंधित मंत्री ने सकारात्मक पहल का आश्वासन दिया है।
रांची। रांची में आयोजित एक आशीर्वाद समारोह में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन अपनी पत्नी कल्पना सोरेन के साथ हटिया विधायक नवीन जायसवाल के आवास पहुंचे। यह आयोजन विधायक की पुत्री माही जायसवाल के विवाह उपरांत रखा गया था। मुख्यमंत्री ने समारोह में शामिल होकर नवविवाहित जोड़े को आशीर्वाद दिया और उनके सुखद वैवाहिक जीवन की कामना की। परिवार से की मुलाकात इस दौरान हेमंत सोरेन ने विधायक नवीन जायसवाल और उनके परिवार से मुलाकात कर खुशी जाहिर की। कार्यक्रम में आत्मीयता और पारिवारिक अपनापन देखने को मिला। समारोह का माहौल सादगी, खुशी और गर्मजोशी से भरा रहा, जहां मौजूद सभी लोगों ने नवदंपति को दीं शुभकामनाएं।
रांची में झारखंड विधानसभा के सत्र के दौरान मंगलवार को झारखंड स्टेट यूनिवर्सिटी बिल 2026 को बहस के बाद पास कर दिया गया। इस दौरान कई विधायकों ने संशोधन के सुझाव दिए, लेकिन सरकार ने मूल प्रावधानों को बरकरार रखते हुए बिल को मंजूरी दिलाई। सत्र के दौरान शिक्षा, पेयजल और प्रशासन से जुड़े कई अहम मुद्दों पर भी चर्चा हुई। यूनिवर्सिटी बिल को मिली मंजूरी यह बिल सदन में सुदीव्य कुमार सोनू ने पेश किया। उन्होंने बताया कि इसका पहले वाला संस्करण पिछले साल अगस्त में पेश किया गया था, जिसे वापस लेकर संशोधित रूप में दोबारा लाया गया। बिल पास होने के साथ ही राज्य के विश्वविद्यालयों की प्रशासनिक व्यवस्था में बड़ा बदलाव तय हो गया है। VC चयन में अब CM की भी भूमिका नए कानून के अनुसार: विश्वविद्यालयों के कुलपति (VC) का चयन अब राज्यपाल और मुख्यमंत्री मिलकर करेंगे अभी तक यह अधिकार केवल राज्यपाल (कुलाधिपति) के पास था सरकार का कहना है कि दो संवैधानिक पदों की संयुक्त भागीदारी से बेहतर और संतुलित निर्णय संभव होगा। विपक्ष के सुझाव, लेकिन नहीं हुए स्वीकार बहस के दौरान कई विधायकों ने अहम सुझाव दिए: राज सिन्हा ने यूनिवर्सिटी कैंपस में प्लेसमेंट एजेंसी खोलने का प्रस्ताव रखा अमित यादव ने VC चयन प्रक्रिया से मुख्यमंत्री की भूमिका हटाने की मांग की हालांकि, सरकार ने इन सभी सुझावों को खारिज कर दिया। हर घर पानी की तैयारी, लाखों चापाकल होंगे दुरुस्त सत्र के दौरान पेयजल संकट का मुद्दा भी उठा। मंत्री योगेंद्र प्रसाद ने बताया कि: गर्मी को देखते हुए हर घर तक पानी पहुंचाने की तैयारी की जा रही है राज्य में 1,44,906 चापाकलों की मरम्मत का आदेश दिया गया है संथाल परगना में पानी की समस्या पर चिंता विधायक हेमलाल मुर्मू ने संथाल परगना क्षेत्र में खराब चापाकलों और सूखे की समस्या उठाई। इस पर मंत्री ने स्वीकार किया कि: कई चापाकल 10 साल पुराने हो चुके हैं भूजल स्तर गिरने से पानी की समस्या बढ़ी है वैकल्पिक जल आपूर्ति योजना पर काम चल रहा है सदन में हंगामा, असंसदीय भाषा पर विवाद सत्र के दौरान विपक्षी विधायकों ने सदन में इस्तेमाल की गई कथित असंसदीय भाषा को लेकर विरोध जताया। नीरा यादव ने इस मुद्दे को उठाया उन्होंने कहा कि सदन की कार्यवाही देखने आने वाले छात्रों पर इसका गलत असर पड़ता है स्पीकर और मंत्री ने जताया खेद रबीन्द्र नाथ महतो ने कहा कि आपत्तिजनक शब्दों को रिकॉर्ड से हटा दिया गया है। वहीं संसदीय कार्य मंत्री राधा कृष्ण किशोर ने कहा कि सदन की गरिमा बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है। BDO की कमी जल्द होगी दूर मंत्री दीपिका पांडेय ने बताया कि: राज्य के 264 ब्लॉकों में से 218 में BDO तैनात हैं बाकी 46 ब्लॉकों में सर्किल ऑफिसर अतिरिक्त प्रभार संभाल रहे हैं अगले 15-20 दिनों में सभी खाली पद भर दिए जाएंगे
झारखंड में रामनवमी, सरहूल और ईद जैसे प्रमुख त्योहारों पर डीजे बजाने को लेकर सियासत गरमा गई है। विधानसभा के बाहर दिए गए एक बयान ने इस मुद्दे को और तूल दे दिया है, जहां सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने नजर आ रहे हैं। “डीजे हर हाल में बजेगा” - मंत्री का बड़ा बयान राज्य के स्वास्थ्य एवं खाद्य आपूर्ति मंत्री इरफान अंसारी ने साफ शब्दों में कहा कि झारखंड में त्योहारों के दौरान डीजे बजेगा और हर साल बजेगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार ने कभी डीजे पर पूरी तरह रोक लगाने की बात नहीं कही, बल्कि इसके संभावित दुष्परिणामों को लेकर लोगों को जागरूक करने की कोशिश की गई थी। मंत्री ने यह भी बताया कि जुलूसों के दौरान किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए सिविल सर्जनों को साथ रहने का निर्देश दिया गया है। कोर्ट के आदेश बनाम राजनीतिक बयानबाजी सरकार की ओर से कहा जा रहा है कि वह कोर्ट के निर्देशों का पालन कर रही है, जबकि विपक्ष इसे आम लोगों की धार्मिक स्वतंत्रता में दखल बता रहा है। अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री हफिजुल हसन ने भी साफ किया कि सरकार किसी भी त्योहार के खिलाफ नहीं है और केवल नियमों का पालन करवा रही है। विपक्ष का विरोध, जुलूस निकालने की चेतावनी विधायक निर्मल महतो, मनीष प्रसाद और रौशन लाल चौधरी समेत कई नेताओं ने जुलूस पर किसी भी तरह की रोक का विरोध किया है। उनका कहना है कि: रामनवमी और अन्य त्योहारों के जुलूस हर हाल में निकलेंगे सरकार को अनुमति देनी ही होगी यदि अनुमति नहीं मिली, तो भी जुलूस निकाला जाएगा “धार्मिक उन्माद फैलाने की कोशिश”-सरकार का पलटवार मंत्री दीपिका सिंह पांडेय ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि भाजपा अफवाह और धार्मिक उन्माद फैलाकर राजनीति कर रही है। उन्होंने कहा कि अगर किसी को नियमों पर आपत्ति है, तो वह संबंधित संस्थाओं से अनुमति ले सकता है। बाबूलाल मरांडी का बड़ा बयान प्रतिपक्ष के नेता बाबूलाल मरांडी ने कहा कि किसी भी धार्मिक आयोजन पर रोक लगाना गलत है। उन्होंने जोर देकर कहा कि सार्वजनिक सड़कों पर जुलूस निकालना सभी का अधिकार है और किसी भी डर या दबाव में इसे रोका नहीं जाना चाहिए। “सरकार लोगों को कर रही परेशान”-नीरा यादव विधायक नीरा यादव ने आरोप लगाया कि सरकार जानबूझकर ऐसे फैसले ले रही है, जिससे आम लोगों को परेशानी हो। उन्होंने कहा कि सभी लोग मिलकर त्योहार मनाएंगे और डीजे भी बजाएंगे। मुद्दा बना राजनीतिक टकराव का कारण यह विवाद अब सिर्फ प्रशासनिक या कानूनी नहीं, बल्कि राजनीतिक मुद्दा बन चुका है। सत्ता पक्ष कोर्ट के आदेश और सुरक्षा व्यवस्था की बात कर रहा है विपक्ष इसे धार्मिक स्वतंत्रता से जोड़ रहा है
झारखंड के हजारीबाग जिले से एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जहां पूर्व मंत्री पर कोयला खनन परियोजना में काम कर रहे मजदूरों पर तीर-धनुष से हमला करने का आरोप लगा है। इस घटना के बाद इलाके में दहशत का माहौल बन गया है और मामला राजनीतिक रूप से भी तूल पकड़ता नजर आ रहा है। कोयला परियोजना में अचानक हमला, मजदूरों में अफरा-तफरी यह पूरा मामला हजारीबाग के केरेडारी क्षेत्र स्थित चट्टी बरियातू कोल परियोजना का बताया जा रहा है। यहां काम कर रहे मजदूरों पर अचानक हमला कर दिया गया, जिससे वहां मौजूद लोगों में भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। हालांकि राहत की बात यह है कि इस घटना में किसी के घायल होने की सूचना नहीं है। पूर्व मंत्री पर लगे गंभीर आरोप इस हमले का आरोप झारखंड के पूर्व मंत्री योगेंद्र साव पर लगाया गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, वह पहाड़ी के ऊपर खड़े होकर हाथ में तीर-धनुष लिए कंपनी के वर्करों और वाहनों की ओर निशाना साधते नजर आए। इस घटना का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। कोयला खनन के विरोध से जुड़ा मामला बताया जा रहा है कि यह पूरा विवाद इलाके में चल रहे कोयला खनन कार्य को लेकर है। स्थानीय स्तर पर इस परियोजना का विरोध किया जा रहा था और उसी क्रम में यह घटना सामने आई। रिपोर्ट्स के अनुसार, संबंधित परियोजना एनटीपीसी से जुड़ी बताई जा रही है, जहां खनन कार्य जारी है। तीर चलाने से मची दहशत प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, पूर्व मंत्री पहाड़ की चोटी पर चढ़ गए और वहां से नीचे काम कर रहे मजदूरों की ओर तीर चलाया। इस दौरान मजदूरों में अफरा-तफरी मच गई और कई लोग अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे। पहले भी मिल चुकी हैं धमकियां कंपनी के कर्मचारियों का दावा है कि इससे पहले भी उन्हें काम बंद करने के लिए धमकाया गया था। आरोप है कि यह घटना उसी विवाद का हिस्सा हो सकती है। जांच के बाद होगी कार्रवाई पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि वायरल वीडियो और अन्य साक्ष्यों की पुष्टि के बाद ही आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। राजनीति में भी गरमाया मुद्दा यह मामला अब राजनीतिक रंग भी लेता जा रहा है। विपक्षी दलों ने इस घटना को लेकर सरकार पर सवाल उठाए हैं और कानून-व्यवस्था पर चिंता जताई है। विवादों से रहा है पुराना नाता पूर्व मंत्री योगेंद्र साव पहले भी अपने बयानों और गतिविधियों को लेकर चर्चा में रहे हैं। लेकिन इस बार तीर-धनुष से हमले के आरोप ने उन्हें फिर से सुर्खियों में ला दिया है।
नगर निगम में बढ़ी राजनीतिक हलचल झारखंड के Dhanbad नगर निगम में डिप्टी मेयर पद को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। हाल ही में हुए नगर निगम चुनाव के बाद अब उप महापौर की कुर्सी को लेकर पार्षदों के बीच जोड़-तोड़ और समर्थन जुटाने की राजनीति शुरू हो गई है। शुक्रवार को महापौर Sanjeev Singh के सिंह मेंशन स्थित आवास पर आयोजित एक अभिनंदन समारोह में 40 से अधिक पार्षदों की मौजूदगी ने इस चुनाव को और दिलचस्प बना दिया। अरुण चौहान के नाम का प्रस्ताव समारोह के दौरान कई पार्षदों ने डिप्टी मेयर पद के लिए Arun Chauhan का नाम प्रस्तावित किया। सूत्रों के अनुसार, इस प्रस्ताव को कार्यक्रम में मौजूद कई पार्षदों का समर्थन भी मिला। मेयर संजीव सिंह ने सभी पार्षदों का स्वागत करते हुए उन्हें चुनाव में जीत की बधाई दी और शहर के विकास कार्यों में मिलकर काम करने की अपील की। मेयर ने दिया भरोसा मेयर संजीव सिंह ने पार्षदों को आश्वस्त किया कि वे उनकी भावनाओं और इच्छाओं का सम्मान करेंगे। उन्होंने कहा कि पार्षद जिस भी उम्मीदवार को डिप्टी मेयर चुनेंगे, उसे उनका पूरा समर्थन मिलेगा। उन्होंने पार्षदों से आग्रह किया कि वे राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर शहर के विकास के लिए एकजुट होकर काम करें, ताकि धनबाद को नई दिशा और गति मिल सके। महिला प्रतिनिधित्व का मुद्दा भी गरमाया डिप्टी मेयर की दौड़ में अब महिला प्रतिनिधित्व का मुद्दा भी तेजी से उभर रहा है। इसी कड़ी में Menka Singh भी मैदान में उतर आई हैं। हाल ही में उन्होंने पार्षदों के लिए एक अभिनंदन समारोह आयोजित किया था, जिसमें उन्होंने ‘आधी आबादी’ के प्रतिनिधित्व का मुद्दा उठाते हुए समर्थन का दावा किया। जीत के लिए 28 पार्षदों का समर्थन जरूरी डिप्टी मेयर बनने के लिए कम से कम 28 पार्षदों का समर्थन जरूरी है। ऐसे में दोनों पक्षों के बीच समर्थन जुटाने की कवायद तेज हो गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में पार्षदों की गोलबंदी और तेज होगी और यह चुनाव पूरी तरह ‘नंबर गेम’ पर निर्भर करेगा। आगे और बढ़ेगी सियासी गर्मी फिलहाल नगर निगम में डिप्टी मेयर पद को लेकर माहौल गर्म है। अरुण चौहान और मेनका सिंह के बीच मुकाबला रोचक होता जा रहा है। अब देखना दिलचस्प होगा कि पार्षदों का बहुमत किसके पक्ष में जाता है और आखिरकार उप महापौर की कुर्सी किसे मिलती है।
सदन शुरू होने से पहले गरमाया सियासी माहौल झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के 14वें दिन कार्यवाही शुरू होने से पहले ही राजनीतिक माहौल गरमा गया। मुख्य विपक्षी दल Bharatiya Janata Party के विधायकों ने विधानसभा के मुख्य द्वार पर जोरदार प्रदर्शन किया और राज्य की Hemant Soren सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शन के दौरान भाजपा विधायक हाथों में भगवा रंग की तख्तियां लेकर सरकार के खिलाफ नारे लगा रहे थे। उनका आरोप था कि राज्य में जल प्रबंधन की स्थिति बेहद खराब है और सरकार लोगों को साफ पानी उपलब्ध कराने में विफल रही है। नल-जल योजना पर लगाए गंभीर आरोप भाजपा विधायकों ने सरकार की नल-जल योजना को लेकर गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना है कि राज्य में “घर-घर नल” लगाने का वादा किया गया था, लेकिन जमीनी स्तर पर लोगों को पानी नहीं मिल रहा है। विधायकों का दावा है कि योजना कागजों पर तो बड़ी दिखती है, लेकिन हकीकत में कई जगहों पर नल लगे होने के बावजूद पानी नहीं पहुंच रहा है। पोस्टरों के जरिए सरकार पर साधा निशाना प्रदर्शन के दौरान विधायकों ने पोस्टरों और नारों के माध्यम से भी सरकार पर निशाना साधा। पोस्टरों पर लिखे नारों में शामिल थे- “हेमंत सरकार पानी दो, पानी दो!” “नल-जल योजना हुई फेल, जिम्मेदार को भेजो जेल।” “नल में जल नहीं, जल में है घोटाला। पानी के नाम पर भ्रष्टाचार का बोलबाला।” इन नारों के जरिए विपक्ष ने सरकार पर पानी की समस्या को लेकर जनता को गुमराह करने का आरोप लगाया। सदन के भीतर भी मुद्दा उठाने की तैयारी भाजपा विधायकों ने कहा कि नल-जल योजना में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताएं और भ्रष्टाचार हुआ है। उन्होंने मांग की कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और दोषियों पर कार्रवाई हो। विपक्षी दल ने यह भी संकेत दिया कि इस मुद्दे को विधानसभा के भीतर जोर-शोर से उठाया जाएगा और सरकार से जवाब मांगा जाएगा। पानी की समस्या को लेकर बढ़ा सियासी दबाव राज्य में कई इलाकों में पेयजल की समस्या को लेकर लगातार शिकायतें सामने आ रही हैं। ऐसे में नल-जल योजना को लेकर उठे सवालों ने झारखंड की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है। अब देखना होगा कि सरकार विपक्ष के इन आरोपों पर क्या जवाब देती है और विधानसभा के अंदर इस मुद्दे पर क्या बहस होती है।
झारखंड में रामनवमी जुलूस के दौरान चलंत डीजे बजाने पर लगाए गए प्रतिबंध को लेकर सियासी विवाद तेज हो गया है। इस मुद्दे पर मंगलवार को विधानसभा के भीतर और बाहर जमकर हंगामा हुआ। विपक्षी दल भाजपा के विधायकों ने इस फैसले के विरोध में जोरदार प्रदर्शन किया, जबकि सरकार ने साफ कहा कि यह कदम अदालत के आदेशों के पालन के तहत उठाया गया है। विधानसभा परिसर में भाजपा का प्रदर्शन रामनवमी जुलूस में डीजे पर रोक को लेकर भाजपा विधायकों ने विधानसभा परिसर में विरोध जताया। उनका आरोप है कि सरकार हिंदू त्योहारों के समय अनावश्यक पाबंदियां लगाकर लोगों की धार्मिक भावनाओं को आहत कर रही है। भाजपा विधायक रोशनलाल ने कहा कि रामनवमी करोड़ों हिंदुओं की आस्था का पर्व है और जुलूस में डीजे पर प्रतिबंध लगाना अनुचित है। उन्होंने सरकार से मांग की कि इस फैसले को तुरंत वापस लिया जाए। भाजपा नेताओं का यह भी कहना है कि हर बार हिंदू त्योहारों के समय ही इस तरह के प्रतिबंध लगाए जाते हैं, जो तुष्टिकरण की राजनीति को दर्शाता है। सदन के अंदर भी गूंजे नारे विपक्ष का विरोध केवल विधानसभा परिसर तक सीमित नहीं रहा। जैसे ही सदन की कार्यवाही शुरू हुई, भाजपा विधायक नारेबाजी करते हुए विरोध दर्ज कराने लगे। इस दौरान भाजपा विधायक नवीन जायसवाल ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अगर रामनवमी के जुलूस में डीजे नहीं बजाने दिया जाएगा तो क्या हिंदुओं को धर्म परिवर्तन करना पड़ेगा। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि हजारीबाग में प्रशासन लोगों को जुलूस के दौरान डीजे बजाने से रोकने के लिए दबाव बना रहा है। हजारीबाग की रामनवमी का दिया हवाला भाजपा विधायकों ने कहा कि हजारीबाग की रामनवमी देशभर में अपनी भव्यता और परंपरा के लिए जानी जाती है। यहां कई दिनों तक धार्मिक जुलूस, अखाड़ा प्रदर्शन और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होते हैं। ऐसे में डीजे पर प्रतिबंध लगाने से इस परंपरा पर असर पड़ेगा। सरकार ने कहा-सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन वहीं सत्ता पक्ष ने विपक्ष के आरोपों को खारिज कर दिया। कांग्रेस विधायक राजेश कच्छप ने कहा कि प्रशासन केवल न्यायालय के निर्देशों के अनुसार कार्रवाई कर रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अदालत के आदेश के अनुसार रात 10 बजे के बाद तेज ध्वनि वाले डीजे और लाउडस्पीकर बजाने की अनुमति नहीं है। इसलिए प्रशासन इसी नियम का पालन सुनिश्चित करा रहा है। ‘यह किसी धर्म विशेष का मुद्दा नहीं’ संसदीय कार्य मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने भी सदन में कहा कि यह मामला किसी धर्म विशेष से जुड़ा नहीं है। उन्होंने बताया कि अदालत के निर्देश के अनुसार रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक तेज ध्वनि वाले साउंड सिस्टम पर प्रतिबंध लागू है और सरकार केवल उसी का पालन कर रही है। उन्होंने विपक्ष पर आरोप लगाया कि वह इस मुद्दे को हिंदू-मुस्लिम रंग देकर समाज का माहौल खराब करने की कोशिश कर रहा है। सड़क से सदन तक बढ़ा विवाद रामनवमी जैसे धार्मिक और आस्था से जुड़े पर्व के दौरान डीजे प्रतिबंध का मामला अब राजनीतिक टकराव का रूप ले चुका है। सड़क से लेकर विधानसभा तक उठ रही आवाजों के बीच यह मुद्दा फिलहाल शांत होता नहीं दिख रहा है और आने वाले दिनों में इस पर सियासत और तेज होने की संभावना है।
झारखंड हाईकोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) और रांची पुलिस से जुड़े विवादित मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। न्यायमूर्ति एस.के. द्विवेदी की अदालत ने इस मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) से कराने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने CBI को प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू करने का आदेश भी दिया है। इस मामले में अदालत ने 24 फरवरी को सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित रख लिया था, जिसे बुधवार को सुनाया गया। क्या है पूरा मामला यह मामला रांची के एयरपोर्ट थाना कांड संख्या 05/2026 से जुड़ा है। इसमें संतोष कुमार ने ED अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज कराई थी। FIR दर्ज होने के बाद रांची पुलिस ने ED कार्यालय में छापेमारी भी की थी। पुलिस की इस कार्रवाई को चुनौती देते हुए प्रवर्तन निदेशालय ने हाईकोर्ट में रिट याचिका दाखिल की थी। ED ने अदालत से प्राथमिकी को रद्द करने और पूरे मामले की जांच CBI से कराने की मांग की थी। इसके साथ ही शिकायतकर्ता संतोष कुमार के खिलाफ भी प्राथमिकी दर्ज करने का आग्रह किया गया था। 23 करोड़ के गबन का आरोप दरअसल, संतोष कुमार पर करीब 23 करोड़ रुपये के सरकारी धन के गबन का आरोप है, जो कथित पेयजल घोटाले से जुड़ा बताया जा रहा है। ED ने इस मामले में उनके खिलाफ ECIR दर्ज कर जांच शुरू की थी। ED के अनुसार, 12 जनवरी 2026 को संतोष कुमार खुद पूछताछ के लिए ED कार्यालय पहुंचे थे। पूछताछ के दौरान वे अचानक उत्तेजित हो गए और पास में रखा जग उठाकर अपने सिर पर मार लिया, जिससे उन्हें हल्की चोट आई। बाद में उन्होंने ED अधिकारियों पर मारपीट का आरोप लगाते हुए एयरपोर्ट थाना में मामला दर्ज कराया। कोर्ट में किसने रखा पक्ष मामले की सुनवाई के दौरान ED की ओर से एस.वी. राजू, अधिवक्ता ए.के. दास और सौरभ कुमार ने दलीलें पेश कीं। वहीं राज्य सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता एस. नागामुथु, महाधिवक्ता राजीव रंजन और अधिवक्ता दीपांकर ने पक्ष रखा। शिकायतकर्ता की ओर से अधिवक्ता सुमित गाड़ोदिया ने अदालत में दलीलें दीं। अहम बात: हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब पूरे मामले की जांच CBI करेगी और नई प्राथमिकी दर्ज कर जांच प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।
झारखंड में विधायकों और पूर्व विधायकों को ग्रेटर रांची क्षेत्र में जमीन उपलब्ध कराने की योजना अब आगे बढ़ती नजर आ रही है। राज्य सरकार ने इस लंबे समय से लंबित प्रक्रिया को गति देते हुए जल्द जमीन की रजिस्ट्री कराने का निर्णय लिया है। सरकार की ओर से कहा गया है कि अगले तीन दिनों के भीतर रजिस्ट्री के लिए ऑनलाइन पोर्टल शुरू कर दिया जाएगा, जिससे संबंधित विधायक और पूर्व विधायक अपनी जमीन की रजिस्ट्री करा सकेंगे। विधानसभा में उठा मुद्दा मंगलवार को विधानसभा की कार्यवाही के दौरान इस मुद्दे को झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के विधायक मथुरा महतो ने सदन में उठाया। उन्होंने कहा कि विधायकों और पूर्व विधायकों से जमीन आवंटन के लिए राशि पहले ही जमा कर ली गई है, लेकिन इसके बावजूद रजिस्ट्री की प्रक्रिया अब तक शुरू नहीं हो सकी है। उन्होंने सरकार से मांग की कि इस मामले में जल्द कार्रवाई करते हुए प्रक्रिया पूरी की जाए ताकि संबंधित लोगों को राहत मिल सके। भाजपा विधायक ने प्रशासन पर लगाए आरोप इस पर भाजपा विधायक सी.पी. सिंह ने रांची जिला प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि जमीन के लिए ली गई राशि सहकारी लिमिटेड के खाते में जमा है, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर देरी के कारण रजिस्ट्री प्रक्रिया शुरू नहीं हो पाई है। सी.पी. सिंह ने बताया कि उन्होंने इस मामले को लेकर रांची के उपायुक्त से भी बातचीत की थी। उस समय यह आश्वासन दिया गया था कि विधानसभा के मौजूदा सत्र के दौरान एक सप्ताह के भीतर रजिस्ट्री पोर्टल शुरू कर दिया जाएगा। लेकिन करीब 20 दिन बीत जाने के बाद भी पोर्टल शुरू नहीं होने से विधायकों और पूर्व विधायकों में नाराजगी बढ़ रही है। मंत्री ने सदन में दिया भरोसा मामले की गंभीरता को देखते हुए संसदीय कार्य मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने सदन में स्पष्ट किया कि अब इस प्रक्रिया में और देरी नहीं होगी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि अगले तीन दिनों के भीतर जमीन की रजिस्ट्री के लिए पोर्टल खोल दिया जाएगा और सभी आवश्यक औपचारिकताएं पूरी कर ली जाएंगी। बताया जा रहा है कि राज्य सरकार ने विधायकों और पूर्व विधायकों के लिए ग्रेटर रांची क्षेत्र में जमीन चिन्हित कर ली है। पोर्टल शुरू होने के बाद जमीन की रजिस्ट्री की प्रक्रिया तेजी से पूरी की जाएगी, जिससे लंबे समय से लंबित मांग का समाधान हो सकेगा।
होली अवकाश के बाद फिर शुरू होगी सदन की कार्यवाही होली की लंबी छुट्टियों के बाद सोमवार, 9 मार्च से झारखंड विधानसभा का बजट सत्र एक बार फिर शुरू हो रहा है। सत्र के शेष दिनों की कार्यवाही को लेकर राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। इस बार सदन में सबसे ज्यादा नजर विपक्ष के रुख पर टिकी हुई है कि वह सरकार को घेरने के लिए कितना आक्रामक तेवर अपनाता है। भाजपा विधायक की डिग्री का मुद्दा चर्चा में विधानसभा सत्र से पहले राजनीतिक गलियारों में भाजपा विधायक नवीन जायसवाल की डिग्री को लेकर विवाद सबसे अधिक चर्चा का विषय बना हुआ है। बताया जा रहा है कि सत्ता पक्ष इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाने की तैयारी में है। इसके जरिए विपक्ष पर दबाव बनाने की रणनीति तैयार की गई है, जिससे सदन में बहस तेज होने की संभावना है। पहले चरण में शांत रहा था विपक्ष बजट सत्र के पहले चरण में विपक्ष का रवैया अपेक्षाकृत शांत रहा था। सदन के अंदर सरकार के खिलाफ विपक्ष की ओर से ज्यादा तीखी प्रतिक्रिया या जोरदार विरोध देखने को नहीं मिला था। इस स्थिति को लेकर राजनीतिक हलकों में भी कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई थीं। विपक्ष के पास मुद्दों की कमी की चर्चा राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि फिलहाल विपक्ष के पास सरकार को घेरने के लिए ठोस मुद्दों की कमी नजर आ रही है। यही कारण है कि सदन में उसकी सक्रियता सीमित दिखाई दे रही है। सत्ता पक्ष ने साधा विपक्ष पर निशाना वहीं झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) और कांग्रेस के कुछ विधायकों का कहना है कि विपक्ष पूरी तरह सुस्त पड़ गया है। उनका दावा है कि सरकार सदन में उठने वाले हर सवाल का जवाब देने के लिए पहले से तैयार रहती है। ऐसे में विपक्ष को नए मुद्दे खोजने और सरकार को घेरने का ज्यादा मौका नहीं मिल पा रहा है। सत्र के दौरान तेज हो सकती है राजनीतिक बहस राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बजट सत्र के बाकी दिनों में सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिल सकती है। खासकर डिग्री विवाद और अन्य राजनीतिक मुद्दों को लेकर सदन में माहौल गर्म रहने की संभावना जताई जा रही है।
गढ़वा: झारखंड के गढ़वा जिले में मंडल डैम परियोजना के विस्थापितों के पुनर्वास को लेकर शनिवार को पुलिस और ग्रामीणों के बीच तीखी झड़प हो गई। इस घटना में कई ग्रामीण घायल हो गए। घटना के बाद झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) जिला कमेटी का एक प्रतिनिधिमंडल घायलों से मिलने उनके गांव पहुंचा और पूरे मामले की जानकारी ली। स्थल निरीक्षण के दौरान हुआ विवाद जानकारी के अनुसार, यह घटना रंका प्रखंड के विश्रामपुर क्षेत्र स्थित बरवाही गांव की है। यहां मंडल डैम के विस्थापितों के लिए प्रस्तावित पुनर्वास योजना के तहत प्रशासनिक टीम स्थल निरीक्षण करने पहुंची थी। निरीक्षण के लिए उपायुक्त दिनेश यादव और पुलिस अधीक्षक अमन कुमार का काफिला गांव में पहुंचा था। बताया जा रहा है कि ग्रामीणों ने प्रशासनिक वाहनों के काफिले को रोक दिया। इसी दौरान पुलिस और ग्रामीणों के बीच कहासुनी बढ़ गई, जो देखते ही देखते झड़प में बदल गई। स्थिति बिगड़ने पर पुलिस और ग्रामीणों के बीच धक्का-मुक्की हुई, जिसमें कई लोग घायल हो गए। JMM ने प्रशासन पर लगाया आरोप घटना के बाद झारखंड मुक्ति मोर्चा की जिला कमेटी ने इस पूरे मामले को प्रशासन की “बर्बर कार्रवाई” बताते हुए कड़ी प्रतिक्रिया दी है। पार्टी के नेताओं का कहना है कि विस्थापितों की समस्याओं को सुनने के बजाय प्रशासन ने बल प्रयोग किया, जिससे कई आदिवासी ग्रामीण घायल हो गए। घायलों से मिलने पहुंचा प्रतिनिधिमंडल घटना की जानकारी मिलने के बाद JMM जिला कमेटी का एक प्रतिनिधिमंडल बरवाही गांव पहुंचा। प्रतिनिधिमंडल ने पुलिस कार्रवाई में घायल हुए लोगों से मुलाकात कर उनकी स्थिति का जायजा लिया और पूरी घटना की जानकारी ली। इस टीम में पार्टी के जिला उपाध्यक्ष रौशन कुमार पाठक, सचिव शरीफ अंसारी, युवा अध्यक्ष संजय सिंह, उपाध्यक्ष फरीद खान, मनोज तिवारी, सुनील गौत्तम, बीरेंद्र साव और धर्मेंद्र कुमार दुबे शामिल थे। प्रतिनिधिमंडल ने घटना में घायल महिला मरियम तिर्की से भी मुलाकात की और उनसे पूरी घटना के बारे में विस्तार से जानकारी ली। पुनर्वास को लेकर पहले से नाराज हैं ग्रामीण स्थानीय लोगों का कहना है कि मंडल डैम परियोजना से प्रभावित परिवारों के पुनर्वास और मुआवजे को लेकर लंबे समय से असंतोष बना हुआ है। ग्रामीणों का आरोप है कि उनकी मांगों पर उचित ध्यान नहीं दिया जा रहा है। वहीं, इस घटना के बाद क्षेत्र में तनाव का माहौल बना हुआ है। ग्रामीणों और राजनीतिक दलों की ओर से मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की जा रही है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।