रांची। झारखंड में लंबे इंतजार के बाद मानसून एक बार फिर सक्रिय होने लगा है। रविवार दोपहर से मौसम का मिजाज बदला और कई जिलों में हल्की से मध्यम बारिश दर्ज की गई। सोमवार सुबह से राजधानी रांची सहित 20 से अधिक जिलों में बादलों का डेरा बना हुआ है। मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार राज्य में आज से मानसूनी गतिविधियां तेज होंगी और दोपहर बाद अच्छी बारिश की संभावना है। मौसम विभाग ने बताया मौसम विभाग ने बताया कि मानसून 4 जुलाई तक सक्रिय रह सकता है। इस दौरान राज्य के अधिकांश हिस्सों में तेज बारिश, वज्रपात और 50 किलोमीटर प्रति घंटे तक की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना है। विशेष रूप से 30 जून और 1 जुलाई को उत्तर-पूर्वी जिलों देवघर, दुमका, गोड्डा, जामताड़ा, पाकुड़ और साहिबगंज के अलावा रांची, बोकारो, धनबाद, रामगढ़, खूंटी, पूर्वी और पश्चिमी सिंहभूम तथा सरायकेला-खरसावां में कहीं-कहीं भारी बारिश हो सकती है। बारिश के कारण बारिश के कारण अगले पांच दिनों में अधिकतम तापमान में 3 से 4 डिग्री सेल्सियस तक गिरावट आने का अनुमान है। पिछले 24 घंटों में सबसे अधिक 18 मिमी बारिश सरायकेला में दर्ज की गई, जबकि बहरागोड़ा का अधिकतम तापमान 37.4 डिग्री सेल्सियस रहा। रांची का अधिकतम तापमान 3.5 डिग्री गिरकर 30.7 डिग्री सेल्सियस और हजारीबाग का तापमान 4.9 डिग्री की गिरावट के साथ 32.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। मौसम वैज्ञानिक अभिषेक आनंद ने कहा मौसम वैज्ञानिक अभिषेक आनंद ने कहा कि अगले तीन से चार दिनों में दक्षिण-पश्चिम मानसून पूरी तरह सक्रिय होने की संभावना है, जिससे राज्यभर में अच्छी बारिश होगी। उन्होंने किसानों को खेतों में जलजमाव से बचाव की सलाह दी है, क्योंकि अधिक पानी से धान की नर्सरी, मक्का, अरहर और अन्य खरीफ फसलों को नुकसान पहुंच सकता है। वहीं, खुले स्थानों पर जाने से बचने और वज्रपात के दौरान विशेष सतर्कता बरतने की भी अपील की गई है। 1 जून से अब तक झारखंड में सामान्य से 62 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। सबसे कम वर्षा गढ़वा में और सबसे अधिक सिमडेगा में रिकॉर्ड की गई है।
रांची। झारखंड में मानसून सक्रिय होने के साथ ही मौसम विभाग ने आज राज्य के कई जिलों के लिए भारी बारिश, वज्रपात और तेज हवाओं का अलर्ट जारी किया है। लोगों से खराब मौसम के दौरान सतर्क रहने और अनावश्यक रूप से घर से बाहर नहीं निकलने की अपील की गई है। मौसम विभाग के अनुसार, कई इलाकों में गरज-चमक के साथ तेज बारिश हो सकती है। इन जिलों में ज्यादा असर की संभावना मौसम विभाग के मुताबिक रांची, बोकारो, धनबाद, जमशेदपुर (पूर्वी सिंहभूम), पश्चिमी सिंहभूम, खूंटी, सरायकेला-खरसावां, गुमला, सिमडेगा और रामगढ़ समेत कई जिलों में भारी बारिश और वज्रपात की आशंका जताई गई है। कुछ क्षेत्रों में 40 से 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं भी चल सकती हैं। किसानों और आम लोगों के लिए सलाह प्रशासन ने किसानों से खराब मौसम के दौरान खेतों में काम करने से बचने की सलाह दी है। वहीं आम लोगों से खुले मैदान, पेड़ों और बिजली के खंभों के पास खड़े न होने की अपील की गई है। तेज बारिश के कारण निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति भी बन सकती है। अगले 48 घंटे तक मौसम रहेगा सक्रिय मौसम विभाग का अनुमान है कि अगले 48 घंटे तक झारखंड के कई हिस्सों में बारिश का दौर जारी रह सकता है। कुछ स्थानों पर मध्यम से भारी वर्षा दर्ज होने की संभावना है, जिससे तापमान में भी गिरावट आ सकती है।
रांची। झारखंड में मौसम लगातार करवट ले रहा है। मौसम केंद्र, रांची के अनुसार 23 जून को राज्य के अधिकांश जिलों में आंशिक रूप से बादल छाए रहेंगे और हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है। कई क्षेत्रों में मेघ गर्जन, वज्रपात और 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं भी चल सकती हैं। रांची, धनबाद, बोकारो, रामगढ़, हजारीबाग, कोडरमा, गिरिडीह, खूंटी, पूर्वी सिंहभूम, पश्चिमी सिंहभूम, सरायकेला-खरसावां, देवघर, दुमका, जामताड़ा, पाकुड़ और साहिबगंज समेत कई जिलों में मौसम का असर देखने को मिल सकता है। 24 जून से पलामू-गढ़वा में हीट वेव की संभावना मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि 24 जून को राज्य के उत्तर-पश्चिमी हिस्सों, खासकर पलामू, गढ़वा और चतरा जिलों में हीट वेव चल सकती है। इन क्षेत्रों में तापमान बढ़ने और गर्म हवाएं चलने की आशंका है। लोगों को दोपहर के समय अनावश्यक रूप से बाहर नहीं निकलने और पर्याप्त मात्रा में पानी पीने की सलाह दी गई है। 25 जून तक बना रहेगा मौसम का असर मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार 25 जून को भी राज्य के कई हिस्सों में बादल छाए रहेंगे। कहीं-कहीं हल्की से मध्यम बारिश, गर्जन और तेज हवाओं की संभावना बनी रहेगी। वहीं उत्तर-पश्चिमी जिलों में गर्मी का असर जारी रह सकता है। डालटनगंज रहा सबसे गर्म 22 जून को मानसूनी गतिविधियों के कारण अधिकांश जिलों में तापमान सामान्य से कम दर्ज किया गया। राजधानी रांची का अधिकतम तापमान 28.4 डिग्री सेल्सियस रहा, जबकि जमशेदपुर में 31.8 और चाईबासा में 30.8 डिग्री सेल्सियस तापमान रिकॉर्ड किया गया। दूसरी ओर, डालटनगंज 37.1 डिग्री सेल्सियस के साथ राज्य का सबसे गर्म स्थान रहा। कई इलाकों में हुई बारिश पश्चिमी सिंहभूम के जगन्नाथपुर में सबसे अधिक 13.5 मिमी वर्षा दर्ज की गई। वहीं सिमडेगा के बानो क्षेत्र में 10 मिमी और खूंटी में 4 मिमी बारिश हुई। मौसम विभाग ने लोगों से खराब मौसम के दौरान खुले मैदानों और पेड़ों के नीचे खड़े होने से बचने की अपील की है।
रांची। गर्मी और उमस की लंबी मार झेलने के बाद आखिरकार झारखंड में मानसून ने अपनी पूरी ताकत के साथ दस्तक दे दी है। हालांकि, राज्यभर में बादलों का मिजाज एक जैसा नहीं है। एक तरफ जहां राजधानी समेत कई जिलों को झुलसाती धूप से बड़ी राहत मिली है, वहीं कुछ इलाके अब भी मानसून की पहली फुहार के लिए आसमान की तरफ टकटकी लगाए बैठे हैं। इन 11 जिलों में झमाझम बारिश की चेतावनी रांची स्थित मौसम विभाग के ताजा बुलेटिन के अनुसार, 17 जून को राज्य के दक्षिणी और पूर्वी हिस्सों में मानसून पूरी तरह सक्रिय रहेगा। मौसम विज्ञानियों ने 11 जिलों—रांची, खूंटी, सिमडेगा, गुमला, पूर्वी सिंहभूम, पश्चिमी सिंहभूम, सरायकेला-खरसावां, बोकारो, रामगढ़, धनबाद और जामताड़ा—में मध्यम से भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। इन क्षेत्रों में गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ने से तापमान में खासी गिरावट दर्ज की जाएगी, जिससे उमस से बेहाल लोगों को काफी सुकून मिलेगा। वज्रपात और आंधी का मंडराता खतरा राहत की इन बूंदों के साथ प्राकृतिक आपदा का जोखिम भी जुड़ा है। मौसम विभाग ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि रांची, खूंटी, रामगढ़, बोकारो, धनबाद के साथ-साथ संताल परगना और उत्तरी छोटानागपुर के कुछ जिलों (गिरिडीह, देवघर, दुमका, पाकुड़, साहिबगंज और गोड्डा) में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं। दिन भर आंधी और बिजली गिरने (वज्रपात) की प्रबल आशंका बनी रहेगी। इसे देखते हुए प्रशासन ने खुले मैदानों में काम करने वाले लोगों और विशेषकर किसानों को अत्यधिक सावधानी बरतने व सुरक्षित स्थानों पर आश्रय लेने की सलाह दी है। पलामू प्रमंडल में अभी भी गर्मी का सितम जहां एक ओर आधा झारखंड बारिश से तरबतर है, वहीं राज्य का उत्तर-पश्चिमी हिस्सा अब भी भीषण गर्मी की चपेट में है। पलामू, गढ़वा, चतरा और लातेहार जिलों में अभी गर्मी का असर कम नहीं हुआ है। डालटनगंज और इसके आसपास के इलाकों में 17 जून को भी अधिकतम तापमान 37 से 40 डिग्री सेल्सियस के बीच बने रहने का अनुमान है। हालांकि, मौसम विभाग का कहना है कि शाम ढलते-ढलते इन तपते इलाकों में भी हल्के बादल छा सकते हैं और छिटपुट बारिश से थोड़ी बहुत राहत मिलने की उम्मीद है। पठारी इलाकों का मौसम हुआ सुहावना राज्य के पठारी इलाकों और खास तौर पर नेतरहाट का मौसम आज सबसे बेहतरीन रहने वाला है। इसके अलावा राजधानी रांची, खूंटी, सिमडेगा और पश्चिमी सिंहभूम में बादलों की आवाजाही और रुक-रुक कर हो रही बारिश के कारण दिन भर ठंडक बनी रहेगी। इन क्षेत्रों में अधिकतम तापमान 28 से 32 डिग्री सेल्सियस के आसपास ही सिमटा रहने का अनुमान है, जो स्थानीय लोगों के लिए किसी सौगात से कम नहीं है।
रांची। झारखंड में दक्षिण-पश्चिम मॉनसून धीरे-धीरे अपना दायरा बढ़ा रहा है। मौसम विभाग के अनुसार, अगले तीन से चार दिनों के दौरान मॉनसून राज्य के और हिस्सों में आगे बढ़ सकता है। हालांकि, अगले दो दिनों तक इसकी रफ्तार कुछ कमजोर रहने की संभावना है। इस बीच 16 और 17 जून को राज्य के कई जिलों में तेज हवा, वज्रपात और बारिश का अनुमान जताया गया है। कई जिलों में बारिश और तेज हवाओं का अलर्ट मौसम विभाग के अनुसार, 16 जून को उत्तर-पश्चिमी झारखंड को छोड़कर राज्य के अधिकांश क्षेत्रों में आंशिक से घने बादल छाए रहेंगे। कई स्थानों पर गरज-चमक के साथ बारिश और 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं। वहीं 17 जून को रांची, लोहरदगा, गुमला, खूंटी, सिमडेगा, रामगढ़, बोकारो, पश्चिमी सिंहभूम, पूर्वी सिंहभूम और सरायकेला-खरसावां के कुछ हिस्सों में भी इसी तरह के मौसम की संभावना है। मॉनसून का बढ़ा दायरा, अलनीनो पर नजर मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, मॉनसून धनबाद, बोकारो, पूर्वी सिंहभूम, सरायकेला-खरसावां, गिरिडीह के कुछ हिस्सों तथा पश्चिमी सिंहभूम, खूंटी, रांची और रामगढ़ के कई इलाकों तक पहुंच चुका है। मौसम विज्ञान केंद्र का कहना है कि परिस्थितियां अनुकूल रहने पर अगले कुछ दिनों में मॉनसून का विस्तार और होगा। इस बीच प्रशांत महासागर में अलनीनो के बनने की पुष्टि हुई है। मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इसका प्रभाव बढ़ता है, तो इसका असर मानसूनी बारिश और कृषि पर पड़ सकता है। फिलहाल इसकी तीव्रता का आकलन किया जा रहा है। गर्मी भी बनी रही बरकरार सोमवार को राज्य के अधिकांश जिलों में अधिकतम तापमान में बढ़ोतरी दर्ज की गई। मेदिनीनगर और जमशेदपुर में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहा। वहीं रामगढ़ में हल्की बारिश दर्ज की गई, जबकि कांके में पिछले 24 घंटों के दौरान 86.4 मिमी वर्षा रिकॉर्ड की गई।
रांची। राजधानी रांची में रविवार को हुई महज दो घंटे की तेज बारिश ने नगर निगम की जल निकासी व्यवस्था की पोल खोल दी। शहर के कई प्रमुख मार्ग और निचले इलाके जलमग्न हो गए, जिससे लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। सेवा सदन रोड, हरमू करम चौक, करमटोली चौक, हरमू रोड, रातू रोड, पंडरा, पंचशील नगर और मौलाना आजाद कॉलोनी समेत कई इलाकों में सड़कें पानी में डूब गईं। कई स्थानों पर वाहनों की रफ्तार थम गई, जबकि पैदल चलना भी मुश्किल हो गया। अस्पताल और मंदिर परिसर में घुसा पानी सबसे गंभीर स्थिति सेवा सदन रोड पर देखने को मिली, जहां कमर तक पानी भर गया। बारिश का पानी सेवा सदन अस्पताल और लक्ष्मी नारायण मंदिर परिसर तक पहुंच गया। अस्पताल में भर्ती मरीजों के परिजनों को दवा और भोजन पहुंचाने के लिए पानी से होकर गुजरना पड़ा। स्थानीय लोगों के अनुसार कुछ समय के लिए सड़क पूरी तरह नदी जैसी नजर आने लगी। उफनाईं नालियां, बढ़ा जलाशयों का जलस्तर तेज बारिश के कारण शहर की अधिकांश नालियां उफान पर आ गईं और कई जगहों पर नालियों का गंदा पानी सड़कों पर बहने लगा। इससे आवागमन प्रभावित हुआ और लोगों को बदबू व जलभराव की समस्या का सामना करना पड़ा। दूसरी ओर शहर के तालाबों और जलाशयों का जलस्तर भी तेजी से बढ़ गया। स्थानीय नागरिकों ने आरोप लगाया कि हर साल मानसून से पहले जल निकासी व्यवस्था दुरुस्त करने के दावे किए जाते हैं, लेकिन पहली ही तेज बारिश में व्यवस्था ध्वस्त हो जाती है। बिजली आपूर्ति भी रही बाधित बारिश और तेज हवाओं का असर बिजली व्यवस्था पर भी पड़ा। कई इलाकों में बिजली के तार टूटने, ट्रांसफार्मर में खराबी और पेड़ गिरने से बिजली आपूर्ति बाधित रही। कोकर, अपर बाजार, हरमू, मोरहाबादी, बरियातू, कांके, टाटीसिलवे और टुपुदाना सहित कई क्षेत्रों में घंटों बिजली गुल रही। पारस अस्पताल और कटहल मोड़ इलाके के लोगों ने भी लंबे समय तक बिजली बाधित रहने की शिकायत की। रविवार की बारिश ने एक बार फिर रांची की जल निकासी, सड़क निर्माण और बिजली व्यवस्था की तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते स्थायी समाधान नहीं किया गया तो पूरे मानसून में शहरवासियों को इसी तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।
रांची। झारखंड में दक्षिण-पश्चिम मानसून के सक्रिय होने के साथ मौसम ने करवट ले ली है। पिछले 24 घंटों के दौरान राज्य के कई हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश दर्ज की गई, जिससे तापमान में गिरावट आई और लोगों को भीषण गर्मी से राहत मिली। सबसे अधिक 46.4 मिमी बारिश कोडरमा के तिलैया में रिकॉर्ड की गई, जबकि चंदवा में 45.2 मिमी और रांची के कांके में 42.5 मिमी वर्षा हुई। पूर्वी सिंहभूम सहित कई अन्य जिलों में भी अच्छी बारिश दर्ज की गई। राजधानी रांची में रविवार को दिनभर तेज धूप और लगभग 35 डिग्री सेल्सियस तापमान रहने के बाद शाम छह बजे अचानक मौसम बदला। तेज बारिश और गरज के साथ हुई वर्षा देर रात तक जारी रही। भारी बारिश के कारण सेवा सदन पथ, जयपाल सिंह स्टेडियम, मेन रोड और स्टेशन रोड जैसे इलाकों में जलजमाव हो गया। सुरक्षा के मद्देनजर कई क्षेत्रों में कुछ समय के लिए बिजली आपूर्ति भी बाधित रही। मौसम विभाग के अनुसार मौसम विभाग के अनुसार सोमवार को रांची, खूंटी, गुमला, सिमडेगा, लोहरदगा, पश्चिमी एवं पूर्वी सिंहभूम, सरायकेला-खरसावां, रामगढ़, बोकारो और हजारीबाग में हल्की से मध्यम बारिश के साथ गरज-चमक की संभावना है। कुछ स्थानों पर 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं और वज्रपात की भी आशंका है। लोगों को खुले स्थानों और पेड़ों के नीचे खड़े होने से बचने की सलाह दी गई है। वहीं पलामू, गढ़वा, चतरा, लातेहार, गिरिडीह, देवघर, गोड्डा, पाकुड़ और साहिबगंज जैसे उत्तर-पश्चिमी जिलों में बारिश अपेक्षाकृत कम रहने के कारण उमस भरी गर्मी बनी रह सकती है। इन क्षेत्रों में अधिकतम तापमान 37 से 38 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने का अनुमान है। मौसम विज्ञान विभाग का हैं कहना? मौसम विज्ञान विभाग का कहना है कि राज्य में मानसून के आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां अनुकूल हैं। झारखंड से गुजर रही मौसमी ट्रफ के प्रभाव से अगले चार से पांच दिनों तक राज्य के कई हिस्सों में बारिश जारी रहने की संभावना है, जिससे मौसम सुहावना बना रहेगा।
रांची। झारखंड में दक्षिण-पश्चिम मानसून ने आखिरकार दस्तक दे दी है। मौसम विभाग के अनुसार राज्य के पूर्वी हिस्सों में मानसूनी गतिविधियां शुरू हो चुकी हैं और अगले दो से तीन दिनों में इसका प्रभाव पूरे राज्य में देखने को मिलेगा। इस बीच विभाग ने नौ जिलों में भारी बारिश को लेकर ऑरेंज अलर्ट जारी किया है, जबकि राजधानी रांची समेत कई इलाकों में गरज-चमक के साथ मध्यम से भारी बारिश की संभावना जताई गई है। रांची स्थित मौसम विज्ञान केंद्र में आयोजित प्रेस वार्ता में मौसम वैज्ञानिक अभिषेक आनंद ने बताया कि संथाल परगना और कोल्हान क्षेत्र में मानसून सक्रिय हो चुका है। गोड्डा, देवघर, पूर्वी सिंहभूम और गिरिडीह के कई हिस्सों में अच्छी बारिश दर्ज की गई है। मौसम विभाग का अनुमान है कि जल्द ही मानसून राज्य के शेष जिलों तक भी पहुंच जाएगा। मौसम विभाग के मुताबिक मौसम विभाग के मुताबिक, पश्चिम बंगाल के ऊपर बने गहरे निम्न दबाव क्षेत्र का असर झारखंड में साफ दिखाई दे रहा है। इसी वजह से कोल्हान और संथाल परगना क्षेत्र में भारी वर्षा की संभावना बढ़ गई है। रांची सहित कई जिलों में अगले कुछ दिनों तक बादल छाए रहने, तेज हवाएं चलने और वज्रपात की आशंका भी जताई गई है। हालांकि इस वर्ष मानसून सामान्य से कुछ देर से पहुंचा है, लेकिन इसकी प्रगति सामान्य समय-सारणी के अनुरूप मानी जा रही है। मौसम विभाग ने यह भी अनुमान जताया है कि जून में सामान्य से कम बारिश हो सकती है, जबकि जुलाई और अगस्त में होने वाली वर्षा मानसून की वास्तविक स्थिति तय करेगी। मानसून की शुरुआत मानसून की शुरुआत किसानों के लिए राहत लेकर आई है। विभाग ने किसानों को धान की नर्सरी तैयार करने और निचले खेतों में रोपाई शुरू करने की सलाह दी है। साथ ही लोगों से खराब मौसम के दौरान खुले मैदान, बड़े पेड़ों और बिजली के खंभों से दूर रहने तथा वज्रपात और तेज हवाओं के समय विशेष सतर्कता बरतने की अपील की गई है।
रांची। झारखंड में भीषण गर्मी और बढ़ते तापमान से परेशान लोगों के लिए राहत भरी खबर है। मौसम विभाग ने संकेत दिया है कि राज्य में 17 जून तक दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के प्रवेश करने की संभावना है। मॉनसून के आगमन से पहले ही मौसम का मिजाज बदलने लगा है और आने वाले दिनों में कई जिलों में बारिश, तेज हवाएं और वज्रपात की गतिविधियां देखने को मिल सकती हैं। आज इन जिलों में बारिश और वज्रपात के आसार मौसम विभाग के अनुसार 9 जून को रामगढ़, बोकारो, रांची, गुमला और खूंटी जिलों में बादल छाए रहने के साथ कहीं-कहीं हल्की बारिश हो सकती है। इसके अलावा वज्रपात और तेज हवाएं चलने की भी संभावना जताई गई है। मौसम में यह बदलाव लोगों को गर्मी से कुछ राहत दे सकता है। 10 जून को तेज हवाओं के साथ बदलेगा मौसम मौसम विभाग का अनुमान है कि 10 जून को राज्य के उत्तर-पश्चिमी और आसपास के मध्य क्षेत्रों को छोड़कर अन्य हिस्सों में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं। इसके साथ ही कई स्थानों पर वज्रपात और हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है। 11 और 12 जून को ऑरेंज अलर्ट साइक्लोनिक सर्कुलेशन के प्रभाव से 11 जून से मौसम और अधिक सक्रिय हो सकता है। धनबाद, बोकारो, कोडरमा, हजारीबाग, रामगढ़ और रांची जिलों में 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से आंधी, वज्रपात और बारिश की संभावना को देखते हुए मौसम विभाग ने ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। 12 जून से अगले तीन दिनों तक राज्य के कई इलाकों में बारिश और बादल छाए रहने के आसार हैं। बढ़ते तापमान ने बढ़ाई परेशानी मॉनसून की प्रतीक्षा के बीच राज्य के कई शहरों में तापमान लगातार बढ़ रहा है। सोमवार को मेदिनीनगर का अधिकतम तापमान 43.1 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि जमशेदपुर में 41.3 और चाईबासा में 40.8 डिग्री सेल्सियस तापमान रहा। रांची का तापमान 37.2 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया। ऐसे में लोगों को अब मॉनसून की पहली बारिश का इंतजार है, जो गर्मी से बड़ी राहत लेकर आ सकती है।
रांची। झारखंड में मानसून पूर्व गतिविधियों ने रफ्तार पकड़ ली है। राज्य के कई जिलों में हुई बारिश ने जहां लोगों को भीषण गर्मी और उमस से राहत मिली है , वहीं वज्रपात की घटनाओं ने चिंता बढ़ा दी है। पिछले 24 घंटों के दौरान बिजली गिरने से तीन लोगों की मौत हो गई, जिससे कई परिवारों में मातम छा गया। सबसे दुखद घटना गढ़वा जिले के धुरकी प्रखंड के परासपानी कला गांव में हुई, जहां 12 वर्षीय क्रमु कुमार की वज्रपात की चपेट में आने से मौत हो गई। वहीं रामगढ़ जिले के गंडके पाहन टोला निवासी 30 वर्षीय राजू मुंडा और कुजू क्षेत्र के मुरपा कठरा टोला निवासी 16 वर्षीय साहिल कुमार भी आकाशीय बिजली का शिकार बन गए। कई जिलों में झमाझम बारिश मौसम विभाग के अनुसार, राज्य के अधिकांश हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश दर्ज की गई है। सिमडेगा जिले के थर्थाइटांगर में सबसे अधिक 70.3 मिमी वर्षा रिकॉर्ड की गई। बारिश के कारण तापमान में गिरावट आई है और लोगों को गर्मी से काफी राहत महसूस हुई है। राज्य में सबसे अधिक तापमान डाल्टनगंज में 37.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि लातेहार में न्यूनतम तापमान 21.9 डिग्री सेल्सियस रहा। मौसम के इस बदलाव ने वातावरण को अपेक्षाकृत सुहावना बना दिया है। येलो अलर्ट जारी, सावधानी बरतने की अपील मौसम विज्ञान केंद्र, रांची ने अगले कुछ दिनों तक राज्य में बारिश, मेघगर्जन और वज्रपात की संभावना जताई है। रांची, बोकारो, रामगढ़, गुमला और खूंटी समेत कई जिलों के लिए येलो अलर्ट जारी किया गया है। विशेषज्ञों के मुताबिक, पूर्वी उत्तर प्रदेश से तेलंगाना तक फैले ट्रफ और ऊपरी हवा के चक्रवाती परिसंचरण के कारण झारखंड में मौसम सक्रिय बना हुआ है। मौसम विभाग ने लोगों को खराब मौसम के दौरान खुले मैदानों, ऊंचे पेड़ों और बिजली के खंभों से दूर रहने तथा सुरक्षित स्थानों पर शरण लेने की सलाह दी है। साथ ही, मौसम संबंधी चेतावनियों पर लगातार नजर रखने को कहा गया है।
रांची। झारखंड में एक बार फिर मौसम का मिजाज बदलने वाला है। मौसम विभाग (IMD) के अनुसार आने वाले दिनों में राज्य के कई हिस्सों में तापमान तेजी से बढ़ सकता है और कुछ जिलों में पारा 42 से 43 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने की संभावना जताई गई है। IMD के अनुसार IMD के जिला-स्तरीय पूर्वानुमान के मुताबिक पलामू, चतरा, गढ़वा और कोडरमा जैसे जिलों में अधिकतम तापमान 40–42°C तक पहुँच सकता है, जबकि रांची में तापमान 35–37°C और पूर्वी सिंहभूम में 38–39°C रहने का अनुमान है। हालांकि, गर्मी के बीच कुछ इलाकों में हल्की बारिश, तेज हवाएं और गरज-चमक की भी संभावना बनी हुई है। मौसम विभाग ने लोगों को दोपहर में धूप से बचने, अनावश्यक घर से बाहर न निकलने और पर्याप्त पानी पीने की सलाह दी है। राज्य में मानसून की रफ्तार अभी धीमी बनी हुई है, जिससे आने वाले दिनों में उमस और गर्मी दोनों बढ़ सकती हैं।
रांची। झारखंड में अगले कुछ दिनों के दौरान मौसम का रुख बदलने वाला है। मौसम विभाग ने राज्य के कई क्षेत्रों में मेघ गर्जन, वज्रपात, तेज हवाओं और हल्की बारिश की संभावना जताई है। दक्षिण-पश्चिम मानसून की रफ्तार बढ़ने के साथ ही झारखंड में भी प्री-मानसून गतिविधियां तेज होने लगी हैं, जिससे लोगों को भीषण गर्मी से कुछ राहत मिलने की उम्मीद है। मौसम विभाग के अनुसार मौसम विभाग के अनुसार, 6 जून को राज्य के कई हिस्सों में बादल गरजने, बिजली चमकने और 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना है। हालांकि व्यापक बारिश की संभावना नहीं है, लेकिन कुछ क्षेत्रों में हल्की वर्षा हो सकती है। राजधानी रांची में अधिकतम तापमान 36 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 24 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है। 7 से 9 जून तक जारी रहेगा मौसम का असर मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, 7 जून को झारखंड के दक्षिणी और मध्य भागों में कहीं-कहीं हल्की बारिश के साथ गर्जन और वज्रपात की स्थिति बन सकती है। 8 जून को राज्य के उत्तर-पूर्वी और दक्षिण-पूर्वी इलाकों में आंशिक रूप से बादल छाए रहेंगे और कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। वहीं 9 जून को भी दक्षिणी और मध्य झारखंड में मेघ गर्जन और वज्रपात की संभावना बनी रहेगी। इस दौरान तेज हवाएं लोगों की दिनचर्या को प्रभावित कर सकती हैं। मौसम विभाग ने लोगों को खुले स्थानों और पेड़ों के नीचे खड़े होने से बचने की सलाह दी है। 10 जून से प्री-मानसून बारिश के संकेत मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि 10 जून से राज्य के कई हिस्सों में प्री-मानसून बारिश शुरू हो सकती है। इससे तापमान में गिरावट आने और मौसम सुहावना होने की संभावना है। पिछले 24 घंटों के दौरान भी राज्य के कई इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश दर्ज की गई। सबसे अधिक वर्षा पाकुड़ जिले में 80 मिमी रिकॉर्ड की गई, जिससे मानसून की दस्तक के संकेत और मजबूत हुए हैं।
रांची। झारखंड में भीषण गर्मी और लू से परेशान लोगों को आखिरकार राहत मिलनी शुरू हो गई है। बुधवार से राज्य के मौसम में बड़ा बदलाव देखने को मिला। राजधानी रांची समेत कई जिलों में बारिश और ठंडी हवाओं के कारण तापमान में गिरावट दर्ज की गई। मौसम सुहाना होने से लोगों ने राहत की सांस ली। हालांकि Medininagar में गर्मी का असर अब भी बना हुआ है। खूंटी में सबसे ज्यादा बारिश बुधवार को राज्य के कई हिस्सों में अच्छी बारिश हुई। खूंटी में सबसे अधिक 30 मिमी बारिश दर्ज की गई, जबकि बोकारों में 16 मिमी और जमशेदपुर में करीब पांच मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई। रांची के कई इलाकों में भी हल्की बारिश हुई, जिससे उमस और गर्मी में कमी आई। अगले पांच दिनों तक खराब मौसम के आसार मौसम विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक के अनुसार, अगले पांच दिनों तक झारखंड में मौसम ऐसा ही बना रहेगा। इस दौरान 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज आंधी चल सकती है। साथ ही कई जिलों में गर्जन, वज्रपात और बारिश की संभावना भी जताई गई है। मौसम विभाग का कहना है कि बारिश और ठंडी हवाओं की वजह से अधिकतम तापमान में और गिरावट आएगी। मेदिनीनगर अब भी सबसे गर्म राज्य में सबसे ज्यादा तापमान मेदिनीनगर में दर्ज किया गया। वहां अधिकतम तापमान 43.8 डिग्री सेल्सियस रहा। दूसरी ओर रांची के तापमान में 2.3 डिग्री सेल्सियस की गिरावट दर्ज की गई और अधिकतम तापमान 37 डिग्री सेल्सियस रहा। मौसम विभाग ने उम्मीद जताई है कि एक-दो दिनों में मेदिनीनगर में भी तापमान कम होगा। लोगों को सतर्क रहने की सलाह मौसम विभाग ने लोगों से खराब मौसम के दौरान सतर्क रहने की अपील की है। विभाग ने खुले मैदान, पेड़ और बिजली के खंभों से दूर रहने तथा जरूरत पड़ने पर ही घर से बाहर निकलने की सलाह दी है।
अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी NASA ने चांद पर स्थायी मानव बस्ती बसाने की दिशा में बड़ा ऐलान किया है। एजेंसी ने करीब 20 अरब डॉलर की महत्वाकांक्षी “मून बेस” योजना पेश की है, जिसका उद्देश्य चांद पर ऐसा स्थायी ठिकाना बनाना है जहां वैज्ञानिक लंबे समय तक रहकर रिसर्च कर सकें। NASA ने इस मिशन के लिए विस्तृत रोडमैप जारी करते हुए रोवर, लैंडर और ड्रोन तकनीक विकसित करने के लिए अरबों डॉलर के कॉन्ट्रैक्ट भी दिए हैं। आर्टेमिस मिशन के बाद नई तैयारी NASA का यह कदम आर्टेमिस-II मिशन की सफलता के बाद सामने आया है। अप्रैल 2026 में आर्टेमिस-II मिशन के तहत चार अंतरिक्ष यात्रियों ने चांद की परिक्रमा की थी। यह 1972 के अपोलो-17 मिशन के बाद पहला मानव मिशन था जिसने लो अर्थ ऑर्बिट से आगे यात्रा की। अब NASA का लक्ष्य 2028 तक आर्टेमिस-III मिशन के जरिए अंतरिक्ष यात्रियों को दोबारा चांद की सतह पर उतारना है। NASA ने जारी किया मून बेस का ब्लूप्रिंट वॉशिंगटन डीसी में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में NASA प्रमुख Jared Isaacman ने कहा कि चांद पर बनने वाला यह बेस मानवता का दूसरे खगोलीय पिंड पर पहला स्थायी ठिकाना होगा। उन्होंने बताया कि मून बेस में लूनर रोवर, ड्रोन, वैज्ञानिक उपकरण और जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित किया जाएगा ताकि इंसान चांद जैसे कठिन वातावरण में लंबे समय तक रहना सीख सकें। 2026 में शुरू होंगे तीन बड़े मिशन NASA ने 2026 के लिए तीन शुरुआती “मून बेस मिशन” घोषित किए हैं। इनका उद्देश्य इंसानों के पहुंचने से पहले तकनीक का परीक्षण करना और जोखिम कम करना है। Moon Base-I मिशन क्या करेगा? पहले मिशन “Moon Base-I” के तहत Blue Origin के “Blue Moon Mark-1 Endurance” लैंडर का उपयोग किया जाएगा। यह मिशन चांद के दक्षिणी ध्रुव के पास स्थित Shackleton Connecting Ridge इलाके में उतरेगा। यहां वैज्ञानिक उपकरण भेजे जाएंगे, जिनमें स्टीरियो कैमरे और लेजर रेट्रो-रिफ्लेक्टिव सिस्टम शामिल होंगे। NASA के मुताबिक: स्टीरियो कैमरे यह जांचेंगे कि रॉकेट थ्रस्टर चांद की सतह को कैसे प्रभावित करते हैं। लेजर सिस्टम अंतरिक्ष यानों को सटीक लोकेशन पहचानने में मदद करेगा। Moon Base-II में भेजा जाएगा भारी सामान दूसरे मिशन “Moon Base-II” में चांद पर 1100 पाउंड से ज्यादा सामान पहुंचाया जाएगा। यह मिशन Astrobotic Technology के “Griffin Lander” के जरिए भेजा जाएगा। इस मिशन में Astrolab का FLIP रोवर भी शामिल होगा। इसका उद्देश्य चांद की सतह पर भारी सामान ले जाने और मूवमेंट तकनीक विकसित करना है। Moon Base-III करेगा रहस्यमयी ‘लूनर स्वर्ल्स’ की जांच तीसरा मिशन “Moon Base-III” चांद की सतह पर दिखने वाले रहस्यमयी चमकीले पैटर्न “Lunar Swirls” का अध्ययन करेगा। वैज्ञानिकों का मानना है कि इनका संबंध चांद के नीचे मौजूद चुंबकीय क्षेत्रों से हो सकता है। इस मिशन में यूरोपियन और कोरियन स्पेस एजेंसियों के उपकरण भी शामिल होंगे। तीन चरणों में बनेगा चांद का बेस NASA ने पूरे कार्यक्रम को तीन चरणों में बांटा है। पहला चरण (2026-2028) नई तकनीकों का परीक्षण चांद की सतह पर ऑपरेशन की तैयारी लूनर वाहन और रोवर की तैनाती दूसरा चरण (2029-2032) स्थायी इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करना पावर ग्रिड और सपोर्ट सिस्टम बनाना रहने योग्य मॉड्यूल विकसित करना तीसरा चरण (2032 के बाद) चांद पर लगातार मानव मौजूदगी नियमित क्रू रोटेशन स्थायी वैज्ञानिक रिसर्च करोड़ों डॉलर में बनेंगे चंद्र रोवर NASA ने Astrolab और Lunar Outpost को चांद पर चलने वाले रोवर बनाने की जिम्मेदारी दी है। Astrolab को करीब 219 मिलियन डॉलर Lunar Outpost को करीब 220 मिलियन डॉलर दिए गए हैं। इन रोवरों को तीन तरीकों से संचालित किया जा सकेगा: अंतरिक्ष यात्री खुद चलाएंगे पृथ्वी से रिमोट कंट्रोल पूरी तरह स्वायत्त संचालन NASA का लक्ष्य है कि ये रोवर चांद पर करीब एक साल तक सक्रिय रह सकें। ब्लू ओरिजिन को मिली बड़ी जिम्मेदारी Jeff Bezos की कंपनी Blue Origin को इन रोवरों को चांद तक पहुंचाने की जिम्मेदारी दी गई है। कंपनी को इसके लिए 188 मिलियन डॉलर का कॉन्ट्रैक्ट मिला है। प्रदर्शन के आधार पर अतिरिक्त 280 मिलियन डॉलर तक दिए जा सकते हैं। 2028 में भेजे जाएंगे उड़ने वाले ड्रोन NASA 2028 में चांद पर चार छोटे “हॉपिंग ड्रोन” भी भेजेगा। इनका काम उन इलाकों की तस्वीरें लेना होगा जहां रोवर पहुंचना मुश्किल होगा। इन ड्रोन को ले जाने वाला स्पेसक्राफ्ट Firefly Aerospace तैयार करेगी। “अब चांद पर स्थायी मौजूदगी बनाने का समय” NASA के मून बेस प्रोग्राम अधिकारी कार्लोस गार्सिया-गालान ने कहा कि आने वाले वर्षों में ऐसी स्थिति बनाई जाएगी जहां इंसान लगातार चांद पर मौजूद रह सकें। NASA प्रमुख जेरेड आइजैकमैन ने कहा कि यह मिशन सिर्फ अमेरिका का नहीं बल्कि पूरी मानवता का भविष्य बदलने वाला कदम साबित होगा।
रांची। झारखंड में भीषण गर्मी के बीच मौसम विभाग ने राहत भरी खबर दी है। राज्य के अधिकांश हिस्सों में बुधवार दोपहर बाद मौसम बदलने के संकेत हैं। विभाग के अनुसार कई जिलों में आंशिक बादल छाए रहेंगे और हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। हालांकि उत्तर-पश्चिमी जिलों गढ़वा, पलामू और चतरा में हीट वेव का असर अभी भी बना रहेगा। तेज हवा और वज्रपात की चेतावनी मौसम विभाग ने राज्य के पूर्वी और मध्य हिस्सों में गरज के साथ तेज हवा और वज्रपात की संभावना जताई है। कुछ इलाकों में हवा की रफ्तार 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकती है। वहीं Simdega, Gumla, कोडरमा और हजारीबाग में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने का अनुमान है। मौसम वैज्ञानिकों ने लोगों को खुले मैदान, पेड़ों और बिजली के खंभों से दूर रहने की सलाह दी है। कई जिलों में 45 डिग्री तक पहुंचेगा पारा उत्तर-पश्चिमी झारखंड के गढ़वा, पलामू और चतरा में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है। यह राज्य का सबसे गर्म क्षेत्र बना रहेगा। वहीं देवघर, धनबाद और पाकुड़ में अधिकतम तापमान 41 डिग्री के आसपास रहने की संभावना है। राजधानी रांची और आसपास के इलाकों में अधिकतम तापमान 39 डिग्री तथा न्यूनतम 26 डिग्री रहने का अनुमान है। बोकारो, रामगढ़, खूंटी और हजारीबाग में भी तापमान 39 से 42 डिग्री के बीच रह सकता है। बारिश से मिल सकती है राहत मौसम विभाग का कहना है कि अगले दो से तीन दिनों में अधिकतम तापमान में 3 से 4 डिग्री सेल्सियस तक गिरावट आ सकती है। लगातार बादल और हल्की बारिश से लोगों को गर्मी से कुछ राहत मिलने की उम्मीद है। हालांकि फिलहाल उमस और गर्म हवाओं से परेशानी बनी रह सकती है। मौसम विशेषज्ञों ने लोगों को दोपहर में बाहर निकलने से बचने और पर्याप्त पानी पीने की सलाह दी है।
रांची। झारखंड इन दिनों भीषण गर्मी की चपेट में है। राज्य के कई जिलों में तापमान सामान्य से 3 से 5 डिग्री सेल्सियस अधिक दर्ज किया जा रहा है। रांची स्थित मौसम केंद्र के अनुसार पलामू प्रमंडल सबसे ज्यादा गर्म इलाका बना हुआ है। डाल्टनगंज में अधिकतम तापमान 45.7 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया, जो सामान्य से करीब 5 डिग्री अधिक है। इसके अलावा जमशेदपुर में 41.6 डिग्री, चाईबासा में 42 डिग्री, सरायकेला में 43 डिग्री और बोकारो थर्मल में 42.6 डिग्री तापमान दर्ज किया गया। देवघर, गुमला, हजारीबाग और लोहरदगा समेत कुल 10 जिलों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है। रांची में भी गर्मी से लोग बेहाल राजधानी रांची में भी तेज धूप और गर्म हवाओं ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। कांके में तापमान 40 डिग्री, हिंदपीढ़ी में 39.8 डिग्री और एयरपोर्ट क्षेत्र में 39.6 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। मौसम विभाग के अनुसार रांची में अगले दो दिनों के दौरान तापमान में 2 से 3 डिग्री की गिरावट संभव है। इन जिलों में हीटवेव का अलर्ट मौसम विभाग ने गढ़वा, पलामू और चतरा जिलों में हीटवेव जैसी स्थिति बनने की संभावना जताई है। इन क्षेत्रों में दिन के समय तेज गर्म हवाएं और प्रचंड धूप लोगों की मुश्किलें बढ़ा सकती हैं। कुछ इलाकों में बदल सकता है मौसम दूसरी ओर धनबाद, बोकारो, गिरिडीह, हजारीबाग और कोडरमा में गरज के साथ तेज हवा और वज्रपात की संभावना है। हवा की रफ्तार 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकती है। रांची, खूंटी, गुमला और रामगढ़ में भी मौसम बदलने के संकेत हैं। कुछ क्षेत्रों में हल्की बारिश और बादल छाने की संभावना जताई गई है। हालांकि हल्की बारिश के बावजूद राज्य के अधिकांश हिस्सों में गर्मी का असर बरकरार है।
Central Board of Secondary Education यानी सीबीएसई की री-इवैल्यूएशन प्रक्रिया को लेकर बड़ा मामला सामने आया है। 12वीं बोर्ड परीक्षा के एक छात्र ने दावा किया था कि बोर्ड द्वारा भेजी गई फिजिक्स की स्कैन आंसरशीट उसकी नहीं है। अब बोर्ड ने छात्र के दावे को सही मानते हुए उसे सही उत्तरपुस्तिका भेज दी है। इस पूरे मामले के सामने आने के बाद सीबीएसई की ऑन-स्क्रीन मार्किंग और री-इवैल्यूएशन प्रक्रिया को लेकर छात्रों और अभिभावकों के बीच चिंता बढ़ गई है। सोशल मीडिया पर भी यह मुद्दा तेजी से चर्चा में है। छात्र का दावा निकला सही 12वीं के छात्र वेदांत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर दावा किया था कि फिजिक्स विषय में कम अंक आने के बाद उसने री-इवैल्यूएशन प्रक्रिया के तहत स्कैन कॉपी मंगवाई थी, लेकिन जो उत्तरपुस्तिका उसे भेजी गई, वह उसकी नहीं थी। छात्र ने कहा था कि उत्तरपुस्तिका में लिखावट उसकी नहीं थी और केवल रोल नंबर उसका दिखाई दे रहा था। उसने यह भी कहा कि इंग्लिश की उत्तरपुस्तिका में उसकी खुद की हैंडराइटिंग साफ नजर आ रही थी, जबकि फिजिक्स की कॉपी पूरी तरह अलग थी। इसके बाद यह मामला सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया और छात्रों ने मूल्यांकन प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग शुरू कर दी। CBSE ने भेजी सही आंसरशीट मामला बढ़ने के बाद Central Board of Secondary Education ने छात्र से संपर्क किया और जांच के बाद सही उत्तरपुस्तिका उसके पंजीकृत ईमेल पते पर भेज दी। सीबीएसई ने अपने आधिकारिक एक्स अकाउंट पर कहा कि छात्र की शिकायत की समीक्षा की गई और सही उत्तरपुस्तिका भेज दी गई है। बोर्ड ने यह भी कहा कि जहां आवश्यक होगा वहां परिणाम अपडेट करने की प्रक्रिया भी की जाएगी। छात्र वेदांत ने भी सोशल मीडिया पर पुष्टि की कि बोर्ड ने उसे सही आंसरशीट भेज दी है और उसका दावा सही साबित हुआ। री-इवैल्यूएशन प्रक्रिया पर उठे सवाल इस घटना के बाद छात्रों और अभिभावकों ने Central Board of Secondary Education की री-इवैल्यूएशन और स्कैनिंग प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। कई लोगों का कहना है कि अगर एक छात्र की कॉपी बदल सकती है, तो अन्य छात्रों के साथ भी ऐसी गलती संभव है। वेदांत ने बोर्ड से ऑन-स्क्रीन मार्किंग और स्कैनिंग प्रक्रिया का ऑडिट कराने की मांग की है। छात्र का कहना है कि पूरे साल मेहनत करने वाले विद्यार्थियों के भविष्य से जुड़ी ऐसी गलतियां बेहद गंभीर हैं। ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम पर बढ़ी बहस सीबीएसई इस वर्ष 12वीं बोर्ड परीक्षा की कॉपियों का मूल्यांकन ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम के जरिए कर रहा है। इसमें उत्तरपुस्तिकाओं को स्कैन करके डिजिटल माध्यम से जांचा जाता है। हालांकि इस घटना के बाद अब इस प्रक्रिया की विश्वसनीयता को लेकर बहस शुरू हो गई है। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि तकनीकी प्रक्रिया में छोटी सी चूक भी छात्रों के परिणाम पर बड़ा असर डाल सकती है। छात्रों में बढ़ी चिंता री-इवैल्यूएशन प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में छात्रों ने अपनी स्कैन कॉपी के लिए आवेदन किया था। ऐसे में यह मामला सामने आने के बाद कई छात्र अब अपनी उत्तरपुस्तिकाओं को लेकर चिंतित नजर आ रहे हैं। फिलहाल Central Board of Secondary Education ने मामले को सुधारने की कार्रवाई कर दी है, लेकिन इस घटना ने बोर्ड की मूल्यांकन प्रणाली को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
रांची। झारखंड समेत पूरे देश में आज से नौतपा की शुरुआत भी हो गई है। इसका मतलब है कि अगले 9 दिन और ज्यादा गर्मी रहेगी। हीटवेव और तापमान भी बढ़ेगा। कई जिलों में तापमान 45°C से ज्यादा बना रह सकता है। वहीं रांची पारा 42 डिग्री तक रहने का अनुमान है। इस दौरान लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। साथ ही, लोगों से अपील की गई है कि दिन के 11 से शाम 4 बजे के बीच बाहर धूप में निकलने से परहेज करें। यदि किसी जरूरी काम से निकलना भी हो, तो चेहरा पूरी तरह कपड़े से ढक कर और छाता लेकर निकलें। साथ में पानी की बोतल अवश्य रखें और खाली पेट को बिलकुल ही नहीं निकलें। आम का पन्ना, सत्तू आदि का सेवन करते रहें।
रांची। झारखंड में मौसम लगातार करवट ले रहा है। एक ओर कई जिलों में भीषण गर्मी और लू का असर देखने को मिल रहा है, वहीं दूसरी ओर कई इलाकों में आंधी, बारिश और वज्रपात की चेतावनी जारी की गई है। मौसम विभाग के अनुसार 26 मई तक राज्य के मौसम में उतार-चढ़ाव बना रहेगा। रांची समेत कई शहरों में बढ़ा तापमान राजधानी रांची बुधवार को भीषण गर्मी की चपेट में रही। यहां अधिकतम तापमान 38.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो पिछले 24 घंटे में 1.1 डिग्री बढ़ा। वहीं Medininagar में तापमान 43.4 डिग्री और Jamshedpur में 41.8 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। सरायकेला में हल्की बारिश भी हुई। इन जिलों में चलेगी लू मौसम विभाग ने पलामू, गढ़वा, चतरा और लातेहार में 21 से 23 मई तक लू चलने और तापमान में और बढ़ोतरी की संभावना जताई है। लोगों को दोपहर के समय घर से बाहर निकलने में सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। कई जिलों में बारिश और वज्रपात का अलर्ट 22 मई को रांची समेत कई जिलों में दोपहर बाद बादल छाने, तेज हवा चलने और वज्रपात के साथ बारिश होने की संभावना है। खासकर संतालपरगना क्षेत्र में 40 से 50 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से तेज हवा चल सकती है। 23 मई को रामगढ़, हजारीबाग, कोडरमा, गिरिडीह, बोकारो, धनबाद, देवघर, जामताड़ा, दुमका, पाकुड़, गोड्डा और साहिबगंज में 60 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से आंधी और बारिश का अनुमान है। इन जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। वहीं रांची सहित कई अन्य जिलों में येलो अलर्ट जारी किया गया है।
रांची। झारखंड में अगले 72 घंटों के दौरान मौसम तेजी से बदल सकता है। रांची स्थित मौसम केंद्र ने राज्य के कई जिलों में गरज के साथ बारिश, तेज हवा और बिजली गिरने की चेतावनी जारी की है। दक्षिणी और मध्य झारखंड के इलाकों में मौसम ज्यादा सक्रिय रहने की संभावना जताई गई है। मौसम विभाग ने लोगों से सतर्क रहने और खराब मौसम के दौरान खुले स्थानों से दूर रहने की अपील की है। कई जिलों में तेज हवा और वज्रपात का खतरा मौसम केंद्र के अनुसार खूंटी और गुमला समेत दक्षिणी झारखंड के कई हिस्सों में 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवा चल सकती है। इसके साथ ही वज्रपात की भी आशंका है। वहीं धनबाद, बोकारो, रामगढ़ और लोहरदगा समेत मध्य झारखंड के जिलों में भी गरज के साथ हल्की से मध्यम बारिश और तेज हवाएं चलने का अनुमान है। अगले तीन दिनों का मौसम पूर्वानुमान 19 मई को उत्तर-पश्चिमी झारखंड को छोड़कर राज्य के अधिकांश हिस्सों में बारिश और तेज हवा का असर देखने को मिल सकता है। 20 मई को पूर्वी और मध्य झारखंड में मौसम और ज्यादा सक्रिय रहेगा। इस दौरान 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं। 21 मई को पलामू, गढ़वा और लातेहार को छोड़कर बाकी हिस्सों में बारिश और मेघ गर्जन की संभावना बनी रहेगी। तापमान में भी बढ़ोतरी राज्य के कई जिलों में गर्मी का असर भी बना हुआ है। डाल्टनगंज में अधिकतम तापमान 41 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। वहीं जमशेदपुर, बोकारो और रांची में भी तापमान सामान्य से ऊपर रिकॉर्ड किया गया है। मौसम विभाग के मुताबिक अगले पांच दिनों तक तापमान में किसी बड़े बदलाव की संभावना नहीं है।
रांची। देश के कई हिस्सों में अगले कुछ दिनों तक मौसम का मिजाज बदलने वाला है। मौसम विभाग के अनुसार 14 से 19 मई के बीच झारखंड समेत पूर्वी, दक्षिणी और उत्तरी भारत के कई राज्यों में बारिश, तेज हवाएं और गरज-चमक देखने को मिल सकती है। कई इलाकों में बिजली गिरने की भी आशंका जताई गई है, जिससे लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। झारखंड में 19 मई तक खराब रहेगा मौसम पूर्वानुमान के मुताबिक झारखंड में 14 से 19 मई तक आसमान आंशिक रूप से बादलों से ढका रहेगा। इस दौरान कई जिलों में हल्की से मध्यम बारिश और गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ सकती हैं। खासतौर पर 14 से 17 मई के बीच राज्य के उत्तर-पूर्वी, दक्षिणी और मध्य हिस्सों में 40 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना है। मौसम विभाग ने लोगों को खराब मौसम के दौरान खुले मैदान और पेड़ों के नीचे खड़े होने से बचने की सलाह दी है। दक्षिण भारत और पूर्वी राज्यों में भी असर दक्षिण भारत के कई राज्यों में भी मौसम खराब रहने की संभावना है। तमिलनाडु, पुडुचेरी और लक्षद्वीप में 14 मई को बारिश हो सकती है। वहीं केरल, माहे, तटीय आंध्र प्रदेश और रायलसीमा में 14 से 17 मई तक बारिश और तेज हवाओं का दौर जारी रह सकता है। तेलंगाना में भी 14 और 15 मई को गरज-चमक के साथ बारिश के आसार हैं। इसके अलावा उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में 14 से 16 मई तक तथा गंगा के मैदानी पश्चिम बंगाल में 14 मई को बारिश का अनुमान है। बिहार में 15 और 17 मई को तथा ओडिशा में 14 और 15 मई को हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। दिल्ली में दो दिन राहत, फिर बढ़ेगी गर्मी राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में 14 और 15 मई को आंशिक बादल छाए रहेंगे और 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं। हल्की बारिश और गरज-चमक से लोगों को गर्मी से राहत मिलेगी, लेकिन 16 मई से मौसम साफ होते ही तापमान फिर बढ़ने की संभावना है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।