रांची। रांची के जेएससीए इंटरनेशनल स्टेडियम कॉम्प्लेक्स में खेले गए झारखंड टी20 क्रिकेट लीग 2026 के रोमांचक मुकाबले में कोयलांचल सुपर किंग्स ने शानदार बल्लेबाजी का प्रदर्शन करते हुए छोटानागपुर रॉयल्स को 5 विकेट से हरा दिया। 191 रन के चुनौतीपूर्ण लक्ष्य का पीछा करते हुए कोयलांचल की टीम ने 19.1 ओवर में 5 विकेट खोकर 192 रन बनाए और पांच गेंद शेष रहते मुकाबला अपने नाम कर लिया। इस जीत के साथ टीम ने टूर्नामेंट में लगातार दूसरी जीत दर्ज कर अपनी दावेदारी और मजबूत कर दी। रॉयल्स ने बनाए 190 रन, चंदन कुमार मुखी की विस्फोटक पारी टॉस के बाद पहले बल्लेबाजी करते हुए छोटानागपुर रॉयल्स ने 19.4 ओवर में 190 रन बनाए। टीम को विराट सिंह और मोहम्मद नाजिम सिद्दीकी ने पहले विकेट के लिए 77 रन जोड़कर मजबूत शुरुआत दिलाई। इसके बाद चंदन कुमार मुखी ने महज 18 गेंदों पर 49 रन की तूफानी पारी खेलकर स्कोर को मजबूती दी। हालांकि पूरी टीम निर्धारित ओवर पूरे होने से पहले ही ऑलआउट हो गई। कोयलांचल की ओर से शुभ शर्मा ने 3 विकेट, जबकि हर्ष राज, उत्कर्ष सिंह और अमित कुमार ने दो-दो विकेट अपने नाम किए। उत्कर्ष और शरणदीप ने रखी जीत की नींव लक्ष्य का पीछा करने उतरी कोयलांचल सुपर किंग्स को उत्कर्ष सिंह और शरणदीप सिंह भाटिया ने शानदार शुरुआत दिलाई। दोनों बल्लेबाजों ने पहले विकेट के लिए 122 रन की साझेदारी कर जीत की मजबूत नींव रखी। उत्कर्ष ने 32 गेंदों में 53 रन बनाए, जबकि शरणदीप ने 50 गेंदों पर 79 रन की बेहतरीन पारी खेली। अंत में शुभ शर्मा ने 14 गेंदों में नाबाद 31 रन बनाकर टीम को जीत दिलाई। सुप्रियो के पांच विकेट भी नहीं बचा सके टीम छोटानागपुर रॉयल्स के गेंदबाज सुप्रियो चक्रवर्ती ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 3.1 ओवर में 29 रन देकर 5 विकेट लिए, लेकिन उनकी मेहनत टीम को जीत नहीं दिला सकी। वहीं 79 रन की मैच जिताऊ पारी खेलने वाले शरणदीप सिंह भाटिया को 'प्लेयर ऑफ द मैच' चुना गया।
रांची। रांची के जेएससीए इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम में खेले गए झारखंड टी-20 क्रिकेट लीग 2026 के रोमांचक मुकाबले में जमशेदपुर स्टीलर्स ने धनबाद डायमंड्स को 7 रन से हराकर टूर्नामेंट में अपनी पहली जीत दर्ज की। हाई-स्कोरिंग मुकाबले में दोनों टीमों के बल्लेबाजों ने शानदार प्रदर्शन किया, लेकिन अंतिम क्षणों में जमशेदपुर की टीम दबाव बनाए रखने में सफल रही और जीत अपने नाम कर ली। जमशेदपुर ने खड़ा किया 202 रन का मजबूत स्कोर टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करते हुए जमशेदपुर स्टीलर्स ने 20 ओवर में 7 विकेट के नुकसान पर 202 रन बनाए। टीम के बल्लेबाजों ने शुरुआत से ही आक्रामक अंदाज अपनाया और लगातार तेज गति से रन बटोरे। जवाब में लक्ष्य का पीछा करने उतरी धनबाद डायमंड्स ने भी शानदार संघर्ष किया और निर्धारित 20 ओवर में 8 विकेट पर 195 रन बना सकी। इस तरह टीम जीत से महज 7 रन दूर रह गई। राम रौशन शरण की पारी गई बेकार, शमशाद ने झटके चार विकेट धनबाद डायमंड्स के बल्लेबाज राम रौशन शरण ने 32 गेंदों पर 63 रन की विस्फोटक पारी खेली। उन्होंने अपनी पारी में 6 चौके और 3 छक्के लगाए, लेकिन उनकी यह शानदार बल्लेबाजी टीम को जीत नहीं दिला सकी। गेंदबाजी में शमशाद अहमद ने चार ओवर में 39 रन देकर 4 विकेट चटकाए। उनके बेहतरीन प्रदर्शन के लिए उन्हें 'फाइटर ऑफ द मैच' और मुकाबले का सर्वश्रेष्ठ गेंदबाज चुना गया। रवि शर्मा बने जीत के नायक जमशेदपुर स्टीलर्स की जीत में रवि शर्मा ने ऑलराउंड प्रदर्शन से अहम भूमिका निभाई। उन्होंने 19 गेंदों पर नाबाद 30 रन बनाए, जिसमें 4 चौके और 2 छक्के शामिल थे। इसके अलावा गेंदबाजी में 3 ओवर में 24 रन देकर 2 विकेट भी हासिल किए। उनके शानदार प्रदर्शन के लिए उन्हें 'प्लेयर ऑफ द मैच' चुना गया। इस जीत के साथ जमशेदपुर स्टीलर्स ने अंक तालिका में अपना खाता खोला, जबकि धनबाद डायमंड्स को लगातार दूसरी हार का सामना करना पड़ा।
रांची। झारखंड टी-20 क्रिकेट लीग के लिए आयोजित प्लेयर ऑक्शन में धनबाद के आठ प्रतिभाशाली क्रिकेटरों का चयन विभिन्न फ्रेंचाइजी टीमों में हुआ है। इस उपलब्धि ने धनबाद के क्रिकेट जगत में उत्साह का माहौल पैदा कर दिया है। खिलाड़ियों के चयन को जिले में क्रिकेट के बढ़ते स्तर और युवा प्रतिभाओं की सफलता के रूप में देखा जा रहा है। धनबाद क्रिकेट एसोसिएशन (डीसीए) ने भी इसे जिले के लिए गौरवपूर्ण उपलब्धि बताया है। इन खिलाड़ियों को मिला मौका झारखंड टी-20 लीग के लिए चयनित खिलाड़ियों में कुनैन कुरैशी, श्रेष्ठ, राहुल प्रसाद, अनुराग सिंह सेंगर, प्रतीक रंजन, सिद्धार्थ सिन्हा, युवराज सिंह और आर्यमन लाला शामिल हैं। इन खिलाड़ियों ने पिछले कुछ वर्षों में अपने प्रदर्शन और मेहनत के दम पर क्रिकेट जगत का ध्यान आकर्षित किया है। इसी का परिणाम है कि विभिन्न फ्रेंचाइजी टीमों ने उन्हें अपनी टीम का हिस्सा बनाया है। खिलाड़ियों की मेहनत का मिला पुरस्कार धनबाद क्रिकेट एसोसिएशन के सचिव विनय कुमार सिंह ने सभी चयनित खिलाड़ियों को बधाई देते हुए कहा कि यह उपलब्धि उनकी कड़ी मेहनत, अनुशासन और निरंतर बेहतर प्रदर्शन का परिणाम है। उन्होंने कहा कि राज्य की प्रतिष्ठित टी-20 लीग में जगह बनाना किसी भी युवा क्रिकेटर के लिए बड़ी उपलब्धि होती है और यह जिले के अन्य खिलाड़ियों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बनेगा। डीसीए ने जताया गर्व डीसीए सचिव ने कहा कि संगठन हमेशा से युवा खिलाड़ियों को बेहतर प्रशिक्षण, सुविधाएं और प्रतिस्पर्धात्मक अवसर उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध रहा है। भविष्य में भी खिलाड़ियों को राज्य और राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने के लिए हर संभव प्रयास किए जाएंगे। उन्होंने उम्मीद जताई कि चयनित खिलाड़ी लीग में शानदार प्रदर्शन कर धनबाद का नाम रोशन करेंगे। अब प्रदर्शन पर टिकी निगाहें झारखंड टी-20 लीग राज्य के प्रतिभाशाली खिलाड़ियों के लिए अपनी क्षमता दिखाने का बड़ा मंच माना जाता है। ऐसे में धनबाद के इन आठ खिलाड़ियों से जिले के खेल प्रेमियों को काफी उम्मीदें हैं। सभी की नजर अब उनके प्रदर्शन पर रहेगी, जहां वे अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर नई पहचान बनाने की कोशिश करेंगे।
रांची। झारखंड में आईपीएल (IPL) की तर्ज पर क्रिकेट का एक बड़ा मंच सजने जा रहा है। आगामी 10 जून से झारखंड टी-20 क्रिकेट लीग का भव्य आगाज होने जा रहा है। इस टूर्नामेंट को लेकर क्रिकेट प्रेमियों में भारी उत्साह है, जहां जेएससीए (JSCA) स्टेडियम में राज्य के स्टार क्रिकेटरों का धूम-धड़ाका देखने को मिलेगा। जमशेदपुर में ऑक्शन लीग के लिए खिलाड़ियों के ऑक्शन (Auction) की प्रक्रिया 30 मई को जमशेदपुर के एक शानदार रिजॉर्ट में हो रही है। झारखंड राज्य क्रिकेट संघ (JSCA) ने इसके लिए 271 खिलाड़ियों की लिस्ट जारी की है, जिन्हें 6 अलग-अलग कैटेगरी (पुल) में बांटा गया है। 50 लाख का बजट और 6 टीमें: क्या हैं ऑक्शन के नियम? झारखंड टी-20 प्रीमियर लीग में इस बार कुल 6 फ्रेंचाइजी टीमें खिताब के लिए आपस में भिड़ेंगी। ऑक्शन के लिए जेएससीए द्वारा तय किए गए मुख्य नियम इस प्रकार हैं: कुल टीमें: 6 (रांची कैपिटल्स, जमशेदपुर स्टीलर्स, धनबाद डायमंड्स, छोटानागपुर रॉयल्स, कोयलांचल सुपर किंग्स और संथाल स्ट्राइकर्स) पर्स वैल्यू (बजट): प्रत्येक फ्रेंचाइजी के पास खिलाड़ियों को खरीदने के लिए अधिकतम 50 लाख रुपए की राशि निर्धारित है। अनिवार्य खिलाड़ी: हर टीम को अपने स्क्वाड में कम से कम 18 खिलाड़ियों को शामिल करना जरूरी होगा। कुल खिलाड़ी: 271 क्रिकेटरों की सूची जारी की गई है, जिनका बेस प्राइज उनकी कैटेगरी के हिसाब से तय होगा। पुल ए (Icon Players): ईशान किशन और रॉबिन मिंज पर टिकी नजरे ऑक्शन में सबसे ज्यादा रोमांच पुल ए यानी आइकॉन खिलाड़ियों की श्रेणी में देखने को मिलेगा। इस लिस्ट में भारतीय टीम और आईपीएल में अपनी चमक बिखेर चुके झारखंड के 5 बड़े चेहरे शामिल हैं। क्रिकेट जानकारों के मुताबिक, फ्रेंचाइजी इन स्टार्स को टीम में शामिल करने के लिए पानी की तरह पैसा बहाने को तैयार हैं। Jharkhand T20 League के लिए आइकॉन खिलाड़ियों की सूची (Pool A) ईशान किशन (विकेटकीपर बल्लेबाज) अनुकूल रॉय (ऑलराउंडर) रॉबिन मिंज कुमार कुशाग्र सुशांत मिश्रा (तेज गेंदबाज) छह कैटेगरी (Pools) में बांटे गए खिलाड़ी झारखंड के अनुभवी और युवा टैलेंट को मौका देने के लिए खिलाड़ियों को 6 अलग-अलग पूल्स में विभाजित किया गया है: पुल ए (आइकॉन क्रिकेटर): इंटरनेशनल और आईपीएल खेलने वाले खिलाड़ी (5 खिलाड़ी)। पुल बी (सीनियर स्टेट प्लेयर): राज्य स्तर के 31 अनुभवी खिलाड़ी। पुल सी (अंडर 23 स्टेट प्लेयर): राज्य के 22 युवा खिलाड़ी। पुल डी (सीनियर व अंडर 23 इंटर डिस्ट्रिक्ट): जिला स्तरीय 118 खिलाड़ी। पुल ई (इमर्जिंग खिलाड़ी अंडर 19): 25 उभरते हुए खिलाड़ी। पुल एफ (जिला स्तर के खिलाड़ी): 70 स्थानीय खिलाड़ी। पुल बी (Pool B) में शामिल हैं ये 31 दिग्गज सीनियर खिलाड़ी पुल बी में राज्य स्तर के उन 31 सीनियर खिलाड़ियों को रखा गया है, जिन्होंने घरेलू क्रिकेट में लगातार शानदार प्रदर्शन किया है। टीमें इनके अनुभव का फायदा उठाने के लिए उत्सुक रहेंगी। पुल बी के प्रमुख खिलाड़ी: विराट सिंह, उत्कर्ष सिंह, अमित कुमार, शुभ शर्मा, शिखर मोहन, अरविंद कुमार, राजनदीप सिंह, बाल कृष्णा, पंकज कुमार, मो कौनैन कुरैशी, साहिल राज, कुमार देवव्रत, मो नाजिम सिद्दीकी, विकास सिंह, शहरणदीप सिंह, सौरभ शेखर, मनीषी, कुमार सूरज, विकाश कुमार विशाल, आदित्या सिंह, अतुल सिंह सुरवार, ईशान ओम, जतिन पांडे, सुप्रियो चक्रवर्ती, विवेकानंद तिवारी, ऋषभ राज, विकास कुमार, सोनू कुमार सिंह, राहुल प्रसाद, सुमित कुमार और अभिनव शरण।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।